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कांता की कामपिपासा

फूलवा ने आभार प्रकट करने वाली नज़रो से कांता को देखा और किचन से बाहर निकल गयी. कांता ने फूलवा के जाने के बाद अपनी नाइटी के आगे का एक बटन खोल दिया जिस से उसकी गोरी गोरी मांसल चूचियों का उपरी भाग नज़र आने लगा. अपने बालो को खोल कर उन्हे

अपने सीने पर आगे एक तरफ कर लिया. और दूध का ग्लास लेकर अपने आप से बोली “ चल कांता आज तो अपने ससुर को दूध पिला ही दे”

इतना कहकर कांता किचन से निकलकर अपने ससुर के बेडरूम की तरफ चल पड़ी. कांता ने बेडरूम के गेट को नॉक किया………. थकककक…….. थकककक……..

जानकी लाल: कौन है???????????

\

कांता: मैं हूँ बाबू जी………… आपके लिए दूध लेकर आई हूँ.

जानकी लाल: अरे बहू तुम………….. आ जाओ बेटी अंदर आ जाऊऊऊऊ दरवाजा खुला है.

(कांता के हाथो मे दूध का ग्लास देख कर) अरे बेटी तुम क्यो परेशान हो रही हो……. फूलवा को भेज दिया होता……….

कांता: इसमे परेशानी की क्या बात है बाबू जी……….. आख़िर सेवा का थोड़ा हक़ तो हमारा भी बनता है.

जानकी लाल (हँसते हुए) क्यो नही बेटी बिल्कुल……………….. थोड़ा क्या पूरा हक़ बनता है.

कांता: तो लीजिए और दूध पी लीजिए……….

कांता ने ग्लास को जानकी लाल की तरफ बढ़ा दिया. जानकी लाल ने ग्लास जब को पकड़ा तो उनकी उंगली कांता की नाज़ुक उंगलियो को छू गयी. कांता की उंगलिया की छुवन मात्र से ही जानकी लाल का पूरा बदन सिहर उठा. जानकी लाल दूध का ग्लास लेकर दूध पीने लगे.

दूध पीने के बाद कांता ने जानकी लाल से कहा:

कांता; बाबू जी अगर आप अभी सो नही रहे है तो मैं कुछ देर आपके पास बैठ जाऊ.. क्योकि मुझे भी नींद नही आ रही है.

जानकी लाल को तो मानो मन माँगी मुराद मिल गयी. लेकिन उन्होने इस बात को कांता पर जाहिर नही होने दिया और बोले……………

जानकी लाल: हाँ. हाँ … बेटी क्यो नही……….. मुझे भी नींद नही आ रही है……… चलो क्यो ना कुछ खेलते है……………………. ऐसे

टाइम पास भी हो जाएगा…….

कांता: ठीक है ……………….. चलिए चेस खेलते है (कांता चेस की अच्छी खिलाड़ी थी, जानकी लाल को भी चेस खेलना आता था) लेकिन

दाँव पर कुछ लगा होना चाहिए.

 


जानकी लाल: बिल्कुल बेटी क्यो नही ………………….. चलो तुम ही बताओ कि बेट किस चीज़ पर लगाओगी.

कांता: (कुछ सोचते हुए) ऐसा करते है कि अगर आप जीते तो आप जो कहेंगे मैं वो करूँगी और अगर मैं जीती तो आपको मेरी एक विश पूरी करनी होगी.

जानकी लाल: मंजूर है……………..

ये कहकर जानकी लाल ने चेस का बोर्ड और गोटियाँ लेकर अपने बेड पर चेस बोर्ड लगाया. कांता भी जानकी लाल के बेड पर बैठ गयी.

जानकी लाल ने सफेद मोहरो को कांता को दिया और खुद काले मोहरे अपने पास रखे. बाज़ी लगाने के बाद जानकी लाल कांता से बोले

जानकी लाल: चलो बेटी ………….. पहले तुम्हारी चाल है……………

कांता ने अपनी निगाह चेस बोर्ड पर जमा दी. कांता चेस बोर्ड पर अपनी नज़रे जमाने के लिए थोड़ी सी झुकी हुई थी. जिसकी वजह से उसकी नाइटी के खुले हुए बटनो के भीतर से उसकी बड़ी बड़ी दूधिया चूचिया जानकी लाल को नज़र आ रही थी. जानकी लाल की नज़रें एक बार चेस बोर्ड पर जाती और दूसरी बार कांता की गोलाईयों पर. जानकी लाल कांता की चाल का इंतज़ार कर रहे थे. लेकिन जानकी लाल को क्या

मालूम था की कांता ने अपने स्तनों की झलक दिखाकर अपनी चाल की शुरुआत कर दी थी. और ये चाल जानकी लाल पर भारी भी पड़ रही थी.

कांता ने अपने हाथी के आगे वाले पैदल को दो कदम आगे बढ़ा दिया और बोली,

कांता: चलिए बाबू जी, अब आपकी चाल है…………..

अब जानकी लाल ने अपनी नज़रे कांता के मोहरो पर से हटाकर चेस बोर्ड के मोहरो पर जमा दी. और कुछ देर सोचने के बाद उन्होने अपने

घोड़े को 2 ½ कदम अपने बाए हाथ की तरफ रख लिया.

कांता उनकी चाल देख कर बोली.

कांता: वाह बाबू जी आप ने तो पहली ही चाल मे अपना घोड़ा बाहर निकाल लिया.

जानकी लाल: अरे बहू अभी तो तुम बस खेल देखती जाओ मेरा……………….

कांता: (अपने हाथी को दो कदम आगे बढ़ाते हुए) तो लीजिए अब आप मेरे हाथी को संभालिएगा………….. कहीं ये आपके घोड़े को कुचल ना दे…………

दोनो धीरे धीरे एक दूसरे से खुल रहे थे और उनके बात करने का अंदाज़ धीरे धीरे डबल मीनिंग होता जा रहा था.

जानकी लाल: (अपने दूसरे घोड़े को भी बाहर निकालते हुए बोले) आकार मे बड़े होने से कुछ नही होता………….. अभी देखना तुम्हारे हाथी की हवा निकाल देगा मेरा घोड़ा.

कांता: (अपनी रानी के आगे वाले पैदल को दो कदम आगे बढ़ाते हुए) अरे बाबू जी अपने घोड़े को बचा के रखना कही मेरे दोनो विशाल

हाथियो के बीच मे फस गया तो उसका कचूमर हो जाएगा……

जवाब मे जानकी लाल ने भी अपने वज़ीर के आगे वाले पैदल को दो कदम आगे बढ़ा दिया और बोले

जानकी लाल: अरे अभी तुमने मेरे घोड़े की रफ़्तार नही देखी है ना…… इसलिए कह रही हो……….. ये तुम्हारे दोनो हाथियो के बीच मे घुस कर जगह बनाएगा और अपना काम करके दिखाएगा….

कांता ने अपने ऊट (कॅमल) को तीन कदम क्रॉस रास्ते मे आगे बढ़ा दिया.

अब जानकी लाल चेस बोर्ड पर नज़रें गढ़ा कर कुछ सोचने लगे. उनका पूरा ध्यान चेस बोर्ड पर था.

तभी कांता ने चुपके से अपनी नाइटी का एक और बटन खोल दिया, जिससे उसकी चूचियों का आधा से अधिक हिस्सा नज़र आने

लगा……….

तभी जानकी लाल ने अपनी चाल चल दी और कांता से बोले

जानकी लाल: चलो बेटी अब तुम्हारी चाल है……….. कांता अपनी नज़रो को चेस बोर्ड पे जमाती हुई थोड़ा सा और आगे की तरफ झुक गयी. जिससे जानकी लाल को उसके खुले गले की नाइटी से उसके पूरे जोबन के दर्शन होने लगे. कांता के दोनो उन्नत और सुडौल जोबन देख कर

जानकी लाल का मन डोलने लगा था.

कांता अपना ध्यान चेस बोर्ड पर ऐसे लगा रखी थी जैसे उसे इस बात का कोई भान ही नही है. कांता ने अपनी चाल चलते हुए जानकी लाल के घोड़े पर अपने हाथी से निशाना लगाया और बोली.

कांता: लीजये अपने घोड़े को बचाइये…………. हाथी को देख कर ही इसके पसीने छूटने लगे है.

जानकी लाल: मान गये बहू कि तुम्हारी हाथी बड़े भी है और ख़तरनाक भी.

 
कांता जानकी लाल की डबल मीनिंग बात को समझ रही थी. वो भी इसे एंजाय करते हुए बोली.

कांता: अभी आपने इनका आकार देखा ही कहाँ है……………… जब ये दोनो हाथी खुल के मैदान मे आते है तो अच्छे अच्छो के पसीने छूट जाते है…….

जानकी लाल का ध्यान अब चेस मे कम और कांता की जवानी मे ज़्यादा खोने लगा था. कांता भी जानबूझ कर ऐसी पोज़िशन मे बैठी हुई थी कि जानकी लाल को ज़यादा से ज़्यादा अपनी चूचियो को दिखा सके. जानकी लाल को भी इस सेक्सी चेस मे बड़ा मज़ा आ रहा था. उनका ध्यान

कांता के स्तनों पर ज़्यादा था इस कारण कांता उनके कई मोहरो को मार चुकी थी. और कुछ ही देर मे कांता ने अपनी ख़ास चाल को चलते हुए जानकी लाल को पहली बाज़ी मे हरा दिया. और जानकी लाल से बोली:

कांता: देखा बाबू जी…………… मैने आपको हरा दिया नाआआ……… आपको शर्त तो याद है ना…………

जानकी लाल: हाँ………… बेटी बिल्कुल याद है ………………बताओ क्या चाहिए तुम्हे…………… शर्त के मुताबिक हम तुम्हारी एक विश

पूरी करेंगे.

कांता: तो ठीक है बाबू जी ………………….. मेरी विश ये है कि अब मैं इस बिज़्नेस को संभालना चाहती हूँ. …………..

जानकी लाल: अरे ये सब तो वैसे ही तुम्हारा ही है………………….. संभालो……… मुझे भला इसमे क्या ऐतराज है…………

कांता: और 3 दिन बाद देल्ही मे जो मीटिंग होने वाली है उसको भी मैं अटेंड करने आपके साथ देल्ही चलूंगी…………..

जानकी लाल: (कुछ सोचते हुए) अब ठीक है भाई…………….. शर्त तो हम हार ही चुके है, इसलिए मुझे तुम्हारी बात तो मान नी ही पड़ेगी.

कांता: (लगभग चॅलेंज करते हुए) और खेलने का मूड है या रहने दें………….

जानी लाल: नही नही …………. अभी तो एक और बाजी होनी चाहिए……….. अगर तुम्हारी खेलने की इक्षा हो तो………..

कांता: मुझे कोई ऐतराज नही है………………. मगर बिना बेट के बाज़ी नही होगी……

जानकी लाल: हाँ ये तो है ही ……………… और बेट भी सेम ही रहेगी. हारने वाला जीतने वाले की एक विश पूरी करेगा.

अब दोनो फिर चेस बोर्ड पर मोहरे जमाकर आमने सामने बैठ गये. चुकी पहली बाज़ी कांता जीत चुकी थी इसलिए सफेद मोहरे से शुरआत करने का अवसर कांता को ही मिला..

कांता ने इस बार अपनी चाल बदलते हुए सबसे पहले अपने ऊट के सामने के पैदल को दो कदम आगे बढ़ाया…………

उसकी चाल पर जानकी लाल चेस बोर्ड पर नज़रे जमा कर कुछ सोचने लगे. इस बार जानकी लाल ने इरादा कर लिया था कि चाहे कैसे भी हो ये ग़मे उन्होने ही जीतना ही है.

कांता ने जब ये देखा कि इस बार जानकी लाल का पूरा ध्यान चेस मे है तो उसने चुपके से अपनी नाइटी का तीसरा और और आखरी बटन भी खोल दिया……. उसकी नाइटी का आखरी बटन खुलते ही कांता के जोबन पूरी तरह दिखाई देने लगे थे. अब उसकी स्काइ रंग की छोटी

ब्रा जो कि कांता बड़े बड़े बेकाबू जोबन को छुपाने मे असमर्थ थी वो भी झलकने लगे थे.

जानकी लाल ने अपने वज़ीर के बाए साइड वाले आगे के पैदल को एक साथ दो क़दम चला दिया…….. और कांता से बोले……….

जानकी लाल: चलो बेटी………………. इस बार हमे तुम नही हरा पाओगी……..

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कांता: (चेस बोर्ड पर अपनी निगाह को जमाते हुए) अरे वाहह……. इस बार तो आप मुझपर धावा बोलने के मूड मे लग रहे है……… अपने

वज़ीर को आगे लाने की सोच रहे है………….

 
जानकी लाल ने जब झुकी हुई कांता के खुले हुए बटन से उसकी छलक्ती जवानी को देखा तो उनके नीचे के अंगो मे कुछ सरसराने सा लगा…….. उफ्फ क्या मस्त चूचियाँ थी कांता की………… बिल्कुल गोरे रंग की…….. और उसपर उसका विशाल आकार……….. उसकी

एक झलक किसी का भी लंड खड़ा करने के लिए काफ़ी थी. जानकी लाल का भी यही हाल था .

लेकिन जानकी लाल को किसी भी हाल मे ये बाज़ी जीतनी थी. इसलिए उन्होने अपने दिमाग़ को खेल की तरफ लगाना शुरू किया. कांता ने भी अपनी रानी के सामने वाले पैदल को दो कदम बढ़ा कर अपनी रानी के आगे का रास्ता सॉफ किया. जानकी लाल कांता की चाल देख कर बोले………..

जानकी लाल: अरे बहू ज़रा अपनी रानी को बचा के रखना……… नही तो मेरा वज़ीर तुम्हारी रानी का बाजा बजा देगा……………… और ये

कहकर जानकी लाल ने अपने घोड़े को 2 ½ कदम आगे बढ़ाया

कांता: (अपनी चाल चलते हुए) अरे बाबू जी आपके वज़ीर मे इतनी ताक़त कहाँ जो वो मेरी रानी का बाजा बजा सके…

जानकी लाल: (अपनी नज़रो को चेस बोर्ड पर जमाते हुए) देखती जाओ बहू इस बार …………….. मैं रानी के साथ साथ तुम्हारा भी बाजा बजा दूँगा…….

जानकी लाल अपने इस लास्ट वाक्य को कहकर कांता के चेहरे के हाव भाव को पढ़ने की कोशिश करने लगे और जब उन्होने देखा कि कांता

उनकी इस डबल मीनिंग बात पर किसी प्रकार की नाराज़गी जाहिर नही कर रही है तो वो मन ही मन बड़े खुश हुए……..

कांता : (अपने ऊट (कॅमल) को बाहर निकालते हुए) अरे बाबू जी………………. पहले मेरी रानी का तो बाजा बजाईये उसके बाद मेरा बाजा बजाने की सोचिएगा……….

जानकी लाल कांता के मुँह से ऐसी बात सुनकर समझ गये कि अब वो कुछ और भी कूले शब्दो का प्रयोग कर सकते है…………….

दोनो ही बड़े ध्यान से चेस खेल रहे रहे थे……… जानकी लाल ये गेम को जीतना चाहते थे……………. इसलिए उन्होने अपना पूरा ध्यान चेस बोर्ड पर ही लगा रखा था……… चुकी जानकी लाल भी चेस के उस्ताद थे इसलिए जल्द ही वो कांता पर हावी होने लगे. वो अपने वज़ीर को उपर की तरफ पाँचवी लाइन मे रखते हुए कांता से बोले.

जानकी लाल: ये लो बेटी……….. अब मेरा वज़ीर तुम्हारे एरिया मे घुस गया है और जल्दी ही तुम्हारी रानी को काबू कर लेगा………

कांता: (अपनी चाल चलते हुए) कोई बात नही बाबू जी मेरी रानी भी आपके वज़ीर का सामना करने के लिए तैयार है. ………….. ये कहकर

वो जानकीलाल की तरफ एक अर्थपूर्ण भरी मुस्कान से देखने लगी…

 


चूकि जानकी लाल इस बार बड़े ध्यान से खेल रहे थे इसलये उन्होने कांता को शह और मात दे दी………….. और खुशी से बोले..

जानकी लाल: लो बेटी मैने तुम्हे हरा दिया………………… मैं बेट जीत गया हू………

कांता: हाँ बाबू जी ………. मान गये………….. आपका वज़ीर ने तो मेरे एरिया मे घुस कर खलबली ही मचा दी……

जानकी लाल: आख़िर मैने तुम्हारी रानी का बाजा बजा ही दिया……….. अब तुम्हे शर्त के अनुसार मेरी एक विश पूरी करनी होगी………..

कांता: जी बाबू जी……… तो बोलिए आपकी क्या विश है…………

जानकी लाल: (कुछ सीरीयस होते हुए) देखो कांता…………… मैं पहले ही तुम्हे बता दूँ………. मैं कुछ भी विश कर सकता हूँ……… इसलिए तुम पहले सोच लो……… ऐसा ना हो कि बाद मे तुम्हे कुछ बुरा लगे………….. ये कहकर जानकी लाल काँटे के चेहरे के भाव को समझने की कोशिश करने लगे…….

कांता भी समझ चुकी थी कि ससुर जी की क्या विश होगी……… लेकिन वो तो पहले से ही मानसिक रूप से इसके लिए तैयार थी…….. मगर वो इसे जाहिर नही करना चाहती थी………… इसलिए उसने भी कुछ प्रश्नवाचक निगाहो से जानकी लाल को देखा……. मानो वो उसके मन की बात को जान ने की कोशिश कर रही हो……. और बोली……..

कांता: बेट के हिसाब से आपने मेरी एक विश पूरी की है तो मुझे भी आपकी एक विश तो पूरी करनी ही पड़ेगी.

जानकी लाल: नही बेटी नही…………. अगर तुम्हे ऐसा कुछ लग रहा है तो मैं तुमपर विश पूरी करने का दबाव नही डालूँगा……… अगर तुम्हारी मर्ज़ी है तो करो वरना …………….. कोई बात नही.

कांता: नही नही बाबू जी ऐसा कैसे हो सकता है……….. बेट तो बेट होती है……….. अब हारे है तो बेट पूरी करनी ही होगी……….. बोलिए आप की क्या विश है ………….

जानकी लाल ने अपनी नज़रे कांता की भरपूर और गदराई हुई जवानी पर डाली. कांता की नाइटी के तीनो बटन खुले हुए थे और वो जानकी लाल को आमंत्रण दे रहे थे.

कांता भी जानकी लाल की ललचाई नज़रो से समझ गयी थी कि अब जानकी लाल उसके जिस्म को पाने का ही विश करेंगे.

जानकी लाल कांता को साइड से देख रहे थे और देखा क्या रहे थे अपनी आँखो से उसे नंगा कर रहे थे. कांता के नुकीले जोबन पर देख कर

अपने होंठो पर जीभ फिराते हुए बोले.

जानकी लाल: कााआआन्न्‍ननननणणनतत्त्टटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटत्त्ताआआआअ………… मैं……… तुम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हीईईई………..एक बार …………..स्पर्श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करंना चाहता हूँ……………………… अपने हाथो से छु कर

महसूस करना चाहता हूँ. यही मेरी विश है…………

कांता : (चौकने का नाटक करते हुए)ये…………… क्या ……….. कह रहे है बाबू जी ………………….. ऐसा कैसे हो सकता

है……………………. मेरा मतलब ऐसी विश से नही था.

 
कांता की बात सुनकर जानकी लाल थोड़े गंभीर हो गये……… और बोले…………

जानकी लाल: देखो बेटी……… मैं जानता हूँ कि मुझे ऐसा नही कहना चाहिए था…… मगर क्या करूँ………….. तुम्हारा ये भरा हुआ बदन देख कर मेरे अंदर एक भूचाल सा आ जाता है……….. वैसे तो मैने पहले ही कहा था कि मैं विश मे कुछ भी माँग सकता हूँ……… इसलिए

मैने तुम्हे छूने की विश की, इसके अलावा कुछ नही. लेकिन अगर तुम्हे ऐतराज है तो रहने दो……….. कोई बात नही………………..

ये कहकर जानकी लाल चुप हो गये……

. कांता जानकी लाल की बात सुनकर मन ही मन बहुत खुश हुई……… लेकिन अपने चेहरे पर उसने लाज और शरम का नक़ाब लगाकर जानकी लाल से बोली…………

कांता: (अपनी नज़रे झुका कर बोली)ठीक है बाबू जी……………. लेकिन प्ल्ज़…….. आप सिर्फ़ मुझे छुना ही ……. इसके आगे कुछ नही……….

जानकी लाल: (खुश होते हुए) हाँ. बेटी हाँ……. जब तुम शर्त पूरी करने के लिए इतनी बड़ी बात मान सकती हो तो मैं भी तुम्हारी ये बात ज़रूर रखूँगा…………

कांता: लेकिन बाबू जी एक प्राब्लम और है……………

जानकी लाल: (कुछ अशांत मन से) अब क्या हुया बेटी……….. क्या प्राब्लम है?

कांता: (अपने सिर को झुकाकर शरमाने का नाटक करती हुई) बाबू जी मेरे मन मे कभी भी ऐसा विचार नही आया आज तक……….. जब आप मुझे स्पर्श करेंगे तो मैं तो शरम से मर ही जाउन्गी……….. मैं ये सब कैसे देख पाउन्गी………. हालाकी मैं इसके लिए तैयार हूँ… मगर फिर भी……………..

जानकी लाल: (कुछ सोचते हुए) तो फिर बेटी मैं ऐसा करता हूँ कि तुम्हारी आखों पे पट्टी बाँध देता हूँ…….. जिस से कि मुझे भी सहूलियत हो जाएगी और तुम्हे भी………………………..

कांता भी कुछ ऐसा ही सोच रही थी…………… कांता ने इस बात पर सहमति मे अपना सिर हिला दिया……..

जानकी लाल ने बड़ा सा कपड़े का टुकड़ा लिया………. और बोले…….

जानकी लाल: बेटी कांता तुम यहाँ पर खड़ी हो जाओ……..

 
जानकी लाल की बात सुनकर कांता बेड से उतरकर नीचे खड़ी हो गयी……… जानकी लाल ने कपड़े की पट्टी बनाकर कांता की आँखो के ऊपर से पीछे की तरफ बाँध दिया… अब कांता कुछ देख नही सकती थी लेकिन फिर भी वो जानकी लाल की आँखो को अपने बदन पर महसूस कर रही थी. मन ही मन कांता भी बहुत रोमांचित हो रही थी. कांता की आखो पे पट्टी बँधी हुई होने के कारण अब जानकी लाल को अपने हाव भाव छुपाने की ज़रूरत नही थी. पहले तो जानकी लाल कांता के बदन को बड़े ध्यान से देखने लगे. कांता की बड़ी बड़ी चूचियाँ……… उसको देख कर किसी का भी दिल उसको दबाने के लिए मचल उठता……… कांता का गदराया और भरा हुआ जिस्म देख कर जानकी लाल के होंठ सूखने लगे थे…….. फिर जानकी लाल कांता को घूरते हुए उसके पीछे आ गये…. उनकी नज़रें फिसलती हुई कांता की

विशाल गान्ड पर जा टिकी.

वैसे तो जानकी लाल ने कांता की गान्ड का भारी पन पहले भी कई बार देखा था लेकिन आज उसकी गान्ड को इतमीनान से देखने का मौका मिला था………… कांता के कुल्हो की चौड़ाई और भारीपन देख कर सहज ही अंदाज़ा लगा लिए कि कांता काफ़ी कामुक औरत है, और

चुदाई भी जबर्जस्त तरीके से करवाती है…… अब जानकी लाल वक़्त ना गवाते हुए कांता के सामने की तरफ आ गये. और धीरे से कांता की

हथेलियो को अपने हाथो मे लिया………… जैसे ही दोनो के हाथ एक दूसरे से स्पर्श हुए दोनो के शरीर मे एक झटका सा लगा………..

जानकी लाल अपनी दोनो हथेलियो से कांता की नरम और नाज़ुक हथेलियो को सहलाने लगे. धीरे धीरे वो कांता के हाथों को कोहिनी (एल्बो) तक सहलाने लगे. उसके हाथो का स्पर्श जानकी लाल को एक नये आनंद की अनुभूति करा रहा था. जानकी लाल धीरे से कांता के पीछे की तरफ आ गये और अपने दोनो हाथो से कांता के दोनो हाथो को सहलाने लगे. इस समय जानकी लाल कांता के ठीक पीछे थे और वो 2 इंच ही दूर थे कांता की गान्ड से……….

जानकी लाल को कांता की गान्ड की गर्मी अपने लंड पर महसूस हो रही थी.

यही हाल कांता का भी था वो भी अपनी गान्ड पे जानकी लाल के लंड की गर्मी महसूस कर रही थे.

जानकी लाल कांता की बगलो तक अपने हाथ से सहला रहे थे. जब उन्होने देखा कि कांता बिल्कुल नॉर्मल है और उसके चेहरे पर कोई शिकन नही है तो वो थोड़ा और आगे बढ़ गये. जिससे कि कांता की गान्ड पर जानकी लाल का लंड हल्का स्पर्श करने लगा. जानकी लाल ने अपने दोनो हाथो से कांता की सुराहीदार गर्दन को सहलाना शुरू किया. अपनी खुली हुई गर्दन पर जानकी लाल के हाथो का स्पर्श पाकर कांता का बदन सिहर उठा. जानकी लाल अपने मुँह को कांता के कान के पास लेजाकर फुसफुसाए.

 
जानकी लाल: कांता तुम बहुत सुंदर हो…….. तुम्हारे जैसी मस्त औरत मैने आज तक नही देखी……… तुम्हारे शरीर का स्पर्श बिल्कुल रेशम के स्पर्श की तरह है………… तुम्हे छूकर तो मैं धन्य हो गया………. ये कहकर जानकी लाल ने अपनी दोनो हथेलिओ को कांता के बड़े बड़े स्तनों पर रख दिया……

उफफफफफफफ्फ़……….. क्या किस्मत पाई थी जानकी लाल ने………….. इस उमर मे भी जानकी लाल की हथेलियाँ कितनी खुशनसीब थी जो कांता के रसीले जोबन को सहला रही थी. जानकी लाल कांता की दोनो चूचियाँ को सहलाने लगे और हल्के हल्के मसल्ने भी लगे. उनके

मसल्ने से कांता की चूचियों के निपल धीरे धीरे खड़े हो रहे थे. जानकी लाल ने भी ये महसूस कर लिया था

जानकी लाल ने अब अपने हाथो का दबाव थोड़ा बढ़ा दिया और कांता की चूचियो के निपल को अपने अंगूठे और उंगली से ज़ोर से मसल्ने

लगे. कांता सिसकते हुए बोली……………………….

कांता: आआआआआहह बाबू जी ये क्या कर रहे हो……………………………

जानकी लाल: (कांता की चूचियों को मसल्ते हुए) क्यो बहू क्या हुआ ………. क्या तुम्हे मेरा छुना अच्छा नही लग रहा है …………….

कांता: मैने ऐसा कब कहा बाआआअबुउउउउउउउउ जी …………. मगर ज़रा धीरे धीरे मसलिए……………….

कांता की ये बात सुनकर जानकी लाल समझ गये कि अब धीरे धीरे कांता अपना समर्पण कर देगी……. ये सोचते ही जानकी लाल को और

जोश आ गाया…… और वो कांता की चूचियो को और तेज मसल्ते हुए बोले……….

जानकी लाल: क्याआआ करूँ बहू………….. तुम्हारे ये दोनो जोबन इतने मस्त है कि जो भी इन्हे देखता होगा वो इन्हे दबाने की ज़रूर सोचता होगा, जब तुम्हारे जोबन को देखने से ही दिल मचल जाता है तो मेरे तो हाथ तो तुम्हारे जोबन पर ही है मैं इन्हे बिना दबाए कैसे रह सकता हूँ…. और ये कहकर जानकी लाल कांता की बड़ी बड़ी चूचियों को बड़े ही जोश से मसल्ने लगे……………… लगभग 5-7 मिनिट तक जानकी लाल कांता को स्तनों को बेदर्दी से मसल्ते रहे……… कांता के निपल भी जोश से पूरे तन गये थे….. जानकी लाल कांता की चूचियो को मसल्ते

उस से पूरी तरह चिपक गये थे……..

 
कांता भी अपनी गान्ड की दरार मे जानकी लाल के लंड के कटाव को महसूस कर रही थी. अब जानकी लाल ने उसको स्तनों से हाथ हटाया और उसके चिकने पेट पर अपना हाथ फिराने लगे. पूरे पेट पर हाथ फिराने के बाद जानकी लाल कांता की नाभि को टटोलने लगे, कुछ प्रयास के बाद ही जानकी लाल ने कांता की नाभि मे अपनी एक उंगली घुसा दी और बोले……………..

जानकी लाल: अरे कांताआआआ……… जब तुम्हारी नाभि ही इतनी गहरी है तो बाकी की जगह कितनी गहरी होगी……………

.

कांता जानकी लाल के बाकी की जगह का मतलब समझ रही थी, लेकिन फिर भी ना समझी का नाटक करते हुए बोली…………..

कांता: बाकी की कौन सी जगह की बात कर रहे है बाबू जी……………

जानकी लाल: अरे समझी नही तुम……………. चलो जाने दो और ये कहकर अपना एक हाथ वापस कांता की मदमस्त चूचियों पर रख दिया………..

कांता: बताइए ना बाबू जी………….. बाकी की कौन सी जगह की बात कर रहे है…………… कांता अपनी बातो मे अब ज़्यादा खुलापन लाना चाहती थी

जानकी लाल: (कांता की एक चूचियो को मसल्ते हुए) ………. अरे रहने दो बेटी, तुम्हे बुरा लग जाएगा……

कांता: अरे बाबू जी जब आप मुझे ऐसे छू सकते है तो थोड़ी बाते तो हो ही सकती है…………… आप बोलिए मैं बुरा नही मानूँगी………………

कांता की बाते सुनकर जानकी लाल ने अपना एक हाथ कांता के पेट से हटाकर धीरे धीरे उसकी रानों के पास ले गये और कांता के कानो मे फुसफुसा कर बोले…………..

जानकी लाल: मैं ये कह रहा था कि जब तुम्हारी नाभि इतनी गहरी होगी तो तुम्हारी ये (चूत को हाथ लगाते हुए) कितनी गहरी होगी मेरी कांता रानी ………ये कहकर जानकी लाल ने अपने दूसरे हाथ को भी कांता के रानों पर रख दिया और दोनों हाथो से उसकी दोनो रानों को सहलाने

लगे………..

कांता जानकी लाल के ऊपर अपने शरीर के भार को डालने लगी………\

 
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