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खेल खिलाड़ी का पार्ट--17
गतान्क से आगे..............
"..मैं चाहता हू तुम उसके थोड़ा करीब जाओ.ये ठीक है कि तुम उसके पति के खिलाफ चुनाव लड़ रही हो मगर कोई ज़ाति दुश्मनी थोड़े ही है!",भाय्या जी उसकी चूचियो को अपने हाथो मे आटे की तरह गूँध रहे थे & वो अपनी गर्दन बाई तरफ घुमा उनके चेहरे पे चूम रही थी.
"इस से क्या फ़ायदा होगा?"उसने अपने बाए कंधे से उनकी छाती पे हल्के से धक्का दिया तो उसका इशारा समझते हुए भाय्या जी पलंग पे लेट गये & उनके उपर राम्या भी लेट गयी फिर उसने अपने हाथो को बिस्तर पे जमाया & अपनी कमर उच्छाल-2 कर चुदाई शुरू कर दी.भाय्या जी के हाथ उसके पूरे जिस्म पे फिर रहे थे.
"वो तुम्हे बाद मे पता चलेगा.अभी तो तुम बस यही करना.",उन्होने उसे बाँहो मे बाँधा & उसके चेहरे को अपनी ओर घुमा उसके होंठो को चूमने लगे.राम्या बदस्तूर कमर हिलाए चली जा रही थी.अचानक सिले होंठो से आहो की आवाज़े आने लगी & उसकी चूत भाय्या जी के लंड पे कस गयी,उसका पूरा बदन उनकी बाहो मे अकड़ सा गया-वो फिर से झाड़ गयी थी.उसके झाड़ते ही भाय्या जी ने नीचे से कमर हिला कर धक्के लगाना शुरू कर दिया.राम्या की मस्ती का तो अब कोई हिसाब नही था.वो 1 बार नशे से उबरती नही थी कि उसका महबूब उसे फिर से मदहोश कर देता था.उसका तगड़ा लंड उसकी पूरी चूत पे छाया हुआ था & उसके बदन के रोम02 मे बस मज़ा था और कुच्छ नही!
भाय्या जी ने उसकी कमर थामी & उसे नीचे करते हुए अपनी दाई करवट पे हो गये फिर उसकी दाई जाँघ को अपने दाए हाथ से हवा मे उठाया & बाए को उसकी गर्दन के नीचे से ले जाके उसके सीने के उभारो को दबोचा & 1 बार फिर उसकी चुदाई शुरू कर दी.
"ऊहह...हान्न्न्न..और अंदर घुसैये...ऊव्ववव..हाआंन्णणन्..ऐसे ही...अपने लंड को मेरी चूत के आख़िर तक घुसैए..हाईईईई....!",राम्या ने मदहोशी मे पागल हो अपने दाए हाथ को नीचे लेजाके अपने प्रेमी के आंडो को दबोच लिया जो उसकी गंद थपथपा रहे थे.महबूबा की इस गर्म हरकत पे भैया जी अपनी बाई बाँह पे थोडा उठाके & उसके शरीर & चूचियो पे किस्सस की झड़ी लगा दी & अपना लंड जड तक उसकी चूत मे धंसा के उसकी चुदाई करने लगे.
"सुनिए..",राम्या ने उनके आंडो से खेलना छ्चोड़ अपने दाए हाथ को उनके चेहरे से लगा दिया जो उसके दाए कंधे को चूम रहा था,"..प्रधान को हराने की हाईईईईईई.....ऊहह..तरीके मे कोई ख़तरा तो नही...उउन्न्ञन्?"
"जो भी ख़तरा है वो मैं उठाउंगा.तुम बस वोही करना जो मैं तुम्हे कहूँगा.बस हम वापस सटा मे होंगे & इस बार तुम भी राज करोगी.",भैया जी ने उसकी गुदाज़ बाँह पे अपने होठ सटा दिए & अपने धक्के और तेज़ कर दिए,"..कल चोदा था दीपक ने तुम्हे?"
"ऊहह...हां..!",राम्या को भी उनसे ऐसी बाते करने मे मज़ा आता था & उसकी मस्ती थोड़ी और बढ़ गयी.
"कितनी बार?"वो उसकी चूचियो को ऐसे दबा रहे थे मानो उनसे दूध निकालना चाहते हो.
"बस 1.",राम्या बेचैनी से अपनी कमर हिला रही थी.उसकी चूत तो बावली हो गयी थी & उसमे सनसनाहट होने लगी थी.
"तुम झड़ी थी?"
"अपनी उंगली से."
"यही चोदा था बिस्तर पे?"
"हाँ लेकिन कितना फ़र्क है कल रात मे और आज मे....आआननह..!",राम्या करही उसकी चूत से रस बहना और तेज़ हो गया था,"..आपकी मर्दानगी के आगे तो वो कुच्छ भी नही...चोदिए मुझे और चोदिए मुझे भाय्या जी...मैं झड़ने वाली हू...हॅयियी राआंम्म्म....!"
"हा,मेरी जान.मैं ही चोदुन्गा तुम्हे..उम्र भर चोदुन्गा..तुम्हारी प्यास मैं ही बुझौन्गा & तुम्हे डेवाले की रानी बनाउन्गा...य्ाआहह..!",राम्या भैया जी के वादो से और खुमारी मे आ गयी.उसके जिस्म का अंग-2 अब मस्ती मे हिलोरे ले रहा था & उनकी बातो से पैदा हुए जोश ने उसके महबूब के लंड को उसकी चूत मे इतना अंदर धकेल दिया था की अब वो उसकी कोख पे चोट कर रहा था.राम्या की चूत बहुत गीली थी लेकिन फिर भी भैया जी के लंड की मोटाई कुच्छ ज़्यादा होने की वजह से उसे खुद की चूत और फैलती महसूस हो रही थी.लंड की रगड़ से उसका बुरा हाल था & तभी दोनो के जिस्मो के सारे बाँध टूट गये.राम्या को कुच्छ होश ना था,उसके बदन मे बिजली रोम-2 से फूटने लगी थी,उसकी चूत मे इतना ज़्यादा मज़ा पैदा हुआ था कि उसका दिल भर आया था & उसकी आँखे खुशी से छलक उठी थी & अपनी सिसकारियो के अलावा उसे अपने प्रेमी की आह सुनाई दी & ठीक उसी वक़्त उसकी चूत मे वही जाना-पहचाना गर्म & गीला एहसास हुआ.दोनो साथ-2 झाड़ चुके थे,अब ना जद्ड़ोजेहाद थी ना बेचैनी सिर्फ़ सुकून था.
.......................
"पता कैसे चला उस मेकॅनिक के बारे मे?",प्रोफेसर दीक्षित दिव्या के साथ वाली सीट पे बैठ गये & जीप का दरवाज़ा बंद किया.
"प्रोफेसर,लुटेरो को अंदाज़ा नही था कि वॅन के टाइर्स कितने खराब हैं & जब अचानक टाइर्स ने जवाब दिया होगा तो उन्हे किसी पंचार वाले की ज़रूरत महसूस हुई होगी.अब जब वॅन ज़्यादा चली नही थी तो मैने अंदाज़ा लगाया कि उन्हे ये काम भी वही कही आस-पास करना पड़ा होगा फिर नक्शा देखने के बाद अपने कॉन्स्टेबल्स को मैने अलग-2 मोहल्लो मे भेज दिया.उन्ही मे से 1 ने मुझे खबर दी है."
"1 बात बताइए,दिव्या जी?"
"पूछिए."
"आपके कॉन्स्टेबल्स सभी अफसरो के लिए ऐसी मुस्तैदी से काम करते हैं या फिर ये आपका असर है?",प्रोफेसर फिर से अपने पुराने रंग मे आ रहा था.
"जो भी आप समझें.",दिव्या ने भी टका सा जवाब दिया.
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"खबर पक्की है ना?"
"हां,सर.",उस इंसान ने आस-पास देखा,"..वो अपने 1 आदमी के साथ आ रहा है.मुर्शिद भी तैय्यार बैठा है & वो अपने खास आदमियो के साथ उस से रात 9 बजे पिंकी बार मे मिलने वाला है."
"पिंकी बार मे?"
"सर,उसके इलाक़े के अंदर है ये बार.",अजीत के साथ आए इनस्पेक्टर ने कहा.
"मगर फिर भी बार जैसी भीड़ वाली जगह मे वो ऐसी मीटिंग करने की कैसे सोच सकता है?",वो मुखबिर की ओर घुमा,"खबर पक्की है ना तुम्हारी?"
"बिल्कुल साहब,यकीन ना हो तो आप मेरे पैसे भी काम के बाद देना."
"हूँ.",अजीत ने इनस्पेक्टर को इशारा किया तो उसने मुखबिर को 1 लिफ़ाफ़ा थमाया & दोनो वाहा से निकल पड़े.
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"वो अकेला ही आया था मेडम & बहुत जल्दी मचा रहा था.जब मैने बोला कि उसके 2 टाइयर बिल्कुल बेकार हो चुके हैं तो वो फ़ौरन चला गया & 4 नये टाइयर्स खरीद के ले आया.",मिस्त्री बात तो दिव्या & प्रोफेसर से कर रहा था मगर उसका ध्यान उस लड़के पे था जो 1 बड़े से ट्यूब को पानी से भरे ट्यूब मे डाल चेक कर रहा था.
"देखने मे कैसा था वो?",
"लंबा था.."
"कितना?"
"आपके जितना ही होगा मेडम.."
"रंग,मूच्छें..?",प्रोफेसर ने पुचछा.
"छ्चोड़िए,प्रोफेसर.ऐसा करते हैं इसे दफ़्तर बुला लेते हैं फिर अपने आर्टिस्ट से इसके बताए हुलिए का स्केच तैय्यार करवाते हैं."
"मैं धंधा छोड़ के कैसे आउन्गा मेडम?"
"अब आना तो पड़ेगा ही,भाई क्या कर सकते हैं.अपना मोबाइल नंबर दो मैं तुम्हे फोन करूँगी तब हमारे दफ़्तर आके ज़रा उस आदमी की तस्वीर बनवाने मे मदद कर देना.",दिव्या ने उसे अपना विज़िटिंग कार्ड दिया,"..ये मेरा नंबर है कुच्छ नया पता चले तो बताना.",दिव्या वाहा से जाने को मूडी.
"मेडम!",उसने पीछे से आवाज़ दी.
"बोलो."
"मेडम,वो आया तो अकेला था मगर उसके मोबाइल पे बार-2 फोन आ रहा था & 1 बार बात करते हुए वो ये भी बोला था कि वो पिंकी बार मे रात को मिलेगा अपनी ही टेबल पे.",फिर जैसे उसे कुछ और याद आया,..हां,रात के 9 बजे का टाइम बोला था वो."
"क्या?!सुनो,तब तो तुम अभी हमारे साथ चलो.",दिव्या उस मिस्त्री को ले प्रोफेसर के साथ अपने दफ़्तर रवाना हो गयी.
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"हम सब सादे कपड़ो मे वाहा जाएँगे..",अजीत अपने इनस्पेक्टर्स & हवलदरो को शाम के ऑपरेशन के लिए तैय्यार कर रहा था,"..मुर्शिद की शक्ल तो हम सब पहचानते हैं मगर उस हथ्यारो के कारोबारी की शक्ल हमे नही पता.अगर वो बार के बाहर हमारे खबरी की नज़र मे आता है तो वो हमे इशारा कर देगा नही तो जब मुर्शिद उस से मिलेगा तो वो हमारी नज़र मे आ जाएगा.ध्यान रहे हमे दोनो को रंगे हाथो पकड़ना है..",कमरे मे बैठे 2 इनस्पेक्टर,2 सब-इनस्पेक्टर & 5 हवलदार ध्यान से अजीत को सुन रहे थे.सब के सब पहुँचे निशानची थे & किसी की भी ईमानदारी पे आज तक कोई सवाल नही उठा था.
गतान्क से आगे..............
"..मैं चाहता हू तुम उसके थोड़ा करीब जाओ.ये ठीक है कि तुम उसके पति के खिलाफ चुनाव लड़ रही हो मगर कोई ज़ाति दुश्मनी थोड़े ही है!",भाय्या जी उसकी चूचियो को अपने हाथो मे आटे की तरह गूँध रहे थे & वो अपनी गर्दन बाई तरफ घुमा उनके चेहरे पे चूम रही थी.
"इस से क्या फ़ायदा होगा?"उसने अपने बाए कंधे से उनकी छाती पे हल्के से धक्का दिया तो उसका इशारा समझते हुए भाय्या जी पलंग पे लेट गये & उनके उपर राम्या भी लेट गयी फिर उसने अपने हाथो को बिस्तर पे जमाया & अपनी कमर उच्छाल-2 कर चुदाई शुरू कर दी.भाय्या जी के हाथ उसके पूरे जिस्म पे फिर रहे थे.
"वो तुम्हे बाद मे पता चलेगा.अभी तो तुम बस यही करना.",उन्होने उसे बाँहो मे बाँधा & उसके चेहरे को अपनी ओर घुमा उसके होंठो को चूमने लगे.राम्या बदस्तूर कमर हिलाए चली जा रही थी.अचानक सिले होंठो से आहो की आवाज़े आने लगी & उसकी चूत भाय्या जी के लंड पे कस गयी,उसका पूरा बदन उनकी बाहो मे अकड़ सा गया-वो फिर से झाड़ गयी थी.उसके झाड़ते ही भाय्या जी ने नीचे से कमर हिला कर धक्के लगाना शुरू कर दिया.राम्या की मस्ती का तो अब कोई हिसाब नही था.वो 1 बार नशे से उबरती नही थी कि उसका महबूब उसे फिर से मदहोश कर देता था.उसका तगड़ा लंड उसकी पूरी चूत पे छाया हुआ था & उसके बदन के रोम02 मे बस मज़ा था और कुच्छ नही!
भाय्या जी ने उसकी कमर थामी & उसे नीचे करते हुए अपनी दाई करवट पे हो गये फिर उसकी दाई जाँघ को अपने दाए हाथ से हवा मे उठाया & बाए को उसकी गर्दन के नीचे से ले जाके उसके सीने के उभारो को दबोचा & 1 बार फिर उसकी चुदाई शुरू कर दी.
"ऊहह...हान्न्न्न..और अंदर घुसैये...ऊव्ववव..हाआंन्णणन्..ऐसे ही...अपने लंड को मेरी चूत के आख़िर तक घुसैए..हाईईईई....!",राम्या ने मदहोशी मे पागल हो अपने दाए हाथ को नीचे लेजाके अपने प्रेमी के आंडो को दबोच लिया जो उसकी गंद थपथपा रहे थे.महबूबा की इस गर्म हरकत पे भैया जी अपनी बाई बाँह पे थोडा उठाके & उसके शरीर & चूचियो पे किस्सस की झड़ी लगा दी & अपना लंड जड तक उसकी चूत मे धंसा के उसकी चुदाई करने लगे.
"सुनिए..",राम्या ने उनके आंडो से खेलना छ्चोड़ अपने दाए हाथ को उनके चेहरे से लगा दिया जो उसके दाए कंधे को चूम रहा था,"..प्रधान को हराने की हाईईईईईई.....ऊहह..तरीके मे कोई ख़तरा तो नही...उउन्न्ञन्?"
"जो भी ख़तरा है वो मैं उठाउंगा.तुम बस वोही करना जो मैं तुम्हे कहूँगा.बस हम वापस सटा मे होंगे & इस बार तुम भी राज करोगी.",भैया जी ने उसकी गुदाज़ बाँह पे अपने होठ सटा दिए & अपने धक्के और तेज़ कर दिए,"..कल चोदा था दीपक ने तुम्हे?"
"ऊहह...हां..!",राम्या को भी उनसे ऐसी बाते करने मे मज़ा आता था & उसकी मस्ती थोड़ी और बढ़ गयी.
"कितनी बार?"वो उसकी चूचियो को ऐसे दबा रहे थे मानो उनसे दूध निकालना चाहते हो.
"बस 1.",राम्या बेचैनी से अपनी कमर हिला रही थी.उसकी चूत तो बावली हो गयी थी & उसमे सनसनाहट होने लगी थी.
"तुम झड़ी थी?"
"अपनी उंगली से."
"यही चोदा था बिस्तर पे?"
"हाँ लेकिन कितना फ़र्क है कल रात मे और आज मे....आआननह..!",राम्या करही उसकी चूत से रस बहना और तेज़ हो गया था,"..आपकी मर्दानगी के आगे तो वो कुच्छ भी नही...चोदिए मुझे और चोदिए मुझे भाय्या जी...मैं झड़ने वाली हू...हॅयियी राआंम्म्म....!"
"हा,मेरी जान.मैं ही चोदुन्गा तुम्हे..उम्र भर चोदुन्गा..तुम्हारी प्यास मैं ही बुझौन्गा & तुम्हे डेवाले की रानी बनाउन्गा...य्ाआहह..!",राम्या भैया जी के वादो से और खुमारी मे आ गयी.उसके जिस्म का अंग-2 अब मस्ती मे हिलोरे ले रहा था & उनकी बातो से पैदा हुए जोश ने उसके महबूब के लंड को उसकी चूत मे इतना अंदर धकेल दिया था की अब वो उसकी कोख पे चोट कर रहा था.राम्या की चूत बहुत गीली थी लेकिन फिर भी भैया जी के लंड की मोटाई कुच्छ ज़्यादा होने की वजह से उसे खुद की चूत और फैलती महसूस हो रही थी.लंड की रगड़ से उसका बुरा हाल था & तभी दोनो के जिस्मो के सारे बाँध टूट गये.राम्या को कुच्छ होश ना था,उसके बदन मे बिजली रोम-2 से फूटने लगी थी,उसकी चूत मे इतना ज़्यादा मज़ा पैदा हुआ था कि उसका दिल भर आया था & उसकी आँखे खुशी से छलक उठी थी & अपनी सिसकारियो के अलावा उसे अपने प्रेमी की आह सुनाई दी & ठीक उसी वक़्त उसकी चूत मे वही जाना-पहचाना गर्म & गीला एहसास हुआ.दोनो साथ-2 झाड़ चुके थे,अब ना जद्ड़ोजेहाद थी ना बेचैनी सिर्फ़ सुकून था.
.......................
"पता कैसे चला उस मेकॅनिक के बारे मे?",प्रोफेसर दीक्षित दिव्या के साथ वाली सीट पे बैठ गये & जीप का दरवाज़ा बंद किया.
"प्रोफेसर,लुटेरो को अंदाज़ा नही था कि वॅन के टाइर्स कितने खराब हैं & जब अचानक टाइर्स ने जवाब दिया होगा तो उन्हे किसी पंचार वाले की ज़रूरत महसूस हुई होगी.अब जब वॅन ज़्यादा चली नही थी तो मैने अंदाज़ा लगाया कि उन्हे ये काम भी वही कही आस-पास करना पड़ा होगा फिर नक्शा देखने के बाद अपने कॉन्स्टेबल्स को मैने अलग-2 मोहल्लो मे भेज दिया.उन्ही मे से 1 ने मुझे खबर दी है."
"1 बात बताइए,दिव्या जी?"
"पूछिए."
"आपके कॉन्स्टेबल्स सभी अफसरो के लिए ऐसी मुस्तैदी से काम करते हैं या फिर ये आपका असर है?",प्रोफेसर फिर से अपने पुराने रंग मे आ रहा था.
"जो भी आप समझें.",दिव्या ने भी टका सा जवाब दिया.
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"खबर पक्की है ना?"
"हां,सर.",उस इंसान ने आस-पास देखा,"..वो अपने 1 आदमी के साथ आ रहा है.मुर्शिद भी तैय्यार बैठा है & वो अपने खास आदमियो के साथ उस से रात 9 बजे पिंकी बार मे मिलने वाला है."
"पिंकी बार मे?"
"सर,उसके इलाक़े के अंदर है ये बार.",अजीत के साथ आए इनस्पेक्टर ने कहा.
"मगर फिर भी बार जैसी भीड़ वाली जगह मे वो ऐसी मीटिंग करने की कैसे सोच सकता है?",वो मुखबिर की ओर घुमा,"खबर पक्की है ना तुम्हारी?"
"बिल्कुल साहब,यकीन ना हो तो आप मेरे पैसे भी काम के बाद देना."
"हूँ.",अजीत ने इनस्पेक्टर को इशारा किया तो उसने मुखबिर को 1 लिफ़ाफ़ा थमाया & दोनो वाहा से निकल पड़े.
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"वो अकेला ही आया था मेडम & बहुत जल्दी मचा रहा था.जब मैने बोला कि उसके 2 टाइयर बिल्कुल बेकार हो चुके हैं तो वो फ़ौरन चला गया & 4 नये टाइयर्स खरीद के ले आया.",मिस्त्री बात तो दिव्या & प्रोफेसर से कर रहा था मगर उसका ध्यान उस लड़के पे था जो 1 बड़े से ट्यूब को पानी से भरे ट्यूब मे डाल चेक कर रहा था.
"देखने मे कैसा था वो?",
"लंबा था.."
"कितना?"
"आपके जितना ही होगा मेडम.."
"रंग,मूच्छें..?",प्रोफेसर ने पुचछा.
"छ्चोड़िए,प्रोफेसर.ऐसा करते हैं इसे दफ़्तर बुला लेते हैं फिर अपने आर्टिस्ट से इसके बताए हुलिए का स्केच तैय्यार करवाते हैं."
"मैं धंधा छोड़ के कैसे आउन्गा मेडम?"
"अब आना तो पड़ेगा ही,भाई क्या कर सकते हैं.अपना मोबाइल नंबर दो मैं तुम्हे फोन करूँगी तब हमारे दफ़्तर आके ज़रा उस आदमी की तस्वीर बनवाने मे मदद कर देना.",दिव्या ने उसे अपना विज़िटिंग कार्ड दिया,"..ये मेरा नंबर है कुच्छ नया पता चले तो बताना.",दिव्या वाहा से जाने को मूडी.
"मेडम!",उसने पीछे से आवाज़ दी.
"बोलो."
"मेडम,वो आया तो अकेला था मगर उसके मोबाइल पे बार-2 फोन आ रहा था & 1 बार बात करते हुए वो ये भी बोला था कि वो पिंकी बार मे रात को मिलेगा अपनी ही टेबल पे.",फिर जैसे उसे कुछ और याद आया,..हां,रात के 9 बजे का टाइम बोला था वो."
"क्या?!सुनो,तब तो तुम अभी हमारे साथ चलो.",दिव्या उस मिस्त्री को ले प्रोफेसर के साथ अपने दफ़्तर रवाना हो गयी.
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"हम सब सादे कपड़ो मे वाहा जाएँगे..",अजीत अपने इनस्पेक्टर्स & हवलदरो को शाम के ऑपरेशन के लिए तैय्यार कर रहा था,"..मुर्शिद की शक्ल तो हम सब पहचानते हैं मगर उस हथ्यारो के कारोबारी की शक्ल हमे नही पता.अगर वो बार के बाहर हमारे खबरी की नज़र मे आता है तो वो हमे इशारा कर देगा नही तो जब मुर्शिद उस से मिलेगा तो वो हमारी नज़र मे आ जाएगा.ध्यान रहे हमे दोनो को रंगे हाथो पकड़ना है..",कमरे मे बैठे 2 इनस्पेक्टर,2 सब-इनस्पेक्टर & 5 हवलदार ध्यान से अजीत को सुन रहे थे.सब के सब पहुँचे निशानची थे & किसी की भी ईमानदारी पे आज तक कोई सवाल नही उठा था.