नाइक ने बोतल का ढक्कन खोला और पानी हलक मेंउड़ेला।
वापस बोतल टेबल पर रखते हुए ऋषभ से पूछा–“वोबाइक किसकी है?”
“मेरी–अभी दस दिन पहले नई निकाली थी।”
अखिलेश ने प्रश्न किया–“जब लाश राज की ही थी तोकपड़ों को डॉली ने पहचानने से इंकार क्यों किया?”
“यह मैंने पहले ही समझाया था डॉली को कि न तोकपड़े पहचानने हैं और न लाश पहचाननी है, क्योंकि मैं इसमामले में बिल्कुल भी इन्वॉल्वमेंट नहींचाहता–मैं पुलिस कासामना करने का बिल्कुल इच्छुक नहीं था–बस खाली हमेंगुमशुदगी दर्ज करानी थी क्योंकि वो जरूरी थी। जब किसी कापति नदारद है तो एक बार रिपोर्ट होना जरूरी है वरना खुद हीसंदिग्ध बन जाएंगे। इसलिए गुमशुदगी दर्ज कराना जरूरीथा इसलिए हमारा प्लान था कि कपड़े और लाश पहचानने सेइंकार कर दिया जाएगा–पुलिस अगर हत्यारे तक पहुंचती हैतो ठीक और अगर नहीं पहुंचती है तो उससे ज्यादा ठीकक्योंकि रास्ते का कांटा राज तो हट चुका है –बस यही हमारीसफलता थी–।”
“आप हत्यारा किसे बनाना चाहते थे?”
“सन्नी को।”
“तो इसके लिए क्या सबूत प्लांट किये?”
“उसके लिए हमने कोई सबूत प्लांट नहीं किये, बस लाश की शिनाख्त मिटायी –फिर डॉली के हाथ में था कि वहचाहती तो सन्नी को शक के घेरे में ले आती और नहीं चाहतीतो नहीं लाती–लेकिन फिर भी इसलिए लाना पड़ता क्योंकि वरना लोग सवाल करते कि राज क्यों गायब हुआ–लोगउसके पीछे की वजह कुरेदते इसलिए लोगों को बताना यहजरूरी था कि राज के सन्नी से समलैंगिक संबंध थे औरसन्नी डॉली पर कुदृष्टि रखता था जिससे दोनों के बीचमतभेद हो गये थे और दुश्मनी पैदा हो गयी थी। इस तरहपुलिस सन्नी तक पहुंच जाती और चूंकि यह सच था कि दोनोंके समलैंगिक सम्बन्ध थे इसलिए पुलिस सन्नी को ही संदिग्धमानती और उस पर कार्रवाही करती–।”
“क्या तुम्हारे पास उनके समलैंगिक सम्बन्धों के सबूत हैं – ?”
“हां–कुछ फोटोग्राफ्स हैं और वीडियो हैं जो डॉली नेबना रखी थी–लेकिन साब... मेरे एक सवाल का जवाब देदीजिए–आप मुझ तक कैसे पहुंचे, कौन-सा लूज प्वाइंट छूटगया था– ?”
नाइक ठहरकर ऋषभ को देखता रहा।
वो इतनी गहन सोच में डूबा था कि मानो उसने सवालसुना ही न हो।
थोड़े अंतराल के बाद ऋषभ पुनः बोला–“मुझे इस बातकी बहुत जिज्ञासा है सर कि आप हम लोगों तक कैसे पहुंचे–हमनेतो बहुत सावधानी बरती थी फिर भी आप हम तक पहुंचगये?”
“अपराध सिर चढ़कर बोलता है इसीलिए तुम इतनी देर तक बोलते रहे थे, तुम निर्दोष होते तो तुम्हारे पास बोलने केलिए कुछ नहीं होता, तब हम चाहकर भी तुम्हारा कुछ नहींबिगाड़ सकते थे–।”
“मतलब मैं यही तो जानना चाह रहा हूँ कि तुम बैंक मेंकैसे पहुंच गये?”
“डॉली के सिर चढ़े अपराध ने हमें बैंक तक पहुंचाया थाऔर तुम्हारे सिर चढ़े अपराध ने हमें तह तक पहुंचा दिया।”
यह रहस्यपूर्ण स्वर ऋषभ की समझ में नहीं आ पायालेकिन वो चुप रह गया।
नाइक उससे बोला–“ठीक है, तुम बाहर बैठ सकते हो।”
ऋषभ पुनः मोबाइल स्क्रीन खोलता हआ बोला–“एक बारमुझे अपना एकाउंट नम्बर दे देते, मैं ट्रांसफर कर देता–।”
“दे देंगे, अभी बाहर बैठो जाकर।”
“ओके सर।” ऋषभ उठकर खड़ा हो गया।
और अखिलेश चकित दृष्टि से नाइक को देखने लगा। उसेहैरानी इस बात की थी कि जिसे हवालात में डालना चाहिए था,उसे बाहर बैठने को क्यों कहा जा रहा है?
जब ऋषभ बाहर निकल गया तो अखिलेश ने नाइक सेपूछा–“सर इसे आपने फ्री बाहर छोड़ दिया, अगर भाग गयातो क्या होगा?”
“मैं इसके बारे में कोई दूसरा फैसला करना चाहता हूँ ।”
“दूसरा फैसला?”
“पहले सन्नी को लाओ बुलाकर, बाद में चर्चा करते हैं–।”
अखिलेश कुर्सी से उठा और बाहर की तरफ चल दिया।
☐☐☐
अगले क्षणों में सन्नी उस कुर्सी पर बैठा था।
नाइक सन्नी की आंखों में झांकता हुआ बोला–“राज सेक्या सम्बन्ध थे तुम्हारे–?”
“म–म–राज से–साहब उससे तो मेरे कोई सम्बन्ध नहींथे–।”
अपेक्षाकृत नर्म लेकिन कोड़े की फटकार वाले स्वर मेंनाइक बोला–“तुम्हें पता है कि राज की हत्या हो चुकीहै–?”
“ह-ह-हत्या...?”उसका मुंह खुला का खुला रह गया।
“इसलिए बोल रहा हूँ कि जो भी बोलो वो सच बोलो, अगर मुझे गुमराह करने की कोशिश करोगे तो तुम्हें ही हत्यारोपीकर जेल में ठूँस दूंगा जबकि मुझ पता है कि हत्या तुमने नहीं की है–इसलिए सच बोलो, झूठ बोलकर मेरी वहशत मत जगाओ–।”
दुनिया भर का आश्चर्य सन्नी के चेहरे पर जमा हो गयाथा।
उसका मुंह खुला-का-खुला था।
नाइक पुनः उसकी रीढ़ की हड्डी तक में सिहरन पैदा करताहुआ बोला–“राज से तुम्हारे क्या सम्बन्ध थे?”
“स...सर...वो गे था–।”
“तुमसे सम्बन्ध?”
“मेरे साथ वो समलैंगिक था लेकिन यह पन्द्रह दिन पहलेतक की बात है, फिर उसकी सास ने मुझे उस घर से निकलवादिया था–साहब वो मेरा बचपन का दोस्त है और वो बचपनसे ही ऐसा है–उससे स्कूल टाइम से मेरे ऐसे ही सम्बन्धथे–फिर मैं दूर चला गया, अभी महीना भर पहले मेरा इसशहर में ट्रांसफर हुआ–वो मुझसे फेसबुक पर जुड़ा–मैंने तोइसलिए उसे मैसेज किया था कि वो मेरी कुछ मदद करेगा मगरउसने तो मुझ पर प्रेशर बना दिया कि मैं उसी के घर मेंरहूंगा...साहब...यह मेरी गलती थी कि मैं उस घर मेंरहा...करीब बीस दिन उस घर में रहा। वो रोज रात कोबन-संवरता था और मेरे साथ सोता था–फिर पन्द्रह दिन पहलेमैं सेपरेट दूसरी जगह शिफ्ट हो गया–उसके बाद से तो आजतक उसकी मेरी बातचीत भी नहीं हुई है–न उसी ने फोनकिया और न मैंने ही कभी फोन किया।”
“डॉली से तुम्हारे कैसे सम्बन्ध रहे?”
“डॉली से? ठीक-ठाक रहे–नार्मली...पहले वो मुझसेचिढ़ती थी, फिर उसने देखा कि मैं उसे कभी कोई नुकसाननहीं पहुंचाऊंगा तो उसके व्यवहार में चेंजिंग आ गयी–फिरजब में उस फ्लैट से निकल गया तो डॉली ने भी कभी मुझेकॉल नहीं की और मैंने भी कभी उसे कॉल करना जरूरी नहींसमझा।”
नाइक ने होंठ भींचे और उससे बोला–“ठीक है, तुम जासकते हो–उस मोटी औरत को भेज देना।”
सन्नी राम-राम करता हुआ कुर्सी से उठा और बाहर निकलगया।
नाइक अखिलेश से बोला–“इसने कन्फर्मेशन दे दी कि ऋषभ ने जो बोला था, सच बोला था।”
अखिलेश ने हुंकारा भरा ही था कि शन्नो भीतर आ गयी।
नाइक ने कुर्सी पर बैठाया–“बैठिए।’
शन्नो इस तरफ पड़ी कुर्सी पर बैठ गयी।
नाइक ने पूछा –“बैंक में कैसे हंगामा काट रही थीं आप?”
“साहब...यह जो अभी गया है, इसी ने मेरे दामाद राजको गायब किया है–।”
“यह गायब क्यों करेगा?”
“यह साला हरामी है–इसने फुसलाकर राज का माइंडचेंज कर रखा था–यह बहुत कमीना है, बहत ढीठ, बेशर्म है।पहले यह राज के ही घर में रहता था–उसके साथ बेशर्महरकत करता था तो मेरी बेटी ने हड़काकर इसे घर से निकालातो इसने राज को गायब करके बदला लिया है–पता नहींइसने कहां छिपाकर रखा हुआ है–इसे हड़काकर पूछिए, इसपर थर्ड डिग्री यूज कीजिए–राज के बारे में इसी को पताहै–।”
“ठीक है हम पूछ लेंगे–इस केस में तुम और क्या जानतीहो?”
“बस साहब मेरा दामाद मुझे मिल जाये, मेरी टेंशन खत्महो जाये। पता नहीं इसने उसे कहां गायब कर दिया है।”
“तुम्हारी बेटी जिससे प्यार करती थी, तुमने उसके साथउसकी शादी क्यों नहीं की?”
“प्यार करती थी? आपको किसने बताया और इस मामलेमें आप इस दूसरे लडके को क्यों लाये हैं उठाकर?”
“अगर तुमने इसी के साथ डॉली को ब्याह दिया होता तोआज तुम्हें यह दिन नहीं देखना पड़ता–आखिर तुम लोग बच्चोंके मां-बाप होते हो या उनके फ्यूचर के दुश्मन–यह पागलपंतीतुम लोग कब छोड़ोगे?”
शन्नो एकटक नाइक को देखती रह गयी थी।
खुले मुँह से बोली–“क्या यह सारी कहानी यह लड़काऋषभ बताकर गया है?”
“उसके बताने न बताने से तुम्हारे क्रूर फैसलों का पाप नहींधुल जाएगा–आखिर तुम लोग औलाद को क्या समझकर पैदाकरते हो। इसलिए कि एक बच्चे को जन्म दे रहे हो या इसलिएकि एक गुलाम को, प्रजा को जन्म दे रहे हो जिसको तुम्हारेआदेशों का पालन करना परम कर्त्तव्य होगा और जिसके सपनेतुम्हारी तानाशाही की वेदी पर बलि चढेंगे और तुम्हारे अंदरका शैतान अट्टहास करेगा क्योंकि तुम्हारी कुंठा को शांति मिलेगी–?”वह सांस लेकर तुरन्त आगे बोला–“आखिर क्यासमझकर तुमने डॉली की शादी ऋषभ से नहीं होने दी– ?”
“अरे साहब वो अदर कास्ट है, नीच जाति का है।”
“तुम्हें ये इल्म है कि तुम्हारी सोच कितनी नीच है?”
वह बिजली की तरह कड़क रहा था जिसका सामना शन्नोनहीं कर पा रही थी।
“यह थोथे विचार, ये रूढ़ियां पता नहीं कब इन भारतवासियोंके जेहन से आऊट होंगी–तुम्हें पता है कि तुम्हारी इसी नीचसोच की वजह से भारत हजार साल तक गुलाम रहा था–प्रकृतिने तुम्हें कड़ी सजा दी थी तुम्हारी उस हिमाकत की मगर सबकतुमने आज भी नहीं उठाया है–रस्सी जल गयी है मगर बलनहीं गये हैं–क्या होती है नीच जाति? क्या ऋषभ या उसकेजाति वालों के पास मस्तिष्क नहीं है, वो सोचना-समझना नहींजानते–उन्हें कौन-सा कौशल नहींआता है यह बताओ मुझे,आखिर तुमने कैसे जाना कि वो नीच है–?”
शन्नो चुप बैठी रही। बगलें झांकती रही।
नाइक फिर बिजली की तरह कड़का–“हर व्यक्ति का, हरलड़का-लड़की का जन्मसिद्ध अधिकार है कि वो किसी से प्यार करे, फिर उससे शादी करे, उसके साथ आलिंगन हो, उसकेसाथ अपनी दुनिया बसाये और तुम जैसे तानाशाह जो प्रकृति का मजाक उड़ाने के लिए पैदा हुए हो–क्योंकि तुम प्रकृति केउसूलों के खिलाफ मुहिम चलाते हो–तुम्हारा काम है किसी के भविष्य को तहस-नहस करना, उसके सपनों को स्वाहकरना–मालूम है कितना बड़ा पाप है यह? इसी पाप कीभगवान ने तुम्हें यह सजा दी कि तुम्हें हिजड़ा दामाद दिया–जबतुम्हारी बेटी खून के आंसू बहाएगी तो उसकी पीड़ा से तुमचाहकर भी खुद को मुक्त नहीं कर सकतीं–यही सजा है तुम्हारी तिल-तिल मरना और यह तुम्हारी उसी नीच सोच कीवजह से है जिसके तहत तुम किसी इंसान को नीच जाति कासमझने का पाप करती हो।”
शन्नो शर्मसार बैठी थी।
नाइक के दांत किटकिटा रहे थे। वह बहुत नफरत कीदृष्टि से शन्नो को देख रहा था मानो किसी बहुत नीच वस्तुको देख रहा हो।
“चला गया वो अपने तबेले में जहां उसकी तरह तालीबजाने वाले रहते हैं–अब तुम्हारा ऊंची जाति वाला छक्कादामाद कभी लौटकर नहीं आएगा क्योंकि उसे पत्नी की नहींपति की जरूरत थी–वह चला गया अपने पति के पास–।”
वह आगे बोला–“जाओ–अब मैं तुम्हारा प्रायश्चित करूंगा,इसी थाने में डॉली और ऋषभ का विवाह होगा और मैंकराऊंगा और किसी ने नौटंकी दिखाई तो उठाकर ठूंस दूंगाजेल में–जाओ...तुम लोग जाओ–।”
शन्नो झटके के साथ हैरान दृष्टि से नाइक को देखती रहगयी।
और उससे ज्यादा हैरान दृष्टि से अखिलेश नाइक को देखरहा था।
अखिलेश की तो बुद्धि चकरा रही थी।
जैसे कोई तश्तरी हवा में तैर रही हो।
☐☐☐
उन लोगों के बाहर जाने के बाद नाइक ने अपना फोन रेकार्डिंग और फ्लाइट मोड से हटाया ।
मोबाइल में सिगनल आते ही मिस काल मैसेज मिलना शुरू हो गये जिसमें एसएसपी अमित कुमार का भी मैसेज था ।
नाइक ने अमित कुमार को फोन किया ।
उधर से रिसीव हुआ—“हैलो ।”
नाइक बोला—“जय हिंद सर ।”
“जय हिन्द—उस लावारिश लाश के सम्बन्ध में क्या इन्वेस्टीगेशन चल रही है ?”
“अभी तक तो कुछ नहीं हो पा रहा सर—जब तक लाश या कपड़ों की शिनाख्त नहीं होगी तब तक इन्वेस्टीगेशन को कोई दिशा नहीं मिलेगी ।”
अखिलेश की आंखें गोल हो गयी थीं । अब तो उसकी बुद्धि फिरकनी बन चुकी थी । समझ में नहीं आ रहा था कि यह माजरा क्या है मगर अब समझ में आने लगा था । ये शायद पचास हजार रुपये की ताकत थी जो नाइक से अनुचित फैसले करवा रही थी ।
मगर नाइक को जहां तक वो जानता है, पचास हजार की रकम तो प्रभावित नहीं कर सकती, तो फिर इस व्यवहार का क्या कारण है ?
अखिलेश की आंखें गोल हो रही थीं और बुद्धि फिरकनी ।
प्रत्युत्तर में दूसरी तरफ से नाइक के कान में शब्द पड़े—“थाना प्रेमनगर में आज एक गुमशुदगी दर्ज हुई है—गुमशुदा व्यक्ति की उम्र लावारिश लाश से मेल खाती है । इसलिए एक बार उस परिवार के यहां जाकर पूछताछ कर सकते हो— ।”
“मैं वहां हो आया सर और उस परिवार के कई सारे लोगों को थाने भी ले आया पूछताछ के लिए— ।”
“हूं—S—हूं—SS ।”
“मगर लावारिश लाश से उनका कोई सम्बन्ध नहीं है, पूछताछ में पता चला है कि वहां मामला दूसरा है —उसका पति गे है, बीवी से रोज झगड़ा रहता था, उसे पत्नी की नहीं पति की जरुरत थी—आखिर रोज-रोज की कलह से तंग आकर वो घर छोड़कर चला गया है— ।”
“ओह— !”
“यस सर, इस लावारिश लाश का जैसे ही कोई क्लू मिलेगा, मैं जोर शोर से इन्वेस्टीगेशन शुरू कर दूंगा मगर अभी हमारे पास कोई दिशा नहीं है ।”
“पोस्टमार्टम कब होगा ?”
“आज देर शाम होगा—कल को हम बॉडी उठाकर लाएंगे, फिर क्या करना है सर, किसे सौंपनी है ?”
“चूंकि लाश हिन्दू समुदाय से ताल्लुक रखती है इसलिए किसी हिन्दू वेलफेयर सोसायटी को सौंप देना, वे अंतिम संस्कार कर देंगे ।”
“ओके सर— ।”
कॉल डिसकनेक्ट हुई ।
अखिलेश नाइक को यूं अचरज से देख रहा था मानो कोई किले के प्रांगण में कुतुबमीनार को ठुमके लगाते देख रहा हो ।
ऐसा ही अविश्वसनीय भाव था अखिलेश के चेहरे पर ।
अखिलेश नाइक से बोला—“सर आपने...हत्यारे को भी जाने दिया—?” वो चकित स्वर में पूछ रहा था ।
“हां— ।”
“क्यों—?”
नाइक ने अखिलेश की आंखों में विद्रोह पाया । नाइक उसकी आंखों में झांकता रह गया ।
उसने गहरी सांस छोड़ी ।
☐☐☐