S
StoryPublisher
Guest
जानकी लाल भी मजबूती से कांता को अपनी दोनो बाजुओं मे जकड लिए……… और कांता से बोले……..
जानकी लाल: बेटी अगर तुम्हे कोई ऐतराज नही हो तो मैं तुम्हे बेड पर लिटा दूऊऊऊ………
कांता: अब तो मुझे शर्त पूरी ही करनी है……….. अब चाहे मुझे आप खड़े खड़े छुये या बेड पर लिटाकर छुये……….. अब ये तो मैं समझ ही गयी हूँ कि दोनो हाल मे ही आप मुझे बहुत अच्छी तरह से छुवेन्गे………..
कांता की बात सुनकर जानकी लाल कांता को पीछे से पकड़े हुए ही बेड पर ले गये और कांता को बेड पर मुँह के बल लिटा दिया…………….. जानकी लाल कांता के बड़े बड़े चूतड़ो को देख रहे थे………. जो कि उस समय किसी हांड़ी की तरह लग रही थी. जानकी लाल कांता के बड़े कुल्हो पर हाथ फिराते हुए बोले……….
जानकी लाल: एक बाद कहूँ बहू………….
कांता: (मदभरी आवाज़ मे) हाँ बाबू जी बोलिए ना……………..
जानकी लाल: (उसकी गान्ड की दरार मे उंगली फिराते हुए) कांता……………. तुम्हारा पिच्छवाड़ा बड़ा ही पुष्ट और विशाल है…………. ऐसी औरते जिनके कूल्हे भारी होते है वो बड़ी कामुक होती है………….. और संभोग करते समय काफ़ी खुल के साथ देती
है………………………….. ऐसा लगता है कि तुम्हे भी संभोग मे बड़ा मज़ा आता है…………… क्यो मैं सही कर रहा हूँ ना कांता ……….
कांता ने अपनी टांगे थोड़ी और चौड़ी कर दी जिस से कि उसकी गान्ड की दरार और खुल गयी. …………….. और बोली
कांता: संभोग करने मे तो सभी को ही मज़ा आता है बाबू जी…….. इसमे कौन सी नयी बात है………..
कांता के इस प्रकार जवाब देने से जानकी लाल की हिम्मत बढ़ती जा रही थी. अब वो के कुल्हो को बड़े ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगे…….. और बोले.
जानकी लाल: अरे कांता तुम्हारी जैसी औरतो की बात अलग होती है………… ऐसे कुल्हो की औरते जबरदस्त संभोग की आदी होती है………. ऐसी औरतो के साथ जितना भी संभोग करो उतना ही कम होता है ………………
जानकी लाल: बेटी अगर तुम्हे कोई ऐतराज नही हो तो मैं तुम्हे बेड पर लिटा दूऊऊऊ………
कांता: अब तो मुझे शर्त पूरी ही करनी है……….. अब चाहे मुझे आप खड़े खड़े छुये या बेड पर लिटाकर छुये……….. अब ये तो मैं समझ ही गयी हूँ कि दोनो हाल मे ही आप मुझे बहुत अच्छी तरह से छुवेन्गे………..
कांता की बात सुनकर जानकी लाल कांता को पीछे से पकड़े हुए ही बेड पर ले गये और कांता को बेड पर मुँह के बल लिटा दिया…………….. जानकी लाल कांता के बड़े बड़े चूतड़ो को देख रहे थे………. जो कि उस समय किसी हांड़ी की तरह लग रही थी. जानकी लाल कांता के बड़े कुल्हो पर हाथ फिराते हुए बोले……….
जानकी लाल: एक बाद कहूँ बहू………….
कांता: (मदभरी आवाज़ मे) हाँ बाबू जी बोलिए ना……………..
जानकी लाल: (उसकी गान्ड की दरार मे उंगली फिराते हुए) कांता……………. तुम्हारा पिच्छवाड़ा बड़ा ही पुष्ट और विशाल है…………. ऐसी औरते जिनके कूल्हे भारी होते है वो बड़ी कामुक होती है………….. और संभोग करते समय काफ़ी खुल के साथ देती
है………………………….. ऐसा लगता है कि तुम्हे भी संभोग मे बड़ा मज़ा आता है…………… क्यो मैं सही कर रहा हूँ ना कांता ……….
कांता ने अपनी टांगे थोड़ी और चौड़ी कर दी जिस से कि उसकी गान्ड की दरार और खुल गयी. …………….. और बोली
कांता: संभोग करने मे तो सभी को ही मज़ा आता है बाबू जी…….. इसमे कौन सी नयी बात है………..
कांता के इस प्रकार जवाब देने से जानकी लाल की हिम्मत बढ़ती जा रही थी. अब वो के कुल्हो को बड़े ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगे…….. और बोले.
जानकी लाल: अरे कांता तुम्हारी जैसी औरतो की बात अलग होती है………… ऐसे कुल्हो की औरते जबरदस्त संभोग की आदी होती है………. ऐसी औरतो के साथ जितना भी संभोग करो उतना ही कम होता है ………………