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कुछ दिनों बाद –
सम्बन्धित थाने को सूचना मिली कि नगले की पुलिया में एक लाश पड़ी है ।
लाश की खबर ने पुलिस के कान खड़े कर दिये । समय रहते पुलिस हरकत में आयी ।
जब पुलिस दल-बल के साथ उक्त नगले की पुलिया पर पहुंची तो वहां भीड़ का जमावड़ा था ।
पुलिस को देखकर भीड़ काई की तरह फट गयी ।
पुलिस जीप नगले की पुलिया पर स्थिर हुई । इंस्पेक्टर संदीप नाइक जीप से उतरा ।
काला चश्माधारी और हल्की मूंछे रखने का शौकीन लगभग बत्तीस वर्षीय इंस्पेक्टर संदीप नाइक व्यक्तित्व के तौर पर खासा प्रभावित करता था ।
पुलिस को देखकर भीड़ काई की तरह फट गयी थी। ऊपरसड़क से पुलिया कातल लगभग दस फीट की गहराई में पड़ताथा। रोड के एक साइड से प्राकृतिक स्लोब द्वारा नीचे उतरा जासकता था। वो बरसात के पानी के लिए निर्मित की गयीपुलिया थी जो वर्ष के अधिकांश समय सूखी रहती थी। मात्रकुछ दिनों के लिए बरसात में उससे पानी दर गुजर होता था।
वो नाला अभी भी सूखा था। पुलिया में एक गोल ह्युम पाइप का उपयोग कियागया था जिसके माध्यम से पानीइधर-से-उधर होता था।
इंस्पेक्टर नाइक अपने दल के साथ नीचे उतरा। लाश परदृष्टि पड़ते ही नाइक ही नहीं बल्कि हर एक के बदन में झुरझुरीदौड़ गयी।
हत्यारा कोई हैवान ही रहा होगा।
या फिर मृतक का भयानक दुश्मन जिसे मृतक के चेहरे सेसख्त नफरत थी।
क्योंकि चेहरे की जो दुर्दशा की गयी थी, उसे शब्दों मेंबांधना भी असम्भवसरीखा ही था।
चेहरा रक्त और लोथड़ों में परिवर्तित होकर रह गया था।
आंखें कहां हैं? खासा ढूंढने के बाद भी नहीं मिल सकतीं,नाक कहां है? पतानहीं। मुंह? नहीं ढूंढा जा सकता।
चेहरे को कुचला गया था।
किसी भारी चीज से।
गर्दन आधी कटी हुई थी। कदाचित निर्दयता से गर्दन कोरेता गया था।
कुछ शायद कुत्तों ने अपनी प्रवृति का असर दिखाया था।
कपड़े नोचे गये थे जो सम्भवतः कुत्तों ने ही कृत्य कियाथा। इस बात की पुष्टि इस बात से भी मिलती थी कि ह्यूमपाइप पर कुत्तों के पैरों के निशान मौजूद थे।
साथ में हत्यारे के फुट स्टेप्स भी थे।
रक्त की पर्त काली पड़ चुकी थी। रक्त तो लगता था साराही बाहर आ गया था।जिधर स्लोब था, उधर बहकर ह्यूमपाइप से बाहर आकर मिट्टी पर फैल गया था।
रक्त की ऊपरी पर्त सूख चुकी थी जिसे देखकर अन्दाजा लगाया जा सकता था कि लाश लगभग चौबीस घण्टे पुरानीसकती है।
नाइक ने लाश का प्रथम दृष्टया मुआयना किया, तदुपरांतसर्वप्रथम उसने उच्चाधिकारियों को अवगत करना जरूरी समझा ।
सब-इंस्पेक्टर भीड़ से लाश की बाबत प्राथमिक जानकारीजुटाने की गरज से कुछ प्रश्न करने लगा।
यह एक सिंगल वे रोड था जो सुनसान के शब्द सेपरिभाषित किया जा सकता था। इधर-उधर खेत खलिहान पड़ते थे। यह सड़क शहर की तरफ जाती थी।कहा जा सकताहै कि यह सड़क शहर के बाहर निकलकर आसपास के देहातइलाके को जाती थी।
अमूमन इस सड़क पर चहल-पहल दिन में ही रहा करतीथी। रात्रि आठ बजे के बाद तो मानो सड़क नीरवता औरसन्नाटे के हवाले हो जाती थी। चूंकि विगत वर्षों से चोरी औरलूट की घटनाएं कम होते-होते लगभग शून्य ही हो गयी थींलेकिन चन्द वर्ष पूर्व तक इस सड़क पर लूट की घटनाएं आमथीं। लुटेरे इतनेअधीर थे कि उन्हें रात होने तक का सब्र नहींहो पाता था। कई बार वे दिन-दहाड़े अपनी ऊर्जा को खर्च करलिया करते थे।
चुनांचे अब लूटपाट की घटनाएं लगभग शांत हो चुकीथीं...मगर क्या कीजिएलोगों के दिल में पुरानी दहशत इसकदर काबिज थी कि आज भी वहां से रात मेंगुजरने कीपहलवानी कोई मजबूरीवश ही दिखा पाता था।
यही कारण था कि सड़क रात भर सिर्फ सन्नाटों से दोस्तीगांठती थी या फिर कुत्ते और अन्य जानवर उसके हमजोलीहोते थे।
आधा घण्टा पश्चात वहां उच्चाधिकारियों की गाड़ियां पहुँच गयीं।
इसके अलावा फिंगरप्रिंट दल, डॉग स्कवायड दल औरसर्विलांस की टीम भी वहां आ गयी।
एस.एस.पी. अमित कुमार ने लाश को एक नजर देखने केबाद इंस्पेक्टर नाइक से पूछा–“क्या लाश की शिनाख्त होपाई?”
“अभी नहीं सर।”
“क्या कोई मृतक को नहीं जानता?”
“नो सर–लाश का चेहरा इतनी बुरी तरह से कुचला गयाहै कि चेहरे के तौर पर तो पहचानने का प्रश्न ही पैदा नहीं होतालेकिन कद-काठी और कपड़ों से भी किसी ने नहीं पहचाना।”
“क्या इलाके में कोई गुमशुदगी हुई है?”
“कोई रिपोर्ट नहीं है सर।”
“ओके।” अमित कुमार लाश की तरफ घूम गये।
लाश ह्यूम पाइप के लगभग बीचों-बीच पड़ी थी।
वे ह्यूम पाइप के किनारे पर खड़े होकर लाश का निरीक्षणकरने लगे।
नाइक से मंत्रणा करते हुए बोले–“चेहरा तो किसी भारीचीज से कुचला गयाहै–।”
“और वो भारी चीज यहां आस-पास नहीं मिली है।” नाइकफौरन से पेश्तर बोला–“कोई पत्थर या ईंट या कोई चीज ऐसीनहीं मिली है कि जिससे चेहरे को कुचला गया हो–यानि उसभारी चीज को हत्यारा अपने साथ ले गया है–।”
“इस तरह चेहरा कुचलने के क्या कारण हो सकते हैं?” एसएसपी अमित कुमार ने प्रश्न रखा था।
नाइक अपनी योग्यता प्रदर्शित करते बोला–“मोटे तौर परतो यही कहा जा सकता है कि शिनाख्त मिटाने के लिए हीहत्यारे ने यह काम किया है लेकिन इसके पीछे एक दूसरी वजहभी हो सकती है।”
“वो क्या?”
“हत्यारे को मृतक के चेहरे से बेपनाह नफरत हो, जिसे वहकुचल-कुचलकर अपने मन में शांति लाना चाहता हो।”
“इतनी बड़ी नफरत किस बिना पर हो सकती है?”
“इस नफरत का मुख्य कारण हत्यारे की बीवी, बहन मां याबेटी से आशनाई हो सकता है।”
एसएसपी अमित कुमार ने एक झटके से चेहरा मोड़करइंस्पेक्टर संदीप नाइक को देखा। वह वजनदार तर्क ही नहीं देरहा था बल्कि उसका ठहरा हुआ लहजा भी विश्वास से लबरेजथा जो अमित कुमार को आकर्षित कर गया था।
अमित कुमार ने स्वीकृति में गर्दन हिलायी थी।
संदीप नाइक कहीं हद तक गदगद हुआ था क्योंकि उसनेअमित कुमार के चेहरे पर अपने लिए प्रशंसा के भाव पढ़ लियेथे।
अमित कुमार ने आगे फिर प्रश्न रख दिया–“हत्यारे कितनेहो सकते हैं?”
नाइक तुरंत ही बोला–“जहां तक मैंने फुटस्टेप्स को पढ़ाहै, मुझे हत्यारा एक हीलग रहा है, बाकी अब एक्सपर्ट टीमआ गयी है, वो अपना जजमेंट देगी–।”
“क्या हत्या कहीं और करके यहां लाश डाली गयी है?”
“नो सर, हत्या यहीं की गयी है, क्योंकि ब्लड के निशानयहां के अलावा कहीं नहीं हैं।”
“तो यह काम कोई एक व्यक्ति कैसे कर सकता है?”
नाइक कुछ क्षण को चुप रह गया। तदुपरांत बोला–“यहयक्ष प्रश्न है कि अगर हत्यारा एक ही है तो उसने हट्टे-कट्टेमृतक पर काबू कैसे पाया और उससे भी बड़ा प्रश्न यह है किमृतक को हत्यारा यहां तक लाने में सफल कैसे हुआ?”
“मेरा अगला प्रश्न यही था।”
“जरूर हत्यारा मृतक को बहला-फुसलाकर यहां लायाहोगा–शायद दोनों गाढ़े दोस्त रहे होंगे या उनमें किसी प्रकारके अच्छे तअल्लुक होंगे।”
“लेकिन फिर भी–।” अमित कुमार ने टोका–“मृतक आखिरकार क्यों इस सुनसान में और वो भी पुलिया के नीचेहत्यारे के साथ आएगा–नार्मली नहीं आना चाहिए–यह कांडरात में अंजाम दिया गया हो सकता है–।”
“जी सर–चांसेज यही हैं कि इस हत्याकाण्ड को रात केसन्नाटे में अंजाम दिया गया है–रात में यह सड़क एकदमसुनसान रहती है–।”
“तभी प्रश्न पैदा होता है कि मृतक किसी भी बहाने से, किसी भी तरह के फुसलाने से रात में इस सुनसान रोड परपुलिया के नीचे क्यों आएगा?”
नाइक चुप ही रह गया। उसे तर्कपूर्ण कोई जवाब नहींसूझा।
अगले ही क्षण अमित कुमार पुनः बोले–“इसीलिए कयासकहता है कि हत्यारा एक नहीं हो सकता–वे अनेक हैं और मृतक को जबरन यहां लाये हैं और इस हत्याकांड को अंजामदिया है।”
“लेकिन सर ह्यूम पाइप में, आप देखिए, जो फुट स्टेप्स हैं,वो एक ही प्रकार के तले के हैं, दूसरे प्रकार के तले केफुटस्टेप्स नहीं हैं और यह चिह्न ह्यूम पाइप से बाहर आकरऊपर सड़क तक चले हैं, फिर मिटते चले गये और सड़क तकबिल्कुल नदारद हो गये हैं–।”
“यानि ह्यूम पाइप में एक ही शख्स घुसा था और उसी नेगर्दन रेती है, उसी ने चेहरे को कुचला है, उसके बाकी साथीबाहर खड़े रहे हैं जिनका काम पोजीशनदेखना था।”
“हो सकता है सर ऐसा ही हो।”
“ऐसा इसलिए होगा क्योंकि एक आदमी हरगिज भी इसवारदात को अंजाम नहीं दे सकता, वो भी इस स्थान परक्योंकि यह मृतक अपनी मर्जी से या किसी प्रकार के फुसलानेसे नहीं आ सकता –यहां सिर्फ मृतक को लाया जा सकता है,वो भी जबरन–।”
“इट्स ओके सर।”
एक्सपर्ट टीमें अपने काम पर लग चुकी थीं।
डॉग स्क्वायड को लाश सुंघायी गयी थी।
और...।
☐☐☐
डॉग स्क्वायड टीम पूरी तरह सक्रिय थी, कदाचित काम परलग चुकी थी।
डॉग को लाश सुंघायी गयी।
जो व्यक्ति कुत्ते की जंजीर पकड़े था, उसने कुत्ते कोविशिष्ट शैली में निर्देशित किया–“रन–।”
कुत्ता वहां से भागा।
जिधर फुट स्टेप्स गये थे, कुत्ता उधर को सूंघता हुआ तेजीके साथ भागा।
ऊपर सड़क पर चढ़ा।
उसकी जंजीर पकड़े कर्मी उसके साथ-साथ था, व दल केअन्य कर्मी तथा एक एसआई तथा कुछ कांस्टेबल भी साथ-साथदौड़े।
कुत्ता सड़क पर चढ़कर दूसरी साइड में कोई दस मीटरचलकर एक स्थान पर रुक गया और रह-रहकर जमीन सूंघताहुआ इधर-उधर भौंकने लगा।
टीम के सदस्यों ने उस विशेष स्थान पर अपनी निगाहें गड़ादीं।
वो लगभग तीन मीटर का क्षेत्र था जिसको कुत्ता रह-रहकरसूंघते हुए भौंक रहा था।
एक्सपर्ट टीम यहां बैठ गयी और उस स्थान का बारीकी सेनिरीक्षण करने लगी।
यकायक वहां टीम को ब्लड के निशान मिले। जो काफीहल्के निशान थे, बहुत गौर से देखने पर मिट्टी के ऊपर लालिमासी नजर आती थी।
कर्मी संतुष्ट हुए कि यहां ब्लड के चिह्न हैं। एक्सपर्ट टीम तथापुलिस उन निशान के इर्द-गिर्द बारीकी से मुआयना करने लगी।
कुत्ता रह-रहकर वहीं चक्कर लगा रहा था।
जब कुत्ते से अगला परिणाम मिलते देर लगी तो कर्मी नेपुनः कुत्ते को एक स्थान पर रोका, थोड़ा उस पर स्नेह से हाथफेरा और रेडी होते हुए पुनः उसे विशिष्ट शैली में निर्देशितकिया–“रन।”
कुत्ता वहां से पूरी शक्ति लगाकर भागा।
इस बार वह खेतों की तरफ भागा।
टीम के सदस्य और पुलिसकर्मी उसके पीछे-पीछे दौड़े।
करीब सौ मीटर दौड़कर एक झाड़ी के पास कुत्ता स्थिरहुआ।
और उसने एक खाली पानी की बोतल वहां से बरामद करली जो बाहरी साइड से सूख चुके खून से रंगी हुई थी।
कुत्ता मुंह में दबाकर झाड़ी के पास पड़ी उस बोतल कोबाहर ले आया।
टीम की आंखों में चमक पैदा हो गयी।
बोतल टीम ने अपने नियंत्रण में ले ली व उस स्थान काबहुत बारीकी से निरीक्षण होने लगा।
वो झाड़ी और आसपास दूर तक के स्थान को खंगाल दियागया मगर अगले क्षणों में ऐसा कुछ भी नहीं मिला जो उल्लेखनीयहोता या जिसे क्लू के तौर पर उपयोग में लाया जाता।
काफी देर की मेहनत के पश्चात् भी जब वे उन्हें निराशा हीहाथ लगी यानि उस स्थान का घटनास्थल से मात्र इतनासम्बन्ध ही स्थापित हो पाया कि वहां एक खून सनी बोतलपड़ी थी। इसके अलावा वहां घटनास्थल सम्बन्धित कुछ भीमिलकर नहीं दिया तो डॉग स्क्वायड टीम ने पुनः एक बार कुत्तेको वहां से रन किया।
इस बार कुत्ता वापसी की दिशा में भागा।
कदाचित उसी स्थान की जानिब जिधर मिट्टी पर हल्के खूनके निशान मिले थे,मिट्टी के ऊपर लालिमा की शक्ल में।
लगभग सौ मीटर की उक्त दूरी कुत्ते ने चंद क्षण में पूरीकर ली थी। टीमसस्पेंसफुल थी कि कुत्ता अब किधर लेकरजाएगा।
यह तो वापसी की दिशा में भाग रहा था।
जरूर ह्यूम पाइप तक जाकर कुत्ता भ्रमित हो जाना है–कुछ ऐसे ही कयास टीम और पुलिस द्वारा लगाये जा रहे थेमगर ये कयास उस समय गलत साबित हुए जब कुत्ता उननिशान वाले स्थान को क्रॉस करके सड़क के साथ-साथ द्रुत गति से भागा।
शहर की तरफ।
कदाचित कुत्ता शहर की तरफ पूरी शक्ति लगाकर दौड़ रहाथा।
टीम के लोग तो कुत्ते के साथ दौड़ रहे थे लेकिन पुलिसकर्मियों को जबअसहनीय लगा तो उन्होंने एक जीप को सेवामें ले लिया।
अब पुलिस जीप कुत्ते के पीछे-पीछे दौड़ रही थी।
कुत्ता करीब एक किलोमीटर निरंतर दौड़ा। एक किलोमीटरआगे एक बड़ा-सा नाला पड़ता था जो हमेशा शहर के गंदे पानीसे भरा रहता था और उस पानी को दूर एक नदी में उड़ेल देताथा।
उस नाले का ब्रिज जहां से शुरू होता था, ब्रिज के एककोने पर एक स्थान को कुत्ता सूंघने लगा और स्थान को देखतेहुए भौंकने लगा।
फिर उस स्थान को छोड़कर जाता था तो ब्रिज के बराबरसे नाले में उतरने का प्रयत्न करने लगता था। चूंकि नाला पानीसे भरा था और नाला अनवरत बहरहा था, कदाचित नाले कीतरफ ढलान जाता था, कुत्ता थोड़ा नीचे उतरकर ठहर जाता थाऔर पानी को देखते हुए लपलपाकर भौंकने लगता था।
यह उपक्रम मिनट-दो मिनट ही कर पाता था कि पुनःवापस होता था और ब्रिज के उसी स्थान को पुनः सूंघने औरभौंकने लगता था, जहां प्रथमतया रुका था।
एक्सपर्ट टीम के लोग ब्रिज के उस कोने पर बैठ गये औरस्थान को देखने लगे और इसी के साथ उनके चेहरों पर प्रसन्नता की लहर उठी।
टीम का एक सदस्य एक एसआई का ध्यान आकर्षितकरता हुआ बोला–“यह देखो इस स्थान पर मोबाइल को तोड़ागया है और अभी भी मोबाइल के कई अवशेष यहां बाकीहैं–मोबाइल तोड़कर जब उठाया गया है, तो सफाई पूरी तरहसे नहीं की गयी है।”
एसआई की आंखों में चमक पैदा हुई। उसकी आंखों ने भीउन किरचों कोपकड़ लिया था, जो मोबाइल के थे, बहुतछोटी-छोटी किरचें वहां अभी भी पड़ीहुए थीं।
टीम का सदस्य आगे बोला–“यह निःसंदेह मृतक के मोबाइलकी किरचे हैं–हत्यारा हत्या करने के बाद मृतक का मोबाइलऔर हो सकता है बाकी सामान भी अपने साथ ले आया था।उसने मोबाइल को यहां रखकर तोड़ा है, उसके बाद पार्टस् कोउठाकर नाले में फेंक दिया लेकिन मोटे तौर पर ही उसने पार्टस्उठाये, छोटी किरचें यहां पड़ी हैं–।”
“रियली –आप ठीक कहते हैं–।”
टीम मेम्बर आगे बोला–“मर्डर वेपन भी यहीं ठिकानेलगाया हो सकता है क्योंकि मर्डर स्पॉट से यहां तक या सिटीतक इससे अच्छा स्थान नहीं है सामान को ठिकाने लगानेका।”
“यस।”
"कुत्ता नाले में उतरने की कोशिश कर रहा है, यानि पानीके भीतर कुछ है–यहां तलाशी लेने पर मर्डर वेपन व मृतक काअन्य सामान मिल सकता है।”
एस आई स्वीकृति में ऊपर नीचे गर्दन हिला रहा था वनाले की तलाशी का मन बना रहा था।
उधर!
☐☐☐
सम्बन्धित थाने को सूचना मिली कि नगले की पुलिया में एक लाश पड़ी है ।
लाश की खबर ने पुलिस के कान खड़े कर दिये । समय रहते पुलिस हरकत में आयी ।
जब पुलिस दल-बल के साथ उक्त नगले की पुलिया पर पहुंची तो वहां भीड़ का जमावड़ा था ।
पुलिस को देखकर भीड़ काई की तरह फट गयी ।
पुलिस जीप नगले की पुलिया पर स्थिर हुई । इंस्पेक्टर संदीप नाइक जीप से उतरा ।
काला चश्माधारी और हल्की मूंछे रखने का शौकीन लगभग बत्तीस वर्षीय इंस्पेक्टर संदीप नाइक व्यक्तित्व के तौर पर खासा प्रभावित करता था ।
पुलिस को देखकर भीड़ काई की तरह फट गयी थी। ऊपरसड़क से पुलिया कातल लगभग दस फीट की गहराई में पड़ताथा। रोड के एक साइड से प्राकृतिक स्लोब द्वारा नीचे उतरा जासकता था। वो बरसात के पानी के लिए निर्मित की गयीपुलिया थी जो वर्ष के अधिकांश समय सूखी रहती थी। मात्रकुछ दिनों के लिए बरसात में उससे पानी दर गुजर होता था।
वो नाला अभी भी सूखा था। पुलिया में एक गोल ह्युम पाइप का उपयोग कियागया था जिसके माध्यम से पानीइधर-से-उधर होता था।
इंस्पेक्टर नाइक अपने दल के साथ नीचे उतरा। लाश परदृष्टि पड़ते ही नाइक ही नहीं बल्कि हर एक के बदन में झुरझुरीदौड़ गयी।
हत्यारा कोई हैवान ही रहा होगा।
या फिर मृतक का भयानक दुश्मन जिसे मृतक के चेहरे सेसख्त नफरत थी।
क्योंकि चेहरे की जो दुर्दशा की गयी थी, उसे शब्दों मेंबांधना भी असम्भवसरीखा ही था।
चेहरा रक्त और लोथड़ों में परिवर्तित होकर रह गया था।
आंखें कहां हैं? खासा ढूंढने के बाद भी नहीं मिल सकतीं,नाक कहां है? पतानहीं। मुंह? नहीं ढूंढा जा सकता।
चेहरे को कुचला गया था।
किसी भारी चीज से।
गर्दन आधी कटी हुई थी। कदाचित निर्दयता से गर्दन कोरेता गया था।
कुछ शायद कुत्तों ने अपनी प्रवृति का असर दिखाया था।
कपड़े नोचे गये थे जो सम्भवतः कुत्तों ने ही कृत्य कियाथा। इस बात की पुष्टि इस बात से भी मिलती थी कि ह्यूमपाइप पर कुत्तों के पैरों के निशान मौजूद थे।
साथ में हत्यारे के फुट स्टेप्स भी थे।
रक्त की पर्त काली पड़ चुकी थी। रक्त तो लगता था साराही बाहर आ गया था।जिधर स्लोब था, उधर बहकर ह्यूमपाइप से बाहर आकर मिट्टी पर फैल गया था।
रक्त की ऊपरी पर्त सूख चुकी थी जिसे देखकर अन्दाजा लगाया जा सकता था कि लाश लगभग चौबीस घण्टे पुरानीसकती है।
नाइक ने लाश का प्रथम दृष्टया मुआयना किया, तदुपरांतसर्वप्रथम उसने उच्चाधिकारियों को अवगत करना जरूरी समझा ।
सब-इंस्पेक्टर भीड़ से लाश की बाबत प्राथमिक जानकारीजुटाने की गरज से कुछ प्रश्न करने लगा।
यह एक सिंगल वे रोड था जो सुनसान के शब्द सेपरिभाषित किया जा सकता था। इधर-उधर खेत खलिहान पड़ते थे। यह सड़क शहर की तरफ जाती थी।कहा जा सकताहै कि यह सड़क शहर के बाहर निकलकर आसपास के देहातइलाके को जाती थी।
अमूमन इस सड़क पर चहल-पहल दिन में ही रहा करतीथी। रात्रि आठ बजे के बाद तो मानो सड़क नीरवता औरसन्नाटे के हवाले हो जाती थी। चूंकि विगत वर्षों से चोरी औरलूट की घटनाएं कम होते-होते लगभग शून्य ही हो गयी थींलेकिन चन्द वर्ष पूर्व तक इस सड़क पर लूट की घटनाएं आमथीं। लुटेरे इतनेअधीर थे कि उन्हें रात होने तक का सब्र नहींहो पाता था। कई बार वे दिन-दहाड़े अपनी ऊर्जा को खर्च करलिया करते थे।
चुनांचे अब लूटपाट की घटनाएं लगभग शांत हो चुकीथीं...मगर क्या कीजिएलोगों के दिल में पुरानी दहशत इसकदर काबिज थी कि आज भी वहां से रात मेंगुजरने कीपहलवानी कोई मजबूरीवश ही दिखा पाता था।
यही कारण था कि सड़क रात भर सिर्फ सन्नाटों से दोस्तीगांठती थी या फिर कुत्ते और अन्य जानवर उसके हमजोलीहोते थे।
आधा घण्टा पश्चात वहां उच्चाधिकारियों की गाड़ियां पहुँच गयीं।
इसके अलावा फिंगरप्रिंट दल, डॉग स्कवायड दल औरसर्विलांस की टीम भी वहां आ गयी।
एस.एस.पी. अमित कुमार ने लाश को एक नजर देखने केबाद इंस्पेक्टर नाइक से पूछा–“क्या लाश की शिनाख्त होपाई?”
“अभी नहीं सर।”
“क्या कोई मृतक को नहीं जानता?”
“नो सर–लाश का चेहरा इतनी बुरी तरह से कुचला गयाहै कि चेहरे के तौर पर तो पहचानने का प्रश्न ही पैदा नहीं होतालेकिन कद-काठी और कपड़ों से भी किसी ने नहीं पहचाना।”
“क्या इलाके में कोई गुमशुदगी हुई है?”
“कोई रिपोर्ट नहीं है सर।”
“ओके।” अमित कुमार लाश की तरफ घूम गये।
लाश ह्यूम पाइप के लगभग बीचों-बीच पड़ी थी।
वे ह्यूम पाइप के किनारे पर खड़े होकर लाश का निरीक्षणकरने लगे।
नाइक से मंत्रणा करते हुए बोले–“चेहरा तो किसी भारीचीज से कुचला गयाहै–।”
“और वो भारी चीज यहां आस-पास नहीं मिली है।” नाइकफौरन से पेश्तर बोला–“कोई पत्थर या ईंट या कोई चीज ऐसीनहीं मिली है कि जिससे चेहरे को कुचला गया हो–यानि उसभारी चीज को हत्यारा अपने साथ ले गया है–।”
“इस तरह चेहरा कुचलने के क्या कारण हो सकते हैं?” एसएसपी अमित कुमार ने प्रश्न रखा था।
नाइक अपनी योग्यता प्रदर्शित करते बोला–“मोटे तौर परतो यही कहा जा सकता है कि शिनाख्त मिटाने के लिए हीहत्यारे ने यह काम किया है लेकिन इसके पीछे एक दूसरी वजहभी हो सकती है।”
“वो क्या?”
“हत्यारे को मृतक के चेहरे से बेपनाह नफरत हो, जिसे वहकुचल-कुचलकर अपने मन में शांति लाना चाहता हो।”
“इतनी बड़ी नफरत किस बिना पर हो सकती है?”
“इस नफरत का मुख्य कारण हत्यारे की बीवी, बहन मां याबेटी से आशनाई हो सकता है।”
एसएसपी अमित कुमार ने एक झटके से चेहरा मोड़करइंस्पेक्टर संदीप नाइक को देखा। वह वजनदार तर्क ही नहीं देरहा था बल्कि उसका ठहरा हुआ लहजा भी विश्वास से लबरेजथा जो अमित कुमार को आकर्षित कर गया था।
अमित कुमार ने स्वीकृति में गर्दन हिलायी थी।
संदीप नाइक कहीं हद तक गदगद हुआ था क्योंकि उसनेअमित कुमार के चेहरे पर अपने लिए प्रशंसा के भाव पढ़ लियेथे।
अमित कुमार ने आगे फिर प्रश्न रख दिया–“हत्यारे कितनेहो सकते हैं?”
नाइक तुरंत ही बोला–“जहां तक मैंने फुटस्टेप्स को पढ़ाहै, मुझे हत्यारा एक हीलग रहा है, बाकी अब एक्सपर्ट टीमआ गयी है, वो अपना जजमेंट देगी–।”
“क्या हत्या कहीं और करके यहां लाश डाली गयी है?”
“नो सर, हत्या यहीं की गयी है, क्योंकि ब्लड के निशानयहां के अलावा कहीं नहीं हैं।”
“तो यह काम कोई एक व्यक्ति कैसे कर सकता है?”
नाइक कुछ क्षण को चुप रह गया। तदुपरांत बोला–“यहयक्ष प्रश्न है कि अगर हत्यारा एक ही है तो उसने हट्टे-कट्टेमृतक पर काबू कैसे पाया और उससे भी बड़ा प्रश्न यह है किमृतक को हत्यारा यहां तक लाने में सफल कैसे हुआ?”
“मेरा अगला प्रश्न यही था।”
“जरूर हत्यारा मृतक को बहला-फुसलाकर यहां लायाहोगा–शायद दोनों गाढ़े दोस्त रहे होंगे या उनमें किसी प्रकारके अच्छे तअल्लुक होंगे।”
“लेकिन फिर भी–।” अमित कुमार ने टोका–“मृतक आखिरकार क्यों इस सुनसान में और वो भी पुलिया के नीचेहत्यारे के साथ आएगा–नार्मली नहीं आना चाहिए–यह कांडरात में अंजाम दिया गया हो सकता है–।”
“जी सर–चांसेज यही हैं कि इस हत्याकाण्ड को रात केसन्नाटे में अंजाम दिया गया है–रात में यह सड़क एकदमसुनसान रहती है–।”
“तभी प्रश्न पैदा होता है कि मृतक किसी भी बहाने से, किसी भी तरह के फुसलाने से रात में इस सुनसान रोड परपुलिया के नीचे क्यों आएगा?”
नाइक चुप ही रह गया। उसे तर्कपूर्ण कोई जवाब नहींसूझा।
अगले ही क्षण अमित कुमार पुनः बोले–“इसीलिए कयासकहता है कि हत्यारा एक नहीं हो सकता–वे अनेक हैं और मृतक को जबरन यहां लाये हैं और इस हत्याकांड को अंजामदिया है।”
“लेकिन सर ह्यूम पाइप में, आप देखिए, जो फुट स्टेप्स हैं,वो एक ही प्रकार के तले के हैं, दूसरे प्रकार के तले केफुटस्टेप्स नहीं हैं और यह चिह्न ह्यूम पाइप से बाहर आकरऊपर सड़क तक चले हैं, फिर मिटते चले गये और सड़क तकबिल्कुल नदारद हो गये हैं–।”
“यानि ह्यूम पाइप में एक ही शख्स घुसा था और उसी नेगर्दन रेती है, उसी ने चेहरे को कुचला है, उसके बाकी साथीबाहर खड़े रहे हैं जिनका काम पोजीशनदेखना था।”
“हो सकता है सर ऐसा ही हो।”
“ऐसा इसलिए होगा क्योंकि एक आदमी हरगिज भी इसवारदात को अंजाम नहीं दे सकता, वो भी इस स्थान परक्योंकि यह मृतक अपनी मर्जी से या किसी प्रकार के फुसलानेसे नहीं आ सकता –यहां सिर्फ मृतक को लाया जा सकता है,वो भी जबरन–।”
“इट्स ओके सर।”
एक्सपर्ट टीमें अपने काम पर लग चुकी थीं।
डॉग स्क्वायड को लाश सुंघायी गयी थी।
और...।
☐☐☐
डॉग स्क्वायड टीम पूरी तरह सक्रिय थी, कदाचित काम परलग चुकी थी।
डॉग को लाश सुंघायी गयी।
जो व्यक्ति कुत्ते की जंजीर पकड़े था, उसने कुत्ते कोविशिष्ट शैली में निर्देशित किया–“रन–।”
कुत्ता वहां से भागा।
जिधर फुट स्टेप्स गये थे, कुत्ता उधर को सूंघता हुआ तेजीके साथ भागा।
ऊपर सड़क पर चढ़ा।
उसकी जंजीर पकड़े कर्मी उसके साथ-साथ था, व दल केअन्य कर्मी तथा एक एसआई तथा कुछ कांस्टेबल भी साथ-साथदौड़े।
कुत्ता सड़क पर चढ़कर दूसरी साइड में कोई दस मीटरचलकर एक स्थान पर रुक गया और रह-रहकर जमीन सूंघताहुआ इधर-उधर भौंकने लगा।
टीम के सदस्यों ने उस विशेष स्थान पर अपनी निगाहें गड़ादीं।
वो लगभग तीन मीटर का क्षेत्र था जिसको कुत्ता रह-रहकरसूंघते हुए भौंक रहा था।
एक्सपर्ट टीम यहां बैठ गयी और उस स्थान का बारीकी सेनिरीक्षण करने लगी।
यकायक वहां टीम को ब्लड के निशान मिले। जो काफीहल्के निशान थे, बहुत गौर से देखने पर मिट्टी के ऊपर लालिमासी नजर आती थी।
कर्मी संतुष्ट हुए कि यहां ब्लड के चिह्न हैं। एक्सपर्ट टीम तथापुलिस उन निशान के इर्द-गिर्द बारीकी से मुआयना करने लगी।
कुत्ता रह-रहकर वहीं चक्कर लगा रहा था।
जब कुत्ते से अगला परिणाम मिलते देर लगी तो कर्मी नेपुनः कुत्ते को एक स्थान पर रोका, थोड़ा उस पर स्नेह से हाथफेरा और रेडी होते हुए पुनः उसे विशिष्ट शैली में निर्देशितकिया–“रन।”
कुत्ता वहां से पूरी शक्ति लगाकर भागा।
इस बार वह खेतों की तरफ भागा।
टीम के सदस्य और पुलिसकर्मी उसके पीछे-पीछे दौड़े।
करीब सौ मीटर दौड़कर एक झाड़ी के पास कुत्ता स्थिरहुआ।
और उसने एक खाली पानी की बोतल वहां से बरामद करली जो बाहरी साइड से सूख चुके खून से रंगी हुई थी।
कुत्ता मुंह में दबाकर झाड़ी के पास पड़ी उस बोतल कोबाहर ले आया।
टीम की आंखों में चमक पैदा हो गयी।
बोतल टीम ने अपने नियंत्रण में ले ली व उस स्थान काबहुत बारीकी से निरीक्षण होने लगा।
वो झाड़ी और आसपास दूर तक के स्थान को खंगाल दियागया मगर अगले क्षणों में ऐसा कुछ भी नहीं मिला जो उल्लेखनीयहोता या जिसे क्लू के तौर पर उपयोग में लाया जाता।
काफी देर की मेहनत के पश्चात् भी जब वे उन्हें निराशा हीहाथ लगी यानि उस स्थान का घटनास्थल से मात्र इतनासम्बन्ध ही स्थापित हो पाया कि वहां एक खून सनी बोतलपड़ी थी। इसके अलावा वहां घटनास्थल सम्बन्धित कुछ भीमिलकर नहीं दिया तो डॉग स्क्वायड टीम ने पुनः एक बार कुत्तेको वहां से रन किया।
इस बार कुत्ता वापसी की दिशा में भागा।
कदाचित उसी स्थान की जानिब जिधर मिट्टी पर हल्के खूनके निशान मिले थे,मिट्टी के ऊपर लालिमा की शक्ल में।
लगभग सौ मीटर की उक्त दूरी कुत्ते ने चंद क्षण में पूरीकर ली थी। टीमसस्पेंसफुल थी कि कुत्ता अब किधर लेकरजाएगा।
यह तो वापसी की दिशा में भाग रहा था।
जरूर ह्यूम पाइप तक जाकर कुत्ता भ्रमित हो जाना है–कुछ ऐसे ही कयास टीम और पुलिस द्वारा लगाये जा रहे थेमगर ये कयास उस समय गलत साबित हुए जब कुत्ता उननिशान वाले स्थान को क्रॉस करके सड़क के साथ-साथ द्रुत गति से भागा।
शहर की तरफ।
कदाचित कुत्ता शहर की तरफ पूरी शक्ति लगाकर दौड़ रहाथा।
टीम के लोग तो कुत्ते के साथ दौड़ रहे थे लेकिन पुलिसकर्मियों को जबअसहनीय लगा तो उन्होंने एक जीप को सेवामें ले लिया।
अब पुलिस जीप कुत्ते के पीछे-पीछे दौड़ रही थी।
कुत्ता करीब एक किलोमीटर निरंतर दौड़ा। एक किलोमीटरआगे एक बड़ा-सा नाला पड़ता था जो हमेशा शहर के गंदे पानीसे भरा रहता था और उस पानी को दूर एक नदी में उड़ेल देताथा।
उस नाले का ब्रिज जहां से शुरू होता था, ब्रिज के एककोने पर एक स्थान को कुत्ता सूंघने लगा और स्थान को देखतेहुए भौंकने लगा।
फिर उस स्थान को छोड़कर जाता था तो ब्रिज के बराबरसे नाले में उतरने का प्रयत्न करने लगता था। चूंकि नाला पानीसे भरा था और नाला अनवरत बहरहा था, कदाचित नाले कीतरफ ढलान जाता था, कुत्ता थोड़ा नीचे उतरकर ठहर जाता थाऔर पानी को देखते हुए लपलपाकर भौंकने लगता था।
यह उपक्रम मिनट-दो मिनट ही कर पाता था कि पुनःवापस होता था और ब्रिज के उसी स्थान को पुनः सूंघने औरभौंकने लगता था, जहां प्रथमतया रुका था।
एक्सपर्ट टीम के लोग ब्रिज के उस कोने पर बैठ गये औरस्थान को देखने लगे और इसी के साथ उनके चेहरों पर प्रसन्नता की लहर उठी।
टीम का एक सदस्य एक एसआई का ध्यान आकर्षितकरता हुआ बोला–“यह देखो इस स्थान पर मोबाइल को तोड़ागया है और अभी भी मोबाइल के कई अवशेष यहां बाकीहैं–मोबाइल तोड़कर जब उठाया गया है, तो सफाई पूरी तरहसे नहीं की गयी है।”
एसआई की आंखों में चमक पैदा हुई। उसकी आंखों ने भीउन किरचों कोपकड़ लिया था, जो मोबाइल के थे, बहुतछोटी-छोटी किरचें वहां अभी भी पड़ीहुए थीं।
टीम का सदस्य आगे बोला–“यह निःसंदेह मृतक के मोबाइलकी किरचे हैं–हत्यारा हत्या करने के बाद मृतक का मोबाइलऔर हो सकता है बाकी सामान भी अपने साथ ले आया था।उसने मोबाइल को यहां रखकर तोड़ा है, उसके बाद पार्टस् कोउठाकर नाले में फेंक दिया लेकिन मोटे तौर पर ही उसने पार्टस्उठाये, छोटी किरचें यहां पड़ी हैं–।”
“रियली –आप ठीक कहते हैं–।”
टीम मेम्बर आगे बोला–“मर्डर वेपन भी यहीं ठिकानेलगाया हो सकता है क्योंकि मर्डर स्पॉट से यहां तक या सिटीतक इससे अच्छा स्थान नहीं है सामान को ठिकाने लगानेका।”
“यस।”
"कुत्ता नाले में उतरने की कोशिश कर रहा है, यानि पानीके भीतर कुछ है–यहां तलाशी लेने पर मर्डर वेपन व मृतक काअन्य सामान मिल सकता है।”
एस आई स्वीकृति में ऊपर नीचे गर्दन हिला रहा था वनाले की तलाशी का मन बना रहा था।
उधर!
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