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किस्मत का खेल पार्ट --61
गतान्क से आगे.......
सब ने हाथ मिलकर शाकहन्ड किया और साजन ने बात आगे बढ़ाई,’’तो हम लोगो को आज की परिस्थिति के राजकीय परिवेश को चेंज करना होगा और आज के युग मे पॉलिटिक्स की धुरा हमे संभालनी होगी. मैं यहा आपलोगो को कुच्छ बताना चाहता हू.’’ इतना कहकर वो तस्वीरे जो जय को दिखाई थी वोही तस्वीरे फिर से सबलोगो को दिखाई. सब ने बारी बारी वो तस्वीरे देखी और फिर नीशी बोली,’’साजन ये तस्वीरे तो आम है, हम सब जानते है कि पॉलिटिक्स मे यही होता आया है और हम कुछ लोग क्या ये बरसो पुरानी सिस्टम को चेंज कर सकते है क्या?’’
साजन,’’पूरी बात सुन लो नीशी फिर फ़ैसला तो आपलोगो के हाथ मे है ही ना.’’ इतना बोलकर साजन ने अपनी बहन और मा की मौत के बारे मे सब को बताया और आगे कहा,’’मैं हाथ मे आए हुए इस मौके को कभी नही छ्चोड़ूँगा और मिस्टर. इंदरराज और साथ मे भाभिजी और ये दोनो भी मुझे मदद करने वाले है.’’
मुनीश ने बीच मे बोला,’’लेकिन साजन ये तो तेरा पर्सनल बदला है, इसमे पॉलिटिक्स चेंज करने की बात कहा से आई.’’
साजन,’’मुनीश तेरे पिताजी कौन थे और क्या करते थे?’’
मुनीश,’’मेरे पिताजी एक ट्रक ड्राइवर थे और आक्सिडेंट मे उसकी मौत हो गयी.’’
साजन,’’बिरजू तेरे पिताजी कौन थे और क्या करते थे?’’
बिरजू,’’मेरे पिताजी आड्वोकेट थे और एक हादसे मे उसकी भी मौत ही हुई थी.’’
साजन,’’निशा, तेरे पिताजी की भी हत्या या आक्सिडेंट हुवा था हुई थी बराबर ?’’
निशा,’’राइट.’’
साजन,’’जय तेरे पिताजी का भी आक्सिडेंट हुवा था बराबर ?’’
जय ने भी हा मे सिर हिलाया.
साजन,’’नीशी तेरे दादाजी की भी मौत हुई थी आक्सिडेंट मे ही सही ना?’’
नीशी ने भी सिर हिलाया.
साजन,’’इन दोनो पति पत्नी ने अपने दो बच्चो की लाश भी आक्सिडेंट मे ही देखी है और ये दोनो साधक भी अपने पेरेंट्स को आक्सिडेंट मे ही गावा बैठे है.’’
नीशी,’’लेकिन तू कहना क्या चाहता है साजन?’’
साजन,’’दूसरी बात सब के रिलेटिव्स का आक्सिडेंट या मौत राजस्थान या जॅयैपर के आसपास ही हुई है ये किसी के ध्यान मे आया?’’
एक बिजली गिर पड़ी सब के उपर. क्यूकी साजन बिल्कुल सही था. पिछछले एक साल से वे लोग इकट्ठे थे, मौज मस्ती किया करते थे लेकिन अपने मा बाप को कभी याद नही किया था और आज अचानक सब को अपने रिलेटिव्स की याद आई तो साजन सही था. ये एक हादसा था या कुदरत की करामात.
उदयं,’’वॉट ईज़ देन प्रूव्ड एवेनफ्टेर ऑल दा इन्सिडेंट्स माइ फ्रेंड? आंड माइ फादर, य्र फादर आंड नीशी’स फादर स्टिल अलाइव साजन, वॉट’स ऑफ देम?’’
साजन,’’यस, दिस ईज़ दा मोस्ट क्वेस्चन अमॉंग `अस माइ फ्रेंड तट वाइ और फादर्स आर स्टिल अलाइव आंड दा रेस्ट आर डेड.’’
नीशी,’’येस देर यू आर.’’
साजन,’’क्यूकी मेरे फादर समाधि ट्रस्ट के इंटरनॅशनल होड़दे पर नियुक्त है, नीशी तेरे पिताजी मेरे डॅड को सपोर्ट कर रहे है और उदयं योर फादर ईज़ गिविंग लॉट्स ऑफ मनी टू समाधि ट्रस्ट माइ फ्रेंड.’’
जय,’’तू कहाँ क्या चाहता है साजन.’’
साजन,’’माइ फ्रेंड्स सोचो, वाइ वी आर गॅदर्ड हियर ओर आइ कॅन से वाइ वी आर कंपेल्ड टू गेथेर हियर फॉर 3 ओर 4 यियर्ज़. हम सब कोई स्पोर्ट्स तो कोई कला मे एक्सपर्ट है, लेकिन पढ़ने मे ज़ीरो है नही तो ठीक से पढ़ाई नही कर पाते है और या तो इतने कम मार्क्स है कि कही अड्मिशन मिलना मुश्किल है और नही तो इतना पैसा नही है कि कोई अच्छा कोर्स कर सकते है. इसीलिए कोई खास मकसद से हमे यहा इकठ्ठा किया गया है और हमारी दोस्ती की गयी है. थॅंक्स टू समाधि ट्रस्ट माइ फ्रेंड्स.’’
मुनीश,’’तू समाधि ट्रस्ट की तारीफ कर रहा है या गाली दे रहा है.’’
साजन,’’तारीफ क्यूकी इसकी मदद के बिना नही तो मैं मेरे बहन के मौत के सौदागरो तक पहुच पाता और ना ही तो आज इस नतीजे पर पहुच पाता की रेवोल्यूशन मस्ट बी स्टार्टेड बाइ अस.’’
सब सोच मे पड़ गये कि साजन क्या बोल रहा है और क्या यही वास्तविकता है, यही कड़वा सच है. क्या इसीलिए सब ज़ुल्म सहे लड़को या लड़कियो को यहा इकठ्ठा किया गया था. क्या ये कोई शड्यंत्रा है या कुदरत की लीला.
आख़िर जय ने खामोशी तोड़ी और बोला,’’साजन तेरे पास क्या कोई ठोस सबूत है कि हमलोगो को इसीलिए यहा इकठ्ठा किया गया है.’’
साजन बोले इसके पहले मिस्टर. इंदरराज बीच मे बोले,’’एक्सक्यूस मी फ्रेंड्स, लेकिन अगर आप सब की इज़ाज़त हो तो मैं कुच्छ कहु बीच मे.’’
सब ने हामी भर दी तो वे आगे बोल उठे,’’मैं और मेरी मेरी पत्नी. दोनो जॅयैपर मे ही रहते है. मैं जॅयैपर के कलेक्टर का पीए था और मेरी वाइफ इंजिनियर. हम दोनो ने राजस्थान के पॉलिटिशियन्स का काम नही किया अंजाम हमारे दो बच्चे की मौत हो गयी. इस हादसे को भी 7 साल गुजर चुके है. लेकिन हमने हिम्मत नही हारी और अपनी ताक़त पे केस लड़े, और मुझे ये भी बताने मे ज़रा भी शर्म नही है कि केस नीशी के पिताजी लड़े थे. लेकिन उसने हमारी मदद करने के बजाय जॅयैपर के पॉलिटिशियन्स के आगे घुटने टेक कर हमे केस हरा दिया और हम मजबूर हो गये कि हम हमारी तरह आगे बढ़े.’’
नीशी,’’ये आप क्या कह रहे है. मेरे डॅड ने ऐसा किया क्या?’’
अपरणबेन ऋषि बोली,’’निशिबहन मैं भी एक बंगलन हू, इसी नाते हमने अपना केस आप के पिताजी को सौपा था. हम आप के पिताजी के खिलाफ नही है क्यूकी आप के पिताजी भी शायद मजबूर है. क्यूकी केस हार जाने के बाद हम लोग उसे मिले थे, झगड़ा भी किया था. लेकिन उसकी आँखो मे आँसू थे और उसके आखरी शब्द यही थे कि मैं मेरी बच्ची की वजह से मजबूर हू. एक बार वो भोगत चुकी है, लेकिन मैं उसे तड़पटा मरते नही देख सकता.’’
नीशी,’’क्या? क्या कहा मेरे डॅड ने की मैं एक बार भोगत चुकी हू और मुझे तड़पटा देख नही सकते. ये क्या कहा मेरे डॅड ने?’’
साजन,’’यस नीशी, जो बात तुमने आज तक मेरे से भी छिपाइ है और अपने डॅड से भी वो बात तेरे डॅड ने उन्ही दिनो जान ली थी जिन दीनो तेरे साथ बलात्कार से भी शब्द कम पड़ जाए ऐसा घिनोना क्रुत्य हुवा था. तूने शायद जय को सबकुच्छ बताना ज़रूरी समझा लेकिन तेरे सब से नज़दीक दोस्त को नही यार.’’
नीशी की आँखो मे आँसू आ गये थे, उसके साथ जो हादसा हुवा इसकी वजह से नही बल्कि उस हादसे को उसके डॅड ने जाना भी था लेकिन उसको बताया नही था कि वो जानते थे. इसका मतलब जितना नीशी ने झेला था उस से कही ज़्यादा उसके डॅड ने झेला था. क्यूकी की एक अव्वल दरज्जे के वकील होने के नाते भी वे कुच्छ नही कर पाए थे. लेकिन नीशी सोच रही थी कि उसके डॅड ने जाना कैसे तो उसने साजन से पुच्छ लिया.
साजन,’’नीशी तेरे डॅड ने कैसे जाना ये बात इस वीडियो कॅसेट मे है तू अकेली ज़रूर देख लेना. लेकिन इतना ज़रूर बता देता हू कि हम सब का दुश्मन एक ही है और वो है रणवीरसींह रावत और उसके पिता राजस्थान के होम मिनिस्टर मिस्टर. खेंगरसिंह रावत.’’
नीशी ने दाँत भिचते बोला,’’वॉट?’’
साजन,’’यस नीशी ये ही दो राक्षस है जिसने आज राजस्थान ही नही बल्कि पूरी इंडिया को कब्ज़े मे कर रखा है.’’
नीशी,’’बस्टेर्दस साजन मैं इस हरामियो को तो कभी माफ़ नही करूँगी.’’
साजन,’’तूने ही तो जय को कहा था ना कि हर एक बात का सही समय आना चाहिए, मौका मिलना चाहिए. आज तुझे मौका मिल रहा है नीशी और ये दोनो साधक राजस्थान का कोना कोना जानते है और कलेक्टर का पीए होने के नाते और एक इंजिनियर होने के नाते मिस्टर. आंड म्र्स. ऋषि हमे फुल सपोर्ट कर रहे है कि रेवोल्यूशन कैसे करना है और हम कैसे उनके पाव ज़मीन पर ला सकते है.’’
जय,’’साजन तू कैसे जानता है कि नीशी ने मुझे कुच्छ कहा भी था.’’
गतान्क से आगे.......
सब ने हाथ मिलकर शाकहन्ड किया और साजन ने बात आगे बढ़ाई,’’तो हम लोगो को आज की परिस्थिति के राजकीय परिवेश को चेंज करना होगा और आज के युग मे पॉलिटिक्स की धुरा हमे संभालनी होगी. मैं यहा आपलोगो को कुच्छ बताना चाहता हू.’’ इतना कहकर वो तस्वीरे जो जय को दिखाई थी वोही तस्वीरे फिर से सबलोगो को दिखाई. सब ने बारी बारी वो तस्वीरे देखी और फिर नीशी बोली,’’साजन ये तस्वीरे तो आम है, हम सब जानते है कि पॉलिटिक्स मे यही होता आया है और हम कुछ लोग क्या ये बरसो पुरानी सिस्टम को चेंज कर सकते है क्या?’’
साजन,’’पूरी बात सुन लो नीशी फिर फ़ैसला तो आपलोगो के हाथ मे है ही ना.’’ इतना बोलकर साजन ने अपनी बहन और मा की मौत के बारे मे सब को बताया और आगे कहा,’’मैं हाथ मे आए हुए इस मौके को कभी नही छ्चोड़ूँगा और मिस्टर. इंदरराज और साथ मे भाभिजी और ये दोनो भी मुझे मदद करने वाले है.’’
मुनीश ने बीच मे बोला,’’लेकिन साजन ये तो तेरा पर्सनल बदला है, इसमे पॉलिटिक्स चेंज करने की बात कहा से आई.’’
साजन,’’मुनीश तेरे पिताजी कौन थे और क्या करते थे?’’
मुनीश,’’मेरे पिताजी एक ट्रक ड्राइवर थे और आक्सिडेंट मे उसकी मौत हो गयी.’’
साजन,’’बिरजू तेरे पिताजी कौन थे और क्या करते थे?’’
बिरजू,’’मेरे पिताजी आड्वोकेट थे और एक हादसे मे उसकी भी मौत ही हुई थी.’’
साजन,’’निशा, तेरे पिताजी की भी हत्या या आक्सिडेंट हुवा था हुई थी बराबर ?’’
निशा,’’राइट.’’
साजन,’’जय तेरे पिताजी का भी आक्सिडेंट हुवा था बराबर ?’’
जय ने भी हा मे सिर हिलाया.
साजन,’’नीशी तेरे दादाजी की भी मौत हुई थी आक्सिडेंट मे ही सही ना?’’
नीशी ने भी सिर हिलाया.
साजन,’’इन दोनो पति पत्नी ने अपने दो बच्चो की लाश भी आक्सिडेंट मे ही देखी है और ये दोनो साधक भी अपने पेरेंट्स को आक्सिडेंट मे ही गावा बैठे है.’’
नीशी,’’लेकिन तू कहना क्या चाहता है साजन?’’
साजन,’’दूसरी बात सब के रिलेटिव्स का आक्सिडेंट या मौत राजस्थान या जॅयैपर के आसपास ही हुई है ये किसी के ध्यान मे आया?’’
एक बिजली गिर पड़ी सब के उपर. क्यूकी साजन बिल्कुल सही था. पिछछले एक साल से वे लोग इकट्ठे थे, मौज मस्ती किया करते थे लेकिन अपने मा बाप को कभी याद नही किया था और आज अचानक सब को अपने रिलेटिव्स की याद आई तो साजन सही था. ये एक हादसा था या कुदरत की करामात.
उदयं,’’वॉट ईज़ देन प्रूव्ड एवेनफ्टेर ऑल दा इन्सिडेंट्स माइ फ्रेंड? आंड माइ फादर, य्र फादर आंड नीशी’स फादर स्टिल अलाइव साजन, वॉट’स ऑफ देम?’’
साजन,’’यस, दिस ईज़ दा मोस्ट क्वेस्चन अमॉंग `अस माइ फ्रेंड तट वाइ और फादर्स आर स्टिल अलाइव आंड दा रेस्ट आर डेड.’’
नीशी,’’येस देर यू आर.’’
साजन,’’क्यूकी मेरे फादर समाधि ट्रस्ट के इंटरनॅशनल होड़दे पर नियुक्त है, नीशी तेरे पिताजी मेरे डॅड को सपोर्ट कर रहे है और उदयं योर फादर ईज़ गिविंग लॉट्स ऑफ मनी टू समाधि ट्रस्ट माइ फ्रेंड.’’
जय,’’तू कहाँ क्या चाहता है साजन.’’
साजन,’’माइ फ्रेंड्स सोचो, वाइ वी आर गॅदर्ड हियर ओर आइ कॅन से वाइ वी आर कंपेल्ड टू गेथेर हियर फॉर 3 ओर 4 यियर्ज़. हम सब कोई स्पोर्ट्स तो कोई कला मे एक्सपर्ट है, लेकिन पढ़ने मे ज़ीरो है नही तो ठीक से पढ़ाई नही कर पाते है और या तो इतने कम मार्क्स है कि कही अड्मिशन मिलना मुश्किल है और नही तो इतना पैसा नही है कि कोई अच्छा कोर्स कर सकते है. इसीलिए कोई खास मकसद से हमे यहा इकठ्ठा किया गया है और हमारी दोस्ती की गयी है. थॅंक्स टू समाधि ट्रस्ट माइ फ्रेंड्स.’’
मुनीश,’’तू समाधि ट्रस्ट की तारीफ कर रहा है या गाली दे रहा है.’’
साजन,’’तारीफ क्यूकी इसकी मदद के बिना नही तो मैं मेरे बहन के मौत के सौदागरो तक पहुच पाता और ना ही तो आज इस नतीजे पर पहुच पाता की रेवोल्यूशन मस्ट बी स्टार्टेड बाइ अस.’’
सब सोच मे पड़ गये कि साजन क्या बोल रहा है और क्या यही वास्तविकता है, यही कड़वा सच है. क्या इसीलिए सब ज़ुल्म सहे लड़को या लड़कियो को यहा इकठ्ठा किया गया था. क्या ये कोई शड्यंत्रा है या कुदरत की लीला.
आख़िर जय ने खामोशी तोड़ी और बोला,’’साजन तेरे पास क्या कोई ठोस सबूत है कि हमलोगो को इसीलिए यहा इकठ्ठा किया गया है.’’
साजन बोले इसके पहले मिस्टर. इंदरराज बीच मे बोले,’’एक्सक्यूस मी फ्रेंड्स, लेकिन अगर आप सब की इज़ाज़त हो तो मैं कुच्छ कहु बीच मे.’’
सब ने हामी भर दी तो वे आगे बोल उठे,’’मैं और मेरी मेरी पत्नी. दोनो जॅयैपर मे ही रहते है. मैं जॅयैपर के कलेक्टर का पीए था और मेरी वाइफ इंजिनियर. हम दोनो ने राजस्थान के पॉलिटिशियन्स का काम नही किया अंजाम हमारे दो बच्चे की मौत हो गयी. इस हादसे को भी 7 साल गुजर चुके है. लेकिन हमने हिम्मत नही हारी और अपनी ताक़त पे केस लड़े, और मुझे ये भी बताने मे ज़रा भी शर्म नही है कि केस नीशी के पिताजी लड़े थे. लेकिन उसने हमारी मदद करने के बजाय जॅयैपर के पॉलिटिशियन्स के आगे घुटने टेक कर हमे केस हरा दिया और हम मजबूर हो गये कि हम हमारी तरह आगे बढ़े.’’
नीशी,’’ये आप क्या कह रहे है. मेरे डॅड ने ऐसा किया क्या?’’
अपरणबेन ऋषि बोली,’’निशिबहन मैं भी एक बंगलन हू, इसी नाते हमने अपना केस आप के पिताजी को सौपा था. हम आप के पिताजी के खिलाफ नही है क्यूकी आप के पिताजी भी शायद मजबूर है. क्यूकी केस हार जाने के बाद हम लोग उसे मिले थे, झगड़ा भी किया था. लेकिन उसकी आँखो मे आँसू थे और उसके आखरी शब्द यही थे कि मैं मेरी बच्ची की वजह से मजबूर हू. एक बार वो भोगत चुकी है, लेकिन मैं उसे तड़पटा मरते नही देख सकता.’’
नीशी,’’क्या? क्या कहा मेरे डॅड ने की मैं एक बार भोगत चुकी हू और मुझे तड़पटा देख नही सकते. ये क्या कहा मेरे डॅड ने?’’
साजन,’’यस नीशी, जो बात तुमने आज तक मेरे से भी छिपाइ है और अपने डॅड से भी वो बात तेरे डॅड ने उन्ही दिनो जान ली थी जिन दीनो तेरे साथ बलात्कार से भी शब्द कम पड़ जाए ऐसा घिनोना क्रुत्य हुवा था. तूने शायद जय को सबकुच्छ बताना ज़रूरी समझा लेकिन तेरे सब से नज़दीक दोस्त को नही यार.’’
नीशी की आँखो मे आँसू आ गये थे, उसके साथ जो हादसा हुवा इसकी वजह से नही बल्कि उस हादसे को उसके डॅड ने जाना भी था लेकिन उसको बताया नही था कि वो जानते थे. इसका मतलब जितना नीशी ने झेला था उस से कही ज़्यादा उसके डॅड ने झेला था. क्यूकी की एक अव्वल दरज्जे के वकील होने के नाते भी वे कुच्छ नही कर पाए थे. लेकिन नीशी सोच रही थी कि उसके डॅड ने जाना कैसे तो उसने साजन से पुच्छ लिया.
साजन,’’नीशी तेरे डॅड ने कैसे जाना ये बात इस वीडियो कॅसेट मे है तू अकेली ज़रूर देख लेना. लेकिन इतना ज़रूर बता देता हू कि हम सब का दुश्मन एक ही है और वो है रणवीरसींह रावत और उसके पिता राजस्थान के होम मिनिस्टर मिस्टर. खेंगरसिंह रावत.’’
नीशी ने दाँत भिचते बोला,’’वॉट?’’
साजन,’’यस नीशी ये ही दो राक्षस है जिसने आज राजस्थान ही नही बल्कि पूरी इंडिया को कब्ज़े मे कर रखा है.’’
नीशी,’’बस्टेर्दस साजन मैं इस हरामियो को तो कभी माफ़ नही करूँगी.’’
साजन,’’तूने ही तो जय को कहा था ना कि हर एक बात का सही समय आना चाहिए, मौका मिलना चाहिए. आज तुझे मौका मिल रहा है नीशी और ये दोनो साधक राजस्थान का कोना कोना जानते है और कलेक्टर का पीए होने के नाते और एक इंजिनियर होने के नाते मिस्टर. आंड म्र्स. ऋषि हमे फुल सपोर्ट कर रहे है कि रेवोल्यूशन कैसे करना है और हम कैसे उनके पाव ज़मीन पर ला सकते है.’’
जय,’’साजन तू कैसे जानता है कि नीशी ने मुझे कुच्छ कहा भी था.’’