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मंगलू कुर्सी पर बैठा अपनी सोर्चों में डूबा था कि उसके कानों में जंगला की फुसफुसाहट पडी ।
" मंगलू!"
“हां।"
"मुझे खतरे की महक आ रही है ।"
"खतरे की महक?" मंगलू के चेहरे पर अजीब-भाव उभरे।
"तुझे मुझ पर यकीन नहीं क्या?"
" है !"
“भवतारा का चाकू मुझें खतरे में लग रहा है । तेरे से चाकू छीना जाएगा ।"
"ये कैसे हो सकता हैं?"
" होगा…तेरे को पहले, सावधानी बरत लेनी चाहिए ।"
"क्या? "
"यहां से अभी निकल जा ।"
"हां । ड्राइंगरूम में बैठी मोना चौधरी अब किसी के आने का इंतजार कर रही है । वो लोग तेरे से चाकू छीनने आ रहे हैं ।" मंगलू फौरन कुर्सी से उठ खड़ा हुआ ।
" मोना चौधरी को मैं अभी खत्म !"
"नहीं !"
" तुमने ही तो कहा था कि मोना चौधरी को मार.......!"
" वो तब की बात थी, अब तू निकल जा, यहां से बाहर ......!"
"ठीक है ।" कहते हुए वो दरवाजे की तरफ़ बढ़ गया ।
॥॥॥॥॥
॥॥॥॥॥
"कहां जा रहे हो?” मंगलू को मुख्य द्वार की तरफ बढते देखा तो मोना चौधरी के होंठों से निकला ।
"जा रहा हूं।" मंगलू ने ठिठककर मोना चौधरी को देखा ।
“तुमने तो शाम को जाने को कहा.. . !"
" मै अभी जा रहा हूं ।"
"प्रोग्राम कैसे बदल गया?"
"क्योंकि तूने लोगों को बुला लिया है । चाकू छीनना चाहते हो तुम ।"
मौना चौधरी चौंकी और खडी हो गई।
"तुम्हें किसने बताई ये वात?" हैरान-सी मोना चौधरी बोली ।
" मुझें सब पता चल जाता है ।"
"तुम्हें जाने नहीं दूंगी ।" मोना चौधरी एकाएक कह उठी । मोना चौधरी तेजी से मंगलू की तरफ़ दौडी और उससे जा टकराई ।
मंगलू लड़खड़ाया और पास के स्टूल से जा टकराया । मोना चौधरी पुन: मंगलू पर झपटी ।
मंगलू ने हाथ बढाकर उसे रोक दिया । मोना चौधरी ने मंगलू को देखा । मंगलू की आंखें गुस्से से भरी थीं ।
"मेरे रास्ते मे मत आओ!" मोना चौधरी ने उसकी आगे बढी बांह की पीछे करना चाहा ।
परंतु बांह टस-से-मस न हुई ।
"मैं जा रहा हूं औंर मुझे जाने दो ।" कहकर मंगलू पुन: दरवाजे की तरफ बढा ।
उसी पल मोना चौधरी ने उसकी पीठ पर छलांग लगाई और उसे पीछे से पकड़ लिया मंगलू ठिठका ।
"क्या तुम मरना चाहती हो ?" मंगलू गुर्रा उटा ।
"मैं नहीं जाने दूंगी ।"
उसी पल मगंलू ने खुद को पीठ के बल गिरा लिया ।
मोना चौधरी नीचे दबी और उसके होंठों से कराह निकली ।
पकड़ ढीली हो गई ।
मंगलू फौरन आजाद होकर खडा हो गया ।
मोना चौधरी उछंल कर खडी हो गई ।
मंगलू के चेहरे पर अब दरिन्दगी नजर आने लगी थी ।
"मैं तुम्हें मार दूंगा ।" मंगलू मोना चौधरी की तरफ बढा ।
मोना चौधरी सावधानी से हटने लगी ।
" ये क्या कर रहा है मंगलू।" जंगला की फुसफुसाहट मंगलू के कानो में पडी ।
मंगलू ठिठका ।
"यहां रहकर वत्त बर्बाद मत कर !"
"मोना चौधरी ही मेरे रास्ते में आ रही है ।" मंगलू गुस्से से बोला ।
"बेवकूफा ये सव मूर्ख मनुष्य हैं । तू यहीं ठहरकर अपना वक्त क्यों बर्बाद करता है ।"
“छोड दूं मोना चौधरी को?"
"हां । यहां से फौरन बाहर निकल, वरना शैतान का बेटा तेरे से नाराज़ हो जाएगा ।"
मोना चौधरी मंगलू के होंठों से निकालने वाले शब्दों को सुन रही थ्री ।
उस वक्त मंगलू पलटा और दरवाजे की तरफ बढा ।
मोना चौधरी विना वक्तं गंवाए, तेजी से मंगलू की तरफ दोडा ।
आहट सुनकर मंगलू ठिठकते हुऐ पलटा ।
मोना चौधरी उसके करीब ही थी।
मगलू ने उसी पल हाथ आगे करके मोना चौधरी को रोका और उसके चेहरे पर घूंसा मारा, फिर पलटकर दरवाजा खोलते हुए बाहर निकल गया ।
मोना चौधरी को ऐसा लगा जैसे उसकां चेहरा लोहे के खम्बे से टकरा गया हो । आंखों के सामने अंधेरा उभर आया ।
लड़खड़ाकर वो नीचे जा गिरी । उसे होश तो था, परंतु उठने की हिम्मत जैसे गवा चुकी थी ।
॥॥॥॥॥
॥॥॥॥॥
मंगलू तीन दिन बाद खुले में आया था । बाहर की हवा उसे अच्छी लगी । वहां से बाहर निकलकर वह सड़क के किनारे फुटपाथ पर चलने लगा था ।
"अच्छा किया जो तू बाहर आ गया ।" कानो मे जंगला की फुसफुसाहट गूंजी ।
"अब मुझे किस तरफ जाना है?"
"मैंने शैतान के बेटे से बात करने की चेष्टा की, परंतु बात नहीं हो सकी । वो कहीं व्यस्त हे ।"
"तो?"
"मैं नहीं जानता कि तूने कहां जाना है । अब तेरे को क्या बताऊं? "
"अजीब हो तुम । वहां से मेरे को बाहर जाने को कह दिया है अब कहते हो कि तुम्हें नहीं पता, मैंने किधर जाना है ।"
"सच तो कहा है ! शैतान का बेटा फुर्सत में आते ही, मुझसे वात करेगा, तो तेरा हाल बताऊंगा ।"
"तब तक मैं, क्या करू?"
जंगला की तंरफ से कोई आवाज नहीं आई ।
"कहाँ भाग गया ।" मंगलू पुन: बोला ।।
“तेरे पास ही हू ।"
"जवाब दे मेरी बात का । जिन लोगों को चाकू चाहिए, वो मुझे तलाश कर लेगे, यूं खुले मे रहा तो।"
"तू होटल में ठहर जा !"
"होटल में-वहां पैसे खर्च होंगे । मेरे पास पैसे नहीं है ।”
"ये तो मामूली-सी समस्या है । वो देख, सामने गली है ।"
"हां ।" मंगलू ने गली की तरफ़ देखा ।
" वहीं कहीं खडा हो जा । कोई गली में आएगा तो तू उसे मारकर उससे रुपए छीन लेना ।"
" पुलिस मुझे पकड़ लेगी !"
" तूने अपने दोस्त को मारा, तेरे को पुलिस ने पकड़ा क्या?"
"नही ।"
"तो अब कैसे पकड़ लेगी । तेरी पीठ पर शैतान के बेटे, भवतारा का हाथ है । बेफिक्र रह तू !"
तभी मंगलू ने एक औरत को गती में जाते देखा ।
" वो औरत गली में जारही है ।"
"पीछे जा, काट दे गला उसका-निकाल शैतान के बेटे का चाकू।"
मंगलू ने अपने कदम तेज कर दिए ।
ओरत गली मैं जा चुकी थी।
मंगलू गली के किनारे पर पहुचा । गली में दो लोग और भी जा रहे थे, परंतु वे कुछ दूर थे ।
" मंगलू!"
“हां।"
"मुझे खतरे की महक आ रही है ।"
"खतरे की महक?" मंगलू के चेहरे पर अजीब-भाव उभरे।
"तुझे मुझ पर यकीन नहीं क्या?"
" है !"
“भवतारा का चाकू मुझें खतरे में लग रहा है । तेरे से चाकू छीना जाएगा ।"
"ये कैसे हो सकता हैं?"
" होगा…तेरे को पहले, सावधानी बरत लेनी चाहिए ।"
"क्या? "
"यहां से अभी निकल जा ।"
"हां । ड्राइंगरूम में बैठी मोना चौधरी अब किसी के आने का इंतजार कर रही है । वो लोग तेरे से चाकू छीनने आ रहे हैं ।" मंगलू फौरन कुर्सी से उठ खड़ा हुआ ।
" मोना चौधरी को मैं अभी खत्म !"
"नहीं !"
" तुमने ही तो कहा था कि मोना चौधरी को मार.......!"
" वो तब की बात थी, अब तू निकल जा, यहां से बाहर ......!"
"ठीक है ।" कहते हुए वो दरवाजे की तरफ़ बढ़ गया ।
॥॥॥॥॥
॥॥॥॥॥
"कहां जा रहे हो?” मंगलू को मुख्य द्वार की तरफ बढते देखा तो मोना चौधरी के होंठों से निकला ।
"जा रहा हूं।" मंगलू ने ठिठककर मोना चौधरी को देखा ।
“तुमने तो शाम को जाने को कहा.. . !"
" मै अभी जा रहा हूं ।"
"प्रोग्राम कैसे बदल गया?"
"क्योंकि तूने लोगों को बुला लिया है । चाकू छीनना चाहते हो तुम ।"
मौना चौधरी चौंकी और खडी हो गई।
"तुम्हें किसने बताई ये वात?" हैरान-सी मोना चौधरी बोली ।
" मुझें सब पता चल जाता है ।"
"तुम्हें जाने नहीं दूंगी ।" मोना चौधरी एकाएक कह उठी । मोना चौधरी तेजी से मंगलू की तरफ़ दौडी और उससे जा टकराई ।
मंगलू लड़खड़ाया और पास के स्टूल से जा टकराया । मोना चौधरी पुन: मंगलू पर झपटी ।
मंगलू ने हाथ बढाकर उसे रोक दिया । मोना चौधरी ने मंगलू को देखा । मंगलू की आंखें गुस्से से भरी थीं ।
"मेरे रास्ते मे मत आओ!" मोना चौधरी ने उसकी आगे बढी बांह की पीछे करना चाहा ।
परंतु बांह टस-से-मस न हुई ।
"मैं जा रहा हूं औंर मुझे जाने दो ।" कहकर मंगलू पुन: दरवाजे की तरफ बढा ।
उसी पल मोना चौधरी ने उसकी पीठ पर छलांग लगाई और उसे पीछे से पकड़ लिया मंगलू ठिठका ।
"क्या तुम मरना चाहती हो ?" मंगलू गुर्रा उटा ।
"मैं नहीं जाने दूंगी ।"
उसी पल मगंलू ने खुद को पीठ के बल गिरा लिया ।
मोना चौधरी नीचे दबी और उसके होंठों से कराह निकली ।
पकड़ ढीली हो गई ।
मंगलू फौरन आजाद होकर खडा हो गया ।
मोना चौधरी उछंल कर खडी हो गई ।
मंगलू के चेहरे पर अब दरिन्दगी नजर आने लगी थी ।
"मैं तुम्हें मार दूंगा ।" मंगलू मोना चौधरी की तरफ बढा ।
मोना चौधरी सावधानी से हटने लगी ।
" ये क्या कर रहा है मंगलू।" जंगला की फुसफुसाहट मंगलू के कानो में पडी ।
मंगलू ठिठका ।
"यहां रहकर वत्त बर्बाद मत कर !"
"मोना चौधरी ही मेरे रास्ते में आ रही है ।" मंगलू गुस्से से बोला ।
"बेवकूफा ये सव मूर्ख मनुष्य हैं । तू यहीं ठहरकर अपना वक्त क्यों बर्बाद करता है ।"
“छोड दूं मोना चौधरी को?"
"हां । यहां से फौरन बाहर निकल, वरना शैतान का बेटा तेरे से नाराज़ हो जाएगा ।"
मोना चौधरी मंगलू के होंठों से निकालने वाले शब्दों को सुन रही थ्री ।
उस वक्त मंगलू पलटा और दरवाजे की तरफ बढा ।
मोना चौधरी विना वक्तं गंवाए, तेजी से मंगलू की तरफ दोडा ।
आहट सुनकर मंगलू ठिठकते हुऐ पलटा ।
मोना चौधरी उसके करीब ही थी।
मगलू ने उसी पल हाथ आगे करके मोना चौधरी को रोका और उसके चेहरे पर घूंसा मारा, फिर पलटकर दरवाजा खोलते हुए बाहर निकल गया ।
मोना चौधरी को ऐसा लगा जैसे उसकां चेहरा लोहे के खम्बे से टकरा गया हो । आंखों के सामने अंधेरा उभर आया ।
लड़खड़ाकर वो नीचे जा गिरी । उसे होश तो था, परंतु उठने की हिम्मत जैसे गवा चुकी थी ।
॥॥॥॥॥
॥॥॥॥॥
मंगलू तीन दिन बाद खुले में आया था । बाहर की हवा उसे अच्छी लगी । वहां से बाहर निकलकर वह सड़क के किनारे फुटपाथ पर चलने लगा था ।
"अच्छा किया जो तू बाहर आ गया ।" कानो मे जंगला की फुसफुसाहट गूंजी ।
"अब मुझे किस तरफ जाना है?"
"मैंने शैतान के बेटे से बात करने की चेष्टा की, परंतु बात नहीं हो सकी । वो कहीं व्यस्त हे ।"
"तो?"
"मैं नहीं जानता कि तूने कहां जाना है । अब तेरे को क्या बताऊं? "
"अजीब हो तुम । वहां से मेरे को बाहर जाने को कह दिया है अब कहते हो कि तुम्हें नहीं पता, मैंने किधर जाना है ।"
"सच तो कहा है ! शैतान का बेटा फुर्सत में आते ही, मुझसे वात करेगा, तो तेरा हाल बताऊंगा ।"
"तब तक मैं, क्या करू?"
जंगला की तंरफ से कोई आवाज नहीं आई ।
"कहाँ भाग गया ।" मंगलू पुन: बोला ।।
“तेरे पास ही हू ।"
"जवाब दे मेरी बात का । जिन लोगों को चाकू चाहिए, वो मुझे तलाश कर लेगे, यूं खुले मे रहा तो।"
"तू होटल में ठहर जा !"
"होटल में-वहां पैसे खर्च होंगे । मेरे पास पैसे नहीं है ।”
"ये तो मामूली-सी समस्या है । वो देख, सामने गली है ।"
"हां ।" मंगलू ने गली की तरफ़ देखा ।
" वहीं कहीं खडा हो जा । कोई गली में आएगा तो तू उसे मारकर उससे रुपए छीन लेना ।"
" पुलिस मुझे पकड़ लेगी !"
" तूने अपने दोस्त को मारा, तेरे को पुलिस ने पकड़ा क्या?"
"नही ।"
"तो अब कैसे पकड़ लेगी । तेरी पीठ पर शैतान के बेटे, भवतारा का हाथ है । बेफिक्र रह तू !"
तभी मंगलू ने एक औरत को गती में जाते देखा ।
" वो औरत गली में जारही है ।"
"पीछे जा, काट दे गला उसका-निकाल शैतान के बेटे का चाकू।"
मंगलू ने अपने कदम तेज कर दिए ।
ओरत गली मैं जा चुकी थी।
मंगलू गली के किनारे पर पहुचा । गली में दो लोग और भी जा रहे थे, परंतु वे कुछ दूर थे ।