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खेल खिलाड़ी का compleet

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खेल खिलाड़ी का पार्ट--55

गतान्क से आगे............-

"कमिशनर साहब,जसजीत जी के बेटे के केस की क्या खबर है?",CM अत्रे बस अभी-2 जसजीत से मिलने के बाद अपने दफ़्तर आए थे.

"सर,पूरी फोर्स इसी काम मे जुटी है."

"क्यू?क्या बाकी जुर्म होने बंद हो गये हैं?",अत्रे ने 1 फाइल उठा के पैनी निगाह से कमिशनर को देखा,"देखिए,ये केस बहुत ज़रूरी है मैं मानता हू मगर इसके चलते बाकी काम नही रुकना चाहिए."

"सर,हम पूरी मुस्तैदी से अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभा रहे हैं."

"हूँ..वैसे क्या लगता है कब तक सुलझेगा ये मामला?"

"सर,आपको तो पता ही है आज पहली बार किडनॅपर्स ने कॉंटॅक्ट किया है.अभी तक तो उनकी माँगे भी नही पता चली हैं.कुच्छ पक्का नही कहा जा सकता.अगर किस्मत अच्छी रही तो चंद दिनो मे सुलझ जाएगा मामला नही तो हफ्ते भी लग सकते हैं."

"हूँ..",उन्होने फाइल पे नज़रें गढ़ा दी,"..हफ्ते ही लगे तो ठीक हैं.अब आप जा सकते हैं."

"सर.",कमिशनर ने CM की कही आख़िरी बात का मतलब समझ लिया था.वो जानता था कि अत्रे 1 नेता पहले है & CM की कुर्सी उसे कितनी प्यारी है.प्रधान को कमज़ोर करने का कोई मौका वो भला क्यू छ्चोड़ेगा मगर इस सब मे वो बच्चा मोहरा बन के रह गया था....लेकिन वो कर भी क्या सकता था?..लेकिन वो इस शहर का कमिशनर था..चाहे कुछ भी हो जाए,वो केवल बच्चे को बचाने को तवज्जो देगा,अत्रे & बाकी नेता इंतेज़ार कर सकते थे.

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"क्या पता चला,डॉक्टर?",अजीत ने फोरेन्सिक लॅब के चीफ से पुचछा.

"1 बहुत ज़रूरी बात."

"बताइए."

"ये सुव चोरी की है."

"अच्छा!"

"हाँ,इसके एंजिन पे इसका चॅसी नंबर खुरछ के उसे बदलने की कोशिश की गयी है मगर फिर भी हमने अंदाज़ लगा लिया है कि नंबर क्या हो सकता है..ये देखिए.",उसने 1 काग़ज़ अजीत को दिया.

"जीएच10045287ल या गफ़10095287ई..थॅंक्स,डॉक्टर.देखते हैं आपकी निकली ये जानकारी क्या रंग लाती है."

"वेलकम,ऑफीसर."

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"वो लौंडा तो बेकार है ये मैं जानता हू.",बल्लू रघु & रानो के साथ बैठा था,"..अकेला पूरा चेहरा दुनिया को दिखाते हुए बच्चे को अगवा करने आ गया,गधा कहीं का!..लेकिन वो गॅंग जिसने उस से बच्चे को छ्चीना वो पेशेवर है,बाबा."

"हाँ,बल्ले..अभी-2 मुझे बलदेव ने बताया है कि पोलीस को वो गाड़ी मिल गयी है जिसमे लड़का भागा था & वो गाड़ी भी जिसमे वो सोचते हैं कि बच्चा अगवा हुआ था."

"क्या?!"

"हां,बेटा मगर वो गॅंग की गाड़ी बिल्कुल जली हुई है."

"धात तेरे की!",बल्लू झल्लाया,"बाबा,मैने सारे शहर मे सभी गॅंग्स के यहा पता करवा लिया है.ये अपने शहर क्या अपने राज्य के किसी गॅंग का काम नही है.सब साले सोच रहे हैं कि इतना बड़ा कांड करने वाला ये रातोरात नया गॅंग पैदा कैसे हो गया!"

"पैदा जब भी हुआ हो,बल्लू..",रानो की आवाज़ खून जमाने वाली थी,"..उन्हे मौत की नींद हम ही सुलाएँगे."

अगली रात अजीत फिर घर नही आ पाया था & वरुण & मेघना ने 1 और रात 1 ही कमरे मे बिताई.इस रात दोनो की कशमकश और ज़्यादा थी.दोनो के दिल बीती बातो को याद कर उनके जिस्मो की बेचैनी बढ़ाए जा रहे थे.

पूरी रात दोनो ने आँखो-2 मे काट दी.सवेरे फिर पिच्छले दिन की ही तरह वरुण के लिए मोना ने चाइ बनाई जिसे पीते हुए वो टीवी देख रहा था.वो कार जिसमे किडनॅपर्स अनीश को छ्चीन के ले गये थे,उसकी बरामदगी की खबर से उसे उनके पकड़े जाने की कुच्छ उम्मीद जागी मगर तभी टीवी पे अगली खबर सुनते ही उसके होश उड़ गये.

"वरुण अवस्थी नाम का ये शख्स सज़ायाफ़्ता मुजरिम है & जसजीत प्रधान के बेटे के अफ़रन के सिलसिले मे पोलीस को इसकी तलाश है..",वरुण ने मोना को देखा जिसके चेहरे पे भी घबराहट झलक रही थी.

"मोना,मैं यहा से निकल जाता हू."

"& पोलीस के हाथो मे पड़ गये तो!बस 1 ही रात की तो बात है वरुण फिर अपने उस साथी के पास चले जाना या फिर.."

"या फिर क्या?"

"मैं अजीत से बात करू?"

"क्या बतओगि उसे की कैसे जानती हो इस मुजरिम को..",वरुण फीकी हँसी हंसा,"..मोना,तुम्हारी ज़िंदगी खुशाल है.क्यू उसे बर्बाद करना चाहती हो!..मेरी ज़िंदगी जितनी बर्बाद होनी थी हो चुकी,अब इस से ज़्यादा कुच्छ और बुरा क्या हो सकता है.1 बार जैल जा चुका हू,दूसरी बार चला जाऊँगा लेकिन तुम अपने पति से कुच्छ नही कहोगी."

"ठीक है.",वरुण चाइ ख़त्म कर उपर च्छूपने चला गया & मेघना उसे च्छुपाने के बाद उदास अपने बिस्तर पे तब तक बैठी रही जब तक अजीत वापस नही आ गया.

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अरशद & दीप्ति चुदाई मे जुटे थे & कमरे के आड़े हुए दरवाज़े से उनकी मस्त आवाज़ें बाहर आ रही थी.इस वक़्त अनीश के कमरे के बाहर की ड्यूटी देव & बालू की थी.चार्ली दोनो प्रेमियो की नशीली आहें सुन गरम हो चुका था & उसका जिस्म भी किसी लड़की के साथ की ख्वाहिश मे तड़प रहा था.

उसने दरवाज़े की ओट से देखा,दीप्ति अपने घुटनो & हाथो पे बिस्तर पे थी & अरशद पीछे से उसकी चूत मे लंड घुसाए उसे चोद रहा था.उस गरम नज़ारे को देख कब उसका हाथ अपने पॅंट के अंदर घुस गया & उसके लंड से खेलने लगा उसे पता ही नही चला.

दोनो प्रेमियो की पीठ उसकी तरफ थी & वो अरशद की पुष्ट गंद को भिंचे हुए दीप्ति की चूत मे धक्के लगाते देखते हुए अपना लंड हिला रहा था,"क्या बे!बा हाथ से ही हिलाएगा या फिर इसका इस्तेमाल भी करेगा!"

"ह-हां..नही...!",चार्ली चौंक गया & लंड पॅंट मे डाल कमरे मे जाने लगा.बालू हंसता हुआ बाथरूम चला गया.

"क्यू बे कुच्छ सच्चा मज़ा चाहिए या बस..",बालू बाथरूम से बाहर आया & हाथो से लंड हिलाने का इशारा किया.

"यहा कैसे होगा.",चार्ली मायूसी से बोला.

"होगा..वो कौन थी रे पिच्छली बार तेरी शाब्बो..क्या नाम था?"

"गुलबो.",चार्ली खुशी से बोला.

"हां,फिर मिलेगा उस से."

"मगर कैसे उस्ताद?",चार्ली ने आवाज़ नीची कर ली,"उसमे ख़तरा होगा.हम यहा च्चिपे हैं.कही किसी को भनक लग गयी तो?"

"कुच्छ नही होगा."

"& अरशद?"

"अबे तू बस बेफ़िक्र रह & जब कहु चलने को तैय्यार रहियो.",बालू बेपरवाही से बोला & वाहा से चला गया.

"बिल्कुल सही जवाब है दोस्त..",प्रोफेसर दीक्षित ने अरशद से कहा,"..वैसे मेरा नाम दीक्षित है."

"हमारी माँग ध्यान से सुन लो & कल बताओ कि हमे ये कब दे रहे हो.",अरशद ने उसकी बात अनसुनी करते हुए अपनी माँग बताई & फोन काट दिया.इस बार फिर 8 सेकेंड के भीतर पोलीस ने कॉल ट्रेस कर ली.इस बार सिविल हॉस्पिटल के पीसीओ से फोन आया था & वाहा के पोलीस पोस्ट के इंचार्ज को फ़ौरन वाहा भेजा गया.वो दौड़ता हुआ वाहा पहुँचा मगर बूथ हॉस्पिटल के पिच्छले दरवाज़े पे बना था.इंचार्ज ने पिच्छले गेट के बाहर खड़े 1 हवलदार को उसके मोबाइल पे जल्दी बूथ तक पहुचने को कहा.इधर वो कॉन्स्टेबल गेट से दाखिल हुआ & उसी के बगल से अरशद 1 बाइक से वाहा से बाहर निकला.

अरशद ने बाइक वही खड़ी की जहा हमेशा से खड़ी होती थी,1 मकान के गॅरेज मे.उस हथियारो के दलाल ने ही उसे इस गॅरेज की चाभी दी थी & ये बिके मुहैय्या कराई थी.वाहा से वो पैदल पास के मार्केट की पार्किंग मे गया गाड़ी निकाली & बुंगले की ओर चल पड़ा.

"क्या?!",प्रोफेसर & अरशद की बातचीत कंट्रोल रूम मे सुन रहे अजीत ने जैसे ही ये बात डीसीपी वेर्मा को बताई उनके माथे पे शिकन पड़ गयी,चलो मेरे साथ."

"देखिए,कमिशनर साहब अपने बेटे को बचाने के लिए मैं कोई भी कीमत देने को तैय्यार हू मगर 1 करोड़ के हीरे..मैं कहा से लाऊँ ये सब.",जसजीत की आवाज़ मे बेबसी थी.

"प्रधान जी,मैं आपकी परेशानी समझता हू.देखिए,ये बहुत शातिर लोग हैं.उन्हे रकम छ्होटे-2 हीरे चाहिए जिनमे से किसी भी हीरे की कीमत र्स.10,000 से ज़्यादा ना हो.यानी की करीब 1000 हीरे उन्हे चाहिए.अब ये हीरे इतने छ्होटे होते हैं लगभग कमीज़ के बटन के जैसे या उस से भी छ्होटे.1बड़ी पोटली मे आसानी से 1000 हीरे आ जाएँगे.मैने आपकी बात CM साहब तक पहुँचा दी है & वो भी इस बात का हल ढूढ़ने मे लगे हुए हैं."

ये सारी बातें जसजीत की स्टडी मे हो रही थी की तभी दरवाज़े पे दस्तक हुई & 1 नौकर के हाथो चाइ-नाश्ते की ट्रॉली के साथ नीना वाहा दाखिल हुई.उसका पति तो पहले से ही बड़े भाई के साथ वाहा बैठा था.नीना ने सभी को चाइ सर्व करवाई & वाहा से चली गयी.5 मिनिट बाद भैया जी को भी ये खबर मालूम थी & 15 मिनिट बाद रघु कुम्भात को भी.

"भैया,हम दोनो अपने पैसे मिला लेते हैं & बाकी का उधार ले लेते हैं."

"नही,मुकुल."

"देखिए,प्रधान जी..",कमिशनर ने आगे कहा,"..प्रोफेसर उनके साथ बात तो करेगा ही.वो उनकी माँग को नीचे लाने की कोशिश करेगा मगर बात ये है कि अगर हम हीरे दे देते हैं तो वो पहले उन्हे परखेंगे & फिर बच्चे को हमे सौपेंगे.अगर हम इन्हे धोखा देने की कोशिश करते हैं तो फिर..",कमिशनर ने बात अधूरी छ्चोड़ दी.

"नही..कमिशनर साहब..मैं अपने बच्चे को अब और ख़तरे मे नही डाल सकता.",तभी जसजीत का मोबाइल बजा जिसे मुकुल ने उठा लिया.

"भैया,CM साहब का फोन है.",जसजीत ने मोबाइल लिया & कुच्छ देर बात करता रहा & फिर फोन कमिशनर को थमा दिया.

"CM साहब ने 1 उपाय सुझाया है.राज्य के गेम ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन से वो ये हीरे हमे दिलवा देंगे & हम इनकी कीमत बाद मे चुका सकते हैं.."

"..& अगर हम उन्हे दबोचने मे कामयाब हो गये तब तो कोई बात ही नही है.बच्चा भी हमारे पास होगा & हीरे भी.",कमिशनर ने फोन जसजीत को लौटा के उसकी बात पूरी की.जो कमिशनर ने नही बताया वो ये कि CM अत्रे ने उसे फोन रखने से पहले ये कहा था कि हीरे अगर वापस नही मिले तो बहुत अच्छा होगा.मतलब सॉफ था कि फिर उस कीमत को चुकाने मे जसजीत को काफ़ी समय लगेगा & फिर CM का रास्ता सॉफ था.

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"1 बात तो तय है..".प्रोफेसर दिव्या & नामित के साथ बैठा था,"..ये जितने भी लोगो का गॅंग है उनमे से कोई 1 या तो जौहरी है या फिर हीरो का जानकार."

"हूँ..मगर प्रोफेसर मुझे लगता है कि उन हीरो के ज़रिए उन्हे पकड़ना तो आसान हो जाएगा.हम हीरो को ट्रॅक कर उन तक पहुँच सकते हैं."

"नही दिव्या जी,वो छ्होटे साइज़ के हीरे आपको केवल छ्होटे जौहरियो से मिलते हैं.उनपे कोई सरकारी मार्क भी नही होगा चाहे आप उन्हे जहा से ले लें."

"पर हमे खरीदते वक़्त तो कार्ड मिलता है जिसमे उनके असली होने की सरकारी मोहर लगी रहती है."

'बिल्कुल सही,नामित जी मगर हीरे पे तो कोई मार्किंग नही होती.बहुत से बहुत आप हीरे को जौहरी से जाँचवा के उसके साथ के कार्ड मे लिखी बात की सच्चाई परख सकते हैं.बड़े हीरो पे तो मार्किंग होती भी है मगर इन छ्होटे-2 हीरो पे ऐसा कुच्छ नही होता."

"यानी उन्हे ट्रॅक करना मुश्किल है?"

"बहुत.",प्रोफेसर सोचे जा रहा था.ये लोग बहुत चालाक थे & इसका मतलब था कि उतने ही ख़तरनाक भी होंगे.उसे पहली बार अपनी ज़िम्मेदार का बोझ महसूस हुआ & उसके दिल मे 1 बार फिर वही डर आया कि अगर बच्चे को कुच्छ हो गया तो वो क्या दोबारा उस सदमे को झेल पाएगा.दीपाली की मौत वाले हादसे मे उसे अपनी महबूबा को खोने का दर्द तो था ही मगर साथ मे नाकाम होने की टीस भी थी.अब फिर से वही टीस क्या उसे तोड़ नही देगी?..उसने ठंडी सांस भरी..जो होगा देखा जाएगा..अभी तो बस ये काम ठीक से हो जाए.

सवेरे के 4 बजे मेघना की नींद खुली तो उसने देखा की वरुण फर्श पे लगे बिस्तर पे नही है.वो झटके से उठी तो देखा वो तैय्यार हो के बाथरूम से निकल रहा है,"अब मैं चलूँगा."

"हूँ..ड्रॉयिंग रूम मे बैठो,मैं चाइ बनाती हू.",वो रसोई मे चली गयी.

खामोशी से दोनो चाइ पीते हुए टीवी देख रहे थे.मेघना को समझ नही आ रहा था कि उसका दिल बैठा क्यू जा रहा था.वरुण से अब कोई रिश्ता वो रखने की सोच भी नही सकती थी.उसने उसकी जो भी मदद की वो इसलिए क्यूकी वो उन दोनो के बीच के उस खूबसूरत रिश्ते को भूली नही थी जो बदक़िस्मती से टूट गया था..& वरुण ने भी इन तीन दिनो मे कोई ऐसी हरकत या बात नही की जिस से लगे की वो अभी भी उसे प्यार करता था.

"मोना..",वरुण खड़ा था,"..अब जाता हू.तुमने जो किया वो तो शायद ही कोई करता.इतना बड़ा ख़तरा मोल लिया तुमने मेरे लिए."

"प्लीज़ वरुण..",आगे अगर बोलती तो शायद उसकी रुलाई छूट जाती.

"ओके,मोना.बाइ!"

"1 मिनिट,वरुण.",मेघना भागती हुई ड्रॉयिंग रूम से बाहर गयी & जब वापस आई तो उसके हाथो मे कुच्छ पैसे थे.

"मोना,प्लीज़..मैं ये नही ले सकता.",मोना ने चुपचाप सारे पैसे उसकी कमीज़ की जेब मे डाल दिए.

"वरुण,बस 1 बात याद रखना कि चाहे जिसकी मदद लो,जो भी करो..तुम 1 अच्छे इंसान हो & कोई पेशेवर मुजरिम नही.",वरुण ने उसका हाथ पकड़ा & उसकी आँखो मे देखा.मेगना की आँखो की नमी उसे अपनी निगाहो मे भी महसूस हुई.

"बाइ!",उसने उसका हाथ दबाया & वाहा से निकल गया.अब उसकी मंज़िल थी मूसा का अड्डा जहा उसे उम्मीद थी कि उसे अपनी मुश्किल से च्छुतकारा मिल ही जाएगा.

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दिव्या की आँख खुली तो 1 पल को उसे समझ नही आया कि वो कहा है फिर जब नींद पूरी तरह खुली तो उसे याद आया कि वो प्रोफेसर दीक्षित के साथ उसी के कमरे मे है.कल दिन मे घर की बिजली अचानक चली गयी थी & उसे ठीक करने के बहाने मे 2 लोग आए & प्रोफेसर के कमरे के बग्स फिर से चालू कर गये थे.इस बार उन्होने उसके बिस्तर के हेअडबोर्ड के पीछे 1 बग फिट किया था & दूसरा फिर से गुलदस्ते मे.

प्रोफेसर ने गुलदस्ते मे ताज़े फूल लगा के पानी भर दिया & उस बग को बेकार कर दिया.पलंग के सिरहाने वाले बग के तार को लटका देना तो और भी आसान काम था.उसके बाद फिर से कमेरे पे 1 कपड़ा डाल अंधेरे कमरे मे उसने दिव्या को जम के चोदा था.

रात की हर्कतो ने दिव्या को काफ़ी थका दिया था & इसलिए उसे काफ़ी गहरी नींद आई थी.वो उठी & अपने कपड़े पहनने लगी कि तभी फोन घनघना उठा..इतनी सुबह किडनॅपर्स का फोन!

उसने झट से कपड़े पहन कमरे के दरवाज़ा खोला.तब तक प्रोफेसर ने फोन उठा लिया था,"दीक्षित बोल रहा हू,दोस्त."

"हमारी माँगो का क्या हुआ?"

"क्या दोस्त..इतनी बड़ी माँग है & फिर हमे बच्चे की सलामती का कोई असबूत नही दिया.",अरशद मन ही मन मुस्कुराया..बड़ा होशियार आदमी था इसलिए तो उसने अपने मोबाइल मे अनीश की बात रेकॉर्ड की थी.उसने उसे ऑन किया.

"..मैं ठीक हू,मम्मी-पापा.ना बीमार हू ना कोई चोट लगी है.बिल्कुल अच्छा हू.",कॉल ट्रेस हो गयी थी.

"लाजपत कुंज..ए ब्लॉक..के पास के बूथ से कॉल की जा रही है.",कंट्रोल रूम मे बैठे टेक्नीशियन ने लोकेशन बताई,"..हां..पार्क के पास.",ये जानकारी फ़ौरन वाहा के सबसे नज़दीकी पेट्रोल कार को दी गयी.

"हमारी माँग मानी की नही?"

"यार कुच्छ तो कम करो.बहुत ज़्यादा रकम है."

"मैं कल फिर फोन करूँगा.अगर हां नही बोला तो फोन के 6 घंटे बाद अनीश का कुच्छ समान तुमलोगो को मिल जाएगा.",ट्रॅक सूट पहने अरशद ने फोन काटा & बूथ से निकल जॉगिंग करता पार्क मे दाखिल हो गया.उसके निकलने के 5 सेकेंड बाद ही पेट्रोल कार वाहा पहुँची & पोलिसेवाले इलाक़े को छानने लगे.तब तक अरशद पार्क के दूसरे छ्होर के गेट से निकल अपनी बाइक पे सवार वाहा से निकल चुका था.

प्रोफेसर का बदन ठंडे पसीने से नहा गया था,वो जानता था अनीश के समान का क्या मतलब था..उस मासूम के जिस्म का कोई हिस्सा या फिर..उसने सर झटका & नामित की ओर देखा,"अपने बॉस को कहिए कि हीरो का जल्द इंतेज़ाम करें & अगर नही हैं तो मुझसे मिलें मैं कुच्छ ना कुच्छ करवाउन्गा!",प्रोफेसर की आवाज़ की चिंता ने दिव्या & नामित दोनो को परेशान कर दिया था.शायद पहली बार उन्हे एहसास हुआ था कि मामला कितना संगीन है.

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"क्या वो कार तमिल नाडु से चोरी हुई थी?",जाली सुव को देख के जो 2 चॅसी नंबर. का सुराग मिला था,उनमे से 1 सही था & उसका पता चल गया था,"..ओके..ठीक है.",अजीत ने इंटरकम रखा & सामने बैठे इनस्पेक्टर से मुखातिब हुआ,"..साउत इंडिया से चोरी गाड़िया यहा बहुत खपाई जाती हैं.ये उस सुव का असली नंबर है.इसे लेके शहर के सभी चोरी की गाडियो के दलालो की खबर लो & राज्य के बाकी शहरो मे भी ये नंबर फ्लश करवा दो."

"सर."

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"दिव्या जी?"

"जी बोल रही हू.",दिव्या ने अपने मोबाइल पे अंजान नंबर देख के फोन रिसीव किया.

"मैं फ़राज़ बोल रहा हू पंचमहल से."

"ओह..हेलो फ़राज़ जी!कैसे हैं आप?"

"बढ़िया हू दिव्या जी आपके काम की 1 बात पता चली है."

"अच्छा.क्या?"

"जिस केस के सिलसिले मे आप हमारे शहर आई थी उसी का 1 बहुत बड़ा सुराग मिला है."

"अच्छा."

"हां,1 लुटेरे का नाम पता चल गया है हमे."

"क्या?कैसे?",दिव्या की हैरत & खुशी का ठिकाना नही था.

"अभी कुच्छ दिन पहले रुटीन ट्रॅफिक चेकिंग मे 1 आदमी हमारे हाथ लगा जिसकी बाइक की डिकी मे नक़ली शराब भरी थी.हिरासत मे लेने के बाद उस से हमे 500 के 40 नोट्स मिले.हमारे 1 इनस्पेक्टर ने पहले उन नोट्स की जाँच 1 बॅंक मे करवाई कि कही ये नक़ली तो नही.नोट्स तो बिल्कुल असली थे मगर जब हम उन्हे मालखाने मे रखने लगे तो मुझे आपके यहा की लूट की याद आई.आपके डिपार्टमेंट ने हमे उस लूट की सभी डीटेल्स भेजी ही थी तो मैने यू ही नोट्स के नंबर्स मॅच किए & सारे नंबर्स मिल गये."

"ग्र8 वर्क,फ़राज़ जी."

"थॅंक्स.मैने फिर उस आदमी से कड़े तरीके से पूछ ताछ की तो पता चला की उसका 1 रेग्युलर ग्राहक था जिसे वो हर तरह की शराब मुहैय्या कराता था & ये नोट्स उसी ने एकमुश्त पेमेंट की तौर पे दिए थे & उसी ने बताया कि उसका नाम बालू है & जुर्म उसका पेशा है.उसे ये तो नही मालूम था कि डेवाले की लूट उसने की थी मगर उसका कहना था कि देव नाम के 1 शख्स के साथ उसकी बहुत छनती थी & आजकल दोनो ही हमारे शहर मे नज़र नही आ रहे.साथ ही ये भी पता चला है कि बालू को जुए की लत है & जिस रोज़ हम रेलवे यार्ड मे उस शख्स को नही पकड़ पाए थे उसी रोज़ उसने अपना बहुत बड़ा जुए का कर्ज़ा चुकाया था & उस रोज़ उसके साथ देव & 1 और कोई शख्स था..कौन ये हमे पता नही..मैने आपके दिए हुए स्केचस उसे दिखाए तो उसने बालू को तो पहचान लिया मगर दूसरे को वो नही पहचान पाया."

"फ़राज़ जी,आपने तो हमारे लिए बहुत बड़ा काम कर दिया."

"अब शर्मिंदा मत कीजिए,दिव्या जी.मैने आपको ई-मैल भेजी है उसे देख लीजिएगा.ओके,बाइ!"

"बाइ!"

बुंगले के कंप्यूटर पे दिव्या ने ई-मैल चेक की तो उसे पता चल गया कि जिस शख्स ने लूट की वॅन के टाइयर्स बदलवाए थे वो बालू ही था.दिव्या ने फ़ौरन ये जानकारी डिपार्टमेंट को दी & क्रिमिनल डेटबेस मे बालू को ढूँढा तो कुच्छ ही देर मे बालू की पूरी कहानी उसके आँखो के सामने थी.उसने सभी को ताक़ीद की कि बालू की फोटो हर थाने मे लगा दी जाए & 1 उसे पकड़ने का नोटीस जारी कर दिया जाए.

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"देख,अरशद & दीप्ति जब ड्यूटी पे होंगे & देव आराम कर रहा होगा तब हम नसीबपुरा चलेंगे..",आनेवाले ख़तरे से बेख़बर बालू चार्ली को अपना अयाशि का प्लान समझा रहा था,"..अपने-2 कमरे लॉक कर हम यहा से निकलेंगे & ट्रेन से 20 मिनिट मे वाहा पहुँच जाएँगे.",वो डेवाले की लोकल ट्रेन्स की बात कर रहा था,"..2 घंटे मे अपना काम निपटा के फिर करीब 30 मिनिट मे वापस यहा आ जाएँगे.तो 3 घंटे मे अपना काम हो जाएगा & ये बात अरशद को पता भी नही चलेगी."

"लेकिन उस्ताद अगर बाहर किसी ने देख लिया तो?",चार्ली चिंतित तो था मगर चुदाई का लालच उसे लुभा रहा था,"..अरशद बता रहा था कि वो आदमी कह रहा था कि नसीबपुरा की रेड मे वो बाल-2 बचा था फिर स्केचस भी तो जारी हैं."

"अबे यार तू बहुत डरता है!",बालू बेपरवाही से बोला,"..अब मुझे देख,कितने बरस हो गये.स्केच क्या अपनी तो फोटो है पोलिसेवालो के पास तो क्या करू?..साला जीना छ्चोड़ दू!..अबे यार,1 तो पता नही कि कब साली ज़िंदगी का खेल ख़त्म हो जाए उपर से जब तक ज़िंदा रहें,ऐसे डर-2 के मरते रहें.देख,तुझे नही जाना तो मत जा,मैं तो जाउन्गा..साला बहुत दिन हो गये किसी औरत की चूत मारे हुए!",वो उठ खड़ा हुआ,अब उसकी ओर देव की बारी थी.चार्ली भी उठा,उसकी ज़िम्मेदारी खाना बनाने की & घर की देख-रेख की थी,फिर वो दोनो जोडियो को आराम देने के लिए अकेला 2 घंटे बैठता था.

"उस्ताद..",कमरे से निकलता बालू मुड़ा,"..मैं चलूँगा आपके साथ.",जिस्म की भूख ने उसकी समझ पे परदा डाल दिया था.

"ये हुई ना बात!चल आराम कर.बताउन्गा तुझे कि कब जाना है.",बालू कमरे से बाहर निकल गया.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--55

gataank se aage............-

"Commissioner sahab,Jasjit ji ke bete ke case ki kya khabar hai?",CM Atre bas abhi-2 jasjit se milne ke baad apne daftar aaye the.

"sir,puri force isi kaam me juti hai."

"kyu?kya baki jurm hone band ho gaye hain?",atre ne 1 file utha ke paini nigah se commissioner ko dekha,"dekhiye,ye case bahut zaruri hai main manta hu magar iske chalte baki kaam nahi rukna chahiye."

"sir,hum puri mustaidi se apni zimmedariyaan nibha rahe hain."

"hun..vaise kya lagta hai kab tak suljhega ye mamla?"

"sir,aapko to pata hi hai aaj pehli baar kidnappers ne contact kiya hai.abhi tak to unki maange bhi nahi pata chali hain.kuchh pakka nahi kaha ja sakta.agar kismat achhi rahi to chand dino me suljah jayega mamla nahi to hafte bhi lag sakte hain."

"hun..",unhone file pe nazren gada di,"..hafte hi lage to thik hain.ab aap ja sakte hain."

"sir.",commissioner ne CM ki kahi aakhiri baat ka matlab samajh liya tha.vo janta tha ki atre 1 neta pehle hai & CM ki kursi use kitni pyari hai.pradhan ko kamzor karne ka koi mauka vo bhala kyu chhodega magar is sab me vo bachcha mohra ban ke reh gaya tha....lekin vo kar bhi kya sakta tha?..lekin vo is shehar ka commissioner tha..chahe kuch bhi ho jaye,vo kewal bachche ko bachane ko tavajjoh dega,atre & baki neta intezar kar sakte the.

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"kya pata chala,doc?",Ajit ne forensic lab ke chief se puchha.

"1 bahut zaruri baat."

"bataiye."

"ye SUV chori ki hai."

"achha!"

"haan,iske engine pe iska chassis number khurach ke use badalne ki koshish ki gayi hai magar fir bhi humne andaz laga liya hai ki number kya ho sakta hai..ye dekhiye.",usne 1 kagaz ajit ko diya.

"GH10045287L ya GF10095287I..thanx,doc.dekhte hain aapki nikali ye jankari kya rang lati hai."

"welcome,officer."

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"vo launda to bekar hai ye main janta hu.",Ballu Raghu & rano ke sath baitha tha,"..akela pura chehra duniya ko dikhate hue bachche ko agwa karne aa gaya,gadha kahinka!..lekin vo gang jisne us se bachche ko chheena vo peshewar hai,Baba."

"haan,balle..abhi-2 mujhe Baldev ne bataya hai ki police ko vo gadi mil gayi hai jisme ladka bhaga tha & vo gadi bhi jisme vo sochte hain ki bachcha agwa hua tha."

"kya?!"

"haan,beta magar vo gang ki gadi bilkul jali hui hai."

"dhat tere ki!",ballu jhallaya,"baba,maine sare shehar me sabhi gangs ke yaha pata karwa liya hai.ye apne shehar kya apne rajya ke kisi gang ka kaam nahi hai.sab sale soch rahe hain ki itna bada kand karne vala ye raatoraat naya gang paida kaise ho gaya!"

"paida jab bhi hua ho,ballu..",rano ki aavaz khun jamane wali thi,"..unhe maut ki nind hum hi sulayenge."

Agli raat Ajit fir ghar nahi aa paya tha & Varun & Meghna ne 1 aur raat 1 hi kamre me bitayi.is raat dono ki kashmakash aur zyada thi.dono ke dil beeti baato ko yaad kar unke jismo ki bechaini badhaye ja rahe the.

puri raat dono ne aankho-2 me kaat di.savere fir pichhle din ki hi tarah varun ke liye mona ne chai banayi jise peete hue vo tv dekh raha tha.vo car jisme kidnappers Anish ko chheen ke le gaye the,uski baramdgi ki khabar se use unke pakde jane ki kuchh umeed jagi magar tabhi tv pe agli khabar sunte hi uske hosh ud gaye.

"Varun Awasthi naam ka ye shakhs sazayafta mujrim hai & Jasjit Pradhan ke bete ke apharan ke silsile me police ko iski talash hai..",avrun ne Mona ko dekha jiske chehre pe bhi ghabrahat jhalak rahi thi.

"mona,main yaha se nikal jata hu."

"& police ke hatho me pad hata hu!bas 1 hi raat ki to baat hai varun fir apne us sathi ke paas chale jana ya fir.."

"ya fir kya?"

"main ajit se baat karu?"

"kya bataogi use ki kaise janti ho is mujrim ko..",varun fiki hansi hansa,"..mona,tumhari zindagi khushaal hai.kyu use barbad karna chahti ho!..meri zindagi jitni barbad honi thi ho chuki,ab is se zyada kuchh aur bura kya ho sakta hai.1 baar jail ja chuka hu,dusri baar chala jaoonga lekin tum apne pati se kuchh nahi kahogi."

"thik hai.",varun chai khatm kar upar chhupne chala gaya & meghna use chhupane ke baad udas apne bistar pe tab tak baithi rahi jab tak ajit vapas nahi aa gaya.

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Arshad & Dipti chudai me jute the & kamre ke ade hue darwaze se unki mast aavazen bahar aa rahi thi.is waqt anish ke kamre ke bahar ki duty Deva & Balu ki thi.Charlie dono premiyo ki nashili aahen sun garam ho chuka tha & uska jism bhi kisi ladki ke sath ki khwahish me tadap raha tha.

usne darwaze ki ot se dekha,dipti apne ghutno & hatho pe bistar pe thi & arshad peechhe se uski chut me lund ghusaaye use chod raha tha.us garam nazare ko dekh kab usk hath apne pant ke andar ghus gaya & uske lund se khelne laga use pata hi nahi chala.

dono premiyo ki pith uski taraf thi & vo arshad ki pusht gand ko bhinche hue dipti ki chut me dhakke lagate dekhte hue apna lund hila raha tha,"kya be!ba hath se hi hilayega ya fir iska istemal bhi karega!"

"h-haan..nahi...!",charlie chaunk gaya & lund pant me daal kamre me jane laga.balu hansta hua bathroom chala gaya.

"kyu be kuchh sachcha maza chahiye ya bas..",balu bathroom se bahar aaya & hatho se lund hilane ka ishara kiya.

"yaha kaise hoga.",charlie mayusi se bola.

"hoga..vo kaun thi re pichhli baar teri Shabbo..kya naam tha?"

"Gulabo.",charlie khushi se bola.

"haan,fir milega us se."

"magar kaise ustad?",charlie ne aavaz neechi kar li,"usme khatra hoga.hum yaha chhipe hain.kahi kisi ko bhanak lag gayi to?"

"kuchh nahi hoga."

"& arshad?"

"abe tu bas befikr rah & jab kahu chalne ko taiyyar rahiyo.",balu beparwahi se bola & vaha se chala gaya.

"Bilkul sahi jawab hai dost..",Professor Dixit ne Arshad se kaha,"..vaise mera naam Dixit hai."

"humari mang dhyan se sun lo & kal batao ki hume ye kab de rahe ho.",arshad ne uski baat ansuni karte hue apni mang batayi & fone kaat diya.is baar fir 8 second ke bhitar police ne call trace kar li.is baar Civil Hospital ke PCO se fone aaya tha & vaha ke police post ke incharge ko fauran vaha bheja gaya.vo daudta hua vaha pahuncha magar booth hospital ke pichhle darwaze pe bana tha.incharge ne pichhle gate ke bahar khade 1 hawaldar ko uske mobile pe jaldi booth tak pahuchane ko kaha.idhar vo constable gate se dakhil hua & usi ke bagal se arshad 1 bike se vaha se bahar nikla.

arshad ne bike vahi khadi ki jaha humesha se khadi hoti thi,1 makan ke garage me.us hathyaro ke dalal ne hi use is garage ki chabhi di thi & ye bike muhaiyya karayi thi.vaha se vo paidal paas ke market ki parking me gaya gadi nikali & bungle ki or chal pada.

"kya?!",professor & arshad ki baatchit control room me sun rahe Ajit ne jaise hi ye baat DCP Verma ko bataye unke mathe pe shikan pad gayi,chalo mere sath."

"dekhiye,Commissioner sahab apne bete ko bachane ke liye main koi bhi keemat dene ko taiyyar hu magar 1 crore ke heere..main kaha se laoon ye sab.",Jasjit ki aavaz me bebasi thi.

"Pradhan ji,main aapki pareshani samajhta hu.dekhiye,ye bahut shatir log hain.unhe rakam chhote-2 heere chahiye jinme se kisi bhi heere ki keemat Rs.10,000 se zyada na ho.yani ki karib 1000 heere unhe chahiye.ab ye heere itne chhote hote hain lagbhag kamiz ke button ke jaise ya us se bhi chhote.1badi potli me aasani se 1000 heere aa jayenge.maine aapki baat CM sahab tak phuncha di hai & vo bhi is baat ka hal dhondane me lage hue hain."

ye sari baaten jasjit ki study me ho rahi thi ki tabhi darwaze pe dastak hui & 1 naukar ke hatho chai-nashte ki trolley ke sath Nina vaha dakhil hui.uska pati to pehle se hi bade bhai ke sath vaha baitha tha.nina ne sabhi ko chai serve karwai & vaha se chali gayi.5 minute baad Bhaiya ji ko bhi ye khabar malum thi & 15 minute baad Raghu Kumbhat ko bhi.

"bhaiya,hum dono apne paise mila lete hain & baki ka udhar le lete hain."

"nahi,Mukul."

"dekhiye,pradhan ji..",commissioner ne aage kaha,"..professor unke sath baat to karega hi.vo unki mang ko neeche lane ki koshish karega magar baat ye hai ki agar hum heere de dete hain to vo pehle unhe parkhenge & fir bachche ko hume saupenge.agar hum inhe dhokha dene ki koshish karte hain to fir..",commissioner ne baat adhuri chhod di.

"nahi..commissioner sahab..main apne bachche ko ab aur khatre me nahi daal sakta.",tabhi jasjit ka mobile baja jise mukul ne utha liya.

"bhaiya,CM sahab ka fone hai.",jasjit ne mobile liya & kuchh der baat karta raha & fir fone commissioner ko thama diya.

"CM sahab ne 1 upai sujhaya hai.rajya ke Gem Trading Corporation se vo ye heere hume dilwa denge & hum inki keemat baad me chuka sakte hain.."

"..& agar hum unhe dabochne me kamyab ho gaye tab to koi baat hi nahi hai.bachcha bhi humare paas hoga & heere bhi.",commissioner ne fone jasjit ko lauta ke uski baat puri ki.jo commissioner ne nahi bataya vo ye ki CM Atre ne use fone rakhne se pehle ye kaha tha ki heere agar vapas nahi mile to bahut achha hoga.matlab saaf tha ki fir us keemat ko chukane me jasjit ko kafi samay lagega & fir CM ka rasta saaf tha.

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"1 baat to tay hai..".professor Divya & Namit ke sath baitha tha,"..ye jitne bhi logo ka gang hai unme se koi 1 ya to jauhri hai ya fir heero ka jankar."

"hun..magar professor mujhe lagta hai ki un heero ke zariye unhe pakadna to aasan ho jayega.hum heero ko track kar un tak pahunch sakte hain."

"nahi divya ji,vo chhote size ke heere aapko keval chhote jauhriyo se milte hain.unpe koi sarkari mark bhi nahi hoga chahe aap unhe jaha se le len."

"par hume kharidte waqt to card milta hai jisme unke asli hone ki sarkari mohar lagi rehti hai."

'bilkul sahi,namit ji magar heere pe to koi marking nahi hoti.bahut se bahut aap heere ko jauhri se janchwa ke uske sath ke card me likhi baat ki sachchai parakh sakte hain.bade heero pe to marking hoti bhi hai magar in chhote-2 heero pe aisa kuchh nahi hota."

"yani unhe track karna mushkil hai?"

"bahut.",professor soche ja raha tha.ye log bahut chalak the & iska matlab tha ki utne hi khatarnak bhi honge.use pehli baar apni zimmedar ka bojh mehsus hua & uske dil me 1 baar fir vahi darr aaya ki agar bachche ko kuchh ho gaya to vo kya dobara us sadme ko jhel payega.Deepali ki maut vale hadse me use apni mehbooba ko khone ka dard to tha hi magar sath me nakam hone ki tees bhi thi.ab fir se vahi tees kya use tod nahi degi?..usne thandi sans bhari..jo hoga dekha jayega..abhi to bas ye kaam thik se ho jaye.

Savere ke 4 baje Meghna ki nind khuli to usne dekha ki Varun farsh pe lage bistar pe nahi hai.vo jhatke se uthi to dekha vo taiyyar ho ke bathroom se nikal raha hai,"ab main chalunga."

"hun..drawing room me baitho,main chai banati hu.",vo rasoi me chali gayi.

khamoshi se dono chai peete hue tv dekh rahe the.meghna ko samajh nahi aa raha tha ki uska dil baitha kyu ja raha tha.varun se ab koi rishta vo rakhne ki soch bhi nahi sakti thi.usne uski jo bhi madad ki vo isliye kyuki vo un dono ke beech ke us khubsurat rishte ko bhuli nahi thi jo badkismati se tut gaya tha..& varun ne bhi in teen dino me koi aisi harkat ya baat nahi ki jis se lage ki vo abhi bhi use pyar karta tha.

"Mona..",varun khada tha,"..ab jata hu.tumne jo kiya vo to shayad hi koi karta.itna bada khatra mol liya tumne mere liye."

"please varun..",aage agar bolti to shayad uski rulayi chhut jati.

"ok,mona.bye!"

"1 minute,varun.",meghna bhagti hui drawing room se bahar gayi & jab vapas aayi to uske hatho me kuchh paise the.

"mona,please..main ye nahi le sakta.",mona ne chupchap sare paise uski kamiz ki jeb me daal diye.

"varun,bas 1 baat yaad rakhna ki chahe jiski madad lo,jo bhi karo..tum 1 achhe insan ho & koi peshevar mujrim nahi.",varun ne uska hath pakda & uski aankho me dekha.megna ki aankho ki nami use apni nigaho me bhi mehsus hui.

"bye!",usne uska hath dabaya & vaha se nikal gaya.ab uski manzil thi Musa ka adda jaha use umeed thi ki use apni mushkil se chhutkara mil hi jayega.

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Divya ki aankh khuli to 1 pal ko use samajh nahi aaya ki vo kaha hai fir jab nind puri tarah khuli to use yaad aaya ki vo Professor Dixit ke sath usi ke kamre me hai.kal din me ghar ki bijli achanak chali gayi thi & use thik karne ke bahane me 2 log aaye & professor ke kamre ke bugs fir se chalu kar gaye the.is baar ynhone uske bistar ke headbord ke peechhe 1 bug fit kiya tha & dusra fir se guldaste me.

professor ne guldaste me taze phool laga ke pani bhar diya & us bug ko bekar kar diya.palang ke sirhane vale bug ke taar ko latka dena to aur bhi aasan kaam tha.uske baad fir se camere pe 1 kapda daal andhere kamre me usne divya ko jum ke choda tha.

raat ki harkato ne divya ko kafi thaka diya tha & isliye use kafi gehri nind aayi thi.vo uthi & apne kapde pehanane lagi ki tabhi fone ghanghana utha..itni subah kidnappers ka phone!

usne jhat se kapde pehan kamre ke darwaza khola.tab tak professor ne fone utha liya tha,"Dixit bol raha hu,dost."

"humari maango ka kya hua?"

"kya dost..itni badi mang hai & fir hume bachche ki salamati ka koi asboot nahi diya.",Arshad man hi man muskuraya..bada hoshiyar aadmi tha isliye to usne apne mobile me Anish ki baat record ki thi.usne use on kiya.

"..main thik hu,mummy-papa.na bimar hu na koi chot lagi hai.bilkul achha hu.",call trace ho gayi thi.

"Lajpat Kunj..A block..ke paas ke booth se call ki ja rahi hai.",control room me baithe technician ne location batayi,"..haan..park ke paas.",ye jankari fauran vaha ke sabse nazdiki patrol car ko di gayi.

"humari mang mani ki nahi?"

"yaar kuchh to kam karo.bahut zyada rakam hai."

"main kal fir fone karunga.agar haan nahi bola to fone ke 6 ghante baad Anish ka kuchh saman tumlogo ko mil jayega.",track suit pehne arshad ne fone kata & booth se nikal jogging karta park me dakhil ho gaya.uske nikalne ke 5 second baad hi patrol car vaha pahunchi & policevale ilake ko chhanane lage.tab tak arshad park ke dusre chhor ke gate se nikal apni bike pe savar vaha se nikal chuka tha.

professor ka badan thande pasine se naha gaya tha,vo janta tha anish ke saman ka kya matlab tha..us masoom ke jism ka koi hissa ya fir..usne sar jhatka & Namit ki or dekha,"apne boss ko kahiye ki heero ka jald intezam karen & agar nahi hain to mujhse milen main kuchh na kuchh karwaunga!",professor ki aavaz ki chinta ne divya & namit dono ko pareshan kar diya tha.shayad pehli baar unhe ehsas hua tha ki mamla kitna sangin hai.

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"kya vo car Tamil Nadu se chori hui thi?",jali SUV ko dekh ke jo 2 chassis nos. ka surag mila tha,unme se 1 sahi tha & uska pata chal gaya tha,"..ok..thik hai.",ajit ne intercom rakha & asmne baithe inspector se mukhatib hua,"..south India se chori gaadiya yaha bahut khapayi jati hain.ye us SUV ka asli number hai.ise leke shehar ke sabhi chori ki gadiyo ke dalalo ki khabar lo & rajya ke baki shehro me bhi ye number flash karwa do."

"sir."

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"divya ji?"

"ji bol rahi hu.",divya ne apne mobile pe anjan number dekh ke fone receive kiya.

"main Faraz bol raha hu Panchmahal se."

"oh..hello faraz ji!kaise hain aap?"

"badhiya hu divya ji aapke kaam ki 1 baat pata chali hai."

"achha.kya?"

"jis case ke silsile me aap humare shehar aayi thi usi ka 1 bahut bada surag mila hai."

"achha."

"haan,1 lutere ka naam pata chal gaya hai hume."

"kya?kaise?",divya ki hairat & khushi ka thikana nahi tha.

"abhi kuchh din pehle routine traffic checking me 1 aadmi humare hath laga jiski bike ki dickiy me naqli sharab bhari thi.hirasat me lene ke baad us se hume 500 ke 40 notes mile.humare 1 inspector ne pehle un notes ki janch 1 bank me karwai ki kahi ye naqli to nahi.notes to bilkul asli the magar jab hum unhe malkhane me rakhne lage to mujhe aapke yaha ki loot ki yaad aayi.aapke department ne hume us loot ki sabhi details bheji hi thi to maine yu hi notes ke numbers match kiye & sare numbers mil gaye."

"gr8 work,faraz ji."

"thanx.maine fir us aadmi se kade tarike se puchhtachh ki to pata chala ki uska 1 regular grahak tha jise vo har tarah ki sharab muhaiyya karata tha & ye notes usi ne ekmusht payment ki taur pe diye the & usi ne bataya ki uska naam Balu hai & jurm uska pesha hai.use ye to nahi malum tha ki Devalay ki loot usne ki thi magar uska kehna tha ki Deva naam ke 1 shakhs ke sath uski bahut chhanti thi & aajkal dono hi humare shehar me nazar nahi aa rahe.sath hi ye bhi pata chala hai ki balu ko jue ki lat hai & jis roz hum railway yard me us shakhs ko nahi pakad paye the usi roz usne apna bahut bada jue ka karza chukaya tha & us roz uske sath deva & 1 aur koi shakhs tha..kaun ye hume pata nahi..maine aapke diye hue sketches use dikhaye to usne balu ko to pehchan liya magar dusre ko vo nahi pehchan paya."

"faraz ji,aapne to humare liye bahut bada kaam kar diya."

"ab sharminda mat kijiye,divya ji.maine aapko e-mail bheji hai use dekh lijiyega.ok,bye!"

"bye!"

bungle ke computer pe divya ne e-mail check ki to use pata chal gaya ki jis shakhs ne loot ki van ke tyres badalwaye the vo balu hi tha.divya ne fauran ye jankar department ko di & criminal database me balu ko dhoonda to kuchh hi der me balu ki puri kahani uske aankho ke samne thi.usne sabhi ko taqeed ki ki balu ki foto har thane me laga di jaye & 1 use pakadne ka notice jari kar diya jaye.

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"dekh,arshad & dipti jab duty pe honge & deva aaram kar raha hoga tab hum Nasibpura chalenge..",aanevale khatre se bekhabar balu Charlie ko apna ayasshi ka plan samjha raha tha,"..apne-2 kamre lock kar hum yaha se niklenge & train se 20 minute me vaha pahunch jayenge.",vo devalay ki local trains ki baat kar raha tha,"..2 ghante me apna kaam nipta ke fir karib 30 minute me vapas yaha aa jayenge.to 3 ghante me apna kaam ho jayega & ye baat arshad ko pata bhi nahi chalegi."

"lekin ustad agar bahar kisi ne dekh liya to?",charlie chintit to tha magar chudai ka lalach use lubha raha tha,"..arshad bata raha tha ki vo aadmi keh raha tha ki nasibpura ki raid me vo baal-2 bacha tha fir sketches bhi to jari hain."

"abe yaar tu bahut darta hai!",balu beparwahi se bola,"..ab mujhe dekh,kitne baras ho gaye.sketch kya apni to foto hai policevalo ke paas to kya karu?..sala jeena chhod du!..abe yaar,1 to pata nahi ki kab sali zindagi ka khel khatm ho jaye upar se jab tak zinda rahen,aise darr-2 ke marte rahen.dekh,tujhe nahi jana to mat ja,main to jaunga..sala bahut din ho gaye kisi aurat ki chut mare hue!",vo uth khada hua,ab uski or deva ki bari thi.charlie bhi utha,uski zimmedari khana banane ki & ghar ki dekh-rekh ki thi,fir vo dono jodiyo ko aaram dene ke liye akela 2 ghante baithata tha.

"ustad..",kamre se nikalta balu muda,"..main chalunga aapke sath.",jism ki bhukh ne uski samajh pe parda daal diya tha.

"ye hui na baat!chal aaram kar.bataunga tujhe ki kab jana hai.",balu kamre se bahar nikal gaya.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--56

गतान्क से आगे............-

"चल जल्दी बता साहब को किसे बेची थी वो गाड़ी?",इनस्पेक्टर ने इनटेरगेशन रूम मे कुर्सी पे बैठे उस घबराए शख्स को & 1 और तमाचा जमाया.वो इनस्पेक्टर दिन भर सर खपाने के बाद & 5 चोरी की गाडिया बेचने वालो से कड़ी पुच्छ-ताछ करने के बाद उस शख्स तक पहुँच ही गया था जिसने वो सुव बेची थी.

"साहब..अब मुझे उसका नाम-पता कैसे मालूम होगा.",वो गिड़गिडया,"..बस उसकी शक्ल याद है."

"हूँ..उसने तुम्हे पेमेंट कैसे किया था..मतलब कैसे नोट थे?",अजीत का दिमाग़ तेज़ी से चल रहा था.

"1000 & 500 के नोट्स थे."

"तूने क्या किया उन पैसों का?"

"साहब,कुच्छ खर्च हो गये कुच्छ हैं."

"कहा हैं?"

"1 बार मुझे छ्चोड़ दें साहब,बस मैं सब आपको दे दूँगा..बल्कि आप जीतने बोलो उतने पैसे आपको पहुचा दूँगा."

"अबे साले..कमिने..",इनस्पेक्टर ने उसकी धुलाई शुरू कर दी,"..हमारे साब को घूस देने की कोशिश कर रहा है.चल,चोरी की गाड़ी बेचने-खरीदने के अलावा अब सरकारी अफ़सर को घुस देने का चार्ज भी तुझपे लगाता हू."

"अरे नही साब..हाईईइ..नही..मेरा वो मतलब नही था....",अजीत के इशारे पे इनस्पेक्टर रुक गया.

"तो उसका हुलिया बताओ.",फिर वो इनस्पेक्टर से मुखातिब हुआ,"..वो पैसो को बरामद करो & उन्हे चेक करो.शायद कुच्छ हाथ लगे & इसे हमारे रेकॉर्ड्स के सभी क्रिमिनल्स की तस्वीरे दिखाओ."

"साहब."

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"ये तो बड़ी अच्छी खबर है,दिव्या.अब उन लुटेरो का पकड़ मे आना दूर नही लगता."

"हां,प्रोफेसर मगर हम तो इस केस मे फँसे हैं तो कही वो हमारे हाथ से बच ना जाए."

"हाँ ये बात भी है लेकिन इस समय इस केस से ज़्यादा किसी और केस को तवज्जो भी तो नही दे सकते."

"हां."

"प्रोफेसर.",नामित वाहा आ गया,"आपकी कही बात से मुझे 1 आइडिया सूझा & मैने रेकॉर्ड्स खंगलवाए & ये देखिए मुझे क्या मिला!",नामित बहुत जोश मे था.

"क्या मिला,नामित जी?"

"ये आदमी.",उसने देव की तस्वीर दोनो के सामने की,"देव,सुनारो के परिवार मे इसकी पैदाइश हुई थी & काफ़ी दीनो तक इसने यही काम किया फिर जुर्म की दुनिया मे उतर गया."

"आपने ये इन्फर्मेशन डीसीपी साहब को दे दी?"

"नही,प्रोफेसर अभी नही.मैने सोचा पहले आपसे बात कर लू.कही ऐसा तो नही होगा कि वो मुझे बेवकूफ़ समझेंगे?"

"नामित..",जवाब दिव्या ने दिया,"..हम इस केस मे पूरी तरह से अंधेरे मे हैं.ऐसे मे कोई भी बात कितनी भी सीधी सी क्यू ना लगे बेकार नही होती.तुम बेझिझक वेर्मा सर को ये बात बताओ.ज़्यादा से ज़्यादा क्या होगा..ये देव बेकसूर निकलेगा यही ना!..तो क्या हुआ है तो ये पेशेवर मुजरिम इस्पे शक़ तो लाज़मी है."

"थॅंक यू.",नामित वाहा से निकल गया.

आज भैया जी बहुत खुश थे,आज उन्हे फोन करके नीना को बुलाना नही पड़ा था,वो खुद उनसे मिलने आ रही थी उनके सरकारी बंगल पे.उन्होने बस बाहर के गार्ड्स को पहरे पे रहने दिया था & घर के नौकरो को उन्होने छुट्टी दे दी थी.वो आज नीना के साथ जम के लुत्फ़ उठना चाहते थे.फोन पे उसकी खनकती आवाज़ ने ही उन्हे गरम कर दिया था.

इंटरकम बजने पे उन्होने उसे उठाया तो गार्ड ने उन्हे नीना के आने की खबर दी तो उन्होने उसे अंदर भेजने को कहा & साथ ही ये ताकीद की कोई भी तब तक अंदर ना आए जब तक की उनका हुक्म ना हो.इसके बाद उन्होने अपने सारे कपड़े उतार दिए & सोफे पे बैठ अपने लंड को सहलाने लगे.

"आओ मेरी जान.",नीना जैसे ही अंदर दाखिल हुई उसकी आँखे हैरानी से फैल गयी,"..दरवाज़ा बंद कर दो.",उसने दरवाज़ा बंद किया & फिर घूम वही खड़ी रही.उसे इस बात की उम्मीद नही थी कि भैया जी यू नंगे उसका इंतजार कर रहे होंगे.

"खड़ी क्यू हो?हमारे पास आओ.",उन्होने लंड को थोड़ा हिलाया.नीना वैसे ही खड़ी सकुचने का नाटक करने लगी.

"जी..वो..आपको लगेगा कि मैं नखरे कर रही हू..मगर आज सच मे वक़्त नही है मेरे पास..",भैया जी ने उसे सर से पाँव तक देखा.आज नीना ने काले रंग की स्लीवेलेस्स,कसी ड्रेस पहनी थी जो उसके घुटनो तक आ रही थी.जब वो दरवाज़ा बंद करने घूमी थी तो उसकी 36 साइज़ की गंद & ज़्यादा उभरी दिखी थी,"..वो तो मुझे कुच्छ ऐसी बता पता चली कि लगा कि आपको खुद मिलके बता दू."

"तो बताओ ना.",भैया जी सोफे से उठा उसके करीब आए & बाई बाँह को उसके बाए कंधे पे रख उसके बदन को घेरते हुए दाए मे उसका दूसरा हाथ थाम उसे अपने साथ सोफे पे ले आए & उसे खुद से सटा के बैठ गये.उनका बाया हाथ नीना के मखमली बाज़ू सहलाने मे लग गया & दाए से उसने नीना के दाए हाथ को उठा अपने होंठो से लगा लिया.कुच्छ देर तक चूमने के बाद वो उसकी उंगलियो को हौले-2 चूसने लगे तो नीना कसमसने लगी.

"प्लीज़..मत करिए!..मेरी बात तो सुन लीजिए.",भैया जी का बाया हाथ उसके बाज़ू से सरक के उसकी कमर पे आ गया था & दबा रहा था.वो सर पीछे कर नीना की गर्दन के पिच्छले हिस्से & ड्रेस की गहरी बॅक मे से दिख रही उसकी चिकनी पीठ को चूम रहे थे.

"आपको पता है क्या फिरौती मागी है किडनॅपर्स ने....नही....प्लीज़...आप भी ना..!",भैया जी ने उसका बाया हाथ अपने लंड पे रख दिया & उसने जब ना-नुकर की तो तब तक उसे लंड पे दबाए रहे जब तक नीना ने अपने कोमल हाथ से उनके सख़्त लंड को हिलाना नही शुरू कर दिया.

"नही..जानेमन बताओ क्या कीमत लगी है उस मासूम की?",उन्होने ड्रेस की ज़िप को नीचे कर नीना की पीठ पे बेसब्री से हाथ फिराया.

"उन्न....नही..प्लीज़.",नीना लंड छ्चोड़ ड्रेस की ज़िप वापस बंद करने को छटपटाई तो भैया जी ने मुस्कुराते झुए उसकी ड्रेस के स्ट्रॅप्स को कंधो से नीचे कर दिया & उसे बाहो मे भर उसकी छातियो को अपने सीने से दबा दिया.दबाव के चलते उसकी दूधिया चूचियाँ ब्रा से छलक के बाहर आने को आतुर दिख रही थी.

उन्होने नीना के रसीले होंठो को अपने होंठो की गिरफ़्त मे लिया & तब तक उन्हे चूमते रहे जब तक नीना भी थोड़ी मस्ती मे नही आ गयी & अपने होंठो को खोल उनकी ज़ुबान को अपनी ज़ुबान से लड़ जाने दिया.

"1 करोड़ के हीरे माँगे हैं उन्होने.",उसने उनकी छाती पे हाथ जमा उन्हे दूर कर किस तोड़ी.

"क्या?!",भैया जी चौंक पड़े.उन्होने उसका ब्रा नीचे कर उसकी चुचियाँ नंगी की & उन्हे झुक के चूमने लगे.

"उम्म..नही..प्लीज़...आहह..",उन्होने हल्के से उसके शहद के रंग के निपल्स को बारी-2 काटा,"..प्लीज़....आप मुझे मरवाएँगे..हॅयियी...ऊहह...!",भैया जी सब भूल उसकी चूचियो को दबाने,चूसने मे जुट गये.नीना उनके सर को पकड़ उनके बॉल खींचने लगी.भैया जी के लिए ये समझना मुश्किल था कि ऐसा वो उन्हे रोकने के लिए कर रही है या मस्ती मे बहाल होके.नीना का जिस्म अब पूरी तरह से मस्त था.उसकी चूत गीली हो गयी थी & वो बेचैनी मे अपनी भारी जंघे आपस मे रगड़ रही थी.

"तो क्या जसजीत तैय्यार है इतनी बड़ी रकम चुकाने के लिए?",उन्होने जी भर के उसकी छातियो को चूसा & चूमा & जब नीना का जिस्म झटके खाते हुए उसके झड़ने की गवाही देने लगा तो उन्होने अपना सर उसके सीने से अलग किया & उसे खड़ा कर दिया.

"हां.",वो उसकी ड्रेस उतार रहे थे & वो हाथो से अपने सीने को ढँके खड़ी थी.

"मगर ये तो बहुत बड़ी रकम है?",उन्होने उसकी पॅंटी खींचनी चाही तो नीना ने उनका हाथ थाम लिया मगर उन्होने उसका हाथ किनारे किया & उसकी रस से लिसदी पॅंटी को उतार दिया.

"CM अत्रे उसे गेम ट्रेडिंग से हीरे दिलवा रहे हैं."

"क्या?",भैया जी ने उसे सोफे पे लिटाया तो नीना नही मानी.

"नही..बहुत देर हो जाएगी..1 तो आपके काम से आई & आप मुझे ही..नही कपड़े पहनने दीजिए.",भैया जी ने खड़ी नीना को बाहो मे भर उसे अपनी गोद मे बिठा लिया.

"अरे,मेरी रानी हर बार ऐसे ही घबराती हो!मगर कुच्छ नही होता.",उसकी कोमल गंद का दबाव लंड पे पड़ते ही उनका दिल उसे चोदने को बेकरार हो उठा.

"इसलिए तो और डर लगता है कि कब तक किस्मत हमारा साथ देगी.जाने दीजिए ना!",वो उनकी गोद से उठने लगी तो उन्होने उसकी कमर थाम उसे गोद मे बिठा लिया & सोफे की बॅक से टेक लगाते हुए उन्होने उसकी पीठ अपनी छाती से लगा ली & बाए हाथ से उसकी कमर को जकड़ा & दाए से उसकी चूत मे उंगली करने लगे.

"ऊहह....हाईईईईईई.....उउउउन्न्न्न्ह्ह्ह्ह..प्लेआस्ीईए......!",भैया जी की उंगली की रगड़ से वो बहाल उनके उपर लेट सी गयी & अपना सर उनके बाए कंधे पे टीका दिया & मज़े मे आँखे बंद कर अपनी कमर हिलाने लगी.

"सीयेम उसे मुफ़्त मे हीरे दे रहा है?"

"आन्न्‍न्णनह..नही..ओईइ....भैया को सारी कीमत चुकानी पड़ेगी लेकिन पोलीस को यकीन है की..हाईईईईईईईईईईईईई.......आआनह..",भैया जी बहुत ज़ोर-2 से उसकी चूत मे अपनी 2 उंगलिया कर रहे थे & वो भी मस्ती मे चीखते हुए अपनी कमर उच्छाल रही थी,"..वो बदमाशो को .....ऊहह...धार दबोचेगी......आआन्न्न्नह..!",नीना कुच्छ ही पलो मे दोबारा झाड़ गयी.

भैया जी की समझ मे अत्रे का खेल आ गया था.उन्होने नीना को सोफे पे उल्टा लिटाया & उसकी गंद सहलाने लगे.वो समझ गये थे कि अब पोलीस ज़रूर किडनॅपर्स को पकड़ेगी & उन्हे उसी वक़्त ख़त्म कर देगी.हीरे बरामद होंगे मगर कहा ये जाएगा कि ना किडनॅपर्स मिले ना ही हीरे.हीरे जाएँगे CM की जेब मे & प्रधान अपना सियासी करियर भूल उन हीरो की कीमत अदा करता रहेगा.उन्होने नीना की मक्खनी गंद को चूम लिया,ये औरत बड़े काम की थी.ना केवल उसने उन्हे बिस्तर मे वो अंजाना एहसास दिलाया था बल्कि अब उनके करियर मे भी उनके काम आ रही थी.वो झुक के उसकी गंद चाटने लगे तो नीना अपनी गंद उचका के उनके चेहरे मे घुसाने लगी.भैया जी समझ गये कि अब वो पूरी तरह से मस्त है & उनका चुदाई मे पूरा साथ देगी.

वो अपने घुटनो को उसके जिस्म की दोनो ओर जमा के उसकी गंद पे बैठ गये & उसकी दरार मे अपना मोटा लंड फँसा के उसकी मोटी फांको को हाथो मे दबोच लिया & उन्हे दबाते हुए अपना लंड आगे-पीछे करने लगे.उसकी गंद से हाथ आगे उसकी कोमल पीठ पे फिसलते हुए उन्होने उसकी ब्रा के हुक्स खोल दिए.लंड के गर्म एहसास को महसूस करते ही नीना आहे भरने लगी.1 घंटे बाद उन्हे पोलीस डिपार्टमेंट मे तैनात उनका आदमी भी उन्हे इस बारे मे और खबर देने वाला था.उन्होने सोच लिया था कि इस मामले से प्रधान को हराने के अलावा & कैसे फ़ायदा उठाया जा सकता है लेकिन वो सब बाद मे.अभी केवल नीना & उसके नशीले जिस्म का लुत्फ़ उठना उनका मक़सद था.

उसकी गंद की फांको को दबाते हुए उन्होने फैलाया & इस बार उसकी दरार मे फिसलते अपने लंड को उसकी चूत के छेद मे घुसा दिया.

"ऊव्ववव..!",सर सोफे से उठा नीना करही.भैया जी उसकी गंद पे बैठे उसे चोदने लगे.नीना की चूत की कसावट उनके लंड को पागल किए जा रही थी.वो उसकी गान्ड पे हाथ रखे बस धक्के पे धक्के लगाए जा रहे थे.नीना भी मस्ती मे अपनी गंद उचकाने लगी थी.उसे बहुत मज़ा आ रहा था.भैया जी का लंड उसकी चूत की गहराइयो मे उतरा उसकी चूत की दीवारो से रगड़ के उसे जन्नत की सैर करा रहा था.उसने सोफे के गद्दे को अपने हाथो से भींच लिया & अपना सर बेचैनी से हिलाते हुए बुरी तरह गंद उचकाने लगी.उसकी गंद पकड़े उसे चोद्ते हुए भैया जी समझ गये कि वो 1 बार फिर झाड़ गयी है.

उन्होने लंड बाहर खींचा & नीना को गोद मे उठा लिया & उसे अपने कमरे मे ले गये & बिस्तर पे लिटा दिया फिर उसकी टाँगे फैलाई & उसकी चूत से बह रहे रस को चाटने लगे.नीना सर के नीचे रखे तकिये को हाथो से पकड़ कसमसाती हुई आहे भरने लगी.झड़ने के बाद उसकी चूत बड़ी संवेदनशील हो गयी थी & ऐसे मे उसके आशिक़ का यू उसकी चूत मे ज़ुबान फिराना उसे पागल कर रहा था.

तभी भैया जी का मोबाइल बजा.उन्होने नंबर देखा,उनके पोलिसेवाले ने वक़्त से पहले ही फोन कर दिया था.उन्होने फ़ौरन ब्लुएतूथ हंडसफ़री किट कान मे लगाया & फिर से नीना की जंघे फैला,उन्हे सहलाते हुए उसकी चूत चाटने लगे,"बोलो."

"सर,बड़ी काम की बात पता चली है.जो एसीपी प्रोफेसर के साथ तैनात है उसे 1 बात सूझी है कि कही किडनॅपर्स मे कोई जवाहरात का जानकार तो नही.."

"अरे काम की बात करो!",भैया जी झल्ला उठे,1 तो उनके मस्ताने खेल के बीच खलल डाल रहा था उपर से बेकार की बाते कर रहा था.उन्होने सारा रस पीने के बाद नीना की खुली जाँघो के बीच घुटने पे बैठ अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दिया & 1 बार फिर उसकी चुदाई शुरू कर दी.

"सर,देव नाम का 1 अपराधी शक़ के दायरे मे आया है मगर मुश्किल ये है कि हमारे मुखबिरो का कहना है कि वो इधर पंचमहल शिफ्ट हो गया है & यहा शायद काम नही करता."

"हूँ.ठीक है.और कुच्छ?",भैया जी ने नीना के घुटने मोड़ दिए थे & उन्हे उसकी मोटी चूचियो पे दबाए उसे चोदे जा रहे थे.नीना वैसे ही कभी बिस्तर,कभी तकिये को बेचैनी से अपने हाथो मे पकड़ती आहे भरे जा रही थी.

"जी नही,सर."

"ठीक है.परसो दफ़्तर आके अपना इनाम ले जाना."

"शुक्रिया सर.",पोलीस वाला हंसा तो भैया जी ने फोन बंद कर कीट कान से निकाल के फेंक दिया & अपनी माशूका के घुटनो को दबोचे उसके उपर लेट गये & अब बड़े शदीद धक्को के साथ उसकी चुदाई करने लगे.नीना की चूत की कसावट अब उन्हे बहुत बुरी तरह से महसूस हो रही थी & अब वो भी झड़ने के करीब पहुँच रहे थे.

"किसे इनाम दे रहे थे?....ऊओह...हाईईइ.....!",नीना ने उन्हे अपनी बाहो मे कस लिया & उनकी पीठ पे अपने बेसब्र हाथ फिराने लगी.भैया जी ने उसके घुटने छ्चोड़े तो उसने अपनी टाँगे उनकी टाँगो के उपर रख दी & तलवो को उनकी टाँगो के उपर जमा नीचे से कमर हिलाते हुए उचकने लगी.

"1 ऐसा शख्स था जिसकी जानकारी हमे कामयाबी दिलाएगी ताकि तुम ज़िंदगी भर मेरी रानी बन के रह सको....आहह..!",नीना ने उचकते हुए उनकी गंद मे नाख़ून धंसा दिए थे & उनके बाए कान मे दीवानो की तरह जीभ फिराने लगी थी.अपनी प्रेमिका के झड़ने को महसूस करते ही भैया जी का लंड भी पिचकारिया छ्चोड़ने लगा & वो भी झटके खाते हुए नीना की चूचियो पे ढेर हो गये.

"सेठ मोहन लाल डकैती केस वाली फाइल अपडेट कर दी?",दिव्या थोड़ा वक़्त निकाल दफ़्तर आई थी.

"जी मेडम,आप प्लीज़ ऑनलाइन डेटबेस मे अपडेट कर डीजये..",कॉन्स्टेबल ने कंप्यूटर ऑन किया,"..मैं हार्ड कॉपी लेके आता हू,उसपे आपके दस्तख़त चाहिए."

"हूँ.",ये बहुत बड़ा सुराग हाथ लगा था दिव्या को.गुलबो ने अपने पास आने वाले लुटेरे का नाम विकी बताया था & दिव्या को पूरा यकीन था कि वो उस बंदे का नक़ली नाम था मगर बालू की खबर तो बिल्कुल पक्की थी.हवलदार फाइल ले आया तो उसने उसपे दस्तख़त किए & ऑनलाइन डेटबेस मे भी लॉगिन करके वही जानकारी अपडेट कर दी.

फाइल लेके वो डीसीपी वेर्मा के दफ़्तर जाने लगी ताकि उन्हे दोनो केसस के बारे मे जो भी नयी जानकारी जमा हुई,उस से वाकिफ़ करा दे.दिव्या कॅबिन से निकली तो बाहर के हॉल मे काम कर रहे लोगो की गहमागहमी देख उसे बहुत भला लगा.पिच्छले कुच्छ दीनो से बंगल पे रह के वो थोड़ा उकता गयी थी.

"अबे ठीक से देख..",उसने देखा की 1 इनस्पेक्टर 1 बड़े सहमे शख्स को जोकि कुर्सी पे बैठा था 1 चपत लगा रहा है,"..तभी तो पहचानेगा & हां..अगर यू ही किसी का नाम लिया तो बेटा तुझे ही इस केस मे अंदर कर दूँगा.",दिव्या ने देखा कि ये इनस्पेक्टर अजीत के मातहत काम करता था.

"इनस्पेक्टर.."

"मेडम.",उसने सलाम ठोंका,"..यही है जिसने सुव बेची थी.",उसने दिव्या के सिहरे से पुच्छे सवाल का जवाब दिया,"..अब साहब ने कहा है कि इसे ये आल्बम दिखाऊँ शायद किसी को पहचान ले."

"हूँ.",दिव्या आगे जाने लगी की तभी सामने से आती 1 लेडी कॉन्स्टेबल से वो टकरा गयी & फाइल उसके हाथ से गिर गयी.

"सॉरी मेडम.",वो कॉन्स्टेबल फटफट बिखरे पन्ने उठाने लगी.

"कोई बात नही.",दिव्या उसकी मदद करने लगी.1 पन्ना उस सहमे शख्स के कदमो के पास गिरा था.दिव्या ने देखा कि उसने उस पन्ने को गौर से देखा & फिर आल्बम देखने लगा.दिव्या ने कॉन्स्टेबल से पन्ने लिए,वो शख्स 1 बार फिर उसी गिरे पन्ने को देख रहा था.दिव्या उसके नज़दीक गयी तो उसने हड़बड़ा के फिर से आल्बम मे नज़रे गढ़ा दी.दिव्या ने पन्ना उठाया तो उसपे उसी आर्म्स डीलर का स्केच था जिसकी तलाश मे अजीत नसीबपुरा गया था.उसने तो इस शख्स का स्केच इसलिए लगाया था कि अगर कही ये पकड़ मे आता है तो शायद वो उसे उस विकी नाम के गुलबो के ग्राहक का पता बता दे.

"तुम इसे जानते हो?",दिव्या ने स्केच उस चोरी के गाड़ी बेचने वाले के सामने किया.

उसने ना मे सर हिलाया & अपनी आस्तीन से माथे पे चूचुहा रहा पसीना पोंच्छने लगा.एसी हॉल मे उसे पसीना आ रहा था,ये देख दिव्या मुस्कुराइ & उसके सामने मेज़ पे बैठ गयी,"कौन है ये?"

"अबे बताता है या फिर से तुझे दवाई चाहिए..हैं?",उस कॉन्स्टेबल ने अपना उल्टा हाथ दिखाया.

"बा..बताता हू..लेकिन.."

"अबे लेकिन के..जल्दी बोल!",उसने उसे फिर घुड़का.

"मेडम..अगर मैं ग़लत हुआ तो क्या मुझे अंदर कर देंगी?"

"नही..तुम पहले ये बताओ कि इसे जानते हो तो कैसे जानते हो?"

"मेडम..इसकी शक्ल उसी से मिलती है जिसने मुझसे गाड़ी खरीदी थी."

"क्या?!"

"जी,मेडम."

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"ये तो बहुत बड़ा सुराग हाथ लगा है.",डीसीपी वेर्मा कुर्सी पे हाथो को जोड़े बैठे थे.

"सर."

"हां,दिव्या.".कमरे मे अजीत भी मौजूद था.

"मेरा ख़याल है कि जिस गॅंग ने सेठ मोहन लाल को लूटा था उसी का हाथ है अनीश की किडनॅपिंग मे."

"ये तुम कैसे कह सकती हो?"

"सर,इस आर्म्स डेलाएर को 1 लुटेरे के साथ देखा गया था."

"अब ये किडनॅपिंग के लिए गाड़ी खरीद रहा है & हमे अच्छी तरह पता है कि शहर का कोई भी गॅंग इस मामले मे शामिल नही है तो फिर वही लोग बचते हैं शक़ के दायरे मे."

"हूँ..गुड पॉइंट.यानी कि अगर हम बालू को पकड़ने मे ध्यान लगाए तो शायद ये मामला सुलझ जाए..",वो अजीत से मुखातिब हुए,"..अजीत,ये बात अभी बस हम तीनो & प्रोफेसर दीक्षित तक ही रहनी चाहिए.अब जब तक हम किसी को पकड़ नही लेते,हम कोई जानकारी किसी से नही बाटेंगे."

"ओके,सर.मगर क्यू?"

"कोई खास बात नही बस इसलिए की जितना ज़्यादा लोग बातो को जानते हैं उतना उसके लीक होने का खतरा बढ़ता है."

"सर,नामित को बताना है या नही?"

"अरे उसे तो मैं भूल ही गया था.हाँ,उसे बताना है मगर उसे भी मेरी बात समझा देना."

"ओके,सर."

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"उउन्ण..छ्चोड़िए..ऊव्ववव..!",नीना अपनी दिलकश शर्मीली अदाओं से भैया जी को रिझाने मे कोई कसर नही छ्चोड़ रही थी.उनके पहलू मे उनसे चिपकी वो उनके हाथो को अपने जिस्म पे कही भी ठहरने नही दे रही थी,"बताइए ना अब कैसे इस जानकारी से फ़ायदा होगा हमे?"

"मेरी जान..",भैया जी ने उसकी चूचियाँ मसली,वो उसे इनकार कर उसकी बेरूख़ी मोल लेने का ख़तरा उठना नही चाहते थे,"..बस इतना जानो कि अब मैं ऐसा खेल खेलूँगा कि जसजीत तो पानी मे जाएगा ही ,उसके साथ CM भी.उपर से हमे पैसे भी मिलेंगे फिर इस शहर क्या तुम इस राज्य पे अपनी हुकूमत चलाना.",उन्होने उसकी बाई जाँघ उठा के अपनी टाँगो के उपर चढ़ा ली.

"तफ़सील से बताइए.",उसने उनके सीने के बालो को सहलाया.

"अच्छा भाई.",अब वो उसकी गंद सहला रहे थे,"..बच्चा हमारे काबू मे आ जाए तो फिरौती किसे मिलेगी?हमे..फिर तुम ये नही समझी की CM की इसमे क्या चाल है.",नीना की गंद को सहलाते हुए उन्होने CM के इरादो से वाकिफ़ कराया,"..तो वो किडनॅपर्स तो जान से जाएँगे ही & हम उनकी बॉडीस को पोलीस से बरामद करवा देंगे & पूरे मुल्क मे इस बात का धिंडोरा पीटेगे की अगर लाषे मिल गयी तो हीरे क्यू नही मिले?..उन्हे पोलीस ने दबा दिया है CM के कहने पे.अत्रे इस मामूली सी चाल से बचना जानता है मगर आन चुनाव के पहले ऐसे स्कॅंडल मे फँसा तो उसके साथ पार्टी की हार के चान्सस बढ़ जाते हैं.उसके बाद हम जीत गये तो फिर तुम हमारी मालिका बन हुकूमत करना!",नीना के मन मे और भी सवाल थे मगर उसने अभी उन्हे पुच्छना ठीक नही समझा & हंसते हुए 1 बार फिर भैया जी की बाहो मे समा गयी.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--56

gataank se aage............-

"Chal jaldi bata sahab ko kise bechi thi vo gadi?",inspector ne interrogation room me kursi pe baithe us ghabraye shakhs ko & 1 aur tamacha jamaya.vo inspector din bhar sar khapane ke baad & 5 chori ki gadiya bechne valo se kadi puchh-tachh karne ke baad us shakhs tak pahunch hi gaya tha jisne vo SUV bechi thi.

"sahab..ab mujhe uska naam-pata kaise malum hoga.",vo gidgidaya,"..bas uski shakl yaad hai."

"hun..usne tumhe payment kaise kiya tha..matlab kaise note the?",Ajit ka dimagh tezi se chal raha tha.

"1000 & 500 ke notes the."

"tune kya kiya un paison ka?"

"sahab,kuchh kharch ho gaye kuchh hain."

"kaha hain?"

"1 baar mujhe chhod den sahab,bas main sab aapko de dunga..balki aap jitne bolo utne paise aapko pahicha dunga."

"abe sale..kamine..",inspector ne uski dhulai shuru kar di,"..humare sagab ko ghoos dene ki koshish kar raha hai.chal,chori ki gadi bechne-kharidne ke alawa ab sarkari afsar ko ghus dene ka charge bhi tujhpe lagata hu."

"are nahi saab..haiiii..nahi..mera vo matlab nahi tha....",ajit ke ishare pe inspector ruk gaya.

"to uska huliya batao.",fir vo inspector se mukhatib hua,"..vo paose os se barmad karo & unhe check karo.shayad kuchh hath lage & ise humare records ke sabhi criminals ki tasveere dikhao."

"sahab."

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"ye to badi achhi khabar hai,Divya.ab un lutero ka pakad me aana door nahi lagta."

"haan,Professor magar hum to is case me phanse hain to kahi vo humare hath se bach na jaye."

"haan ye baat bhi hai lekin is samay is case se zyada kisi aur case ko tavajjoh bhi to nahi de sakte."

"haan."

"professor.",Namit vaha aa gaya,"aapki kahi baat se mujhe 1 idea sujha & maine records khangalwaye & ye dekhiye mujhje kya mila!",namit bahut josh me tha.

"kya mila,namit ji?"

"ye aadmi.",usne Deva ki tasvir dono ke samne ki,"deva,sunaro ke parivar me iski paidaish hui thi & kafi dino tak isne yehi kaam kiya fir jurm ki duniya me utar gaya."

"aapne ye information DCP sahab ko de di?"

"nahi,professor abhi nahi.maine socha pehle aapse baat kar lu.kahi aisa to nahi hoga ki vo mijhe bevkuf samjhenge?"

"namit..",jawab divya ne diya,"..hum is case me puro tarah se andhere me hain.aose me koi bhi baat kitni bhi seedhi si kyu na lage bekar nahi hoti.tum bejhijhak Verma sir ko ye baat batao.zyada se zyada kya hoga..ye deva bekasur niklega yahi na!..to kya hua hai to ye peshevar mujrim ispe shaq to lazmi hai."

"thank you.",namit vaha se nikal gaya.

Aaj Bhaiya Ji bahut khush the,aaj unhe fone karke Nina ko bulana nahi pada tha,vo khud unse milne aa rahi thi unke sarkari bungle pe.unhone bas bahar ke guards ko pehre pe rehne diya tha & ghar ke naukro ko unhone chhutti de di thi.vo aaj nina ke sath jum ke lutf uthana chahte the.fone pe uski khanakti aavaz ne hi unhe garam kar diya tha.

intercom bajne pe unhone use uthaya to guard ne unhe nina ke aane ki khabar di to unhone use andar bhejne ko kaha & sath hi ye takeed ki koi bhi tab tak andar na aaye jab tak ki unka hukm na ho.iske baad unhone apne sare kapde utar diye & sofe pe baith apne lund ko sehlane lage.

"aao meri jaan.",nina jaise hi andar dakhil hui uski aankhe hairani se fail gayi,"..darwaza band kar do.",usne darwaza band kiya & fir ghum vahi khadi rahi.use is baat ki umeed nahi thi ki bhaiya ji yu nange uska mintezar kar rahe honge.

"khadi kyu ho?humare paas aao.",unhone lund ko thoda hilaya.nina vaise hi khadi sakuchane ka natak karne lagi.

"ji..vo..aapko lagega ki main nakhre kar rahi hu..magar aaj sach me waqt nahi hai mere paas..",bhaiya ji ne use sar se panv tak dekha.aaj nina ne kale rang ki sleeveless,kasi dress pehni thi jo uske ghutno tak aa rahi thi.jab vo darwaza band karne ghumi thi to uski 36 size ki gand & zyada ubhri dikhi thi,"..vo to mujhe kuchh aisi bata pata chali ki laga ki aapko khud milke bata du."

"to batao na.",bhaiya ji sofe se utha uske karib aaye & bayi banh ko uske baye kandhe pe rakh uske badan ko gherte hue daye me uska dusra hath tham use apne sath sofe pe le aaye & use khud se sata ke baith gaye.unka baya hath nina ke makhmali bazu sehlane me lag gaya & daye se usne nina ke daye hath ko utha apne hontho se laga liya.kuchh der tak chumne ke baad vo uski ungliyo ko haule-2 chusne lage to nina kasmasane lagi.

"please..mat kariye!..meri baat to sun lijiye.",bhaiya ji ka baya hath uske bazu se sarak ke uski kamar pe aa gaya tha & daba raha tha.vo sar peechhe kar nina ki gardan ke pichhle hisse & dress ki gehri back me se dikh rahi uski chikni pith ko chum rahe the.

"aapko pata hai kya firauti magi hai kidnappers ne....nahi....please...aap bhi na..!",bhaiya ji ne uska baya hath apne lund pe rakh diya & usne jab na-nukar ki to tab tak use lund pe dabaye rahe jab tak nina ne apne komal hath se unke sakht lund ko hilana nahi shuru kar diya.

"nahi..janeman batao kya keemat lagi hai us masoom ki?",unhone dress ki zip ko neeche kar nina ki pith pe besabri se hath firaya.

"unn....nahi..please.",nina lund chhod dress ki zip vapas band karne ko chhatpatai to bhaiya ji ne muskurate jhue uski dress ke straps ko kandho se neeche kar diya & use baaho me bhar uski chhatiyo ko apne seene se daba diya.dabav ke chalte uski doodhiya chhatiya bra se chhalak ke bahar aane ko aatur dikh rahi thi.

unhone nina ke rasile hotho ko apne hotho ki giraft me liya & tab tak unhe chumte rahe jab tak nina bhi thodi masti me nahi aa gayi & apne hotho ko khol unki zuban ko apni zuban se lad jane diya.

"1 crore ke heere mange hain unhone.",usne unki chhati pe hath jama unhe door kar kiss todi.

"kya?!",bhaiya ji chaunk pade.unhone uska bra neeche kar uski chhatiya nangi ki & unhe jhuk ke chumne lage.

"umm..nahi..please...aahhh..",unhone halke se uske shehad ke rang ke nipples ko bari-2 kata,"..please....aap mujhe marwayenge..haiii...oohhhhhh...!",bhaiya ji sab bhool uski choochiyo ko dabane,chusne me jut gaye.nina unke sar ko pakad unke baal khinchne lagi.bhaiya ji ke liye ye samajhna mushkil tha ki aisa vo unhe rokne ke liye kar rahi hai ya masti me behal hoke.nina ka jism ab puri tarah se mast tha.uski chut gili ho gayi thi & vo bechaini me apni bhari janghe aapas me ragad rahi thi.

"to kya Jasjit taiyyar hai itni badi rakam chukane ke liye?",unhone ji bhar ke uski chhatiyo ko chusa & chuma & jab nina ka jism jhatke khate hue uske jhadne ki gawahi dene laga to unhone apna sar uske seene se alag kiya & use khada kar diya.

"haan.",vo uski dress utar rahe the & vo hatho se apne seene ko dhanke khadi thi.

"magar ye to bahut badi rakam hai?",unhone uski panty khinchni chahi to nina ne unka hath tham liya magar unhone uska hath kinare kiya & uski ras se lisdi panty ko utar diya.

"CM Atre use Gem Trading se heere dilwa rahe hain."

"kya?",bhaiya ji ne use sofe pe litaya to nina nahi mani.

"nahi..bahut der ho jayegi..1 to aapke kaam se aayi & aap mujhe hi..nahi kapde pehanane dijiye.",bhaiya ji ne khadi nina ko baaho me bhar use apni god me bitha liya.

"are,meri rani har baar aise hi ghabrati ho!magar kuchh nahi hota.",uski komal gand ka dabav lund pe padte hi unka dil use chodne ko bekarar ho utha.

"isliye to aur darr lagta hai ki kab tak kismat humara sath degi.jane dijiye na!",vo unki god se uthne lagi to unhone uski kamar tham use god me bitha liya & sofe ki back se tek lagate hue unhone uski pith apni chhati se laga li & baye hath se uski kamar ko jakda & daye se uski chut me ungli karne lage.

"oohhhhh....haiiiiiii.....uuuunnnnhhhh..pleaseeeee......!",bhaiya ji ki ungli ki ragad se vo behal unke upar let si gayi & apna sar unke baye kandhe pe tika diya & maze me aankhe band kar apni kamar hilane lagi.

"CM use muft me heere de raha hai?"

"aannnnnhhhh..nahi..ouiiii....bhaiya ko sari keemat chukani padegi lekin police ko yakin hai ki..haiiiiiiiiiiiiii.......aaaanhhhhhhh..",bhaiya ji bahut zor-2 se uski chut me apni 2 ungliya kar rahe the & vo bhi masti me chikhte hue apni kamar uchhal rahi thi,"..vo badmasho ko .....oohhhhhh...dhar dabochegi......aaaannnnhhhhhhhhh..!",nina kuchh hi palo me dobare jhad gayi.

bhaiya ji ki samajh me atre ka khel aa gaya tha.unhone nina ko sofe pe ulta litaya & uski gand sehlane lage.vo samajh gaye the ki ab police zarur kidnappers ko pakdegi & unhe usi waqt khatm kar degi.heere baramad honge magar kaha ye jayega ki na kidnappers mile na hi heere.heere jayenge CM ki jeb me & Pradhan apna siyasi career bhul un heero ki keemat ada karta rahega.unhone nina ki makkhani gand ko chum liya,ye aurat bade kaam ki thi.na keval usne unhe bistar me vo anjan ehsas dilaya tha balki ab unke career me bhi unke kaam aa rahi thi.vo jhuk ke uski gand chaatne lage to nina apni gand uchka ke unke chehre me ghusane lagi.bhaiya ji samajh gaye ki ab vo puri tarah se mast hai & unka chudai me pura sath degi.

vo apne ghutno ko uske jism ki dono or jama ke uski gand pe baith gaye & uski darar me apna mota lund fansa ke uski moti fanko ko hatho me daboch liya & unhe dabate hue apna lund aage-peechhe karne lage.uski gand se hath aage uski komal pith pe fislate hue unhone uski bra ke hooks khol diye.lund ke garm ehsas ko mehsus karte hi nina aahe bharne lagi.1 ghante baad unhe police department me tainat unka aadmi bhi unhe is bare me aur khabar dene wala tha.unhone soch liya tha ki is mamle se pradhan ko harane ke alawa & kaise fayda uthaya ja sakta hai lekin vo sab baad me.abhi keval nina & uske nashile jism ka lutf uthana unka maqsad tha.

uski gand ki fanko ko dabate hue unhone failaya & is baar uski darar me fisalte apne lund ko uski chut ke chhed me ghusa diya.

"oowwww..!",sar sofe se utha nina karahi.bhaiya ji uski gand pe baithe use chodne lage.nina ki chut ki kasavat unke lund ko pagal kiye ja rahi thi.vo uski gnad pe hath rakhe bas dhakke pe dhakke lagaye ja rahe the.nina bhi masti me apni gand uchkane lagi thi.use bahut maza aa raha tha.bhaiya ji ka lund uski chut ki gehraiyo me utra uski chut ki deewaro se ragad ke use jannat ki sair kara raha tha.usne sofe ke gadde ko apne hatho se bhinch liya & apna sar bechaini se hilate hue buri tarah gand uchkane lagi.uski gand pakde use chodte hue bhaiya ji samajh gaye ki vo 1 baar fir jhad gayi hai.

unhone lund bahar khincha & nina ko god me utha liya & use apne kamre me le gaye & bistar pe lita diya fir uski tange failayi & uski chut se beh rahe ras ko chaatne lage.nina sar ke neeche rakhe takiye ko hatho se pakad kasmasati hui aahe bharne lagi.jhadne ke baad uski chut badi samvedanshil ho gayi thi & aise me uske aashiq ka yu uski chut me zuban firana use pagal kar raha tha.

tabhi bhaiya ji ka mobile baja.unhone number dekha,unke policevale ne waqt se pehle hi fone kar diya tha.unhone fauran bluetooth handsfree kit kaan me lagaya & fir se nina ki janghe faila,unhe sehlate hue uski chut chaatne lage,"bolo."

"sir,badi kaam ki baat pata chali hai.jo ACP Professor ke sath tainat hai use 1 baat sujhi hai ki kahi kidnappers koi zevrat ka jankar to nahi.."

"are kaam ki baat karo!",bhaiya ji jhalla uthe,1 to unke mastane khel ke beech khalal daal raha tha upar se bekar ki baate kar raha tha.unhone sara ras peene ke baad nina ki khuli jangho ke beech ghutne pe baith apna lund uski chut me ghusa diya & 1 baar fir uski chudai shuru kar di.

"air,Deva naam ka 1 apradhi shaq ke dayre me aaya hai magar mushkil ye hai ki humare mukhbiro ka kehna hai ki vo idhar Panchmahal shift ho gaya hai & yaha shayad kaam nahi karta."

"hun.thik hai.aur kuchh?",bhaiya ji ne nina ke ghutne mod diye the & unhe uski moti choochiyo pe dabaye use chode ja rahe the.nina vaise hi kabhi bistar,kabhi takiye ko bechaini se apne hatho me pakadti aahe bhare ja rahi thi.

"ji nahi,sir."

"thik hai.parso daftar aake apna inaam le jana."

"shukriya sir.",police vala hansa to bhaiya ji ne fone band kar kit kaan se nikal ke fenk diya & apni mashooka ke ghutno ko daboche uske upar let gaye & ab bade shadeed dhakko ke sath uski chudai karne lage.nina ki chut ki kasavat ab unhe bahut buri tarah se mehsus ho rahi thi & ab vo bhi jhadne ke kareeb pahunch rahe the.

"kise inam de rahe the?....ooohhhh...haiiii.....!",nina ne unhe apni baaho me kas liya & unki pith pe apne besabr hath firane lagi.bhaiya ji ne uske ghutne chhode to usne apni tange unki tango ke upar rakh di & talvo ko unki tango ke upar jama neeche se kamar hilate hue uchakne lagi.

"1 aisa shakhs tha jiski jankari hume kamyabi dilayegi taki tum zindagi bhar meri rani ban ke reh sako....aahhhhh..!",nina ne uchakte hue unki gand me nakhun dhansa diye the & unke baaye kaan me deewano ki tarah jibh firane lagi thi.apni premika ke jhadne ko mehsoos karte hi bhaiya ji ka lund bhi pichkariya chhodne laga & vo bhi jhatke khate hue nina ki choochiyo pe dher ho gaye.

"Seth Mohan Lal dacoity case vali file update kar di?",Divya thoda waqt nikal daftar aayi thi.

"ji madam,aap please online database me update kar dijye..",constable ne computer on kiya,"..main hard copy leke aata hu,uspe aapke dastkhat chahiye."

"hun.",ye bahut bada surag hath laga tha divya ko.Gulabo ne apne paas aane vale lutere ka naam Vicky bataya tha & divya ko pura yakeen tha ki vo us bande ka naqli naam tha magar Balu ki khabar to bilkul pakki thi.hawaldar file le aaya to usne uspe dastkhat kiye & online database me bhi login karke vahi jankari update kar di.

file leke vo DCP Verma ke daftar jane lagi taki unhe dono cases ke bare me jo bhi nayi jankari jama hui,us se vakif kara de.divya cabin se nikli to bahar ke hall me kaam kar rahe logo ki gehmagehmi dekh use bahut bhala laga.pichhle kuchh dino se bungle pe reh ke vo thoda ukta gayi thi.

"abe thik se dekh..",usne dekha ki 1 inspector 1 bade sehme shakhs ko joki kursi pe baitha tha 1 chapat laga raha hai,"..tabhi to pehchanega & haan..agar yu hi kisi ka naam liya to beta tujhe hi is case me andar kar dunga.",divya ne dekha ki ye inspector ajit ke mathat kaam karta tha.

"inspector.."

"madam.",usne salam thonka,"..yehi hai jisne SUV bechi thi.",usne divya ke sihare se puchhe sawal ka jawab diya,"..ab sahab ne kaha hai ki ise ye album dikhaoon shayad kisi ko pehchan le."

"hun.",divya aage jane lagi ki tabhi samne se aati 1 lady constable se vo takra gayi & file uske hath se gir gayi.

"sorry madam.",vo constable phatphat bikhre panne uthane lagi.

"koi baat nahi.",divya uski mada karne lagi.1 panna us sehme shakhs ke kadmo ke paas gira tha.divya ne dekha ki usne us panne ko gaur se dekha & fir album dekhne laga.divya ne constable se panne liye,vo shakhs 1 baar fir usi gire panne kod ekh raha tha.divya uske nazdik gayi to usne hadbada ke fir se album me nazre gada di.divya ne panna uthaya to uspe usi arms dealer ka sketch tha jisi talash me Ajit Nasibpura gaya tha.usne to is shakhs ka sketch isliye lagaya tha ki agar kahi ye pakad me aata hai to shayad vo use us Vicky naam ke gulabo ke grahak ka pata bata de.

"tum ise jante ho?",divya ne sketch us chori ke gadi bechne vale ke samne kiya.

usne naa me sar hilaya & apni aasteen se mathe pe chuchuha raha paseena ponchhne laga.AC hall me use paseena aa raha tha,ye dekh divya muskurayi & uske samne mez pe baith gayi,"kaun hai ye?"

"abe batata hai ya fir se tujhe dawai chahiye..hain?",us constable ne apna ulta hath dikhaya.

"ba..batata hu..lekin.."

"abe lekin ke..jaldi bol!",usne use fir ghudka.

"madam..agar main galat hua to kya mujhe andar kar dengi?"

"nahi..tum pehle ye batao ki ise jante ho to kaise jante ho?"

"madam..iski shakl usi se milti hai jisne mujhse gadi kharidi thi."

"kya?!"

"ji,madam."

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"ye to bahut bada surag hath laga hai.",DCP Verma kursi pe hatho ko jode baithe the.

"sir."

"haan,divya.".kamre me ajit bhi maujood tha.

"mera khayal hai ki jis gang ne seth mohan lal ko loota tha ussi ka hath hai Anish ki kidnapping me."

"ye tum kaise keh sakti ho?"

"sir,is arms delaer ko 1 lutere ke sath dekha gaya tha."

"ab ye kidnapping ke liye gadi kharid raha hai & hume achhi tarah pata hai ki shehar ka koi bhi gang is mamle me shamil nahi hai to fir vahi log bachte hain shaq ke dayre me."

"hun..good point.yani ki agar hum balu ko pakadne me dhyan lagaye to shayad ye mamla sulajh jaye..",vo ajit se mukhatib hue,"..ajit,ye baat abhi bas hum teeno & Professor Dixit tak hi rehni chahiye.ab jab tak hum kisi ko pakad nahi lete,hum koi jankari kisi se nahi baatenge."

"ok,sir.magar kyu?"

"koi khas baat nahi bas isliye ki jitna zyada log baato ko jante hain utna uske leak hone ka khtra badhta hai."

"sir,Namit ko batana hai ya nahi?"

"are use to main bhool hi gaya tha.haan,use batana hai magar use bhi meri baat samjha dena."

"ok,sir."

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"uunn..chhodiye..oowwww..!",Nina apni dilkash sharmili adaon se Bhaiya Ji ko rijhane me koi kasar nahi chhod rahi thi.unke pehlu me unse chipki vo unke hatho ko apne jism pe kahi bhi theharne nahi de rahi thi,"bataiye na ab kaise is jankari se fayda hoga hume?"

"meri jaan..",bhaiya ji ne usi chhatiya masli,vo use inkar kar uski berukhi mol lene ka khatra uthana nahi chahte the,"..bas itna jano ki ab main aisa khel khelunga ki Jasjit to pani me jayega hi ,uske sath CM bhi.upar se hume paise bhi milenge fir is shehar kya tum is rajya pe apni hukumat chalana.",unhone uski bay jangh utha ke apni tango ke upar chadha li.

"tafsil se bataiye.",usne unke seene ke balo ko shelaya.

"achha bhai.",ab vo uski gand sehla rahe the,"..bachcha humare kabu me aa jaye to firauti kise milegi?hume..fir tum ye nahi samjhi ki CM ki isme kya chaal hai.",nina ki gand ko sehlate hue unhone CM ke irado se vakif karaya,"..to vo kidnappers to jaan se jayenge hi & hum unki bodies ko police se baramad karwa denge & pure mulk me is baat ka dhindore peetenge ki agar lashe mil gayi to heere kyu nahi mile?..unhe police ne daba diya hai CM ke kehne pe.Atre is mamooli si chaal se bachna janta hai magar ain chunav ke pehle aise scandal me phansa to uske sath party ki haar ke chances badh jate hain.uske baad hum jeet gaye to fir tum humari malika ban hukumat karna!",nina ke man me aur bhi sawal the magar usne abhi unhe puchhna thik nahi samjha & hanste hue 1 baar fir bhaiya ji ki baaho me sama gayi.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........
 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--57

गतान्क से आगे............-

"सारे शहर मे बालू के नाम का अलर्ट जारी कर दो & साथ मे देव का भी..",डीसीपी वेर्मा उम्मीद की किरण दिखते ही हरकत मे आ गये थे,"..दिव्या,ध्यान रहे कि ये अलर्ट तुम भेजोगी क्यूकी सेठ मोहन लाल वाला केस तुम्हारे ज़िम्मे था.अलर्ट मे केस का नाम ज़रूर देना.मैं नही चाहता कि उन्हे ये भनक लगे की हमे उनके किडनॅपिंग मे शामिल होने का शक़ है."

"सर,यहा या पंचमहल मे जब भी लूट हुई उसमे दीप्ति को चारा बनाके 4 लूटेरो ने वारदात को अंजाम दिया था..",दिव्या कह रही थी,"..अब हमे पक्का पता है कि बालू उनमे से 1 है.नामित की थ्योरी माने तो दूसरा हो सकता है देव मगर वो लुटेरा जिसका नाम हमे विकी पता चला था वो तो पक्का बालू के ही साथ है.तो क्या उसके नाम का अलर्ट नही जारी करें?"

"नही.इस तरह से उन्हे पक्का पता चल जाएगा कि हमे उनके अफ़रन मे शामिल होने का पता चल गया है.देखो,बालू,देव ये सब सज़ायाफ़्ता छटे बुदमाश हैं जबकि उस विकी के बारे मे कुच्छ ऐसा नही पता है तो उसपे शक़ करना यानी गॅंग को सावधान करना & अनीश को ख़तरे मे डालना."

"ओके,सर.",सभी उठके जाने लगे तो वेर्मा साहब ने उन्हे रोका.

"दिव्या,प्रोफेसर दीक्षित को बोल देना कि वो किडनॅपर्स से कहें की हमे उनकी शर्त मंज़ूर है मगर वो पहले 1 बार अनीश से हमारी बात कराएँ & फिर वो जगह बताएँ जहा वो हमसे हीरे लेके अनीश को सौंपेंगे."

"सर."

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"जसजीत जी,ये हैं वो हीरे जैसे उन नीच इंसानो ने माँगे हैं.",CM अत्रे के इशारे पे आर.एस.अवस्थी ने 1 आदमी को अंदर बुलाया जिसने 1 कपड़े का बड़ा सा पाउच डेस्क पे रखा.अवस्थी ने खुद उसे 1 ट्रे दी तो उसने उसपे पाउच को उल्टा कर दिया.हीरो की चकाचौंध से सबकी आँखे चुन्धिया गयी.उस आदमी ने 1-1 करके हीरे गिने & उन्हे वापस पाउच मे डाला.

"प्रधान भाई,अब ऐसे मौके पे ये बात करना मुझे बिल्कुल भी अच्छा नही लग रहा मगर क्या करें ये क़ानूनी करवाई तो करनी पड़ेगी.",अवस्थी ने 1 स्टंप पेपर पे लिखा करारनामा प्रधान को पढ़ने को दिया.उसमे ये लिखा था कि प्रधान को ये हीरे गेम ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन की ओर से CM के खास अनुरोध पे दिए जा रहे हैं & आने वाले 6 महीनो मे उसे उनकी सारी कीमत अदा करनी पड़ेगी.जसजीत ने चुपचाप काग़ज़ पे दस्तख़त किए.

"शुक्रिया,अत्रे जी.",उसने पाउच उठा लिया.ऐसा नही था कि उसे अत्रे की चाल का पता नही था.वो अच्छे से जानता था कि ये हीरे देके वो क्या खेल खेल रहा है मगर वो मजबूर था.और कोई रास्ता भी तो नही था अनीश को वापस लाने का.जसजीत ने हीरे उठाए & काफ़ी कड़ी सेक्यूरिटी के बीच अपने घर वापस आके उन्हे अपनी तिजोरी मे महफूज़ रख दिया.उसने किसी को भी ये नही बताया कि हीरे अब उसके पास हैं.

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"क्या फ़ैसला लिया तुमलोगो ने?",अरशद हर बार आवाज़ बदलने की कोशिश करता था मगर प्रोफेसर अच्छे से जानता था की पहले रोज़ से वो 1 ही शख्स से बात कर रहा है.

"तुम्हे हीरे मिल जाएँगे मगर 1 बार मेरी बच्चे से बात करवाओ."

"वो नामुमकिन है,मैं तुम्हे कल फिर उसकी आवाज़ सुना दूँगा & तुम्हे ये बताउन्गा की हीरे कब & कहा पहुचाने हैं & बच्चा कैसे मिलेगा.",उसने फोन रखा & बूथ से बाहर निकला.इस बार भी वही हुआ जो पहले हुआ था,पोलीस बस चंद सेकेंड्स देर से वाहा पहुँची,तब तक अरशद वाहा से निकल चुका था.

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"प्यारे..",नाश्ते की मेज़ पे जैसे ही चार्ली ने बालू की प्लेट रखी उसने दबी आवाज़ मे कहा,"..आज शाम तैय्यार रहना."

"हूँ.",चार्ली ने प्लेट रखी & वापस रसोई मे चला गया.

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"अरे..",दिव्या चौंक गयी.वो अपने बिस्तर मे सो रही थी कि प्रोफेसर वाहा आ गया & उसे अपनी बाहो मे भर लिया था,"..मैं तो आ ही रही थी."

"मैने सोचा कि आज तुम्हारे कमरे को गुलज़ार करते हैं.",दिव्या दाई करवट पे लेटी थी & पीछे से प्रोफेसर ने उसे बाई बाँह के घेरे मे ले लिया था & उसके गुलाबी होंठ चूमने लगा था.दिव्या थोड़ा पीछे हुई & अपनी मोटी गंद प्रोफेसर के लंड पे पूरी दबा दी.प्रोफेसर उसकी छ्होटी नाइटी के उपर से ही उसके पेट को सहलाता उसे चूमता रहा.

"उम्म्म्म..तुम्हे क्या लगता है..?..आहह..",प्रोफेसर अब उसके होंठो को छ्चोड़ उसकी पीठ चूम रहा था & दिव्या बाया हाथ पीछे ले जा उसके पाजामे के उपर से उसके लंड को सहला रही थी,"..कि जैसा हम सोच रहे हैं,दोनो वारदातो मे 1 ही गॅंग का हाथ है?..ऊहह..!".प्रोफेसर ने उसकी पॅंटी मे हाथ घुसा के उसकी गंद को रगड़ना शुरू कर दिया था.

"हाँ,तुम्हारी सोच तो सही लगती है.",वो उठ बैठा & अपने कपड़े निकालने लगा.कमरे की मद्धम रोशनी मे उसने देखा की दिव्या भी उठ गयी & अपनी नाइटी उतारने लगी.उसकी आँखो मे जिस्मो का नशा था & हसीन चेहरे पे बिखरे बाल बड़े लुभावने लग रहे थे.अपने आशिक़ की निगाहो मे निगाहें डाल वो अपने कपड़े निकालने लगी.दोनो पूरे नंगे हुए & दिव्या अपनी दोनो टाँगे प्रोफेसर के दोनो तरफ रखते हुए उसकी गोद मे बैठ गयी.1 दूसरे को सीने से लगाए,1 दूसरे की पीठ पे बेचैनी से अपने गरम हाथ फिराते दोनो 1 दूसरे को चूमने लगे.दिव्या की ज़ुबान प्रोफेसर के मुँह मे घुस उसकी जीभ से खेलने लगी तो प्रोफेसर ने उसकी चौड़ी गंद की मस्त फांको को हाथो मे भर लिया.

"मगर 1 बात है..",प्रोफेसर अपनी महबूबा के होंठ छ्चोड़ उसकी गर्दन चूमते हुए नीचे होने लगा तो दिव्या उसके गले को थाम पीछे झुक गयी & अपने सीने के मस्त उभर उसकी खिदमत मे पेश कर दिए.दिव्या की कमर थामे प्रोफेसर उसकी छातियो को चूमने लगा.अपनी नाक दोनो चूचियो के बीच घुसा उसने अपना मुँह रगड़ा तो दिव्या को हँसी भी आई & मज़ा भी,"..काम ये गॅंग कर रहा होगा मगर दिमाग़ किसी और का है."

"ऊहह..आहह..लेकिन किसका हो सकता है?..उउन्न्ह..!",प्रोफेसर अब उसकी मोटी,कसी चूचिया चूस रहा था.जब से दिव्या प्रोफेसर की प्रेमिका बनी थी तब से उसका शफ्फाक़ गोरा जिस्म कुच्छ दागो से भर गया था-प्रोफेसर के होंठो की गुस्ताखियो के दागो से.उन दागो मे और इज़ाफ़ा करने के बाद प्रोफेसर ने उसे पीछे धकेला तो दिव्या वैसे ही अपनी टाँगे उसकी कमर पे लपेटे पीछे बिस्तर पे लेट गयी.प्रोफेसर के मज़बूत हाथो ने उसकी कमर को थाम उसके जिस्म को उपर उठा उसके गोरे पेट को अपने मुँह से लगा लिया.दिव्या उसकी इस हरकत से परेशान हो तेज़ आहे भरने लगी.

"आननह..प्रधान का तो कोई ऐसा दुश्मन भी नही है..उऊन्ह..हुउन्न्ह..!",प्रोफेसर उसकी नाभि को चाते जा रहा था & उसकी चूत गीली हुए जा रही थी.दिव्या का सर बिस्तर पे था & जिस्म प्रोफेसर के हाथो मे हवा मे उठा था.जब उसका प्रेमी इस तरह उसे अपने काबू मे ले लेता था तो 1 अजीब से रोमांच से उसका दिल मचल जाता था.प्रोफेसर की ज़ुबान थोड़ी और नीचे हुई & दिव्या की चिकनी,गुलाबी चूत को चाट लिया.

"आहह..!",दिव्या ज़ोर से करही.प्रोफेसर की आतुर जीभ उसकी चूत की गहराइयो मे उतार उसे और रस बहाने पे मजबूर करने लगी.दिव्या अपने बालो से खेलती कमर हिलाते हुए इस पल का पूरा लुत्फ़ उठा रही थी.

"उस लड़के वरुण को भूल गयी?",प्रोफेसर उसकी चूत को चाते चला जा रहा था.बीच-2 मे उसकी जीभ उसके दाने को भी छेड़ देती थी.

"हां....उउफफफफ्फ़...",प्रोफेसर की ज़ुबान ने उसकी चूत की कसमसाहट को शिद्दत पे पहुँचा दिया था,"..मगर वो तो जुनूनी किस्म का इंसान लगता है..हाईईईईई....फिर वो अगवा कर नही पाया..आन्न्न्नह..हान्न्न्नह..मैं तो किसी जानी दुश्मन की बात कर रही थी...आआअन्न्न्नह......!",1 लंबी चीख के साथ दिव्या झाड़ गयी & बिस्तर पे गिर गयी.अपनी गोद मे उसके पेट को सहलाते हुए प्रोफेसर आँखे बंद किए अपनी साँसे संभालती दिव्या को देख रहा था.उसके चेहरे पे मस्ती की खुमारी & मदहोशी का मिलन उसके लंड को बेकाबू करने को काफ़ी था.तेज़ सांसो से पैदा हुए सीने के उतार-चढ़ाव तो शायद किसी ऋषि की तपस्या भी तोड़ देते तो फिर प्रोफेसर की क्या बिसात थी!

उसने 1 हाथ से लंड पकड़ दिव्या की चूत मे उसे घुसाया & फिर आगे झुकते हुए उसकी नर्म बाहे पकड़ उसे उठाके अपने सीने से लगा लिया.दिव्या उसके गले से लग गयी & उसके सर को चूमते हुए अपनी गंद उपर-नीचे करने लगी.दोनो की चुदाई शुरू हो गयी थी.

"इन राजनेताओ की ज़िंदगी 1 बंद किताब होती है जिसके कुच्छ पन्ने तो शायद उनके मा-बाप,बीवियो ने भी नही पढ़े होते हैं.जसजीत 1 अच्छा आदमी है मगर मैं नही मानता कि उसका दामन बिल्कुल बेदाग है..",प्रोफेसर अपनी हसीन महबूबा की कसी गंद को अपने हाथो मे तौल रहा था,"..& अगर ऐसा है भी तो फिर उसकी कामयाबी से जलने वालो की कमी थोड़े ही है!",वो उसके दाए कंधे को चूम रहा था.दिव्या की उच्छलने की रफ़्तार बढ़ रही थी.उसने अपनी बाहें प्रोफेसर के कंधे पे जमाते हुए उसके सर को हाथो मे भर लिया & उसे अपने सीने से चिपकाए अपने घुटनो पे बैठ ज़ोर-2 से चुदाई करने लगी.उसके जिस्म की कशमकश 1 बार फिर आसमान च्छुने लगी थी.

"उउन्न्ह...ऊन्नह...आआननह..हाआअन्न्न्नह..!",उसने ज़ोर से आहे भरी,उसकी चूत ने प्रोफेसर के लंड को बिल्कुल जाकड़ लिया था,वो दोबारे झाड़ रही थी.

"तुम्हारा इशारा कही भैया जी की ओर तो नही?",दिव्या जब संभली तो उसने अपने प्रेमी के नर्म लब चूम लिए.प्रोफेसर के लिए उसके दिल मे प्यार का सैलाब उमड़ रहा था.प्रोफेसर ने उसकी गंद पकड़े हुए उसे पलटा & बिस्तर पे लिटा दिया & अपने हाथ बिस्तर पे जमा उसे चोदने लगा.

"हो सकता है वो हो या फिर कोई और हो.",उसके गहरे मगर धीमे धक्के दिव्या को पागल कर रहे थे.उसके बाजुओ मे बेसब्री से हाथ फिराते हुए वो आहे भर रही थी.जिस्म का जोश बढ़ा तो उसकी टाँगे भी उस मस्ती की गवाही देने लगी.अपने पैरो को वो प्रोफेसर की टाँगो पे रगड़ने लगी.उसकी मस्तानी हरकते देख प्रोफेसर मुस्कुराया & उसके उपर झुक गया & उसे चूमने लगा.दिव्या ने अपने आशिक़ का चेहरा हाथो मे थाम लिया & उसे बड़ी शिद्दत से चूमने लगी.

"केवल दूसरी पार्टी ही क्यू,उसकी अपनी पार्टी का कोई और शख्स भी उसका दुश्मन हो सकता है.",प्रोफेसर ने उसकी दाई टांग को पकड़ उसे भी उसकी बाई टांग के उपर रख दिया & फिर बिना लंड निकाले दिव्या की दाई तरफ लेट गया फिर उसने उसकी दाई टाँग को उठा दिया & थोड़ा सा उसकी ओर घूम अपनी बाई बाँह उसकी गर्दन के नीचे डाल दी & उसकी चूत मे अपने लंड को अंदर-बाहर करने लगा.

"आईईईईयययययईए..!",मस्ती मे करहती दिव्या ने अपने होंठ प्रोफेसर के होंठो से लगा दिए & बाया हाथ नीचे ले जाके उसके आंडो को सहलाने लगी.प्रोफेसर उसके हाथ के एहसास से मस्ती मे पागल हो गया & अपने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी,"अजिंक्या..डार्लिंग...आहह..लेकिन ये काम किसी ताक़तवर इंसान का लगता है?..ऊव्ववव.....हाँ...चोद्ते रहो..इसी तरह..हाईईइ....आहह...हान्न्न्न्न..!"

"हाँ,मेरी जान वो तो है..",प्रोफेसर का चेहरा भी अब जोश से तमतमा गया था & वो बस तेज़-2 धक्के लगाए जा रहा था.दिव्या की चूत की जकड़न फिर से क़ातिल हो गयी थी & इस बार वो खुद पे काबू रखने के मूड मे नही था.अपनी महबूबा को अपने & करीब कर उसकी चूचियो को दबाते हुए,उसकी टांग को थामे वो उसे चोदे जा रहा था 7 कुच्छ ही पॅलो बाद दोनो ने 1 साथ ज़ोर से आह भरी.अपने कमरे मे सोया नामित चौंक के उठ बैठा मगर उसके बाद उसे कुच्छ सुनाई नही दिया.उसने कमरे का दरवाज़ा खोल बाहर झाँका तो पूरे घर मे सन्नाटा था.वो वापस बिस्तर पे आया & ये सोचता सो गया की उसे वहाँ हुआ था.

आँखे बंद किए,मुँह खोले दिव्या अपनी जन्नत मे खो गयी थी.वो 1 बड़ी खूबसूरत जगह थी जहा बस खुशी ही खुशी थी,मज़ा ही मज़ा.उसकी चूत मे उसे कुच्छ बहुत गरम महसूस हो रहा था.वो जानती थी ये प्रोफेसर का वीर्य था जो उसकी चूत को भर रहा था.प्रोफेसर के आंडो मे भी 1 अजीब सा मस्ताना एहसास हो रहा था जिसकी तासीर वो दिल से लेके पूरे जिस्म मे महसूस कर रहा था & खुशी से पागल हो रहा था.दो जिस्म मस्ती का खेल फिर जीत गये थे & सुकून से भर गये थे.

"वो ताक़तवर इंसान राज्य का CM भी तो हो सकता है.",प्रोफेसर ने अपनी प्रेमिका को बाहो मे भर उसके माथे को चूमा तो दिव्या का दिल जो सुकून से भरा था उसमे थोड़ी उलझन पैदा हो गयी..हो तो सकता था..भगवान करे..ऐसा ना हो..लेकिन अगर ऐसा हुआ तो..ज़लज़ला आ जाएगा राज्य मे..सब कुच्छ जो शांति से चल रहा है बिखर जाएगा..कैसे निबटेंगे वो लोग फिर इस से जब उनका नेता ही सब बर्बाद करने पे तुला हो..

वो ऐसे ही सवालो मे खोई रहती मगर प्रोफेसर ने लंड को उसकी चूत से खींचा & उसे अपनी तरफ घुमा अपनी बाहो मे भर लिया & चूमने लगा.दिव्या ने खुद को उसकी बाहो मे ढीला छ्चोड़ दिया & सारी परेशानिया भूल उसकी किस का जवाब देने लगी.

"डर लग रहा है,सुतड़.",चार्ली बालू के साथ तेज़ कदमो से चला जा रहा था.

"अबे यार!",बालू झल्ला उठा,"..तेरी हर समय फटती क्यू रहती है!..साला..हमारा हुलिया पिच्छली बार से इतना बदला हुआ है..इतना वक़्त बीत गया & तू है की अभी भी डरे जा रहा है!"

"उस्ताद,कोई बहुत ज़्यादा वक़्त तो नही हुआ है."

"तो तू जा वापस.",बालू रुक गया,"..भाई,मेरा भी मूड खराब कर रहा है तू.तुझे लेनी है या नही?",चार्ली खामोश रहा तो बालू ने सवाल दोहराया.चार्ली ने हां मे सर हिलाया.

"तो चल चुपचाप..आए टॅक्सी!",जब अरशद & दीप्ति पहरे पे बैठे & देव सोने चला गया तो दोनो चुपके से अपने-2 कमरे लॉक कर घर से निकल आए थे.20 मिनिट मे दोनो नसीबपुरा मे थे.

"अब सुन..मैं उधर जा रहा हू..",बालू ने 1 गली की ओर इशारा किया,"..तू भी वही चलेगा या फिर..?"

"मैं सोच रहा था कि.."

"..उसी पोच्छली वाली के पास जाऊं.",बालू बात पूरी कर हंसा,"..जा,मुन्ना मगर ध्यान रहे अगर पुच्छे तो कह दियो कि तुझे किसी कंपनी मे नौकरी मिल गयी है दूसरे शहर मे."

"ठीक है,उस्ताद."

"ठीक डेढ़ घंटे बाद यही मिलना.देर मत करना."

"नही करूँगा,उस्ताद.",दोनो अपने-2 रास्ते चल दिए.

"वरुण भाई,बुरा मत मानना मगर ये तो वही बात हुई कि आसमान से गिरे खजूर मे अटके!",मूसा ज़ोर से हंसा.6 फ्ट से भी ज़्यादा लंबा मूसा 1 खुशदील इंसान था लेकिन उसकी सबसे बड़ी खूबी थी कि वो यारो का यार था.

"तुम्हारी बात का क्या बुरा मानना,मूसा भाई.",वरुण ने उसकी फैली हथेली पे हाथ मारा.

"तो अब करना क्या है?"

"मैं उस बच्चे को छुड़ा के अपने पाप को कुच्छ हद्द तक धोना चाहता हू."

"भाई,ये तो बड़ी ही मुश्किल बात है.",मूसा सोच मे पड़ गया.वरुण जानता था कि अभी-2 जैल से च्छुटे मूसा को वो दोबारा ख़तरे मे डाल रहा था.

"मूसा भाई,बस ये आख़िरी एहसान कर दो बस."

"वरुण भाई,दोस्ती मे एहसान की बात कर अपने यार को शर्मिंदा मत करो!मेरी समझ मे नही आ रहा कि ये काम आख़िर किया किसने है?"

"भाई..",उन दोनो के साथ मूसा के कुच्छ खास आदमी बैठे थे & उन्ही मे से 1 बोला,"..ये अपने शहर के किसी बंदे का काम नही किसी बाहर वाले का है & बाबा के लोग भी इस मामले मे कुच्छ ज़्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं."

"क्या?!कुम्भात को इसमे क्या दिलचस्पी है."

"भाई,वो सेठ मोहन लाल की डकैती मे भी कोई बाहर वाला था & अब ये..2 बड़े-2 काम मे कोई बाहर वाला उसकी नाक के नीचे से हलवा खींच ले गया & वो सूंघ भी नही पाया,इसी की खुंदक होगी बुड्ढे को!",कमरे मे ठहाको का शोर गूंजा.

"अरे नही यार,केवल वो बात नही है..मामला कुच्छ ज़्यादा पेचीदा है..खैर..पोलीस ने कुच्छ नया किया है क्या?"

"भाई,बिल्कुल ताज़ा खबर है..",1 जवान लड़का कमरे मे आया,"..मामू लोग बालू नाम के कोई गुंडे को ढूंड रहे हैं वो मोहन लाल डकैती मामले मे & उपर से नही बोल रहे मगर किसी देव के बारे मे भी पुचहताच्छ कर रहे हैं."

"वाह बेटा ना सलाम ना आदाब,सीधे ऑल इंडिया रेडियो की ख़बरे सुनाने लगा!"

"सलाम,भाई.",वो लड़का झेन्प्ता मूसा के करीब आया तो उसने उसकी पीठ पे धौल जमाया.

"तुझे कैसे पता चला ये सब?"

"वो अपना शंभू है ना हवलदार,वही बता रहा था मुझे अभी."

"बालू..देव..",मूसा सोच मे पड़ गया,"..वरुण भाई आप आराम करो..अब मैं देखता हू क्या हो सकता है."

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"भाई रघु..बस 1 बार बच्चा हमारे हाथ लग जाए.",भैया जी रघु,रानो & बल्लू के साथ बैठे थे.

"उसके बाद तो हमारे वारे न्यारे हो जाएँगे.",रघु ने बात पूरी की.

"भाई बल्लू,अब क्या करोगे?",भैया जी उस से मुखातिब हुए.

"बस साहब,आपके डिपार्टमेंट की तरह मैं भी बालू & देव की खोज मे लगा हुआ हू."

"अरे अभी हमारा डिपार्टमेंट कहा हुआ है.अगर तुम्हारी मेहनत रंग ले आई तब ज़रूर हो जाएगा!",भैया जी की बात पे सभी हंस पड़े.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--57

gataank se aage............-

"Sare shehar me Balu ke naam ka alert jari kar do & sath me Deva ka bhi..",DCP Verma umeed ki kiran dikhte hi harkat me aa gaye the,"..Divya,dhyan rahe ki ye alert tum bhejogi kyuki Seth Mohan Lal vala case tumhare zimme tha.alert me case ka naam zarur dena.main nahi chahta ki unhe ye bhanak lage ki hume unke kidnapping me shamil hone ka shaq hai."

"sir,yaha ya Panchmahal me jab bhi loot hui usme Dipti ko chara banake 4 lootero ne vardat ko anjam diya tha..",divya keh rahi thi,"..ab hume pakka pata hai ki balu unme se 1 hai.Namit ki thory mane to dusra ho sakta hai deva magar vo lutera jiska naam hume Vicky pata chala tha vo to pakka balu ke hi sath hai.to kya uske naam ka alert nahi jari karen?"

"nahi.is tarah se unhe pakka pata chal jayega ki hume unke apharan me shamil hone ka pata chal gaya hai.dekho,balu,deva ye sab sazayafta chhante budmash hain jabki us vicky ke bare me kuchh aisa nahi pata hai to uspe shaq karna yani gang ko savdhan karna & Anish ko khatre me dalna."

"ok,sir.",sabhi uthke jane lage to verma sahab ne unhe roka.

"divya,Professor Dixit ko bol dena ki vo kidnappers se kahen ki hume unki shart manzoor hai magar vo pehle 1 baar anish se humari baat karayen & fir vo jagah batayen jaha vo humse heere leke anish ko saunpenge."

"sir."

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"Jasjit ji,ye hain vo heere jaise un neech insano ne mange hain.",CM Atre ke ishare pe R.S.Awasthi ne 1 aadmi ko andar bulaya jisne 1 kapde ka bada sa pouch desk pe rakha.awasthi ne khud use 1 tray di to usne uspe pouch ko ulta kar diya.heero ko chakachaundh se sabki aankhe chundhiya gayi.us aadmi ne 1-1 karke heere gine & unhe vapas pouch me dala.

"Pradhan bhai,ab aise mauke pe ye baat karna mujhe bilkul bhi achha nahi lag raha magar kya karen ye kanooni karvai to karni padegi.",awasthi ne 1 stamp paper pe likha kararnama pradhan ko padhne ko diya.usme ye likha tha ki pradhan ko ye heere Gem Trading Corporation ki or se CM ke khas anurodh pe diye ja rahe hain & aane vale 6 mahino me use unki sari keemat ada karni padegi.jasjit ne chupchap kagaz pe dastkhat kiye.

"shukriya,atre ji.",usne pouch utha liya.aisa nahi tha ki use atre ki chaal ka pata nahi tha.vo achhe se janta tha ki ye heere deke vo kya khel khel raha hai magar vo majboor tha.aur koi rasta bhi to nahi tha anish ko vapas lane ka.jasjit ne heere uthaye & kafi kadi security ke beech apne ghar vapas aake unhe apni tijori me mehfuz rakh diya.usne kisi ko bhi ye nahi bataya ki heere ab uske paas hain.

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"kya faisala liya tumlogo ne?",Arshad har baar avaz badalne ki koshish karta tha magar professor achhe se janta tha ki pehle roz se vo 1 hi shakhs se baat kar raha hai.

"tumhe heere mil jayenge magar 1 baar meri bachche se baat karao."

"vo namumkin hai,main tumhe kal fir uski aavaz suna dunga & tumhe ye bataunga ki heere kab & kaha pahuchane hain & bachcha kaise milega.",usne fone rakha & booth se bahar nikla.is baar bhi vahi hua jo pehle hua tha,police bas chand seconds der se vaha pahunchi,tab tak arshad vaha se nikal chuka tha.

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"pyare..",nashte ki mez pe jaise hi Charlie ne balu ki plate rakhi usne dabi aavaz me kaha,"..aaj sham taiyyar rehna."

"hun.",charlie ne plate rakhi & vapas rasoi me chala gaya.

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"are..",divya chaunk gayi.vo apne bistar me so rahi thi ki professor vaha aa gaya & use apni baaho me bhar liya tha,"..main to aa hi rahi thi."

"maine socha ki aaj tumhare kamre ko gulzar karte hain.",divya dayi karwat pe leti thi & peechhe se professor ne use bayi banh ke ghere me le liya tha & uske gulabi honth chumne laga tha.divya thoda peechhe hui & apni moti gand professor ke lund pe puri daba di.professor uski chhoti nighty ke upar se hi uske pet ko sehlata use chumta raha.

"ummmm..tumhe kya lagta hai..?..aahhhhh..",professor ab uske hontho ko chhod uski chum raha tha & divya baya hath peechhe le ja uske pajame ke upar se uske lund ko sehla rahi thi,"..ki jaisa hum soch rahe hain,dono vardato me 1 hi gang ka hath hai?..oohhhhhh..!".professor ne uski panty me hath ghusa ke uski gand ko ragadna shuru kar diya tha.

"haan,tumhari soch to sahi lagti hai.",vo uth baitha & apne kapde nikalne laga.kamre ki maddham roshni me usne dekha ki divya bhi uth gayi & apni nighty utarne lagi.uski aankho me jismo ka nasha tha & haseen chehre pe bikhre baal bade lubhavne lag rahe the.apne aashiq ki nigaho me nigahen daal vo apne kapde nikalne lagi.dono pure nange hue & divya apni dono tange professor ke dono taraf rakhte hue uski god me baith gayi.1 dusre ko seene se lagaye,1 dusre ki pith pe bechaini se apne garam hath firate dono 1 dusre ko chumne lage.divya ki zuban professor ke munh me ghus uski jibh se khelne lagi to professor ne uski chaudi gand ki mast fanko ko hatho me bhar liya.

"magar 1 baat hai..",professor apni mehbooba ke honth chhod uski gardan chumte hue neeche hone laga to divya uske gale ko tham peechhe jhuk gayi & apne seene ke mast ubhar uski khidmat me psh kar diye.divya ki kamar thame professor uski chhatiyo ko chumne laga.apni naak dono choochiyo ke beech ghusa usne apna munh ragda to divya ko hansi bhi aayi & maza bhi,"..kaam ye gang kar raha hoga magar dimagh kisi aur ka hai."

"oohhhhh..aahhhhhh..lekin kiska ho sakta hai?..uunnhhhhhh..!",professor ab uski moti,kasi choochiya chus raha tha.jab se divya professor ki premika bani thi tab se uska shaffaq gora jism kuchh daagho se bhar gaya tha-professor ke hotho ki gustakhiyo ke daagho se.un dagho me aur izafa karne ke baad professor ne use peechhe dhakela to divya vaise hi apni tange uski kamatr pe lapete peechhe bistar pe let gayi.professor ke mazbut hatho ne uski kamar ko tham uske jism ko upar utha uske gore pet ko apne munh se laga liya.divya uski is harkat se pareshan ho tez aahe bharne lagi.

"aannhhhhhh..pradhan ka to koi aisa dushman bhi nahi hai..uunhh..huunnhhhhh..!",professor uski nabhi ko chate ja raha tha & uski chut gili hue ja rahi thi.divya ka sar bistar pe tha & jism professor ke hatho me hawa me utha tha.jab uska premi is tarah use apne kabu me le leta tha to 1 ajib se romanch se uska dil machal jata tha.professor ki zuban thodi aur neeche hui & divya ki chikni,gulabi chut ko chaat liya.

"aahhhhhhhh..!",divya zor se karahi.professor ki aatur jibh uski chut ki gehraiyo me utar use aur ras bahane pe majbur karne lagi.divya apne baalo se khelti kamar hilate hue is pal ka pura lutf utha rahi thi.

"us ladke varun ko bhul gayi?",professor uski chut ko chaate chala ja raha tha.beech-2 me uski jibh uske dane ko bhi chhed deti thi.

"haan....uufffff...",professor ki zuban ne uski chut ki kasmasahat ko shiddat pe pahuncha diya tha,"..magar vo to junooni kism ka insa lagta hai..haiiiiii....fir vo agwa kar nahi paya..aannnnhhhh..haannnnhhhh..main to kisi jani dushman ki baat kar rahi thi...aaaaannnnhhhhhhhh......!",1 lumbi chikh ke sath divya jhad gayi & bistar pe gir gayi.apni god me uske pet ko sehlate hue professor aankhe band kiye apni sanse sambhalti divya ko dekh raha tha.uske chehre pe masti ki khumari & madhoshi ka milan uske lund ko bekabu karne ko kafi tha.tez sanso se paida hue seene ke utar-chadhav to shayad kisi rishi ki tapasya bhi tod dete to fir professor ki kya bisat thi!

usne 1 hath se lund pakad divya ki chut me use ghusaya & fir aage jhukte hue uski narm baahe pakad use uthake apne seene se laga liya.divya uske gale se lag gayi & uske sar ko chumte hue apni gand upar-neeche karne lagi.dono ki chudai shuru ho gayi thi.

"in rajnetao ki zindagi 1 band kitab hoti hai jiske kuchh panne to shayd unke maa-baap,biwiyo ne bhi nahi padhe hote hain.jasjit 1 achha aadmi hai magar main nahi manta ki uska daman bilkul bedagh hai..",professor apni haseen mehbooba ki kasi gand ko apne hatho me taul raha tha,"..& agar aisa hai bhi to fir uski kamyabi se jalne valo ki kami thode hi hai!",vo uske daye kandhe ko chum raha tha.divya ki uchhalne ki raftar badh rahi thi.usne apni baahen professor ke kandhe pe jamate hue uske sar ko hatho me bhar liya & use apne seene se chipkaye apne ghutno pe baith zor-2 se chudai karne lagi.uske jism ki kashmakash 1 baar fir aasmaan chhune lagi thi.

"uunnhhhh...oonnhhhhh...aaaannhhhhhh..haaaaannnnhhhhh..!",usne zor se aahe bhari,uski chut ne professor ke lund ko bilkul jakad liya tha,vo dobare jhad rahi thi.

"tumhara ishara kahi Bhaiya Ji ki or to nahi?",divya jab sambhli to usne apne premi ke narm lab chum liye.professor ke liye uske dil me pyar ka sailab umad raha tha.professor ne uski gand pakde hue use palta & bistar pe lita diya & apne hath bistar pe jama use chodne laga.

"ho sakta hai vo ho ya fir koi aur ho.",uske gehre magar dheeme dhakke divya ko pagal kar rahe the.uske bazuo me besabri se hath firate hue vo aahe bhar rahi thi.jism ka josh badha to uski tange bhi us masti ki gawahi dene lagi.apne pairo ko vo professor ki tango pe ragadne lagi.uski mastani harkate dekh professor muskuraya & uske upar jhuk gaya & use chumne laga.divya ne apne aashiq ka chehra hatho me tham liya & use badi shiddat se chumne lagi.

"keval dusri party hi kyu,uski apni party ka koi aur shakhs bhi uska dushman ho sakta hai.",professor ne uski dayi tang ko pakad use bhi uski bayi tang ke upar rakh diya & fir bina lund nikale divya ki dayi taraf let gaya fir usne uski dayi tnag ko utha diya & thoda sa uski or ghum apni bayi banh uski gardan ke neeche daal di & uski chut me apne lund ko andar-bahar karne laga.

"aaiiiiyyyyyeeeee..!",masti me karahti divya ne apne honth professor ke hotho se laga diye & baya hath neeche le jake uske nado ko sehlane lagi.professor uske hath ke ehsas se masti me pagal ho gaya & apne dhakko ki raftar badha di,"Ajinkya..darling...aahhhhhh..lekin ye kaam kisi taqatwar insan ka lagta hai?..oowwww.....haan...chodte raho..isi tarah..haiiii....aahhhh...haannnnn..!"

"haan,meri jaan vo to hai..",professor ka chehra bhi ab josh se tamtama gaya tha & vo bas tez-2 dhakke lagaye ja raha tha.divya ki chut ki jakdan fir se qatil ho gayi thi & is baar vo khud pe kabu rakhne ke mood me nahi tha.apni mehbooba ko apne & karib kar uski chhatiyo ko dabate hue,uski tang ko thame vo use chode ja raha tha 7 kuchh hi palo baad dono ne 1 sath zor se aah bhari.apne kamre me soya namit chaunk ke uth baitha magar uske baad use kuchh sunai nahi diya.usne kamre ka darwaza khol bahar jhanka to pure ghar me sannata tha.vo vapas bistar pe aaya & ye sochta so gaya ki use veham hua tha.

aankhe band kiye,munh khole divya apni jannat me kho gayi thi.vo 1 badi khubsurat jagah thi jaha bas khushi hi khushi thi,maza hi maza.uski chut me use kuchh bahut garam mehsus ho raha tha.vo janti thi ye professor ka virya tha jo uski chut ko bhar raha tha.professor ke ando me bhi 1 ajib sa mastana ehsas ho raha tha jiski taseer vo dil se leke pure jism me mehsus kar raha tha & khushi se pagal ho raha tha.do jism masti ka khel fir jeet gaye the & sukun se bhar gaye the.

"vo taqatwar insan rajya ka CM bhi to ho sakta hai.",professor ne apni premika ko baaho me bhar uske mathe ko chuma to divya ka dil jo sukun se bhara tha usme thodui uljhan paida ho gayi..ho to sakta tha..bhagwan kare..aisa na ho..lekin agar aisa hua to..zalzala aa jayega rajya me..sab kuchh jo shanti se chal raha hai bikhar jayega..kaise nibtenge vo log fir is se jab unka neta hi sab barbad karne pe tula ho..

vo aise hi sawalo me khoyi rehti magar professor ne lund ko uski chut se khincha & use apni taraf ghuma apni baaho me bhar liya & chumne laga.divya ne khud ko uski baaho me dhila chhod diya & sari pareshaniya bhul uski kiss ka jawab dene lagi.

"Darr lag raha hai,sutad.",Charlie balu ke sath tez kadmo se chala ja raha tha.

"abe yaar!",balu jhalla utha,"..tero har samay phatati kyu rehti hai!..sala..humara huliya pichhli baar se itna badla hua hai..itna waqt beet gaya & tu hai ki abhi bhi dare ja raha hai!"

"ustad,koi bahut zyada waqt to nahi hua hai."

"to tu ja vapas.",balu ruk gaya,"..bhai,mera bhi mood kharab kar raha hai tu.tujhe leni hai ya nahi?",charlie khamosh raha to balu ne sawal dohraya.charlie ne haan me sar hilaya.

"to chal chupchap..aye taxi!",jab Arshad & Dipti pehre pe baithe & Deva sone chala gaya to dono chupke se apne-2 kamre lock kar ghar se nikal aaye the.20 minute me dono Nasibpura me the.

"ab sun..main udhar ja raha hu..",balu ne 1 gali ki or ishara kiya,"..tu bhi vahi chalega ya fir..?"

"main soch raha tha ki.."

"..usi pochhli vali ke paas jaoon.",balu baat puri kar hansa,"..ja,munna magar dhyan rahe agar puchhe to kag diyo ki tujhe kisi company me naukri mil gayi hai dusre dhehar me."

"thik hai,ustad."

"thik dedh ghante baad yahi milna.der mat karna."

"nahi karunga,ustad.",dono apne-2 raste chal diye.

"Varun bhai,bura mat maanana magar ye to vahi baat hui ki aasman se gire khajur me atke!",Musa zor se hansa.6 ft se bhi zyada lumba musa 1 khushdil insan tha lekin uski sabse badi khubi thi ki vo yaaro ka yaar tha.

"tumhari baat ka kya bura maanana,musa bhai.",varun ne uski faili hatheli pe hath mara.

"to ab karna kya hai?"

"main us bachche ko chhuda ke apne paap ko kuchh hadd tak dhona chahta hu."

"bhai,ye to badi hi mushkil baat hai.",musa soch me pad gaya.varun janta tha ki abhi-2 jail se chhute musa ko vo dobara khatre me daal raha tha.

"musa bhai,bas ye aakhiri ehsan kar do bas."

"varun bhai,dosti me ehsan ki baat kar apne yaar ko sharminda mat karo!meri samajh me nahi aa raha ki ye kaam aakhir kiya kisne hai?"

"bhai..",un dono ke sath musa ke kuchh khas aadmi baithe the & unhi me se 1 bola,"..ye apne shehar ke kisi bande ka kaam nahi kisi bahar wale ka hai & Baba ke log bhi is mamle me kuchh zyada dilchaspi le rahe hain."

"kya?!Kumbhat ko isme kya dilchaspi hai."

"bhai,vo Seth Mohan Lal ki dacoity me bhi koi bahar vala tha & ab ye..2 bade-2 kaam me koi bahar vala uski naak ke neeche se halwa khinch le gaya & vo sungh bhi nahi paya,isi ki khundak hogi buddhe ko!",kamre me thahako ka shor gunja.

"are nahi yaar,kewal vo baat nahi hai..mamla kuchh zyada pechida hai..khair..police ne kuchh naya kiya hai kya?"

"bhai,bilkul taza khabar hai..",1 jawan ladka kamre me aaya,"..mamu log Balu naam ke koi gunde ko dhund rahe hain vo mohan lal dacoity mamle me & upar se nahi bol rahe magar kisi Deva ke bare me bhi puchhtachh kar rahe hain."

"vaah beta na salam na aadab,seedhe All India radio ki khabre sunane laga!"

"salam,bhai.",vo ladka jhenpta musa ke karib aaya to usne uski pith pe dhaul jamaya.

"tujhe kaise pata chala ye sab?"

"vo apna Shambhu hai na hawaldar,vahi bata raha tha mujhe abhi."

"balu..deva..",musa soch me pad gaya,"..varun bhai aap aaram karo..ab main dekhta hu kya ho sakta hai."

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"bhai Raghu..bas 1 baar bachcha humare hath lag jaye.",Bhaiya ji raghu,Rano & Ballu ke sath baithe the.

"uske baad to humare vare nyare ho jayenge.",raghu ne baat puri ki.

"bhai ballu,ab kya karoge?",bhaiya ji us se mukhatib hue.

"bas sahab,aapke deaprtment ki tarah main bhi balu & deva ki khoj me laga hua hu."

"are abhi humara department kaha hua hai.agar tumhari mehnat rang le aayi tab zarur ho jayega!",bhaiya ji ki baat pe sabhi hans pade.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--58

गतान्क से आगे............-

चार्ली उसी इमारत के बाहर खड़ा था जहा कुच्छ दीनो पहले अजीत ने रेड मारी थी & मुर्शिद को पकड़ा था.इमारत अब बंद पड़ी थी मगर नसीबपुरा मे जिस्म्फरोशी का धंधा अभी बंद नही हुआ था.

"क्या भिड़ू?माल माँगता है क्या?",ड्रग्स बेच रहे 1 आदमी ने चार्ली को पशोपेश मे खड़े देखा तो उसके करीब आया.

"नही.",चार्ली आगे बढ़ा,उसकी मंज़िल पिंकी बार थी,वो जानता था की लुक्खा गुलाबो का दलाल वही बैठता था.उसका अंदाज़ा बिल्कुल सही था,लुक्खा उसे वाहा बैठा लड़कियो की दलाली करता दिख गया.

"लुक्खा."

"हां."

"ज़रा गुलाबो के साथ 2 घंटे करना है."

"यार,गुलाबो तो अभी फ्री नही है तो मीना को क्यू नही ले जाता."

"अरे नही यार,अपने को तो गुलाबो ही चाहिए."

"क्या यार!ऐसे नही करने का..सब आइटम लोग मस्त हैं अपनी तू अब उनके बीच ऐसे भेद-भाव करेगा तो मेरे धंधे का क्या होगा!",वो हंसा मगर गुलाबो के बारे मे पता करने लगा.पोलीस की रेड के कुच्छ ही दिन बाद पिंकी बार वापस अपने पुराने ढर्रे पे आ गया था बस अब लड़किया अपने ग्राहको के साथ उस इमारत के बजाय कही और जा रही थी.

"ला भाई मेरा पैसा.ये छ्होकरा तुझे गुलाबो के पास ले जाएगा.",चार्ली ने उसे पैसे दिए & 1 16 साल के लड़के के साथ चला गया.वो लड़का उसे बार से कुच्छ दूरी पे बनी 1 लॉड्ज मे ले गया जहा दूसरी मंज़िल के 1 कमरे से 1 ग्राहक के पीछे-2 गुलाबो निकली.

"ये लो तुम्हारी गुलाबो.",लड़का बखशीश की उम्मीद मे था & चार्ली ने उसे निराश नही किया.

"तू..",गुलाबो का मुँह हैरत से खुला था.

"हां,डार्लिंग.अंदर चल.",गुलबो के देखते ही चार्ली का लंड पॅंट मे कुलबुलाने लगा था.

"विकी,तू कहा चला गया था?..आहह..क्या करता है..आराम से कर ना..वी..आबे मैं निकाल रही हू ना..फॅट जाएगी ब्रा..!",चार्ली जल्दी-2 गुलाबो के कपड़े उतार रहा था.

"नौकरी मिल गयी दूसरे शहर मे.",उसने झूठ बोला & गुलाबो के नगी होते ही उस छ्होटे से कमरे के पलंग पे उसे गिरा दिया & उसके उपर चढ़ उसकी चूचिया दबाते हुए उसे चूमने लगा.

"ऊहह..अपने कपड़े तो उतार..हाईईईई..कहा चला गया था तू?..वी मा....!",चार्ली उसकी चूत मे उंगली कर रहा था & गुलाबो छट-पटाने लगी थी,"..हाई रामम्म्मम..",गुलाबो 1 वेश्या थी & हर मर्द के साथ ऐसे पेश आती थी जैसे उसी मर्द ने उसे कमाल का झाद्वाया हो लेकिन चार्ली के साथ उसे नाटक करने की ज़रूरत नही पड़ती थी.पता नही ऐसा क्या था उसमे की उसका जिस्म जाग जाता था & उसका रोम-2 मज़े से भर उठता था.

चार्ली उसकी चूचियाँ चूस्ते हुए लगातार उसकी चूत मे उंगली ज़ोर-2 से रगड़ रहा था.उसके बालो को नोचती गुलाबो के मन मे ख़याल आया कि वो उसे बता दे कि पोलीस को उसकी तलाश है लेकिन फिर उसे अजीत & दिव्या की भलमांसाहत याद आ गयी.कोई और पोलिसेवाले होते तो उसका धंधा चौपट हो चुका होता & नही तो उसकी जिस्म से मुफ़्त के मज़े तो ज़रूर ही लूट लिए होते.और फिर चार्ली 1 ग्राहक था,वो उसकी चुदाई की दीवानी थी & वो भी उसके जिस्म के पीछे पागल था लेकिन ना वो उसे प्यार करती थी ना ही वो उसे चाहता था.

जब तक अपने कपड़े उतार चार्ली ने जब उसकी जंघे फैला अपना प्यासा लंड उसकी चूत मे घुसाया तब तक उसने तय कर लिया था की वो चार्ली के डेवाले लौटने की खबर दिव्या को ज़रूर देगी.

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"कर लिया ऐश?",सही समय पे चार्ली & बालू काम पूरा करने के बाद मिले.

"हां,उस्ताद."चार्ली मुस्कुरा रहा था,गुलाबो को उसने डेढ़ घंटे मे 2 बार जम के चोदा था & अब उसे बहुत सुकूम महसूस हो रहा था.

"तो चल वापस चलें.",दोनो तेज़ी से वाहा से निकल गये इस बात से बेख़बर कि उनका नसीबपुरा आना उनकी सबसे बड़ी भूल थी.1 दलाल ने बालू को पहचान लिया था & 1 घंटे के अंदर-2 बल्लू,पोलीस & मूसा को पता चल गया था कि बालू शहर मे है & तीनो उसे ढूँढने मे दुगुने जोश से जुट गये थे.

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दिव्या की आँख खुली तो उसने देखा की प्रोफेसर दीक्षित बिस्तर पे मौजूद नही था.वो अपने कमरे मे वापस लौट गया होगा ये सोच के उसने करवट बदली & घड़ी देखी,5 बजने वाले थे.उसने सोचा की थोड़ी देर और सोया जाए कि तभी उसका मोबाइल बजा.स्क्रीन देखी तो डीसीपी वेर्मा का नंबर था.

"गुड मॉर्निंग,सर.",उसने फ़ौरन फोन उठाया.

"ये क्या हो रहा है दिव्या?!",वेर्मा साहब की बौखलाई आवाज़ उसके कान से टकराई.

"क्या हुआ सर?",दिव्या क्जा दिमाग़ दौड़ने लगा की आख़िर क्या गड़बड़ हुई.

"अजिंक्या ने जेसीपी सिंग को अभी-2 फोन किया है कि उसे फ़ौरन वो हीरे चाहिए.अब वो मेरा दिमाग़ खा रहे हैं की आख़िर ऐसी क्या बात हो गयी है!..तुमलोगो ने मुझसे कुच्छ च्चिपाया तो नही है?"

"सर,बिल्कुल नही सर..मैं तो खुद हैरान हू..अभी तक प्रोफेसर ने ऐसी कोई बात हमसे तो नही की.",उसने जल्दी से गाउन पहना & कमरे से बाहर निकली तो देखा उसी तरह तरह बौखलाया नामित भी अपने कमरे से निकल रहा है.प्रोफेसर बंगल के हॉल मे बैठा मुस्कुराते हुए ऑरेंज जूस पी रहा था.

"सर,मैं प्रोफेसर से बात करती हू.लाउडस्पिकर ऑन है.आप भी बात कर सकते हैं."

"अगर बच्चे को वापस लाना है तो हीरे मुझे फ़ौरन चाहिए.",प्रोफेसर जानता था कि दिव्या क्या पुछेगि & उसने पहले ही जवाब दे दिया.

"लेकिन क्यू?"

"वो काम होने पे तुम सबको खुद बा खुद समझ आ जाएगा."

"अभी बता दोगे तो क्या ग़ज़ब हो जाएगा अजिंक्या!",वेर्मा साहब अब झल्ला गये थे.

"प्लीज़,दोस्त.मेरी बात मानो.मुझे अभी हीरे दे दो.मुझपे भरोसा करो तुमलोग थोड़ा सब्र रखो,काम के बाद सब समझ जाओगे."

"ओके.जो ठीक समझो करो.",कुच्छ देर की चुप्पी के बाद वेर्मा साहब बोले & फोन काट दिया.दिव्या खड़ी प्रोफेसर को देखती रही मगर प्रोफेसर ने कुच्छ नही कहा.उसने भी कुच्छ पुच्छना ठीक नही समझा & तैय्यार होने अपने कमरे मे चली गयी.

कोई 1 घंटे बाद खुद जसजीत ने हीरो की पोटली 1 ब्रीफकेस मे रख के प्रोफेसर को सौंपी.

"ट्रॅकर काम कर रहा है,सर.",कंट्रोल रूम मे कंप्यूटर के सामने बैठे 1 पोलिसेवाले ने डीसीपी वेर्मा को स्क्रीन दिखाई.दरअसल लेदर ब्रीफकेस के खोल मे 1 ट्राककिन डिवाइस च्छुपाई गयी थी ताकि हीरे जिसके भी पास हो उसे ट्रॅक किया जा सके.

"गुड.ब्रीफकेस की पोज़िशन ज़रा भी बदले तो मुझे फ़ौरन खबर दो.",इतनी सुबह दफ़्तर आने से उन्हे बहुत खिज हुई थी मगर वेर्मा साहब कर क्या सकते थे,अपने दोस्त को लाए भी तो वो खुद ही थे.

"मेडम,1 अच्छी खबर है.",दिव्या के नीचे काम करने वाले इनस्पेक्टर का फोन था,"बल्लू कल रात नसीबपुरा मे देखा गया है."

"क्या?!तुमने वाहा का चक्कर लगाया या नही?"

"बस वही जा रहा हू,मेडम.क्या आप नही आएँगी?"

"मैं तुम्हे थोड़ी देर मे फोन कर के बताती हू."

"जी.",दिव्या ने फ़ौरन डीसीपी वेर्मा से बात की & उन्होने उसे वाहा जाने की इजाज़त दे दी.जब वो निकल रही थी उस वक़्त सवेरे के 8.30 बज रहे थे & प्रोफेसर दीक्षित शायद नहा रहा था.

दिव्या जब तक नसीबपुरा पहुची,इनस्पेक्टर ने मुकबीर की मदद से उस कोठे को खोज निकाला था जहा बल्लू गया था मगर उस कोठे की जिस वेश्या के साथ बल्लू ने वक़्त गुज़ारा था उस से कोई खास बात पता नही चली सिवाय इसके की वाहा आनेवाला शख्स बल्लू ही था.दिव्या ने अपने आदमियो को इलाक़े मे फैला दिया,"इलाक़े के टॅक्सी वालो से भी पुचहताच्छ करो.हो सकता है उसने आने-जाने के लिए टॅक्सी की हो?",वो ज़रा सी भी गुंजाइश नही छ्चोड़ना चाहती थी.

कोई 2 घंटे बाद उनकी मेहनत रंग लाई,"साहब,लगता तो है कि यही था कल रात मगर इसके साथ 1 लड़का भी था.",इनस्पेक्टर टॅक्सी ड्राइवर को फ़ौरन जीप मे बैठी दिव्या के पास ले गया.

"तुम्हे यकीन है कि यही था?",दिव्या ने बल्लू की तस्वीर की ओर इशारा किया.

"मेडम,पक्का तो नही कह सकता लेकिन लगता तो है."

"ये देखो लड़का ईसा लगता था क्या?",दिव्या ने विकी यानी की चार्ली का स्केच उसके सामने किया.

"हां,मेडम ये भी वही लगता है."

"अबे,चल..मेडम अभी बहुत बिज़ी हैं..तू बाद मे आना..अरे ठीक है..",हवाल दार किसी को रोक रहा था.

"कौन है?",दिव्या ने जीप से सर बाहर निकाला.

"मैं हू,मेडम.गुलाबो."

"आने दो..1 मिनिट गुलाबो ज़रा मैं ये काम निपटा लू.हां तो बोलो कुच्छ सुना तुमने उन्हे बात करते हुए या कुच्छ देखा?"

"मेडम,दोनो वही बाते कर रहे थे जोकि यहा से जाने पे सभी करते हैं..कि मज़ा आया..नही आया..वग़ैरह..मगर ये आदमी बीमार था.",उसने बल्लू की ओर इशारा किया,"..मैं तो 1 गली से निकल रहा था जहा 1 ट्रक से आते की बोरिया उतार रही थी & काफ़ी धूल उड़ रही थी.ये आदमी धूल से खांसने लगा & खाँसते-2 बेदम हो गया."

"फिर?"

"..इसके साथ वाले लड़के ने इसकी जेब से निकाल के इसे कोई मशीन दी जिसे इसने मुँह मे लगाया & फिर थोड़ी देर मे वो संभाल गया."

"अपना नाम-पता लिखा दो,तुम्हे पता नही तुमने आज पोलीस की कितनी बड़ी मदद की है.",दिव्या ने उस से ये पुचछा कि उन दोनो ने टॅक्सी से कहा छ्चोड़ी थी & फिर उसे जाने दिया.

"हां,गुलाबो.अब बोलो?"

"मेडम,कल विकी आया था?"

"कुच्छ कहा उसने तुमसे की कहा था & फिर आने की कोई बात की?"

"नही,मेडम फिर आने का तो नही बोला वो & कहा की किसी और शहर मे नौकरी मिल गयी है & मेडम.."

"हां,गुलाबो."

"उसने 1 गोदना गुदवा लिया है."

"अच्छा,कैसा?"

"1 साँप का मेडम."

"ऐसा?",दिव्या ने जालीद से अपनी कलम से काग़ज़ पे वोही गोदना बनाया जिसे प्रोफेसर ने पंचमहल मे उस लुटेरे से मुठभेड़ के वक़्त उसकी गर्दन पे देखा था.

"हाँ,मेडम.बिल्कुल ऐसा."

"शुक्रिया,गुलाबो.",दिव्या के हाथ तो मानो ख़ज़ाना लग गया था!वो फ़ौरन दफ़्तर गयी & डीसीपी वेर्मा को सारी जानकारी दी.

"ग्रेट वर्क,दिव्या!",वेर्मा साहब को भी बड़ी राहत मिली थी,"..अजीत,उस टॅक्सी वाले की बताई जगह के आसपास के 1 किमी के दायरे मे अच्छे से छान-बीन करो,अब हमे गॅंग के 3 लोगो के बारे मे पता है-बल्लू,देव & चार्ली,किसी ने तो तीनो मे से किसी 1 को देखा ही होगा..दिव्या,तुम वापस बंगल पे जाओ & नामित के साथ प्रोफेसर की मदद करो."

दिव्या फ़ौरन बंगल पे पहुँची.प्रोफेसर थोड़ा परेशान सा चहलकदमी कर रहा था,"क्या हुआ?"

"अभी तक फोन नही आया है किडनॅपर्स का.",नामित ने जवाब दिया.

"वो हमारे डर को बढ़ाना चाह रहे हैं.",प्रोफेसर ने कहा.दिव्या ने देखा की प्रोफेसर बिल्कुल तैय्यार था.उसने सोचा कि पुच्छे की क्या उसे कही जाना है लेकिन फिर उसने ठीक नही समझा & खामोश रही.

"हूँ..खाना खाते हैं.",वो अंदर चली गयी.

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"भाई,यही कही है वो लोग.",बल्लू का गुरगा डेवाले के नक्शे पे उसी जगह पे पेन से निशान लगा रहा था जहा पोलीस चुपचाप बल्लू की तलाश मे जुटी थी.

"तुम सब खुद तो ढुंढ़ो ही लेकिन इस तरह की ना उन हरमियो को शक़ हो ना पोलीस को बल्कि अपने कुच्छ आदमी पोलीस के भी पीछे लगा दो,अगर उन्हे हमसे पहले ये कुत्ते मिले तो हम उस बात से भी फ़ायदा उठा सकते हैं.",1 करोड़ के हीरो का सवाल था & बल्लू इस बार नाकाम नही होना चाहता था.

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"भाई,यही कही पे च्छूपे हैं साले!",ठीक उसी वक़्त मूसा के आदमी भी उसे वैसे ही नक्शे पे उसी जगह को दिखा रहे थे.

"ठीक है,लग जाओ काम पे.ढूंड के लाओ & हां पोलीस को ज़रा भी भनक ना लगने पाए."

"जी,भाई."

"& खुद कुच्छ नही करना.पहले मुझे खबर करना."

"भाई."

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"हेलो,भाई.",शाम के 6 बजे फोन की घंटी बजते ही प्रोफेसर ने रिसीवर उठाया.

"मम्मी,पापा मैं बिल्कुल ठीक हू.मुझे कोई तकलीफ़ नही है.खाना अच्छा मिलता है.आप इनको जो चाहिए दे दो & मुझे ले जाओ.",अनीश की रिकॉर्डीड आवाज़ प्रोफेसर के कानो से टकराई.

"यहा आने से पहले ही टेप किया है.अब सुनो..",कॉल ट्रेस होना शुरू हुआ.

"तुम सुनो दोस्त.ये कॉल ट्रेस हो रही है,ये तुम भी जानते हो मगर मुझे इस बात की परवाह नही कि तुम गिरफ्तार होते हो या नही,मुझे बस बच्चा सही-सलामत चाहिए.हीरे मेरे हाथ मे हैं,उनकी चमक से मेरी आँखे चुन्धिया रही हैं.तुम्हारे पास पेन है?"

"हा-हां.",अरशद हैरान था कि आख़िर ये हो क्या रहा था.

"ये नंबर लिखो..",प्रोफेसर ने 1 नंबर लिखवाया,"..ठीक 10 मिनिट मे मुझे फोन करो.",उसने फोन रख दिया.कॉल बस ट्रेस होने ही वाली थी जब लाइन कटी.

"ये साला क्या कर रहा है!",कंट्रोल रूम मे तैनात लोग बौखला गये थे.

"अजिंक्या..",दिव्या & नामित की भी हैरानी की कोई सीमा नही थी.प्रोफेसर उन्हे अनसुना करते हुए ब्रीफकेस पकड़ा & भागता हुआ कमरे से निकला.जब तक दोनो अफ़सर अपनी हैरत से बाहर आते प्रोफेसर उन्हे बाहर से लॉक कर बंगल से बाहर भाग रहा था.

"प्रोफेसर भाग गया है!",दिव्या फोन पे चीखी,नामित दरवाज़े पे कंधे से धक्का मार रहा था.प्रोफेसर भागता हुआ बुंगले के पीछे से होता हुआ कॉलोनी के मार्केट मे पहुँचा.आज बाज़ार की छुट्टी होती थी.आज मुँह अंधेरे ही प्रोफेसर ने वाहा की 1 दुकान का नंबर नोट कर लिया था,उसे पता था कि शाम को दुकानदार अपनी दुकान की सफाई करवाने को आता है.इस वक़्त दुकान का नौकर दुकान की सफाई कर रहा था & मालिक खड़ा अपनी देख-रेख मे काम करवा रहा था.उसके दुकान के फोन की घंटी बजी & जब तक वो फोन तक पहुँचता तब तक उसे धकेल कर किनारे करता प्रोफेसर वाहा तक पहुँचा & फोन उठाया,"हेलो,1 नंबर और लिखो & 1 घंटे बाद मुझे फिर फोन करो.अगर मैं फोन ना उठाऊं तो फिर 1 घंटे तक हर 15 मिनिट बाद नंबर ट्राइ करते रहना."

"मगर.."

"अगर-मगर कुच्छ नही.जैसा कहता हू वैसा करो तो हीरे भी मिलेंगे & पोलीस से भी बचे रहोगे.",प्रोफेसर ने फोन रखा,उस भौंचक्के दुकानदार का शुक्रिया अदा किया & वाहा से भागा.ठीक उसी वक़्त नामित ने दरवाज़ा तोड़ा & दिव्या के साथ भागता हुआ नीचे पहुँचा.उसे हैरत हो रही थी कि बेसमेंट मे बैठे पोलिसेवाले अब तक प्रोफेसर के पीछे क्यू नही भागे थे.

नीचे उसे उसके सवाल का जवाब मिल गया.प्रोफेसर ने उस दरवाज़े & फर्श के बीच 1 लकड़ी के टुकड़े को ऐसे फँसा दिया था की अंदर से लाख जद्ड़ोकेहद के बावजूद पोलिसेवाले दरवाज़ा नही खोल पाए थे.दिव्या भागते हुए बुंगले से निकली & उसे दूर प्रोफ़ेसर भी दौड़ता नज़र आया.

"रुक जाओ,प्रोफेसर!",वो चीखी & उसकी ओर दौड़ी.इलाक़े के पोलिसेवालो को भी अब तक खबर मिल गयी थी & वो भी दूसरी ओर से प्रोफेसर को पकड़ने चले आ रहे थे.सामने से आते पोलीवेवालो को देख प्रोफेसर ने ट्रॅफिक की परवाह किए बिना सड़क के पार दौड़ लगाई & बस मे भागता हुआ चढ़ा.बत्ती हरी थी & ड्राइवर उसे मिस नही करना चाहता था.उसने बस ज़रा भी धीमी नही की लेकिन प्रोफेसर भागता हुआ बस पे चढ़ ही गया & पोलिसेवालो से बच निकला.

कंट्रोल रूम अब ब्रीफकेस ट्रॅक कर रहा था.शहर के एलेक्ट्रॉनिक माप पे 1 लाल रंग का बिंदु 1 रास्ते पे बढ़ा जा रहा था.उस रास्ते पे 1 नाका लगाके पोलीस चौकान्नी खड़ी हो गयी & हर गाड़ी को रोक के चेकिंग करने लगी.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--58

gataank se aage............-

Charlie usi imarat ke bahar khada tha jaha kuchh dino pehle Ajit ne raid mari thi & Murshid ko pakda tha.imarat ab band padi thi magar Nasibpura me jismfaroshi ka dhandha abhi band nahi hua tha.

"kya bhidu?maal mangta hai kya?",drugs bech rahe 1 aadmi ne charlie ko pashopesh me khade dekha to uske karib aaya.

"nahi.",charlie aage badha,uski manzil Pinky Bar thi,vo janta tha ki Lukkha Gulabo ka dalal vahi baithata tha.uska andaza bilkul sahi tha,lukkha use vaha baitha ladkiyo ki dalali karta dikh gaya.

"lukkha."

"haan."

"zara gulabo ke sath 2 ghante karna hai."

"yaar,gulabo to abhi free nahi hai to Mina ko kyu nahi le jata."

"are nahi yaar,apne ko to gulabo hi chahiye."

"kya yaar!aise nahi karne ka..sab item log mast hain apni tu ab unke beech aise bhed-bhav karega to mere dhandhe ka kya hoga!",vo hansa magar gulabo ke bare me pata karne laga.police ki raid ke kuchh hi din baad pinky bar vapas apne purane dharre pe aa gaya tha bas ab ladkiya apne grahako ke sath us imarat ke bajay kahi aur ja rahi thi.

"la bhai mera paisa.ye chhokra tujhe gulabo ke paas le jayega.",charlie ne use paise diye & 1 16 saal ke ladke ke sath chala gaya.vo ladka use bar se kuchh doori pe bani 1 lodge me le gaya jaha dusri manzil ke 1 kamre se 1 grahak ke peechhe-2 gulabo nikli.

"ye lo tumhari gulabo.",ladka bakhshish ki umeed me tha & charlie ne use nirash nahi kiya.

"tu..",gulabo ka munh hairat se khula tha.

"haan,darling.andar chal.",gulabo ke dekhte hi charlie ka lund pant me kulbulane laga tha.

"Vicky,tu kaha chala gaya tha?..aahhhh..kya karta hai..aram se kar na..oui..abe main nikal rahi hu na..phat jayegi bra..!",Charlie jaldi-2 Gulabo ke kapde utar raha tha.

"naukri mil gayi dusre shehar me.",usne jhuth bola & gulabo ke nagi hote hi us chhote se kamre ke palang pe use gira diya & uske upar chadh uski chhatiya dabate hue use chumne laga.

"oohhhh..apne kapde to utar..haiiiii..kaha chala gaya tha tu?..oui maa....!",charlie uski chut me ungli kar raha tha & gulabo chhatpatane lagi thi,"..haii raammmmm..",gulabo 1 veshya thi & har mard ke sath aise pesh aati thi jaise usi mard ne use kamal ka jhadwaya ho lekin charlie ke sath use natak karne ki zarurat nahi padti thi.pata nahi aisa kya tha usme ki uska jism jag jata tha & uska rom-2 maze se bhar uthata tha.

charlie uski chhatiya chuste hue lagatar uski chut me ungli zor-2 se ragad raha tha.uske baalo ko nochti gulabo ke man me khayal aaya ki vo use bata de ki police ko uski talash hai lekin fir use Ajit & Divya ki bhalmansahat yaad aa gayi.koi aur policevale hote to uska dhandha chaupat ho chuka hota & nahi to uski jism se muft ke maze to zarur hi loot liye hote.aur fir charlie 1 grahak tha,vo uski chudai ki deewani thi & vo bhi uske jism ke peechhe pagal tha lekin na vo use pyar karti thi na hi vo use chahta tha.

jab tak apne kapde utar charlie ne jab uski janghe faila apna pyasa lund uski chut me ghusaya tab tak usne tay kar liya tha ki vo charlie ke Devalay lautne ki khabar divya ko zarur degi.

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"kar liya aish?",sahi samay pe charlie & Balu kaam pura karne ke baad mile.

"haan,ustad."charlie muskura raha tha,gulabo ko usne dedh ghante me 2 baar jum ke choda tha & ab use bahut sukum mehsus ho raha tha.

"to chal vapas chalen.",dono tezi se vaha se nikal gaye is baat se bekhabar ki unka Nasibpura aana unki sabse badi bhool thi.1 dalal ne balu ko pehchan liya tha & 1 ghante ke andar-2 Ballu,Police & Musa ko pata chal gaya tha ki balu shehar me hai & teeno use dhoondane me dugune josh se jut gaye the.

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divya ki aankh khuli to usne dekha ki Professor Dixit bistar pe maujood nahi tha.vo apne kamre me vapas laut gaya hoga ye soch ke usne karwat badli & ghadi dekhi,5 bajne vale the.usne socha ki thodi der aur soya jaye ki tabhi uska mobile baja.screen dekhi to DCP Verma ka number tha.

"good morning,sir.",usne fauran fone uthaya.

"ye kya ho raha hai divya?!",verma sahab ki baukhlayi aavaz uske kaan se takrayi.

"kya hua sir?",divya kja dimagh daudne laga ki aakhir kya gadbad hui.

"Ajinkya ne JCP Singh ko abhi-2 fone kiya hai ki use fauran vo heere chahiye.ab vo mera dimagh kha rahe hain ki aakhir aisi kya baat ho gayi hai!..tumlogo ne mujhse kuchh chhipaya to nahi hai?"

"sir,bilkul nahi sir..main to khud hairan hu..abhi tak professor ne aisi koi baat humse to nahi ki.",usne jaldi se gown pehna & kamre se bahar nikli to dekha usi kli tarah baukhlaya Namit bhi apne kamre se nikal raha hai.professor bungle ke hall me baitha muskurate hue orange juice pi raha tha.

"sir,main professor se baat karti hu.loudspeaker on hai.aap bhi baat kar sakte hain."

"agar bachche ko vapas lana hai to heere mujhe fauran chahiye.",professor janta tha ki divya kya puchhegi & usne pehle hi jawab de diya.

"lekin kyu?"

"vo kaam hone pe tum sabko khud ba khud samajh aa jayega."

"abhi bata doge to kya gazab ho jayega ajinkya!",verma sahab ab jhalla gaye the.

"please,dost.meri baat mano.mujhe abhi heere de do.mujhpe bharosa karo tumlog thoda sabra rakho,kaam ke baad sab samajh jaoge."

"ok.jo thik samjho karo.",kuchh der ki chuppi ke baad verma sahab bole & fone kaat diya.divya khadi professor ko dekhti rahi magar professor ne kuchh nahi kaha.usne bhi kuchh puchhna thik nahi samjha & taiyyar hone apne kamre me chali gayi.

koi 1 ghante baad khud Jasjit ne heero ki potli 1 briefcase me rakh ke professor ko saunpi.

"tracker kaam kar raha hai,sir.",control room me computer ke samne baithe 1 policevale ne DCP Verma ko screen dikhayi.darasal leather briefcase ke khol me 1 trackin device chhupayi gayi thi taki heere jiske bhi paas ho use track kiya ja sake.

"good.briefcase ki position zara bhi badle to mujhe fauran khabar do.",itni subah daftar aane se unhe bahut khij hui thji magar verma sahab kar kya sakte the,apne dost ko laye bhi to vo khud hi the.

"Madam,1 acchi khabar hai.",Divya ke neeche kaam karne vale inspector ka fone tha,"Ballu kal raat Nasibpura me dekha gaya hai."

"kya?!tumne vaha ka chakkar lagaya ya nahi?"

"bas vahi ja raha hu,madam.kya aap nahi aayengi?"

"main tumhe thodi der me fone kar ke batati hu."

"ji.",divya ne fauran DCP Verma se baat ki & unhone use vaha jane ki ijazat de di.jab vo nikal rahi thi us waqt savere ke 8.30 baj rahe the & Professor Dxiti shayad naha raha tha.

divya jab tak nasibpura phunchi,inspector ne mukbir ki madad se us kothe ko khoj nikala tha jaha ballu gaya tha magar us kothe ki jis veshya ke sath ballu ne waqt guzara tha us se koi khas baat pata nahi chali siway iske ki vaha aanevala shakhs ballu hi tha.divya ne apne aadmiyo ko ilake me faila diya,"ilake ke taxi valo se bhi puchhtachh karo.ho sakta hai usne aane-jane ke liye taxi ki ho?",vo zara si bhi gunjaish nahi chhodna chahti thi.

koi 2 ghante baad unki mehnat rang layi,"sahab,lagta to hai ki yehi tha kal raat magar iske sath 1 ladka bhi tha.",inspector taxi driver ko fauran jeep me baithi divya ke paas le gaya.

"tumhe yakin hai ki yehi tha?",divya ne ballu ki tasvir ki or ishara kiya.

"madam,pakka to nahi keh sakta lekin lagta to hai."

"ye dekho ladka isa lagta tha kya?",divya ne Vicky yani ki Charlie ka sketch uske samne kiya.

"haan,madam ye bhi vahi lagta hai."

"abe,chal..madam abhi bahut busy hain..tu baad me aana..are thik hai..",hawal dar kisi ko rok raha tha.

"kaun hai?",divya ne jeep se sar bahar nikala.

"main hu,madam.Gulabo."

"aane do..1 minute gulabo zara main ye kaam nipta lu.haan to bolo kuchh suna tumne unhe baat karte hue ya kuchh dekha?"

"madam,dono vahi baate kar rahe the joki yaha se jane pe sabhi karte hain..ki maza aaya..nahi aaya..vagairah..magar ye aadmi bimar tha.",usne ballu ki or ishara kiya,"..main tai 1 gali se nikal raha tha jaha 1 truck se aate ki boriya utar rahi thi & kafi dhool ud rahi thi.ye aadmi dhool se khansane laga & khanste-2 bedam ho gaya."

"fir?"

"..iske sath vale ladke ne iski jeb se nikal ke ise koi machine di jise isne munh me lagaya & fir thodi der me vo sambhal gaya."

"apna naam-pata likha do,tumhe pata nahi tumne aaj police ki kitni badi mada ki hai.",divya ne us se ye puchha ki un dono ne taxi se kaha chhodi thi & fir use jane diya.

"haan,gulabo.ab bolo?"

"madam,kal vicky aaya tha?"

"kuchh kaha usne tumse ki kaha tha & fir aane ki koi baat ki?"

"nahi,madam fir aane ka to nahi bola vo & kaha ki kisi aur shehar me naukri mil gayi hai & madam.."

"haan,gulabo."

"usne 1 godna gudwa liya hai."

"achha,kaisa?"

"1 sanp ka madam."

"aisa?",divya ne jalid se apni kalam se kagaz pe vohi godna banaya jise professor ne Pnachmahal me us lutere se muthbhed ke waqt uski gardan pe dekha tha.

"haan,madam.bilkul aisa."

"shukriya,gulabo.",divya ke hath to mano khazana lag gaya tha!vo fauran daftar gayi & DCP Verma ko sari jankari di.

"great work,divya!",verma sahab ko bhi badi rahat mili thi,"..ajit,us taxi vale ki batayi jagah ke aaspaas ke 1 km ke dayre me achhe se chhan-been karo,ab hume gang ke 3 logo ke bare me pata hai-ballu,Deva & charlie,kisi ne to teeno me se kisi 1 ko dekha hi hoga..divya,tum vapas bungle pe jao & namit ke sath professor ki madad karo."

divya fauran bungle pe pahunchi.professor thoda pareshan sa chehalkadmi kar raha tha,"kya hua?"

"abhi tak fone nahi aaya hai kidnappers ka.",namit ne jawab diya.

"vo humare darr ko badhana chah rahe hain.",professor ne kaha.divya ne dekha ki professor bilkul taiyyar tha.usne socha ki puchhe ki jya use kahi jana hai lekin fie usne thik nahi samjha & khamosh rahi.

"hun..khana khate hain.",vo andar chali gayi.

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"bhai,yehi kahi hai vo log.",Ballu ka gurga Devalay ke nakshe pe usi jagah pe pen se nishan laga raha tha jaha police chupchap ballu ki talash me juti thi.

"tum sab khud to dhundo hi lekin is tarah ki na un haramiyo ko shaq ho na police ko balki apne kuchh aadmi police ke bhi peechhe laga do,agar unhe humse pehle ye kutte mile to hum us baat se bhi fayda utha sakte hain.",1 crore ke heero ka sawal tha & ballu is baar nakaam nahi hona chahta tha.

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"bhai,yehi kahi pe chhupe hain sale!",thik usi waqt Musa ke aadmi bhi use vaise hi nakshe pe usi jagah ko dikha rahe the.

"thik hai,lag jao kaam pe.dhoond ke lao & haan police ko zara bhi bhanak na lagne paye."

"ji,bhai."

"& khud kuchh nahi karna.pehle mujhe khabar karna."

"bhai."

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"hello,bhai.",sham ke 6 baje fone ki ghanti bajte hi professor ne receiver uthaya.

"mummy,papa main bilkul thik hu.mujhe koi taklif nahi hai.khana achha milta hai.aap inko jo chahiye de do & mujhe le jao.",Anish ki reocrded aavaz professor ke kanose takrayi.

"yaha aane se pehle hi tape kiya hai.ab suno..",call trace hona shuru hua.

"tum suno dost.ye call trace ho rahi hai,ye tum bhi jante ho magar mujhe is baat ki parwah nahi ki tum giraftar hote ho ya nahi,mujhe bas bachcha sahi-salamat chahiye.heere mere hath me hain,umki chamak se meri aankhe chundhiya rahi hain.tumhare paas pen hai?"

"ha-haan.",Arshad hairan tha ki aakhir ye ho kya raha tha.

"ye number likho..",professor ne 1 number likhwaya,"..thik 10 minute me mujhe fone karo.",usne fone rakh diya.call bas trace hone hi wali thi jab line kati.

"ye sala kya kar raha hai!",control room me tainat log baukhla gaye the.

"Ajinkya..",divya & namit ki bhi hairani ki koi seema nahi thi.professor unhe ansuna karte hue briefcase pakda & bhagta hua kamre se nikla.jab tak dono afsar apni hairat se bahar aate professor unhe bahar se lock kar bungle se bahar bhag raha tha.

"professor bhag gaya hai!",divya fone pe chikhi,namit darwaze pe kandhe se dhakka maar raha tha.professor bhagta hua bungle ke peechhe se hota hua colony ke market me pahuncha.aaj bazar ki chhutti hoti thi.aaj munh andhere hi professor ne vaha ki 1 dukan ka number note kar liya tha,use pata tha ki sham ko dukandar apni dukan ki safai karwane ko aata hai.is waqt dukan ka naukar dukan ki safai kar raha tha & malik khada apni dekh-rekh me kaam karwa raha tha.uske dukan ke fone ki ghanti baji & jab tak vo fone tak pahunchta tab tak use dhakel kar kinare karta professor vaha tak pahuncha & fone uthaya,"hello,1 number aur likho & 1 ghante baad mujhe fir fone karo.agar main fone na uthaoon to fir 1 ghante tak har 15 minute baad number try karte rehna."

"magar.."

"agar-magar kuchh nahi.jaisa kehta hu vaisa karo to heere bhi milenge & police se bhi bache rahoge.",professor ne fone rakha,us bhaunchakke dukandar ka shukriya ada kiya & vaha se bhaga.thik usi waqt namit ne darwaza toda & divya ke sath bhagta hua neeche pahuncha.use hairat ho rahi thi ki basement me baithe policevale ab tak professor ke peechhe kyu nahi bhage the.

neeche use uske sawal ka jawab mil gaya.professor ne us darwaze & farsh ke beech 1 lakdi ke tukde ko aise phansa diya tha ki andar se lakh jaddokehad ke bavjood policevale darwaza nahi khol paye the.divya bhagte hue bungle se nikli & use door professro bhi daudta nazar aaya.

"ruk jao,professor!",vo chikhi & uski or daudi.ilake ke policevalo ko bhi ab tak khabar mil gayi thi & vo bhi dusri or se professor ko pakadne chale aa rahe the.samne se aate polivevalo ko dekh professor ne traffic ki parwah kiye bina sadak ke paar daud lagayi & bus me bhagta hua chadha.batti hari thi & driver use miss nahi karna chahta tha.usne bus zara bhi dhimi nahi ki lekin professor bhagta hua bus pe chadh hi gaya & policevalo se bach nikla.

control room ab briefcase track kar raha tha.shehar ke electronic map pe 1 laal rang ka bindu 1 raste pe badha ja raha tha.us raste pe 1 naka lagake police chaukanni khadi ho gayi & har gadi ko rok ke checking karne lagi.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--59

गतान्क से आगे............-

"सर,ब्रीफकेस मिल गया."

"गुड!",कंट्रोल रूम मे डीसीपी वेर्मा कान से वाइर्ले का हेअडफ़ोने लगाए हुए थे.

"पर सर,आपने कहा था आदमी है ये तो औरत है."

"क्या?ब्रीफकेस भूरे रंग का है ना?"

"हां,सर तो औरत कैसे हो सकती है?",वएर्मा साहब गुस्से से बौखला गये.

"सर,औरत ही है."

"सर,वो हमे गच्चा दे गया.".पीछे खड़े अजीत ने कहा.

"अजिंक्या,जो भी करो बस अंजाम अच्छा हो.",वेर्मा साहब बुद्बुदाये & अपने दोस्त को ढूँदने मे लग गये.

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प्रोफेसर ने चलती बस को अगले ट्रॅफिक सिग्नल पे छ्चोड़ा & ब्रीफकेस को उल्टी दिशा मे जा रही 1 कार की पिच्छली सीट पे डाल दिया.उसकी ड्राइवर को पता ही नही चला क्यूकी वो बेचारी तो अपने फोन पे बातो मे मगन थी & जब बत्ती हरी हुई तो उसका सारा ध्यान कार आगे बढ़ने पे था.प्रोफेसर हीरो की पोटली को अपनी जॅकेट की अंदर की जेब मे रखे हुए 1 बाज़ार मे घुस गया & वाहा से 1 सूटकेस खरीदा & 1 हार्डवेर की दुकान से कुच्छ सामना खरीदा & फिर पोलिसेवालो की नज़र से बच के थोड़ी देर तक बाज़ार घूमता रहा.इस शहर मे 1 ही जगह थी जहा वो इस वक़्त महफूज़ रह सकता था.उसके कदम उधर ही बढ़ रहे थे.

"अजीत,तुम बालू & उसके साथियो की तलाश जारी रखो & दिव्या,तुम नामित के साथ प्रोफेसर दीक्षित को ढूँड़ो.",डीसीपी वेर्मा कंट्रोल रूम मे सभी को ऑर्डर्स दे रहे थे.उन्हे लग रहा था कि कल के दिन कुच्छ ऐसा घटने वाला है जोकि अच्छा हो या बुरा होगा ख़तरनाक.

उधर दिव्या का दिमाग़ बस इसी सोच मे लगा था की प्रोफेसर हीरे लेके च्छूपा कहा होगा.उसका अंदाज़ा था कि उसने खुद ही किडनॅपर्स से सौदा करने का सोच लिया था लेकिन उसके लिए वक़्त चाहिए & तब तक वो कहा च्छुपेगा ये उसकी समझ नही आ रहा था.अभी तक तो उसकी भी उम्मीद इसी बात पे टिकी थी की जहा किडनॅपर्स होंगे वही प्रोफेसर कभी तो पहुचेगा.

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"कहा जा रहा है?",मूसा के इलाक़े के 1 ग़ैरक़ानूनी जुआघर मे घुसते प्रोफेसर को 1 हत्ते-कत्ते आदमी ने रोका.प्रोफेसर ने अभी-2 अरशद से बात की थी & उसने कल सवेरे प्रोफेसर को ज़िँबा नदी के किनारे बनी जेटी पे बुलाया था जोकि अब बेकार पड़ी थी.डेवाले जीबा के किनारे ही बसा था.

"अंदर."

"क्यू?तेरी मा का ब्याह हो..",बात पूरी होने से पहले गुंडा ज़मीन पे अपना जबड़ा पकड़े पड़ा था.उसकी हालत देख कुच्छ गुंडे भागते हुए वाहा आए.

"मुझे हाथ लगाने से पे ले अपने उस्ताद मूसा को बोलो की प्रोफेसर उस से मिलने आया है.",प्रोफेसर की कड़ी आवाज़ मे कुच्छ ऐसा था कि गुंडे वही रुक गये & उनमे से 1 जुएघर के अंदर चला गया.कुच्छ देर बाद वो वापस आया & प्रोफेसर को गली मे आगे आने का इशारा किया.

"खुशाम्दीद,प्रोफेसर साहब,खुशाम्दीद!",मूसा ने आगे बढ़ के प्रोफेसर को गले से लगा लिया.प्रोफेसर & मूसा की जान-पहचान कैसे हुई वो तो 1 अलग ही दास्तान है पर जिन्होने भी प्रोफेसर का नॉवेल "आख़िरी बाज़ी" पढ़ा होगा तो उसमे प्रताप नाम के किरदार & मूसा मे उन्हे कोई फ़र्क़ नही नज़र आता होगा.

"1 बड़े ही नाज़ुक मसले के सिलसिले मे यहा आया हू,मूसा.",प्रोफेसर ने कमरे मे खड़े लोगो की ओर देखा तो मूसा उसे लेके अंदर के कमरे मे चला गया जहा प्रोफेसर ने उसे सारी बात बताई.

"कमाल के हैं उसके खेल भी!",मूसा ने ज़ोर का ठहाका लगते हुए उपर वाले की ओर इशारा किया,"तुम्हे 1 इंसान से मिलता हू,प्रोफेसर..ज़रा वरुण को बुलाओ.",उसने अपने 1 आदमी को इशारा किया.

"वरुण,मैं तुम्हे ज़िम्मेदार नही मानता..",वरुण की दास्तान सुनने के बाद प्रोफेसर ने कहा,"..हालात ने तुम्हे जैल भेज दिया लेकिन दोस्त,तुम बहुत बड़ी ग़लती करने जा रहे थे.उन किडनॅपर्स के हाथो 1 भला काम हुआ कि उन्होने तुम्हे ये संगीन जुर्म करने से बचा लिया.मेरे दोस्त,मैं कोशिश करूँगा कि बच्चे की बरामदगी के साथ-2 तुम्हे भी तुम्हारी मुश्किल से निकालु मगर तुम्हे मेरा साथ देना होगा."

"ज़रूर,प्रोफेसर साहब."

"तो ठीक है,सुनो.",प्रोफेसर मूसा & वरुण को अपना प्लान बताने लगा.

"प्रोफेसर,ये ठीक नही.",मूसा बोला,"तुम मुझे क्यू अलग रख रहे हो?"

"मूसा,तुम हमारी कितनी मदद कर रहे हो ये तुम नही समझ सकते लेकिन तुम्हे वाहा ले जाके हम तुम्हे ख़तरे मे नही डाल सकते."

"ख़तरो से खेलना तो हमारा रोज़ का काम है!"

"मूसा,मामला संगीन है & पोलिसेवाले तो ऐसे मौको की तलाश मे ही रहते हैं.तुम या तुम्हारा कोई भी आदमी इलाक़े के आस-पास भी नज़र आया तो वो तुम्हे फिर से बंद कर देंगे."

"मगर.."

"मगर-वागर छ्चोड़ो,मेरी बात मानो,मूसा प्लीज़!"

"ठीक है..तो कल सुबह."

"कल सुबह."

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"अबे चंदू देख तो ये तो मूसा का आदमी है,साला हमारे इलाक़े मे क्या कर रहा है!"

"लगता है साले का जीने का दिल नही कर रहा.उठाओ हराम जादे को!",6-7 गुंडे उस शख्स की ओर बढ़े.

"1 मिनिट भाई लोग,अपुन बल्लू भाई से मिलना चाहता है."

"क्यू बे?बहन का रिश्ता करवाना है तुझे उन से!",गुणडो ने भद्दी सी हँसी हँसी.

"भाई लोग,आजकल तुमलोग जिसकी तलाश मे हो उस असले का पता है अपुन के पास."

"अरे यार,साला गोली दे रहा है,तोडो इसके हाथ."

"अबे रुक!",उनमे से 1 ने इशारा किया.वो देखने से सबका सरदार लग रहा था.उसके दिमाग़ मे ख़याल आया की अगर कही वो सच बोल रहा था & उन्होने उसे नही मिलवाया तब तो बल्लू सबकी जान ले लेगा & अगर झूठ भी बोल रहा था तो दुश्मन गॅंग के आदमी को पकड़वाने से कुच्छ तो फ़ायदा होगा,"चल."

"पक्की खबर है तेरे पास.",बल्लू ने उसे पैनी निगाहो से देखा,"अगर तू गेम खेल रहा है तो तुझे कैसी मौत मिलेगी ये तो तू जानता ही है."

"झूठ बोलू तो अपने हाथ से अपुन अपनी मुंदी काट देगा आपके सामने!"

"ठीक है,भूलना मत अपनी बात.",बल्लू के हाथ बैठे-बिताए इतना बड़ा सुराग लगा था,अब हीरे & बच्चा उसकी पकड़ से ज़्यादा दूर नही थे.

बल्लू ने मूसा के आदमी से प्रोफेसर दीक्षित का हुलिया ले लिया था,उसने फ़ौरन रघु को सारी बात बताई जिसने भाय्या जी को फोन किया & उनसे प्रोफेसर के बारे मे पुछा.अब भाय्या जी ने भी प्रोफेसर को कभी नही देखा था तो वो सोच मे पड़ गये.उन्होने रघु को सवेरे तक इंतेज़ार करने को कहा & इस उलझन को सुलझाने का तरीका सोचने लगे.उन्हे बस 1 ही इंसान उन्हे इस उलझन से बाहर निकालता दिख रहा था-नीना.

"कैसी हो जानेमन?"

"ठीक ही हू.",नीना ने थोड़ा परेशान होने का नाटक किया.

"क्या बात है कुच्छ परेशान लग रही हो?"

"नही बस ऐसे ही,इतने दिन हो गये अपने घर से निकले हुए,उपर से कोई काम भी नही हो पा रहा है,ना अनीश मिल रहा है & अब तो.."

"अब तो क्या?"

"वो आदमी था ना.."

"वो हीरे लेके भाग गया."

"आपको पता है?!",नीना चौंक उठी.

"वो छ्चोड़ो,1 बात बताओ,उस आदमी को तुमने देखा है या फिर उसकी कोई तस्वीर मिल सकती है?"

"मैने उसे देखा तो नही मगर वो 1 मशहूर लेखक है,इंटरनेट से तो उसकी तस्वीर आसानी से मिल जाएगी."

"हूँ..ये नेक काम तुम ही कर दो.",भैया जी का उस से मिलने का कोई इरादा तो नही था मगर नीना की खनकती आवाज़ ने उन्हे उसके जिस्म के उतार-चढ़ाव याद दिला दिए थे & उन्हे ये ख़याल आया कि इसी बहाने शायद उस से मुलाकात भी हो जाए.

"कर तो दूं मगर आपको दूँगी कैसे..वो भी अभी रात को?"

"अभी ज़्यादा वक़्त नही हुआ है.तुम 1 काम क्यू नही करती,अपने घर चली जाओ 7 मैं वाहा पहुँचता हू तुमसे तस्वीर लेने को."

"इसमे तो बहुत ख़तरा है.नही मैं नही आऊँगी."

"पागल मत बनो.ज़रा सोचो,हमे कितना बड़ा फ़ायदा होगा & थोड़ा ख़तरा तो उठाना होगा ना!"

"मगर.."

"सोच लो,नीना.ऐसे मौके बार-2 नही मिलते.जो भी इरादा हो मुझे बता देना.",भैया जी ने फोन रख दिया.वो नीना के हुस्न के दीवाने थे लेकिन इतने भी नही कि अपनी बाते मनवाने के तरीके भूल गये हों.उधर नीना को उनके यू फोन काटने से लगा कि कही वो उसके हाथो से निकल ना जाए.वो अच्छी तरह जानती थी कि भाय्या जी बड़े आराम से कही और से भी प्रोफेसर की तस्वीर ले सकते थे मगर उस से माँगने का मक़सद सिर्फ़ उसके जिस्म की नज़दीकी पाना था.उसने तय कर लिया कि वो उनसे मिलने जाएगी.

"सुनो,आज रात मैं ज़रा घर चली जाती हू.",उसने मुकुल से कहा.

"क्यू नीना?"

"इतने दीनो से घर च्छुटा हुआ है पता नही क्या हालत हो गयी होगी.आज रात जाके वही सो जाती हू फिर सवेरे नौकरो से काम करवा के दिन मे वापस आ जाऊंगी."

"तो सवेरे चली जाना ना."

"नही,मुकुल फिर सवेरे यहा के कामो मे देर हो जाएगी.मैं कल वाहा सफाई वग़ैरह करवा के आ जाऊंगी ना.",मुकुल जानता था कि नीना 1 बार कुच्छ ठान ले तो उसे फिर उस बात से डिगना बड़ा मुश्किल था तो उसने हामी भर दी.नीना फ़ौरन वाहा से अपने घर को निकल गयी.

"मैं घर जा रही हू."

"ये हुई ना बात.",रात के रंगीन होने की कल्पना से भाय्या जी का लंड खड़ा होने लगा.

"मगर मैं नही चाहती कि कोई भी आपको वाहा देखे."

"तुम उस बात की फ़िक्र मत करो,मैं 1 बजे के करीब आऊंगा."

"फिर भी आपको किसी ने घर मे घुसते देख लिया तो ग़ज़ब हो जाएगा.",नीना ने घबराने का नाटक किया,"उपर से आपके गार्ड्स,बत्ती वाली कार..मुझे बहुत डर लग रहा है.किसी और तरीके से फोटो ले लीजिए ना!"

'अरे,तुम बहुत घबराती हो.मैं ना गार्ड्स को लाऊंगा ना ही बत्ती वाली कार,तुम बस अपने घर का 1 दरवाज़ा खुला छ्चोड़ दो."

"लेकिन..",कुच्छ देर तक नीना ना-नुकर करती रही मगर अंत मे मान गयी.तय ये हुआ कि नीना अपने घर का पिच्छला दरवाज़ा खुला छ्चोड़ेगी.भाय्या जी उसी रास्ते अंदर आएँगे & उनकी कार घर से दूर पार्क होगी.

रात के 1 बजे प्रोफेसर दीक्षित & वरुण अगली सुबह की तैय्यारि करने के बाद बिस्तर पे गये लेकिन दोनो की आँखो मे नींद नही थी.कल की चिंता दोनो ही के दिलो मे थी & दोनो चुपचाप बस कर्वते बदल रहे थे.

दिव्या ने काफ़ी दिमाग़ लगाने के बाद सोच लिया था कि सस्ते होटेल्स या प्रोफेसर के दोस्तो के यहा छापा मारने से वो मिलने वाला नही है,वो किसी ऐसी जगह च्छूपा है जहा कोई उसे ढूनडने की सोच भी नही सकता.वो प्रोफेसर की प्रेमिका थी लेकिन दोनो ने अभी इतना अरसा साथ नही गुज़ारा था कि उसे उसके हर ठिकाने या सोच के बारे मे मालूम हो लेकिन फिर भी उसने 1 तुक्का लगाया कि हो ना हो अजिंक्या दीक्षित ज़रूर किसी गुंडे के साथ च्छूपा है क्यूकी पोलीस ये सोच भी नही सकती की 1 करोड़ के हीरे लेके वो किसी मुजरिम के पास जाएगा.उसने फ़ौरन शहर के गुणडो की फाइल्स निकलवा के पढ़ना शुरू किया.

उधर अजीत को शहर के नक्शे पे उस जगह जहा बल्लू & चार्ली टॅक्सी से उतरे थे,के 2 किमी के दायरे मे हर इलाक़े की पूरी जानकारी ले रहा था.उसकी मेहनत रंग लाने वाली थी मगर उसे अभी ये पता नही था & उसे बड़ी खिज हो रही थी.

इस सब से बेख़बर बल्लू & चार्ली सो रहे थे & देव & दीप्ति अनीश की पहरेदारी कर रहे थे & अरशद उसी आर्म्स डीलर से 1 सिनिमा हॉल के बाहर मिल रहा था,"मैने उसे कल मिलने बुला लिया है."

"ठीक है.ये कपड़े & जूते रखो.",दोनो हॉल के बाहर 1 बेंच पे बैठे थे & उसने पैरो के पास रखे 1 पॅकेट की ओर इशारा किया,"बच्चे को यही पहना के छ्चोड़ना."

"लेकिन क्यू?"

"ताकि फोरेन्सिक वालो को सबूत मिलने की कोई गुंजाइश ना रहे."

"ओके."

"& हां,बच्चे के छूटते ही तुम सब यहा से बहुत दूर चले जाओगे & कुच्छ दीनो तक 1 दूसरे से भी कोई कॉंटॅक्ट नही रखोगे."

"मुझे याद है.",अरशद ने पॅकेट उठाया & बाइक की ओर बढ़ चला.जुर्म उसकी ज़िंदगी का अटूट हिस्सा बन चुका था लेकिन ना जाने क्यू इस बार उसके दिल मे 1 अंजाना सा डर

पैदा हो गया था.उसने बाइक स्टार्ट की & वाहा से चला गया.

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नीना ने प्रोफेसर की तस्वीर का प्रिनटाउट निकाल लिया था.अब उसे बस भाय्या जी का इंतेज़ार करना था.थोड़ी ही देर मे वो बोर होने लगी & उबासिया लेने लगी.उसने सोचा कि 1 बजे तक सो ही ले.घर आके उसने कपड़े उतार कर 1 नेग्लिजी पहन ली थी & वो उसी मे सो गयी.

"हाया....!",हैरत से उसकी नींद खुली.वो बाई करवट पे चादर ताने सो रही थी कि कोई उसके पीछे बिस्तर मे घुस गया था & उसे बाज़ू मे घेरे उसके चेहरे को दीवानो की तरह चूम रहा था.

"आप आ गये..ऊहह..!",कमरे मे रोशनी थी & भाय्या जी उसके दाए कान मे जीभ फिरा रहे थे,"प्लीज़..बत्ती बंद कर दीजिए..& आहह..ये क्या अभी तो 12 ही बजे हैं..नही..",भाय्या जी उसकी नेग्लिजी मे हाथ घुसा के उसके निपल्स को बारी-2 से मसल रहे थे,"..ज़रूर किसी ने देख लिया होगा..उउन्न्ञणनह...!",भैया जी ने उसके होंठो को अपने होंठो से बंद कर दिया.

नीना ने महसूस किया कि भाय्या जी पूरी तरह से नंगे थे.उनके मज़बूत जिस्म के एहसास ने उसे मस्त तो कर दिया था मगर हर बार की तरह इस बार भी वो आसानी से उन्हे अपना जिस्म सौंपना नही चाहती थी.उनका हाथ जैसे ही उसके सीने से नीचे उसकी पॅंटी मे घुसा उसने किस तोड़ते हुए उनका हाथ पकड़ के झटका & उनकी गिरफ़्त से आज़ाद हो गयी.

"आप समझते हैं क्या होगा अगर हमारा राज़ फ़ाश हो गया तो!",वो घुटनो पे बैठ आँखो से अँगारे बरसाती गुस्से से बोली.भैया जी भी उठ बैठे,नीना का सीना उपर-नीचे हो रहा था & निपल्स का आकर नेग्लिजी मे से झलक रहा था.उसके बिखरे बॉल दिलकश अंदाज़ मे उसके चेहरे पे थे.

"तुम बहुत घबराती हो.किसी ने भी नही देखा है मुझे आते हुए..अच्छा तुमने तस्वीर निकाली?",उन्होने बात बदल दी.

"हां.",बेरूख़ी से बोल वो घूमने लगी की भैया जी आगे बढ़े & घुटनो पे बैठ उसे फिर से बाहो मे भर लिया.

"छ्चोड़िए..मेरा मंन नही है..प्लीज़..जाइए..!",वो नाराज़ होने का नाटक करने लगी.भैया जी उसकी कमर को थामे उसकी चूचियो को अपने चौड़े सीने से पीसते हुए उसके चेहरे को मुस्कुराते हुए देखने लगे,"..मैं तो आपकी हर बात मानती हू मगर आप नही...अब छ्चोड़िए ना..!",उसने उन्हे धकेलने की कोशिश की मगर भैया जी उसे थामे बस 1 तक उसे देखते रहे.ऐसा क्या था उस चेहरे मे,उस जिस्म मे..जिसने उन्हे इस कदर दीवाना बना दिया था की वो उसके लिए ऐसा पागलपन कर रहे थे.

"छ्चोड़िया ना..!"नीना को उनके चेहरे का भाव तोड़ा बदला लगा,"क्या हुआ?..ऐसे क्या देख रहे हैं?"

"तुम्हारी चाहत मुझे ऐसे मजबूर कर देती है & मैं ऐसी हरकते कर बैठता हू.",भैया जी ने शायद ही कभी ऐसे अपनी बीवी से भी बात की थी,"अब बताओ इसमे क्या सिर्फ़ मेरा कसूर है?",नीना ने नज़रे नीची कर ली.जो नाज़ुक हाथ अभी तक भैया जी के सीने को धकेल रहे थे अब उसपे शांत पड़े थे & बहुत ही हल्के-2 बालो से खेल भी रहे थे.

"मगर थोड़ी तो सावधानी बरतनी चाहिए ना!",नीना ने सर झुकाए उनके सीने पे हाथ फिराते जवाब दिया.अब वो मान जाने का नाटक कर रही थी,"मैं क्या नही चाहती आपसे मिलना लेकिन डर तो लगता है ना!",उसने सर उठा कुच्छ ऐसी नज़रो से देखा कि भैया जी का दिल उसके लिए प्यार & उसके जिस्म की चाहता से भर गया.

"मेरे होते तुम्हे डरने की ज़रूरत नही.",उन्होने अपना आगोश और कसा & झुक के उसे चूमने लगे.इस बार नीना उनका साथ दे रही थी.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--59

gataank se aage............-

"Sir,briefcase mil gaya."

"good!",control room me DCP verma kaan se wireless ka headfone lagaye hue the.

"par sir,aapne kaha tha aadmi hai ye to aurat hai."

"kya?briefcase bhure rang ka hai na?"

"haan,sir to aurat kaise ho sakti hai?",vaerma sahab gusse se baukhla gaye.

"sir,aurat hi hai."

"sir,vo hume gachcha de gaya.".peechhe khade ajit ne kaha.

"Ajinkya,jo bhi karo bas anjam achha ho.",verma sahab budbudaye & apne dost ko dhoondne me lag gaye.

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professor ne chalti bus ko agle traffic signal pe chhoda & briefcase ko ulti disha me ja rahi 1 car ki pichhli seat pe daal diya.uski driver ko pata hi nahi chala kyuki vo bechari to apne fone pe baato me magan thi & jab batti hari hui to uska sara dhyan car aage badhane pe tha.professor heero ki potli ko apni jacket ki andar ki jeb me rakhe hue 1 bazar me ghus gaya & vaha se 1 suitcase kharida & 1 hardware ki dukan se kuchh samna kharida & fir policevalo ki nazar se bach ke thodi der tak bazar ghumta raha.is shehar me 1 hi jagah thi jaha vo is waqt mehfuz reh sakta tha.uske kadam udhar hi badh rahe the.

"Ajit,tum Balu & uske sathiyo ki talash jari rakho & Divya,tum namit ke sath Professor Dixit ko dhoondo.",DCP Verma control room me sabhi ko orders de rahe the.unhe lag raha tha ki kal ke din kuchh aisa ghatne vala hai joki achha ho ya bura hoga khatarnak.

udhar divya ka dimagh bas isi soch me laga tha ki professor heere leke chhupa kaha hoga.uska andaza tha ki usne khud hi kidnappers se sauda karne ka soch liya tha lekin uske liye waqt chahiye & tab tak vo kaha chhupega ye uski samajh nahi aa raha tha.abhi tak to uski bhi umeed isi baat pe tiki thi ki jaha kidnappers honge vahi professor kabhi to pahuchega.

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"kaha ja raha hai?",Musa ke ilake ke 1 gairkanooni juaghar me ghuste professor ko 1 hatte-katte aadmi ne roka.professor ne abhi-2 Arshad se baat ki thi & usne kal savere professor ko Jinba nadi ke kinare bani jetty pe bulaya tha joki ab bekar padi thi.Devalay jiba ke kinare hi basa tha.

"andar."

"kyu?teri maa ka byah ho..",baat puri hone se pehle gunda zamin pe apna jabda pakde pada tha.uski halat dekh kuchh gunde bhagte hue vaha aaye.

"mujhe hath lagane se pe hle apne ustad musa ko bolo ki professor us se milne aaya hai.",professor ki kadi aavaz me kuchh aisa tha ki gunde vahi ruk gaye & unme se 1 jueghar ke andar chala gaya.kuchh der baad vo vapas aaya & professor ko gali me aage aane ka sihara kiya.

"khushaamdeed,professor sahab,khushaamdeed!",musa ne aage badh ke professor ko gale se laga liya.professor & musa ki jaan-pehchan kaise hui vo to 1 alag hi dastan hai par jinhone bhi professor ka novel "Aakhiri Bazi" padha hoga to usme Pratap naam ke kirdar & musa me unhe koi farq nahi nazar aata hoga.

"1 bade hi nazuk masle ke silsile me yaha aaya hu,musa.",professor ne kamre me khade logo ki or dekha to musa use leke andar ke kamre me chala gaya jaha professor ne use sari baat batayi.

"kamal ke hain uske khel bhi!",musa ne zor ka thahaka lagate hue uparweale ki or ishara kiya,"tumhe 1 insan se milata hu,professor..zara varun ko bulao.",usne apne 1 aadmi ko ishara kiya.

"varun,main tumhe zimmedar nahi manta..",varun ki dastatn sunane ke baad professor ne kaha,"..halaat ne tumhe jail bhej diya lekin dost,tum bahut badi galti karne ja rahe the.un kidnappers ke hatho 1 bhala kaam hua ki unhone tumhe ye sangeen jurm karne se bacha liya.mere dost,main koshish karunga ki bachche ki baramadgi ke sath-2 tumhe bhi tumhari mushkil se nikalu magar tumhe mera sath dena hoga."

"zarur,professor sahab."

"to thik hai,suno.",professor musa & varun ko apna plan batane laga.

"professor,ye thik nahi.",musa bola,"tum mujhe kyu alag rakh rahe ho?"

"musa,tum humari kitni mada kar rahe ho ye tum nahi samajh sakte lekin tumhe vaha le jake hum tumhe khatre me nahi daal sakte."

"khatro se khelna to humara roz ka kaam hai!"

"musa,mamla sangeen hai & policevale to aise mauko ki talash me hi rehte hain.tum ya tumhara koi bhi aadmi ilake ke aas-paas bhi nazar aaya to vo tumhe fir se band kar denge."

"magar.."

"magar-vagar chhodo,meri baat mano,musa please!"

"thik hai..to kal subah."

"kal subah."

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"abe Chandu dekh to ye to musa ka aadmi hai,sala humare ilake me kya kar raha hai!"

"lagta hai sale ka jine ka dil nahi kar raha.uthao haramzade ko!",6-7 gunde us shakhs ki or badhe.

"1 minute bhai log,apun Ballu bhai se milna chahta hai."

"kyu be?bahan ka rishta karwana hai tujhe un se!",gundo ne bhaddi si hansi hansi.

"bhai log,aajkal tumlog jiski talash me ho us asle ka pata hai apun ke paas."

"are yaar,sala goli de raha hai,todo iske hath."

"abe ruk!",unme se 1 ne ishara kiya.vo dekhne se sabka sardar lag raha tha.uske dimagh me khayal aaya ki agar kahi vo sach bol raha tha & unhone use nahi milwaya tab to ballu sabki jaan le lega & agar jhuth bhi bol raha tha to dushman gang ke aadmi ko pakadwane se kuchh to fayda hoga,"chal."

"pakki khabar hai tere paas.",ballu ne use paini nigaho se dekha,"agar tu game khel raha hai to tujhe kaisi maut milegi ye to tu janta hi hai."

"jhuth bolu to apne hath se apun apni mundi kaat dega aapke samne!"

"thik hai,bhulna mat apni baat.",ballu ke hath baithe-bithaye itna bada surag laga tha,ab heere & bachcha uski pakad se zyada door nahi the.

Ballu ne Musa ke aadmi se Professor Dixit ka huliya le liya tha,usne fauran Raghu ko sari baat batayi jisne Bhaiyya Ji ko fone kiya & unse professor ke bare me puchha.ab bhaiyya ji ne bhi professor ko kabhi nahi dekha tha to vo soch me pad gaye.unhone raghu ko savere tak intezar karne ko kaha & is uljhan ko suljhane ka tarika sochne lage.unhe bas 1 hi insan unhe is uljhan se bahar nikalta dikh raha tha-Nina.

"kaisi ho janeman?"

"thik hi hu.",nina ne thoda pareshan hone ka natak kiya.

"kya baat hai kuchh pareshan lag rahi ho?"

"nahi bas aise hi,itne din ho gaye apne ghar se nikle hue,upar se koi kaam bhi nahi ho pa raha hai,na Anish mil raha hai & ab to.."

"ab to kya?"

"vo aadmi tha na.."

"vo heere leke bhag gaya."

"aapko pata hai?!",nina chaunk uthi.

"vo chhodo,1 baat batao,us aadmi ko tumne dekha hai ya fir uski koi tasvir mil sakti hai?"

"maine use dekha to nahi magar vo 1 mahoor lekhak hai,internet se to uski tasvir aasani se mil jayegi."

"hun..ye nek kaam tum hi kar do.",bhaiya ji ka us se milne ka koi irada to nahi tha magar nina ki khanakti aavaz ne unhe uske jism ke utar-chadhav yaad dila diye the & unhe ye khayal aaya ki isi bahane shayad us se mulakat bhi ho jaye.

"kar to doon magar aapko dungi kaise..vo bhi abhi raat ko?"

"abhi zyada waqt nahi hua hai.tum 1 kaam kyu nahi karti,apne ghar chali jao 7 main vaha pahunchta hu tumse tasveer lene ko."

"isme to bahut khatra hai.nahi main nahi aaoongi."

"pagal mat bano.zara socho,hume kitna bada fayda hoga & thoda khatra to uthana hoga na!"

"magar.."

"soch lo,nina.aise mauke baar-2 nahi milte.jo bhi irada ho mujhe bata dena.",bhaiya ji ne fone rakh diya.vo nina ke husn ke deewane the lekin itne bhi nahi ki apni baate manwane ke tarike bhul gaye hon.udhar nina ko unke yu fone kaatne se laga ki kahi vo uske hatho se nikal na jaye.vo achhi tarah janti thi ki bhaiyya ji bade aaram se kahi aur se bhi professor ki tasvir le sakte the magar us se maangane ka maqsad sirf uske jism ki nazdiki paana tha.usne tay kar liya ki vo unse milne jayegi.

"suno,aaj raat main zara ghar chali jati hu.",usne Mukul se kaha.

"kyu nina?"

"itne dino se ghar chhuta hua hai pata nahi kya halat ho gayi hogi.aaj raat jake vahi so jati hu fir savere naukro se kaam karwa ke din me vapas aa jaoongi."

"to savere chali jana na."

"nahi,mukul fir savere yaha ke kamo me der ho jayegi.main kal vaha safai vagairah karwa ke aa jaoongi na.",mukul janta tha ki nina 1 baar kuchh than le to use fir us baat se digana bada mushkil tha to usne hami bhar di.nina fauran vaha se apne ghar ko nikal gayi.

"main ghar ja rahi hu."

"ye hui na baat.",raat ke rangin hone ki kalpana se bhaiyya ji ka lund khada hone laga.

"magar main nahi chahti ki koi bhi aapko vaha dekhe."

"tum us baat ki fikr mat karo,main 1 baje ke karib aaoonga."

"fir bhi aapko kisi ne ghar me ghuste dekh liya to gazab ho jayega.",nina ne ghabrane ka natak kiya,"upar se aapke guards,batti wali car..mujhe bahut darr lag raha hai.kisi aur tarike se foto le lijiye na!"

'are,tum bahut ghabrati ho.main na guards ko laoonga na hi batti vali car,tum bas apne ghar ka 1 darwazaa khuila chhod do."

"lekin..",kuchh der tak nina na-nukar karti rahi magar ant me maan gayi.tay ye hua ki nina apne ghar ka pichhla darwaza khula chhodegi.bhaiyya ji usi raste andar aayenge & unki car ghar se door park hogi.

Raat ke 1 baje Professor Dixit & varun agli subah ki taiyyari karne ke baad bistar pe gaye lekin dono ki aankho me nind nahi thi.kal ki chinta dono hi ke dilo me thi & dono chupchap bas karwate badal rahe the.

Divya ne kafi dimagh lagane ke baad soch liya tha ki satse hotels ya professor ke dosto ke yaha chhapa marne se vo milne vala nahi hai,vo kisi aisi jagha chhupa hai jaha koi use dhoondane ki soch bhi nahi sakta.vo professor ki premika thi lekin dono ne abhi itna arsa sath nahi guzara tha ki use uske har thikane ya soch ke bare me malum ho lekin fir bhi usne 1 tukka lagaya ki ho na ho Ajinkya Dixit zarur kisi gunde ke sath chhupa hai kyuki police ye soch bhi nahisa kti ki 1 crore ke heere leke vo kisi mujrim ke paas jayega.usne fauran shehar ke gundo ki files nikalwa ke padhna shuru kiya.

udhar ajit ko shehar ke nakshe pe us jagah jaha Ballu & Charlie taxi se utre the,ke 2 km ke dayre me har ilake ki puri jankari le raha tha.uski mehnat rang lane wali thi magar use abhi ye pata nahi tha & use badi khij ho rahi thi.

is sab se bekhabar ballu & charlie so rahe the & Deva & Dipti Anish ki pehredari kar rahe the & Arshad usi arms dealer se 1 cinema hall ke bahar mil raha tha,"maine use kal milne bula liya hai."

"thik hai.ye kapde & jute rakho.",dono hall ke bahar 1 becnh pe baithe the & usne pairo ke paas rakhe 1 packet ki or ishara kiya,"bachche ko yehi pehna ke chhodna."

"lekin kyu?"

"taki forensic valo ko saboot milne ki koi gunjaish na rahe."

"ok."

"& haan,bachche ke chhutate hi tum sab yaha se bahut door chale jaoge & kuchh dino tak 1 dusre se bhi koi contact nahi rakhoge."

"mujhe yaad hai.",arshad ne packet uthaya & bike ki or badh chala.jurm uski zindagi ka atoot hissa ban chuka tha lekin na jane kyu is baar uske dil me 1 anjana sa darr

paida ho gaya tha.usne bike start ki & vaha se chala gaya.

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Nina ne professor ki tasvir ka printout nikal liya tha.ab use bas Bhaiyya Ji ka intezar karna tha.thodi hi der me vo bore hone lagi & ubasiya lene lagi.usne socha ki 1 baje tak so hi le.ghar aake usne kapde utarke 1 negligee pehan li thi & vo usi me so gayi.

"haaaa....!",hairat se uski nind khuli.vo bayi karwat pe chadar tane so rahi thi ki koi uske peechhe bistar me ghus gaya tha & use bazu me ghere uske chehre ko deewano ki tarah chum raha tha.

"aap aa gaye..oohhhhh..!",kamre me roshni thi & bhaiyya ji uske daye kaan me jibh fira rahe the,"please..batti band kar dijiye..& aahhhhh..ye kya abhi to 12 hi baje hain..nahi..",bhaiyya ji uski negligee me hath ghusa ke uske nipples ko bari-2 se masal rahe the,"..zarur kisi ne dekh liya hoga..uunnnnnhhhh...!",bhaiya ji ne uske hotho ko apne hotho se band kar diya.

nina ne mehsus kiya ki bhaiyya ji puri tarah se nange the.unke mazboot jism ke ehsas ne use mast to kar diya tha magar har baar ki tarah is baar bhi vo aasani se unhe apna jism saunpna nahi chahti thi.unka hath jaise hi uske seene se neeche uski panty me ghusa usne kiss todte hue unka hath pakad ke jhatka & unki giraft se azad ho gayi.

"aap samajhte hain kya hoga agar humara raaz fash ho gaya to!",vo ghutno pe baith aankho se angare barsati gusse se boli.bhaiya ji bhi uth baithe,nina ka seena upar-neeche ho raha tha & nipples ka aakar negligee me se jhalak raha tha.uske bikhre baal dilkash andaz me uske chehre pe the.

"tum bahut ghabrati ho.kisi ne bhi nahi dekha hai mujhe aate hue..achha tumne tasvir nikali?",unhone baat badal di.

"haan.",berukhi se bol vo ghumne lagi ki bhaiya ji aage badhe & ghutno pe baith use fir se baaho me bhar liya.

"chhodiye..mera mann nahi hai..please..jaiye..!",vo naraz hone ka natak karne lagi.bhaiya ji uski kamar ko thame uski chhatiyo ko apne chaude seene se peetse hue uske chehre ko muskurate hue dekhne lage,"..main to aapki har baat manti hu magar aap nahi...ab chhodiye na..!",usne unhe dhakelne ki koshish ki magar bhaiya ji use thame bas 1 tak use dekhte rahe.aisa kya tha us chehre me,us jism me..jisne unhe is kadar deewana bana diya tha ki vo uske liye aisa pagalpan kar rahe the.

"chhodiya na..!"nina ko unke chehre ka bhav thoda badla laga,"kya hua?..aise kya dekh rahe hain?"

"tumhari chahta mujhe aise majboor kar deti hai & main aisi harkate kar baithata hu.",bhaiya ji ne shayad hi kabhi aise apni biwi se bhi baat ki thi,"ab batao isme kya sirf mera kasoor hai?",nina ne nazre neechi kar li.jo nazuk hath abhi tak bhaiya ji ke seene ko dhakel rahe the ab uspe shant pade the & bahut hi halke-2 baalo se khel bhi rahe the.

"magar thodi to savdhani baratni chahiye na!",nina ne sar jhukaye unke seene pe hath firate jawab diya.ab vo maan jane ka natak kar rahi thi,"main kya nahi chahti aapse milna lekin darr to lagta hai na!",usne sar utha kuchh aisi nazro se dekha ki bhaiya ji ka dil uske liye pyar & uske jism ki chahta se bhar gaya.

"mere hote tumhe darne ki zarurat nahi.",unhone apna agosh aur kasa & jhuk ke use chumne lage.is baar nina unka sath de rahi thi.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--60

गतान्क से आगे............-

भैया जी नीना की नेग्लिजी मे हाथ घुसाए उसकी मखमली पीठ & कमर को सहलाते हुए उसे चूम रहे थे.नीना के हाथ भी अब गर्मजोशी से अपने आशिक़ के सीने के बालो & कंधो से होते हुए उसके सर के बालो मे जा घुसे थे.चूमते हुए भैया जी ने उसकी नेग्लिजी पूरी उपर उठा दी & फिर किस तोड़ते हुए उसे उसके जिस्म से लगा कर दिया.नीना ने शरमाने का नाटक करते हुए अपनी बाहें अपने सीने के पार रख अपनी चूचियाँ च्छूपा ली.

भैया जी ने मुस्कुराते हुए उसकी बाहे उसके सीने से हटाई & फिर झुक के उसकी बाई चूची को दाए हाथ मे थाम मुँह मे भर लिया & चूसने लगे.नीना के जिस्म मे बिजली दौड़ गयी & उसके हाथ भैया जी के कंधे & सिर से जा लगे.भैया जी काफ़ी देर तक उसकी चूची को चूस्ते रहे & फिर उसकी दाई छाती के साथ भी वही हरकत दोहराने लगे.नीना की चूत जोकि बहुत ज़्यादा गीली हो चुकी थी अब बुरी तरह कसमसने लगी थी & जब भैया जी ने उसकी दाई चूची को मुँह मे पूरा भरने की कोशिश करते हुए बहुत ही ज़ोर से चूसा तो वो उनके बाल बेचैनी से नोचते हुए झाड़ गयी.

भैया जी ने अपनी महबूबा को बाहो मे थामा & उसके चेहरे को चूमने लगे.सुबक्ती नीना उनके आगोश मे समा गयी & अपने लब उनके लेबो से सटा दिए.कुच्छ देर तक तो भैया जी के हाथ उसकी पीठ से ही लगे रहे मगर थोड़ी देर के बाद वो नीचे गये & उसकी मस्त गंद को पॅंटी के अंदर घुस दबाने लगे.

जोश से कसी चूचियो पे प्रेमी के सीने के बालो की गुदगुदी महसूस होते ही नीना & मस्त हो गयी & उनसे थोड़ा & सॅट गयी.भैया जी ने दाए हाथ को आगे किया & आगे से उसकी पॅंटी मे घुसा के उसकी चूत के अंदर-बाहर करने लगे.चूत से तो पहले से ही रस की धार बह रही थी.भैया जी ने उसका दाया हाथ अपने कंधे से उतारा & उसमे अपना लंड थमा दिया.कुच्छ देर तक वो वैसे ही उस से लंड हिलवाते हुए उसकी चूत मारते रहे.उसके बाद उन्होने उंगली बाहर निकाली & नीना को दिखा उंगली को अपने मुँह मे भर सारा रस चाट लिया.

नीना ने शर्मा के मुँह उनके सीने मे च्छुपा लिया तो उन्होने उसकी पॅंटी नीचे सरका दी & उसे चूमते हुए उसे बाहो मे भरे बिस्तर पे लेट गये.थोड़ी देर तक दोनो प्रेमी 1 दूसरे को बाहो मे भरे बिस्तर पे लोटते हुए 1 दूसरे को चूमते रहे.उसके बाद भैया जी ने नीना की जंघे फैलाई & उसकी आँखो मे देखते हुए झुक के उसकी चूत से अपना मुँह सटा दिया.

आह भरते हुए नीना ने चूत उपर उठा दी & उनके सर को हटाने की कोशिश करने लगी मगर उन्होने उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया & कुच्छ ही पॅलो मे नीना उनके सर को हटाने के बजाय उसे अपनी चूत मे और घुसा रही थी.भैया जी ने चूत चाटते हुए उसकी टाँगो को सीधा किया & फिर घूम के उसके उपर इस तरह से आ गये की उनका तगड़ा लंड नीना के चेहरे के उपर लटकने लगा.नीना उनका इशारा समझ गयी मगर शरमाने का नाटक करती रही & मुँह बाई तरफ फेर लिया.

भैया जी ने लंड झुका के उसके होटो पे सटा दिया & कमर हिलाने लगे मानो होंठो को खोल लंड मुँह मे लेने की दरखास्त कर रहे हों.नीना उनकी इल्तिजा को अनसुना करती रही तो उन्होने उसकी चूत से मुँह उठाया & उसके सिरहाने आए & उसके सर को थाम अपना लंड उसके मुँह मे घुसा दिया.अपने घुटनो पे बैठ वो उसके सर को पकड़ उसके मुँह को चोदने लगे तो नीना ने भी लंड चूसना शुरू कर दिया.

कुच्छ पल बाद वो फिर से 69 पोज़िशन मे आ गये & अपनी महबूबा की चूत चाटने लगे & तब तक चाटते रहे जब तक की वो झाड़ नही गयी.उसके झाड़ते ही उन्होने लंड उसके मुँह से निकाला & घूम के उसे उसकी चूत मे घुसा दिया & चुदाई शुरू कर दी.नीना की मस्ती का तो कोई हिसाब था नही,वो ज़ोर-2 से आहे भरते हुए भैया जी को अपनी बाहो मे भर उनकी चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगी.उसकी मस्तानी चूत मे लंड घुसा के भैया जी को भी कुच्छ सुकून & ढेर सा मज़ा मिल रहा था.

नीना बिस्तर से उचक के उनके हर धक्के का जवाब दे रही थी,उसके नाख़ून उनकी पीठ पे खरोंच के निशान छ्चोड़ रहे थे & भैया जी की खुशी का परवर नही था.वो लंड को सूपदे तक बाहर खींच बहुत ज़ोर से वापस जड तक उसकी चूत मे धंसा रहे थे & उनके हर धक्के पे नीना के जिस्म मे मज़े की फुलझड़िया फुट रही थी.

"ओईईई माआ......हाईईईई.......ऊहह..!",नीना उनसे लिपट के उचकति हुई उनके कान को चूमे जा रही थी,उसकी चूत के रस छ्चोड़ने की धार से भैया जी समझ गये कि उनकी महबूबा झाड़ चुकी है.कुच्छ पल और धक्के मारने के बाद उन्होने लंड बाहर खींचा & फ़ौरन झुक के नीना की चूत से बह रहे रस को चाटने लगे.नीना तो मस्ती से बहाल हो उठी & उनके बालो को खींचती उनके सर को चूत से अलग करने की नाकाम कोशिश करते हुए च्चटपटाने लगी.

भैया जी ने सारा रस चाता & फिर घुटनो पे बैठ उसकी टाँगे फैलाक़े फिर से उसकी चूत मे लंड घुसा दिया.नीना 1 बार फिर चुदने लगी.कुच्छ देर बाद भैया जी ने उसकी बाहे पकड़ उसे उठाया & अपने सीने से लगा दिया.नीना ने भी अपनी बाहे उनकी गर्दन के गिर्द कस दी.भैया जी घुटनो पे बैठे उसकी गंद की कसी फांको को थामे धक्के पे धक्के लगाए जा रहे थे.नीना का जिस्म तो जैसे मस्ती के समंदर की गहराई मे डूब गया था & वाहा से बाहर आना ही नही चाह रहा था.

वो भैया जी के सर को पकड़े उनके होंठो को चूमने लगी तो भैया जी ने अपनी 1 उंगली पीछे उसकी गंद मे घुसा दी,"ऊहह..!",नीना ने किस तोड़ के सर को पीछे फेंका.भैया जी लंड से उसकी चूत & उंगली से उसकी गंद मारने लगे.ये दोहरी मार नीना का मदहोश जिस्म ज़्यादा देर तक झेल नही पाया & वो फिर से झाड़ गयी.वो चीख मार के पीछे बिस्तर पे गिर गयी.इस बार उसकी चूत से पहले से भी ज़्यादा रस निकला था.वो हाँफ रही थी & उसके चलते उसका सीना & भी दिलकश लग रहा था.भैया जी झुके & उसकी चूचिया चूसने लगे.

"उउम्म्म्म....उउन्न्ह..!",नशे मे डूबी नीना उनके सर को सहलाती आहे भर रही थी.भैया जी उसकी छातियो से नीचे उसके गोल पेट पे आए & वाहा चूमने के बाद उसकी नाभि चाटने लगे.इतनी क़ातिल चुदाई के बाद इतने हल्के रेशमी से एहसास ने नीना को और गरम कर दिया.भैया जी ने उसकी नाभि से ज़ुबान हटाई & फिर उसकी चूत से बह आए रस को चाटने लगे.नीना को ऐसा लग रहा था जैसे उसके जिस्म मे जान ही नही है मगर फिर भी प्रेमी की ज़ुबान चूत पे महसूस करते ही वो अपनी कमर हिलाने लगी.

भैया जी ने फ़ौरन मुँह हटाया & लंड को दोबारा उसकी चूत मे उतार दिया.दोनो ने 1 दूसरे को बाहो मे भर लिया,नीना ने अपनी टाँगे भैया जी के घुटनो के पीछे फँसा दी & उनके सहारे कमर उचकाने लगी.उसके हाथ उनकी गंद से लगे हुए थे.भैया जी के होंठ उसके चेहरे से लेके सीने & उपरी बाहो तक घूम रहे थे लेकिन उनके हाथ अब अपनी महबूबा के हसीन चेहरे से ही सटे हुए थे.बहुत देर तक दोनो जिस्मो की जद्ड़ोजेहाद चलती रही & उसके बाद दोनो ने 1 साथ बहुत ज़ोर से चीख-जो शायद बाहर की सड़क तक सुनाई दी,मारी जोकि दोनो के 1 साथ झड़ने का एलान कर रही थी.चूत मे भैया जी के गर्म वीर्या को महसूस करते ही नीना को वोही सुकून मिल गया जिसकी उसे इस खेल के शुरू होने से ही चाह थी.

"उउंम....औचह..!..क्या करते हैं?!..दर्द होता है..!",नीना बाई करवट पे लेटी थी & भैया जी उसके पीछे उसके पेट पे दाई बाँह डाले उसे सहलाते हुए बाई को उसकी गर्दन के नीचे डालके उसके हसीन चेहरे को खुद की तरफ घुमा के उसे चूम रहे थे & हल्के से उसके निचले होंठ पे काट लिया था.ऐसा करते ही नीना अपने नखरे दिखाते हुए उनकी बाँहो से निकल के बिस्तर से उठ गयी.

"प्रोफेसर दीक्षित की तस्वीर नही देखनी.",सर घुमा के बाए कंधे के उपर से उन्हे देख वो मुस्कुराइ & अपने ड्रेसिंग टेबल के पास चली गयी & उसकी दराज खोल कुच्छ देर पहले ही निकाला प्रिंट आउट बाहर किया.

"तो ये है वो!",भैया जी ने उसे फिर से अपने आगोश मे क़ैद कर लिया & दाए हाथ मे उस से तस्वीर ले ली.ये अजीब सी ही बात थी कि उन्होने आजतक इस मशहूर इंसान की शक्ल नही देखी थी.उन्होने तस्वीर को वापस ड्रेसिंग टेबल पे रखा & नीना की चूचियो पे अपने हाथो से दायरे बनाते हुए उसके होंठो को चूमने लगे.अभी सवेरा होने मे काफ़ी वक़्त था & तब तक उनकी तवज्जो की हक़दार वो तस्वीर नही उनकी महबूबा थी.

"उउन्न्ह..जाइए ना..!..हो गया..बस..ऊव्वववव..!",नीना के नाटक ने उन्हे और जोश से भर दिया & उन्होने फ़ौरन उसकी टाँगे फैला के खड़े-2 ही उसकी चूत,जोकि दोनो के रस से गीली थी,मे अपना लंड घुसा दिया.

"आन्न्‍नणणनह..प्लीज़....अब नही..हाईईईईईईईईई..!",नीना ने ड्रेसिंग टेबल के शीशे को दोनो हाथो से थाम लिया & उनसे चुदने लगी.उसके मस्ताने चेहरे के हर 1 गर्म भाव को वो शीशे मे देख रहे थे & हर पल अपने धक्को की रफ़्तार बढ़ा रहे थे.अपने सपनो के साकार होने की खुशी & जिस्म की आग के ठंडे होने की आशा ने नीना को & मस्त कर दिया & वो बस आँखे बंद कर अपने आशिक़ के साथ झड़ने की जद्ड़ोजेहाद करने लगी.

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बल्लू के सामने तस्वीरो का 1 पुलिंदा पड़ा था & मूसा का गद्दार आदमी उन तस्वीरो को देख रहा था.आख़िर उसने प्रोफेसर की तस्वीर को पहचान ही लिया.बल्लू की खुशी का ठिकाना नही था मगर उसका चेहरा उसके दिल का हाल बयान नही कर रहा था.उसने आपमने 1 शख्स को उस आदमी को उसकी कीमत देने को कहा & खुद आगे की तैय्यारि मे जुट गया.

उधर प्रोफेसर ने भी वरुण के साथ किडनॅपर्स से पहली मुलाकात की तैय्यारि कर ली थी & ज़िँबा की बंद जेटी की ओर जाने को सवेरा होते ही निकल पड़ा था.पोलीस भी निथल्लि नही बैठी थी,अजीत के ऑर्डर के मुताबिक पोलिसेवाले & मुखबिर ने उस इलाक़े का चप्पा-2 छान मारा था & ऐसे 5 मकानो को मार्क कर लिया था जिनके बारे मे उन्हे शुबहा था.रात 2 बजे से अजीत ने उन मकानो पे छापा मारना शुरू किया मगर पहले 4 मकानो मे उसके हाथ कुच्छ ना लगा.पाँचवे मकान तक पहुँचते-2 सुबह हो गयी थी & अब वो & उसके आदमी उस मकान को घेरने से पहले की प्लॅनिंग कर रहे थे.

दिव्या ने भी सवेरा होते-2 1 गुंडे की फाइल मे 1 लाइन ऐसी पढ़ी थी जिसे पढ़ के उसे समझ आ गया था कि प्रोफेसर कहा है.नामी गुंडे मूसा शीक की फाइल मे 1 जगह ये लिखा था कि आज से 10 बरस पहले उसके खिलाफ बहुत ठोस सबूत ना मिलने पे उसे मामूली सी सज़ा हुई थी.उसी दौरान जैल मे उस से मिलने 1 क्रिमिनॉलजिस्ट प्रोफेसर अजिंक्या दीक्षित आए थे जिन्होने अपनी थीसिस मे भी उसका ज़िक्र किया था.दिव्या अपनी टीम के साथ मूसा के अड्डे की ओर निकल गयी & वाहा पहुँचते ही उसे छुप-2 के निकलते प्रोफेसर & वरुण दिख गये.वो अपने आदमियो के साथ छुप के उनका पीछा करने लगी इस बात से बेख़बर की उसके पीछे-2 बल्लू अपने गुणडो के साथ आ रहा है.

प्रोफेसर & वरुण अलग-2 जेटी पहुँचे.प्रोफेसर 1 उजड़े गेट से अंदर दाखिल हुए.खूबसूरत ज़िँबा नदी के किनारे इस जगह पे कभी पार जाने के लिए स्टीमर चला करते थे मगर फिर 2 पुल बने & नाव चलना लगभग बंद ही हो गया.तब से जेटी भी वीरान पड़ी थी & अब तो जुंगली पेड़-पौधो ने उसके बड़े हिस्से को ढँक लिया था.प्रोफेसर लकड़ी की जेटी पे खड़ा था & वरुण जेटी के बाहर के रास्ते की छिप के निगरानी कर रहा था.जेटी तक या तो पानी के रास्ते या फिर उस रास्ते से ही पहुँचा जा सकता था.

"हाथ उपर कर बिना मुड़े पीछे की ओर 20 कदम आओ.",ये अरशद की आवाज़ थी & प्रोफेसर उसे फ़ौरन पहचान गया & उसने उसके कहे मुताबिक किया.

"अब दाए घुमो & 20 कदम चलो.",1 टूटे दफ़्तर के कह्न्दहर के अंदर प्रोफेसर घुस गया.

"मेडम,अंदर चलें?"

"नही,बिल्कुल नही.सब नज़रो से ओझल रहो & 1 आदमी जीप पे तैनात रहो.",दिव्या ने इनस्पेक्टर को हिदायत दी तो सभी छुप गये & उस रास्ते & वरुण पे निगाह गढ़ा दी.

KHEL KHILADI KA paart--60

gataank se aage............-

Bhaiya Ji Nina ki negligee me hath ghusaye uski makhmali pith & kamar ko sehlate hue use chum rahe the.nina ke hath bhi ab garmjoshi se apne aashiq ke seene ke balo & kandho se hote hue uske sar ke baalo me jaa ghuse the.chumte hue bhaiya ji ne uski negligee puri upar utha di & fir kiss todte hue use uske jism se laga kar diya.nina ne sharmane ka natak karte hue apni baahen apne seene ke paar rakh apni chhatiya chhupa li.

bhaiya ji ne muskurate hue uski baahe uske seene se hatayi & fir jhuk ke uski bayi choochi ko daye hath me tham munh me bhar liya & chusne lage.nina ke jism me bijli daud gayi & uske hath bhaiya ji ke kandhe & sir se ja lage.bhaiya ji kafi der tak uski choochi ko chuste rahe & fir uski dayi chhati ke sath bhi vahi harkat dohrane lage.nina ki chut joki bahut zyada gili ho chuki thi ab buri tarah kasmasane lagi thi & jab bhaiya ji ne uski dayi chhati ko munh me pura bharne ki koshish karte hue bahut hi zor se chusa to vo unke baal bechaini se nochte hue jhad gayi.

bhaiya ji ne apni mehbooba ko baaho me thama & uske chehre ko chumne lage.subakti nina unke agosh me sama gayi & apne lab unke labo se sata diye.kuchh der tak to bhaiya ji ke hath uski pith se hi lage rhae magar thodi der ke baad vo neeche gaye & uski mast gand ko panty ke andar ghus dabane lage.

josh se kasi choochiyo pe premi ke seene ke baalo ki gudgudi mehsus hote hi nina & mast ho gayi & unse thoda & sat gayi.bhaiya ji ne daye hath ko aage kiya & aage se uski panty me ghusa ke uski chut ke andar-bahar karne lage.chut se to pehle se hi ras ki dhar beh rahi thi.bhaiya ji ne uska daya hath apne kandhe se utara & usme apna lund thama diya.kuchh der tak vo vaise hi us se lund hilwate hue uski chut marte rahe.uske baad unhone ungli bahar nikali & nina ko dikha ungli ko apne munh me bhar sara ras chat liya.

nina ne sharma ke munh unke seene me chhuipa liya to unhone uski panty neeche sarka di & use chumte hue use baaho me bahr bistar pe let gaye.thodi der tak dono premi 1 dusre ko baaho me bhare bistar pe lotate hue 1 dusre ko chumte rahe.uske baad bhaiya ji ne nina ki janghe failayi & uski aankho me dekhte hue jhuk ke uski chut se apna munh sata diya.

aah bharte hue nina ne chut upar utha di & unke sar ko hatane ki koshish karne lagi magar unhone uski chut chaatna shuru kar diya & kuchh hi palo me nina unke sar ko hatane ke bajay use apni chut me aur ghusa rahi thi.bhaiya ji ne chut chaatate hue uski tango ko seedha kiya & fir ghum ke uske upar is tarah se aa gaye ki unka tagda lund an nina ke chehre ke upar latakne laga.nina unka ishara samajh gayi magar sharmane ka natak karti rahi & munh bayi taraf fer liya.

bhaiya ji ne lund jhuka ke uske hotho pe sata diya & kamar hilane lage mano hotho ko khol lund munh me lene ki darkhast kar rahe hon.nina unki iltija ko ansuna karti rahi to unhone uski chut se munh uthaya & uske sirahne aaye & uske sar ko tham apna lund uske munh me ghusa diya.apne ghutno pe baith vo uske sar ko pakad uske munh ko chodne lage to nina ne bhi lund chusna shur kar diya.

kuchh pal baad vo fir se 69 position me aa gaye & apni mehbooba ki chut chaatane lage & tan tak chaatate rahe jab taki ki vo jhad nahi gayi.uske jhadte hi unhone lund uske munh se nikala & ghum ke use uski chut me ghusa diya & chudai shuru kar di.nina ki masti ka to koi hisab tha nahi,vo zor-2 se aahe bharte hue bhaiya ji ko apni baaho me bhar unki chudai ka lutf uthane lagi.uski mastani chut me lund ghusa ke bhaiya ji ko bhi kuchh sukun & dher sa maza mil raha tha.

nina bistar se uchak ke unke har dhakke ka jawab de rahi thi,uske nakhun unki pith pe kharonch ke nishan chhod rahe the & bhaiya ji ki khushi ka parawar nahi tha.vo lund ko supade tak bahar khinch bahut zor se vapas jud tak uski chut me dhansa rahe the & unke har dhakke pe nina ke jism me maze ki phuljhadiya phut rahi thi.

"ouiiiiii maaaa......haiiiii.......oohhhhhhhhhhh..!",nina unse lipat ke uchakti hui unke kaan ko chume ja rahi thi,uski chut ke ras chhodne ki dhar se bhaiya ji samajh gaye ki unki mehboobe jhad chuki hai.kuchh pal aur dhakke marne ke baad unhone lund bahar khincha & fauran jhuk ke nina ki chut se beh rahe ras ko chaatne lage.nina to masti se behal ho uthi & unke baalo ko khinchti unke sar ko chut se laag karne ki nakam koshish karte hue chhatpatane lagi.

bhaiya ji ne sara ras chata & fir ghutno pe baith uski tange failake fir se uski chut me lund ghusa diya.nina 1 baar fir chudne lagi.kuchh der baad bhaiya ji ne uski baahe pakad use uthaya & apne seene se laga diya.nina ne bhi apni baahe unki gardan ke gird kas di.bhaiya ji ghutno pe baithe uski gand ki kasi fanko ko thame dhakke pe dhakke lagaye ja rahe the.nina ka jism to jaise masti ke samandar ki gehrayi me doob gaya tha & vaha se bahar aana hi nahi chah raha tha.

vo bhaiya ji ke sar ko pakde unke hotho ko chumne lagi to bhaiya ji ne apni 1 ungli peechhe uski gand me ghusa di,"oohhhhh..!",nina ne kiss tod ke sar ko peechhhe fenka.bhaiya ji lund se uski chut & ungli se uski gand marne lage.ye dohri maar nina ka madhosh jism zyada der tak jhel nahi paya & vo fir se jhad gayi.vo chikh maar ke peechhe bistar pe gir gayi.is bar uski chut se pehle se bhi zyada ras nikla tha.vo hanf rahi thi & uske chalte uska seena & bhi dilkash lag raha tha.bhaiya ji jhuke & uski choochiya chusne lage.

"uummmm....uunnhhhhh..!",nashe me doobi nina unke sar ko sehlati aahe bhar rahi thi.bhaiya ji uski chhatiyo se neeche uske gol pet pe aaye & vaha chumne ke baad uski nabhi chaatne lage.itni qatil chudai ke baad itne halke reshmi se ehsas ne nina ko aur garam kar diya.bhaiya ji ne uski nabhi se zuban hatayi & fir uski chut se beh aaye ras ko chaatane lage.nina ko aisa lag raha tha jaise uske jism me jaan hi nahi hai magar fir bhi premi ki zuban chut pe mehsus karte hi vo apni kamar hilane lagi.

bhaiya ji ne fauran munh hataya & lund ko dobara uski chut me utar diya.dono ne 1 dusre ko baaho me bhar liya,nina ne apni tange bhaiya ji ke ghutno ke peechhe fansa di & unke sahara kamar uchkane lagi.uske hath unki gand se lage hue the.bhaiya ji ke honth uske chhere se leke seene & upri baaho tak ghum rahe the lekin unke hath abs apni mehbooba ke haseen chehre se hi sate hue the.baht der tak dono jismo ki jaddojehad chalti rahi & uske baad dono ne 1 sath bahut zor se chikh-jo shayad bahar ki sadak tak sunai di,mari joki dono ke 1 sath jhadne ka elan kar rtahi thi.chut me bhaiya ji ke garm virya ko mehsus karte hi nina ko vohi sukun mil gaya jiski use is khel ke shuru hone se hi chah thi.

"Uumm....ouchhhh..!..kya karte hain?!..dard hota hai..!",Nina bayi karwat pe leti thi & Bhaiya ji uske peechhe uske pet pe dayi banh dale use sehlate hue bayi ko uski gardan ke neeche dalke uske haseen chehre ko khud ki taraf ghuma ke use chum rahe the & halke se uske nichle honth pe kaat liya tha.aisa karte hi nina apne nakhre dikhate hue unki banho se nikal ke bistar se uth gayi.

"Professor Dixit ki tasvir nahi dekhni.",sar ghuma ke baye kandhe ke upar se unhe dekh vo muskurayi & apne dressing table ke paas chali gayi & uski daraj khol kuchh der pehle hi nikala print out bahar kiya.

"to ye hai vo!",bhaiya ji ne use fir se apne agosh me qaid kar liya & daye hath me us se tasvir le li.ye ajib si hi baat thi ki unhone aajtak is mashoor insan ki shakl nahi dekhi thi.unhone tasveer ko vapas dressing table pe rakha & nina ki chhatiyo pe apne hatho se dayre banate hue uske hotho ko chumne lage.abhi savera hone me kafi waqt tha & tab tak unki tavajjoh ki haqdar vo tasveer nahi unki mehbooba thi.

"uunnhhhhh..jaiye na..!..ho gaya..bas..oowwwww..!",nina ke natak ne unhe aur josh se bhar diya & unhone fauran uski tange faila ke khade-2 hi uski chut,joki dono ke ras se gili thi,me apna lund ghusa diya.

"aannnnnnhhhh..please....ab nahi..haiiiiiiiiii..!",nina ne dressing table ke sheeshe ko dono hatho se tham liya & unse chudne lagi.uske mastane chehre ke har 1 garm bhav ko vo shishe me dekh rahe the & har pal apne dhakko ki raftar badha rahe the.apne sapno ke sakar hone ki khushi & jism ki aag ke thande hone ki aasha ne nina ko & mast kar diya & vo bas aankhe band kar apne aashiq ke sath jhadne ki jaddojehad karne lagi.

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Ballu ke samne tasveero ka 1 pulinda pada tha & Musa ka gaddar aadmi un tasveero ko dekh raha tha.aakhir usne professor ki tasvir ko pehchan hi liya.ballu ki khushi ka thikana nahi tha magar uska chehra uske dil ka haal bayan nahi kar raha tha.usne apmne 1 shakhs ko us aadmi ko uski keemat dene ko kaha & khud aage ki taiyyari me jut gaya.

udhar professor ne bhi Varun ke sath kidnappers se pehli mulakat ki taiyyari kar li thi & Jinba ki band jetty ki or jane ko savera hote hi nikal pada tha.police bhi nitthali nahi baithi thi,Ajit ke order ke mutabik policevale & mukhbir ne us ilake ka chappa-2 chhan mara tha & aise 5 makano ko mark kar liya tha jinke bare me unhe shubaha tha.raat 2 baje se ajit ne un makano pe chhapa marna shuru kiya magar pehle 4 makano me uske hath kuchh na laga.panchve makan tak pahunchte-2 subah ho gayi thi & ab vo & uske aadmi us makan ko gherne se pehle ki planning kar rahe the.

Divya ne bhi savera hote-2 1 gunde ki file me 1 line aisi padhi thi jise padh ke use samajh aa gaya tha ki professor kaha hai.nami gunde Musa Sheikh ki file me 1 jagah ye likha tha ki aaj se 10 baras pehle uske khilaf bahut thos sabut na milne pe use mamuli si saza hui thi.usi dauran jail me us se milne 1 criminologist Professor Ajinkya Dixit aaye the jinhone apni thesis me bhi uska zikr kiya tha.divya apni team ke sath musa ke adde ki or nikal gayi & vaha pahunchte hi use chhup-2 ke nikalte professor & varun dikh gaye.vo apne aadmiyo ke sath chhup ke unka peechha karne lagi is baat se bekhabar ki uske peechhe-2 Ballu apne gundo ke sath aa raha hai.

professor & varun alag-2 jetty pahunche.professor 1 ujde gate se andar dakhil hue.khubsurat jinba nadi ke kinare is jagah pe kabhi paar jane ke liye steamer chala karte the magar fir 2 pul bane & nave chalna lagbhag band hi ho gaya.tab se jetty bhi viran padi thi & ab to jungli ped-paudho ne uske bahde hisse ko dhank liya tha.professor lakdi ki jetty pe khada tha & varun jetty ke bahar ke raste ki chhip ke nigrani kar raha tha.jetty tak ya to pani ke raste ya fir us raste se hi pahuncha ja sakta tha.

"hath upar kar bina mude peechhe ki or 20 kadam aao.",ye Arshad ki aavaz thi & professor use fauran pehchan gaya & usne uske kahe mutabik kiya.

"ab daye ghumo & 20 kadam chalo.",1 tute daftar ke kahndahar ke andar professor ghus gaya.

"madam,andar chalen?"

"nahi,bilkul nahi.sab nazro se ojhal raho & 1 aadmi jeep pe tainat raho.",divya ne inspector ko hidayat di to sabhi chhup gaye & us raste & varun pe nigah gad diye.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--61

गतान्क से आगे............-

दिव्या को खबर नही थी कि मूसा के धोखेबाज़ आदमी की मदद से बल्लू भी अपने साथियो के साथ वाहा पहुच चुका था & इस वक़्त सबसे पीछे से उन सब पे नज़र रख रहा था.

"भाई,अंदर चल के उठा लेते हैं सबको."

"चुप,गधे!",बल्लू ने उसे झिड़का,"..कोई कुच्छ नही करेगा.पोलीस भी यहा है.छ्होटी सी भूल भी सारा खेल बिगाड़ सकती है.गाड़ी को इन झाड़ियो के पीछे लो & जब तक मैं ना काहु कोई कुच्छ नही करेगा."

ठीक उसी वक़्त दिव्या ने भी ऐसा ही किया,"देखो,ये लड़का जिसका नाम वरुण है प्रोफेसर दीक्षित के साथ है.कंट्रोल रूम को सारी बात बताओ & चाहे कुच्छ भी हो जाए,मेरे ऑर्डर के बिना कोई कुच्छ नही करेगा.इस लड़के को ज़रा भी भनक नही लगनी चाहिए की हमारी निगाह उसपे है.",सभी पोलीस वाले दम साधे अब बस इंतेज़ार कर रहे थे.

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"सर,ये आख़िरी घर बचा है.".इनस्पेक्टर ने अजीत को वो घर दिखाया जहा किडनॅपर्स अनीश के साथ छुपे थे,"मैं जाऊं इसे चेक करने?"

"चेक करने की क्या ज़रूरत है.देखो गेट पे इतना बड़ा ताला लगा है."

"यानी कि हम ग़लत थे,सर.वो इस इलाक़े मे है ही नही?"

"नही,मैने ऐसा तो नही कहा."

"मगर गेट पे ताला है सर."

"& गेट से बाहर आते गाड़ी के टाइयर्स के निशान भी हैं & वो देखो..",दोनो 1 मारुति आल्टो मे बैठे बंगल का चक्कर लगा रहे थे,"..रसोई का एग्ज़ॉस्ट फन चल रहा है."

"तो क्या करना है,सर?"

"हेलो.",ठीक उसी वक़्त अजीत का मोबाइल बजा.

"अजीत,अभी कुच्छ मत करना..",डीसीपी वेर्मा लाइन पे थे,"..दिव्या ने प्रोफेसर को ढूंड लिया है & ऐसा लगता है कि वो अकेला किडनॅपर्स से सौदा कर रहा है.तुम बस वाहा मुस्तैद रहो & मेरे ऑर्डर्स का इंतेज़ार करो."

"सर.",अजीत ने फोन बंद किया,"..इस बंगले को घेरो मगर ऐसे कि ना बाहर से अंदर जाने वाले को कुच्छ शक़ हो ना ही अंदर मौजूद लोगो को."

"ओके,सर."

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"हीरे कहा हैं?",नक़ाब पहने अरशद प्रोफेसर के सामने आया.

"बच्चा कहा है?"

"देखो,होशियारी मत करो वरना.."

"वरना मुझे पता है,तुम भी मेरे पीछे से आ रहे अपने साथी को कहो कि ज़्यादा नज़दीक ना आए वरना..",प्रोफेसर ने अपनी जॅकेट को पकड़ फैलाया तो अरशद की ज़ुबान सूख गयी & उसने प्रोफेसर के पीछे से आ रहे बालू को रुकने का इशारा किया.प्रोफेसर के पेट पे 2 करीब 4 इंच के स्टील पाइप्स बँधे थे जिनमे से वाइर्स निकलते दिख रहे थे.

"ये क्या मज़ाक है?",अरशद गुस्से से बोला.

"मज़ाक नही बॉम्ब है.1 करोड़ के हीरे ऐसे ही चाहिए तुम्हे.मैने पाइप्स मे एक्सप्लोसिव्स भरे हैं & मेरी जॅकेट की बाई बाज़ू के अंदर से इसका बटन मेरे हाथ मे ये है.",प्रोफेसर ने अपनी बाई हथेली खोली,"..बच्चा दो & हीरे लो."

"ठीक है तुम हमे हीरे दो & मैं तुम्हे कल बच्चा दे दूँगा."

"क्या भाई!",प्रोफेसर हंसा,"..तुम्हे खुद भी अपनी बात पे यकीन हो रहा है!नही,1 हाथ दो दूसरे हाथ लो.या फिर.."

"या फिर क्या?"

"मुझे अपने साथ ले चलो."

"& अपनी मौत बुला लो?",अरशद हंसा,"तुम मुझे क्या इतना बड़ा गधा समझते हो!"

"बिल्कुल नही.तुम्हारे जैसे दिमागदार इंसान कम ही नज़र आते हैं.मगर अभी तो तुम्हे मुझपे भरोसा करना ही पड़ेगा.मैं इसी कारण से पोलीस से भाग के यू अकेला आया हू ताकि तुम्हे कोई ख़तरा ना रहे & फिर बच्चा भी महफूज रहे."

"हूँ..",अरशद ने प्रोफेसर के पीछे खड़े बालू को आँखो से इशारा किया,"ठीक है.हाथ पीछे करो."

"& अपना तुरुप का पत्ता तुम्हे सौंप दू.नही,भाई.मेरी आँखो पे पट्टी बाँध दो मगर मेरे हाथ बाँधने की मत सोचो वरना हम तीनो ये गुफ्तगू उपरवाले के दरबार मे कर रहे होंगे."

"ठीक है.",थोड़ी देर बाद दोनो के बीच पट्टी बाँधे चलता प्रोफेसर वरुण को नज़र आया तो वो भागा & फ़ौरन उस गाड़ी मे बैठ गया जिस से वाहा आया था.इधर बालू & अरशद के साथ प्रोफेसर 1 कार मे निकला मगर अरशद ने कोई कच्ची गोलिया तो खेली नही थी.उसके कहे मुताबिक पहले से ही तैयार देव 1 गाड़ी मे उनके पीछे चलने लगा.वरुण उनके पीछे लग गया.

"कार स्टार्ट करो मगर ध्यान रहे उन्हे हम नज़र नही आने चाहिए.",दिव्या अपनी टीम के साथ इन तीनो गाडियो के पीछे चल दी & सबसे आख़िर मे बल्लू इन सबका पीछा करने लगा.

"सब तैयार रहो.वो यही आ रहे हैं.",अजीत ने अपनी टीम को वाइर्ले से मुस्तैद किया & गौर से बंगल तक आने वाली सड़क को देखने लगा.कुच्छ ही देर बाद उसने देखा कि अरशद की कार वाहा आई जिसमे से बालू ने उतर के आस-पास का मुआयना किया & गेट का ताला खोल गाड़ी को अंदर जाने दिया मगर उसने गेट लॉक नही किया.थोड़ी देर बाद देव भी वाहा पहुँचा & थंब्स अप का इशारा किया इस बात से बेख़बर की पोलीस & बल्लू दोनो उनके पीछे हैं.दोनो ने गेट लॉक किया & अंदर चले गये.

"सर,क्या मैं अंदर जाऊं?",अजीत ने डीसीपी वेर्मा से पुचछा.

"नही,अजीत.मुझे लगता है कि प्रोफेसर के बाहर आने का इंतेज़ार करना चाहिए."

"सर,कही देर ना हो जाए."

"सब्र रखो,अजीत."

"मगर सर..अरे..सर.मैं अभी आपसे बात करता हू.",अजीत ने वाइर्ले नीचे रखा.उसने बल्लू को देख लिया था,"ये यहा क्या कर रहा है.आज तो अच्छा दिन लगता है.",उसने साथ के इनस्पेक्टर से कहा,"..बच्चा तो मिलेगा ही साथ मे ये कुम्भात का दामाद भी हाथ आने वाला लगता है."

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"बॉम्ब खोलो & हीरे दो.हमे उन्हे परखना है कि वो असली हैं या फिर शीशे के मामूली टुकड़े."

"बच्चा कहा है?",अरशद उसे बेसमेंट मे ले गया & दरवाज़ा खोल के दिखाया.

"ठीक है.ये रहे हीरे.तसल्ली कर लो.",प्रोफेसर ने पोटली उसे थमायी & कमरे मे घुस गया & अपनी जक्सेट उतार दी,"..ये लो बॉम्ब.उसने पाइप्स & तार अपने जिस्म से अलग किए& लापरवाही से अरशद की ओर उच्छल दिया तो वो घबरा के 2 कदम पीछे हटा तो प्रोफेसर हंसा,"..नक़ली है,भाई."

अरशद ने जेब से बंदूक निकाल के सामने तानी तो प्रोफेसर ने हाथ उठा दिए,"घूम जाओ.",नक़ाब पहने दीप्ति वाहा आई & उसने प्रोफेसर के हाथ नीचे कर बाई मे 1 हथकड़ी डाली जिसके दूसरे सिरे पे 1 मज़बूत चैन थी.,चैन के दूसरे सिरे पे 1 & हथकड़ी थी जिसके सिरे को उसने उसी रोड मे बाँधा जिसमे अनीश का पैर बाँधा था.दास्तानो के बावजूद प्रोफेसर समझ गया था कि वो कोई लड़की है & अब उसे यकीन हो गया था कि सेठ मोहन लाल के यहा डकैती करने वाला गॅंग ही अभी उसके सामने था.दीप्ति उसे बाँधने के बाद दरवाजा बंद कर चली गयी.

"बेटा,घबराना मत.मुझे तुम्हारे पापा ने भेजा है तुम्हे घर लाने को.",उसने सहमे अनीश को समझाया मघर वो बेचारा उसपे भरोसा नही कर पा रहा था.तब प्रोफेसर ने उसे उसके बचपन की वो तमाम बाते बताई जो जसजीत प्रधान ने उसे बताई थी.थोड़ी ही देर मे अनीश का डर कम हो गया था.

"अंकल,हम यहा से कब जाएँगे?"

"बस बेटा,आज शाम तक.",प्रोफेसर जानता था कि हीरे परखने मे इतना वक़्त तो लगेगा ही.

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"भाई,अंदर चलें?"

"नही,अभी नही.उस प्रोफेसर को बाहर आता दिखने दो फिर तुम मे से 2 लोग उस पोलिसेवली को उलझाना & हम सब उनलोगो से हीरे & बच्चा,दोनो छ्चीन लेंगे."

अजीत का दिमाग़ बड़ी तेज़ी से घूम रहा था.जिसने भी अनीश को किडनॅप किया था वो तो बस मोहरा थे.चाल कोई और चल रहा था & वो जानता था कि CM अत्रे के सिवा वो और कोई नही हो सकता.रघु कुम्भात उर्फ बाबा पे उसने आज तक हाथ नही डालने दिया था & आज जहा बच्चा क़ैद था,उस घर के बाहर उसका दाया हाथ माना जाने वाला बल्लू खड़ा था.1 बार बच्चा सही-सलामत मिल जाए फिर वो इस घिनोने खेल के खिलाड़ियो को क़ानून के शिकंजे मे जाकड़ के रहेगा.

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वरुण की समझ मे नही आ रहा था कि वो आख़िर यहा बैठा कितनी देर तक इंतेज़ार करे,प्रोफेसर ने उस से कहा था की ख़तरे की सूरत मे वो उसे कोई ना कोई इशारा ज़रूर करेगा लेकिन कही उन सबने प्रोफेसर को मौका दिए बिना उसका काम तमाम कर दिया हो तो?..उसने अपनी जेब मे रखी पिस्टल को च्छुआ & सोचा कि बस घर मे घुस जाए लेकिन प्रोफेसर ने उसे सख़्त हिदायत दी थी कि वो उस पिस्टल का इस्तेमाल आख़िरी रास्ते के तौर पे करेगा.उसने खुद को संभाला & घर की ओर देखने लगा.

सभी पोलिसेवालो का भी यही हाल था.सभी घर पे धावा बोलना चाहते थे मगर अनीश का ख़याल आते ही वो रुक जाते थे.

और घर के अंदर आँखो पे सुनरो का लेंस लगाए देव 1-1 हीरे को बारीकी से परख रहा था.दोपहर बाद 3 बजे उसने लेंस उतारा & अरशद की ओर देख के सर हिलाया.हीरे बिल्कुल असली थे.सभी घर से निकलने की तैइय्यारी करने लगे.दीप्ति & चार्ली समान बाँधने लगे & अरशद & बालू ये तसल्ली करने मे लग गये कि घर मे उन्होने कोई सुराग तो नही छ्चोड़ा था.देव हीरो को 5 हिस्सो मे कर अलग-2 पोटलियो मे बाँधने लगा.आधे घंटे मे सब तैय्यार थे.अरशद ने उस आर्म्स डीलर के दिए कपड़े & जूते उठाए & अनीश के पास चला गया.सारे गॅंग मेंबर्ज़ हॉल मे शांत बैठे थे.वो जताना नही चाह रहे थे मगर सभी के दिल ज़ोरो से धड़क रहे थे & मन ही मन सब यही दुआ कर रहे थे कि बस अब सब कुच्छ ठीक-तक ख़त्म हो जाए.

"क्या?!..कब?..ओह्ह..!..तो मैं क्या करू,सर?",दिव्या & अजीत दोनो को 1 साथ ही 1 बहुत ही चौंकाने वाली खबर मिली.

"कुच्छ नही,अजीत.तुम वही डटे रहो.",डीसीपी वेर्मा ने ऑर्डर दिया.

"सर,मुझे बंगले के अंदर का दरवाज़ा खुलता दिख रहा है.मैं देखने जा रहा हू.",उसने ऑपरेटर को वाइर्ले थमाया & आगे बढ़ने की सोचने लगा.बंगले के बाहर 1 फ्रेंच कट दाढ़ी वाला शख्स खड़ा था & अंदर से बालू & देव उस से मिलने & बाहर का मुआयना करने निकले थे.ये वाजी आर्म्स डीलर था जिसकी तलाश अजीत को अपनी पिच्छली पोस्टिंग से थी.अब उसकी समझ मे सारा खेल आ गया था,CM & अवस्थी ने इसी के ज़रिए इस गॅंग से किडनॅपिंग करवाई थी.

"चलो!",गेट खुलते देख बल्लू चिल्लाया & 4 गुंडे दिव्या की टीम की ओर गोलिया चलाते जबकि वो खुद 5 लोगो के साथ बंगल की ओर भागा.अगले ही पल बालू & देव वही ढेर थे.

"पहले एसीपी दिव्या की टीम को मुसीबत से निकालो.",अजीत ने अपनी टीम को ऑर्डर दिया & गुणडो पे पीछे से गोलिया बरसानी शुरू कर दी.तब तक बल्लू बंगले के अंदर था मगर वाहा उसका सामना अरशद,दीप्ति & चार्ली की गोलीबारी से हुआ.

"अंकल..",अनीश रोने लगा.वो नये कपड़े पहन चुका था.

"कुच्छ नही होगा,बेटा.मैं हूँ ना.",प्रोफेसर ने उसे गोद मे उठाया & बेसमेंट से निकला.ठीक उसी वक़्त वरुण सभी की नज़र बचा के पीछे की दीवार फाँद अंदर घुसा.बल्लू का 1 गुरगा उसके सामने आ गया & उसपे गोली चलानी ही चाही कि वरुण ने अपने हाथ मे पकड़े रिवॉलव का घोड़ा दबा दिया.गोली सीधा बदमाश के सीने के पार हो गयी & वो कटे पेड़ की तरह गिर गया.वरुण का पूरा बदन कांप रहा था & वो पसीने से नहा गया था,ये पहला मौका था जब उसने किसी इंसान की जान ली थी.

शोरॉगुल से वो वापस होश मे आया & घर मे दाखिल हुआ.अंदर तो जैसे जंग के मैदान का नज़ारा था.बल्लू के 2 आदमी मर चुके थे जबकि चार्ली भी मौत की नींद सो चुका था.प्रोफेसर ने वरुण को 1 कमरे की आड़ मे खड़े देखा तो उसे बाहर जाने का इशारा किया मगरा तब तक गुन्दो से निबट के पोलीस के दोनो जाँबाज़ अफ़सर अपनी टीम्स के साथ घर पे धावा बोल चुके थे.

किसी की कुच्छ समझ मे नही आ रहा था बस अपने दुश्मन को देखते बंदूक का घोड़ा दबा रहे थे.प्रोफेसर ने अपने जिस्म को ढाल बना के अनीश के सामने लगाया & वाहा से निकलने लगा कि तभी उस आर्म्स डीलर ने उसे दबोच लिया.अनीश को छ्चोड़ प्रोफेसर उस से गुत्थम-गुत्था हो गया.उसने उसे फर्श पे पटका & सीने पे कुच्छ मुक्के बरसाए & फिर उसे उठाके वाहा हॉल मे फेंक दिया जहा गोलीबारी हो रही थी.उसने धुएँ के बीच बस इतना देखा कि उस हथियारपोश को 1 गोली लगी उसने अनीश को थामा & 1 बंद खिड़की को लात मारा खोला & बाहर कूद गया.

वो जानता था की इस वक़्त सभी बौखलाए हैं & अनीश पोलीस की गोली का भी शिकार बन सकता है.वो बंगल के पीछे की ओर जा ही रहा था कि उसके सर पे पीछे से वार हुआ & वो गिर पड़ा.बल्लू ने उसे 2-3 लाते जमाई & अनीश को उठा वाहा से भागा.

"उस्ताद,अंदर मरे आदमी से ये पोटली मिली है.",बल्लू ने उस से चार्ली के हिस्से के हीरे लिए & वाहा से गोलिया डॉड्ज करता बाहर अपनी गाड़ी मे भागा.प्रोफेसर उसके पीछे दौड़ा मगर बल्लू बहुत तेज़ था.प्रोफेसर गाड़ी का पीछा करने लगा मगर उसके हाथ बस पीछे लगा लोहे क्रॅश गार्ड ही आ पाया.उसे थामे प्रोफेसर सड़क पे तेज़ चल रही गाड़ी के साथ घिसटने लगा.

"सर,वो बच्चे को प्रोफेसर से छ्चीन भाग रहा है.",1 इनस्पेक्टर ने सभी को सावधान किया तो अजीत & दिव्या बल्लू के बचे-खुचे गोली चलाते गुणडो से उसे वाहा निबटने को छ्चोड़ 1 पोलीस जीप की ओर दौड़े.अजीत ड्राइव करने लगा & दिव्या ने अपनी पिस्टल निकाल ली.

"वो अजीत..वो वरुण की वॅन है..वरुण भी अपनी गाड़ी से बल्लू के पीछे लगा था,"उसी के पीछे चलो.",बल्लू अपनी कार डेवाले से बाहर डेवाले की पहाड़ियो की ओर ले जा रहा था.प्रोफेसर ने 1 मोड़ पे गाड़ी के थोड़ा धीमा होते ही उसे छ्चोड़ दिया & जल्दी से पीछे आ रही वरुण की वॅन मे सवार हो गया.घुमावदार रस्तो कभी ऊँचे हो रहे थे कभी नीचे ऐसे ही 1 रास्ते पे प्रोफेसर वरुण को बल्लू के पीछे लगे रहने का इशारा कर वॅन से कूद गया.दरअसल बल्लू बहुत चालाक था,पहले तो उसने अपनी गाड़ी 1 पहाड़ी पे चढ़ाना शुरू कर दिया & जब पीछे आती दोनो गाड़ियाँ उसके पीछे चढ़ाई चढ़ने लगी तो उसने 1 कच्चे रास्ते पे गाड़ी उतार उसे फिर से वापस उधर मोड़ दिया जिधर से आया था.अब बाकी दोनो गाडिया उसकी तरह उसी कच्चे रास्ते से उतरने मे नाकामयाब रही & उन्हे गाड़ी घुमाने मे देर लगी.ये देख प्रोफेसर वॅन से कूद गया & कच्चे रास्ते पे भागने लगा.

और जैसे ही बल्लू की गाड़ी उसे अपने नीचे आती दिखाई दी,अपनी ख़ैरियत की परवाह किए बिना प्रोफेसर उसपे कूद गया.बल्लू ने छत पे उसके गिरने की आवाज़ सुनते ही गाड़ी को बुरी तरह घुमाना शुरू किया मगर प्रोफेसर अब गुस्से से भरा था.अपने जेब से 1 रुमाल निकाल उसने हाथ पे बँधा & 3-4 मुक्को मे ही पीछे का 1 खिड़की का शीशा तोड़ दिया & अगले ही पल वो गाड़ी के अंदर था.

मगर अंदर घुसते ही प्रोफेसर को 1 बड़ी हल्की घड़ी चलने की आवाज़ सुनाई दी & उसके कान खड़े हो गये.बल्लू को पीछे से दाए हाथ से मारते हुए वो बाए से अनीश के कपड़े टटोलने लगा कि उसका ध्यान अनीश के पैर के जूते पे गया.

"बेटा,जूते उतार!",वो चिल्लाया,"..जूते उतार बेटा!",अनीश बस रोए जा रहा था मगर फिर भी उसने अपने अंकल की बात मानी.पीछे से प्रोफेसर अपने दाए बाज़ू से बल्लू का गला दबा रहा था मगर वो भी कम दिलेर नही था बाए से उसकी गिरफ़्त कमज़ोर करने की कोशिश करता दाए से स्टियरिंग संभाले उसने गाड़ी की रफ़्तार बढ़ा दी थी.

प्रोफेसर ने बाए हाथ से 1 जूते को उठा उसके सोल को खोला,"गाड़ी रोक,बच्चे के पास बॉम्ब है!",वो चिल्लाया.टाइमर मे बस चंद सेकेंड दिख रहे थे.बल्लू ने उसकी 1 ना सुनी & उसका हाथ अपनी गर्दन से झटकते हुए आक्सेलरटोर को कार के फर्श से सटा दिया.

"ये क्या हो रहा है!",दिव्या & अजीत परेशान थे.अब वरुण उनके पीछे हो गया था & उसका दिल भी ज़ोरो से धड़क रहा था.गाड़ी अगले मोड़ पे आँखो से ओझल हो गयी थी कि तभी ज़ोर का धमाका हुआ.दोनो ड्राइवर्स ने जल्दी ब्रेक लगाया.

तीनो उतरे & उस आग के गोले की ओर भागे.सामने का नज़ारा देख उनके हलक सुख गये.बल्लू की गाड़ी के परखच्चे उड़ गये थे.बॉम्ब ने गाड़ी के पेट्रोल टॅंक को भी 1 बॉम्ब मे तब्दील कर दिया था & तभी ऐसा ज़ोर का धमाका हुआ था.

अजीत सर पे हाथ रख के बैठ गया जबकि दिव्या की आँखो से आँसू बह चले.वरुण ज़ोर से चिल्लाता जलती गाड़ी की ओर भागा.अजीत के अंदर जैसे उस बॉम्ब ने 1 ज्वालामुखी का मुँह खोल दिया था.वो उठा & अपनी गाड़ी मे बैठ गया.उसे अब किसी चीज़ की परवाह नही थी.1 मासूम को सत्ता की हवस के खेल मे बलि का मोहरा बनाया गया था & अब उस खिलाड़ी को खेल जीतने की सज़ा मिलेगी.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--61

gataank se aage............-

Divya ko khabar nahi thi ki Musa ke dhokhebaz aadmi ki madad se Ballu bhi apne sathiyo ke sath vaha phunch chuka tha & is waqt sabse peechhe se un sab pe nazar rakh raha tha.

"bhai,andar chal ke utha lete hain sabko."

"chup,gadhe!",ballu ne use jhidka,"..koi kuchh nahi karega.police bhi yaha hai.chhoti si bhul bhi sara khel bigaad sakti hai.gadi ko in jhadiyo ke peechhe lo & jab tak main na kahu koi kuchh nahi karega."

thik usi waqt divya ne bhi aisa hi kiya,"dekho,ye ladka jiska naam Varun hai Professor Dixit ke sath hai.control room ko sari baat batao & chahe kuchh bhi ho jaye,mere order ke bina koi kuchh nahi karega.is ladke ko zara bhi bhanak nahi lagni chahiye ki humari nigah uspe hai.",sabhi police vale dum sadhe ab bas intezar kar rahe the.

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"sir,ye aakhiri ghar bacha hai.".inspector ne Ajit ko vo ghar dikhaya jaha kidnappers Anish ke sath chhupe the,"main jaoon ise check karne?"

"check karne ki kya zarurat hai.dekho gate pe itna bada tala laga hai."

"yani ki hum galat the,sir.vo is ilake me hai hi nahi?"

"nahi,maine aisa to nahi kaha."

"magar gate pe tala hai sir."

"& gate se bahar aate gadi ke tyres ke nishan bhi hain & vo dekho..",dono 1 Maruti Alto me baithe bungle ka chakkar laga rahe the,"..rasoi ka exhaust fan chal raha hai."

"to kya karna hai,sir?"

"hello.",thik usi waqt ajit ka mobile baja.

"ajit,abhi kuchh mat karna..",DCP Verma line pe the,"..divya ne professor ko dhoond liya hai & aisa lagta hai ki vo akela kidnappers se sauda kar raha hai.tum bas vaha mustaid raho & mere orders ka intezar karo."

"sir.",ajit ne fone band kiya,"..is bungle ko ghero magar aise ki na bahar se andar jane vale ko kuchh shaq ho na hi andar maujood logo ko."

"ok,sir."

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"heere kaha hain?",naqab pehne Arshad professor ke samne aaya.

"bachcha kaha hai?"

"dekho,hoshiyari mat karo varna.."

"varna mujhe pata hai,tum bhi mere peechhe se aa rahe apne sathi ko kaho ki zyada nazdik na aaye varna..",professor ne apni jacket ko pakad failaya to arshad ki zuban sukh gayi & usne professor ke peechhe se aa rahe Balu ko rukne ka ishara kiya.professor ke pet pe 2 karib 4 inch ke steel pipes bandhe the jinme se wires nikalte dikh rahe the.

"ye kya mazak hai?",arshad gusse se bola.

"mazak nahi bomb hai.1 crore ke heere aise hi chahiye tumhe.maine pipes me explosives bhare hain & meri jacket ki bayi bazu ke andar se iska button mere hath me ye hai.",professor ne apni bayi hatheli kholi,"..bachcha do & heere lo."

"thik hai tum hume heere do & main tumhe kal bachcha de dunga."

"kya bhai!",professor hansa,"..tumhe khud bhi apni baat pe yakin ho raha hai!nahi,1 hath do dusre hath lo.ya fir.."

"ya fir kya?"

"mujhe apne sath le chalo."

"& apni maut bula lu?",arshad hansa,"tum mujhe kya itna bada gadha samajhte ho!"

"bilkul nahi.tumhare jaise dimaghdar insan kam hi nazar aate hain.magar abhi to tumhe mujhpe bharosa karna hi padega.main isi karan se police se bhag ke yu akela aya hu taki tumhe koi khatra na rahe & fir bachcha bhi mehsuz rahe."

"hun..",arshad ne professor ke peechhe khade balu ko aankho se ishara kiya,"thik hai.hath peechhe karo."

"& apna turup ka patta tumhe saunp du.nahi,bhai.meri aankho pe patti bandh do magar mere hath bandhne ki mat socho varna hum teeno ye guftgu uparwale ke darbar me kar rahe honge."

"thik hai.",thodi der baad dono ke beech patti bandhe chalta professor varun ko nazar aaya to vo bhaga & fauran us gadi me baith gaya jis se vaha aya tha.idhar balu & arshad ke sath professor 1 car me nikla magar arshad ne koi kachchi goliya to kheli nahi thi.uske kahe mutabik pehle se hi taiyar Deva 1 gadi me unke peechhe chalne laga.varun unke peechhe lag gaya.

"car start karo magar dhyan rahe unhe hum nazar nahi aane chahiye.",divya apni team ke sath in teeno gadiyo ke peechhe chal di & sabse aakhir me ballu in sabka peechha karne laga.

"sab taiyar raho.vo yehi aa rahe hain.",ajit ne apni team ko wireless se mustaid kiya & gaur se bungle tak aane vali sadak ko dekhne laga.kuchh hi der baad usne dekha ki arshad ki car vaha aayi jisme se balu ne utar ke aas-paas ka muayana kiya & gate ka tala khol gadi ko andar jane diya magar usne gate lock nahi kiya.thodi der baad deva bhi vaha pahuncha & thumbs up ka ishara kiya is baat se bekhabar ki police & ballu dono unke peechhe hain.dono ne gate lock kiya & andar chale gaye.

"sir,kya main andar jaoon?",ajit ne DCP Verma se puchha.

"nahi,ajit.mujhe lagta hai ki professor ke bahar aane ka intezar karna chahiye."

"sir,kahi der na ho jaye."

"sabr rakho,ajit."

"magar sir..are..sir.main abhi aapse baat karta hu.",ajit ne wireless neeche rakha.usne ballu ko dekh liya tha,"ye yaha kya kar raha hai.aaj to achha din lagta hai.",usne sath ke inspector se kaha,"..bachcha to milega hi sath me ye Kumbhat ka damad bhi hath aane vala lagta hai."

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"bomb kholo & heere do.hume unhe parakhna hai ki vo asli hain ya fir sheeshe ke mamuli tukde."

"bachcha kaha hai?",arshad use basement me le gaya & darwaza khol ke dikhaya.

"thik hai.ye rahe heere.tasalli kar lo.",professor ne potli use thamayi & kamre me ghus gaya & apni jakcet utar di,"..ye lo bomb.usne pipes & taar apne jism se alag kiye& laparwahi se arshad ki or uchhal diya to vo ghabra ke 2 kadam peechhe hata to professor hansa,"..naqli hai,bhai."

arshad ne jeb se banduk nikal ke samne tani to professor ne hath utha diye,"ghum jao.",naqab pehne Dipti vaha aayi & usne professor ke hath neeche kar bayi me 1 hathkadi dali jiske dusre sire pe 1 mazbut chain thi.,chain ke dusre sire pe 1 & hathkadi thi jiske sire ko usne usi rod me bandha jisme anish ka pair bandha tha.dastano ke bavjood professor samajh gaya tha ki vo koi ladki hai & ab use yakin ho gaya tha ki Seth Mohan Lal ke yaha dacoity karne vala gang hi abhi uske samne tha.dipti use bandhne ke baad darwza band kar chali gayi.

"beta,ghabrana mat.mujhe tumhare papa ne bheja hai tumhe gahr lane ko.",usne sehme anish ko samjhaya maghar vo bechara uspe bharosa nahi kar pa raha tha.tab professor ne use uske bachpan ki vo tamam baate batayi jo Jasjit Pradhan ne use batayi thi.thodi hi der me anish ka darr kam ho gaya tha.

"uncle,hum yaha se kab jayenge?"

"bas beta,aaj sham tak.",professor janta tha ki heere parakhne me itna waqt to lagega hi.

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"bhai,andar chalen?"

"nahi,abhi nahi.us professor ko bahar aata dikhne do fir tum me se 2 log us policevali ko uljhana & hum sab unlogo se heere & bachcha,dono chheen lenge."

ajit ka dimagh badi tezi se ghum raha tha.jisne bhi anish ko kidnap kiya tha vo to bas mohra the.chaal koi aur chal raha tha & vo janta tha ki CM Atre ke siwa vo aur koi nahi ho sakta.Raghu Kumbhat urf Baba pe usne aaj tak hath nahi dalne diya tha & aaj jaha bachcha qaid tha,us ghar ke bahar uska daya hath mana jane wala ballu khada tha.1 baar bachcha sahi-salamat mil jaye fir vo is ghinone khel ke khiladiyo ko kanoon ke shikanje me jakad ke rahega.

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varun ki samjh me nahi aa raha tha ki vo aakhir yaha baitha kitni der tak intezar kare,professor ne us se kaha tha ki khatre ki surat me vo use koi na koi ishara zarur karega lekin kahi un sabne professor ko mauka diye bina uska kaam tamam kar diya ho to?..usne apni jeb me rakhi pistol ko chhua & socha ki bas ghar me ghus jaye lekin professor ne use sakht hidayat di thi ki vo us pistol ka istemal aakhiri raste ke taur pe karega.usne khud ko sambhala & ghar ki or dekhne laga.

sabhi policevalo ka bhi yehi haal tha.sabhi ghar pe dhava bolna chahte the magar anish ka khayal aate hi vo ruk jate the.

aur ghar ke andar aankho pe sunaro ka lens lagaye deva 1-1 heere ko bariki se parakh raha tha.dopahar baad 3 baje usne lens utara & arshad ki or dekh ke sar hilaya.heere bilkul asli the.sabhi ghar se nikalne ki taiyyari karne lage.dipti & Charlie saman baandhane lage & arshad & balu ye tasalli karne me lag gaye ki ghar me unhone koi surag to nahi chhoda tha.deva heero ko 5 hisso me kar alag-2 potliyo me bandhne laga.aadhe ghante me sab taiyyar the.arshad ne us arms dealer ke diye kapde & jute uthaye & anish ke paas chala gaya.sare gang members hall me shant baithe the.vo jatana nahi chah rahe the magar sabhi ke dil zoro se dhadak rahe the & man hi man sab yehi dua kar rahe the ki bas ab sab kuchh thik-thak khatm ho jaye.

"Kya?!..kab?..ohh..!..to main kya karu,sir?",Divya & Ajit dono ko 1 sath hi 1 bahut hi chaunkane vali khabar mili.

"kuchh nahi,ajit.tum vahi date raho.",DCP Verma ne order diya.

"sir,mujhe bungle ke andar ka darwaza khulta dikh raha hai.main dekhne ja raha hu.",usne operator ko wireless thamaya & aage badhne ki sochne laga.bungle ke bahar 1 french cut dadhi wala shakhs khada tha & andar se Balu & Deva us se milne & bahar ka muayana karne nikle the.ye vajhi arms dealer tha jiski talash ajit ko apni pichhli posting se thi.ab uski samajh me sara khel aa gaya tha,CM & Awasthi ne isi ke zariye is gang se kidnapping karwayi thi.

"chalo!",gate khulte dekh Ballu chillaya & 4 gunde divya ki team ki or goliya chalate jabki vo khud 5 logo ke sath bungle ki or bhaga.agle hi pal balu & deva vahi dher the.

"pehle ACP divya ki team ko musibat se nikalo.",ajit ne apni team ko order diya & gundo pe peechhe se goliya barsani shuru kar di.tab tak ballu bungle ke andar tha magar vaha uska samna Arshad,Dipti & Charlie ki golibari se hua.

"uncle..",Anish rone laga.vo naye kapde pehan chuka tha.

"kuchh nahi hoga,beta.main hoon na.",professor ne use god me uthaya & basement se nikla.thik usi waqt Varun sabhi ki nazar bacha ke peechhe ki deewar phand andar ghusa.ballu ka 1 gurga uske samne aa gaya & uspe goli chalani hi chahi ki varun ne apne hath me pakde revolver ka ghoda daba diya.goli seedha badmash ke seene ke paar ho gayi & vo kate ped ki tarah gir gaya.varun ka pura badan kanp raha tha & vo paseene se naha gaya tha,ye pehla mauka tha jab usne kisi insan ki jaan li thi.

shorogul se vo vapas hosh me aaya & ghar me dakhil hua.andar to jaise jung ke maidan ka nazara tha.ballu ke 2 aadmi mar chuke the jabki charlie bhi maut ki nind so chuka tha.professor ne varun ko 1 kamre ki aad me khade dekha to use bahar jane ka ishara kiya magara tab tak gundo se nibat ke police ke dono jaanbaz afsar apni teams ke sath ghar pe dhawa bol chuke the.

kisi ki kuchh samajh me nahi aa raha tha bas apne dushman ko dekhte banduk ka ghoda daba rahe the.professor ne apne jism ko dhaal bana ke anish ke samne lagaya & vaha se nikalne laga ki tabhi us arms dealer ne use daboch liya.anish ko chhod professor us se guttham-guttha ho gaya.usne use farsh pe patka & seene pe kuchh mukke barsaye & fir use uthake vaha hall me fenk diya jaha golibari ho rahi thi.usne dhuen ke beech bas itna dekha ki us hathyarfarosh ko 1 goli lagi usne anish ko thama & 1 band khidki ko laat mara khola & bahar kud gaya.

vo janta tha ki is waqt sabhi baukhlaye hain & anish police ki goli ka bhi shikar ban sakta hai.vo bungle ke peechhe ki ro ja hi raha tha ki uske sar pe peechhe se vaar hua & vo gir pada.ballu ne use 2-3 laate jamayi & anish ko utha vaha se bhaga.

"ustad,andar mare aadmi se ye potli mili hai.",ballu ne us se charlie ke hisse ke heere liye & vaha se goliya dodge karta bahar apni gadi me bhaga.professor uske peechhe dauda magar ballu bahut tez tha.professor gadi ka peechha karne laga magar uske hath bas peechhe laga lohe crash guard hi aa paya.use thame professor sadak pe tez chal rahi gadi ke sath ghisatne laga.

"sir,vo bachche ko professor se chheen bhag raha hai.",1 inspector ne sabhi ko savdhan kiya to ajit & divya ballu ke bache-khuche goli chalate gundo se use vaha nibatne ko chhod 1 police jeep ki or daude.ajit drive karne laga & divya ne apni pistol nikal li.

"vo ajit..vo varun ki van hai..varun bhi apni gadi se ballu ke peechhe laga tha,"usi ke peechhe chalo.",ballu apni car Devalay se bahar devalay ki pahadiyo ki or le ja raha tha.professor ne 1 mod pe gadi ke thoda dheema hote hi use chhod diya & jaldi se peechhe aa rahi varun ki van me savar ho gaya.ghumavdar rasto kabhi oonche ho rahe the kabhi neeche aise hi 1 raste pe professor varun ko ballu ke peechhe lage rehne ka ishara kar van se kud gaya.darasal ballu bahut chalak tha,pehle to usne apni gadi 1 pahadi pe chadhana shuru kar diya & jab peechhe aati dono gadiyan uske peechhe chadhai chadhne lagi to usne 1 kachche raste pe gadi utar use fir se vapas udhar mod diya jidhar se aaya tha.ab baki dono gadiya uski tarah usi kachche raste se utarne me nakamyab rahi & unhe gadi ghumane me der lagi.ye dekh professor van se kud gaya & kachche raste pe bhagne laga.

aur jaise hi ballu ki gadi use pane neeche aati dikhayi di,apni khairiyat ki parvah kiye bina professor uspe kud gaya.ballu ne chhat pe uske girne ki aavaz sunte hi gadi ko buri tarah ghumana shuru kiya magar professor ab gusse se bhara tha.apne jeb se 1 rumal nikal usne hath pe bandha & 3-4 mukko me hi peechhe ka 1 khidki ka shisha tod diya & agle hi pal vo gadi ke andar tha.

magar andar ghuste hi professor ko 1 badi halki ghadi chalne ki aavaz sunai di & uske kaan khade ho gaye.ballu ko peechhe se daye hath se marte hue vo baye se anish ke kapde tatolne laga ki uska dhyan anish ke pair ke jute pe gaya.

"beta,jute utar!",vo chillaya,"..jute utar beta!",anish bas roye ja raha tha magar fir bhi usne apne uncle ki baat mani.peechhe se professor apne daye bazu se ballu ka gala daba raha tha magar vo bhi kam diler nahi tha baye se uski giraft kamzor karne ki koshish karta daye se steering sambhale usne gadi ki raftar badha di thi.

professor ne baye hath se 1 jute ko utha uske sole ko khola,"gadi rok,bachche ke paas bomb hai!",vo chillaya.timer me bas chand second dikh rahe the.ballu ne uski 1 na suni & uska hath apni gardan se jhatakte hue accelrator ko car ke farsh se sata diya.

"ye kya ho raha hai!",divya & ajit pareshan the.ab varun unke peechhe ho gaya tha & uska dil bhi zoro se dhadak raha tha.gadi agle mod pe aankho se ojhal ho gayi thi ki tabhi zor ka dhamaka hua.dono drivers ne jaldi brake lagaya.

teeno utre & us aag ke gole ki or bhage.samne ka nazara dekh unke halak sukh gaye.ballu ki gadi ke parkhachche ud gaye the.bomb ne gadi ke petrol tank ko bhi 1 bomb me tabdil kar diya tha & tabhi aisa zor ka dhamaka hua tha.

ajit sar pe hath rakh ke baith gaya jabki divya ki aankho se aansu beh chale.varun zor se chillata jalti gadi ki or bhaga.ajit ke andar jaise us bomb ne 1 jwalamukhi ka munh khol diya tha.vo utha & apni gadi me baith gaya.use ab kisi chiz ki parwah nahi thi.1 masoom ko satta ki hawas ke khel me bali ka mohra banaya gaya tha & ab us khiladi ko khel jeetne ki saza milegi.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--62 end

गतान्क से आगे............-

"साहब,हम आपको अंदर नही जाने दे सकते."

"सतपाल,अपने साथियो से कहो कि मेरा रास्ता छ्चोड़ें.",ग्लोरीया अपार्टमेंट के फ्लॅट के बाहर खड़े CM अत्रे के बॉडीगार्ड्स को अजीत की आँखो मे उतरा खून सॉफ नज़र आ रहा था.

"साहब,आप होश मे नही हैं."

"होश मे तुम नही हो!",अजीत चीखा,"..इस कामीने अत्रे ने उस मासूम की जान ले ली!"

"क्या?!"

"हां,अपनी आँखो से उसके परखच्चे उड़ते देखता आया हूँ.",अजीत के अंदर का गुबार भी आँसुओ की शक्ल मे बाहर आया,"तुम कुच्छ भी करो,चाहे मेरी जान चली जाए मगर मैं उस सत्ता के लालची को आज अपने हाथो से सज़ा दिए बगैर नही जाऊँगा.",सतपाल का सीनियर अभी तक अजीत को खामोशी से देख रहा था,उसने जेब से 1 चाभी निकाली & दरवाज़ा खोल दिया.अजीत ने उसे देख सर हिलाया & अंदर दाखिल हुआ.

"ये क्या बदतमीज़ी है!",वो फ्लॅट के बेडरूम मे पहुँचा तो उसने देखा कि 1 बहुत हसीन लड़की जिसकी उम्र बमुश्किल 18 बरस होगी बिल्कुल नंगी बिस्तर पे पड़ी थी & अत्रे भी नंगा उसकी चूत चाट रहा था.अजीत को देख वो गुस्से से चीखा & कपड़े पहननाने लगा,"सेक्यूरिटी!सेक्यूरिटी!कहा मर गये?..कौन हो तुम..?..क-क्या चाहिए?",अजीत ने उसकी ओर पिस्टल तानी मगर वो लड़की वैसे ही बिस्तर पे लेटी रही बस थोड़ा उठ के हेअडबोर्ड से टेक लगा के बैठके मुस्कुराने लगी.

"कौन हो भाई..?..क..क्यू म..मारना चाहते हो मुझे..?",अत्रे गिड़गिदा रहा था.

"उस मासूम ने क्या बिगाड़ा था किसी का?मारना था तो उसके बाप को मारते?उसे क्यू?"

"किसकी बात कर रहे हो?..मैने किसी को नही मारा."

"मारा नही मरवाया.प्रधान के बेटे को!"

"क्या?!क्या बकवास कर रहे हो?"

"चुप!ये फ्लॅट है ना सेक्रेटरी अवस्थी का.यही बैठ के तुम दोनो ने अपनी जाती कुर्सी को बचाने के लिए ये किडनॅपिंग का घिनोना खेल रचा था ना उस आर्म्स डीलर के साथ?"

"क्या?!तुम पागल हो!",अत्रे अब गिड़गिदा नही रहा था बल्कि हैरत से भरा था.

"हॅव ए स्मोक.",वो लड़की बिस्तर से उठके 1 सिगरेट सुलगा के अजीत के पास आ खड़ी हुई,"..प्लीज़ हॅव इट.",उसने इसरार किया तो अजीत ने सिगरेट ले लिया,"मैं आपकी कन्फ्यूषन दूर करती हूँ."

"आपने सुना है ना कि पुराने ज़माने मे नगरवधू होती थी."

"क्या बकवास है?",अजीत झल्लाया.

"प्लीज़,हॅव पेशियेन्स.",उसने अजीत के कंधे पे हाथ रखा & तारीफ भरी निगाहो से देखा,"..तो वो नगरवधू होती तो 1 वेश्या ही थी मगर हर कोई उसके पास नही जा सकता था.सबसे पहला हक़ होता था राजा का फिर बाकी जाने-माने लोगो का.तो मैं आज की नगरवधू हू.",उसने बड़े गर्व से कहा.

"..ये फ्लॅट है तो मेरे बाप श्री अवस्थी जी का मगर यहा रहती मैं हू."

"क्या?लेकिन तुम्हे क्या ज़रूरत इस सब की?"

"सभी पैसे के लिए नही करते ये सब.",वो हँसी,"..मेरा शौक है.जानती हू तुम्हारी समझ मे नही आएगा मगर जब CM साहब जैसा ताक़तवर इंसान आपका कद्रदान हो तब आपकी समझ मे आएगा.मेरे पिता को कुच्छ नही पता & यहा कोई साज़िश नही रची जाती बस रोमानी खेल खेले जाते हैं.आप चाहें तो आप का भी यहा स्वागत है.बहुत किस्मत वालो को ये ख़ुशनसीबी मिलती है."

"क्या?!तो आप यहा..",अजीत ने अत्रे की ओर देखा.

"हां..मैं भी चाहता था कि जसजीत परेशान रहे,चुनाव हार जाए & मुझे देल्ही ना जाना पड़े मगर उसके बच्चे को मैने अगवा नही करवाया."

"तो फिर किसने करवाया?",अजीत अब और उलझन मे पड़ गया.

"शायद मैं जानती हू."

"कौन है वो?",वो लड़की उसके करीब आई & उसके कान मे फुसफुसाई.

"क्या?!",तभी उसका मोबाइल बजा,ये दिव्या का नंबर था.

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प्रधान के घर मातम मन रहा था मगर अभी अनीश के जाने का नही बल्कि किसी और बात का.हुआ ये था कि रात भर की चुदाई के बावजूद ना भैया जी का दिल भरा & नीना के उपर भी ना जाने कैसी खुमारी चढ़ि की दोनो ने ये खेल अगले दिन भी जारी रखा.भैया जी ने सवेरे के 4 बजे रघु को फोन कर उसके 1 आदमी को नीना के यहा बुलवा लिया & उसे प्रोफेसर दीक्षित की तस्वीर थमायी.तस्वीर थमाते वक़्त वो केवल पाजामा पहने थे & घर के बाहर आ गये थे.ठीक उसी वक़्त उनकी पुरानी प्रेमिका राम्या सेन अपने पति के साथ उसी रास्ते से जा रही थी.उसकी मंज़िल थी देवी मंदिर जहा आजके रोज़ बड़ी भीड़ होती थी & सवेरे जाके वो उस भीड़ से बचना चाहती थी.राम्या के पति ने तो नही देखा मगर राम्या ने अपने नेता & आशिक़ को यू नंगे बदन घर के बाहर खड़े देखा & सारा माजरा समझ गयी.

इधर उसने महसूस भी किया था कि वो उस से कुच्छ बेरूख़् हो गये हैं.राम्या ने जब देखा कि ये मुकुल प्रधान का घर है तो उसके दिल मे 1 शैतानी ख़याल आया.उसने 1 बूथ से मुकुल को गुमनाम फोन कर दिया कि उसकी बीवी उसी के बिस्तर मे अपने आशिक़ के साथ गुलच्छर्रे उड़ा रही है.मुकुल ने उसे गालिया दी मगर शक़ तो उसे हो ही गया था.वो भागता हुआ सवेरे के 6 बजे के कुच्छ बाद अपने घर पहुँचा.अपनी चाभी से उसने दरवाज़ा खोला & अंदर गया.

"आहह..ऊहह...हाइईईईई...नाआआअ..!",नीना बिस्तर पे पेट के बल पड़ी थी & भैया जी उसके उपर सवार पीछे से उसकी चुदाई कर रहे थे.दाए हाथ को उसके पेट ने नीचे घुसा उन्होने पहले करवट ले & फिर उसे अपने उपर ले लिया & उसके पेट को पकड़ नीचे से धक्के लगाने लगे.नीना के जिस्म का नशा आज पूरी तरह से उनके सर चढ़ गया था.अधखुले दरवाजे की आड़ से मुकुल ने जब ये नज़ारा देखा तो उसके तन-बदन मे आग लग गयी.आँखो से आँसू बहने लगे.आजतक उसे लगता था कि नीना उस से खफा रहती है क्यूकी वो उसके सपने नही पूरे कर पाया मगर उसे कभी ये नही लगा था कि वो बेवफा भी है.उसने नीना के अलावा किसी और औरत का ख़याल भी नही किया था & वो उसी के बिस्तर मे उस इंसान के साथ जोकि उसके भैया का दुश्मन था चुदाई कर रही थी!

आँसू पोन्छ्ता मुकुल नीचे बने अपनी स्टडी मे गया.तब तक भैया जी बिस्तर से पैर लटका के बैठ गये थे & नीना भी उनकी गोद मे उनकी ओर पीठ किए बैठी थी.आगे की ओर झुक अपनी बाहे उनकी गिरफ़्त मे कस्वाए वो कमर हिला उनके लंड का लुत्फ़ उठा रही थी की तभी सामने का दरवाज़ा खुला.

"हाआअ....!",चौंक के वो सीधी बैठी & मुँह पे हाथ रखा & जब तक दोनो अलग हो पाते,मुकुल ने पिस्टल की सारी गोलिया उनके जिस्मो मे उतार दी.

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अंजलि बुत बनी बैठी थी.अभी-2 उसे बेटे की मौत की खबर सुनाई गयी थी.कहा गया था कि बल्लू & प्रोफेसर भी उस धमाके मे मारे गये थे.प्रधान के घर के बाहर मीडीया वालो का हुजूम लगा था & ऐसे मे 2 गाडिया उसके बंगले मे दाखिल हुई.सबसे पहली गाड़ी से जेसीपी सिंग & डीसीपी वेर्मा कमिशनर साहब के साथ उतरे & अंदर गये.

"प्रधान साहब,हमे बहुत ज़रूरी बात करनी है आपसे."

"क्या कमिज़िशनर साहब?"

"आपके बेटे को अगवा करने वाले का पता चल गया है & वो यहा आने वाला है?"

"क्या?!कमिशनर साहब मैं उस कुत्ते को अपने हाथो से मारूँगा!",नम आँखो से अँगारे बरस रहे थे.कमरे मे दिव्या भी आ खड़ी हुई थी.

"ज़रूर मारिएगा.",सभी घूमे.प्रधान का मुँह हैरत से खुल गया.सामने प्रोफेसर खड़ा था,"इसे पहचानते हैं.",उसने घायल आर्म्स डीलर का गिरेबान पकड़ के आगे किया.जसजीत के माथे पे पसीना छल्छला आया,"आप तो खुश होंगे ना सोच के कि मैं भी मारा गया अनीश के साथ,हैं?"

"मैं अनीश को लिए-दिए गाड़ी से कूड़ा & फिर धमाका हुआ.तब तक एसीपी दिव्या ने वापस बंगले पे जाके ज़िंदा बचे लोगो को गिरफ़्त मे लिया जिनमे से ये भी था.अभी अजीत जी ने इस से सब कुच्छ उगलवा लिया है & वो ग्लोरीया अपार्टमेंट भी हो आए हैं.अब प्रधान जी आप खुद ही सब बता दीजिए."

"मुझे CM की कुर्सी चाहिए थी..",कुच्छ देर खामोश रहने के बाद प्रधान बोला,"..पार्टी के जो इंटर्नल सॅंपल पोल्स हुए थे,उसमे अत्रे & मुझ मे बहुत फ़र्क नही था.मैं जानता था कि जीतने के बाद भी अत्रे मेरे लिए परेशानी खड़ी कर सकता है.अब हर जगह से उसके आदमियो को हरवाता तो पार्टी हारती & मैं CM नही बन पाता.तो मैने ये खेल खेला.इस से..",आर्म्स डीलर की ओर उंगली उठाके उसने बात आगे बढ़ाई,"..मेरी मुलाकात काफ़ी पहले हुई थी & मैने इसके हथियार बिकवाने & पोलीस से बचाने मे काफ़ी मदद की.बदले मे ये मुझे पैसे देता था.इसलिए मैं ज़्यादा तर बिज़्नेसमॅन से चंदा नही लेता था & ईमानदारी से काम करता था & लोगो के बीच मेरी सॉफ इमेज थी."

"..ग्लोरीया अप्रटमेंट के बारे मे भी इसी ने मुझे बताया था.",प्रधान ने सर झुकाया & वही मुझे अपनी बीवी का 1 राज़ पता चला."

"कि महेश अरोरा उसका पुराना प्रेमी है.",सभी चौंक पड़े क्यूकी अंजलि भी वाहा आ गयी थी,"यही ना..?..हां..था वो मेरा पुराना प्रेमी मगर शादी के बाद मैं सिर्फ़ तुम्हारी थी.उसका ख़याल भी नही आया मेरे दिल में..",वो फफक पड़ी,"..& फिर मेरे बच्चे ने क्या बिगाड़ा था तुम्हारा?!"..वो चीखी,"..क्यू मारा उसे?"

"क्यूकी वो मेरा नही महेश का पाप था!",जसजीत उठ के चीखा तो अंजलि 1 पल उसे देखती रही & फिर हँसने लगी.दिव्या ने उसे बाहर ले जाने की कोशिश की मगर वो हँसती ही रही.

"जसजीत प्रधान,आज तुम हार गये इसलिए नही कि पोलीस को पता चल गया तुम्हारे खेल का मगर इसलिए कि अनीश सचमुच तुम्हारा बेटा था..हां..मैं अनीश की माँ अपने दूसरे बेटे अंकुर की कसम खा के कहती हू कि अनीश के बाप तुम हो.महेश से मेरे जिस्मानी ताल्लुक़ात थे मगर शादी के 3 महीने पहले ही हमारी सगाई से भी पहले मैने उस से नाता तोड़ लिया था..",जसजीत के चेहरे का रंग फक्क पड़ गया.

"..क्यू?..अब बोलो सबसे जीत सकते हो मगर क्या उपरवाले से जीत सकते हो.सोचो,जसजीत तुम अपने बेटे,अपने खून के क़ातिल हो!"

"नही!",जसजीत चीखा,"..तुम झूठ बोलती हो!",वो रो रहा था.

"जाओ जाके टेस्ट करवाओ आजकल तो डीएनए टेस्ट से सब पता चल जाता है.मेरे बेटे के चिथड़े उड़ाए तुमने उनमे से किसी टुकड़े से मिलाओ अपने बाल को,पता चल जाएगा सब तुमको."

"इसकी ज़रूरत नही है.",प्रोफेसर ने चुटकी बजाई & वरुण अनीश को लेके अंदर दाखिल हुआ,"..ये रहा आपका बेटा,अंजलि जी.मैने वादा किया था ना जसजीत जी & उसे पूरा कर रहा हू.",अंजलि दौड़ी & अपने बेटे को सीने से लगा लिया.

"मिस्टर.प्रधान,क्या केवल जनम देने से कोई पिता बन जाता है?अगर आप अनीश के पिता नही भी होते तो क्या होता?..वो तो आपको ही बाप मानता था..& फिर उसे मारने की भी सोच ली आपने..इतनी नफ़रत 1 मासूम से जोकि आपका अपना खून था..& केवल CM बनाने के लिए.जसजीत जी,परिवार से बढ़ के कुच्छ नही होता.ये बात उस से पुछिये जो दुनिया मे तन्हा है.",दिव्या ने देखा कि प्रोफेसर की आवाज़ थोड़ी भारी हो गयी थी & वरुण की आँखे भी नम हो गयी थी इस बात पे.

केस सुलझ चुका था & अब 6 महीने बीत चुके थे.आइए देखते हैं कि सभी किरदार अब क्या कर रहे थे.अपनी प्रेमिका की मौत के बाद पहली बार प्रोफेसर दीक्षित को किसी रिश्ते मे सुकून मिला था.दिव्या & उन्होने शादी तो नही की मगर दोनो ही साथ रहने लगे थे & बहुत खुश थे.प्रोफेसर ने अगली किताब भी लिख ली थी & उसका मैन किरदार दिव्या जैसा ही था लेकिन उसने केवल सेठ मोहन लाल डकैती केस को ही कहानी का रूप दिया था,प्रधान किडनॅपिंग केस को वो यू भुनाता,इतना गलिज़ इंसान तो वो था नही.

जसजीत & मुकुल,दोनो ही भाइयो को सज़ा हुई लेकिन जसजीत को सज़ा हुई आर्म्स डीलर से संत-गाँठ करने की.दोनो भाइयो के बच्चो के खातिर प्रोफेसर ने कमिशनर से हाथ जोड़ के & अजीत के साथ मिलके CM को उसके राज़ का वास्ता दे के असली बात दुनिया से छिपाने को कहा.

अंजलि ने तीनो बच्चो को अपनी छाँव मे ले लिया.श्लोक पे मा के जाने का बहुत असर पड़ा था लेकिन अंजलि ने उस बिन मा के बच्चे को भी वोही प्यार दिया था जोकि वो अपने बेटो को देती थी.1 साइकिट्रिस्ट लगातार अनीश & श्लोक के साथ काम कर रहा था & सभी को उम्मीद थी कि दोनो बच्चे अपने बडो की ग़लतियो के दिए गये ज़ख़्मो से उबर ही जाएँगे.

मेघना को उस रोज़ किसी ने ये कह दिया कि बॉम्ब फटने से अजीत भी मर गया तो उस पल उसे एहसास हुआ कि बेवफा ही सही अजीत उसकी ज़िंदगी था & जब वो सही-सलामत उसके सामने आ खड़ा हुआ तो उसकी खुशी का तो ठिकाना ही नही रहा.उस रात दोनो पति-पत्नी ने अपनी पिच्छली ज़िंदगी की सारी बातें 1 दूसरे को बता दी.जब अजीत को पता चला कि वरुण 3 रात उसके घर रहा मगर उसकी मेघना ने उस से बेवफ़ाई नही की तो उसे खुद पे बड़ी शर्म आई लेकिन मेघना ने उसे अपने आगोश मे भर लिया & उसे सब भूल जाने को कहा.

अजीत ने वरुण से मुलाकात की & उसे 1 स्कूल मे क्रिकेट कोच की नौकरी लगवाई.प्रोफेसर ने कमिशनर को ये कहा कि उस रोज़ वरुण अनीश को किदनपेपर्स से च्छुड़वा रहा था नकि अगवा कर रहा था & उसका सबूत था कि उसने भी अपनी जान पे खेल के उस रोज़ बच्चे को बचाया था.वरुण अब हर हफ्ते प्रोफेसर से मिलने ज़रूर जाता था.उसने उसके जैसा समझदार इंसान आज तक नही देखा था & प्रोफेसर को भी अपना ये नया दोस्त बहुत अच्छा लगता था.

महेश अरोरा ने अपनी फॅक्टरी बेच दी थी.सब ख़त्म हुआ तो उसे एहसास हुआ कि वो कितना स्वार्थी & मतलबी इंसान था.आजकल वो हरिद्वार के पास 1 वृद्धाश्रम चला रहा है.

राम्या सेन को लगा कि उसी के फोन ने 2 जाने ले ली & उसने उसी रोज़ पॉलिटिक्स को अलविदा कह दिया.अब वो घर पे रहती है & अपने बेटे की परवरिश पे पूरा ध्यान देती है.उसीका पति जिसे कुच्छ नही पता था,पहले भी उस से खुश था मगर अब तो वो खुशी से पागल रहता है क्यूकी उसकी बीवी हर वक़्त बस अब उसी की खुशी के बारे मे सोचती रहती है.

वो आर्म्स डीलर जैल मे सज़ा काट रहा है & CM से लेके पोलीस तक सभी की 1 ही राय है कि चाहे जो भी हो उस कमीने को कभी भी जैल से बाहर ना आने दिया जाए.

जसजीत को पछतावा है & वो जैल मे क़ैदियो को पढ़ाने का काम कर रहा है.उसने सोच रखा है कि सज़ा पूरी होते ही वो अपनी प्यारी अंजलि को लेके किसी छ्होटी सी जगह रहने चला जाएगा.बच्चे पढ़ें,अपनी ज़िंदगी बनाएँ मगर वो अब अपनी सारी ज़िंदगी अपनी सच्ची पत्नी का दिल खुशियो से भरने मे लगा देगा.

मुकुल जैल मे बहुत खुश है.हर काम मे बढ़-चढ़ के हिस्सा लेता है & उसने भी सोच लिया है कि जैल से निकलते तीनो बच्चो की परवरिश करेगा & अपनी मा समान भाभी को आगे कोई तकलीफ़ नही होने देगा.

अंजलि को भी अब सुकून है.बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है उसके कंधो पे मगर उसका पति अब सही रास्ते पे है ये सोच के उसे बड़ी तसल्ली है.बच्चो के कामो मे उसका वक़्त कैसे काट रहा है उसे पता ही नही चल रहा.

अगर बेचैन है तो बस 2 लोग.वो 2 लोग जिन्होने जुर्म को दिल का सुकून मान लिया था,अपनी परेशानियो से भाग उन्होने उस पेड़ के नीचे पनाह ली थी जो शुरू मे तो छाँव देता है मगर बाद मे केवल कांटो की बारिश करता है.

औरतो की जैल मे क़ैद दीप्ति अपनी जान अरशद की याद मे आँसू बहाती रहती है & मर्दो की जैल मे बंद अरशद हर वक़्त अपने यारो की मौत & महबूबा के जुदाई के दर्द से बेज़ार होता रहता है.

तो दोस्तो कैसी लगी ये कहानी आपको बताना ज़रूर आपके विचारो का इंतजार रहेगा आपका दोस्त राज शर्मा

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कामुक कहानियाँ

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समाप्त

दा एंड

KHEL KHILADI KA paart--62

gataank se aage............-

"sahab,hum aapko andar nahi jane de sakte."

"Satpal,apne sathiyo se kaho ki mera rasta chhoden.",Gloria Apartment ke flat ke bahar khade CM Atre ke bodyguards ko ajit ki aankho me utra khun saaf nazar aa raha tha.

"sahab,aap hosh me nahi hain."

"hosh me tum nahi ho!",ajit chikha,"..is kamine atre ne us masoom ki jaan le li!"

"kya?!"

"haan,apni aankho se uske parkhachche udte dekhta aaya hun.",ajit ke andra ka gubar bhi aansuo ki shakl me bahar aaya,"tum kuchh bhi karo,chahe meri jaan chali jaye magar main us satta ke lalchi ko aaj apne hatho se saza diye bagair nahi jaoonga.",satpal ka senior abhi tak ajit ko khamoshi se dekh raha tha,usne jeb se 1 chabhi nikali & darwaza khol diya.ajit ne use dekh sar hilaya & andar dakhil hua.

"ye kya badtamizi hai!",vo flat ke bedroom me pahuncha to usne dekha ki 1 bahut haseen ladki jiski umra bamushkil 18 baras hogi bilkul nangi bistar pe padi thi & atre bhi nanga uski chut chat raha tha.ajit ko dekh vo gusse se chikha & kapde pehananae laga,"security!security!kaha mar gaye?..kaun ho tum..?..k-kya chahiye?",ajit ne uski or pistol tani magar vo ladki vaise hi bistar pe leti rahi bas thoda uth ke headbord se te k laga ke baithke muskurane lagi.

"kaun ho bhai..?..k..kyu m..maarna chahte ho mujhe..?",atre gidgida raha tha.

"us masoom ne kya bigada tha kisi ka?marna tha to uske baap ko marte?use kyu?"

"kiski baat kar rahe ho?..maine kisi ko nahi mara."

"mara nahi marwaya.Pradhan ke bete ko!"

"kya?!kya bakwas kar rahe ho?"

"chup!ye flat hai na secretary awasthi ka.yehi baith ke tum dono ne apni jati kursi ko bachane ke liye ye kidnapping ka ghinona khel racha tha na us arms dealer ke sath?"

"kya?!tum pagal ho!",atre ab gidgida nahi raha tha balki hairat se bhara tha.

"have a smoke.",vo ladki bistar se uthke 1 cigarette sulga ke ajit ke paas aa khadi hui,"..please have it.",usne israr kiya to ajit ne cigarette le liya,"main aapki confusion door karti hun."

"aapne suna hai na ki purane zamane me nagarvadhu hoti thi."

"kya bakwas hai?",ajit jhallaya.

"please,have patience.",usne ajit ke kandhe pe hath rakha & tarif bhari nigaho se dekha,"..to vo nagarvadhu hoti to 1 veshya hi thi magar har koi uske paas nahi ja sakta tha.sabse pehla haq hota tha raja ka fir baki jane-mane logo ka.to main aaj ki nagarvadhu hu.",usne bade garv se kaha.

"..ye flat hai to mere baap shri awasthi ji ka magar yaha rehti main hu."

"kya?lekin tumhe kya zarurt is sab ki?"

"sabhi paise ke liye nahi karte ye sab.",vo hansi,"..mera shauk hai.janti hu tumhari samajh me nahi ayega magar jab CM sahab jaisa taqatwar insan aapka kadrdan ho tab aapki samajh me aayega.mere pita ko kuchh nahi pata & yaha koi sazish nahi rachi jati bas romani khel khele jate hain.aap chahen to aap ka bhi yaha swagat hai.bahut kismat valo ke ye khushnasibi milti hai."

"kya?!to aap yaha..",ajit ne atre ki or dekha.

"haan..main bhi chahta tha ki Jasjit pareshan rahe,chunav haar jaye & mujhe Delhi na jana pade magar uske bachche ko maine agwa nahi karwaya."

"to fir kisne karwaya?",ajit ab aur uljhan me pad gaya.

"shayad main janti hu."

"kaun hai vo?",vo ladki uske karaib aayi & uske kaan me phusphusayi.

"kya?!",tabhi uska mobile baja,ye divya ka number tha.

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pradhan ke ghar matam man raha tha magar abhi anish ke jane ka nahi balki kisi aur baat ka.hua ye tha ki raat bhar ki chudai ke bavjood na Bhaiya Ji ka dil bhara & Nina ke upar bhi na jane kaisi khunari chadi ki dono ne ye khel agle din bhi jari rakha.bhaiya ji ne savere ke 4 baje Raghu ko fone kar uske 1 admi ko nina ke yaha bulwa liya & use Professor Dixit ki tasvir thamayi.tasvir thamate waqt vo keval pajama pehne the & ghar ke bahar aa gaye the.thik usi waqt unki purani premika Ramya Sen apne pati ke sath usi raste se ja rahi thi.uski manzil thi Devi Mandir jaha aajke roz badi bheed hoti thi & savere jake vo us bhid se bachna chahti thi.ramya ke pati ne to nahid ekha magar ramya ne apne neta & aashiq ko yu nange badan ghar ke bahar khade dekha & sara majra samajh gayi.

idhar usne mehsus bhi kiya tha ki vo us se kuchh berukh ho gaye hain.ramya ne jab dekha ki ye Mukul Pradhan ka ghar hai to uske dil me 1 shaitani khayal aaya.usne 1 booth se mukul ko gumnam fone kar diya ki uski biwi usi ke bistar me apne aashiq ke sath gulchharre uda rahi hai.mukul ne use galiya di magar shaq to use ho hi gaya tha.vo bhagta hua savere ke 6 baje ke kuchh baad apne ghar pahuncha.apni chabhi se usne darwaza khola & andar gaya.

"aahhhh..oohhhhh...haaiiiiii...naaaaaaa..!",nina bistar pe pet ke bal padi thi & bhaiya ji uske upar savar peechhe se uski chudai kar rahe the.daye hath ko uske pet ne neeche ghusa unhone pehle karwat le & fir use apne upar le liya & uske pet ko pakad neeche se dhakke lagane lage.nina ke jism ka nasha aaj puri tarah se unke sar chadh gaya tha.adhkhule darwazae ki aad se mukul ne jab ye nazara dekha to uske tan-badan me aag lag gayi.aankho se aansu behne lage.aajtak use lagta tha ki nina us se khafa rehti hai kyuki vo uske sapne nahi pure kar paya magar use kabhi ye nahi laga tha ki vo bewafa bhi hai.usne nina ke alawa kisi aur aurat ka khayal bhi nahi kiya tha & vo usi ke bistar me us insan ke sath joki uske bhaiya ka dushman tha chudai kar rahi thi!

aansu ponchhta mukul neeche bane apni study me gaya.tab tak bhaiya ji bistar se pair latka ke baith gaye the & nina bhi unki god me unki or pith kiye baithi thi.aage ki or jhuk apni baahe unki giraft me kaswaye vo kamar hila unke lund ka lutf utha rahi thi ki tabhi samne ka darwaza khula.

"haaaaa....!",chaunk ke vo seedhi baithi & munh pe hath rakha & jab tak dono alag ho pate,mukul ne pistol ki sari goliya unke jismo me utar di.

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Anjali but bani baithi thi.abhi-2 use bete ki maut ki khabar sunayi gayi thi.kaha gaya tha ki ballu & professor bhi us dhamake me mare gaye the.pradhan ke ghar ke bahar media walo ka hujum laga tha & aise me 2 gadiya uske bungle me dakhil hui.sabse pehli gadi se JCP Singh & DCP Verma Commissioner sahab ke sath utre & andar gaye.

"pradhan sahab,hume bahut zaruri baat karni hai aapse."

"kya commisiioner sahab?"

"aapke bete ko agwa karne vale ka pata chal gaya hai & vo yaha aane vala hai?"

"kya?!commissioner sahab main us kutte ko apne hatho se marunga!",nam aankho se angare baras rahe the.kamre me divya bhi aa khadi hui thi.

"zarur mariyega.",sabhi ghume.pradhan ka munh hairat se khul gaya.samne professor khada tha,"ise pehchante hain.",usne ghayal arms dealer ka gireban pakad ke aage kiya.jasjit ke mathe pe paseena chhalchhala aaya,"aap to khush honge na soch ke ki main bhi mar gaya anish ke sath,hain?"

"main anish ko liye-diye gadi se kuda & fir dhamaka hua.tab tak ACP divya ne vapas bungle pe jake zinda bache logo ko giraft me liye jinme se ye bhi tha.abhi ajit ji ne is se sab kuchh ugalwa liya hai & vo gloria apartment bhi ho aaye hain.ab pradhan ji aap khud hi sab bata dijiye."

"mujhe CM ki kursi chahiye the..",kuchh der khamosh rehne ke baad pradhan bola,"..party ke jo internal sample polls hue the,usme atre & mujh me bahut fark nahi tha.main janta tha ki jitne ke baad bhi atre mere liye pareshani khadi kar sakta hai.ab har jagah se uske aadmiyo ko harwata to party harti & main CM nahi ban pata.to maine ye khel khela.is se..",arms dealer ki or ungli uthake usne baat aage badhayi,"..meri mulakat kafi pehle hui thi & maine iske hathyar bikwane & police se bachane me kafi madad ki.badle me ye mujhe paise deta tha.isliye main zyada tar businessman se chanda nahi leta tha & imandari se kaam karta tha & logo ke beech meri saaf image thi."

"..gloria aprtment ke abre me bhi isi ne mujhe bataya tha.",pradhan ne sar jhukaya & vahi mujhe apni biwi ka 1 raaz pata chala."

"ki Mahesh Arora uska purana premi hai.",sabhi chaunk pade kyuki anjali bhi vaha aa gayi thi,"yehi na..?..haan..tha vo mera purana premi magar shadi ke baad main sirf tumhari thi.uska khayal bhi nahi aaya mere dil men..",vo phaphak padi,"..& fir mere bachche ne kya bigada tha tumhara?!"..vo chikhi,"..kyu mara use?"

"kyuki vo mera nahi mahesh ka paap tha!",jasjit uth ke chikha to anjali 1 pal use dekhti rahi & fir hansne lagi.divya ne use bahar le jane ki koshish ki magar vo hansti hi rahi.

"Jasjit Pradhan,aaj tum haar gaye isliye nahi ki police ko pata chal gaya tumhare khel ka magar isliye ki anish sachmuch tumhara beta tha..haan..main anish ki maan apne dusre bete Ankur ki kasam kha ke kehti hu ki anish ke baap tum ho.mahesh se mere jismani tallukat the magar shadi ke 3 mahine pehle hie humari sagai se bhi pehle maine us se nata rod liya tha..",jajsit ke chehre ka rang phak pad gaya.

"..kyu?..ab bolo sabse jeet sakte ho magar kya uparwale se jeet sakte ho.socho,jasjit tum apne bete,apne khun ke qatil ho!"

"nahi!",jasjit chikha,"..tum jhuth bolti ho!",vo ro raha tha.

"jao jake tets karwao aajkal to DNA test se sab pata chal jata hai.mere bete ke chithde udaye tumne unme se kisi tukde se milao apne baal ko,pata chal jeyega sab tumko."

"iski zarurat nahi hai.",professor ne chutki bajayi & varun anish ko leke andar dakhil hua,"..ye raha aapka beta,anjali ji.maine vada kiya tha na jasjit ji & use pura kar raha hu.",anjali daudi & apne bete ko seene se laga liya.

"mr.pradhan,kya keval janam dene se koi pita ban jata hai?agar aap anish ke pita nahi bhi hote to kya hota?..vo to aapko hi baap manta tha..& fir use marne ki bhi soch li aapne..itni nafrat 1 masoom se joki aapka apna khun tha..& keval CM banane ke liye.jasjit ji,parivar se badh ke kuchh nahi hota.ye baat us se puchhiye jo duniya me tanha hai.",divya ne dekha ki professor ki aavaz thdi bhari ho gayi thi & varun ki aankhe bhi nam ho gayi thi is baat pe.

Case sulajh chuka tha & ab 6 mahine beet chuke the.aaiye dekhte hain ki sabhi kirdar ab kya kar rahe the.apni premika ki maut ke baad pehli baar Professor Dixit ko kisi rishte me sukun mila tha.Divya & unhone shadi to nahi ki magar dono hi sath rehne lage the & bahut khush the.professor ne agli kitab bhi likh li thi & uska main kirdar divya jaisa hi tha lekin usne keval Seth Mohan Lal dacoity case ko hi kahani ka roop diya tha,Pradhan kidnapping case ko vo yu bhunata,itna galiz insan to vo tha nahi.

Jasjit & Mukul,dono hi bhaiyo ko saza hui lekin jasjit ko saza hui arms dealer se santh-ganth karne ki.dono bhaiyo ke bachcho ke khatir professor ne commissioner se hath jod ke & Ajit ke sath milke CM ko uske raaz ka vasta de ke asli baat duniya se chhipane ko kaha.

Anjali ne teeno bachcho ko apni chhaon me le liye.Shlok pe maa ke jane ka bahut asar pada tha lekin anjali ne us bin maa ke bachche ko bhi vohi pyar diya tha joki vo apne beto ko deti thi.1 psychiatrist lagatar anish & shlok ke sath kaam kar raha tha & sabhi ko umeed thi ki dono bachche apne bado ki galtiyo ke diye gaye zakhmo se ubar hi jayenge.

Meghna ko us roz kisi ne ye keh diya ki bomb phatne se ajit bhi mar gaya to us pal use ehsas hua ki bevafa hi sahi ajit uski zindagi tha & jab vo sahi-salamat uske samne aa khada hua to uski khushi ka to thikana hi nahi raha.us raat dono pti-patni ne apni pichhli zindagi ki sari baaten 1 dusre ko bata di.jab ajit ko pata chala ki Varun 3 raat uske ghar raha magar uski meghna ne us se bewafai nahi ki to use khud pe badi sharm aayi lekin meghna ne use apne agosh me bhar liya & use sab bhul jane ko kaha.

ajit ne varun se mulakat ki & use 1 school me cricket coach ki naukri lagwayi.professor ne commissioner ko ye kaha ki us roz varun anish ko kidnapeprs se chhudwa raha tha naki agwa kar raha tha & uska saboot tha ki usne bhi apni jaan pe khel ke us roz bachche ko bachaya tha.varun ab har hafte professor se milne zarur jata tha.usne uske jaisa samajhdar insan aaj tak nahi dekha tha & professor ko bhi apna ye naya dost bahut achha lagta tha.

Mahesh Arora ne apni factory bech di thi.sab khatm hua to use ehsas hua ki vo kitna swarthi & matlabi insan tha.aajkal vo haridwar ke paas 1 vriddhashram chala raha hai.

Ramya Sen ko laga ki usi ke fone ne 2 jane le li & usne usi roz politics ko alvida keh diya.ab vo ghar pe rehti hai & apne bete ki parvarish pe pura dhyan deti hai.usika pati jise kuchh nahi pata tha,pehle bhi us se khush tha magar ab to vo khushi se pagal rehta hai kyuki uski biwi har waqt bas ab usi ki khushi ke bare me sochti rehti hai.

vo arms dealer jail me saza kaat raha hai & CM se leke police tak sabhi ki 1 hi rai hai ki chahe jo bhi ho us kamine ko kabhi bhi jail se bahar na aane diya jaye.

jasjit ko pachhtawa hai & vo jail me qaidiyo ko padhane ka kaam kar raha hai.usne soch rakha hai ki saza puri hote hi vo apni pyari anjali ko leke kisi chhoti si jagah rehne chala jayega.bachche padhen,apni zindagi banayen magar vo ab apni sari zindagi apni sachchi patni ka dil khushiyo se bharne me laga dega.

mukul jail me bahut khush hai.har kaam me badh-chad ke hissa leta hai & usne bhi soch liya hai ki jail se nikalte teeno bachcho ki parvarish karega & apni maa saman bhabhi ko aage koi taklif nahi hone dega.

anjali ko bhi ab sukun hai.bahut badi zimmedari hai uske kandho pe magar uska pati ab sahi raste pe hai ye soch ke use badi tasalli hai.bachcho ke kaamo me uska waqt kaise kat raha hai use pata hi nahi chal raha.

agar bechain hai to bas 2 log.vo 2 log jinhone jurm ko dil ka sukun nmaan liya tha,apni pareshaniyo se bhag unhone us ped ke neeche panah li thi jo shuru me to chhanh deta hai magar baad me kewal kanto ki barish karta hai.

aurato ki jail me qaid Dipti apni jaan Arshad ki yaad me aansu bahati rehti hai & mardo ki jail me band arshad har waqt apne yaro ki maut & mehbooba ke judai ke dard se bezar hota rehta hai.

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kaamuk kahaaniyaan

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samaapt

THE END

 
धन्यवाद दोस्तो

दोस्तो ये तो चलता ही रहता है
 
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