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कामाग्नि complete

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अब तक आपने पढ़ा कि कैसे भाई-बहन और पत्नी ने घर में खुलेआम चुदाई का माहौल बना लिया था और पूरी मस्ती के साथ रह रहे थे तभी राजन को याद आया कि उसने सोनिया को उसके भाई से चुदवाने का वादा किया था और फिर वो उसके लिए प्लानिंग करने लगे।

अब आगे…

अगले दिन मैं क्लीनिक चला गया और नेहा कॉलेज, तब सोनिया ने समीर (सोनिया का भाई) को कॉल लगाया।

सोनिया- क्या बात है यार, तुम तो अपनी बहन को भूल ही गए? कभी खुद भी कॉल कर लिया करो।

समीर- नहीं दीदी, आपको कैसे भूल सकता हूँ, वो ज़रा प्रोजेक्ट में बिजी हो गया था। फाइनल इयर है ना तो इसलिए!

सोनिया- ओह हाँ! वो तो है, फिर सारा टाइम पढ़ाई में ही लगे रहते हो या कोई दोस्त भी बनाई है?

समीर- ‘बनाई है?’ मतलब आप गर्लफ्रेंड के बारे में पूछ रही हो? पहले तो कभी नहीं पूछा जब यहाँ थीं तब। अब क्या जीजाजी की संगत का असर हो गया जो भाई की गर्लफ्रेंड की फिकर होने लगी।

सोनिया- हा हा हा… नहीं यार, सोचा अब तुम हमें मिस नहीं करते हो तो शायद कोई गर्लफ्रेंड बना ली हो। हम तो तुम्हें बहुत मिस करते हैं। अभी नहाने जा ही रही थी कि सोचा तुमको फ़ोन करके पूछ लूँ कि तुमको हमारी याद क्यों नहीं आती।

समीर- ओह्ह… मतलब… हम्म… अब मैं क्या बोलूँ?

वो सोनिया की बात में छिपा इशारा समझ गया था लेकिन पहले कभी उसने सोचा नहीं था कि सोनिया कभी इस बारे में बात करेगी। वैसे सोनिया और समीर दोनों ही ये जानते थे कि वो एक दूसरे को छिप छिप कर नहाते हुए देखते थे। दोनों ये भी समझते थे कि ये बात दोनों को पता है क्योंकि दोनों ना केवल देखते थे बल्कि दिखाते भी थे।

समीर ने सोनिया की जो अदाएं देखीं थीं उस छेद से उसे देखने के बाद वो भी जानता था कि उसकी दीदी उसको रिझाने की पूरी कोशिश कर रही थी।

लेकिन एक तो माता-पिता के साथ एक छोटे घर में रहते हुए दोनों का साथ में अकेले होना ही बहुत कम होता था उस पर कभी पढ़ाई की टेंशन तो कभी किसी का मूड ठीक नहीं। इन सब के बाद भी जो कुछ मौके मिले तो फटी पड़ी रहती थी कि कहीं कुछ गलत हो गया तो जितना मजा मिल रहा है वो भी हाथ से ना चला जाए। कभी कभी जब जैसे तैसे हिम्मत जुटाई तो मौका ही हाथ से फिसल जाता था।

ऐसे करते करते काफी समय हाथ से निकल गया और फिर सोनिया की शादी हो गई।

आज जब सोनिया ने इशारे में ही सही लेकिन वही पुराने तार छेड़े तो समीर के दिल कि धड़कन अचानक बढ़ गई और वो हड़बड़ा गया लेकिन फिर उसने अपने आप को सम्हालते हुए कहा- दरअसल दीदी ऐसा है ना, कि मैं कॉलेज में थोड़ा पढ़ाकू लड़कों की श्रेणी में आता हूँ, तो जो लड़कियाँ सारा टाइम पढ़ाई की ही बात करती हैं, बस उन्ही से बात हो पाती है। बाकी किसी से बात करने का कभी मौका ही नहीं मिलता, तो पढ़ाई के अलावा लड़कियों से कैसे बात करना है उसमें मैं थोड़ा कमज़ोर हूँ।

सोनिया- अच्छा ये बात है। तो ठीक है, तू एक काम कर कुछ दिन के लिए यहाँ आ जा, यहाँ राजन की बहन नेहा भी हमारे साथ रहती है। कुछ दिन उसके साथ रहेगा तो तेरी झिझक भी निकल जाएगी और क्या पता तुझे नेहा ही पसंद आ जाए और तू उसे ही गर्लफ्रेंड बना ले।

समीर- बात तो ठीक है लेकिन यहाँ मम्मी-पापा को क्या कहूँगा कि पढ़ाई-लिखाई छोड़ कर मैं कुछ दिन के लिए दीदी के पास जा रहा हूँ और वो भी लड़की पटाने की ट्रेनिंग लेने? हा हा हा…

सोनिया- ओके बाबा! लेकिन राखी पर तो आ सकता है ना? उसके लिए तो कोई मना नहीं करेगा?

समीर- हाँ वो तो है। तब तक मेरा प्रोजेक्ट भी ख़त्म हो जाएगा।

सोनिया- गुड! अच्छा ठीक है अब रखती हूँ… नहाने जा रही हूँ… अब तो तू ज़रूर मिस करेगा मुझे।

शरारती अंदाज़ में इतना कह कर सोनिया ने फ़ोन रख दिया और नहाने चली गई। आज उसकी पुरानी यादें ताज़ा हो गईं थीं और वो साधारण तरीके से नहाने के बजाए उसी कामुक तरीके से नहा रही थी जैसे उसका भाई अभी भी उसे देख रहा है। उसने अपने उरोजों को अपने दोनों हाथों में भर के मसला और चूचियों को चुटकी से पकड़ कर उमेठा, फिर खींचा।

पानी से भीगते अपने बदन को सहलाते हुए अपना दायाँ हाथ वो अपनी जाँघों के बीच ले गई और अपनी एक उंगली से भगनासा (क्लिटोरिस, चूत का दाना) को सहलाने लगी। एक एक करके बाकी उंगलियाँ उसने अपनी चूत में डाल लीं और अन्दर बाहर करने लगी। उसकी आँखें बंद थीं और उसके मन में उसके भाई का लंड घूम रहा था.

आम तौर पर सोनिया हस्त-मैथुन नहीं करती थी। खासकर शादी के बाद तो उसने ऐसा कभी नहीं किया था लेकिन आज अपने भाई के लंड की कल्पना करते हुए उसे ऐसा करने में बड़ा मजा आया था।समीर का लंड राजन के लंड से बड़ा और मोटा था और ज्यादा गोरा होने से थोड़ा गुलाबी था जो उसे बहुत प्यारा लगता था वो सोचने लगी कि जब वो सच में उसे चोदेगा तब कैसा लगेगा।

उधर समीर की धड़कन अभी भी बढ़ी हुई थी, उसका मन अब प्रोजेक्ट में नहीं लग रहा था, बेचैनी में वो इधर उधर टहल रहा था, उसका लंड खड़ा तो नहीं था लेकिन उसमें एक अजीब सी गुदगुदी सी हो रही थी जैसे नींद खुलने पर अंगड़ाई लेने का मन करता है, वैसे ही उसका भी अपने लंड को मसलने का मन कर रहा था।वह अपनी बहन का दीवाना था वह उसको पाने के लिये कुछ भी कर सकता था

आखिर ऐसे ही टहलते टहलते जब वो बाथरूम के पास से गुज़रा तो उसे अन्दर नहाने की आवाज़ सुनाई दी। उसे पता था कि अन्दर उसकी माँ नहा रही होंगी क्योंकि उस वक़्त घर में वो दोनों ही थे।

शीतल वैसे तो दो बड़े बच्चों की माँ थी लेकिन हमेशा अपने काम में क्रियाशील रहने और व्यस्तता के कारण उनका शरीर सुडौल और त्वचा सुन्दर थी।

वैसे तो समीर ने कभी शीतल को इस नज़र से नहीं देखा था लेकिन आज उसकी बेचैनी ने उसे मजबूर कर दिया था। उसने सोचा न समझा और अपनी आँख उस छेद से लगा दी जिससे वो अपनी बहन सोनिया को देखा करता था। उसकी आँखों ने जो देखा उसकी खबर शायद उसके दिमाग से भी पहले उसके लंड को लग गई थी, वो लंड जो अब तक बेचैन पड़ा करवटें बदल रहा था, वही अब अंगड़ाई ले कर उठ खड़ा हुआ था।

समीर ने अपना लंड अपनी मुट्ठी में लेकर हिलाना शुरू कर दिया। उसने पहली बार अपनी मम्मी के हुस्न को इस तरह नंगा देखा था। 36-30-35 का सुडौल बदन, डी कप साइज के बड़े बड़े उरोज जो ज़्यादा लटके नहीं थे और वो मस्त गोल भरे हुए नितम्ब… समीर का लंड थोड़ी ही देर में झड़ गया, वो इतना ज्यादा झड़ा जितना पहले कभी नहीं झड़ा था।

वैसे तो 42 साल की शीतल अपनी बेटी सोनिया से कुछ काम सुन्दर नहीं थी लेकिन आज समीर के इस कदर झड़ने का करण इससे कहीं ज़्यादा था। उसकी एक गर्लफ्रेंड है पर उसने दिदी को नही बताया और वह उसको कई बार चोद चुका था और भी तीन चार लड़कियों को चोद चुका था पर दिदी उसका पहला प्यार था उसको पाने के लिये वह उसकी नंनद को पटाने का नाटक भी कर सकता था कभी कभी भोला बनकर भी बहोत काम बनते है फिर अभी अभी सोनिया ने पुरानी यादें ताज़ा कर दी थीं और इन सब पर तुर्रा ये कि उसने अपनी माँ को नंगी देखा था।

सनी लियोनी को नंगी देख कर किसी को इतना झटका नहीं लगेगा जितना किसी पड़ोस की लड़की को नंगी देख कर लगेगा क्योंकि जिस बात की आप अपेक्षा नहीं करते, जब वो होती है तो उत्तेजना ज़्यादा होती है। और अगर वो औरत आपकी माँ हो तो फिर तो बात नियंत्रण से बाहर हो जाती है।

समीर भी इतनी उत्तेजना सहन नहीं कर पाया और जल्दी से लंड और हाथ धोकर अपने कमरे में जा कर सो गया।

 
उधर समीर की धड़कन अभी भी बढ़ी हुई थी, उसका मन अब प्रोजेक्ट में नहीं लग रहा था, बेचैनी में वो इधर उधर टहल रहा था, उसका लंड खड़ा तो नहीं था लेकिन उसमें एक अजीब सी गुदगुदी सी हो रही थी जैसे नींद खुलने पर अंगड़ाई लेने का मन करता है, वैसे ही उसका भी अपने लंड को मसलने का मन कर रहा था।वह अपनी बहन का दीवाना था वह उसको पाने के लिये कुछ भी कर सकता था

आखिर ऐसे ही टहलते टहलते जब वो बाथरूम के पास से गुज़रा तो उसे अन्दर नहाने की आवाज़ सुनाई दी। उसे पता था कि अन्दर उसकी माँ नहा रही होंगी क्योंकि उस वक़्त घर में वो दोनों ही थे।

शीतल वैसे तो दो बड़े बच्चों की माँ थी लेकिन हमेशा अपने काम में क्रियाशील रहने और व्यस्तता के कारण उनका शरीर सुडौल और त्वचा सुन्दर थी।

वैसे तो समीर ने कभी शीतल को इस नज़र से नहीं देखा था लेकिन आज उसकी बेचैनी ने उसे मजबूर कर दिया था। उसने सोचा न समझा और अपनी आँख उस छेद से लगा दी जिससे वो अपनी बहन सोनिया को देखा करता था। उसकी आँखों ने जो देखा उसकी खबर शायद उसके दिमाग से भी पहले उसके लंड को लग गई थी, वो लंड जो अब तक बेचैन पड़ा करवटें बदल रहा था, वही अब अंगड़ाई ले कर उठ खड़ा हुआ था।

समीर ने अपना लंड अपनी मुट्ठी में लेकर हिलाना शुरू कर दिया। उसने पहली बार अपनी मम्मी के हुस्न को इस तरह नंगा देखा था। 36-30-35 का सुडौल बदन, डी कप साइज के बड़े बड़े उरोज जो ज़्यादा लटके नहीं थे और वो मस्त गोल भरे हुए नितम्ब… समीर का लंड थोड़ी ही देर में झड़ गया, वो इतना ज्यादा झड़ा जितना पहले कभी नहीं झड़ा था।

वैसे तो 42 साल की शीतल अपनी बेटी सोनिया से कुछ काम सुन्दर नहीं थी लेकिन आज समीर के इस कदर झड़ने का करण इससे कहीं ज़्यादा था। उसकी एक गर्लफ्रेंड है पर उसने दिदी को नही बताया और वह उसको कई बार चोद चुका था और भी तीन चार लड़कियों को चोद चुका था पर दिदी उसका पहला प्यार था उसको पाने के लिये वह उसकी नंनद को पटाने का नाटक भी कर सकता था कभी कभी भोला बनकर भी बहोत काम बनते है फिर अभी अभी सोनिया ने पुरानी यादें ताज़ा कर दी थीं और इन सब पर तुर्रा ये कि उसने अपनी माँ को नंगी देखा था।

सनी लियोनी को नंगी देख कर किसी को इतना झटका नहीं लगेगा जितना किसी पड़ोस की लड़की को नंगी देख कर लगेगा क्योंकि जिस बात की आप अपेक्षा नहीं करते, जब वो होती है तो उत्तेजना ज़्यादा होती है। और अगर वो औरत आपकी माँ हो तो फिर तो बात नियंत्रण से बाहर हो जाती है।

समीर भी इतनी उत्तेजना सहन नहीं कर पाया और जल्दी से लंड और हाथ धोकर अपने कमरे में जा कर सो गया।फिर तो समीर रोज ही अपनी माँ को नहाते हुये देखने लगा।

एक दिन तो शीतल पूरी नंगी नहा रही थीं.. उस दिन तो वो पैन्टी भी नहीं पहने हुए थीं। वो अपनी बुर में भी साबुन लगाकर साफ़ कर रही थीं। ये देखकर समीर का लण्ड तन गया था और सम्भल ही नहीं पा रहा था। समीर सोच रहा था कि मैं कैसे अपनी माँ के बदन से लिपटूं..

समीरने पहले एक बार माँ को डैड के साथ सेक्स करते हुए भी देखा था।

उस दिन अचानक समीर बैलेंस नहीं रख पाया और दरवाजे से टकरा गया।

दरवाजे पर आवाज़ होने से शीतल ने पूछा- कौन?

समीरने कहा- मैं हूँ.. मुझे कॉलेज के लिए देर हो रही है.. जल्दी करो..

वो बोलीं- तुम अन्दर आ जाओ.. मैं दरवाजा खोलती हूँ।

दरवाजा खुला और समीर अन्दर चला गया।

शीतल ने दरवाज़ा बंद कर लिया, समीर जल्दी से लेट्रीन में घुस गया।

समीर के लेट्रिन जाते ही शीतल बदन से तौलिया हटाकर नहाने लगीं। समीर लेट्रीन के डोर के होल से देखने लगा.. शीतल पूरी नंगी होकर नहा रही थीं, उन्होंने अपने पूरे बदन पर साबुन लगाया और अपने चूचे मसल-मसल कर नहाने लगीं।

उनका पीठ पर हाथ नहीं पहुँच पा रहा था..

इस वक्त उनका भीगा गोरा बदन और भी सेक्सी लग रहा था। फिर उन्होंने अपनी बुर के ऊपर साबुन लगाया और मसल-मसल कर साफ़ करने लगीं। बुर के ऊपर काले-काले घने बाल बहुत सेक्सी लग रहे थे.. वो उनको धो रही थीं।

समीरने इसी समय लेट्रीन से बाहर आने की सोची.. किंतु फ्लश और दरवाजा की आवाज़ सुन कर उन्होंने बदन को तुरंत सामने से तौलिया से कवर किया और हड़बड़ी में समीर को देखकर पीठ देते हुए घूम गईं.. जबकि पीछे तौलिया नहीं था और उनके पूरे नंगे बदन को देखकर समीर के पूरे बदन में सनसनी दौड़ गई।

 
क्या सेक्सी सीन था.. नंगी कमर.. मोटे-मोटे गोल उठे हुए चूतड़..

समीरने पूछा- आपको कितनी देर और लगेगी.. आपका नहाना हो गया क्या?

तुरंत ही उनको ग़लती समझ में आई और तौलिया को कमर में लपेट लिया.. लेकिन इससे तो उनके मम्मे नंगे हो गए.. उन्होंने अपने मम्मों को हाथ से ढका हुआ था।

समीरने कहा- आप जल्दी नहा लो..

वे बोलीं- हाँ ठीक है..

फिर समीरने कहा- लगता है कि आपकी पीठ कुछ ज़्यादा ही मैली हो रखी है.. काफी कुछ काली सी है।

वो बोलीं- हाँ.. मेरा हाथ नहीं पहुँचता है ना.. इसलिए ठीक से साफ नहीं हो पाती है।

समीरने तुरंत ही कहा- लाओ.. मैं आपकी कमर और पीठ को रगड़ कर साफ़ कर देता हूँ।

वो बोलीं- नही मैं कर लुंगी तू बाहर जा

समीर बोला क्या मम्मी मैं करता हु ना

शीतल ने सोचा अब जब समीर ने सब देखा ही है तो क्या फर्क पड़ता है वैसे भी जय पंद्रह दिन से बाहर गया था और और दस दिन बाद वह आनेवाला था और समीर अपने बाप से भी बहुत खूबसूरत और पूरा गठीला जवान हो गया तो शीतल ने कहा “हाँ ठीक है”..

उन्होंने रबिंग पैड की तरफ इशारा करते हुए कहा- वो पैड ले लो..

समीरने रबिंग पैड लेकर उनकी पीठ पर और साबुन लगाया.. अपनी मम्मी के जिस्म पर हाथ फेरने से समीर के पूरे बदन में करेंट सा दौड़ गया।

समीरने यह कहते हुए अपना पजामा खोल दिया- ये खोल देता हूँ.. नहीं तो भीग जाएगा।

फिर समीरने रबिंग पैड से उनकी कमर को ज़ोर से रगड़ा.. कमर और पीठ का मैल उतर रहा था।

समीर बोलता जा रहा था- बहुत मैल निकल रहा है..

समीर उनके मस्त जिस्म को मलता भी जा रहा था.. बड़ी मस्ती से मम्मी के गोरे-गोरे चिकने बदन पर रबिंग पैड रगड़ रहा था।

शीतल को भी अच्छा लग रहा था, यह वही शीतल थी जिसने विराज को कुछ भी करने को ना बोला था और अपने पति के सिवा किसीको हाथ लगाने नही दिया था पर आज वह भी अपने बेटे के साथ अर्ध नग्न होकर नहा रही थी और अपने बेटे के हाथों को अपने बदन पर फेरने दे रही थी। औरबोलीं- ठीक से रगड़ दे.. जिससे सारा मैल उतर जाए।

समीर भी बोला- यस.. आज मैं पूरा मैल उतार दूँगा।

फिर समीरने उनको घुटने के बल खड़ा होने को कहा.. उनकी कमर को रगड़ते-रगड़ते समीरने रबिंग पैड को नीचे चूतड़ के ऊपर ले जाकर ये बोलते हुए रगड़ने लगा- यहाँ भी बहुत मैल है..

वो बोलीं- अच्छा.. जल्दी कर..

समीर भी रबिंग पैड को उनके चूतड़ों पर गोलाई में घुमा घुमा कर मस्ती से उनकी गांड को दबाने लगा।

फिर साबुन से हाथों से मला.. फिर गर्दन पर साबुन लगाते-लगाते समीर का हाथ फिसल कर उनके मम्मों पर चला गया और समीरने उनके मम्मों पर भी साबुन लगा दिया।

शीतल ने मस्ती से आँखें बन्द कर रखी थीं.. शायद समीर के हाथों के कोमल स्पर्श का वे भी मजा ले रही थीं। शीतल को चुदाई किये हुये बहुत दिन हुये थे इसलीये जब समीरने उनके मम्मों पर हाथ लगाया और उन्होंने कुछ नहीं कहा तो समीर उनके मम्मों को मसलने लगा और कहा- यहाँ का भी मैल साफ़ कर देता हूँ।

उनके चूचों की मुलायमियत ने समीर के लंड की सख्ती को और बढ़ा दिया था और अब उससे नहीं रहा जा रहा था।

समीर का लंड तन गया था.. और उसके अंडरवियर में लण्ड एकदम अकड़ कर टाइट हो गया था।

अब तक समीरने अपनी बनियान भी उतार दी थी.. भीगे-भीगे बदन पर मोती जैसी पानी की बूँदें चमक रही थीं.. जो शीतल को और सेक्सी बना रही थीं। फिर समीर कभी भीगे बदन को मलता और कमर के पीछे से हाथ डाल कर उनके मम्मों पर साबुन मलने लगता.. तो समीर का लंड बार-बार उनके चूतड़ पर और कभी-कभी दोनों चूतड़ों की फाँक में टच हो रहा था।

समीर का कड़क लौड़ा उनकी गांड में टच होने पर वो भी कुछ सकपकाईं। फिर समीर सामने से मम्मों को मसल कर उनके पेट को मसलने लगा। फिर गर्दन मसलते हुए अपने हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर कमर मसलने लगा। लेकिन इससे उनके मम्मे समीर के सीने से ज़ोर से रगड़कर दब रहे थे और वो ‘आह्ह..’ की आवाज़ निकालने लगीं।

समीर समझ गया कि उन्हें भी कुछ-कुछ ज़रूर होने लगा है और अब तूफान आने वाला है..

फिर समीरने उनके मम्मों को दबाकर मसलना शुरू कर दिया और पूछा- ठीक से मैल उतार रहा है ना?

उनका चेहरा चुदास की मस्ती से लाल होने लगा।

समीरने भी सोचा कि आज अच्छा मौका है.. समीरने उनका बदन मसलते-मसलते अपने लंड को बाहर निकाल लिया था।

वो पूरा खड़ा था.. पूरा तैयार था।

मुझे शीतल-डैड का सेक्स सीन याद आ गया।

समीरने अचानक कहा- उई शीतल कॉकरोच है..

और समीर उनसे बुरी तरह से लिपट गया।

वो समीर को जकड़ते हुए बोलीं- कहाँ है?

‘साइड में चला गया..’

इसी लिपटा-लिपटी में समीर का लंड बार-बार उनकी खुली बुर से टकराकर रगड़ने का मज़ा ले रहा था..

इससे उनको भी मजा आया था..

अब समीर भी उनसे चिपके-चिपके अपने बदन पर पानी डाल कर नहाने लगा।

शीतल अब समीर के बदन पर साबुन लागते हुए उसके सीने को मसल रही थीं.. और उसके सारे बदन पर साबुन मलने लगी थीं।

समीर की चौड़ी मर्दाना छाती में.. पेट पर.. कमर में.. चूतड़ों पर.. मतलब अब वो बिंदास बेटे के जिस्म से खेल रही थीं।

फिर धीरे-धीरे उन्होंने समीर का अंडरवियर भी नीचे खिसका दिया और लण्ड के आस-पास साबुन मलने लगीं।

समीर को भी बहुत मज़ा आ रहा था.. फिर वो समीर के लंड पर साबुन मलने लगीं.. समीर से रहा नहीं जा रहा था, समीरने भी उनके मम्मों को जोर से दबा दिए और शीतल से बोला- कहो तो दूध भी पी लूँ?

वो जबाव में मस्ती से बेटे के लौड़े को मुठियाने लगीं..

बस फिर क्या था समीरने उनके मम्मों को पकड़ कर पहले जीभ से चाटा.. फिर ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया।

वो भी चूचे चुसवाती हुई समीर के लंड को ज़ोर-ज़ोर से मसलने और दबाने लगीं।

फिर समीर का रस गिरने वाला था.. शीतल बोलीं देर हो रही है.. चलो अभी इतना ही.. तुझे भी कॉलेज को देर हो रही होगी।

यह कहते हुए उन्होंने समीर के लंड पर ज़ोरदार किस जड़ दिया।

फिर समीरने कहा- हाँ ठीक है.. बाकी काम रात को करेंगे..

शीतल ने हँस कर समीर के चूतड़ों पर थपकी लगा दी।फिर समीर तैयार होकर कॉलेज चला गया

 
सोनिया भी अपने भाई की कल्पना में डूबी रही सारा दिन और जब शाम को राजन घर आया तो उस पर टूट पड़ी। वहीं ड्राइंग रूम में ही उसे नंगा करने लगी, बड़ी मुश्किल से राजन जैसे तैसे दरवाज़ा बंद कर पाया।

नेहा अभी वापस नहीं आई थी क्योंकि वो अपने दोस्तों के साथ कॉलेज के बाद फिल्म देखने चली गई थी। सोनिया और राजन दोनों घर में अकेले ही थे। खैर अकेले न होते तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता।

सोनिया तो पहले से ही नंगी थी। राजन के कपड़े उतरते ही सोनिया ने इसका लटका हुआ लंड अपने मुँह में भर लिया। अब क्लीनिक से ट्रैफिक के धक्के खा कर आए हुए आदमी का लंड इतनी आसानी से तुरंत तो खड़ा नहीं हो सकता। सोनिया उसे चूसे जा रही थी और वो नर्म पड़ा 4 इंच का ही उसके मुंह में भरा हुआ था। वैसे तो अभी सोनिया को गले तक लंड लेना नहीं आया था। लेकिन अभी लंड की जो अवस्था थी, उसमें सोनिया ने उसे जड़ तक अपने मुँह में ले रखा था और उसके होंठ राजन के अंडकोष को छू रहे थे।

यह राजन के लिए एक नया अनुभव था और उसके छोटे मियाँ को खड़े होने में देर नहीं लगी। जब वो पूरी तरह खड़ा हो गया तो राजन ने कोशिश की कि वो उसे सोनिया के मुँह से निकाल कर चूत में डाल दे, लेकिन जब सोनिया ने छोड़ने से मना कर दिया तो राजन ने सोनिया को कमर से पकड़ कर उठाया और उसकी जाँघों को अपने कन्धों पर रख कर खड़ा हो गया अब वो खड़े खड़े अपनी बीवी की चूत चाट रहा था और सोनिया उसके कन्धों पर उलटी लटकी हुई उसका लंड चूस रही थी।

तभी नेहा भी घर आ गई थी, उसने हमेशा की तरह अपनी चाभी से दरवाज़ा खोला और सामने जो देखा तो देखती ही रह गई। कुछ देर तक तो वो यूँ ही अवाक् खड़ी उनको देखती रही, फिर जब उसे होश आया तो उसने दरवाज़ा बंद किया और जल्दी से कपड़े निकाल कर अपने भाई के पीछे से जाकर उससे चिपक गई। फिर धीरे से नीचे सरकते हुए भैया के नितम्बों को चूमते हुए उनकी दोनों जाँघों के बीच अपना सर डाल कर नेहा उनके बॉल्स (अंडकोष) चूसने लगी।

शायद इसी वजह से थोड़ी ही देर में राजन, सोनिया के मुँह में झड़ने लगा।

वैसे तो शायद सोनिया उसका पूरा रस चूस जाती लेकिन शायद नेहा के अंडे चूसने की वजह से रस कुछ ज़्यादा ही निकल गया था या फिर उलटे लटके होने की वजह से सोनिया कण्ट्रोल नहीं कर पाई और थोड़ा वीर्य उसके मुँह से छलक कर नीचे बहने लगा जिसको नेहा ने जल्दी से चाट लिया।

यह देख कर सोनिया इतना उत्तेजित हो गई कि वो भी तुरंत झड़ने लगी।

उसके बाद राजन ने उसको नीचे उतारा और सोनिया ने नेहा के होंठों पर लगा राजन का वीर्य चाटना शुरू कर दिया। नेहा ने भी उसके होंठों और गालों पर जो वीर्य लगा था वो चाट लिया।

यह देख कर राजन हंस पड़ा और फिर सब हंसने लगे।

इसके बाद सबने खाना खाया और बैडरूम में सोने चले गए।

आज सोनिया अलग ही मूड में थी- आज तुम दोनों भाई बहन चुदाई करो, मैं बस देखूंगी।

नेहा- क्यों भाभी? ऐसा क्यों?

सोनिया- कुछ नहीं, आज कल्पना में मैं समीर के साथ चुदाई करना चाहती हूँ तो तुमको देख कर मुझे थोड़ी प्रेरणा मिल जाएगी।

और फिर राजन ने नेहा को खूब चोदा और उनको देख देख कर सोनिया ने जी भर के अपने भाई के नाम की चूत-घिसाई की। लेकिन आज नेहा और सोनिया ने एक नया खेल सीख लिया था, मिल बाँट कर लंड का रस पीने का खेल। राजन चूत में झड़े या मुँह में या कहीं और भी झड़े, नेहा या सोनिया उसे चाट कर अपने मुँह में भर लेती और फिर दोनों उसे एक दूसरी के मुँह से चाट कर या चूस कर निकालती और पी जाती।

ननद भौजाई के इस खेल ने उनके रिश्ते हो और मज़बूत कर दिया था, उन दोनों की कोई सगी बहन नहीं थी लेकिन अब वो एक दूसरे को अपनी बहन की तरह ही मानने लगी थी।
 
इधर समीर श्याम को घर आया अपने रूम जाकर कपड़े बदलकर बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर शीतल के पास गया शीतल आराम कर रही थी समीर को देख कर वह उठ गई और समीर को चाय देकर उसके साथ बैठकर उसने भी चाय पी लिया और शीतल नहाने के लिए बाथरूम में घुस गईं.. और समीर भी मौका पाकर अपनी आँख को दरवाजे के छेद से लगा कर बाथरूम के अन्दर का सीन देखने लगा।

शीतल ने अभी नहाना शुरू ही किया था.. वे अपनी साड़ी उतार रही थीं।

फिर उन्होंने अपने ब्लाउज को खोलना शुरू किया, अब शीतल ब्रा और पेटिकोट में समीर की नजरों के सामने थीं।

उनकी बड़ी-बड़ी गोरी चूचियाँ मानो ब्रा से निकलने के लिए बेताब हो रही थीं और शीतल ने ब्रा को भी उतार दिया, शीतल की दोनों चूचियाँ आज़ाद हो गईं।

अब शीतल ने अपना पेटीकोट भी उतार दिया और वो बिल्कुल नंगी हो चुकी थीं।

नंगी शीतल ग़ज़ब की हसीन लग रही थीं.. शीतल की चूचियों से समीर की नज़र नीचे खिसकते हुए उनकी चूत पर ठहर गईं।

शीतल की चूत काफ़ी बड़ी और गोरी थी.. उस पर हल्की-हल्की सी झांटें उगी हुई थीं।

समीर के पूरे बदन में सनसनी होने लगी और समीर का लंड तन कर खड़ा हो गया।

शीतल अपने सारे बदन को साबुन से मसल-मसल कर नहा रही थीं, नहाते-नहाते शीतल अपने दोनों चूचियों को हाथों से दबाने लगीं।

इसी तरह दबाते-दबाते शीतल पर जवानी की मदहोशी छाने लगी, वे अपने हाथों से बुर भी मसल रही थीं।

पहले तो बुर को हाथों से हल्के-हल्के सहलाती रहीं.. और फिर उन्होंने अपनी छूट में अपनी दो उंगलियों को पेल दिया और शीतल के मुँह से हल्की-हल्की सिसकारी निकालने लगी ‘ऊऊओ.. आअहह.. ससिईई..

शीतल ने अब नहाना शुरू कर दिया, समीर दरवाज़े से हट गया।

थोड़ी देर बाद शीतल नहा कर बाथरूम से निकलीं.. इस बार समीर को उनका हुस्न और भी लाजवाब लगा।

शीतल के इस रूप ने समीर को अपनी माँ में दिलचस्पी लेने के लिए बेकरार कर दिया था। शीतल अपने कमरे में चली गईं.. उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया।

अब समीर में अपनी माँ को देखने की ज्यादा चाहत जाग उठी थी। शीतल का एक नया मस्ताना रूप देखने की इस चाहत कि वजह से समीर से भी नहीं रहा गया, समीरने भी बाहर से माँ को पुकारा।

‘क्या हुआ.. अन्दर आओ न..’

शायद शीतल भी समीर के इंतज़ार में थीं, उन्होंने दरवाज़ा खोल दिया.. समीर के अन्दर दाखिल होते ही दरवाज़ा लॉक कर दिया।

शीतल सिर्फ़ तौलिया लपेटे हुए थीं.. वे तौलिया वाला गाउन पहन कर बाथरूम से आई थीं।

फिर क्या था.. समीरने बोला- तो.. मैं आपका बदन पोंछ कर पाउडर लगा दूँ?

उनकी मौन मुस्कराहट देख कर समीरने उनके बदन पर से तौलिया को सामने से खोल दिया और उनके नंगे जिस्म को एक छोटी तौलिया से मस्ती से रगड़ कर पोंछना शुरू किया। पहले गर्दन.. फिर मम्मों को.. कमर.. पेट और फिर नाभि के नीचे भी तौलिया का एक कोना जिसमें समीर का हाथ उनके जिस्म को अधिक टच हो रहा था.. समीर हाथ फेरता रहा।

शीतल तौलिया वाले गाउन को बदन पर पकड़े हुई थीं।

समीर हाथ को अन्दर डालकर यह सब कर रहा था।

फिर समीरने नाभि के नीचे पोंछते समय एक झटका दिया और उनका तौलिया वाला गाउन नीचे गिर गया।

उनका पूरा गोरा जिस्म समीर के सामने नंगा हो गया। शीतल ने दोनों हाथ चूचों पर रख लिए.. समीरने उनकी बुर को मस्ती से रगड़-रगड़ कर पोंछना शुरू किया।

उन्हें भी मस्ती आने लगीं.. वो आज बड़ी हसीन लग रही थीं।

शीतल की बुर पर बड़ी-बड़ी झाँटें थीं.. और झाँटों के अन्दर से झाँकती उनकी गोरी बुर..

आह्ह.. समीर तो उनके बस इस मस्त हिस्से की झलक को देख कर मदहोश हो रहा था।

अब समीरने पाउडर लगाना शुरू किया और इसी बहाने शीतल को अपनी बाँहों में भर कर उनकी चूचियों को मसलने लगा। अपने हाथों से ज़ोर-ज़ोर से मम्मों को दबाने लगा और अचानक शीतल ने अपने होंठों को समीर के होंठों पर रख दिए।

समीर भी मौका देख कर होंठों से होंठ रगड़ते हुए चूसने लगा और मम्मों को भी ज़ोर से दबाने लगा।

वो फिर हल्की-हल्की सिसकारी निकालने लगीं- ऊऊओ.. आअहह.. ससिईई..

वो बोलीं- तुम क्या कर रहे हो..?

समीर बोला- मैंने आपको डैड के साथ कई बार सेक्स का मज़ा लेते हुए देखा है..

कहानी जारी रहेगी
 
समीर भी मौका देख कर होंठों से होंठ रगड़ते हुए चूसने लगा और मम्मों को भी ज़ोर से दबाने लगा।

वो फिर हल्की-हल्की सिसकारी निकालने लगीं- ऊऊओ.. आअहह.. ससिईई..

वो बोलीं- तुम क्या कर रहे हो..?

समीर बोला- मैंने आपको डैड के साथ कई बार सेक्स का मज़ा लेते हुए देखा है..

इतना सुनते ही उनका एक हाथ सरकता हुआ समीर के लंड पर चला गया और वे मेरे लौड़े को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगीं, बोलीं- आह्ह.. तुम मेरे मम्मों को चूसते रहो..

समीर भी चूचे चूसता.. फिर कभी जीभ फेरता.. समीर उनके निप्पलों पर जीभ फेरते-फेरते नाभि तक आ गया।

समीर के भी लंड में सनसनी होने लगी, शीतल लंड को अपने हाथों में लेकर सहलाने लगीं।

देखते-ही-देखते लंड मूसल की तरह खड़ा हो गया।

‘हाय कितना शानदार लंड है.. मैं तो बस इस लंड की दीवानी हो गई हूँ..’

और शीतल अपने बेटे के लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं।

उन दोनों के मुँह से सिसकारियाँ निकालने लगीं आआहह.. वे भरपूर मज़ा लेकर मेरे लवड़े को चूस रही थीं..

ऊओह क्या मस्ती थी.. क्या मज़ा आ रहा था.. आह्ह वे दाँत भी गड़ा रही थीं.. लौड़े को केले सा ग़ज़ब का चूस रही थीं।समीर ने सोचा माँ भी क्या मस्त चीज़ थीं.. कभी सोचा भी नहीं था.. अपनी माँ की मस्तानी जवानी का मज़ा लूटने मिलेगा।

समीरने माँ से पूछा- अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है.. और करना है?

शीतल ने कहा- सब्र करो.. पूरे खेल का मज़ा लेना बाकी है.. जैसे-जैसे मैं बोलती हूँ.. वैसा करते जाओ।

समीरने तुरंत ‘यस’ कर दिया।

शीतल ने अपनी अल्मारी से हेयर रिमूवर क्रीम निकाली और समीर को दे दी।

अब उन्होंने समीर को अपने दोनों हाथ ऊपर करके बाँहों की बगलों के बालों पर लगाने को कहा..

समीरने उनके मम्मों को चूसते हुए उनकी बगलों पर क्रीम लगा दी।

फिर उन्होंने कहा- नीचे बुर के ऊपर के बालों पर भी लगाओ।

समीरने चूत पर भी क्रीम लगा दी।

इसके बाद वो वैसे ही बिस्तर पर लेटी रहीं.. लाल रोशनी में उनका पूरा बदन लाल लावे की तरह बड़ा ही सेक्सी लग रहा था।

समीर उनके बदन पर हाथ फेर रहा था।

कोई 5 मिनट बाद वो बोलीं- कॉटन लेकर अब ये क्रीम पोंछ दो।

समीर रुई लेकर बगलों और चूत पर लगी हुई बालसफा क्रीम को रगड़ते हुए पोंछने लगा।

दोनों बगलों के सारे बाल अपने आप उतर गए।

अब नीचे चूत के बाल पोंछने लगा.. पूरी क्रीम साफ़ होते ही सारे बाल उतर गए और क्या गजब की चिकनी मक्खन की तरह गोरी चूत के दीदार हुए।

समीरने शीतल से कहा- हाय माँ.. इतनी सुन्दर चूत.. इसे अब तक क्यों छुपा कर रखा था।

यह कहते हुए समीरने उनकी चूत पर ज़ोर से चुम्मी कर ली।

शीतल ने भी सिसकारी मारी.. फिर उन्होंने लिक्विड चॉकलेट निकाली और कहा- इसे नाभि के नीचे फैला दो।

समीरने लिक्विड चॉकलेट को उनकी बुर के ऊपर चारों तरफ फैला दिया और उनके लिए तो ये इशारा ही काफ़ी था।

फिर समीर जीभ से उनकी चूत को चाटने लगा.. चारों तरफ जीभ घुमा-घुमा कर चिकनी बुर पर लगी चॉकलेट को चाट रहा था।

हाय.. क्या मस्त मज़ा आ रहा था।

फिर ज़ोर-ज़ोर से चॉकलेट के साथ चूत चूसने लगा।

‘आहह.. उउईई.. मेरी माँ.. ओह्ह.. बड़ा मज़ा आ रहा है..’

‘चूस ले.. आह्ह.. चूस ले.. फिर मौका नहीं मिलेगा अपनी माँ की चॉकलेटी बुर.. को खा जा रे.. खा जा..’

शीतल मदहोशी में सिसकारियों के बीच बोल रही थीं।

‘माँ आपकी चूत कितनी टेस्टी है.. हाय माँ.. हाइईईई.. माँ क्या मस्तानी चूत है..’

बोलते हुए समीरने अपनी जीभ को उनकी चूत में अन्दर भी घुमा दी।

‘ऊओउउ उइई..इस्स.’ शीतल के मुँह से निकला, बोलीं- इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया… वेल डन माय बॉय.. कॅरी ऑन..

समीरने कहा- माँ मुझे कितने मार्क्स मिले?

बोलीं- सेशन पूरा होने दो..

समीर चूत में उंगली भी करने लगा।

इससे वो एकदम से गनगना उठीं और बोलीं- मुझे भी चॉकलेटी लंड का टेस्ट करना है।

समीरने तुरंत ही अपने लंड पर खूब ज़्यादा चॉकलेट लगा दी और उनके मुँह की तरफ लौड़े को बढ़ा दिया।

वो पहले जीभ से सुपारा चाटती रहीं.. फिर लौड़े को मुँह में लेकर ज़ोर से चूसने लगीं और सिसकारिया भरने लगीं ‘उम्म्म..या..’

समीर भी ‘ओह.. उउउ..’ कर रहा था।

बोलीं- क्या शानदार ‘चॉकलेटी बार’ है।

अब उन्होंने लंड को मुँह से निकालकर बुर के पास हाथ से रखा.. तो समीर समझ गया।

बोलीं- जल्दी करो..

समीरने लंड को बुर पर फेरते-फेरते फिसलाते हुए शीतल की हसीन नाज़ुक बुर में एक धक्के के साथ ‘घचह.. से अन्दर पेल दिया।

‘ऊओउउइई.. . मार दिया रे तूने..’ शीतल चिल्लाईं।

दस सेकंड में ही लौड़े ने चूत में अपनी जगह बना ली और शीतल चिल्लाने लगीं-तेज..कर.. ओह्ह..

समीर भी तेज़ी से अपना लंड शीतल की बुर में अन्दर-बाहर करने लगा।

‘आआअहह.. ययस्स.. ऊऊऊहह.. चोदद.. आआहह .. आआहह.. आआहह.. आआअहह और आई फेल्ट लाइक हेवेन..’

शीतल नीचे से अपनी चूत उछल-उछल कर लंड को अपने चूत में निगल रही थीं.. और बोले जा रही थी- और ज़ोर से और ज़ोर से..

समीरने भी चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी।

‘ऊऊऊहह.. आआहह.. अब मज़ा आ रहा है.. और चोद.. ज़ोर से चोद.. अपनी माँ की हसीन चूत को.. अपनी माँ की मस्त चूत लूट ले.. चूत का मज़ा चख ले.. हायईइ.. ऊऊुउउइईई.. तुमने मुझे आज स्वर्ग में पहुँचा दिया.. ऊऊहह..हाय.. .. ऊऊऊहह.. ऊऊहह.. आअहहहह.. आई लव यू..’

समीरने भी कहा- आई लव यू टू.. माँ..

काफी देर तक चूत की रगड़ाई करने के बाद समीर झड़ने को हो गया था।

चुदाई का खेल अब खत्म हो चुका था.. और समीरने अपना गरम-गरम जूस उनकी चूत में छोड़ दिया था। समीरने अपनी बीच की उंगली उनकी चूत में फिर से घुसा दी और ज़ोरों से घुमाने लगा।

समीर अपनी उंगली में उसके भी गरम पानी को महसूस कर रहा था।

शीतल बोलीं- ओह मेरी जान आई लव यू.. ऐसे ही मुझे हमेशा चोदना.. समीर जन्मों की प्यासी हूँ।

समीरने भी कहा- तुम जब भी चाहोगी.. मैं तुम्हें हमेशा तैयार मिलूँगा माँ.. बस मुझे ऐसे ही अपने पास रखना और मुझे बहुत प्यार करना..

समीर शीतल को गले लगाते हुए उनके होठो को चूमने लगा।

‘मेरी माँ.. मेरी जान.. तू मस्त चीज़ है… क्या शानदार चूत है तेरी.. काश मैं इस चॉकलेटी चूत को पहले चोद पाता.. आई एम सो लकी.. जिसे तुम जैसी माँ मिली है.. मेरी जानम फिर कब दोगी.. यह दिन फिर कब आएगा.. ग़ज़ब की माँ हो तुम..!’

“अब तो जब भी मौका मिलेगा तब”

उन्होंने मेरे गाल पर किस किया.. और बोलीं- नॉटी बॉय.. जल्दी ही फिर खेल होगा.. अबकी बार फ्रूट जैम के साथ मजा मिलेगा..

 
अब तक आपने पढ़ा कि कैसे पत्नी अपने भाई से चुदवाने के सपने देख रही थी इन सब से घर मे चुदाई का माहौल और भी गर्म हो गया था। ऐसे में एक दिन समीर ने सोनिया को कॉल किया।

अब आगे…

सोनिया ने फ़ोन उठाया देखा समीर का कॉल है- हेल्लो! तुझे आज मेरी याद कैसे आ गई?

समीर- कुछ नहीं नहाने जा रहा था तो तुम्हारी याद आ गई। हा हा हा!

सोनिया- हे हे… क्या बात है दो हफ्तों में तेरे तो पर ही निकल आये?

सोनिया के मन में यह सुन कर हल्की सी गुदगुदी तो ज़रूर हुई थी कि अब समीर भी थोड़ा खुलने लगा था, इशारों में ही सही। लेकिन वो वो फ़ोन पर इशारों से आगे ज़्यादा खुलना चाहती भी नहीं थी क्योंकि फ़ोन पर एक हद से आगे आप जा नहीं सकते और फिर मामला बीच में लटक जाता है।

समीर- काश पर निकल आते तो उड़ कर अभी वहां ही आ जाता।

सोनिया- क्या बात है! नेहा से मिलने की इतनी जल्दी हो रही है क्या?

समीर- नहीं, रहने दो आप नहीं समझोगी।

सोनिया ने जान बूझ कर बात को घुमा दिया था। वो जानती थी कि समीर उसी से मिलने के लिए इतना बेक़रार हो रहा था। इस बात से वो मन ही मन खुश भी थी- और सुना, मम्मी कैसी हैं?

समीर- मस्त हैं मक्खन मलाई के जैसी!

सोनिया मन में सोचने लगी ‘ये आज इसे क्या हो गया है पहले तो कभी मम्मी के बारे में ऐसे बात नहीं की इसने?’

सोनिया- क्यों आज मम्मी को इतना मस्का क्यों मार रहा है तू?

समीर- मस्का मार नहीं रहा हूँ यार मम्मी तो खुद ही मस्का हैं।

सोनिया- कहीं तू…?

फिर मन में सोचने लगी ‘मम्मी के साथ भी वही गेम तो नहीं खेल रहा?’

समीर- अच्छा दीदी मैं चलता हूँ.

बुदबुदाते हुए ‘मम्मी नहाने चली गईं।’

और समीर ने फ़ोन रख दिया।

सोनिया को अब यकीन हो गया था कि समीर बाथरूम के छेद से मम्मी को नंगी नहाते हुए देखने जा रहा था। शायद ये पहली बार नहीं था तभी तो मम्मी को मक्खन मलाई बोल रहा था। ये सब बातें सोच कर सोनिया चिंतित भी थी और उत्तेजित भी।

शाम को जब सब खाना खाने बैठे तो सोनिया ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में उसकी समीर से क्या क्या बातें हुई हैं और वो न केवल राखी पर आने को तैयार है बल्कि शायद वो इस बात को लेकर उत्तेजित भी है।

सोनिया- इशारों इशारों में मैंने छेड़ा कि अब वो मुझे बाथरूम में नहाते हुए नहीं देख पाता होगा। पहले तो वो थोड़ा झिझक गया था लेकिन आज तो उसने जो कहा उससे साफ़ समझ आता है कि न केवल वो मुझे फिर से नंगी देखना चाहता है बल्कि शायद उसने मम्मी को नहाते हुए देखना शुरू कर दिया है।

नेहा- भाभी, मेरे ख्याल से तो आप पक्का चुदने वाली हो इस बार राखी पर अपने भाई से।

राजन- लेकिन मेरे प्लान के हिसाब से तो सोनिया के पहले तुमको उससे चुदवाना पड़ेगा।

नेहा- क्यों शुरुआत मुझसे क्यों?

राजन- देखो तुम उस से चुदोगी तो वो तुमसे अपने दिल की बात खुल कर करने लगेगा और फिर तुम आसानी से ये पता कर पाओगी कि वो बहन चोद बनने के लिए कितना तैयार है और फिर उस हिसाब से हम आगे की प्लानिंग आसानी से कर पाएंगे।

नेहा- बात तो आप सही कह रहे हो।

सोनिया- हाँ वैसे भी मैंने उसको नेहा से दोस्ती कराने का लालच दे कर ही बुलाया है।

नेहा- भाऽऽभी! चुदवाना खुद को है और नाम मेरा लगा दिया।

सोनिया- अब यार अभी से ऐसे तो नहीं कह सकती थी न कि भाई मैं तेरे से चुदवाने के लिए बेक़रार हो रही हूँ, जल्दी आ जा।

इस बात पर सभी हंस दिए।

फिर सोनिया ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा- एक बात और है, जैसा मुझे पक्का लग रहा है कि समीर आजकल हमारी मम्मी को नंगी देख कर मुठ मारने लगा है तो आज दिन भर मैं सोच रही थी कि कहीं ऐसा न हो कि मुझे चोदने के बाद उसकी हिम्मत बढ़ जाए और उसका अगला टारगेट मम्मी बन जाए।

राजन- वो बाद की बात है यार, पहले तुम तो चुद लो उसके बाद देखेंगे कि उसके भेजे में क्या चल रहा है।

नेहा- लेकिन भैया, इस बात से मेरे दिमाग में एक खुराफात आई है।

राजन, सोनिया- क्या?

नेहा- हम तीनो बहुत दिनों से एक साथ सेक्स कर रहे हैं और सारे आसन और जुगाड़ ट्राई कर चुके हैं। बहुत दिन से कुछ अलग नहीं किया और हमारी चुदाई अब थोड़ी बोरिंग होने लगी है। समीर को आने में अभी एक महीना बाकी है। तब तक क्यों न हम कुछ नया करें?

सोनिया- क्या नया करने को बोल रही हो साफ़ साफ़ बताओ न यार?

नेहा- देखो जैसे अभी भाभी ने कहा कि उनको लग रहा है कहीं समीर उसकी मम्मी को चोदने की सोचने न लग जाए। तो क्यों न हम ऐसी ही कल्पनाओं को लेकर रोल प्ले करें।

सोनिया- तुम्हारा मतलब राजन समीर बने और तुम मेरी मम्मी और मैं तुम लोगों की चुदाई देख कर अपनी कल्पना साकार करूँ?

 
नेहा- नहीं! मेरा मतलब भैया समीर बने, मैं सोनिया, और आप समीर की मम्मी। उसके बाद हम कोशिश करेंगे कि आपको समीर से चुदवा दें।

राजन- क्या बात है… ये कुछ नया आईडिया है। सच में रोज़ रोज़ एक जैसी चुदाई थोड़ी बोरिंग हो गई थी। चलो आज यही रोल प्ले करते हैं।

नेहा- देखो! समीर (राजन) और सोनिया (नेहा) अंदर कमरे में चुदाई कर रहे होंगे तभी समीर की मम्मी (सोनिया) आकर देखेगी और उन पर गुस्सा होकर चिल्लाने लगेगी। और फिर जैसे तैसे दोनों भाई बहन शीतल को भी अपने खेल में शामिल कर लेंगे।

सोनिया- ठीक है! समीर (राजन), तुम बैडरूम में जा कर अपनी बहन चोदो। मैं कपडे पहन कर आती हूँ। तुम दोनों का तो नंगे रहने का ही रोल है। लेकिन शीतल को तो कपडे पहन कर आना पड़ेगा न।

समीर (राजन) और सोनिया (नेहा) अंदर कमरे बेड पर एक दूसरे से लिपट कर लेट गए और चूमा चाटी करने लगे। सोनिया, नेहा के कमरे में जा कर साड़ी पहन कर शीतल के रोल के लिए तैयार होने लगी।

15 मिनट बाद जब वो शीतल के रूप में बैडरूम में पहुंची तो समीर और सोनिया डॉगी स्टाइल में चुदाई कर रहे थे और दोनों के चेहरे दरवाज़े की और ही थे।

जैसे ही शीतल न दरवाज़ा खोला… गुस्से में चिल्लाते हुए- हे भगवान! ये हो क्या रहा है? तूझे ज़रा भी शर्म नहीं आई समीर, अपनी सगी बहन के साथ ये सब करते हुए। और सोनिया तू तो बड़ी है तूझे भी इसको रोकते नही बना?

सोनिया- अरे यार समीर, तू क्यों रुक गया? तू चालू रख मैं बात करती हूँ मम्मी से।

यह सुन कर शीतल तो सकते में आ गई। उसने सोचा भी नहीं था कि उसे ऐसा कुछ सुनने को मिलेगा। समीर ने सोनिया की बात मानते हुए वापस चोदना शुरू कर दिया। सोनिया ने आँखें बंद कीं और मम्मी को हाथ से एक मिनट रुकने का इशारा किया जैसे वो वापस अपने सुरूर में आने की कोशिश कर रही हो।

थोड़ी देर रुक कर उसने आँखें खोलीं और बोली- देखो मम्मी, पहली बात तो मैं अभी बहस करने के बिल्कुल मूड में नहीं हूँ लेकिन एक बात बता देती हूँ कि ये सब करने के लिए मैंने ही समीर को उकसाया था।

“समीर! और तेज़ चोद!”

समीर ने रफ़्तार बढ़ा दी। सोनिया की आँखें फिर बंद हो गईं और माथे पर बल पड़ गए जैसे उसे कोई तीव्र अनुभूति हो रही हो। उसी अवस्था में वो फिर बोली- आपकी जनरेशन की यही प्रॉब्लम है। आप लाइफ को एन्जॉय करना जानते ही नहीं हो। सोचो आप कभी ऐसे झड़े हो जैसे मैं झड़ रही हूँऽऽऽ अह… ओह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… फऽऽ… क…

राजन और नेहा भले ही रोल प्ले कर रहे हों लेकिन रोल में असली अनुभव डालने के लिए उन्होंने यह मान लिया था कि वे यह सब अपनी शीतल शर्मीला के सामने कर रहे हैं। ऐसा करने की वजह से वो इतने उत्तेजित हो गए थे कि दोनों सच में बहुत जल्दी और बहुत ज़ोर से झड़ गये थे।

सोनिया (नेहा) एक झटके से आगे झुकी जिससे समीर (राजन) का झड़ा हुआ लंड सटाक से उसकी चूत से बाहर आ गया। सोनिया उछल कर बेड से उतरी और अपनी शीतल शीतल के सामने खड़ी हो गई।

शीतल अभी तक जो हुआ, उसके सदमे से बाहर नहीं आ पाई थी। इस बात का फायदा उठाते हुए सोनिया ने शीतल को अपनी बॉहों में लिया और उसके होंठों को चूसने लगी।

शीतल ने ऐसी किसी बात की सपने में भी अपेक्षा नहीं की थी। इस से पहले कि वो कुछ कर पाती, उसने वो अनुभव किया जो उसके जीवन मे पहली बार हुआ था। उसके पति ने कभी उसके होंठों को ऐसे नहीं चूसा था। उसके अंदर की शीतल तो पूरी तरह जड़वत खड़ी थी क्योंकि सब कुछ न केवल उसकी अपेक्षा से बिल्कुल परे हो रहा था बल्कि इतना जल्दी हो रहा था कि उसे कुछ सोच कर प्रतिक्रिया करने का समय ही नहीं मिल पा रहा था।

दूसरी ओर उसके अंदर की औरत को ये स्वर्गिक अनुभूति पहली बार हो रही थी। वो किंकर्तव्यविमूढ़ सी इस वासना की धारा में बहने लगी।

सोनिया ने इसी बीच अपनी दो उंगलियां अपनी चूत में डाल रखीं थीं। उसने अपना चुम्बन तोड़ा और वो दो उंगलियां अपनी शीतल को चटा दीं।

सोनिया- टेस्ट द न्यू जेनरेशन सेक्स! ( नए ज़माने के कामरस का स्वाद चखो)

शीतल ने आंखें बंद कर लीं। उसके अंदर की संस्कारी औरत ये सब होते देख नहीं सकती थी और जो दूसरी औरत थी वो इस नए स्वाद का पूर्ण आनन्द लेना चाहती थी। यही समय था जब सोनिया और समीर ने मिलकर उसके सारे कपड़े निकाल दिये।

जब शीतल ने आँखें खोलीं तो उसके सामने उसके बेटे का वीर्य और चूत के रस में सना लंड था। ये वही रस था जिसका स्वाद वो अभी आँखें बंद करके ले रही थी। आखिर काम की प्यासी औरत की जीत हुई और उसने अपने बेटे का लंड अपने मुँह में भर लिया और उसे ताबड़तोड़ चूसने लगी। जल्दी ही लंड खड़ा भी हुआ और उसे अपनी शीतल की चूत का प्रसाद भी मिला।

वैसे तो ये सब रोलप्ले था लेकिन जब भी कोई रोलप्ले पूरी शिद्दत के साथ किया जाता है तो सारी कायनात उसे सच बनाने की कोशिश में लग जाती है।

राजन, नेहा और सोनिया के रोलप्ले ऐसे ही चलते रहे जब तक समीर के आने का दिन नहीं आ गया।

पर दोस्तो राजन और सोनिया को यह नही मालूम था कि समीर अपनी माँ शीतल को चोद चुका है और अब भी रोज चोद रहा है वह मादरचोद तो बन ही गया था अब उसे बहन चोद बनना बाकी था

और फिर…

दोस्तो, आपको यह भाई बहन, शीतल की चुदाई कहानी कैसी लगी आप मुझे ज़रूर बताइयेगा।

 
अब तक आपने पढ़ा कि योजना के अनुसार सबसे पहले नेहा समीर से चुदवाने वाली थी। सोनिया और समीर फ़ोन पर इशारों इशारों में काफी सेक्सी बातें करने लगे थे और सोनिया को समझ आ गया था कि समीर अपनी मम्मी को नंगे नहाते हुए देख रहा था। इसी बात से प्रेरित होकर राजन, सोनिया और नेहा ने एक रोल प्ले किया था। समीर के आने तक ऐसे ही दिन काटते रहे।

अब आगे…

अगले दिन समीर आने वाला था और कम से कम कुछ दिनों के लिए घर का माहौल बदलने वाला था। अब न तो कोई सारा समय नंगे रह पाएगा और न ही जब मनचाहे ढंग से चुदाई हो पाएगी। राजन, नेहा और सोनिया ने आपस में सलाह करके पूरी योजना तैयार कर ली और फिर सारी रात जम के चुदाई की ताकि अगले आने वाले कुछ दिनों में खुद पर नियंत्रण रखना आसान हो जाए

खास तौर पर राजन ने सबसे ज़्यादा नेहा को चोदा क्योंकि सोनिया तो फिर भी मिल सकती थी लेकिन समीर के रहते नेहा की चूत मिलना थोड़ा मुश्किल होता।

देर रात तक तरह तरह से चोदने के बाद आखिर सब थक गए।

राजन- अब नहीं होगा मुझसे, बहुत थक गया हूँ।

सोनिया- तीन बार अपनी बहन चोद चुके हो और दो बार मुझे। आदमी हो कोई खरगोश नहीं कि बस चुदाई ही करते रहो।

नेहा- हाँ, और ऐसा भी नहीं कि अब मैं कभी मिलने वाली नहीं हूँ। भाभी को तो रात में चोद ही सकते हो और मैं भी 4-6 दिन में मिल ही जाऊँगी। तब तो भाभी सारा टाइम अपने भाई से ही चुदवाने वाली हैं तो आपको मेरी ही चूत नसीब होगी।

सोनिया- तेरे मुँह में घी-शक्कर!

और इतना कह कर सोनिया ने ने नेहा को चूम लिया। इस बात पर सब हंसने लगे और फिर सब सो गए।

अगला दिन एक नया सवेरा ले कर आने वाला था।

सुबह उठने के बाद सबने फ्रेश होकर नाश्ता किया और फिर तीनों ने गोला बना कर एक साथ एक दूसरे को गले लगाया (जैसा फुटबॉल के खिलाड़ी अक्सर करते हैं)। उन्होंने वादा किया कि वो पूरी कोशिश करेंगे कि अगली बार जब वो इस तरह गले मिलें तो समीर भी उनके साथ हो।

उसके बाद राजन तैयार होकर क्लीनिक चला गया। नेहा ने आज कॉलेज से बंक मार दी क्योंकि वो अपनी भाभी के साथ समीर को लेने स्टेशन जाने वाली थी।

दोनों ने मिल कर घर सजाया, जो कुशन और गद्दे, सेक्स की सहूलियत के लिए इधर उधर बिखरे पड़े थे उनको अपनी जगह पर रखा गया। सहूलियत के लिए जो 1-2 कंडोम के डब्बे हर कमरे में पड़े हुए थे, उनको वापस छिपा कर रख दिया गया। टीवी के पास जो चुदाई के वीडियो की सीडी/डीवीडी का ढेर था, उसे भी छिपा कर उसकी जगह बॉलीवुड के सेक्सी गीतों और फिल्मों की डीवीडी रख दी गईं।

तब तक ट्रेन के आने का समय भी होने लगा था तो दोनों ननद-भौजाई जल्दी से तैयार होकर रेलवे स्टेशन की तरफ चल दीं। कार सोनिया चला रही थी और नेहा उसके मज़े ले रही थी।

नेहा- क्या भाभी, बड़ी जल्दी हो रही है अपने भाई से मिलने की। आपको देख कर तो ऐसा लग रहा है कि आपसे सब्र नहीं होना। मुझे तो लगता है वहीं स्टेशन पर ही कोई रूम बुक करवाना पड़ेगा आप दोनों के लिए।

सोनिया- रहने दे… रहने दे। खुद के मन में लड्डू फूट रहे हैं, मुझे बोल रही है।

नेहा- मेरे मन में क्यों लड्डू फूटेंगे?

सोनिया- पहले तो तू ही चुदवाने वाली है न उस से। नए लंड के बारे में सोच सोच के चूत में गुदगुदी हो रही होगी इसलिए मेरा नाम ले ले कर ये सब बोल रही है।

नेहा- भाभी आप भी न… बड़ी वो हो।

इतने में स्टेशन आ गया और गाड़ी पार्क कर के दोनों गेट की तरफ बढ़ गईं।

थोड़ी ही देर में समीर आता हुआ दिखाई दिया। उसने अपना हाथ लहरा के इशारा किया इधर सोनिया ने भी अपना हाथ हवा में हिला कर हेलो वाला इशारा किया। नेहा ने पहली बार उसे इस नज़र से देखा था, वो मंत्रमुग्ध सी देखती ही रह गई।

शादी में तो वो इतना व्यस्त था कि खुद कैसा दिख रहा है उसका होश ही नहीं था। बहन की शादी में भाई के पास कहाँ समय होता है सजने धजने का।

जैसे ही वो पास आया, सोनिया ने उसे गले से लगा लिया, शादी के पहले उसने कभी ऐसा नहीं किया था। एक तो शादी के पहले लड़कियां होती ही हैं थोड़ी रिज़र्व टाइप की और ऊपर से इनके बीच जिस तरह का आकर्षण था, उसके चलते सोनिया को लगता था कि अगर वो समीर के ज़्यादा पास गई तो कहीं कुछ कर न बैठे। लेकिन आज न उसे कोई झिझक थी न कोई डर, इसलिए वो दिल खोल कर अपने भाई से गले मिल रही थी।

 
समीर की तो हालत ख़राब हो गई थी, जिस बहन को वो छिप छिप कर नंगी देखा करता था, आज वो उसकी बांहों में थी। उसके वो कोमल उरोज जिनको वो हमेशा छूना चाहता था, वो आज उसकी छाती से चिपके हुए थे। उसने भी सोनिया को अपनी बाँहों में जकड़ लिया था। दिल तो किया कि हथेलियों को पीठ से नीचे सरका कर नितम्बों को सहला दे लेकिन उसके हाथ कमर से आगे न जा पाए। हिम्मत ही नहीं हुई बावजूद इसके कि फ़ोन पर दोनों बहुत खुल गए थे, असली में जब सामने आते हैं तो बात कुछ और हो जाती हैं।

इनको देख कर नेहा भी बड़ी उत्तेजित हो गई थी, उसे लगा अब उसकी बारी है तो जैसे ही समीर सोनिया से अलग हुआ और सोनिया ने कहा- ये मेरी ननद नेहा!

समीर ने हाथ मिलाने के लिए हाथ बढ़ाया और नेहा ने गले मिलने के लिए दोनों हाथ। फिर अचानक से समीर का हाथ देख कर उसे होश आया और उसने भी हाथ मिला लिया।

इस बात से सोनिया को बड़ी हंसी आई लेकिन उसने हंसी छिपा ली।

लेकिन सारे रास्ते जब भी उसकी नज़रें नेहा से मिलतीं वो मुस्कुरा देती और नेहा मन मसोस कर रह जाती।

रास्ते भर इधर उधर की बातें होती रहीं जैसे घर पर सब कैसे हैं वगैरा वगैरा।

घर पहुंच कर सोनिया ने समीर को कहा कि वो नहा ले फिर सब खाना खा लेंगे।

समीर- नहाने के लिए ही तो आया हूँ मैं यहाँ।

सोनिया ने एक बड़ी सी मुस्कराहट के साथ उसे बाथरूम का दरवाज़ा दिखाया और किचन में चली गई।

समीर ने देखा वो काफी बड़ा बाथरूम था। आम घरों में जितने बड़े साधारण कमरे होते हैं उतना बड़ा। दरवाज़ा उसके एक कोने में था। दरवाज़े के ठीक सामने वाले कोने में पर्दा लगा हुआ था जिसके पीछे एक बड़ा सा तिकोना बाथ टब था। उसके सामने के कोने में चमचमाता हुआ हाई-टेक कमोड था। इन दोनों के सामने और दरवाज़े से लगी हुई दीवार पर एक बड़ा पूरी दीवार के साइज का दर्पण था और एक बड़ा सिंक जो ग्रेनाइट के प्लेटफॉर्म में फिट था।

बाथ टब का बाहरी हिस्सा गोल था (पिज़्ज़ा के बड़े टुकड़े जैसा)। उसके अंदर ३ कोनों पर बैठने की जगह दी हुई थी लेकिन जितना बड़ा वो था उसमें 4-5 लोग आराम से बैठ सकते थे। अंदर तरह तरह की लाइट्स और शॉवर्स लगे हुए थे जिनकी सेटिंग के लिए एक पैनल भी था। इसके चारों ओर फाइबर का पारदर्शी गोल कवर था जो आधा स्लाइड हो कर दरवाज़े का काम करता था और इसके चारों ओर एक सुन्दर पर्दा लगा हुआ था ताकि अगर कोई टॉयलेट या सिंक का प्रयोग करना चाहे तो नहाने वाले को न देख सके।

ये सब देख कर समीर के मुँह से अपने आप ‘वाओ’ निकल गया। वो नहाते नहाते सोचने लगा कि दीदी की तो ऐश है। लेकिन एक बात उसे दुखी कर रही थी कि यहाँ अगर वो बाथरूम के दरवाज़े में छेद कर भी ले तो पता नहीं सोनिया को नहाते हुए देख पाएगा या नहीं क्योंकि अंदर एक पर्दा और भी था।

आखिर उसने उन सब नए नए उपकरणों के साथ छेड़खानी करते हुए सारी सेटिंग्स आज़मा कर देखीं और बहुत देर तक नहाने के बाद जब वो बाथरूम से बहार निकला तो नेहा वहीं सामने खड़ी थी।

नेहा गुस्से में- क्या यार नहाने के लिए दरवाज़ा बंद करने की क्या जरूरत थी।

इतना कह के वो अंदर चली गई और दरवाज़ा बंद कर लिया।

समीर कुछ समझ नहीं पाया कि हुआ क्या था। वो किचन में सोनिया के पास गया और जब उसने पूछा कि ये सब क्या था तब सोनिया ने उसे समझाया।

सोनिया- देखो, बाथ टब के चारों तरफ तो परदा है न… तो नहाने के लिए दरवाज़ा बंद नहीं करते ताकि किसी को टॉयलेट या सिंक यूज़ करना को तो कर सके। बेचारी नेहा को कब से पेशाब आ रही थी लेकिन तुम्हारे चक्कर में रोक कर खड़ी थी। इसलिए गुस्सा हो रही थी। अब समझे?

समीर- और किसी ने पर्दा हटा दिया तो?

इतना कह कर समीर ने धीरे से आंख मार दी।

सोनिया- तो पर्दा हटाने वाला भी तो दिखाई देगा न।

सोनिया ने एक शैतानी सी मुस्कराहट बिखेरते हुए कहा।

खाना तैयार था सब जा कर खाने के टेबल पर बैठ गए और खाना खाने लगे।

 
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