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कांता की कामपिपासा

तभी डोरबेल बजी. कांता ने जाकर दरवाजा खोला. रूम बॉय के साथ एक और आदमी खड़ा था… शायद वो होटेल का डॉक्टर था…………..

कांता उनको देख कर बोली:

कांता: आइए………. बाबू जी का पैर फिसल गया और ये गिर गये………….

डॉक्टर. ने सिर हिलाते हुए जानकी लाल के पैरो को देखा……….. उन पर हल्के से नीले निशान पड़े हुए थे……….. जानकी लाल के पैरो को इधर उधर से देखने के बाद डॉक्टर. कांता की तरफ देख कर बोला:

डॉक्टर.: घबराने की कोई बात नही है……….. चोट मामूली है………. हल्का सा मांसपेशियो मे खिचाव आ गया है…. मैं मलम और खाने के लिए दवा दे देता हूँ…. कल तक ये आराम से चल सकते है………….

जानकी लाल: (चौंकते हुए) कल तक …………….. अरे नही आज तो मुझे जाना है………..

डॉक्टर. : देखिए इस हालत मे आपका चलता ठीक नही होगा……… बेहतर यही होगा कि आप एक दिन फुल बेड रेस्ट करे………………

ये कह कर डॉक्टर. ने कुछ खाने की दवाई और पैर पर मलने के लिए मलम दिया कांता को और रूम बॉय के साथ कमरे से बाहर निकल गया…………

उसके जाने के बाद जानकी लाल ने कांता से कहा………..

जानकी लाल: अरे बहू ………… चोट इतनी ज़्यादा नही है ………… डॉक्टर. तो ऐसे ही बोलते है… मैं चल सकता हूँ……….. और ये कह कर खड़े होने की कोशिस की मगर पैर के दर्द के कारण वो नही उठ सके…………

 
कांता समझ गयी कि आज जानकी लाल को बेड रेस्ट देना ही पड़ेगा… उसने जानकी लाल से कहा…

कांता: देखिए बाबू जी ऐसी हालत मे हम लोग प्रेम सिंग के ऑफीस मे नही जा सकते है….

जानकी लाल: अरे अगर हम आज उसके पास नही जाएँगे तो ये प्रॉजेक्ट हाथ से निकल जाएगा…. नही कांता नही…… मुझे ये प्रॉजेक्ट किसी भी कीमत पर हासिल करना है…………..

कांता: :लेकिन बाबू जी ऐसी हालत मे हम लोग प्रेम सिंग के साथ मीटिंग के लिए उसके ऑफीस नही जा सकते………….

जानकी लाल: लेकिन तुम तो जा सकती हो…………………

कांता: मैं ………………. आपका मतलब है कि मैं अकेले जाउ……. उसको प्रॉजेक्ट दिखाने के लिए………..

जानकी लाल: हाँ बेटी………. तुम्हे जाना ही होगा…………. अरे एक बिज़्नेस वुमन बनना है तो ऐसी मीटिंग की आदत तुम्हे डालनी होगी…..

कांता: लेकिन मैं वहाँ अकेले…….. मतलब आपके बिना ……….. मैं ये सब कैसे मॅनेज कर पाउन्गी……..

जानकी लाल: देखो बेटी अब प्रॉजेक्ट तुम्हारे हाथ मे है…….. वैसे भी मैने प्रेम सिंग को मना लिया है………. वो केवल 9% मे मान गया है………. लेकिंग उसने ये भी कहा है कि फाइनल डिसिशन मैं आपके प्रॉजेक्ट प्रेज़ेंटेशन के बाद ही दूँगा…… मतलब उसको प्रॉजेक्ट पसंद आ गया तो वो ये टेंडर हमे दे देगा……. अब बस तुम्हे जाकर उसको फाइल दिखानी है…………… कांता बात को समझो ज़रा…

कांता ने सहमती मे अपना सिर हिलाया……… और वापस अपने कमरे मे जाकर तैयार होने लगी………… लगभग आधे घंटे के बाद कांता तैयार होकर बाहर आई……… कांता ने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी. उसी की मॅचिंग करता हुआ हाल्फ स्लीव्स का ब्लाउस, और ऐसा लग रहा था कि वो एक लो कट ब्लाउस था. उसके खुले बाल हवा मे लहरा रहे थे, कांता साड़ी को अपनी नाभि के नीचे ही बाँधती, जिस से उसकी गहरी नाभि भी दिखाई देती थी, जो उसके बदन को और सेक्सी लुक देती थी.

 
जानकी लाल सोफे पर लेटे हुए टीवी देख रहा था. कांता ने प्रॉजेक्ट के सारे डॉक्युमेंट्स लिए और जानकी लाल को अपना ध्यान रखने के लिए कह कर कमरे से बाहर निकल गयी.

होटेल के मेन गेट पर गाड़ी उसका इटनज़ार कर रही थी… कांता के कार के पास आते ही ड्राइवर ने कार का पीछे वाला दरवाजा खोल दिया. और कांता कार मे बैठ गयी, जब ड्राइवर सीट पर आकर बैठ गया तो कांता ने अपने हॅंडबॅग से एक कार्ड निकालकर ड्राइवर को उसपर लिखे पते पर चलने के लिए कहा….

. ड्राइवर चुकी गुड़गाव का लोकल आदमी था इसलिए वो देल्ही की मेन जगहो को अच्छी तरफ जानता था……. लगभग 45 मिनट के बाद कार एक आलीशान टवर के सामने रुकी… ड्राइवर ने वहाँ खड़े वॉच मॅन को इशारा करके अपने पास बुलाया. और उसे उस कार्ड को दिखाकर कुछ पूछने लगा……….

कुछ देर बार उसने कांता को प्रेम सिंग के ऑफीस का लोकेशन समझा दिया……. कांता कार से उतरी और फाइल प्रॉजेक्ट और हॅंड बॅग को लेकर टवर मे प्रवेश कर गयी. ड्राइवर कार लेकर पार्किंग मे चला गया.. कुछ देर बाद कांता और प्रेम सिंग एक शानदार से ऑफीस मे एक अफीशियल टेबल पर आमने सामने बैठे हुए थे…..

ये प्रेम सिंग का पर्सनल और प्राइवेट ऑफीस था…. शायद आज ऑफीस मे प्रेम सिंग के अलावा कोई नही था. कांता को इस बात से कोई हैरानी नही हुई, क्योकि उसे भी कुछ ऐसी ही उम्मीद थी…. तभी प्रेम सिंग ने दोनो के बीच की चुप्पी को तोड़ते हुए कहा.

प्रेम सिंग : हाँ तो कांता जी आप अपना प्रॉजेक्ट फाइल ले आई हैं……….

कांता: जी प्रेम सिंग जी…………. ये रही मेरी प्रॉजेक्ट फाइल……… और ये कह कर कांता ने अपने पास पड़ी फाइल को प्रेम सिंग के सामने खिसका दिया…………… प्रेम सिंग अपनी चेयर से उठते हुए कांता के पीछे आकर खड़ा हो गया और उसकी कुर्सी की बॅक पर अपने दोनो हाथो को टीका कर बोला………

प्रेम सिंग : अरे कांता जी फाइल तो आप ही दिखाएँ…… और मुझे अपने प्रॉजेक्ट के बारे मे डीटेल से समझातीे जाएँ……..

 
प्रेम सिंग की बात सुनकर कांता ने प्रॉजेक्ट फाइल लिया और उसको खोलकर प्रेम सिंग को प्रॉजेक्ट के बार मे बताने लगी………

प्रेम सिंग ने धीरे से अपना दोनो हाथ कांता के दोनो कंधो पर रख दिए और उसको धीरे धीरे अपने हाथो से मसलने लगा….. कांता प्रॉजेक्ट के बारे मे बता रही थी कि कितने पेड़ है …………. सिचाई के साधन कैसे है…… पॅकिंग कैसी होती ………… ट्रांसपोर्ट कैसे होता………. और भी बाते …… तभी प्रेम सिंग कांता की बात काटकर बोला……….

प्रेम सिंग : ये सब बाते तो ठीक है मगर जो आम तुम्हारी कंपनी सप्लाइ करेगी वो कैसे होंगे ……. ये कहते हुए प्रेम सिंग वापस अपनी कुर्सी पर आकर बैठ गया

. कांता फाइल मे से वो पेज खोलने लगी जिसमे आमो की किस्म और क़ुआलिटी की पूरी डीटेल्स के साथ पिक भी थी. वो पेज खोलकर कांता प्रेम सिंग को दिखाने की गरज से टेबल पर थोड़ा सा झुक गयी जिसके कारण उसका आँचल नीचे लुढ़क गया और उसके लो कट ब्लाउस से उसकी घाटीया नज़र आने लगी…….

कांता अपने आँचल की परवाह किए बिना प्रेम सिंग को पिक दिखाती हुई बोली……

कांता: सर ये वो आम है जो हम आपको सप्लाइ करेंगे……….

प्रेम सिंग कांता की चुचियों की तरफ देखते हुए बोला………….

प्रेम सिंग : तुम्हारे आम देखने मे तो ठीक है ……. मगर इनका रस कैसा है ……. ये देख कर तो नही बताया जा सकता ना………….

कांता ने प्रेम सिंग की आँखो को अपनी चूचियो पर नोटीस कर लिया था…………. कांता अपने आँचल को हटाकर एक तरफ करते हुए टेबल पर झुक गयी जिस से की प्रेम सिंग को कांता की लगभग आधी चूचिया नज़र आ ने लगी……………

कांता: तो सर आप मेरे आम चूस कर क्यो नही देख लेते कि इनका स्वाद कैसा है.

कांता अब पूरी तरह प्रेम सिंग के टेबल पर चढ़ कर बैठ गयी थी…..

प्रेम सिंग अपनी कुर्सी से उठता हुआ कांता को अपनी टेबल पर ही घुमा दिया.. और कांता के ब्लाउस के उपर से कांता की चूचियो को दबाते हुए बोला

प्रेम सिंग : तुम्हारे आम तो वाकई मे बड़े बड़े और बहुत कठोर है………

.

कांता: अरे सर आम खाने का असली मज़ा तो छिलका उतारने के बाद ही आता है …….

ये सुनकर प्रेम सिंग ने कांता के ब्लाउस के सारे हुक खोल दिए और उसके ब्लाउस को निकाल दिया……… अब कांता के छोटे से ब्रा मे उसकी चूचिया आधे से अधिक बाहर ही थी……….. प्रेम सिंग ने कांता के ब्रा के दोनो कप मे अपने दोनो हाथ की हथेलिया डालकर कांता की चूचियो को बुरी तरह मसल्ते हुए बोला……

प्रेम सिंग : कल रात को तो ये बच गये………. लेकिन आज इनको चूस चूस कर सारा रस पी जाउन्गा………..

 
कांता के निपल भी अब कठोर हो चुके थे…….. कांता को भी अब जोश आने लगा था…..

कुछ देर ब्रा के अंदर हाथ डाल कर कांता की चूचियो को मसल्ने के बाद प्रेम सिंग ने कांता की ब्रा के हुक भी खोल दिए…………

कांता की चूचिया किसी रबर के बाल की तरह उछल कर बाहर आ गयी….. कांता के ब्राउन निपल पूरी तरह टाइट होकर लगभग 1 इंच बड़े हो गये थे. प्रेम सिंग कांता की चुचियों को ऐसे गूँथ रहा था जैसे की कोई आटा लगाता हो.

कांता और प्रेम सिंग का ये प्रॉजेक्ट डिस्कशन बड़े ही जोश के साथ प्रेम सिंग के ऑफीस टेबल पर चल रहा था. कुछ देर तक कांता की चुचियों को मसल्ने के बाद प्रेम सिंग कांता के सामने आ गया और उसको टेबल के किनारे पर खिसकाकर उसके दोनो पैरो को टेबल से नीचे लटका दिया और उसको चौड़ा करके कांता के दोनो पैरो के बीच मे आ गया और कांता के चेहरे को अपनी हथेलियो मे भरते हुए कांता के नाज़ुक और मादक होंठो पर अपने होंठो को रख दिया.

कांता को अपने होंठो पर प्रेम सिंग के तपते हुए होंठ बड़े ही सुखदायक लग रहे थे. दोनो के होंठ ऐसे चिपके हुए थे जैसे कि जनम जन्मान्तर के बिच्छड़े हुए प्रेमी युगल हो. कुछ देर बाद प्रेम सिंग ने अपनी जीभ को कांता के मुँह मे दाखिल कर उसके मुँह के अंदर इधर उधर करने लगा.

कांता भी अपनी जीभ बढ़ाकर प्रेम सिंग का साथ दे रही थी. कुछ देर तक दोनो यू ही करते रहे.

फिर प्रेम सिंग हाथ बढ़ाकर कांता की कमर से लिपटी हुई साड़ी को खीच कर खोलने लगा, कांता भी प्रेम सिंग का सहयोग करते हुए टेबल से नीचे उतर कर खड़ी हो गयी.... प्रेम सिंग ने भी अपनी शर्ट उतार दी थी. प्रेम सिंग का सुडोल और गठीला बदन देख कर कांता भी मन ही मन बहुत खुश हो रही थी...............

अपनी शर्ट उतारने के बात प्रेम सिंग ने कांता को अपनी टेबल पर थोड़ा सा झुकाकर खड़ा कर दिया...

आगे झुके हुए होने के कारण कांता की गान्ड पेटिकोट मे से बाहर निकलने के लिए बेताब प्रतीत हो रही थी. कांता का पेटिकोट उसकी गान्ड से बिल्कुल चिपका हुया था जिस वजह से पेटिकॉट के उपर से ही कांता की पैंटी की धारिया सॉफ नज़र आ रही थी. कांता की पैंटी काफ़ी छोटी थी या यूँ कहिए कि कांता के विशाल चूतड़ के आगे पैंटी छोटी पड़ गयी थी.........

 
प्रेम सिंग का लंड भी बिल्कुल टनटना गया था और वो भी पेंट मे टेंट बना रहा था. प्रेम सिंग कांता की गान्ड पर हाथ फेरने लगा और कांता के दोनो कुल्हो को अपने हाथो से मसल्ने लगा....

अपनी गान्ड मे प्रेम सिंग के हाथो की मालिश कांता को बड़ा ही आनंदमयी लग रहा था. कांता खुद थोड़ा सा और झुक गयी जिस से कि उसकी गान्ड का उभार और ज़्यादा हो गया.....

कुछ देर बाद प्रेम सिंग ने अपनी कमर के नीचे के आगे वाले हिस्से को कांता की गान्ड से सटा दिया और अपने हाथ कांता के पेटिकोट के नाडे पर लेजाकर उसे खोलने लगा..... कुछ ही देर बाद कांता का पेटिकॉट उसके पैरो मे पड़ा हुआ था.....

उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या नज़ारा था.............. कांता की सुडोल, चिकनी और दूधिया रंग की टाँग, और उसकी गोरी गोरी और गुदाज जाँघ......... उसके विशाल चूतड़ो का आकर्षक कटाव... और उस पर कांता की पैंटी....................... कोई भी इस नज़ारे को देखता तो उसे कांता की पैंटी से जलन होना स्वाभाविक था......... क्योकि वो हमेशा कांता की उस गान्ड से चीपकी हुई रहती थी, जिस गान्ड से अपने लंड को चिपकाने के लिए अच्छे अच्छे तरसते थे.....

 
कांता की सुडोल, चिकनी और दूधिया रंग की टाँग, और उसकी गोरी गोरी और गुदाज जाँघ......... उसके विशाल चूतड़ो का आकर्षक कटाव... और उस पर कांता की पैंटी....................... कोई भी इस नज़ारे को देखता तो उसे कांता की पैंटी से जलन होना स्वाभाविक था......... क्योकि वो हमेशा कांता की उस गान्ड से चीपकी हुई रहती थी, जिस गान्ड से अपने लंड को चिपकाने के लिए अच्छे अच्छे तरसते थे.....

कांता की गुदाज गान्ड पर हाथ फेरते हुए प्रेम सिंग अपने आपको बड़ा गर्वित महसूस कर रहा था. प्रेम सिंग का अब अपने आप को रोक पाना असंभव लगने लगा था, उसको ऐसा लगने लगा था कि अब अगर उसने अपने लंड को पेंट से बाहर नही निकाला तो वो या तो पेंट फाड़ देगा, या खुद टूट जाएगा......... इस बात को समझ कर प्रेम सिंग ने कांता की गान्ड पर से हाथ हटाया और कांता को हटाकर खुद टेबल के सहारे कांता की तरफ मुँह करके खड़ा हो गया...और इशारे से कांता को अपनी पेंट खोलने के लिए कहा..........

कांता को भी इस पल का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार था... कांता ने बड़ी ही नज़ाकत के साथ प्रेम सिंग की बेल्ट को खोलते हुए धीरे धीरे उसकी पेंट की ज़िप को नीचे सरकाने लगी. जब वो प्रेम सिंग की पेंट की ज़िप को नीचे सरका रही थी तब प्रेम सिंग का अकड़ा हुया लंड उसके हाथो से टच हो गया था... कांता को ऐसा लंगा जैसे कि उसके हाथ किसी मोटे लोहे की रोड से छू गये हों....... जैसे ही पेंट ज़िप खोलकर कांता ने प्रेम सिंग की पेंट को नीचे सरकाया तो प्रेम सिंग का अंडरवेर के अंदर फनफनाता हुआ लंड देख कर दंग रह गयी. प्रेम सिंग के अंडरवेर की ऐसी हालत थी कि अब फटा कि अब फटा........... कांता समझ गयी कि अंदर का माल काफ़ी तगड़ा है........ कांता ने अंडरवेर के उपर से ही प्रेम सिंग के लंड को अपनी मुट्ठी मे भरने के नाकामयाब कोशिश करते हुए कांता प्रेम सिंग के लंड को मसल्ने लगी..

प्रेम सिंग ने अपने दोनो हाथ टेबल पर टिका कर अपनी आँखे बंद कर ली....... और मुँह से हल्की हल्की आआआआआहह निकालने लगा....

कांता को भी प्रेम सिंग को तड़पाना बड़ा अच्छा लग रहा था. कुछ देर तक वो ऐसे ही प्रेम सिंग के लंड को अपने हाथो से मसल्ती रही. फिर उसने धीरे से अपना हाथ प्रेम सिंग के अंडरवेअर मे डाल दिया......

कांता के नाज़ुक और मुलायम हाथो का स्पर्श अपने नंगे लंड पर पड़ते ही जैसे वो स्वर्ग मे पहुच गया........

.कांता ने अपनी मुट्ठी मे भर लिया....... प्रेम सिंग का लंड इतना मोटा था कि वो कांता की मुठ्ठी मे पूरा नही आ रहा था. प्रेम सिंग के लंड का साइज़ नापकर कांता भी उसे देखने के लिए उतावली हो गयी और उसने अपने दूसरे हाथ को प्रेम सिंग के पीछे ले जाकर उसकी कमर पे चिपकी हुई अंडरवेर के एक किनारे मे अपनी उंगली फ़साकर एक झटके के साथ प्रेम सिंग की अंडरवेर को नीचे कर दिया. जैसे ही कांता ने प्रेम सिंग की अंडरवेअर को नीचे किया वैसे ही प्रेम सिंग का हल्लब्बि लंड उछलकर कांता के चेहरे से टकरा गया. कांता को तो ऐसा लगा जैसे को सख़्त वस्तु उसके चेहरे से टकरा गयी हो..........

 
प्रेम सिंग का लंड काफिी गोरा था, उसका सुडोल लंड उत्तेजना के मारे फूल गया था, उसके लंड की नसे फूल गयी थी, उसके लंड का सुपाडा किसी टमाटर की तरह लाल और बड़ा था. लंड की मोटाई जड़ की तराफ़ और ज़्यादा मोटी होती चलती गयी थी. प्रेम सिंग के शानदार लंड को देख कर कांता अपने आपको रोक ना सकी और झट से लंड के सुपाडे को अपने दोनो होंठो के बीच ले लिया.

जैसे ही कांता के नाज़ुक होंठ प्रेम सिंग के सुपाडे पर टीके, प्रेम सिंग की तो जैसे जान ही निकल गयी. उसने अपनी आखे भीच ली. कांता ने अब प्रेम सिंग के लंड को अपने मुँह मे लेकर आगे पीछे करना शुरू किया... कुछ देर मे ही प्रेम सिंग का लंड कांता के थूक से पूरा गीला हो गया. अब कांता प्रेम सिंग के लंड को जड़ तक अपने मुँह के अंदर लेकर चूस रही थी.

प्रेम सिंग तो जैसे सातवे आसमान पर पहुच गया था. प्रेम सिंग अपने हाथ को कांता के सिर के उपर फिरा रहा था. कांता भी बड़ी ही तन्मयता से प्रेम सिंग को मुख मैथून का सुख दे रही थी. लगभग 5 मिनट तक कांता ऐसे ही प्रेम सिंग के लंड को चूस्ती रही. फिर प्रेम सिंग ने कांता को रुकने का इशारा किया. कांता ने अपने मुँह से प्रेम सिंग का लंड निकाल दिया.... प्रेम सिंग का सुपाड़ा कुछ और फूल गया था... प्रेम सिंग ने अपने शरीर पर बची एक मात्र वस्त्र बनियान को निकालते हुए कांता को खाड़ा होने का इशारा किया.... कांता के खड़े होते ही प्रेम सिंग ने उसे अपनी बाहो मे भर लिया और अपने होंठ को कांता के मादक होंठो पर रख कर रस्पान करने लगा.... उसने अपने दोनो हाथ को कांता की पैंटी मे घुसाकर उसके दोनो कुल्हो को मसल्ने लगा. वैसे तो प्रेम सिंग की हथेली काफ़ी चौड़ी थी मगर कांता के विशाल कुल्हो पर वो छोटी से ही प्रतीत हो रही थी.

कुछ देर तक कांता की गान्ड को मसने के बाद उसने कांता की पैंटी के किनारे मे हाथ डालकर उसे नीचे सरका दिया, अब कांता और प्रेम दोनो ही निवस्त्र थे. प्रेम सिंग ने कांता को अपनी बाहो मे भरते हुए उसके कुल्हों पर हाथ लगाकर उसे उठा लिया और उसे टेबल पर बिठा दिया. उसके बाद प्रेम सिंग के हाथ फिर से कांता के बदन पर रेंगने लगे... प्रेम सिंग कांता को उपर से धीरे धीरे सहलाता हुया अपने हाथ को कांता के दोनो पैरो के जोड़ के बीच मे ले गया... कांता की चूत एकदम चिकनी थी, ऐसा लग रहा था कि कांता ने 1-2 दिन पहले ही अपनी पुसी की सेविंग की है..

प्रेम सिंग के हाथ अब कांता की चूत के उपर फिसल रहे थे.

अपनी चूत पर प्रेम सिंग के हाथ का स्पर्श कांता को बहुत ही मस्ती प्रदान कर रहा था.... कांता प्रेम सिंग की टेबल पर लेट गयी और अपनी दोनो टांगे और चौड़ी कर ली जिस से कि प्रेम सिंग को उसकी चूत का व्यू अच्छी तरह दिख रहा था.

प्रेम सिंग कांता की चूत के दोनो होंठ को फैलकार कांता की चूत का जायजा लेने लगा... कांता की चूत बिल्कुल गोरी थी लेकिन उसके अंदर की फाक हल्के संतरे कलर की थी. प्रेम सिंग अपनी बीच वाली उंगली को कांता की चूत की फाको मे डालकर उपर से नीचे की तरफ और नीचे से उपर की तरफ फेरने लगा. प्रेम सिंग की उंगलिओ ने ये महसूस कर लिया कि कांता की चूत अंदर से गीली हो चुकी थी. कुछ देर तक अपनी उंगलिओ को कांता की चूत पर रगड़ने के बाद प्रेम सिंग अपनी मध्यमा उंगली को कांता की चूत मे बड़े ही प्यार से सरकाने लगा,

 
प्रेम सिंग की उंगलिओ ने ये महसूस कर लिया कि कांता की चूत अंदर से गीली हो चुकी थी. कुछ देर तक अपनी उंगलिओ को कांता की चूत पर रगड़ने के बाद प्रेम सिंग अपनी मध्यमा उंगली को कांता की चूत मे बड़े ही प्यार से सरकाने लगा,

कांता को जैसे ही इस बात आभास हुआ कांता ने अपनी टांगे और खोल दी जिस से कि उंगली आराम से उसकी चूत मे जा सके. कांता की चूत काफ़ी गीली हो चुकी थी इस वजह से प्रेम सिंग की मोटी उंगली आराम से उसकी चूत मे उतर गयी. अब प्रेम सिंग ने अपने अंगूठे को कांता की चूत के क्लिट्र्स पर रखकर उसे रगड़ते हुए अपनी उंगली को कांता की चूत मे आगे पीछे करने लगा.

प्रेम सिंग की इस हरकत ने कांता की चूत की अग्नि मे घी डालने का काम किया और कांता के मुँह से सेक्सी सिसकारी निकलने लगी. और वो अपनी कमर को उचका कर के प्रेम सिंग का सहयोग करने लगी.

प्रेम सिंग कांता की उत्तेजना को भापकर अपने होंठो को कांता के होंठो पर रख कर चूसने लगा....... अब कांता के उपर और नीचे वाले दोनो होंठ प्रेम सिंग के साथ उलझे हुए थे. लगभग 5 मिनट तक ये डिस्कशन चला दोनो के बीच. फिर प्रेम सिंग ने अपने मुँह को कांता की नाभि पर रख कर उसकी नाभि की चूसने लगा....

कांता के हाथ अपने आप प्रेम सिंग के सिर पर चले गये और वो प्रेम सिंग के बालो मे अपना हाथ फेरने लगी.

कुछ देर तक प्रेम सिंग ऐसे ही कांता की नाभि मे अपनी जीभ डालकर उसकी नाभि को चाट्ता रहा. तभी कांता ने प्रेम सिंग का सिर पकड़कर उसे और नीचे की तरफ दबाना शुरू किया,

प्रेम सिंग कांता की बेचैनी को समझते हुए अपने दोनो हाथो से कांता क़ी चूत को चौड़ा करके अपने होंठो मे कांता की चूत के क्लिट्र्स को भर कर चूसने लगा.

कांता की चूत पर जैसे ही प्रेम सिंग के होंठ पड़े कांता के मुँह से एक लंबी आआआअहह निकल गयी. कांता को अपनी चूत पर प्रेम सिंग के होंठ किसी गरम वस्तु की तरफ प्रतीत हो रहे थे. कांता प्रेम सिंग के सर को और ज़्यादा अपनी चूत मे दबा रही थी और अपनी गान्ड उचका कर अपनी चूत को प्रेम सिंग के मुँह पर रगड़ रही थी.

 
प्रेम सिंग इस समय कांता की दोनो टाँगों के बीचे मे ही था. उसने अपने दोनो हाथ कांता की चूचियो पर रख दिए और उसको ज़ोर ज़ोर से मसल्ते हुए कांता की चूत चाटने लगा. प्रेम सिंग के ऑफीस मे कांता की गरम सासो की आवाज़ सुनाई देने लगी थी. प्रेम सिंग की जीभ कांता की चूत मे से रिस्ते हुए पानी से पूरी भीग गयी थी.... उसने कांता की चूत के होंठो को अपने होंठो से आज़ाद करते हुए कांता से बोला.

प्रेम सिंग : मैने आपकी फाइल तो देख ली है.................... वाकई मे तुम्हारी फाइल क़ाबिले तारीफ़ है........... मज़ा आ गाया तुम्हारी इस हॉट फाइल को देख कर.......... ये कहते हुए वो कांता की बड़ी बड़ी चूचियो के निपल को अपनी चुटकी मे लेकर मसल्ने लगा...............

...

कांता: (दर्द से कराहते हुए) अहह.......................... सर मैने तो पहले ही कहा था कि आप अगर मेरी फाइल को एकांत मे देखेंगे तो ये टेंडर मुझे ही देंगे..............

प्रेम सिंग : हाआआआआ............... कान्ंननननननननननननणणनतत्त्टटटटटटटटटटटटटत्त्ताआआआ............ तुम बिल्कुल सही कह रही हो....................................

कांता: मतलब .......... कि आप मुझे ये टेंडर दे रहे है................................

प्रेम सिंग : बिल्कुल कांता................................. इतनी लाजवाब फाइल को मैं कैसे ना कह सकता हूँ...............

प्रेम सिंग की बात सुनकर कांता मन ही मन बहुत खुस हो गयी..... और अपनी टाँगों को चौड़ी कर अपनी चूत पर हाथ रगड़ते हुए बोली...................

कांता: तो सिर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर फिर देर किस बात की हाईईईईईईईईईई............................ आऐए ना सिर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर

मेरी फाइल पर अपने ऑतरिज़्ड सिग्नेचर तो कर दीजिए.

कांता की बात का सार समझते हुए प्रेम सिंग कांता के जिस्म को अपने जिस्म से चिपकाते हुए बोला.............

प्रेम सिंग : अर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रररीईईईईईई कांता......... इतनी उतावली क्यो हो रही हो सिग्नेचर के लिए............... सिग्नेचर भी कर दूँगा.................... लेकिन पहले अपनी मोहर का ठप्पा तो लगा दूं तुम्हारी फाइल पर....... फिर ऐसा रगड़ कर सिग्नेचर करूँगा कि तुम्हारी फाइल की हालत ही खराब हो जायगी.............. ये कहते हुए प्रेम सिंग कांता की गान्ड पर हाथ फेर रहा था...

 
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