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किस्मत का खेल पार्ट --68
गतान्क से आगे.......
जय कुच्छ समझे इसके पहले उदयन और साजन दोनो हस पड़े, जय अंदर जा के साजन के सामने बैठ गया. साजन ने सिगरेट जलाई थी, उदयन ने एकसाथ दो जलाकर एक जय को दिया. जय ने जैसे ही कश खिचा तो साजन देखता ही रह गया और बोला,’’तूने कब चालू की जेके.’’
जय,’’तेरी क्रांति शुरू हुई तभी.’’ फिर बाहर जाती लड़कियो को दूर से देखता हुवा बोला,’’बड़ी बेशरम लड़की है.’’
उदयन,’’अबे बेशरम नही यार मस्त लड़की है ऐसा बोल.’’
साजन,’’वो सब छ्चोड़ ना बोल क्या काम था ?’’
जय,’’तू साले आज दिनभर यहा था, मैं यहा तक आके चला गया, मैं तुझे पागलो की तरह इधर उधर ढूँढ रहा हू और तू मज़े से इश्क़ फर्मा रहा है. सालो तुम कर क्या रहे हो ?’’
साजन,’’आज तो छुट्टी है तो साफ सफाई का काम चल रहा था.’’
जय,’’साफ सफाई? अबे कौन सी सफाई?’’
उदयन,’’हथियार की, छ्चोड़ ना तू नही समझेगा ?’’
जय ने उसकी कलाई मरोडते हुए बोला,’’समझता हू हरम्खोर.’’
साजन,’’लेकिन तू यहा आया क्यू था? कुच्छ काम था क्या ?’’
जय,’’काम था इसीलिए तो आया था.’’
साजन,’’बोल क्या काम था?’’
जय,’’मैं आज गुरुजी के पास गया था.’’
साजन,’’अच्छा.’’
जय,’’मैं आक्च्युयली तुमलोगो के लिए गया था कि ये कार्य ग़लत है और तुमलोगो की जान को ख़तरा है, ये सब बात मैं गुरुजी को करने गया था.’’
साजन,’’लेकिन हम तो पहले बता चुके है गुरुजी को, उसके ही आशीर्वाद के बाद ही हमने ये कार्य शुरू किया है.’’
जय ने एक लंबा काश खिचा और कहा,’’गुरुजी ने सबकुच्छ बताया और वो भी बताया जो तुमलोग नही जानते हो.’’
साजन ने कश खिचते हुए पुचछा,’’क्या नही जानते हम? ऐसा क्या स्वामीजी ने तुझे बताया ?’’
जय,’’मिली के बारे मे.’’
साजन अपनी बैठक पर से खड़ा हो गया और पुचछा,’’मिली ? वो साधिका, कॅल्कटा वाली?’’
जय ने हा मे सिर हिलाया. साजन ने आगे पुचछा,’’क्या बताया मिली के बारे मे? वो कहा है?’’
जय ने आगे बताया,’’मिली मेरी बहन है.’’
साजन उसे देखता ही रह गया. दोनो की नज़रे एक हुई. कोई दूसरी बात बोलने की ज़रूरत नही थी. दो मिनट एकदुसरे के सामने देखते हुए सिगरेट ख़तम की और आगे जय बोला,’’मिली मेरी फूफी की बेटी है, गुरुजी ने पाल पोसकर बड़ा किया है और साधिका है, लेकिन खेंगरसिंह और रणवीरसींह ने स्वामीजी को प्रचारकार्या ना करने की सज़ा दी है और मिली को किडनॅप कर लिया है.’’
साजन ऐसे ही सुनता रहा और थोड़ी देर बाद बोला,’’यूडी मैं शर्त जीत गया ना.’’
जय,’’कौन सी शर्त ?’’
उदयन,’’साजन ने सब से शर्त लगाई थी कि एक दिन तू ज़रूर ये मिशन जाय्न करेगा.’’
जय ने साजन के सामने देखा और फिर धीरे से बोला,’’इसका मतलब आपलोग मुझे पर्मिशन देते हो ये मिशन जाय्न करने की.’’
साजन,’’अबे पर्मिशन काहे की, हमलोगो का घर का मिशन थोड़े ही ना है. ये तो हम सब का जॉइंट रेवोल्यूशन है. अब देख तेरे आने से कैसे दाँत खट्टे करते है सालो के. लेकिन मिली किडनॅप हुई कैसे?’’
जय,’’यार तुम लोगो ने मेरे दिल का बोझ हल्का कर दिया. साजन तू सच कहता था जिसके मन पर गुजरती है ना वोही जानता है. आज जब मेरी बहन की बारी आई तो मुझे पता चला कि क्या बीतती है दिल पर. सॉरी यार मैने तुम लोगो पर भरोसा नही किया और तुझे आक्सेप्ट नही किया.’’
साजन,’’छ्चोड़ ना यार, सॉरी के लिए ये दुनिया बहुत छ्होटी है. अभी तो वैसे भी ये शुरुआत है. मुझे तो तेरे आने से ज़्यादा खुशी हुई है. चलो फिर एक बार एक तो हो गये. दूसरा तू लेट आया, लेकिन पूरा क्रांतिकारी बनके आया है. देख हाथ मे सिगरेट, कुच्छ ही दीनो मे तेरे हाथ मे जाम होगा और बाँहो मे दो दो मस्त माल.’’
जय,’’बस बस बहुत हो गया आज के लिए. सालो लड़की मे क्या देखते हो.’’
उदयन,’’अबे क्या ना देखे वो बता, किसी के गुलाबी होठ तो किसी के गुलाबी गाल, किसी के फुट बॉल तो किसी के टेन्निस बॉल…..?’’
जय,’’बस बस तेरी बकवास तेरे पास ही रख, साजन आगे क्या करना है बोल.’’
साजन,’’पहले आज तक क्या हुवा है वो पता कर ले दो दिन के बाद की मीटिंग मे फिर आगे सोचेंगे क्या करना है. लेकिन हमारा पहला उसूल है कि बाहर कुच्छ भी नही बोलना है. दूसरा अभी दो दिन तक तू इस मिशन से दूर ही है. क्यू है वो भी तुझे दो दिन के बाद ही पता चलेगा. तो मेरी रिक्वेस्ट है कि दो दिन तक अपने मूह पर ताला लगा लेना मेरे दोस्त. बाद मे तू हमारे साथ ही है. ठीक है.’’
जय,’’ठीक है यार. इतना दिन दूर रहा हू, दो दिन और सही. तो फिर अभी मैं चलता हू. दो दिन के बाद ही तुझे मिलूँगा. समझ लो की मैं यहा हू ही नही.’’
साजन,’’ओके थॅंक्स यार.’’
जय तुरंत उठकर रूम से बाहर निकल आया और बाहर जा के गार्डेन मे आराम से बैठ गया. उसका दिल बड़ा शांत था क्यूकी एक बड़ा बोझ उसके दिल से उतर गया था. साजन की स्वीकृति आ जाने के बाद वो बड़ा खुश भी था और शांत भी हो गया था. जय आकाश की और देख के शांत होकर गार्डेन मे करीब एक घंटा अकेला बैठा रहा.
जय ने कह तो दिया था कि वो दो दिन तक इन्वॉल्व नही होगा. फिर भी उसे बेचैनी सताने लगी थी. खास कर के जय अपनी बहन मिली से मिलने को बेताब था. आज इतने सालो के बाद कोई लड़की उसे बहन के रूप मे मिल रही थी. जे को दो दिन ऐसे ही बैठना गवारा नही था. दूसरे दिन ही वो पीरियड मिस कर के आश्रम मे चला गया. फिर से वो स्वामीजी की कुटीर मे बैठ गया. लेकिन उसे बताया गया कि स्वामीजी आज नागपुर मे ही नही थे. लेकिन स्वामीजी की वॉलंटियर्स को सूचना थी कि कोई भी साजन & कंपनी.मे से कोई भी आए तो कुटीर मे उसे बिठाना है. इसीलिए फिर वोही ट्रीटमेंट जय को मिल रही थी.
गतान्क से आगे.......
जय कुच्छ समझे इसके पहले उदयन और साजन दोनो हस पड़े, जय अंदर जा के साजन के सामने बैठ गया. साजन ने सिगरेट जलाई थी, उदयन ने एकसाथ दो जलाकर एक जय को दिया. जय ने जैसे ही कश खिचा तो साजन देखता ही रह गया और बोला,’’तूने कब चालू की जेके.’’
जय,’’तेरी क्रांति शुरू हुई तभी.’’ फिर बाहर जाती लड़कियो को दूर से देखता हुवा बोला,’’बड़ी बेशरम लड़की है.’’
उदयन,’’अबे बेशरम नही यार मस्त लड़की है ऐसा बोल.’’
साजन,’’वो सब छ्चोड़ ना बोल क्या काम था ?’’
जय,’’तू साले आज दिनभर यहा था, मैं यहा तक आके चला गया, मैं तुझे पागलो की तरह इधर उधर ढूँढ रहा हू और तू मज़े से इश्क़ फर्मा रहा है. सालो तुम कर क्या रहे हो ?’’
साजन,’’आज तो छुट्टी है तो साफ सफाई का काम चल रहा था.’’
जय,’’साफ सफाई? अबे कौन सी सफाई?’’
उदयन,’’हथियार की, छ्चोड़ ना तू नही समझेगा ?’’
जय ने उसकी कलाई मरोडते हुए बोला,’’समझता हू हरम्खोर.’’
साजन,’’लेकिन तू यहा आया क्यू था? कुच्छ काम था क्या ?’’
जय,’’काम था इसीलिए तो आया था.’’
साजन,’’बोल क्या काम था?’’
जय,’’मैं आज गुरुजी के पास गया था.’’
साजन,’’अच्छा.’’
जय,’’मैं आक्च्युयली तुमलोगो के लिए गया था कि ये कार्य ग़लत है और तुमलोगो की जान को ख़तरा है, ये सब बात मैं गुरुजी को करने गया था.’’
साजन,’’लेकिन हम तो पहले बता चुके है गुरुजी को, उसके ही आशीर्वाद के बाद ही हमने ये कार्य शुरू किया है.’’
जय ने एक लंबा काश खिचा और कहा,’’गुरुजी ने सबकुच्छ बताया और वो भी बताया जो तुमलोग नही जानते हो.’’
साजन ने कश खिचते हुए पुचछा,’’क्या नही जानते हम? ऐसा क्या स्वामीजी ने तुझे बताया ?’’
जय,’’मिली के बारे मे.’’
साजन अपनी बैठक पर से खड़ा हो गया और पुचछा,’’मिली ? वो साधिका, कॅल्कटा वाली?’’
जय ने हा मे सिर हिलाया. साजन ने आगे पुचछा,’’क्या बताया मिली के बारे मे? वो कहा है?’’
जय ने आगे बताया,’’मिली मेरी बहन है.’’
साजन उसे देखता ही रह गया. दोनो की नज़रे एक हुई. कोई दूसरी बात बोलने की ज़रूरत नही थी. दो मिनट एकदुसरे के सामने देखते हुए सिगरेट ख़तम की और आगे जय बोला,’’मिली मेरी फूफी की बेटी है, गुरुजी ने पाल पोसकर बड़ा किया है और साधिका है, लेकिन खेंगरसिंह और रणवीरसींह ने स्वामीजी को प्रचारकार्या ना करने की सज़ा दी है और मिली को किडनॅप कर लिया है.’’
साजन ऐसे ही सुनता रहा और थोड़ी देर बाद बोला,’’यूडी मैं शर्त जीत गया ना.’’
जय,’’कौन सी शर्त ?’’
उदयन,’’साजन ने सब से शर्त लगाई थी कि एक दिन तू ज़रूर ये मिशन जाय्न करेगा.’’
जय ने साजन के सामने देखा और फिर धीरे से बोला,’’इसका मतलब आपलोग मुझे पर्मिशन देते हो ये मिशन जाय्न करने की.’’
साजन,’’अबे पर्मिशन काहे की, हमलोगो का घर का मिशन थोड़े ही ना है. ये तो हम सब का जॉइंट रेवोल्यूशन है. अब देख तेरे आने से कैसे दाँत खट्टे करते है सालो के. लेकिन मिली किडनॅप हुई कैसे?’’
जय,’’यार तुम लोगो ने मेरे दिल का बोझ हल्का कर दिया. साजन तू सच कहता था जिसके मन पर गुजरती है ना वोही जानता है. आज जब मेरी बहन की बारी आई तो मुझे पता चला कि क्या बीतती है दिल पर. सॉरी यार मैने तुम लोगो पर भरोसा नही किया और तुझे आक्सेप्ट नही किया.’’
साजन,’’छ्चोड़ ना यार, सॉरी के लिए ये दुनिया बहुत छ्होटी है. अभी तो वैसे भी ये शुरुआत है. मुझे तो तेरे आने से ज़्यादा खुशी हुई है. चलो फिर एक बार एक तो हो गये. दूसरा तू लेट आया, लेकिन पूरा क्रांतिकारी बनके आया है. देख हाथ मे सिगरेट, कुच्छ ही दीनो मे तेरे हाथ मे जाम होगा और बाँहो मे दो दो मस्त माल.’’
जय,’’बस बस बहुत हो गया आज के लिए. सालो लड़की मे क्या देखते हो.’’
उदयन,’’अबे क्या ना देखे वो बता, किसी के गुलाबी होठ तो किसी के गुलाबी गाल, किसी के फुट बॉल तो किसी के टेन्निस बॉल…..?’’
जय,’’बस बस तेरी बकवास तेरे पास ही रख, साजन आगे क्या करना है बोल.’’
साजन,’’पहले आज तक क्या हुवा है वो पता कर ले दो दिन के बाद की मीटिंग मे फिर आगे सोचेंगे क्या करना है. लेकिन हमारा पहला उसूल है कि बाहर कुच्छ भी नही बोलना है. दूसरा अभी दो दिन तक तू इस मिशन से दूर ही है. क्यू है वो भी तुझे दो दिन के बाद ही पता चलेगा. तो मेरी रिक्वेस्ट है कि दो दिन तक अपने मूह पर ताला लगा लेना मेरे दोस्त. बाद मे तू हमारे साथ ही है. ठीक है.’’
जय,’’ठीक है यार. इतना दिन दूर रहा हू, दो दिन और सही. तो फिर अभी मैं चलता हू. दो दिन के बाद ही तुझे मिलूँगा. समझ लो की मैं यहा हू ही नही.’’
साजन,’’ओके थॅंक्स यार.’’
जय तुरंत उठकर रूम से बाहर निकल आया और बाहर जा के गार्डेन मे आराम से बैठ गया. उसका दिल बड़ा शांत था क्यूकी एक बड़ा बोझ उसके दिल से उतर गया था. साजन की स्वीकृति आ जाने के बाद वो बड़ा खुश भी था और शांत भी हो गया था. जय आकाश की और देख के शांत होकर गार्डेन मे करीब एक घंटा अकेला बैठा रहा.
जय ने कह तो दिया था कि वो दो दिन तक इन्वॉल्व नही होगा. फिर भी उसे बेचैनी सताने लगी थी. खास कर के जय अपनी बहन मिली से मिलने को बेताब था. आज इतने सालो के बाद कोई लड़की उसे बहन के रूप मे मिल रही थी. जे को दो दिन ऐसे ही बैठना गवारा नही था. दूसरे दिन ही वो पीरियड मिस कर के आश्रम मे चला गया. फिर से वो स्वामीजी की कुटीर मे बैठ गया. लेकिन उसे बताया गया कि स्वामीजी आज नागपुर मे ही नही थे. लेकिन स्वामीजी की वॉलंटियर्स को सूचना थी कि कोई भी साजन & कंपनी.मे से कोई भी आए तो कुटीर मे उसे बिठाना है. इसीलिए फिर वोही ट्रीटमेंट जय को मिल रही थी.