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खेल खिलाड़ी का पार्ट--55
गतान्क से आगे............-
"कमिशनर साहब,जसजीत जी के बेटे के केस की क्या खबर है?",CM अत्रे बस अभी-2 जसजीत से मिलने के बाद अपने दफ़्तर आए थे.
"सर,पूरी फोर्स इसी काम मे जुटी है."
"क्यू?क्या बाकी जुर्म होने बंद हो गये हैं?",अत्रे ने 1 फाइल उठा के पैनी निगाह से कमिशनर को देखा,"देखिए,ये केस बहुत ज़रूरी है मैं मानता हू मगर इसके चलते बाकी काम नही रुकना चाहिए."
"सर,हम पूरी मुस्तैदी से अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभा रहे हैं."
"हूँ..वैसे क्या लगता है कब तक सुलझेगा ये मामला?"
"सर,आपको तो पता ही है आज पहली बार किडनॅपर्स ने कॉंटॅक्ट किया है.अभी तक तो उनकी माँगे भी नही पता चली हैं.कुच्छ पक्का नही कहा जा सकता.अगर किस्मत अच्छी रही तो चंद दिनो मे सुलझ जाएगा मामला नही तो हफ्ते भी लग सकते हैं."
"हूँ..",उन्होने फाइल पे नज़रें गढ़ा दी,"..हफ्ते ही लगे तो ठीक हैं.अब आप जा सकते हैं."
"सर.",कमिशनर ने CM की कही आख़िरी बात का मतलब समझ लिया था.वो जानता था कि अत्रे 1 नेता पहले है & CM की कुर्सी उसे कितनी प्यारी है.प्रधान को कमज़ोर करने का कोई मौका वो भला क्यू छ्चोड़ेगा मगर इस सब मे वो बच्चा मोहरा बन के रह गया था....लेकिन वो कर भी क्या सकता था?..लेकिन वो इस शहर का कमिशनर था..चाहे कुछ भी हो जाए,वो केवल बच्चे को बचाने को तवज्जो देगा,अत्रे & बाकी नेता इंतेज़ार कर सकते थे.
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"क्या पता चला,डॉक्टर?",अजीत ने फोरेन्सिक लॅब के चीफ से पुचछा.
"1 बहुत ज़रूरी बात."
"बताइए."
"ये सुव चोरी की है."
"अच्छा!"
"हाँ,इसके एंजिन पे इसका चॅसी नंबर खुरछ के उसे बदलने की कोशिश की गयी है मगर फिर भी हमने अंदाज़ लगा लिया है कि नंबर क्या हो सकता है..ये देखिए.",उसने 1 काग़ज़ अजीत को दिया.
"जीएच10045287ल या गफ़10095287ई..थॅंक्स,डॉक्टर.देखते हैं आपकी निकली ये जानकारी क्या रंग लाती है."
"वेलकम,ऑफीसर."
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"वो लौंडा तो बेकार है ये मैं जानता हू.",बल्लू रघु & रानो के साथ बैठा था,"..अकेला पूरा चेहरा दुनिया को दिखाते हुए बच्चे को अगवा करने आ गया,गधा कहीं का!..लेकिन वो गॅंग जिसने उस से बच्चे को छ्चीना वो पेशेवर है,बाबा."
"हाँ,बल्ले..अभी-2 मुझे बलदेव ने बताया है कि पोलीस को वो गाड़ी मिल गयी है जिसमे लड़का भागा था & वो गाड़ी भी जिसमे वो सोचते हैं कि बच्चा अगवा हुआ था."
"क्या?!"
"हां,बेटा मगर वो गॅंग की गाड़ी बिल्कुल जली हुई है."
"धात तेरे की!",बल्लू झल्लाया,"बाबा,मैने सारे शहर मे सभी गॅंग्स के यहा पता करवा लिया है.ये अपने शहर क्या अपने राज्य के किसी गॅंग का काम नही है.सब साले सोच रहे हैं कि इतना बड़ा कांड करने वाला ये रातोरात नया गॅंग पैदा कैसे हो गया!"
"पैदा जब भी हुआ हो,बल्लू..",रानो की आवाज़ खून जमाने वाली थी,"..उन्हे मौत की नींद हम ही सुलाएँगे."
अगली रात अजीत फिर घर नही आ पाया था & वरुण & मेघना ने 1 और रात 1 ही कमरे मे बिताई.इस रात दोनो की कशमकश और ज़्यादा थी.दोनो के दिल बीती बातो को याद कर उनके जिस्मो की बेचैनी बढ़ाए जा रहे थे.
पूरी रात दोनो ने आँखो-2 मे काट दी.सवेरे फिर पिच्छले दिन की ही तरह वरुण के लिए मोना ने चाइ बनाई जिसे पीते हुए वो टीवी देख रहा था.वो कार जिसमे किडनॅपर्स अनीश को छ्चीन के ले गये थे,उसकी बरामदगी की खबर से उसे उनके पकड़े जाने की कुच्छ उम्मीद जागी मगर तभी टीवी पे अगली खबर सुनते ही उसके होश उड़ गये.
"वरुण अवस्थी नाम का ये शख्स सज़ायाफ़्ता मुजरिम है & जसजीत प्रधान के बेटे के अफ़रन के सिलसिले मे पोलीस को इसकी तलाश है..",वरुण ने मोना को देखा जिसके चेहरे पे भी घबराहट झलक रही थी.
"मोना,मैं यहा से निकल जाता हू."
"& पोलीस के हाथो मे पड़ गये तो!बस 1 ही रात की तो बात है वरुण फिर अपने उस साथी के पास चले जाना या फिर.."
"या फिर क्या?"
"मैं अजीत से बात करू?"
"क्या बतओगि उसे की कैसे जानती हो इस मुजरिम को..",वरुण फीकी हँसी हंसा,"..मोना,तुम्हारी ज़िंदगी खुशाल है.क्यू उसे बर्बाद करना चाहती हो!..मेरी ज़िंदगी जितनी बर्बाद होनी थी हो चुकी,अब इस से ज़्यादा कुच्छ और बुरा क्या हो सकता है.1 बार जैल जा चुका हू,दूसरी बार चला जाऊँगा लेकिन तुम अपने पति से कुच्छ नही कहोगी."
"ठीक है.",वरुण चाइ ख़त्म कर उपर च्छूपने चला गया & मेघना उसे च्छुपाने के बाद उदास अपने बिस्तर पे तब तक बैठी रही जब तक अजीत वापस नही आ गया.
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अरशद & दीप्ति चुदाई मे जुटे थे & कमरे के आड़े हुए दरवाज़े से उनकी मस्त आवाज़ें बाहर आ रही थी.इस वक़्त अनीश के कमरे के बाहर की ड्यूटी देव & बालू की थी.चार्ली दोनो प्रेमियो की नशीली आहें सुन गरम हो चुका था & उसका जिस्म भी किसी लड़की के साथ की ख्वाहिश मे तड़प रहा था.
उसने दरवाज़े की ओट से देखा,दीप्ति अपने घुटनो & हाथो पे बिस्तर पे थी & अरशद पीछे से उसकी चूत मे लंड घुसाए उसे चोद रहा था.उस गरम नज़ारे को देख कब उसका हाथ अपने पॅंट के अंदर घुस गया & उसके लंड से खेलने लगा उसे पता ही नही चला.
दोनो प्रेमियो की पीठ उसकी तरफ थी & वो अरशद की पुष्ट गंद को भिंचे हुए दीप्ति की चूत मे धक्के लगाते देखते हुए अपना लंड हिला रहा था,"क्या बे!बा हाथ से ही हिलाएगा या फिर इसका इस्तेमाल भी करेगा!"
"ह-हां..नही...!",चार्ली चौंक गया & लंड पॅंट मे डाल कमरे मे जाने लगा.बालू हंसता हुआ बाथरूम चला गया.
"क्यू बे कुच्छ सच्चा मज़ा चाहिए या बस..",बालू बाथरूम से बाहर आया & हाथो से लंड हिलाने का इशारा किया.
"यहा कैसे होगा.",चार्ली मायूसी से बोला.
"होगा..वो कौन थी रे पिच्छली बार तेरी शाब्बो..क्या नाम था?"
"गुलबो.",चार्ली खुशी से बोला.
"हां,फिर मिलेगा उस से."
"मगर कैसे उस्ताद?",चार्ली ने आवाज़ नीची कर ली,"उसमे ख़तरा होगा.हम यहा च्चिपे हैं.कही किसी को भनक लग गयी तो?"
"कुच्छ नही होगा."
"& अरशद?"
"अबे तू बस बेफ़िक्र रह & जब कहु चलने को तैय्यार रहियो.",बालू बेपरवाही से बोला & वाहा से चला गया.
"बिल्कुल सही जवाब है दोस्त..",प्रोफेसर दीक्षित ने अरशद से कहा,"..वैसे मेरा नाम दीक्षित है."
"हमारी माँग ध्यान से सुन लो & कल बताओ कि हमे ये कब दे रहे हो.",अरशद ने उसकी बात अनसुनी करते हुए अपनी माँग बताई & फोन काट दिया.इस बार फिर 8 सेकेंड के भीतर पोलीस ने कॉल ट्रेस कर ली.इस बार सिविल हॉस्पिटल के पीसीओ से फोन आया था & वाहा के पोलीस पोस्ट के इंचार्ज को फ़ौरन वाहा भेजा गया.वो दौड़ता हुआ वाहा पहुँचा मगर बूथ हॉस्पिटल के पिच्छले दरवाज़े पे बना था.इंचार्ज ने पिच्छले गेट के बाहर खड़े 1 हवलदार को उसके मोबाइल पे जल्दी बूथ तक पहुचने को कहा.इधर वो कॉन्स्टेबल गेट से दाखिल हुआ & उसी के बगल से अरशद 1 बाइक से वाहा से बाहर निकला.
अरशद ने बाइक वही खड़ी की जहा हमेशा से खड़ी होती थी,1 मकान के गॅरेज मे.उस हथियारो के दलाल ने ही उसे इस गॅरेज की चाभी दी थी & ये बिके मुहैय्या कराई थी.वाहा से वो पैदल पास के मार्केट की पार्किंग मे गया गाड़ी निकाली & बुंगले की ओर चल पड़ा.
"क्या?!",प्रोफेसर & अरशद की बातचीत कंट्रोल रूम मे सुन रहे अजीत ने जैसे ही ये बात डीसीपी वेर्मा को बताई उनके माथे पे शिकन पड़ गयी,चलो मेरे साथ."
"देखिए,कमिशनर साहब अपने बेटे को बचाने के लिए मैं कोई भी कीमत देने को तैय्यार हू मगर 1 करोड़ के हीरे..मैं कहा से लाऊँ ये सब.",जसजीत की आवाज़ मे बेबसी थी.
"प्रधान जी,मैं आपकी परेशानी समझता हू.देखिए,ये बहुत शातिर लोग हैं.उन्हे रकम छ्होटे-2 हीरे चाहिए जिनमे से किसी भी हीरे की कीमत र्स.10,000 से ज़्यादा ना हो.यानी की करीब 1000 हीरे उन्हे चाहिए.अब ये हीरे इतने छ्होटे होते हैं लगभग कमीज़ के बटन के जैसे या उस से भी छ्होटे.1बड़ी पोटली मे आसानी से 1000 हीरे आ जाएँगे.मैने आपकी बात CM साहब तक पहुँचा दी है & वो भी इस बात का हल ढूढ़ने मे लगे हुए हैं."
ये सारी बातें जसजीत की स्टडी मे हो रही थी की तभी दरवाज़े पे दस्तक हुई & 1 नौकर के हाथो चाइ-नाश्ते की ट्रॉली के साथ नीना वाहा दाखिल हुई.उसका पति तो पहले से ही बड़े भाई के साथ वाहा बैठा था.नीना ने सभी को चाइ सर्व करवाई & वाहा से चली गयी.5 मिनिट बाद भैया जी को भी ये खबर मालूम थी & 15 मिनिट बाद रघु कुम्भात को भी.
"भैया,हम दोनो अपने पैसे मिला लेते हैं & बाकी का उधार ले लेते हैं."
"नही,मुकुल."
"देखिए,प्रधान जी..",कमिशनर ने आगे कहा,"..प्रोफेसर उनके साथ बात तो करेगा ही.वो उनकी माँग को नीचे लाने की कोशिश करेगा मगर बात ये है कि अगर हम हीरे दे देते हैं तो वो पहले उन्हे परखेंगे & फिर बच्चे को हमे सौपेंगे.अगर हम इन्हे धोखा देने की कोशिश करते हैं तो फिर..",कमिशनर ने बात अधूरी छ्चोड़ दी.
"नही..कमिशनर साहब..मैं अपने बच्चे को अब और ख़तरे मे नही डाल सकता.",तभी जसजीत का मोबाइल बजा जिसे मुकुल ने उठा लिया.
"भैया,CM साहब का फोन है.",जसजीत ने मोबाइल लिया & कुच्छ देर बात करता रहा & फिर फोन कमिशनर को थमा दिया.
"CM साहब ने 1 उपाय सुझाया है.राज्य के गेम ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन से वो ये हीरे हमे दिलवा देंगे & हम इनकी कीमत बाद मे चुका सकते हैं.."
"..& अगर हम उन्हे दबोचने मे कामयाब हो गये तब तो कोई बात ही नही है.बच्चा भी हमारे पास होगा & हीरे भी.",कमिशनर ने फोन जसजीत को लौटा के उसकी बात पूरी की.जो कमिशनर ने नही बताया वो ये कि CM अत्रे ने उसे फोन रखने से पहले ये कहा था कि हीरे अगर वापस नही मिले तो बहुत अच्छा होगा.मतलब सॉफ था कि फिर उस कीमत को चुकाने मे जसजीत को काफ़ी समय लगेगा & फिर CM का रास्ता सॉफ था.
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"1 बात तो तय है..".प्रोफेसर दिव्या & नामित के साथ बैठा था,"..ये जितने भी लोगो का गॅंग है उनमे से कोई 1 या तो जौहरी है या फिर हीरो का जानकार."
"हूँ..मगर प्रोफेसर मुझे लगता है कि उन हीरो के ज़रिए उन्हे पकड़ना तो आसान हो जाएगा.हम हीरो को ट्रॅक कर उन तक पहुँच सकते हैं."
"नही दिव्या जी,वो छ्होटे साइज़ के हीरे आपको केवल छ्होटे जौहरियो से मिलते हैं.उनपे कोई सरकारी मार्क भी नही होगा चाहे आप उन्हे जहा से ले लें."
"पर हमे खरीदते वक़्त तो कार्ड मिलता है जिसमे उनके असली होने की सरकारी मोहर लगी रहती है."
'बिल्कुल सही,नामित जी मगर हीरे पे तो कोई मार्किंग नही होती.बहुत से बहुत आप हीरे को जौहरी से जाँचवा के उसके साथ के कार्ड मे लिखी बात की सच्चाई परख सकते हैं.बड़े हीरो पे तो मार्किंग होती भी है मगर इन छ्होटे-2 हीरो पे ऐसा कुच्छ नही होता."
"यानी उन्हे ट्रॅक करना मुश्किल है?"
"बहुत.",प्रोफेसर सोचे जा रहा था.ये लोग बहुत चालाक थे & इसका मतलब था कि उतने ही ख़तरनाक भी होंगे.उसे पहली बार अपनी ज़िम्मेदार का बोझ महसूस हुआ & उसके दिल मे 1 बार फिर वही डर आया कि अगर बच्चे को कुच्छ हो गया तो वो क्या दोबारा उस सदमे को झेल पाएगा.दीपाली की मौत वाले हादसे मे उसे अपनी महबूबा को खोने का दर्द तो था ही मगर साथ मे नाकाम होने की टीस भी थी.अब फिर से वही टीस क्या उसे तोड़ नही देगी?..उसने ठंडी सांस भरी..जो होगा देखा जाएगा..अभी तो बस ये काम ठीक से हो जाए.
सवेरे के 4 बजे मेघना की नींद खुली तो उसने देखा की वरुण फर्श पे लगे बिस्तर पे नही है.वो झटके से उठी तो देखा वो तैय्यार हो के बाथरूम से निकल रहा है,"अब मैं चलूँगा."
"हूँ..ड्रॉयिंग रूम मे बैठो,मैं चाइ बनाती हू.",वो रसोई मे चली गयी.
खामोशी से दोनो चाइ पीते हुए टीवी देख रहे थे.मेघना को समझ नही आ रहा था कि उसका दिल बैठा क्यू जा रहा था.वरुण से अब कोई रिश्ता वो रखने की सोच भी नही सकती थी.उसने उसकी जो भी मदद की वो इसलिए क्यूकी वो उन दोनो के बीच के उस खूबसूरत रिश्ते को भूली नही थी जो बदक़िस्मती से टूट गया था..& वरुण ने भी इन तीन दिनो मे कोई ऐसी हरकत या बात नही की जिस से लगे की वो अभी भी उसे प्यार करता था.
"मोना..",वरुण खड़ा था,"..अब जाता हू.तुमने जो किया वो तो शायद ही कोई करता.इतना बड़ा ख़तरा मोल लिया तुमने मेरे लिए."
"प्लीज़ वरुण..",आगे अगर बोलती तो शायद उसकी रुलाई छूट जाती.
"ओके,मोना.बाइ!"
"1 मिनिट,वरुण.",मेघना भागती हुई ड्रॉयिंग रूम से बाहर गयी & जब वापस आई तो उसके हाथो मे कुच्छ पैसे थे.
"मोना,प्लीज़..मैं ये नही ले सकता.",मोना ने चुपचाप सारे पैसे उसकी कमीज़ की जेब मे डाल दिए.
"वरुण,बस 1 बात याद रखना कि चाहे जिसकी मदद लो,जो भी करो..तुम 1 अच्छे इंसान हो & कोई पेशेवर मुजरिम नही.",वरुण ने उसका हाथ पकड़ा & उसकी आँखो मे देखा.मेगना की आँखो की नमी उसे अपनी निगाहो मे भी महसूस हुई.
"बाइ!",उसने उसका हाथ दबाया & वाहा से निकल गया.अब उसकी मंज़िल थी मूसा का अड्डा जहा उसे उम्मीद थी कि उसे अपनी मुश्किल से च्छुतकारा मिल ही जाएगा.
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दिव्या की आँख खुली तो 1 पल को उसे समझ नही आया कि वो कहा है फिर जब नींद पूरी तरह खुली तो उसे याद आया कि वो प्रोफेसर दीक्षित के साथ उसी के कमरे मे है.कल दिन मे घर की बिजली अचानक चली गयी थी & उसे ठीक करने के बहाने मे 2 लोग आए & प्रोफेसर के कमरे के बग्स फिर से चालू कर गये थे.इस बार उन्होने उसके बिस्तर के हेअडबोर्ड के पीछे 1 बग फिट किया था & दूसरा फिर से गुलदस्ते मे.
प्रोफेसर ने गुलदस्ते मे ताज़े फूल लगा के पानी भर दिया & उस बग को बेकार कर दिया.पलंग के सिरहाने वाले बग के तार को लटका देना तो और भी आसान काम था.उसके बाद फिर से कमेरे पे 1 कपड़ा डाल अंधेरे कमरे मे उसने दिव्या को जम के चोदा था.
रात की हर्कतो ने दिव्या को काफ़ी थका दिया था & इसलिए उसे काफ़ी गहरी नींद आई थी.वो उठी & अपने कपड़े पहनने लगी कि तभी फोन घनघना उठा..इतनी सुबह किडनॅपर्स का फोन!
उसने झट से कपड़े पहन कमरे के दरवाज़ा खोला.तब तक प्रोफेसर ने फोन उठा लिया था,"दीक्षित बोल रहा हू,दोस्त."
"हमारी माँगो का क्या हुआ?"
"क्या दोस्त..इतनी बड़ी माँग है & फिर हमे बच्चे की सलामती का कोई असबूत नही दिया.",अरशद मन ही मन मुस्कुराया..बड़ा होशियार आदमी था इसलिए तो उसने अपने मोबाइल मे अनीश की बात रेकॉर्ड की थी.उसने उसे ऑन किया.
"..मैं ठीक हू,मम्मी-पापा.ना बीमार हू ना कोई चोट लगी है.बिल्कुल अच्छा हू.",कॉल ट्रेस हो गयी थी.
"लाजपत कुंज..ए ब्लॉक..के पास के बूथ से कॉल की जा रही है.",कंट्रोल रूम मे बैठे टेक्नीशियन ने लोकेशन बताई,"..हां..पार्क के पास.",ये जानकारी फ़ौरन वाहा के सबसे नज़दीकी पेट्रोल कार को दी गयी.
"हमारी माँग मानी की नही?"
"यार कुच्छ तो कम करो.बहुत ज़्यादा रकम है."
"मैं कल फिर फोन करूँगा.अगर हां नही बोला तो फोन के 6 घंटे बाद अनीश का कुच्छ समान तुमलोगो को मिल जाएगा.",ट्रॅक सूट पहने अरशद ने फोन काटा & बूथ से निकल जॉगिंग करता पार्क मे दाखिल हो गया.उसके निकलने के 5 सेकेंड बाद ही पेट्रोल कार वाहा पहुँची & पोलिसेवाले इलाक़े को छानने लगे.तब तक अरशद पार्क के दूसरे छ्होर के गेट से निकल अपनी बाइक पे सवार वाहा से निकल चुका था.
प्रोफेसर का बदन ठंडे पसीने से नहा गया था,वो जानता था अनीश के समान का क्या मतलब था..उस मासूम के जिस्म का कोई हिस्सा या फिर..उसने सर झटका & नामित की ओर देखा,"अपने बॉस को कहिए कि हीरो का जल्द इंतेज़ाम करें & अगर नही हैं तो मुझसे मिलें मैं कुच्छ ना कुच्छ करवाउन्गा!",प्रोफेसर की आवाज़ की चिंता ने दिव्या & नामित दोनो को परेशान कर दिया था.शायद पहली बार उन्हे एहसास हुआ था कि मामला कितना संगीन है.
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"क्या वो कार तमिल नाडु से चोरी हुई थी?",जाली सुव को देख के जो 2 चॅसी नंबर. का सुराग मिला था,उनमे से 1 सही था & उसका पता चल गया था,"..ओके..ठीक है.",अजीत ने इंटरकम रखा & सामने बैठे इनस्पेक्टर से मुखातिब हुआ,"..साउत इंडिया से चोरी गाड़िया यहा बहुत खपाई जाती हैं.ये उस सुव का असली नंबर है.इसे लेके शहर के सभी चोरी की गाडियो के दलालो की खबर लो & राज्य के बाकी शहरो मे भी ये नंबर फ्लश करवा दो."
"सर."
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"दिव्या जी?"
"जी बोल रही हू.",दिव्या ने अपने मोबाइल पे अंजान नंबर देख के फोन रिसीव किया.
"मैं फ़राज़ बोल रहा हू पंचमहल से."
"ओह..हेलो फ़राज़ जी!कैसे हैं आप?"
"बढ़िया हू दिव्या जी आपके काम की 1 बात पता चली है."
"अच्छा.क्या?"
"जिस केस के सिलसिले मे आप हमारे शहर आई थी उसी का 1 बहुत बड़ा सुराग मिला है."
"अच्छा."
"हां,1 लुटेरे का नाम पता चल गया है हमे."
"क्या?कैसे?",दिव्या की हैरत & खुशी का ठिकाना नही था.
"अभी कुच्छ दिन पहले रुटीन ट्रॅफिक चेकिंग मे 1 आदमी हमारे हाथ लगा जिसकी बाइक की डिकी मे नक़ली शराब भरी थी.हिरासत मे लेने के बाद उस से हमे 500 के 40 नोट्स मिले.हमारे 1 इनस्पेक्टर ने पहले उन नोट्स की जाँच 1 बॅंक मे करवाई कि कही ये नक़ली तो नही.नोट्स तो बिल्कुल असली थे मगर जब हम उन्हे मालखाने मे रखने लगे तो मुझे आपके यहा की लूट की याद आई.आपके डिपार्टमेंट ने हमे उस लूट की सभी डीटेल्स भेजी ही थी तो मैने यू ही नोट्स के नंबर्स मॅच किए & सारे नंबर्स मिल गये."
"ग्र8 वर्क,फ़राज़ जी."
"थॅंक्स.मैने फिर उस आदमी से कड़े तरीके से पूछ ताछ की तो पता चला की उसका 1 रेग्युलर ग्राहक था जिसे वो हर तरह की शराब मुहैय्या कराता था & ये नोट्स उसी ने एकमुश्त पेमेंट की तौर पे दिए थे & उसी ने बताया कि उसका नाम बालू है & जुर्म उसका पेशा है.उसे ये तो नही मालूम था कि डेवाले की लूट उसने की थी मगर उसका कहना था कि देव नाम के 1 शख्स के साथ उसकी बहुत छनती थी & आजकल दोनो ही हमारे शहर मे नज़र नही आ रहे.साथ ही ये भी पता चला है कि बालू को जुए की लत है & जिस रोज़ हम रेलवे यार्ड मे उस शख्स को नही पकड़ पाए थे उसी रोज़ उसने अपना बहुत बड़ा जुए का कर्ज़ा चुकाया था & उस रोज़ उसके साथ देव & 1 और कोई शख्स था..कौन ये हमे पता नही..मैने आपके दिए हुए स्केचस उसे दिखाए तो उसने बालू को तो पहचान लिया मगर दूसरे को वो नही पहचान पाया."
"फ़राज़ जी,आपने तो हमारे लिए बहुत बड़ा काम कर दिया."
"अब शर्मिंदा मत कीजिए,दिव्या जी.मैने आपको ई-मैल भेजी है उसे देख लीजिएगा.ओके,बाइ!"
"बाइ!"
बुंगले के कंप्यूटर पे दिव्या ने ई-मैल चेक की तो उसे पता चल गया कि जिस शख्स ने लूट की वॅन के टाइयर्स बदलवाए थे वो बालू ही था.दिव्या ने फ़ौरन ये जानकारी डिपार्टमेंट को दी & क्रिमिनल डेटबेस मे बालू को ढूँढा तो कुच्छ ही देर मे बालू की पूरी कहानी उसके आँखो के सामने थी.उसने सभी को ताक़ीद की कि बालू की फोटो हर थाने मे लगा दी जाए & 1 उसे पकड़ने का नोटीस जारी कर दिया जाए.
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"देख,अरशद & दीप्ति जब ड्यूटी पे होंगे & देव आराम कर रहा होगा तब हम नसीबपुरा चलेंगे..",आनेवाले ख़तरे से बेख़बर बालू चार्ली को अपना अयाशि का प्लान समझा रहा था,"..अपने-2 कमरे लॉक कर हम यहा से निकलेंगे & ट्रेन से 20 मिनिट मे वाहा पहुँच जाएँगे.",वो डेवाले की लोकल ट्रेन्स की बात कर रहा था,"..2 घंटे मे अपना काम निपटा के फिर करीब 30 मिनिट मे वापस यहा आ जाएँगे.तो 3 घंटे मे अपना काम हो जाएगा & ये बात अरशद को पता भी नही चलेगी."
"लेकिन उस्ताद अगर बाहर किसी ने देख लिया तो?",चार्ली चिंतित तो था मगर चुदाई का लालच उसे लुभा रहा था,"..अरशद बता रहा था कि वो आदमी कह रहा था कि नसीबपुरा की रेड मे वो बाल-2 बचा था फिर स्केचस भी तो जारी हैं."
"अबे यार तू बहुत डरता है!",बालू बेपरवाही से बोला,"..अब मुझे देख,कितने बरस हो गये.स्केच क्या अपनी तो फोटो है पोलिसेवालो के पास तो क्या करू?..साला जीना छ्चोड़ दू!..अबे यार,1 तो पता नही कि कब साली ज़िंदगी का खेल ख़त्म हो जाए उपर से जब तक ज़िंदा रहें,ऐसे डर-2 के मरते रहें.देख,तुझे नही जाना तो मत जा,मैं तो जाउन्गा..साला बहुत दिन हो गये किसी औरत की चूत मारे हुए!",वो उठ खड़ा हुआ,अब उसकी ओर देव की बारी थी.चार्ली भी उठा,उसकी ज़िम्मेदारी खाना बनाने की & घर की देख-रेख की थी,फिर वो दोनो जोडियो को आराम देने के लिए अकेला 2 घंटे बैठता था.
"उस्ताद..",कमरे से निकलता बालू मुड़ा,"..मैं चलूँगा आपके साथ.",जिस्म की भूख ने उसकी समझ पे परदा डाल दिया था.
"ये हुई ना बात!चल आराम कर.बताउन्गा तुझे कि कब जाना है.",बालू कमरे से बाहर निकल गया.
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कामुक कहानियाँ
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क्रमशः........
KHEL KHILADI KA paart--55
gataank se aage............-
"Commissioner sahab,Jasjit ji ke bete ke case ki kya khabar hai?",CM Atre bas abhi-2 jasjit se milne ke baad apne daftar aaye the.
"sir,puri force isi kaam me juti hai."
"kyu?kya baki jurm hone band ho gaye hain?",atre ne 1 file utha ke paini nigah se commissioner ko dekha,"dekhiye,ye case bahut zaruri hai main manta hu magar iske chalte baki kaam nahi rukna chahiye."
"sir,hum puri mustaidi se apni zimmedariyaan nibha rahe hain."
"hun..vaise kya lagta hai kab tak suljhega ye mamla?"
"sir,aapko to pata hi hai aaj pehli baar kidnappers ne contact kiya hai.abhi tak to unki maange bhi nahi pata chali hain.kuchh pakka nahi kaha ja sakta.agar kismat achhi rahi to chand dino me suljah jayega mamla nahi to hafte bhi lag sakte hain."
"hun..",unhone file pe nazren gada di,"..hafte hi lage to thik hain.ab aap ja sakte hain."
"sir.",commissioner ne CM ki kahi aakhiri baat ka matlab samajh liya tha.vo janta tha ki atre 1 neta pehle hai & CM ki kursi use kitni pyari hai.pradhan ko kamzor karne ka koi mauka vo bhala kyu chhodega magar is sab me vo bachcha mohra ban ke reh gaya tha....lekin vo kar bhi kya sakta tha?..lekin vo is shehar ka commissioner tha..chahe kuch bhi ho jaye,vo kewal bachche ko bachane ko tavajjoh dega,atre & baki neta intezar kar sakte the.
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"kya pata chala,doc?",Ajit ne forensic lab ke chief se puchha.
"1 bahut zaruri baat."
"bataiye."
"ye SUV chori ki hai."
"achha!"
"haan,iske engine pe iska chassis number khurach ke use badalne ki koshish ki gayi hai magar fir bhi humne andaz laga liya hai ki number kya ho sakta hai..ye dekhiye.",usne 1 kagaz ajit ko diya.
"GH10045287L ya GF10095287I..thanx,doc.dekhte hain aapki nikali ye jankari kya rang lati hai."
"welcome,officer."
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"vo launda to bekar hai ye main janta hu.",Ballu Raghu & rano ke sath baitha tha,"..akela pura chehra duniya ko dikhate hue bachche ko agwa karne aa gaya,gadha kahinka!..lekin vo gang jisne us se bachche ko chheena vo peshewar hai,Baba."
"haan,balle..abhi-2 mujhe Baldev ne bataya hai ki police ko vo gadi mil gayi hai jisme ladka bhaga tha & vo gadi bhi jisme vo sochte hain ki bachcha agwa hua tha."
"kya?!"
"haan,beta magar vo gang ki gadi bilkul jali hui hai."
"dhat tere ki!",ballu jhallaya,"baba,maine sare shehar me sabhi gangs ke yaha pata karwa liya hai.ye apne shehar kya apne rajya ke kisi gang ka kaam nahi hai.sab sale soch rahe hain ki itna bada kand karne vala ye raatoraat naya gang paida kaise ho gaya!"
"paida jab bhi hua ho,ballu..",rano ki aavaz khun jamane wali thi,"..unhe maut ki nind hum hi sulayenge."
Agli raat Ajit fir ghar nahi aa paya tha & Varun & Meghna ne 1 aur raat 1 hi kamre me bitayi.is raat dono ki kashmakash aur zyada thi.dono ke dil beeti baato ko yaad kar unke jismo ki bechaini badhaye ja rahe the.
puri raat dono ne aankho-2 me kaat di.savere fir pichhle din ki hi tarah varun ke liye mona ne chai banayi jise peete hue vo tv dekh raha tha.vo car jisme kidnappers Anish ko chheen ke le gaye the,uski baramdgi ki khabar se use unke pakde jane ki kuchh umeed jagi magar tabhi tv pe agli khabar sunte hi uske hosh ud gaye.
"Varun Awasthi naam ka ye shakhs sazayafta mujrim hai & Jasjit Pradhan ke bete ke apharan ke silsile me police ko iski talash hai..",avrun ne Mona ko dekha jiske chehre pe bhi ghabrahat jhalak rahi thi.
"mona,main yaha se nikal jata hu."
"& police ke hatho me pad hata hu!bas 1 hi raat ki to baat hai varun fir apne us sathi ke paas chale jana ya fir.."
"ya fir kya?"
"main ajit se baat karu?"
"kya bataogi use ki kaise janti ho is mujrim ko..",varun fiki hansi hansa,"..mona,tumhari zindagi khushaal hai.kyu use barbad karna chahti ho!..meri zindagi jitni barbad honi thi ho chuki,ab is se zyada kuchh aur bura kya ho sakta hai.1 baar jail ja chuka hu,dusri baar chala jaoonga lekin tum apne pati se kuchh nahi kahogi."
"thik hai.",varun chai khatm kar upar chhupne chala gaya & meghna use chhupane ke baad udas apne bistar pe tab tak baithi rahi jab tak ajit vapas nahi aa gaya.
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Arshad & Dipti chudai me jute the & kamre ke ade hue darwaze se unki mast aavazen bahar aa rahi thi.is waqt anish ke kamre ke bahar ki duty Deva & Balu ki thi.Charlie dono premiyo ki nashili aahen sun garam ho chuka tha & uska jism bhi kisi ladki ke sath ki khwahish me tadap raha tha.
usne darwaze ki ot se dekha,dipti apne ghutno & hatho pe bistar pe thi & arshad peechhe se uski chut me lund ghusaaye use chod raha tha.us garam nazare ko dekh kab usk hath apne pant ke andar ghus gaya & uske lund se khelne laga use pata hi nahi chala.
dono premiyo ki pith uski taraf thi & vo arshad ki pusht gand ko bhinche hue dipti ki chut me dhakke lagate dekhte hue apna lund hila raha tha,"kya be!ba hath se hi hilayega ya fir iska istemal bhi karega!"
"h-haan..nahi...!",charlie chaunk gaya & lund pant me daal kamre me jane laga.balu hansta hua bathroom chala gaya.
"kyu be kuchh sachcha maza chahiye ya bas..",balu bathroom se bahar aaya & hatho se lund hilane ka ishara kiya.
"yaha kaise hoga.",charlie mayusi se bola.
"hoga..vo kaun thi re pichhli baar teri Shabbo..kya naam tha?"
"Gulabo.",charlie khushi se bola.
"haan,fir milega us se."
"magar kaise ustad?",charlie ne aavaz neechi kar li,"usme khatra hoga.hum yaha chhipe hain.kahi kisi ko bhanak lag gayi to?"
"kuchh nahi hoga."
"& arshad?"
"abe tu bas befikr rah & jab kahu chalne ko taiyyar rahiyo.",balu beparwahi se bola & vaha se chala gaya.
"Bilkul sahi jawab hai dost..",Professor Dixit ne Arshad se kaha,"..vaise mera naam Dixit hai."
"humari mang dhyan se sun lo & kal batao ki hume ye kab de rahe ho.",arshad ne uski baat ansuni karte hue apni mang batayi & fone kaat diya.is baar fir 8 second ke bhitar police ne call trace kar li.is baar Civil Hospital ke PCO se fone aaya tha & vaha ke police post ke incharge ko fauran vaha bheja gaya.vo daudta hua vaha pahuncha magar booth hospital ke pichhle darwaze pe bana tha.incharge ne pichhle gate ke bahar khade 1 hawaldar ko uske mobile pe jaldi booth tak pahuchane ko kaha.idhar vo constable gate se dakhil hua & usi ke bagal se arshad 1 bike se vaha se bahar nikla.
arshad ne bike vahi khadi ki jaha humesha se khadi hoti thi,1 makan ke garage me.us hathyaro ke dalal ne hi use is garage ki chabhi di thi & ye bike muhaiyya karayi thi.vaha se vo paidal paas ke market ki parking me gaya gadi nikali & bungle ki or chal pada.
"kya?!",professor & arshad ki baatchit control room me sun rahe Ajit ne jaise hi ye baat DCP Verma ko bataye unke mathe pe shikan pad gayi,chalo mere sath."
"dekhiye,Commissioner sahab apne bete ko bachane ke liye main koi bhi keemat dene ko taiyyar hu magar 1 crore ke heere..main kaha se laoon ye sab.",Jasjit ki aavaz me bebasi thi.
"Pradhan ji,main aapki pareshani samajhta hu.dekhiye,ye bahut shatir log hain.unhe rakam chhote-2 heere chahiye jinme se kisi bhi heere ki keemat Rs.10,000 se zyada na ho.yani ki karib 1000 heere unhe chahiye.ab ye heere itne chhote hote hain lagbhag kamiz ke button ke jaise ya us se bhi chhote.1badi potli me aasani se 1000 heere aa jayenge.maine aapki baat CM sahab tak phuncha di hai & vo bhi is baat ka hal dhondane me lage hue hain."
ye sari baaten jasjit ki study me ho rahi thi ki tabhi darwaze pe dastak hui & 1 naukar ke hatho chai-nashte ki trolley ke sath Nina vaha dakhil hui.uska pati to pehle se hi bade bhai ke sath vaha baitha tha.nina ne sabhi ko chai serve karwai & vaha se chali gayi.5 minute baad Bhaiya ji ko bhi ye khabar malum thi & 15 minute baad Raghu Kumbhat ko bhi.
"bhaiya,hum dono apne paise mila lete hain & baki ka udhar le lete hain."
"nahi,Mukul."
"dekhiye,pradhan ji..",commissioner ne aage kaha,"..professor unke sath baat to karega hi.vo unki mang ko neeche lane ki koshish karega magar baat ye hai ki agar hum heere de dete hain to vo pehle unhe parkhenge & fir bachche ko hume saupenge.agar hum inhe dhokha dene ki koshish karte hain to fir..",commissioner ne baat adhuri chhod di.
"nahi..commissioner sahab..main apne bachche ko ab aur khatre me nahi daal sakta.",tabhi jasjit ka mobile baja jise mukul ne utha liya.
"bhaiya,CM sahab ka fone hai.",jasjit ne mobile liya & kuchh der baat karta raha & fir fone commissioner ko thama diya.
"CM sahab ne 1 upai sujhaya hai.rajya ke Gem Trading Corporation se vo ye heere hume dilwa denge & hum inki keemat baad me chuka sakte hain.."
"..& agar hum unhe dabochne me kamyab ho gaye tab to koi baat hi nahi hai.bachcha bhi humare paas hoga & heere bhi.",commissioner ne fone jasjit ko lauta ke uski baat puri ki.jo commissioner ne nahi bataya vo ye ki CM Atre ne use fone rakhne se pehle ye kaha tha ki heere agar vapas nahi mile to bahut achha hoga.matlab saaf tha ki fir us keemat ko chukane me jasjit ko kafi samay lagega & fir CM ka rasta saaf tha.
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"1 baat to tay hai..".professor Divya & Namit ke sath baitha tha,"..ye jitne bhi logo ka gang hai unme se koi 1 ya to jauhri hai ya fir heero ka jankar."
"hun..magar professor mujhe lagta hai ki un heero ke zariye unhe pakadna to aasan ho jayega.hum heero ko track kar un tak pahunch sakte hain."
"nahi divya ji,vo chhote size ke heere aapko keval chhote jauhriyo se milte hain.unpe koi sarkari mark bhi nahi hoga chahe aap unhe jaha se le len."
"par hume kharidte waqt to card milta hai jisme unke asli hone ki sarkari mohar lagi rehti hai."
'bilkul sahi,namit ji magar heere pe to koi marking nahi hoti.bahut se bahut aap heere ko jauhri se janchwa ke uske sath ke card me likhi baat ki sachchai parakh sakte hain.bade heero pe to marking hoti bhi hai magar in chhote-2 heero pe aisa kuchh nahi hota."
"yani unhe track karna mushkil hai?"
"bahut.",professor soche ja raha tha.ye log bahut chalak the & iska matlab tha ki utne hi khatarnak bhi honge.use pehli baar apni zimmedar ka bojh mehsus hua & uske dil me 1 baar fir vahi darr aaya ki agar bachche ko kuchh ho gaya to vo kya dobara us sadme ko jhel payega.Deepali ki maut vale hadse me use apni mehbooba ko khone ka dard to tha hi magar sath me nakam hone ki tees bhi thi.ab fir se vahi tees kya use tod nahi degi?..usne thandi sans bhari..jo hoga dekha jayega..abhi to bas ye kaam thik se ho jaye.
Savere ke 4 baje Meghna ki nind khuli to usne dekha ki Varun farsh pe lage bistar pe nahi hai.vo jhatke se uthi to dekha vo taiyyar ho ke bathroom se nikal raha hai,"ab main chalunga."
"hun..drawing room me baitho,main chai banati hu.",vo rasoi me chali gayi.
khamoshi se dono chai peete hue tv dekh rahe the.meghna ko samajh nahi aa raha tha ki uska dil baitha kyu ja raha tha.varun se ab koi rishta vo rakhne ki soch bhi nahi sakti thi.usne uski jo bhi madad ki vo isliye kyuki vo un dono ke beech ke us khubsurat rishte ko bhuli nahi thi jo badkismati se tut gaya tha..& varun ne bhi in teen dino me koi aisi harkat ya baat nahi ki jis se lage ki vo abhi bhi use pyar karta tha.
"Mona..",varun khada tha,"..ab jata hu.tumne jo kiya vo to shayad hi koi karta.itna bada khatra mol liya tumne mere liye."
"please varun..",aage agar bolti to shayad uski rulayi chhut jati.
"ok,mona.bye!"
"1 minute,varun.",meghna bhagti hui drawing room se bahar gayi & jab vapas aayi to uske hatho me kuchh paise the.
"mona,please..main ye nahi le sakta.",mona ne chupchap sare paise uski kamiz ki jeb me daal diye.
"varun,bas 1 baat yaad rakhna ki chahe jiski madad lo,jo bhi karo..tum 1 achhe insan ho & koi peshevar mujrim nahi.",varun ne uska hath pakda & uski aankho me dekha.megna ki aankho ki nami use apni nigaho me bhi mehsus hui.
"bye!",usne uska hath dabaya & vaha se nikal gaya.ab uski manzil thi Musa ka adda jaha use umeed thi ki use apni mushkil se chhutkara mil hi jayega.
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Divya ki aankh khuli to 1 pal ko use samajh nahi aaya ki vo kaha hai fir jab nind puri tarah khuli to use yaad aaya ki vo Professor Dixit ke sath usi ke kamre me hai.kal din me ghar ki bijli achanak chali gayi thi & use thik karne ke bahane me 2 log aaye & professor ke kamre ke bugs fir se chalu kar gaye the.is baar ynhone uske bistar ke headbord ke peechhe 1 bug fit kiya tha & dusra fir se guldaste me.
professor ne guldaste me taze phool laga ke pani bhar diya & us bug ko bekar kar diya.palang ke sirhane vale bug ke taar ko latka dena to aur bhi aasan kaam tha.uske baad fir se camere pe 1 kapda daal andhere kamre me usne divya ko jum ke choda tha.
raat ki harkato ne divya ko kafi thaka diya tha & isliye use kafi gehri nind aayi thi.vo uthi & apne kapde pehanane lagi ki tabhi fone ghanghana utha..itni subah kidnappers ka phone!
usne jhat se kapde pehan kamre ke darwaza khola.tab tak professor ne fone utha liya tha,"Dixit bol raha hu,dost."
"humari maango ka kya hua?"
"kya dost..itni badi mang hai & fir hume bachche ki salamati ka koi asboot nahi diya.",Arshad man hi man muskuraya..bada hoshiyar aadmi tha isliye to usne apne mobile me Anish ki baat record ki thi.usne use on kiya.
"..main thik hu,mummy-papa.na bimar hu na koi chot lagi hai.bilkul achha hu.",call trace ho gayi thi.
"Lajpat Kunj..A block..ke paas ke booth se call ki ja rahi hai.",control room me baithe technician ne location batayi,"..haan..park ke paas.",ye jankari fauran vaha ke sabse nazdiki patrol car ko di gayi.
"humari mang mani ki nahi?"
"yaar kuchh to kam karo.bahut zyada rakam hai."
"main kal fir fone karunga.agar haan nahi bola to fone ke 6 ghante baad Anish ka kuchh saman tumlogo ko mil jayega.",track suit pehne arshad ne fone kata & booth se nikal jogging karta park me dakhil ho gaya.uske nikalne ke 5 second baad hi patrol car vaha pahunchi & policevale ilake ko chhanane lage.tab tak arshad park ke dusre chhor ke gate se nikal apni bike pe savar vaha se nikal chuka tha.
professor ka badan thande pasine se naha gaya tha,vo janta tha anish ke saman ka kya matlab tha..us masoom ke jism ka koi hissa ya fir..usne sar jhatka & Namit ki or dekha,"apne boss ko kahiye ki heero ka jald intezam karen & agar nahi hain to mujhse milen main kuchh na kuchh karwaunga!",professor ki aavaz ki chinta ne divya & namit dono ko pareshan kar diya tha.shayad pehli baar unhe ehsas hua tha ki mamla kitna sangin hai.
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"kya vo car Tamil Nadu se chori hui thi?",jali SUV ko dekh ke jo 2 chassis nos. ka surag mila tha,unme se 1 sahi tha & uska pata chal gaya tha,"..ok..thik hai.",ajit ne intercom rakha & asmne baithe inspector se mukhatib hua,"..south India se chori gaadiya yaha bahut khapayi jati hain.ye us SUV ka asli number hai.ise leke shehar ke sabhi chori ki gadiyo ke dalalo ki khabar lo & rajya ke baki shehro me bhi ye number flash karwa do."
"sir."
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"divya ji?"
"ji bol rahi hu.",divya ne apne mobile pe anjan number dekh ke fone receive kiya.
"main Faraz bol raha hu Panchmahal se."
"oh..hello faraz ji!kaise hain aap?"
"badhiya hu divya ji aapke kaam ki 1 baat pata chali hai."
"achha.kya?"
"jis case ke silsile me aap humare shehar aayi thi usi ka 1 bahut bada surag mila hai."
"achha."
"haan,1 lutere ka naam pata chal gaya hai hume."
"kya?kaise?",divya ki hairat & khushi ka thikana nahi tha.
"abhi kuchh din pehle routine traffic checking me 1 aadmi humare hath laga jiski bike ki dickiy me naqli sharab bhari thi.hirasat me lene ke baad us se hume 500 ke 40 notes mile.humare 1 inspector ne pehle un notes ki janch 1 bank me karwai ki kahi ye naqli to nahi.notes to bilkul asli the magar jab hum unhe malkhane me rakhne lage to mujhe aapke yaha ki loot ki yaad aayi.aapke department ne hume us loot ki sabhi details bheji hi thi to maine yu hi notes ke numbers match kiye & sare numbers mil gaye."
"gr8 work,faraz ji."
"thanx.maine fir us aadmi se kade tarike se puchhtachh ki to pata chala ki uska 1 regular grahak tha jise vo har tarah ki sharab muhaiyya karata tha & ye notes usi ne ekmusht payment ki taur pe diye the & usi ne bataya ki uska naam Balu hai & jurm uska pesha hai.use ye to nahi malum tha ki Devalay ki loot usne ki thi magar uska kehna tha ki Deva naam ke 1 shakhs ke sath uski bahut chhanti thi & aajkal dono hi humare shehar me nazar nahi aa rahe.sath hi ye bhi pata chala hai ki balu ko jue ki lat hai & jis roz hum railway yard me us shakhs ko nahi pakad paye the usi roz usne apna bahut bada jue ka karza chukaya tha & us roz uske sath deva & 1 aur koi shakhs tha..kaun ye hume pata nahi..maine aapke diye hue sketches use dikhaye to usne balu ko to pehchan liya magar dusre ko vo nahi pehchan paya."
"faraz ji,aapne to humare liye bahut bada kaam kar diya."
"ab sharminda mat kijiye,divya ji.maine aapko e-mail bheji hai use dekh lijiyega.ok,bye!"
"bye!"
bungle ke computer pe divya ne e-mail check ki to use pata chal gaya ki jis shakhs ne loot ki van ke tyres badalwaye the vo balu hi tha.divya ne fauran ye jankar department ko di & criminal database me balu ko dhoonda to kuchh hi der me balu ki puri kahani uske aankho ke samne thi.usne sabhi ko taqeed ki ki balu ki foto har thane me laga di jaye & 1 use pakadne ka notice jari kar diya jaye.
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"dekh,arshad & dipti jab duty pe honge & deva aaram kar raha hoga tab hum Nasibpura chalenge..",aanevale khatre se bekhabar balu Charlie ko apna ayasshi ka plan samjha raha tha,"..apne-2 kamre lock kar hum yaha se niklenge & train se 20 minute me vaha pahunch jayenge.",vo devalay ki local trains ki baat kar raha tha,"..2 ghante me apna kaam nipta ke fir karib 30 minute me vapas yaha aa jayenge.to 3 ghante me apna kaam ho jayega & ye baat arshad ko pata bhi nahi chalegi."
"lekin ustad agar bahar kisi ne dekh liya to?",charlie chintit to tha magar chudai ka lalach use lubha raha tha,"..arshad bata raha tha ki vo aadmi keh raha tha ki nasibpura ki raid me vo baal-2 bacha tha fir sketches bhi to jari hain."
"abe yaar tu bahut darta hai!",balu beparwahi se bola,"..ab mujhe dekh,kitne baras ho gaye.sketch kya apni to foto hai policevalo ke paas to kya karu?..sala jeena chhod du!..abe yaar,1 to pata nahi ki kab sali zindagi ka khel khatm ho jaye upar se jab tak zinda rahen,aise darr-2 ke marte rahen.dekh,tujhe nahi jana to mat ja,main to jaunga..sala bahut din ho gaye kisi aurat ki chut mare hue!",vo uth khada hua,ab uski or deva ki bari thi.charlie bhi utha,uski zimmedari khana banane ki & ghar ki dekh-rekh ki thi,fir vo dono jodiyo ko aaram dene ke liye akela 2 ghante baithata tha.
"ustad..",kamre se nikalta balu muda,"..main chalunga aapke sath.",jism ki bhukh ne uski samajh pe parda daal diya tha.
"ye hui na baat!chal aaram kar.bataunga tujhe ki kab jana hai.",balu kamre se bahar nikal gaya.
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kaamuk kahaaniyaan
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kramashah........
गतान्क से आगे............-
"कमिशनर साहब,जसजीत जी के बेटे के केस की क्या खबर है?",CM अत्रे बस अभी-2 जसजीत से मिलने के बाद अपने दफ़्तर आए थे.
"सर,पूरी फोर्स इसी काम मे जुटी है."
"क्यू?क्या बाकी जुर्म होने बंद हो गये हैं?",अत्रे ने 1 फाइल उठा के पैनी निगाह से कमिशनर को देखा,"देखिए,ये केस बहुत ज़रूरी है मैं मानता हू मगर इसके चलते बाकी काम नही रुकना चाहिए."
"सर,हम पूरी मुस्तैदी से अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभा रहे हैं."
"हूँ..वैसे क्या लगता है कब तक सुलझेगा ये मामला?"
"सर,आपको तो पता ही है आज पहली बार किडनॅपर्स ने कॉंटॅक्ट किया है.अभी तक तो उनकी माँगे भी नही पता चली हैं.कुच्छ पक्का नही कहा जा सकता.अगर किस्मत अच्छी रही तो चंद दिनो मे सुलझ जाएगा मामला नही तो हफ्ते भी लग सकते हैं."
"हूँ..",उन्होने फाइल पे नज़रें गढ़ा दी,"..हफ्ते ही लगे तो ठीक हैं.अब आप जा सकते हैं."
"सर.",कमिशनर ने CM की कही आख़िरी बात का मतलब समझ लिया था.वो जानता था कि अत्रे 1 नेता पहले है & CM की कुर्सी उसे कितनी प्यारी है.प्रधान को कमज़ोर करने का कोई मौका वो भला क्यू छ्चोड़ेगा मगर इस सब मे वो बच्चा मोहरा बन के रह गया था....लेकिन वो कर भी क्या सकता था?..लेकिन वो इस शहर का कमिशनर था..चाहे कुछ भी हो जाए,वो केवल बच्चे को बचाने को तवज्जो देगा,अत्रे & बाकी नेता इंतेज़ार कर सकते थे.
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"क्या पता चला,डॉक्टर?",अजीत ने फोरेन्सिक लॅब के चीफ से पुचछा.
"1 बहुत ज़रूरी बात."
"बताइए."
"ये सुव चोरी की है."
"अच्छा!"
"हाँ,इसके एंजिन पे इसका चॅसी नंबर खुरछ के उसे बदलने की कोशिश की गयी है मगर फिर भी हमने अंदाज़ लगा लिया है कि नंबर क्या हो सकता है..ये देखिए.",उसने 1 काग़ज़ अजीत को दिया.
"जीएच10045287ल या गफ़10095287ई..थॅंक्स,डॉक्टर.देखते हैं आपकी निकली ये जानकारी क्या रंग लाती है."
"वेलकम,ऑफीसर."
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"वो लौंडा तो बेकार है ये मैं जानता हू.",बल्लू रघु & रानो के साथ बैठा था,"..अकेला पूरा चेहरा दुनिया को दिखाते हुए बच्चे को अगवा करने आ गया,गधा कहीं का!..लेकिन वो गॅंग जिसने उस से बच्चे को छ्चीना वो पेशेवर है,बाबा."
"हाँ,बल्ले..अभी-2 मुझे बलदेव ने बताया है कि पोलीस को वो गाड़ी मिल गयी है जिसमे लड़का भागा था & वो गाड़ी भी जिसमे वो सोचते हैं कि बच्चा अगवा हुआ था."
"क्या?!"
"हां,बेटा मगर वो गॅंग की गाड़ी बिल्कुल जली हुई है."
"धात तेरे की!",बल्लू झल्लाया,"बाबा,मैने सारे शहर मे सभी गॅंग्स के यहा पता करवा लिया है.ये अपने शहर क्या अपने राज्य के किसी गॅंग का काम नही है.सब साले सोच रहे हैं कि इतना बड़ा कांड करने वाला ये रातोरात नया गॅंग पैदा कैसे हो गया!"
"पैदा जब भी हुआ हो,बल्लू..",रानो की आवाज़ खून जमाने वाली थी,"..उन्हे मौत की नींद हम ही सुलाएँगे."
अगली रात अजीत फिर घर नही आ पाया था & वरुण & मेघना ने 1 और रात 1 ही कमरे मे बिताई.इस रात दोनो की कशमकश और ज़्यादा थी.दोनो के दिल बीती बातो को याद कर उनके जिस्मो की बेचैनी बढ़ाए जा रहे थे.
पूरी रात दोनो ने आँखो-2 मे काट दी.सवेरे फिर पिच्छले दिन की ही तरह वरुण के लिए मोना ने चाइ बनाई जिसे पीते हुए वो टीवी देख रहा था.वो कार जिसमे किडनॅपर्स अनीश को छ्चीन के ले गये थे,उसकी बरामदगी की खबर से उसे उनके पकड़े जाने की कुच्छ उम्मीद जागी मगर तभी टीवी पे अगली खबर सुनते ही उसके होश उड़ गये.
"वरुण अवस्थी नाम का ये शख्स सज़ायाफ़्ता मुजरिम है & जसजीत प्रधान के बेटे के अफ़रन के सिलसिले मे पोलीस को इसकी तलाश है..",वरुण ने मोना को देखा जिसके चेहरे पे भी घबराहट झलक रही थी.
"मोना,मैं यहा से निकल जाता हू."
"& पोलीस के हाथो मे पड़ गये तो!बस 1 ही रात की तो बात है वरुण फिर अपने उस साथी के पास चले जाना या फिर.."
"या फिर क्या?"
"मैं अजीत से बात करू?"
"क्या बतओगि उसे की कैसे जानती हो इस मुजरिम को..",वरुण फीकी हँसी हंसा,"..मोना,तुम्हारी ज़िंदगी खुशाल है.क्यू उसे बर्बाद करना चाहती हो!..मेरी ज़िंदगी जितनी बर्बाद होनी थी हो चुकी,अब इस से ज़्यादा कुच्छ और बुरा क्या हो सकता है.1 बार जैल जा चुका हू,दूसरी बार चला जाऊँगा लेकिन तुम अपने पति से कुच्छ नही कहोगी."
"ठीक है.",वरुण चाइ ख़त्म कर उपर च्छूपने चला गया & मेघना उसे च्छुपाने के बाद उदास अपने बिस्तर पे तब तक बैठी रही जब तक अजीत वापस नही आ गया.
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अरशद & दीप्ति चुदाई मे जुटे थे & कमरे के आड़े हुए दरवाज़े से उनकी मस्त आवाज़ें बाहर आ रही थी.इस वक़्त अनीश के कमरे के बाहर की ड्यूटी देव & बालू की थी.चार्ली दोनो प्रेमियो की नशीली आहें सुन गरम हो चुका था & उसका जिस्म भी किसी लड़की के साथ की ख्वाहिश मे तड़प रहा था.
उसने दरवाज़े की ओट से देखा,दीप्ति अपने घुटनो & हाथो पे बिस्तर पे थी & अरशद पीछे से उसकी चूत मे लंड घुसाए उसे चोद रहा था.उस गरम नज़ारे को देख कब उसका हाथ अपने पॅंट के अंदर घुस गया & उसके लंड से खेलने लगा उसे पता ही नही चला.
दोनो प्रेमियो की पीठ उसकी तरफ थी & वो अरशद की पुष्ट गंद को भिंचे हुए दीप्ति की चूत मे धक्के लगाते देखते हुए अपना लंड हिला रहा था,"क्या बे!बा हाथ से ही हिलाएगा या फिर इसका इस्तेमाल भी करेगा!"
"ह-हां..नही...!",चार्ली चौंक गया & लंड पॅंट मे डाल कमरे मे जाने लगा.बालू हंसता हुआ बाथरूम चला गया.
"क्यू बे कुच्छ सच्चा मज़ा चाहिए या बस..",बालू बाथरूम से बाहर आया & हाथो से लंड हिलाने का इशारा किया.
"यहा कैसे होगा.",चार्ली मायूसी से बोला.
"होगा..वो कौन थी रे पिच्छली बार तेरी शाब्बो..क्या नाम था?"
"गुलबो.",चार्ली खुशी से बोला.
"हां,फिर मिलेगा उस से."
"मगर कैसे उस्ताद?",चार्ली ने आवाज़ नीची कर ली,"उसमे ख़तरा होगा.हम यहा च्चिपे हैं.कही किसी को भनक लग गयी तो?"
"कुच्छ नही होगा."
"& अरशद?"
"अबे तू बस बेफ़िक्र रह & जब कहु चलने को तैय्यार रहियो.",बालू बेपरवाही से बोला & वाहा से चला गया.
"बिल्कुल सही जवाब है दोस्त..",प्रोफेसर दीक्षित ने अरशद से कहा,"..वैसे मेरा नाम दीक्षित है."
"हमारी माँग ध्यान से सुन लो & कल बताओ कि हमे ये कब दे रहे हो.",अरशद ने उसकी बात अनसुनी करते हुए अपनी माँग बताई & फोन काट दिया.इस बार फिर 8 सेकेंड के भीतर पोलीस ने कॉल ट्रेस कर ली.इस बार सिविल हॉस्पिटल के पीसीओ से फोन आया था & वाहा के पोलीस पोस्ट के इंचार्ज को फ़ौरन वाहा भेजा गया.वो दौड़ता हुआ वाहा पहुँचा मगर बूथ हॉस्पिटल के पिच्छले दरवाज़े पे बना था.इंचार्ज ने पिच्छले गेट के बाहर खड़े 1 हवलदार को उसके मोबाइल पे जल्दी बूथ तक पहुचने को कहा.इधर वो कॉन्स्टेबल गेट से दाखिल हुआ & उसी के बगल से अरशद 1 बाइक से वाहा से बाहर निकला.
अरशद ने बाइक वही खड़ी की जहा हमेशा से खड़ी होती थी,1 मकान के गॅरेज मे.उस हथियारो के दलाल ने ही उसे इस गॅरेज की चाभी दी थी & ये बिके मुहैय्या कराई थी.वाहा से वो पैदल पास के मार्केट की पार्किंग मे गया गाड़ी निकाली & बुंगले की ओर चल पड़ा.
"क्या?!",प्रोफेसर & अरशद की बातचीत कंट्रोल रूम मे सुन रहे अजीत ने जैसे ही ये बात डीसीपी वेर्मा को बताई उनके माथे पे शिकन पड़ गयी,चलो मेरे साथ."
"देखिए,कमिशनर साहब अपने बेटे को बचाने के लिए मैं कोई भी कीमत देने को तैय्यार हू मगर 1 करोड़ के हीरे..मैं कहा से लाऊँ ये सब.",जसजीत की आवाज़ मे बेबसी थी.
"प्रधान जी,मैं आपकी परेशानी समझता हू.देखिए,ये बहुत शातिर लोग हैं.उन्हे रकम छ्होटे-2 हीरे चाहिए जिनमे से किसी भी हीरे की कीमत र्स.10,000 से ज़्यादा ना हो.यानी की करीब 1000 हीरे उन्हे चाहिए.अब ये हीरे इतने छ्होटे होते हैं लगभग कमीज़ के बटन के जैसे या उस से भी छ्होटे.1बड़ी पोटली मे आसानी से 1000 हीरे आ जाएँगे.मैने आपकी बात CM साहब तक पहुँचा दी है & वो भी इस बात का हल ढूढ़ने मे लगे हुए हैं."
ये सारी बातें जसजीत की स्टडी मे हो रही थी की तभी दरवाज़े पे दस्तक हुई & 1 नौकर के हाथो चाइ-नाश्ते की ट्रॉली के साथ नीना वाहा दाखिल हुई.उसका पति तो पहले से ही बड़े भाई के साथ वाहा बैठा था.नीना ने सभी को चाइ सर्व करवाई & वाहा से चली गयी.5 मिनिट बाद भैया जी को भी ये खबर मालूम थी & 15 मिनिट बाद रघु कुम्भात को भी.
"भैया,हम दोनो अपने पैसे मिला लेते हैं & बाकी का उधार ले लेते हैं."
"नही,मुकुल."
"देखिए,प्रधान जी..",कमिशनर ने आगे कहा,"..प्रोफेसर उनके साथ बात तो करेगा ही.वो उनकी माँग को नीचे लाने की कोशिश करेगा मगर बात ये है कि अगर हम हीरे दे देते हैं तो वो पहले उन्हे परखेंगे & फिर बच्चे को हमे सौपेंगे.अगर हम इन्हे धोखा देने की कोशिश करते हैं तो फिर..",कमिशनर ने बात अधूरी छ्चोड़ दी.
"नही..कमिशनर साहब..मैं अपने बच्चे को अब और ख़तरे मे नही डाल सकता.",तभी जसजीत का मोबाइल बजा जिसे मुकुल ने उठा लिया.
"भैया,CM साहब का फोन है.",जसजीत ने मोबाइल लिया & कुच्छ देर बात करता रहा & फिर फोन कमिशनर को थमा दिया.
"CM साहब ने 1 उपाय सुझाया है.राज्य के गेम ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन से वो ये हीरे हमे दिलवा देंगे & हम इनकी कीमत बाद मे चुका सकते हैं.."
"..& अगर हम उन्हे दबोचने मे कामयाब हो गये तब तो कोई बात ही नही है.बच्चा भी हमारे पास होगा & हीरे भी.",कमिशनर ने फोन जसजीत को लौटा के उसकी बात पूरी की.जो कमिशनर ने नही बताया वो ये कि CM अत्रे ने उसे फोन रखने से पहले ये कहा था कि हीरे अगर वापस नही मिले तो बहुत अच्छा होगा.मतलब सॉफ था कि फिर उस कीमत को चुकाने मे जसजीत को काफ़ी समय लगेगा & फिर CM का रास्ता सॉफ था.
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"1 बात तो तय है..".प्रोफेसर दिव्या & नामित के साथ बैठा था,"..ये जितने भी लोगो का गॅंग है उनमे से कोई 1 या तो जौहरी है या फिर हीरो का जानकार."
"हूँ..मगर प्रोफेसर मुझे लगता है कि उन हीरो के ज़रिए उन्हे पकड़ना तो आसान हो जाएगा.हम हीरो को ट्रॅक कर उन तक पहुँच सकते हैं."
"नही दिव्या जी,वो छ्होटे साइज़ के हीरे आपको केवल छ्होटे जौहरियो से मिलते हैं.उनपे कोई सरकारी मार्क भी नही होगा चाहे आप उन्हे जहा से ले लें."
"पर हमे खरीदते वक़्त तो कार्ड मिलता है जिसमे उनके असली होने की सरकारी मोहर लगी रहती है."
'बिल्कुल सही,नामित जी मगर हीरे पे तो कोई मार्किंग नही होती.बहुत से बहुत आप हीरे को जौहरी से जाँचवा के उसके साथ के कार्ड मे लिखी बात की सच्चाई परख सकते हैं.बड़े हीरो पे तो मार्किंग होती भी है मगर इन छ्होटे-2 हीरो पे ऐसा कुच्छ नही होता."
"यानी उन्हे ट्रॅक करना मुश्किल है?"
"बहुत.",प्रोफेसर सोचे जा रहा था.ये लोग बहुत चालाक थे & इसका मतलब था कि उतने ही ख़तरनाक भी होंगे.उसे पहली बार अपनी ज़िम्मेदार का बोझ महसूस हुआ & उसके दिल मे 1 बार फिर वही डर आया कि अगर बच्चे को कुच्छ हो गया तो वो क्या दोबारा उस सदमे को झेल पाएगा.दीपाली की मौत वाले हादसे मे उसे अपनी महबूबा को खोने का दर्द तो था ही मगर साथ मे नाकाम होने की टीस भी थी.अब फिर से वही टीस क्या उसे तोड़ नही देगी?..उसने ठंडी सांस भरी..जो होगा देखा जाएगा..अभी तो बस ये काम ठीक से हो जाए.
सवेरे के 4 बजे मेघना की नींद खुली तो उसने देखा की वरुण फर्श पे लगे बिस्तर पे नही है.वो झटके से उठी तो देखा वो तैय्यार हो के बाथरूम से निकल रहा है,"अब मैं चलूँगा."
"हूँ..ड्रॉयिंग रूम मे बैठो,मैं चाइ बनाती हू.",वो रसोई मे चली गयी.
खामोशी से दोनो चाइ पीते हुए टीवी देख रहे थे.मेघना को समझ नही आ रहा था कि उसका दिल बैठा क्यू जा रहा था.वरुण से अब कोई रिश्ता वो रखने की सोच भी नही सकती थी.उसने उसकी जो भी मदद की वो इसलिए क्यूकी वो उन दोनो के बीच के उस खूबसूरत रिश्ते को भूली नही थी जो बदक़िस्मती से टूट गया था..& वरुण ने भी इन तीन दिनो मे कोई ऐसी हरकत या बात नही की जिस से लगे की वो अभी भी उसे प्यार करता था.
"मोना..",वरुण खड़ा था,"..अब जाता हू.तुमने जो किया वो तो शायद ही कोई करता.इतना बड़ा ख़तरा मोल लिया तुमने मेरे लिए."
"प्लीज़ वरुण..",आगे अगर बोलती तो शायद उसकी रुलाई छूट जाती.
"ओके,मोना.बाइ!"
"1 मिनिट,वरुण.",मेघना भागती हुई ड्रॉयिंग रूम से बाहर गयी & जब वापस आई तो उसके हाथो मे कुच्छ पैसे थे.
"मोना,प्लीज़..मैं ये नही ले सकता.",मोना ने चुपचाप सारे पैसे उसकी कमीज़ की जेब मे डाल दिए.
"वरुण,बस 1 बात याद रखना कि चाहे जिसकी मदद लो,जो भी करो..तुम 1 अच्छे इंसान हो & कोई पेशेवर मुजरिम नही.",वरुण ने उसका हाथ पकड़ा & उसकी आँखो मे देखा.मेगना की आँखो की नमी उसे अपनी निगाहो मे भी महसूस हुई.
"बाइ!",उसने उसका हाथ दबाया & वाहा से निकल गया.अब उसकी मंज़िल थी मूसा का अड्डा जहा उसे उम्मीद थी कि उसे अपनी मुश्किल से च्छुतकारा मिल ही जाएगा.
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दिव्या की आँख खुली तो 1 पल को उसे समझ नही आया कि वो कहा है फिर जब नींद पूरी तरह खुली तो उसे याद आया कि वो प्रोफेसर दीक्षित के साथ उसी के कमरे मे है.कल दिन मे घर की बिजली अचानक चली गयी थी & उसे ठीक करने के बहाने मे 2 लोग आए & प्रोफेसर के कमरे के बग्स फिर से चालू कर गये थे.इस बार उन्होने उसके बिस्तर के हेअडबोर्ड के पीछे 1 बग फिट किया था & दूसरा फिर से गुलदस्ते मे.
प्रोफेसर ने गुलदस्ते मे ताज़े फूल लगा के पानी भर दिया & उस बग को बेकार कर दिया.पलंग के सिरहाने वाले बग के तार को लटका देना तो और भी आसान काम था.उसके बाद फिर से कमेरे पे 1 कपड़ा डाल अंधेरे कमरे मे उसने दिव्या को जम के चोदा था.
रात की हर्कतो ने दिव्या को काफ़ी थका दिया था & इसलिए उसे काफ़ी गहरी नींद आई थी.वो उठी & अपने कपड़े पहनने लगी कि तभी फोन घनघना उठा..इतनी सुबह किडनॅपर्स का फोन!
उसने झट से कपड़े पहन कमरे के दरवाज़ा खोला.तब तक प्रोफेसर ने फोन उठा लिया था,"दीक्षित बोल रहा हू,दोस्त."
"हमारी माँगो का क्या हुआ?"
"क्या दोस्त..इतनी बड़ी माँग है & फिर हमे बच्चे की सलामती का कोई असबूत नही दिया.",अरशद मन ही मन मुस्कुराया..बड़ा होशियार आदमी था इसलिए तो उसने अपने मोबाइल मे अनीश की बात रेकॉर्ड की थी.उसने उसे ऑन किया.
"..मैं ठीक हू,मम्मी-पापा.ना बीमार हू ना कोई चोट लगी है.बिल्कुल अच्छा हू.",कॉल ट्रेस हो गयी थी.
"लाजपत कुंज..ए ब्लॉक..के पास के बूथ से कॉल की जा रही है.",कंट्रोल रूम मे बैठे टेक्नीशियन ने लोकेशन बताई,"..हां..पार्क के पास.",ये जानकारी फ़ौरन वाहा के सबसे नज़दीकी पेट्रोल कार को दी गयी.
"हमारी माँग मानी की नही?"
"यार कुच्छ तो कम करो.बहुत ज़्यादा रकम है."
"मैं कल फिर फोन करूँगा.अगर हां नही बोला तो फोन के 6 घंटे बाद अनीश का कुच्छ समान तुमलोगो को मिल जाएगा.",ट्रॅक सूट पहने अरशद ने फोन काटा & बूथ से निकल जॉगिंग करता पार्क मे दाखिल हो गया.उसके निकलने के 5 सेकेंड बाद ही पेट्रोल कार वाहा पहुँची & पोलिसेवाले इलाक़े को छानने लगे.तब तक अरशद पार्क के दूसरे छ्होर के गेट से निकल अपनी बाइक पे सवार वाहा से निकल चुका था.
प्रोफेसर का बदन ठंडे पसीने से नहा गया था,वो जानता था अनीश के समान का क्या मतलब था..उस मासूम के जिस्म का कोई हिस्सा या फिर..उसने सर झटका & नामित की ओर देखा,"अपने बॉस को कहिए कि हीरो का जल्द इंतेज़ाम करें & अगर नही हैं तो मुझसे मिलें मैं कुच्छ ना कुच्छ करवाउन्गा!",प्रोफेसर की आवाज़ की चिंता ने दिव्या & नामित दोनो को परेशान कर दिया था.शायद पहली बार उन्हे एहसास हुआ था कि मामला कितना संगीन है.
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"क्या वो कार तमिल नाडु से चोरी हुई थी?",जाली सुव को देख के जो 2 चॅसी नंबर. का सुराग मिला था,उनमे से 1 सही था & उसका पता चल गया था,"..ओके..ठीक है.",अजीत ने इंटरकम रखा & सामने बैठे इनस्पेक्टर से मुखातिब हुआ,"..साउत इंडिया से चोरी गाड़िया यहा बहुत खपाई जाती हैं.ये उस सुव का असली नंबर है.इसे लेके शहर के सभी चोरी की गाडियो के दलालो की खबर लो & राज्य के बाकी शहरो मे भी ये नंबर फ्लश करवा दो."
"सर."
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"दिव्या जी?"
"जी बोल रही हू.",दिव्या ने अपने मोबाइल पे अंजान नंबर देख के फोन रिसीव किया.
"मैं फ़राज़ बोल रहा हू पंचमहल से."
"ओह..हेलो फ़राज़ जी!कैसे हैं आप?"
"बढ़िया हू दिव्या जी आपके काम की 1 बात पता चली है."
"अच्छा.क्या?"
"जिस केस के सिलसिले मे आप हमारे शहर आई थी उसी का 1 बहुत बड़ा सुराग मिला है."
"अच्छा."
"हां,1 लुटेरे का नाम पता चल गया है हमे."
"क्या?कैसे?",दिव्या की हैरत & खुशी का ठिकाना नही था.
"अभी कुच्छ दिन पहले रुटीन ट्रॅफिक चेकिंग मे 1 आदमी हमारे हाथ लगा जिसकी बाइक की डिकी मे नक़ली शराब भरी थी.हिरासत मे लेने के बाद उस से हमे 500 के 40 नोट्स मिले.हमारे 1 इनस्पेक्टर ने पहले उन नोट्स की जाँच 1 बॅंक मे करवाई कि कही ये नक़ली तो नही.नोट्स तो बिल्कुल असली थे मगर जब हम उन्हे मालखाने मे रखने लगे तो मुझे आपके यहा की लूट की याद आई.आपके डिपार्टमेंट ने हमे उस लूट की सभी डीटेल्स भेजी ही थी तो मैने यू ही नोट्स के नंबर्स मॅच किए & सारे नंबर्स मिल गये."
"ग्र8 वर्क,फ़राज़ जी."
"थॅंक्स.मैने फिर उस आदमी से कड़े तरीके से पूछ ताछ की तो पता चला की उसका 1 रेग्युलर ग्राहक था जिसे वो हर तरह की शराब मुहैय्या कराता था & ये नोट्स उसी ने एकमुश्त पेमेंट की तौर पे दिए थे & उसी ने बताया कि उसका नाम बालू है & जुर्म उसका पेशा है.उसे ये तो नही मालूम था कि डेवाले की लूट उसने की थी मगर उसका कहना था कि देव नाम के 1 शख्स के साथ उसकी बहुत छनती थी & आजकल दोनो ही हमारे शहर मे नज़र नही आ रहे.साथ ही ये भी पता चला है कि बालू को जुए की लत है & जिस रोज़ हम रेलवे यार्ड मे उस शख्स को नही पकड़ पाए थे उसी रोज़ उसने अपना बहुत बड़ा जुए का कर्ज़ा चुकाया था & उस रोज़ उसके साथ देव & 1 और कोई शख्स था..कौन ये हमे पता नही..मैने आपके दिए हुए स्केचस उसे दिखाए तो उसने बालू को तो पहचान लिया मगर दूसरे को वो नही पहचान पाया."
"फ़राज़ जी,आपने तो हमारे लिए बहुत बड़ा काम कर दिया."
"अब शर्मिंदा मत कीजिए,दिव्या जी.मैने आपको ई-मैल भेजी है उसे देख लीजिएगा.ओके,बाइ!"
"बाइ!"
बुंगले के कंप्यूटर पे दिव्या ने ई-मैल चेक की तो उसे पता चल गया कि जिस शख्स ने लूट की वॅन के टाइयर्स बदलवाए थे वो बालू ही था.दिव्या ने फ़ौरन ये जानकारी डिपार्टमेंट को दी & क्रिमिनल डेटबेस मे बालू को ढूँढा तो कुच्छ ही देर मे बालू की पूरी कहानी उसके आँखो के सामने थी.उसने सभी को ताक़ीद की कि बालू की फोटो हर थाने मे लगा दी जाए & 1 उसे पकड़ने का नोटीस जारी कर दिया जाए.
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"देख,अरशद & दीप्ति जब ड्यूटी पे होंगे & देव आराम कर रहा होगा तब हम नसीबपुरा चलेंगे..",आनेवाले ख़तरे से बेख़बर बालू चार्ली को अपना अयाशि का प्लान समझा रहा था,"..अपने-2 कमरे लॉक कर हम यहा से निकलेंगे & ट्रेन से 20 मिनिट मे वाहा पहुँच जाएँगे.",वो डेवाले की लोकल ट्रेन्स की बात कर रहा था,"..2 घंटे मे अपना काम निपटा के फिर करीब 30 मिनिट मे वापस यहा आ जाएँगे.तो 3 घंटे मे अपना काम हो जाएगा & ये बात अरशद को पता भी नही चलेगी."
"लेकिन उस्ताद अगर बाहर किसी ने देख लिया तो?",चार्ली चिंतित तो था मगर चुदाई का लालच उसे लुभा रहा था,"..अरशद बता रहा था कि वो आदमी कह रहा था कि नसीबपुरा की रेड मे वो बाल-2 बचा था फिर स्केचस भी तो जारी हैं."
"अबे यार तू बहुत डरता है!",बालू बेपरवाही से बोला,"..अब मुझे देख,कितने बरस हो गये.स्केच क्या अपनी तो फोटो है पोलिसेवालो के पास तो क्या करू?..साला जीना छ्चोड़ दू!..अबे यार,1 तो पता नही कि कब साली ज़िंदगी का खेल ख़त्म हो जाए उपर से जब तक ज़िंदा रहें,ऐसे डर-2 के मरते रहें.देख,तुझे नही जाना तो मत जा,मैं तो जाउन्गा..साला बहुत दिन हो गये किसी औरत की चूत मारे हुए!",वो उठ खड़ा हुआ,अब उसकी ओर देव की बारी थी.चार्ली भी उठा,उसकी ज़िम्मेदारी खाना बनाने की & घर की देख-रेख की थी,फिर वो दोनो जोडियो को आराम देने के लिए अकेला 2 घंटे बैठता था.
"उस्ताद..",कमरे से निकलता बालू मुड़ा,"..मैं चलूँगा आपके साथ.",जिस्म की भूख ने उसकी समझ पे परदा डाल दिया था.
"ये हुई ना बात!चल आराम कर.बताउन्गा तुझे कि कब जाना है.",बालू कमरे से बाहर निकल गया.
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कामुक कहानियाँ
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क्रमशः........
KHEL KHILADI KA paart--55
gataank se aage............-
"Commissioner sahab,Jasjit ji ke bete ke case ki kya khabar hai?",CM Atre bas abhi-2 jasjit se milne ke baad apne daftar aaye the.
"sir,puri force isi kaam me juti hai."
"kyu?kya baki jurm hone band ho gaye hain?",atre ne 1 file utha ke paini nigah se commissioner ko dekha,"dekhiye,ye case bahut zaruri hai main manta hu magar iske chalte baki kaam nahi rukna chahiye."
"sir,hum puri mustaidi se apni zimmedariyaan nibha rahe hain."
"hun..vaise kya lagta hai kab tak suljhega ye mamla?"
"sir,aapko to pata hi hai aaj pehli baar kidnappers ne contact kiya hai.abhi tak to unki maange bhi nahi pata chali hain.kuchh pakka nahi kaha ja sakta.agar kismat achhi rahi to chand dino me suljah jayega mamla nahi to hafte bhi lag sakte hain."
"hun..",unhone file pe nazren gada di,"..hafte hi lage to thik hain.ab aap ja sakte hain."
"sir.",commissioner ne CM ki kahi aakhiri baat ka matlab samajh liya tha.vo janta tha ki atre 1 neta pehle hai & CM ki kursi use kitni pyari hai.pradhan ko kamzor karne ka koi mauka vo bhala kyu chhodega magar is sab me vo bachcha mohra ban ke reh gaya tha....lekin vo kar bhi kya sakta tha?..lekin vo is shehar ka commissioner tha..chahe kuch bhi ho jaye,vo kewal bachche ko bachane ko tavajjoh dega,atre & baki neta intezar kar sakte the.
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"kya pata chala,doc?",Ajit ne forensic lab ke chief se puchha.
"1 bahut zaruri baat."
"bataiye."
"ye SUV chori ki hai."
"achha!"
"haan,iske engine pe iska chassis number khurach ke use badalne ki koshish ki gayi hai magar fir bhi humne andaz laga liya hai ki number kya ho sakta hai..ye dekhiye.",usne 1 kagaz ajit ko diya.
"GH10045287L ya GF10095287I..thanx,doc.dekhte hain aapki nikali ye jankari kya rang lati hai."
"welcome,officer."
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"vo launda to bekar hai ye main janta hu.",Ballu Raghu & rano ke sath baitha tha,"..akela pura chehra duniya ko dikhate hue bachche ko agwa karne aa gaya,gadha kahinka!..lekin vo gang jisne us se bachche ko chheena vo peshewar hai,Baba."
"haan,balle..abhi-2 mujhe Baldev ne bataya hai ki police ko vo gadi mil gayi hai jisme ladka bhaga tha & vo gadi bhi jisme vo sochte hain ki bachcha agwa hua tha."
"kya?!"
"haan,beta magar vo gang ki gadi bilkul jali hui hai."
"dhat tere ki!",ballu jhallaya,"baba,maine sare shehar me sabhi gangs ke yaha pata karwa liya hai.ye apne shehar kya apne rajya ke kisi gang ka kaam nahi hai.sab sale soch rahe hain ki itna bada kand karne vala ye raatoraat naya gang paida kaise ho gaya!"
"paida jab bhi hua ho,ballu..",rano ki aavaz khun jamane wali thi,"..unhe maut ki nind hum hi sulayenge."
Agli raat Ajit fir ghar nahi aa paya tha & Varun & Meghna ne 1 aur raat 1 hi kamre me bitayi.is raat dono ki kashmakash aur zyada thi.dono ke dil beeti baato ko yaad kar unke jismo ki bechaini badhaye ja rahe the.
puri raat dono ne aankho-2 me kaat di.savere fir pichhle din ki hi tarah varun ke liye mona ne chai banayi jise peete hue vo tv dekh raha tha.vo car jisme kidnappers Anish ko chheen ke le gaye the,uski baramdgi ki khabar se use unke pakde jane ki kuchh umeed jagi magar tabhi tv pe agli khabar sunte hi uske hosh ud gaye.
"Varun Awasthi naam ka ye shakhs sazayafta mujrim hai & Jasjit Pradhan ke bete ke apharan ke silsile me police ko iski talash hai..",avrun ne Mona ko dekha jiske chehre pe bhi ghabrahat jhalak rahi thi.
"mona,main yaha se nikal jata hu."
"& police ke hatho me pad hata hu!bas 1 hi raat ki to baat hai varun fir apne us sathi ke paas chale jana ya fir.."
"ya fir kya?"
"main ajit se baat karu?"
"kya bataogi use ki kaise janti ho is mujrim ko..",varun fiki hansi hansa,"..mona,tumhari zindagi khushaal hai.kyu use barbad karna chahti ho!..meri zindagi jitni barbad honi thi ho chuki,ab is se zyada kuchh aur bura kya ho sakta hai.1 baar jail ja chuka hu,dusri baar chala jaoonga lekin tum apne pati se kuchh nahi kahogi."
"thik hai.",varun chai khatm kar upar chhupne chala gaya & meghna use chhupane ke baad udas apne bistar pe tab tak baithi rahi jab tak ajit vapas nahi aa gaya.
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Arshad & Dipti chudai me jute the & kamre ke ade hue darwaze se unki mast aavazen bahar aa rahi thi.is waqt anish ke kamre ke bahar ki duty Deva & Balu ki thi.Charlie dono premiyo ki nashili aahen sun garam ho chuka tha & uska jism bhi kisi ladki ke sath ki khwahish me tadap raha tha.
usne darwaze ki ot se dekha,dipti apne ghutno & hatho pe bistar pe thi & arshad peechhe se uski chut me lund ghusaaye use chod raha tha.us garam nazare ko dekh kab usk hath apne pant ke andar ghus gaya & uske lund se khelne laga use pata hi nahi chala.
dono premiyo ki pith uski taraf thi & vo arshad ki pusht gand ko bhinche hue dipti ki chut me dhakke lagate dekhte hue apna lund hila raha tha,"kya be!ba hath se hi hilayega ya fir iska istemal bhi karega!"
"h-haan..nahi...!",charlie chaunk gaya & lund pant me daal kamre me jane laga.balu hansta hua bathroom chala gaya.
"kyu be kuchh sachcha maza chahiye ya bas..",balu bathroom se bahar aaya & hatho se lund hilane ka ishara kiya.
"yaha kaise hoga.",charlie mayusi se bola.
"hoga..vo kaun thi re pichhli baar teri Shabbo..kya naam tha?"
"Gulabo.",charlie khushi se bola.
"haan,fir milega us se."
"magar kaise ustad?",charlie ne aavaz neechi kar li,"usme khatra hoga.hum yaha chhipe hain.kahi kisi ko bhanak lag gayi to?"
"kuchh nahi hoga."
"& arshad?"
"abe tu bas befikr rah & jab kahu chalne ko taiyyar rahiyo.",balu beparwahi se bola & vaha se chala gaya.
"Bilkul sahi jawab hai dost..",Professor Dixit ne Arshad se kaha,"..vaise mera naam Dixit hai."
"humari mang dhyan se sun lo & kal batao ki hume ye kab de rahe ho.",arshad ne uski baat ansuni karte hue apni mang batayi & fone kaat diya.is baar fir 8 second ke bhitar police ne call trace kar li.is baar Civil Hospital ke PCO se fone aaya tha & vaha ke police post ke incharge ko fauran vaha bheja gaya.vo daudta hua vaha pahuncha magar booth hospital ke pichhle darwaze pe bana tha.incharge ne pichhle gate ke bahar khade 1 hawaldar ko uske mobile pe jaldi booth tak pahuchane ko kaha.idhar vo constable gate se dakhil hua & usi ke bagal se arshad 1 bike se vaha se bahar nikla.
arshad ne bike vahi khadi ki jaha humesha se khadi hoti thi,1 makan ke garage me.us hathyaro ke dalal ne hi use is garage ki chabhi di thi & ye bike muhaiyya karayi thi.vaha se vo paidal paas ke market ki parking me gaya gadi nikali & bungle ki or chal pada.
"kya?!",professor & arshad ki baatchit control room me sun rahe Ajit ne jaise hi ye baat DCP Verma ko bataye unke mathe pe shikan pad gayi,chalo mere sath."
"dekhiye,Commissioner sahab apne bete ko bachane ke liye main koi bhi keemat dene ko taiyyar hu magar 1 crore ke heere..main kaha se laoon ye sab.",Jasjit ki aavaz me bebasi thi.
"Pradhan ji,main aapki pareshani samajhta hu.dekhiye,ye bahut shatir log hain.unhe rakam chhote-2 heere chahiye jinme se kisi bhi heere ki keemat Rs.10,000 se zyada na ho.yani ki karib 1000 heere unhe chahiye.ab ye heere itne chhote hote hain lagbhag kamiz ke button ke jaise ya us se bhi chhote.1badi potli me aasani se 1000 heere aa jayenge.maine aapki baat CM sahab tak phuncha di hai & vo bhi is baat ka hal dhondane me lage hue hain."
ye sari baaten jasjit ki study me ho rahi thi ki tabhi darwaze pe dastak hui & 1 naukar ke hatho chai-nashte ki trolley ke sath Nina vaha dakhil hui.uska pati to pehle se hi bade bhai ke sath vaha baitha tha.nina ne sabhi ko chai serve karwai & vaha se chali gayi.5 minute baad Bhaiya ji ko bhi ye khabar malum thi & 15 minute baad Raghu Kumbhat ko bhi.
"bhaiya,hum dono apne paise mila lete hain & baki ka udhar le lete hain."
"nahi,Mukul."
"dekhiye,pradhan ji..",commissioner ne aage kaha,"..professor unke sath baat to karega hi.vo unki mang ko neeche lane ki koshish karega magar baat ye hai ki agar hum heere de dete hain to vo pehle unhe parkhenge & fir bachche ko hume saupenge.agar hum inhe dhokha dene ki koshish karte hain to fir..",commissioner ne baat adhuri chhod di.
"nahi..commissioner sahab..main apne bachche ko ab aur khatre me nahi daal sakta.",tabhi jasjit ka mobile baja jise mukul ne utha liya.
"bhaiya,CM sahab ka fone hai.",jasjit ne mobile liya & kuchh der baat karta raha & fir fone commissioner ko thama diya.
"CM sahab ne 1 upai sujhaya hai.rajya ke Gem Trading Corporation se vo ye heere hume dilwa denge & hum inki keemat baad me chuka sakte hain.."
"..& agar hum unhe dabochne me kamyab ho gaye tab to koi baat hi nahi hai.bachcha bhi humare paas hoga & heere bhi.",commissioner ne fone jasjit ko lauta ke uski baat puri ki.jo commissioner ne nahi bataya vo ye ki CM Atre ne use fone rakhne se pehle ye kaha tha ki heere agar vapas nahi mile to bahut achha hoga.matlab saaf tha ki fir us keemat ko chukane me jasjit ko kafi samay lagega & fir CM ka rasta saaf tha.
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"1 baat to tay hai..".professor Divya & Namit ke sath baitha tha,"..ye jitne bhi logo ka gang hai unme se koi 1 ya to jauhri hai ya fir heero ka jankar."
"hun..magar professor mujhe lagta hai ki un heero ke zariye unhe pakadna to aasan ho jayega.hum heero ko track kar un tak pahunch sakte hain."
"nahi divya ji,vo chhote size ke heere aapko keval chhote jauhriyo se milte hain.unpe koi sarkari mark bhi nahi hoga chahe aap unhe jaha se le len."
"par hume kharidte waqt to card milta hai jisme unke asli hone ki sarkari mohar lagi rehti hai."
'bilkul sahi,namit ji magar heere pe to koi marking nahi hoti.bahut se bahut aap heere ko jauhri se janchwa ke uske sath ke card me likhi baat ki sachchai parakh sakte hain.bade heero pe to marking hoti bhi hai magar in chhote-2 heero pe aisa kuchh nahi hota."
"yani unhe track karna mushkil hai?"
"bahut.",professor soche ja raha tha.ye log bahut chalak the & iska matlab tha ki utne hi khatarnak bhi honge.use pehli baar apni zimmedar ka bojh mehsus hua & uske dil me 1 baar fir vahi darr aaya ki agar bachche ko kuchh ho gaya to vo kya dobara us sadme ko jhel payega.Deepali ki maut vale hadse me use apni mehbooba ko khone ka dard to tha hi magar sath me nakam hone ki tees bhi thi.ab fir se vahi tees kya use tod nahi degi?..usne thandi sans bhari..jo hoga dekha jayega..abhi to bas ye kaam thik se ho jaye.
Savere ke 4 baje Meghna ki nind khuli to usne dekha ki Varun farsh pe lage bistar pe nahi hai.vo jhatke se uthi to dekha vo taiyyar ho ke bathroom se nikal raha hai,"ab main chalunga."
"hun..drawing room me baitho,main chai banati hu.",vo rasoi me chali gayi.
khamoshi se dono chai peete hue tv dekh rahe the.meghna ko samajh nahi aa raha tha ki uska dil baitha kyu ja raha tha.varun se ab koi rishta vo rakhne ki soch bhi nahi sakti thi.usne uski jo bhi madad ki vo isliye kyuki vo un dono ke beech ke us khubsurat rishte ko bhuli nahi thi jo badkismati se tut gaya tha..& varun ne bhi in teen dino me koi aisi harkat ya baat nahi ki jis se lage ki vo abhi bhi use pyar karta tha.
"Mona..",varun khada tha,"..ab jata hu.tumne jo kiya vo to shayad hi koi karta.itna bada khatra mol liya tumne mere liye."
"please varun..",aage agar bolti to shayad uski rulayi chhut jati.
"ok,mona.bye!"
"1 minute,varun.",meghna bhagti hui drawing room se bahar gayi & jab vapas aayi to uske hatho me kuchh paise the.
"mona,please..main ye nahi le sakta.",mona ne chupchap sare paise uski kamiz ki jeb me daal diye.
"varun,bas 1 baat yaad rakhna ki chahe jiski madad lo,jo bhi karo..tum 1 achhe insan ho & koi peshevar mujrim nahi.",varun ne uska hath pakda & uski aankho me dekha.megna ki aankho ki nami use apni nigaho me bhi mehsus hui.
"bye!",usne uska hath dabaya & vaha se nikal gaya.ab uski manzil thi Musa ka adda jaha use umeed thi ki use apni mushkil se chhutkara mil hi jayega.
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Divya ki aankh khuli to 1 pal ko use samajh nahi aaya ki vo kaha hai fir jab nind puri tarah khuli to use yaad aaya ki vo Professor Dixit ke sath usi ke kamre me hai.kal din me ghar ki bijli achanak chali gayi thi & use thik karne ke bahane me 2 log aaye & professor ke kamre ke bugs fir se chalu kar gaye the.is baar ynhone uske bistar ke headbord ke peechhe 1 bug fit kiya tha & dusra fir se guldaste me.
professor ne guldaste me taze phool laga ke pani bhar diya & us bug ko bekar kar diya.palang ke sirhane vale bug ke taar ko latka dena to aur bhi aasan kaam tha.uske baad fir se camere pe 1 kapda daal andhere kamre me usne divya ko jum ke choda tha.
raat ki harkato ne divya ko kafi thaka diya tha & isliye use kafi gehri nind aayi thi.vo uthi & apne kapde pehanane lagi ki tabhi fone ghanghana utha..itni subah kidnappers ka phone!
usne jhat se kapde pehan kamre ke darwaza khola.tab tak professor ne fone utha liya tha,"Dixit bol raha hu,dost."
"humari maango ka kya hua?"
"kya dost..itni badi mang hai & fir hume bachche ki salamati ka koi asboot nahi diya.",Arshad man hi man muskuraya..bada hoshiyar aadmi tha isliye to usne apne mobile me Anish ki baat record ki thi.usne use on kiya.
"..main thik hu,mummy-papa.na bimar hu na koi chot lagi hai.bilkul achha hu.",call trace ho gayi thi.
"Lajpat Kunj..A block..ke paas ke booth se call ki ja rahi hai.",control room me baithe technician ne location batayi,"..haan..park ke paas.",ye jankari fauran vaha ke sabse nazdiki patrol car ko di gayi.
"humari mang mani ki nahi?"
"yaar kuchh to kam karo.bahut zyada rakam hai."
"main kal fir fone karunga.agar haan nahi bola to fone ke 6 ghante baad Anish ka kuchh saman tumlogo ko mil jayega.",track suit pehne arshad ne fone kata & booth se nikal jogging karta park me dakhil ho gaya.uske nikalne ke 5 second baad hi patrol car vaha pahunchi & policevale ilake ko chhanane lage.tab tak arshad park ke dusre chhor ke gate se nikal apni bike pe savar vaha se nikal chuka tha.
professor ka badan thande pasine se naha gaya tha,vo janta tha anish ke saman ka kya matlab tha..us masoom ke jism ka koi hissa ya fir..usne sar jhatka & Namit ki or dekha,"apne boss ko kahiye ki heero ka jald intezam karen & agar nahi hain to mujhse milen main kuchh na kuchh karwaunga!",professor ki aavaz ki chinta ne divya & namit dono ko pareshan kar diya tha.shayad pehli baar unhe ehsas hua tha ki mamla kitna sangin hai.
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"kya vo car Tamil Nadu se chori hui thi?",jali SUV ko dekh ke jo 2 chassis nos. ka surag mila tha,unme se 1 sahi tha & uska pata chal gaya tha,"..ok..thik hai.",ajit ne intercom rakha & asmne baithe inspector se mukhatib hua,"..south India se chori gaadiya yaha bahut khapayi jati hain.ye us SUV ka asli number hai.ise leke shehar ke sabhi chori ki gadiyo ke dalalo ki khabar lo & rajya ke baki shehro me bhi ye number flash karwa do."
"sir."
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"divya ji?"
"ji bol rahi hu.",divya ne apne mobile pe anjan number dekh ke fone receive kiya.
"main Faraz bol raha hu Panchmahal se."
"oh..hello faraz ji!kaise hain aap?"
"badhiya hu divya ji aapke kaam ki 1 baat pata chali hai."
"achha.kya?"
"jis case ke silsile me aap humare shehar aayi thi usi ka 1 bahut bada surag mila hai."
"achha."
"haan,1 lutere ka naam pata chal gaya hai hume."
"kya?kaise?",divya ki hairat & khushi ka thikana nahi tha.
"abhi kuchh din pehle routine traffic checking me 1 aadmi humare hath laga jiski bike ki dickiy me naqli sharab bhari thi.hirasat me lene ke baad us se hume 500 ke 40 notes mile.humare 1 inspector ne pehle un notes ki janch 1 bank me karwai ki kahi ye naqli to nahi.notes to bilkul asli the magar jab hum unhe malkhane me rakhne lage to mujhe aapke yaha ki loot ki yaad aayi.aapke department ne hume us loot ki sabhi details bheji hi thi to maine yu hi notes ke numbers match kiye & sare numbers mil gaye."
"gr8 work,faraz ji."
"thanx.maine fir us aadmi se kade tarike se puchhtachh ki to pata chala ki uska 1 regular grahak tha jise vo har tarah ki sharab muhaiyya karata tha & ye notes usi ne ekmusht payment ki taur pe diye the & usi ne bataya ki uska naam Balu hai & jurm uska pesha hai.use ye to nahi malum tha ki Devalay ki loot usne ki thi magar uska kehna tha ki Deva naam ke 1 shakhs ke sath uski bahut chhanti thi & aajkal dono hi humare shehar me nazar nahi aa rahe.sath hi ye bhi pata chala hai ki balu ko jue ki lat hai & jis roz hum railway yard me us shakhs ko nahi pakad paye the usi roz usne apna bahut bada jue ka karza chukaya tha & us roz uske sath deva & 1 aur koi shakhs tha..kaun ye hume pata nahi..maine aapke diye hue sketches use dikhaye to usne balu ko to pehchan liya magar dusre ko vo nahi pehchan paya."
"faraz ji,aapne to humare liye bahut bada kaam kar diya."
"ab sharminda mat kijiye,divya ji.maine aapko e-mail bheji hai use dekh lijiyega.ok,bye!"
"bye!"
bungle ke computer pe divya ne e-mail check ki to use pata chal gaya ki jis shakhs ne loot ki van ke tyres badalwaye the vo balu hi tha.divya ne fauran ye jankar department ko di & criminal database me balu ko dhoonda to kuchh hi der me balu ki puri kahani uske aankho ke samne thi.usne sabhi ko taqeed ki ki balu ki foto har thane me laga di jaye & 1 use pakadne ka notice jari kar diya jaye.
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"dekh,arshad & dipti jab duty pe honge & deva aaram kar raha hoga tab hum Nasibpura chalenge..",aanevale khatre se bekhabar balu Charlie ko apna ayasshi ka plan samjha raha tha,"..apne-2 kamre lock kar hum yaha se niklenge & train se 20 minute me vaha pahunch jayenge.",vo devalay ki local trains ki baat kar raha tha,"..2 ghante me apna kaam nipta ke fir karib 30 minute me vapas yaha aa jayenge.to 3 ghante me apna kaam ho jayega & ye baat arshad ko pata bhi nahi chalegi."
"lekin ustad agar bahar kisi ne dekh liya to?",charlie chintit to tha magar chudai ka lalach use lubha raha tha,"..arshad bata raha tha ki vo aadmi keh raha tha ki nasibpura ki raid me vo baal-2 bacha tha fir sketches bhi to jari hain."
"abe yaar tu bahut darta hai!",balu beparwahi se bola,"..ab mujhe dekh,kitne baras ho gaye.sketch kya apni to foto hai policevalo ke paas to kya karu?..sala jeena chhod du!..abe yaar,1 to pata nahi ki kab sali zindagi ka khel khatm ho jaye upar se jab tak zinda rahen,aise darr-2 ke marte rahen.dekh,tujhe nahi jana to mat ja,main to jaunga..sala bahut din ho gaye kisi aurat ki chut mare hue!",vo uth khada hua,ab uski or deva ki bari thi.charlie bhi utha,uski zimmedari khana banane ki & ghar ki dekh-rekh ki thi,fir vo dono jodiyo ko aaram dene ke liye akela 2 ghante baithata tha.
"ustad..",kamre se nikalta balu muda,"..main chalunga aapke sath.",jism ki bhukh ne uski samajh pe parda daal diya tha.
"ye hui na baat!chal aaram kar.bataunga tujhe ki kab jana hai.",balu kamre se bahar nikal gaya.
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kaamuk kahaaniyaan
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kramashah........