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किस्मत का खेल पार्ट --49
गतान्क से आगे.......
एक लड़के ने फिर उठकर पुच्छ लिया,’’स्वामीजी, अगर हमारी दुनिया मे पेरेंट्स के अलावा और कोई हो और वो.....’’
स्वामीजी ने हॅस्कर बीच मे ही बोल दिया,’’प्यार करनेवालो के लिए तो ये मार्ग स्वर्ग है, हमने कहा था ना की आप जैसे हो, जो भी हो सिर्फ़ जुड़ जाओ, यहा आप को कुच्छ भी छ्चोड़ना नही है, सिर्फ़ अपने जीवन मे इस मार्ग को जोड़ दो. अगली सुबह सुनहरी होगी, ये हमारी 100% गारंटी है. इसे ताम्रपत्र मे लिखा गया लेख ही समझो.’’
निशा ने पुच्छ लिया,’’स्वामीजी, आप जय से कुच्छ कार्य करवाना चाहते है, उसके बारे मे हमे कुच्छ बताएँगे?’’
स्वामीजी ने मुस्कुरकर आँखे बंद की और गहरी सांस ली बाद मे आँखे खोलकर बोला,’’अभी देर है इस कार्य मे, पहले इसे जुड़ जाने दो.’’
निशा,’’लेकिन क्या जय जुड़ जाएगा इस कार्य मे?’’
स्वामीजी,’’अवश्य, सिर्फ़ जय ही नही आप सभी लोग बारी बारी इस मार्ग मे आने ही वाले हो. जो पहले आया समझो उसका सूर्योदय जल्दी होगा. हर एक का एक निश्चित समय होता है, जिस दिन वो सुबह हो गयी, वो जुड़ ही जाएगा. ये लड़का भी अवश्य आएगा.’’
थोड़ी देर मे जय होश मे आ गया और उसके सिर की बाई आँख से कान के बीच एक नस को वो उंगली से दबाता चला गया और उकी मस्तिष्क की रेखाए खीची हुई थी. साजन ने उसे संभाला. पूछने पर सब ने उसे बताया कि वो ट्रांस मे चला गया था और फिर स्वामीजी धीरे से खड़े हुए और जय के पास आकर दाया हाथ उसके सिर पर रखा और एक उंगली उस नस पर रखी और प्रेशर दिया और आँखे बंद कर के दो मिनट खड़े रहे. फिर स्वामिनी ने सब का कल्याण हो कहकर धीरे धीरे पीछे के दरवाजे से अंदर के रूम मे जाना शुरू किया. सब ने खड़े होकर हाथ जोड़े और फिर सब जय के आसपास खड़े रह गये.
सब स्टूडेंट्स धीरे धीरे कुटीर से बाहर आए और साजन ने जय को पुचछा,’’क्या हुवा जय, यार ये ट्रांस क्या होता है?’’
जा की आँखो से धीरे धीरे पानी की बूँद आ रही थी, वो बोला,’’कुच्छ ट्रांस नही था यार, मुझे फिर वोही सबकुच्छ दिखाई दिया, आँखो के सामने अंधेरा च्छा गया और फिर वोही औरत की छाती और फिर वोही साधु, लेकिन इस बार ये नस(वेन) कुच्छ ज़्यादा दुखती है. नीशी ने उस नस पे अपनी उंगली रखी तो महसूस किया कि बहुत जोरो से स्ट्रोक मार रही थी. फिर जे बोला,’’अब रात की नींद तक ये दर्द सहा नही जाएगा.’’
बिरजू,’’लेकिन ये होता क्या है, क्या ट्रांस मे ऐसा कुच्छ होता है’’
जय,’’ना ये ट्रांस नही था यार, ट्रांस मे तो आदमी ब्रह्मांड मे चला जाता है, ये तो मेरी बीमारी है, शायद इसे माइग्रेन कहते है, इसके सिंप्टम्स है. आँखो से पानी बहना, सिर पे खालीपना होना, आवाज़ सहन नही होना, रोशनी सहन नही होनी एट्सेटरा.’’
‘’लेकिन स्वामीजी ने कहा कि तू ट्रांस मे चला गया था.’’निशा ने कहा.
जय,’’कुच्छ भी हो यार मुझे यहा से ले चलो, मेरा जी घबरा रहा है, मुझे कुच्छ अच्छा नही लगता है यहा.’’
साजन,’’क्या ? अबे साले स्वामीजी तो कहते थे कि तू इस मार्ग मे जल्दी आनेवाला है और तू तो कहता है कि तुझे यहा अच्छा नही लगता है ? यार बात क्या है समझ मे नही आई.’’
जय,’’क्या क्या, स्वामीजी ने कहा की मैं इस मार्ग मे आनेवाला हू ?’’
नीशी,’’यस जय ही टोल्ड अस दट यू विल डेफ. फॉलो दिस मिशन.’’
जय,’’बट हाउ कॅन इट पासिबल, जस्ट आइ हॅव नोट डिसाइडेड टू फॉलो इट यार. (फिर अपनी वेन दबाते हुए आगे बोला) लेकिन मुझे पहले यहा से बाहर ले जाओ यार मेरा सिर दुख रहा है.’’
फिर सब आश्रम से बाहर आए और सिटी की ओर चल पड़े. पाइयोली रिवर ब्रिड्ज क्रॉस कर के सब स्टूडेंट्स कॉलेज कॅंपस की ओर चल पड़े. ये ग्रूप धीरे से अलग हो के म्यूज़ीयम की ओर चला गया. रेलवे स्टेशन की क्रॉसिंग लाइन क्रॉस कर के वाहा एक छ्होटी सी रेस्टोरा थी वाहा चाय पानी के लिए रुके. सब वाहा बैठ गये. साजन ने चाय के साथ कुच्छ रेफ्रेशमेंट भी मँगवाया. जय अभी भी बार बार वो नस दबाता था. कभी कभी उसके मूह से सिसकिया निकल आती थी. सब पहली बार देख रहे थे जय को ऐसी हालत मे. अचानक उसकी हेल्त को असर हुवा था.
सब चुप थे तो जय ने कहा,’’यार मैं कोई सीरीयस बीमार नही हुवा हू, वाइ आर यू सो सीरीयस? कुच्छ बाते तो करो, शायद ये दर्द गायब हो जाए.
बिरजू ने कहा,’’यार सीरीयस नही है, सोच रहा हू.’’
जय,’’हा कभी कभी अच्छा काम तू कर लेता है.’’
बिरजू ने एक हाथ जमाया जय को. जय के मूह से आ निकल गयी,’’आबे ये तेरा हाथ है की हथोदा, कितना ज़ोर है तेरे मे.’’
निशा,’’क्या सोच रहा है तू ?’’
बिरजू,’’स्वामीजी ने ये क्यू कहा कि जय ट्रांस मे है, जब कि ये तो कहता है कि उसे वही दौरा पड़ा था.’’
साजन,’’अबे तू जब भी सोचता है ना डीप मे सोचता है, क्यू खालीपीली दिमाग़ को खराब करना है. तुझे क्या जुड़ना है इस मार्ग मे ?’’
जय,’’वो बात बाद मे साजन, लेकिन तू और नीशी तो जानते हो इस मार्ग को, इस स्वामीजी को, तुमलोगो ने क्यू नही बताया हमे ?’’
साजन,’’अबे यार इसमे कौन सी बताने वाली बात है, मेरे डॅडी पहले से ही इस संस्था के ट्रस्टी है और नीशी के डॅडी उसे हेल्प कर रहे है. मुझे ये कोई पसंद नही है, ना ही कभी मेरे डॅडी ने मुझे प्रेशर किया है. मैं तो साले सब साधु से दूर ही रहता हू. मुझे वैसे भी सॅफ्रन नही पिंक कलर पसंद है.’’
बिरजू,’’हा साले तुझे पिंक ही पसंद आता है ना. क्यूकी सॅफ्रन मे सबकुच्छ त्याग करने की बात आती है और पिंक मे सबकुच्छ भोगने मिलता है ना. कितनी को बर्बाद किया है साले बता ?’’
साजन (धीरे से),’’अबे ये निशा और नीशी खड़ी है और ऐसी बाते पुच्छ रहा है, कम से कम लड़कियो की इज़्ज़त का तो ख़याल कर.’’
निशा,’’तू और लड़कियो की इज़्ज़त के बारे मे बाते, हा हा हा चल बता ना कितनी लड़कियो को बर्बाद किया है तूने. चल मैं ही पुच्छ रही हू.’’
साजन,’’मैने तुझे बर्बाद किया है क्या ? इसे तो आबाद करना कहते है. गिनती तो याद ही नही है मुझे.’’
निशा और नीशी दोनो ने लात की बारिश कर दी साजन को. थोड़ी देर मे चाय और नस्ता आया और सब मिल के खाने पीने लगे.
जय,’’लेकिन साजन कुच्छ तो बता इस मार्ग के बारे मे, ये स्वामीजी कौन है, क्यू तेरे पिताजी इस से जुड़े हुए है, यार कुच्छ तो होगा ना कि इस स्वामीजी का नाम देश विदेशो मे भी फेमस है.’’
गतान्क से आगे.......
एक लड़के ने फिर उठकर पुच्छ लिया,’’स्वामीजी, अगर हमारी दुनिया मे पेरेंट्स के अलावा और कोई हो और वो.....’’
स्वामीजी ने हॅस्कर बीच मे ही बोल दिया,’’प्यार करनेवालो के लिए तो ये मार्ग स्वर्ग है, हमने कहा था ना की आप जैसे हो, जो भी हो सिर्फ़ जुड़ जाओ, यहा आप को कुच्छ भी छ्चोड़ना नही है, सिर्फ़ अपने जीवन मे इस मार्ग को जोड़ दो. अगली सुबह सुनहरी होगी, ये हमारी 100% गारंटी है. इसे ताम्रपत्र मे लिखा गया लेख ही समझो.’’
निशा ने पुच्छ लिया,’’स्वामीजी, आप जय से कुच्छ कार्य करवाना चाहते है, उसके बारे मे हमे कुच्छ बताएँगे?’’
स्वामीजी ने मुस्कुरकर आँखे बंद की और गहरी सांस ली बाद मे आँखे खोलकर बोला,’’अभी देर है इस कार्य मे, पहले इसे जुड़ जाने दो.’’
निशा,’’लेकिन क्या जय जुड़ जाएगा इस कार्य मे?’’
स्वामीजी,’’अवश्य, सिर्फ़ जय ही नही आप सभी लोग बारी बारी इस मार्ग मे आने ही वाले हो. जो पहले आया समझो उसका सूर्योदय जल्दी होगा. हर एक का एक निश्चित समय होता है, जिस दिन वो सुबह हो गयी, वो जुड़ ही जाएगा. ये लड़का भी अवश्य आएगा.’’
थोड़ी देर मे जय होश मे आ गया और उसके सिर की बाई आँख से कान के बीच एक नस को वो उंगली से दबाता चला गया और उकी मस्तिष्क की रेखाए खीची हुई थी. साजन ने उसे संभाला. पूछने पर सब ने उसे बताया कि वो ट्रांस मे चला गया था और फिर स्वामीजी धीरे से खड़े हुए और जय के पास आकर दाया हाथ उसके सिर पर रखा और एक उंगली उस नस पर रखी और प्रेशर दिया और आँखे बंद कर के दो मिनट खड़े रहे. फिर स्वामिनी ने सब का कल्याण हो कहकर धीरे धीरे पीछे के दरवाजे से अंदर के रूम मे जाना शुरू किया. सब ने खड़े होकर हाथ जोड़े और फिर सब जय के आसपास खड़े रह गये.
सब स्टूडेंट्स धीरे धीरे कुटीर से बाहर आए और साजन ने जय को पुचछा,’’क्या हुवा जय, यार ये ट्रांस क्या होता है?’’
जा की आँखो से धीरे धीरे पानी की बूँद आ रही थी, वो बोला,’’कुच्छ ट्रांस नही था यार, मुझे फिर वोही सबकुच्छ दिखाई दिया, आँखो के सामने अंधेरा च्छा गया और फिर वोही औरत की छाती और फिर वोही साधु, लेकिन इस बार ये नस(वेन) कुच्छ ज़्यादा दुखती है. नीशी ने उस नस पे अपनी उंगली रखी तो महसूस किया कि बहुत जोरो से स्ट्रोक मार रही थी. फिर जे बोला,’’अब रात की नींद तक ये दर्द सहा नही जाएगा.’’
बिरजू,’’लेकिन ये होता क्या है, क्या ट्रांस मे ऐसा कुच्छ होता है’’
जय,’’ना ये ट्रांस नही था यार, ट्रांस मे तो आदमी ब्रह्मांड मे चला जाता है, ये तो मेरी बीमारी है, शायद इसे माइग्रेन कहते है, इसके सिंप्टम्स है. आँखो से पानी बहना, सिर पे खालीपना होना, आवाज़ सहन नही होना, रोशनी सहन नही होनी एट्सेटरा.’’
‘’लेकिन स्वामीजी ने कहा कि तू ट्रांस मे चला गया था.’’निशा ने कहा.
जय,’’कुच्छ भी हो यार मुझे यहा से ले चलो, मेरा जी घबरा रहा है, मुझे कुच्छ अच्छा नही लगता है यहा.’’
साजन,’’क्या ? अबे साले स्वामीजी तो कहते थे कि तू इस मार्ग मे जल्दी आनेवाला है और तू तो कहता है कि तुझे यहा अच्छा नही लगता है ? यार बात क्या है समझ मे नही आई.’’
जय,’’क्या क्या, स्वामीजी ने कहा की मैं इस मार्ग मे आनेवाला हू ?’’
नीशी,’’यस जय ही टोल्ड अस दट यू विल डेफ. फॉलो दिस मिशन.’’
जय,’’बट हाउ कॅन इट पासिबल, जस्ट आइ हॅव नोट डिसाइडेड टू फॉलो इट यार. (फिर अपनी वेन दबाते हुए आगे बोला) लेकिन मुझे पहले यहा से बाहर ले जाओ यार मेरा सिर दुख रहा है.’’
फिर सब आश्रम से बाहर आए और सिटी की ओर चल पड़े. पाइयोली रिवर ब्रिड्ज क्रॉस कर के सब स्टूडेंट्स कॉलेज कॅंपस की ओर चल पड़े. ये ग्रूप धीरे से अलग हो के म्यूज़ीयम की ओर चला गया. रेलवे स्टेशन की क्रॉसिंग लाइन क्रॉस कर के वाहा एक छ्होटी सी रेस्टोरा थी वाहा चाय पानी के लिए रुके. सब वाहा बैठ गये. साजन ने चाय के साथ कुच्छ रेफ्रेशमेंट भी मँगवाया. जय अभी भी बार बार वो नस दबाता था. कभी कभी उसके मूह से सिसकिया निकल आती थी. सब पहली बार देख रहे थे जय को ऐसी हालत मे. अचानक उसकी हेल्त को असर हुवा था.
सब चुप थे तो जय ने कहा,’’यार मैं कोई सीरीयस बीमार नही हुवा हू, वाइ आर यू सो सीरीयस? कुच्छ बाते तो करो, शायद ये दर्द गायब हो जाए.
बिरजू ने कहा,’’यार सीरीयस नही है, सोच रहा हू.’’
जय,’’हा कभी कभी अच्छा काम तू कर लेता है.’’
बिरजू ने एक हाथ जमाया जय को. जय के मूह से आ निकल गयी,’’आबे ये तेरा हाथ है की हथोदा, कितना ज़ोर है तेरे मे.’’
निशा,’’क्या सोच रहा है तू ?’’
बिरजू,’’स्वामीजी ने ये क्यू कहा कि जय ट्रांस मे है, जब कि ये तो कहता है कि उसे वही दौरा पड़ा था.’’
साजन,’’अबे तू जब भी सोचता है ना डीप मे सोचता है, क्यू खालीपीली दिमाग़ को खराब करना है. तुझे क्या जुड़ना है इस मार्ग मे ?’’
जय,’’वो बात बाद मे साजन, लेकिन तू और नीशी तो जानते हो इस मार्ग को, इस स्वामीजी को, तुमलोगो ने क्यू नही बताया हमे ?’’
साजन,’’अबे यार इसमे कौन सी बताने वाली बात है, मेरे डॅडी पहले से ही इस संस्था के ट्रस्टी है और नीशी के डॅडी उसे हेल्प कर रहे है. मुझे ये कोई पसंद नही है, ना ही कभी मेरे डॅडी ने मुझे प्रेशर किया है. मैं तो साले सब साधु से दूर ही रहता हू. मुझे वैसे भी सॅफ्रन नही पिंक कलर पसंद है.’’
बिरजू,’’हा साले तुझे पिंक ही पसंद आता है ना. क्यूकी सॅफ्रन मे सबकुच्छ त्याग करने की बात आती है और पिंक मे सबकुच्छ भोगने मिलता है ना. कितनी को बर्बाद किया है साले बता ?’’
साजन (धीरे से),’’अबे ये निशा और नीशी खड़ी है और ऐसी बाते पुच्छ रहा है, कम से कम लड़कियो की इज़्ज़त का तो ख़याल कर.’’
निशा,’’तू और लड़कियो की इज़्ज़त के बारे मे बाते, हा हा हा चल बता ना कितनी लड़कियो को बर्बाद किया है तूने. चल मैं ही पुच्छ रही हू.’’
साजन,’’मैने तुझे बर्बाद किया है क्या ? इसे तो आबाद करना कहते है. गिनती तो याद ही नही है मुझे.’’
निशा और नीशी दोनो ने लात की बारिश कर दी साजन को. थोड़ी देर मे चाय और नस्ता आया और सब मिल के खाने पीने लगे.
जय,’’लेकिन साजन कुच्छ तो बता इस मार्ग के बारे मे, ये स्वामीजी कौन है, क्यू तेरे पिताजी इस से जुड़े हुए है, यार कुच्छ तो होगा ना कि इस स्वामीजी का नाम देश विदेशो मे भी फेमस है.’’