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खेल खिलाड़ी का compleet

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खेल खिलाड़ी का पार्ट--17

गतान्क से आगे..............

"..मैं चाहता हू तुम उसके थोड़ा करीब जाओ.ये ठीक है कि तुम उसके पति के खिलाफ चुनाव लड़ रही हो मगर कोई ज़ाति दुश्मनी थोड़े ही है!",भाय्या जी उसकी चूचियो को अपने हाथो मे आटे की तरह गूँध रहे थे & वो अपनी गर्दन बाई तरफ घुमा उनके चेहरे पे चूम रही थी.

"इस से क्या फ़ायदा होगा?"उसने अपने बाए कंधे से उनकी छाती पे हल्के से धक्का दिया तो उसका इशारा समझते हुए भाय्या जी पलंग पे लेट गये & उनके उपर राम्या भी लेट गयी फिर उसने अपने हाथो को बिस्तर पे जमाया & अपनी कमर उच्छाल-2 कर चुदाई शुरू कर दी.भाय्या जी के हाथ उसके पूरे जिस्म पे फिर रहे थे.

"वो तुम्हे बाद मे पता चलेगा.अभी तो तुम बस यही करना.",उन्होने उसे बाँहो मे बाँधा & उसके चेहरे को अपनी ओर घुमा उसके होंठो को चूमने लगे.राम्या बदस्तूर कमर हिलाए चली जा रही थी.अचानक सिले होंठो से आहो की आवाज़े आने लगी & उसकी चूत भाय्या जी के लंड पे कस गयी,उसका पूरा बदन उनकी बाहो मे अकड़ सा गया-वो फिर से झाड़ गयी थी.उसके झाड़ते ही भाय्या जी ने नीचे से कमर हिला कर धक्के लगाना शुरू कर दिया.राम्या की मस्ती का तो अब कोई हिसाब नही था.वो 1 बार नशे से उबरती नही थी कि उसका महबूब उसे फिर से मदहोश कर देता था.उसका तगड़ा लंड उसकी पूरी चूत पे छाया हुआ था & उसके बदन के रोम02 मे बस मज़ा था और कुच्छ नही!

भाय्या जी ने उसकी कमर थामी & उसे नीचे करते हुए अपनी दाई करवट पे हो गये फिर उसकी दाई जाँघ को अपने दाए हाथ से हवा मे उठाया & बाए को उसकी गर्दन के नीचे से ले जाके उसके सीने के उभारो को दबोचा & 1 बार फिर उसकी चुदाई शुरू कर दी.

"ऊहह...हान्न्न्न..और अंदर घुसैये...ऊव्ववव..हाआंन्‍णणन्..ऐसे ही...अपने लंड को मेरी चूत के आख़िर तक घुसैए..हाईईईई....!",राम्या ने मदहोशी मे पागल हो अपने दाए हाथ को नीचे लेजाके अपने प्रेमी के आंडो को दबोच लिया जो उसकी गंद थपथपा रहे थे.महबूबा की इस गर्म हरकत पे भैया जी अपनी बाई बाँह पे थोडा उठाके & उसके शरीर & चूचियो पे किस्सस की झड़ी लगा दी & अपना लंड जड तक उसकी चूत मे धंसा के उसकी चुदाई करने लगे.

"सुनिए..",राम्या ने उनके आंडो से खेलना छ्चोड़ अपने दाए हाथ को उनके चेहरे से लगा दिया जो उसके दाए कंधे को चूम रहा था,"..प्रधान को हराने की हाईईईईईई.....ऊहह..तरीके मे कोई ख़तरा तो नही...उउन्न्ञन्?"

"जो भी ख़तरा है वो मैं उठाउंगा.तुम बस वोही करना जो मैं तुम्हे कहूँगा.बस हम वापस सटा मे होंगे & इस बार तुम भी राज करोगी.",भैया जी ने उसकी गुदाज़ बाँह पे अपने होठ सटा दिए & अपने धक्के और तेज़ कर दिए,"..कल चोदा था दीपक ने तुम्हे?"

"ऊहह...हां..!",राम्या को भी उनसे ऐसी बाते करने मे मज़ा आता था & उसकी मस्ती थोड़ी और बढ़ गयी.

"कितनी बार?"वो उसकी चूचियो को ऐसे दबा रहे थे मानो उनसे दूध निकालना चाहते हो.

"बस 1.",राम्या बेचैनी से अपनी कमर हिला रही थी.उसकी चूत तो बावली हो गयी थी & उसमे सनसनाहट होने लगी थी.

"तुम झड़ी थी?"

"अपनी उंगली से."

"यही चोदा था बिस्तर पे?"

"हाँ लेकिन कितना फ़र्क है कल रात मे और आज मे....आआननह..!",राम्या करही उसकी चूत से रस बहना और तेज़ हो गया था,"..आपकी मर्दानगी के आगे तो वो कुच्छ भी नही...चोदिए मुझे और चोदिए मुझे भाय्या जी...मैं झड़ने वाली हू...हॅयियी राआंम्म्म....!"

"हा,मेरी जान.मैं ही चोदुन्गा तुम्हे..उम्र भर चोदुन्गा..तुम्हारी प्यास मैं ही बुझौन्गा & तुम्हे डेवाले की रानी बनाउन्गा...य्ाआहह..!",राम्या भैया जी के वादो से और खुमारी मे आ गयी.उसके जिस्म का अंग-2 अब मस्ती मे हिलोरे ले रहा था & उनकी बातो से पैदा हुए जोश ने उसके महबूब के लंड को उसकी चूत मे इतना अंदर धकेल दिया था की अब वो उसकी कोख पे चोट कर रहा था.राम्या की चूत बहुत गीली थी लेकिन फिर भी भैया जी के लंड की मोटाई कुच्छ ज़्यादा होने की वजह से उसे खुद की चूत और फैलती महसूस हो रही थी.लंड की रगड़ से उसका बुरा हाल था & तभी दोनो के जिस्मो के सारे बाँध टूट गये.राम्या को कुच्छ होश ना था,उसके बदन मे बिजली रोम-2 से फूटने लगी थी,उसकी चूत मे इतना ज़्यादा मज़ा पैदा हुआ था कि उसका दिल भर आया था & उसकी आँखे खुशी से छलक उठी थी & अपनी सिसकारियो के अलावा उसे अपने प्रेमी की आह सुनाई दी & ठीक उसी वक़्त उसकी चूत मे वही जाना-पहचाना गर्म & गीला एहसास हुआ.दोनो साथ-2 झाड़ चुके थे,अब ना जद्ड़ोजेहाद थी ना बेचैनी सिर्फ़ सुकून था.

.......................

"पता कैसे चला उस मेकॅनिक के बारे मे?",प्रोफेसर दीक्षित दिव्या के साथ वाली सीट पे बैठ गये & जीप का दरवाज़ा बंद किया.

"प्रोफेसर,लुटेरो को अंदाज़ा नही था कि वॅन के टाइर्स कितने खराब हैं & जब अचानक टाइर्स ने जवाब दिया होगा तो उन्हे किसी पंचार वाले की ज़रूरत महसूस हुई होगी.अब जब वॅन ज़्यादा चली नही थी तो मैने अंदाज़ा लगाया कि उन्हे ये काम भी वही कही आस-पास करना पड़ा होगा फिर नक्शा देखने के बाद अपने कॉन्स्टेबल्स को मैने अलग-2 मोहल्लो मे भेज दिया.उन्ही मे से 1 ने मुझे खबर दी है."

"1 बात बताइए,दिव्या जी?"

"पूछिए."

"आपके कॉन्स्टेबल्स सभी अफसरो के लिए ऐसी मुस्तैदी से काम करते हैं या फिर ये आपका असर है?",प्रोफेसर फिर से अपने पुराने रंग मे आ रहा था.

"जो भी आप समझें.",दिव्या ने भी टका सा जवाब दिया.

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"खबर पक्की है ना?"

"हां,सर.",उस इंसान ने आस-पास देखा,"..वो अपने 1 आदमी के साथ आ रहा है.मुर्शिद भी तैय्यार बैठा है & वो अपने खास आदमियो के साथ उस से रात 9 बजे पिंकी बार मे मिलने वाला है."

"पिंकी बार मे?"

"सर,उसके इलाक़े के अंदर है ये बार.",अजीत के साथ आए इनस्पेक्टर ने कहा.

"मगर फिर भी बार जैसी भीड़ वाली जगह मे वो ऐसी मीटिंग करने की कैसे सोच सकता है?",वो मुखबिर की ओर घुमा,"खबर पक्की है ना तुम्हारी?"

"बिल्कुल साहब,यकीन ना हो तो आप मेरे पैसे भी काम के बाद देना."

"हूँ.",अजीत ने इनस्पेक्टर को इशारा किया तो उसने मुखबिर को 1 लिफ़ाफ़ा थमाया & दोनो वाहा से निकल पड़े.

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"वो अकेला ही आया था मेडम & बहुत जल्दी मचा रहा था.जब मैने बोला कि उसके 2 टाइयर बिल्कुल बेकार हो चुके हैं तो वो फ़ौरन चला गया & 4 नये टाइयर्स खरीद के ले आया.",मिस्त्री बात तो दिव्या & प्रोफेसर से कर रहा था मगर उसका ध्यान उस लड़के पे था जो 1 बड़े से ट्यूब को पानी से भरे ट्यूब मे डाल चेक कर रहा था.

"देखने मे कैसा था वो?",

"लंबा था.."

"कितना?"

"आपके जितना ही होगा मेडम.."

"रंग,मूच्छें..?",प्रोफेसर ने पुचछा.

"छ्चोड़िए,प्रोफेसर.ऐसा करते हैं इसे दफ़्तर बुला लेते हैं फिर अपने आर्टिस्ट से इसके बताए हुलिए का स्केच तैय्यार करवाते हैं."

"मैं धंधा छोड़ के कैसे आउन्गा मेडम?"

"अब आना तो पड़ेगा ही,भाई क्या कर सकते हैं.अपना मोबाइल नंबर दो मैं तुम्हे फोन करूँगी तब हमारे दफ़्तर आके ज़रा उस आदमी की तस्वीर बनवाने मे मदद कर देना.",दिव्या ने उसे अपना विज़िटिंग कार्ड दिया,"..ये मेरा नंबर है कुच्छ नया पता चले तो बताना.",दिव्या वाहा से जाने को मूडी.

"मेडम!",उसने पीछे से आवाज़ दी.

"बोलो."

"मेडम,वो आया तो अकेला था मगर उसके मोबाइल पे बार-2 फोन आ रहा था & 1 बार बात करते हुए वो ये भी बोला था कि वो पिंकी बार मे रात को मिलेगा अपनी ही टेबल पे.",फिर जैसे उसे कुछ और याद आया,..हां,रात के 9 बजे का टाइम बोला था वो."

"क्या?!सुनो,तब तो तुम अभी हमारे साथ चलो.",दिव्या उस मिस्त्री को ले प्रोफेसर के साथ अपने दफ़्तर रवाना हो गयी.

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"हम सब सादे कपड़ो मे वाहा जाएँगे..",अजीत अपने इनस्पेक्टर्स & हवलदरो को शाम के ऑपरेशन के लिए तैय्यार कर रहा था,"..मुर्शिद की शक्ल तो हम सब पहचानते हैं मगर उस हथ्यारो के कारोबारी की शक्ल हमे नही पता.अगर वो बार के बाहर हमारे खबरी की नज़र मे आता है तो वो हमे इशारा कर देगा नही तो जब मुर्शिद उस से मिलेगा तो वो हमारी नज़र मे आ जाएगा.ध्यान रहे हमे दोनो को रंगे हाथो पकड़ना है..",कमरे मे बैठे 2 इनस्पेक्टर,2 सब-इनस्पेक्टर & 5 हवलदार ध्यान से अजीत को सुन रहे थे.सब के सब पहुँचे निशानची थे & किसी की भी ईमानदारी पे आज तक कोई सवाल नही उठा था.
 
"..मेरा इशारा मिलते ही सब 1-1 करके या जोड़ो मे बार के अंदर जाएँगे.मेरा मानना है कि असल मीटिंग बार की इमारत मे किसी और कमरे मे होगी इसलिए 1 आदमी पूरे ऑपरेशन के दौरान बाहर ही खड़ा रहेगा & किसी भी ख़तरे से हमे आगाह करेगा.आप सभी अपने-2 हथ्यार चेक कर लीजिए.कोई भी अपना निजी हथ्यार इस्तेमाल नही करेगा.ध्यान रहे,हम दुश्मन की मांद मे घुस रहे हैं & हो सकता है उसे हथ्यार की कमी ना हो इसलिए आप भी भरपूर गोलिया रखिएगा & बहुत सोच-समझ के उनका इस्तेमाल करिएगा.कोई सवाल?",सबका 1 ही जवाब था नही.

"ओके.तो आपलोग जा सकते हैं.हम 5 बजे से बारी-2 से बार के बाहर पोज़िशन लेना शुरू कर देंगे.उमीद तो यही करता हू की हमे अपने हथ्यारो का इस्तेमाल नही करना पड़े लेकिन....",अजीत 1 पल को खामोश हो गया,"..ओके,गेंटल्मन.बेस्ट ऑफ लक!",वो कमरे से बाहर निकल गया.

"आउच..!"

"ओह्ह..आइ'म सॉरी..!",अपने ख़यालो मे गुम अजीत कमरे से निकला & सामने से आती दिव्या से टकरा गया,"..दिव्या..",दिव्या & वो बिल्कुल सामने से टकराए थे & दिव्या की मोटी चूचियाँ अजीत के सीने से दब गयी थी.दिव्या के पीछे आता प्रोफेसर भी अपने को संभाल नही पाया & वो पीछे से दिव्या से टकरा गया & उसका लंड दिव्या की चौड़ी गंद से जा लगा.कुच्छ पॅलो के लिए दिव्या उन 2 मर्दो के बीच दब गयी & उस वक़्त उसे अपने सीने पे अजीत के सीने का दबाव & गंद पे प्रोफेसर के लंड का दबाव 1 साथ महसूस हुआ.

जहा अजीत के जिस्म की छुअन ने उसे फिर से बीते,सुहाने दीनो की याद दिला दी वही प्रोफेसर के लंड का नया एहसास उसे हैरत मे डाल गया.लंड खड़ा नही था मगर फिर भी उस ज़रा से लम्हे मे भी दिव्या को उसकी लंबाई का अंदाज़ा हो गया था & वो प्रभावित हुए बिना ना रह सकी थी.

"सॉरी,दिव्या.",अजीत ने 1 पल को उसके हसीन चेहरे को देखा & वाहा से चला गया.

"बट आइ'एम नोट सॉरी.",कॅबिन मे घुसते ही प्रोफेसर की मज़किया लहजे वाली आवाज़ गूँजी.

"लड़की से टकराते हैं & उसके लिए शर्मिंदा भी नही हैं!",दिव्या की मुस्कान प्रोफेसर को थोड़ी ज़िल्लत महसूस कराने वाली थी,"..ऐसी बदतमीज़ी की आपसे उमीद तो नही थी मुझे!"

"आप जैसी खूबसूरत लड़की के करीब कौन नही आना चाहेगा,ऑफीसर.",प्रोफेसर कुर्सी पे बैठ गया,"..& मैने जान बुझ के हिमाकत तो की नही थी.अब उपरवाले के करम से खाकसार ने आपका एहसास पा लिया इसके लिए वो शुक्रगुज़ार होगा या शर्मिंदा?!आप ही बताइए."

"वाकई आप लफ़ज़ो के जादूगर हैं,प्रोफेसर.",आज दिव्या का मूड थोड़ा ठीक था.अजीत से टकराने से उसके जिस्म मे 1 चाह भी जाग उठी थी & उसे प्रोफेसर से बात करना आज उतना बुरा नही लग रहा था,"चलिए,ये बताइए कि आप मुझे कैसे पेश करेंगे?"

"ये तो मुझे भी अभी तक नही मालूम.मुझे लगता है मैने अभी तक आपको पूरी तरह से जाना नही है.",प्रोफेसर की बेबाक नज़रे डेस्क के पार अपनी कुर्सी पे बैठी दिव्या के जिस्म पे 1 बार उपर से नीचे तक फिर गयी तो दिव्या को उन नज़रो की तपिश शिद्दत से महसूस हुई.वो प्रोफेसर की बात का मतलब समझ रही थी.1 पल को उसके दिल ने बोला भी की इसमे बुरा क्या है,उसकी जवानी & हुस्न अगर प्रोफेसर की मर्दानगी से मिलेंगे तो उसमे हर्ज क्या था लेकिन अगले पल उसने अपने दिल को समझा के शांत कर दिया.

"और कितना जानना चाहते हैं?'

"आप तो मुझे वो किताब लगती हैं,दिव्या जी जिसमे हर रोज़ 1 नया सफ़ा जुड़ जाता है & वो भी उतना ही अनूठा होता है जितने की पहले के सफे थे.आपको तो ताउम्र पढ़ु तो भी शायद यही प्यास रहेगी की थोडा और पढ़ लेता तो करार आता.",तारीफ सुन दिव्या का दिल खुशी से भर उठा पर उसने उसे प्रोफेसर पे ज़ाहिर नही होने दिया.

"फिर भी कुछ तो सोचा होगा आपने की कैसे लिखेंगे अपनी अगली किताब?",उसने प्रोफेसर की गहरी निगाहो से निगाहें चुरा ली.उनकी तपिश उसे बेकल कर रही थी.

"सोचा है या यू कहु सोचा तो पहले ही था.डीसीपी वेर्मा का शुक्रगुज़ार हू कि आपसे मुलाकात करवा दी.",प्रोफेसर मेज़ पे हाथ रख थोड़ा आगे झुक गया.उसका चेहरा संजीदा हो चुका था,"यकीन मानिए,दिव्या जी मैने जैसी हेरोयिन के बारे मे सोचा था आप हू बा हू वैसी हैं बल्कि उस से भी कही ज़्यादा हसीन & हिम्मती.बस 1 परेशानी है.",वो वापस पीछे हो अपनी कुर्सी मे आराम से बैठ गया.

"क्या?",दिव्या थोड़ा परेशान हो गयी.

"डरता हू कहूँगा तो आप शायद सच मे खफा हो जाएँ & मैं आपके साथ से महरूम हो जाऊं."

"ऐसी भी क्या बात है?"

"1 काम करते हैं.आपने मेरी किताबें पढ़ी हैं?"

"हां.2-3."

"कौन-2 सी?",दिव्या ने उसे नाम बताए

"ये तो वो किताबें है जिन्हे मैने अपने शुरुआती दिनो मे लिखा था.आपने मेरी वो किताबे तो पढ़ी ही नही है जो सबसे ज़्यादा बिकी हैं.",वो उठा & कोने के कपबोर्ड को खोल अपना बॅग निकाला.रोज़ सवेरे प्रोफेसर अपने बॅग के साथ आता & अगर दिव्या बिज़ी होती तो वो अपने लॅपटॉप पे काम करता रहता.

"ये लीजिए दिव्या जी..",प्रोफेसर ने 1 किताब निकाली & उसपे कुच्छ लिख के दिव्या को थमाया,"..पहले आप ये किताब पढ़िए फिर मैं आपको अपनी परेशानी के बारे मे बताउन्गा."

"अंगारों की सेज!इसमे से रोमॅन्स की बू आ रही है प्रोफेसर.",दिव्या हँसी.

"आप रोमॅन्स से परहेज करने वाली तो लगती नही?",दिव्या बस मुस्कुराइ & किताब खोली & पहले पन्ने पे लिखी प्रोफेसर की इबारत पढ़ी,"हुस्न & हिम्मत के संगम की नज़र-अजिंक्या दीक्षित",दिव्या के गुलाबी गालो मे हल्की सी लाली & घुल गयी.प्रोफेसर की निगाहो ने ये देखा & उसका दिल भी खुशी से भर उठा.

"आपकी परेशानी जानने के लिए तो मुझे इसे पढ़ना ही पड़ेगा.वैसे ज़रा इसकी कहानी के बारे मे कुच्छ बताइए."

"जी.ये 1 लड़की की कहानी है जिसकी ज़िंदगी मे इश्क़ तूफान ले आता है & कैसे उसे पहेलिया सुलझानी पड़ती हैं.दिव्या जी,आप कहानी की हेरोयिन को गौर से पढ़िएगा फिर मैं आपसे अपनी परेशानी के बारे मे बात करूँगा."

"ओके.",तभी दरवाज़े पे दस्तक हुई & 1 हवलदार आया,"बोलो."

"मेडम,स्केच तैय्यार हो गया है.",उसकी बात पूरी होने से पहले ही प्रोफेसर & दिव्या कॅबिन के बाहर थे.

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क्रमशः...........
 
KHEL KHILADI KA paart--17

gataank se aage..............

"..main chahta hu tum uske thoda karib jao.ye thik hai ki tum uske pati ke khilaf chunav lad rahi ho magar koi zati dushmani thode hi hai!",bhaiyya ji uski choochiyo ko apne hatho me aate ki tarah gundh rahe the & vo apni gardan bayi taraf ghuma unke chehre pe chum rahi thi.

"is se kya fayda hoga?"usne apne baye kandhe se unki chhati pe halke se dhakka diya to uska ishara samajhte hue bhaiyya ji palang pe let gaye & unke upar ramya bhi let gayi fir usne apne hatho ko bistar pe jamaya & apni kamar uchhal-2 kar chudai shuru kar di.bhaiyya ji ke hath uske pure jism pe fir rahe the.

"vo tumhe baad me pata chalega.abhi to tum bas yehi karna.",unhone use baho me bandha & uske chehre ko apni or ghuma uske hotho ko chumne lage.ramya badastur kamar hilaye chali ja rahi thi.achanak sile hotho se aaho ki aavaze aane lagi & uski chut bhaiyya ji ke lund pe kas gayi,uska pura badan unki baaho me akad sa gaya-vo fir se jhad gayi thi.uske jhadte hi bhaiyya ji ne neeche se kamar hila kar dhakke lagana shuru kar diya.ramya ki masti ka to ab koi hisab nahi tha.vo 1 baar nashe se ubarti nahi thi ki uska mehbub use fir se madhosh kar deta tha.uska tagda lund uski puri chut pe chhaya hua tha & uske badan ke rom02 me bas maza tha aur kuchh nahi!

bhaiyya ji ne uski kamar thami & use neeche karte hue apni dayi karwat pe ho gaye fir uski dayi jangh ko apne dfaye hath se hawa me uthaya & baye ko uski gardan ke neeche se le jake uske seene ke ubharo ko dabocha & 1 baar fir uski chudai shuru kar di.

"oohhhhh...haannnn..aur andar ghusaiye...oowwww..haaannnnn..aise hi...apne lund ko meri chut ke aakhir tak ghusaiye..haiiiii....!",Ramya ne madhoshi me pagal ho apne daye hath ko neeche lejake apne premi ke ando ko daboch liya jo uski gand thapthapa rahe the.mehbooba ki is garm harkat pe Bhaiya Ji apni bayi banh pe thoda uchke & uske shehre & chhatiyo pe kisses ki jhadi laga di & apna lund jud tak uski chut me dhansa ke uski chudai karne lage.

"suniye..",ramya ne unke ando se khelna chhod apne daye hath ko unke chehre se laga diya jo uske daye kandhe ko chum raha tha,"..Pradhan ko harane kea haiiiiiii.....oohhhh..tarike me koi khatra to nahi...uunnnn?"

"jo bhi khatra hai vo main uthaunga.tum bas vohi karna jo main tumhe kahunga.bas hum vapas satta me honge & is baar tum bhi raaj karogi.",bhaiya ji ne uski gudaz banh pe apne hoth sata diye & apne dhakke aur tez kar diye,"..kal choda tha Deepak ne tumhe?"

"oohhhh...haan..!",ramya ko bhi unse aisi baate karne me maza aata tha & uski masti thodi aur badh gayi.

"kitni baar?"vo uski choochiyo ko aise daba rahe the mano unse doodh nikalna chahte ho.

"bas 1.",ramya bechaini se apni kamar hila rahi thi.uski chut to bawli ho gayi thi & usme sansanahat hone lagi thi.

"tum jhadi thi?"

"apni ungli se."

"yehi choda tha bistar pe?"

"haan lekin kitna fark hai kal raat me aur aaj me....aaaannhhhh..!",ramya karahi uski chut se ras behna aur tez ho gaya tha,"..aapki mardangi ke aage to vo kuchh bhi nahi...chodiye mujhe aur chodiye mujhe bhaiyya ji...main jhadne wali hu...haiii raaaammmm....!"

"haa,meri jaan.main hi chodunga tumhe..umra bhar chodunga..tumhari pyas main hi bujhaunga & tumhe Devalay ki rani banaunga...yaaaahhhhh..!",ramya bhaiya ji ke vado se aur khumari me aa gayi.uske jism ka ang-2 ab masti me hilore le raha tha & unki baato se paida hue josh ne uske mehboob ke lund ko uski chut me itna andar dhakel diya tha ki ab vo uski kokh pe chot kar raha tha.ramya ki chut bahut gili thi lekin fir bhi bhaiya ji ke lund ki motai kuchh zyada hone ki vajah se use khud ki chut aur failti mehsus ho rahi thi.lund ki ragad se uska bura haal tha & tabhi dono ke jismo ke sare bandh toot gaye.ramya ko kuchh hosh na tha,uske badan me bijli rom-2 se phutne lagi thi,uski chut me itna zyada maza paida hua tha ki uska dil bhar aya tha & uski aankhe khushi se chhalak uthi thi & apni siskariyo ke alawa use apne premi ki aah sunai di & thik usi waqt uski chut me vahi jana-pehchana garm & gila ehsas hua.dono sath-2 jhad chuke the,ab na jaddojehad thi na bechaini sirf sukun tha.

"Pata kaise chala us mechanic ke bare me?",Professor Dixit Divya ke sath vali seat pe baith gaye & jeep ka darwaza band kiya.

"professor,lutero ko andaza nahi tha ki van ke tires kitne kharab hain & jab achanak tires ne jawab diya hoga to unhe kisi pucnture wale ki zarurat mehsus hui hogi.ab jab van zyada chali nahi thi to maine andaza lagaya ki unhe ye kaam bhio vahi kahi aas-pas karana pada hoga fir naksha dekhne ke baad apne constables ko maine alag-2 mohallo me bhej diya.unhi me se 1 ne mujhe khabar di hai."

"1 baat bataiye,divya ji?"

"puchiye."

"aapke constables sabhi afsaro ke liye aisi mustaidi se kaam karte hain ya fir ye aapka asar hai?",professor fir se apne purane rang me aa raha tha.

"jo bhi aap samjhen.",divya ne bhi taka sa jawab diya.

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"khabar pakki hai na?"

"haan,sir.",us insan ne aas-paas dekha,"..vo apne 1 aadmi ke sath aa raha hai.Murshid bhi taiyyar baitha hai & vo apne khas aadmiyo ke sath us se raat 9 baje Pinky bar me milne wala hai."

"pinky bar me?"

"sir,uske ilake ke andar hai ye bar.",Ajit ke sath aye inspector ne kaha.

"magar fir bhi bar jaisi bheed wali jagah me vo aisi meeting karne ki kaise soch sakta hai?",vo mukhbir ki or ghuma,"khabar pakki hai na tumhari?"

"bilkul sahab,yakin na ho to aap mere paise bhi kaam ke baad dena."

"hun.",ajit ne inspector ko ishara kiya to usne mukhbir ko 1 lifafa thamaya & dono vaha se nikal pade.

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"vo akela hi aya tha madam & bahut jaldi macha raha tha.jab maine bola ki uske 2 tyre bilkul bekar ho chuke hain to vo fauran chala gaya & 4 naye tyres kharid ke le aaya.",mistri baat to divya & professor se kar raha tha magar uska dhyan us ladke pe tha jo 1 bade se tube ko pani se bhare tube me daal check kar raha tha.

"dekhne me kaisa tha vo?",

"lumba tha.."

"kitna?"

"aapke jitna hi hoga madam.."

"rang,moochhen..?",professor ne puchha.

"chhodiye,professor.aisa karte hain ise daftar bula lete hain fir apne artist se iske bataye huliye ka sketch taiyyar karwate hain."

"main dhandha chod ke kaise aaunga madam?"

"ab aana to padega hi,bhai kya kar sakte hain.apna mobile number do main tumhe fone karungi tab humare daftar aake zara us aadmi ki tasvir banvane me madad kar dena.",divya ne use apna visiting card diya,"..ye mera number hai kuchh naya pata chale to batana.",divya vaha se jane ko mudi.

"madam!",usne peechhe se aavaz di.

"bolo."

"madam,vo aya to akela tha magar uske mobile pe baar-2 fone aa raha tha & 1 baar baat karte hue vo ye bhi bola tha ki vo pinky bar me raat ko milega apni hi table pe.",fir jaise use kuch aur yaad aya,..haan,raat ke 9 baje ka time bola tha vo."

"kya?!suno,tab to tum abhi humare sath chalo.",divya us mistri ko le professor ke sath apne daftar rawana ho gayi.

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"hum sab sade kapdo me vaha jayenge..",ajit apne inspectors & hawaldaro ko sham ke operation ke liye taiyyar kar raha tha,"..murshid ki shakl to hum sab pehchante hain magar us hathyaro ke karobari ki shakl hume nahi pata.agar vo bar ke bahar humare khabri ki nazar me aata hai to vo hume ishara kar dega nahi to jab murshid us se milega to vo humari nazar me aa jayega.dhyan rahe hume dono ko range hatho pakadna hai..",kamre me baithe 2 inspector,2 sub-inspector & 5 hawaldar dhyan se ajit ko sun rahe the.sab ke sab pahunche nishanchi the & kisi ki bhi imandari pe aaj tak koi sawal nahi utha tha.

"..mera ishara milte hi sab 1-1 karke ya jodo me bar ke andar jayenge.mera maanana hai ki asal meeting bar ki imarat me kisi aur kamre me hogi isliye 1 aadmi pure operation ke dauran bahar hi khada rahega & kisi bhi khatre se hume aagah karega.aap sabhi apne-2 hathyar check kar lijiye.koi bhi apna niji hathyar istemal nahi karega.dhyan rahe,hum dushman ki maand me ghus rahe hain & ho sakta hai use hathyar ki kami na ho isliye aap bhi bharpur goliya rakhiyega & bahut soch-samajh ke unka istemal kariyega.koi sawal?",sabka 1 hi jawab tha nahi.

"ok.to aaplog ja sakte hain.hum 5 baje se bari-2 se bar ke bahar position lena shuru kar denge.umeed to yehi karta hu ki hume apne hathyaro ka istemal nahi karna pade lekin....",ajit 1 pal ko khamosh ho gaya,"..ok,gentleman.best of luck!",vo kamre se bahar nikal gaya.

"ouch..!"

"ohh..i'm sorry..!",apne khayalo me gum ajit kamre se nikla & samne se aati divya se takra gaya,"..divya..",divya & vo bilkul samne se takraye the & divya ki moti chhatiya ajit ke seene se dab gayi thi.divya ke peechhe aata professor bhi apne ko sambhal nahi paya & vo peechhe se divya se takra gaya & uska lund divya ki chaudi gand se ja laga.kuchh palo ke liye divya un 2 mardo ke beech dab gayi & us waqt use apne seene pe ajit ke seene ka dabav & gand pe professor ke lund ka dabav 1 sath mehsus hua.

jaha ajit ke jism ki chhuan ne use fir se beete,suhane dino ki yaad dila di vahi professor ke lund ka naya ehsas use hairat me dal gaya.lund khada nahi tha magar fir bhi us zara se lamhe me bhi divya ko uski lumbai ka andaza ho gaya tha & vo prabhavit hue bina na reh saki thi.

"sorry,divya.",ajit ne 1 pal ko uske haseen chehre ko dekha & vaha se chala gaya.

"but i'm not sorry.",cabin me ghuste hi professor ki mazakiya lehje vali aavaz gunji.

"ladki se takrate hain & uske liye sharminda bhi nahi hain!",divya ki muskan professor ko thodi zillat mehsus karane vali thi,"..aisi badtamizi ki aapse umeed to nahi thi mujhe!"

"aap jaisi khubsurat ladki ke karib kaun nahi aana chahega,officer.",professor kursi pe baith gaya,"..& maine jan bujh ke himaakat to ki nahi thi.ab uparwale ke karam se khaksar ne aapka ehsas pa liya iske liye vo shukraguzar hoga ya sharminda?!aap hi bataiye."

"vakai aap lafzo ke jadugar hain,professor.",aaj divya ka mood thoda thik tha.ajit se takrane se uske jism me 1 chah bhi jag uthi thi & use professor se baat karna aaj utna bura nahi lag raha tha,"chaliye,ye bataiye ki aap mujhe kaise pesh karenge?"

"ye to mujhe bhi abhi tak nahi malum.mujhe lagta hai maine abhi tak aapko puri tarah se jana nahi hai.",professor ki bebak nazre desk ke paar apni kursi pe baithi divya ke jism pe 1 baar upar se neeche tak fir gayi to divya ko un nazro ki tapish shiddat se mehsus hui.vo professor ki baat ka matlab samajh rahi thi.1 pal ko uske dil ne bola bhi ki isme bura kya hai,uski jawani & husn agar professor ki mardangi se milenge to usme harj kya tha lekin agle pal usne apne dil ko samjha ke shant kar diya.

"aur kitna janana chahte hain?'

"aap to mujhe vo kitab lagti hain,divya ji jisme har roz 1 naya safa jud jata hai & vo bhi utna hi anutha hota hai jitne ki pehle ke safe the.aapko to taumra padhu to bhi shayad yehi pyas rahegi ki thoda aur padh leta to karar aata.",tarif sun divya ka dil khushi se bhar utha par usne use professor pe zahir nahi hone diya.

"fir bhi kuch to socha hoga aapne ki kaise likhenge apni agli kitab?",usne professor ki gehri nigaho se nigahen chura li.unki tapsih use bekal kar rahi thi.

"socha hai ya yu kahu socha to pehle hi tha.DCP Verma ka shukraguzar hu ki aapse mulakat karwa di.",professor mez pe hath rakh thoda aage jhuk gaya.uska chehra sanjida ho chuka tha,"yakin maniye,divya ji maine jaisi heroine ke bare me socha tha aap hu ba hu vaisi hain balki us se bhi kahi zyada hasin & himmati.bas 1 pareshani hai.",vo vapas peeche ho apni kursi me aaram se baith gaya.

"kya?",divya thoda pareshan ho gayi.

"darta hu kahunga to aap shayad sach me khafa ho jayen & main aapke sath se mehrum ho jaoon."

"aisi bhi kya baat hai?"

"1 kaam karte hain.aapne meri kitaben padhi hain?"

"haan.2-3."

"kaun-2 si?",divya ne use naam bataye

"ye to vo kitaben hai jinhe maine apne shuruati dino me likha tha.aapne meri vo kitabe to padhi hi nahi hai jo sabse zyada biki hain.",vo utha & kone ke cupboard ko khol apna bag nikala.roz savere professor apne bag ke sath aata & agar divya busy hoti to vo apne laptop pe kaam karta rehta.

"ye lijiye divya ji..",professor ne 1 kitab nikali & uspe kuchh likh ke divya ko thamaya,"..pehle aap ye kitab padhiye fir main apko apni pareshani ke bare me bataunga."

"Angaron Ki Sej!isme se romance ki bu aa rahi hai professor.",divya hansi.

"aap romance se parhej karne vali to lagti nahi?",divya bas muskurayi & kitab kholi & pehle panne pe likhi professor ki ibarat padhi,"husn & himmat ke sangam ki nazar-Ajinkya Dixit",divya ke gulabi galo me halki si lali & ghul gayi.professor ki nigaho ne ye dekha & uska dil bhi khushi se bhar utha.

"aapki pareshani jaanane ke liye to mujhe ise padhna hi padega.vaise zara iski kahani ke bare me kuchh bataiye."

"ji.ye 1 ladki ki kahani hai jiski zindagi me ishq tofan le aata hai & kaise use paheliya suljhani padti hain.divya j,aap kahani ki heroine ko gaur se padhiyega fir main aapse apni pareshani ke bare me baat karunga."

"ok.",tabhi darvaze pe dastak hui & 1 hawaldar aya,"bolo."

"madam,sketch taiyyar ho gaya hai.",uski baat puri hone se pehle h professor & divya cabin ke bahar the.

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क्रमशः...........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--18

गतान्क से आगे..............

"चूसो..और ज़ोर से..हाआन्न.....ऐसे नही..हां..ऐसे....हाईईईई.....चोदो,अजीत चोदो अपनी दिव्या को!",दिव्या की चूचियो की चुभन ने अजीत को गुज़रा ज़माना याद दिला दिया था.वो आँखे बंद किए उसके साथ की गयी चुदाइयो के बारे मे सोच रहा था.

मेघना खूबसूरत थी & बिस्तर मे उसका पूरा साथ देती थी लेकिन जो आग & जो जोश दिव्या मे था वो उसका मुक़ाबला कभी नही कर सकती थी.ऐसा नही था की वो मेघना के साथ खुश नही था,बहुत खुश था,उसके बगैर जीने की तो वो सोच भी नही सकता था लेकिन दिव्या..वो तो और भी हसीन और दिलकश हो गयी थी & आज उस से टकराने के बाद उसने वो ख्वाहिश अजीत के दिल मे फिर से जगा दी थी जिसे उसने मरा हुआ समझ लिया था.उसका दिल 1 बार फिर दिव्या के जिस्म के साथ की माँग कर रहा था & उसे समझ नही आ रहा था की वो उसको समझाए कैसे.

"सर,घर आ गया.",ड्राइवर की आवाज़ से वो होश मे आया.

"हूँ.",वो गाड़ी से उतर घर के अंदर चला गया.

"हाई!",मुस्कुराती मेघना नौकर के साथ खाना लगा रही थी.

"हेलो!",अजीत अपने बेडरूम मे चला गया & अपने कपड़े उतारने लगा.उसे पिंकी बार के बाहर 6 बजे पहुचना था.5 बजे से बाकी टीम वाले उसे रिपोर्ट करना शुरू करने वाले थे.तब तक वो थोड़ा वक़्त सुकून से बिताना चाहता था.

"क्या बात है?परेशान लग रहे हो.",मेघना ने कमीज़ उतारते अजीत को पीछे से बाहो मे भर लिया & हसरत से उसके सीने के बालो मे हाथ फिरा दिए.

"नही तो.थोड़ा थक गया था.",अजीत ने कमीज़ अलमारी मे टांगी तो मेघना ने उसे अपनी बाहो से आज़ाद कर दिया.

"मैने नौकरो को उनके क्वॉर्टर मे भेज दिया है.",अजीत अलमारी बंद कर के घुमा तो देखा की उसकी प्यारी बीवी जिसने की आज लंबी.ढीली स्कर्ट & 1 गोल गले का टॉप पहना था बिस्तर के कोने पे बैठी शोखी से मुस्कुरा रही है,"..लेकिन तुम तो थक गये हो.",उसने बनावटी आह भरी,"..उन्हे बुला के घर का बाकी काम करवा लेती हू."

अजीत मेघना के करीब आया & उसकी दाई तरफ खड़ा हो गया.उसने अपना दाया हाथ उसके दाए गाल पे लगा दिया & प्यार से सहलाने लगा.मेघना ने मज़े मे आँखे बंद कर ली & अपना गाल अपने पति के हाथ पे रगड़ने लगी.अजीत उसके गाल को सहलाता हुआ थोड़ा और करीब आ गया & अपना दाया अंगूठा उसके होंठो पे फिराने लगा.मेघना उसे चूम रही थी.पल-2 उसकी मस्ती बढ़ती जा रही थी.

अजीत ने अंगूठा उसके होंठो के अंदर किया तो मेघना आँखे बंद किए-2 उसे चूसने लगी.अजीत बाए हाथ से उसके बालो से खेल रहा था.अंगूठा चुस्ती मेघना को देख उसे अपनी पुरानी प्रेमिका का ख़याल आ गया.ऐसे पॅलो मे दिव्या बेबाकी से उसकी निगाहो से अपनी निगाहें मिला देती थी & उसका जोश & बढ़ जाता था.उसने मेघना के बँधे बाल खोल दिए तो वो उसकी पीठ पे लहरा गये.मेघना के बाल छ्होटे थे & बस कंधो से कुच्छ नीचे तक आते थे.अगर उसे अपनी बीवी मे कोई कमी नज़र आती थी तो वो यही थी,उसे लंबे बालो वाली लड़किया बड़ी अच्छी लगती थी जैसे कि दिव्या.

अजीत मेघना के और करीब आ गया था.मेघना ने आँखे खोली तो पति के बालो भरे पेट को अपनी नज़रो के सामने पाया.उसने पलके उपर की तो अजीत ने आँखो से इशारा किया तो मेघना की आँखे शर्म से झुक गयी.दोबारा पलके उठाने पे उसने अजीत को अपना इशारा दोहराते पाया.शर्म से मुस्कुराती मेघना ने बाए हाथ से अजीत का गाल पे रखा दाया हाथ थामा हुआ था.

उसने वैसे ही अंगूठा चूस्ते हुए दाए हाथ के अंगूठे & पहली उंगली से अजीत के पॅंट की ज़िप पकड़ी & उसे इस तरह नीचे किया की उसके हाथ का कोई भी हिस्सा अजीत के लंड को नही लगा.अजीत ने पॅंट उतार दी & मेघना को फिर से इशारा किया.उसके गालो का रंग और सुर्ख हो गया & उसका अंगूठा छ्चोड़ते हुए उसने अपना चेहरा अजीत के पेट मे च्छूपा लिया.

अजीत ने अपनी बीवी के हसीन चेहरे को हाथो मे भरा & नीचे झुक के उसके रसीले होंठो को चूमने लगा.पति की ज़ुबान ने मेघना को मस्त कर दिया & थोड़ी ही देर मे वो उसके मुँह मे अपनी जीभ घुसा के उसे शिद्दत से चूम रही थी.चूमते हुए अजीत ने मेघना का बाया हाथ पकड़ा & अपने अंडरवेर पे रख दिया.मेघना ने किस तोड़ी & लाजाते हुए हाथ खींच लिया.शादी को साल होने को आया था & मेघना अभी भी उसके लंड को छुने,पकड़ने मे शर्मा जाती थी.अजीत ने दोबारा उसका हाथ पकड़ के अपने अंडरवेर पे रखा तो इस बार मेघना ने शरमाते हुए उसे नीचे कर दिया.अजीत का 7.5 इंच का लंड उसकी आँखो के सामने तना खड़ा था.मेघना ने शर्मा के चेहरा फेर लिया.

अभी दिव्या होती तो टूट पड़ती इस लंड पे..लंड चूस्ते वक़्त उसकी आँखो का भाव..अफ....अजीत दिव्या की हर्कतो को याद कर पागल हो उठा.उसने मेघना को बाहो मे भर बिस्तर से उठाया & उसे चूमने लगा.पति के नंगे जिस्म से चिपकी मेघना अब आहे भरने लगी थी.अजीत उसे लिए-दिए बिस्तर पे लेट गया & उसका दाया हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया.मेघना ने हाथ खींचना चाहा मगर अजीत ने उसकी 1 ना सुनी.मेघना ने शरमाते हुए लंड पकड़ा & हिलाने लगी.

"ये तुम्हारा ही तो है..",अजीत & मेघना 1 दूसरे को देखते हुए करवट से लिपटे लेटे थे,"..फिर इसे छुने मे इतना शरमाती क्यू हो?",अजीत उसकी गर्दन चूम रहा था & उसका दाया हाथ मेघना की स्कर्ट के अंदर घुस उसकी मखमली जाँघो पे मचल रहा था.

"तो बेशर्म बन जाऊं & खुद ही थाम लिया करू क्या?!",शरारत से जवाब देते हुए मेघना अपनी ही बात पे शर्मा गयी.अजीत का हाथ उसकी पॅंटी मे घुस उसकी गंद की बाई फाँक को दबा रहा था.

"नेकी & पुच्छ-2!",अजीत ने पॅंटी नीचे सर्काई & गंद की फाँक को मसल्ते हुए गंद की दरार पे अपना हाथ चलाया & फिर पीछे से उसकी गीली चूत मे 2 उंगलिया घुसा दी.

"ऊहह..!",मेघना पति की गिरफ़्त मे कसमसाई,"..आराम से करो ने..हाईईईई..!",अजीत उसकी चूत कुरेदे जा रहा था & टॉप के उपर से ही उसकी चूचियो को अपने दन्तो से बहुत हल्के-2 काट रहा था.

"आज तो वो करो ना!",अजीत अपनी नाक को उसकी चूचियो मे रगड़ते हुए उसकी चूत मे उंगली अंदर-बाहर कर रहा था.

"उन..हुंग..!".मेघना ने इनकार किया & अपना चेहरा बिस्तर मे च्छुपाने लगी.अजीत जनता था कि वो ना ही करेगी मगर फिर भी उसने उसे लंड चूसने को पुचछा था.दिव्या से जुदा होने के बाद वो ये सुख तो भूल ही गया था.ना जाने क्यू मेघना को लंड मुँह मे लेने मे क्या परेशानी थी?उसे बहुत झुनझूलाहट होती थी मगर वो अपनी प्यारी बीवी के साथ ज़बरदस्ती तो नही कर सकता था ना!अजीत के ज़हन मे उसके लंड पे ज़ुबान चलाती दिव्या की तस्वीर उभर गयी.कभी-2 चुदाई के बाद वो उसके झाडे लंड को मुँह से सॉफ कर काई पलो तक चाटती रहती थी....ओह्ह..दिव्या!

"हाईईइ....धीरे..करो..नाआआआआआआअ..!",दिव्या की याद मे खोए अजीत की उंगलिया कब मेघना की चूत को और तेज़ी से रगड़ने लगी थी ये उसे भी पता नही चला था.झड़ती मेघना की चीख से वो होश मे आया & उसने अपनी उंगलिया उसकी चूत मे से खींच ली.अपनी बीवी की आँखो मे झाँकते हुए उसने उसके रस सी लिस्डी उंगलियो को चाट लिया तो मेघना उसकी इस हरकत से जज़्बाती हो उस से चिपक गयी & उसके चेहरे पे किस्सस की झड़ी लगा दी.
 
थोड़ी देर बाद अजीत ने उसे सीधा लिटाया & उसका टॉप निकालने लगा.अजीत के हाथ मेघना के कपड़ो को तेज़ी से निकाल रहे थे.जब ब्रा के खुलते ही मेघना की 36 साइज़ की चूचिया नुमाया हुई तो वो उनसे मुँह लगाके उसके उपर लेट गया.पता नही कितना वक़्त वैसे गुज़र गया & अजीत उसके सीने के उभारो से खेलता रहा.मेघना तो पड़ी हुई बस उसकी हर्कतो का लुत्फ़ उठा रही थी.अजीत उसकी चूचियो को कभी इतनी ज़ोर से दबाता की उसकी आँखे भींच जाती & वो चीख पड़ती तो कभी वो बस 1 उंगली से उसके निपल्स के गिर्द दायरे बनाने लगता & उस कोमल एहसास से उसके बदन मे मस्ती की लेहर फुट पड़ती जोकि सीधा उसकी चूत तक जाती.अजीत की ज़ुबान कभी बस उसके किशमिश के दानो जैसे कड़े निपल्स को यूही छेड़ते रहती तो कभी वो उसकी पूरी की पूरी चूची को अपने मुँह मे भरने की कोशिश करने लगता.उसकी इस हरकत पे वो अपना जिस्म बिस्तर से उठाती उसके बालो को खींचती जोश से पागल हो जाती.

ऐसा नही था की उसके सीने की गोलाईयो से खेलते हुए अजीत का ध्यान उसके बाकी जिस्म पे नही था.जब हाथ उसके सीने को छ्चोड़ते तो वो उसके नर्म पेट,मासूम चेहरे & गुदाज़ बाहो से खेलने लगते & जब ज़ुबान सीने से अलग होती तो हाथ उसकी जगह ले लेते & ज़ुबान बाकी जिस्म को भिगोने मे लग जाती.अजीत की हर्कतो से मेघना दोबारा झाड़ गयी.

दूसरी बार झाड़ते ही अजीत ने उसकी टाँगे उठा के अपने कंधो पे रखी & अपने घुटने पे बैठ अपने लंड को उसकी नाज़ुक चूत मे घुसाने लगा.मेघना अधमुंदी पॅल्को से अपने पति के लंड को अपने अंदर घुसते देख रही थी.अपने हाथो को अपने सर के बगल तकिये पे लगाए वो उसके शुरुआती धक्के सहने लगी.अजीत ने अपनी टाँगे पीछे बिस्तर पे फैला दी & अपने मज़बूत बाजुओ पे अपना वज़न संभाले उसकी चुदाई करने लगा.ऐसा करने से मेघना की गंद बिस्तर से उठ गयी थी & अजीत का लंड उसकी चूत मे काफ़ी गहरे जा रहा था.

"उउन्न्ञणन्....आननह..!".मेघना के हाथ अजीत के बाजुओ को सहलाने लगे.पति-पत्नी 1 दूसरे को 1 टक देखे जा रहे थे & अपना खेल खेल रहे थे.अजीत की नज़रो के सामने अभी भी दिव्या की सूरत घूम रही थी.चोद वो मेघना को रहा था मगर उसका दिल दिव्या को याद कर रहा था..उसका आहे भरने ..उसकी चट की हरकतें..उसके चेहरे के भाव....उसका लिपटना.."ओह्ह..अजीत...हान्णन्न्....!",मेघना ने उसकी बाहो से होते हुए अपने हाथ उसकी गर्दन मे डाल दिए थे & उसके सर को नीचे खींच अपने होंठ उसके होंठो से सटा दिए थे.जिस तरह से वो अपनी जीभ से उसकी जीभ को छेड़ रही थी अजीत समझ गया था कि वो झड़ने वाली है.उसने अपने धक्के थोड़े तेज़ कर दिए & उसे वैसे ही चूमता रहा.मेघना उसकी गर्दन को और नीचे किए जा रही थी & तभी उसने अपनी बिस्तर से पहले से ही उठी गंद को थोडा और उपर उठाके अजीत के धक्को का जवाब देना शुरू कर दिया.वो झाड़ रही थी & अजीत उसमे उसकी मदद कर रहा था.

"ओफफफ्फ़....!",मेघना ने झाड़ते ही अजीत की गर्दन छ्चोड़ दी & बिस्तर पे लेटी हुई उसकी चुदाई का मज़ा उठाने लगी.अजीत ने उसकी दाई टांग को अपने कंधे से उतारा & उसी जाँघ को सहलाते हुए अपने घुटनो पे बैठ के धक्के लगाने लगा.मेघना की बाई टांग अभी भी उसके दाए कंधे पे चढ़ि थी.उसकी चुदाई से हिलती मेघना की चूचियाँ 1 बार फिर उसे बीते दीनो मे ले गयी.दिव्या की चूचिया कितने मस्त अंदाज़ मे छल्छलाती थी & वो उन्हे मसल-2 के पागल हो जाता था.

उसने दाए हाथ से मेघना की बाई चूची को पकड़ा & अपने धक्के तेज़ कर दिए.1 बार फिर मेघना की आहे कमरे मे गूंजने लगी.अजीत अपने कंधे पे चढ़ि उसकी टांग को सहलाते हुए अपने दाए हाथ को उसके पेट से होता हुआ उसके सीने पे ले जाता & फिर उसके उभारो को दबाने लगता.मेघना अपने हाथो से अपने बालो को उलझाते हुए बिस्तर पे अपना सर बेचैनी से दाए-बाए घुमा रही थी.आज अजीत के धक्को का जोश उसकी हरकतो की गर्मी कुच्छ ज़्यादा ही थी & उसका मोम सा बदन तो बस पिघले जा रहा था.

"ओईइ..माआअ....हाईईईईई...नहियिइ.....!",अजीत का बाया हाथ चोद्ते हुए उसके गुलाबी दाने को जोकि मस्ती मे फूल सा गया था,रगडे जा रहा था & मेघना बेचैनी से अपनी कमर उच्छाल रही थी.जब वो दिव्या के दाने को ऐसे छेड़ता था तो वो तो ऐसी पागल हो जाती थी की उसे लगता था कि वो उसके काबू मे भी नही आएगी मगर मेघना के साथ ऐसा नही था.तेज़ आहे भरती वो तो उसके रहमो करम पे थी.अजीत ने उसकी दाई जाँघ पकड़ के थोड़ा सा उपर खींचा & बाए हाथ से उसके दाने को रगड़ते हुए अपने धक्के और तेज़ कर दिए.अब वक़्त आ गया था कि इस खेल को अंजाम तक पहुचेया जाए फिर उसे शाम को पिंकी बार भी तो जाना था.उसके नाडे बिल्कुल कस गये थे & मेघना की गंद पे हर धक्के के साथ लग रहे थे.उसने मेघना के दाने को ज़ोर से रगड़ते हुए ज़ोर के धक्के लगाए & उसकी दाई टांग से अपना मुँह लगा दिया.बिस्तर से गंद उठाती मेघना आहे भरती अपने हाथो से बिस्तर की चादर को बेचैनी से खींचती झाड़ रही थी & उसकी चूत को अजीत अपने लंड से पिचकारी की तरह निकलते वीर्य से भर रहा था.उसके होंठ मेघना की गोरी टांग से चिपके हुए थे.मेघना ने नशे से बोझल पॅल्को से मस्ती के लहरो के थपेड़े झेलते हुए अपने पति की ओर देखा जो उसकी टांग को पागलो की तरह चूमते हुए झटके खा रहा था.वो हल्के से मुस्कुराइ & आँखे बंद कर ली.

उसकी ये मुस्कान पल मे गायब हो जाती अगर उसने अपने पति के झाड़ते ही उसके मुँह से निकले नाम को सुना होता-दिव्या.वो तो भला हो उसकी गुदाज़ टांग का की अजीत के होंठो से निकला दिव्या का नाम उसके माँस मे दब गया.

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क्रमशः...........

 
KHEL KHILADI KA paart--18

gataank se aage..............

"chuso..aur zor se..haaaann.....aise nahi..haan..aise....haiiiii.....chodo,ajit chodo apni divya ko!",divya ki chhatiyo ki chubhan ne ajit ko guzra zamana yaad dila diya tha.vo aankhe band kiye uske sath ki gayi chudaiyo ke bare me soch raha tha.

Meghana khubsurat thi & bistar me uska pura sath deti thi lekin jo aag & jo josh Divya me tha vo uska muqabla kabhi nahi kar sakti thi.aisa nahi tha ki vo meghna ke sath khush nahi tha,bahut khush tha,uske bagair jeene ki to vo soch bhi nahi sakta tha ba lekin divya..vo to aur bhi haseen aur dilkash ho gayi thi & aaj us se takrane ke baad usne vo khwahish ajit ke dil me fir se jaga di thi jise usne mara hua samajh liya tha.uska dil 1 baar fir divya ke jism ke sath ki mang kar raha tha & use samajh nahi aa raha tha ki vo usko samjhaye kaise.

"sir,ghar aa gaya.",driver ki aavaz se vo hosh me aya.

"hun.",vo gadi se utar ghar ke andar chala gaya.

"hi!",muskurati meghna naukar ke sath khana laga rahi thi.

"hello!",ajit apne bedroom me chala gaya & apne kapde utarne laga.use Pinky Bar ke bahar 6 baje pahuchana tha.5 baje se baki team vale use report karna shuru karne vale the.tab tak vo thoda waqt sukun se bitana chahta tha.

"kya baat hai?pareshan lag rahe ho.",meghna ne kamiz utarte ajit ko peechhe se baaho me bhar liya & hasrat se uske seene ke balo me hath fira diye.

"nahi to.thoda thak gaya tha.",ajit ne kamiz almari me tangi to meghna ne use apni baaho se azad kar diya.

"maine naukro ko unke quarter me bhej diya hai.",ajit almari band kar ke ghuma to dekha ki uski pyari biwi jisne ki aaj lambi.dhili skirt & 1 gol gale ka top pehna tha bistar ke kone pe baithi shokhi se muskura rahi hai,"..lekin tum to thak gaye ho.",usne banawati aah bhari,"..unhe bula ke ghar ka baki kaam karwa leti hu."

Ajit Meghna ke karib aya & uski dayi taraf khada ho gaya.usne apna daya hath uske daye gaal pe laga diya & pyar se sehlane laga.meghna ne maze me aankhe band kar li & apna gaal apne pati ke hath pe ragadne lagi.ajit uske gaal ko sehlata hua thoda aur karib aa gaya & apna daya angutha uske hotho pe firane laga.meghna use chum rahi thi.pal-2 uski masti badhti ja rahi thi.

ajit ne angutha uske hotho ke andar kiya to meghna aankhe band kiye-2 use chusne lagi.ajit baye hath se uske baalo se khel raha tha.angutha chusti meghna ko dekh use apni purani premika ka khayal aa gaya.aise palo me Divya bebaki se uski nigaho se apni nigahen mila deti thi & uska josh & badh jata tha.usne meghna ke bandhe baal khol diye to vo uski pith pe lehra gaye.meghna ke baal chhote the & bas kandho se kuchh neeche tak aate the.agar use apni biwi me koi kami nazar aati thi to vo yehi thi,use lumbe balo vali ladkiya badi achhi lagti thi jaise ki divya.

ajit meghna ke aur karib aa gaya tha.meghna ne aankhe kholi to pati ke baalo bhaer pet ko apni nazro ke samne paya.usne palke upar ki to ajit ne aankho se ishara kiya to meghna ki aankhe sharm se jhuk gayi.dobara palke uthane pe usne ajit ko apna ishara dohrate paya.sharm se muskurati meghna ne baye hath se ajit ka gaal pe rakha daya hath thama hua tha.

usne vaise hi angutha chuste hue daye hath ke anguthe & pehli ungli se ajit ke pant ki zip pakdi & use is tarah neeche kiya ki uske hath ka koi bhi hissa ajit ke lund ko nahi laga.ajit ne pant utar di & meghna ko fir se ishara kiya.uske gaalo ka rang aur surkh ho gaya & uska angutha chhodte hue usne apna chehra ajit ke pet me chhupa liya.

ajit ne apni biwi ke haseen chehre ko hatho me bhara & neeche jhuk ke uske rasile hontho ko chumne laga.pati ki zuban ne meghna ko mast kar diya & thodi hi der me vo uske munh me apni jibh ghusa ke use shiddat se chum rahi thi.chumte hue ajit ne meghna ka baya hath pakda & apne underwear pe rakh diya.meghna ne kiss todi & lajate hue hath khinch liya.shadi ko saal hone ko aya tha & meghna abhi bhi uske lund ko chhune,pakadne me sharma jati thi.ajit ne dobara uska hath pakad ke apne underwear pe rakha to is baar meghna ne sharmate hue use neeche kar diya.ajit ka 7.5 inch ka lund uski aankho ke samne tana khada tha.meghna ne sharma ke chehra fer liya.

abhi divya hoti to toot padti is lund pe..lund chuste waqt uski aankho ka bhav..uff....ajit divya ki harkato ko yaad kar pagal ho utha.usne meghna ko baaho me bhar bistar se uthaya & use chumne laga.pati ke nanage jism se chipki meghna ab aahe bharne lagi thi.ajit use liye-diye bistar pe let gaya & uska daya hath pakad ke apne lund pe rakh diya.meghna ne hath khinchna chaha magar ajit ne uski 1 na suni.meghna ne sharmate hue lund pakda & hilane lagi.

"ye tumhara hi to hai..",ajit & meghna 1 dusre ko dekhte hue karwat se lipte lete the,"..fir ise chhune me itna sharmati kyu ho?",ajit uski gardan chum raha tha & uska daya hath meghna ki skirt ke andar ghus uski makhmali jangho pe machal raha tha.

"to besharm ban jaoon & khud hi tham liya karu kya?!",shararat se jawab dete hue meghna apni hi baat pe sharma gayi.ajit ka hath uski panty me ghus uski gand ki bayi fank ko daba raha tha.

"neki & puchh-2!",ajit ne panty neeche sarkayi & gand ki fank ko masalte hue gand ki darar pe apna hath chalaya & fir peechhe se uski gili chut me 2 ungliya ghusa di.

"oohhhh..!",meghna pati ki giraft me kasmasayi,"..aaram se karo ne..haiiiii..!",ajit uski chut kurede ja raha tha & top ke upar se hi uski chhatiyo ko apne danto se bahut halke-2 kaat raha tha.

"aaj to vo karo na!",ajit apni naak ko uski chhatiyo me ragadte hue uski chut me ungli andar-bahar kar raha tha.

"un..hunh..!".meghna ne inkar kiya & apna chehra bistar me chhupane lagi.ajit janta tha ki vo na hi karegi magar fir bhi usne use lund chusne ko puchha tha.divya se juda hone ke baad vo ye sukh to bhul hi gaya tha.na jane kyu meghna ko lund munh me lene me kya pareshani thi?use bahut jhunjhulahat hoti thi magar vo apni pyari biwi ke sath zabardasti to nahi kar sakta tha na!ajit ke zehan me uske lund pe zuban chalati divya ki tasvir ubhar gayi.kabhi-2 chudai ke baad vo uske jhade lund ko munh se saaf kar kayi palo tak chaatati rehti thi....ohh..divya!

"haiiii....dhire..karo..naaaaaaaaaaaaaaa..!",divya ki yaad me khoye ajit ki ungliya kab meghna ki chut ko aur tezi se ragadne lagi thi ye use bhi pata nahi chala tha.jhadti meghna ki chikh se vo hosh me aya & usne apni ungliya uski chut me se khinch li.apni biwi ki aankho me jhankte hue usne uske ras si lisdi ungliyo ko chaat liya to meghna uski is harkat se jazbati ho us se chipak gayi & uske chehre pe kisses ki jhadi laga di.

thodi der baad ajit ne use seedha litaya & uska top nikalne laga.ajit ke hath meghna ke kapdo ko tezi se nikal rahe the.jab bra ke khulte hi meghna ki 36 size ki choochiya numaya hui to vo unse munh lagake uske upar let gaya.pata nahi kitna waqt vaise guzar gaya & ajit uske seene ke ubharo se khelta raha.meghna to padi hui bas uski harkato ka lutf utha rahi thi.ajit uski choochiyo ko kabhi itni zor se dabata ki uski aankhe bhinch jati & vo chikh padti to kabhi vo bas 1 ungli se uske nipples ke gird dayre banane lagta & us komal ehsas se uske badan me masti ki lehar phut padti joki seedha uski chut tak jati.ajit ki zuban kabhi bas uske kishmish ke dano jaise kade nipples ko yuhi chhedte rehti to kabhi vo uski puri ki puri chhati ko apne munh me bharne ki koshish karne lagta.uski is harkat pe vo apna jism bistar se uthati uske baalo ko khinchti josh se pagal ho jati.

aisa nahi tha ki uske seene ki golaiyo se khelte hue ajit ka dhyan uske baki jism pe nahi tha.jab hath uske seene ko chhodte to vo uske narm pet,masoom chehre & gudaz baaho se khelne lagte & jab zuban seene se alag hoti to hath uski jagah le lete & zuban baki jism ko bhigone me lag jati.ajit ki harkato se meghna dobara jhad gayi.

dusri baar jhadte hi ajit ne uski tange utha ke apne kandho pe rakhi & apne ghutne pe baith apne lund ko uski nazuk chut me ghusane laga.meghna adhmundi palko se apne pati ke lund ko apne andar ghuste dekh rahi thi.apne hatho ko apne sar ke bagal takiye pe lagaye vo uske shuruati dhakke sehne lagi.ajit ne apni tange pane peechhe bistar pe faila di & apne mazbut bazuo pe apna vazan sambhale uski chudai karne laga.aisa karne se meghna ki gand bistar se uth gayi thi & ajit ka lund uski chut me kafi gehre ja raha tha.

"uunnnnn....aannhhhhh..!".meghna nke hath ajit ke bazuo ko sehlane lage.pati-patni 1 dusre ko 1 tak dekhe ja rahe the & apna khel khel rahe the.ajit ki nazro ke samne abhi bhi divya ki surat ghum rahi thi.chod vo meghna ko raha tha magar uska dil divya ko yaad kar raha tha..uska aahe bharne ..uski chut ki harkaten..uske chehre ke bhav....uska lipatna.."ohh..ajit...haannnn....!",meghna ne uski baaho se hote hue apne hath uski gardan me daal diye the & uske sar ko neeche khinch apne honth uske hotho se sata diye the.jis tarah se vo apni jibh se uski jibh ko chhed rahi thi ajit samajh gaya tha ki vo jhadne vali hai.usne apne dhakke thode tez kar diye & use vaise hi chunta raha.meghna uski gardan ko aur neeche kiye ja rahi thi & tabhi usne apni bistar se pehle se hi uthi gand ko thoda aur upar uthake ajit ke dhakko ka jawab dena shuru kar diya.vo jhad rahi thi & ajit usme uski madad kar raha tha.

"offff....!",meghna ne jhadte hie ajit ki gardan chhod di & bistar pe leti hui uski chudai ka maza uthane lagi.ajit ne uski dayi tang ko apne kandhe se utara & usi jangh ko sehlate hue apne ghutno pe baith ke dhakke lagane laga.meghna ki bayi tang abhi bhi uske daye kandhe pe chadhi thi.uski chudai se hilti meghna ki chhatiyo 1 baar fir use beete dino me le gayi.divya ki choochiya kitne mast andaz ma chhalchhalati thi & vo unhe masal-2 ke pagal ho jata tha.

usne daye hath se meghna ki bayi chhati ko pakda & apne dhakke tez kar diye.1 bar fir meghna ki aahe kamre me gunjne lagi.ajit apne kandhe pe chadhi uski tang ko sehlate hue apne daye hath ko uske pet se hota hua uske seene pe le jata & fir uske ubharo ko dabane lagta.meghna apne hatho se apne baalo ko uljhate hue bistar pe apna sar bechaini se daye-baye ghuma rahi thi.aaj ajit ke dhakko ka josh uski harakto ki garmi kuchh zyada hi thi & uska mom sa badan to bas pighle ja raha tha.

"ouiiii..maaaaa....haiiiiii...nahiiii.....!",ajit ka baya hath chodte hue uske gulabi dane ko joki masti me phool sa gaya tha,ragde ja raha tha & meghna bechaini se apni kamar uchhal rahi thi.jab vo divya ke dane ko aise chhedta tha to vo to aisi pagal ho jati thi ki use lagta tha ki vo uske kabu me bhi nahi ayegi magar meghna ke sath aisa nahi tha.tez aahe bharti vo to uske rehmo karam pe thi.ajit ne uski dayi jangh pakad ke thoda sa upar khincha & baye hath se uske dane ko ragadte hue apne dhakke aur tez kar diya.ab waqt aa gaya tha ki is khel ko anjam tak pahuchaya jaye fir use sham ko Pinky Bar bhi to jana tha.uske nade bilkul kas gaye the & meghna ki gand pe har dhakke ke sath lag rahe the.usne meghna ke dane ko zor se ragadte hue zor ke dhakke lagaye & uski dayi tang se apna munh laga diya.bistar se gand uthati meghna aahe bharti apne hatho se bistar ki chadar ko bechaini se khinchti jhad rahi thi & uski chut ko ajit apne lund se pichkari ki tarah nikalte virya se bhar raha tha.uske honth meghna ki gori tang se chipke hue the.meghna ne nashe se bojhal palko se masti ke lehro ke thapede jhelte hue apne pati ki or dekha jo uski tang ko paglo ki tarah chumte hue jhatke kha raha tha.vo halke se muskurayi & aankhe band kar li.

uski ye muskan pal me gayab ho jati agar usne apne pati ke jhadte hi uske munh se nikle naam ko suna hota-divya.vo to bhala ho uski gudaz tang ka ki ajit ke hotho se nikla divya ka naam uske maans me dab gaya.

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क्रमशः...........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--19

गतान्क से आगे..............

"मैं आज ही पिंकी बार जाके इसके बारे मे पुछुन्गि.",दिव्या पोलीस आर्टिस्ट के तैय्यार किए स्केच को गौर से देख रही थी.स्केच 1 लंबोत्रे चेहरे वाला शख्स जिसके बाल नॉर्मल साइज़ के थे & नाक भी खड़ी थी.उसके मुन्छ भी थी & उसके कान थोड़े बाहर को निकले थे,का था.बालो की माँग ठीक सर के बीचोबीच से निकाली गयी थी.दिव्या ने आर्टिस्ट से उस स्केच मे सर के बालो का स्टाइल बदलने को कहा & फिर मुच्छे साफ करने को.थोड़ी ही देर मे उसके पास उस शख्स के हर हुलिए मे 3-4 स्केचस थे.

"मैं भी आपके साथ चलूँगा.",प्रोफेसर डिक्सिट दिव्या के साथ उसके कॅबिन वापस आ गये थे.

"वाहा ख़तरा हो सकता है,प्रोफेसर."

"ये सीन तो मेरे उपन्यास मे ज़रूर होगा.",दिव्या ने सवालिया मुस्कान फेंकी.

"ऐसा अनोखा सीन पढ़ा है आपने कभी की कहानी की हेरोयिन हीरो को ख़तरनाक जगह साथ ले जाने से रोक रही है.आमतौर पे ये काम तो हीरो करता है!",दिव्या हंस पड़ी.

"जब हेरोयिन पोलिसेवाली हो तब ऐसा ही होता है प्रोफेसर."

"आज तो मेरी किस्मत खुल गयी!आपने मुझे अपना हीरो तो माना.",दिव्या सिर्फ़ मुस्कुरा दी.

"प्रोफेसर,मैं वाहा कुच्छ आदमियो के साथ जाउन्गी लेकिन वो सादे कपड़ो मे होंगे.वो बड़ा बदनाम इलाक़ा है & ऐसे मे मैं आपकी जान ख़तरे मे नही डाल सकती."

"प्लीज़,दिव्या जी.मैं अपनी हिफ़ाज़त खुद कर सकता हू.अब मैं अपने मुँह से अपनी तारीफ तो करूँगा नही कि मुझे क्या आता है & क्या नही.बस मुझे अपने साथ ले चलिए.प्लीज़!"

"ओके.लेकिन ज़रा भी गड़बड़ हुई तो आप मेरे बताए आदमी के साथ वाहा से निकल लेंगे.

"ओके."

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वो मोना के भाई के नये घर के बाहर खड़ा था.डेवाले शहर अपने पाँव पसार रहा था.रोज़ नये-2 लोग यहा रहने आ रहे थे & रोज़ नयी रिहाइशी कॉलोनीस बस रही थी.डेवाले विकास निगम ने शहर के बाहरी इलाक़े मे 1 बहुत बड़ा हाउसिंग प्रॉजेक्ट शुरू किया था जिसके तहत प्राइवेट बिल्डर्स ने कयि अप्रटमेंट बिल्डिंग्स बनाई थी पर अभी ये इलाक़ा जो नवीन खंड के नाम से जाना जाता था अभी पूरी तरह बसा नही था.इसी बात ने उसकी मुश्किल आसान कर दी थी.पास ही डेवाले मिल्क सर्विस(ड्म्स) का बहुत बड़ा प्लांट था जहा से हर वक़्त मिल्क टॅंकर्स & वॅन्स खड़े रहते थे.

ड्म्स के प्लांट के बाहर 1 बहुत बड़ा खाली प्लॉट था जो ड्म्स का ही था & वो उसे पार्किंग की तरह इस्तेमाल कर रहा था.इसी पार्किंग मे वो बड़े आराम से अपनी वॅन च्छूपा सकता था & इन खाली पड़े अपार्टमेंट्स मे से किसी 1 को वो अपना ठिकाना बना सकता था.वो वाहा से फ़ौरन शहर की ओर चल पड़ा.अब उसे जल्द से जल्द 1 वॅन ख़रीदनी थी & जसजीत प्रधान & उसके परिवार वालो के आने-जाने की जगहे देखनी थी.

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पिंकी बार शहर के सबसे बदनाम मोहल्ले की शान था.नसीबपुरा का इलाक़ा अपने कोतो के लिए जाना जाता था.जुर्म की दुनिया के बाशिंदे & समाज के हाशिए पे रहने वाले वो लोग जिन्हे हम बुरा कहते हैं सब यही रहते थे & इसी नसीबपुरा के बीचोबीच उसकी मैन सड़क पे था पिंकी बार.

बार के सामने की चार मंज़िला इमारत की दूसरी मंज़िल से अजीत बार का मैन गेट देख रहा था.बार बस 1 एक्मन्ज़िला इमारत थी & इस वक़्त रात के 8 बजे वाहा बहुत गहमागहमी थी.अजीत के साथी बार के आस-पास फैले हुए थे & 2 बार के अंदर बैठे थे.सभी के कानो मे मोबाइल का हेडसेट ये हंडसफ़री की थी.

"सर,मुर्शिद अपने आदमियो के साथ आ गया है.",अजीत ने खिड़की से देखा 1 मंझोले कद का चुस्त आदमी पठान सूट पहने 4 आदमियो के साथ बार मे दाखिल हुआ.पाँचो के अंदर जाते ही उनकी गाड़ी बार के दूसरी तरफ अजीत की इमारत के नीचे खड़ी हो गयी,उस गाड़ी के अंदर 2 आदमी थे.

"राम,तुम्हारी ड्यूटी बाहर की है.ज़रा भी ख़तरा होते ही तुम गाड़ी के टाइर्स को पंक्चर करोगे & ज़रूरत पड़ी तो कार मे बैठे दोनो गुणडो को भी."

"यस,सर."

"अब मैं अंदर जा रहा हू.",5 मिनिट बाद 1 सस्ती चेक की शर्ट & जीन्स मे अजीत बार के अंदर दाखिल हो गया था.पूरे बार मे रंगीन लाइट्स जल रही थी.1 तरफ काउंटर था जहा से 1 तगड़ा शख्स वेटर्स को उनका ऑर्डर थमा रहा था.हर तरफ टेबल्स लगे थे जिनके गिर्द बैठे लोग शराब पी रहे थे.पूरे बार मे सिगरेट का धुआ भरा था.उस धुए को सूंघते ही अजीत समझ गया कि केवल साधारण सिगरेट नही चरस & हशीश भी यहा पी जा रही थी.बार के दरवाज़े से घुसते ही सामने की दीवार से लगा 1 बत्तियो वाला स्टेज था वैसा ही जैसा शादी-ब्याह मे डीजे लेक फ्लोर लगते हैं.उस फ्लोर के उपर छत से डिस्को लाइट्स चमक रही थी & फ्लोर के पीछे की दीवार पे बड़ा सा वाइनाइल पोस्टर लगा था जिसपे गुलाबी रंग मे पिंकी बार छपा था.

अजीत के घुसते ही वाइनाइल पोस्टर के बगल मे लगे पर्दे के पीछे से 4 लड़किया निकली & स्टेज पे नाचने लगी.म्यूज़िक सिस्टम पे तेज़ आवाज़ मे 1 चालू गाना बज रहा था.लड़कियो के लिबास या तो छ्होटे थे या तंग.अजीत समझ गया की यहा जिस्म्फरोशी भी होती है.टेबल पे बैठे लोग वेटर्स के ज़रिए नाचती लड़कियो से मोल-भाव कर रहे थे. जब कोई लड़की किसी ग्राहक के साथ बाहर चली जाती तो उसकी जगह पर्दे के पीछे से निकल के नयी लड़की ले लेती.

"सर..",अजीत के कानो मे हंडसफ़री खड़खदाया,"..ये लड़किया अपने ग्राहको के साथ बार से कुच्छ 40 मीटर की दूरी पे बार की ही लाइन मे 3 बिल्डिंग छ्चोड़ के 1 3 मंज़िली इमारत मे जा रही हैं."

"ओके,राम.तुम मुस्तैद रहो.",अजीत फुसफुसाया,"..1 बियर.",उसने 1 टेबल पे बैठ के ऑर्डर दिया.

"खाने को क्या लोगे?"

"1 चिकन तिक्का ले आ."

"तुमलोग ज़रा इस बार के पीछे का हिस्सा चेक करो.कोई पीछे का दरवाज़ा है तो कैसा है?",अपनी कोहनियो को मेज़ पे टीका हाथो को होतो के सामने बँधे अजीत बुदबुदा रहा था.

"सर,पीछे 1 गली जिसमे मुर्शिद के आदमी पहरा दे रहे हैं.1 दरवाज़ा है जिसमे से केवल लड़किया अंदर जा रही हैं."

"ठीक है.तुमलोग अभी किसी की नज़र मे मत आना.",वेटर बियर की बॉटल लेके आया & खोल के उसके सामने उसे ग्लास मे धारा & टिक्के की प्लेट के साथ रख दिया.अजीत ने 1 घूँट भरा तभी उसकी आँखे हैरत से फॅट गयी.अभी-2 दिव्या बार मे दाखिल हुई थी.उसने बहुत मेक-अप कर रखा था & काले रंग का बड़ा भड़काव सा चमकता,स्लीव्ले टॉप पहन रखा था.नीचे काली स्किन-टाइट जीन्स थी & पूरा लिबास उसके जिस्म से चिपका हुआ था.उसके साथ 1 अधेड़ उम्र का शख्स था.

अजीत ने उसे दफ़्तर मे भी देखा था..क्या दिव्या भी यहा किसी केस के लिए आई है.उस्ने अपने चेहरा अपने हाथो मे ऐसे च्छूपा लिया मानो वो बहुत परेशान हो फिर उंगलियो को ज़रा सा फैलाया & दिव्या को देखा.दोनो काउंटर पे बैठे मुस्टंडे से कुच्छ बाते कर रहे थे.

"सलाम,भाई.बंदे को राजू कहते हैं.",प्रोफेसर दीक्षित मुस्कुराया,"..& ये अपनी आइटम है.बात ये है बड़े भाई की अपुन उधर शांति नगर के इलाक़े मे काम करता है."

"तो यहा क्यू आया है चुतिये?",मुस्टंडे ने 4 विस्की के ग्लास 1 वेटर को पकड़ाए.

"भाई,अपनी आइटम कुच्छ दिन यहा काम की थी & 1 भदवे ने इसका पैसा मार लिया.साला 2 रात इसको बजाया & बोला की पैसा अभी देता है & फिर गायब हो गया.ज़रा मदद करो ना भाई.",प्रोफेसर इस वक़्त कमाल की आक्टिंग कर रहा था.उसके कपड़े,बोलने का लहज़ा सब यही कह रहे थे कि वो 1 दलाल है.

"अबे,तुमने मुझे क्या आइटम लोगो का इनिस्पेक्टोर समझ रखा है,चल केट ले!",उसने वेटर से झूठे ग्लास ले पीछे बनी खिड़की मे सरका दिए,"..धंधे के टाइम दिमाग़ मत चाट.चल फुट!"

"क्या भाई!भाई भाई के काम नही आएगा.वो नागेश बोला तुम मदद करेगा तो मैं आया."

"वो साला भोंसड़ी का,खुद भी टाइम खोटी करता है & खोटी करने को 2 चूतिया अलग से भेजता है."

"आए,कुत्ते!गाली क्यू देता है बेहेन्चोद!",दिव्या गुस्से मे आ गयी,"..मेहनत का पैसा लेने आई हू ना कि हराम का.बताना है तो बता वरना मर साले!"

"आए,तो उसी वक़्त लेना था ना पैसा.अब अभी चिल्लाने से क्या होगा?!वो साला तो तेरी लेके चला गया तू यहा बैठी रह घंटा पकड़ के!",उसने 2-3 वेटर्स के ऑर्डर सुन के उन्हे थमाए & उनसे पैसे लेके अपने गल्ले मे डाले,"..चल बता वो कौन था?नाम जानती है कि नही?",दिव्या ने उसका हुलिया बताया तो वो मुस्टंडा सोच मे पड़ गया.
 
"तू यहा कैसे काम की रे?",मुस्टंडे के माथे पे शिकन थी,"..कौन था तेरा दल्ला?"

"रोज़ी लाई थी अपुन को फिर मैं शांति नगर शिफ्ट हो गयी."

"हूँ,रोज़ी यानी कल्लू..कहा है दोनो?"

"क्या रे तू मेरे को चेक कर रहा है ना?रोज़ी तो अपने गाँव गयी है & कल्लू भी उसके साथ है.",दिव्या पूरी तैय्यारि के साथ आई थी.

"अच्छा,मेरी मा,चल बता कौन था वो?",दिव्या ने उसका हुलिया बताया तो वो सोच मे पड़ गया.

"हाँ,आता तो था ऐसा 1 बंदा बीच मे & उसके साथ 1 जवान लड़का भी आता था.इधर दोनो दिखे नही.",उसने 1 वेटर के दिए पैसे गिने,"चल तू फ़िक्र मत कर अपना नंबर दे वो कमीना दिखा तो मैं तेरे को बुला लेगा."

अजीत की 1 नज़र दिव्या & प्रोफेसर पे थी तो दूसरी मुर्शिद की टेबल पे.उसे पता नही था लेकिन इस तरह से आने का आइडिया प्रोफेसर का था क्यूकी उसका मानना था कि पिंकी बार जिसका सारा धंधा गुंडे,मवालीयो से चलता था,उसका कोई भी मुलाज़िम पोलीस को देखते ही अपना मुँह बंद कर देगा.

तभी उसने देखा की मुर्शिद चौकन्ना हो उठा है,उसकी नज़र दरवाज़े पे गयी जहा की हल्की लाल रोशनी मे अंदर आते 2 लोगो का चेहरा उसे ठीक से दिखाई नही दिया,"..लगता है शिकार आ गया.",वो फुसफुसाया.

तभी डिस्को लाइट्स झिलमिलाने लगी & म्यूज़िक तेज़ हो गया.चमचमाती लाइट मे अजीत ने देखा की मुर्शिद & उसके साथी उस पर्दे की ओर बढ़ रहे हैं जहा से लड़किया अंदर बार मे आके नाच रही थी.वो उठा & उनके पीछे हो लिया.

"तू ऐसा क्यू नही करती?",मुस्टंडा लगभग चीख रहा था,"..वो जिसने तेरे पैसे खाए है ना उसके साथ 1 चिकना जवान आता था जो गुलाबो का दीवाना हो गया था..अबे गुलाबो किधर है?",उसने 1 वेटर को बोला.

"कस्टमर को हल्का करने गयी है."

"तू वाहा लॉड्ज पे जा & वाहा लुक्खा खड़ा होगा उसको बोल कि वो गुलाबो से तुझे मिलवा दे.",म्यूज़िक के कानफ़ादू शोर के उपर से वो बोला.

अजीत नज़र बचा के मुर्शिद के पीछे हो लिया था.वो पाँचो बार के पीछे बने कमरे से होते हुए जा रहे थे.कमरे मे कोई 10-15 लड़किया बैठी थी & पीछे के दरवाज़े से और अंदर आ रही थी.ये बार तो रणडिबाज़ी का बहुत बड़ा अड्डा था!मुर्शिद तेज़ी से बाहर के दरवाज़े की ओर जा रहा था.उस कमरे मे कुच्छ तगड़े मर्द खड़े थे,अजीत समझ गया कि ये बार के बआउन्सर है क्यूकी वैसे ही 4-5 मुस्टंडे बार के अंदर भी खड़े थे.मुर्शिद के पीछे जाना उन मुस्टांडो को लड़ाई का न्योता देना था & सारा ऑपरेशन खटाई मे पड़ सकता था.

"पीछे के दरवाज़े से मुर्शिद निकल रहा है.नज़र रखो.मैं बाहर आ रहा हू.",फुसफुसाता अजीत पलटा & वापस बार मे आया,उसने देखा दिव्या भी वाहा नही थी..अच्छा हुआ चली गयी..यहा कुच्छ भी हो सकता था & वो उसे ख़तरे मे नही देखना चाहता था.

"सर,वो पीछे की गली मे आगे जा रहा है."

"उधर ही जिधर वो लड़किया ग्राहको के साथ जा रही हैं?"

"जी."

"सब उधर ही चलो."

जब अजीत अंदर गया था दिव्या प्रोफेसर के साथ बार से निकल आई थी,"अब ये लॉड्ज क्या है?"

"श्ह..वो देखिए.",बार से 1 लड़की निकली & अपने ग्राहक के साथ आगे बढ़ गयी,"..उनके पीछे चलिए.",प्रोफेसर ने दिव्या की पतली कमर मे बाँह डाल उसे अपने से चिपका लिया.दिव्या कुच्छ बोलती उस से पहले ही उसे 1 मुस्टंडा खड़ा दिखा.

"साले,इतना उतावला क्यू हो रहा है.सड़क पे ही हल्का होगा क्या?",प्रोफेसर के सख़्त हाथ के दबाव ने दिव्या के बदन मे झुरजुरी पैदा कर दी.उसने खुद को संभाला & उसे धकेलते हुए हँसी & दोनो उस रंडी & उसके ग्राहक के पीछे बढ़ गये.

"क्या?मामू भेजा तेरे को?",रमेश लॉड्ज के बाहर खड़े लुक्खा ने दोनो को सर से पाँव तक घूरा.

"तो और क्या मौसी भेजी!",दिव्या ने ताड़ से जवाब दिया.

ठीक उसी वक़्त उस लॉड्ज के पीछे के दरवाज़े से मुर्शिद & उसके साथी दाखिल हुए.

"इस इमारत को घेर लो.मैं 3 लोगो के साथ अंदर जाऊँगा.सारे एंट्री & एग्ज़िट पायंट्स पे कड़ी नज़र रखो.1 भी हमारे हाथ से बचना नही चाहिए.",अजीत 1 इमारत की ओट मे खड़ा मुर्शिद को अंदर जाते देख रहा था.

"गुलाबो तो अभी लगी हुई है अंदर."

"कौन से कमरे मे है बता दे?वही बाहर खड़ी हो जाऊंगी."

"ठीक है जा,पहली मंज़िल रूम नंबर103."

"अरे सुन..",दिव्या & प्रोफेसर ठिठक गये.वो पास आया & दिव्या को सर से पाँव तक देखने लगा,"..तू कहा बैठती है?"

"शांति नगर मे.",दोनो डर गये थे कि कही उसे शक़ तो नही हो गया था.

"आएगा मैं उधर 1-2 दिन मे तू अपना अड्डा बता ना.तेरे साथ ही पार्टी करूँगा."

"चल हॅट,साले!",दिव्या ने आँख मारी,"..अभी लौटूँगी तो नंबर दूँगी.सीधा डाइरेक्ट मेरी गोद मे आ जाना.",दिव्या हंसते हुए प्रोफेसर के साथ अंदर चली गयी.लॉड्ज के हर कमरे मे चुदाई चल रही थी & रंडियो की बनावटी आहो की आवाज़े गूँज रही थी.

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क्रमशः...........

 
KHEL KHILADI KA paart--19

gataank se aage..............

"main aaj hi pinky bar jake iske bare me puchhungi.",divya police artist ke taiyyar kiye sketch ko gaur se dekh rahi thi.sketch 1 lambotre chehre vala shakhs jiske baal normal size ke the & naak bhi khadi thi.uske munchh bhi thi & uske kaan thode bahar ko nikle the,ka tha.baalo ki mang thik sar ke beechobeech se nikali gayi thi.divya ne artist se us sketch me sar ke balo ka style badalne ko kaha & fir muchhe saf karne ko.thodi hi der me uske paas us shakhs ke har huliye me 3-4 sketches the.

"main bhi aapke sath chalunga.",Professor Dixit divya ke sath uske cabin vapas aa gaye the.

"vaha khatra ho sakta hai,professor."

"ye scene to mere upanyas me zarur hoga.",divya ne sawaliya muskan fenki.

"aisa anokha scene padha hai aapne kabhi ki kahani ki heroine hero ko khatarnak jagah sath le jane se rok rahi hai.aamtaur pe ye kaam to hero karta hai!",divya hans padi.

"jab heroine policevali ho tab aisa hi hota hai professor."

"aaj to meri kismat khul gayi!aapne mujhe apna hero to mana.",divya sirf muskura di.

"professor,main vaha kuchh aadmiyo ke sath jaungi lekin vo sade kapdo me honge.vo bada badnam ilaka hai & aise me main aapki jaan khatre me nahi dal sakti."

"please,divya ji.main apni hifazat khud kar sakta hu.ab main apne munh se apni tarif to karunga nahi ki mujhe kya aata hai & kya nahi.bas mujhe apne sath le chaliye.please!"

"ok.lekin zara bhi gadbad hui to aap mere bataye aadmi ke sath vaha se nikal lenge.

"ok."

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vo Mona ke bhai ke naye ghar ke bahar khada tha.Devalay shehar apne panv pasar raha tha.roz naye-2 log yaha rehne aa rahe the & roz nayi rihayishi colonies bas rahi thi.Devalay Vikas Nigam ne shehar ke bahri ilake me 1 bahut bada housing project shuru kiya tha jiske tehat private builders ne kayi aprtment buildings banayi thi par abhi ye ilaka jo Navin Khand ke naam se jana jata tha abhi puri tarah basa nahi tha.isi baat ne uski mushkil aasan kar di thi.paas hi Devalay Milk Service(DMS) ka bahut bada plant tha jaha se har waqt milk tankers & vans khade rehte the.

DMS ke plant ke bahar 1 bahut bada khali plot tha jo DMS ka hi tha & vo use parking ki tarah istemal kar raha tha.isi parking me vo bade aaram se apni van chhupa sakta tha & in khali pade apartments me se kisi 1 ko vo apna thikana bana sakta tha.vo vaha se fauran shehar ki or chal pada.ab use jald se jald 1 van kharidni thi & Jasjit Pradhan & uske parivar valo ke aane-jane ki jagahe dekhni thi.

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pinky bar shehar ke sabse badnam mohalle ki shan tha.Nasibpura ka ilaka apne kotho ke liye jana jata tha.jurm ki duniya ke bashinde & samaj ke hashiye pe rehne vale vo log jinhe hum bura kehte hain sab yehi rehte the & isi nasibpura ke beechobeech uski main sadak pe tha pinky bar.

bar ke samne ki char manzila imarat ki dusri manzil se ajit bar ka main gate dekh raha tha.bar bas 1 ekmanzila imarat thi & is waqt raat ke 8 baje vaha bahut gehmagehmi thi.ajit ke sathi bar ke aas-pas faile hue the & 2 bar ke nadar baithe the.sabhi ke kano me mobile ka headset ye handsfree kit thi.

"sir,Murshid apne aadmiyo ke sath aa gaya hai.",ajit ne khidki se dekha 1 manjhole kad ka chust aadmi pathan suit pehne 4 aadmiyo ke sath bar me dakhil hua.pancho ke andar jate hi unki gadi bar ke dusri taraf ajit ki imarat ke neeche khadi ho gayi,us gadi ke andar 2 aadmi the.

"Raam,tumhari duty bahar ki hai.zara bhi khatra hote hi tum gadi ke tires ko puncture karoge & zarurat padi to car me baithe dono gundo ko bhi."

"yes,sir."

"ab main andar ja raha hu.",5 minute baad 1 sasti check ki shirt & jeans me ajit bar ke andar dakhil ho gaya tha.pure bar me rangin lights jal rahi thi.1 taraf counter tha jaha se 1 tagda shakhs waiters ko unka order thama raha tha.har taraf tables lage the jinke gird baithe log sharab pi rahe the.pure bar me cigarette ka dhua bhara tha.us dhue ko sunghte hi ajit samajh gaya ki keval sadharan cigarette nahi charas & hashish bhi yaha pi ja rahi thi.bar ke darwaze se ghuste hi samne ki deewar se laga 1 battiyo vala stage tha vaisa hi jaisa shadi-byah me DJ lake floor lagate hain.us floor ke upar chhat se disco lights chamak rahi thi & floor ke peechhe ki deewar pe bada sa vinyl poster laga tha jispe gulabi rang me Pinky bar chhapa tha.

ajit ke ghuste hi vinyl poster ke bagal me lage parde ke peechhe se 4 ladkiya nikli & stage pe naachne lagi.music system pe tez aavaz me 1 chalu gana baj raha tha.ladkiyo ke libas ya to chhote the ya tang.ajit samajh gaya ki yaha jismfaroshi bhi hoti hai.table pe baithe log waiters ke zariye naachti ladkiyo se mol-bhav kar rahe the.ajb koi ladki kisi grahak ke sath bahar chali jati to uski jagah parde ke peechhe se nikal ke nayi ladki le leti.

"sir..",ajit ke kano me handsfree khadkhadaya,"..ye ladkiya apne grahako ke sath bar se kuchh 40 metre ki duri pe bar ki hi line me 3 building chhod ke 1 3 manzili imarat me ja rahi hain."

"ok,raam.tum mustaid raho.",ajit phusphusaya,"..1 beer.",usne 1 table pe baith ke order diya.

"khane ko kya loge?"

"1 chicken tikka le aa."

"Tumlog zara is bar ke peechhe ka hissa check karo.koi peechhe ka darwaza hai to kaisa hai?",apni kohniyo ko mez pe tika hatho ko hotho ke samne bandhe Ajit budbuda raha tha.

"sir,peechhe 1 gali jisme Murshid ke aadmi pehra de rahe hain.1 darwaza hai jisme se kewal ladkiya andar ja rahi hain."

"thik hai.tumlog abhi kisi ki nazar me mat aana.",waiter beer ki bottle leke aaya & khol ke uske samne use glass me dhara & tikke ki plate ke sath rakh diya.ajit ne 1 ghunt bhara tabhi uski aankhe hairat se phat gayi.abhi-2 Divya bar me dakhil hui thi.usne bahut make-up kar rakha tha & kale rang ka bada bhadkau sa chamakta,sleeveless top pehan rakha tha.neeche kali skin-tight jeans thi & pura libas uske jism se chipka hua tha.uske sath 1 adhed umra ka shakhs tha.

ajit ne use daftar me bhi dekha tha..kya divya bhi yaha kisi case ke liye aayi hai.suen apne chehra apne hatho me aise chhupa liya mano vo bahut pareshan ho fir ungliyo ko zara sa failaya & divya ko dekha.dono counter pe baothe mustande se kuchh baate kar rahe the.

"salam,bhai.bande ko Raju kehte hain.",Professor Dixit muskuraya,"..& ye apni item hai.baat ye hai bade bhai ki apun udhar Shanti nagar ke ilake me kaam karta hai."

"to yaha kyu aaya hai chutiye?",mustande ne 4 whisky ke glass 1 waiter ko pakdaye.

"bhai,apni item kuchh din yaha kaam ki thi & 1 bhadwe ne iska paisa maar liya.sala 2 raat isko bajaya & bola ki paisa abhi deta hai & fir gayab ho gaya.zara madad karo na bhai.",professor is waqt kamal ki acting kar raha tha.uske kapde,bolne ka lehja sab yehi keh rahe the ki vo 1 dalal hai.

"abe,tumne mujhe kya item logo ka inispector samajh rakha hai,chal kate le!",usne waiter se juthe glass le peechhe bani khidki me sarka diye,"..dhandhe ke time dimag mat chaat.chal phut!"

"kya bhai!bhai bhai ke kaam nahi aayega.vo Nagesh bola tum madad karega to main aaya."

"vo sala bhonsdi ka,khud bhi time khoti karta hai & khoti karne ko 2 chutiya alag se bhejta hai."

"aye,kutte!gali kyu deta hai behenchod!",divya gusse me aa gayi,"..mehnat ka paisa dhundte ayi hu na ki haram ka.batana hai to bata varna mar sale!"

"aye,to usi waqt lena tha na paisa.ab abhi chillane se kya hoga?!vo sala to teri leke chala gaya tu yaha baithi reh ghanta pakad ke!",usne 2-3 waiters ke order sun ke unhe thamaye & unse paise leke apne galle me dale,"..chal bata vo kaun tha?naam janti hai ki nahi?",divya ne uska huliya bataya to vo mustanda soch me pad gaya.

"tu yaha kaise kaam ki re?",mustande ke mathe pe shikan thi,"..kaun tha tera dalla?"

"Rosy layi thi apun ko fir main Shanti nagar shift ho gayi."

"hun,rosy yani kallu..kaha hai dono?"

"kya re tu mere ko check kar raha hai na?rosy to apne ganv gayi hai & kallu bhi uske sath hai.",divya puri taiyyari ke sath ayi thi.

"achha,meri maa,chal bata kaun tha vo?",divya ne uska huliya bataya to vo soch me pad gaya.

"haan,aata to tha aisa 1 banda beech me & uske sath 1 jawan ladka bhi aata tha.idhar dono dikhe nahi.",usne 1 waiter ke diye paise gine,"chal tu fikr mat kar apna number de vo kamina dikha to main tere ko bula lega."

ajit ki 1 nazar divya & professor pe thi to dusri murshid ki table pe.use pata nahi tha lekin is tarah se aane ka idea professor ka tha kyuki uska maanana tha ki pinky bar jiska sara dhandha gunde,mawaliyo se chalta tha,uska koi bhi mulazim police ko dekhte hi apna munh band kar dega.

tabhi usne dekha ki murshid chaukanna ho utha hai,uski nazar darwaze pe gayi jaha ki halki laal roshni me andar aate 2 logo ka chehra use thik se dikhayi nahi diya,"..lagta hai shikar aa gaya.",vo phusphusaya.

tabhi disco lights jhilmilane lagi & music tez ho gaya.chamchamati light me ajit ne dekha ki murshid & uske sathi us parde ki or badh rahe hain jaha se ladkiya andar bar me aake nach rahi thi.vo utha & unke peechhe ho liya.

"tu aisa kyu nahi karti?",mustanda lagbhag chikh raha tha,"..vo jisne tere paise khaye hai na uske sath 1 chikna jawan aata tha jo Gulabo ka deewana ho gaya tha..abe gulabo kidhar hai?",usne 1 waiter ko bola.

"customer ko halka karne gayi hai."

"tu vaha lodge pe ja & vaha Lukkha khada hoga usko bol ki vo gulabo se tujhe milwa de.",music ke kaanphadu shor ke upar se vo bola.

ajit nazar bacha ke murshid ke peechhe ho liya tha.vo pancho bar ke peechhe bane kamre se hote hue ja rahe the.kamre me koi 10-15 ladkiya baithi thi & peechhe ke darwaze se aur andar aa rahi thi.ye bar to randibazi ka bahut bada adda tha!murshid tezi se bahar ke darwaze ki or ja raha tha.us kamre me kuchh tagde mard kahde the,ajit samajh gaya ki ye bar ke bouncer hai kyuki vaise hi 4-5 mustande bar ke andar bhi kahde the.murshid ke peechhe jana un mustando ko ladai ka nyota dena tha & sara operation khatai me pad sakta tha.

"peechhe ke darwaze se murshid nikal raha hai.nazar rakho.main bahar aa raha hu.",phusphusata ajit palta & vapas bar me aya,usne dekha divya bhi vaha nahi thi..achha hua chali gayi..yaha kuchh bhi ho sakta tha & vo use khatre me nahi dekhna chahta tha.

"sir,vo peechhe ki gali me aage ja raha hai."

"udhar hi jidhar vo ladkiya grahako ke sath ja rahi hain?"

"ji."

"sab udhar hi chalo."

jab ajit andar gaya tha divya professor ke sath bar se nikal ayi thi,"ab ye lodge kya hai?"

"shh..vo dekhiye.",bar se 1 ladki nikli & apne grahak ke sath aage badh gayi,"..unke peechhe chaliye.",professor ne divya ki patli kamar me banh daal use capne se chipka liya.divya kuchh bolti us se pehle hi use 1 mustanda khada dikha.

"sale,itna utawla kyu ho raha hai.sadak pe hi halka hoga kya?",professor ke sakht hath ke dabav ne divya ke badan me jhurjhuri paida kar di.usne khud ko sambhala & use dhakelte hue hansi & dono us randi & uske grahak ke peechhe badh gaye.

"kya?Mamu bheja tere ko?",Ramesh lodge ke bahar khade lukkha ne dono ko sar se panv tak ghura.

"to aur kya mausi bheji!",divya ne tad se jawab diya.

thik usi waqt us lodge ke peechhe ke darwaze se murshid & uske sathi dakhil hue.

"is imarat ko gher lo.main 3 logo ke sath andar jaoonga.sare entry & exit points pe kadi nazar rakho.1 bhi humare hath se bachna nahi chahiye.",ajit 1 imarat ki ot me khada murshid ko andar jate dekh raha tha.

"gulabo to abhi lagi hui hai andar."

"kaun se kamre me hai bata de?vahi bahar khadi ho jaoongi."

"thik hai ja,pehli manzil room number103."

"are sun..",divya & professor thithak gaye.vo paas aaya & divya ko sar se panv tak dekhne laga,"..tu kaha baithati hai?"

"shanti nagar me.",dono darr gaye the ki kahi use shaq to nahi ho gaya tha.

"ayega main udhar 1-2 din me tu apna adda bata na.tere sath hi party karunga."

"chal hatt,sale!",divya ne aankh mari,"..abhi lautungi to number dungi.seedha direct meri god me aa jana.",divya hanste hue professor ke sath andar chali gayi.lodge ke har kamre me chudai chal rahi thi & randiyo ki banawati aaho ki aavaze gunj rahi thi.

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क्रमशः...........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--20

गतान्क से आगे..............

अजीत के इशारे पे दो पोलिसेवालो ने लॉड्ज के पिच्छले दरवाज़े की रखवाली करते दोनो गुन्दो को बिना आवाज़ किए काबू मे ले लिया था.अजीत 3 लोगो के साथ लॉड्ज के अंदर दाखिल हुआ.निचली मंज़िल के हर कमरे मे रंडिया अपने धंधे मे मशगूल थी,"उपर चलो.",उसके ऑर्डर पे सभी सीढ़िया फलांगते उपर चढ़ गये.

"बस हो गया.अब निकल.",वो रंडी अपनी ब्रा को अपने सीने के नीचे उसके पिच्छले हिस्से को आगे कर उसका हुक लगा रही थी.

"जान,1 बार और.",वो मर्द घटिया सी हँसी हंसा.

"चल,साले!",उसने हुक बंद कर उसे पीछे किया & फुर्ती से उसका स्ट्रॅप्स को अपने कंधो मे डाला.तभी दरवाज़े पे दस्तक हुई,"..देख,कोई और आई है अपने ग्राहक के साथ."

"मैं पैसे दे रहा हू ना."

"चल साले तो पहले क्यू नही बोला कि तुझे डबल टाइम करना है.अब फुट!",रंडी ने अपना कुर्ता पहन लिया & सलवार मे टांग डालने लगी.दोबारा दस्तक हुई.

"आई,थोड़ा सब्र रख.",उसने उस ग्राहक को कमरे से निकाल के दरवाज़ा खोला & बाहर जाने लगी.

"गुलाबो."

"हां."

"मैं तुझसे मिलने आई है."

"क्यू?कौन है तू?मैं तेरे को नही जानती."

"मैं भी नही जानती.वो मामू भेजा तेरे पास."

"क्यू?यहा धंधा करना है तेरे को?"

"अरे,नही बेहन.",& दिव्या ने वही मनगढ़ंत कहानी सुना दी.

"इस कमरे मे हैं सर.",अजीत ने देखा कमरे के दरवाज़े का नंबर था 105.उसने नही देखा था पर वो दो लोग जिनकी शक्ल वो बार मे नही देख पाया था,उनका वाहा घुसना मुर्शिद के लिए सिग्नल था कि वो हत्यारो का व्यापारी वाहा आ चुका था & बार के सामने खड़ी गाड़ी ने उस व्यापारी & 1 और आदमी को लॉड्ज पहुँचा दिया था.

अजीत ने बगल के कमरा नंबर.104 की ओर इशारा किया & 1 पोलिसवाला उसके अंदर घुस गया.बिस्तर पे 1 रंडी लेटी थी & आदमी उसकी चूत मे लंड धंसाए चुदाई कर रहा था.उसे देख वो दोनो चौंक के चिल्लाने वाले थे कि उसने अपने 1-1 हाथ से दोनो का मुँह बंद चुप रहने का इशारा किया.थोड़ी ही देर मे अजीत अपने बाकी 2 साथियो के साथ उस कमरे मे था.वो रंडी & वो आदमी जल्दी-2 कपड़े पहन रहे थे.लॉड्ज मे रंडियो के लिए ज़्यादा कमरे बनाने के लिए 1 कमरे मे लकड़ी के पारटिशन्स लगाके 2 या फिर 3-3 छ्होटे कमरे बना दिए गये थे.अजीत ने मेज़ खींची & उसपे खड़ा हो 1 पारटिशन के उपर से 105 नंबर कमरे मे झाँका.

"साला,रंडी की कमाई खा गया!",गुलाबो ने गुटखे का पॅकेट अपने मुँह मे खाली किया,"..वो चिकना जो मेरा दीवाना हो गया था ना सही था,बेहन.तेरा वाला तो कभी किसी लड़की को नही देखता था.मैने तो सोचा था कि उसे लौंदे पसंद हैं."

"कमीना साला!",दिव्या ने बनावटी गुस्सा जताया.

"पता नही कहा चला गया मेरा चिकना."

"किसी से मिलते नही थे वो लोग.है ना?"

"हां,साला बहुत मस्त था चिकना.इतना मोटा औज़ार था उसका..हॅयियी बेहन सच यहा तो चूत मे अब कुच्छ महसूस ही नही होता लेकिन वो हरामी पागल कर देता था!मैने बोला कि उसके घर चल के करते हैं तो साला डाँटने लगा.लगता है शादीशुदा था साला.".दिव्या ने उस से थोड़ी देर मे उस जवान का हुलिया निकलवा लिया था.

अजीत को उस हथ्यार व्यापारी का चेहरा नही दिख रहा था क्यूकी उसकी पीठ उसकी तरफ थी.वो 1 बॅग खोल 2-3 पिसटल्स मुर्शिद को दिखा रहा था,"असली माल.गोलियो के साथ.जितनी चाहो उतनी लेकिन रेट कम नही होगा."

"वो तो ठीक है लेकिन डेलिवरी कैसे करोगे & कब?"

"वो मेरा सिरदर्द है.तुम बस डेलिवरी की जगह बताना & हां मैं सारे पैसे अड्वान्स मे लेता हुआ."

'ये तो ग़लत बात है भाई..",मुर्शिद का 1 साथी बोला,"..तुम पैसे लेके भाग गये तो."

"अगर भरोसा नही तो धंधा मत करो मेरे साथ लेकिन मैं पूरे पैसे पहले लूँगा."

"ये माल कितने दिन मे डेलिवर कर दोगे?"

"15 दिन मे अगर अभी ऑर्डर दिया तो.",मुर्शिद ने पिस्टल उठाई & अपने साथी पे तान दी,"क्या बोलता है?उड़ा दू?"

"उड़ा दो उस्ताद.तुम्हारी मर्ज़ी.",उसका साथी खिसे निपोर्ता हुआ बोला.वो मुर्शिद का मज़किया अंदाज़ जानता था.

"ठीक है भाई.मैं तुम्हे ऑर्डर देता हू तुम पैसे बताओ.ऐसी 10 पिस्टल गोलियो के साथ &.."

"& क्या?"

"कुच्छ भारी समान भी चाहिए."

"हूँ..",उस आदमी ने 1 जॅकेट पहनी थी,उसमे हाथ डाल अंदर की जेब से उसने कुच्छ काग़ज़ निकाले,"..ये देखो.मशीन गन्स,ऑटोमॅटिक राइफल्स & दूसरे हथ्यारो की तस्वीरे उन काग़ज़ो पे थी,"..कौन सा चाहिए?",मुर्शिद & उसके साथी तो उन काग़ज़ो को ऐसे खुश होके देखने लगे जैसे कोई बच्चा नयी कॉमिक्स मिलने पे होता है.थोड़ी ही देर मे मुर्शिद ने बंदुके पसंद कर ली थी.अजीत मेज़ से उतरा & इशारा किया.

"हॅंड्ज़ अप!",दरवाज़े पे लात पड़ी & चारो पोलिसेवाले बंदुके ताने कमरा नंबर.105 मे घुस गये,"..कोई अपनी जगह से नही हिलेगा!",मुर्शिद ठीक दरवाज़े के सामने बैठा था.उसने सामने रखी मेज़ पे ज़ोर की लात मारी तो मेज़ सीधा खड़े पोलिसेवालो के पैरो मे लगी.फिर क्या था!गोलियो की आवाज़े गूंजने लगी.1 गुंडे ने कमरे मे लगी लाइट फोड़ दी & सब वाहा से भागने की कोशिश करने लगे.पोलिसेवाले गलियारे मे पोज़िशन ले रहे थे.

"ये क्या है?",दिव्या उठ खड़ी हुई.गुलाबो भागने लगी तो उसने उसे पकड़ा,"..हमारे पीछे रहो.मैं देखती हू.",दिव्या ने अपना टॉप उठाया सामने जींस मे अटकी पिस्टल हाथ मे ले ली.उसकी आँखे हैरत से फैल गयी जब उसने देखा की प्रोफेसर भी 1 ऑटो मॅटिक पिस्टल लिए कमरे का दरवाज़ा खोल बाहर झाँक रहा है,"प्रोफेसर.",दिव्या ने उसकी गन की ओर इशारा किया.

"लाइसेन्स है मेरे पास.",प्रोफेसर मुस्कुराया.ज़ोर की गोलीबारी हो रही थी.अजीत हंडसफ़री पे बाहर खड़े पोलिसेवालो को ऑर्डर्स दे रहा था,"..कोई भी ना बचने पाए.हेडक्वॉर्टर्स से और फोर्स मँगाओ.एरिया सील करो!",तभी 1 गुंडे ने गलियारे का बल्ब गोली से फोड़ दिया,"..वो अंधेरा करके भागेंगे.होशियार!",दिव्या फ़ौरन बाहर निकली & अजीत से टकरा गयी.तभी 2-3 गोलिया दोनो के सर के पास से गुज़र गयी.अजीत उसे लिए दिए फर्श पे गिर गया.

अब वो लेटी दिव्या के उपर चढ़ा हुआ गोलिया चला रहा था,"तुम यहा क्या कर रही हो?",उस ख़तरे से भरे पल मे भी अजीत दिव्या के नर्म जिस्म के एहसास से पागल हो उठा.दिव्या ने भी उसका लंड अपनी चूत पे चुभता महसूस किया..ज़माने बाद वो इस मज़बूत जिस्म के नीचे दबी थी.

"छन्बीन करने आई थी.",दिव्या ने सर पीछे किया अंधेरे मे कुच्छ चमका & उसने निशाना साध के गोली चला दी.

"आहह..!",1 चीख सुनाई दी.

"कितने हैं?",दिव्या ने पलटते हुए अजीत को नीचे कर कमरा नंबर 104 का दरवाज़ा बाहर की तरफ खींच दोनो को उसकी ओट मे कर दिया.अब वो उसके लंड पे चूत दबाए घुटनो पे पोज़िशन लेके खड़ी थी.
 
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