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किस्मत का खेल

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किस्मत का खेल पार्ट --104

गतान्क से आगे.......

जय का दिमाग़ अब अपने ठिकाने पर नही था क्यूकी ये सारी तस्वीरे उसको फसाए जा रही थी और शायद स्वामी ही उसे फसा रहे थे. जय ने फिर भी होश संभालते हुए कहा,’’यस.’’

एक लड़की की तस्वीर दिखाते हुए ZF ने कहा,’’क्या यही है तुम्हारी बहन ?’’

जय ने तवीर देखते ही कहा,’’जी हाँ सर यही है मेरी बहन मिली.’’

ज़फ़्फ़ेर हूसेन ने ज़ोर से हस्कर कहा,’’मी लॉर्ड फिर तो किस्सा साफ है. क्यूकी ये तस्वीर कोई मिली नाम की लड़की की नही बल्कि देल्ही की मशहूर कॉल गर्ल सोनिया की है.’’

सारी अदालत मे सन्नाटा च्छा गया. जय ने चिल्लाकर कहा,’’वकील साहिब मेरी बहन को बेइज्जत मत करिए. वो सोनिया नही मेरी बहन मिली है.’’

ZF ने हस्ते हुए कहा,’’नही मिस्टर. जय ये देखिए.’’ और कुछ और तस्वीरे जय और सोनिया की सारे कोर्ट मे दिखाई गयी जिस मे जय और वो लड़की दोनो बेड मे साथ होते है, इतना ही नही जय का साधन पेंट मे उपर उठा हुवा स्पष्ट दिख रहा था.’’

आक्च्युयली आश्रम मे उस लड़की के साथ जिस हालत मे जय था वो हालत अब मिली के साथ जोड़ दी गयी थी और वोही मिली जिसे यहाँ उसकी तस्वीर मे कोर्ट मे सोनिया कहा जा रहा था.

जय ने कहा,’’ये बिल्कुल झूठ है. मैं अपनी बहन के साथ ऐसा कर ही नही सकता.’’

ज़फ़्फ़ेर हूसेन ने फिर हॅस्कर कहा,’’क्यू झूठ बोल रहे हो साहिबजादे. अभी देखो पूरा खेल तो बाकी है.’’ इतना कहकर कुछ और तस्वीरे कोर्ट मे पेश की गयी जिस मे उस लड़की के अलग अलग व्यक्तियो के साथ व्यभिचार करती हुई दिखाई गयी थी. यानी उस लड़की को कॉल गर्ल साबित कर दिया गया.

ZF,’’मी लॉर्ड इतना ही नही जिस लड़की के साथ डॅन्स फ्लोर पर ये लड़का नाच रहा था वो और कोई नही बल्कि दूसरी कॉल गर्ल है. और हक़ीकत मे मिली नाम की कोई लड़की है ही नही. सिर्फ़ अपनी जान बचाने के लिए और स्वामी को बदनाम करने के लिए ही जय वहाँ गया था और होटेल मे ऐयाशी कर के वापस आ गया था. अगर मिली नाम की कोई लड़की होती तो क्या आज अपने भाई को अदालत के कटघरे मे खड़ा होते हुए इतने दिनो मे यहाँ आती नही उसे बचाने के लिए ?’’

जय ने चिल्लाकर कहा,’’सर उसे शायद अरब देशो मे बेच डाला होगा अब तक.’’

ZF फिर हस पड़े और कहा,’’बर्खूदार अगर ये सच होता तो तुम अपनी बहन को बचाने के लिए देल्ही ठहर जाते किसी दूसरी लड़की के लिए जयपुर नही आते.’’

जय ने दलील की,’’एक मिनिट जड्ज साहिब अगर ये लड़की मिली नही है और कोई सोनिया है तो इसकी शकल मेरी बुआ सुनंदा से क्यू मिलती है ?’’

ZF,’’दिखाओ तुम्हारी बुआ की तस्वीर.’’

और तय हुवा कि अगली तारीख मे राजेश्वरिदेवी सुनंदा की तस्वीर लेकर अदालत मे आएगी. राजेश्वरिदेवी को फोन पर सूचना दे दी गयी. और अदालत ने अगली तारीख दी.

लेकिन यही तो धोखा था जय के साथ. क्यूकी मिली को बाहर की दुनिया सोनिया के नाम से जानती थी. और असली सोनिया कौन थी ? यस वही लड़की जो डॅन्स फ्लोर पर जय के साथ थी और नंगी हालत मे भी जय से लिपट गयी थी. ये तो जय को भी बाद मे पोलीस इनस्पेक्टर राठौर से पता चल गया. लेकिन कोर्ट मे तो साबित हो चुका था कि जय कॉल गर्ल का शौकीन था.
 


अब तो एक ही बात शायद जय को बचा सकती थी कि उसकी बुआ की तस्वीर क्यू उस मिली उर्फ़े सोनिया से मिलती है ? हाला कि जय की सिक्स सेन्स कह रही थी कि ज़रूर वे लोग जो उनके पिछे पड़े है वो ये भी उल्टा सुलटा कुछ ना कुछ ऐसा साबित कर देंगे जो उसके खिलाफ हो.

लेकिन जय के दिमाग़ पर एक सवाल हमेशा के लिए बैठ गया कि अगर मिली को सोनिया बनाया गया था तो फिर वो दूसरी लड़की जो असल मे सोनिया है वो है कौन ?????

वर्तमान मे..............................................

.......................................................................

इधर जय ने चाय पी और सिगरेट जलाकर खामोशी के साथ बस की राह देखता रहा. जय को सबकुछ याद आ रहा था. सुबह से लेकर अभी तक उसने सिर्फ़ एक बार नाश्ता किया था तो भूख भी लगी थी. लेकिन यहाँ आधी रात को कहाँ मिलेगा. जय ने सोचा कि थोड़े दूर तक देखा जाए ता कि कुछ खाने को मिल सके. महुवा को भावनगर डिस्ट्रिक्ट का कश्मीर कहा जाता है. कोकोनट के ट्रीस से भरा ये एक अड्वॅन्स्ड रूरल एरिया कहा जा सकता है. यहाँ से 45 कि.मी. दूर अलंग शिप ब्रेकिंग यार्ड है जो एशिया का 2न्ड लार्जेस्ट शिप ब्रेकिंग यार्ड है. ये जय को याद था. लेकिन अलंग भावनगर और महुवा के बीच आता है. यानी कि नींद मे वो एरिया चला गया था. बस स्टॅंड से बाहर आकर जय ने इधर उधर देखा तो बस कुछ कुछ चाय के छ्होटे छ्होटे स्टॉल दिखाई दिए. इसके अलावा कुछ और नही था. मजबूरन जय को यू ही भूखा रहना पड़ा. इतने मे उसने देखा कि एक छोटी टाटा मॅजिक वहाँ आके खड़ी हुई. उसके ड्राइवर ने जय को देखकर गाड़ी रोकी और पुछा कि कहाँ जाना है ? जय ने बताया कि वो वहाँ से अमरेली जाना चाहता है. वो मॅजिक वाले ने जय को बोला कि स्ट्रीट बस तो सुबह की मिलेगी. अगर चाहो तो हमारे साथ आजाओ. अमरेली तक छ्चोड़ देंगे. जय तुरंत बैठ गया और बैठते ही मॅजिक आगे चल दी.

टाटा मॅजिक एक छोटी सी कार जैसी रिक्शा है. उसमे पहले से ही पर्सेंजर्स थे और अब जय उसमे बैठ गया. जर्नी धीरे धीरे आगे बढ़ने लगी. लेकिन जय अब अपने अतीत मे नही जा सकता था. क्यूकी छोटी सी गाड़ी होने की वजह से ट्रॅवेलिंग मे थोड़ी असुविधा हो रही थी और अंदर बैठे हुए सब रूरल एरिया के लोग थे जो ज़ोर ज़ोर से बातचीत कर रहे थे. इसीलिए जय को आनेवाले चार घंटे तक कुछ भी आराम नही मिलनेवाला था.

क्रमशः……………………….

 


Jay ka dimag ab apane thikane par nahi tha kyuki ye sari tasveere usko fasaye ja rahi thi aur shayad swami hi use fasa rahe the. Jay ne fir bhi hosh sambhalate huye kaha,’’Yes.’’

Ek ladki ki tasveer dikhate huye ZF ne kaha,’’Kya yahi hai tumhari bahan ?’’

Jay ne taveer dekhate hi kaha,’’Ji ha sir yahi hai meri bahan Mili.’’

Zaffer Hussain ne jor se haskar kaha,’’My lord fir to kissa saf hai. Kyuki ye tasveer koi Mili nam ki ladki ki nahi balki Delhi ki mashhoor call girl Soniya ki hai.’’

Sare adalat me sannata chha gaya. Jay ne chillakar kaha,’’Vakil sahib meri bahan ko beijjat mat kariye. Vo Soniya nahi meri bahan Mili hai.’’

ZF ne haste huye kaha,’’Nahi Mr. Jay ye dekhiye.’’ Aur kuch aur tasveere Jay aur Soniya ki sare court me dikhai gayi jis me Jay aur vo ladki dono bed me sath hote hai, itana hi nahi Jay ka sadhan pent me upar utha huva spasht dikh raha tha.’’

Actually ashram me us ladki ke sath jis halat me Jay tha vo halat ab Mili ke sath jod di gayi thi aur vohi Mili jise yahan uski tasveer me court me Soniya kaha ja raha tha.

Jay ne kaha,’’Ye bilkul juth hai. Main apani bahan ke sath aisa kar hi nahi sakta.’’

Zaffer Hussain ne fir haskar kaha,’’Kyu juth bol rahe ho sahibjade. Abhi dekho pura khel to baki hai.’’ Itana kehkar kuch aur tasveere court me pesh ki gayi jis me us ladki ke alag alag vyaktiyo ke sath vyabhichar karti huyi dikhai gayi thi. Yani us ladki ko call girl sabit kar diya gaya.

ZF,’’My lord itana hi nahi jis ladki ke sath dance floor par ye ladka nach raha tha vo aur koi nahi balki dusri call girl hai. Aur hakikat me Mili nam ki koi ladki hai hi nahi. Sirf apani jan bachane ke liye aur Swami ko badnam karne ke liye hi Jay vahan gaya tha aur hotel me aiyashi kar ke vapas aa gaya tha. Agar Mili nam ki koi ladki hoti to kya aaj apane bhai ko adalat ke katere me khada hote huye itane dino me yahan ati nahi use bachane ke liye ?’’

Jay ne chillakar kaha,’’Sir use shayad arab desho me bech dala hoga ab tak.’’

ZF fir has pade aur kaha,’’Barkhudar agar ye sach hota to tum apani bahan ko bachane ke liye Delhi thahar jate kisi dusri ladki ke liye Jaypur nahi aate.’’

Jay ne dalil ki,’’Ek minute judge sahib agar ye ladki Mili nahi hai aur koi Soniya hai to iski shakal meri bua Sunanda se kyu milti hai ?’’

ZF,’’Dikhao tumhari bua ki tasveer.’’

Aur tay huva ki agali tarikh me Rajeshvaridevi Sunanda ki tasveer lekar adalat me ayegi. Rajeshvaridevi ko phone par suhana de di gayi. Aur adalat ne agali tarikh di.

Lekin yahi to dhokha tha Jay ke sath. Kyuki Mili ko bahar ki duniya Soniya ke nam se janti thi. Aur asali Soniya kaun thi ? Yes vahi ladki jo dance floor par Jay ke sath thi aur nangi halat me bhi Jay se lipat gayi thi. Ye to Jay ko bhi bad me police inspector Rathore se pata chal gaya. Lekin court me to sabit ho chuka tha ki Jay call girl ka shaukeen tha.
 


Ab to ek hi bat shayad Jay ko bacha sakti thi ki uski bua ki tasveer kyu us Mili urfe Soniya se milti hai ? Hala ki Jay ki sixth sense kah rahi thi ki jarur ve log jo unke pichhe pade hai vo ye bhi ulta sulta kuch na kuch aisa sabit kar denge jo uske khilaf ho.

Lekin Jay ke dimag par ek sawal hamesha ke liye baith gaya ki agar Mili ko Soniya banaya gaya tha to fir vo dusri ladki jo asal me Soniya hai vo hai kaun ?????

Idhar Jay ne chay pi aur cigarette jalakar khamoshi ke sath bus ki rah dekhata raha. Jay ko sabkuch yad aa raha tha. Subah se lekar abhi tak usne sirf ek bar nashta kiya tha to bhukh bhi lagi thi. Lekin yahan adhi rat ko kaha milega. Jay ne socha ki thode dur tak dekha jaye ta ki kuch khane ko mil sake. Mahuva ko Bhavnagar District ka Kashmir kaha jata hai. Coconut ke trees se bhara ye ek advanced rural area kaha ja sakta hai. Yahan se 45 k.m. dur Alang Ship Breaking yard hai jo ashia ka 2nd largest ship breaking yard hai. Ye Jay ko yad tha. Lekin Alang Bhavnagar aur Mahuva ke bich aata hai. Yani ki nind me vo area chala gaya tha. Bus stand se bahar aakar Jay ne idhar udhar dekha to bas kuch kuch chay ke chhote chhote stall dikhai diye. Iske alava kuch aur nahi tha. Majburan Jay ko yu hi bhukha rahna pada. Itane me usne dekha ki ek choti tata magic vahan aake khadi rahi. uske driver ne Jay ko dekhkar gadi roki aur puchha ki kaha jana hai ? Jay ne bataya ki vo vahan se Amreli jana chahta hai. Vo magic wale ne Jay ko bola ki ST Bus to subah ki milegi. Agar chaho to hamare sath aajaao. Amreli tak chhod denge. Jay turant baith gaya aur baithate hi magic aage chal di.

Tata magic ek choti si car jaisi rickshaw hai. Usme pahle se hi pessengers the aur ab jay usme baith gaya. Journey dhire dhire aage badhane lagi. Lekin Jay ab apane atit me nahi ja sakta tha. Kyuki choti si gadi hone ki vajah se travelling me thodi asuvidha ho rahi thi aur andar baithe huye sab rural area ke log the jo jor jor se batchit kar rahe the. Isiliye Jay ko anewale char ghante tak kuch bhi aram nahi milnewala tha.

kramashah……………………….

 
किस्मत का खेल पार्ट --105



गतान्क से आगे.......

लेकिन आनेवाले चार घंटो मे उसका पिछा करनेवाली लड़किया भी थकने वाली थी. आयूडैकर को जैसे ही जूनगरह हाइवे पर मुड़ते हुए ग्रीष्मा ने देखा तो वो एक क्षण तो भूल गयी कि वो एक CBई की एजेंट है और एक मकसद के लिए जय के पास उसे जाना है. ग्रीष्मा के दिलो दिमाग़ पर फिर से जय के प्यार का जादू सवार हो उठा. उसे अपने बॉस के शब्द याद नही आ रहे थे और फिर से प्यार मे गिरफ्तार होकर उसके दिमाग़ मे ये आया कि उसके पहले किसी और कोई जय के पास नही पहुचना चाहिए. ग्रीष्मा के दिमाग़ पर दिल ने कब्जा जमा लिया और उसकी कार भी आयूडैकर के पिच्छ मूडी और उसका पिछा करने लगी.

जो रास्ता आते समय काटना मुश्किल हो रहा था. वहाँ आयूडैकर वाली लड़की ने बॅक व्यू मिरर मे देख लिया कि वो लड़की उसका पिच्छा कर रही है. वो मन मे हसी और अपने पास की रिवॉल्वोर को छुआ और फिर अपनी कार का एक्सिलेटर दबाया. ग्रीष्मा ने देखा कि अचानक आयूडैकर ने स्पीड पकड़ ली है. उसने भी बहुत ज़ोर किया. लेकिन अल्ट्रा मॉडर्न ऑडी कार के आगे उसकी सेकेंड हॅंड कार कहाँ तक पिछा कर सकती थी. जूनगरह के अंदर अभी परवेश हुवा ही होगा कि ग्रीष्मा की कार मे पंक्चर हो गया.

अब आधी रात गये बिल्कुल सुंसान रास्ते मे कोई कहाँ पंक्चर वाला मिलनेवाला था. मजबूरन कोई और वेहिकल का वेट करना ज़रूरी ही बन गया था ग्रीष्मा के लिए. वो थोड़ी देर कार मे यू ही बैठी रही. क्यूकी वो किसे बुलाए. एक तो अंजान शहर, अकेली औरत. अभी कुछ ही घंटे पहले वो पुच्छ पुच्छ कर इसी रास्ते से तलला पहुचि थी. अब वो कहाँ जाए ? आयूडैकर वाली लड़की भी आगे जाकर बिल्कुल गायब हो चुकी थी. अब

ग्रीष्मा को अहसास हुवा कि उसने क्या कर डाला था. प्यार के चक्कर मे अपना कर्तव्य भूलकर यहाँ तक आ पहुचि थी. अब उसको अपने पर ही गुस्सा आने लगा. ग्रीष्मा मन ही मन सोचती रही थी कि क्यू उसने ऑडी कार का पिच्छा किया ? जय कभी ना कभी तो वहाँ आनेवाला ही था. कुछ ऐसा चक्कर चलाना चाहिए था ता कि खुद उसको वहाँ रहने की जगह मिल जाए और जब तक जय तलला नही पहुचता वो आराम से उसकी राह देखकर वही बैठी रहे. कभी ना कभी जय को वहाँ पहुचना ही था. तब तक अगर धैर्य से वो इंतेज़ार करती तो शायद नतीजा और होता. लेकिन अब आगे क्या ?

 


ग्रीष्मा ने कम से कम डेढ़ घंटे तक जो भी वेहिकल वहाँ से गुज़रा उसको बाहर जाकर रोकना चाहा. लेकिन कहा जाता है की जूनगरह की गिर्नार की तालेटी साधु बावाओ की कर्म भूमि है. स्मशानो की नगरी है. इसीलिए यहाँ भूत प्रेत मे भी विश्वास करनेवाले ज़्यादा मिलते है. जैसे ही ग्रीष्मा लिफ्ट के लिए खड़ी रहती, वो वेहिकल अचानक स्पीड बढ़ाकर वहाँ से आगे चला जा रहा था. ग्रीष्मा को बड़ा अजीब लगा की अक्सर लोग लड़कियो को देखकर अपनी वेहिकल खड़ी रख देते है और यहाँ तो उल्टा उसे देखकर सब वेहिकल भाग रहे है. आख़िर ठक्कर उसने फ़ैसला किया कि सुबह तक वो ऐसे ही अपनी कार मे बैठी रहेगी.

*********

इधर वो आयूडैकर वाली लड़की ने भी एक खेल खेला. उसने अपनी कार जूनगरह के स्ट्रीट स्टॅंड के सुंसान जगह पर पार्क कर ली और आराम से वेट करने लगी कि आगे क्या होता है ? उसे भी ये हो रहा था कि आख़िर इस जय को कहाँ ढूँढे ? सुबह से लेकर आधी रात होने को आई थी. ऐसे सोचते सोचते उसकी आँख लग गयी और वो अपनी ही कार मे सो गयी.

*********

ऐसे ही सुबह के 7 बज गये. तब तक ग्रीष्मा एक कॅरियर को रोकने मे सफल हो चुकी थी और अपनी कार उसके साथ बाँधकर वो जूनगरह के अंदर प्रवेश कर चुकी थी और वेट कर रही थी कि सामनेवाला पंक्चर वाला कब आए और उसका काम हो. वहाँ आयूडैकर वाली लड़की सुबह 7 बजे उठी और अचानक उसने तुरंत अपनी कार स्टार्ट की और हाइवे की ओर ले ली. उसने सोचा कि अब जल्दी वो कुछ भी कर के जय का पता लगाए और दूसरी लड़की से पहले वो पहुच जाए. वो दूसरे रास्ते से पुच्छ के फिर से जय के पुराने घर पहुचि और वहाँ फिर से इंक्वाइरी की. लेकिन वही जवाब मिला कि उसकी मा यहाँ नही रहती है वो पक्का तलला मे ही रहती है. फिर उसने अजूबाजू वालो से बातचीत कर के ये जान लिया कि कौन कौन से रास्ते से आहमेदबाद से तलला या जूनगरह आया जा सकता था. फिर उसने दिमाग़ चलाया कि जय कौन कौन से रास्ते से आ सकता है. फिर उसने जल्दी से निर्णय लिया और वापस आहमेदबाद की ओर चल दी.

*******

इधर सुबह 6 बजे के करीब जय अमरेली पहुचा और वहाँ से उसे डाइरेक्ट तलला होती हुई बस मिल गयी. वो तुरंत उसमे बैठ गया और उसकी यात्रा और आगे बढ़ी. उधर ग्रीष्मा ने भी पंक्चर हो जाने के बाद पूरा जूनगरह छान मारा. लेकिन कही ऑडी कार नही दिखाई दी. ग्रीष्मा की सिक्स सेन्स कह रही थी कि जय अगर पहेले जाएगा तो तलला ही जाएगा. उसने अपनी सिक्स्त सेन्स पर चलने का सोच लिया. उसने फिर तलला वापस जाने का फ़ैसला किया. और उसने तुरंत अपनी कार फिर वोही रास्ते मे घुमाई. बस इतनी भागदौड़ मे आख़िर धैर्य की जीत होनेवाली थी. दूसरी लड़की के पास इतना समय नही था कि वो वेट कर सके तो उसके भाग्य मे अभी जय का मिलना नही लिखा था. लेकिन ग्रीष्मा को ये सौभाग्य सब से पहले मिलनेवाला था.

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कुछ पल जय की आँखे फटी ही रह गयी, उसकी ज़ुबान लड़खड़ा गयी और गला सूखा हो गया, हाथ पैर काँपने लगे और ज़ोर से चिल्लाया,’’मामा……..’’ जय की साँसे फूल गयी. मामा ने उसको सहारा दिया, लेकिन जय वही सिकुड़कर नीचे ज़मीन पर बैठ गया.

नही उसकी आँखो मे आँसू नही थे. लेकिन जय सोच रहा था कि कुदरत ने उसके किए की सज़ा उसकी मा को कैसे दे दी थी. कुछ देर के लिए जय बिल्कुल खामोश रह गया. मामा और मामी ने कुछ देर उसे यू ही बैठने दिया. लेकिन जय का दिल जैल मे रहकर पत्थर का हो चुका था. इसीलिए उसकी आँखो मे आँसू नही आए. लेकिन अपनी ही जात पर उसे बड़ी नफ़रत पैदा हो गयी थी.

कुछ पल के बाद मामी ने पुकारा,’’जय…’’

जय ने सिर उठाकर अपनी मामी और फिर मामा के सामने देखा. दोनो ने जय की नज़र मे देखा. शून्य हो चुका था जय. मामा ने उसे हाथ पकड़कर उठाया और उसे फिर से बेड पर बिठाया.

क्रमशः……………………….

 


Lekin anewale char ghanto me uska pichha karnewali ladkiya bhi thakane wali thi. Audicar ko jaise hi Junagarh highway par mudate huye Grishma ne dekha to vo ek kshan to bhul gayi ki vo ek CBI ki aagent hai aur ek maksad ke liye Jay ke pas use jana hai. Grishma ke dilo dimag par fir se Jay ke pyar ka jadu savar ho utha. Use apane Boss ke shabd yad nahi aa rahe the aur fir se pyar me giraftar hokar uske dimag me ye aya ki uske pehle kisi aur ko Jay ke pas nahi pahuchana chahiye. Girhsma ke dimag par dil ne kabja jama liya aur uski car bhi audicar ke pichh mudi aur uska pichha karne lagi.

Jo rasta aate samay katana mushkil ho raha tha. Vahan Audicar wali ladki ne back view mirror me dekh liya ki vo ladki uska pichha kar rahi hai. Vo man me hasi aur apane pas ki revolvore ko chhua aur fir apani car ka accilator dabaya. Grishna ne dekha ki achanak audicar ne speed pakad li hai. Usne bhi bahur jor kiya. Lekin altra modern audi car ke aage uski second hand car kaha tak pichha kar sakti thi. Junagarh ke andar abhi paravesh huva hi hoga ki Grishma ki car me puncture ho gaya.

Ab adhi rat gaye bilkul sumsan raste me koi kaha puncture wala milnewala tha. Majburan koi aur vehicle ka wait karna jaruri hi ban gaya tha Grishma ke liye. Vo thodi der car me yu hi baithi rahi. Kyuki vo kise bulaye. Ek to anjan shahar, akeli aurat. Abhi kuch hi ghante pehle vo puchh puchh kar isi raste se Talala pahuchi thi. Ab vo kaha jaye ? Audicarwali ladki bhi aage jakar bilkul gayab ho chuki thi. Ab

Grishma ko ahsas huva ki usne kya kar dala tha. Pyar ke chakkar me apana kartavya bhulkar yahan tak aa pahuchi thi. Ab usko apane par hi gussa ane laga. Grishma man hi man sochati rahi ki kyu usne Audi car ka pichha kiya ? Jay kabhi na kabhi to vahan anewala hi tha. Kuch aisa chakkar chalana chahiye tha ta ki khud usko vahan rahne ki jagah mil jaye aur jab tak Jay Talala nahi pahuchata vo aram se uski rah dekhkar vahi baithi rahe. Kabhi ka kabhi Jay ko vahan pahuchana hi tha. Tab tak agar dhairya se vo intezar karti to shayad natija aur hota. Lekin ab aage kya ?

Grishma ne kam se kam dedh ghante tak job hi vehicle vahan se gujara usko bahar jakar rokana chaha. Lekin kaha jata hai ki Junagarh ki Girnar ki taleti sadhu bavao ki karm bhumi hai. Smashano ki nagari hai. Isiliye yahan bhut prêt me bhi vishvas karnewale jyada milte hai. Jaise hi Grishma lift ke liye khadi rahti, vo vehicle achanak speed badhakar vahan se aage chala ja raha tha. Grishma ko bada ajib laga ki aksar log ladkiyo ko dekhkar apani vehicle khadi rakh dete hai aur yahan to ulta use dekhkar sab vehicle bhag rahe hai. Akhir thakkar usne faisla kiya ki subah tak vo aise hi apani car me baithi rahegi.

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Idhar vo audicar wali ladki ne bhi ek khel khela. Usne apani car Junagarh ke ST stand ke sumsan jagah par park kar li aur aram se wait karne lagi ki aage kya hota hai ? Use bhi ye ho raha tha ki akhir is Jay ko kaha dhundhe ? Subah se lekar adhi rat hone ko ayi thi. Ais sochate sochate uski ankh lag gayi aur vo apani hi car me so gayi.

*********

 


Aise hi subah ke 7 baj gaye. Tab tak Grishma ek carrier ko rukane me safal ho chuki thi aur apani car uske sath bandhkar vo Junagarh ke andar pravesh kar chuki thi aur wait kar rahi thi ki samnewala puncture wala kab aye aur uska kam ho. Vahan Audicar wali ladki subah 7 baje uthi aur achanak usne turant apani car start ki aur highway ki aur le li. Usne socha ki ab jaldi vo kuch bhi kar ke Jay ka pata lagaye aur dusri ladki se pehle vo pahuch jaye. Vo dusre raste se puchh ke fir se Jay ke purane ghar pahuchi aur vahan fir se inquiry ki. Lekin vahi jawab mila ki uski ma yahan nahi rahti hai vo pakka Talala me hi rahti hai. Fir usne ajubaju walo se batchit kar ke ye jan liya ki kaun kaun se raste se Ahmedabad se Talala ya Junagarh aya ja sakta tha. Fir usne dimag chalaya ki Jay kaun kaun se raste se aa sakta hai. Fir usne jaldi se nirnay liya aur vapas Ahmedabad ki aur chal di.

*******

Idhar subah 6 baje ke karib Jay Amreli pahucha aur vahan se use direct Talala hoti huyi bas mil gayi. Vo turant usme baith gaya aur uski yatra aur aage badhi. Udhar Grishma ne bhi puncture ho jane ke bad pura junagarh chhan mara. Lekin kahi audi car nahi dikhai di. Grishma ki sixth sense kah rahi thi ki Jay agar pahele jayega to Talala hi jayega. Usne apani sixth sense par chalne ka soch liya. Usne fir Talala vapas jane ka faisla kiya. Aur usne turant apani car fir vohi raste me ghumayi. Bas itani bhagdaud me akhir dhairya ki jit honewali thi. Audivarwali ladki ke pas itana samay nahi tha ki vo wait kar sake to uske bhagya me abhi Jay ka milna nahi likha tha. Lekin Grishma ko ye saubhagya sab se pehle milnewala tha.

Kuch pal Jay ki ankhe fati hi rah gayi, uski juban ladkhada gayi aur gala sukha ho gaya, Hath pair kapane laage aur jor se chillaya,’’Mama……..’’ Jay ki sanse ful gayi. Mama ne usko sahara diya, lekin Jay vahi sikudkar niche jamin par baith gaya.

Nahi uski ankho me ansu nahi the. Lekin Jay soch raha tha ki kudarat ne uske kiye ki saja uski ma ko jaise de di thi. Kuch der ke liye Jay bilkul khamosh rah gaya. Mama aur mami ne kuch der use yu hi baithane diya. Lekin Jay ka dil jail me rahkar patthar ka ho chuka tha. Isiliye uski ankho me ansu nahi aye. Lekin apani hi jat par use badi nafarat paida ho gayi thi.

Kuch pal ke bad Mami ne pukara,’’Jay…’’

Jay ne sir uthakar apani mami aur fir mama ke samne dekha. Dono ne Jay ki najar me sunkar dekha. Shunya ho chuka tha Jay. Mama ne use hath pakadkar uthaya aur use fir se bed par bithaya.

kramashah……………………….

 
किस्मत का खेल पार्ट --106

गतान्क से आगे.......

10 या 15 मिनिट्स के बाद जय ने आँखे बंद की और अपने चेहरे पर बहुत ज़ोर डाला. मामा और मामी दोनो एक नौजवान को आज अपनी मरी हुई मा की याद मे आँसू पीते हुए देख रहे थे. बड़ी मुश्किल से जय ने मन ही मन खून के आँसू पिए और ये ज़हर पीकर गला साफ करते हुए स्वस्थ होने की कोशिस की. फिर बोलने की कोशिश करने लगा,’’मा….मा… आप ने मुझे बताया क्यू नही?’’

कुछ पल के लिए मामा कुछ नही बोल सके फिर उसने भी अपने सूखे गले को साफ किया और बोले,’’जय हमे कहाँ पता था कि तू कहाँ है ? और वैसे भी तेरी मा की लाश तक हमे नसीब नही हुई.’’

जय ने अचानक सिर उठाकर आँखे फैलाए पुछा,’’क्यू मामा ऐसा क्यू हुवा ?’’

मामा ने कहा,’’बेटे कुछ महीने पहले तेरी मा के लिए एक फोन आया था. वैसे तो वो बोल ही नही सकती थी और सारा दिन यहाँ पूजा पाठ किया करती थी. बोल नही सकती थी इसीलिए कथा कीर्तन सब बंद हो चुके थे. लेकिन उस दिन ना जाने क्या सूझी कि फोन की रिंग बजते ही उसने उठ कर फोन अपने हाथ मे लिया. तेरी मामी रसोईघर मे थी. उसने बाहर आकर देखा कि फोन किसने लिया है तो वो भी सोच मे पड़ गयी कि अक्सर तो वो फोन उठाती ही नही आज क्यू अचानक उसने फोन उठाया होगा ? लेकिन कुछ मिनिट्स के बाद उसने फोन रखा और अंदर के उसके अलग से कमरे से कुछ अपने लिए कपड़े निकाले और इशारे से तेरी मामी को बताया कि हरिद्वार जाना चाहती है.’’

मामा की साँस फूली थी इसीलिए कुछ पल के लिए अटके और फिर बोले,’’तेरी मामी ने पुछा कि अचानक क्यू ? तो वो बोली किसी ने उसको हरिद्वार मे मिलने बुलाया है और कहा है कि अकेले ही आना.’’

फिर मामा रुक गये. जय का धीरज समाप्त हो रहा था इसीलिए उसने पुछा,’’फिर क्या हुवा ?’’

मामा,’’बेटे मैने और तेरी मामी ने उसे बहुत समझाया और कहा कि ऐसे अकेले जाने मे ख़तरा है. एक तो वो बोल नही सकती थी उपर से अकेली स्त्री जात. मैने कहा कि जाना ही है तो मैं तेरे साथ आता हू. तो उसने इशारे से मना किया. हम भी नही माने और हमने उसे नही जाने दिया. दो दिन तो हमने उसको अकेले पड़ने ही नही दिया. लेकिन…..’’

फिर मामा अटके तो जय ने हाथ पकड़कर उसको हड़बड़ा दिया और कहा,’’लेकिन आगे क्या हुवा मामा ?’’

मामा की आँखो मे आँसू आ गये और कहा,’’एक दिन सुबह वो अपने कमरे मे नही थी. रात को हमे यू ही सोता हुवा छ्चोड़कर चली गयी. मैने बहुत कोशिश की लेकिन उसका पता नही लगा तो कुछ दिनो के बाद मैं खुद हरिद्वार चला गया. वहाँ जाकर मैने बहुत पूछताछ कि तो हमारे गुजराती समाज की धर्मशाला वाले ने मेरे कहने पर से बताया कि एक ऐसी स्त्री उसके यहाँ कुछ दिन पहले आई थी. लेकिन बाद मे एक सज्जन बुढ्ढा आदमी उसे गुजराती समाज से अपने साथ ले गया और उसी शाम को गंगा नदी के किनारे के उस तरफ एक स्त्री डूब गयी और सिर्फ़ उसकी लाश मिली. जिसका अंतिम संस्कार वहाँ के मंदिर के पुजारी ने कर दिया था. क्यूकी वह स्त्री का कोई सगा नही मिल पाया था.’’

मामा फिर रुके तो जय चिल्लाया,’’लेकिन मामा वो मेरी मम्मी ही थी ये आप ने कैसे सोच लिया ?’’

मामा,’’जय मैं भी उसका भाई हू. मैने भी उस गुजराती समाज वाले को पुछा था कि क्या सबूत है कि मरनेवाली स्त्री मेरी बहन ही है. तो वो मुझे उस मंदिर के पुजारी के पास ले गया और उस पुजारी ने पोलीस को भी बुला लिया और हरिद्वार की पोलीस ने तेरी मा की कुछ निशानिया मुझे सौपी जिसमे कपड़े थे, हाथो मे वो सीधे सादे दो कंगन पहनती थी और गीता का एक ग्रंथ था जिस पर तेरी मम्मी ने अपना नाम लिखा था. और वो थैला जिसमे ये सब रखकर तेरी मम्मी यहाँ से गयी थी.’’

 
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