संजयभाई फिर हॅस्कर बोला,’’शांत हो जाओ शक्तिसिंह यह सब किया कराया इस मास्टर माइंड का है. जय ही है सारा सूत्रधार. क्यूकी वो आदमी सिर्फ़ जय के लिए ही काम करता है और वो बोल तो रहा है कि जब जय जैल से छूटे तो इतनी दौलत उसके पास होनी चाहिए कि किसी के पास ना तो काम माँगना पड़े और ना तो पैसा.’’
जय सोचता ही रह गया कि ऐसा कौन होगा जो उसके नाम पर स्वामी रामानंद, विक्रम, साजन, रणवीरसींह, खेंगरसिंह सब को लूटता रहा हो और उसे तो पता भी नही चला इतने साल तक. फिर कुच्छ देर वो मौन रहा और फिर बोला,’’देखो शायद आप लोगो ने जो बात की है वो सच हो सकती है. लेकिन वो आदमी जो इतने सालो तक आप को मेरे नाम से लूटता आ रहा है उसके बारे मे मैं तो आज तक कुच्छ जानता तक नही. और आप सब की यह हालत हो चुकी है यह भी तो मैं नही जानता यारो.’’
शक्तिसिंह ने अब गाड़ी स्टार्ट कर दी थी और पिछे मुड़कर कहा,’’ओ….भाई अब बस कर तेरा नाटक. हम सब जानते है और समझते भी है. वो तुम्हारा बाप ही है. हम सब ने तुझे जैल पहुचाया और तुम बाप बेटे ने मिलकर आज तक हम सब को लूटा. तू क्या यह नही जानता कि तेरे बाप और इन सब की नही बनती थी.’’
तभी जय को विक्रम और किशोरीलाल की सारे बाते याद आई. फिर उसने सोचा कि ऐसा शायद हो सकता है कि उसके पिताजी ज़िंदा हो और शायद ऐसा कर भी रहे हो. इसीलिए तो शायद उसकी मा को भी उसके पास ज़िंदा होना चाहिए. इतना सोचकर एक तरह से वो खुश हुवा कि इसका मतलब उसके मातपिता ज़िंदा है, सलामत है और उसका बदला ले रहे है.
लेकिन दूसरी तरफ उसे लग रहा था कि अगर ऐसा होता और इतने पवरफुल उसके पिताजी होते तो आज तक वो जैल मे नही होता और शायद छूटने के बाद तो इन चार पाँच दिनो मे उसके पास होना चाहिए था. फिर उसको याद आया कि जो कहानी उसने वो लेटर्स मे पढ़ी है उसमे कही भी रणवीरसींह, खेंगरसिंह या स्वामी रामानंद का तो नाम ही नही आया था. सिर्फ़ दुश्मनी विक्रम से ही थी. फिर ऐसा क्यू ?
जय ने तुरंत कहा,’’देखो भाई लोग मेरे पिताजी ज़िंदा है कि नही यह तक मैं नही जानता. और मान लो कि वो ज़िंदा है तो आज तक मैं जैल मे नही होता और अगर होता तो छूटने के बाद मैं आज आप के पास नही उसके पास होना चाहिए था. अगर वो इतने पवरफुल होते तो मुझे इस तरह आप किडनॅप कर जाओगे इस बात मे कुच्छ दम नही है. दूसरा मैने मेरे पिताजी और विक्रम यानी कि साजन के बाप की दुश्मनी के बारे मे पिच्छाले एक साल मे ही जाना है. क्यूकी कोई मुझे भी लेटर भेज के सब कहानी बता रहा है. और उस कहानी मे कही भी स्वामी, रणवीरसींह या खेंगरसिंह का नाम नही है. तो फिर अगर मेरे पिताजी ज़िंदा भी है और अगर इतने पवरफुल है तो मैं आज आप के साथ क्यू हू ? और उसकी क्या दुश्मनी बाकी सब के साथ है इस पर थोड़ा सोच लो.’’
अमरभाई ने खुल के हॅस्कर कहा,’’बेटे यह तो तेरी खुद की कहानी है. और इसके पहले कि तेरा बाप तेरे तक पहुच जाए उसके पहले हम लोग पहुच चुके है.’’
जय ने हॅस्कर उसके सामने देखा और कहा,’’नही भाई आप ग़लत हो. अगर थोड़ी देर होती या तो यह भाई साब मुझे नही बताते तो मैं उस CBई एजेंट के साथ देल्ही होता और वहाँ सेफ होता.’’
संजयभाई ने तुरंत कहा,’’तभी सोचकर तो तेरा बाप आराम से संचालन कर रहा होगा ना कि मेरा बेटा तो आसानी से देल्ही तक पहुच जाएगा और किसी के हाथ कुच्छ नही आएगा और जब कुच्छ समय के बाद सब शांत हो जाता तो आसानी से तुम लोग कही और बस जाते और हम से आसानी से पिछा छुड़वा लेते.’’
जय ने तुरंत हॅस्कर कहा,’’लॉजिकली तो आप भी सही हो. लेकिन यह सब मुझे तो मालूम होना चाहिए ना. मैं तो इन मे से कुच्छ नही जानता. यहाँ तक कि दो लॉकर्स किसने तोड़े, क्यू तोड़े ? उसमे ऐसा क्या था कि स्वामी, साजन का बाप और रणवीरसींह और उसके बाप का जीना भी हराम हो सकता है. और सब से बड़ी बात मेरे पिताजी अगर ज़िंदा है तो उसकी स्वामी या रणवीरसींह और उसके बाप से क्या दुश्मनी थी भाई? और स्वामी ने ऐसा क्या किया है जो मेरे पिताजी से डरना पड़े ?’’
अमरभाई ने फिर से कहा,’’तेरा बाप खेंगरसिंह को पहचानता है और उसकी वजह से ही आखरी बार जोधपुर से उसको भागना पड़ा था. इतना तो तू जानता ही होगा.’’
यह नयी बात सुनकर जय चौक पड़ा और उसने कहा,’’अरे मेरे भाई यह सब कुच्छ मैं नही जानता. जीतने भी लेटर्स मुझे मिले है उसमे लास्टवाले लेटर मे यही लिखा है कि आखरी बार जोधपुर के लिए मेरे पिताजी निकले थे बाद मे उसका कोई नामोनिशान नही है.’’
‘’तू झूठ बोल रहा है जय, लेकिन हम आसानी से तेरा और तेरे बाप का पिच्छा नही छ्चोड़ेंगे याद रखना.’’ संजयभाई ने चिल्लाकर कहा.
क्रमशः……………………….