• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

कहीं वो सब सपना तो नही complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date


सुरेश पूरे गुस्से मे बोला और निशाना सोनिया की तरफ करते हुए गोली चला दी,,,सन्नी पहले

ही समझ गया था कि अब सुरेश गोली चला देगा इसलिए वो जल्दी से सोनिया के सामने आ गया

और सोनिया को धक्का दे दिया,,,सोनिया धक्का लगते ही ज़मीन पर गिर गयी और गोली लगी सन्नी

के लेफ्ट शोल्डर के थोड़ा नीचे हार्ट के उपर,,,,,

सन्नी को गोली लगी तो एक दम से सोनिया और कविता के मुँह से चीख के साथ सन्नी का नाम

निकल गया ,,,,,सुउुुउउन्न्ञननन्न्नययययययययययययी

गोली लगते ही सन्नी भी सोनिया के करीब ही ज़मीन पर गिर गया,,,,,इस से पहले सुरेश

दूसरी गोली चलाता कविता भाग कर ज़मीन पर गिरे हुए सन्नी के सामने आ गयी और सन्नी की

तरफ बढ़ने वाली गोली खुद के सीने पर खाने को तैयार हो गयी,,,,,

गोली लगने के बाद मैं ज़मीन पर गिरा हुआ था जबकि सोनिया ने भाग कर मुझे बाहों मे

भर लिया और मेरे जिस्म को पीछे से बाहों मे भरके खुद के आधे जिस्म को मेरी छाती पर

कर दिया और मुझे बचाने लगी,,,,कविता मेरे सामने आके घुटनो के बल बैठ गयी ,,,,

सुरेश हँसने लगा,,,,,अरे वाह मान गया सन्नी 2-2 माशूक़ ,,,,एक की खातिर तू मरने को

तैयार है और दूसरी तेरी खातिर मरने को तैयार है,,,,मारना तो मैं एक को चाहता हूँ लेकिन

लेकिन सोचता हूँ क्यूँ ना दोनो को मार दूं,,,इस से ज़्यादा तडपेगा तू,,ज़्यादा दर्द होगा जब

दोनो चाहने वालियों को मैं तेरे से दूर कर दूँगा,,,,

सुरेश ने निशाना किया कविता की तरफ और फिर एक गोली चली,,,,लेकिन जैसे ही गोली चली

सुरेश ज़मीन पर गिर गया,,,,मैं हैरान हो गया ,,,,,,तभी मेरी नज़र पड़ी गेट के पास

खड़े थे ख़ान भाई,,,,,ख़ान भाई के हाथ मे भी पिस्टल थी जिस से उन्होने सुरेश की

एक टाँग पर गोली मारी थी,,,जैसे ही सुरेश को गोली लगी वो ज़मीन पर गिरा और गिरते ही

अपना निशाना किया ख़ान भाई की तरफ और गोली चला दी लेकिन ख़ान भाई बच गये और गोली

लगी गेट पर ,,,,तभी ख़ान भाई ने दूसरी गोली चलाई तो सुरेश ज़मीन पर लेट गया

उसका वो हाथ जिसमे पिस्टल पकड़ी हुई थी वो भी ज़मीन पर गिर गया,,,,मैने देखा गोली

सुरेश के दिल पर लगी थी,,,,,शायद वो मर गया था,,,,

सुरेश के गिरते ही कविता जल्दी से सुरेश की तरफ भागी और उसके हाथ से पिस्टल लेने लगी

तभी ख़ान भाई ने उसको रोक लिया,,,,,,नही बेटी ऐसा मत करो,,,ये सबूत है उसपे उसकी

उंगलियों के निशान है,,,

कविता सुरेश के हाथ से पिस्टल लेके बाकी की बची हुई गोलियाँ भी सुरेश के सीने मे

उतार देना चाहती थी,,,,लेकिन ख़ान भाई ने उसको रोक लिया था,,,,ख़ान भाई ने कविता को

'पीछे से पकड़ा हुआ था इसलिए कविता गुस्से मे सुरेश के जिस्म पर टाँगे मारने लगी और

ज़ोर ज़ोर से चिल्ला कर बोलने लगी,,,,तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे सन्नी को गोली मारने की

मैं तेरा खून पी जाउन्गी ,,,कामीने,,,,कविता ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी और सुरेश की

लाश को अपने पैरो से मार रही थी,,,

तभी ख़ान भाई फिर से बोले,,,,बस कर बेटी वो मर गया है,,,,लेकिन कविता ख़ान भाई की

बात ही नही सुन रही थी,,,,

फिर मैं धीरे से बोला,,,,बस कर कविता वो मर गया है,,,,,कविता ने मेरी बात सुनी

और भाग कर मेरे पास आ गयी,,,,तभी ख़ान भाई ने कविता और सोनिया को मेरे जख्म पर

पूरा ज़ोर लगा कर दबाने को बोला,,,,

तुम दोनो जखम पर ज़ोर से दबा कर रखो,,,ज़्यादा खून मत निकलने देना,,,मैं आंब्युलेन्स

को कॉल करता हूँ,,,,

लेकिन ख़ान भाई अप यहाँ कैसे आए ,,,मैने हल्की आवाज़ मे ख़ान भाई से पूछा,,,,

मुझे इसके बाप का फोन आ गया था सन्नी,,,,उसने बोला था कि ये घर से पिस्टल लेके तेरे

घर तुझे मारने आ रहा है ,,,,उन्होने बोला था कि जो भी करना पड़े अबकी बार सुरेश को

कोई और ज़ुल्म मत करने देना,,,,मैं उनकी बात समझ गया था,,,मैने तेरे को फोन भी किए

कितनी बार लेकिन तूने फोन उठाया ही नही इसलिए मैं खुद तेरे घर तुझे बताने आ

गया था,,,,लेकिन यहाँ आके देखा तो ,,,,

अच्छा हुआ ख़ान बही आप सही टाइम पर आ गये,,,,,वरना आज मैं,,,,,

तभी सोनिया ने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया,,,,वो रो रही थी और रोती हुई मुझे कुछ भी

ग़लत बोलने से मना कर रही थी,,,,,,कविता भी मेरे पास बैठकर रो रही थी,,,

फिर ख़ान भाई पोलीस और आंब्युलेन्स को फोन करने लगे,,,मैं ज़मीन पर गिरा हुआ था मेरा

सर सोनिया की गोद मे था,,,,उसका एक हाथ मेरे जखम पर दबा हुआ था और एक हाथ मेरे सर

को प्यार से सहला रहा था ,,,,कविता का भी हाथ सोनिया के हाथ के साथ मेरे जखम को

दबा रहा था ताकि ज़्यादा खून ना निकले,,लेकिन खून बहुत निकल चुका था इसलिए मैं

सोनिया की गोद मे बेहोश हो गया,,,,,,

जब होश आया तो मैं हॉस्पिटल मे था,,,साइड पर एक नर्स खड़ी हुई थी जो मुझे खून की

बॉटल चढ़ा रही थी,,,,मैने हल्की आँखें खोली और इधर उधर देखा तो कविता मेरे

पास एक टेबल पर बैठी हुई थी,,,,,

मेरे शोल्डर पर पट्टी हो चुकी थी,,,कविता मेरे पास ही बैठी हुई थी और उसका सर

मेरे बेड पर टिका हुआ था,,शायद वो सो रही थी,,,,लेकिन जैसे ही मुझे होश आया और नर्स

बाहर की तरफ भागी तो कविता उठ गयी,,,,

मुझे होश आते ही नर्स डॉक्टर को लेने चली गयी,,,,नर्स के बार जाते ही कविता उठी और रोते

हुए मेरे गले लग गयी,,,,

अब कैसा है तू,,,,दर्द तो नही हो रहा,,,,,,,अभी मैं कविता की बात का जवाब देने ही

लगा था कि माँ भुआ और शोभा भी वहाँ आ गयी,,,

सब लोगो की आँखें नम थी,,,,सब की सब रो रही थी,,,,,,तभी पीछे से डॉक्टर आ गया

चलो चलो इतना रश मत लगाओ,,,,,थोड़ा आराम करने दो इसको,,,

तभी माँ बोली,,,,,,अब कैसा है मेरा बेटा डॉक्टर साहब,,, कोई ख़तरा तो नही,,,,

नही बहन जी, अब कोई ख़तरा नही,,,,,गोली जिस्म के आर पार हो गयी थी इसलिए गोली का

जहर नही फैला जिस्म मे और गोली ना तो दिल को टच हुई और ना ही किसी बोन को,,किस्मत

वाला है सन्नी,,,,,,जो बच गया,,,,,,लेकिन फिर भी गोली जिस्म से आरपार हुई है तो कुछ

डॅमेज तो हुआ है,,,,,खून भी बहुत निकला है,,,,लेकिन अब घबराने की ज़रूरत नही इसको

कुछ खून की बॉटल चढ़ानी है बाकी ये ख़तरे से बाहर है,,,,अब आप लोग बाहर जाओ

मुझे इसका चेक-अप करना है जल्दी ही इसको प्राइवेट रूम मे शिफ्ट कर दूँगा फिर आराम से

मिल लेना इसको,,,

डॉक्टर के कहने पर सभी लोग बाहर चले गये लेकिन कविता नही गयी,,,,डॉक्टर ने कविता

को भी बाहर जाने को बोला लेकिन उसने मना कर दिया,,,,,

तभी माँ बोल पड़ी,,,,,इसको यहीं रहने दीजिए डॉक्टर साहब,,,,जबसे आई है तबसे एक पल

के लिए दूर नही हुई ये सन्नी से,,,,

सब लोग बाहर चले गये लेकिन कविता मेरा हाथ पकड़ कर वहीं बैठी रही,,,,,डॉक्टर ने

कुछ चेक-अप किया और वहाँ से चला गया,,,फिर मुझे भी प्राइवेट रूम मे शिफ्ट कर दिया

गया,,,,,

 


रूम मे सब लोग थे ,,,,माँ भुआ,,,शोभा,,,कविता,,,,,लेकिन सोनिया नही थी,,,,

मेरी नज़रे सोनिया को तलाश कर रही थी,,,,भुआ ये बात समझ गयी थी,,,,,सन्नी सोनिया

यहीं है,,,अभी आ जाएगी थोड़ी देर मे,,,,,

लेकिन भुआ वो है कहाँ,,,,,,

तभी माँ बोली,,,,,,वो ब्लड दे रही है तुम्हारे लिए,,हम लोगो मे से किसी का ब्लड तेरे

ब्लड से नही मिलता सन्नी,,,,बस सोनिया का ही मिलता है,,,,वो तेरे लिए ब्लड दे रही है

तभी नर्स रूम मे आई,,,,आपकी बेटी आपको बुला है है,,,,उसने माँ को इतना बोला तो माँ

के साथ साथ शोभा भी सोनिया के पास चली गयी,,,,

भुआ मेरे बेड पर बैठ गयी और मेरे सर को सहलाने लगी,,,वो रो रही थी,,,एक तरफ कविता

मेरा हाथ पकड़ कर बैठी हुई थी वो भी रो रही थी,,,,

अरे अब रोना बंद भी करो,,,मैं बिल्कुल ठीक हूँ,,,डॉक्टर की बात नही सुनी थी क्या आप

लोगो ने,,,,अब रोना बंद करो इस से पहले मैं रोना शुरू कर दूं,,,,और याद रखा तुम

लोग मैं रोते हुए बहुत बुरा दिखता हूँ,,,,,,मेरी बात सुनके कविता और भुआ खुश हो गयी

भुआ डॅड कहाँ है,,,,

बेटा वो पोलीस स्टेशन गये है ख़ान भाई के पास,,,,,कुछ पेपर साइ करने थे,,,,अभी

आ जाएँगे थोड़ी देर मे,,,,,

तभी शोभा और माँ रूम मे आ गयी,,,,

माँ आप दोनो आ गयी ,,,,,सोनिया कहाँ है,,,,

शोभा ने मुझे दरवाजे की तरफ एशारा किया तो सोनिया दरवाजे के पास खड़ी होके रो रही

थी,,,,,,वहाँ क्यूँ खड़ी है पगली,,इधर आ अपने भाई के पास,,,मैने इतना बोला तो वो

भाग कर मेरे पास आ गयी और मेरे गले लग्के फूट फूट कर रोने लगी,,,,,

काफ़ी टाइम वो मेरे गले लग्के रोती रही ,,,फिर माँ ने उसको मेरे उपर से उठाया और चुप

करवाया,,,,

रो क्यूँ रही है बेटी तुझे तो खुश होना चाहिए जो इतना प्यार करने वाला भाई मिला है

तुझे तो तेरी खातिर मरने को भी तैयार हो गया आज,,,,तुझे तो खुशी होनी चाहिए,,,चल

अब रोना बंद कर,,,,बिल्कुल ठीक है तेरा भाई,,चल चुप कर अब,,,,,

चुप कर जा सोनिया ,,,,ये बात बोली शोभा ने और सोनिया को अपने गले लगा लिया,,,ये सब नाटक

कर रहा है सन्नी,,,,मेरी शादी मे नाचना नही पड़े इसलिए यहाँ हॉस्पिटल मे आके लेट

गया है,,इसको पता है ये नाचेगा मेरी शादी मे तो जोकर जैसा लगेगा,,,,नाचने से बचने

के लिए यहाँ आ गया है ये,,,,,

शोभा की इस बात से सभी लोग हँसने लगे,,,क्यूकी मुझे नाचना जो नही आता था,,,सच मे

जब भी नाचता मैं तो जोकर जैसा लगता था,,,,

मेरी वजह से सब लोग रो रहे थे लेकिन अब मेरे मज़ाक की वजह से खुश भी हो गये थे

अरे शोभा दीदी फ़िक्र मत करो,,,,जोकर ही क्यूँ ना बन-ना पड़े लेकिन आपकी शादी मे नाचूँगा

ज़रूर मैं,,,इतनी खुशी का दिन होगा जब आप दूर जाओगी हम लोगो से ,,,कब्से दुआ कर रहा

था अब जाके भगवान ने मेरी सुनी है,,,,,मैने इतना मज़ाक मे बोला तो सब लोग हँसने लगे,,

लेकिन शोभा हल्के गुस्से से मुझे देखती हुई बोली,,,,देखो ना माँ अपनी बहन को घर से

भेजने की कितनी जल्दी है इसको,,,,आपकी बेटी को ये ऐसे बोल रहा है आप कुछ बोलो ना इसको

मा,,,,

अरे मैं क्या बोलू,,,तुम दोनो की आपस की बात है,,,,वैसे भी पंगा तूने शुरू किया है अब

तू ही संभाल अपने भाई को,,,,मुझे क्या मेरी एक बेटी जाएगी तो दूसरी आ जाएगी,,,,

दूसरी,,,दूसरी कॉन माँ,,शोभा ने हैरान होते हुए पूछा,,,,

और कॉन,,,,,ये कविता,,,,,क्यूँ बेटी आएगी ना मेरे घर,,,सन्नी की दुल्हन बनके,,,,माँ ने

एक दम ऐसे बोला तो कविता शर्मा गयी और अपने सर मेरे बेड पर झुका लिया,,,,

अरे अरे शर्मा क्यूँ रही हो,,,,सोनिया ने सब बता दिया मुझे,,कैसे तू सन्नी की जान बचाने

के लिए उसके सामने आके बैठ गयी थी,,,,इतना प्यार करती है ना मेरे सन्नी से,,,बोल बनेगी

मेरे सन्नी की दुल्हन,,,,

कविता ने शरमाते हुए चेहरा उठाया और हल्की आवाज़ मे बोली,,,,जी आंटी जी,,,,

आंटी नही अब माँ बोलने की आदत डाल लो कविता भाभी,,,,,शोभा ने इतना बोला तो सब लोग

हँसने लगे,,,कविता की तो हालत खराब हो गयी थी,,,जहाँ सब लोग हंस रहे थे वहीं

सोनिया चुप खड़ी थी,,,,उसके फेस पर हल्की उदासी थी,,,,मैं हंसता हुआ उसके उदास फेस

को ही देख रहा था,,,,और भुआ का ध्यान हम दोनो की तरफ था,,,,,

कुछ देर बाद डॉक्टर आया और मुझे नींद का इंजेक्षन लगा गया,,,,हम सब लोग हँसी मज़ाक

कर रहे थे लेकिन सोनिया के फेस पर हल्की उदासी मेरे से छुप नही रही थी,,,वो हंस

ज़रूर रही थी लेकिन उसके चहरे पर उदासी थी जिसको वो झूठी हँसी से छुपाने की बड़ी

कोशिश कर रही थी लेकिन सब कोशिश मेरे सामने नाकाम थी,,,

बातें करते हुए मेरी आँखें बंद होने लगी,,,,और कब मैं सो गया पता ही नही चला,,,

शायद नींद के इंजेक्षन का असर हो गया था मेरे उपर ???

आधी रात के करीब मेरी आँख खुली,,रूम मे एक छोटा बल्ब जल ज़रा था जिसकी हल्की-हल्की

रोशनी थी रूम मे,,,मेरे बेड के अलावा रूम मे एक 3 सीट वाला सोफा पड़ा हुआ था जिसपर

भुआ सो रही थी,,,,साथ मे 2 चेर्स पड़ी हुई थी एक पर सोनिया बैठी हुई थी जबकि

दूसरी पर उसने अपने पैर रखे हुए थे,,उसकी आँखें खुली हुई थी ,,नींद का नाम-ओ-निशान

नही था उसकी आँखों मे,,,,मेरे राइट साइड पर एक छोटे टेबल पर कविता बैठी हुई थी

जो मेरे राइट हॅंड को पकड़े हुए सर को मेरे बेड पर झुका कर आराम कर रही थी,,,

तभी मैने उसको हल्के से आवाज़ दी,,,,,कविता,,,,,कविता,,,,

उसने सर उठाकर मुझे देखा और साथ ही सोनिया की नज़रे भी हम लोगो की तरफ हो गयी,,

क्या हुआ सन्नी,,,,,प्यास लगी है क्या,,,,,या वॉशरूम जाना है,,,,

नही मुझे प्यास भी नही लगी और वॉशरूम भी नही जाना,,,,

तो फिर,,,तुम उठ क्यूँ गये,,,,चलो सो जाओ और आराम करो,,,,

मैं तो आराम कर लूँगा लेकिन तुम भी तो आराम करो,,,,कब तक बैठी रहोगी ऐसे टेबल पर

मेरी बात सुने कविता ने सोफे और चेर्स की तरफ देखा मैं समझ गया ,,,,उसके लिए जगह

नही थी,,,,,तभी मैं थोड़ा लेफ्ट साइड की तरफ खिसक गया और राइट साइड मे थोड़ी जगह

बन गयी,,,,,,मैने उसके इशारा किया अपने साथ लेट जाने का,,,,

उसने मना कर दिया,,,

मैने दोबारा हल्का ज़ोर देकर कहा तो उसने सोनिया की तरफ देखा,,,सोनिया ने भी उसको इशारे

मे मेरे साथ लेटने को बोल दिया,,,,,,

कविता मेरी राइट साइड पर लेट गयी और मेरे राइट शोल्डर पर सर रखके एक हाथ को मेरे

पेट पर रखा और आराम करने लगी,,,,,,मैने देखा जैसे ही कविता लेट गयी मेरे साथ तो

सोनिया की भी आँखें बंद हो गयी,,,,आँखें बंद करते टाइम उसने मेरी तरफ देखा तो उसकी

आँखों मे हल्की उदासी थी,,,,जो मुझे भी उदास कर रही थी,,,,,,,

कविता मेरे साथ चिपक कर लेट गयी थी और शायद उसकी आँख लग गयी थी,,मैने भी अपनी

आँखें बंद की और वापिस नींद के आगोश मे चला गया,,,,,

 


सुबह शोभा मुझे और कविता को उठा रही थी,,,,,,उठो लैला मजनू सुबह हो गयी,,,,इतनी

बात सुनके मैने आँखें खोली तो भुआ,,सोनिया और माँ सोफे पर बैठी हुई थी,,,,डॅड चेयर

पर और शोभा मेरे बेड के पास खड़ी मुझे उठा रही थी,,,,

शोभा की आवाज़ सुनके मैं उठ गया और मेरे साथ सो रही कविता भी उठ गयी,,कविता ने जैसे

ही उठकर शोभा की तरफ देखा जो हमे उठा रही थी,,,,उसने उठकर शोभा को गुड मोर्निंग

बोले,,,,,लेकिन जैसे ही उसकी नज़र रूम मे बैठे बाकी लोगो पर गयी वो शर्मसार हो गयी

क्यूकी वो सब लोगो के सामने मेरे साथ एक ही बेड पर लेटी हुई थी,,,,,वो जल्दी से उठी और

वॉशरूम की तरफ भाग गयी,,,,

उसके भागने से रूम मे सब लोग हँसने लगे,,,,

तभी डॅड बोले,,,,,तुम सही कह रही थी सरिता,,,लगता है अब शोभा के साथ साथ सन्नी

की भी शादी कर देनी चाहिए,,,,

सब लोग हँसने लगे और मेरी तरफ देखने लगे,,मैं भी हल्का सा शरमा गया था,,,लेकिन

मैने देखा कि सोनिया अभी भी उदास आँखों से मुझे देख रही थी,,,,

कुछ देर मे कविता वॉशरूम से बाहर आ गयी वो अभी भी शर्मा रही थी,,,,

अब क्यूँ शर्मा रही हो कविता बेटी अब तो चोरी पकड़ी गयी,,,कविता शरमाती हुई मेरे पास

आके टेबल पर बैठ गयी,,,,,

ना ना अब यहाँ नही बैठा तुमने बेटी,,,अब तुम घर जाओ और कुछ आराम करो,,,अब सरिता

और शोभा यहाँ रुकेगी सन्नी के पास,,,,,तुम गीता और सोनिया घर जाके कुछ देर आराम करो

प्लज़्ज़्ज़ अंकल मुझे यहाँ रहने दीजिए ना सन्नी के पास,,,वैसे भी मैने आराम कर लिया था

रात को,,,कविता ने सर झुका कर बोला,,,,वो डॅड से नज़रे नही मिला रही थी,,

पहले तो मुझे अंकल नही दाद बोलो,,,,,और रही बात आराम की वो तो हम सबने देख लिया है

की कितना आराम किया तुम दोनो ने,,,,,

डॅड की बात से फिर से रूम मे हँसी गूँज उठी,,,,कविता तो शरम से पानी पानी हो गयी

थी,,,,

तभी भुआ सोनिया उठी और मेरे पास आके मुझे मिली और घर जाने लगी,,,,सोनिया का दिल नही

कर रहा था घर जाने को,,,,ये उसकी आँखों से पता चल रहा था मुझे,,,,वो घर जाने

की बात से उदास थी,,,,तभी डॅड फिर से कविता को बोले ,,,,,चलो चलो उठो बेटी,,घर

जाओ,,,,,थोड़ा आराम करना फिर आ जाना,,,,वैसे भी तेरा सन्नी यहीं है कहीं भाग नही

रहा,,,,

कविता कुछ नही बोली बस शरमाते हुए उठी और आके सोनिया के पास खड़ी हो गयी,,,,फिर वो

दोनो भुआ के साथ घर चली गयी,,,,,

दाद भी थोड़ा कम से चले गये,,,,माँ और शोभा मेरे पास रही,,,,,,

कुछ टाइम बाद शोभा के सास ससुर भी मुझे देखने आए,,,,जब शोभा के सास ससुर जाने

लगे तो शोभा और माँ उनको बाहर तक छोड़ने गयी,,,,,,

जैसे ही वो लोग बाहर गये सुरेश का बाप अंदर आ गया,,,,,

कैसा है सन्नी,,,,तबीयत कैसी है,,,,,वो मेरा हाल चाल तो पूछ रहा था लेकिन उसकी

आँखें नम थी,,वो रोया हुआ लग रहा था,,,,रोता भी क्यूँ नही कल बेटा मरा था उसका

जीई मैं ठीक हूँ,,,,,आइएम सौरी अंकल,,,,वो सुरेश,,,

वो मेरे पास आके बैठ गये,,,,,,उसके साथ वहीं हुआ जो उसने खुद अपनी किस्मत मे लिखा था

,,कम से कम कोई और जुर्म करने से तो बच गया,,,,क्या होता अगर तुझे ये तेरी फॅमिली को

कुछ हो जाता,,,,,मुझे किसी पर गुस्सा नही है सन्नी,,,,मैने पहले जो कुछ किया उसको

बचाने क लिए किया,,,,,आख़िर वो मेरा बेटा था,,,,लेकिन कोर्ट रूम मे वो वीडियोस देखकर

मुझे उसपे गुस्सा आने लगा,,,मैं सोच भी नही सकता था मेरा बेटा इतनी गिरी हुई हरकते

कर सकता है,,,,,अच्छा हुआ अब वो मर गया,,,,ऐसा बेटा होने से अच्छा था भगवान मेरे को

रितिका जैसी एक और बेटी दे देता,,,,,इतना बोलकर वो फूट फूट कर रोने लगा,,,,

वो अकेले गुनहगार नही था अंकल जी,,,,उसने अकेले ने कुछ नही किया,,,,हो सकता है उसने

अमित और बाकी दोस्तो की बातों मे आके ऐसा काम किया हो,,,

जो भी हो सन्नी,,,,काम तो उसने बहुत बुरा किया,,,,उसकी सज़ा भी मिल गयी उसको,,,और अब बाकी

लोगो को भी सज़ा ज़रूर मिलेगी,,,,,कल मैने ख़ान को फोन करके बता दिया था जब सुरेश

तुझे मारने के लिए घर से निकला था,,,,,पहले तो मैं उसको पोलीस से बचाता रहा,,,अपने

ही घर मे छुपा कर रखा उसको लेकिन जब वो तुझे मारने निकला तो मैने भी ख़ान को वो सब

करने को बोला जो ज़रूरी था,,,,,,,ख़ान ने अपना काम बखूबी किया और अब मेरी बारी है,

मेरे से अब जो बन पड़ेगा मैं करूँगा,,,,,अब मैं भी तेरा साथ दूँगा सन्नी,,,बेटी मेरी

बाहर सुरक्षित है,,,,बेटा मेरा मर गया,,,,अब मुझे भी उन लोगो का कोई डर नही,,,,

इतना बोलकर वो वहाँ से चला गया लेकिन जाते जाते मुझे कोई दिलासा देता गया,,,,,,,

अब पता नही ये क्या करने वाले है,,,,मुझे उनकी बातों से कुछ समझ नही आया,,,लेकिन

इतना विश्वास हो गया था कि अब ये जो भी करेंगे ठीक ही करेंगे,,,,जो बंदा अपने ही

बेटे को मरवा सकता है उसको कोई और जुर्म करने से रोकने के लिए वो बंदा बाकी लोगो को सज़ा

दिलवाने के लिए कोई भी जोखिम लेने को तैयार हो जाएगा,,,,,

सोनिया और कविता को घर गये अभी 2 अवर्स ही हुए थे कि दोनो वापिस आ गयी,,,,,

अरे तुम दोनो इतनी जल्दी आ भी गयी,,,,आराम तो कर लेना था थोड़ी देर,,,,,

माँ हम लोगो ने रात को आराम कर लिया था,,,,ये बात बोली सोनिया ने,,,,,

हां हाँ जानती हूँ कितना आराम किया,,,,सीधी तरह क्यूँ नही बोलती कि तू अपने भाई के पास

रहना चाहती है,,,,,चलो ठीक है रहो तुम दोनो सन्नी के पास वैसे भी मुझे और शोभा

को थोड़ी शॉपिंग करनी है,,,,,इतना बोलकर माँ ने मेरे फोरहेड पर हल्की किस की और वहाँ

से चली गयी,,,,,,

फिर पूरा दिन सोनिया और कविता मेरे पास रही,,,रात भी ज़िद्द करके दोनो यहीं रुक गयी थी

अगले दिन शोभा की शादी थी,,,मैं शादी पर नही गया क्यूकी मुझे डॉक्टर ने छुट्टी नही

दी थी,,,,वैसे भी ज़्यादा लोग नही थे वहाँ पर,,,,इधर से माँ भुआ डॅड और सोनिया थे

उधर से लड़का ,लड़के के माँ बाप और चाचा चाची थे ,,,,लड़के का चाचा डॅड का अच्छा

दोस्त था जिसने रिश्ता करवाया था,,,,शादी करवाने वही आदमी आया था कोर्ट से जिसने करण

और रितिका की शादी करवाई थी,,,,,वो ख़ान भाई का दोस्त था ख़ान भाई ने उसको बुलवाया

था

शादी के बाद एक छोटा सा फॅमिली लंच था,,,,,शादी के बाद शोभा अपने ससुराल चली

गयी थी,,,,,,

कविता शादी पर नही गयी,,,,वो यहीं थी मेरे पास,,,,और अगले 2 दिन भी वो यहीं रही

मेरे पास,,,ज़िद्द करती गयी और मोम डॅड उसकी ज़िद्द मानते गये,,क्यूकी अब उनकी नज़र मे वो उनकी

बहू थी,,,,,इस बात से सब लोग खुश थे बट सोनिया खुश न्ही थी,,,,

फिर आया रिसेप्षन की पार्टी का दिन,,,,,डॉक्टर ने भी मुझे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी थी,

क्यूकी हॉस्पिटल मे भी आराम ही करना था जो मैं घर जाके भी कर सकता था,,,

 
घर जाके अपने रूम मे अपने बेड पर आराम कर रहा था,,,,,घर मे खूब रोनक थी,,मैं

बाहर निकलना चाहता था लेकिन घर वालो ने मना किया था,,,पार्टी रात को थी इसलिए रात

तक मुझे आराम करने को बोला गया था,,,,,डॉक्टर ने भी ज़्यादा चलने फिरने से मना किया

था क्यूकी जखम अभी भरा नही था,,,टाँके भी अच्छी तरह से सूखे नही थे,,खून

बहने का डर था ज़्यादा चलने फिरने से,,,,,

लेकिन फिर भी मेरे से रहा नही गया,,,टाइम कोई 2-3 बजे के आस पास था,,,मैं नीचे आया

तो देखा घर पूरा सज़ा दिया गया था,,,,फ्रंट गार्डन मे ड्ज लगा था,,,,डॅन्स का प्रोग्राम

वहीं था जबकि पीछे वाले गार्डन मे खाने पीने का बंदोबस्त किया गया था,,,मैं नीचे

घूम ही रहा था तभी मेरी नज़र पड़ी माँ और डॅड के रूम मे,,,,वहाँ रेखा मनोहर और

मामा बैठे हुए थे,,,वो लोग कुछ बात कर रहे थे,,,,मैं आराम से रूम के दरवाजे के

पास जाके खड़ा हो गया और उन लोगो की बातें सुन-ने लगा,,,,

देखने पर तो मुझे मामा रेखा और मनोहर नज़र आ रह थे लेकिन बातों को सुनकर पता

चला माँ भुआ और डॅड भी वहीं थे उस रूम मे,,,,

सुरेंदर,,,,,,अशोक तूने तो मुझे माफ़ कर दिया लेकिन अभी भी किसी से माफी माँगनी है

मुझे,,,,,

अशोक,,,,,,,माफ़ तो करना ही था तुझे सुरेंदर ,,,तूने जो किया उसमे तेरी जितनी ग़लती थी

उतनी ही ग़लती मेरी भी थी,,,सज़ा का हक़दार तो मैं भी हूँ,,,,

गीता ,,,,,हां सुरेंदर ग़लती हम सब से हुई है,,,हर कोई सज़ा का हक़दार है लेकिन अब

इन बातों का कोई फ़ायदा नही,,,,जो होना था हो गया,,,अब हमे आगे की सोचनी है,,,,

सुरेंदर,,,,,आगे की बाद मे पहले मुझे किसी से माफी माँगनी है,,,,

गीता ,,,,,,किस से माफी माँगनी है अब तुझे ,,,,

सुरेंदर,,,,,,,सन्नी से,,,,,,वही रहता है जिसको सब कुछ बताना है और माफी माँगी है

,,,,सोनिया को इस सब के बारे मे कुछ नही पता इसलिए उस से कोई बात नही करनी,,वैसे

है कहाँ सन्नी,,,,,

अशोक,,,,,,अपने रूम मे आराम कर रहा है,,,,अभी कुछ मत बताना उसको,,,पहले से बेचारा

बहुत दुखी है,,,,,आज ही तो हॉस्पिटल से आया है,,,,और वैसे भी आज जशन का माहौल है

घर मे ,,,,अभी कुछ मत बताना ,,सही टाइम आने दो हम सब बता देंगे उसको,,

मनोहर,,,,,,,,,अब आप लोगो को ज़्यादा देर नही करनी चाहिए,,,,सब कुछ सच सच बता

देना चाहिए,,,,क्यूकी सच बताने मे जितनी देर होती है उतना ही बुरा असर होता है लोगो

पर,,,,सच जितनी जल्दी सामने आ जाए उतना ही अच्छा है,,,,मनोहर ये बात रेखा की तरफ

देखकर बोल रहा था,,,,रेखा की आँखों मे आँसू आ गये,,वो मनोहर के गले लग गयी,,,

अरे अब तू क्यूँ रो रही है,,,,,तूने तो सब बता दिया ना मुझे,,,,अब ये रोना धोना किस

बात का,,,,,,चल चुप कर,,,,

सुरेंदर ,,,,,,,ठीक कहा मनोहर ,,,,सच जितनी जल्दी सामने आ जाए उतना अच्छा होता है,

मैं भी जल्दी से अब सब कुछ बता दूँगा ,,,,,बस सन्नी कुछ ठीक हो जाए,,,,

फिर वो लोग कुछ और बातें करने लगे,,,,मैं दरवाजे से हटके जाने ही लगा था कि मेरा

ध्यान गया पीछे की तरफ जहाँ खिड़की पर सोनिया खड़ी हुई थी,,,,वो भी अंदर की सारी

बातें सुन रही थी,,,,

मैने पलट कर उसकी तरफ देखा तो वो अंजान बनते हुए,,,,तू यहाँ क्या कर रहा है चल

उपर जाके आराम कर,,,,डॉक्टर ने ज़्यादा चलने फिरने से मना किया है ना,,,,चल जा उपर

और रात पार्टी के पहले अपने बेड से नही उठना,,,,,

वो अंजान बन-ने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन वो ये भी जान गयी थी कि मैने उसको '

बातें सुनते हुए पकड़ लिया था,,,फिर भी वो अंजान बनती जा रही थी,,अंजान बनते हुए

उसने मेरा हाथ पकड़ा और उपर मेरे रूम मे ले गयी,,,,जहाँ कविता बैठी हुई थी,,

ये ले संभाल अपने सन्नी को,,,,डॉक्टर ने बोला है आराम करने को लेकिन ये पूरे घर मे

घूम रहा है,,,,अब इसको रूम से बाहर नही जाने देना,,,समझी,,,,,,सोनिया ने इतना बोला

तो कविता ने आगे बढ़ कर मेरा हाथ पकड़ा और मुझे बेड पर लेटा दिया,,,,

मैं 2 मिनिट के लिए वॉशरूम क्या गयी तू रूम से बाहर चला गया,,,,चल अब आराम कर और

अगर रात से पहले बाहर निकला तो मेरे से बुरा कोई नही होगा,,,,

मैं बेड पर लेट गया,,,,,और सोचने लगा अब ऐसी क्या बात है जो मुझे बताई जानी है'

लेकिन सोनिया को नही,,,,,और ऐसी क्या ग़लती हुई मामा से जिसके बारे मे मुझे बताया जाना

ज़रूरी है,,,ऐसा क्या सच है जो सामने आना ज़रूरी है,,,,,जिसके बारे मे शायद रेखा भी'

जानती है और उसने मनोहर को भी बता दिया,,,,,मुझे कुछ समझ नही आ रहा था,,,,,

मैं रात पार्टी टाइम तक अपने रूम मे ही रहा,,,मामा मनोहर और रेखा मेरा हाल चाल पूछ

कर नीचे चले गये थे किसी ने कोई ज़्यादा बात नही की थी,कोई सच नही बताया था मुझे

,,उन लोगो को सही टाइम का इंतजार था और सही टाइम कब होगा ,,,कॉन जाने,,,,,,

रात करीब पार्टी शुरू होने से पहले 7 बजे के करीब मैं तैयार हो गया,,,,बड़ी मुश्किल

हो रही थी कोट पेंट पहन-ने मे,,,,अभी तो शर्ट के बटन भी बंद नही हो रहे थे

तभी दरवाजे से चलके अंदर की तरफ कविता आ गयी,,

उसने मेरी हेल्प की तैयार होने मे,,,,,शर्ट पहनाई,,,,फिर पेंट भी और शूज भी,,,ऐसे

तैयार कर रही थी मुझे जैसे कोई माँ अपने बच्चे को तैयार करती है या कोई बीवी अपने पति

को,,,,,

मुझे तैयार करके वो खुद चली गयी तैयार होने,,,,,मैं तैयार होके रूम से बाहर आ गया,,

अभी मेहमान तो नही आए थे क्यूकी पार्टी टाइम 10 बजे का था,,,,मैं जल्दी तैयार हो गया

था,,,,,सभी मर्द जल्दी तैयार हो गये थे लेकिन औरतें अभी तैयार हो रही थी और रब जाने

कितना टाइम लगना था इन लोगो को तैयार होने मे,,,मैं नीचे नही गया और उपर के फ्लोर पर

ही घूम रहा था,,,मैं भुआ के ड्रॉयिंग रूम की खिड़की से बाहर फ्रंट गार्डन का नजारा

देख रहा था,,,,

काफ़ी टाइम मैं वहीं खड़ा रहा,,,,फिर दिल किया पीछे वाले गार्डन मे जाके देखने को,

देखु तो सही खाने मे क्या बन रहा है,,,,,बाकी सब की टेन्षन नही थी,,,बस देखना था

चिकन है या नही,,,,वैसे तो हम पंजाबी थे बिना चिकन के पार्टी करना मुश्किल था

हम लोगो के लिए लेकिन फिर भी एक चीज़ ज़रूरी थी,,,तंगड़ी कबाब,,वही देखने के लिए

मैं पीछे की तरफ जा रहा था,,,,तभी मेरी नज़र पड़ी भुआ के रूम मे,,,जहाँ सोनिया

खड़ी हुई थी ड्रैसिंग टेबल के सामने,,,,,

उसने लाल रंग का पेटिकोट पहना हुआ था और साथ मे लाल रंग का ब्लाउस ,,,,वो ब्लाउस की

डोरी को बाँधने की कोशिश कर रही थी जिसमे उसको मुश्किल हो रही थी,,,मेरा ध्यान उसकी

चिकनी पीठ पर टिका हुआ था,,साथ साथ मैं मिरर मे उसके मासूम और खूबसूरत चेहरे

को भी देख रहा था,,,,उसका ध्यान एक दम से मेरी तरफ आ गया,,,,वो थोड़ी परेशान हो

गयी,,,,उसके हाथ अभी भी उसकी पीठ पर थे,,,,वो पीठ पर ब्लाउस की डोरी बाँधती हुई

मेरी तरफ देख रही थी मिरर मे,,,,

उसकी तरफ देखते हुए मेरे कदम आगे रूम की तरफ बढ़ने लगे,,,,वो थोड़ा डर गयी उसने सर

को ना मे हिला कर मुझे अंदर आने से मना किया लेकिन मैं आगे की तरफ बढ़ता गया,,वो

थोड़ा डर गयी,,,वो समझ गयी थी अब मैं उसके करीब आ रहा हूँ,,,वो जल्दी से पलट

गयी और मेरी तरफ देखते हुए मुझे अंदर आने से मना करने लगी,,,,वो अपने सर को ना मे

हिला रही थी लेकिन मैं आगे बढ़ता जा रहा था,,,तभी दरवाजे के पास जाके मैने दरवाजे

की नॉब को पकड़ा और दरवाजा बंद करने लगा,,,,जब मैं दरवाजा बंद कर रहा था तो सोनिया

की तरफ देख रहा था,,,वो मेरी इस हरकत से खुश हो गयी थी,,मैं उसके पास नही गया

था बल्कि दरवाजा बंद करके वहाँ से आगे की तरफ चला गया था,,,,

मैं चलके पीछे वाले गार्डन की तरफ चला गया और छत से नीचे की तरफ देखने लगा

मैं देखने तो कुछ और आया था लेकिन मेरा ध्यान सोनिया की तरफ था,,उसका चेहरे मेरी

नज़रो से दूर ही नही हो रहा था,,,,हालाकी अब उसका हंसता हुआ चेहरा देखकर आया था

लेकिन मुझे उसका उदास चेहरे भी याद रहा रहा था जब माँ ने कविता से मेरी शादी की

बात की थी तो सोनिया उदास हो गयी थी,,,,ये बात नही सोनिया को मेरे और कविता से कोई जलन

थी लेकिन पता नही क्यूँ फिर भी वो उदास थी,,,,,मुझे उसकी उदासी की वजह जान-नी थी,,

मैं यहाँ खड़ा हुआ नीचे देख रहा था तभी डॅड मेरे पास आ गये,,,,,अरे तैयार हो गये

तुम सन्नी बेटा,,,,लेकिन ये क्या,,,,,तूने टाइ क्यूँ नही पहनी,,,,,,

तभी डॅड की नज़र पड़ी कविता पर जो भुआ के रूम से तैयार होके बाहर आ गयी थी,,,अरे

कविता बेटी सुनो ज़रा,,,,

कविता चलके हम लोगो के पास आ गयी,,,,,मैने कविता को देखा तो देखता रह गया,,,उसने

भी लाल रंग की साड़ी पहनी थी जैसी सोनिया पहन रही थी,,,,बाल खुले थे उसके,,हाथ

से लेके एल्बो तक उसकी बाजू चूड़ियों से भरे हुए थे,,,हल्के जेवर भी पहने हुए थे

और हल्का मेक-अप भी किया हुआ था,,,,,लाल रंग की लिपस्टिक भी लगाई हुई थी,,,,मैने

उसको देखा तो नज़र हटाने को दिल नही किया उस पर से ,,

जी अंकल अपने मुझे बुलाया,,,,,,,कविता पास आके बोली,,,

अंकल नही डॅड बोला करो अब तुम,,,,अब तुम इस घर की बहू बन-ने वाली हो,,,

कविता शरमा गयी और सर झुका लिया,,,,जी डॅड अपने मुझे बुलाया,,,,

हां ये हुई ना बात,,,देखो ना बेटी ये तैयार तो हो गया लेकिन टाइ नही पहनी इसने,,तुम ज़रा

इसको टाइ पहना दो,,,,

सौरी डॅड मैं भूल गयी थी,,,,अभी पहना देती हूँ,,,चलो सन्नी मेरे साथ,,,,उसने इतना

बोला तो मैं जैसे दौर पतंग के साथ खींची चली जाती है मैं भी कविता के साथ साथ

खींचा चला गया,,,,

 


रूम मे जाके कविता ने टाइ उठाई और मेरे सामने आके मुझे टाइ पहनाने लगी,,,वो मुझे टाइ

पहना रही थी और मैं उसके चहरे को देख रहा था,,,,उसने हर शृंगार किया हुआ था लेकिन

सब हर शृंगार उसके एक मासूम फेस के आगे फीका पड़ गया था,,,बहुत क्यूट लग रही थी वो

ऐसे क्या देख रहे हो सन्नी,,,,,,उसने टाइ लगाते हुए पूछा,,,,

कुछ नही,,,बस देख रहा हूँ कि इतनी खूबसूरत परी मेरी किस्मत मे कैसे आ गयी,लगता

है उपर वाले ने किस्मत लिखते टाइम ध्यान नही दिया,,,यकीन नही हो रहा कि इतनी खूबसूरत

लड़की मेरी बीवी बन-ने वाली है,,,,,,

वो शरमा गयी और फिर बोली,,,,,चल चल तुझे किसने कहाँ मैं बीवी बनूँगी तेरी,,,,सपना

आया था क्या,,,,,इतना बोलकर वो हँसने लगी,,,,

सपना ही सही,,,एक बार मेरी बीवी बनी तो सही तुम,,,,और मुझे तो ये सब भी सपना लग

रहा है जो तुम मेरे इतने करीब खड़ी हो,,,

ये सपना नही हक़ीक़त है बुद्धू,,,इतना बोलकर उसने मेरे सर पर हाथ मारा,,,,यकीन हुआ या

नही,,,

ऐसे थोड़ी होने लगा यकीन ,,इतना बोलकर मैने उसको एक हाथ से अपने करीब खींच लिया

वो भी आराम से मेरे करीब आ गयी,,,फिर मैने उसके लाल सुर्ख होंठों पर एक किस करदी

कुछ टाइम हम लोग ऐसे ही खड़े किस करते रहे,,,,,फिर वो मेरे से अलग हुई,,,उसके लिप्स

से लिपस्टिक उतर चुकी थी,,,उसके लाल सुराख होंठ अब गुलाबी हो गये थे,,,उसके होंठों

से थोड़ी लिपस्टिक मेरे होंठो पर लग गयी थी,,,,वो पीछे हटके अपने हाथ से मेरे होंठों

से लिपस्टिक सॉफ करने लगी,,,,

तभी सोनिया रूम मे आ गयी,,,,सोनिया को देखकर दिल खुश हो गया,,वो भी लाल साड़ी मे थी

कविता और सोनिया दोनो एक जैसी लग रही थी,,बस सोनिया हाइट मे थोड़ी बड़ी थी कविता से

लेकिन दोनो की दोनो बहुत खूबसूरत थी,,,,तय करना मुश्किल था कॉन ज़्यादा खूबसूरत है

अरे तूने भी लिपस्टिक लगानी शुरू करदी सन्नी,,,वैसे अच्छा कलर है ,,,

सोनिया की बात से कविता शरमा गयी,,,,

अब तू भी शुरू हो गयी सोनिया,,,

सौरी बाबा,,,क्या करूँ आदत से मजबूर हूँ,,,लेकिन तुम लोग अपनी आदत सुधार लो,,,जब भी

कुछ ऐसा करना हो दरवाजा बंद कर लिया करो,,,,,माँ बाहर खड़ी होके सब देख रही थी

जब तुम दोनो मस्ती मे मगन थे,,,,

हयी मैं मर गयी,,,,माँ ने सब कुछ देख लिया क्या,,,कविता थोड़ी डरते हुए बोली,,

और नही तो क्या,,,तभी कहती हूँ दरवाजा बंद कर लिया करो,,,,चल अब जल्दी शोभा दीदी

और जीजू भी आ गये है,,,,,,

लेकिन मैं माँ के सामने कैसे जाउन्गी,,,,,,मुझे डर लग रहा है,,,सब कुछ देख लिया आज

माँ ने और सब इस सन्नी की ग़लती है,,जब देखो शुरू हो जाता है,,,

अच्छा अब मेरी ग़लती हो गयी सारी,,,मुझे कोई टेन्षन नही माँ के सामने जाने मे,,मैं चला

तुझे आना है तो आ वरना रूम मे खुद को लॉक करके बैठ जा,,,,मैने इतना बोला और वहाँ

से हंसता हुआ नीचे चला गया,,,,,

कविता भी डरी सहमी हुई सोनिया के साथ नीचे आ गयी,,,,

पार्टी खूब मस्त चल रही थी,,,,डॅड के बॅंक के काफ़ी दोस्त आए थे जिनको मैने हमेशा

बॅंक मे देखा था,,,,,भुआ की बुटीक की सहेलियाँ आई हुई थी,,,,,शोभा के कुछ कॉलेज

फ्रेंड्स थे,,,,,आस पड़ोस वाले थे जो आज पहली बार हमारे घर आए थे,,,क्यूकी अक्सर

घर मे चुदाई का खेल चलता था इसलिए ना तो डॅड किसी को घर लेके आते थे और ना ही

भुआ या माँ,,,,,माँ ने तो सफाई करने के लिए भी किसी को नही रखा था,,,,

पार्टी मे सब लोग शोभा और उसके पति को बधाई दे रहे थे,,,,मेरा हाल चाल भी सब लोगो

ने पूछा था,,,,लेकिन इसके साथ साथ एक और बात थी ,,,माँ और डॅड कविता को सब से मिलवा

रहे थे,,,,अब पक्का हो गया था कविता इस घर की बहू बन-ने वाली थी,,,लेकिन सोनिया

इस बात से खुश नही लग रही थी,,,,वो कविता के साथ साथ चल रही थी लेकिन झूठी

मुस्कान थी उसके चहरे पर,,,,मुझे उसकी उदासी की वजह समझ नही आ रही थी,,,

खैर पार्टी अच्छी चली,,,,खूब मस्ती की सब लोगो ने,,,सब लोग अपने अपने घर चले गये

शोभा भी चली गयी थी,,,,,अब बस फॅमिली वाले ही रह गये थे,,,,कामिनी भाभी और सूरज

भाई भी अभी यहीं थे,,,,,,,,

तभी डॅन्स फ्लोर पर गीता भुआ ने एक रोमॅंटिक ट्रॅक प्ले कर दिया,,,,म्यूज़िक ऑन होते ही

माँ डॅड के साथ,,,,भुआ सुरेंदर के साथ,,,,रेखा मनोहर के साथ और कामिनी सूरज के साथ

बाहों मे बाहें डालके डॅन्स करने लगी,,,,तभी कविता भी चलके मेरे पास आ गयी,,और

अपने हाथ मेरे गले मे डालके डॅन्स करने लगी,,,,मेरा एक हाथ तो पट्टी से बँधा हुआ था

जो पट्टी मेरे गले मे पड़ी हुई थी,,,,,लेकिन मैने दूसरा हाथ उसकी कमर पर रख दिया और

डॅन्स करने लगा,,,,,वो मुझे पार्टी की बातें बताने लगी कि कैसे माँ ने उसको सब लोगो

से मिलवाया,,,म्यूज़िक काफ़ी लाउड था इसलिए वो मेरे कान के पास आके बोल रही थी,,,वो मेरे

से हाइट मे छोटी थी इसलिए मैने भी अपना सर झुका कर अपने कान को उसके करीब कर

दिया था,,,,

मैं उसकी बातें तो सुन रहा था लेकिन मेरा ध्यान था सोनिया की तरफ,,,क्यूकी रोमॅंटिक

ट्रॅक पर सब डॅन्स कर रहे थे एक सोनिया ही अकेली दूर खड़ी हुई थी,,,मैं उसकी तरफ

ही देख रहा था,,,तभी भुआ ने मेरी तरफ देखा और सोनिया के पास चली गयी और सोनिया को

लेके डॅड के पास,,,,,माँ पीछे हट गयी और डॅड सोनिया के साथ डॅन्स करने लगे,,,माँ पीछे

हटके चेयर पर बैठ गयी थी,,

सोनिया डॅड के साथ डॅन्स करने लगी,,,डॅड की पीठ थी मेरी तरफ जिस से सोनिया के चहरे

को देख पा रहा था मैं,,,,मेरा चहरे भी उसकी तरफ था जबकि कविता की पीठ थी उस

तरफ,,,,मैं अभी भी सोनिया की तरफ देख रहा था वो बहुत ज़्यादा उदास लग रही थी मुझे

भुआ हम दोनो की तरफ देख रही थी,,,तभी कविता का ध्यान भी मेरी तरफ आया तो उसने

मेरी नज़रो का पीछा किया और पलट कर देखा तो सोनिया डॅड के साथ डॅन्स कर रही थी और

मेरा ध्यान सोनिया की तरफ था,,,,वो समझ गयी और जल्दी से हटके डॅड के पास चली गयी और

डॅड को अपने साथ डॅन्स करने क लिए बोलने लगी,,,,,जैसे ही डॅड ने सोनिया को खुद से अलग

किया तो कविता ने जल्दी से सोनिया को मेरे करीब कर दिया और खुद डॅड के साथ डॅन्स करने

लगी,,,,

मैं कविता की इस हरकत से खुश हो गया और सर झुका कर कविता का शुक्रिया अदा किया,,,

उसने भी सर झुका कर नज़रे हो नज़रों मे मुझे वेलकम बोला और डॅड के साथ डॅन्स करने

लगी,,,,

सोनिया मेरे करीब खड़ी हुई थी,,,,वो थोड़ी डरी हुई थी,,,,कविता ने ये सब इतनी जल्दी

मे कर दिया तो मुझे और सोनिया को पता ही नही चला,,सोनिया मेरे करीब थी लेकिन आगे नही

बढ़ रही थी,,,,तभी मैने अपने राइट हॅंड को उसकी तरफ किया और उसको डॅन्स के लिए पास

आने को बोला,,,,,उसने डरते डरते अपना लेफ्ट हॅंड मेरे राइट हॅंड मे पकड़ा दिया,,मैने बड़े

प्यार से उसको अपने करीब किया और उसका लेफ्ट हॅंड अपने शोल्डर पर रख दिया,,,,उसने अपना

राइट हॅंड खुद-ब-खुद मेरे लेफ्ट शोल्डर पर रख दिया,,,,लेकिन वहाँ मुझे गोली लगी

थी तो डरते डरते मजबूरी मे सोनिया ने अपने हाथ को मेरे गले मे डाल दिया,,,मैने भी

अपने राइट हॅंड को उसकी कमर से होते हुए उसकी नंगी पीठ पर रख दिया और उसको खुद से

चिपका लिया,,,,

 
हम दोनो एक दूसरे से चिपक गये थे,,मेरा लेफ्ट हॅंड गले मे पहनी हुई पट्टी से लटककर

मेरे सीने पर था जो अब मेरे और सोनिया के सीने के बीच दबने लगा था,,उसके दोनो

हाथ मेरे गले मे थे और मेरा हाथ उसकी नंगी पीठ पर,,,उसका चेहरा मेरे राइट तरफ

के शोल्डर के पास था लेकिन वो अपने सर को मेरे और ज़्यादा करीब करने से डर रही थी

तभी मैने अपने हाथ को उसकी पीठ से सहलाते हुए उसके सर पर रखा और उसके सर को अपने

शोल्डर पर रख दिया,,,,वो थोड़ा बेचैन हो गयी मेरी इस हरकत से,,,,,

मेरा हाथ उसके सर से वापिस उसकी पीठ पर चला गया,,,,,

हम दोनो एक दूसरे से चिपके हुए हल्के हल्के इधर उधर हिलते हुए स्लो डॅन्स कर रहे

थे,,,,हम दोनो इतने करीब थे इसलिए हम दोनो की हालत खराब होने लगी थी,,,तभी

मेरा हाथ उसकी पीठ पर थिरकने लगा,,,,उसकी पीठ की तरफ डॅड और कविता डॅन्स कर रहे

थे लेकिन डॅड की पीठ थी हम लोगो की तरफ वो हमे नही देख सकते थे,,लेकिन कविता

हमे देख सकती थी,,,,मेरा हाथ सोनिया की पीठ पर थिरकने लगा था,,,,सोनिया की हालत

खराब हो रही थी,,,कविता भी ये जान गयी थी इसलिए मुझे मना कर रही थी ऐसा करने

से,,,,उसको पता था कि अगर हम लोग बहक गये तो कोई ग़लती कर देंगे लेकिन अब देर हो

गयी थी,,मैं कविता की बात सुन ही नही रहा था,,,

बाकी लोग भी मेरी पीठ पीछे डॅन्स कर रहे थे इसलिए मेरा हाथ सोनिया की पीठ पर हिलता

हुआ नही देख सकते थे,,,,,

कविता मुझे मना करती जा रही थी इशारे मे लेकिन मैं उसकी बात नही सुन रहा था,तभी

सोनिया मेरे कान के पास अपने लिप्स करके बोली,,,,,,

मात्त्तत्त काररर सुउनययी कूिइ दीकख लीगगाअ,,,,अहह सामाजज़ता क्यउउूउ ंहिि

तुउुउउ,,,,मात्तत्त कार्ररर नाअ प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़

उसकी साँसे उखाड़ने लगी थी,,गर्म होने लगी थी जिसका एहसास मुझे अपने कान पर हो रहा

था,,,,उसके दिल की धड़कनें भी काफ़ी तेज हो गयी थी,,,जो मुझे उस हाथ पर महसूस हो

रही थी जो मेरे और सोनिया के बीच मे दबा हुआ था,,,,मेरा वो हाथ उसके छोटे छोटे बूब्स

पर टच हो रहा था,,,,,

म्यूज़िक चल रहा था इसलिए किसी को शक़ नही हो रहा था जो हम इतनी करीब होके बातें

कर रहे थे,,,,

उसका गाल मेरे गाल को टच कर रहा था,,,,उसके लिप्स मेरे कान के पास थे,,

माअत्त्त कारर नाआ सुन्नयी प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़,,कूविइ डीएकखह लीएगगाआ,आहह तुउुउउ

संमज़्ज़तताअ क्कक्यउउुउउ ंहिईीईई,,,,हमम्म्ममममममममम माअत्त्त काररर नाआआअ प्लज़्ज़्ज़

कोई देखता है तो देखने दे,,,मुझे डर नही ,,,,मैं तुझे प्यार करता हूँ,,,,तुझे हाँसिल

करना चाहता हूँ,,,,और तुझे हाँसिल करने के लिए मुझे किसी से डरने की ज़रूरत नही,,

प्याररर माऐईन्न बहीी कर्र्त्ती हून्न्न तुउज्झ्ही लेक्किन्न दार्र लग्गतता हाीइ म्मूउजझी

और्र्रर तूऊ वाईससी बहिि मुउज़्झहही हँससिल्ल कारर्र छुक्का हाईईइ टू भ्हाल्ला यी सब

क्क्ययउउू कार रहहा हाई,,,,मेररी ल्लीइयईी टुउन्ने अप्प्पंनी जीिस्सम्म पार गूल्लीइी खाइइ

हाीइ एब्ब बल्ला और्र कय्या राहह गया मुउजझी हँसिल्ल कररननी मी,,,तू अब पुउर्रीई

तरराहह सी मुउज़्झहही हँसिल्ल्ल कारर्र छुक्का हाीइ,,,अब माइिईन्न मुउर्रीई त्तररहह सी

टीएरर्र्रृिइ हूऊंणन्न् सुउन्नयययी,,,,,,,

नही पूरी तरह से नही अभी तो तुझे दिल से हाँसिल किया है,,,,अभी कुछ और हाँसिल करना

बाकी है,,,,लेकिन तू डर रही है,,,

हान्ं मुउजझी दरर्र लग्गतता हाीइ सुउन्न्णी,,,कययुउककीी यईी सब्बब गग्ग्गाल्लत्ट हाीइ

अहह माट्त्ट कार्ररर प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ कययउउू तद्डप्पा रहहा हाई मुउज़्झहही मॅट कार

ना प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़

तडपा मैं नही रहा ,,तू तडपा रही है मुझे भी और खुद को भी,,,जब मुझे कोई डर नही

तो भला तू क्यूँ डर रही है,,,,

क्युक्कीी मैईन्न तेर्रीइ बहहानं हूंन तेरीई मशहूओक़्क़ नाहहिईिइ कववीितता कििई तररहह

,,,,,अहह हात्त जा नाअ प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़ दीकख मुउुज्झहहस्सी आब्ब्ब औरर्र नाहहिि रुउक्का

जेया राहहा इश्स सी पहल्ली कू गल्लतीीई हूओ जययी और मैईन्न अपपननीी गल्लतीीई पार

रुसववा हू जौउउन्न्ञन् मत्त कार रुक्क्क जा तुउज़्झहही मेरि कासामम

सोनिया ने इतना बोला और अपनी कसम दी तो मैं एक पल मे रुक गया और तभी म्यूज़िक ऑफ हो गया

हम दोनो एक दूसरे से दूर हट गये,,,,,उसकी हालत बहुत खराब हो गयी थी,,,

तभी भुआ बोली,,,,वन्स मोर वन्स मोर,,,,,,लेकिन सोनिया पीछे हट गयी,,,,,,मैं थक गयी

हूँ चलो ना सो जाते है,,,,

तभी कविता उसकी हालत समझ गयी,,,,हां हां मैं भी बहुत थक गयी चलो सो जाते है

डॅड भी मान गये और सब लोग घर के अंदर जाने लगे,,,,तभी कामिनी भाभी और सूरज भाई

कविता को लेके अपने घर जाने लगे तो माँ बोली,,,

अरे बेटा यहीं रुक जाओ सुबह चले जाना,,,,,

नही आंटी जी,,,,सुबह ऑफीस जाना है,,,,,अभी नही रुक सकता,,,,

ठीक है तो बेटा,,,,लेकिन जब टाइम मिले तो आना ,,और कामिनी को भी साथ लेके आना,,तुमसे

ज़रूरी बात करनी है,,,,

मैं समझ गया आंटी जी,,,,,कविता और सन्नी की शादी की बात करनी है ना,,,,मैं माँ से

बात कर लूँगा और आपको बता दूँगा,,,,फिर माँ को लेके ही आपके घर आउन्गा,,,,

कविता और मेरी शादी की बात होने वाली थी,,,,कविता शरमा रही थी,,सब लोग खुश थे

लेकिन सोनिया खुश नही थी,,,,,वो सबके साथ मिलके हंस तो रही थी लेकिन उसकी उदासी

मेरे से छुपि नही थी,,,,और शायद कविता से भी नही,,,,वो भी सोनिया की तरफ देख रही

थी,,,

मैं भी एक तक सोनिया की तरफ देख रहा था,,तभी मेरा ध्यान गया भुआ की तरफ जो मुझे

सोनिया की तरफ देखते हुए देख रही थी,,,,,

पार्टी ख़तम हो गयी,,,,,सब लोग अपने घर चले गये,,,,शोभा भी गयी अपने ससुराल,,,आज

कविता भी अपने घर चली गयी क्यूकी पिछले 8-10 दिन ये वो यहीं थी,,,,

नीचे माँ भुआ डॅड और सुरेंदर मामा सो गये,,,,और उपर भुआ के रूम मे मनोहर और रेखा सो

गये,,,,,मैं जब अपने रूम मे गया तो सोनिया कपड़े चेंज करके बेड पर बैठी हुई थी,,,,

मैं अंदर पहुँचा और अपने कपड़े चेंज करने लगा,,,,मेरे गले मे पट्टी बँधी हुई थी

जिस से मैने अपने लेफ्ट हॅंड को सहारा दिया हुआ था,,,मैने अपना हाथ पट्टी मे से निकाला और

कोट निकालने लगा,,,,,मुझे कोट निकालने मे थोड़ी परेशानी हो रही थी,,ये बात सोनिया भी

समझ गयी थी,,,,

तभी सोनिया बोली,,,,,कविता कहाँ है भाई,,,,,

वो चली गयी अपने घर,,,,,अब क्या हमेशा यहीं रहेगी,,,,,

हां भाई यहीं तो रहने वाली है वो हमेशा,,,,तेरी शादी जो होने वाली है उसके साथ

ये बात बोलते हुए वो नकली हँसी लिए हुए मुझे एसा दिखा रही थी जैसे वो खुश है,बट

मैं उसको अच्छी तरह से जानता था,,,,,उसके चहरे की उदासी मेरे से कभी छुपि नही थी

हां अब क्या कर सकते है,,,माँ ने भी सूरज भाई को बात करने क लिए बुला लिया है,अब

तो लगता है शादी होके ही रहेगी,,,,

होके रहेगी मतलब,,,तू शादी नही करना चाहता क्या कविता से,,,,उसने थोड़ा सवालिया नज़रो

से देखते हुए पूछा,,,,

क्यू नही करना चाहता ,,,,मैं तो मरा जा रहा हूँ उस से शादी करने के लिए,,,,लेकिन अब

उस से ज़्यादा मरा जा रहा हूँ ये कोट उतारने के लिए,,,,मेरे शोल्डर मे दर्द हो रहा था

ये बात सोनिया जान गयी थी,,,,

तभी वो अपने बेड से उठी और मेरे करीब आके मेरा कोट उतारने लगी,,,,,कोट उतारते ही

मैने शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए,,,,वो थोड़ा पीछे हट गयी,,जब शर्ट के बटन

खुल गये तो उसने आगे बढ़ के शर्ट निकालने मे भी मेरी हेल्प की,,,अब मैं बनियान मे था और

पेंट निकालने वाला था,,,,लेकिन अभी मैने पैरो मे जूते पहने हुए थे,,,,सोनिया ने मुझे

बेड पर बैठने को बोला और मैं बैठ गया फिर वो ज़मीन पर घुटनो के बल बैठकर मेरे

जूते निकालने लगी,,,,,जूते निकल गये तो मैं खड़ा होके पेंट निकालने लगा तो वो एक दम

से पलट कर खड़ी हो गयी,,,,,वो मुझे इस हालत मे देखना नही चाहती थी,,,,तभी मैं

भी एक दम से रुक गया,,,क्यूकी मैने पेंट के नीचे अंडरवेअर जो नही पहनता था,,,,घर मे

चुदाई की वजह से ये आदत पड़ी थी मुझे,,,,,

 


मैं अपना पयज़ामा लेके बाथरूम मे घुस गया और पयज़ामा पहन कर रूम मे वापिस आ गया,,

सोनिया खुश थी,,उसको लगा शायद मैं उसकी वजह से बाथरूम मे जाके पयज़ामा चेंज करके

आया हूँ,,,,लेकिन उसको क्या पता की बात कुछ और ही थी,,,,

मैं आके बेड पर लेट गये,,,,,सोनिया भी जाके अपने बेड पे लेटने लगी,,,,तभी बोली

भाई तूने मेडिसिन खा ली क्या,,,,,

पार्टी के चक्कर मे मेडिसिन खाना भूल ही गया था,,,,,मैने ना मे सर हिलाया तो उसने

मुझे मेडिसिन दी और पानी का ग्लास भी और वापिस जाके बेड पर बैठ गयी,,,,मैने मेडिसिन

ली और बेड पर लेट गया,,,,,

सुबह जब उठा तो फ्रेश होके नीचे आ गया,,,,,सब लोग बैठकर टीवी देख रहे थे,,रेखा

और मनोहर गाँव वापिस जा चुके थे लेकिन मामा अब यहीं था,,क्यूकी डॅड ने मामा को माफ़

कर दिया था,,,,,लेकिन मामा ने ग़लती क्या की थी ये अभी तक पता नही चला था मुझे,,

सोनिया भी कॉलेज चली गयी थी,,,,अब उसके पास शोभा की अक्तिवा जो थी,,,,मुझे अभी

कुछ दिन रेस्ट करनी थी,,,,

कुछ टाइम बाद डॅड भी बॅंक चले गये,,,,भुआ बुटीक चली गयी और साथ मे माँ को भी ले

गयी,,,,,,मुझे नाश्ता बना दिया था पहले ही,,,,,अब घर पर मैं और मामा थे,,,,मैं

मामा से बात करना चाहता था कि आख़िर उस दिन गाँव मे क्या हुआ था,,,,,मामा मेरे साथ ही

बैठकर टीवी देख रहा था,,,,इस से पहले मैं कोई बात शुरू करता मामा वहाँ से उठकर

चला गया,,,,फिर मैं अकेला ही रह गया घर मे,,,,

कॉलेज से आते टाइम सोनिया माँ को साथ लेके आ गयी थी,,,,फिर दोपेहर का खाना खाया और

सो गया,,,,,आज रात मैं भुआ के रूम मे सोया था,,,,क्यूकी मुझे सोनिया के साथ और सोनिया

को मेरे साथ सोने मे डर जो लगता था,,,,,

फिर 3-4 दिन ऐसे ही निकल गये,,,,सब लोग घर से चले जाते,,,,,माँ भुआ के साथ,,,डॅड

बॅंक ,,,,मामा पता नही कहाँ जाता था,,,,और सोनिया भी कॉलेज,,,,,ना तो सोनिया से बात हो

रही थी मेरी,,,,,मैं उस से पूछना चाहता था कि आख़िर वो मेरी और कविता की शादी के

बात पर इतनी उदास क्यूँ हो जाती थी,,,,और ना ही मामा से पूच सका इतने दिन की गाँव मे

क्या पंगा हुआ था,,,,क्यूकी माँ ने तो सीधे सीधे बताने से ही मना कर दिया था,,बोला था

जब टाइम आएगा तब बता दूँगी,,,लेकिन साला टाइम आएगा कब,,,,,,

आज सब लोग शाम को टीवी देख रहे थे,,,,,,डॅड भी बॅंक से जल्दी आ गये थे,,,,भुआ भी

जल्दी आ गयी थी बुटीक से,,,,कोई 4-5 बजे का टाइम रहा होगा,,,,मैं भी वहीं बैठा

हुआ था और सोनिया भी,,,,,,

अशोक,,,,,,,,तो सरिता कुछ बात बनी कविता के भाई के साथ या नही,,,कब आ रहा है वो

शादी की बात करने,,,,,,या तुम बोलो तो हम लोग चलते है उनके घर बात करने,,,,,

सरिता,,,,,,,जी मैने उस दिन सूरज को बोला था,,,,उसने अपनी माँ से बात करके फिर उनको

साथ लेके आने को बोला था,,,,,देखते है 2-3 दिन फिर मैं बात करती हूँ सूरज से,

मैने सोनिया की तरफ देखा तो सोनिया फिर से उदास हो गयी थी,,,,,,मैं उसके उदास चहरे की

तरफ देख रहा था और भुआ मुझे सोनिया की तरफ देखते हुए देख रही थी

तभी सब लोग एक दम चुप हो गये,,,,टीवी पर अमित के केस की लाइव न्यूज़ आ रही थी,,,इधर

न्यूज़ शुरू हुई ही थी कि मेरा फोन बजने लगा,,,ये फोन था ख़ान भाई का,,,,

मैने फोन कान पर लगाया और थोड़ा दूर हटके बात करने लगा,,,मैने देखा कि पोलीस

वाले अमित और उसके दोस्तो को हथकड़ी लगा कर कोर्ट से बाहर ले जा रहे थे,,,,अमित के

साथ साथ अमित का बाप मिस्टर सेठी भी था,,,और उनके पीछे ही सुरेश का बाप भी था जिसको

हथकड़ी लगी हुई थी,,,,

ख़ान भाई फोन पर बहुत खुश थे,,,,उन्होने बताया कि अमित और उसके दोस्तो के खिलाफ जो

सबूत थे उनकी हेल्प से अमित और उसके दोस्तो को उमर क़ैद की सज़ा हुई है,,,,उन लोगो पर

लड़कियों के रेप की और लड़कियों को ख़ुदकुशी के लिए उकसाने की धारा लगी है,,,,जबकि

अमित के बाप पर सबूतों से छेड़खानी करने का और अपनी पॉवर का ग़लत इस्तेमाल करने

का आरोप लगा है और उसको 8 साल की सज़ा हुई है,,,,सुरेश का बाप सरकारी गवाह बन गया

था इसलिए उसको कम सज़ा हुई है,,,,,सुरेश के बाप को 3 साल की सज़ा हुई थी,,,,,

अमित के बाप को भले ही सज़ा 8 साल की हुई थी लेकिन एक बार सज़ा होते ही ख़ान भाई को

यकीन था कि अब सीबीआइ बाकी के पेंडिंग केस पर भी काम शुरू कर देगी जो सेठी पर दर्ज

है,,,,अब सेठी जल्दी जैल से बाहर आने वाला न्ही,,,,

मैं ख़ान भाई की बात सुनकर बहुत खुश हुआ,,,,,जो जंग मैने और ख़ान भाई ने शुरू की

थी वो हम लोग जीत गये थे,,,,

मैने फोन बंद किया और सोफे पर जाके बैठ गया,,,,सब लोग बहुत खुश थे,,,,टीवी पर अमित

और बाकी लोगो की न्यूज़ और उनकी सज़ा के बारे मे सुनकर घर वाले खुश हो गये थे,,,

तभी डॅड मेरे करीब आ गये और मुझे सोफे से खड़ा करके अपनी बाहों मे भर लिया और ज़ोर

से अपने सीने से लगा लिया,,,,,,मुझे हल्का दर्द हुआ और मेरी आह निकल गयी,,,,गोली का

जखम अभी इतनी जल्दी भरने वाला नही था,,,,और डॅड ने भी खुशी के मारे मुझे पूरी

जान लगा कर बाहों मे भर लिया था,,,,

ये हुई ना बात,,,,मेरा बेटा जंग जीत गया,,,,आज मुझे बहुत फक़्र है तुझ पर बेटा,,,,तेरी

वजह से ऐसे घटिया लोगो को सज़ा हुई है,,,सच मे बड़ी खुशी हो रही है आज मुझे

बेटा,,,,,अब लग रहा है मेरा बेटा बड़ा हो गया है,,,,,अब तो जल्दी से शादी करवा दूँगा

तेरी कविता से,,,,,बोल करेगा ना शादी कविता से,,,,

तभी माँ भी सोफे से उठी,,,,इसका बस चले तो आज ही शादी करले से कविता से लेकिन आप

इसकी जान निकालने पर क्यूँ तुले हुए हो,,,,,इतनी ज़ोर से सीने से क्यूँ लगा रहे हो,,,,दर्द हो

रहा होगा मेरे बचे को,,,,चलो छोड़ो अब,,,,,

माँ ने शायद मेरी दर्द से निकली हुई आह सुन ली थी जब डॅड ने मुझे बाहों मे भरा था

अरे सरिता शेर है मेरा बेटा शेर,,,,और इतनी छोटे छोटे जख़्मो से शेरो को दर्द नही

होता ,,,,क्यूँ सन्नी बेटा ठीक बोला ना मैने,,,,,

मैं कुछ नही बोला बस हां मे सर हिला दिया,,,,

सरिता अब तो जल्दी से बस सूरज से बात करो,,,,अब तो जितनी जल्दी हो इसकी शादी करवाओ

कविता के साथ,,,,डॅड खुशी मे बार बार मेरी और कविता की शादी की बात कर रहे थे

लेकिन सोनिया खुश नही थी,,,मेरी और कविता की शादी की बात सुनके,,,वो थोड़ी उदास थी,

तभी मेरे से उसकी उदासी देखी नही गयी,,,,और मैं डॅड को बोलने लगा,,,,,

डॅड शादी की बात बाद मे लेकिन उस से पहले मुझे आपसे एक ज़रूरी बात करनी है,,,जब

मैने ज़रूरी बात बोली तो मामा और भुआ मेरी तरफ देखने लगे,,,,और माँ भी कुछ परेशान

हो गयी,,,क्यूकी उनको लगा था मैं उनसे गाँव वाली बात पूछने लगा हूँ लेकिन मैं तो कोई

और बात करने वाला था,,,,

हां हां बेटा बोलो क्या ज़रूरी बात करनी है,,,,,,अब तो तुम कुछ भी बोल सकते हो बेटा

 


तभी मैने सोनिया की तरफ देखा,,,उसका चहरे उदास था,,लेकिन अब वो थोड़ी परेशान भी

थी क्यूकी उसको भी नही पता था मैं क्या बात करने वाला हूँ,,,,वो मुझे सवालिया नज़रो

से देख रही थी,,,,,

बोल ना बेटा क्या ज़रूरी बात करनी है,,,,,डॅड की बात से मेरा ध्यान सोनिया से हटके डॅड

की तरफ गया,,,

डॅड मुझे आपसे मेरे और सोनिया के बारे मे बात करनी है,,,,जब मैने इतना बोला तो डॅड कुछ

सोच मे पड़ गये,,,,लेकिन जैसे ही मैने सोनिया की तरफ देखा उसका मुँह खुला का खुला रह

गया,,,,

हां हां बोलो बेटा क्या बात है तुम्हारी और सोनिया की,,,,कुछ झगड़ा हुआ क्या तुम लोगो मे

इस से पहले मैं कुछ बोलता सोनिया जल्दी से सोफे से उठी और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे उपर

की तरफ ले गयी,,,,

सोनिया मेरा हाथ पकड़ कर सीडियों से उपर की तरफ लेके जा रही थी,,लेकिन हम लोगो के

जाते ही डॅड बोलने लगे,,,,अब क्या बात हो गयी इन दोनो की,,,,,लगता है झगड़ा कुछ ज़्यादा

ही बढ़ गया है इनका,,,,

तभी गीता भुआ भी बोल पड़ी,,,हां हां अशोक ऐसा ही लगता है तभी तो उपर चले गये

दोनो अपना झगड़ा सॉल्व करने,,,,,लगता है सोनिया नही चाहती कि उन दोनो के झगड़े मे हम

लोग इन्वॉल्व हो,,,,

अरे भाई बहन का झगड़ा है,,,हम लोगो ने क्यू इन्वॉल्व होना,,,,खुद ही हल करने दो दोनो

को मिलकर,,,,,

मैं सीडियों से इतनी बात सुनता हुआ सोनिया के साथ उपर वाले फ्लोर पर आ गया,,,,,लेकिन वो

वहाँ नही रुकी और मुझे वहाँ से भी उपर छत पर ले गयी,,,,,

छत पर आते ही वो गुस्से मे बोली,,,,,क्या बात करनी है तूने डॅड से हम लोगो के बारे मे

बोल ना,,,चुप क्यूँ है,,,क्या ज़रूरी बात करने वाला था तू डॅड से,,,,

वही बात जो करने से तुम डरती हो,,,,,,तुम्हारी और मेरी बात,,,,हम दोनो के प्यार की बात

तेरा दिमाग़ तो ठीक है ना,,,पागल हो गया है क्या,,,,,हम दोनो भाई बहन है,,,और वैसे

भी वो लोग तेरी और कविता की शादी की बात करने वाले है सूरज भाई से,,,,देखा नही वो

लोग कितने खुश है ,,क्यूँ उनके चहरे से खुशी छीन लेना चाहता है तू,,,,क्या उनको

खुश देखकर तू खुश नहीं ,,,,,,

उनको खुश देखकर मैं खुश हूँ या नही ये तो नही पता लेकिन किसी को उदास देखकर मैं

उदास ज़रूर हूँ,,,,

मेरी बात से सोनिया थोड़ी परेशान हो गयी,,,,,उदास ,,कॉन उदास है,,,,तूने देखा नही सब लोग

कितने खुश है तूने जो जंग शुरू की थी वो तू जीत गया अब तेरी शादी भी हो जाएगी उस

लड़की के साथ जिसको तू प्यार करता है ,,,,फिर भला किसी ने उदास क्यूँ होना,,,,मुझे तो

सब लोग खुश नज़र आ रहे थे नीचे,,,,,

जानता हूँ सब लोग खुश है मेरी और कविता की शादी से,,,,,मैं भी बहुत खुश हूँ कि

मेरी शादी उस लड़की से होने लगी है जिसको मैं प्यार करता हूँ,,,,लेकिन ये सब सुनकर

क्या तुम खुश हो,,,,

मैं ,मैं वो,,,मैं ,,,,,,,,,,,,,सोनिया को कोई बात नही सूझ रही थी,,,,

बोल ना चुप क्यूँ हो गयी,,,,बता क्या तू खुश है मेरी और कविता की शादी की बात सुनके,

हां भाई मैं बहुत खुश हूँ ,,,,उसने चेहरे मेरी तरफ किया और हँसने लगी,,,लेकिन उसकी

आँखों की उदासी उसकी झूठी हँसी से छुप नही सकी थी मेरे सामने,,,,

मैं उसके करीब चला गया,,,,देख मेरी आखों मे और हँसके बोल यही बात कि तू खुश है

मेरी और कविता की शादी से,,,,,,बोला ना,,,

उसने चहरे झुका लिया,,,,बोल ना,,,,अगर तू सच मे मेरे से प्यार करती है तो देख मेरी

आँखों मे और बोल तुझे खुशी है मेरी और कविता की शादी से,,,बोल ना,,,,बोलती क्यूँ नही

तभी उसने सर उठाकर मेरी तरफ देखा और एक हाथ मेरे सर पर भी रख दिया,,,तू आँखों

मे देखकर बोलने की बात कर रहा है मैं तेरी कसम ख़ाके बोलने को तैयार हूँ भाई कि

मैं बहुत खुश हूँ तेरी और कविता की शादी की बात सुनके,,,,उसने ये बात मेरे सर पर

हाथ रखकर बोली तो मैं थोड़ा परेशान हो गया,,,,

मैने देखा था ये मेरी और कविता की शादी की बात से उदास हो जाती थी,लेकिन ये मेरी झूठी

कसम तो नही खा सकती ,,इस बात का भी मुझे यकीन है,,,,

अब हो गयी तसल्ली,,,,चल अब नीचे चल और बोल सबको की कोई ज़रूरी बात नही थी,,,तू

बस ऐसे ही मज़ाक कर रहा था,,,,,उसने मेरा हाथ पकड़ा और नीचे की तरफ चलने लगी

तभी मैने उसको खींच कर अपने करीब कर लिया,,,,और कस कर अपनी बाहों मे जकड लिया

वो एक दम मेरे से चिपक गयी,,,,,तू मेरे सर की झूठी कसम नही खा सकती ये बात तो

मैं मानता हूँ लेकिन तेरी आँखों की उदासी भी झूठी नही थी,,,मैने कयि बार नोट किया

है तू मेरी और कविता की शादी की बात से उदास हो जाती थी,,,,अगर तुझे खुशी है मेरी

और कविता की शादी की तो भला उदासी किस बात की होती है तुझे,,,,,

तभी उसकी आँखों मे हल्के आँसू आ गये,,,,,क्यूकी मैं तेरे से प्यार करती हूँ सन्नी,और

तू कविता से प्यार करता है शादी करने वाला है,,,,,उसके साथ हाथ मे हाथ डालके लोगो के

सामने जाने वाला है,,,,बाहर की दुनिया मे उसके साथ घूमने वाला है,,,,लेकिन मैं,,मैं

तो तेरे साथ बाहर भी नही जा सकती,,,तेरे हाथ मे हाथ डालके लोगो के सामने भी नही

घूम सकती,,,,तेरे साथ शादी भी नही कर सकती,,,इस बात की उदासी है मुझे,,मैं

बस छुप छुप कर लोगो से डर डर कर तुझे प्यार कर सकती हूँ,,तेरे जितनी हिम्मत नही

मेरे मे कि इतने लोगो के सामने माल मे तुझे किस कर सकूँ,,,अपने ही घर वालो को ये

बता सकूँ कि मैं तुझसे प्यार करती हूँ,,,,,नही है मेरे मे इतनी हिम्मत,,,,इतना बोलकर

वो मेरे गले लग्के रोने लगी,,,,,,

मैं उसकी सारी बात समझ गया,,,

 
मैने उसके सर को अपने शोल्डर से थोड़ा दूर किया और उसके आँसू सॉफ करने लगा,,बस इतनी

सी बात और तू घबरा गयी,,,,,मैं तुझसे प्यार करता हूँ सोनिया,,,,तेरे प्यार की वजह से

मेरे मे इतनी हिम्मत आती है कि मैं लोगो के सामने जाके ये कहने से नही डरता कि मैं

तेरे से प्यार करता हूँ,,,,ना ही अपने घर वालो के सामने कहने से डरता हूँ,,,,तेरे प्यार

मे बहुत ताक़त है सोनिया जो मुझे इतनी हिम्मत देता है,,,,लेकिन लगता है मेरे प्यार मे

इतनी ताक़त नही जो तू दुनिया के डर का या अपने ही घर वालो के डर का सामना कर सके,,

लगता है मेरा प्यार कमजोर है,,,,या तुझे मुझपे यकीन नही है,,,,

नही सन्नी ऐसे मत बोल प्लज़्ज़्ज़्ज़,,,,मैं खुद से ज़्यादा तेरा यकीन करती हूँ,,,और तेरे प्यार

मे बड़ी ताक़त है ,,,,ताक़त तो बस मुझमे नही जो मैं दुनिया के सामने जा सकूँ,,,तू खुद

को या अपने प्यार को रुसवा मत कर ये बोलके कि तेरे प्यार मे इतनी ताक़त नही,,,,

अच्छा अगर ये बात है तो साबित कर,,,पकड़ मेरा हाथ और चल मेरे साथ नीचे और बता दे

मोम डॅड को कि तू मेरे से प्यार करती है,,,,,

नही नही सन्नी,,,मैं ये नही कर सकती,,,,मैं मर जाउन्गी अगर उनको ये सब पता चल

गया,,,,पता नही वो क्या सोचेंगे हम लोगो के बारे मे,,,

वो जो सोचते है सोचने दे,,,,,लेकिन अगर आज मैने उन लोगो को अपने प्यार के बारे मे नही

बताया तो मैं भी मर जाउन्गा सोनिया,,,,,आज पूरी हिम्मत आई है मेरे मे ,,,आज नही बता

सका तो फिर कभी नही,,,,,

इतना बोलकर मैने उसका हाथ पकड़ा और नीचे की तरफ चलने लगा,,,,,,,

नही सन्नी प्ल्ज़्ज़ रुकजा ,,,,रुकजा सन्नी ऐसा मत कर,,,मैं मर जाउन्गी सन्नी,,,,,रुकजा प्ल्ज़

वो मुझे रुकने को बोलती गयी और मैं उसका हाथ पकड़ कर नीचे की तरफ चलता गया,,,,वो

अपना ज़ोर लगा रही थी अपना हाथ मेरे से छुड़वाने मे लेकिन आज नही,,आज नही जाने दूँगा

मे इसको,,,,

मैं उसको लेके नीचे आ गया,,,सब लोग सोफे पर ही बैठे हुए थे,,,,जब उन्होने मुझे

सोनिया को यूँ खींच कर नीचे लेके आते हुए देखा तो थोड़ा परेशान हो गये,,उपर से सोनिया

रोके आई थी इसलिए उसकी आँखें भी नम थी,,,,

ये सब क्या हो रहा है सन्नी,,,,,डॅड सोफे से उठते हुए बोले,,,,,

वही हो रहा है डॅड जो होना चाहिए,,,मैने बोला था ना कि आपसे ज़रूरी बात करनी है

हां हां बोल ,,,क्या बात करनी है,,,,,और ये सोनिया रो क्यूँ रही है,,,,,

कुछ नही डॅड बस थोड़ा डरी हुई है ये,,,

लेकिन ये रो क्यूँ रही है सन्नी,,,,क्या फिर से तुम दोनो का झगड़ा हुआ है ,,,

नही डॅड,,ये आँसू झगड़े के नही,,,,,,प्यार के है,,,,,बोल ना सोनिया,,,बोल साथ देगी मेरा

या मुझे रुसवा करेगी आज सबके सामने,,,

सोनिया चुप करके सर झुका कर खड़ी हुई थी,,,,,,

बोल ना सोनिया ,,,,साथ देगी अपने भाई का प्यार करने मे या नफ़रत का बीज पैदा करेगी मेरे

दिल मे,,,,,

ये सब क्या हो रहा है सन्नी,,,डॅड थोड़ा गुस्से मे बोले,,,,लेकिन सोनिया चुप रही,,,

तभी मैने सोनिया को उसके सर से पकड़ा और अपने करीब करके उसके होंठों मे अपने होंठ

रखके उसको किस करने लगा,,,,मैने उसको कुछ पल किस की और खुद से अलग करके दूर कर

दिया,,,,,

वो दूर हटके मुझे हैरानी से देखने लगी,,,,सब लोग भी हैरान हो गये मेरी इस हरकत

से,,,,,

तभी डॅड गुस्से मे बोले,,,,,,ये क्या बदतमीज़ी थी सन्नी,,,,तेरा दिमाग़ खराब हो गया है

क्या,,,,,,डॅड गुस्से से मेरी तरफ बढ़ने लगे तभी भुआ और माँ बीच मे आ गयी और उनको

रोक लिया,,,,

बोल सोनिया अब क्या बोलना है तुझे,,,,क्या मैने तेरे साथ बदतमीज़ी की ,,बोल ना इन लोगो को

कि मैं कितना बुरा हूँ,,,तेरे साथ हमेशा बदतमीज़ी करता हूँ,,,,तेरे करीब आता हूँ

तुझे हाँसिल करने की कोशिश करता हूँ,,,,तुझसे प्यार करने की गुस्ताख़ी करता हूँ,,

सोनिया वहीं खड़ी रही और मुझे नम आँखों से देखती रही लेकिन कुछ नही बोली,,,डॅड अभी

भी गुस्से मे पता नही क्या क्या बोल रहे थे,,,,

कुछ तो बोल,,,चाहे मुझे रुसवा ही कर्दे सबके सामने ,,,,लेकिन खुदा का वास्ता है तुझे

कुछ तो बोल,,,,प्ल्ज़्ज़ सोनिया ,,,,आज बड़ी मुश्किल से इतनी हिम्मत हुई है मुझमे कि अपने घर

वालो को बता सकूँ कि मैं अपनी बहन को कितना प्यार करता हूँ,,,,तू भी हिम्मत कर प्यार

नही तो ना सही,,,,हिम्मत कर थोड़ा गुस्सा कर और कर्दे मुझे सबके सामने रुसवा

मैने इतना बोला तो सोनिया भाग कर मेरे गले लग गयी और मेरे होठों पर किस करने लगी

सोनिया ने भी अपने प्यार का इज़हार कर दिया,,,,जैसे मैने उसको कुछ पल के लिए किस की उसने

भी मुझे कुछ पल के लिए किस की और जल्दी से भाग कर भुआ के पास चली गयी,,,,

तभी सब लोग हैरान रह गये जब सोनिया ने भी अपने प्यार का इज़हार कर दिया,,,

तभी मैने सबको और हैरान कर दिया,,,,,,हम दोनो एक दूसरे से प्यार करते है डॅड और

शादी करना चाहते है,,,,मैने इतनी बात बोली तो गीता थोड़ी खुश हो गयी लेकिन बाकी लोग

नही,,,,,

डॅड रोने लगे और मामा को बोलने लगे,,,,,देख लिया ये क्या कर दिया तूने,,,,सब तेरी वजह

से हुआ है ,,सब बर्बाद कर दिया तूने,,,मेरी सारी फॅमिली को बर्बाद कर दिया,,,क्या बिगाड़ा

था मैने तेरा,,,,क्या बिगाड़ा था इन बच्चो ने तेरा,,,,किस ग़लती की सज़ा दी है तूने इन

बच्चों को,,,,डॅड रोते हुए ज़मीन पर बैठ गये,,,,माँ उनको चुप करवा रही थी,,,

उधर मामा भी रोने लगा,,,,,सोनिया भी भुआ के गले लग्के रो रही थी,,,,,

तभी मामा रोते हुए मेरे पास आया और मेरा हाथ पकड़ लिया,,,,और मुझे सोफे पर बिठा दिया

और खुद ज़मीन पर घुटनो के बल बैठकर मेरे सामने हाथ जोड़कर माफी माँगने लगा,,,

मुझे माफ़ कर्दे सन्नी बेटा,,,,ये सब मेरी वजह से हुआ है,,,,,मुझे माफ़ कर्दे बेटा,,

मुझे माफ़ कर्दे,,,मैने उस जुर्म की सज़ा दी है तुम लोगो को जो जुर्म तुम लोगो ने किया ही

नही,,,,,,

मामा आप रो क्यूँ रहे हो,,,,और भला मेरा मेरी बहन से प्यार करना कोई ग़लती है क्या जो

सब लोग इतने परेशान हो गये है,,,,,,वैसे भी तो इस घर मे कब्से जिस्म का नंगा नाच

चल रहा है,,,,,,बाप बेटी के साथ हवस पूरी कर रहा है,,,बेटा माँ के साथ ,,और भाई

बहन के साथ अपनी हवस मिटा रहा है,,,,तो भला एक भाई का अपनी बहन से प्यार करने

पर इतना गुस्सा क्यूँ आ रहा है आप लोगो को,,,आप लोगो को तो खुश होना चाहिए कि मैं

आपकी इस परंपरा को आगे लेके जा रहा हूँ,,,,

मेरी बात सुनके भुआ और माँ भी रोने लगी,,,,

कुछ देर रूम मे सन्नाटा रहा,,बस सब लोगो के रोने की ही आवाज़ आ रही थी,,,,फिर मामा

बोला,,,,,

तेरा कोई कसूर नही है सन्नी,,,,और ना ही हम सब का कसूर है जो हम लोगो ने अपनी

हवस को अपने ही घर मे पूरा किया,,,,कसूर तो उस हरामी किशन लाल का है जिसने मेरी

जिंदगी खराब करदी,,मेरे पूरे परिवार की ज़िंदगी खराब करदी,,,,,और बदले की आग मे

मैने तुम लोगो की फॅमिली,,, अपनी फॅमिली खराब करदी,,,,

मैं थोड़ा परेशान हो गया,,,,किषल लाल ,,,यानी माँ का चाचा,,,,जिसने सीमा का रेप किया

था ,,,लेकिन उसने सुरेंदर की फॅमिली को कैसे बर्बाद कर दिया,,,,मैं कुछ समझ नही

पा रहा था,,,,

मामा भला माँ के चाचा ने आपकी फॅमिली को कैसे बर्बाद कर दिया,,,,मैं कुछ समझा नहीं

 


वो तेरी माँ का चाचा नही है सन्नी,,,,वो अशोक का बाप है,,,,,और बदक़िस्मती से वो

तेरा भी बाप है,,,,,,,,तेरी बास्किस्मती ये है कि उसने तेरी माँ का एक बार रेप किया

लेकिन मेरी माँ का रेप तो वो हर रोज करता था,,,,हर दिन करता था हर पल करता था

और मैं बेबसी से सब कुछ देखता रहता था,,,,इतना बोलकर सुरेंदर रोता हुआ मेरे पैरो

मे गिर गया,,,,

सुरेंदर की बातों से मैं परेशान हो गया,,,,और सब लोगो की तरफ देखने लगा,,,माँ और

भुआ रोती हुई अपना सर हिला कर मुझे ये बता रही थी कि सुरेंदर जो बोल रहा है वो

सच है,,

अशोक ने आगे बढ़ कर सुरेंदर को उठाया और सामने सोफे पर बिठा दिया,,,,,गीता चलके उसके

पास चली गयी ,,,साथ वाले सोफे पर अशोक खुद बैठ गया,,इधर मैं बड़े सोफे पर अकेला

बैठा हुआ था तभी माँ मेरे पास आके बैठ गयी और माँ के पास सोनिया आके बैठ गयी,,,

तभी गीता सुरेंदर के सोफे की एक तरफ थोड़ी सी साइड पर बैठ गयी,,और उसका हाथ पकड़

लिया,,,,,,और सुरेंदर को बोलने को कहा,,,,

सुरेंदर बोलने लगा,,,,,,

मैं तेरा मामा नही सन्नी,,,,,और ना ही गीता तेरी भुआ है,,,,,गीता मेरी बहन है और

गाँव मे रेखा मेरी बहन है,,,,,हम तीनो भाई बहन है,,,,,और गीता अशोक की बहन

नही अशोक की पत्नी है,,,,

तभी मैं थोड़ा हैरान रह गया लेकिन तभी मुझे याद आया उस तस्वीर के बारे मे जो

मैने रेखा के घर देखी थी,,,,मैं उसको पहचान नही पा रहा था,,,उस तस्वीर मे 5

लोग थे जो जाने पहचाने लग रहे थे लेकिन 2 को मैं बिल्कुल भी नही पहचान रहा था

,,अब पता चला मैं 3 लोगो को क्यूँ पहचान रहा था वो तीन लोग सुरेंदर गीता और रेखा

और हो ना हो बाकी के 2 लोग इनके माँ बाप होंगे,,,,,

सुरेंदर ने आगे बोलना शुरू किया ,,,,,,,,,

मेरी माँ किशन लाल के घर काम वाली थी,,,किशन लाल के घर का सारा काम करती थी

और मैं भी माँ के साथ रसोई के काम मे हाथ बटाने उनके साथ जाता था,,,जबकि रेखा

पुष्पा देवी के साथ गाय भेँसो को संभालने का काम करती थी,,,,गीता की अशोक से बहुत

बनती थी इसलिए गीता अशोक के साथ स्कूल जाती थी,,,,,हम लोगो को भी स्कूल जाने का

दिल करता था लेकिन हम लोगो का बाप हमे स्कूल नही जाने देता था और ना ही किशन लाल

हमे स्कूल जाने देता था,,,वो चाहता था कि मैं माँ के साथ किचन का काम करूँ और

रेखा पुष्पा देवी के साथ गोबर संभालने मे उसकी मदद करे,,,,,वो गीता को भी नही जाने

देना चाहता था स्कूल लेकिन अशोक की ज़िद्द की वजह से किशन लाल गीता को स्कूल जाने

देता,,,,

मेरा बाप एक नंबर का शराबी था ,,,कोई काम नही करता था और किशन लाल इसी बात का

पूरा फ़ायदा उठाता था,,,,वो रोज मेरे बाप को शराब के लिए पैसे दे देता और बदले मे मेरी

माँ के साथ अपनी हवस मिटाता,,,मेरी माँ भी बेबस थी कुछ कर नही सकती थी,,,क्यूकी

जिस घर मे हम रहते जो हम लोग खाते पीते वो सब किशन लाल का था,,,,बाप ने तो पूरी

उमर कोई काम ही नही किया था,,,माँ मजबूर थी,,,,एक तो ग़रीब थी दूसरी एहसानो के बोझ

तले दबी हुई थी,,,,,,और मजबूरी मे किशन लाल को अपने जिस्म से खेलने देती कभी मना

नही करती,,,और किशन लाल भी उसकी मजबूरी का पूरा फ़ायदा उठाता ,,,,,,

सुरेंदर रो रहा था और बोल रहा था,,,,,,,

किशन लाल जब दिल करे मेरी माँ के जिस्म से खेलना शुरू कर देता,,,,कभी कमरे मे तो

कभी आँगन मे,,,,कभी खेतो मे तो कभी किचन मे,,,,मैं माँ के साथ काम करता था

किचन मे तो किशन लाल वहाँ आता और माँ के जिस्म से खेलना शुरू कर देता,, कभी वो

अकेला आता तो कभी दूसरे गाँव का ठाकुर( सरिता का बाप) भी आ जाता जो सरिता का बाप

था और किशन लाल का अच्छा दोस्त भी,,,,,,वो दोनो मिलकर मेरे सामने मेरी माँ के जिस्म के

साथ खेलते और मैं बस खड़ा तमाशा देखता रहता,,,,मैं बहुत छोटा था कुछ कर नही

सकता था,,,मुझे तो ये भी नही पता था कि वो लोग क्या कर रहे है,,,मुझे तो ऐसा लगता

जैसे वो लोग मेरी माँ को मार रहे है,,,,,कभी कभी गुस्से मे खून खौल जाता मेरा और

हाथ मे पकड़े चाकू को किशन लाल के सीने मे उतारने का दिल करता लेकिन माँ मना कर देती

कुछ टाइम बीत-ता गया और हम लोग थोड़े बड़े होने लगे,,,,रेखा और गीता भी बड़ी होने लगी

जवान होने लगी,,,,,गीता तो अशोक की वजह से बच जाती क्यूकी अशोक हमेशा उसके साथ ही

रहता था ,,,दोनो प्यार करते थे एक दूसरे को,,,लेकिन रेखा नही बच पाई,,,,पुष्पा देवी

ने भी कोशिश की उसको बचाने की लेकिन किशन लाल पुष्पा देवी को बहुत मारता था,,,

रेखा जवान हो गयी और किशन लाल ने ठाकुर के साथ मिलके उसको भी अपनी हवस का शिकार

बनाना शुरू कर दिया और जब मैं कुछ करने की कोशिश करता तो मुझे बाँध कर रखा

जाता और बहुत मारा जाता,,,,जब मार से भी कुछ नही हुआ तो मेरे परिवार को जान से मारने

की धमकी देके मेरे से ही मेरी माँ के साथ जिस्मानी रिश्ता बनाने पर मजबूर किया जाने

लगा और मैं अपने परिवार की हिफ़ाज़त के लिए इस गंदे रास्ते पर चलने लगा,,

अगर मना करता तो किशन लाल और ठाकुर मेरे परिवार को मार देते,,,,मैं बेबस था बहुत

लाचार था,,,,,

रेखा के साथ साथ भी वही सब होने लगा जो मेरी माँ के साथ होता था,,,और माँ सारा दिन

किशन लाल और ठाकुर की गुलामी करती थक जाती और मेरे बाप के साथ रात को कुछ नही कर

पाती तो मेरे बाप ने भी रेखा के जिस्म का सहारा लेना शुरू कर दिया,,,मेरा बाप भी रेखा

के साथ हवस मिटाने लगा,,,,

कुछ टाइम बाद उन लोगो ने गीता पर हाथ डालने की कोशिश की ,,,मैने मना किया तो मेरे

बाप को मार डाला उन लोगो ने,,,,,मार कर नहर मे फैंक दिया और बोला कि शराब के नशे

मे नहर मे गिर गया है मेरा बाप,,,,

मैं गीता को नही बचा सकता था,,,अगर कोशिश भी करता तो अपने ही परिवार के किसी और

शख्स को खो देता,,,,,,लेकिन गीता ने अशोक को सब कुछ बता दिया और अशोक भी जानता था

वो कुछ नही कर पाएगा इसलिए वो गीता को लेके गाँव से भाग गया और शहर आ गया,,,

अशोक शुरू से गाँव के स्कूल मे पढ़ा था और बाद मे शहर मे पढ़ने जाने लगा था और

गीता भी साथ मे जाती थी इसलिए इन लोगो को शहर की काफ़ी जानकारी थी,,,,,,और उधर

पुष्पा देवी का केवल से बहुत प्यार था इसलिए शुरू से ही उसको शहर मे पढ़ने भेज दिया

गया था ताकि उसपे अपने बाप का गंदा साया नही पड़े,,उसको अपने बाप की करतूतों के बारे

मे कुछ पता नही चले,,,,,

गीता सुरक्षित हो गयी थी,,लेकिन मेरी माँ और रेखा नही,,,,,मेरे बाप की मौत के बाद

मेरी माँ ने भी उसी नहर मे कूद कर ख़ुदकुशी करली जहाँ मेरे बाप को मार कर फेंका

था ठाकुर और किशन लाल ने,,,,वो अब ज़िल्लत की जिंदगी को और ज़्यादा बर्दाश्त नही कर

सकी,,,,,,,

अब मैं और रेखा ही रहते थे,,,,,रेखा मेरी जान की हिफ़ाज़त के लिए कुछ नही कर सकती

थी और मैं रेखा की हिफ़ाज़त की वजह से कुछ नही कर पा रहा था,,,,माँ के मरने के बाद

मैं किशन लाल के घर का काम करने लगा,,खाना पकाने लगा,,,,

कुछ टाइम बीता तो किसी बीमारी के चलते ठाकुर भी मर गया,,,,ठाकुर ने मरने से पहले

सरिता की शादी अशोक से पक्की करदी थी लेकिन अशोक गीता के साथ भाग गया था,,ठाकुर

के मरने के बाद सरिता किशन लाल के घर रहने आ गयी थी,,,किशन लाल ने कभी गंदी

नज़र नही डाली थी सरिता पर क्यूकी वो ठाकुर की बेटी थी और जब सरिता की शादी होनी

थी अशोक से तो काफ़ी पैसा मिलना था किशन लाल को ,,इसलिए वो ना तो खुद सरिता पर

गंदी नज़र डालता और मुझे भी धमकी देता कि अगर मैने सरिता के साथ कुछ ग़लत किया तो

मुझे और रेखा को मार देगा,,,,

इधर अशोक शहर तो आ गया था लेकिन ना काम ना रहने की जगह,,,घर से थोड़े पैसे

लेके आया था उसमे 1-2 महीना ही गुज़रा हुआ था,,,,फिर पढ़ाई भी करनी थी और गीता को

भी पढ़ाना था,,,,जो पैसे थे उनसे किराए का कमरा लेके दोनो रहते थे और पार्ट टाइम जॉब

करने लगे थे,,,,,लेकिन इतने पैसे से शहर मे गुज़ारा नही होता था,,,,इसलिए गाँव जाके

बाप से पैसे माँगना चाहता था अशोक लेकिन उसको पता था उसका बाप उसकी हेल्प नही करेगा

और गीता भी उसको रोक देती गाँव जाने से,,,,

लेकिन जब दोनो ने शादी करली और गीता पेट से हो गयी तो पैसे की ज़रूरत आन पड़ी और

अशोक को मजबूरी मे गाँव जाना पड़ा क्यूकी गीता को बस कुछ दिनो मे बच्चा होने वाला था

लेकिन जब अशोक गाँव गया तो किशन लाल ने पैसे देने से मना कर दिया,,,और शर्त रखी

कि अगर अशोक सरिता से शादी करेगा तो ही उसको पैसे मिलने थे और वो भी इतने पैसे कि

वो अपना खुद का घर ले सकता था,,,,अशोक मजबूर था उसको पैसो की ज़रूरत थी इसलिए

वो सरिता से शादी करने को मान गया,,,

अशोक ने सरिता से शादी की और उसको अपने साथ शहर ले गया और शहर जाके कुछ पैसा

लगाया बच्चे की डेलीवरी पर और एक नया घर भी ले लिया,,,,,लेकिन गीता को अशोक की दूसरी

शादी मंजूर नही थी,,,,वो ना तो खुद सरिता के नये घर मे जाना चाहती थी और ना ही

विशाल को जाने देना चाहती थी,,,,

,,,,,,,,,,,,,,इस बात से मैं थोड़ा हैरान हो गया

हां सन्नी तुम ठीक समझे,,,,विशाल अशोक और गीता का बेटा है ,,,,,

गीता अपने किराए वाले घर मे ही रहने लगी थी,,,,अशोक कभी गीता के पास रहता तो

कभी सरिता के पास क्यूकी घर तो ले लिया था आगे पढ़ने और काम के लिए भी अशोक को पैसे

चाहिए थे,,,,उसने पैसो के लिए ही सरिता से शादी की थी,,,,लेकिन सरिता की भी अपनी

ज़रूरत थी,,,,उसकी शादी हो गयी थी वो चाहती थी उसका पति उस से प्यार करे उसको शादी

का हर सुख दे जो एक पति अपनी पत्नी को देता है,,,अशोक थक गया था बार बार एक घर

से दूसरे घर जाते जाते,,,,लोग बातें करना शुरू कर रहे थे लोगो की बातों से बचने

के लिए अशोक गीता को लेके सरिता वाले घर मे आ गया क्यूकी अब नया घर छोड़कर किराए

वाले घर मे रहना तो बेवकूफी होती,,,,लेकिन जब गीता विशाल के साथ सरिता के पास रहने

आई तो लोगो ने अशोक के घर बच्चा देखा तो उसको सरिता का बेटा समझ लिया,,,अशोक ने

भी लोगो की बातों से बचने के लिए यही कह दिया कि ये बेटा उसका और सरिता का है,लेकिन

अब दूसरी औरत घर मे आ गयी तो उसका क्या करना था,,,अशोक ने ग़लती से किसी को बता

दिया कि गीता उसकी बहन है,,,

 
Back
Top