• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

कहीं वो सब सपना तो नही complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
मैं बेड पर खड़ा हो गया और उसको गान्ड से पकड़ कर गोद मे उठा लिया उसने भी अपने हाथ

मेरे गले मे डाल दिए ,,,मेरा लंड अभी भी उसकी चूत मे था बाहर नही निकला था ,बेड

पर खड़े होते ही मैने उसको गान्ड से पकड़ कर उपर नीचे उछालना शुरू कर दिया अब तक

वो भी मेरा साथ दे रही थी और अब भी देने लगी थी,,,उसने अपने हाथों को मेरे गले मे

डाल दिया था और खुद को मेरे गले के सहारे उपर नीचे करने लगी थी,,,,उसके बूब्स मेरी

छाती पर रगड़ खा रहे थे ,,वो बहुत खुश थी पूरी मस्ती मे थी ,,,,उसकी खुशी उसके

चहरे से सॉफ पता चल रही थी,,,

अभी तक उसके बलों का जुड़ा बना हुआ था तो मैने एक हाथ उसकी गान्ड से उठा लिया और उसके

बालों के जुड़े को खोल दिया ,,जुड़ा खुलते ही उसके लंबे और काले बाल उसके उपर नीचे

होते जिस्म के साथ लहराने लगे थे,,मैं अपने हाथ को उसके बालों मे घुसा दिया और उसके

सर को अपने करीब करके उसके लिप्स को अपने लिप्स मे भर लिया और एक हाथ से उसकी गान्ड को

उपर नीचे उछालने लगा,,,हम लोग करीब 30-35 मिनिट से चुदाई कर रहे थे,,,वो एक बार

झड चुकी थी इसलिए इतना टाइम लगा रही थी और मैं एक नयी चूत की मस्ती मे था इसलिए

इतना टाइम लगा रहा था,,लेकिन अब मस्ती चरम सीमा पर पहुँच गयी थी क्यूकी मैने उसको

तेज़ी से उपर नीचे उछालना शुरू कर दिया था और उसने भी अपने नाख़ून मेरी पीठ पर चुभो

कर मुझे बता दिया था कि वो झड़ने वाली है,,,,तभी तेज़ी से सिसकियाँ लेते हुए उसने अपने

लिप्स को मेरे लिप्स से दूर कर लिया और आहें भरते हुए चूत से पानी बहाना शुरू कर दिया

जैसे ही उसकी चूत से पानी निकल गया मैने उसको नीचे बेड पर लेटा दिया,,,वो तेज़ी से

साँसे ले रही थी और अब मेरा भी होने वाला था इसलिए मैं उसके करीब घुटनो के बल

बैठ गया और अपने लंड को हाथ से हिलाते हुए पानी को उसके मुँह पर निकालने लगा तो उसने

मुँह दूसरी तरफ कर लिया मैं समझ गया इसको ये अच्छा नही लगेगा और जल्दी से लंड को उसके

पेट पर ले गया और लंड ने स्पर्म की पिचकारियाँ मारना शुरू कर दिया और देखते ही देखते

उसका पेट मेरे लंड के पानी से भर गया,,,,,मैं भी थक गया था और थक कर उसके साथ

ही बेड पर लेट गया,,,,

कुछ देर हम लोग ऐसे ही लेटे रहे फिर रितिका उठी और बाथरूम मे चली गयी और खुद को

सॉफ करके वापिस आजे बेड पर लेट गयी लेकिन अब उसने टवल से खुद को कवर किया हुआ था

,,मैं अभी भी नंगा ही था,,,,वो मेरे पास आके ऐसे ही लेट गयी और अपना हाथ मेरी चेस्ट

पर रख दिया,,,पहले तो हल्के हल्के मेरी चेस्ट को सहलाती रही लेकिन जैसे ही मैने हँसके

उसकी तरफ देखा तो उसने मेरे मुँह पर एक थप्पड़ लगा दिया,,,ज़्यादा ज़ोर से नही लेकिन हल्के

से भी नही,,,,,

ओउक्चह मार क्यूँ रही हो भाभी,,,,कुछ ग़लत किया क्या मैने,,,,मैने इतना हँसके बोला तो

रितिका ने एक और थप्पड़ लगा दिया,,,,,,

इतना बुरा हाल कर दिया मेरा और बोलता है कि मैने कुछ ग़लत किया क्या,,,थोड़ा आराम से नही

कर सकता था क्या,,,,इतना दर्द तो शादी वाले दिन भी नही हुआ जब करण ने सील खोली थी

मेरी,,,,अच्छा हुआ तेरे से सील नही खुलवाई,,,,मैने तेरे को अच्छा लड़का समझा था सन्नी

लेकिन मुझे नही पता था तू इतनी बुरी चुदाई करता है,,,,

अरे भाभी क्या बोल रही हो,,,क्या आपकी चुदाई करके मैं बुरा बन गया अब,,,आप ही तो खुद

चुदवाना चाहती थी मेरे से,,,,आपकी ज़िद थी एक बार मेरे साथ हमबिस्तर होने की और अब

जब मैने आपकी ज़िद्द पूरी काद्री तो मैं बुरा हो गया,,,,

मैने कब कहा तू बुरा है सन्नी,,,तुझे पता है जब मैं तेरे पर लाइन मारती थी तो इसके

बारे मे करण को सब पता था,,,,मुझे लगा था मैं तुझे सिड्यूस कर लूँगी मना लूँगी

लेकिन करण को नही लगता था,,,,उसको नही लगता था तू उसको धोखा देगा और करण सही था

,,तू करण से बहुत वफ़ादार था इसी बात ने मुझे तेरे और ज़्यादा करीब कर दिया,,मैने

सोचा नही था कि शादी के बाद मैं तेरे साथ ये सब करूँगी लेकिन पता नही तूने अपनी

अच्छी आदतों से मुझपे क्या जादू कर दिया कि मैने अपने ही पति से बोल दिया कि मुझे उसके

बेस्ट फ्रेंड से किसी गैर मर्द से चुदना है और उसने भी एक बार मुझे मना नही किया,ये

सब हुआ क्यूकी तू बहुत अच्छा है सन्नी,,,,करण के साथ भी और मेरे साथ भी,,,,लेकिन तू

बहुत बुरा भी है,,,,,बहुत बुरी और जबरदस्त चुदाई करता है,,,,मुझे तो अब डर लगने

लगा है कि तूने मेरी चूत का इतना बुरा हाल कर दिया तो अब गान्ड को तो फाड़ ही देगा तू

,,कसम से बहुत डर लग रहा है मुझे,,,,चूत की तो सील खुली हुई थी लेकिन अब गान्ड

तो सील पॅक है,,,,,हयी रे जान निकाल देगा तू मेरी,,,,डर लग रहा है,,,

नही भाभी ऐसी बात नही,,,,मुझे चूत मारे बहुत टाइम हो गया था और उपर से आप जैसी

इतनी खूबसूरत भाभी मेरे सामने थी नंगी ,,,मैं बस कुछ पल के लिए होश खो बैठा

था ,,मुझे ऐसे लग रहा था कि जैसे मैं सपना देख रहा हूँ,,और वैसे भी आप जैसी

लड़की का मेरे साथ होना सपने से कम नही,,,,आप जैसी लड़की के साथ सेक्स करने के लिए कोई

किसी का क़त्ल भी करने को तैयार हो जाएगा,,,,

सच मे सन्नी,,,क्या मैं इतनी खूबसूरत लगती हूँ तुझे,,,,,

मुझे ही नही भाभी करण को भी,,,,वो बहुत प्यार करता है आपसे,,,,मुझे आपके साथ ये

सब करना अच्छा नही लग रहा था,,लेकिन मैं क्या करता मैं मजबूर था अपने लंड की वजह

से,,,,पहले भी आप बहुत ट्राइ करती थी मेरे पर लेकिन मैं पता नही क्यूँ दूर हो जाता था

आपसे,,,मेरा दिल तो बहुत करता था फिर भी पता नही क्यूँ,,अगर आप करण की गर्लफ्रेंड ना होती तो

मैं कभी मना नही करता,,,,

सच मे सन्नी,,,,,क्या तू मुझे मना नही करता अगर मैं करण की गर्लफ्रेंड ना होती तो,,,

अरे मुझे पागल कुत्ते ना काटा था जो इतनी खूबसूरत लड़की खुद सामने से चलके मुझे

अपने साथ लाइफ का पहला सेक्स करने को बोल रही है और मैं मना कर देता,,,नेवेर भाभी

अच्छा अभी तूने बोला कि तूने काफ़ी टाइम से किसी की चूत नही मारी इसलिए तू बहक गया

था मजबूर था,,,वैसे अब तक तू कितनी लड़कियो की चूत मार चुका है,,,,

पता नही भाभी ,,आज तक गिनती नही की कभी,,,,मैने शरारती अंदाज मे बोला तो भाभी

ने हल्के से एक और थप्पड़ मार दिया मुझे,,,,

वैसे है तू पक्का खिलाड़ी सन्नी,,,,,काफ़ी तजुर्बा है तुझे,,,,वैसे सुना था कारण से

लेकिन आज खुद देखा तो मान गयी मैं,,,तू भी पक्का खिलाड़ी है और तेरा बड़ा मूसल तो

तेरे से भी बड़ा खिलाड़ी है,,,

वैसे भाभी आप भी कम नही हो,,,,पूरा साथ दिया अपने मेरा,,,,और अब तो अब चूत लंड

गान्ड जैसे वर्ड़ भी यूज़ करने लगी हो,,,,,

 


मेरी बात सुनके भाभी शरमा गयी,,,,,वो क्या है ना सन्नी करण जब भी चुदाई करता है

साथ साथ हल्की हल्की डर्टी टॉक भी करता है,,,उसी से आदत हो गयी मुझे,,और वैसे भी

डर्टी टॉक करते हुए चुदाई करने का अलग ही मज़ा है,,,,

हां सही बोला भाभी अपने,,,,,,तो इसी बात पर एक बार और हो जाए,,,,

इतनी भी क्या जल्दी है,,,आज पूरी रात हम लोगो की है,,,,

बस आज की रात भाभी,,,दोबारा कभी नही आओगी क्या अपने देवर सन्नी के पास,,,,,,,

नही सन्नी,,,,एक रात की ज़िद थी मेरी वो पूरी हो रही है,,दोबारा तेरे पास आउन्गी या नही

ये तो टाइम ही बता सकता है,,मैं उसके बारे मे कुछ नही बोल सकती,,,,

अरे भाभी क्या मज़ाक कर रही हो,,,एक बार जो चूत सन्नी के लंड का स्वाद चख लेती है

उसको नशा हो जाता है सन्नी के लंड का,,,,चलो मैं ज़्यादा ज़ोर नही डालता आप पर,,टाइम

विल टेल भाभी,,,,,लेकिन आज रात तो अपनी है ना,,,,आज की रात मे इतनी चुदाई करूँगा

आपकी की आप कम से कम 5-7 दिन करण को अपने पास भी नही आने दोगि,,,,

इतना बोलकर मैने फिर से भाभी के सर को अपने पास किया और फिर शुरू हो गयी हम दोनो

की प्यार भरी किस,मैने भाभी के जिस्म पर लिपटे हुए टवल को अलग कर दिया और भाभी

को नंगी कर दिया,,,पहले की चुदाई मे भी भाभी ने मेरा साथ दिया था इसलिए दोबारा से

जब हम लोगो ने मस्ती करनी शुरू की तब भी भाभी मेरा साथ देने को पूरी तरह तैयार थी

और जैसे ही भाभी के जिस्म से टवल अलग हुआ भाभी मेरे उपर चढ़ गई और मुझे किस करते

हुए मेरे सर को प्यार से सहलाने लगी,,,,मेरे हाथ भी भाभी की पीठ पर चले गये और

मैने भी भाभी की पीठ को प्यार से सहलाना शुरू कर दिया,,,पहले भाभी थोड़ा शर्मा

रही थी घबरा रही थी लेकिन अब भाभी मेरे से भी ज़्यादा एग्ज़ाइट हो गयी थी और बहुत ही

मजेदार तरीके से मुझे किस करती जा रही थी,,,,मेरे हाथ भाभी की पीठ को प्यार से

सहला रहे थे फिर मैने अपने हाथों को पीठ से नीचे करते हुए उनकी गान्ड पर रख

दिया,,,हाथ गान्ड पर जाते ही मैने अपने दोनो हाथों से गान्ड को हल्के से खोला और गान्ड

के सूराख पर एक उंगली से हल्की हल्की जाँच करने लगा,,उनकी गान्ड सच मे सील पॅक थी

मैने एक उंगली अंदर डालने की कोशिश की तो एक उंगली भी अंदर नही जा रही थी,,,मैने

भाभी के लिप्स से अपने लिप्स को दूर किया और अपने हाथ की एक उंगली को अपने मुँह मे भरके

चूस कर थूक लगा लिया और अपने हाथ को वापिस भाभी की गान्ड की तरफ लेके जाने लगा

तभी भाभी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपने मुँह से थोड़ा थूक मेरे हाथ पर उंगलियों के

उपर थूक दिया,,मेरी उंगलियाँ थूक से सराबोर हो गयी थी,,,भाभी ने बहुत ज़्यादा थूक

लगा दिया था मेरी उंगलियों पर,,,,भाभी की भी पता था थोड़े थूक से कुछ नही होने

वाला,,,,,

मैने वापिस भाभी को किस करना शुरू किया और अपने हाथ को जिस पर भाभी ने थूक दिया

था उस हाथ को भाभी की गान्ड पर ले गया और सारे थूक को भाभी की गान्ड के होल पर

मलने लगा,,,,गान्ड का होल भी थोड़ा चिकना हो गया था और उंगलियाँ भी चिकनी थी थूक

की वजह से,,,मैने दूसरे हाथ से गान्ड के होल को थोड़ा खोला और एक उंगली भाभी की

गान्ड मे घुसा दी जो आराम से एक ही बार मे पूरी अंदर चली गयी,,,मैं कुछ देर भाभी की

गान्ड को एक उंगली से हल्के हल्के चोदता रहा फिर एक और उंगली घुसा दी भाभी की गान्ड

मे ,,,लेकिन अब तक मेरा हाथ थोड़ा सूख गया था,,,भाभी ने मेरे हाथ को पकड़ा और अपनी

गान्ड से हटा कर अपने मूह से फिर थूक दिया मेरे हाथ पर,,,,हाथ पर थूक लगते ही

मैने जल्दी से हाथ को गान्ड पर रखा और एक ही बार मे 2 उंगलियाँ घुसा दी भाभी की

गान्ड मे जो आराम से घुस गयी,,,,मैने उंगलियों को गोल गोल घुमा कर भाभी की गान्ड मे

अंदर बाहर करना शुरू कर दिया,,,

कभी देर तक भाभी और मैं किस करते रहे और मैं भाभी की गान्ड को 2 उंगलियों से

चोदता रहा,,,,भाभी ने कई बार मेरे हाथ की उंगलियों पर थूक लगाया था,,,कुछ देर

बाद मेरा हाथ फिर सूखने वाला हुआ तो मैने उंगलियों को गान्ड से निकाला और भाभी के

मुँह के पास किया तो भाभी जल्दी से मेरे उपर से उतर गयी और अपने फेस को मेरे लंड की

तरफ करके अपने घुटनो को मेरे सर के दोनो तरफ करके अपनी चूत को मेरे मुँह के उपर

कर दिया,,,जिस से हम दोनो 69 की पोज़िशन मे आ गये,,,,भाभी ने जल्दी से मेरे लंड को

पकड़ कर मुँह मे भर लिया और चूसना शुरू कर दिया,,,मैने भी भाभी की चूत को अपने

मुँह से लगा लिया और हाथ पर थूक लगा कर भाभी की गान्ड मे फिर से 2 उंगलियाँ घुसा

दी और फिर से 2 उंगलियों से भाभी की गान्ड को चोदने लगा,,,काफ़ी टाइम से हम ऐसे ही एक

दूसरे के प्राइवेट पार्ट को चूस और चाट रहे थे साथ साथ मैं भाभी की गान्ड मे उंगली

भी कर रहा था,,इसी दौरान मेरे हाथ जब भी सूख जाता मैं उसपे थूक लगा लेता,,,

करीब 8-10 मिनिट बाद हल्की हल्की मस्ती करने के बाद भाभी मेरे जिस्म से नीचे उतर

गयी और घुटनो को बेड से लगा कर अपने सर को नीचे बेड से लगा कर और गान्ड को उपर उठा

कर कुटिया की तरह झुक गयी,,,मैं समझ गया था कि भाभी गान्ड मरवाने को तैयार है

क्यूकी अब तक भाभी ने मेरे लंड को भी चूस चूस कर थूक से सराबोर कर दिया था

मेरा लंड एक दम चमक रहा था भाभी के थूक की वजह से,,,मैं भी जल्दी से उठा और

अपने लंड को भाभी की गान्ड के होल पर रखा और हल्का ज़ोर लगाया लेकिन कोई फ़ायदा नही

हुआ ,,मेरा लंड एक साइड मे फिसल गया,,,,मैने कुछ थूक अपने हाथ पर लगाया और भाभी

की गान्ड पर लगा दिया और वापिस लंड को भाभी के गान्ड के होल पर रखा और हल्के से ज़ोर

लगाया नही इस बार भी कोई फ़ायदा नही हुआ,,मैने की बार कोशिश की ज़्यादा से ज़्यादा थूक

लगा कर भाभी की गान्ड मे लंड पेलने की लेकिन हर कोशिश नाकाम रही,,,मुझे हल्का

गुस्सा आ रहा था और शायद भाभी को भी,,,,तभी भाभी उठी और अपने पर्स से एक बॉडी

लोशन की शीशी निकाल कर मुझे दी और खुद वापिस झुक कर कुतिया बन गयी,,,

मैने बॉडी लोशन की शीशी खोली और खूब सारा बॉडी लोशन भाभी की गान्ड के होल पर

लगा दिया और उंगलियों से गान्ड के होल को खोल कर लोशन को भाभी की गान्ड मे भी भर

दिया और अच्छी तरह उंगलियाँ घुमा कर होल को हर तरफ से चिकना कर दिया,,भाभी की

गान्ड बहुत ज़्यादा टाइट थी लेकिन ये लोशन काफ़ी चिकना था,,लोशन की चिकनाई की वजह

से 2 उंगलियाँ बड़े आराम से अंदर बाहर हो रही थी,,,,फिर मैने अपने हाथ से बॉडी लोशन

को अपने लंड पर भी लगा लिया और लोशन वाली शीशी को साइड पर रख दिया और फिर से अपने

लंड को पकड़ा और भाभी की गान्ड पर टिका दिया और हल्के से ज़ोर लगाया तो लंड की टोपी

भाभी की गान्ड मे घुस गयी तभी भाभी की हल्की चीख निकल गयी,,,

हयीईईई आअररामम्म सी सुउन्नयी दार्र्द्द हूटता हाइईइ,,,,मर गयइी माआआअ

मुझे पता था भाभी की गान्ड टाइट है और मेरा मूसल इतने आराम से नही जाने वाला लेकिन

अब मैं टोपी को बाहर नही निकालना चाहता था क्यूकी अगर टोपी को बाहर करता तो दोबारा

अंदर डालने पर भाभी फिर तड़प उठती,,,,इसलिए मैने लंड की टोपी को गान्ड के अंदर ही

रहने दिया और अपने एक हाथ को भाभी की कमर की एक साइड से उनके पेट के नीचे से करते

हुए उनकी चूत पर ले गया और उनकी चूत को सहलाने लगा और साथ ही भाभी को हल्के से

अपने साथ सटा भी लिया क्यूकी अगर मैं एक और झटका मारता तो पक्का था भाभी ने आगे की

तरफ बढ़ने की कोशिश करनी थी और मैं उनको अब रोक भी सकता था,,,मैने भाभी की

चूत को एक हाथ से सहलाना शुरू किया और दूसरे हाथ से बेड पर पड़ी हुई लोशन की शीशी

उठा ली और शीशी को लंड पर उल्टी करके दबा दिया जिस से शीशी से लोशन की एक धार

सीधी लंड पर गिरी ,,मैने शीशी को वापिस बेड पर रखा और हाथ से लोशन को लंड पर

मल दिया और फिर कमर को आगे करके लंड को हल्के से और ज़्यादा गान्ड मे घुसाने की कोशिश

की,,,,,एक तो लंड पर खूब सारा लोशन लग गया था उपर से लंड की टोपी पहले से भाभी

की गान्ड मे थी और साथ साथ मैं भाभी की चूत को भी सहला रहा था इसलिए भाभी को

ज़्यादा दर्द नही हुआ,,,,जो थोड़ा बहुत दर्द होना था वो चूत को सहलाने से मिलने वाली मस्ती

की वजह से नही हुआ ,,,अब मेरा लंड 2-3 इंच तक भाभी की गान्ड मे घुस गया था ,,,

 
मैने ज़्यादा लंड को अंदर करने की कोशिश नही की बस इतने ही लंड से हल्के हल्के बहुत

स्लो स्पीड मे आगे पीछे करने लगा साथ साथ तेज़ी से भाभी की चूत को सहलाने लगा ताकि

अगर थोडा बहुत दर्द हो भी तो उसका पता नही चले भाभी को,,,,भाभी की गान्ड इतनी

ज़्यादा टाइट थी कि मेरा लंड पूरी तरह से फँसा हुआ था उनकी गान्ड मे ,,,मुझे ऐसे लगा

मैने कस कर अपने लंड को मुट्ठी मे दबाया हुआ है,,,,,लेकिन इतने लंड से भी मुझे मज़ा

बहुत आ रहा था,,,,मैं हल्के हल्के लंड को आगे पीछे करने लगा करीब 3-4 मिनिट तक

मैं अपने 2-3 इंच से भाभी की गान्ड को चोदता रहा फिर भाभी ने पलट कर मेरी तरफ

देखा और लंड को आगे खिसकाने का एशारा किया,,,,,भाभी का इशारा मिलते ही मैने एक हाथ

से थोड़ा सा और लोशन लंड पर लगाया और अच्छी तरह लंड पर मल दिया और दोनो हाथों से

भाभी की कमर को पकड़ा और लंड को हल्का ज़ोर लगा कर गान्ड मे और ज़्यादा अंदर तक घुसाने

लगा,,,मेरे दोनो हाथ भाभी की कमर पर थे इसलिए चूत पर कोई मज़ा नही मिल रहा था

भाभी को,,,,इसलिए भाभी ने अपने सर को बेड से लगा लिया और अपने हाथ को अपनी चूत पर

ले गयी और खुद ही चूत को सहलाने लगी,,,,,क्यूकी भाभी को भी पता था जब लंड और ज़्यादा

अंदर तक जाएगा तो थोड़ा बहुत ही सही दर्द तो होगा ना,,इसलिए भाभी खुद ही अपनी चूत

को सहलाने लगी ताकि दर्द का पता नही चले,,,,,मेरे हल्के ज़ोर लगाने से लंड करीब आधे

से ज़्यादा भाभी की गान्ड मे घुस गया ,,,,

मैने आधे लंड से ही भाभी की गान्ड को चोदना शुरू कर दिया,,,करीब 5-6 मिनिट बाद

मैने देखा कि भाभी की सिसकियाँ थोड़ी तेज हो गयी थी,,,,लेकिन मैं हैरान था भाभी

के दोनो हाथ बेड पर थे और भाभी ने अपने जिस्म को बेड से उपर उठाया हुआ था,इसका मतलब

था भाभी का हाथ उनकी चूत पर नही था लेकिन अगर उनका हाथ उनकी चूत पर नही था तो

क्या भाभी को गान्ड मे मस्ती आने लगी थी,,,,,मैं जो सोच रहा था वो सही था,,क्यूकी

भाभी ने अपने हाथों को बेड से लगा कर खुद को उपर उठा कर अपनी गान्ड को हल्के हल्के

आगे पीछे करना शुरू कर दिया था,,,,मैं समझ गया कि अब भाभी को भी गान्ड मे मज़ा

आने लगा इसलिए मैने स्पीड थोड़ी तेज करदी और उधर भाभी भी अपने गान्ड को आगे पीछे

करने लगी,,,

भाभी दर्द कम हुआ या नही,,,,,मज़ा आने लगा क्या,,,,

हान्णन्न् सयनायीयी आब्ब्ब्ब दार्र्द्द्द नाहहिि हाइईइ ,,,साकच्छ मईए तुउन्नी दार्र्द्द न्ह्ही

कििय्या,,पीहल्ली हहूउआ था तहोड़दा दार्र्द्द जबब्ब तीरा मूस्साल्ल उउउननदीर्र ग्यया

था लीक्कीिईन्न्न आब्ब्ब बील्लककूउल्ल बहीी दार्द्ड़ नाहि हाइी ,,,,एब्ब तूओ माजा एयेए

राहा हाइईइ,,,,अहह हह ऊऊऊऊहह

सच मे भाभी मज़ा आ रहा है क्या,,,,,

हान्न्न स्युवन्नीयीईयी माज्जा आ राहहा हाइी,,,,मुउज़्झे दरर्र तहा क्कीी भ्हुत्त दर्द्द्द्द

हूग्गा लीक्किन्न तुउन्नी सब्ब सांबभाल्ल्ल लिइय्या ,,,,

तो क्या भाभी स्पीड थोड़ी तेज कर दूँ अब,,,,,

नहिी नाहहिि सुउन्न्नयययी ऐसी हिी हाल्ल्कीइ हाल्लक्कििई स्पपीड़द्ड पीर्र काररू आग्गर्र

स्पीदड़ टीज़्जज्ज्ज्ज काररननीी हुउई मायन्न ख़्हुद्धह काँम्माररर क्कूव टीज्जिई सीए

अग्गीए पीिकच्ची काररन्ना ष्हुउररूउ कारर डुउननगइइ ,,लीक्किंन अब्भीी नाहहिि प्लज़्ज़्ज़्ज़

अब्भीईिइ एआसे हहिि चूदूऊ म्मूउज़्झहही,,,,,

तो मुझे सन्नी नही देवर जी बोलो भाभी,,,वरना स्पीड तेज कर दूँगा,,,,,

नाहहिि नाहहिि ससुउन्नययी ऐसा जुऊल्लंम मात्ट काररन्ना आपपननीी बभ्भीी पीरर

फिर से सन्नी ,,मैने कहा ना देवर जी बोलो,,,,,

आअकचा अcछा बब्बा ग्गल्ल्ल्त्ती हो गयइ ,,,डीवीर जीिीइ ऐसे हिी द्द्ढ़हीररी

द्ड़हीररी छ्ूदूओ आपपनन्ी बब्भिि ककूऊ ,,,,स्पपीडड़ तीज कार्रकक्क्की जुऊल्लम

मॅट कारन्ना डीवीर जीि,,,,

ठीक है भाभी,,,लेकिन बताओ मज़ा आ रहा है ना,,,बोलो कितन मज़ा आ रहा है,,,

बहुत मज्जा आ राहहा हाइईइ द्दीवीरर जीिीइ ऐसी हिी छूद्दू अपपननीी बब्भिि

क्कीिई गाणन्ंदड़ कूऊ औरर्र मसत्तिीई सी छ्ूदूऊ अप्प्पननीी भभीी कूऊव

फिर कुछ 3-4 मिनिट मैने स्पीड तेज नही की और ऐसे ही भाभी को चोदता रहा,,लेकिन जब

मज़ा ज़्यादा आने लगा भाभी को तो भाभी ने खुद ही अपनी गान्ड को थोड़ा तेज़ी से आगे पीछे

करना शुरू कर दिया,,,भाभी का इशारा मिलते ही मैने भाभी की कमर को कस कर पकड़ा और

भाभी की हिलती कमर के साथ एक झटका लगा दिया और लंड पूरा भाभी की गान्ड मे घुस

गया,,,,भाभी की हल्की चीख निकल गयी और भाभी ने कमर हिलाते हुए पीछे मूड के मुझे

गुस्से से देखा तो मैं हँसके भाभी को आँख मार दी,,,,,,

फिर मैने अपने पूरे लंड से भाभी को चोदना शुरू कर दिया,,,भाभी बस सिसकियाँ लेती

जा रही थी और मुझे तेज़ी से चोदने को बोलती जा रही थी,,,अब तक मेरी भी स्पीड काफ़ी

तेज हो चुकी थी लेकिन भाभी मुझे और तेज करने को बोलने लगी,,मैने थोड़ा लोशन और

लगाया अपने लंड पर और स्पीड तेज करदी,,,अब भाभी वापिस सर को बेड पर रख कर लेट

गयी और अपने हाथ से अपनी चूत मे उंगली करने लगी,,,मैं समझ गया कि अब भाभी को ज़रा

भी दर्द नही हो रहा है और अब भाभी शायद झड़ने वाली भी है,,क्यूकी मैं 20-25 मिनिट

से भाभी की गान्ड मार रहा था,,भाभी ने अपनी चूत पर उंगली करते हुए तेज़ी से आहहें

भरना शुरू कर दिया तो मैने भी अपनी स्पीड तेज करदी क्यूकी मैं भी भाभी के साथ ही

झड़ना चाहता था,,,और ऐसा ही हुआ,,करीब 3-4 मिनिट बाद भाभी लंबी लंबी आँहे भरती

हुई झड गयी और मैं भी तेज़ी से भाभी की गान्ड मारता हुआ भाभी की गान्ड मे झड गया,,

जब मेरा सारा पानी भाभी की गान्ड मे निकल गया तो मैने अपने लंड को भी भाभी की गान्ड

से निकाला और बेड पर गिर गया और भाभी की बगल मे लेट गया,,,,भाभी भी मेरी तरफ पीठ

करके लेट गयी,,,,भाभी की गान्ड मेरी तरफ थी तो मैं भाभी की गान्ड से निकलने वाले

अपने लंड के पानी को देख राह था जो भाभी की गान्ड से निकल कर बेड पर गिर रहा था

कुछ देर हम लोग ऐसे ही लेटे रहे,,,,ना भाभी कुछ बोली और ना मैं,,हम दोनो अपनी अपनी

सँसू पर क़ाबू पाने की कोशिश कर रहे थे,,,,,

जब भाभी की हालत ठीक हुओ भाभी मेरी तरफ पलट गयी,,,,,,

क्यू भाभी मज़ा आया ना गान्ड मरवा कर अपने देवर से,,,,,मैने हँसके भाभी से पूछा तो

भाभी थोड़ा शरमा गयी,,,,,

हां देवेर जी बहुत मज़ा आया,,,इतना मज़ा कभी चूत मे नही आया,,,,मैं तो खा-म-खा डर

रही थी कि दर्द होगा गान्ड मे लेकिन इतना भी दर्द नही हुआ,,,,अच्छा किया तूने खूब सारा

लोशन लगा लिया था,,,मुझे तो डर था कि ये मूसल चूत मे आसानी से नही गया तो भला

टाइट सील पॅक गान्ड मे कैसे जाएगा लेकिन लोशन ने अपना काम कर ही दिया,,,ग़लती हो

गयी कि चूत मे लंड डालने से पहले लोशन नही लगवाया मैने तेरे से,,,

कोई बात नही अब दोबारा चूत मार लूँगा लोशन लगा कर,,,मैने इतना बोला और हँसने लगा

नही नही,,,,चूत तो मैं कभी भी मरवा लूँगी करण से तुम बस आज रात मेरी गान्ड का

ठीक से ख्याल रखो सन्नी,,,बस पूरी रात मेरी गान्ड मारो क्यूकी गान्ड मे बहुत ज़्यादा मज़ा

आता है,,चूत से भी कहीं ज़्यादा मज़ा,,,,

मैं भाभी की बात सुनके हँसने लगा,,,,,फिर उस रात मैने 3 बार और भाभी की गान्ड

मारी भाभी ने फिर उस रात मुझे चूत नही मारने दी ,,हालाकी भाभी की चूत भी काफ़ी

टाइट थी लेकिन फिर भी मैं भाभी की गान्ड ही मारता रहा क्यूकी मुझे भी गान्ड मे ही

ज़्यादा मज़ा आ रहा था,,,

पूरी रात मैं रितिका भाभी की चुदाई करता रहा,,,हम लोग सुबह करीब 6 बजे सोए थे

और जब आँख खुली तो मैं बेड पर अकेला था,,टाइम करीब 11 बजे का हो गया था,,मैं उठा

और बाथरूम मे चला गया,,,फ्रेश होके अपने रूम से निकलकर अलका आंटी और शिखा के रूम

की तरफ चला गया,,वहाँ जाके देखा तो सब लोग ऐर्पोट जाने के लिए तैयार हो गये थे,,

रितिका मुझे बड़े प्यार से देख रही थी और मुस्कुरा रही थी जबकि अलका और शिखा थोड़ी

उदास थी,,,,,,फिर हम लोग ऐर्पोट की तरफ चल पड़े,,,,,कुछ ही देर मे हम ऐर्पोट पर

थे उन लोगो को अंदर भेज कर मैं वापिस अपनी कार के पास आ गया,,,तभी करण मेरे पीछे

पीछे मेरी कार के पास आ गया,,,,,

अरे इतनी भी क्या जल्दी है सन्नी भाई अपनी अमानत तो लेते जाओ,,,,मैने ये आवाज़ सुनी और पीछे

की तरफ देखा तो करण हाथ मे मेरा कॉलेज बॅग लिए खड़ा हुआ था,,,

साला मैं तो बॅग के बारे मे भूल ही गया था,,,,जिसकी वजह से सब पंगा हो रहा था,,

ओह्ह्ह्ह सौरी करण भाई मैं तो भूल ही गया था,,,मैने करण के हाथ से बॅग पकड़ा और

कार मे रख दिया,,,फिर करण के गले लग्के मिला

तो रात कैसी रही सन्नी भाई,,,,मज़ा आया या नही,,,,,करण ने हंसते हुए पोछा,

मैं कुछ नही बोला बस मुस्कुरा कर करण की तरफ देखने लगा,,,

करण भी हँसके मुझे देखने लगा,,,,थॅंक्स्क्स्क्स भाई कि तूने अच्छे से ख्याल रखा रितिका का

उसने बता दिया था मुझे कि तूने उसको ज़्यादा तंग नही किया,,,,,मुझे यकीन तो नही हो रहा

था उसकी बात पर क्यूकी मैं जानता हूँ तू चुदाई के मामले मे बड़ा कमीना है लेकिन फिर

भी मैं रितिका की बात मान गया,,,

अबे तेरी अमानत थी ना वो इसलिए बड़े प्यार से पेश आया मैं,,,ज़्यादा तंग भी नही किया और

ज़्यादा हर्ट भी नही किया,,,,,अगर कोई और होती वो भी सील पॅक गान्ड वाली तो माँ कसम

सुबह अपने आप बेड से उठके बाथरूम तक भी नही जा पाती,,,,रूम से बाहर आना तो दूर की

बात थी

मैने इतनी बात बोली तो करण और मैं दोनो हँसने लगे,,,,,

तभी करण फिर से मेरे गले लग गया,,,,,सौरी भाई मैं तुझे अकेले छोड़कर जा रहा हूँ

दिल तो नही कर रहा लेकिन क्या करो मजबूरी है,,,

अबे सौरी क्यू बोल रहा है,,,और मैने तुझे पहले ही कहा था कि मैं अकेला नही हूँ

ख़ान भाई है मेरे साथ,,तू मेरी फ़िक्र मत कर और अपनी फॅमिली के साथ जा,,,,वैसे मैं भी

यही चाहता हूँ क्यूकी जैसे मैने अपनी फॅमिली को इस सब से सुरक्षित कहीं दूर भेज

दिया है वैसे ही मैं चाहता हूँ तू और तेरी फॅमिली भी कुछ टाइम के लिए इस सब लफडे से

दूर चले जाए,,,,चल अब जा सब तेरा वेट कर रहे होंगे,,,,

एक बार फिर हम दोनो गले लगे और करण गया ऐर्पोट के अंदर और मैं कार लेके वहाँ से

चल पड़ा घर की तरफ,,,,,रात करीब 8-9 बजे मैं अपने शहर पहुँच गया लेकिन मैं

घर नही गया क्यूकी अभी वहाँ पोलीस की कुछ जाँच पड़ताल बाकी थी,,,

कविता के घर भी नही गया क्यूकी सूरज और कामिनी भाभी की बात का कोई जवाब नही देना

चाहता था मैं और उन लोगो ने सवाल पूछ पूछ कर तंग कर देना था मुझे,,,इसलिए घर

से थोड़ी डोर माल रोड पर एक होटेल मे रुक गया जहाँ से कॉलेज नज़दीक ही था मेरा,,

बहुत थका हुआ था इसलिए खाना ख़ाके सो गया,,,सुबह आँख खुली जब फोन बजने लगा था

कविता=======हेलो सन्नी

सन्नी======= हेलो कविता

कविता====== कहाँ है तू सन्नी ,,करण के घर पे है क्या,,,

सन्नी==== नही करण के घर पे नही हूँ कहीं और हूँ मैं,,तू बता इतनी सुबह क्यूँ फोन

किया,,,,

कविता==== कुछ नही सन्नी ,,आज से कॉलेज शुरू हो रहे है और सोनिया ज़िद कर रही है

कॉलेज जाने को,,,सोचा तुमको बता दूं क्यूकी वो रुकने का नाम ही नही ले रही,,,

सन्नी======== इट्स ओके,,,तुम दोनो आ जाओ कॉलेज कोई बात नही,,,मैं भी कॉलेज के पास ही

हूँ ,,बस 10 मिनिट मे पहुँच रहा हूँ कॉलेज,,,,

कविता ने बाइ बोलके फोन काट दिया मैं भी उठकर फ्रेश हुआ और कॉलेज की तरफ चल

पड़ा सोचा कि नाश्ता भी कॉलेज की कॅंटीन मे कर लूँगा,,,,,

सर्दिया थी इसलिए कॅंटीन वाले ने मेरे कहने पर टेबल बाहर धूप मे लगा दिए थे

मैं टेबल पर जाके बैठ गया और कॉफी के साथ सॅंडविच का मज़ा लेने लगा,,,

तभी सुरेश मेरे पास आके बैठ गया,,,,,

और क्या हाल चाल है सन्नी भाई,,,,आज कल नज़र ही नही आते,,,,और ना ही आपका दोस्त करण

नज़र आता है,,,,

नज़र क्या आना था सुरेश ,,,,कॉलेज तो आज शुरू हुआ है,,,,,मैने मुस्कुरा कर जवाब

दिया

अरे मेरा मतलब वो नही था भाई,,,,,मेरा मतलब था कि कल मैं करण के घर गया था तो

वहाँ लॉक लगा हुआ था,,,,फोन भी ट्राइ किया करण का,, रितिका का भी लेकिन फोन ऑफ था

दोनो का ,,,,क्या वो लोग कहीं घूमने गये है क्या,,,

पता नही मुझे सुरेश,,,हो सकता है हनिमून पर गये हो अब मुझे थोड़ी बता कर जाएँगे

कि हनिमून पर कहाँ जा रहे है वो लोग,,,,वैसे तू क्यूँ गया था करण के घर,,,

अरे भाई अपनी बेहन से मिलने और किस लिए,,,,और वैसे भी मुझे करण और रितिका से माफी

माँगनी थी,,,,शादी वाले दिन मैं कुछ ठीक तरह से पेश नही आया था उन लोगो के साथ

इसलिए कल घर पे मिलने गया था उन लोगो को,,लेकिन घर पर कोई नही था,,,

पता नही मैं तो खुद अपने गाँव गया हुआ था,,,कल ही वापिस आया हूँ,,,वैसे अगर करण

का फोन आया या कुछ पता चला तो मैं तुझे बता दूँगा,,,,

वो उठकर जाने लगा तभी अमित भी उसके पीछे वहाँ आ गया,,,,,

 


बड़ा अफ़सोस हुआ सन्नी भाई आपके घर की खबर सुनके,,,,सुना है चोर आ गये थे आपके

घर पे और पोलीस वालो को भी मार दिया,,,,वैसे कुछ ज़्यादा नुकसान तो नही हुआ ,,,इतना

बोलते टाइम अमित के चेहरे पर हल्की मुस्कान थी,,,

नही अमित भाई कुछ ज़्यादा नुकसान नही हुआ,,,

वैसे पोलीस वाले क्या कर रहे थे आपके घर पे सन्नी भाई,,,,अमित ने कुछ शक़ करते हुए

पूछा,,,,

वो पोलीस वाले राउंड-अप थे तभी उन लोगो ने किसी को दीवार से कूद कर अंदर जाते हुए

देखा था,,,,उनको शक हुआ तो वो भी अंदर चले गये और चोरों ने उनको गोली मार दी,लेकिन

मुझे समझ नही आता कि गोली की आवाज़ किसी ने सुनी क्यूँ नही,,,,,लगता है पिस्टल के आगे

साइलेनसर लगा रखा होगा चोरों ने,,,,

तभी सुरेश बोल पड़ा,,,,अरे वाह भाई लगता है आज कल के चोर भी समझदार हो गये है

सुरेश ने इतना बोला और अमित के साथ मिलकर हँसने लगा,,,

फिर वो लोग भी मेरे साथ बैठ गये और कॉफी औरडर करके कॉफी पीने लगे,,, तभी सुरेश

बोला,,,,,,,,थन्क्ष्क्ष्क्ष सन्नी भाई उस दिन तूने मेरी हेल्प की जो मुझे उठाकर आंब्युलेन्स मे

डाला,,,,,साला कोई आगे नही आया कॉलेज से एक तू ही आगे बढ़ा ,,,

इसमे थॅंक्स्क्स्क्स की क्या बात है सुरेश,,,,और वैसे भी मेरी कॉन सी तेरे से कोई दुश्मनी थी जो

मैं तेरी हेल्प नही करता,,,,तेरी जगह कोई और भी होता तो मैं उसकी हेल्प करने के लिए

आगे ज़रूर आता,,,,

सही बोला सन्नी भाई ,,हम लोगो मे कोई दुश्मनी नही है और अब तो हम लोगो की रिश्तेदारी

शुरू हो गयी है,,,,आख़िरकार तू मेरे जीजा का बेस्ट फ्रेंड है,,,तभी इतना बोलते हुए सुरेश

ने अमित को कुछ एशारा किया,,,,,

सुरेश का इशारा मिलते ही अमित बोल पड़ा,,,,,सौरी सन्नी भाई जो हम लोगो मे उस दिन झगड़ा

हुआ था,,,मुझे नही पता था कि शिखा करण की बेहन है,,,,पता होता तो मैं ऐसी वैसी

हरकत नही करता,,,,

मैं समझ गया था ये लोग चापलूसी कर रहे है और करते भी क्यूँ नही पोलोटिक्स से जो

संबंध रखते है,,,,,

इट्स ओके अमित भाई,,,,,मैं तो कबका भूल चुका उस बात को,,,मैने हंसते हुए बोला,,,

फिर हम लोग इधर उधर की बातें करने लगे,,,आज ये लोग मेरे साथ कुछ प्यार से पेश

आ रहे है,,,,लगता है इनको मुझ पर शक नही रहा अब क्यूकी मेरे घर से कुछ नही मिला

इन लोगो को,,,लेकिन फिर भी इन्पे यकीन करना सही नही था,,,क्यूकी ये बड़े कमिने थे

लेकिन एक बात ठीक हो गयी थी आज कि अगर इनको मेरे पर शक नही तो मेरी फॅमिली को भी

कोई ख़तरा नही इन लोगो से,,,

अच्छा अब हम लोग दोस्त है तो एक बात पूछ सकता हूँ क्या तेरे से मैं सन्नी,ये बात बोली

थी अमित ने

हां हां क्यूँ नही अमित भाई,,,एक क्या दो बातें पूछ सकते हो आप,,,,

तुझे पता है कि सुमित कहाँ छुपा हुआ है,,,या किसी को कोई बात करते सुना हो उसके

बारे मे,,,,

नही अमित भाई मुझे नही पता सुमित कहाँ है,,, पता होता तो मैं आपके पापा को बता

देता,,,,

अच्छा तो तुझे वो सीडीज़ कैसे मिली जो तूने मेरे बाप को दी,,,,

वो तो मुझे सुमित के घर से मिली थी,,,,

तो तुम जानते थे सुमित का घर कहाँ है,,,,,अमित ने शक करते हुए मेरी तरफ देखा और

ये सवाल किया,,,,

नही मुझे नही पता था,,,लेकिन जहाँ से सुमित अपने नशे का समान लेके आता था उसी एरिया

मे कुछ लोगो से पता चला था कि सुमित का घर कहाँ है,,,इसलिए मैं उसके घर की

तलाशी लेने चला गया था,,,,और वहाँ मुझे वो सीडीज़ मिल गयी थी,,,

वैसे अगर आप लोगो को सुमित की कोई खबर चाहिए तो आपको भी उसी जगह जाना चाहिए

जहाँ से वो नशे का समान लेके आता है,,,,शायद कोई दोस्त या जान पहचान वाला मिल जाए

सुमित का,,,,

मेरी बात सुनके अमित और सुरेश चुप हो गये और कॉफी पीने लगे,,

जब अमित और सुरेश की कॉफी ख़तम हुई वो लोग वहाँ से चले गये,,अमित गुस्से से कॅंटीन

वाले को बोलता गया,,,,,ओई छोटू सन्नी भाई का बिल भी मेरे अकाउंट मे डाल देना,

अमित की बात पर कॅंटीन वाला थोड़ा गुस्सा हो गया,,,,,,

मेरी कॉफी भी ख़तम हो गयी और मैं कॅंटीन वाले के पास चला गया,,,,,देखा भाई साले

भिखारी को,,,अपना पैसा दिया नही जाता और बोल रहा था आपका बिल भी उसके आकाउंट मे डालने

को,,,,,

तभी मैने पर्स मे से पैसे निकाले और उसको दे दिए,,,,,

चल ये पकड़ पैसे और गुस्सा थूक दे,,,सोच लेना किसी कुत्ते को महीना भर रोटी खिला

दी थी तूने,,,,,मेरी बात से कॅंटीन वाला खुश हो गया,,,,

लेकिन भाई मैं आपसे पैसे कैसे ले सकता हूँ मैं तो पहले से आपका क़र्ज़दार हूँ,,

वो क़र्ज़ा ऐसे ही खड़ा रहने दे वो अलग बात है और ये तेरी कॅंटीन के बिल का पैसा है

सो इसका हिसाब अलग है,,चल अब पैसे पकड़ वरना मैं तेरी कॅंटीन से कॉफी नही

पीऊँगा कभी,,,,,मेरी बात सुनके उसने चुप चाप पैसे पकड़ लिए

मैं वापिस आके उसी टेबल पर बैठ गया,,,क्यूकी ज़्यादा कुछ करने को था नही आज कॉलेज

मे ,,,,तभी सोनिया और कविता भी कॉलेज आ गयी,,,

कहाँ था तू 2 दिन से,,घर क्यूँ नही आया,,,पता है मैं कितनी परेशान हो गयी थी,,,ये

बात सोनिया ने गुस्से मे बोली और मेरे पास बैठ गयी,,,

वो मैं किसी दोस्त के घर पर था,,,

जूथ मत बोल,,,,करण के अलावा और कोई दोस्त नही तेरा और करण तो खुद घर पे नही है

कल उसके घर पर लॉक लगा देखा था हम लोगो ने,,,,और वैसे भी तू मेरे साथ तो झूठ

बिल्कुल भी मत बोला कर तुझे पता है मैं तेरा झूठ पल भर मे पकड़ लेती हूँ,,,

अरे बाबा ,,अच्छा,, अछा,,मैं दोस्त के घर पे नही था,,होटेल मे था,,,अब खुश

होटेल मे क्यूँ,,घर नही आ सकता था तू,,,,अब गुस्सा करने की बारी कविता की थी,,,क्या वो

तेरा घर नही जो तुझे होटेल मे रुकना पड़ा,,,,

अरे बाबा माफ़ करदो अब क्या बच्चे की जान लोगि तुम दोनो,,,मैं तो सूरज भाई और कामिनी

भाभी की बातों से बचने के लिए घर नही आया,,,,

ओह्ह सही कहा सन्नी,,,,मेरा भी दिमाग़ खा गये वो लोग सवाल पूछ पूछ कर,,,,अच्छा बता

नाश्ता किया या नही,,,,

हाँ अभी करके हटा हूँ,,,तुम लोग कुछ लोगि क्या चाइ या कॉफी

नो थॅंक्स्क्स्क्स सन्नी,,,हम घर से नाश्ता करके आई है,,,,

वैसे ब्लॅकी अगर नाश्ता हो गया हो तो क्या क्लास मे चले,,या आज यहीं बैठकर टाइम पास

करना है,,,,,ये बात बोली सोनिया ने हंसते हुए तो कविता भी हँसने लगी

नही मुझे नही जाना क्लास मे तुम दोनो जाओ,,,,तभी सोनिया उठी और वहाँ से चली गयी जबकि

कविता बैठी रही मेरे पास,,,,,

तूने नही जाना क्या क्लास मे,,,,मैने कविता से पूछा,,,,

जाना तो है सन्नी लेकिन मुझे तेरे से कुछ बात करनी है,,,,वो मैं वो,,,

मैं जानता हूँ तूने क्या बात करनी है,,,तुझे लगता होगा कि सोनिया भी मेरे से प्यार करती

है तो शायद मैं तुमको भूल जाउन्गा या उतना प्यार नही करूँगा जितना पहले करता था तो

तुम मेरी एक बात कान खोल कर सुन लो,,,मैं तुमसे भी उतना ही प्यार करता हूँ जितना कि

सोनिया से करता हूँ,,ये बात मुझे भी थोड़ी परेशान ज़रूर करती है कि अब क्या होगा मेरा

लेकिन मैं दिमाग़ पर टेन्षन नही डालता,,,तुम भी टेन्षन को दिमाग़ से निकाल दो और सब कुछ

टाइम पर छोड़ दो,,और सबसे बड़ी बात मेरे पर यकीन करो,,,,

मुझे तेरे पर पूरा यकीन है सन्नी,,,और मैं ज़रा भी परेशान नही हूँ,,,मैं तो बस ये

चाहती हूँ कि जो भी हो अच्छा हो,,किसी को किसी की वजह से कोई दुख ना हो,,तुझे तो पता

है हम लोग बचपन के दोस्त है,,,,जो भी हो हम लोगो की दोस्ती ख़तम नही होनी चाहिए

कभी,,,,,

ओके अब मैं चलती हूँ वो देख सोनिया दूर से खड़ी होके मुझे घूर रही है,,कविता के

बोलने पर मैने पीछे मूड के देखा तो सोनिया दूर खड़ी हम लोगो को ही देख रही थी

कविता उठकर जाने लगी तभी ना जाने मुझे क्या हुआ मैं भी उठ कर खड़ा हो गया और कविता

का हाथ पकड़ लिया,,,,

कविता थोड़ा डर गयी,,,ये क्या कर रहे हो सन्नी,,,छोड़ो मेरा हाथ सब लोग देख रहे है

,,हम कॉलेज मे है भूलो मत तुम,,,,

कॉलेज मे हूँ तभी तो हाथ पकड़ा है ,,,,कहीं अकेले मे होता तो कुछ और ही पकड़ लेता

कविता शरमा गयी,,,,छोड़ो बाबा मुझे शरम आ रही है देखो सब लोग घूर रहे है

सन्नी,,,प्ल्ज़्ज़ छोड़ो मुझे,,,,

अपने बाय्फ्रेंड के साथ खड़ी होके तुझे लोगो के देखने पर शरम आ रही है या सोनिया के

देखने से,,,,,,,

वो मैं वो ,,,नही सन्नी,,,,

उस से कुछ बोला नही गया तभी मैने उसको अपने करीब खींच लिया और गले से लगा लिया

वो एक दम सकपका गयी थी मेरी इस हरकत से,,,,देख तू मेरी गर्लफ्रेंड है और इस बात का अगर

लोगो को पता चलता है तो अच्छी बात है ना,,अब भला कब तक हम लोग छुप छुप कर मिलते

रहेंगे,,,,एक ना एक दिन तो सबको पता चलना ही है,,तो आज क्यूँ नही,,,पता लगने दो सबको

कि हम दोनो का चक्कर है,,

अच्छा बाबा लेकिन छोड़ो अब मुझे क्लास मे जाने को देर हो रही है,,सोनिया मेरा खून पी

जाएगी अगर मेरी वजह से क्लास मे लेट हो गयी,,,देखो वो अभी भी हम लोगो को ही देख

रही है,,,,,

 
मैने पीछे मूड कर देखा तो सोनिया खुश लग रही थी,,,तभी कविता ने आगे बढ़कर मेरे गाल

पर हल्की किस करदी और वहाँ से भाग गयी और जाते जाते बोलके गयी,,,,,तू मेरा बाय्फ्रेंड वाय्फ्रेंड कुछ

नही है ब्लॅकी ये बात सपने मे भी नही सोचना,,,,

मैं उसकी बात पे हँसने लगा और वो भी सोनिया के करीब जाके खुश होके मुझे देख रही थी

साथ मे सोनिया भी बहुत खुश थी,,,,फिर वो दोनो गयी क्लास मे और मैं वहीं बैठा रहा

टाइम पास करता रहा,,,,

तभी मुझे ख़ान भाई का फोन आया और मैने बात की उनसे,,,,उन्होने मुझे किसी से मिलने को

बोला और मैं कॉलेज से चल पड़ा उस शक्स को मिलने,,,,

मैं कार लेके चल पड़ा ख़ान भाई की बताई हुई जगह पर,,,ये जहग थी एक पॉलिटीशियन

का ऑफीस जो अमित के बाप की अपोजीशन पार्टी का लीडर था,,,,अमित के बाप का दुश्मन

था ये,,हालाकी अमित के बाप के बारे मे हमेशा कोई ना कोई बुरी खबर छपती ही रहती

थी अख़बार मे लेकिन इन जनाब के बारे मे कोई बुरी बात नही सुनी थी आज तक,,,यही सुना

था कि ये बहुत सॉफ सुथरे मंत्री है और लोगो की हेल्प क लिए हमेशा आगे रहते है शायद

इसलिए ख़ान भाई ने मुझे इनको मिलने को बोला था ताकि हम अपने दुश्मन के दुश्मन से हाथ

मिला ले ,,,,,,,,,,

मैं उसके घर के बाहर पहुँच गया और ख़ान भाई के बताए हुए नंबर पर फोन किया तो

सामने से एक लेडी से बात हुई मेरी,,,लेडी से बात करके फोन कट किया तो गेट पर खड़ा

हुआ एक आदमी मुझे अपने साथ अंदर ले गया,,,मैं चलते हुए इधर उधर देख रहा था ये

जगह भी बॉडी गार्ड्स से भरी हुई थी,,,,तभी वो आदमी मुझे एक ऑफीस मे ले गया,,

दरवाजा खुलते ही मैने देखा कि अंदर चेयर पर एक औरत बैठी हुई थी,,जो उमर मे कोई

35-40 के आस पास थी ,,,गोरा रंग था उसका,,बालों का जुड़ा किया हुआ था,,वाइट रंग की

साड़ी को बहुत ही सिंपल तरीके से बाँध रखा था उसने,,,ज़्यादा मेक-अप भी नही किया हुआ

था,,हल्की गुलाबी रंग की लिपस्टिक लगाई हुई थी बस,,,,

मेरे अंदर जाते ही उसने चेयर से उठकर मेरा वेलकम किया और मुझे सामने पड़ी चेयर पर

बैठने को बोला,,,,

मैं उसके सामने वाली चेयर पर बैठ गया और वो अपनी चेयर पर वापिस बैठ गयी,,,

तो तुम हो सन्नी जिसके बारे मे इनस्पेक्टर ख़ान ने बात की थी,,मेरा नाम मधु है,,

हेलो मधु मेडम,,, जी मेडम मेरा नाम सन्नी है और मुझे ख़ान भाई ने भेजा है,,,,

इनस्पेक्टर ख़ान तुम्हारे भाई है क्या,,,,उसने थोड़ा हैरान होते हुए पूछा,,,,,

जी नही लेकिन भाई से कम भी नही है,,,,दरअसल हम लोग एक ही रास्ते पर चल रहे है

और हम लोगो की मंज़िल भी एक है,,,तो साथ साथ सफ़र का मज़ा लेने क लिए हम लोग कुछ

ज़्यादा ही करीब हो गये है,,और अच्छे दोस्त बन गये या आप कह सकती हो अच्छे भाई बन गये,,

ये तो बहुत अच्छी बात है,,,,अच्छा अब ये बताओ कि तुम्हारे पास ऐसी क्या चीज़ है जिस से

तुम मिस्टर सेठी को कुर्सी से उतार सकते हो और मिट्टी मे मिला सकते हो,,,,,

( मिस्टर,सेठी अमित का बाप)

जी क्या बोला आपने मैं कुछ समझा नही,,,,कैसी कुर्सी और किसको मिट्टी मे मिलाना है,,,

अरे तुम्हारे पास कोई जानकारी है ना मिस्टर सेठी के खिलाफ ,,इनस्पेक्टर ख़ान ने बोला था मुझे

कि तुम लोगो को हमारी हेल्प चाहिए मिस्टर सेठी के खिलाफ,,,तुम कोई केस करने वाले हो मिस्टर सेठी

पर ,, ख़ान और तुमको लगता है कि सेठी अपनी पॉवेर और पैसे से जड्ज को खरीद सकता

है इसलिए ख़ान ने मुझे फोन किया था और बोला कि तुम लोगो को हम लोगो की हेल्प चाहिए

जी सही बात बोली आपने ,,,हम लोगो को आपकी हेल्प चाहिए,.,,,लेकिन हम लोगो के पास सेठी

के खिलाफ कोई सबूत नही है हम लोगो के पास सेठी के बेटे अमित के खिलाफ सबूत है

ख़ान भाई ने पूरी बात तो बताई होगी ना आपको,,

नही ख़ान ने कुछ नही बताया मुझे बस इतना बोला कि तुम मेरे पास आओगे और तुम ही बात

करोगे मुझसे,,,,,लेकिन ख़ान ने इतना बोला था कि इस से सेठी की कुर्सी भी जा सकती है

जी इतना तो नही पता मुझे लेकिन अपने बेटे अमित की वजह से वो लोगो मे बदनाम ज़रूर हो

जाएगा,,,,,बाकी कुर्सी जाएगी उसकी ये नही ये तो आप लोगो को बेहतर पता होगा,,,,

अच्छा तो बताओ क्या सबूत है तुम्हारे पास सेठी के बेटे के खिलाफ,,,ज़रा खुल कर बताओ

पता तो चले,,,,,

जी मेडम बताता हूँ,,,,,,,,आपको तो पता ही होगा कुछ महीने पहले ------- कॉलेज मे 2

लड़कियों ने ख़ुदकुशी की थी,,,मैं उसी कलाज का स्टूडेंट हूँ,,और सेठी का बेटा भी

उसी कॉलेज मे है,,,,,उन लड़कियों ने ख़ुदकुशी की थी सेठी के बेटे अमित से दुखी होके

लेकिन सेठी ने अपनी पवर का इस्तेमाल किया और प्रिन्सिपल के साथ मिलकर ये साबित कर दिया

था कि लड़कियाँ अपनी स्टडी की टेन्षन से दुखी थी तो उन्होने ख़ुदकुशी करली,,,पोलीस भी

कुछ नही कर पाई क्यूकी प्रिन्सिपल भी सेठी का चमचा है क्यूकी सेठी कॉलेज ट्रस्ट

फंड का चेर्मन है,,,बहुत पैसा दिया है उसने कॉलेज को और हमारे प्रिन्सिपल को भी,,,

लेकिन मेरे पास ऐसा सबूत है जिस से साबित हो जाएगा कि लड़कियों की ख़ुदकुशी की वजह

स्टडी नही बल्कि वो टॉर्चर था जो सेठी का बेटा करता था उनके साथ,,,,सेठी के बेटे ने

अपने दोस्तो के साथ मिलकर उन लड़कियों का रेप किया और फिर मरने पर मजबूर किया,,,क्यूकी

अगर वो ना मरती तो रोज उनका रेप होता ,,,ऐसी ज़िल्लत की ज़िंदगी गंवारा नही थी उन

लड़कियों को इसलिए उन लड़कियों ने ख़ुदकुशी करली,,,

मधु मेडम काफ़ी देर मेरी बात को ध्यान से सुनती रही फिर बोली,,,,अच्छा ऐसा क्या सबूत

है तुम्हारे पास कि जिस से तुमको लगता है तुम सेठी के बेटे को गुनहगार साबित कर सकते

हो,,,,क्यूकी वो लोग बहुत पवरफुल लोग है,,,उनसे जंग करो तो अपने हाथ मे एक से बढ़ कर एक

हथियार रखने होंगे तुमको,,,

अपने सही कहा मधु मेडम,,,,वो लोग बहुत पवरफुल है ,,,लेकिन मेरे पास जो हथियार है

उन लोगो के खिलाफ वो उन लोगो की पॉवर को मिट्टी मे मिला देगा,,,,,

अच्छा ऐसा कॉन्सा हथियार है तुम्हारे पास ,,,,ज़रा मुझे भी दिखाओ,,,पता तो चले कि

एक कॉलेज का स्टूडेंट किस हथियार की बदोलत इतनी बड़ी जंग लड़ने की तैयारी कर रहा है

मेरे पास उस रेप की वीडियो है मधु मेडम,,,और सेठी के बेटे का अपने दोस्त के साथ किया

हुआ इक़बालिया ज़ुल्म का वीडियो भी है

मेरी बात सुनके मधु का मुँह खुला का खुला रह गया,,,कुछ देर वो सोच मे पड़ गयी फिर

बोली,,,,कहाँ है वो वीडियो दिखाओ मुझे,,,,मैं अभी जाके मंत्री जी को दिखाती हूँ ,,वो

कुछ एग्ज़ाइट हो गयी थी,,,,,

इतनी भी क्या जल्दी है मधु मेडम,,,,और वैसे भी मैं आपको वो वीडियो दिखा सकता हूँ

लेकिन दे नही सकता,,,,मैने सॉफ लफ़ज़ो मे मना किया तो वो थोड़ा गुस्से हो गयी और मुझे

घूर्ने लगी,,,,

क्यूँ नही दे सकते मुझे वो वीडियो,,,क्या तुमको हम लोगो पर यकीन नही है क्या,,,,

जी नही मधु मेडम,,,मुझे आप लोगो पर बिल्कुल भी यकीन नही है,,,,आख़िर आप लोग भी

तो राजनीति के गंदे खेल मे शामिल हो,,,ये बात और है कि आपके मंत्री जी के बारे मे आज

तक कोई ग़लत खबर नही सुनी मैने कभी लेकिन फिर भी मैं आप लोगो पर यकीन तो नही

कर सकता ना,,,,वो कहते है ना,,,,साँप सामने हो और मंत्री तो पहले मंत्री को मारो क्यूकी

साँप का तो पता नही आपको डस्ता है या नही लेकिन मंत्री तो आपको ज़रूर डसेगा,,,,

अगर ऐसी बात है तो क्यूँ आए तुम यहाँ अगर हम लोगो पर यकीन नही तुमको,,,किसी और

की हेल्प क्यू नही लेते ,,,,,

ख़ान भाई की वजह से आया हूँ मैं यहाँ,,क्यूकी उनको आप लोगो पर यकीन है,,,वरना मैं

कभी नही आता,,,और वैसे भी जो सबूत है मेरे पास उनको लेके किसी भी दूसरी पार्टी के

मंत्री के पास चला जाउ तो वो हँसके मेरी हेल्प करने को तैयार हो जाएगा क्यूकी अमित को

सज़ा तो होके रहेगी और अमित की वजह से सेठी भी अपनी कुर्सी से हाथ धो बैठेगा और इस

सब से दूसरी पार्टी को बहुत फ़ायदा होगा,,,,,आपको हेल्प नही करनी तो ना सही,,,ओके मैं फिर

चलता हूँ फालतू मे आपका और अपना टाइम खराब किया मैने,,,,

मैने इतना सब कुछ अकड़ मे बोला और वहाँ से जाने लगा,,,,मैं झूठ मूठ ही वहाँ से

जाने लगा था क्यूकी मुझे इन लोगो की हेल्प की बहुत ज़रूरत थी,,मैं तो बस फालतू मे थोड़ा

नखरा कर रहा था,,,,

 


अरे अरे कहाँ चले,,,,तुम बिल्कुल वैसे ही निकले जैसा ख़ान ने बोला था,,,मैं तो बस

मज़ाक कर रही थी देख रही थी ख़ान ने जो बताया था तुम्हारे बारे मे तुम वैसे हो भी

या बस फालतू मे ख़ान तुम्हारी तारीफ कर रहा था,,,,

अच्छा ,,तो क्या सोचा अपने,,,ख़ान भाई ठीक थे मेरे बारे मे या ग़लत,,,,

100% सही था ख़ान तुम्हारे बारे मे,,,,मैं तुम्हारे साथ मज़ाक कर रही थी सन्नी,,लेकिन

तुमको हमारा यकीन करना होगा,,,,अगर हम लोगो की हेल्प चाहिए तो यकीन करना पड़ेगा

हम लोगो पर,,,जानती हूँ आजकल की दुनिया मे राजनीति करने वालो का यकीन करना मुश्किल

है लेकिन सब लोग एक जैसे नही होते सन्नी,,,,,,,जैसे तुम अमित को सज़ा दिलवा कर अपने

कॉलेज और कॉलेज की लड़कियों को अमित से छुटकारा दिलवाना चाहते हो वैसे ही हम लोग

सेठी को इस पॉलिटिक्स की दुनिया से दूर करना चाहते है क्यूकी वो अपनी पवर का ग़लत यूज़

करता है,,,,हम दोनो का मक़सद एक ही है सन्नी,,,,,तुम वो वीडियो मुझे नही दे सकते लेकिन

मुझे दिखा तो सकते हो ना,,,,,

जी ज़रूर दिखा सकता हूँ,,,जब भी आप बोलो,,,,,,

क्या अभी दिखा सकते हो,,,,,,

वो वीडियो मेरे लॅपटॉप मे थी और लॅपटॉप अभी मेरे पास था लेकिन मैं इतनी जल्दी नही करना

चाहता था इसको वीडियो दिखाने मे ,,,

जी अभी तो नही दिखा सकता क्यूकी वो वीडियोस मेरे पास नही है अभी ,,,किसी महफूज जगह

पर है,,,लेकिन जब भी आप बोलो मैं वीडियोस आपको दिखा दूँगा,,,,

तो ठीक है,,,,,अभी तुम जाओ मैं मंत्री जी से बात करके तुमको बता दूँगी,,,उसने इतना

बोला और अपनी कुर्सी से खड़ी हो गयी,,,,फिर मेरी तरफ हाथ बढ़ाया और मैं भी उस से हाथ

मिलाकर दरवाजे की तरफ बढ़ने लगा,,,

एक मिंट रूको सन्नी,,,,तुम ये सब बात करने यहाँ आए हो इस ऑफीस मे ये सब बात तो ख़ान

मेरे साथ फोन पर भी कर सकता था,,,,मुझे तो लगा था तुम सबूत लेके आओगे,,,

मैं सबूत साथ मे लेके नही घूमता मधु मेडम,,,,और ख़ान भाई आपको पूरी बात नही

बता सकते थे,,,,,,,,,,,,क्यूकी मरने वाली लड़कियों मे से एक लड़की ख़ान भाई की बेहन

थी,,,,,

मेरी बात सुनके मधु का मुँह खुला का खुला रह गया,,,,,,वो कुछ नही बोल सकी,,,,और मैं

दरवाजा खोलके ऑफीस से बाहर आ गया,,,,,,,,

वहाँ से कार लेके चला ही था कि मुझे कविता का फोन आ गया,,,,मैने फोन पर बात

करनी शुरू की तो पीछे से मुझे सोनिया की आवाज़ आ रही थी जो किसी से बहस कर रही थी

किसी बात पर,,,

हेलो सन्नी कहाँ हो तुम ,,,जल्दी से अपने घर आ जाओ,,,वो थोड़ी परेशान लग रही थी

क्या हुआ कविता इतनी परेशान क्यूँ हो,,,,और ये पीछे से सोनिया की आवाज़ आ रही है किस से

झगड़ा कर रही है वो,,,,

किसी से नही तुम बस जल्दी से अपने घर आ जाओ,,,,इतना बोलकर कविता ने फोन काट दिया

मैं भी थोड़ा परेशान हो गया क्यूकी कविता भी परेशान थी,,,मैं तेज़ी से कार चलाता हुआ

घर की तरफ चल पड़ा,,,,,

घर पहुँचा तो देखा कि सोनिया पोलीस वालो से बहस कर रही थी ,,,,जो पोलीस वाले घर

की निगरानी कर रहे थे,,,,

मैं कार से उतर कर सोनिया के पास गया तो सोनिया घर के अंदर जाने की कोशिश कर रही

थी जबकि वो लोग उसको अंदर नही जाने दे रहे थे,,,,

अरे हमारा घर है और हम लोग अंदर क्यूँ नही जा सकते,,,,सोनिया गुस्से से बोल रही थी उन

लोगो को,,,,

देखिए मेडम अभी जाँच-पड़ताल बाकी है जब तक हम लोगो का काम पूरा नही हो जाता हम

आपको अंदर नही जाने दे सकते,,हम लोगो को उपर से ओरडर है,,हम कुछ नही कर सकते,,

लेकिन सोनिया उनकी बात नही सुन रही थी,,,,क्या करती वो है ही इतनी ज़िद्दी,,,,

तभी मैने ख़ान भाई को फोन किया ,,पहले तो दूर हटके वो सारी बात बताई जो मधु के

ऑफीस मे हुई फिर सोनिया और पोलीस वालो की बहस के बारे मे बताया,,,ख़ान भाई ने मुझे

फोन उन पोलीस वालो को देने को बोला,,,,

उन लोगो ने ख़ान भाई से बात की और हम लोगो को अंदर जाने दिया,,,,

ख़ान भाई ने मुझे बता दिया था कि पोलीस अपना काम कर चुकी है और फ़ौरेंसिक टीम ने भी

अपना काम ख़तम कर लिया है,,,,,अब हम लोग घर के अंदर जा सकते है,,,क्यूकी जो भी

जाँच पड़ताल थी वो उसी जगह पर ज़्यादा थी जहाँ खून गिरा हुआ था जबकि घर के

अंदर से कुछ ज़्यादा सबूत नही मिले थे,,,,क्यूकी अंदर बस चोरी हुई थी और कुछ नही,,

हम लोग घर के अंदर चले गये ,,,,

तभी अंदर जाके कविता मुझसे बोली,,,थॅंक्स सन्नी तू आ गया ये सोनिया की बच्ची ने तो नाक

मे दम किया हुआ थे मेरे,,,मैं कब्से बोल रही थी कि पोलीस वालो से बहस मत कर लेकिन

ये थी कि मेरी बात ही नही सुन रही थी

तो क्यूँ ना करती बहस मैं,,,,हम लोगो का घर है और वो हम लोगो को ही अंदर नही जाने

दे रहे थे,,,,सोनिया थोड़ी गुस्से मे बोली और आगे चलके घर मे घुस गयी,,

मैने कविता को चुप रहने का इशारा किया क्यूकी अगर हम लोग ज़्यादा बोलते तो सोनिया ने हम

लोगो पर सारा गुस्सा उतार देना था,,,

सोनिया अंदर गयी और घर की हालत देख कर और ज़्यादा गुस्से मे आ गयी ,,,,एक बार मुझे

मिल जाए वो लोग जिन्होने मेरे घर की ऐसी हालत की तो कसम से जान ले लूँगी उनकी,देखो

तो ज़रा क्या हालत करदी हमारे घर की,,,,कीड़े पड़े उन लोगो को,,कुत्ते की मौत मरे वो

लोग,,,,

सोनिया गुस्से मे बोल रही थी और मैं और कविता उसको देख कर हंस रहे थे,,,,तभी सोनिया

का ध्यान हम लोगो की तरफ आया तो हम लोग चुप हो गये,,,,

ऐसे हंसस क्या रहे हो तुम दोनो,,,,चलो मेरी हेल्प करो,,,,,

कविता==========हेल्प ?? कैसी हेल्प???

सोनिया,,,,अरे घर को ठीक करने मे और भला क्या हेल्प चाहिए मुझे तुम लोगो से,,

तभी कविता मेरे से बोली,,,,,सन्नी क्या हम ऐसा कर सकते है,,,समान को हाथ लगा सकते

है,,,क्या पोलीस वाले,,,,,

वो अभी बोल ही रही थी कि मैं बीच मे बोल पड़ा,,,,,,हां कविता मेरी ख़ान भाई से बात

हो गयी है हम लोग समान को हाथ भी लगा सकते है और यहाँ रह भी सकते है अब,,

मैं यहाँ रहना तो नही चाहता था लेकिन कॉलेज मे अमित और सुरेश ने काफ़ी हद तक ठीक

ढंग से बात की थी मेरे साथ इसलिए मुझे नही लगता था हम लोगो को यहाँ रहने मे कोई

ख़तरा हो सकता है,,,,वैसे भी घर वाले तो दूर है महफूज है ,,,अगर कोई ख़तरा हुआ

भी तो मुझे सिर्फ़ सोनिया को बचाने का काम करना होगा जो काम मैं अपनी जान देके भी कर

सकता हूँ,,,,,

जब मैने कहा कि हम लोग यहाँ रह सकते है तो सोनिया खुश हो गयी और लग गयी घर की

हालत को ठीक करने ,,कविता भी उसकी हेल्प करने लगी,,,,

ओये तू क्यूँ बुत बनके खड़ा हुआ है ब्लॅकी चल तू भी हाथ लगा और हेल्प कर घर की सफाई

करने मे,,,,,,

नही अभी नही मुझे बहुत भूख लगी है पहले कुछ खिलाओ मुझे तभी कुछ काम कर सकता

हूँ मैं,,,,वैसे भी लंच टाइम हो गया है,,,,

तभी कविता बोली,,,,,,,,,ठीक है सन्नी मैं किचन का समान ठीक करती हूँ और फिर

खाना भी पका देती हूँ तुम तब तक सोनिया के साथ मिलकर नीचे वाले फ्लोर की हालत ठीक

करदो,.,,,,,

मैं और सोनिया मान गये और चले गये मोम और डॅड के रूम मे,,,,कविता चली गयी किचन मे

वैसे भी किचन मे ज़्यादा नुकसान नही हुआ था,,,कुछ बर्तन ही इधर उधर ज़मीन पर

पड़े हुए थे,,,,,,

 
कविता किचन मे समान को अपनी जगह पर रखकर खाना पकने की तैयारी करने लगी जबकि

मैं और सोनिया मों दाद के रूम मे जाके वहाँ के सामान को ठीक करके रखने लगे,,पहले तो

हम लोगो ने सभी कपड़े उठाकर अच्छी तरह से तह लगा कर एक तरफ रख दिए और फिर रूम

मे जो समान टूट गया था उसको उठाकर बाहर गेट के पास रख दिया,,,हम लोग बाहर गये तो

देखा कि बाहर जो पोलीस वाले ड्यूटी कर रहे थे अब वो लोग वहाँ नही थे,,,,

हम लोग काफ़ी टाइम से रूम की सफाई कर रहे थे इसलिए पसीने से भीग गये थे जब मोम

और डॅड का रूम ठीक तरह से सेट हो गया जिसमे हमे 1 अवर से भी ज़्यादा का टाइम लग गया

था ,,फिर हम लोग नीचे के दूसरे रूम मे चले गये जो रूम मामा का था,,,

( मतलब विशाल का था )

वो रूम स्टोर रूम भी था इसलिए वहाँ कुछ ज़्यादा समान पड़ा हुआ था,,,हम लोगो को इतना

काम करने की आदत नही थी खांसकार सोनिया को तो बिल्कुल भी नही ,,,,वो तो किचन मे भी

कोई काम नही करना जानती थी ,,,बस माँ के साथ मिलकर कभी सब्जी काट देती थी,,जबकि

कविता को किचन का सारा काम आता था,,,

हम लोगो का पूरा बदन पसीने से भीग गया था,,,हालाकी सर्दी का मौसम शुरू हो गया था

और हम लोगो को जब गर्मी का एहसास हुआ तो हम लोगो ने एसी भी ऑन कर लिया था लेकिन फिर

भी इतनी मेहनत करते हुए हम लोगो को पसीना आ ही रहा था,,,यहाँ पर समान जो इतना

ज़्यादा था कि ज़्यादा मेहनत करनी पड़ रही थी,,,,मेरा तो ठीक था लेकिन सोनिया थक गयी

थी वो बड़ी आराम से काम कर रही थी ,,मुझे ज़्यादा गर्मी लग रही थी इसलिए मैने अपनी

टी-शर्ट निकाल दी,,,मेरे ऐसे करने से सोनिया ने एक बार मुझे घूर कर देखा और जब मैने

इशारा किया अपने जिस्म पर आए हुए पसीने की तरफ तो वो समझ गयी कि गर्मी की वजह से

मैने टी-शर्ट उतारी है,,,मेरी टी-शर्ट उतर गयी थी और मैं खूब मेहनत कर रहा था अब

तो ज़्यादा ही मेहनत करनी पड़ रही थी मुझे क्यूकी सोनिया जो थक गयी थी,,,,

तभी मैं और सोनिया ज़मीन पर गिरी हुई एक लोहे की अलमारी को ज़मीन से उठाकर वापिस उसकी

जगह पर खड़ी कर रहे थे,,,,सोनिया थक कर चूर हो गयी थी थोड़ी ही देर मे इसलिए

उस से अब ज़्यादा ज़ोर नही लगाया जा रहा था,,,सारा ज़ोर मुझे ही लगाना पड़ रहा था लेकिन

मेरे अकेले के लिए इस अलमारी को उठाना मुमकिन नही था फिर भी मैने अपनी तरफ से अलमारी को

उठा लिया लेकिन सोनिया को मुश्किल हो रही थी वो ज़्यादा ज़ोर नही लगा पा रही थी,,तभी

मैने हल्के गुस्से से उसको देखा और इशारा किया कि वो भी ज़ोर लगाए क्यूकी अलमारी का सारा

वजन मेरे हाथों पर ही था वो तो बस अलमारी को पकड़ कर खड़ी हुई थी,,,मेरे से अलमारी

को संभालना मुश्किल हो रहा था इसलिए मैं उसको इशारा कर रहा था कि वो भी थोड़ा ज़ोर

लगाए लेकिन उस से ज़ोर नही लग रहा था,,हार कर मैने अलमारी को वापिस ज़मीन पर रख

दिया और सोनिया ने भी अलमारी के वापिस ज़मीन पर आने से चैन की साँस ली,,,तभी एक दम से

वो मेरी तरफ देखकर हँसने लगी,,,,,और हंसते हुए ज़मीन पर बैठ गयी,,,,

क्या हुआ तुझे,,, हँसने क्यूँ लगी एक दम से ,, पागल हो गयी है क्या,,,,,

नही भाई मैं तो तेरी हालत पे हंस रही हूँ ,,,कितनी मुश्किल हो रही थी तुझे अलमारी

को थामने मे ,,,और मुझसे तो थोड़ा सा भी ज़ोर नही लग रहा था इतनी ज़्यादा थक गयी हूँ

मैं,,,इतना बोलकर वो फिर से हँसने लगी,,,,

तो इसमे हँसने की क्या बात है,,,मैने थोड़ा अकड़ते हुए बोला,,,चल उठा बहुत काम बाकी

है अभी,,,

लेकिन वो मेरी बात नही सुन रही थी बस हँसती जा रही थी,,,,

क्या हो गया तुझे पागल तो नही हो गयी,,,बिन वजह क्यूँ हंस रही है,,,

पता नही भाई,,,,बहुत हँसी आ रही है मुझे एक दम से,,,वो हँसती जा रही थी ,,,,

अच्छा अच्छा हंसले ,,,,वैसे भी तू पागल है और बिन वजह हँसने वाले को पागल ही समझते है

लोग,,,,,हंसले जितना हँसना है,,,,काम तो बाद मे भी हो जाएगा,,,,,

मेरे इतना बोलने से वो कुछ देर चुप हुई और वापिस फिर से हँसने लगी,,,,,

अब क्या हो गया ,,एक पल के लिए चुप हो गयी थी और फिर से हँसने लगी,,,सच मे पागल हो

गयी है तू,,,,

हाँ हां जानती हूँ पागल हो गयी हूँ ,,तभी तो हंस रही हूँ,,,तू भी हंस लिया कर

सन्नी कभी कभी,,,,इतना बोलकर वो हँसती जा रही थी,,,,

ना मुझे कोई शॉंक नही बिन वजह हँसने का मैं तेरी तरह पागल नही हूँ,,,

मैने उसको वापिस पागल बोला तो वो ज़मीन से उठकर खड़ी हो गयी,,,,अच्छा मैं पागल हूँ जो

हंस रही हूँ अभी रुक तुझे भी पागल करती हूँ मैं,,,इतना बोलकर वो मेरे पास आ गयी

और इस से पहले मैं उसको रोकता उसने मेरी कमर पर गुद-गुदि करनी शुरू करदी,,मेरे जिस्म

पर टी-शर्ट नही थी इसलिए मुझे ज़्यादा ही गुद-गुदि हो रही थी,,उपर से सोनिया खुद भी

खिल-खिला कर हंस रही थी तो मुझे भी बहुत हँसी आने लगी,,,,वो खुद भी हँसती जा रही

थी और मुझे भी गुद-गुदि करके हंसा रही थी,,,,हम दोनो ही पागल हो गये थे,,,

तभी मुझे कुछ ज़्यादा ही गुद-गुदि होने लगी तो मैं थोड़ा पीछे हटने लगा ,,मेरे पीछे

एक मॅट्रेस ज़मीन पर पड़ा हुआ था,,,मैं पीछे हटने लगा सोनिया की गुद-गुदि से बचने

के लिए और साथ मे सोनिया भी आगे होने लगी ताकि मुझे गुद-गुदि कर सके,,जैसे ही मैं थोड़ा

पीछे हटा मेरा पैर मॅट्रेस से टकरा गया और मैं बेक़ाबू होके पीछे की तरफ गिर गया

मैने खुद को गिरने से बचाने के लिए सोनिया का हाथ पकड़ लिया वैसे भी मैं उसके हाथों

को अपने जिस्म से दूर करने की और गुद-गुदि से बचने की कोशिश कर रहा था,,,

मैने गिरते हुए सोनिया का हाथ पकड़ लिए और एसा करने से सोनिया भी मेरे साथ गिर गयी,मैं

मॅट्रेस के उपर पीठ के बल गिरा जबकि सोनिया मेरी छाती पर पेट के बल गिर गयी,,गिरने

के बाद भी वो हँसती जा रही थी,,उसका सर मेरी नंगी और पसीने से भीगी हुई छाती पर

टिका हुआ था और वो हँसती जा रही थी,,,उसके हाथ भी मेरी नंगी छाती पर थे,, कुछ

देर हँसने के बाद जब उसको एहसास हुआ कि वो मेरे जिस्म पर गिरी हुई है तो उसने अपने सर

को मेरी छाती से उपर उठा लिया और मेरी तरफ देखने लगी,,,,अभी भी उसके चहरे पर

हल्की हल्की मुस्कान थी,,,वो मुस्कुराती हुई मेरी तरफ देखने लगी और फिर मेरी छाती से

अपना सर उठकर मेरी छाती की तरफ,जब उसको एहसास हुआ कि वो मेरी नंगी छाती से चिपकी

हुई है तो उसकी हँसी रुक गयी,,,मुस्कान भी उसके चहरे से उड़ गयी एक दम से,,उसने कुछ पल

के लिए मेरी नंगी छाती को देखा और फिर मेरे चहरे की तरफ देखने लगी,,,वो थोड़ी डर

गयी परेशान वो गयी खुद को ऐसी हालत मे पाके,,,

उसने अपने हाथ को ठीक से मेरी छाती पर रखा और मेरे उपर से उठाने की कोशिश करने

लगी लेकिन मेरी छाती पर हल्का हल्का पसीना था जिस से उसके हाथ फिसल गये और वो वापिस

मेरे उपर गिर गयी,,,वो वापिस मेरी छाती से चिपक गयी,,,उसके गिरने से मेरी हँसी निकल

गयी,,,,उसने सर उठाकर मेरी तरफ देखा तो मुझे हंसते देख हल्के गुस्से से घूर्ने लगी

लेकिन मैं चुप नही हुआ और हल्के हल्के मुस्कुराता रहा,,,उसने फिर से गुस्से से देखा और

उपर उठने की कोशिश की लेकिन वो एक बार फिर फिसल गयी और वापिस मेरी छाती पर गिर

गयी,,,,,इस बार वो मेरी छाती पर गिरी तो उपर नही उठी,,तभी मैने महसूस किया उसके

हाथ मेरी छाती पर हल्के से फिसलने लगे,,,तभी मैने एक दम से उसके शोल्डर से उसको

पकड़ा और अपने जिस्म से थोड़ा उपर उठा दिया,,,,उसने चेहरा उपर उठाकर मेरी तरफ देखा

और आगे की तरफ बढ़ने लगी,,,,,मुझे उसकी हालत ठीक नही लगी,,वो कुछ बेचैन लग रही

थी और हल्के से उपर की तरफ बढ़ रही थी,,,अभी तक उसका सर मेरी छाती पर था लेकिन

अब वो मेरे शोल्डर तक गर्दन के पास तक पहुँच गयी थी,,,मेरे हाथ उसके शोल्डर पर

टिके हुए थे और वो हल्की सी मेरे जिस्म से उपर उठी हुई थी,,,जबकि उसके हाथ मेरी छाती

पर हल्के हल्के इधर उधर फिसल रहे थे,,,,मेरे हाथों पर भी पसीना था और सोनिया

की स्किन भी एक दम रेशम जैसी थी,,,,मेरे पसीने से भरे हुए हाथ उसके शोल्डर पर से

फिसल गये और वो वापिस मेरे जिस्म पर गिर गयी,,,अब उसका चहरा मेरी छाती पर नही बल्कि

मेरे राइट साइड के शोल्डर पर गर्दन एक पास था,,,

वो थोड़ी गर्म हो गयी थी शायद और बेचैन भी,,,,बेचैनी मे उसके हाथ मेरी छाती और

कमर की दोनो तरफ फिसल रहे थे उसकी साँसे उखड़ने लगी थी और गर्म हो गयी थी जिसका

एहसास मुझे अपनी गर्दन पर होने लगा था,,उसके दिल की धड़कन बहुत तेज हो गयी थी जो कि

मुझे अपनी छाती पर महसूस हो रही थी,,,

 


तभी मैने उसके चहरे की तरफ देखा तो उसके चहरे पर उसकी जुल्फे थी मैने अपने एक हाथ

से उसकी ज़ुल्फो को उसके चहरे से हटाया तो देखा उसकी आँखें आधी बंद थी ,,,वो कुछ ठीक

नही लग रही थी मुझे,,,मदहोश हो चुकी थी वो,,,ऐसा लग रहा था जैसे उसने कोई नशा

किया हुआ हो,,,,उसकी हालत देख मैं भी थोड़ा गर्म हो गया लेकिन मैं कुछ कर नही सकता

था और अगर कुछ करता तो एक बार फिर सोनिया को रुसवा कर देता,,,,इसलिए मैने उसको हल्के

से आवाज़ लगाई,,,,,

सोनिया ,,,,,सोनिया,,,,,

उसने मेरी आवाज़ नही सुनी,,,,उसको कोई होश नही था,,,तभी मेरे भी होश उड़ गये ,,,उसने

मुझे एक बस देखा और अपनी हालत ब्यान करदी,,,मैं समझ गया कि ये अपने होश मे नही है

अब ,,इसके पहले मैं कुछ कहता या करता उसने मुझे एक बार देख कर अपनी आँखें बंद

करली और मेरे चहरे की तरफ बढ़ने लगी,,,,इस से पहले कुछ समझ पाता या कुछ कर पाता

उसके होंठ मेरे होंठों से सॅट गये और उसने मुझे किस करना शुरू कर दिया,,,मेरा एक हाथ

उसके सर पर और एक हाथ उसके शोल्डर पर था जबकि उसके हाथ मेरी कमर की दोनो तफर से

मेरी कमर को सहला रहे थे उपर से नीचे तक,,,,वो मुझे किस करती जा रही थी लेकिन

मैं उसको किस का रेस्पॉन्स नही दे रहा था लेकिन मेरे से भी बर्दाश्त नही हुआ तो मैने

भी उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया,,,वो भी मेरे होंठों को चुस्ती जा रही थी,,

अब मेरे हाथ भी उसकी पीठ पर चले गये और मैने उसकी टी-शर्ट मे अपने हाथ घुसा दिए

और उसकी नंगी पीठ को सहलाने लगा,,,,,जैसे ही उसको मेरे हाथों का एहसास उसकी पीठ

पर हुआ वो एक दम से कुछ ज़्यादा ही गर्म हो गयी और कुछ ज़्यादा ही गर्मी मे मुझे किस करने

लगी मैं भी उसका पूरा साथ देने लगा था,,,,क्यूकी मेरी हालत भी बहुत खराब हो गयी थी

तभी हम दोनो को किसी की आवाज़ सुनाई दी,,,,कोई दरवाजे पर खड़ा होके कुछ बोल रहा था

,,,,,

अगर लैला मजनू का प्यार ख़तम हो गया हो तो चलके खाना खा लो,,,ये सब बोल रही थी

कविता जिसके हाथ मे बेलन पकड़ा हुआ था और वो हँसती हुई हम लोगो की तरफ देख रही थी

कविता को देख कर मैं और सोनिया उसी तरह डर गये जैसे मैं और कविता डर गये थे जब

गाँव मे सोनिया ने हम दोनो को ऐसी हालत मे देख लिया था,,,तब कविता शरम के मारे

पानी-पानी हो गयी थी और अब सोनिया की हालत भी वैसी ही हो गयी थी,,,,,

जैसे ही सोनिया का ध्यान कविता की तरफ गया और फिर उसने खुद को मेरे उपर पाया तो जल्दी

से मेरे से हटके एक साइड पर गिर गयी और वहाँ से उठकर खड़ी हो गयी,,,अब तक कविता

हँसती हुई वहाँ से जा चुकी थी,,,,

सोनिया खुद की हालत पर क़ाबू करती हुई दरवाजे की तरफ देखने लगी,,,जब कविता वहाँ

से चली गयी तो सोनिया वापिस मॅट्रेस पर मेरे पास बैठ गयी और मुझे हल्के से थप्पड़

मारा मेरी छाती पर,,,,,

तू कभी नही सुधरेगा ना सन्नी,,,जब देखो गंदी हरकते करता रहता है,,,,

लेकिन अब मैने क्या किया,,,,अब तो जो किया तुमने किया,,,इसमे मेरी क्या ग़लती,,,

सब तेरी ग़लती है,,,टी-शर्ट क्यूँ निकाली तूने,,,मुझे खुद पर क्यूँ गिरने दिया और जब मैं

वो सब करने लगी तो तूने मुझे रोका क्यूँ नही,,,मैं बहक गयी थी होश मे नही थी लेकिन

तू तो होश मे था फिर तूने मुझे रोका क्यूँ नही,,,,क्यूँ इस मोके का फ़ायदा उठाने लगा था

तू,,,,बोल क्यूँ नही रोका मुझे तूने,,,क्यूँ बहकने दिया मुझे ,,,,वो हल्का हल्के रोने लगी

और मुझे छाती पर हल्के से मारने लगी,,,,,,,,,,बोल क्यूँ नही रोका मुझे क्यूँ करने दिया

वो सब जो करने मे मैं डरती रहती हूँ,,,,,बोल क्यूँ नही रोका सन्नी,,,क्यूँ ,,क्यूँ

मैं वो ,,मैं ,,मुझी,,,,मैं वू,,,

बोल ना बोलता क्यूँ नही तू,,,,,क्यू नही रोका मुझे,,,,,,वो रोती जा रही थी और बोलती जा

रही थी,,,,,,

क्यूकी मैं भी बहक गया था सोनिया,,,मुझपे खुद पर क़ाबू नही रहा तुझे अपने इतने

करीब पाके,,,,,मुझे माफ़ करदो लेकिन इसमे मेरी क्या ग़लती,,,

नही सन्नी तुझे क़ाबू मे रहना चाहिए था,,,,जब तू मेरे पास आता है मैं होश मे रहती

हूँ और तुझे रोक लेती हूँ इसलिए जब मैं तेरे पास आई तो तुझे भी मुझे रोकना चाहिए

था क्यूकी अगर हम दोनो क़ाबू से बाहर हो गये तो सब ग़लत हो जाएगा,,,,,सब कुछ ग़लत हो

जाएगा,,,,,

लेकिन मैं क्या कर सकता था,,,मेरी हालत खराब हो गयी थी,,और भला इसमे ग़लत क्या है

तू मुझे प्यार करती है और मैं तुझे प्यार करता हूँ तो इसमे ग़लत क्या है,,

ग़लत है सन्नी सब कुछ ग़लत है,,,,हम दोनो ऐसा नही कर सकते ,,,,क्यूकी मैं तुझसे

प्यार करती हूँ तेरे जिस्म से नही,, जबकि तू बस मेरे जिस्म से प्यार करता है,,जब देखो तू

मेरे जिस्म को हाँसिल करने की कोशिश करता है लेकिन मैं तुझे रोक लेती हूँ और आज जब

मैं खुद बहक गयी तो तुझे अछा मौका मिल गया अपनी हवस मिटाने का,,,मेरे जिस्म को हाँसिल

करने का,,,,,

नही नही सोनिया ये ग़लत है,,,,,तेरा जिस्म मुझे तेरे करीब आने पर मजबूर ज़रूर करता

है लेकिन मेरा प्यार तेरे जिस्म तक सीमित नही

अच्छा अगर ये बात है तो तूने मुझे रोका क्यूँ नही,,क्यूँ मुझे वो सब करने दिया,,और अगर

तेरा प्यार मेरे जिस्म तक सीमित नही तो साबित कर सन्नी,,,,साबित कर तू मुझे प्यार करता है

ना कि मेरे जिस्म को,,,,,इतना बोलकर वो रोती हुई रूम से बाहर चली गयी,,,

जबकि मैं सोचने लगा कि आख़िर मेरी क्या ग़लती उसमे जो कुछ अभी हुआ,,,इसमे तो सोनिया की

ग़लती है तो भला कसूरवार मैं कैसे हुआ,,,,,तभी मेरी नज़र गयी अपने जिस्म पर ,,मेरी

छाती नंगी थी उसपे हल्का हल्का पसीना था,,,मैं समझ गया ये मेरी ग़लती थी,,,जैसे

उसके जिस्म को देख मैं बहक जाता हूँ आज वो मुझे एसी हालत मे देख कर बहक गयी थी

,,लेकिन अब बहुत हो गया अब मुझे उस से दूर रहना होगा,,,,बल्कि अब तो उसको भी खुद से

दूर रखना होगा क्यूकी वो भी बहकने लगी है ,,,,ग़लती किसी की भी हो लेकिन नुकसान मेरा

ही होगा,,,,,मैं कोई ग़लती करके उसको खोना नही चाहता,,,,,

मैं वहाँ से उठा टी-शर्ट पहनी और फ्रेश होके रूम से बाहर निकल आया,,,,वहाँ कविता और

सोनिया बैठी हुई थी,,मैं भी एक तरफ जाके चेयर पर बैठ गया,,,,कविता ने प्लेट मे

खाना लगा दिया और मैं चुप करके खाना खाने लगा,,,,हम सब लोग चुप थे वहाँ एक

सन्नाटा सा पसरा हुआ था सारे घर मे,,,,मैं चुप करके प्लेट की तरफ देखता हुआ खाना

खा रहा था क्यूकी मेरी हिम्मत नही थी उन दोनो से नज़रे मिलने की,,,

तभी सोनिया का फोन बजने लगा और सन्नाटा टूट गया,,,,,सोनिया फोन लेके दूर चली गयी

और बात करने लगी,,,मैने देखा फोन पर बात करते हुए सोनिया के उदास चहरे पर एक

मुस्कान आ गयी थी,,,,सोनिया ने कुछ देर बात की और वापिस आके खाना खाने लगी,,,

किसका फोन था सोनिया,,,,,कविता ने सोनिया से पूछा,,,,

माँ का फोन था,,,,हम लोगो को मिलने बुलाया है और साथ मे कुछ कपड़े मँगवाए है और

बोला है शोभा दीदी के लिए कुछ नये कपड़े लेके आने को,,,,,

वाउ चल जल्दी खाना ख़ाके शॉपिंग पर चलते है वैसे भी बड़े दिन हो गये माल घूमने

नही गये हम लोग,,,,

कविता मेरे से बोली,,,,,,,,,,,सन्नी तू भी खाना ख़ाके जल्दी तैयार हो जा हम लोग माल चलते

है,,,,,

तभी सोनिया बोली,,,,नही हम दोनो चलते है,,,,इसकी ज़रूरत नही,,,,,

अरे इसको भी ले चलते है ना,,,वैसे भी इसने बोला है इसके बिना बाहर नही जाना,,इसको

तो साथ लेके जाना पड़ेगा ना,,,,,,

कोई ज़रूरत न्ही इसको साथ लेके जाने की,,,,कोई मुसीबत होगी तो हम दोनो मिलकर संभाल

लेंगे उसको,,,,इसके साथ लेके जाने की क्या ज़रूरत,,,,

 
तभी मैं बीच मे बोल पड़ा,,,,,,दोस्त या भाई समझ के नही लेके जाना तो मत लेके जा लेकिन

एक ड्राइवर बना कर तो लेके जा सकती है ना,,,,,मैने इतना बोला और गुस्से मे उठकर वहाँ

से चला गया,,,,,क्यूकी मुझे कैसे भी करके इन लोगो के साथ जाना ही था,,,मैं इन लोगो

को अकेले भेजने की ग़लती नही कर सकता था,,,,

मैं रूम मे गया और टी-शर्ट चेंज करके बाहर आ गया,,,,वो दोनो भी खाना ख़ाके मोम के

रूम मे चली गयी थी,,

फिर वो दोनो तैयार होके आ गयी और हम लोग माल की तरफ चल पड़े,,,,मैं कार ड्राइव कर

रहा था वो दोनो पीछे बैठी हुई थी,,,सच मे ड्राइवर ही बना दिया था दोनो ने मुझे,,

फिर मुझे वो पल याद आया जब सोनिया हँसती हुई मुझे गुद-गुदि कर रही थी,,हम दोनो

बचपन से एक साथ रहते आए है,,,हँसी मज़ाक करते आए है,,,जब भी मैं रूठ जाता

तो वो बड़े प्यार से मुझे मना लेती और जब वो रूठ जाती तो मैं उसको मना लेता,,,वो

मासूम चहरे से मुझे खुश कर देती और मैं अपनी बंदरों जैसी हरकतों से उसका दिल

बहलाता,,कभी कभी दोनो एक दूसरे को गुद-गुदि करते और खूब हंसते,,,,लेकिन जबसे मेरे

दिल और दिमाग़ पर सेक्स और वसना हावी हुवे थे तबसे मेरा और सोनिया का हँसना खेलना बंद ही

हो गया था,,क्या सच मे सेक्स और वसना ने इतना बदल दिया था मुझे कि मैं अपनी ही बेहन

के साथ हँसना खेलना तक भूल गया था,,,अब तो रूठने और मनाने का खेल भी नही होता था

,,,बस एक अजीब सा रिश्ता जो बन गया था हम दोनो मे,,,

हम लोग माल मे पहुँच गये ,,,,,कार पार्किंग मे लगा कर हम लोग माल घूमने लगे,,लेकिन

आज कविता और सोनिया आगे चल रही थी जबकि मैं उन लोगो के 10-12 कदम पीछे चल रहा

था,,,,,,

तभी वो लोग एक शोरुम मे घुस गयी और मैं बाहर खड़ा रहा,,,,करीब 2-3 अवर्स तक

वो ऐसे ही शॉपिंग करती रही ,,कभी किसी शॉप मे घुस जाती तो कभी किसी शॉप मे और

मैं बस इनके बॅग्स पकड़ता रहता और पीछे पीछे चलता रहता,,,,आज तो सन्नी सच मे तू

इन लड़कियों का ड्राइवर ही बन गया है,,,,

तभी सोनिया और कविता एक शॉप मे घुसी हुई थी जबकि मैं बाहर खड़ा हुआ था तो

कविता कुछ और बॅग्स मुझे देने के लिए बाहर मेरे पास आई,,,,,,

आज घर पर वो सब क्या हुआ था सन्नी,,,,,कविता ने मेरे पास आके पूछा,,,,

पता नही कविता क्या हुआ मुझे कुछ समझ नही आया,,,,लेकिन मेरी कोई ग़लती नही थी तेरी

कसम,,,,जानता हूँ मैने कयि ग़लतियाँ की है और अब भी करता हूँ लेकिन सच मे तेरी

कसम आज मेरी कोई ग़लती नही थी,,,,,

हां हां जानती हूँ तेरी कोई ग़लती नही थी,,,सोनिया ने मुझे सब बता दिया लेकिन जाने या

अंजाने ही सही सन्नी तेरी भी ग़लती थी आज,,,,तेरी वजह से सोनिया बहक गयी थी और तूने

उसको रोका क्यूँ नही ,,,,,तुझे तो उसको रोकना चाहिए था,,,,,देख एक तो वो पहले से परेशान

है जो तुझे प्यार करने लगी है उपर से तुम दोनो का रिश्ता ऐसा है कि वो चाह कर भी

तुम्हारे साथ वो सब नही कर सकती जो हम दोनो करते है,,,उसको डर है इस दुनिया का उसको

डर है खुद का,,उसको डर है कि अगर वो कुछ ग़लत करेगी और लोगो को पता चल गया तो वो

बर्दाश्त नही कर पाएगी,,तुम दोनो एक दूसरे को प्यार करते हो ये ठीक है लेकिन ये समाज

ये लोग इस बात को नही समझ सकते ,,,,तू प्लज़्ज़्ज़ दूर रहा कर उस से अगर वो तेरे करीब

आए तो उसको दूर कर दिया कर,,,प्लज़्ज़्ज़ सन्नी बोल करेगा ना ऐसा,,,बोल सन्नी,,,प्ल्ज़्ज़ मेरी

खातिर ,,,देख मैं उसकी बेस्ट फ्रेंड हूँ और मैं उसको ऐसे परेशान नही देख सकती,जब

तक तो तू उसके करीब जाने की कोशिश करता था तब तक तो ठीक था लेकिन अब वो भी तेरे

जिस्म से आकर्षित होने लगी है अब उसको ज़्यादा ही डर लगने लगा है,,,,,बोल तू उसको दूर

कर देगा जब भी वो तेरे करीब आएगी,,,,बोल सन्नी,,,,,,,,

मैं कविता की बात समझ गया,,,,ठीक है कविता,,,,मैं उसके करीब नही जाउन्गा और अगर

वो करीब आई तो उसको भी खुद से दूर कर दूँगा,,,,मैं उसको प्यार करता हूँ उसके लिए

कुछ भी कर सकता हूँ ,,,,कभी उसको हर्ट नही कर सकता फिर चाहे ग़लती मेरी हो या

उसकी,,,,,,

कविता ने हँसके मेरे गालों पर एक किस की और वापिस उसी शॉप मे चली गयी,,,

फिर कुछ देर बाद उनकी शॉपिंग ख़तम हुई और हम लोग माल से चलके पार्किंग की तरफ आने

लगे,,,,,मैं उन लोगो के बॅग्स पकड़ कर उनके पीछे पीछे ड्राइवर बनके चल रहा था,,अब

मैं उन लोगो से कोई 4-5 कदम की दूरी पर था,,,,वो दोनो कुछ बात कर रही थी,,,

सोनिया------तूने बात की सन्नी से,,,

कविता------ हां बाबा करली बात,,,,वो सब समझ गया है,,अब वो तेरे पास नही आएगा और

अगर तू उसके पास गयी तो तुझे भी खुद से दूर कर देगा,,,लेकिन मैं परेशान हो गयी हूँ

तुम दोनो से,,,,जब प्यार करते हो तो वो सब करने मे ग़लत क्या,,,,,

सोनिया-----तू तो सब जानती है कविता फिर क्यूँ पूछ रही है,,,,,तुझे पता है हम लोग

ऐसा नही कर सकते,,,,अगर लोगो को पता चल गया तो क्या होगा,,,,,कितनी बदनामी होगी तू

सोच ज़रा ..हम लोगो का रिश्ता हम लोगो को ऐसे करने की इजाज़त नही देता तो भला मैं

कैसे,,,,,,

तभी मैं तेज़ी से आगे बढ़ गया और सोनिया का हाथ पकड़ लिया,,,,वो एक दम से पीछे पलट

गयी मेरी तरफ और हैरानी से देखने लगी,,,,

तुझे इन लोगो की परवाह है ,,क्या इनकी वजह से तू मेरे से प्यार नही कर सकती,,,मैने

इतना बोला तो कविता बीच मे बोली,,सन्नी छोड़ सब देख रहे है,,,

नही कविता तुम बीच मे नही बोलोगि ,,,,ये मेरी और इसकी बात है,,,,,

तभी सोनिया गुस्से से बोली,,,,मेरा हाथ छोड़ सन्नी सब देख रहे है,,,,,,

मुझे परवाह नही इनकी सोनिया,,,,,और तू कब्से परवाह करने लगी लोगो की,भूल गयी मेरी

बाइक के पीछे बैठकर कैसे पागलो की तरह हँसती थी तू,,,कैसे बारिश मे बीच सड़क

पर बच्चों की तरह खेलती थी,,,कैसे हर जगह मेरे साथ खुल कर मस्ती और मज़ाक करती

थी,,,तब तो तुझे परवाह नही होती थी लोगो की,,,,तो भला मुझे प्यार करने की बात पर

तुझे लोगो से डर क्यूँ लगने लगा,,क्यूँ इतनी परवाह होने लगी लोगो की,,,लोग आज देखेंगे

कल बात करेंगे और परसो सब भूल जाएँगे,,,,मुझे इनकी परवाह नही कि ये क्या बोलते है

या क्या सोचते है,,,और तेरे को प्यार करने के लिए मुझे इन लोगो की इजाज़त लेने की ज़रूरत

नही ,,,,इनको पूछने की ज़रूरत नही कि मैं किस से प्यार कर सकता हूँ और किस से नही

मुझे भी लोगो की परवाह नही है सन्नी,,,लेकिन हम दोनो का रिश्ता ऐसा है कि मुझे डर

लगता है ,,,किसी को पता चल गया तो,,,,बहुत बदनामी होगी,,,मैं तो शरम से मर ही

जाउन्गी,,,,

तेरे मेरे रिश्ते का मैं कुछ नही कर सकता सोनिया,,,,,लेकिन इन लोगो का कर सकता हूँ

अच्छा क्या कर सकता है तू इन लोगो का,,,,,,मुझे भी तो पता चले,,इतनी क्या हिम्मत तेरी

जो तुझे लोगो की परवाह नही होगी,,,,,

तभी मैं कुछ नही बोला और अपने हाथ मे पकड़े बॅग्स को ज़मीन पर रखकर आगे बढ़ कर सोनिया

के कस कर अपने जिस्म से चिपका लिया और उसके होंठों पर किस करने लगा,,,,सब लोगो का

ध्यान मेरी और सोनिया की तरफ था,,,,मैं उसको खुद से चिपका कर किस करता जा रहा था

सोनिया के हाथ मे जो बॅग्स पकड़े हुए थे वो ज़मीन पर गिर गये थे,,,,,

कुछ देर बाद हम दोनो अलग हुए,,,,वो हैरान होके मुझे देखने लगी और ऐसी ही हालत थी

कविता की,,,,,मैने जो किया उसका मुझे भी होश नही था मैं खुद भी अपनी हरकत पर

हैरान हो गया

तभी मैं बोल पड़ा,,,,,देख है किसी को परवाह कि हम क्या कर रहे है,,,,कुछ पल उन

लोगो ने देखा और अब देख सब लोग अपने-अपने रास्ते चल दिए ,,,,

सोनिया कुछ नही बोली और बस जल्दी से वहाँ से भाग गयी,,,,,

तभी कविता ज़मीन पर पड़े हुए बॅग्स को उठाने लगी ,मैने भी उसकी हेल्प की और हम दोनो

बॅग्स उठकर पार्किंग की तरफ चल पड़े,,,,,,,ये क्या किया तूने सन्नी,,,,पागल हो गया था

क्या,,,,,वो बेचारी पहले से परेशान थी और अब तूने ये सब कर दिया वो भी माल मे सबके

सामने,,,,पता नही क्या हालत होगी बेचारी की,,,,,क्या हो गया था तुझे,,,,

पता नही कविता,,,,तुम दोनो की बातें सुनी तो रहा नही गया,,,आख़िर मुझे प्यार करने मे

वो लोगो से क्यूँ डर रही है,,,,जबकि मैने कभी नही देखा उसको लोगो की परवाह करते हुए

,,हालाकी मैं कभी कभी डर जाता था लोगो के सामने खुल कर हँसने मे तो सोनिया मुझे

हिम्मत देती थी और बोलती थी कि लोगो की परवाह मत करो खुल कर हँसो भाई,,,लोगो की

परवाह करने लगे तो लोग साँस लेना भी मुश्किल कर देंगे,,,,बस यही सोचते हुए मेरा

दिमाग़ खराब हो गया था,,,

मैं समझ सकती हूँ सन्नी लेकिन तुझे उसकी हालत पर तरस खाना चाहिए थे,,,पता नही

क्या बीत रही होगी उसपे,,,,,वैसे तेरी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी,,,,सोनिया को किस वो

भी माल मे इतने लोगो के सामने,,,मान गयी तेरी हिम्मत को,,,तेरी जगह कोई और होता तो अब

तक अल्लाह हो प्यारा हो गया होता,,,,कविता ने इतना बोला और हँसने लगी,,,

हिम्मत तो मेरी उस दिन कॉलेज मे भी थी तुझे किस करने की,,,लेकिन तू ही डर कर भाग

गयी थी वरना तुझे भी कॉलेज के सामने किस करने से मैं डरता नही,,,,

जानती हूँ तू है ही पक्का पागल,,,देख आज तेरे पागलपन ने क्या कर दिया,,,,मुझे तो बड़ा

तरस आ राह है सोनिया पर,,,,,इतनी बात करके कविता हँसने लगी और मैं भी हल्के से

मुस्कुरा दिया,,,,

हम लोग पार्किंग मे गये तो देखा सोनिया कार से कुछ कदम दूर खड़ी हुई थी ,,,उसने मुझे

देखा और मेरी तरफ पीठ करली,,,मैं उसके करीब से चलके कार के पास पहुँच गया और

बॅग्स को कार की पिछली सीट पर रखने लगा,,,कविता सोनिया के पास खड़ी होके उस से बात

कर रही थी,,,,,तभी मैने देखा कोई हम लोगो की तरफ़ देख रहा था,,,मुझे उसका फेस

नज़र नही आया लेकिन उसके सर पे कॅप लगी हुई थी और आँखों पर भी चंश्मा था,,,मैने उसकी

तरफ देखा तो वो वहाँ से चला गया,,,,,,

तभी कविता मेरे पास आई,,,,,,,जा सन्नी तू ही मना उसको,,,मेरी तो बात ही नही सुन रही

,,,,,बोल रही है तुम दोनो जाओ वो खुद चली जाएगी माँ के पास,,,,

मैं सोनिया की तरफ चलने लगा तभी मैने देखा एक कार बड़ी तेज़ी से चलती हुई सोनिया की

तरफ आ रही थी,,,,,,मैं तेज़ी से चलके उसकी तरफ जाने लगा,,,,कविता ने भी सोनिया को

ज़ोर से आवाज़ लगाई और कार मे बारे मे बताया ,,,,वो कार तेज़ी से सोनिया की तरफ आ रही थी

कविता की आवाज़ से सोनिया पीछे की तरफ पलट गयी और खुद की तरफ आती हुई तेज कार को देख

कर डर गयी और ज़ोर से चीखने लगी,,लेकिन वो कार नही रुकी और सोनिया की तरफ बढ़ती आ

रही थी,,,,,,कार उस से कुछ ही दूर थी कि मैने भाग कर सोनिया को अपनी बाहों मे

भर लिया और पकड़ कर रास्ते से दूर ले गया ,,,,मेरे ऐसा करते ही सोनिया मेरी बाहों मे

आ गयी और कार तेज़ी से चलते हुए पार्किंग से बाहर चली गयी,,,,,मैने देखा तो ड्राइवर ने

कॅप पहनी हुई थी,,,,मुझे कुछ शक हुआ लेकिन अब क्या कर सकता था कार वहाँ से जा

चुकी थी,,,,

तभी मैने सोनिया की तरफ देखा तो वो रो रही थी,,,,बहुत ज़्यादा डर गयी थी वो,,,मैने

उसके आँसू सॉफ किए तो उसने मेरे चहरे को देखा और ज़ोर ज़ोर से रोती हुई मेरे गले लग

गयी,,,,,,

अरे पगली रो क्यूँ रही है,,,,,,देख मैं हूँ ना तेरे पास,,,कुछ नही हुआ चल चुप कर

,,,,,

तभी कविता भी भाग कर हम दोनो के पास आ गयी,,,,,कों था वो सन्नी,,,,कार मे कॉन

था,,तूने देखा उसको,,,,,

मुझे शक तो था कि ये अमित और सुरेश मे से कोई हो सकता था लेकिन मैं उसको पहचान

नही पाया,,,,,,और मैं कविता और सोनिया को डराना भी नही चाहता था,,,,,,

अरे कोई नही होगा कोई मनचला,,,अमीर बाप का शराबी बेटा,,,,मैने ये बात बोल कर उनके

दिल से तो डर ख़तम कर दिया लेकिन मुझे डर था कहीं वो लोग मेरी बेहन या मेरी फॅमिली

को हर्ट नही करे दोबारा,,,,

सोनिया अभी भी रो रही थी और मेरे गले से चिपकी हुई थी,,,,,,,,

अरे अब रोना बंद का छुटकी गुड़िया ,,देख तेरा भाई तेरे पास है,,,,कुछ नही होने देगा

तेरा भाई तुझे,,,,,,,,,

मैं जानती हूँ भाई,,,,तू मुझे कुछ नही होने देगा,,,,बहुत प्यार करता है ना मेरे से तू

एक मैं ही पगली हूँ जो तेरे प्यार को समझती नही,,,,लेकिन मैं मजबूर हूँ सन्नी,,बहुत

मजबूर हूँ,,,,,इतना बोलकर वो कविता के पास चली गयी और कविता उसको चुप करवाते हुए

कार की तरफ ले गयी,,,,,

मेरा दिल तो किया कार जल्दी से भगा कर बाहर ले जाउ लेकिन अब कोई फ़ायदा नही होगा अब तक

तो वो कार पता नही कहाँ पहुँच गयी होगी,,,,

 


मैं भी जाके कार मे बैठ गया,,,,कविता और सोनिया पिछली सीट पर बैठ गयी थी,,,उन लोगो

ने बॅग्स को मेरे साथ वाली सीट पर रख दिया था,,,,,सोनिया अभी भी रो रही थी,मैं अपनी

सीट से पलट कर उसकी तरफ देखने लगा,,,,,,

क्यूँ रो रही है अब तू,,,,अब तो सब ठीक हा ना,,,,वो कोई पागल था शायद नशा किया

होगा उसने ,,,कार भी संभाली नही जा रही थी उस से,,,,चल अब रोना बंद कर,,,सब

ठीक है कुछ नही हुआ ,,,,और मैं तुझे कुछ होने भी नही दूँगा,,,,

मेरी बात सुनके सोनिया चुप हो गयी,,,,,मैं कार वाली बात पर नही रो रही सन्नी उस बात

पर मैं खुश हूँ ,,रोना तो मुझे उस बात पर आ रहा है जो तूने माल मे किया ,,

मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया और कार स्टार्ट करके ड्राइव करने लगा तभी कविता

बोली,,,,,वो कार चलाने वाला जो भी था लेकिन मुझे अजीब लगा वो,,,तूने देखा सन्नी कार

की नंबर प्लेट्स भी नही थी,,,,

कविता की बात सुनके मैं मिरर मे उसको देखने लगा वो मुझे कुछ शकी नज़र से देख

रही थी,,,,,

मैं कुछ नही बोला बस ड्राइव करने लगा,,,,,फिर मैने ख़ान भाई को फोन किया और उनसे

वो गंगा नगर वाले घर का पता पूछा,,,,उन्होने पता मुझे बता दिया और मैं चल पड़ा

मोम डॅड को मिलने गंगा नगर की तरफ,,,,,

ख़ान भाई ने बोला था हमारे घर से 2 अवर्स का रास्ता है लेकिन मुझे तो 3 अवर्स से भी

ज़्यादा लग गये,,,,सर्दियाँ थी अंधेरा भी जल्दी हो जाता था और हम तो वैसे भी काफ़ी लेट

चले थे माल से,,लगभग शाम ढाल ही चुकी थी,,,,और उपर से ये पहाड़ी इलाक़ा था,,,

मुझे हाइवे पर ड्राइव मे प्राब्लम नही थी लेकिन पहाड़ियों मे ज़रा बचके ड्राइव करता

था मैं ,,,,अब तो रात भी ढल चुकी थी,,,,उपर से यहाँ रोड पर कोई लाइट भी नही

थी,,,,,,रास्ता भी सुनसान था,,,बहुत कम गाडिया नज़र आ रही थी रोड पर,,,कोई 1-2

किलोमेटेर बाद एक आध कार देखने को मिल रही थी,,,,

खैर हम लोग ख़ान भाई के बताए हुए पते पर पहुँच गये,,,,ये एक छोटा सा फार्म हाउस

टाइप घर थे,,,,या कह सकते हो बहुत खुला घर था,,,बहुत बड़ा गार्डन था इसमे,,,और

पीछे की तरफ रहने के लिए 4-5 रूम थे और एक छोटा सा आँगन था,,,,जैसे अक्सर पहाड़ी

घर होते है या गाँव के घर,,,,

हम लोग काफ़ी लेट हो गये थे,,,,शायद घर वाले सो चुके थे,,,लेकिन मैं ग़लत था

मैने अभी एक बार ही बेल बजाई थी कि गेट के उपर से देखा डोर से चलती हुई भुआ

गेट खोलने आ रही थी,,,

भुआ ने गेट खोला और सोनिया भुआ के गले लग्के मिली और साथ ही कविता भी,,इस से पहले

भुआ मुझे मिलती सोनिया और कविता ने भुआ का हाथ पकड़ा और भुआ को अंदर की तरफ ले जाने

लगी,,,,,

अरे रूको रूको बेटी सन्नी को तो आने दो,,,,,भुआ सोनिया और कविता से बोली

तभी कविता बोली,,,रहने दो भुआ वैसे भी आज वो सन्नी नही हम लोगो का ड्राइवर है,,

कविता ने इतना बोला और हँसने लगी साथ ही भुआ और सोनिया भी,,

ड्राइवर जल्दी से समान लेके अंदर आ जाओ,,,,इतना बोलके कविता ज़ोर से हँसने लगी और फिर

तीनो हँसती हुई अंदर चली गयी,,,,

मैने भी कार घर के अंदर की और कार से बाग निकालके घर के अंदर चला गया,,देखा तो

आँगन मे सभी लोग आग जला कर बैठे हुए थे,,,,

जैसे ही मैं अंदर गया डॅड बोलने लगे,,,,अरे कविता बेटी नया ड्राइवर रख लिया तुम लोगो

ने और मुझे बताया भी नही,,,,,,डॅड ने इतना बोला तो सब लोग मेरे पर हँसने लगे,,,,

मैं कुछ नही बोला बस एक रूम मे गया और समान रखके वापिस आ गया,,,,मैं आके डॅड को

मिला फिर माँ को फिर भुआ और शोभा को भी मिला,,,,

शोभा बहुत खुश थी आज,,,,वो सोनिया और कविता से हंस हंस कर बातें कर रही थी

तभी वो तीनो उठी और उस रूम मे चली गयी जहाँ मैं वो शॉपिंग वाले बॅग्स रखकर आया

था,,,,,सब लोग भी उसी रूम की तरफ चल पड़े ये देखने कि आख़िर शॉपिंग करके क्या लेके

आई है सोनिया,,,,

हम सब अंदर गये तो शोभा भी शॉपिंग का समान देख कर बहुत खुश थी,,,मुझे कुछ समझ

नही आ रहा था,,,

तभी माँ बोली,,,,अब बस करो बाकी समान कल सुबह देख लेना ,,दोनो थकि हुई आई है

कुछ चाइ कॉफी दो इनको और आराम करने दो,,,

तभी सोनिया और कविता ने उदास होके समान साइड रख दिया और शोभा माँ के साथ किचन मे

चली गयी,,,,भुआ डॅड के पास ही बैठ गयी थी,,,,

इतनी लेट क्यूँ हो गये सन्नी बेटा,,मुझे तो लगा था आज नही आओगे ,,,हम लोग बस सोने ही

लगे थे

क्या बोलू डॅड आपकी बेटी ने तंग कर दिया आज,,,इतना टाइम लगा दिया शॉपिंग मे कि पूछो

मत,,,,,मैं तो कब्से बोल रहा था जल्दी करो जल्दी करो लेकिन मेरी कॉन सुनता है

मैने इतना बोला तो कविता हँसने लगी जबकि सोनिया गुस्सा हो गयी,,

हम लोगो मे से किसी ने भी वो कार वाली बात नही बताई किसी को,,,,वरना घर वाले भी

टेन्षन मे आ जाते,,,,

अच्छा तो आज क्या किया सारा दिन शॉपिंग के अलावा,,,,,भुआ ने सोनिया से पूछा,,,,,

कुछ नही भुआ बस घर की सफाई करी हम सबने मिलकर लेकिन अभी सिर्फ़ नीचे वाला फ्लोर

ही सॉफ हुआ है उपर वाला रहता है अभी,,,,,

हां हां बेटा ख़ान का फोन आया था उसने बता दिया था कि तुम लोग घर वापिस आ गये हो

और घर मे रहने लगे हो,,,,,

जी डॅड,,,,आज ही घर आए हम लोग,,,ख़ान भाई ने बोला कि पोलीस का काम ख़तम हो गया है

,,तो डॅड आप लोग भी चलो अब घर,,,,अब कोई प्राब्लम नही है,,,,मैने जान भूज कर

ऐसी बात बोली ताकि उनको ऐसा लगे कि मैं किसी टेन्षन मे नही हूँ,,,,

अरे नही बेटा अब कैसे जा सकते है अब तो कुछ दिन यहीं रहना होगा,,,,अब तो बहुत ज़रूरी

काम भी है यहाँ कुछ दिन तक,,,,

क्या काम डॅड ,,,मैने डॅड से पूछा,,,

अरे ये कविता और सोनिया ने तुझे कुछ बताया नही क्या,,,,तभी मैने कविता और सोनिया की

तरफ देखा तो वो आपस मे बात करके ये जताने लगी कि उन लोगो का ध्यान नही हम लोगो की

तरफ,,,,

क्या नही बताया डॅड इन लोगो ने मुझे,,,,

अरे बेटा तेरी शोभा दीदी की शादी पक्की हो गयी है,,,जब हम यहाँ आए तो सुबह मैं वॉक

के लिए निकला तो मुझे मेरे ऑफीस का एक दोस्त मिल गया जो अपने बड़े भाई के पास आया था अपनी

फॅमिली को लेके,,,,फिर मैने उसको चाइ पर बुला लिया तो उसके बड़े भाई को अपने बेटे के लिए

हमारी शोभा पसंद आ गयी,,,और अब उन लोगो को शादी की भी जल्दी है क्यूकी लड़के ने

वापिस सिंगापुर जाना है वो वहीं जॉब करता है,,,उन लोगो को बहुत जल्दी है शादी की इसलिए

वो लोग कोर्ट मॅरिज करवाना चाहते है और उसके बाद रिसेप्षन की पार्टी हो जाएगी,,क्यूकी

उनकी फॅमिली ज़्यादा बड़ी नही है और ना ही ज़्यादा रिस्तेदार है उनके,,,,हम लोगो को भी लड़का

अच्छा लगा और हम लोगो ने भी हां करदी,,,,,ख़ान ने बोला था वो किसी को बुला लेगा कोर्ट

से जो शादी करवा देगा,,,,,

अरे डॅड इतना सब कुछ हो गया आप ने मुझे बताया क्यूँ नही,,,और ख़ान भाई ने भी कुछ नही

बताया,,,,,,और ना ही इन 2 पागलो ने ज़िक्र किया किसी बात का,,,,मैने सोनिया और कविता को

पागल बोला तो वो हँसने लगी साथ मे भुआ और डॅड भी

 
Back
Top