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किस्मत का खेल

किस्मत का खेल पार्ट --49

गतान्क से आगे.......

एक लड़के ने फिर उठकर पुच्छ लिया,’’स्वामीजी, अगर हमारी दुनिया मे पेरेंट्स के अलावा और कोई हो और वो.....’’

स्वामीजी ने हॅस्कर बीच मे ही बोल दिया,’’प्यार करनेवालो के लिए तो ये मार्ग स्वर्ग है, हमने कहा था ना की आप जैसे हो, जो भी हो सिर्फ़ जुड़ जाओ, यहा आप को कुच्छ भी छ्चोड़ना नही है, सिर्फ़ अपने जीवन मे इस मार्ग को जोड़ दो. अगली सुबह सुनहरी होगी, ये हमारी 100% गारंटी है. इसे ताम्रपत्र मे लिखा गया लेख ही समझो.’’

निशा ने पुच्छ लिया,’’स्वामीजी, आप जय से कुच्छ कार्य करवाना चाहते है, उसके बारे मे हमे कुच्छ बताएँगे?’’

स्वामीजी ने मुस्कुरकर आँखे बंद की और गहरी सांस ली बाद मे आँखे खोलकर बोला,’’अभी देर है इस कार्य मे, पहले इसे जुड़ जाने दो.’’

निशा,’’लेकिन क्या जय जुड़ जाएगा इस कार्य मे?’’

स्वामीजी,’’अवश्य, सिर्फ़ जय ही नही आप सभी लोग बारी बारी इस मार्ग मे आने ही वाले हो. जो पहले आया समझो उसका सूर्योदय जल्दी होगा. हर एक का एक निश्चित समय होता है, जिस दिन वो सुबह हो गयी, वो जुड़ ही जाएगा. ये लड़का भी अवश्य आएगा.’’

थोड़ी देर मे जय होश मे आ गया और उसके सिर की बाई आँख से कान के बीच एक नस को वो उंगली से दबाता चला गया और उकी मस्तिष्क की रेखाए खीची हुई थी. साजन ने उसे संभाला. पूछने पर सब ने उसे बताया कि वो ट्रांस मे चला गया था और फिर स्वामीजी धीरे से खड़े हुए और जय के पास आकर दाया हाथ उसके सिर पर रखा और एक उंगली उस नस पर रखी और प्रेशर दिया और आँखे बंद कर के दो मिनट खड़े रहे. फिर स्वामिनी ने सब का कल्याण हो कहकर धीरे धीरे पीछे के दरवाजे से अंदर के रूम मे जाना शुरू किया. सब ने खड़े होकर हाथ जोड़े और फिर सब जय के आसपास खड़े रह गये.

सब स्टूडेंट्स धीरे धीरे कुटीर से बाहर आए और साजन ने जय को पुचछा,’’क्या हुवा जय, यार ये ट्रांस क्या होता है?’’

जा की आँखो से धीरे धीरे पानी की बूँद आ रही थी, वो बोला,’’कुच्छ ट्रांस नही था यार, मुझे फिर वोही सबकुच्छ दिखाई दिया, आँखो के सामने अंधेरा च्छा गया और फिर वोही औरत की छाती और फिर वोही साधु, लेकिन इस बार ये नस(वेन) कुच्छ ज़्यादा दुखती है. नीशी ने उस नस पे अपनी उंगली रखी तो महसूस किया कि बहुत जोरो से स्ट्रोक मार रही थी. फिर जे बोला,’’अब रात की नींद तक ये दर्द सहा नही जाएगा.’’

बिरजू,’’लेकिन ये होता क्या है, क्या ट्रांस मे ऐसा कुच्छ होता है’’

जय,’’ना ये ट्रांस नही था यार, ट्रांस मे तो आदमी ब्रह्मांड मे चला जाता है, ये तो मेरी बीमारी है, शायद इसे माइग्रेन कहते है, इसके सिंप्टम्स है. आँखो से पानी बहना, सिर पे खालीपना होना, आवाज़ सहन नही होना, रोशनी सहन नही होनी एट्सेटरा.’’

‘’लेकिन स्वामीजी ने कहा कि तू ट्रांस मे चला गया था.’’निशा ने कहा.

जय,’’कुच्छ भी हो यार मुझे यहा से ले चलो, मेरा जी घबरा रहा है, मुझे कुच्छ अच्छा नही लगता है यहा.’’

साजन,’’क्या ? अबे साले स्वामीजी तो कहते थे कि तू इस मार्ग मे जल्दी आनेवाला है और तू तो कहता है कि तुझे यहा अच्छा नही लगता है ? यार बात क्या है समझ मे नही आई.’’

जय,’’क्या क्या, स्वामीजी ने कहा की मैं इस मार्ग मे आनेवाला हू ?’’

नीशी,’’यस जय ही टोल्ड अस दट यू विल डेफ. फॉलो दिस मिशन.’’

जय,’’बट हाउ कॅन इट पासिबल, जस्ट आइ हॅव नोट डिसाइडेड टू फॉलो इट यार. (फिर अपनी वेन दबाते हुए आगे बोला) लेकिन मुझे पहले यहा से बाहर ले जाओ यार मेरा सिर दुख रहा है.’’

फिर सब आश्रम से बाहर आए और सिटी की ओर चल पड़े. पाइयोली रिवर ब्रिड्ज क्रॉस कर के सब स्टूडेंट्स कॉलेज कॅंपस की ओर चल पड़े. ये ग्रूप धीरे से अलग हो के म्यूज़ीयम की ओर चला गया. रेलवे स्टेशन की क्रॉसिंग लाइन क्रॉस कर के वाहा एक छ्होटी सी रेस्टोरा थी वाहा चाय पानी के लिए रुके. सब वाहा बैठ गये. साजन ने चाय के साथ कुच्छ रेफ्रेशमेंट भी मँगवाया. जय अभी भी बार बार वो नस दबाता था. कभी कभी उसके मूह से सिसकिया निकल आती थी. सब पहली बार देख रहे थे जय को ऐसी हालत मे. अचानक उसकी हेल्त को असर हुवा था.

सब चुप थे तो जय ने कहा,’’यार मैं कोई सीरीयस बीमार नही हुवा हू, वाइ आर यू सो सीरीयस? कुच्छ बाते तो करो, शायद ये दर्द गायब हो जाए.

बिरजू ने कहा,’’यार सीरीयस नही है, सोच रहा हू.’’

जय,’’हा कभी कभी अच्छा काम तू कर लेता है.’’

बिरजू ने एक हाथ जमाया जय को. जय के मूह से आ निकल गयी,’’आबे ये तेरा हाथ है की हथोदा, कितना ज़ोर है तेरे मे.’’

निशा,’’क्या सोच रहा है तू ?’’

बिरजू,’’स्वामीजी ने ये क्यू कहा कि जय ट्रांस मे है, जब कि ये तो कहता है कि उसे वही दौरा पड़ा था.’’

साजन,’’अबे तू जब भी सोचता है ना डीप मे सोचता है, क्यू खालीपीली दिमाग़ को खराब करना है. तुझे क्या जुड़ना है इस मार्ग मे ?’’

जय,’’वो बात बाद मे साजन, लेकिन तू और नीशी तो जानते हो इस मार्ग को, इस स्वामीजी को, तुमलोगो ने क्यू नही बताया हमे ?’’

साजन,’’अबे यार इसमे कौन सी बताने वाली बात है, मेरे डॅडी पहले से ही इस संस्था के ट्रस्टी है और नीशी के डॅडी उसे हेल्प कर रहे है. मुझे ये कोई पसंद नही है, ना ही कभी मेरे डॅडी ने मुझे प्रेशर किया है. मैं तो साले सब साधु से दूर ही रहता हू. मुझे वैसे भी सॅफ्रन नही पिंक कलर पसंद है.’’

बिरजू,’’हा साले तुझे पिंक ही पसंद आता है ना. क्यूकी सॅफ्रन मे सबकुच्छ त्याग करने की बात आती है और पिंक मे सबकुच्छ भोगने मिलता है ना. कितनी को बर्बाद किया है साले बता ?’’

साजन (धीरे से),’’अबे ये निशा और नीशी खड़ी है और ऐसी बाते पुच्छ रहा है, कम से कम लड़कियो की इज़्ज़त का तो ख़याल कर.’’

निशा,’’तू और लड़कियो की इज़्ज़त के बारे मे बाते, हा हा हा चल बता ना कितनी लड़कियो को बर्बाद किया है तूने. चल मैं ही पुच्छ रही हू.’’

साजन,’’मैने तुझे बर्बाद किया है क्या ? इसे तो आबाद करना कहते है. गिनती तो याद ही नही है मुझे.’’

निशा और नीशी दोनो ने लात की बारिश कर दी साजन को. थोड़ी देर मे चाय और नस्ता आया और सब मिल के खाने पीने लगे.

जय,’’लेकिन साजन कुच्छ तो बता इस मार्ग के बारे मे, ये स्वामीजी कौन है, क्यू तेरे पिताजी इस से जुड़े हुए है, यार कुच्छ तो होगा ना कि इस स्वामीजी का नाम देश विदेशो मे भी फेमस है.’’
 
नीशी,’’जय ज़्यादा कुच्छ तो नही मालूम, लेकिन इस स्वामीजी ने बहुत कड़ी तपस्या की है, कई तरह की साधनाए इन्होने हिमालय, चीन, की पर्वआतमालाओ मे की है. इतना पता है कि इस मार्ग मे आनेवाला हर तरह से संतुष्ट हो जाता है. किसी की कोई भी इच्छा अधूरी नही रह जाती. किसी को दौलत नही है, किसी को नौकरी नही है, कोई घर से दुखी है तो कोई समाज से बिच्छड़ा है, कही पति पत्नी का जघड़ा तो कही सास बहू का, कही संतान की प्राप्ति नही है तो कही मन की शांति, कोई दौलत्वाला है तो मन की शांति के लिए यहा आता है. हमे तो सब शांति मिली हुई ही है फिर क्यू किसी मार्ग से जुड़े इसीलिए हमने सोचा था कि इस मार्ग मे नही जाएँगे. लेकिन बहुत करीब से हमने भी पहलिबार देखा है इस स्वामीजी को.’’

जय,’’लेकिन नीशी तुम दोनो तो बचपन से दोस्त हो, और तुम दोनो के पिताजी इस मार्ग मे बहुत आगे है, इसका मतलब है कि तुम्हारी फॅमिली भी इस मार्ग मे बहुत आगे है, तो फिर तुम्दोनो ही क्यू अलग हो. ज़रूर कोई बात है, यार कम से कम अपने ग्रूप से तो बात मत छिपाओ. अगर कोई प्राइवेट बात है तो मत बताओ, लेकिन बता सकते हो तो अभी बता दो प्लीज़.’’

साजन,’’यार ऐसी कोई बात नही है, तुम क्यू ये पकड़ के बैठे हो, मेरा उसूल है की खाओ पिओ और ऐश करो और ज़िंदगी का यही असली मज़ा है, सब मन की शांति के लिए वाहा जाते है, हमे तो पहले से ही मन की शांति है फिर क्यू कोई धार्मिक मार्ग से जुड़े. मुझे तो वैसे भी अपनी आज़ादी ही प्यारी है, काहे को कोई ज़ंज़ीर मे बँध जाए.’’

फिर कोई बात नही हुई और सब कॉलेज कॅंपस मे वापस आ गये. लेकिन जय सोचता ही रह गया था कि नही ज़रूर कोई ना कोई तो वजह है ही कि ये दोनो दूर भागते है. जय ने सोच लिया की आज अगर मौका मिला तो ज़रूर वो नीशी से बात निकालने की कोशिश करेगा.

दोपहर को खाना खा के जय अपनी रूम मे सोने की कोशिश करने लगा. उदयं बाहर बगीचे मे बैठा कोई पेंटिंग्स बना रहा था. जय को खाने के बाद दर्द बहुत बढ़ चुका था. लेकिन उसके लिए तो हमेशा का दर्द था. उसने सोने की कोशिश की लेकिन उस दर्द ने उसे नींद नही आने दिया. जय को हमेशा से उल्टा सोने की आदत थी. कहते है की उल्टा सोनेवाला पुत्र बाप का क़र्ज़ उतारता है. छाती नीचे और दोनो कान किसी चदडार या रुमाल या टवल से धक के सोने का आदि था. चाहे गर्मी हो या सर्दी हमेशा कान पे कुच्छ ना कुच्छ तो रखना ही पड़ता था तो ही जय को नींद आती थी.

जय उल्टा कान पर चदडार ओढ़ के पड़ा था कि अचानक निशा की ज़ोर से हस्ने की आवाज़ उसने सुनी. उसने आँख उठाकर देखा तो निशा उसे देखकर हस रहे थी. जय को बड़ा अजीब लगा एक तो निशा अकेली उसके रूम मे खड़ी थी उपर से ज़ोर से हस रही थी. जय उठकर बेड पर बैठ गया और बोला,

‘’निशा, तू यहा क्या कर रही है?’’

निशा (हस्ते हुए),’’पहले तेरा घूँघट हटा जय’’

जय (मुस्कुराते हुए),’’ओह सॉरी लेकिन मेरी आदत है की मैं कान को चदडार से ढकता हू तो ही नींद आती है, वैसे भी आज दर्द ज़्यादा है तो सोने की कोशिश कर रहा था, लेकिन नींद नही आ रही है.’’

निशा,’’इसीलिए मैं तेरे पास आई हू.’’

जय थोड़ी देर देखता रह गया फिर घबरा कर पुच्छ लिया,’’लेकिन मुझे तो कोई हेल्प नही चाहिए.’’

निशा,’’अरे बाबा, घबरा मत, मैं कुच्छ ऐसा वैसा करने नही आई हू,सच देख मैं तेरे लिए विक्क्स लाई हू, इसे मसाज कर देती हू, तेरा दर्द शायद कम हो जाएगा.’’

जय,’’नही निशा मैं बिल्कुल ठीक हू, कोई ज़रूरत नही है….’’

लेकिन उसकी बात अधूरी ही रह गयी, निशा उसके बेड पर बैठकर अपनी उंगली उस वेन पर लगा चुकी थी और बोली,’’जय, डॉन’ट बी सिल्ली आंड डॉन’ट वरी. मैं तुझे अच्छी तरह से जानती हू, तेरी इज़्ज़त लूटने नही आई हू. (फिर ज़ोर से हस पड़ी).

जय का चेहरा उतर गया,लेकिन फिर भी वो इनकार करने लगा तो निशा बोली,’’क्या मेरी दोस्ती पसंद नही है तुझे, जय मैं ऐसी वैसी लड़की नही हू मैं प्यार करती हू साजन से इसीलिए उसे सबकुच्छ सौप देती हू. मुझे ऐसी नज़रो से मत देखो, दूसरो को तो मैं सहन कर लेती हू लेकिन कम से कम तुम ऐसा वैसा नही सोचोगे इतना मुझे विश्वास था यार.’’

जय,’’ओह, निशा मैं तो कुच्छ सोचता ही नही तुम्हारे बारे मे, मुझे सिर्फ़ इतना ज्ञान है की तुम्हारी लाइफ है, तुम जैसे जी ना चाहती हो जी सकती हो. लेकिन मुझे ये डर है कि कोई तुम्हे यहा देख लेगा और तुम्हारी और बदनामी करे, ये मुझे पसंद नही है.’’

निशा,’’(ज़ोर से हॅस्कर) बदनामी, जय बदनामी तो जितनी सहनी थी मैं सह चुकी हू. अब तो मुझे कोई डर नही है बदनामी का.’’

और जय सतर्क हो गया, जैसे उसके सिक्स्त सेन्स ने घंटी बजा दी. जय ने नीशी को देखा और धीरे से अपना हाथ उसके सिर पर रखा और बोला,’’निशा ठीक है कोई बात नही ये विक्क्स तुम ही लगा दो मुझे, ओके खुश बेबी.’’

निशा हस पड़ी और उसने जय को बेड पर फिर से सुला दिया और विक्क्स की बॉटल खोल के उंगली पर विक्क्स लिया और धीरे धीरे वो वेन पर मसाज करने लगी. जय ने आँखे बंद कर ली और इन्दोनो को पता नही था की नीशी और साजन दरवाजे पर खड़े ये नज़ारा देख रहे थे. साजन अंदर जाने को तैयार हुवा, लेकिन नीशी ने उसे रोक दिया और उसे खीच कर बाहर दीवारो पर सटकर धीरे से बोली,’’साजन, देख अभी जय कैसे निशा की जीवनळीला को खोलता है. सुन ले निशा क्या चाहती है?’’

साजन,’’लेकिन निशा क्यू बताएगी?’’

नीशी,’’देख ले, यही तो चमत्कार है जय मे, देखना अभी वो पूरी बात बता देगी जय को. निशा तुझे चाहती है ये तो वो बता ही चुकी है, अभी देख आगे वो तेरे बारे मे क्या सोचती है वो भी बताएगी. ये जय का चमत्कार है.’’

क्रमशः..............
 
किस्मत का खेल पार्ट --49

गतान्क से आगे.......

Ek ladke ne fir uthkar puchh liya,’’Swamiji, agar hamari duniya me parents ke alava aur koi ho aur vo.....’’

Swamiji ne haskar bich me hi bol diya,’’Pyar karnewalo ke liye to ye marg swarg hai, Hamne kaha tha na ki aap jaise ho, jo bhi ho sirf jud jao, yaha aap ko kuchh bhi chhodana nahi hai, sirf apane jivan me is marg ko jod do. Agali subah sunahari hogi, ye hamari 100% guaranttee hai. Ise tamrapatra me likha gaya lekh hi samjo.’’

Nisha ne puchh liya,’’Swamiji, aap Jay se kuchh karya karvana chahte hai, uske bare me hame kuchh batayenge?’’

Swamiji ne muskurakar ankhe bandh ki aur gehri sans li bad me ankhe kholkar bola,’’Abhi der hai is karya me, pehle ise jud jane do.’’

Nisha,’’Lekin kya Jay jud jayega is karya me?’’

Swamiji,’’Avashya, sirf Jay hi nahi aap sabhi log bari bari is marg me ane hi wale ho. Jo pehle aya samjo uska suryoday jaldi hoga. Har ek ka ek nishchit samay hota hai, jis din vo subah ho gayi, vo jud hi jayega. Ye ladka bhi avashya ayega.’’

Thodi der me Jay hosh me aa gaya aur uske sir ki bayi ankh se kan ke bich ek vain ko vo ungali se dabata chala gaya aur uki mastishk ki rekhaye khichi huyi thi. Sajan ne use samala. Puchhane par sab ne use bataya ki vo trans me chala gaya tha aur fir Swamiji dhire se khade huye aur Jay ke pas aakar daya hath uske sir par rakha aur ek ungali us vain par rakhi aur pressure diya aur ankhe bandh kar ke do min khade rahe. Fir Swamini ne sab ka kalyan ho kehkar dhire dhire pichche ke darwaje se andar ke room me jana shuru kiya. Sab ne khade hokar hath jode aur fir sab Jay ke aaspas khade rah gaye.

Sab students dhire dhire kutir se bahar aye aur Sajan ne Jay ko puchha,’’Kya huva Jay, yar ye trans kya hota hai?’’

Jay ki ankho se dhire dhire pani ki bund aa rahi thi, vo bola,’’Kuchh trans nahi tha yar, muje fir vohi sabkuchh dikhai diya, Ankho ke samne andhera chha gaya aur fir vohi aurat ki chhati aur fir vohi sadhu, lekin is bar ye nas(Vain) kuchh jyada dukhti hai. Nishi ne us nas pe apani ungali rakhi to mehsus kiya ki bahut joro se stroke mar rahi thi. Fir Jay bola,’’Ab rat ki nind tak ye dard saha nahi jayega.’’

Birju,’’Lekin ye hota kya hai, kya trans me aisa kuchh hota hai’’

Jay,’’na ye trans nahi tha yar, trans me to aadami brahmand me chala jata hai, ye to meri bimari hai, shayad ise migrane kehte hai, iske symptoms hai. Ankho se pani behna, sir pe khalipana hona, awaz sahan nahi hona, roshani sahan nahi honi etc.’’

‘’Lekin Swamiji ne kaha ki tu trans me chala gaya tha.’’Nisha ne kaha.

Jay,’’Kuchh bhi ho yar muje yaha se le chalo, mera ji gabhara raha hai, muje kuchh achcha nahi lagta hai yaha.’’

Sajan,’’Kya ? abe sale Swamiji to kehte the ki tu is marg me jaldi anewala hai aur tu to kehta hai ki tuje yaha achcha nahi lagata hai ? yar bat kya hai samaj me nahi ayi.’’

Jay,’’Kya kya, swamiji ne kaha ki mai is marg me anewala hu ?’’

Nishi,’’Yes Jay he told us that u will def. follow this mission.’’

Jay,’’But how can it possible, just I have not decided to follow it yar. (fir apani vain dabate huye age bola) Lekin muje pehle yaha se bahar le jao yar mera sir dukh raha hai.’’

Fir sab ashram se bahar aye aur city ki aur chal pade. Pioli river bridge cross kar ke sab students college campus ki aur chal pade. Ye group dhire se alag ho ke museum ki aur chala gaya. Railway station ki crossing line cross kar ke vaha ek chhoti si restora thi vaha chay pani ke liye ruke. Sab vaha baith gaye. Sajan ne chay ke sath kuchh refreshment bhi mangvaya. Jay abhi bhi bar bar vo nas dabata tha. Kabhi kabhi uske muh se siskiya nikal ati thi. Sab pehli bar dekh rahe the Jay ko aisi halat me. Achanak uski health ko asar huva tha.

Sab chup the to Jay ne kaha,’’Yar mai koi serious bimar nahi huva hu, why r u so serious? Kuchh bate to karo, shayad ye dard gayab ho jaye.

Birju ne kaha,’’Yar serious nahi hai, soch raha hu.’’

Jay,’’Ha kabhi kabhi achcha kam tu kar leta hai.’’

Birju ne ek hath jamaya Jay ko. Jay ke muh se aah nikal gayi,’’Abe ye tera hath hai ki hathoda, kitna jor hai tere me.’’

Nisha,’’Kya soch raha hai tu ?’’

Birju,’’Swamiji ne ye kyu kaha ki Jay trans me hai, jab ki ye to kehta hai ki use vahi daura pada tha.’’

Sajan,’’Abe tu jab bhi sochata hai na deep me sochata hai, kyu khalipili dimag ko kaharab karna hai. Tuje kya judna hai is marg me ?’’

Jay,’’Vo bat bad me Sajan, lekin tu aur Nishi to jante ho is marg ko, is swamiji ko, tumlogo ne kyu nahi bataya hame ?’’

Sajan,’’Abe yar isme kaun si batane wali bat hai, mere daddy pehle se hi is sanstha ke trustee hai aur Nishi ke daddy use help kar rahe hai. Muje ye koi pasand nahi hai, na hi kabhi mere daddy ne muje pressure kiya hai. Mai to sale sab sadhu se dur hi rehta hu. Muje vaise bhi saffron nahi pink colour pasand hai.’’

Birju,’’Ha sale tuje pink hi pasand aata hai na. Kyuki saffron me sabkuchh tyag karne ki bat ati hai aur pink me sabkuchh bhogne milta hai na. Kitni ko barbad kiya hai sale bata ?’’

 
Sajan (Dhire se),’’Abe ye nisha aur nishi khadi hai aur aisi bate puchh raha hai, kam se kam ladkiyo ki ijjat ka to khayal kar.’’

Nisha,’’Tu aur ladkiyo ki ijjat ke bare me bate, ha ha ha chal bata na kitni ladkiyo ko barbad kiya hai tune. Chal mai hi puchh rahi hu.’’

Sajan,’’Maine tuje barbad kiya hai kya ? ise to abad karna kehte hai. Ginati to yad hi nahi hai muje.’’

Nisha aur Nishi dono ne lat ki barish kar di Sajan ko. Thodi der me chay aur nasta aya aur sab mil ke khane pine lage.

Jay,’’Lekin Sajan kuchh to bata is marg ke bare me, ye swamiji kaun hai, kyu tere pitaji is se jude huye hai, yar kuchh to hoga na ki is swamiji ka nam desh videsho me bhi famous hai.’’

Nishi,’’Jay jyada kuchh to nahi malum, lekin is swamiji ne bahut kadi tapasya ki hai, kai tarah ki sadhanaye inhone Himalay, Chin, ki parvatmalao me ki hai. Itana pata hai ki is marg me anewala har tarah se santusht ho jata hai. Kisi ki koi bhi ichcha adhuri nahi reh jati. Kisi ko daulat nahi hai, kisi ko naukari nahi hai, koi ghar se dukhi hai to koi samaj se bichchada hai, kahi pati patni ka jaghada to kahi sas bahu ka, kahi santan ki prapti nahi hai to kahi man ki shanti, koi daulatwala hai to man ki shanti ke liye yaha aata hai. Hame to sab shanti mili huyi hi hai fir kyu kisi marg se jude isiliye hamne socha tha ki is marg me nahi jayenge. Lekin bahut karib se hamne bhi pehlibar dekha hai is swamiji ko.’’

Jay,’’Lekin Nishi tum dono to bachapan se dost ho, aur tum dono ke pitaji is marg me bahut age hai, iska matlab hai ki tumhare family bhi is marg me bahut age hai, to fir tumdono hi kyu alag ho. Jarur koi bat hai, yar kam se kam apane group se to bat mat chhipao. Agar koi privat bat hai to mat batao, lekin bata sakte ho to abhi bata do please.’’

Sajan,’’Yar aisi koi bat nahi hai, tum kyu ye pakad ke baithe ho, mera usul hai ki khao pio aur aish karo aur zindagi ka yehi asali maja hai, Sab man ki shanti ke liye vaha jate hai, hame to pehle se hi man ki shanti hai fir kyu koi dharmik marg se jude. Muje to vaise bhi apani azadi hi pyari hai, kahe ko koi zanzeer me bandh jaye.’’

Fir koi bat nahi huyi aur sab college campus me vapas aa gaye. Lekin Jay sochata hi rah gaya tha ki nahi jarur koi na koi to vajah hai hi ki ye dono dur bhagte hai. Jay ne soch liya ki aaj agar mauka mila to jarur vo Nishi se bat nikalane ki koshish karega.

Dopahar ko khana kha ke Jay apani room me sone ki koshish karne laga. Udayan bahar bagiche me baitha koi paintings bana raha tha. Jay ko khane ke bad dard bahut badh chuka tha. Lekin uske liye to hamesha ka dard tha. Usne sone ki koshish ki lekin us dard ne use nind nahi ane diya. Jay ko hamesha se ulta sone ki adat thi. Kehte hai ki ulta sonewala putra bap ka karz utarta hai. Chahti niche aur dono kan kisi chaddar ya rumal ya towel se dhak ke sone ka adi tha. Chahe garmi ho ya sardi hamesha kan pe kuchh na kuchh to rakhana hi padta tha to hi Jay ko nind ati thi.

Jay ulta kan par chaddar odh ke pada tha ki achanak Nisha ki jor se hasne ki awaz usne suni. Usne ankh uthakar dekha to Nisha use dekhkar has rahe thi. Jay ko bada ajib laga ek to Nisha akeli uske room me kahdi thi upar se jor se has rahi thi. Jay uthkar bed par baith gaya aur bola,

‘’Nisha, tu yaha kya kar rahi hai?’’

Nisha (Haste huye),’’Pehle tera ghunghat hata Jay’’

Jay (Muskurate huye),’’Oh sorry lekin meri adat hai ki mai kan ko chaddar se dhakata hu to hi nind aati hai, vaise bhi aaj dard jyada hai to sone ki koshish kar raha tha, lekin nind nahi aa rahi hai.’’

Nisha,’’Isiliye mai tere pas ayi hu.’’

Jay thodi der dekhata rah gaya fir ghabharakar puchh liya,’’lekin muje to koi help nahi chahiye.’’

Nisha,’’Are baba, ghabara mat, mai kuchh aisa vaisa karne nahi ayi hu,sach dekh mai tere liye vicks layi hu, ise massage kar deti hu, tera dard shayad kam ho jayega.’’

Jay,’’Nahi Nisha mai bilkul thik hu, koi jarur nahi hai….’’

Lekin uski bat adhuri hi rah gayi, Nisha uske bed par baithkar apani ungali us vain par laga chuki thi aur boli,’’Jay, don’t be silly and don’t worry. Mai tuje achchi tarah se janti hu, teri izzat lutane nahi ayi hu. (Fir jor se has padi).

Jay ka chehra utar gaya,lekin fir bhi vo inkar karne laga to Nisha boli,’’Kya meri dosti pasand nahi hai tuje, Jay mai aisi vaisi ladki nahi hu mai pyar karti hu Sajan se isiliye use sabkuchh saup deti hu. Muje aisi najaro se mat dekho, dusro ko to mai sahan kar leti hu lekin kam se kam tum aisa vaisa nahi sochoge itana muje vishvas tha yar.’’

Jay,’’Oh, Nisha mai to kuchh sochata hi nahi tumhare bare me, muje sirf itana gyan hai ki tumhari life hai, tum jaise ji na chahti ho ji sakti ho. Lekin muje ye dar hai ki koi tumhe yaha dekh lega aur tumhari aur badnami kare, ye muje pasand nahi hai.’’

Nisha,’’(Jor se haskar) badnami, Jay badnami to jitani sehni thi mai sah chuki hu. Ab to muje koi dar nahi hai badnami ka.’’

Aur Jay satark ho gaya, jaise uske sixth sense ne ghanti baja di. Jay ne Nishi ko dekha aur dhire se apana hath uske sir par rakha aur bola,’’Nisha thik hai koi bat nahi ye vicks tum hi laga do muje, ok khush baby.’’

Nisha has padi aur usne Jay ko bed par fir se sula diya aur vicks ki bottle khol ke ungali par vicks liya aur dhire dhire vo vain par massage karne lagi. Jay ne ankhe bandh kar li aur indono ko pata nahi tha ki Nishi aur Sajan darwaje par khade ye najara dekh rahe the. Sajan andar jane ko taiyar huva, lekin Nishi ne use rok diya aur use khich kar bahar diwaro par satakar dhire se boli,’’Sajan, dekh abhi Jay kaise Nisha ki jivanleela ko kholta hai. Sun le Nisha kya chahti hai?’’

Sajan,’’Lekin Nisha kyu batayegi?’’

Nishi,’’Dekh le, yehi to chamatkar hai Jay me, dekhana abhi vo puri bat bata degi Jay ko. Nisha tuje chahti hai ye to vo bata hi chuki hai, abhi dekh age vo tere bare me kya sochati hai vo bhi batayegi. Ye Jay ka chamatkar hai.’’

kramashah..............

 
किस्मत का खेल पार्ट --50

गतान्क से आगे.......

एक लड़के ने फिर उठकर पुच्छ लिया,’’स्वामीजी, अगर हमारी दुनिया मे पेरेंट्स के अलावा और कोई हो और वो.....’’

स्वामीजी ने हॅस्कर बीच मे ही बोल दिया,’’प्यार करनेवालो के लिए तो ये मार्ग स्वर्ग है, हमने कहा था ना की आप जैसे हो, जो भी हो सिर्फ़ जुड़ जाओ, यहा आप को कुच्छ भी छ्चोड़ना नही है, सिर्फ़ अपने जीवन मे इस मार्ग को जोड़ दो. अगली सुबह सुनहरी होगी, ये हमारी 100% गारंटी है. इसे ताम्रपत्र मे लिखा गया लेख ही समझो.’’

निशा ने पुच्छ लिया,’’स्वामीजी, आप जय से कुच्छ कार्य करवाना चाहते है, उसके बारे मे हमे कुच्छ बताएँगे?’’

स्वामीजी ने मुस्कुरकर आँखे बंद की और गहरी सांस ली बाद मे आँखे खोलकर बोला,’’अभी देर है इस कार्य मे, पहले इसे जुड़ जाने दो.’’

निशा,’’लेकिन क्या जय जुड़ जाएगा इस कार्य मे?’’

स्वामीजी,’’अवश्य, सिर्फ़ जय ही नही आप सभी लोग बारी बारी इस मार्ग मे आने ही वाले हो. जो पहले आया समझो उसका सूर्योदय जल्दी होगा. हर एक का एक निश्चित समय होता है, जिस दिन वो सुबह हो गयी, वो जुड़ ही जाएगा. ये लड़का भी अवश्य आएगा.’’

थोड़ी देर मे जय होश मे आ गया और उसके सिर की बाई आँख से कान के बीच एक नस को वो उंगली से दबाता चला गया और उकी मस्तिष्क की रेखाए खीची हुई थी. साजन ने उसे संभाला. पूछने पर सब ने उसे बताया कि वो ट्रांस मे चला गया था और फिर स्वामीजी धीरे से खड़े हुए और जय के पास आकर दाया हाथ उसके सिर पर रखा और एक उंगली उस नस पर रखी और प्रेशर दिया और आँखे बंद कर के दो मिनट खड़े रहे. फिर स्वामिनी ने सब का कल्याण हो कहकर धीरे धीरे पीछे के दरवाजे से अंदर के रूम मे जाना शुरू किया. सब ने खड़े होकर हाथ जोड़े और फिर सब जय के आसपास खड़े रह गये.

सब स्टूडेंट्स धीरे धीरे कुटीर से बाहर आए और साजन ने जय को पुचछा,’’क्या हुवा जय, यार ये ट्रांस क्या होता है?’’

जा की आँखो से धीरे धीरे पानी की बूँद आ रही थी, वो बोला,’’कुच्छ ट्रांस नही था यार, मुझे फिर वोही सबकुच्छ दिखाई दिया, आँखो के सामने अंधेरा च्छा गया और फिर वोही औरत की छाती और फिर वोही साधु, लेकिन इस बार ये नस(वेन) कुच्छ ज़्यादा दुखती है. नीशी ने उस नस पे अपनी उंगली रखी तो महसूस किया कि बहुत जोरो से स्ट्रोक मार रही थी. फिर जे बोला,’’अब रात की नींद तक ये दर्द सहा नही जाएगा.’’

बिरजू,’’लेकिन ये होता क्या है, क्या ट्रांस मे ऐसा कुच्छ होता है’’

जय,’’ना ये ट्रांस नही था यार, ट्रांस मे तो आदमी ब्रह्मांड मे चला जाता है, ये तो मेरी बीमारी है, शायद इसे माइग्रेन कहते है, इसके सिंप्टम्स है. आँखो से पानी बहना, सिर पे खालीपना होना, आवाज़ सहन नही होना, रोशनी सहन नही होनी एट्सेटरा.’’

‘’लेकिन स्वामीजी ने कहा कि तू ट्रांस मे चला गया था.’’निशा ने कहा.

जय,’’कुच्छ भी हो यार मुझे यहा से ले चलो, मेरा जी घबरा रहा है, मुझे कुच्छ अच्छा नही लगता है यहा.’’

साजन,’’क्या ? अबे साले स्वामीजी तो कहते थे कि तू इस मार्ग मे जल्दी आनेवाला है और तू तो कहता है कि तुझे यहा अच्छा नही लगता है ? यार बात क्या है समझ मे नही आई.’’

जय,’’क्या क्या, स्वामीजी ने कहा की मैं इस मार्ग मे आनेवाला हू ?’’

नीशी,’’यस जय ही टोल्ड अस दट यू विल डेफ. फॉलो दिस मिशन.’’

जय,’’बट हाउ कॅन इट पासिबल, जस्ट आइ हॅव नोट डिसाइडेड टू फॉलो इट यार. (फिर अपनी वेन दबाते हुए आगे बोला) लेकिन मुझे पहले यहा से बाहर ले जाओ यार मेरा सिर दुख रहा है.’’

फिर सब आश्रम से बाहर आए और सिटी की ओर चल पड़े. पाइयोली रिवर ब्रिड्ज क्रॉस कर के सब स्टूडेंट्स कॉलेज कॅंपस की ओर चल पड़े. ये ग्रूप धीरे से अलग हो के म्यूज़ीयम की ओर चला गया. रेलवे स्टेशन की क्रॉसिंग लाइन क्रॉस कर के वाहा एक छ्होटी सी रेस्टोरा थी वाहा चाय पानी के लिए रुके. सब वाहा बैठ गये. साजन ने चाय के साथ कुच्छ रेफ्रेशमेंट भी मँगवाया. जय अभी भी बार बार वो नस दबाता था. कभी कभी उसके मूह से सिसकिया निकल आती थी. सब पहली बार देख रहे थे जय को ऐसी हालत मे. अचानक उसकी हेल्त को असर हुवा था.

सब चुप थे तो जय ने कहा,’’यार मैं कोई सीरीयस बीमार नही हुवा हू, वाइ आर यू सो सीरीयस? कुच्छ बाते तो करो, शायद ये दर्द गायब हो जाए.

बिरजू ने कहा,’’यार सीरीयस नही है, सोच रहा हू.’’

जय,’’हा कभी कभी अच्छा काम तू कर लेता है.’’

बिरजू ने एक हाथ जमाया जय को. जय के मूह से आ निकल गयी,’’आबे ये तेरा हाथ है की हथोदा, कितना ज़ोर है तेरे मे.’’

निशा,’’क्या सोच रहा है तू ?’’

बिरजू,’’स्वामीजी ने ये क्यू कहा कि जय ट्रांस मे है, जब कि ये तो कहता है कि उसे वही दौरा पड़ा था.’’

साजन,’’अबे तू जब भी सोचता है ना डीप मे सोचता है, क्यू खालीपीली दिमाग़ को खराब करना है. तुझे क्या जुड़ना है इस मार्ग मे ?’’

जय,’’वो बात बाद मे साजन, लेकिन तू और नीशी तो जानते हो इस मार्ग को, इस स्वामीजी को, तुमलोगो ने क्यू नही बताया हमे ?’’

साजन,’’अबे यार इसमे कौन सी बताने वाली बात है, मेरे डॅडी पहले से ही इस संस्था के ट्रस्टी है और नीशी के डॅडी उसे हेल्प कर रहे है. मुझे ये कोई पसंद नही है, ना ही कभी मेरे डॅडी ने मुझे प्रेशर किया है. मैं तो साले सब साधु से दूर ही रहता हू. मुझे वैसे भी सॅफ्रन नही पिंक कलर पसंद है.’’

बिरजू,’’हा साले तुझे पिंक ही पसंद आता है ना. क्यूकी सॅफ्रन मे सबकुच्छ त्याग करने की बात आती है और पिंक मे सबकुच्छ भोगने मिलता है ना. कितनी को बर्बाद किया है साले बता ?’’

साजन (धीरे से),’’अबे ये निशा और नीशी खड़ी है और ऐसी बाते पुच्छ रहा है, कम से कम लड़कियो की इज़्ज़त का तो ख़याल कर.’’
 
निशा,’’तू और लड़कियो की इज़्ज़त के बारे मे बाते, हा हा हा चल बता ना कितनी लड़कियो को बर्बाद किया है तूने. चल मैं ही पुच्छ रही हू.’’

साजन,’’मैने तुझे बर्बाद किया है क्या ? इसे तो आबाद करना कहते है. गिनती तो याद ही नही है मुझे.’’

निशा और नीशी दोनो ने लात की बारिश कर दी साजन को. थोड़ी देर मे चाय और नस्ता आया और सब मिल के खाने पीने लगे.

जय,’’लेकिन साजन कुच्छ तो बता इस मार्ग के बारे मे, ये स्वामीजी कौन है, क्यू तेरे पिताजी इस से जुड़े हुए है, यार कुच्छ तो होगा ना कि इस स्वामीजी का नाम देश विदेशो मे भी फेमस है.’’

नीशी,’’जय ज़्यादा कुच्छ तो नही मालूम, लेकिन इस स्वामीजी ने बहुत कड़ी तपस्या की है, कई तरह की साधनाए इन्होने हिमालय, चीन, की पर्वआतमालाओ मे की है. इतना पता है कि इस मार्ग मे आनेवाला हर तरह से संतुष्ट हो जाता है. किसी की कोई भी इच्छा अधूरी नही रह जाती. किसी को दौलत नही है, किसी को नौकरी नही है, कोई घर से दुखी है तो कोई समाज से बिच्छड़ा है, कही पति पत्नी का जघड़ा तो कही सास बहू का, कही संतान की प्राप्ति नही है तो कही मन की शांति, कोई दौलत्वाला है तो मन की शांति के लिए यहा आता है. हमे तो सब शांति मिली हुई ही है फिर क्यू किसी मार्ग से जुड़े इसीलिए हमने सोचा था कि इस मार्ग मे नही जाएँगे. लेकिन बहुत करीब से हमने भी पहलिबार देखा है इस स्वामीजी को.’’

जय,’’लेकिन नीशी तुम दोनो तो बचपन से दोस्त हो, और तुम दोनो के पिताजी इस मार्ग मे बहुत आगे है, इसका मतलब है कि तुम्हारी फॅमिली भी इस मार्ग मे बहुत आगे है, तो फिर तुम्दोनो ही क्यू अलग हो. ज़रूर कोई बात है, यार कम से कम अपने ग्रूप से तो बात मत छिपाओ. अगर कोई प्राइवेट बात है तो मत बताओ, लेकिन बता सकते हो तो अभी बता दो प्लीज़.’’

साजन,’’यार ऐसी कोई बात नही है, तुम क्यू ये पकड़ के बैठे हो, मेरा उसूल है की खाओ पिओ और ऐश करो और ज़िंदगी का यही असली मज़ा है, सब मन की शांति के लिए वाहा जाते है, हमे तो पहले से ही मन की शांति है फिर क्यू कोई धार्मिक मार्ग से जुड़े. मुझे तो वैसे भी अपनी आज़ादी ही प्यारी है, काहे को कोई ज़ंज़ीर मे बँध जाए.’’

फिर कोई बात नही हुई और सब कॉलेज कॅंपस मे वापस आ गये. लेकिन जय सोचता ही रह गया था कि नही ज़रूर कोई ना कोई तो वजह है ही कि ये दोनो दूर भागते है. जय ने सोच लिया की आज अगर मौका मिला तो ज़रूर वो नीशी से बात निकालने की कोशिश करेगा.

दोपहर को खाना खा के जय अपनी रूम मे सोने की कोशिश करने लगा. उदयं बाहर बगीचे मे बैठा कोई पेंटिंग्स बना रहा था. जय को खाने के बाद दर्द बहुत बढ़ चुका था. लेकिन उसके लिए तो हमेशा का दर्द था. उसने सोने की कोशिश की लेकिन उस दर्द ने उसे नींद नही आने दिया. जय को हमेशा से उल्टा सोने की आदत थी. कहते है की उल्टा सोनेवाला पुत्र बाप का क़र्ज़ उतारता है. छाती नीचे और दोनो कान किसी चदडार या रुमाल या टवल से धक के सोने का आदि था. चाहे गर्मी हो या सर्दी हमेशा कान पे कुच्छ ना कुच्छ तो रखना ही पड़ता था तो ही जय को नींद आती थी.

जय उल्टा कान पर चदडार ओढ़ के पड़ा था कि अचानक निशा की ज़ोर से हस्ने की आवाज़ उसने सुनी. उसने आँख उठाकर देखा तो निशा उसे देखकर हस रहे थी. जय को बड़ा अजीब लगा एक तो निशा अकेली उसके रूम मे खड़ी थी उपर से ज़ोर से हस रही थी. जय उठकर बेड पर बैठ गया और बोला,

‘’निशा, तू यहा क्या कर रही है?’’

निशा (हस्ते हुए),’’पहले तेरा घूँघट हटा जय’’

जय (मुस्कुराते हुए),’’ओह सॉरी लेकिन मेरी आदत है की मैं कान को चदडार से ढकता हू तो ही नींद आती है, वैसे भी आज दर्द ज़्यादा है तो सोने की कोशिश कर रहा था, लेकिन नींद नही आ रही है.’’

निशा,’’इसीलिए मैं तेरे पास आई हू.’’

जय थोड़ी देर देखता रह गया फिर घबरा कर पुच्छ लिया,’’लेकिन मुझे तो कोई हेल्प नही चाहिए.’’

निशा,’’अरे बाबा, घबरा मत, मैं कुच्छ ऐसा वैसा करने नही आई हू,सच देख मैं तेरे लिए विक्क्स लाई हू, इसे मसाज कर देती हू, तेरा दर्द शायद कम हो जाएगा.’’

जय,’’नही निशा मैं बिल्कुल ठीक हू, कोई ज़रूरत नही है….’’

लेकिन उसकी बात अधूरी ही रह गयी, निशा उसके बेड पर बैठकर अपनी उंगली उस वेन पर लगा चुकी थी और बोली,’’जय, डॉन’ट बी सिल्ली आंड डॉन’ट वरी. मैं तुझे अच्छी तरह से जानती हू, तेरी इज़्ज़त लूटने नही आई हू. (फिर ज़ोर से हस पड़ी).

जय का चेहरा उतर गया,लेकिन फिर भी वो इनकार करने लगा तो निशा बोली,’’क्या मेरी दोस्ती पसंद नही है तुझे, जय मैं ऐसी वैसी लड़की नही हू मैं प्यार करती हू साजन से इसीलिए उसे सबकुच्छ सौप देती हू. मुझे ऐसी नज़रो से मत देखो, दूसरो को तो मैं सहन कर लेती हू लेकिन कम से कम तुम ऐसा वैसा नही सोचोगे इतना मुझे विश्वास था यार.’’

जय,’’ओह, निशा मैं तो कुच्छ सोचता ही नही तुम्हारे बारे मे, मुझे सिर्फ़ इतना ज्ञान है की तुम्हारी लाइफ है, तुम जैसे जी ना चाहती हो जी सकती हो. लेकिन मुझे ये डर है कि कोई तुम्हे यहा देख लेगा और तुम्हारी और बदनामी करे, ये मुझे पसंद नही है.’’

निशा,’’(ज़ोर से हॅस्कर) बदनामी, जय बदनामी तो जितनी सहनी थी मैं सह चुकी हू. अब तो मुझे कोई डर नही है बदनामी का.’’

और जय सतर्क हो गया, जैसे उसके सिक्स्त सेन्स ने घंटी बजा दी. जय ने नीशी को देखा और धीरे से अपना हाथ उसके सिर पर रखा और बोला,’’निशा ठीक है कोई बात नही ये विक्क्स तुम ही लगा दो मुझे, ओके खुश बेबी.’’

निशा हस पड़ी और उसने जय को बेड पर फिर से सुला दिया और विक्क्स की बॉटल खोल के उंगली पर विक्क्स लिया और धीरे धीरे वो वेन पर मसाज करने लगी. जय ने आँखे बंद कर ली और इन्दोनो को पता नही था की नीशी और साजन दरवाजे पर खड़े ये नज़ारा देख रहे थे. साजन अंदर जाने को तैयार हुवा, लेकिन नीशी ने उसे रोक दिया और उसे खीच कर बाहर दीवारो पर सटकर धीरे से बोली,’’साजन, देख अभी जय कैसे निशा की जीवनळीला को खोलता है. सुन ले निशा क्या चाहती है?’’

साजन,’’लेकिन निशा क्यू बताएगी?’’

नीशी,’’देख ले, यही तो चमत्कार है जय मे, देखना अभी वो पूरी बात बता देगी जय को. निशा तुझे चाहती है ये तो वो बता ही चुकी है, अभी देख आगे वो तेरे बारे मे क्या सोचती है वो भी बताएगी. ये जय का चमत्कार है.’’

क्रमशः..............

 
किस्मत का खेल पार्ट --50

गतान्क से आगे.......

साजन और नीशी फिर से दरवाजे के पास खड़े रह गये और जय ने थोड़ी देर के बाद पुचछा,’’नीशी, अपने बारे मे कुच्छ बताओ ना, तुम कहा की रहनेवाली हो और साजन से कैसे मिली?’’

नीशी,’’मेरे पिताजी पोलीस मे थे आंड ही ईज़ वेरी ऑनेस्ट पोलीस ऑफीसर. एक हादसे मे उसकी मौत हो गयी और मैं और मेरी मा अकेली हो गयी. तब मैं सिर्फ़ चार साल की थी. फिर हमलोग बोम्बे अंकल के पास चले गये और मैं पढ़ने लगी. लेकिन जैसे जैसे उम्र बढ़ती गयी, सब की गंदी नज़ारे मेरे शरीर पर पड़ती गयी. एक बार एक हादसे से मुझे साजन ने बचाया और मुझे और मेरी मा को असरा दिलाया. मैं पहले से ही योगा सिखाती आई हू और वाहा बॉम्बे मे टूशण भी देती थी. लेकिन साजन ने कहा की अगर मैं चाहू तो बॉम्बे की जगह यहा नागपुर मे अभ्यास कर सकती हू और साजन ने अपने पिताजी से कहकर मेरा अड्मिशन यहा नागपुर मे करवाया. वरना हमारे पास इतने भी पैसे नही थे कि मैं आगे पढ़ सकु. फिर साजन से दोस्ती बढ़ती गयी और हमारे रीलेशन और गहरे बढ़ते गये. मैं उसे चाहने लगी.’’

जय,’’क्या?''

नीशी (मुस्कुराते हुए),''यस जय आइ लव साजन.''

जय,''लेकिन क्या साजन तुझे चाहता है ?’’

निशा,’’मैने कभी पुचछा नही, और जानकर भी कड़वी सच्चाई सुन ने को मिलेगी. अच्छा यही है कि मेरा प्यार मेरे पास रहे और साजन की लाइफ उसके पास.’’

जय,’’लेकिन फिर तेरा संसार कैसे बसेगा ?’’

निशा,’’अगर बॉम्बे रहती तो मेरे ही रिलेटिव या तो मुझे नौचते रहते और या तो मुझे बेच डालते, इस से तो अच्छा है की जिसे मैं प्यार करती हू उसे ही मेरा शरीर दे दू.’’

जय ने निशा का हाथ मसाज करने से रोक दिया और उठकर खड़ा हो गया और निशा की आँखो मे झाँक कर देखा और फिर अपना दाया हाथ निशा के सिर पर रखकर पुचछा,’’एक बात पुच्छू निशा ?’’

निशा,’’बिल्कुल.’’

जय,’’मुझ पे इतना भरोसा क्यू करती हो ? मुझ से डर नही लगता तुझे ?’’

निशा,’’तुम ऐसे होते तो उसी दिन मुझे नौच डालते जिस दिन तूने मुझे और साजन को देखा था.’’

जय हास पड़ा और फिर सीरीयस होकर पुचछा,’’निशा, एक और आखरी सवाल लेकिन सही सही बताना अगर मुझ पर विश्वास हो तो.’’

निशा कुच्छ नही बोली और हा मे चेहरा हिलाया. जय,’’निशा, क्या किसी ने रेप किया था तुझे ?’’

निशा चौक्कर खड़ी हो गयी और बिल्कुल उसकी आँखे फटी रह गयी, उसका गला सुख गया और बोलती बंद हो गयी. धड़कन तेज़ हो गयी और वो कुच्छ बोल नही पाई और तीर नज़रो से जय को देखने लगी.

जय थोड़ी देर देखकर खड़ा होकर निशा के पास आया और उसे अपने गले लगा लिया और बोला,’’तूने अभी दोस्ती का वास्ता दिया था कि अगर मैं तेरा दोस्त हू तो मसाज करने दूँगा, अब मैं कहता हू कि अगर सचमुच मेरी दोस्त हो तो खोल डालो अपने जीवन के उस पन्नो को जिसे दिल मे दबाए आजतक सिसक रही हो तुम.’’

निशा रो पड़ी और टूट गयी. जय ने थोड़ी देर उसे रोने दिया और फिर निशा धीरे से चेहरा उठाकर जय को देखा और बोली,’’हा जय खुद मेरे अंकल ने मेरे साथ बलात्कार किया था और एकबार नही कई बार किया है. इसीलिए मैं बॉम्बे छ्चोड़कर यहा नागपुर आई हू.’’

जय ने उसके होंठो पर हाथ रखकर चुप कर दिया और बोला,’’बस निशा तेरे दिल मे जो दर्द च्छूपा था वो मैने बाहर निकाल दिया, अब पूरी कथा मत बताना, तेरे ज़ख़्म फिर से हरे हो जाएँगे.’’

लेकिन उतने मे साजन जल्दी से अंदर आ गया और निशा को हड़बड़कर बोला,’’लेकिन निशा तूने मुझे क्यू नही बताया अब तक की तेरे साथ रेप हुवा है. जब वो राक्षस तुझ पर रेप अटेंप्ट कर रहा था और तू बच गयी इसके बाद मैने पुचछा तो तूने बताया था कि ऐसा कुच्छ नही हुवा है तेरे साथ और अभी अभी तू कह रही है कि तेरे साथ कई बार ऐसा हादसा हुवा है. सच क्या है आज मुझे सुन ना है.’’

निशा साजन और नीशी को देखकर चौक पड़ी और घबरा गयी. निशा ने उसे दिलासा दिलाया और बोली,’’निशा, हम तेरे दोस्त है, कब से तेरी और जय की बाते सुन रहे है. मैं जानती थी कि तू किसी और को नही लेकिन जय तेरे से सबकुच्छ जान लेगा. बता दे पूरी बात, बता दे तेरा जी और हल्का हो जाएगा.’’

अब निशा स्वश्थ थी और उसने बताना चालू किया....

‘’बॉम्बे मे निशा और उसकी मा दोनो अपने अंकल के यहा रहते थे. उसके अंकल भी पोलीस वाले थे धीरे धीरे निशा बड़ी होने लगी तो उसका रूप भी बढ़ने लगा. जब निशा 9थ स्ट्ड मे थी और उसकी आगे 14 साल की हुई. एक इंग्लीश स्कूल मे वो पढ़ती थी. एक दिन शाम को उसकी मा और चाची सब्जी लेने बाहर गयी थी. स्कूल से छूट कर वो घर आई और उसने चाचा को घर मे देखा और उसने पुचछा तो बताया कि अभी वे लोग घर वापस आ जाएँगे. निशा पहले से ही स्मार्ट थी और अपने अंकल को अपने पापा की नज़रो से ही देखती थी. उस दिन भी हमेशा की तरह उसके अंकल ने उसे बाहो मे भरकर गाल पे किस किया तो उसे कोई अजीब नही लगा और वो अंकल से छूट कर जल्दी से चेहरा और हाथ पानी से साफ किया और कपड़े चेंज करने अंदर के रूम मे चली गयी.

बॉम्बे मे खाना मिलता है लेकिन रहने के लिए जगह नही मिलती. जहा उसके अंकल का घर था बिल्कुल छ्होटा सा था. दो छ्होटे कमरे और एक रसोईघर के नाम पर छ्होटा सा कोना था. दूसरे रूम मे वो गयी ही थी और जैसे ही स्कर्ट के दो बॅट्न्स खोले ही थे कि उसके अंकल उस रूम मे पहुच गये और रूम अंदर से बंद कर दिया. थोड़ी देर मे ही निशा घबरा गयी और समझ गयी की अंकल क्या चाहते है.

निशा के आँखो से आँसू बहने लगे और धीरे धीरे वो कोने मे बैठ गयी और बोली,’’अंकल प्लीज़ मैं आप के बेटी जैसी हू, मुझ पर दया करो प्लीज़. मैं अभी बहुत छ्होटी हू प्लीज़.’’

अंकल,’’अरे यार इसमे कोई बड़ा या छ्होटा नही होता, देखो मेरा कहा मनोगी तो बहुत खुश रहोगी और तुम्हारी लाइफ बन जाएगी. प्लीज़ जल्दी से जो मैं कहता हू वो करो.’’

इतना कहकर अंकल ने पेंट की चैन खोल दी. बाकी ड्रेस ऐसे ही पहना रखा था. वो जल्दी से आगे पिछे देख रहे थे कि कोई देख ना ले और फिर वो कोने मे आकर निशा के सामने बैठ गये और निशा का चेहरा अपने हाथो मे लेकर उसके होठ चूसने लगे. निशा के मूह से आवाज़ नही निकल रही थी और मूह अंकल के हाथो से जकड़ा हुवा था और उसकी आँखो से ज़ोर से पानी बह रहा था. अब उसके अंकल ने उसे खड़ा किया और अपने हाथो से स्कर्ट के अंदर हाथ डालकर निशा की योनि को सहलाने लगा. निशा दर्द से कसमसाने लगी और मना करने लगी लेकिन अंकल ने अपने होठ फिर से निशा के होंठो पर लगा दिए थे.

निशा च्चटपटाने लगी, लेकिन उसके अंकल ने उसे अचानक दीवारो से सटा दिया और बोले,’’देख निशा नखरा मत कर, जल्दी से करने दे अगर कोई आ गया तो मैं तुझे जिंदा नही छ्चोड़ूँगा.’’

लेकिन निशा से एक भयंकर लात अंकल के दो पैरो के बीच लग गयी. उसने जानबूजकर नही लगाई थी, लेकिन योनि पर दबाव सहन नही हुवा और पैर अपने आप ही खड़े हुवे और लात लग गयी और अंकल दोनो हाथ पैरो के बीच लेकर आआअहह कर के बैठ गये. निशा भागने गयी लेकिन अंकल ने उसे गिरा दिया और कोने मे पड़ी एक च्छुरी लेकर निशा को दिखाई और बोले,’’साली नखरे करती है, अब देख कैसे निकालता हू तेरी गोरी चमड़ी.’’ कहकर च्छुरी गले पे लगा दी.

निशा घबरा गयी और हाथ जोड़कर बैठी रही. अंकल ने एक हाथ से च्छुरी पकड़ी और दूसरे हाथ से स्कर्ट के उपर से ही निशा के छ्होटे छ्होटे स्तन को दबाना चालू किया. फिर उसने एक हाथ से निशा के स्कर्ट को उचा किया और छाती तक ले गये. अब निशा की छाती, नवल और जाँघ, पैर सब खुल्ले थे, बस एक काली पेंटी ही शरीर के नीचे के हिस्से पर टिकी थी. पुरानी ब्रा और पेंटी मे शरीर को जैसे ही निशा हाथो से ढकने गयी, च्छुरी की तेज़ धार गले पर फिर से लगी. थोड़ा सा खून निकला और दर्द से निशा के मूह से चीख निकल गयी. अंकल ने हाथ से मूह दबाया और आँखे खोलकर डरा दिया. निशा को दोनो हाथ उपर कर के सोना पड़ा.

14 साल की बच्ची अब पूरी तरह घबरा गयी और चीख उसके गले मे अटक गयी. अब अंकल ने हाथ ब्रा और पेंटी पर फिराना चालू किया और फिर धीरे धीरे पेंटी घुटनो से नीचे निकल गयी. अभी भी शूज निशा ने उतार दिए थे लेकिन शॉक्स पहन रखे थे. पेंटी हट ते ही, निशा की वीटिश योनि अंकल को हवस से भर गयी. अभी बिल्कुल कुँवारी योनि को देखकर अंकल पागल हो गये और जल्दी से पेंट के अंदर से अपना साधन निकाला और हिलाने लगे. निशा ने देखा तो घबरा गयी लेकिन लाचार नज़रो से वही पड़ी रही. क्यूकी जैसे वो हिलती च्छुरी का दबाव बढ़ जाता था. अब अंकल उसके पैरो के बीच पहुच गये. और अपने पैरो से निशा के दोनो पैरो को वाइड किया और पोज़िशन ले ली.
 
फ़िल्मो मे कई बार निशा रेप सीन देख चुकी थी, लेकिन ये तो खुद उसके साथ बीत रहा था. उसकी आँखो से उसकी मर्ज़ी से बाहर आँसुओ की धारा बह रही थी. सिसकिया गले मे अटकी पड़ी थी. चेहरा तंग हो चुका था, उसे मालूम नही था कि कौन सा दर्द वो उठाने वाली थी.

अंकल ने साधन उसके योनिच्छेद पर टीका दिया और उंगली से योनि को वाइड किया. फिर अंदर घुसाने की ट्राइ करता रहा. दर्द से निशा छट-पटाई. क्यूकी योनि पूरी सुखी हुई थी, अंकल ने पहले पूरी उंगली से ही योनि को टटोलना शुरू किया और निशा के गले से चीख फिर से निकल गयी, क्यूकी एक पोलिसेवाले की उंगली से ही उसका युवॅनपेटल टूट गया और हल्का सा खून बहने लगा.

इस बार अंकल ने च्छुरी की धार को नही सहलाया क्यूकी उसे पता था कि एक कुँवारी लड़की को इतना दर्द तो होता ही है, फिर उसके पास ज़्यादा टाइम भी नही था तो उसने दो उंगली से योनि को वाइड कर के अपना साधन टिकाकार कमर से हल्का प्रेशर दिया और हाथो की मुठ्ठी से साधन को अंदर धकेलना शुरू किया. एक आधा इंच अंदर गया और निशा का मूह खुलकर आआआआअहह गले से चीख निकल गयी और पैर नी उँचे उठकर सिकुड़ने लगे. अंकल ने जैसे देखा कि निशा चीख रही है तो उसने दूसरा हाथ भी उसके मूह पर रखा और ज़ोर से दो चार धक्के दिए. खून का थोड़ा फव्वारा च्छुटा और साधन अंदर चला गया.

अंकल ने अब च्छुरी हटा ली और पूरा निशा पर सो गये और ज़ोर से धक्का देने लगे. साधन निशा की योनि की दीवारो को कुचलता हुवा अंदर बाहर होने लगा. निशा की चीख मूह मे रह गयी क्यूकी अब अंकल ने एक हाथ उसके मूह पर दबाए रखा था और दूसरा हाथ उसकी नाज़ुक चूचियो को मसल रहा था. अंकल आँख मिचे सास तेज़ी से फूलकर धक्के पे धक्के दे रहे थे और हर धक्के पर निशा की चीख अटक रही थी. योनि मे असहनीय वेदना उसे हो रही थी.

क्रमशः..............

 
किस्मत का खेल पार्ट --50

गतान्क से आगे.......

Sajan aur Nishi fir se darwaje ke pas kahde rah gaye aur Jay ne thodi der ke bad puchha,’’Nishi, apane bare me kuchh batao na, tum kaha ki rehnewali ho aur Sajan se kaise mili?’’

Nishi,’’mere pitaji police me the and he is very honest police officer. Ek hadse me uski maut ho gayi aur mai aur meri ma akeli ho gayi. Tab mai sirf char sal ki thi. Fir hamlog bombay uncle ke pas chale gaye aur mai padhane lagi. Lekin jaise jaise umra badhati gayi, sab ki gandi najare mere sharir par padti gayi. Ek bar ek hadse se muje Sajan ne bachaya aur muje aur meri ma ko ashara dilaya. Mai pehle se hi yoga sikhati ayi hu aur vaha bombay me tution bhi deti thi. Lekin Sajan ne kaha ki agar mai chahu to bombay ki jagah yaha Nagpur me abhyas kar sakti hu aur Sajan ne apane pitaji se kehkar mera admission yaha Nagpur me karvaya. Varna hamare pas iatane bhi paise nahi the ki mai age padh saku. Fir Sajan se dosti badhati gayi aur hamare relation aur gehre badhate gaye. Mai use chahne lagi.’’

Jay,’’Kya?''

Nishi (Muskurate huye),''Yes Jay I love Sajan.''

Jay,''Lekin kya Sajan tuje chahta hai ?’’

Nisha,’’Maine kabhi puchha nahi, aur jankar bhi kadvi sachchai sun ne ko milegi. Achcha yehi hai ki mera pyar mere pas rahe aur Sajan ki life uske pas.’’

Jay,’’Lekin fir tera sansar kaise basega ?’’

Nisha,’’Agar Bombay rehti to mere hi relative ya to muje nauchate rehte aur ya to muje bech dalte, is se to achcha hai ki jise mai pyar karti hu use hi mera sharir de du.’’

Jay ne Nisha ka hath massage karne se rok diya aur uthkar khada ho gaya aur Nisha ki ankho me jakkar dekha aur fir apana daya hath Nisha ke sir par rakhkar puchha,’’Ek bat puchhu Nisha ?’’

Nisha,’’Bilkul.’’

Jay,’’Muj pe itana bharosa kyu karti ho ? muj se dar nahi lagta tuje ?’’

Nisha,’’Tum aise hote to usi din muje nauch dalte jis din tune muje aur Sajan ko dekha tha.’’

Jay has pada aur fir serious hokar puchha,’’Nisha, ek aur akhari sawal lekin sahi sahi batana agar muj par vishvas ho to.’’

Nisha kuchh nahi boli aur ha me chehra hilaya. Jay,’’Nisha, kya kisi ne rape kiya tha tuje ?’’

Nisha chaukkar khadi ho gayi aur bilkul uski ankhe fati rah gayi, uska gala sukh gaya aur bolti bandh ho gayi. Dhadkan tez ho gayi aur vo kuchh bol nahi payi aur tir najaro se Jay ko dekhane lagi.

Jay ne thodi der dekhkar khada hokar Nisha ke pas aya aur use apane gale laga liya aur bola,’’Tune abhi dosti ka vasta diya tha ki agar mai tera dost hu to massage karne dunga, ab mai kehta hu ki agar sachmuch meri dost ho to khol dalo apane jeevan ke us panno ko jise dil me dabaye aajtak sisak rahi ho tum.’’

Nisha ro padi aur tut gayi. Jay ne thodi der use rone diya aur fir Nisha dhire se chehra uthakar Jay ko dekha aur boli,’’Ha Jay khud mere uncle ne mere sath balatkar kiya tha aur ekbar nahi kai bar kiya hai. Isiliye mai Bombay chhodkar yaha Nagpur ayi hu.’’

Jay ne uske hotho par hath rakhkar chup kar diya aur bola,’’Bas Nisha tere dil me jo dard chhupa tha vo maine bahar nikal diya, ab puri katha mat batana, tere zakhm fir se hare ho jayenge.’’

Lekin utane me Sajan jaldi se andar aa gaya aur Nisha ko hadbadakar bola,’’Lekin Nisha tune muje kyu nahi bataya ab tak ki tere sath rape huva hai. Jab vo rakshash tuj par rape attempt kar raha tha aur tu bach gayi iske bad maine puchha to tune bataya tha ki aisa kuchh nahi huva hai tere sath aur abhi abhi tu kah rahi hai ki tere sath kai bar aisa hadsa huva hai. Sach kya hai aaj muje sun na hai.’’

Nisha Sajan aur Nishi ko dekhkar chauk padi aur ghabhara gayi. Nisha ne use dilasa dilaya aur boli,’’Nisha, ham tere dost hai, kab se teri aur Jay ki bate sun rahe hai. Mai janti thi ki tu kisi aur ko nahi lekin Jay tere se sabkuchh jan lega. Bata de puri bat, bata de tera ji aur halka ho jayega.’’

 
Ab Nisha svashth thi aur usne batana chalu kiya....

‘’Bombay me Nisha aur uski ma dono apane uncle ke yaha rehte the. Uske uncle bhi police wale the Dhire dhire Nisha badi hone lagi to uska rup bhi badhane laga. Jab Nisha 9th std me thi aur uski age 14 sal ki huyi. Ek english school me vo padhati thi. Ek din sham ko uski ma aur chachi sabji lene bahar gayi thi. School se chhutkar vo ghar ayi aur usne chacha ko ghar me dekha aur usne puchha to bataya ki abhi ve log ghar vapas aa jayenge. Nisha pehle se hi smart thi aur apane uncle ko apane papa ki najaro se hi dekhati thi. Us din bhi hamesha ki tarah uske uncle ne use baho me bharkar gal pe kiss kiya to use koi ajib nahi laga aur vo uncle se chhutkar jaldi se chehra aur hath pani se saf kiya aur kapade change karne andar ke room me chali gayi.

Bombay me khana milta hai lekin rehne ke liye jagah nahi milti. Jaha uske uncle ka ghar tha bilkul chhota sa tha. Do chhote kamre aur ek rasoighar ke nam par chhota sa kona tha. Dusre room me vo gayi hi thi aur jaise hi skirt ke do battons khole hi the ki uske uncle us room me pahuch gaye aur room andar se bandh kar diya. Thodi der me hi Nisha ghabara gayi aur samaj gayi ki uncle kya chahte hai.

Nisha ke ankho se ansu behne lage aur dhire dhire vo kone me baith gayi aur boli,’’Uncle please mai aap ke beti jaisi hu, muj par daya karo please. Mai abhi bahut chhoti hu please.’’

Uncle,’’Are yar isme koi bada ya chhota nahi hota, dekho mera kaha manogi to bahut khush rahogi aur tumhari life ban jayegi. Please jaldi se jo mai kehta hu vo karo.’’

Itana kehkar uncle ne pent ki chain khol di. Baki dress aise hi pehna rakha tha. Vo jaldi se age pichhe dekh rahe the ki koi dekh na le aur fir vo kone me aakar Nisha ke samne knee pe baith gaye aur Nisha ka chehra apane hatho me lekar uske hoth chusne lage. Nisha ke muh se awaz nahi nikal rahi thi aur muh uncle ke hatho se jakada huva tha aur uski ankho se jor se pani bah raha tha. Ab uske uncle ne use khada kiya aur apane hatho se skirt ke andar hath dalkar Nisha ki yoni ko sehlane laga. Nisha dard se kasmasane lagi aur mana karne lagi lekin uncle ne apane hoth fir se Nisha ke hoth par laga diye the.

Nisha chhatpatane lagi, lekin uske uncle ne use achanak diwaro se sata diya aur bole,’’Dekh nisha nakhara mat kar, jaldi se karne de agar koi aa gaya to mai tuje jinda nahi chhodunga.’’

Lekin Nisha se ek bhayankar lat uncle ke do pairo ke bich lag gayi. Usne janbujkar nahi lagai thi, lekin yoni par dabav sahan nahi huva aur pair apane aap hi khade huve aur lat lag gayi aur uncle dono hath pairo ke bich lekar aaaaahhhh kar ke baith gaye. Nisha bhagne gayi lekin Unlce ne use gira diya aur kone me padi ek chhuri lekar Nisha ko dikhai aur bole,’’Sali nakhare karti hai, ab dekh kaise nikalta hu teri gori chamadi.’’ Kekhar chhuri gale pe laga di.

Nisha gabhara gayi aur hath jodkar baithi rahi. Unlce ne ek hath se chhuri pakadi aur dusre hath se skirt ke upar se hi Nisha ke chhote chhote stan ko dabana chalu kiya. Fir usne vahi hath se Nisha ke skirt ko ucha kiya aur chhati tak le gaye. Ab Nisha ki chhati, naval aur jangh, pair sab khulle the, bas ek kali penti hi sharir ke niche ke hisse par tiki thi. Purani bra aur penti me sharir ko jaise hi Nisha hatho se dhakane gayi, chhuri ki tez dhar gale par fir se lagi. Thoda sa khun nikala aur dard se Nisha ke muh se chikh nikal gayi. Uncle ne hath se muh dabaya aur ankhe kholdar dara diya. Nisha ko dono hath upar kar ke sona pada.

14 sal ki bachchi ab puri tarah ghabara gayi aur chikh uske gale me atak gayi. Ab uncle ne hath bra aur penti par firana chalu kiya aur fir dhire dhire penti ghutano se niche nikal gayi. Abhi bhi shoes Nisha ne utar diye the lekin shocks pehan rakhe the. Penti hat te hi, Nisha ki wheatish yoni uncle ko havas se bhar gayi. Abhi bilkul kavari yoni ko dekhkar uncle pagal ho gaye aur jaldi se pent ke andar se apana sadhan nikala aur hilane lage. Nisha ne dekha to ghabara gayi lekin lachar najaro se vahi padi rahi. Kyuki jaise vo hilti chhuri ka dabav badh jata tha. Ab uncle uske pairo ke bich pahuch gaye. Aur apane pairo se Nishi ke dono pairo ko wide kiya aur position le li.

Filmo me kaibar Nisha rape scene dekh chuki thi, lekin ye to khud uske sath bit raha tha. Uski ankho se uski marji se bahar ansuo ki dhara bah rahi thi. Siskiya gale me ataki padi thi. Chehra tang ho chuka tha, use malum nahi tha ki kaun sa dard vo uthane vali thi.

Uncle ne sadhan uske yonichhed par tika diya aur ungali se yoni ko wide kiya. Fir andar ghusane ki try karta raha. Dard se Nisha chhatpatai. Kyuki yoni puri sukhi huyi thi, Unlce ne pehle puri ungali se hi yoni ko tatolana shuru kiya aur Nisha ke gale se chikh fir se nikal gayi, kyuki ek policewale ki ungali se hi uska youvanpatal tut gaya aur halka sa khun behane laga.

Is bar uncle ne chhuri ki dhar ko nahi sahlaya kyuki use pata tha ki ek kavari ladki ko itana dard to hota hi hai, fir uske pas jyada time bhi nahi tha to usne do ungali se yoni ko wide kar ke apana sadhan tikakar kamar se halka pressure diya aur hatho ki muththi se sadhan ko andar dhakelana shuru kiya. Ek adha inch anadar gaya aur Nisha ka muh khulkar aaaaaaaaahhhhhhhhh gale se chikh nikal gayi aur pair knee se uche uthkar sikudane lage. Unlce ne jaise dekha ki Nisha chikh rahi hai to usne dusra hath bhi uske muh par rakha aur jor se do char dhakke diye. Khun ka thoda favvara chhuta aur sadhan andar chala gaya.

Uncle ne ab chhuri hata li aur pura Nisha par so gaye aur jor se dhakka dene lage. Sadhan Nisha ki yoni ki diwaro ko kuchalata huva andar bahar hone laga. Nisha ki chikh muh me rah gayi kyuki ab uncle ne ek hath uske muh par dabaye rakha tha aur dusra hath uski najuk chhatiyo ko masal raha tha. Uncle ankh miche sas tezi se fulakar dhakke pe dhakke de rahe the aur har dhakke par Nisha ki chikh atak rahi thi. Yoni me asahya vedana use ho rahi thi.

kramashah..............

 
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