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कहीं वो सब सपना तो नही complete

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सौरी बाबा ग़लती हो गयी,,,,,मैने तुझे परेशानी मे बैठा देखा और तेरे पास आ गयी,,अब

दोबारा कभी ऐसी ग़लती नही होगी,,,,अब तो मुझे जाने दे ना,,,,उसको पता लग गया था

मेरा इरादा नेक नही है,,,,

अब ग़लती की है तूने तो सज़ा भी मिलेगी तुझे,,,,बिना सज़ा के नही जाने दूँगा मैं,और

अब तो वैसे भी हालत खराब हो गयी है मेरी,,,इतनी देर से तू साथ मे जो चिपकी हुई है

तभी कविता का ध्यान गया कि हम लोग एक ही कंबल मे थे,,पहले मैं परेशान था इसलिए

उसको परवाह नही थी इस बात की लेकिन अब मैं गर्म हो गया था तो उसको टेन्षन होने लगी

थी एक ही कंबल मे मेरे साथ,,,,

देख सन्नी बाद मे सज़ा दे देना अभी मुझे जाने दे,,,,कोई आ जाएगा ,,,प्लज़्ज़्ज़ सन्नी

लेकिन मैं कुछ नही बोला बस उसके लिप्स की तरफ बढ़ने लगा,,अभी मेरे लिप्स उसके लिप्स पर

टच ही हुए थे कि उसने पल भर मे मेरे लिप्स को अपने लिप्स मे जाकड़ लिया और किस करना

शुरू कर दिया,,,,यही बात मुझे अच्छी लगती थी कविता की,,,पहले मना करती रहती है

और फिर जल्दी ही हथियार भी डाल देती है,,,,

हम दोनो के लिप्स एक दूसरे के लिप्स मे जकड़े हुए थे और एक मीठी और लंबी किस होने लगी

थी हम दोनो मे,,,लेकिन मैं किस तक ही रुका नही रह सकता था,,मेरे हाथ उसकी टी-शर्ट

के अंदर चले गये मैने उसके बूब्स को मसलना शुरू कर दिया,,,हम लोगो के उपर जो

कंबल था वो भी नीचे गिर गया था,,,मेरे हाथ उसके बूब्स पर थे जबकि उसके हाथ भी

मेरी बनियान मे मेरी पीठ पर चले गये थे,,,,हम लोग पूरे मस्त हो चुके थे,,,

तभी हम लोगो को किसी का खांसने की आवाज़ आई,,,,और जैसे ही हम दोनो ने उस तरफ देखा

तो हम दोनो की गान्ड फॅट गयी,,,,

सोनिया हम लोगो के पास खड़ी हुई थी,,,मेरे हाथ अभी भी उसकी टी-शर्ट मे उसके बूब्स पर

थे जबकि उसके हाथ मेरी पीठ पर थे,,,हम दोनो के लिप्स भी एक दूसरे के थूक से

गीले हो चुके थे,,,,,हम दोनो का हाल बहुत बुरा था,,,ऐसा लग रहा था कि पैरो के

नीचे से ज़मीन निकल रही हो जैसे,,,,

तभी सोनिया बोली,,,,,अगर लैला-मजनू का प्यार ख़तम हो गया हो तो क्या आप वापिस रूम मे

चलेगी कविता जी,,,

सोनिया ने इतना बोला तो हम लोग एक दम से एक दूसरे से दूर हट गये,,,

मैं तो वू मैं वऊू मैं,,,,कविता से कोई बात ही नही हो रही थी,,,

क्या मैं वो मैं वो लगा रखा है,,,,सोनिया थोड़ा गुस्से मे,,,सीधी तरह बोल क्या बोलना

है,,,,

वो मैं तो बाथरूम जाने के लिए आई थी सोनिया,,,,इतना बोलकर उसने सर नीचे झुका लिया

बातरूम इस तरफ नही उस तरफ है,,सोनिया ने बाथरूम की तरफ इशारा करते हुए बोला

कविता जल्दी से भाग कर बाथरूम की तरफ चली गयी,,,,,

तभी सोनिया मुझे बोली,,,,,,,अब तू भी ये मत बोलना कि तू भी बाथरूम जाने के लिए आया

था,,,क्यूकी छत पर कोई बाथरूम नही है,,,मैने सुबह ही चेक किया था,,,इतना बोलकर

वो हँसने लगी,,,,

मेरी तो बोलती ही बंद हो गयी थी ,,,मानो जैसे मुझे साँप सूंघ गया हो,,,

तभी वो हँसती हुई मेरे करीब आई और ज़मीन पर गिरा उठा कंबल उठा कर वहाँ से

चली गयी,,,,

वो तो चली गयी लेकिन मैं अभी तक वहीं खड़ा हुआ था,,,मेरे से एक कदम भी आगे नही

बढ़ाया जा रहा था,,,मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरे पैर ज़मीन मे धँस रहे हो,,

मुझे समझ नही आ रहा था,,,,,ये सोनिया एक दम यहाँ कैसे आ गयी,,,,और सबसे बड़ी बात

ये मुझे और कविता को देखकर गुस्सा क्यूँ नही हुई,,मुझे टेन्षन होने लगी थी,,,

साला एग्ज़ॅम के बाद छुट्टियाँ मनाने और एंजाय करने के लिए गाँव आया था लेकिन जबसे आया था

एक के बाद एक टेन्षन ही मिल रही थी मुझे,,,,एंजाय का तो कोई अता पता ही नही था,,,और

अब जब थोड़ा एंजाय करने ही लगा था फिर से टेन्षन ने आके पकड़ लिया था और इस बार

टेन्षन सोनिया के रूप मे आई थी,,,,

मैं बड़ी मुश्किल से सीडियाँ उतरता हुआ अपने रूम तक गया और जाके लेट गया,,,टेन्षन के

मारे पूरी रात नींद नही आई,,,इसलिए सुबह जल्दी ही फ्रेश होके तैयार हो गया था,,,लेकिन

तैयार होके रूम से बाहर नही निकला ,,,क्यूकी मैं सोनिया के सामने नही जाना चाहता था,,

फिर भी जब देखा कि बाहर सब लोगो जमा हो गये है और अपने रीति रिवाज करने लगे है

रेखा और मनोहर के लिए तो मुझे बाहर जाना ही पड़ा,,,,लेकिन मैं चोरों की तरह छुपता

हुआ रूम से बाहर निकल रहा था ताकि सोनिया मुझे नही देख ले,,,,मेरा इरादा छुप्ते हुए

आँगन से चलके हवेली के बाहर जाने का था,,,लेकिन इतने लोगो के बीच च्छुपते हुए हवेली

से बाहर जाना आसान नही था,,इसलिए मैं हवेली की दीवारो की तरफ देखता हुआ सबसे

अंजान बनता हुआ बाहर की तरफ जा रहा था,,,

मैं इधर उधर देख रहा था तभी किसी की आवाज़ सुनाई दी,,,,किसको तलाश रहे हो

सन्नी,,,,,,मैने आवाज़ का पीछा किया तो देखा ये तो सीमा थी,,,,,जो मेरे करीब आ रही

थी,,,

इस से पहले सीमा को कोई जवाब देता एक और आवाज़ कानो मे पड़ी,,,,,और किसको तलाश करना

है इसने,,,,अपनी गर्लफ्रेंड को तलाश कर रहा होगा,,,,इतना बोलते हुए सोनिया भी सीमा मामी के

पीछे पीछे आ गयी,,,,

सीमा की टेन्षन नही थी मुझे लेकिन सोनिया को देख कर मेरी सिट्टी-पिटी गुल्ल हो गयी थी

कविता अपने रूम मे है सन्नी,,,सोनिया ने इतना बोला और हँसने लगी साथ मे सीमा मामी भी

सीमा जब हंस रही थी तो बहुत क्यूट लग रही थी मेरा ध्यान उसकी मुस्कान पर टिक गया,,कितनी

क्यूट लग रही थी सीमा मामी हँसती हुई,,,,

मैं सीमा की तरफ देख रहा था तभी सोनिया मुझे गुस्से से घुरने लगी,,,,

नही नही मैं मैं किसी को तलाश नही कर रह था मैं तो हवेली को अच्छी तरह देख

रहा था,,,कितनी खूबसूरत हवेली है,,,,मैने सोनिया से नज़रे घुमा ली और सीमा मामी को

जवाब देने लगा,,,

अच्छा तू हवेली देख रहा था ,,मुझे लगा शायद कविता को तलाश रहा है तू,,,,सीमा ने

इतना बोला और फिर सीमा और सोनिया हँसने लगी,,,,

फिर मैं कुछ बोलता इस से पहले किसी ने पीछे से मेरा हाथ पकड़ लिया,,,,ये माँ थी

अच्छा हुआ तू तैयार हो गया सन्नी,,,चल मेरे साथ मुझे कुछ काम है तेरे से,,,,माँ ने इतना

बोला और मुझे अपने साथ लेके जाने लगी,,,,

मैने शूकर मनाया कि माँ आ गयी और बचा लिया मुझे सोनिया और सीमा मामी से,,

मैं माँ के साथ चलके हवेली से बाहर जाने लगा तभी सोनिया फिर से बोली,,,,ले सन्नी

आ गयी तेरी गर्लफ्रेंड,,,,,,मैने पीछे मूड के देखा तो कविता अपने रूम से बाहर आ रही

थी,,

सोनिया ने ये बात थोड़ी ज़ोर से बोली थी तो आँगन मे बैठे हुए हर एक शक्स का ध्यान

कविता की तरफ चला गया और वो जल्दी से वापिस अपने रूम मे भाग गयी,,

माँ मेरा हाथ पकड़ कर चल रही थी लेकिन सोनिया की बात सुनके और कविता को वापिस उसके

रूम मे भाग कर जाते देख माँ भी हँसने लगी,,,लेकिन माँ रुकी नही और मुझे हवेली के

बाहर ले गयी,,,,,

माँ सोनिया कुछ भी बोलती रहती है,,,पागल है वो तो,,,,आप उसकी बात पे यकीन नही

करना,,,,मैं माँ को यकीन दिलाने की कोशिश कर रहा था,,,,,

हाँ हाँ मैं जानती हूँ बेटा ,,,तुझे भी और सोनिया को भी,,,,और खांसकार कविता को भी,

मैं तेरी माँ हूँ मुझे सफाई देने की ज़रूरत नही तुझे,,,

माँ मुझे यकीन दिला रही थी कि उनको मेरी बात पर यकीन है लेकिन फिर भी वो हंस

रही थी,,,,

तभी ..............
 
तभी एक बंदा माँ के पास आया,,,,,राम-राम मालकिन,,,राम-राम छोटे मालिक,,

मालकिन खेतों को पानी लगा दिया है

अच्छा किया,,,,अब कोई है तो नही खेतों मे,,,,,मुझे अपने बेटे को खेत दिखाने जाना है

मैं नही चाहती वहाँ कोई परेशान करे इसको,,,

नही मालकिन अब कोई नही है,,,,सब लोग चले गये है,,,,

ठीक है तुम भी जाओ हवेली और देखो अगर कोई काम है करने वाला,,,

वो बंदा हवेली मे चला गया और मैं माँ के साथ खेतों मे

माँ आप मुझे कहाँ लेके जा रही हो,,,,,मैने माँ के साथ चलते हुए पूछा

तेरे कुछ सवालो के जवाब देने हैं मुझे सन्नी,,,इसलिए कहीं ऐसी जगह जा रहे है

जहाँ कोई ना हो,,,,और वैसे भी मुझे तेरे से अकेले मे मिलना था,,,,इतना बोलकर माँ ने

मुझे आँख मार दी,,,

मैं कुछ बोलने ही लगा कि माँ ने चुप करवा दिया,,,,

यहाँ कुछ मत बोल सन्नी,,,पहले खेतों मे चल,,फिर जो पूछना होगा पूछ लेना,,,

फिर मैं कुछ नही बोला और माँ के साथ चलने लगा,,,,हम लोग खेतों के बीच कच्ची

सड़क पर चल रहे थे ,,,रास्ता बहुत सकरा था,,,,खड़ी फसल मे चलने मे मुश्किल हो

रही थी थोड़ी,,,,,तभी कुछ देर मे हम ऐसी जहग पहुँच गये जहाँ खड़ी फसल काट

कर एक जगह बनाई थी थी,,,वो जगह करीब 10/10 फीट की थी,,,,

वहाँ पहुँच कर माँ जल्दी से ज़मीन पर बैठ गयी और मुझे भी अपने साथ बैठने को बोला

देख रहा है ये जगह,,,, तेरे मामा ने ये फसल काट कर जगह तैयार की थी ताकि हम

मस्ती कर सके,,,,इतना बोलकर माँ ने मेरे लंड पर हाथ रखा और हल्के से दबा दिया,,,

रूको माँ,,,इतनी भी क्या जल्दी है,,,पहले कुछ बातें तो हो जाए,,,,मैने माँ का हाथ

पकड़ते हुए बोला,,,,

हाँ हाँ बातें भी कर लेते है साथ साथ,,,,चल पूछ जो पूछना है,,,,जानती हूँ तू

बड़ा हो गया है अब तेरे को कुछ बातें बतानी ही पड़ेगी,,,,लेकिन याद रखना तू पूछ

तो कुछ भी सकता है लेकिन मैं जवाब उन्ही बातों का दूँगी जो अभी दे सकती हूँ,,क्यूकी

कुछ बातें ऐसी है जिनका जवाब मैं नही दे सकती,,,,

ऐसी कोन्सि बातें है जिनका जवाब आप नही दे सकती माँ,,मैने कुछ शक की नज़र से माँ

को देखा तो माँ हँसने लगी,,,,

कुछ नही बेटा,,,चल पूछ क्या पूछना है,,,,

अपने हवेली के बारे मे मुझे क्यूँ नही बताया कभी,,,,और ये हवेली अपने रेखा को गिफ्ट की

तो चाचा बुरा क्यूँ मान गये,,,,,और चाचा चाची मे से कोई रेखा की शादी मे क्यूँ नही आया

और ऐसी क्या बात है जिस पर अपने झगड़ा किया अपने चाचा से,,,कॉन सा मसला है जो काफ़ी

टाइम से चला आ रहा है,,,,मैने इतने सारे सवाल एक दम से कर दिए तो माँ कुछ परेशान

हो गयी,,,,

रुक रुक रुक थोड़ी साँस लेले,,,,,इतने सवाल एक दम से,,,,,,देख मैने पहले बोला है की

मैं कुछ बातों का जवाब अभी दे सकती हूँ लेकिन कुछ का सही टाइम आने पर,,,अभी के लिए

तुझे बता देती हूँ,,,,,,,,,तभी माँ ने बोलना शुरू किया,,,,

बेटा ये हवेली मेरी है,,,,मेरे बाप-दादा के टाइम की है ये हवेली,,,,मेरा बाप इस गाँव का

बहुत बड़ा आदमी था,,,बहुत रुतबा था उसका यहाँ,,,,बहुत इज़्ज़त थी उसकी इस गाँव मे,,इस

गाँव की ज़्यादा ज़मीन भी मेरे बाप दादा की है,,,ये जो खेत है ये भी मेरे बाप के है,,

लेकिन कहते है ना कि जिसका जितना नाम होता है वो उतना ही बदनाम भी हो जाता है

कभी-कभी

,,,,,

तेरे पापा अशोक मेरे बाप यानी कि अपने ससुर से नफ़रत करते थे तूने तो देखा ही है कि

वो मेरे चाचा से भी नफ़रत करते है,,,,इसलिए तो उन्होने रेखा की शादी मे भी नही आने

दिया चाचा चाची की,,,हालाकी उन्होने चाची को बुलाया था शादी मे पर चाचा को नही

बुलाया,, और चाची चाचा के बिना नही आ सकती थी,,,,

इस हवेली के बारे मे भी इसलिए आप बच्चों को भी कुछ नही बताया कभी,,,,मैं अक्सर

गाँव तो आती थी लेकिन हवेली मे बहुत कम आती थी,,,,तुम लोग भी आए हो हवेली लेकिन तब

बहुत छोटे थे,,,,लेकिन जब तुम कुछ बड़े होने लगे तो अशोक ने मना कर दिया था तुम

लोगो को यहाँ लेके आने के लिए,,,क्यूकी फिर तुम लोगो ने सवाल करने थे और उन सवालो का

मेरे पास कोई जवाब नही होना था,,,जब तक तुम सब इतने बड़े नही हो जाते कि बातों को

समझ सको तब तक तुम लोगो को हवेली से दूर रखा था मैने,,,,,हालाकी विशाल और शोभा

जानते है हवेली के बारे मे लेकिन तुम और सोनिया नही जानते,,,,

तो क्या ये खेत भी आपके है माँ,,,,और क्या आप यहाँ के ठाकुर की बेटी हो,,और अगर विशाल

और शोभा जानते है तू मुझे और सोनिया को क्यूँ अंजान रखा अपने इन सब बातों से,,,

बेटा तुम और सोनिया अभी छोटे हो,,,लेकिन विशाल और शोभा बड़े हो गये है इसलिए उनको सब

बातें बतानी पड़ी हमको,,,विशाल को कुछ बातें तेरे मामा ने बता दी थी जबकि शोभा को

तेरी भुआ ने,,,,तुमको और सोनिया को बताने की टेन्षन मेरी और अशोक की थी ,,लेकिन तुम लोग

अभी इतने बड़े नही हुए इसलिए मैने और अशोक ने तुम लोगो को अभी तक कुछ नही बताया,,

अब तुम कुछ कुछ जान गये हो तो तुमको बता रही हूँ,,,

यहाँ बहुत रुतबा था मेरे परिवार का और अब वही रुतबा मेरा भी है,,,,गाँव मे बहुत

ज़मीन है मेरी,,,जब मेरे बाप के मरने के बाद मेरी शादी तेरे पापा से हुई और मैं उनके

साथ शहर चली गयी तो हम लोग बहुत छोटे घर मे रहते थे,,,मैं चाहती थी कि हम

लोग बड़े घर मे रहे लेकिन तेरे पापा के पास इतना पैसा नही था,,और तेरे पापा मेरे से

पैसा लेने को तैयार नही थे क्यूकी वो पैसा मेरे बाप की ज़मीन की कमाई से जो आना था

,,,लेकिन घर की हालत इतनी ठीक नही थी,,,बॅंक मे तेरे पापा की नयी नयी नोकरी लगी थी

लेकिन तभी पगार इतनी नही थी,,,इसलिए तो तेरी भुआ ने भी बुटीक खोला था ताकि

घर मे कुछ पैसे आ सके,,,वो सब मेहनत करने को तैयार थे लेकिन मेरे से पैसा नही ले

रहे थे,,,इसलिए मैने तुम बच्चों के नाम पर पैसे ज़मा करवाने शुरू कर दिए और कुछ

पैसे यहाँ गाँव वालो को दान देने शुरू कर दिए,,,,

अच्छा माँ कितने पैसे वाली हो तुम ज़रा बताना,,,और कितने पैसे है हम सब भाई बेहन के

अकाउंट्स मे,,,,,

जब माँ ने मुझे पैसे बताए तो मेरा मुँह खुला का खुला रह गया,,,,साला इतने पैसे थे

मेरे घर वालो के पास ,,,मतलब मेरी माँ के पास,,मुझे यकीन नही हो रहा था

हां बेटा बहुत पैसा है हम लोगो के पास,,,,लेकिन तेरे पापा को वो पैसा नही चाहिए इसलिए

तुम बच्चों को दे दिया मैने,,,,और बाकी का गाँव वालो को,,,,इसलिए तो गाँव वाले इतनी इज़्ज़त

करते है मेरी,,,,

लेकिन माँ तुमने बताया नही कि हवेली रेखा को दी तो चाचा गुस्सा क्यूँ हो गये थे,,,,

माँ कुछ देर चुप रही,,,,फिर बोली,,,,,,अरे बेटा रेखा चाचा के घर की काम वाली है

और इतनी बड़ी हवेली किसी काम वाली के नाम करदी मैने तो चाचा गुस्सा हो गये,,,भला

कोई काम वाली को इतनी बड़ी हवेली देता है क्या,,,,

तो आपने क्यूँ दी हवेली रेखा को माँ,,,,मैने फिर पूछा

अरे बेटा वो काम वाली चाचा चाची के लिए थी मेरे लिए तो एक दोस्त जैसी थी,,इसलिए

मैने वो हवेली उसको दे दी,,,,और भला मैने क्या करनी थी हवेली,हम लोगो का घर है

ना शहर मे,,,यहाँ हवेली मे किसको रहना था,,,,पड़ी पड़ी पुरानी और गंदी ही हो रही

थी,,,,

अच्छा माँ तो वो क्या मसला है जो बहुत टाइम से चला आ रहा है तुम्हारा और चाचा का,,

कुछ नही बेटा,,मेरे चाचा को मेरी शादी तेरे पापा से मंजूर नही थी,,,और तेरे पापा भी

मेरे चाचा से बहुत नफ़रत करते थे ,,यही मसला है जो कब्से चला आ रहा है और अभी

तक सॉल्व नही हुआ,,,,,

लेकिन पापा आपकी फॅमिली से इतनी नफ़रत क्यूँ करते है माँ,,,जब देखो चाचा का नाम सुनते

ही पापा गुस्से मे आ जाते है,,यहाँ तक कि बीमारी मे भी चाचा का हाल चाल पूछने नही

आते गाँव मे,,,,

बस बस ,,,अब बहुत हो गये सवाल,,,,हवेली के बारे मे तूने पूछना था तो तूने पूछ लिया

अब कोई सवाल नही,,,और वैसे भी मैं इसका जवाब नही देना चाहती ये बात तेरे पापा ही

बता सकते है तुमको,,,

अब सवाल करने की बारी मेरी है सन्नी,,,,ये तेरे और कविता के बीच मे क्या चल रहा

है जिसके बारे मे सोनिया बोल रही थी अभी,,,,

माँ का सवाल सुनके मैं थोड़ी देर चुप हो गया,,,,कुछ नही माँ आपको तो पता है सोनिया

बस मुझे तंग करती रहती है,,,,मेरे और कविता मे कुछ नही चल रहा ये तो बस सोनिया

का मज़ाक है,,,

अरे बेटा तू डर क्यूँ रहा है,,,,वैसे भी तू बचपन से कविता के साथ रहा है,,बहुत

बनती आई है तुम लोगो मे शुरू से,,,अगर कोई बात है तो मुझे बता दो,,,और वैसे भी

मुझे तो कोई परेशानी नही है तुम लोगो के रिश्ते से अगर तुम कविता से शादी भी करना

चाहते हो तो मुझे अच्छा लगेगा कि कविता मेरे घर की बहू बने,,,

माँ ने इतना बोला और मैं थोड़ा शरमा गया,,,,माँ को यकीन हो गया कि हम दोनो मे कुछ

चल रहा है,,,,,

नही नही माँ ऐसी कोई बात नही है और अगर कोई बात हुई तो मैं आपको ज़रूर बताउन्गा

लेकिन फिलहाल कोई बात नही है मेरे और कविता के बीच मे,,,,,,,

 


तेरी ज़ुबान कुछ बोल रही है और तेरा चेहरा कुछ और बोल रहा है सन्नी,,,,चल छोड़

नही बताना तो मत बता,,,कोई ज़बरदस्ती नही करूँगी मैं तेरे साथ,,,,और वैसे भी अभी

ज़बरदस्ती करने का टाइम नही है हम लोगो के पास,,,जल्दी ही लोगो ने वापिस आ जाना है

खेतों मे काम करने इसलिए बहुत कम टाइम है हम लोगो के पास,,,इतना बोलकर माँ ने फिर

से मेरे लंड को हाथ मे पकड़ लिया और सहलाना शुरू कर दिया,,,,फिर शुरू हुआ मस्ती का

खेल,,

हालाकी माँ ने बहुत बातें मुझे बता दी थी लेकिन फिर भी कुछ बातों के जवाब नही मिले

थे मुझे,,,,कुछ टेन्षन दूर हो गयी थी लेकिन फिर भी कुछ टेन्षन थी जो दूर नही

हुई थी,,,,,और सबसे बड़ी टेन्षन थी कि सोनिया ने मुझे कविता के साथ ऐसी हालत मे देख

लिया था कि मेरी गान्ड ही फॅट गयी थी,,,बेचारी कविता का पता नही क्या हाल हो रहा होगा

हवेली मे,,वो तो कहीं छुप भी नही सकती सोनिया से,,,,

मेरा मूड नही था मस्ती करने का लेकिन फिर भी मैने 2 बार माँ की चुदाई की खेतों

मे और वापिस हवेली की तरफ चल दिए,,,,

वापिस हवेली पहुँचे तो देखा कि हर कोई खाना खा रहा था,,,मैं भी अपने रूम मे

चला गया और माँ मेरे लिए खाना ले आई,,,,माँ बहुत खुश थी और खाना रखते टाइम बहुत

ज़्यादा झुक गयी थी,,,,झुकने पर माँ के बूब्स बाहर निकल आए और मेरा ध्यान माँ के बूब्स

पर चला गया,,,,,

बस कर बेटा कितना घूरता रहेगा मेरे बूब्स को,,,अभी इतनी ज़ोर ज़ोर से मसल कर आया है

खेतों मे ,,दिल नही भरा क्या तेरा,,,,,,

क्या करू माँ आपके बूब्स है ही इतने मस्त की जब देखता हूँ नज़रे फेरने का दिल ही नही

करता,,,,

चल हट बदमाश कहीं का,,,,अब बूब्स को घूर्ना बंद कर और खाना खा ले आराम से बैठ

कर,,,,

माँ ने खाना रखा और बाहर चली गयी,,,,

खाना ख़तम करके मैं किचन मे बर्तन रखने गया तो देखा वहाँ सीमा मामी बर्तन

धो रही थी ,,मैं बर्तन रखने क लिए सीमा के पास गया तो उसने हँसके मुझे देखा और

मेरा ध्यान फिर से उसकी मीठी मुस्कान पर टिक गया,,,,

तभी पीछे से सोनिया ने आके मेरे शोल्डर पर हाथ रखते हुए बोला,,,,,,तू किचन मे क्या

कर रहा है,,,,तेरी कविता तो अपने रूम मे है,,

सोनिया ने इतना बोला और हँसने लगी साथ मे सीमा भी,,,,मैं चुप करके वहाँ से चला आया

बाहर की तरफ क्यूकी वहाँ रुकना ख़तरे से खाली नही था,,,,

मैं आके बाहर खड़ा हो गया और गाँव की औरतों को शादी के रीति रिवाज करते देखने लगा

तभी मेरा ध्यान गया कविता की तरफ जो अपने रूम के बाहर खड़ी हुई थी,,,सब लोगो से

दूर,,,,शायद वो डरी हुई थी और डरती भी क्यूँ ना ,,,सोनिया ने सब लोगो के सामने उसको मेरी

गर्लफ्रेंड जो बोला था,,,,वो इतना शरमा रही थी कि रूम से दूर नही जा रही थी,,ये तो शूकर

है रूम से बाहर आ गयी थी वो मुझे तो लगा था रूम से बाहर ही नही निकलेगी,,,

उसका ध्यान मेरी तरफ आया तो मैने उसको इशारे इशारे मे पूछ लिया कि सोनिया ने ज़्यादा तंग

तो नही किया,,,उसने भी ना मे सर हिला कर मुझे बता दिया कि नही सोनिया ने उसको ज़्यादा

तंग नही किया,,,लेकिन जल्दी ही शरमा कर वो वापिस अपने रूम मे चली गयी,,इसको क्या हुआ

ये इतनी जल्दी वापिस रूम मे क्यूँ चली गयी,,,,,तभी मेरा ध्यान गया किचन की तरफ जहाँ

खड़ी हुई सोनिया और सीमा हम लोगो की तरफ देख रही थी,,,,ओह इसलिए कविता रूम मे भाग

गयी थी,,,,,

सोनिया और सीमा हँसके मुझे देख रही थी,,,,मैं सोनिया से तो डर रहा था लेकिन मेरा ध्यान

सीमा की मीठी मुस्कान से नही हट रहा था,,,,तभी सोनिया फिर से मुझे गुस्से मे देखने

लगी और मैने अपना ध्यान दूसरी तरफ कर लिया,,,,

फिर कुछ देर मैं ऐसे ही लोगो की तरफ देखता हुआ टाइम पास करता रहा,,

कुछ देर बाद सोनिया और सीमा भी कविता के रूम मे चली गयी और मैं चला गया छत पर

क्यूकी ये रीति रिवाज मेरी समझ से दूर थे,,,च्चत पर खड़ा हुआ खेतों की तरफ देख

रहा था और टाइम पास कर रहा था,,,,हल्की हल्की धूप थी जिसका एक अलग ही मज़ा था

गाँव की सर्दियों मे,,,,मैं खेतों की तरफ देखता हुआ धूप सेक रहा था तभी मुझे

किसी के छत पर होने का एहसास हुआ,,,मैने पीछे मूड के देखा तो वो सोनिया थी,,

मैं उसको देख कर डर गया लेकिन वो हंसते हुए मुझे देखती हुई मेरे पास आके खड़ी हो गयी

( ज़्यादा पास नही ) वो मेरे से करीब 4-5 कदम की दूरी पर खड़ी हुई थी और मेरे साथ

साथ खेतों की तरफ देख रही थी,,,,

कितना अच्छा नजारा है ना सन्नी यहाँ,,,,जहाँ देखो बस खेत ही खेत है,,ना किसी कार

के हॉरेन की आवाज़ ना धुआँ छोड़ती हुई सिटी बस , बस हर तरफ शांति ही शांति है,,,बहुत

मज़ा आ रहा है मुझे यहाँ गाँव आके,,,अच्छा हुआ मैने और कविता ने गाँव आने का प्लान बना

लिया और उस से भी अच्छा हुआ कि तुम भी हम लोगो के साथ यहाँ आ गये,,,,,

मैं कुछ नही बोला बस उसकी बातें सुनता रहा और खेतों की तरफ देखता रहा,,मैं उस

की तरफ देखने से डर रहा था,,,,

वैसे मुझे यकीन नही था सन्नी तुम भी गाँव आने को तैयार हो जाओगे,,,,मैने कविता को

भी बोला था कि तुम नही आओगे लेकिन उसको यकीन था तुम उसकी बात को मना नही करोगे

वो बड़े यकीन से बोल रही थी और अब पता चला कि उसको इतना यकीन क्यूँ था,,,,

सोनिया ने इतनी बात बोली तो मेरा ध्यान उसकी तरफ गया और वो मुझे देखकर हँसने लगी,,मैने

जल्दी से अपना चेहरा घुमा लिया,,,,

इट्स ओके सन्नी,,कविता ने मुझे सब बता दिया है,,,अब तुम इतना शरमाओ नही प्लज़्ज़्ज़

तभी मैने उसकी तरफ देखा वो फिर मुस्कुरा रही थी,,,,

मैं शरमा नही रहा सोनिया और ना मैं इस बात से डर रहा हूँ कि तुमको मेरे और कविता

के बारे मे पता चल गया है ,,,मैं उसको ये जता रहा था की मैं उस से डर नही रहा

लेकिन असल मे मैं बहुत डरा हुआ था,,,,

मैं तो इस बात से परेशान हूँ कि तुम कहीं कविता को ज़्यादा तंग नही करो मेरे बारे मे

बात करके,,,,तुम मुझे तंग करो तो कोई बात नही लेकिन कविता बहुत मासूम है उसको ज़्यादा

तंग नही करना प्लज़्ज़्ज़्ज़

ओई होइई कितना ख्याल है अपनी गर्लफ्रेंड का,,,,,,सोनिया ने इतना बोला और हँसने लगी,,,

हां सोनिया मुझे बहुत ख्याल है उसका,,,इसलिए बोल रहा हूँ उसको ज़्यादा तंग नही करना

प्ल्ज़्ज़ वो बेचारी पहले ही बहुत परेशान होगी जब तुमने हम लोगो को उस हालत मे ,,,,,,,

मैं अभी बोल रहा था कि सोनिया बोल पड़ी,,,,,,,

मैं उसको ज़्यादा तंग नही कर रही सन्नी क्यूकी उस मासूम ने मुझे सब कुछ जल्दी ही बता

दिया और वैसे भी वो मेरी बेस्ट फ्रेंड है मेरे से कुछ छुपा नही सकती इसलिए उसको

तंग नही कर रही मैं ज़्यादा,,,मैं तो तुझे तंग कर रही थी क्यूकी तू बात छुपा रहा

था,,,,लेकिन अब तू भी मान गया कि तुम दोनो का चक्कर है तो मैं तुझे भी ज़्यादा तंग

नही करूँगी,,,,लेकिन थोड़ा तंग तो कर सकती हूँ ना,,,,उसने इतना बोला और हँसने लगी,,

ठीक है ठीक है कर ले मुझे जितना तंग करना है,,,वैसे और तू कर भी क्या सकती है

जब देखो मुझे तंग ही करती रहती है,,,,,मैं जो बोल रहा था वो समझ गयी और खेतों

की तरफ देखने लगी,,,,

अच्छा एक बात बता सन्नी,,,,,तू कितना प्यार करता है कविता को,,,,

अरे ये भी कोई पूछने वाली बात है क्या,,,,,मैने थोड़ा चिड़ते हुए बोला,,,

अरे बाबा मैं वैसे ही पूछ रही हूँ,,,,देख तू मेरा भाई है और वो मेरी बेस्टफ्रेंड है

मैं जानती हूँ तू उसके साथ टाइम पास नही कर रहा लेकिन फिर भी मुझे पूछने का हक़

तो बनता है ना,,,,,,

मैं समझ रहा हूँ तू क्या बोल रही है,,,,लेकिन तेरी जानकारी के लिए बता देता हूँ कि

मैं उसके साथ टाइम पास नही कर रहा,,,,,मैं बहुत प्यार करता हूँ उसको और सीरीयस भी

हूँ,,,वो ऐसी लड़की भी नही है जिसके साथ टाइम पास किया जाए,,,वो तो ऐसी लड़की है

जिसके साथ पूरी ज़िंदगी बिताने का दिल करता है,,,,

सोनिया मेरी बात सुनके खुश हो गयी,,,,,ये तो बहुत अच्छी बात है सन्नी कि तू उसको इतना

प्यार करता है ,,,,मैं भी यहीं चाहती हूँ कि मेरा भाई और मेरी बेस्टफ्रेंड एक साथ

रहे,,,,और वैसे भी कविता अच्छी लड़की है उसको तेरे जैसा लड़का ही चाहिए था जो उसकी

इतनी क़दर करे,,,,,लेकिन फिर भी एक बात जान ले अच्छी तरह से अगर तूने कभी उसको

हर्ट किया तो मैं तेरा सर फोड़ दूँगी,,,,,,सोनिया ने ये बात थोड़ी गुस्से मे बोली तो मैं

थोड़ा डर गया उसको भी ये पता चल गया था कि मैं डर गया हूँ,,,

नही नही तू डर मत मैं जानती हूँ तू उसको हर्ट नही करेगा लेकिन फिर भी मैं तुझे

सावधान करना चाहती थी,,,,,उसने इतना बोला और फिर हँसने लगी,,,,,

सावधान ,,,,लेकिन क्यूँ,,,,मैने क्या ग़लती करदी अब,,,,प्यार ही किया है कविता से कोई

ज़ुल्म तो नही किया किसी पे,,,,और प्यार करना क्या कोई ग़लती है,,,,

प्यार करना कोई ग़लती नही है लेकिन प्यार किसी से करना और देखना किसी और को वो भी इतनी

गंदी नज़र से ,,,,ये अच्छी बात नही सन्नी,,,,,

मुझे लगा वो अपनी बात कर रही है क्यूकी मैं कयि बार उसके साथ ग़लत हरकत कर चुका

था,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,अब मैने किसको देख लिया जो तुझे इतना गुस्सा आ रहा है..मैं

जानता था लेकिन फिर भी उसके मुँह से सुन-ना चाहता था,,,,

मैं सीमा की बात कर रही हूँ सन्नी,,,मैने देखा है तुम सीमा मामी को बड़ी अजीब

नज़रो से देखते हो,,,,अगर तुम किसी से प्यार करते हो तो तुमको किसी गैर औरत या लड़की

को ऐसे नही देखना चाहिए,,,,कविता भी तुम्हारे सिवा किसी लड़के की तरफ आँख उठा कर

भी नही देखती तो फिर तुम क्यूँ ऐसी हरकते करते हो,,,,,क्या इतना ही प्यार है तुमको मेरी

दोस्त से ,,,,बोलो,,,,,,,वो फिर से हल्की गुस्से मे थी,,

मैं उसको तंग नही करना चाहता था लेकिन फिर भी ना जाने क्यूँ मेरा दिल किया कुछ पंगा

करने को,,,,,,,,अब क्या करूँ सोनिया सीमा मामी है ही इतनी खूबसूरत कि मेरा ध्यान चला

जाता है उसकी तरफ मैं खुद को रोक नही पाता,,,,,मैं क्या कोई भी लड़का खुद को उनकी

तरफ देखने से रोक नही पाएगा अब वो है ही इतनी मस्त चीज़ की किसी का भी ध्यान उनकी

तरफ चला जाएगा,,,

 


मैने ये बात थोड़ी शरारती अंदाज मे बोली ताकि उसको तंग कर सकूँ ,,,,,

लेकिन तभी सोनिया मेरे पास आई और मुझे कस कर थप्पड़ मारा मेरे मुँह पर,,,,मैने इस

बात का अंदाज़ा भी नही लगाया था कि वो ऐसा करेगी मैं तो बस उसको हल्का गुस्सा दिला रहा

था क्यूकी मैं उसकी बेस्ट फ्रेंड को प्यार करने लगा हूँ और साथ मे किसी और औरत की ऐसे

तारीफ कर रहा हूँ तो उसको गुस्सा तो आएगा ही,,,,लेकिन मैने उस से थप्पड़ की उम्मीद नही

की थी,,,,

शरम आनी चाहिए तुझे सन्नी,,सीमा मामी के बारे मे ऐसे बोलते हुए,,,और कविता को प्यार

करते हो तो तुमको ऐसी हरकत ही नही करनी चाहिए किसी को भी ऐसे गंदी नज़र से नही

देखना चाहिए,,,क्या होगा अगर कविता भी किसी को ऐसे देखना शुरू कर्दे,,,क्या तुमको

अच्छा लगेगा,,,,

मुझे समझ नही आई कि उसको सीमा मामी के नाम पर इतना गुस्सा क्यूँ आ गया,,शायद कविता की

वजह से क्यूकी वो इसकी अच्छी दोस्त जो थी,,,लेकिन मैने तो मज़ाक मे बोला था फिर इसने इतनी

ज़ोर से थप्पड़ क्यूँ मारा मुझे,,,,

तभी मैं कुछ बोलने ही लगा कि उसने एक और थप्पड़ मारा मुझे,,,,,तुझे कोई हक़ नही

सन्नी किसी को इतनी गंदी नज़र से देखने का,,,खास कर सीमा मामी को तो बिल्कुल भी नही

वो तुम्हारी मामी है,,,,,,

मैं समझ नही पाया कि ये मामी के नाम पर इतना गुस्सा क्यूँ हो गयी,,,जब भी मैं मामी की

तरफ देखता तो ये गुस्से से मुझे घूर्ने क्यूँ लग जाती थी,,,

सोनिया मैं तो मज़ाक मे बोल रहा था,,,मेरा कोई गंदा इरादा नही मैं बस,,,,,मैं अभी

बोलने ही लगा था कि तभी उसने फिर से हाथ उठाया लेकिन मैने उसके हाथ पकड़ लिया क्यूकी

मुझे हल्का गुस्सा आ गया था उसपे,,,,

मैने उसका हाथ पकड़ा और उसकी कलाई को हल्के से मोड़ दिया जिस से वो घूम गयी और मेरा

हाथ उसकी पीठ पर आ गया,,,उसकी कलाई मूडी हुई थी और उसकी पीठ पर लगी हुई थी उसका

पेट सामने की दीवार पर लग गया था और उसकी पीठ मेरी तरफ हो गयी थी,,,मैं उसके पीछे

खड़ा हो गया और उसकी कलाई को फिर से हल्का सा मोड़ दिया जिस से उसको दर्द हुआ,,,,

अहह सन्नी हाथ छोड़ मेरा मुझे दर्द हो रहा है,,,,,,अह्ह्ह्ह सन्नी छोड़ ना

अच्छा तुझे दर्द हो रहा है ,,अभी जो कस्स कस्स के मुझे थप्पड़ मारे तूने तब दर्द नही

हुआ तेरे हाथों मे,,,

मैने तो इसलिए मारा कि तू प्यार कविता को करता है लेकिन गंदी नज़र रखता है दूसरी

औरतों पर,,तुझे शरम आनी चाहिए,,,,,,

दूसरी औरत कॉन,,वो सीमा,,,,,तुझे इस बात का गुस्सा है कि मैं सीमा मामी की तरफ

देखता हूँ या इस बात का कि मैं तुझे भी उसी नज़र से देखता हूँ,,,

मैने इतना बोला तो वो चुप कर गयी,,,,लेकिन जल्दी ही बोलने लगी,,,,नही सन्नी ऐसी कोई

बात नही है मैं तो बस ,,,,,वो बोलने लगी तो मैने उसकी कलाई को हल्के से मोड़ दिया

और उसको हल्का दर्द हुआ,,,,,,

आहह सन्नी मत कर हर्ट होता है मुझे,,,,,,

तभी मैं अपने फेस को उसके करीब ले गया उसके शोल्डर के पास और उसके कान मे बोलने

लगा,,,,,हर्ट तो मुझे भी होता है जब तू अजीब नज़रो से मुझे देखती है,,,और अब जब

तुझे मेरे और कविता के बारे मे पता चल गया है तो तुझे अच्छा नही लग रहा शायद तू खुश

नही कि मैं कविता से प्यार करने लगा हूँ,,,,

मैं उसके बिल्कुल साथ मे चिपका हुआ था मेरे लंड जो हल्का हार्ड हो गया था उसकी गान्ड पर

लगने लगा था,,,,मेरी साँसे भी उसके शोल्डर और कान के पास गर्दन पर लगने लगी थी

जो साँसे बहुत गर्म हो गयी थी कुछ ही पल मे,,,,इन सब बातों ने उसको भी थोड़ा गर्म कर

दिया,,उसकी हार्टबीट तेज हो गयी,,साँसे उखाड़ने लगी,,,,,,

न्हीई सुन्नयी म्मैईन्न तूओ भ्हुत्त ख़्ुशह हूंन त्तीररी औरर्र क्काव्वीितता की बाररी

मी जान कार,,और्र भाल्ला कय्या ख़्हूषीि किी बात हूज्गी क्कीी मीर्रा भाइी औरर्र

मेररी द्दूससट्त् प्ययार कार्रनी लाग्गी हाइी ईकक द्दूऊसरी सी,,,,,तभी मैने फिर से

उसकी कलाई मोड़ दी,,,,अहह मॅट काररर नाअ हहूउर्रतत्त हहोतटा हाई ससुउन्नयी,,,

तभी मैं फिर से उसके कान मे बोला बड़ी हल्की आवाज़ मे,,,मुझे नही लगता तू खुश है,

कल रात भी मैने तेरी आँखें देखी थी जब तूने मुझे और कविता को देख लिया था

सीडियों पर,,,तेरी आँखों मे गुस्सा तो ज़रूर था लेकिन एक बेचैनी भी थी,,तुझे शायद

अच्छा नही लग रहा था मेरा यूँ कविता के साथ होना ,,और अभ भी तू सीमा मामी का बहाना

करके मुझपे नकली गुस्सा कर रही है ,,गुस्सा तो तुझे इस बात पर है कि मैं कविता के

साथ जुड़ गया हूँ जबकि तेरे साथ जुड़ना चाहता हूँ,,,,

इतना बोलते हुए मेरा हाथ उसकी कलाई को हल्के हल्के मोड़ रहा था जबकि दूसरा हाथ उसकी

कमर से होता हुआ उसके पेट और दीवार के बीच चला गया था और मैने उसके पेट को हल्के

से सहलाना शुरू कर दिया था,,,,,ऐसा करते ही उसने अपने पेट को दीवार से ज़ोर से दबा

दिया ताकि मेरा हाथ उसके पेट पर हिल-जुल ना सके ,,,,उसके ऐसा करते ही मैने उसके

पेट से अपने हाथ को आगे की तरफ खिसकाना शुरू कर दिया और उसके पेट पर हाथ को

फिराते हुए उसकी कमर की दूसरी तरफ ले गया,,,,,

मेरा हाथ उसके पेट और दीवार के बीच मे फँसा हुआ था और जब मैं अपने हाथ को उसके

पेट से दूसरी तरफ लेके जा रहा था तो पेट के साथ साथ मेरा हाथ दीवार पर भी रगड़

ख़ाता हुआ आगे की तरफ जा रहा था,,,दीवार से रगड़ खाने की वजह से मेरे हाथ की स्किन

छिल्ने लगी थी और मुझे दर्द का हल्का एहसास हो रहा था लेकिन उसके पेट पर हाथ

फिराते हुए मुझे जो उसके पेट का मखमली एहसास हो रहा था उसने दीवार से रगड़ खाने

से स्किन छिल्ने के एहसास को पूरी तरह ख़तम कर दिया था,,,

उसके मुँह से हल्की हल्की आह आह की आवाज़ निकल रही थी ,,,,जो हल्की मस्ती भी थी और

हल्का दर्द भी था जो कलाई मुड़ने से उसको हो रहा था,,,,,अहह नही सन्नी ऐसी कूवई

बात नाहि तुऊउ गगाल्लत्त सम्माझ राहहा हाइी,,,

मैं कुछ ग़लत नही समझ रहा,,,तू जानती है मैं तुझे लाइक करता हूँ और तेरे करीब

आना चाहता हूँ लेकिन अब मैं कविता के करीब होने लगा तो तुझे गुस्सा आने लगा,,तू

इस बात को मान क्यूँ नही लेती इतना बोलकर मैने उसकी गर्दन पर हल्की किस करदी

आहह न्ह्ही सुउन्नयी ऐसा मात्त क्कार्र त्तुउ काववीितता ससी प्ययारर कार्रत्ता हहाई और्र

म्मायन्न इश्स ब्बात्त ससी बभ्हुत्त् क्क्ुशह हूओंन्न ,,तूऊ क्क्कययूउ मीररी साटतह एआईसीई

हहार्रकककट्ट क्काररकी क्काव्वीितता क्की प्ययार क्कूव ररुसवव्वा कारर राहहा हाई

वऊू बहीी तुउज़्झहही बभ्हुत्त् प्पययारर क्कर्ततीी हहाइईइ,,,प्लज़्ज़्ज़्ज़ उसक्की पपयारर क्कू

हहूउर्रत्त माट्त्ट कारर मीररी साटतह एआसा क्कार्रक्की,,

मैं उसके प्यार को हर्ट नही कर रहा,,,हर्ट तो तू कर रही है मुझे भी और खुद को भी

मैं कविता को बहुत प्यार करता हूँ इस बात से मुझे कोई इनकार नही लेकिन उसी तरह मैं

तुझे भी बहुत प्यार करता हूँ ,,,और इस बात पर मुझे कोई शिकायत नही खुद से,,

नहिी सुउन्न्णी यईी गाल्लत्त हाइईइ तटूउ म्मूउज़्झहही प्पययारर न्नाहहीी काररताा त्तुउ बास्स

ग्गान्न्द्दि हार्र्क्कात्ती क्काररत्ता हाई मीररी सातह जो तटूउ अब्भीी बहीी क्कार्र र्राहा

हाइी ऊउरर वाईससी बहीी तूऊ मुउज़्झहही प्पाययर्र न्नाहहीी कारर साकत्टा और्र ना हिी कुकच्छ

औरर्र कारर साककत्ता हाइईइ कययुउककीी तूऊ म्मेररा बभ्ाइी हाइी ,,हुउंम दूननू का

रीशहतता हॅम दून्नू क्कूव ये सब्ब क्काररनी क्कीी ईज़्ज़ाज़्ज़ट्ट न्ह्ही द्दीत्ता

तो इसमे मेरी क्या ग़लती जो तू मेरी बेहन है,,मैं बस तुझे बहुत प्यार करता हूँ उतना ही

प्यार जितना मैं कविता से करता हूँ,,लेकिन तुम इस बात से पता नही क्यूँ मुकर रही हो

याद है उस दिन जब मैने तुझे थप्पड़ मारा था और तेरे मुँह से खूंन् निकल आया था, तू

गुस्सा होने की जगह हंस रही थी प्यार से मुझे देख रही थी,,,तो क्या वो सब झूठ था

नही सुउन्न्णी म्मैईन्न तूओ ईईस्सल्लीययए कखुुशह टहीी कययुउककीी तूऊ म्मूुझहही क्कव्वीितता

सीसी ग्घारर बभीज्ज राहहा था तटूुझहे दार्र तहा क्कीी तूऊ अक्कील्लई मी म्मीरीए

ससी क्कू गाल्लत्त हारकाट नाहहीी कर्रे म्मीररी क्कू हहूरत्त ना कररी ,,म्मूउजझी

रुसववा नाहहीी काररीए,,,लीक्किंन म्मैईन जानने सी माना कार रही त्तीी तो टुऊनी

म्मूुझहहे मारा था,,तूऊ तूओ बास्स म्मूउज़्झहही ख्हुउद्द सी डूउरर कारर राहा था वू

बहिि मीररीई भ्हालायी की लीईई,,,,तूऊ मुउजझी हहूरर्ट न्ंही कारता और्र ना कभिइ

हूर्र्ट कर स्साककत्ता हाइी तूऊ बस मीररी कररी कर सककत्ता है,,,तूऊ तू किसी और्र कू

बहीी म्मूुझहही हुउर्र्ट नाहहीी कर्रनी दीतता और्र जो मुउज़्झहही हुउरत्त काररता हाीइ तूऊ

उसकी जान ल्लेन्नई की क़ोस्शिसश करता है,,भूल गया उस डिन जब उन लड़क्कू को तुन्नी

मररा था मीररीई वज्जहह से,,,,उन्नकीी जान बहिि जा सकक्त्ती त्िी थी,,,

हाँ हाँ मुझे सब याद है,,,,अगर पोलीस नही आती तो शायद मैं उनकी जान ले भी लेता

,,मैं उसकी जान ले लूँगा जो तुझे हर्ट करेगा,,,,जानता हूँ मैं तेरी बहुत केर करता

हूँ बहुत ख्याल रखता हूँ तेरा कभी तुझे हर्ट नही कर सकता लेकिन यही तो प्यार है

मेरा,,,,मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ सोनिया,,,तेरा ख्याल रखना,,तुझे हर्ट नही करना

तेरे साथ हँसना खेलना,,,मस्ती करना,,,अगर ये सब प्यार है तो प्यार ही सही,,,हाँ सोनिया

मुझे तेरे से बहुत प्यार है,,,बहुत प्यार है ,,तू मेरी बेहन है तो इसमे मेरी क्या ग़लती

,,,,और मैं जानता हूँ प्यार तू भी मुझे बहुत करती है लेकिन तू डरती है ,,इस भाई

बेहन के रिश्ते से इसी रिश्ते ने तुझे बाँध कर रखा हुआ है वरना कबकि तू मेरी

बाहों मे आ जाती,,,

नही सुउन्नयी ऐसा मात्त बोल प्लज़्ज़्ज़ मायन्न तुउज़्झहही प्पययारर ंहिी कर्र्त्ती त्तुउ बास्स

मीर्रा ब्भ्हाई हाइईइ,,,

अच्छा अगर ऐसी बात है तो मेरी आँखों मे आँखें डालके ये बात बोल तो मैं यकीन कर

लूँगा तेरा,,,,इतना बोलकर मैने उसको पकड़ा और अपनी तरफ घुमा दिया,,,

देख मेरी आँखों मे और बोल तुझे मेरे से प्यार नही,,,,उसने अपने चेहरे को नीचे झुका

लिया और ज़मीन की तरफ देखने लगी,,,

 
तभी मैने फिर से अपने हाथ से उसकी चिन को पकड़ा और उसका फेस उपर उठा दिया तभी

उसका ध्यान मेरे हाथ की चोट पर गया जो दीवार से रगड़ ख़ाके थोड़ा छिल गया था और

हल्का खून बहने लगा था,,,,,

अरे ये क्या हो गया सन्नी ,,,ये खून कैसे निकलने लगा तेरे हाथ से,,,उसने मेरा हाथ

पकड़ा और देखने लगी,,,,

बात मत पलट मेरी तू सोनिया,,,,मैं जानता हूँ तू मेरे से प्यार करती है लेकिन डरती

है,,,अगर नही करती तो मेरी आँखों मे देख और बोल तुझे मेरे से प्यार नही,,वो कुछ

नही बोली,,,,,,

अच्छा अगर मेरी तरफ देख कर नही बोल सकती तो अपना हाथ रख मेरे सर पर और खा मेरी

कसम कि तुझे मेरे से प्यार नही,,मैने उसका हाथ पकड़ा और अपने सर पर रख दिया,,,

उसका हाथ मेरे सर पर रखा हुआ था और वो नज़रे झुका कर नीचे देख रही थी,,,बोल तुझे

मेरे से प्यार नही देख झूठ नही बोलना वरना मैं मर जाउन्गा,,,,

मैने इतना बोला कि उसने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया,,,,,उसकी आँखें थोड़ी नम हो गयी थी

नही नही सन्नी ऐसे मत बोल प्लज़्ज़्ज़ ऐसी बात दोबारा अपने मुँह पर नही लेके आना कभी,,

मैने उसका हाथ पकड़ा और अपने मुँह से हटा दिया,,,,,अच्छा इतनी फ़िक्र है मेरी तो बोलती क्यूँ

नही कि तू भी मेरे से प्यार करती है,,,,

 
नही सन्नी मैं वो ,,मैं तुुझहही ,,,मैन्न वूऊ ,,सयन्नीयी

उसको कोई बात नही सूझ रही थी,,,,तभी मैं अपना हाथ उसकी पीठ की तरफ ले गया और

उसको अपने करीब कर लिया,,,,मेरा एक हाथ उसकी पीठ पर था जबकि एक हाथ जिसमे खून

निकल रहा था उस से मैने उसके चेहरे को उपर किया,,,क्यूकी मेरे करीब आते ही उसने अपने

सर को झुका लिया था जल्दी से,,,,,मैने उसके फेस को उपर किया और बोला,,,,,बोल कि तुझे

मेरे से प्यार नही मैं चुप छाप यहाँ से चला जाउन्गा,,,,बोल ना ,,,,बोल तू मेरे से प्यार

नही करती,,,,

वो कुछ नही बोली बस मेरी आँखों मे देखती जा रही थी और साथ साथ अपने हाथ मेरी चेस्ट

पर रखकर खुद को मेरे से दूर करने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैने उसकी पीठ से

उसको कस कर पकड़ा हुआ था,,,,,हम दोनो एक दूसरे से चिपके हुए थे,,,,,

बोल ना बोलती क्यू नही,,,,बोल तुझे मेरे से प्यार नही,,,,

उसकी हार्टबीट तेज हो गयी थी,,,साँसे तो पहले से भारी-भारी थी उसकी,,,दिल की धड़कन

भी उसका साथ नही दे रही थी जो काफ़ी तेज हो चुकी थी,,,,सयन्नीयी छ्छूद म्मूउज़्झहही

यईी सब्ब ठीक्क नाहहीी ,,सुउन्नयी छोड़ ना प्लज़्ज़्ज़ क्कू आ जाईगगा ,,सुउन्नययी

प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ छ्छूड्द मुउज़्झहही ककक़कू आ गगयाअ ऊउरर हुउंमी ऐसी दीकखह ल्लीइय्या

तो कय्या हूग्गा,,,मायन्न तूओ मार्र हिी जोऊनगगीइ ष्हररमम सीई ,,,,छोड़ सुउन्नी

प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़

मैने कुछ नही बोला बस अपने हाथ को उसकी चिन से उठाकर उसके सर के पीछे रखा और उसके

सर को अपने करीब कर दिया जिस से उसके लिप्स मेरे लिप्स के करीब हो गये और मैने कोई देर

नही की और जल्दी से उसके लिप्स को अपने मुँह मे भर लिया वो एक दम से सिहर गयी मेरी इस

हरकत से और ज़ोर लगा कर खुद को मेरे से दूर करने लगी ,,उसके हाथ मेरी चेस्ट पर थे

और वो पूरा ज़ोर लगा रही थी मेरे से दूर होने क लिए लेकिन मेरा हाथ उसके सर पर पूरी

पकड़ बना कर कॅसा हुआ था जिस से उसका सर मेरे से दूर नही हो सकता था ना ही उसके

लिप्स मेरे से दूर हो सकते थे,,,,

उसके सॉफ्ट लिप्स मेरे मुँह मे आते ही मैने उसके लिप्स को चूसना शुरू कर दिया,,मेरा एक हाथ

उसकी पीठ पर और एक हाथ उसके सर पर था,,जो हाथ पीठ पर था मैं उसको हिला नही

रहा था बस पकड़ बना कर उसको खुद से चिपका रहा था,,,

उसका मुँह खुल गया था और मेरी ज़ुबान उसके मुँह मे घुस गयी थी और उसकी ज़ुबान से छेड़खानी

करने लगी थी उसके मुँह मे जाके,,वो अपनी ज़ुबान से मेरी ज़ुबान को उसके मुँह से बाहर करने

की कोशिश कर रही थी ,,मैने अपनी ज़ुबान को उसके मुँह से बाहर करना शुरू कर दिया जिस

से ज़ोर लगाती हुई उसकी ज़ुबान मेरे मुँह की तरफ दबने लगी ,,मेरी ज़ुबान उसके मुँह से पूरी

तरह बाहर निकल गयी लेकिन उसकी ज़ुबान नही रुकी,,,शायद वो अभी भी ज़ोर लगा रही थी

अपनी ज़ुबान से जिस वजह से उसको पता ही नही चला कि उसकी ज़ुबान उसके लिप्स से बाहर

आ गयी थी और मेरे लिप्स को टच करने लगी थी,,,मैने भी मौका देखा और उसकी ज़ुबान को

अपने दाँतों मे पकड़ लिया और अपने मुँह मे खींच लिया,,,वो एक दम से घबरा गयी अपनी

इस ग़लती से और उसके बदन ने झटके खाने शुरू कर दिए,,,,वो खुद को मेरे से दूर

करना चाहती थी,,,,,

मेरे मुँह मे उसकी ज़ुबान घुसते ही मैने उसको अपने दाँतों मे पकड़ लिया और चूसना शुरू

कर दिया,,,,कुछ देर मैं ऐसे ही उसकी ज़ुबान को चूस्ता रहा और तभी मुझे हैरानी हुई

उसने ज़ोर लगाना बंद कर दिया और उसके जो हाथ मेरी चेस्ट पर थे वो मेरी पीठ पर चले

गये,,मैं उसकी इस हरकत से खुश हो गया और फिर ज़्यादा ही मस्ती मे उसकी ज़ुबान को चूस्ता

हुआ उसके लिप्स को भी मुँह मे भरने लगा,,,,उसने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया,,,,

हम दोनो मस्ती मे ,,छत पर सर्दियों की हल्की मीठी धूप मे एक दूसरे से चिपक कर एक

दूसरे के होंठों का रस्सपान करने मे लगे हुए थे और कम से कम 3-4 मिनिट हो गये थे

हम लोगो को ऐसे ही खड़े हुए किस करते हुए,,,आज तो सोनिया भी मेरा साथ दे रही थी,,वो

भी पूरी मस्ती मे मुझे किस करती हुई मेरे लिप्स को चूसने लगी थी मेरे मुँह मे अपनी ज़ुबान

घुसा कर मेरी ज़ुबान से छेड़खानी करने लगी थी,,शायद वो आज पूरी तरह मस्त हो गयी

थी,,,,

मैं यही सब सोचता हुआ खुश हो रहा था कि वो भी मस्त हो गयी है लेकिन तभी उसने अपने

हाथों को वापिस मेरी चेस्ट पर रखा और ज़ोर से मुझे धक्का दे दिया और खुद से दूर कर

दिया,,,मस्ती मे मैं अपने हाथों की पकड़ को उसके जिस्म पर काफ़ी कमजोर कर चुका था और

उसको इसी बात का इंतजार था शायद इसलिए उसने एक ही झटके मे मुझे खुद से दूर कर

दिया,,,,झटका इतना जोरदार था कि मैं पीछे हटके ज़मीन पर गिर गया,,,,

मैं ज़मीन पर गिरा हुआ उसकी तरफ देख रहा था और अपने लिप्स पर लगे उसके थूक को सॉफ

कर रहा था अपने हाथ से,,,,,वो दीवार से सॅट के खड़ी हुई खुद की हालत को क़ाबू मे

करने की कोशिश कर रही थी ,,उसकी तेज उखड़ती हुई साँसे ,,तेज हो चुकी दिल की धड़कन

जिसपे क़ाबू करने मे उसको काफ़ी मुश्किल हो रही थी,,,,लेकिन फिर भी वो खुद पर क़ाबू

करने की पूरी कोशिश कर रही थी,,,,जब उसकी हालत थोड़ी ठीक हुई तो वो धीरे से थोड़ी

आगे बढ़ के चली गयी फिर रुक कर मेरी तरफ देखा और बोली,,,,,

सन्नी तेरा और मेरा रिश्ता बहुत अजीब है,,,किसी काँच और पत्थर के जैसा,,,भूल मत जब

काँच से पत्थर टकराता है तो काँच टूट कर बिखर जाता है,,ये रिश्ता भी बिल्कुल

वैसा ही है जिसमे मैं काँच हूँ और तू पत्थर है,,,तू मुझसे टकराया तो तुझे तो

कुछ नही होगा शायद लेकिन मैं टूट कर बिखर जाउन्गी ,,प्ल्ज़्ज़ तू मुझसे दूर रहा कर

क्यूकी मैं टूट कर बिखरना नही चाहती,,,प्ल्ज़्ज़ सुउन्नयी तू मुझे टूट कर बिखरने पर

मजबूर मत करना क्यूकी अगर मैं टूट कर बिखर गयी तो मर जाउन्गी,,,प्लज़्ज़्ज़ सुउन्नयी मत

किया कर ऐसी हरकते ,,,प्लज़्ज़्ज़्ज़ मुझे टूट कर बिखरने मत देना सन्नी,,प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़

इतना बोलकर वो जल्दी से नीचे भाग गयी और मैं वहीं छत पर बैठा हुआ उसकी बातों

के बारे मे सोचने लगा,,,,

मैं कुछ देर तक छत पर ही बैठा रहा और सब बातों के बारे मे सोचने लगा जो अभी

कुछ देर पहले हुई थी सोनिया का साथ,,,,आज सोनिया ने किस का रेस्पॉन्स दिया था मुझे मैं

खुश भी हो गया था उसकी इस हरकत से लेकिन उसका इरादा मुझे बहका कर अपने जिस्म से मेरी

पकड़ को कमजोर करना था ताकि मैं पकड़ कमजोर कर दूं और वो मुझे खुद से दूर कर

सके,,,वो कामयाब भी हो गयी थी क्यूकी जब उसने मुझे किस करना शुरू किया तो मेरी पकड़

सच मे उसके जिस्म पर कमजोर हो गयी और वो मेरे से अलग हो गयी थी,,,,

फिर मुझे याद आई उसकी वो बात,,,,वो ठीक कह रही थी,,,,,मेरा और उसका रिश्ता अजीब

था,,,काँच और पत्थर जैसा,,,हम दोनो टकराते तो उसका टूट कर बिखर जाना मुमकिन था

क्यूकी वो बहुत मासूम और भोली भाली लड़की थी और मैं पत्थर जैसा था,,मुझे कोई फ़र्क़

नही पड़ने वाला था,,,तो क्या मुझे सोनिया से दूर रहना चाहिए,,,क्यूकी मैं नही चाहता

था वो टूट कर बिखर जाए ,,,लेकिन मैं उस से दूर भी नही रह सकता था क्यूकी मैं

उस से बहुत प्यार करता था,,,,लेकिन इसका मतलब ये नही मैं कविता से प्यार नही करता था

मैं कविता से भी उतना ही प्यार करता था जितना सोनिया से,,,,लेकिन क्या ये सही था,,क्या मैं

दोनो से प्यार कर सकता था या सिर्फ़ ये जिस्म का खेल था जो मुझे खेलना था दोनो के साथ

नही नही ये जिस्म का खेल नही मैं दोनो से बहुत प्यार करता था,,,उनके लिए जान भी दे

सकता था,,,

मैं यही सब सोच रहा था कि शाम ढल गयी थी मुझे ठंड लगने लगी,,,मैं उठकर

नीचे चला आया और रूम मे आके लेट गया,,,आँगन मे कोई नही था ,,,,,गाँव की औरतें भी

अपने घर जा चुकी थी और हवेली का गेट भी बंद हो चुका था ,,,बाकी लोग भी अपने रूम्स

मे चले गये थे शायद,,,,

मैं अपने रूम मे आके लेट गया और फिर से सभी बातों क बारे मे सोचने लगा,,,तभी कुछ

देर बाद मेरे रूम मे कोई आया,,,,मैने देखा तो ये भुआ थी जो खाने की प्लेट लेके रूम

मे मेरे पास आके खड़ी हुई थी,,,,

कहाँ था तू सन्नी फिर से घूमने गया था क्या,,,सब लोगो ने खाना खा लिया और तू ही रह

गया खाना खाने के लिए,,,,चल उठ और खाना खा ले,,,,

नही भुआ मुझे भूख नही है,,,आप खाना वापिस ले जाओ,,,,मैने थोड़ा उदास होके बोला

क्या हुआ सन्नी फिर कविता से कोई झगड़ा हुआ क्या तेरा,,,इतना उदास क्यूँ है,,,,

अरे भुआ कोई झगड़ा नही हुआ मेरा किसी से बस सर मे हल्का दर्द है,,और भूख भी नही

है मेरे को,,,,

देख सन्नी बेटा खाने की बेज़्ज़ती नही करते कभी,,,अगर सर मे दर्द है तो बता मैं दबा

देती हूँ और अगर कोई और बात है तो वो भी बता शायद मैं कुछ हेल्प कर सकूँ तेरी और

तेरी गर्लफ्रेंड की,,,,

अरे भुए कोई बात नही है बोला ना मेरे और कविता की,,,कोई झगड़ा नही हुआ मेरा कविता

के साथ,,,,

अच्छा नही बताना तो मत बता लेकिन खाना खा ले बेटा,,,,

मुझे लगा भुआ की बातों से बचना है तो बेटा खाना खा ले इसी मे तेरी भलाई है

ठीक है भुआ आप खाना रख दो मैं खा लूँगा,,,,,,

भुआ ने खाने की प्लेट मेरे बेड पर रखी और बाहर चली गयी,,,,

मुझे भूख तो नही थी फिर भी मैने खाना खा लिया और प्लेट रखने किचन मे चला

गया,,,,,अंधेरा हो चुका था,,आँगन खाली पड़ा था,,

 


मैं बर्तन किचन मे रखकर वापिस अपने रूम मे जा रहा था कि मैने देखा कि रेखा

अपने रूम से निकल कर चोरी चुपके किसी और रूम मे जा रही थी,,,मैने सोचा साली की

नयी नयी शादी हुई है फिर भी किसी और का लंड लेने को कितनी बेचैन है कि अपने पति

से नज़रे बचा के किसी और रूम मे जा रही है ,,,दिल तो किया कि चलो देखते है किसके

रूम मे गयी है लेकिन मुझे वैसे ही बड़ी टेन्षन थी इसलिए मैं अपने रूम मे चला गया

और जाके लेट गया

तभी कुछ 25-30 मिनिट बाद मुझे बाहर से तेज शोर की आवाज़ आई जैसे कोई झगड़ा कर

रहा हो ,,,मैं जल्दी से अपने रूम से निकल कर बाहर गया तो देखा कि उसी रूम के बाहर

जिस मे रेखा गयी थी चोरी चुपके से ,,उस रूम के बाहर डॅड ने सुरेंदर मामा को गले

से पकड़कर दीवार से लगा रखा था और गुस्से मे उनको गालियाँ दे रहे थे,,,,जबकि माँ

भुआ ,,शोभा और विशाल डॅड को मामा को छोड़ने को बोल रहे थे,,,,

लेकिन डॅड मामा को एक हाथ से गर्दन से पकड़कर एक हाथ से मामा को थप्पड़ लगा रहे

थे,,,

भुआ,,,अशोक छोड़ दो इसको ,,मत मारो इसको

सरिता,,,अशोक इसकी बात तो सुन लो ये क्या कहना चाहता है,,

विशाल,,,दाद छोड़ दो मामा को पहले पूरी बात तो सुनलो इनकी

लेकिन डॅड किसी की बात नही सुन रहे थे,,,मैं भी भाग कर उन लोगो के पास चला

गया और उधर मनोहर भी अपने रूम से निकल आया,,,

रेखा ने जब मनोहर को आते देखा तो भाग कर उसके पास चली गयी,,,अरे आप क्यूँ बाहर

आ गये,,,कुछ नही हुआ यहाँ आप चलिए अपने रूम मे

अरे रेखा यहाँ झगड़ा हो रहा है तुम मुझे रूम मे जाने को बोल रही हो,,

कुछ नही हुआ मनोहर वो बस सुरेंदर ने थोड़ी ज़्यादा पी ली थी इसलिए पंगा हुआ और कुछ

बात नही है लेकिन मनोहर फिर भी आगे बढ़ता आ रहा था तभी गीता और विशाल आगे

बढ़ के मनोहर के पास गये और बातें करते हुए उसको रेखा के साथ उसके रूम मे ले गये

तब तक मैं भाग कर डॅड के पास जाके डॅड के हाथों से मामा को च्छुड़वाने की कोशिश

करने लगा,,,,,

डॅड ने मुझे देखा तो एक दम से सुरेंदर को छोड़ दिया लेकिन गालियाँ देनी बंद नही की,,

साले जिस थाली मे ख़ाता है उसी को ठोकर मारता है,,,हमने तुझे अपने घर पर रखा

और तूने इसका ये सिला दिया हम लोगो को,,,तेरे साथ जो कुछ भी हुआ उसकी ग़लती की सज़ा

तूने हम लोगो को क्यूँ दी,,,क्या कमी थी तुझे हमारे घर मे बोल ज़रा,,,क्यूँ किया तूने ऐसा

सुरेंदर कुछ नही बोल रहा था बस सर झुका कर खड़ा हुआ था,,

सरिता=== उसको बोलने का मौका तो दो आप अशोक ,,आप तो उसको मारते ही जा रहे हो,,कुछ तो

बोलने दो इसको,,,

अशोक===मुझे कुछ नही सुन-ना सरिता इसको दफ़ा करदो यहाँ से नही तो मैं इसकी जान ले

लूँगा,,,

तभी डॅड ने एक थप्पड़ और लगा दिया सुरेंदर के फेस पर

तभी मैने देखा कि कविता और सोनिया भी अपने रूम से बाहर निकल आई थी,,जब डॅड ने

मामा को थप्पड़ मारा तो सोनिया बहुत खुश हो गयी थी,,,लेकिन जैसे ही मैने उसकी तरफ देखा

उसने नज़रे घुमा ली,,,

तभी विशाल और गीता भी मनोहर और रेखा को उनके रूम मे छोड़कर वापिस आ गये,,

मत मारो डॅड मामा को,,,पहले उनकी बात तो सुनलो,,,गीता भी रोती हुई डॅड से मामा की बात

सुन-ने को बोल रही थी लेकिन डॅड किसी की नही सुन रहे थे,,,,

तभी डॅड ने देखा कि केवल और सीमा भी अपने रूम से निकल कर बाहर आ गये थे

उन लोगो के आते ही डॅड अपने रूम मे चले गये,,,साथ मे शोभा,,माँ और गीता भी,,,जबकि

विशाल मामा को लेके हवेली के बाहर चला गया ,,,

फिर कार स्टार्ट होने की आवाज़ आई ,,शायद विशाल मामा को लेके कहीं चला गया था,,,

केवल सीमा को लेके उसी रूम मे जाने लगा जिस रूम मे डॅड और बाकी लोग गये थे तभी

माँ ने उनको मना कर दिया,,,केवल वापिस अपने रूम मे चला गया और सीमा को भी ले गया

फिर माँ ने कविता और सोनिया की तरफ देखा तो वो लोग भी अपने रूम मे वापिस चली गयी,,,

मैं अभी माँ के पास ही खड़ा हुआ था,,तभी माँ मुझे बोली,,,,तुम जाओ सन्नी और जाके सो

जाओ,,,अभी कोई बात करने का टाइम नही है,,,,

लेकिन माँ विशाल भाई कहाँ गये मामा को लेके,,,,

वो रेखा के पुराने घर मे गया है,,,सुबह आ जाएगा वापिस,,,तुम जाओ और आराम करो अब कोई

बात नही करनी तुमने,,,समझे,,,,मा थोड़ी गुस्से मे बोली तो मैं वापिस आपने रूम मे

चला गया और सोचने लगा कि डॅड ने मामा को क्यूँ मारा,,,कहीं डॅड ने मामा को रेखा के साथ

तो नही देख लिया,,,,लेकिन डॅड को तो पहले से पता है रेखा और मामा के बारे मे ,,उन दोनो

ने तो एक साथ मिलके भी चोदा था रेखा को,,,कहीं उसकी शादी के बाद डॅड ने कुछ दिन

रेखा से दूर रहने को बोला होगा,,ताकि मनोहर को कुछ पता नही चले,,लेकिन रेखा की

चूत मे ज़्यादा ही खुजली हो रही होगी जो मामा का लंड लेने चली गयी और फँसा दिया मामा

को,,,,,,,,,

 
कल भी टेन्षन के मारे नींद नही आई थी इसलिए कुछ देर टेन्षन भूल कर सो जाना

चाहता था लेकिन कुछ फ़ायदा नही हो रहा था इसलिए सोनिया के बारे मे सोचने लगा जब वो

छत पर मुझे किस करने मे मेरा साथ दे रही थी,,वो किस कुछ पल के लिए मुझे खुशी

दे गयी थी और अब उसके बारे मे सोच-सोच कर भी दिल मे एक मीठा मीठा खुशी का एहसास हो

रहा था और उसी एहसास ने सोने मे मेरी मदद भी कर दी,,,

सुबह उठा तो गाँव की औरतें फिर से आँगन मे ज़मा हो गयी थी,,,ये सला गाँव की शादी

का भी पता नही कितना लंबा टाइम चलती है,,,अब शादी कबकि हो चुकी लेकिन इनका गाना

बजाना और रीति रिवाज ने नाक मे दम किया हुआ है,,लेकिन एक बात तो अच्छी थी कि गाँव की

औरतें आ गयी थी इसलिए घर मे कल रात के झगड़े के बारे मे कोई बात नही कर रहा

था,,,,,,

गीता भुआ और शोभा गाँव की औरतों के साथ बैठी हुई थी जबकि कविता और सोनिया थोड़ी दूर

चेयर पर बैठी हुई थी,,,डॅड केवल के साथ दूर धूप मे बैठ कर बात कर रहे थे

जबकि माँ और सीमा किचन मे थी,,,

विशाल और मामा कहीं नज़र नही आ रहे थे

मेरा दिल कॉफी पीने को कर रहा था इसलिए मैं किचन मे चला गया,,,,

उठ गया मेरा बेटा,,माँ ने किचन मे आते ही मेरा सर चूम लिया और प्यार से सर पर हाथ

फिराते हुए बोला,,,,,तभी माँ ने सीमा की तरफ इशारा करते हुए मुझे चुप रहने को

बोला,,,,माँ को पता था मैं कल रात के बारे मे बात करूँगा लेकिन माँ ने मुझे पहले ही

चुप रहने को बोल दिया था,,,

हां माँ उठा गया ,,फ्रेश भी हो गया ,,अब कुछ कॉफी मिलेगी क्या,,,

अरे बेटा अब तो खाने का टाइम हो रहा है लेकिन कोई बात नही,,पहले तुझे कॉफी बना

देती हूँ इतना बोलकर माँ कॉफी बनानने लगी,,,,

तभी सीमा का ध्यान मेरा तरफ आया और उसने मुझे गुड मोर्निंग बोला,,,,गुड मोर्निंग बेटा

मैने भी उसको गुड मोर्निंग बोल दिया,,,,

तभी सीमा माँ को बोली,,,,,,दीदी चावल कहाँ है नज़र नही आ रहे,,,,

वो देख ना सामने वाले बर्तन मे होंगे,,,,

देख लिया वहाँ दीदी वो बर्तन खाली है,,,,

लगता है ख़तम हो गये,,,,तू ऐसा कर जाके गोदाम से चावल उठा ला ये ले चाबी,,माँ

ने गोदाम की चाबी सीमा की तरफ बढ़ाते हुए बोला,,

सीमा चाबी लेके जाने लगी तभी माँ बोली,,,,तू अकेली इतना वजनी बौरी कैसे उठा लेगी

सीमा,,,ऐसा कर सन्नी को साथ मे ले जा,,,,

मैं कुछ नही बोला और मामी की साथ चल दिया,,,,हवेली मे एक रूम को गोदाम बनाया हुआ

था और किचन का सारा राशन वहाँ रखा हुआ था,,,

मैं मामी के साथ चलने लगा और मामी मुझे मेरे कॉलेज और एग्ज़ॅम्स के बारे मे पूछने लगी

और मैं उनको हंसते हुए जवाब देता गया,,,मैने देखा को सोनिया और कविता दोनो मुझे हल्के

गुस्से से देख रही थी,,,,लेकिन मैने उनकी तरफ ज़्यादा ध्यान नही दिया और मामी के साथ

चलता गया,,

गोदाम मे पहुँचा कर मामी ने एक बौरी की तरफ इशारा किया और मैने वो बौरी उठा ली और

तभी मुझे मज़ाक सूझा ,,,,,

अरे मामी वो देखो कितना बड़ा चूहा,,,,,मैने इतना बोला तो मामी ज़ोर से चिल्लाई,,,,कहाँ

है चूहा ,,,कहाँ है सन्नी ,,,चूहा कहाँ है,,,मामी उछल रही थी और चूहे से

डर रही थी,,तभी मैं हँसने लगा और मामी को पता चल गया मैं मज़ाक कर रहा हूँ

बदमाश सन्नी मार खाएगा तू मेरे से,,जब देखो बदमाशी करता रहता है,,,सरिता दीदी

ठीक ही कहती है,,बहुत तंग करता है तू,,,,

मामी मेरे पास आई और हल्के से मेरा कान मरोड़ दिया,,,,सौररी मामी ग़लती हो गयी अब नही

करता मज़ाक,,,,छोड़ो ना कान मे दर्द हो रहा है,,,

मामी ने हँसके मुझे देखा और कान छोड़ दिया,,,,अब ऐसा मज़ाक किया तो ज़ोर से कान मरोड़

दूँगी,,,पता है कितनी डर गयी थी मैं,,,जान निकल गयी थी मेरी,,,,अब ऐसा मज़ाक नही

करना ,,,समझा,,,,,,

मैने हां मे सर दिया दिया और मामी को बता दिया कि मैं उनकी बात समझ गया,,लेकिन साथ

साथ मैं हंस भी रहा था तो मामी भी हँसने लगी,,,

फिर मैं बौरी उठा कर बाहर आ गया और मामी ने गोदाम को लॉक लगा दिया,,,,हम लोग वही

चूहे वाली बात पर हंसते हुए किचन की तरफ जाने लगे,,,तब भी सोनिया और कविता मुझे

और मामी को देख रही थी,,,,उनको तंग करने के लिए मैं ज़्यादा ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगा

मैं और मामी किचन मे पहुँच गये और माँ ने मुझे कॉफी देते हुए बोला,,,जाओ अब बाहर

जाके कॉफी पियो जब खाना तैयार हो गया तो बता दूँगी मैं तुमको,,

अरे माँ बाहर बैठकर बोर हो जाउन्गा मैं,,,यहीं रहने दो ना ,,,बोलो तो मैं आप लोगो

की कुछ हेल्प कर देता हूँ,,,,इतना बोलते हुए मैं मामी की तरफ देख रहा था,,

तभी माँ हल्के गुस्से से बोली,,,बोला ना तुझे बाहर जाके बैठ यहाँ किसी को तेरी हेल्प

नही चाहिए,,,,,

तभी मैने देखा कि कविता और सोनिया किचन मे आ गयी,,,,,,ठीक बोला माँ इसकी हेल्प की

ज़रूरत नही आपको क्यूकी अब मैं और कविता आ गयी है आपकी हेल्प के लिए,,,सन्नी को बाहर

भेज दो आप,,सोनिया थोड़ा गुस्से से बोली तो मैं चुप करके वहाँ से बाहर आ गया,,,

ये साला इन लोगो को क्या हो गया,,और भला माँ मुझपे गुस्सा क्यूँ कर रही है,,,अब भला

मैने क्या कर दिया,,,,

खैर मैं कॉफी लेके किचन से बाहर आ गया ,,,,डॅड और केवल धूप मे बैठकर बातें

कर रहे थे तभी मैं भी उनके करीब चला गया,,,

डॅड=== तुम भला सन्नी से इतनी अजीब तरह से क्यूँ पेश आते हो,,,भला इस सब मे उसकी क्या

ग़लती है,,,

केवल=== भाई साहब उसकी कोई ग़लती नही है,,लेकिन जब भी उसको देखता हूँ या सोनिया को

देखता हूँ मुझे उस घटिया इंसान का चेहरा नज़र आने लगता है और खून खौल उठता

है मेरा,,,

डॅड==== यार इन सब मे उन बच्चो की क्या ग़लती है,,,वो बेचारे तो इस सब से अंजान है

अभी,,,तुम एक बार बात तो करके देखो सन्नी और सोनिया से,,देखना कितनी अच्छी बातें करते

है वो दोनो,,,,

तभी केवल कुछ बोलने ही लगा कि डॅड का ध्यान मेरी तरफ आया और उन्होने केवल को चुप

करवा दिया,,,,

अरे आओ आओ सन्नी बेटा,,उठ गये तुम,,,डॅड अंजान बनते हुए मेरे से बात करने लगे,,,

मैं भी अंजान बनता हुआ डॅड के करीब चला गया और उनको ये जता दिया कि मैने कुछ नही

सुना,,,,

हां डॅड उठ गया,,,,,आज थोड़ा लेट हो गया,,,,

कोई बात नही बेटा,,,अब कॉन्सा कॉलेज जाना है जो जल्दी उठना पड़े,,,,

डॅड कॉलेज की बात नही,,,वैसे भी जल्दी उठकर क्या करता,,आप लोग तो धूप मे बैठ

कर बातें करके टाइम पास कर रहे हो,,मेरे पास तो मेरा लप्पी भी नही है जिस पर

गेम खेल कर टाइम पास कर सकता मैं,,,,

तभी डॅड ने केवल को इशारा किया और केवल बोल पड़ा,,,,अरे बेटा पहले क्यूँ नही बताया कि

तुझे लॅपटॉप चाहिए,,,,जा मेरे रूम से लेले जाके,,,,

आपके पास लॅपटॉप है क्या,,,,मैने केवल से पूछा,,,

हां बेटा मेरा काम ही ऐसा है बिना लॅपटॉप कहीं नही जाता मैं,,,,जा जाके मेरे रूम से

लेले और शायद कोई गेम भी मिल जाए तुझे उसमे,,,,वैसे भी कुणाल मेरे लप्पी पर ही गेम

खेलता है,,,,जा देख ले शायद कोई तेरे मतलब की गेम हो उसमे,,,,

मैने केवल को थॅंक्स बोला और उसके रूम मे जाके उसका लॅपटॉप उठा लिया,,,लेकिन मैं थोड़ा

उदास था क्यूकी केवल ने आज तक कभी ढंग से बात नही की थी मेरे साथ लेकिन डॅड के

के बोलने पर आज वो मेरे साथ बड़े प्यार से पेश आया था और अपना लॅपटॉप भी मुझे दे दिया

था,

मैने उसका लॅपटॉप लिया साथ मे चारजर भी उठा लिया,,,क्यूकी एक बार गेम खेलना शुरू

करता हूँ तो जल्दी थकता नही मैं,,,,

 
लॅपटॉप लेके बाहर आके बैठ गया और लॅपटॉप ऑन कर लिया,,,जैसे ही लॅपटॉप ऑन हुआ उसपे

केवल की फॅमिली का पिक लगा हुआ था,,,जिसमे केवल सीमा और उनका एक बेटा था शायद यही

कुणाल होगा,,,,उमर करीब --- साल थी उसकी,,,,पहले तो मैं इधर उधर लॅपटॉप मे उसकी

फॅमिली पिक्स देखता रहा क्यूकी मेरा ख़ास ध्यान सीमा मामी पर था मैं उन्ही की पिक ज़्यादा

देख रहा था ,,ये बात नही कि मेरे मान मे कोई गंदा विचार था बस सीमा मामी हँसती

हुई बहुत अच्छी लगती थी मुझे,,उनकी मुस्कान पर मेरा ध्यान टिक जाता था,,,,और वैसे ही

उनकी पिक्स पर भी ध्यान टिक गया था मेरा,,,लेकिन आस पास बहुत लोग थे मुझे लगा कोई

कुछ ग़लत नही समझ ले मुझे सीमा मामी की पिक्स देखते हुए इसलिए मैने जल्दी से गेम

ऑन करली और टाइम पास करने लगा,,,गेम मे इतना मस्त हो गया कि दोपेहर खाना भी नही

खाया मैने ,,,,,

गेम खेलते हुए टाइम का पता ही नही चला कि रात हो गयी,,,गाँव की औरतें जा चुकी थी

उनके जाने का भी पता नही चला,,,तभी डॅड मेरे पास आ गये,,,,,अरे बेटा कितना बिज़ी हो

गया तू गेम मे,,चल उठ अब लॅपटॉप केवल को वापिस कर्दे और खाना खा ले ,,सुना है तूने

दोपेहर को भी खाना नही खाया ,,,,चल उठ जल्दी और खाना खा ले,,,,

मेरा दिल तो नही कर रहा था लेकिन मैं डॅड की बात को टाल नही सकता था इसलिए उठा और

लॅपटॉप लेके केवल के रूम मे चला गया,,,,,

केवल रूम मे नही था सीमा थी,,,मैने लॅपटॉप उसको दिया और बाहर जाने लगा तभी उसने

मुझे रोक लिया और हम लोगो की बातें शुरू हो गयी,,,हम लोग बातें कर रहे थे और खूब

हँसी मज़ाक कर रहे थे तभी कविता वहाँ आ गयी,,,

सन्नी सरिता आंटी बुला रही है चलके खाना खा लो,,उसने थोड़ा गुस्से मे बोला और मैं

चुप करके किचन मे चला गया और अपने खाने की प्लेट लेके अपने रूम मे,,,

मुझे साला समझ नही आ रहा था कि ये कविता मेरे से गुस्से मे बात क्यूँ कर रही है

कहीं सोनिया ने उसको कुछ बता तो नही दिया जो भी कल छत पर हुआ था,,,,,मुझे थोड़ी

टेन्षन होने लगी इस बात पर ,,,,खैर मैने खाना खाया और बरतें किचन मे रखने

चला गया

बर्तन रखकर वापिस अपने रूम मे जा रहा था तभी ध्यान गया सीमा की तरफ जो बाथरूम

की तरफ जा रही थी,,,मैं भी बाथरूम की तरफ चला गया,,सीमा ने मुझे देखा तो वहीं

रुक गयी ,,,हम लोग सीडियों के पास खड़े हुए थे और बातें कर रहे थे जबकि कविता

दूर खड़ी होके हमको देख रही थी,,,,,कुछ देर बातें करने के बाद सीमा मामी बाथरूम

की तरफ चली गयी जबकि मैं वहीं खड़ा उनका इंतजार करने लगा,,,,तभी मैने देखा कि

कविता और सोनिया दोनो चलके मेरे पास आ रही थी,,,,

सोनिया मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़ लिया इस से पहले मैं कुछ बोलता वो मेरा हाथ पकड़

कर मुझे उपर छत की तरफ ले जाने लगी,,,मैं भी कुछ नही बोला और उसके साथ छत

की तरफ जाने लगा,,,,पीछे पीछे कविता भी आ रही थी,,,,मुझे कुछ डर लगने लगा

था कि दोनो मुझे कहाँ लेके जा रही है,,,

हम लोग छत पर पहुँच गये ,,,,

ये सब क्या कर रहा है तू सन्नी ,,,सोनिया ने हल्के गुस्से मे बोला,,,,

क्या कर रहा हूँ मतलब,,,,मैं कुछ समझा नही तुम क्या कह रही हो सोनिया,,,

मेरा मतलब तुम सीमा मामी के साथ इतना हंस हंस कर बातें क्यूँ कर रहे हो,,,,

अरे तो इसमे क्या बड़ी बात है,,अब क्या उनके साथ बात करने के लिए मुझे तेरी इजाज़त लेनी

होगी क्या,,,,और वैसे भी मैं हँसी मज़ाक कर रहा हूँ उनके साथ कुछ ग़लत तो नही कर

रहा ना,,,,,

जानती हूँ तेरा हँसी मज़ाक मैं सन्नी,,,अच्छी तरह से जानती हूँ,,,उसने फिर थोड़ा गुस्से

मे बोला,,,,

तू कहना क्या चाहती है सीधी तरह बोल सोनिया,,,,,मैं भी हल्के गुस्से मे बोला

मैं ये कह रही हूँ सन्नी कि तेरा हँसी मज़ाक कैसा होता है मैं अच्छी तरह जानती हूँ

तू मुँह से तो हँसी मज़ाक करता है लेकिन तेरी आँखें कुछ और ही बोलती है,,,सीमा के साथ

तू हँसके बात करता है और आँखों ही आँखों मे गंदी नज़र से देखता है उनको

मैं उसकी बात से थोड़ा परेशान हो गया,,,हालाकी सीमा अच्छी लगती थी मुझे लेकिन अभी

तक मैं उसको गंदी नज़र से नही देखा था,,हलकी वो बहुत खूबसूरत थी लेकिन अभी

तक मेरा कोई ग़लत इरादा नही बना था उसके बारे मे,,,हाँ ये बात और है कि उसके जिस्म को

मैं ज़रूर तकता रहता था,,,

तभी उसने कविता की तरफ इशारा करते हुए बोला,,,,,,ये लड़की तेरे से बहुत प्यार करती

है सन्नी,,क्या तू अपनी गंदी हरकतों से इसकी चाहत की रुसवाई करना चाहता है,,,बोल सन्नी

क्या तुझे अच्छा लगता है कि तुझसे प्यार करने वाला इंसान तेरे से नाराज़ हो जाए क्यूकी तू

उसके सामने ऐसी गंदी हरकते करता फिरता है,,,,,

मैने कविता की तरफ देखा तो वो नम आँखों से मेरी तरफ देख रही थी,,,

मुझे थोड़ा गुस्सा आ गया,,मेरी कोई ग़लती नही थी लेकिन ये सोनिया मुझे कविता के सामने

बदनाम किए जा रही थी,,,,,मैं थोड़ा गुस्से मे बोल पड़ा,,,,,तुझे क्या लेना देना ये मेरी

और कविता की आपस की बात है,,,मैं उसको रुसवा भी कर दूँ तो तुझे क्या टेन्षन है

मैं गुस्से मे पता नही क्या बोल गया कि कविता बड़ी हैरत से मुझे देखने लगी,,,,

क्या बोला तूने सन्नी,,,,फिर से बोल ज़रा,,,मुझे क्या लेना देना इस सब से,,,भूल मत वो

मेरी बेस्ट फ्रेंड है,,,मैं नही चाहती तू ऐसी हरकते करके उसको रुसवा करे क्यूकी

अगर वो रुसवा हो गयी तो मैं भी रुसवा हो जाउन्गी,,,,,

क्यूँ तुम क्यू रुसवा होने लगी,,,,मैं थोड़े गुस्से मे बोला फिर से,,,मेरी बात से सोनिया

थोड़ी चिड गयी सो हल्की नमी आ गयी उसकी आँखों मे,,,,

मैं फिर बोल पड़ा,,,,वो मुझसे रुसवा होगी तो मैं मना लूँगा उसको ,,मेरी और उसकी बात से

तुझे कोई लेना देना नही है,,,,वो तेरी फ्रेंड है तो मैं क्या कर सकता हूँ,,वो सिर्फ़

तेरी ही नही मेरी भी अच्छी दोस्त है,,,,और भला उसकी रुसवाई से तुझे क्यूँ रुसवा होगा मेरे

से,,,,,,,मैं थोड़ी गुस्से मे बोला फिर से,,,,

तभी सोनिया रोती हुई मेरे पास आ गयी,,,,,और रोती हुई बोली,,,,क्यूकी मैं भी तेरे से

प्यार करती हूँ पागल इंसान,,,तेरी गंदी हरकतों से सिर्फ़ कविता ही नही मुझे भी गुस्सा

आता है तेरे पर,,मैं तुझे किसी और की तरफ ऐसे देखते हुए नही सह सकती,,मुझे ये

अच्छा नही लगता,,,,,,मैं बहुत प्यार करती हूँ तेरे से सन्नी,,,,बहुत प्यार करती हूँ

उसने इतना बोला और फूट फूट कर रोने लगी,,,,तभी आगे बढ़ के कविता ने उसको अपनी बहहों

मे भर लिया और सोनिया कविता के गले लग्के रोने लगी,,,,कविता उसको चुप करवाने की बड़ी

कोशिश कर रही थी लेकिन सोनिया रोती जा रही थी,,,,

मैं थोड़ा परेशान हो गया था,,,हालाकी मैं भी सोनिया ने प्यार करता था लेकिन अभी जब

उसने मुझसे प्यार का इज़हार किया वो भी कविता के सामने तो मुझे कुछ समझ नही आ रहा

था कि मैं क्या करूँ,,,,

तभी मैने आगे बढ़ के सोनिया का हाथ पकड़ा और कविता से उसको दूर करके खुद के करीब

खींच लिया और अपने गले से लगा लिया,,,,मेरे ऐसा करने से कविता मेरे और सोनिया से दूर

हटके पीछे की तरफ जाने लगी तभी मैने कविता का हाथ पकड़ लिया और उसको खुद से

दूर नही जाने दिया,,,,,सोनिया मेरे गले से लग्के रो रही थी जबकि कविता को हाथ पकड़

कर खुद के करीब रोक कर रखा हुआ था मैने,,,,,

कुछ देर हम लोग ऐसे ही खड़े रहे ,,,,सोनिया रोती जा रही थी कविता की आँखें भी थोड़ी

नम हो गयी थी,,,,

तूने मुझे कभी बताया क्यूँ नही सोनिया,,,मैं भी जानता था कि तू मुझे प्यार करती है मैं

कयि बार तेरी आँखों मे खुद के लिए प्यार देख चुका हूँ फिर भी तेरी ज़ुबान से एक बार

बस एक बार ये सुन-ने के लिए मेरे कान तरस गये थे ,,,,बोल तूने कभी मुझे बताया क्यूँ

नही,,,,

तभी वो मेरे से थोड़ा पीछे हट गयी,,,,क्या बताती तुझे मैं सन्नी,,,तुझे खुद नही

पता चलता कि कोई लड़की जिसका बचपन से अब तक सिर्फ़ एक की दोस्त है ,जिसके साथ वो

रूम शेयर करती है,,,अपना दुख सुख शेयर करती है,,,हर बात शेयर करती है जो वो

अपने बाय्फ्रेंड से शेयर कर सकती है,,,,,,तेरी वजह से मैने कॉलेज मे कभी किसी लड़के को

अपने नोट्स भी नही दिए कॉपी करने को क्यूकी मैं जानती थी नोट्स के बहाने कोई ना कोई

लड़का हमेशा मेरे करीब आने की कोशिश करेगा और मैं तेरे सिव किसी और को खुद के

करीब नही आने देना चाहती थी,,,,सिर्फ़ मैं ही नही ये कविता भी,,,,हम दोनो का तेरे

सिवा कभी कोई दोस्त नही हुआ आज तक,,,,,मैं जानती हूँ तूने भी कभी किसी लड़की पर

नज़र नही डाली कॉलेज मे ,,,,ये भी जानती हूँ कि तू कविता से बहुत प्यार करता है

और आज से ही नही बचपन से,,,,,,याद है तूने जब पहली बार कविता को देखा था तो

क्या बोला था,,,,तूने बोला था कि सोनिया वो देखो उस लड़की को ऐसे लगता है जैसे आसमान

से कोई परी उतार कर ज़मीन पर आ गयी है,,,तू बचपन से ही लाइक करता रहा है कविता

को ,,,,और जानती हूँ तू मुझे भी बहुत प्यार करता है,,,,लेकिन तेरा मेरा रिश्ता कुछ

अजीब था सन्नी,,,,मैं चाह कर भी तेरे से प्यार का इज़हार नही कर सकती थी,,,

तो अब क्यूँ,,,अब जब मैं कविता से प्यार करने लगा तो अब तूने प्यार का इज़हार क्यूँ किया,

क्या तू चाहती है कि कविता मुझसे दूर चली जाए,,,,

 
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