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Guest
“इतनी भी थकावट नहीं हुई कि होटल जाकर आराम करूं । अभी कुछ घंटे मैं और भाग-दोड़ कर सकता हू।"
"ठीक है हम दोनों इकट्ठे ही अंधेरे से भरी जगहौं कौ चेक करते हैं ।"
राजन ने सिर हिलाया और काफी का आखिरी घुट धरकर उठते हुए बोला ।
"मैं अभी आया ।" कहने के साथ ही राजन बाथरूम की तरफ बढ गया ।
भवतारा सपाट शिकारी की निगाहों से राजन को बाथरूम की तरफ जाते देखता रहा । उसकी आंखों में हल्की-सी लाली उभर आई थी । जो कि उसके भीतर उछल रहे दरिन्दे की निशानी थी ।
उसके देखते-ही-देखते राजन बाथरूम में प्रवेश कर गया । ठीक उसी पल भवतारा कुर्सी से उठ खडा हुआ ।
मोना चौधरी ने उस पर नजर डाली और निगाह फेर ली । अपनी सोची में व्यस्त थी ।
वेहद शांत अंदाज में भवतारा के कदम बाथरुम की तरफ बढने लगे । उसके शरीर में उठने वाली ऐठने अब जोर पकड़ने लगी थी, उसके भीतर क्रा शेतान उसके असली रूप में आने को बेचैन हो रहा था ।
@@@@@@@@@@@@@@@@@@
जब भवतारा ने भीतर प्रवेश किया तो राजन वाशबेसिन पर शीशे के सामने खडा, मुह पर पानी के छींटे मार रहा था । भवतारा के भीतर प्रवेश करते ही वो दरवाजा खुद-ब-खुद बंद होता चला गया । फिर उसने हाथ बढ़ाकर दरवाजे की सिटकनी लगा दी । इसके साथ ही भवतारा घूमा और राजन की पीठ पर नजरे टिका दी ।
उसी पल भवतारा के शरीर में जोरदार ऐठन उठी ।
इस बार उसने उठने वाली ऐठन को दबाने की चेष्टा न की ।
चंद सेकंड बीतते-बीतते ही भवतारा का रूप बदलने लगा । बो दरिन्दे में परिवर्तित होने लगा । उसके सिर के बाल कम्पन से हिलते हुए धीरे-धीरे छत की तरफ सीधे खडे होने लगे । फैली बांहों के हाथों के उंगलियों के नाखून एकाएक ही इंच भर बढ आए थे । वे इतने तीखे थे कि उनसे पूरी तरह चाकुओं जैसा काम लिया जा सकता था । तब तक अपने सामने लगे शीशे के द्वारा राजन की निगाह उस परं पड चुकी थी ।
वो चौंककर पलटा । हैरानी से उसे देखने लगा ।
भवतारा का चेहरा अभी न बदला था ।
"कौन हो तुम?"
"वही ।" भवतारा के होंठों से गुर्राहट निकली------" जिसकी तुम्हें तलाश है ।"
"श. . शेतान का बेटा?" राजन के होंठों से हक्का बक्का स्वर निकला ।
भवतारा के होंठों से गुर्राहट निकल-रहीं थी !
एकाएक उसके चेहरे में बदलाव आने लगा ।
उसका मासूम चेहरा दरिन्दे में बदलने लगा ।
राजन फटी-फ़टी आंखों से ये सब देख रहा ,था ।
देखते-ही-देखते के दरिन्दा---वहशी बन गया । उसका चेहरा . कुरूप हो उठा था । ऊपर के. दो दांत नुकीले होकर इंच-इंच भर बाहर आ गए थे । ऊपर का होंठ कुछ ऊपर उठ गया था । आंखें लाल सुर्ख हो गई थी । उसके चेहरे पर भूरे रंग के असंख्य दाग नजर आने लगे थे । उसकी दोनों बांहें किसी रोबोट की तरह फैल गंईं थी ।
राजन का दिल धड़कना जैसे भूल गया-था ।
खतरनाक-स्थिति का आभास हो चुका था उसे । उसने दरवाजे की तरफ देखा । दरवाजे की लगी सिटकनी भी देखी । मन में सिर्फ एक ही विचार था कि उससे बचना होगा, यहां से निकलना होगा । दरिन्दे के होंठों से तेज गुर्राहट निकली ।
राजन ने हिम्मत इकट्ठी की और तेजी से उस पर छलांग लया दी । मन में विचार था कि इसे दरवाजे के पास से हटाना होगा, वरना बाहर नहीं निकल पाएगा । इससे पहले कि उसका शरीर उससे टकरा पाता, उसने अपना दायां हाथ आगे कर दिया ।
राजन के होंठों से दबी-दबी चीख निकली ।
उसकी उगलियों के नाखून किसी तेज चाकू की तरह उसके शरीर में धंस गए थे ।
राजन नीचे गिरा ।
उसने जोरदार ठोकर उसके कूल्हे पर मारी ।
इस वक्त शैतानी ताकते खुलेआम दरिन्दे के साथ थी, महज एक ठोकर में ही राजन आठ फीट दूर दीवार से जा टकराया था । पीड़ा हुई, परंतु पीड़ा से ज्यादा उसका खौफ सिर पर सवार था । वो जल्दी से उठा और भयभीत नजरों से उसे देखने लगा ।
दरिन्दा अब झूमते हुए उसकी तरफ बढने लगा था ।
"त.. .तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते ।" राजन के होंठों से कांपता-सा स्वर निकला ।
जवाब में उसके होंठों से गुर्राहट निकली ।
"ठीक है हम दोनों इकट्ठे ही अंधेरे से भरी जगहौं कौ चेक करते हैं ।"
राजन ने सिर हिलाया और काफी का आखिरी घुट धरकर उठते हुए बोला ।
"मैं अभी आया ।" कहने के साथ ही राजन बाथरूम की तरफ बढ गया ।
भवतारा सपाट शिकारी की निगाहों से राजन को बाथरूम की तरफ जाते देखता रहा । उसकी आंखों में हल्की-सी लाली उभर आई थी । जो कि उसके भीतर उछल रहे दरिन्दे की निशानी थी ।
उसके देखते-ही-देखते राजन बाथरूम में प्रवेश कर गया । ठीक उसी पल भवतारा कुर्सी से उठ खडा हुआ ।
मोना चौधरी ने उस पर नजर डाली और निगाह फेर ली । अपनी सोची में व्यस्त थी ।
वेहद शांत अंदाज में भवतारा के कदम बाथरुम की तरफ बढने लगे । उसके शरीर में उठने वाली ऐठने अब जोर पकड़ने लगी थी, उसके भीतर क्रा शेतान उसके असली रूप में आने को बेचैन हो रहा था ।
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जब भवतारा ने भीतर प्रवेश किया तो राजन वाशबेसिन पर शीशे के सामने खडा, मुह पर पानी के छींटे मार रहा था । भवतारा के भीतर प्रवेश करते ही वो दरवाजा खुद-ब-खुद बंद होता चला गया । फिर उसने हाथ बढ़ाकर दरवाजे की सिटकनी लगा दी । इसके साथ ही भवतारा घूमा और राजन की पीठ पर नजरे टिका दी ।
उसी पल भवतारा के शरीर में जोरदार ऐठन उठी ।
इस बार उसने उठने वाली ऐठन को दबाने की चेष्टा न की ।
चंद सेकंड बीतते-बीतते ही भवतारा का रूप बदलने लगा । बो दरिन्दे में परिवर्तित होने लगा । उसके सिर के बाल कम्पन से हिलते हुए धीरे-धीरे छत की तरफ सीधे खडे होने लगे । फैली बांहों के हाथों के उंगलियों के नाखून एकाएक ही इंच भर बढ आए थे । वे इतने तीखे थे कि उनसे पूरी तरह चाकुओं जैसा काम लिया जा सकता था । तब तक अपने सामने लगे शीशे के द्वारा राजन की निगाह उस परं पड चुकी थी ।
वो चौंककर पलटा । हैरानी से उसे देखने लगा ।
भवतारा का चेहरा अभी न बदला था ।
"कौन हो तुम?"
"वही ।" भवतारा के होंठों से गुर्राहट निकली------" जिसकी तुम्हें तलाश है ।"
"श. . शेतान का बेटा?" राजन के होंठों से हक्का बक्का स्वर निकला ।
भवतारा के होंठों से गुर्राहट निकल-रहीं थी !
एकाएक उसके चेहरे में बदलाव आने लगा ।
उसका मासूम चेहरा दरिन्दे में बदलने लगा ।
राजन फटी-फ़टी आंखों से ये सब देख रहा ,था ।
देखते-ही-देखते के दरिन्दा---वहशी बन गया । उसका चेहरा . कुरूप हो उठा था । ऊपर के. दो दांत नुकीले होकर इंच-इंच भर बाहर आ गए थे । ऊपर का होंठ कुछ ऊपर उठ गया था । आंखें लाल सुर्ख हो गई थी । उसके चेहरे पर भूरे रंग के असंख्य दाग नजर आने लगे थे । उसकी दोनों बांहें किसी रोबोट की तरह फैल गंईं थी ।
राजन का दिल धड़कना जैसे भूल गया-था ।
खतरनाक-स्थिति का आभास हो चुका था उसे । उसने दरवाजे की तरफ देखा । दरवाजे की लगी सिटकनी भी देखी । मन में सिर्फ एक ही विचार था कि उससे बचना होगा, यहां से निकलना होगा । दरिन्दे के होंठों से तेज गुर्राहट निकली ।
राजन ने हिम्मत इकट्ठी की और तेजी से उस पर छलांग लया दी । मन में विचार था कि इसे दरवाजे के पास से हटाना होगा, वरना बाहर नहीं निकल पाएगा । इससे पहले कि उसका शरीर उससे टकरा पाता, उसने अपना दायां हाथ आगे कर दिया ।
राजन के होंठों से दबी-दबी चीख निकली ।
उसकी उगलियों के नाखून किसी तेज चाकू की तरह उसके शरीर में धंस गए थे ।
राजन नीचे गिरा ।
उसने जोरदार ठोकर उसके कूल्हे पर मारी ।
इस वक्त शैतानी ताकते खुलेआम दरिन्दे के साथ थी, महज एक ठोकर में ही राजन आठ फीट दूर दीवार से जा टकराया था । पीड़ा हुई, परंतु पीड़ा से ज्यादा उसका खौफ सिर पर सवार था । वो जल्दी से उठा और भयभीत नजरों से उसे देखने लगा ।
दरिन्दा अब झूमते हुए उसकी तरफ बढने लगा था ।
"त.. .तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते ।" राजन के होंठों से कांपता-सा स्वर निकला ।
जवाब में उसके होंठों से गुर्राहट निकली ।