जानकी लाल ने एक हाथ से कांता की पैंटी के उपर से ही उसकी चूत को मसल्ते हुए और दूसरे हाथ से कांता की एक चूची को ज़ोर से
मसल्ते हुए बोले………………
जानकी लाल: अरे कांता…………… कम से कम मुझे छूकर तो देख लेने दो तुम्हारी पिच को……….. ऐसी पिच को छूना भी अपने आप मे गर्व की बात होती है……….
ये कह कर जानकी लाल और ज़ोर से कांता की चूत और चूची को मसल्ने लगे………. जब जानकी लाल कांता की चूचियो को अपनी मुठ्ठी मे भर कर मसलते तो कांता की चुचियों पर जानकी लाल की उंगलिओ की छाप पड़ जाती थी…….. उसकी चूचियो पर लाल लाल निशान बन जाते थे……………. जानकी लाल अपने होंठो को कांता की गर्दन पर ऊपर से नीचे फेर रहे थे, और बीच बीच मे वो कांता के कान को भी हल्के
हल्के दाँत से काट लेते थे………………………
. कांता भी पीछे खिसक कर अपनी गान्ड को जानकी लाल के लंड के उपर रखने का प्रयास कर रही थी. ……………………
. जानकी लाल कांता के उतावलेपन को देख कर समझ गये कि आज थोड़ी सी कॉसिश करने पर कांता की पिच मे अपना गिल्ला गाढ़ा जा सकता है………… ये सोच कर जानकी लाल कांता के गालो को चूमने लगे और अपना हाथ उसकी पैंटी से हटाकर उंगली को कांता के होंठो पर फिराने लगे……. कांता ने भी कुछ देर बाद अपने होंठो को खोल दिया………. जानकी लाल ने अपनी उंगलीयो को कांता के मुँह मे डाल
दिया……….. कांता भी जानकी लाल की उंगलिओ को किसी आइस्क्रीम की तरह चूस रही थी……………… जानकी लाल ने कांता की चूत को अपनी मुठ्ठी मे भरते हुए कहा………………
जानकी लाल: अर्र्र्र्र्र्र्र्र्रररीईईईई काााआआन्न्ननननणणनतत्त्टटटटटटटटटटत्त्ताआआ क्यो तड़पाती हो मुझे………………. अपने इस पिच के दर्शन तो करवा ही दो आज……………………………….
कांता: (सिसकारी लेते हुए) पिच दिखाने मे मुझे कोई आपत्ति नही है बाबू जी……….. लेकिन मैं इस बात से डर रही हूँ कि………… कहीं
आप मेरी पिच देखने के बाद इसमे अपना गिल्ला ना गाढ दें…………….
जानकी लाल: अरे बेटी………… पिच तो होती ही है गिल्ले गाढ़ने के लिए…………. वैसे भी तुम्हारी पिच पर तो कई गिल्ले गाड़े होंगे…………………
कांता: बाबू जी ………. ये आप क्या कह रहे है……… मैं क्या आपको ऐसी लगती हूँ……..
जानकी लाल: इसमे तुम्हारा कोई दोष नही है कांता…………….. तुम हो ही इतनी सुंदर कि तुम्हे देखते ही कोई भी आदमी अपना गिल्ला तुम्हारी पिच पर गाढ़ने के लिए बेताब रहेगाआआअ……….. पर घबराओ मत बेटी मैं गिल्ला तभी गाढ़ुंगा जब तुम खुद गाढ़ने के लिए कहोगी………………….
कांता: तो ठीक है बाबू जी…………………. आप मेर्रर्र्र्र्ररी पिच से कवर हटा सकते है…………………..
ये सुनकर जानकी लाल ने कांता को बेड पर खड़े होने के लिए कहा………. कांता जब बेड पर खड़ी हो गयी तो जानकी उसके सामने आ गये…………. चूकि कांता की आखो पर कपड़ा बँधा हुआ था लेकिन फिर भी कांता समझ गयी कि जानकी लाल उसके सामने खड़ा
है…………….. जानकी लाल ने अपने कुर्ते को उतार दिया…………. अब उसके शरीर पर केवल पाजामा ही था जिसके अंदर उसका
हलब्बी लौडा फुफ्कार मार रहा था……….. जानकी लाल अपने दोनो हाथो को कांता के बड़े बड़े कुल्हो पर फेरते हुए बोले…………..
जानकी लाल: एक बात कहूँ कांता…………….
कांता: हहााआ बबुउउउउउउउजीईइ बोलिए……………….
जानकी लाल: (कांता को अपने आप से सटाते हुए)……… तुम्हारे जैसा माल मैने आज तक नही देखा……………. ये कह कर जानकी लाल ने अपने दोनो हाथो से ज़ोर की थाप कांता के दोनो कुल्हो पर मारे…………….. फहत्त्त्टटटटटतत्ट की आवाज़ के साथ कांता के कुल्हो पर
जानकी लाल की उंगलियो के निशान पड़ गये………………
कांता के मुँह से भी हल्की आह निकल गयी ……………. जैसे ही कांता का मुँह आह के लिए खुला……….. जानकी लाल ने उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए………. और अपना एक हाथ कांता की गान्ड पर और दूसरा हाथ कांता की नंगी पीठ पर फेरते हुए…कांता को अपने सीने से सटा लिया…………….. कांता ने भी अपने हाथ जानकी लाल के कुल्हो के इर्द गिर्द कर लिए………. जानकी लाल ने कांता का पॉज़िटिव रेस्पॉन्स देख कर कांता के मूँह मे अपनी जीभ को डाल दिया……. कांता ने भी अपनी जीभ से जानकी लाल की जीभ का स्वागत
किया………………. दोनो के होंठ एक दूसरे के होंठ से काफ़ी देर तक चिपके रहे……………. अब जानकी लाल ने कांता की गान्ड पर से अपना एक हाथ हटाया और उसके एक हाथ के पंजे मे अपने पंजे की उंगलिया फसा कर उसे जकड लिया…….. और धीरे धीरे कांता के हाथ को अपने तन्नाए हुए लंड पर रख दिया……… कांता के अनुभवी हाथो ने तुरंत समझ लिया कि जानकी लाल का हथियार काफ़ी मोटा और
तगड़ा है…….. इस बात का अनुभव होते ही कांता मन ही मन बहुत खुश हुई……. लेकिन जान बुझ कर नाटक करते हुए बोली:
कांता: बाबू जी ये क्या है…………… (कांता ने बड़े आराम से जानकी लाल का लंड अपने हाथो मे पकड़ रखा था)
जानकी लाल: बेटी ………. यही तो वो गिल्ला है जिसे मैं तुम्हारी पिच मे गाढ़ना चाहता हूँ…………….. कैसा लगा मेरा गिल्ला
कांता: ये तो बहुत बड़ा और मोटा है बाबू जी……………… इतना लंबा गिल्ला कैसे गढ़ सकता है मेरी पिच पर…………………..
जानकी लाल: अरे बेटी………… ये पिच चीज़ ही ऐसी होती है………… इसपर एक तो क्या एक साथ दो दो गिल्ले भी गाढ़े जा सकते है…………………………..
कांता: च्च्चसिईईईईईईई बाबू जी …………. आप कैसी बाते करते है…………….
अब जानकी लाल अपने घुटनो के बल बैठ गये अब उनका मुँह कांता की चूत के ठीक सामने था…………… जानकी लाल ने अपने दोनो हाथ की उंगलिया कांता के दोनो पाटो की ओर लेजाकर कांता की पैंटी पे फ़सा दी और कांता की पैंटी को खोलने लगे …….. इसमे कांता भी उनका सहयोग कर रही थी……………………
कुछ ही पल मे कांता के जिस्म पर से एक मात्र वस्त्र जो कि पैंटी थी वो भी हट गयी……. अब कांता जन्मजात नंगी खड़ी थी जानकी लाल के सामने…….. जानकी लाल ने बैठे ही बैठे अपने एक हाथ से कांता की चूत की फांको को चौड़ा किया……… कांता की चूत की फाके किसी बड़े संतरे की फाक की मानिंद लग रही थी………… उसका रंग गहरे केसरिया रंग का था……… उसकी चूत पर छोटे छोटे बाल थे………. कांता की योनि काम रस से पूरी भीगी हुई थी…………. जानकी लाल ने अपनी बीच वाली उंगली कांता की चूत मे डाली……..
कांता ने उंगली के इशारे को समझते हुए अपनी टांगे थोड़ी और खोल दी……… कांता की चूत गीली होने के कारण काफ़ी चिकनी हो गयी थी इसलिए जानकी लाल की उंगली बिना किसी परेशानी के कांता की चूत मे समा गयी………
जैसे ही जानकी लाल की पूरी उंगली कांता की चूत मे गयी उन्हे ऐसा लगा जैसे उन्होने चूत मे नही किसी हीटर मे अपनी उंगली डाल दी हो………. कांता की चूत की गर्मी देख कर जानकी लाल दंग रह गये…………. चूत मे उंगली घुसने का असर कांता के चेहरे पर स्पष्ट झलक रहा था……….. जानकी लाल कुछ देर ऐसे ही कांता की चूत मे अपनी उंगली आगे पीछे करते रहे……….. फिर अपनी उंगली निकाल कर उन्होने कांता की टाँगो को और चौड़ा किया………. कांता के टांगे चौड़ी करते ही उसकी चूत की फाँक और खुल गयी……. जानकी लाल ने
अपने दोनो हाथ कांता के कुल्हों पर रखे और अपने मुँह को कांता की चूत के और करीब ले जाने लगे………… एक पल रुक कर जानकी लाल ने कांता के चेहरे की ओर देखा……….. कांता का चेहरा मारे उत्तेजना के लाल हो रहा था…….. जानकी लाल की गरम गरम साँसे कांता
अपनी चूत पर महसूस कर रही थी और अपनी चूत चटाइ के बारे मे सोच कर रोमांचित हो रही थी……….. जानकी लाल ने कांता की हालत
को समझ कर अपने होंठ कांता की चूत के होंठो पर रख दिए.
जैसे ही जानकी लाल ने अपने गरम होंठ कांता की गरम चूत के होंठो पे रखे कांता के मुँह से एक गहरी आह निकल गयी………………
जानकी लाल की लप्लपाती जीभ कांता की गरम और रसीली चूत पर चलने लगी…………. जानकी लाल बड़े ही तन्मयता से कांता की चूत चाट रहे थे……………… अगर किसी की चूत को कोई मर्द चाटता है तो उस औरत का क्या हाल होता है ये तो सभी पाठक और ख़ासतौर से पाठिकाओ को पता ही होगा………….. कुछ ऐसी ही हालत अब कांता की हो चुकी थी….. जानकी लाल कांता की चूत को अपने मुँह मे भरकर ऐसे चूस रहे थे जैसे कि कोई पके हुए आम चूस्ता हो……….
जानकी लाल की जीभ का अपनी चूत पर स्पर्श पाकर कांता भी कामाग्नि मे जलने लगी थी………. उसका हाथ अपने आप जानकी लाल के सिर पर आ गया और जानकी लाल के मुँह को अपनी चूत की तरफ दबाने लगी…. और स्वयं भी जानकी लाल के मुँह पर अपनी चूत को रगड़ने लगी……..
एक अद्भुत और बड़ा ही मादक सीन था………. जानकी लाल के दोनो हाथ कांता के विशाल कुल्हो पर थे…… और जानकी लाल का मुँह कांता की दोनो जाँघो के बीच मे उसकी चूत से चिपका हुआ था…….. कांता अपने हाथों से जानकी लाल के सिर के पीछले भाग को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा रही थी ……… और स्वयं गान्ड हिला हिला कर अपनी चूत को जानकी लाल के होंठो पर रगड़ रही थी…………. लगभग
10 मिनट तक जानकी लाल कांता चूत रस का स्वाद लेते रहे………….. फिर उन्होने ने कांता से कहा.
जानकी लाल: कांता …………………… अब तुम ऐसा करो कि बेड पर लेट जाओ………
और ये कहते हुए जानकी लाल ने कांता को बेड पर लिटा दिया………… कांता बेड पर नंगी लेटी हुई थी………………. उसकी चूत से कामरस बहकर उसकी जाँघो पर आ रहा था……………. उसकी चूत फूल सी गयी थी और उसकी चूत का क्लाइटॉरिस भी बड़ा दिखाई दे रहा था……………… जानकी लाल ने अपना पाजामा उतार दिया………. जानकी लाल का लंड अंडरवेअर फाड़ कर बाहर आने के लिए उतावला हो रहा था……….. जानकी लाल कांता के नंगे बदन को देखते हुए एक हाथ से अपने लौडे को मसल्ने लगे………… और अपने होंठो पर जीभ फेरने लगे…… फिर वो कांता की कमर के पास बैठ गये………. और कांता की गीली चूत पर अपना हाथ फिराने लगे………..
जानकी लाल के हाथो का स्पर्श पाकर कांता के पैर और चौड़े हो गये…………
कुछ देर कांता की चूत सहलाने के बाद जानकी लाल ने अपनी दो उंगलियो को कांता की चूत मे डाल दिया……. जानकी लाल की दोनो उंगली बिना किसी रुकावट के बड़े आराम से कांता की चूत मे समा गयी……… तब जानकी लाल ने अपने अंगूठे को कांता की चूत के दाने पर रख
दिया और उसके दाने को मसल्ते हुए….. अपनी दोनो उंगलिया जो कि कांता की चूत मे थी उसे भी हिलाने लगे…………. . ऐसा करते ही
जानकी लाल ने अपनी उंगलियो की स्पीड और बढ़ा दी………….. उत्तेजना के कारण कांता की चूत की फाक हिलने लगी थी………….. …….और उसका दाना हिलने लगा था……………………………. कांता की आँखो मे एक अजीब सी भूख नज़र आ रही थी……………
जानकी लाल कांता की हालत को समझ कर अपने पैरो को कांता के सिर की तरफ किया और अपने होंठो मे कांता की चूत के क्लाइटॉरिस को भर के चूसने लगे………..
जैसे ही जानकी लाल ने कांता की चूत का क्लाइटॉरिस अपने होंठो मे दबा कर चूसा………… कांता ने अपने दोनो हाथो की मुठ्ठी मे बिस्तर को कस के पकड़ लिया…………….
जानकी लाल कांता को और तड़पाने के इरादे से उसकी क्लाइटॉरिस को और ज़ोर से चूसने लगे…………… कांता का शरीर उत्तेजना के कारण काँपने लगा….. उसने अपने हाथ से टटोलते हुए जानकी लाल के पैरो को अपनी ओर खिचा………
अब कांता के हाथ जानकी लाल के अंडरवेर पर फिसल रहे थे……… जल्दी ही कांता के हाथो मे जानकी लाल का हथियार आ गया………………….. कांता जानकी लाल के लंड पर ऐसी टूट पड़ी जैसे कोई कई दिनो का भूखा रोटी पर टूटता हो. …… कांता जानकी लाल के लंड को अपने हाथो मे पकड़ कर दबाने लगी………………… कुछ देर बाद कांता जानकी लाल के अंडर वेअर के नाडे (जानकी लाल पुराने टाइप का अंडरवेर, जिसे देशी भाषा मे कच्छा कहते है) को ढूँढने लगी…………
जानकी लाल उसकी उत्तेजना को देख कर बड़ा ही खुश हो रहा था……………
. जब कांता जानकी लाल के नाडे को ना खोल पाई तो उसने अपनी आख पर बँधी हुई पट्टी को अपने हाथ से खोल दिया……… और एक ही झटके के साथ जानकी लाल के नाडे को खोल दिया………. बिना एक पर गवाए कांता ने …….. जानकी लाल के अंडरवेर को उसके घुटनो तक सरका दिया……… अब कांता के सामने जानकी लाल का मोटा हलब्बी लंड था…………. कांता ने एक पल के लिए उसे देखा और दूसरे
ही पल जानकी का लंड कांता के मुँह के अंदर था………….. ये सब इतनी जल्दी किया कांता ने कि जानकी लाल भी दंग रह गये………..
वाह रे औरत…………. जब वो शर्म करती है तो भी कोई आगे नही होता उसके………
और जब बेशरम बनती है तब भी कोई उसके आगे नही होता है.
अब सिसकने की बारी जानकी लाल की थी………. कांता ने जानकी लाल के लंड को अपने मुँह मे भर लिया और उसके टमाटर की तरह फूले हुए सुपारे पर अपनी जीभ फिराने लगी…………. जानकी लाल के मुँह से आनंदमयी सिसकारी निकलने लगी थी………. दोनो ही खिलाड़ी बड़े ही जबरदस्त तरीके से 69 पोज़िशन का खेल खेल रहे थे. कांता अपने दोनो हाथो से जानकी लाल के दोनो कुल्हो को पकड़कर उनके लंड को
अपने मुँह मे लेकर चूस रही थी. जानकी लाल भी अपनी बहू की चूत का रस बड़ी ही मस्ती के साथ चाट रहे थे……… अब जानकी लाल ने कांता को अपने उपर कर लिया. जिससे कि कांता को अपना सर आगे पीछे करने मे ज़यादा परेशानी ना हो अब कांता और ज़ोर ज़ोर से
जानकी लाल का लंड चूसने लगी थी…………… जानकी लाल कांता की चूत चाट ते हुए बोले…
जानकी लाल: अहह बाहुउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउ…………. आज तक कभी लंड चुसवाने मे इतना मज़ा नही आया……………..
जितना कि तुम्हारे चूसने से आ रहा है……………..
कांता अपने मुँह से जानकी लाल के लंड को निकालकर उसके टोपे पर अपनी जेभ फिराती हुए बोली:
जानकी लाल: चूस्ती है बहू…………….. मगर कभी कभी ……….. और वो भी बड़े अनमने ढंग से………………..
कांता: (जानकी लाल के अंडकोषो को चूस्ती हुई) …………….. इतने बड़े और मोटे लंड को कोई औरत बिना चूज़ कैसे रह सकती है…………………………….. बाबू जी अगर मुझे पता होता कि आपका लंड इतना बड़ा है तो…………. इस कब का अपने मुँह मे लिए लिए रहती………..
जानकी लाल(कांता की गान्ड के दरारो मे अपना उंगली घुसाते हुए बोले)………. बस इसे अपने मुँह मे ही लेती……………. और कहीं नही लेती क्या इसको बहू?
कांता: और कहाँ लिया जाता है इसको………………..
जानकी लाल: और कहाँ कहाँ लिया जाता है इसे बहू?
कांता: आप ही बताएँ कि आप कहाँ देना चाहते हैं इसे………………………………
जानकी लाल कांता की चूत को चौड़ी करके उसमे उंगली घुसाते हुए बोले
जानकी लाल: मैं तो तुम्हारी इस पिच मे अपना गिल्ला गाड़ना चाहता हूँ.
कांता: सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सिईईईईईईई……………….. लेकिन बाबू जी पिच पर गिल्ला गाड़ने के बाद तो मॅच खेलना ज़रूरी हो जाता है…………..
जानकी लाल: बेटी मैं तो तैयार हूँ तुम्हारे साथ मॅच खेलने के लिए………….
कांता: लेकिन मुझे अपने इस मॅच मे ऐसा खिलाड़ी चाहिए जो मुझे थका कर हरा सके……… क्योकि इस मॅच मे हारने मे ही संतुष्टि मिलती है…………………
जानकी लाल: सो तो है बेटी …………… मैं भी तुम्हे इस मॅच मे हरा दूँगा………. तुम एक बार खेल कर तो देखो ……………
कांता: अरे बाबू जी मैने कहा तो मैं ऐसे मॅच वैसे ही खिलाड़ी के साथ खेलती हूँ जो लंबा और जबरदस्त शॉट मार सके………………
जानकी लाल: अरे बहू …………….. एक बार मौका दे कर तो देखो………….. ऐसे ऐसे शॉट खेलूँगा कि तुम्हारे भी पसीने छूट जाएँगे…………………
कांता: अच्च्छा आपको अपने उपर इतना विश्वास है…………………………..
जानकी लाल: बिल्कुल बेटी………………… अभी तुमने हमारी इस खेल मे रफ़्तार नही देखी है इसलिए तुम इतनी बाते कह रही हो……………… एक बार मेरे साथ मॅच खेल के देखो………………………………………. तुम्हारी इस पिच की हालत खराब कर दूँगा.
असल मे कांता भी तो यही चाहती थी कि उसके पिच पर जानकी लाल अपने चोको छक्को की बरसात कर दे………. कांता ने जानकी लाल से कहा……..
कांता: ठीक है बाबू जी…………. जब इतना कुछ हो ही चुका है तो अब मॅच भी खेल ही लेते है………………. ऐसा कहते हुए कांता ने जानकी लाल के लंड को छोड़ दिया और उठ कर बिस्तर पर बैठ गयी………..
जानकी लाल भी उठकर बैठ गये…….. दोनो की नज़रे जब एक दूसरे से मिली तो दोनो के चेहरे पर एक बेशरम से मुस्कान फैल गयी………..
जानकी लाल ने अपनी बहू कांता को बिस्तर पर पीठ के बल लेटा दिया…….. कांता की चूत अब पहले से काफ़ी चौड़ी हो गयी थी………. उसकी गीली चूत पर बल्ब की रोशनी पड़ने से वो चमक रही थी…… जानकी लाल ने कांता की गान्ड के नीचे तकिया लगाया जिस से कि उसकी चूत और ऊपर की तरफ उठ गयी…………. अब जानकी लाल कांता के दोनो पैरो को चौड़ा करते हुए कांता के दोनो पैरो के बीच मे आ गये……. कांता की नज़रे जानकी लाल के मोटे लंड पर टीकी हुई थी……….. और जानकी लाल की नज़रे कांता की चूत से चिपकी हुई
थी……
दोनो शिकारियों की नज़रे अपने अपने शिकार को ऐसे देख रही थी जैसे शिकार करने से पहले शेर अपने शिकार को देखता है…………
जानकी लाल अपने लंड को कांता की चूत के होंठो पर उपर से नीचे तक रगड़ने लगे…….. इस रगड़ से कांता की चूत मे से चिंगारिया फूटने लगी….. ये ऐसी चिंगारी थी जो केवल महसूस होती है दिखाई नही देती………… जब कांता को अपने चूत की तपिश बर्दास्त नही हुई तो
आख़िर मे उसने जानकी लाल से कहा………………
कांता: अर्र्र्र्र्र्र्रररीईई बाबू जी क्यो तड़पाते है…………………. अब शुरू भी कीजिए ना.
जानकी लाल कांता की चूत के होंठो पर अपना लंड रगड़ते हुए बोले…………
जानकी लाल: अरे बेटी कांता…………. क्या शुरू करने के लिए कह रही हूऊऊऊऊओ…………
कांता: वही जो आप इतनी देर से करने के लिए बेताब थे.
जानकी लाल ने जानबूझ कर ना समझने का नाटक करते हुए कहा
जानकी लाल: अरे बहू ……………. जब सब कुछ ही खुल गया है तो कम से कम खोल के बोलो ना आब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्बबब…………………..
कांता: अरे बाबू जी ………….. मॅच शुरू कीजिए ना…………….. अब रहा नही जा रहा है.
जानकी लाल: अरे बेटी मॅच शुरू करने से पहले गिल्ला गाड़ने की ज़रूरत होती है……………..
कांता: (तड़प कर) तो गाढिए ना गिल्लाआअ………………… अब तो पिच भी तैयार है गिल्ला गढ़वाने के लिए…………….. अब जल्दी से
गिल्ला गाढ कर मॅच शुरू कीजिए…………………….
जानकी लाल कांता की तड़प को देखते हुए समझ गये कि अब गिल्ला गाढ़ने का सही समय है………. इसलिए जानकी लाल ने अपने लंड के सुपाडे को कांता की चूत पर टिकाया……… और अपने दोनो हाथो से कांता की कमर को थाम कर एक ज़ोर का झटका लगाया अपनी कमर से……………….
सस्स्स्स्स्साआआआआआअटततटटटटटटटटटटत्त्ताआआआआआआआआअक्ककककककककककककककककककककक की आवाज़ के साथ कांता के मुँह से हल्की से आआआआअहह निकल गयी…………………………….. परिणाम स्वरूप जानकी लाल का आधे से ज़्यादा लंड कांता की चूत मे प्रवेश कर गया………….. अब जानकी लाल ने अपने लंड को उसी जगह पर आगे पीछे करना शुरू किया……… जब कांता की चूत मे लंड आगे पीछे करने की जगह बन गयी तब जानकी लाल ने अचानक से एक और ज़ोर का झटका दिया…………. इससे पहले कि कांता कुछ समझ पाती जानकी लाल ने अपना पूरा लंड कांता की चूत मे उतार दिया था…………
कांता के चेहरे पर हल्के दर्द की रेखाए उतर आई थी…….. और उसकी आँखे अपने आप बंद हो गयी थी…………….. तब जानकी लाल अपने होंठ कांता के होंठो पर रख कर उसे चूसने लगे………….. इस से कांता के चेहरे से दर्द का भाव जाता रहा और जल्द ही उसके चेहरे पर कामपिपासा की छाया लहराने लगी……… जानकी लाल उसके चेहरे के भाव को देख कर समझ गये कि अब कांता नॉर्मल हो गयी
है………………………. अब उन्होने धीरे धीरे अपनी कमर को आगे पीछे हिलाना शुरू किया…………. कुछ ही पलों मे जानकी लाल का लंड कांता की चूत मे आराम से आ जा रहा था………….. जानकी लाल अपने मुँह को कांता के कान पर ले जाकर फुसफुसाते हुए बोले………………….
जानकी लाल: क्यों बहू ………….. गिल्ला अच्छी तरह गाढ़ा कि नही मैने?
कांता: सच कहूँ तो बाबू जी……………………. मुझे आपका गिल्ला और गिल्ला गाढ़ने का अंदाज़ दोनो ही बड़ा अच्छा लगा……………..
अब तो बाबू जी आप लंबे लंबे शॉट लगाकर तेज़ी से रन बटोरिए………………….
इतना सुनते ही जानकी लाल ने अपने दोनो हाथो की हथेलिओ मे कांता की बड़ी बड़ी चूचियो को भरकर उसको भीचते हुए अपने धक्को की स्पीड बढ़ा दी…………. कुछ ही देर मे जानकी लाल के धक्को के स्पीड इतनी बढ़ गयी कि पूरा बेड उसके धक्को से हिलने लग गया था……… कांता की चूत मे जानकी लाल का लंड किसी पिस्टन की तरह बाहर अंदर आ जा रहा था……….. कांता की चूत मे से कामरस बड़ी तेज़ी से बहने के कारण उसकी पूरी चूत पूरी तरह गीली हो गयी थी……………. जिसके कारण जानकी लाल के हर धक्के के साथ कांता की
चूत मे से पच्च्छ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…….. पच्च्छ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह की आवाज़ आ रही थी जो कि बेडरूम के माहॉल को और चुदाइमय बना रही थी.
कांता भी अपनी गान्ड उचका उचका कर जानकी लाल की धुन मे धुन मिला रही थी……………. जानकी लाल तेज़ी से कांता को छोड़ते हुए बोले
जानकी लाल: क्यो बहुँ…………………. मेरे शॉट्स पसंद आ रहे है कि नही?
कांता: अरे पिताजी आप तो बड़े शानदार तरीके से शॉट्स मारते है…………………….. अगर मुझे पता रहता कि आप इतने अच्छे खिलाड़ी है तो अब तक मैं आपके साथ ना जाने कितने मॅच खेल चुकी होती……………….
ये सुनकर जानकी लाल का जोश दुगुना हो गया…………………… वो और तेज़ी के साथ धक्के लगाने लगे. जानकी लाल के हर धक्के के साथ समुचा बेड हिल रहा था………… लगभग 5-6 मिनट तक दोनो की चुदाई इसी पोज़िशन मे चलती रही…………………………… फिर
जानकी लाल कांता के उपर से उठ गये और बिस्तर पर पीठ के बल लेट ते हुए कांता को अपने उपर आने का इशारा किया………….
कांता ने उनके इशारे को समझ कर अपनी दोनो टाँगों को जानकी लाल के दोनो तरफ करते हुए अपनी चूत को जानकी लाल के खड़े लंड के सुपाडे पर टिका दिया……………. लंड चूत मे जगह बनाता हुआ सतत्तटटतत्त से कांता की चूत मे समा गया………………………………
जानकी लाल ने कांता से कहा…………………….
जानकी लाल: अब तुम भी तो शॉट लगाऊऊऊऊओ देखे कैसे शॉट मारती हो………
कांता ने अपने दोनो हाथो को जानकी लाल के बालो से भरी हुई छाती पर टिका दिया……… और फिर अपनी गान्ड को हिलाने लगी……………. कुछ ही देर मे कांता बड़ी तेज़ी से अपनी गान्ड हिला हिला कर धक्के दे रही थी…………..
उधर जानकी लाल भी कांता के हर धक्के का जवाब …… जबरदस्त धक्के के साथ दे रहे थे……….. कांता के कूल्हे बड़े और भारी होने की वजह से हर धक्के के साथ बड़ी ही मादकता के साथ थिरक रहे थे………………… जब कांता की चूत मे जानकी लाल का लंड जाता था तो ऐसा लगता था कि जैसे वो किसी लंड पे नही बल्कि किसी बड़े से खूटे को अपनी चूत मे ले रही हो…………….. जानकी लाल की जाँघो और कांता के कुल्हो की टकराहट की फॅट फॅट की आवाज़ पूरे कमरे मे सुनाई दे रही थी….. कांता के उपर होने के कारण जानकी लाल आराम से अपने लंड को कांता की चूत मे आते जाते देख रहे थे……………. जानकी लाल के लंड पर उचकने से कांता की चूचिया भी बड़े मादक अंदाज़ मे हिल रही थी…………….. ये सब देख कर जानकी लाल के लंड मे और कडापन आ गया…………..
जानकी लाल को इतना जोश आ गया कि उन्होने कांता को पकड़ कर अपनी छाती से चिपका लिया और कांता के कुल्हो को अपने लंड पर दबाते हुए बड़ी ही तेज़ी के साथ नीचे से धक्का लगाने लगे…………………… जानकी लाल के धक्को की स्पीड इतनी तेज थी कि लंड कब कांता की चूत से बाहर आता और कब दोबारा अंदर चला जाता इसका अंदाज़ा कांता भी नही लगा सकती थी……………. कांता की चूत से पानी रिस रिस कर जानकी लाल के लंड पर बह रहा था…………………