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खेल खिलाड़ी का compleet

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दिव्या 7 बजे फ्लॅट पे पहुँची मगर प्रोफेसर का अभी तक कोई आता-पता नही था.अकेली बैठी बोरियत भगाने के लिए उसने अपनी खरीदारी का समान देखना शुरू किया.उसकी नज़र अपनी खरीदी सारी पे पड़ी तो उसने सोचा क्यू ना इसे पहन के देखा जाए.फ़ौरन सारे कपड़े उतार पहले उसने नयी ब्रा & पॅंटी पहनी & फिर पेटिकोट पहना.बिना ब्लाउस पहने ही उसने सारी बाँधी & उसके बाद ब्लाउस को अपनी बाहो मे डाला.ब्लाउस जैसे उसी के लिए बना था & उसके सीने से बिल्कुल चिपका था.उसे लगा कि उसने कुच्छ ज़्यादा कस्के बाँध लिया है तो उसने गाँठ को ढीला किया & उसी वक़्त कमरे का दरवाज़ा खोल प्रोफेसर अंदर दाखिल हुआ.

"हुन्ह्ह्ह्ह..!",दिव्या चौंक गयी & उसका हाथ पीठ पे से अपने सीने पे चला आया मानो अपने सीने को ढँकना चाह रही हो.

"आइ'एम सॉरी.मुझे लगा था आप अभी लौटी नही.",प्रोफेसर की निगाहे उसे सर से पाँव तक निहार रही थी.वो उसके पीछे आया,दिव्या का दिल ज़ोरो से धड़क रहा था..प्रोफेसर अब क्या करेगा?..उसे बाहो मे भरेगा तो नही?

मगर प्रोफेसर ने उसके ब्लाउस की गाँठ बाँधी,"मैं आपको 1 जगह दिखाने ले जाना चाहता हू & मेरी गुज़ारिश है कि इसी लिबास मे वाहा चलें.जहा हम जा रहे हैं वाहा के लिए ये लिबास बिल्कुल सही है.",प्रोफेसर कमरे से बाहर निकल गया.कुच्छ पलो बाद जब दिव्या ने अपने होश संभाले तब वो बाहर आई तो देखा प्रोफेसर ने स्लेटी रंग का सूट & गुलाबी कमीज़ पहनी थी.बहुत हॅंडसम लग रहा था वो.

"चलें."

"चलिए.

रास्ते भर दोनो खामोश रहे.थोड़ी देर पहले कमरे मे प्रोफेसर के अचानक घुसने से जैसे सब बदल गया था.दिव्या को प्रोफेसर की अगली हरकत का इंतेज़ार था.वो तय नही कर पा रही थी कि क्या वो अपने जज़्बातो की मान उसके साथ हुम्बिस्तर हो जाए या फिर अपने उपर काबू रखे.इसी उधेड़बुन मे वो पंचमहल से बाहर आ गये.वो सुजानगढ़ के महल पे आ पहुँचे थे जिसे आज से 400 साल पहले राजा सुजान सिंग ने बनवाया था.आजकल वो 1 होटेल मे तब्दील हो गया था.

महल के आगे के लॉन को 1 ओपन एर रेस्टोरेंट की शक्ल दी गयी थी.प्रोफेसर & दिव्या वही 1 मेज़ पे बैठ गये.मेज़े इस तरह लगी थी कि सबकी निगाह सामने बने छ्होटे से स्टेज पे बैठे गायको पे पड़े जोकि वाहा की भाषा मे कुच्छ गा रहे थे.दिव्या थोड़े बहुत लफ़ज़ो का मतलब समझ रही थी मगर उसे पूरा गीत समझ नही आ रहा था लेकिन इतना साफ था कि गीत बहुत दर्द भरा था.

"क्या गा रहे हैं ये?",दिव्या ने प्रोफेसर से पुचछा.

"बाद मे बताउन्गा.पहले आप खाना खाइए.",खाने के दौरान भी दोनो मे कोई खास बात-चीत नही हुई बस दोनो चोर निगाहो से 1 दूसरे को देख लेते थे.दिव्या को अब अपनी चूत मे कसक महसूस होने लगी थी.उसे शांत करने के लिए उसने अपनी टांग पे टांग चढ़ा उसे भींच लिया मगर इस से उसकी कसक & बढ़ गयी.

"अब आइए,मैं आपको वो दिखाता हू जिसके लिए मैं आपको यहा लाया हू.",प्रोफेसर खाना ख़त्म होने के बाद उठ खड़ा हुआ.उसने हाथ बढ़ाया तो दिव्या ने अपना दाया हाथ उसके हाथ मे दे दिया.प्रोफेसर के हाथ के एहसास ने उसकी हालत और खराब कर दी.प्रोफेसर उसे ले महल के अंदर दाखिल हुआ & 1 साफा पहने & बंदगले के सूट पहने आदमी को इशारा किया.वो दोनो को महल की सबसे उपरी मंज़िल पे ले गया & फिर महल के पिच्छले हिस्से की ओर जाने लगा.1 दरवाज़े के पास आ वो रुका & दरवाज़ा खोल खड़ा हो गया,"इसके आगे केवल आप जा सकते हैं,सर.",उसने झुक के दोनो को सलाम किया & चला गया.

दिव्या प्रोफेसर के साथ दरवाज़े के अंदर गयी तो देखा कि वो छ्होटा सा गलियारा था जो पुल के अंदाज़ मे बना था जोकि उपर से छत से ढँका था लेकिन दोनो तरफ के दरिचो से बाहर देखा जा सकता था.बाई तरफ से पहाड़िया दिख रही थी चाँद की रोशनी मे नहाई हुई & दाई तरफ आबादी का एहसास दिलाती पंचमहल से आनेवाली सड़क का एहसास महल की दीवारो के उपर से हो रहा था.दोनो गलियारे का आख़िर मे आ गये जहा 1 और खूबसूरत नक्काशियो से भरा दरवाज़ा था.प्रोफेसर ने उसे खोला & जैसे दिव्या दूसरी ही दुनिया मे आ गयी.अंदर 1 बड़ा सा कमरा था जिसे देख यू लगता था जैसे आज से 400 साल पहले जब रानी सावित्री देवी यहा रहती थी,तब से ये रोज़ वैसे ही सजता आया है.

कमरे मे कोनो मे बड़े-2 मिट्टी के तेल के बड़े खूबसूरत लॅंप थे.प्रोफेसर ने उन लॅंप्स को बुझा दिया & कमरे के 1 कोने मे रखे बड़े से हांडे मे कुच्छ फ्लोस्तिंग कॅंडल्स जला दी.अब कमरे मे बस इतनी रोशनी थी को दोनो 1 दूसरे को देख सकें.

"ये देखिए..",प्रोफेसर कमरे मे बनी बड़ी सी खिड़की पे खड़ा था,दिव्या उसके करीब गयी & उसका मुँह मे हैरत से खुला रह गया.कमरे से पंचमहल की पहाड़िया नज़र आ रही थी,पूरे चाँद की रोशनी मे नहाई हुई.उसने सर उठा के पूनम के चाँद को देखा & फिर सारे नज़ारे को निहारा,कुद्रत की ऐसी खूबसूरती उसने पहले कभी नही देखी थी.

"प्रोफेसर..",वो उसके दाई तरफ खड़ी थी & बेसखता उसका बाया हाथ उसकी ओर उठ गया जिसे उसने थाम लिया,"..ऐसा लगता है मानो हम वक़्त मे पीछे चले गये हैं."

"हां,हम सच मे वक़्त मे पीछे चले गये हैं.",प्रोफेसर ने उसके हाथ को हल्के से दबाते हुए उसकी काली,गहरी आँखो मे झाँका,"..अब उस गीत का मतलब समझाता हू.वो गवैय्ये रानी सावित्री देवी & राजा सुजान सिंग के प्रेम की कहानी सुना रहे थे.राजा सुजान सिंग दुश्मनो से लड़ने गये जहा बहुत खून-ख़राबा हुआ.दोनो तरफ के बस चंद ही लोग ज़िंदा बचे.कुच्छ लोग वापस महल लौटे मगर उसमे राजा साहब नही थे..",प्रोफेसर के साथ खड़ी उसके हाथ मे अपना हाथ दिए दिव्या कभी उसके चेहरे को देखती कभी चाँदनी मे नहाई पहाड़ियो को,"..उन पहाड़ियो के बीच 1 रास्ता हुआ करता था जहा से ये रियासत बाकी दुनिया से जुड़ी थी.."

"हम जिस रास्ते से यहा आए वो तो काफ़ी बाद मे बना पहाड़ियो को काट के.सबने यही समझा था कि राजा साहब जंग मे नही बचे मगर रानी को यकीन था कि उसका सुहाग ज़िंदा है.वो यही इसी खिड़की पे बैठी अपने महबूब की राह तकती रहती थी.3 महीने तक रानी यही बैठी रही.बस भगवान का ध्यान करने के लिए हटती.उसकी नौकरानियाँ यही पे उसे खाना खिला देती लेकिन रानी 1 पल को भी ये जगह नही छ्चोड़ना चाहती थी क्यूकी उसका भरोसा था कि वो यहा बैठी रही तो राजा ज़रूर वापस आएँगे.."

"..ऐसी ही 1 पूनम की रात को शायद कुच्छ अभी का ही वक़्त था जब रानी के कानो मे घोड़ो की टाप की आवाज़ आई.भरोसा तो उसे भी नही हुआ पर उसी वक़्त चाँद की सफेद रोशनी मे उसे दूर वाहा..",प्रोफेसर ने उंगली से इशारा किया तो दिव्या उसके और करीब आ पहाड़ियो की ओर देखने लगी,"..उन 2 पहाड़ियो के बीच रानी को कुच्छ चमकता हुआ दिखा.जब भी राजा बाहर जाते थे & इस रास्ते से लौटते थे तो रानी उनके लौटने के वक़्त यही बैठ के उनकी राह देखती थी & वो अपनी प्यारी बीवी को अपनी तलवार चमका के अपने आने की खबर देते थे.."

"..उस रोज़ भी ऐसा ही हुआ & रानी खुशी से चीख पड़ी.3 महीनो बाद राजा सुजान सिंग लौट आए थे,रानी सावित्री देवी का भरोसा जीत गया था.उसके बाद क्या हुआ पता है?",दिव्या अपना बाया हाथ प्रोफेसर के हाथ मे दिए हुए घूम उसके सामने खड़ी हो गयी & इनकार मे सर हिलाया,"..दोनो इसी कमरे मे पूरे 10 दीनो तक बंद रहे,पूरे 10 दीनो तक!1 पल को भी बाहर ना आए बस 1 दूसरे मे डूबते रहे,प्यार के समुंदर मे गोते लगाते रहे."

चाँदनी रात की कशिश ने,कमरे की मद्धम रोशनी ने & प्रोफेसर दीक्षित की सुनाई कहानी ने माहौल को रूमानी बना दिया था.इसी रूमानी माहौल की वजह से या फिर कुच्छ देर से चूत मे उठ रही कसक की वजह से जब प्रोफेसर उसका हाथ थामे दिव्या के उपर झुका तो उसने उसका विरोध नही किया & अपने लबो को उसके तपते लबो से च्छू जाने दिया.

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क्रमशः........
 
KHEL KHILADI KA paart--31

gataank se aage ......

"madam,dj chaze to yaha 1 saal pehle kaam karte the.ab to vo Club Vienna me kaam karte hain.",divya & professor fauran club vienna ke liye nikal pade.1 jagah sadak bahut kharab thi & gadi khaddo me hichkole kha rahi thi jiski vajah se divya ka jism professor ke jism se takra jata & uske badan me jhurjhuri daud jati.

vo club vienna pahunch gaye joki 1 5 star hotel ki chauthi manzil pe tha.vaha unki mulakat vaha kle manager se hui,"aap kyu milna chahte hain huamre dj se?"

"humne unki kafi tarif suni hai & chahte hain ki devalay me jo humare club ks salana jalsa ho raha hai vaha vo hi dj console sambhalen.",divya ne pehle hi soch rakha tha ki kya bolna hai.

"oh,i see lekin madam vo shehar se bahar hai & kal hi ayega.aap kal sham ko 8 baje se thoda pehle aa jaiye to us se mulakat ho jayegi."

"ok.",dono hotel se bahar aa gaye,"ab kal tak kya karen?"

"shehar ghumte hain.",profesor muskuraya.hawa tez chal rahi thi & kuchh ghas ke tinke professor ki kamiz se chipak gaye the.divya ne apne hath se un tinko ko jhad ke nikalne ke liye profeesor ke seene pe hath firaya to use laga jaise ki vo faulad ko chhu rahi ho.tinke jhad gaye the lekin vo thodi der tak aise hi professor ki kamiz jhaadne ke bahane unke seene ko sehlati rahi.vo jaise hosh kho baithi thi & jab vo hosh me ayi to sakapaka gayi & apna hath peechhe khinch liya.

thodi der idhar-udhar ghumne ke baad dono 1 restaurant me khana khane chale gaye,"ab aage kya karna hai,divya ji?"

"main thodi shopping karna chahti hu.",divya ne 1 nivala munh me dala.

"aap bura na mane to mujhe thoda kaam hai,kya main vo kar aaoon?"

"haan,professor,zarur jaiye."

"to thik hai.ye ghar ki duplicate chabhi hai,aap ise ralh lijiye.agar aap mujhse pehle pahunch gayi to ghar ke andar dakhil hone me aapko koi taklif nahi hogi.",professor ne chabhi mez pe rakh di & daye hath ke anguthe se divya ke upari honth ke baye kone ke upar sehlaya.divya buri tarah chaunk gayi.

"ye sabzi ka tukda laga tha.",professor ne napkin se apna angutha ponchha lekin us 1 pal ki chhuan ne divya ke jism me 1 chingari sulga di thi.

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"mujhe sari to bahut pasand hai lekin 1 problem hai.",divya ne kafi shopping ki,apne maa-baap ke liye & khud ke liye.1 boutique me use 1 sari pasand aayi thi.narangi rang ki jhini sari ke sath 1 designer sleeveless bluse tha jiske peechhe hooks nahi the balki blouse ke dono hisso ke ant ke kapdo ko lamba chhod unhe bandhne ka intezam tha.

"kya,ma'am?"

"mere size me ye blouse hoga nahi."

"nahi,ma'am hai.aap try kar lijiye pehle.",salesgirl ne uske size ka blouse nikala to divya trial room me blouse try karne chali gayi.apni kamiz utar usne blouse pehna.peechhe 'V' ke aakar me uski gori pith blouse ki back se nazar aa rahi thi & uske neeche uski ganth bandhi thi.samne bas cleavage ki jhalak bhar dikh rahi thi.uske gore badan pe ye rang khub fab raha tha..lekin vo ye le kiske liye rahi thi?..kise rijhana chahti thi vo?.uske zehan me ajit ka chehra ubhra jo use is sari me dekh ke shartiya pagal ho jata & dusra chehra ubhra professor ka jiske reaction ke bare me use malum nahi tha..

"ma'am..",salesgirl ki aavaz se vo khayalo se bahar aayi,"..aap matching lingerie bhi dekhna pasand karengi?",divya ko dhyan aaya ki is rang ke undergarments uske paas hain bhi nahi.chalo isi bahane ye bhi aa jayenge.

"haan.",vo uske sath lingerie section me chali gayi.

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"satpal,mujhe tumse CM sahab ki security ke bare me kuchh baat karni hai?",ajit jeep drive kar raha tha.

"mujhse!",satpal ka chaunkna sahi tha,is kaam ke liye senior afsar the us jaisa constable nahi.

"haan,satpal.dekho,mujhe kuchh khabar mili hai & vo pakki nahui.ab agar main tumhare sahab ko ye baat bataunga to bina baat ke bawal khada ho jayega & CM sahab ki security badha di jayegi joki is chunavi mausam me unhe pasamd nahi ayegi."

"haan,sahab ye baat to hai.vaise main chahta bhi hu ki vo jeete.aakhir humare ganv se hi vo hain saahab."

"hun,satpal is tasvir ko dekho.",usne tent vale ki tasvir use di,",tumne ise kabhi CM sahab ke sath dekha hai?"

"haan,sahab.ye to bahut aate-jate the unke paas.ghar,daftar,rally har jagah."

"inke sath kioi aur bhi mila tha CM se?"

"sahab,ye to pata nahi."

"ye CM sahab ko kitne karib se janta tha."

"sahab.."

"dekho,satpal jhijhko mat ye bahut nazyuk masla hai."

"sahab,ab insan bhagwan to hota nahi.CM sahab vaise to devta insan hain lekin 1 kami hai."

"kaun si?"

"sahab,vo..ladki.."

"ohh..satpal.bade logo ke liye ye aam baat hai.koi 1 ladki hai?"

"nahi sahab,ye aadmi unhe kayi ladkiyo se milwa chuka hai."

"koi khas ladki nahi hai fir?"

"nahi sahab vaise ho sakta hai ki 1 ho."

"kaun?"

"sahab,main kahi phansunga to nahi na?'

"satpal,hum aaj mile hi nahi the.mujhe kya kaise pata chala isme tumhara naam nahi ayega."

sahab..",satpal bolta raha & ajit sunta raha.

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divya 7 baje flat pe pahunchi magar professor ka abhi tak koi ata-pata nahi tha.akeli baithi boriyat bhagane ke liye usne apni kharidari ka saman dekhna shuru kiya.uski nazar apni kharidi sari pe padi to usen socha kyu na ise pehan ke dekha jaye.fauran sare kapde utar pehle usne nayi bra & panty pehni & fir petticoat pehna.bina blouse pehne hi usne sari bandhi & uske baad blouse ko apni baaho me dala.blouse jaise usi ke liye bana tha & uske seene se bilkul chipka tha.use laga ki usne kuchh zyada kaske bandh liya hai to usne ganth ko dhila kiya & usi waqt kamre ka darwaza khol professor andar dakhil hua.

"hunhhhh..!",divya chaunk gayi & uska hath pith pe se apne seene pe chala aaya mano apne seene ko dhankna chah rahi ho.

"i'm sorry.mujhe laga tha aap abhi lauti nahi.",professor ki nigahe use sar se panv tak nihar rahi thi.vo uske peechhe aaya,divya ka dil zoro se dhadak raha tha..professor ab kya karega?..use baaho me bharega to nahi?

magar professor ne uske blouse ki ganth bandhi,"main aapko 1 jagah dikhane le jana chahta hu & meri guzarish hai ki isi libas me vaha chalen.jaha hum ja rahe hain vaha ke liye ye libas bilkul sahi hai.",professor kamre se bahar nikal gaya.kuchh palo baad jab divya ne apne hosh sambhale tab vo bahar aayi to dekha professor ne slaty rang ka suit & gulabi kamiz pehni thi.bahut handsome lag raha tha vo.

"chalen."

"chaliye.

raste bhar dono khamosh rahe.thodi der pehle kamre me professor ke achanak ghusne se jaise sab badal gaya tha.divya ko professor ki agli harkat ka intezar tha.vo tay nahi kar pa rahi thi ki kya vo apne jazbato ki maan uske sath humbistar ho jaye ya fir apne upar kabu rakhe.isi udhedbun me vo panchmahal se bahar aa gaye.vo Sujangrah ke mahal pe aa pahunche the jise aaj se 400 saal pehle Raja Sujan Singh ne banwaya tha.aajkal vo 1 hotel me tabdil ho gaya tha.

mahal ke aage ke lawn ko 1 open air restaurant ki shakl di gayi thi.professor & divya vahi 1 mez pe baith gaye.meze is tarah lagi thi ki sabki nigah samne bane chhote se stage pe baithe gayako pe pade joki vaha ki bhasha me kuchh ga rahe the.divya thode bahut lafzo ka matlab samjh rahji thi magar use pura geet samajh nahi aa raha tha lekin itna saaf tha ki geet bahut dard bhara tha.

"kya ga rahe hain ye?",divya ne professor se puchha.

"baad me bataunga.pehle aap khana khaiye.",khane ke dauran bhi dono me koi khas baat-chit nahi hui bas dono chor nigaho se 1 dusre ko dekh lete the.divya ko ab apni chut me kasak mehsus hone lagi thi.use shant karne ke liye usne apni tang pe tang chadha use bhinch liya magar is se uski kasak & badh gayi.

"ab aaiye,main aapko vo dikhata hu jiske liye main aapko yaha laya hu.",professor khana khatm hone ke baad uth khada hua.usne hath badhaya to divya ne apna daya hath uske hath me de diya.professor ke hath ke ehsas ne uski halat aur kharab kar di.professor use le mahal ke andar dakhil hua & 1 safa pehne & bandgale ke suit pehne aadmi ko ishara kiya.vo dono ko mahal ki sabse upari manzil pe le gaya & fir mahal ke pichhle hisse ki or jane laga.1 darwaze ke paas aa vo ruka & darwaza khol khada ho gaya,"iske aage keval aap ja sakte hain,sir.",usne jhuk ke dono ko salam kiya & chala gaya.

divya professor ke sath darwaze ke andar gayi to dekha ki vo chhota sa galiyara tha jo pul ke andaz me bana tha joki upar se chhat se dhanka tha lekin dono taraf ke daricho se bahar dekha ja sakta tha.bayi taraf se pahadiya dikh rahi thi chand ki roshni me nahayi hui & dayi taraf aabadi ka ehsas dilati panchamahl se aanevali sadak ka ehsas mahal ki deewaro ke upar se ho raha tha.dono galiyare ka aakhir me aa gaye jaha 1 aur khubsurat nakkashiyo se bhara darwaza tha.professor ne use khola & jaise divya dusri hi duniya me aa gayi.andar 1 bada sa kamra tha jise dekh yu lagta tha jaise aaj se 400 saal pehle jab rani savitri devi yaha rehti thi,tab se ye roz vaise hi sajta aaya hai.

kamre me kono me bade-2 mitti ke tel ke bade khubsuart lamp the.professor ne un lamps ko bujha diya & kamre ke 1 kone me rakhe bade se hande me kuchh flosting candles jala di.ab kamre me bas itni roshni thi ko dono 1 dusre ko dekh saken.

"ye dekhiye..",professor kamre me bani badi si khidki pe khada tha,divya uske karib gayi & uska munh me hairat se khula reh gaya.kamre se panchmahal ki pahadiya nazar aa rahi thi,pure chand ki roshni me nahayi hui.usne sar utha ke poonam ke chand ko dekha & fir sare nazare ko nihara,kudrat ki aisi khubsurti usne pehle kabhi nahi dekhi thi.

"professor..",vo uske dayi taraf khadi thi & besakhta uska baya hath uski or uth gaya jise usne tham liya,"..aisa lagta hai mano hum waqt me peechhe chale gaye hain."

"haan,hum sach me waqt me peechhe chale gaye hain.",professor ne uske hath ko halke se dabate hue uski kali,gehri aankho me jhanka,"..ab us geet ka matlab samjhata hu.vo gawaiyye Rani Savitri Devi & raja sujan singh ke prem ki kahani suna rahe the.raja sujan singh dushmano se ladne gaye jaha bahut khun-kharaba hua.dono taraf ke bas chand hi log zinda bache.kuchh log vapas mahal laute magar usme raja sahab nahi the..",professor ke sath khadi uske hath me apna hath diye divya kabhi uske chehre ko dekhti kabhi chandni me nahai pahadiyo ko,"..un pahadiyo ke beech 1 rasta hua karta tha jaha se ye riyasat baki duniya se judi thi.."

"hum jis raste se yaha aaye vo to kafi baad me bana pahadiyo ko kaat ke.sabne yehi samjha tha ki raja sahab jung me nahi bache magar rani ko yakin tha ki uska suhag zinda hai.vo yehi isi khidki pe baithi apne mehbub ki raah takti rehti thi.3 mahine tak rani yehi baithi rahi.bas bhagwan ka dhyan karne ke liye hatati.uski naukraniya yehi pe use khana khila deti lekin rani 1 pal ko bhi ye jagah nahi chhodna chahti thi kyuki uska bharosa tha ki vo yaha baithi rahi to raja zarur vapas aayenge.."

"..aisi hi 1 poonam ki raat ko shayad kuchh abhi ka hi waqt tha jab rani ke kaano me ghodo ki taap ki aavaz aayi.bharosa to use bhi nahi hua par usi waqt chand ki safed roshni me use door vaha..",professor ne ungli se ishara kiya to divya uske aur karib aa pahadiyo ki or dekhne lagi,"..un 2 pahadiyo ke beech rani ko kuchh chamakta hua dikha.jab bhi raja bahar jate the & is raste se lautate the to rani unke lautne ke waqt yehi baith ke unki raah dekhti thi & vo apni pyari biwi ko apni talwar chamka ke apne aane ki khabar dete the.."

"..us roz bhi aisa hi hua & rani khushi se chikh padi.3 mahino baad raja sujan singh laut aaye the,rani savitri devi ka bharosa jeet gaya tha.uske baad kya hua pata hai?",divya apna baya hath professor ke hath me diye hue ghum uske samne khadi ho gayi & inkar me sar hilaya,"..dono isi kamre me pure 10 dino tak band rahe,pure 10 dino tak!1 pal ko bhi bahar na aaye bas 1 dusre me doobne rahe,pyar ke samnadar me gote lagate rahe."

Chandni raat ki kashish ne,kamre ki maddham roshni ne & Professor Dixit ki suani kahani ne mahaul ko rumani bana diya tha.isi rumani mahaul ki vajah se ya fir kuchh der se chut me uth rahi kasak ki vajah se jab professor uska hath thame divya ke upar jhuka to usne uska virodh nahi kiya & apne labo ko uske tapte labo se chhu jane diya.

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--32

गतान्क से आगे....

प्रोफेसर उसके हाथ थामे उसे बहुत हौले-2 चूम रहा था.दिव्या की बाहो के उपर अपने हाथ सरकाते हुए उसने उसके प्यारे चेहरे को थाम लिया & अपने दाए हाथ की सारी उंगलिया उसके बाए कान के पीछे ले गया & बाए को उसके दाहिने गाल पे लगा दिया.जब उसने अपने दाए हाथ की उंगलियो से दिव्या के कान के पीछे सहलाया तो दिव्या ने आह भरते हुए किस तोड़ दी.

ये उसके जिस्म का बड़ा ही नाज़ुक हिस्सा था & यहा छुते ही उसकी मस्ती बढ़ जाती थी.वो प्रोफेसर के दाए हाथ पे अपना गाल रगड़ने लगी.प्रोफेसर उसके दाए गाल को चूमने लगा & वैसे ही उसके कान के पीछे सहलाता रहा.गाल को सहलाना छ्चोड़ बाए हाथ के अंगूठे को उसने होंठो पे दबाते हुए फिराया तो दिव्या तड़प उठी & प्रोफेसर 1 बार फिर उसके होंठ चूमने लगा.उसके हाथ दिव्या के चेहरे से नीचे उसकी नर्म,गुदाज़ उपरी बाहो पे थे & उन्हे सहला रहे थे.दिव्या के जिस्म मे झुरजुरी हो रही थी.प्रोफेसर बहुत हौले-2 उसे चूम रहा था बल्कि उसकी ज़ुबान ने तो अभी तक दिव्या के होंठो का स्वाद भी नही चखा था.

प्रोफेसर के हाथो ने उसकी बाहो को सहलाते हुए उसके कंधो का रुख़ किया & उन्हे सहलाने लगे.दिव्या की बेचैनी पल-2 बढ़ती जा रही थी & उसी से तड़प उसने अपने होंठ पीछे खींच लिए तो प्रोफेसर उसके चेहरे को चूमते हुए नीचे हुआ & उसकी गोरी गर्दन को अपने गर्म लबो से चूमने लगा.प्रोफेसर के हाथ उसके कंधो से उसके ब्लाउस स्ट्रॅप्स को नीचे सरका रहे थे.स्ट्रॅप्स के नीचे होते ही प्रोफेसर के होंठ पहले उसके दाए कंधे पे गये & वहा चूमने लगा & फिर उसकी गर्दन से होते उसके बाए कंधे पे आ गये.

दिव्या को लगा कि अब प्रोफेसर उसका ब्लाउस उतारेगा मगर प्रोफेसर ने उसकी सोच को ग़लत साबित करते हुए उसके स्ट्रॅप्स वापस उसके कंधो पे चढ़ा दिया & उसकी गर्दन के नीचे सीने के उपर जो गड्ढे जैसी जगह होती है वाहा पे चूमने लगा.वैसे प्रोफेसर के दिल मे भी 1 सवाल उठ रहा था कि आख़िर दिव्या के ब्रा स्ट्रॅप्स कहा गये?..चलो थोड़ी देर मे ही इस सवाल का जवाब मिल जाएगा.वो मन ही मन मुस्कुराया & उसकी गर्दन के नीचे चूमता रहा.1 बार फिर वो दिव्या के दाए कंधे पे पहुँचा & इस बार उसके होंठ वही नही रुके बल्कि उस से भी नीचे उसकी बाँह से होते हुए उसके हाथ तक पहुँच गये.

प्रोफेसर नीचे बैठ खड़ी दिव्या की दाई हथेली को चूम रहा था.चूम रहा था कहना ग़लत होगा क्यूकी वो उसकी हथेली को हौले-2 चूस रहा था.दिव्या की चूत की कसक और बढ़ गयी & उसने बेचैनी से अपनी जंघे आपस मे रगडी.प्रोफेसर ने उसकी हथेली छ्चोड़ी & बारी-2 से उसकी उंगलिया चूसने लगा.बात यही तक रहती तो दिव्या शायद बर्दाश्त कर लेती लेकिन प्रोफेसर उसकी 1 उंगली मे मुँह मे भर के चूस्ता & फिर उस उंगली की जड तक जाके जहा पे 2 उंगलिया हथेली से जुड़ती हैं,वाहा पे अपनी जीभ की नोक फिरा देता.दिव्या को लगा कि उसकी टाँगो मे जान नही है & वो खड़े रहने के लिए सहारा ढूँढने लगी.

जिस खिड़की पे वो खड़े थे वो थोड़ा निकाल के बनी थी & इस कारण खिड़की के बगल मे & कमरे की दीवार के बीच थोड़ी सी जगह थी & दिव्या पीच्चे हो उसी जगह की दीवार से पीठ टीका के खड़ी हो गयी.प्रोफेसर ने जब उसकी सारी उंगलियो को चूम,चूस लिया तो उसका ध्यान दिव्या के गोरे पेट पे गया.दिव्या की साँसे बहुत तेज़ चल रही थी & उस वजह से उसका पेट भी उपर नीचे हो रहा था.प्रोफेसर उसके पेट को निहारने लगा & अपने दाए हाथ की 1 उंगली उसके ब्लाउस के नीचे उसकी बगल मे रख दी.दिव्या उस हल्की सी छुअन से भी तड़प उठी & अपना सर उपर उठा अपनी आँखे बंद कर ली.प्रोफेसर की उंगली उसके पेट पे रेंगने लगी & प्रोफेसर ने बहुत हल्के से उसके पेट के उपरी हिस्से पे चूम लिया.

प्रोफेसर बहुत छ्होटी-2 किस्सस से उसके पेट को ढँकते हुए उसकी नाभि की ओर बढ़ने लगा.कुच्छ ही पॅलो मे वो उसकी नाभि तक पहुँच गया.दिव्या की हालत बहुत खराब हो चुकी थी.उसकी चूत से रस बहने लगा था & वो बेचैनी से अपनी जंघे रगड़ रही थी.उसे अब इंतेज़ार था प्रोफेसर के होंठो का अपनिनाभि को चूमने का.उसकी साँसे और तेज़ हो गयी & साथ ही उसकी बेचैनी भी.प्रोफेसर की गर्म साँसे उसे अपनी नाभि पे महसूस हुई तो उसने दम साध लिया.उसके दिल मे जोश था & 1 अजीब सा एहसास-कुच्छ घबराहट का & कुच्छ मज़े का.

प्रोफेसर झुका & उसने दिव्या की सोच को 1 बार फिर ग़लत साबित किया.उसके होंठो ने दिव्या की नाभि के नीचे के हिस्से को पकड़ा & थोड़ा सा खींचते हुए अपने दांतो तले बहुत ही ज़्यादा हल्के से दबा दिया,"..आआहह..!",दिव्या ने आह भरी & दाए हाथ को सर के उपर ले जाके दीवार को थामा & बाए से प्रोफेसर के सर को & झाड़ गयी.उसका बदन झटके खा रहा था & प्रोफेसर उसकी नाभि की गहराई को अब अपनी ज़ुबान से नापने मे जुटा था.वो गिर ही जाती अगर प्रोफेसर के मज़बूत हाथो ने उसकी कमर की बगलो को पकड़ के उसे थाम नही लिया होता तो.जब वो झड़ने की खुमारी से बाहर आई तो उसने देखा की प्रोफेसर उसके पेट & नाभि को प्यार से चूम रहा है & उसके दाए हाथ ने उसके बाए हाथ को थाम लिया है.

प्रोफेसर के बाए हाथ की उंगली उसके पेट पे चलने लगी & वाहा पहुच गयी जहा उसकी सारी अटकी थी.हाथ अंदर घुसा प्रोफेसर ने उसकी सारी खोल दी & फिर अपने होंठ उसकी बाई हथेली से चिपका दिए.यहा भी उसने वही हरकते दोहराई जो उसने दाए हाथ के साथ की थी.दिव्या अभी खुमारी से उबरी नही थी & प्रोफेसर की हर्कतो ने उसे दोबारा मस्त करना शुरू कर दिया था.उसकी उंगलियो को चूसने के बाद वो उपर बढ़ने लगा & उसकी गुदाज़ बाहो को चूमता वो 1 बार फिर उसके चेहरे तक पहुँच गया.1 बार फिर उसने उसने उसके खूबसूरत चेहरे को थाम चूमना चाहा तो दिव्या ने उसके सीने पे हाथ रख उसे रोक दिया.खिड़की से आती चाँदनी मे दिव्या उस पेटिकोट & ब्लाउस मे सदियो पहले की कोई लड़की लग रही थी.इस कमरे मे होटेल की गहमागहमी का ज़रा भी एहसास नही था.खिड़की से भी बस पहाड़िया दिखती थी & उस पल प्रोफेसर को लगा कि वो वक़्त मे पीछे चला गया है.

दिव्या के हाथ उसके सीने से थोड़ा उपर हुए & उसने उसके कोट को नीचे सरका दिया.उसके हाथ प्रोफेसर के शर्ट के बटन्स को खोलने मे लग गये & उनके खुलते ही उसने प्रोफेसर की शर्ट को भी उतार दिया.उसकी नज़रो के सामने चाँद की रोशनी मे प्रोफेसर का गॅतीला उपरी जिस्म चमक रहा था.प्रोफेसर के कंधे बहुत ही चौड़े थे & उसका सीना भी.बाजुओ के दौले तो बहुत ही बड़े थे & पूरा जिस्म फौलादी था.दिव्या ने बाया हाथ बढ़ा के प्रोफेसर के दाए बाज़ू पे रखा & दाए को उसके सीने के घने बालो मे फिराया तो उसे उसका जिस्म का एहसास कोमल लगा.इस अनूठे एहसास से उसके होंठो पे हल्की मुस्कान फैल गयी.उसने प्रोफेसर के कंधो,बाजुओ & सीने को हाथो से सहलाया & उसके सीने के बीचोबीच पहुँच गयी.

उसके मज़बूत पेक्स पे हाथ फिराते हुए उसका दिल किया कि वो उनके बीचोबीच प्रोफेसर के सीने को चूम ले.दिल की मानते हुए वो आगे झुकी & अपने काँपते लब प्रोफेसर के सीने पे रख दिए.उसके बाज़ू पकड़े वो उसके सीने को अपनी किस्सस से ढँकने लगी.प्रोफेसर के बालो भरे सीने से बालो की 1 लकीर नीचे जा रही थी.उसके होंठ उसी लकीर पे चलने लगे लेकिन ज़्यु ही वो उसकी नाभि तक पहुँची वो जैसे नींद से जागी..ये क्या कर रही थी वो?..कहा जा रही थी?..शर्म ने उसे अपने आगोश मे ले लिया & वो हैरत मे पड़ गयी.ऐसा पहले तो नही होता था..बल्कि जब उसने पहली बार 1 लड़के को चूमा था उसके बाद तो उसे ऐसी झिझक,ऐसी हया कभी महसूस नही हुई..फिर आज क्यू?

लाज के मारे वो सीधी खड़ी हुई & अपनी हया च्छुपाने के लिए जब उसे और कोई रास्ता नज़र नही आया तो उसने सामने दिख रहे प्रोफेसर के बालो भरे सीने मे ही अपना चेहरा च्छूपा लिया.प्रोफेसर ने उसे अपने आगोश मे भर लिया & उसकी पीठ & बालो को सहलाने लगा.उसके आगोश मे प्यार था हवस नही,गर्मजोशी थी लेकिन वहशियात नही.इस एहसास से खुश हो दिव्या ने अभी अपनी बाहे उसकी पीठ के गिर्द कस दी.कुच्छ पॅलो बाद प्रोफेसर ने दाए हाथ से दिव्या की ठुड्डी पकड़ उसका चेहरा उपर किया.दिव्या की पलके तो शर्म के मारे खुल ही नही रही थी!उसके दिल की हैरत का तो कोई अंत ही नही था.उसके जैसी बेबाक लड़की आज किसी आम शर्मीली,कुँवारी लड़की की तरह पेश आ रही थी.

"तुम्हारे जैसी रुपसी का प्यार पाके तो मैं धन्य हो गया.मुझे तो अपनी कीमत पे यकीन नही होता!"

"क्यू झूठी तारीफ करते हो!",लाज के मारे 1 बार फिर उसने प्रोफेसर के चौड़े सीने की पनाह ली.

"मैने आज तक किसी लड़की की झूठी तारीफ नही की,दिव्या.",प्रोफेसर उसके बालो को सहला रहा था,"..तुम्हारे जैसी हसीना से मैं आज तक नही मिला.पता है तुम्हारी सबसे ज़्यादा खूबसूरत चीज़ क्या है?..तुम्हारी शख्सियत.तुम खुद्दार हो & बहादुर भी.केस सुलझाते वक़्त तुम्हारे चेहरे पे जो हौसला & अपने उपर भरोसा दिखता है,वो तुम्हारी खूबसूरती मे 4 चाँद लगा देता है.",प्रोफेसर ने 1 बार फिर उसकी ठुड्डी पकड़ उसका चेहरा उपर किया.दिव्या के चेहरे पे तारीफ सुनके हल्की मुस्कान फैल गयी थी मगर आँखे अभी भी हया के बोझ तले बंद थी.

प्रोफेसर ने अपनी महबूबा की बंद पलको को चूमा & फिर बारी-2 से उसके दोनो गुलाबी गालो को जिनपे हया की सुर्खी भी फैली थी.दिव्या को लगा कि अब वो उसके होंठ चूमेगा & इस आशा मे उसके होंठ अपने आप खुल गये लेकिन प्रोफेसर ने होंठो को छ्चोड़ उसकी नाक को चूम लिया.दिव्या ने हैरत मे पड़ आँखे खोली तो उसे प्रोफेसर की नज़रो मे शरारत दिखी & उसे हँसी आ गयी.दोनो प्रेमी हंसते हुए 1 बार फिर 1 दूसरे के गले से लग गये.थोड़ी देर बाद उसे बाँहो मे भर प्रोफेसर ने फिर से चूमा & इस बार अपनी ज़ुबान उसके होंठो पे फिरा दी.इस पोज़िशन मे प्रोफेसर का लंड उसके पेट से आ लगा & उसका बदन सिहर उठा.

दिव्या के बदन मे तो सनसनी दौड़ गयी थी & वो कांप गयी थी.उसने अलग होना चाहा मगर प्रोफेसर की मज़बूत बाहो ने उसे ऐसा नही करने दिया.प्रोफेसर की ज़ुबान उसके मुँह के अंदर घुसी & उसकी ज़ुबान से मिल गयी.दिव्या ने भी प्रोफेसर की ज़ुबान को जवाब देना शुरू किया लेकिन उसके जिस्म मे जो बिजली दौड़ रही थी उसने उसे बेचैन कर दिया था.ऐसा पहले कभी नही हुआ था. की वो सिर्फ़ किसी मर्द के छूने मे वो जितनी मदहोश हो जाए मगर वो हमेशा बेबाक रहती थी & मस्ती के इस खेल मे अपने साथी की बराबरी करती थी मगर आज प्रोफेसर की हर्कतो ने उसके दिल मे भी आम लड़कियो वाला घबराहट & मज़े का मिला-जुला भाव पैदा कर दिया था.
 
प्रोफेसर की ज़ुबान की हर्कतो से परेशान हो उसने किस तोड़ी & उसके आगोश से छूट के घूम गयी मगर प्रोफेसर ने उसी वक़्त उसे पीछे से अपनी बाहो के घेरे मे ले लिया & उसके पेट को सहलाते हुए उसके दाए गालो को चूमने लगा.ऐसा करते ही प्रोफेसर का लंड अब उसकी गंद के उपर आ लगा था & खुमारी अब उसके उपर हावी होने लगी थी.पेट पे फिसलते उसके हाथो की कलाईयो को पकड़ वो उसकी किस्सस का मज़ा ले रही थी.1 बार फिर प्रोफेसर ने उसके होंठो को चूमना चाहा तो उसने मुस्कुराते हुए मुँह फेर लिया.प्रोफेसर ने उसके लंबे,घने बालो को उसके बाए कंधे के उपर से आगे उसकी बाई छाती पे किया & उसकी गर्दन के दाई तरफ चूमने लगा.दिव्या प्रोफेसर से आड़ के खड़ी हो गयी & हल्की-2 आहे भरने लगी.

चूमते हुए प्रोफेसर गर्दन के पीछे आया & वाहा से नीचे उसके ब्लाउस की बॅक से झाकती पीठ पे.दिव्या को यकीन था की अब वो उसका ब्लाउस उतारेगा मगर प्रोफेसर ने उसे 1 बार फिर ग़लत साबित किया & वाहा से नीचे उसके पेटिकोट & ब्लाउस के बीच के नुमाया हिस्से को चूमने लगा.पेटिकोट काफ़ी नीचे से बँधा था & इस वजह से दिव्या की गंद की फांको के उपर उसकी रीढ़ के दोनो तरफ के हल्के गड्ढे या डिंपल्स सॉफ दिख रहे थे.दिव्या की कमर की मांसल बगलो को अपने मज़बूत हाथो से दबाते हुए प्रोफेसर ने जब उन डिंपल्स को चूमा तो दिव्या & बेचैन हो गयी.यहा पे ऐसे आज तक किसी ने प्यार नही किया था उसे & इस अनूठे एहसास ने 1 बार फिर उसकी चूत को परेशान कर दिया.वो अपनी भारी जाँघो को आपस मे रगड़ने लगी.

प्रोफेसर उसकी कमर से अपने हाथ & होंठ चिपकाए था.उसका बाया हाथ दिव्या की कमर की बाई तरफ लगे हुक & ज़िप को खोल रहा था & वो दाई तरफ कमर के मांसल हिस्से को चूम रहा था.पेटिकोट खुलते ही बहुत छ्होटी सी मोवरेज पॅंटी मे दिव्या की चौड़ी गंद प्रोफेसर की आँखो के सामने आ गयी.पॅंटी के नीचे से उसकी गंद की बाई फाँक पे चाँद की रोशनी सीधे पड़ रही थी & वो संगमरमर की तरह चमक रही थी के फर्श पे गिरते ही शर्म की 1 नयी लहर दिव्या के दिल मे उठी & उसने अपने महबूब की नज़रो से च्छूपना चाहा लेकिन प्रोफेसर फ़ौरन उठ खड़ा हुआ & उसे घुमा के अपनी बाहो मे कस लिया.प्रोफेसर ने उसे चूमना शुरू कर दिया,उसकी बाई बाँह दिव्या के बाए कंधे को पकड़े उसकी पीठ को घेरे हुए थी & उसकी दाई बाँह उसकी कमर को थामे थी.

प्रोफेसर ने दाई बाँह को थोड़ा नीचे कर दिव्या की दाई जाँघ को थामा & वैसे ही चूमते हुए अपने आगोश मे कसे उसे उठा लिया & बिस्तर पे ले गया.बिस्तर पे उसने दिव्या को घुटनो के बल बिठा दिया.मोमबत्तियो की मद्धम रोशनी मे केवल ब्लाउस & पॅंटी मे दिव्या बहुत दिलकश लग रही थी.उसकी आँखो मे झाँकते हुए प्रोफेसर ने अपनी पॅंट उतरी तो हया का रंग दिव्या के गालो पे और गहरा हो गया & वो वैसे ही घुटनो पे बैठी घूम गयी & अपनी पीठ प्रोफेसर की ओर कर ली..आख़िर आज उसकी ऐसी हालत क्यू थी?..क्यू वो 1 अनच्छुई कली की तरह शर्मा रही थी?..क्या ये इस कमरे के माहौल का असर है?..सुना है पहले के ज़मानो की लड़किया अपने पति को भी अपना पूरा नंगे जिस्म नही देखने देती थी..मगर वो तो आजके ज़माने की है..बेबाक..निडर..

तभी उसके ख़यालो को तोड़ते उसकी जाँघो से जाँघ सटाके अपने घुटनो पे प्रोफेसर उसके पीछे आ बैठा & उसकी गुदाज़ उपरी बाहो को सहलाते हुए उसके सर को चूमने लगा.दिव्या ने अपना सर दाई तरफ घुमा अपने गुलाबी लब अपने आशिक़ के लिए पेश कर दिए,उसने भी बड़ी खुशी के साथ उन्हे कबूल किया & उनका रस पीने लगा.प्रोफेसर के हाथ थोड़ी देर तक तो उसकी गोरी बाहो पे ही फिसलते रहे फिर उसने उन्हे उसकी जाँघो पे उतार दिया.उसका हाथ उसकी जाँघो के बाहरी हिस्से पे फिराते फिर उपर आ जाते & फिर उसकी सटी जाँघो के अन्द्रुनि हिस्से पे चलाने लगते.प्रोफेसर का लंड उसकी गंद पे दबा हुआ था.दिव्या बहाल हो गयी थी.इतनी मस्ती शायद ही कभी उसने महसूस की थी.

प्रोफेसर के हाथो & होंठो की हर्कतो ने उसे पागल कर दिया था & बहाल हो उसने उसके अपनी जाँघो पे फिराते हाथो को पकड़ लिया.प्रोफेसर ने फ़ौरन अपने हाथो को उलट कर अपनी हथेलियो को उपर कर उसकी उंगलियो मे अपनी उंगलिया फँसा के उसके हाथो को पकड़ लिया.उसकी ज़ुबान ने दिव्या के मुँह के अंदर जो खलबली मचा दी थी उस से परेशान हो उसने किस तोड़ी तो प्रोफेसर उसकी गर्दन चूमने लगा & वैसे ही उसके हाथो को पकड़े नीचे हो उसकी पीठ पे आ गया.दिव्या थोड़ा आगे झुक गई & प्रोफेसर के तपते होठ उसकी पीठ को भी तपने लगे.

दिव्या को लगा कि इस बार प्रोफेसर उसका ब्लाउस नही खोलेगा क्यूकी उसके हाथ तो उसके हाथो मे थे मगर वो 1 बार फिर ग़लत थी.प्रोफेसर ने अपने दन्तो से ही उसकी गाँठ को खोल दिया था..ज़रूर फ्लॅट पे प्रोफेसर ने जान बुझ के ऐसी गाँठ बँधी होगी..तो क्या वो आज उसे यहा जान बुझ के लाया था..उसके होंठो पे मुस्कान फैल गयी.तभी प्रोफेसर ने 1 बार फिर उसके पीछे के डिंपल्स को चूम लिया था.दिव्या ने हाथ च्छुड़ाए & बेचैन हो उस से अलग होने लगी.

प्रोफेसर फुर्ती से उठा & उसे अपनी बाहो मे भर लिया.अब प्रोफेसर टाँगे फैलाए बैठा था & दिव्या उसके सीने से अपना दाया कंधा सटा उसके आगोश मे थी.प्रोफेसर ने ढीले ब्लाउस को उसकी बाहो से अलग किया & उसे अपने सवाल का जवाब मिल गया.दिव्या ने ब्रा तो पहना था मगर स्ट्रेप्लेस्स इसलिए उसे कंधो पे ब्रा स्ट्रॅप्स नज़र नही आए थे.ऑरेंज स्ट्रेप्लेस्स ब्रा मे से उसकी भारी-भरकम छातियो का उपरी हिस्सा दोनो तरफ से पड़ रहे उसकी बाहो के दबाव से मानो ब्रा मे से छलक्ने को बेताब था.प्रोफेसर ने अपना दाया हाथ उसके सीने के उपर से ले जाते हुए उसकी पीठ पे लगे उसके ब्रा के हुक्स को खोला & ब्रा को उच्छाल दिया.

अब उसके सामने दिव्या की 38डी की चूचियाँ पूरी तरह नगी उसकी सांसो के उतार-चढ़ाव के साथ उपर-नीचे होती नुमाया थी.प्रोफेसर 1 तक उन्हे देखे जा रहा था,"ऐसी बड़ी & कसी,खूबसूरत छातियाँ मैने आज तक नही देखी.",दिव्या ने शर्मा के अपना सर दाई तरफ घुमा के प्रोफेसर के बाए कंधे मे छुपा लिया & चोर निगाहो से नीचे देखा,प्रोफेसर ने अंडरवेर नही उतरा था मगर उसके वेयैस्टबंड से लंड का सूपड़ा झाँक रहा था.लंड की लंबाई & मोटाई का अंदाज़ा लगते ही उसके बदन मे सनसनाहट दौड़ गयी.प्रोफेसर ने सर झुका के उसके बाए गाल को चूमा & फिर उसकी बाई चूची को नीचे से अपने दाए हाथ मे ऐसे भरा जैसे की कोई नाज़ुक फूल को उठाता हो.दिव्या के जिस्म मे झुरजुरी दौड़ गयी.प्रोफेसर झुका & दाई चूची को दबाते हुए बाई को उसने अपने मुँह मे भरा & चूसने लगा.

अब दिव्या की मदहोशी उसके उपर पूरी तरह हावी हो गयी & वो निढाल हो प्रोफेसर की बाई बाँह के उपर गिर गयी.उसने दिव्या को बिस्तर पे लिटाया & उसकी हवा मे उठी ऊँची चूचियो को चूमने लगा.प्रोफेसर उसके गुलाबी निपल्स का दीवाना हो गया था.दाए निपल को अपनी उंगलियो के बीच मसल के जब उसने बाई चूची को मुँह मे भरा दिव्या ने ज़ोर से आह भरी & अपना सीना बिस्तर से उठा अपनी चूची से प्रोफेसर के मुँह को और भरने लगी.उसका सर पीछे हो गया & जंघे आपस मे रगड़ खाने लगी.

प्रोफेसर ने उसकी चूचियों को बिल्कुल अनोखे अंदाज़ मे प्यार किया.वो उन्हे वाहा पे चूमता जहा से उनका उभार दिव्या के सीने से शुरू होता था फिर वो उनकी बाहरी बगलो को चूस लेता.चूचियो के नीचे होंठ लगा के लब वो निपल्स को अंगूठे से ऐसे दबाता जैसे बटन दबा रहा हो तो दिव्या जोश से पागल हो जाती & जब प्रोफेसर ने उसकी बाई चूची को हाथ मे दबोच के दाई को मुँह मे भर चूस्ते हुए उसके निपल को अपनी जीभ से छेड़ा तो दिव्या सुबकने लगी & उसका बदन कसमसाने लगा.वो 1 बार फिर झाड़ गयी थी.प्रोफेसर ने उसके सीने को छ्चोड़ दिया & घुटनो पे बैठ उसे देखने लगा.दिव्या मस्ती की खुमारी मे खोई आँखे बंद किए बिस्तर पे सिसक रही थी.

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क्रमशः........
 
KHEL KHILADI KA paart--32

gataank se aage....

professor uske hath thame use bahut haule-2 chum raha tha.divya ki baaho ke upar apne hath sarkate hue usne uske pyare chehre ko tham liya & apne daye hath ki sari ungliya uske baye kaan ke peechhe le gaya & baye ko uske dahine gaal pe laga diya.jab usne apne daye hath ki ungliyo se divya ke kaan ke peechhe sehlaya to divya ne aah bharte hue kiss tod di.

ye uske jism ka bada hi nazuk hissa tha & yaha chhute hi uski masti badh jati thi.vo professor ke daye hath pe apna gaal ragadne lagi.professor uske daye gaal ko chumne laga & vaise hi uske kaan ke peechhe sehlata raha.gaal ko sehlana chhod baye hath ke anguthe ko usne hotho pe dabate hue firaya to divya tadap uthi & professor 1 baar fir uske honth chumne laga.uske hath divya ke chehre se neeche uski narm,gudaz upari baaho pe the & unhe sehla rahe the.divya ke jism me jhurjhuri ho rahi thi.professor bahut haule-2 use chum raha tha balki uski zuban ne to abhi tak divya ke hotho ka swad bhi nahi chakha tha.

professor ke hatho ne uski baaho ko sehlate hue uske kandho ka rukh kiya & unhe sehlane lage.divya ki bechaini pal-2 badhti ja rahi thi & usi se tadap usne apne honth peechhe khinch liye to professor uske chehre ko chumte hue neeche hua & uski gori gardan ko apne garm labo se chumne laga.professor ke hath uske kandho se uske blouse straps ko neeche sarka rahe the.straps ke neeche hote hi professor ke honth pehle uske daye kandhe pe gaye & vahape chumne laga & fir uski gardan se hote uske baye kandhe pe aa gaye.

divya ko laga ki ab professor uska blouse utarega magar professor ne uski soch ko galat sabit karte hue uske straps vapas uske kandho pe chadha diya & uski gardan ke neeche seene ke upar jo gaddhe jaisi jagah hoti hai vaha pe chumne laga.vaise professor ke dil me bhi 1 sawal uth raha tha ki aakhir divya ke bra straps kaha gaye?..chalo thodi der me hi is sawal ka jawab mil jayega.vo man hi man muskuraya & uski gardan ke neeche chumta raha.1 baar fir vo divya ke daye kandhe pe pahuncha & is baar uske honth vahi nahi ruke balki us se bhi neeche uski baanh se hote hue uske hath tak pahunch gaye.

professor neeche baith khadi divya ki dayi hatheli ko chum raha tha.chum raha tha kehna galat hoga kyuki vo uski hatheli ko halue-2 chus raha tha.divya ki chut ki kasak aur badh gayi & usne bechaini se apni janghe aapas me ragdi.professor ne uski hateli chhodi & bari-2 se uski ungliya chusne laga.baat yehi tak rehti to divya shayad bardasht kar leti lekin professor uski 1 ungli me munh me bhar ke chusta & fir us ungli ki jud tak jake jaha pe 2 ungliya hatheli se judti hain,vaha pe apni jibh ki nok fira deta.divya ko laga ki uski tango me jaan nahi hai & vo khade rehne ke liye sahara dhundhne lagi.

jis khidki pe vo khade the vo thoda nikal ke bani thi & is karan khidki ke bagal me & kamre ki deewar ke beech thodi si jagah thi & divya peechhe ho usi jagah ki deewar se pith tika ke khadi ho gayi.professor ne jab uski sari ungliyo ko chum,chus liya to uska dhyan divya ke gore pet pe gaya.divya ki sanse bahut tez chal rahi thi & us vajah se uska pet bhi upar neeche ho raha tha.professor uske pet ko niharne laga & apne daye hath ki 1 ungli uske blouse ke neeche uski bagal me rakh di.divya us halki si chhuan se bhi tadap uthi & apna sar upar utha apni aankhe band kar li.professor ki ungli uske pet pe rengne lagi & professor ne bahut halke se uske pet ke upri hisse pe chum liya.

professor bahut chhoti-2 kisses se uske pet ko dhankte hue uski nabhi ki or badhne laga.kuchh hi palo me vo uski nabhi tak pahunch gaya.divya ki halat bahut kharab ho chuki thi.uski chut se ras behne laga tha & vo bechaini se apni janghe ragad rahi thi.use ab intezar tha professor ke hotho ka apninabhi ko chumne ka.uski sanse aur tez ho gayi & sath hi uski bechaini bhi.professor ki garm sanse use apni nabhi pe mehsus hui to usne dum sadh liya.uske dim me josh tha & 1 ajib sa ehsas-kuchh ghabrahat ka & kuchh maze ka.

professor jhuka & usne divya ki soch ko 1 baar fir galat sabit kiya.uske hotho ne divya ki nabhi ke neeche ke hisse ko pakda & thod sa khinchte hue apne danto tale bahut hi zyada halke se daba diya,"..aaaahhhhh..!",divya ne aah bhari & daye hath ko sar ke upar le jake deewar ko thama & baye se professor ke sar ko & jhad gayi.uska badan jhatke kha raha tha & professor uski nabhi ki gehrai ko ab apni zuban se naapne me juta tha.vo gir hi jatui agar professor ke mazbut hatho ne uski kamar ki baglo ko pakad ke use tham nahi liya hota to.jab vo jhadne ki khumari se bahar aayi to usne dekha ki professor uske pet & nabhi ko pyar se chum raha hai & uske daye hath ne uske baye hath ko tham liya hai.

professor ke baye hath ki ungli uske pet pe chalne lagi & vaha phunch gayi jaha uski sari atki thi.hath andar ghusa professor ne uski sari khol di & fir apne honth uski bayi hatheli se chipka diye.yaha bhi usne vahi harkate dohrayi jo usne daye hath ke sath ki thi.divya abhi khumari se ubri nahi thi & professor ki harkato ne use dobara mast karna shuru kar diya tha.uski ungliyo ko chusne ke baad vo upar badhne laga & uski gudaz baaho ko chumta vo 1 baar fir uske chehre tak pahunch gaya.1 baar fir usne usne uske khubsurat chehre ko tham chumna chaha to divya ne uske seene pe hath rakh use rok diya.khidki se aati chandni me divya us petticoat & blouse me sadiyo pehle ki koi ladki lag rahi thi.is kamre me hotel ki gehmagehmi ka zara bhi ehsas nahi tha.khidki se bhi bas pahadiya dikhti thi & us pal professor ko laga ki vo waqt me peechhe chala gaya hai.

divya ke hath uske seene se thoda upar hue & usne uske coat ko neeche sarka diya.uske hath professor ke shirt ke buttons ko kholne me lag gaye & unke khulte hi usne professor ki shirt ko bhi utar diya.uski nazro ke samne chand ki roshni me professor ka gathila upri jim chamak raha tha.professor ke kandhe bahut hi chaude the & uska seena bhi.bazuo ke daule to bahut hi bade the & pura jism fauladi tha.divya ne baya hath badha ke professor ke daye bazu pe rakha & daye ko uske seene ke ghane baalo me firaya to use uska jism ka ehsas komal laga.is anuthe ehsas se uske hotho pe halki muskan fail gayi.usne professor ke kandho,bazuo & sene ko hatho se sehlaya & uske seene ke beechobeech pahunch gayi.

uske mazbut pecs pe hath firate hue uska dil kiya ki vo unke beechobeech professor ke seene ko chum le.dil ki maante hue vo aage jhuki & apne kaanpte lab professor ke seene pe rakh diye.uske bazu pakde vo uske seene ko apni kisses se dhankne lagi.professor ke baalo bhare seene se balo ki 1 lakir neeche ja rahi thi.uske honth usi lakir pe chalne lage lekin jyu hi vo uski nabhi tak pahunchi vo jaise nind se jagi..ye kya kar rahi thi vo?..kaha ja rahi thi?..sharm ne use apne agosh me le liya & vo hairat me pad gayi.aisa pehle to nahi hota tha..balki jab usne pehli baar 1 ladke ko chuma tha uske baad to use aisi jhijhak,aisi haya kabhi mehsus nahi hui..fir aaj kyu?

laaj ke mare vo seehi khadi hui & apni haya chhupane ke liye jab use aur koi rasta nazar nahi aaya to usne samne dikh rahe professor ke baalo bhare seene me hi apna chehra chhupa liya.professor ne use apne agosh me bhar liya & uski pith & baalo ko sehlane laga.uske agosh me pyar tha hawas nahi,garmjoshi thi lekin vehshiyat nahi.is ehsas se khush ho divya ne abhi apni baahe uski pith ke gird kas di.kuchh palo baad professor ne daye hath se divya ki thuddi pakad uska chehra upar kiya.divya ki palke to sharm ke mare khul hi nahi rahi thi!uske dil ki hairat ka to koi ant hi nahi tha.uske jaisi bebak ladki aaj kisi aam sharmili,kunwari ladki ki tarah pesh aa rahi thi.

"tumhare jaisi rupsi ka pyar pake to main dhanya ho gaya.mujhe to apni kimat pe yaki nahi hota!"

"kyu jhuthi tarif karte ho!",laaj ke mare 1 baar fir usne professor ke chaude sene ki panah li.

"maine aaj tak kisi ladki ki jhuthi tarif nahi ki,divya.",professor uske baalo ko sehla raha tha,"..tumhare jaisi haseena se main aaj tak nahi mila.pata hai tumhari sabse zyada khubsurat chiz kya hai?..tumhari shakhsiyat.tum khuddar ho & bahadur bhi.case suljhate waqt tumhare chehre pe jo hausla & apne upar bharosa dikhta hai,vo tumhari khubsurti me 4 chand laga deta hai.",professor ne 1 baar fir uski thuddi pakad uska chehra upar kiya.divya ke chehre pe tarif sunke halki muskan fail gayi thi magar aankhe abhi bhi haya ke bojh tale band thi.

professor ne apni mehbooba ki band palko ko chuma & fir bari-2 se uske dono gulabi galo ko jinpe haya ki surkhi bhi faili thi.divya ko laga ki ab vo uske honth chumega & is asha me uske honth apne aap khul gaye lekin professor ne hontho ko chhod uski naak ko chum liya.divya ne hairat me pad aankhe kholi to use professor ki nazro me shararat dikhi & use hansi aa gayi.dono premi hanste hue 1 baar fir 1 dusre ke gale se lag gaye.thodi der baad use bahao me bhar professor ne fir se chuma & is baar apni zuban uske hotho pe fira di.is position me professor ka lund uske pet se aa laga & uska badan sihar utha.

divya ke badan me to sansani daud gayi thi & vo kanp gayi thi.usne alag hona chaha magar professor ki mazbut baaho ne use aisa nahi karne diya.professor ki zuban uske munh ke andar ghusi & uski zuban se mil gayi.divya ne bhi professor ki zuban ko jawab dena shuru kiya lekin uske jism me jo bijli daud rahi thi usne use bechain kar diya tha.aisa pehle kabhi nahi hua tha.chuai me vo jitni madhosh ho jaye magar vo humesha bebak rehti thi & masti ke is khel me apne sathi ki barabari karti thi magar aaj professor ki harkato ne uske dil me bhi aam ladkiyo vala ghabrahat & maze ka mila-jula bhav paida kar diya tha.

professor ki zuban ki harkato se pareshan ho usne kiss todi & uske aagosh se chhut ke ghum gayi magar professor ne usi waqt use peechhe se apni baaho ke ghere me le liya & uske pet ko sehlate hue uske daye gaalo ko chumne laga.aisa karte hi professor ka lund ab uski gand ke upar aa laga tha & khumari ab uske uapr hawi hone lagi thi.pet pe fisalte uske hatho ki kaliyo ko pakd vo uski kisses ka maza le rahi thi.1 baar fir professor ne uske hotho ko chumna chaha to usne muskurate hue munh fer liya.professor ne uske lumbe,ghane balo ko uske baye kandhe ke upar se aage uski bayi chhati pe kiya & uski gardan ke dayi taraf chumne laga.divya professor se ad ke khadi ho gayi & halki-2 aahe bharne lagi.

chumte hue professor gardan ke peechhe aaya & vaha se neeche uske blouse ki back se jhankti pith pe.divya ko yakin tha ki ab vo uska blouse utarega magar professor ne use 1 bar fir galat sabit kiya & vaha se neeche uske petticoat & blouse ke beech ke numaya hisse ko chumne laga.petticoat kafi neeche se bandha tha & is vajah se divya ki gand ki fanko ke upar uski reedh ke dono taraf ke halke gaddhe ya dimples saaf dikh rahe the.divya ki kamar ki mansal baglo ko apne mazbut hatho se dabate hue professor ne jab un dimples ko chuma to divya & bechain ho gayi.yaha pe iase aaj tak kisi ne pyar nahi kiya tha use & is anuthe ehsas ne 1 baar fir uski chut ko pareshan kar diya.vo apni bhari jangho ko aapas me ragadne lagi.

professor uski kamar se apne hath & honth chipkaye tha.uska baya hath divya ki kamar ki bayi taraf lage hook & zip ko khol raha tha & vo dayi taraf kamar ke mansal hisse ko chum raha tha.petticoat khulte hi bahut chhoti si morange panty me divya ki chaudi gand professor ki aankho ke samne aa gayi.panty ke neeche se uski gand ki bayi fank pe chand ki roshni seedhe pad rahi thi & vo sangmarmar ki tarah chamak rahi thipetticoat ke farsh pe girte hi sharm ki 1 nayi lehar divya ke dil me uthi & usne apne mehboob ki nazro se chhupna chaha lekin professor fauran uth khada hua & use ghuma ke apni baaho me kas liya.professor ne use chumna shuru kar diya,uski bayi banh divya ke baye kandhe ko pakde uski pith ko ghere hue thi & uski dayi banh uski kamar ko thame thi.

professor ne dayi banh ko thoda neeche kar divya ki dayi jangh ko thama & vaise hi chumte hue apne agosh me kase use utha liya & bistar pe le gaya.bistar pe usne divya ko ghutno ke bal bitha diya.mombattiyo ki maddham roshni me keval blouse & panty me divya bahut dilkash lag rahi thi.uski aankho me jhankte hue professor ne apni pant utari to haya ka rang divya ke galo pe aur gehra ho gaya & vo vaise hi ghutno pe baithi ghum gayi & apni pith professor ki or kar li..aakhir aaj uski aisi halat kyu thi?..kyu vo 1 anchhui kali ki tarah sharma rahi thi?..kya ye is kamre ke mahaul ka asar hai?..suna hai pehle ke zamano ki ladkiya apne pati ko bhi apna pura nanag jism nahi dekhne deti thi..magar vo to aajke zamane ki hai..bebak..nidar..

tabhi uske khayalo ko todte uski jangho se jangh satake apne ghutno pe professor uske peechhe aa baitha & uski gudaz upri baaho ko sehlate hue uske sar ko chumne laga.divya ne apna sar dayi taraf ghuma apne gulabi lab apne aashiq ke liye pesh kar diye,usne bhi badi khushi ke sath unhe kabul kiya & unka ras pine laga.professor ke hath thodi der tak to uski gori baaho pe hi fisalte rahe fir usne unhe uski jangho pe utar diya.uska hath uski jangho ke bahri hisse pe firte fir uapr aa jate & fir uski sati jangho ke andruni hisse pe chalne lagte.professor ka lund uski gand pe daba hua tha.divya behal ho gayi thi.itni masti shayad hi kabhi usne mehsus ki thi.

professor ke hatho & hotho ki harkato ne use pagal kar diya tha & behal ho usne uske apni jangho pe firte hatho ko pakad liya.professor ne fauran apne hatho ko ulat kar apni hatheliyo ko upar kar uski ungliyo me apni ungliya fansa ke uske hatho ko pakad liya.uski zuban ne divya ke munh ke andar jo khalbali macha di thi us se pareshan ho usne kiss todi to professor uski gardan chumne laga & vaise hi uske hatho ko pakde neeche ho uski pith pe aa gaya.divya thoda aage jhuk agyi & professor ke tapte hoth uski pith ko bhi tapane lage.

divya ko laga ki is baar professor uska blouse nahi kholega kyuki uske hath to uske hatho me the magar vo 1 baar fir galat thi.professor ne apne danto se hi uski ganth ko khol diya tha..zarur flat pe professor ne jaan bujh ke aisi ganth bandhi hogi..to kya vo aaj use yaha jaan bujh ke laya tha..uske hotho pe muskan fail gayi.tabhi professor ne 1 baar fir uske peechhe ke dimples ko chum liya tha.divya ne hath chhudaye & bechain ho us se alag hone lagi.

professor furti se utha & use apni baaho me bhar liya.ab professor tange failaye baitha tha & divya uske seene se apna daya kandha sataye uske agosh me thi.professor ne dhile blouse ko uski baaho se alag kiya & use apne sawal ka jawab mil gaya.divya ne bra to pehna tha magar strapless isliye use kandho pe bra straps nazar nahi aaye the.orange strapless bra me se uski bhari-bharkam chhatiyo ka upri hissa dono taraf se pad rahe uski baaho ke dabav se mano bra me se chhalakne ko betab tha.professor ne apna daya hath uske seene ke upar se le jate hue uski pith pe lage uske bra ke hooks ko khola & bra ko uchhal diya.

ab uske samne divya ki 38D ki chhatiya puri tarah nagi uski sanso ke utar-chadhav ke sath upar-neeche hoti numaya thi.professor 1 tak unhe dekhe ja raha tha,"aisi badi & kasi,khubsurat chhatiya maine aaj tak nahi dekhi.",divya ne sharma ke apna sar dayi taraf ghuma ke professor ke baye kandhe me chhupa liya & chor nigaho se neeche dekha,professor ne underwear nahi utara tha magar uske waistband se lund ka supada jhank raha tha.lund ki lumbai & motai ka nadaza lagate hi uske badan me sansanahat daud gayi.professor ne sar jhuka ke uske baye gaal ko chuma & fir uski bayi chhati ko neeche se apne daye hath me aise bhara jaise ki koi nazuk phool ko uthata ho.divya ke jism me jhurjhuri daud gayi.professor jhuka & dayi chhati ko dabate hue bayi ko usne apne munh me bhara & chusne laga.

ab divya ki madhoshi uske upar puri tarah hawi ho gayi & vo nidhal ho professor ki bayi banh ke upar gir gayi.usne divya ko bistar pe litaya & uski hawa me uthi oonchi choochiyo ko chumne laga.professor uske gulabi nipples ka deewana ho gaya tha.daye nipple ko apni ungliyo ke beech masal ke jab usne bayi chhati ko munh me bhara divya ne zor se aah bhari & apna seena bistar se utha apni chhati se professor ke munh ko aur bharne lagi.uska sar peechhe ho gaya & janghe aapas me ragad khane lagi.

professor ne uski chhatiyo ko bilkul anokhe andaz me pyar kiya.vo unhe vaha pe chumta jaha se unka ubhar divya ke seene se shuru hota tha fir vo unki bahri baglo ko chus leta.choochiyo ke neeche honth laga ke lab vo nipples ko anguthe se aise dabata jaise button daba raha ho to divya josh se pagal ho jati & jab professor ne uski bayi chhati ko hath me daboch ke dayi ko munh me bhar chuste hue uske nipple ko apni jibh se chheda to divya subakne lagi & uska badan kasmasane laga.vo 1 baar fir jhad gayi thi.professor ne uske seene ko chhod diya & ghutno pe baith use dekhne laga.divya masti ki khumari me khoyi aankhe band kiye bistar pe sisak rahi thi.

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--33

कुच्छ पॅलो बाद जब वो होश मे आई तो उसने प्रोफेसर को खुद को निहारते पाया.उसने अपना बाया हाथ उसकी ओर बढ़ाया तो प्रोफेसर ने उसे थामा & उठा के बिठा लिया फिर वो खड़ा हुआ & अपना अंडरवेर उतार दिया & फिर घुटनो पे खड़ा हो गया.दिव्या की नज़रे प्रोफेसर के लंड से चिपक के रह गयी.लंड 9.5 इंच लंबा & लगभग 1.5-2 इंच मोटा था.प्रोफेसर के सीने से जो बालो की लकीर नीचे की ओर बढ़ी थी वो लंड के उपर आकर ख़त्म हो गयी थी क्यूकी प्रोफेसर ने अपनी झांतो & लंड के आस-पास के बालो को शेव कर लिया था.

इस वजह से लंड और लंबा लग रहा था & उसके नीचे लटके अंडे गोल्फ बॉल्स की तरह लग रहे थे.दिव्या ने अपनी ज़िंदगी मे ऐसा लंड नही देखा था & खुद बा खुद उसका हाथ आगे बढ़ा & उसने लंड को थाम लिया.लंड बहुत गर्म था & उसका एहसास दिव्या को बहुत भला लगा.उसने उसपे मुट्ठी कसी तो पाया कि उसकी उंगलिया & अंगूठा बमुश्किल लंड को घेर पा रहे हैं.उसने 1 बार धीरे से हिलाया तो प्रोफेसर की आह निकल गयी.दिव्या ने हिलाने की रफ़्तार थोड़ी बढ़ाई & थोड़ा आगे हो उसके सूपदे को हल्के से चूम लिया,प्रोफेसर ने मज़े मे उसके सर को पकड़ लिया & उसके बाल सहलाने लगा.लंड प्रेकुं से गीला था जिसे दिव्या ने चाट लिया.

दिव्या ने लंड को प्रोफेसर के पेट से सटा दिया & उसकी जड से लेके नोक तक अपनी जीभ की नोक फिरा दी.प्रोफेसर ने 1 और आह भरी.दिव्या ने जीभ वापस नीचे फिराई & प्रोफेसर के बिना बालो के आंडो को बारी-2 से मुँह मे भर ज़ोर से चूस लिया.प्रोफेसर ने अब तेज़ आह भरी.दिव्या ने लंड को थामा & हिलाते हुए अपने मुँह मे भर लिया.लंड के आकार ने उसे मदहोश कर दिया था.लंड को हिलाते,आंडो को दबाते वो लंड को चूमते अपनी ही दुनिया मे खो गयी थी जहा बस वो लंड था & कुच्छ नही,उसे तो लंड के मालिक का भी होश नही था.कुच्छ देर बाद जब लंड प्रेकुं से फिर गीला हुआ जिसे उसने खुश-2 चॅटा तो उसे ख़याल आया कि कोई उसका मुँह चोदने की कोशिश नही कर रहा है.

आमतौर पे उसके चूसने से पागल होके उसके प्रेमी उसका सर पकड़ उसका मुँह चोदने लगते थे लेकिन प्रोफेसर ऐसा नही कर रहा था.लंड मुँह मे भरे दिव्या ने उपर देखा तो मुश्किल से अपने उपर काबू रखे,अपनी कमर को हिलने से रोके प्रोफेसर का चेहरा उसे दिखा.प्रोफेसर ने हौले से लंड उसके मुँह से खींचा तो वो घुटनो पे खड़ी हो गयी & प्रोफेसर के बाज़ू थाम लिए.उसे उसका इतना ख़याल था इस बात से उसके दिल मे उसके लिए बहुत प्यार उन्माद आया था.दोनो अगले ही पल 1 दूसरे की बाहो मे थे.

प्रोफेसर ने उसे चूमते हुए उसे बिस्तर पे लिटाया & 1 बार फिर उसके होंठो से उसके पेट तक का सफ़र तय किया.इस बार उसके पेट को चूमने के बाद उसने उसकी पॅंटी की वेयैस्टबंड मे उंगलिया फँसाई तो उसने पानी गंद उचका दी & अगले ही पल उसका हुस्न अपने पूरे शबाब मे प्रोफेसर की आँखो के सामने था.प्रोफेसर घुटनो पे बैठ के उसे निहारने लगा & फिर उसकी दाई टांग उठा ली.अपने होंठ उसने उसके दाए पाँव से लगाए & उसकी उंगलियो को भी वैसे ही चूसा जैसे हाथो की उंगलियो को चूसा था.उंगलिया चूस्ते हुए जब उसने उसकी रस से भीगी पॅंटी उठा के उसे चूमा तो दिव्या की मस्ती फिर बढ़ गयी.

प्रोफेसर ने दोनो पाँवो को बारी-2 वैसे ही चूमा & फिर उसकी टाँगो को चूमता हुआ उसके घुटनो तक आ गया.उसके घुटनो को जी भर के चूमने के बाद उसने उसकी टाँगे फैलाई & उसकी दाई अन्द्रुनि जाँघ को चूमता हुआ उसकी चूत तक पहुँच गया.वाहा पहुँच उसने चूत के आस-पास तब तक चूमा जब तक दिव्या बेचैन हो उसके सर को पकड़ अपनी चूत पे दबाने की कोशिश करते हुए अपनी कमर नही हिलाने लगी.

"आननह..!",प्रोफेसर ने उसकी टाँगे अपने कंधो पे चढ़ाई & बिस्तर पे पेट के बल लेट गया.उसकी जाँघो के बाहरी हिस्सो को सहलाते हुए जैसे ही उसने अपने होंठो को दिव्या की चूत पे रख उस से बह रहे रस को कुत्ते की तरह लपलपाति जीभ से चाटने लगा तो दिव्या ने आह भरी.प्रोफेसर की जीभ उसकी चूत के अंदर दाखिल हो उसके रस को पिए जा रही थी & वो बेचैनी मे आहे भर रही थी.थोड़ी देर बाद र्पोफ्सर ने जीभ चूत से निकाल उसके दाने पे रख दी & उसे चाटने लगा & ठीक उसी वक़्त अपनी 2 उंगलिया चूत मे घुसा चूत को चोदने लगा.

"ऊन्न्नह..!",दिव्या इस दोहरे हमले को नही झेल पाई & झाड़ गयी.झाड़ते ही उसकी कसी चूत & ज़्यादा कस गयी & प्रोफेसर की उंगलियो को अपने भीतर क़ैद कर लिया.प्रोफेसर को उसकी कसावट पे बड़ी हैरत हुई & उसके दिल मे ख़याल आया कि उसकी उंगलियो की जगह कुच्छ ही देर मे उसका लंड होगा & उस वक़्त के मज़े के एहसास से वो मुस्कुरा उठा.

दिव्या झाड़ रही थी & प्रोफेसर डिक्सिट ने अपनी उंगलियो & ज़ुबान को उसकी चूत से अलग कर लिया था & उसकी टांगो के बीच बैठा उसे देख रहा था.कुच्छ पलो बाद जब दिव्या ने आँखे खोली & प्रोफेसर को उसके संभलने का इंतेज़ार करता पाया तो वो उसकी कायल हो गयी..कितना ख़याल था उसे उसका!..कोई और होता तो अभी तक उसके उपर सवार हो चुका होता!

"प्रोफेसर..",दिव्या ने अपनी टाँगे थोड़ी और फैलाई & अपने हाथ अपने सर के पीछे ले जाके फैला अपनी ऊँची छातियो को और उभार दिया,"..मुझे चोदो.",अपनी महबूबा की बात भला प्रोफेसर कैसे टाल सकता था.उसने उसके घुटने मोड तो दिव्या ने अपने निचले होंठ के बाए कोने को अपने दन्तो तले दबा लिया.प्रोफेसर ने अपने बाए हाथ मे लंड को थामा & उसकी चूत की दरार पे रखा & 1 धक्का दिया & सूपदे को अंदर धकेला.

"आहह..!",मोटे सूपदे ने उसकी चूत को फैला दिया था & दिव्या को हल्का दर्द महसूस हुआ था.प्रोफेसर रुक गया था.दिव्या ने उसे देखा & आँखो से लंड को अंदर डालने का इशारा किया तो प्रोफेसर धीरे-2 लंड को अंदर धकेलने लगा.दिव्या ने आँखे मींच ली.उसे दर्द हो रहा था.प्रोफेसर का लंड ना केवल बेहद लंबा था मगर कुच्छ ज़्यादा ही मोटा था & उसकी चूत को बहुत ज़्यादा फैला रहा था.

"ऊहह..!",लंड जब 7 इंच से आगे गया तो दिव्या दर्द से कराह उठी.प्रोफेसर रुक गया & उसने लंड को आगे नही ठेला.दिव्या ने उसे खींच के अपने उपर लिटा लिया तो प्रोफेसर उतने ही लंड से उसके बाए कान & गाल को चूमता उसे चोदने लगा.दिव्या हल्की-2 आहे भरने लगी & कुच्छ देर बाद उसके उपर मस्ती छाने लगी.उसने अपने पैरो के तलवो को प्रोफेसर की मज़बूत टाँगो पे जमा दिया.

"प्रोफेसर..",उसने अपने चेहरे के दाई तरफ पड़े प्रोफेसर के मज़बूत बाज़ू के दौले को चूमा,"..अपना पूरा लंड अंदर घुसाओ ना!"

"तुम्हे दर्द नही होगा?",प्रोफेसर ने अपने चेहरे से उसके चेहरे को सीधा कर उसके होंठ चूमे & उसकी आँखो मे झाँका.

"उम्र भर के मज़े के लिए पल भर के दर्द को सह लूँगी मैं!",इस बात ने प्रोफेसर के दिल मे प्यार & जिस्म मे जोश की लहर दौड़ा दी & 1 ही धक्के मे उसने बचा हुआ लंड भी दिव्या की चूत मे घुसा दिया.

"ऊव्वववव..!",दिव्या चीख उठी.लंड वाहा पहुँचा था जहा अभी तक कोई भी लंड नही पहुँचा था-उसकी कोख के मुँह तक.प्रोफेसर रुक गया था & उसके चेहरे को चूम रहा था.उसे पता था कि दिव्या अभी तकलीफ़ मे है & वो उसे संभलने का वक़्त दे रहा था.थोड़ी देर बाद दिव्या ने अपने चेहरे के बगल मे फैले उसके मज़बूत बाजुओ पे पाने हाथ फिराते हुए उसके कंधो को सहलाया & फिर उसकी पीठ सहलाने लगी.

"रुक क्यू गये?चोदो ना!",दिव्या ने उसके बाए कान मे अपनी जीभ फिराई तो प्रोफेसर ने 1 बार फिर उसकी चुदाई शुरू कर दी.पहले तो वो तेज़ धक्के लगा रहा था मगर लंड को बस 2 इंच ही बाहर निकाल के.थोड़ी देर बाद जब उसने पूरे लंड को बाहर निकाल के अंदर डालना शुरू किया तो दिव्या पागल ही हो गयी.कोख पे पड़ती हर चोट उसके जिस्म मे बिजली दौड़ा देती.वो पागलो की तरह चीख रहा थी & प्रोफेसर की पीठ को खरोंच रही थी.कुच्छ ही पलो मे प्रोफेसर को अपने लंड पे उसकी चूत बहुत ज़्यादा कसति हुई महसूस हुई & वो समझ गया कि वो झाड़ रही है.दिव्या उसके बदन से चिपकी हुई सूबक रही थी & अपनी कमर हिला रही थी.

उसके झड़ने के बाद प्रोफेसर उसके उपर से उठा & अपनी कोहनियो पे अपना वज़न टीका के उसकी चूचिया चूसने लगा.दिव्या उसके बाल सहला रही थी & वो उसे बहुत धीरे-2 चोद रहा था.दिव्या को अपनी चूत पूरी भरी महसूस हो रही थी & इस एहसास से उसका दिल खुशी से भर गया था.प्रोफेसर ने उसकी छातियो को अपने होंठो के निशान से भर दिया & फिर उठ के अपने घुटनो पे हो गया & उसकी छातियाँ मसलते उसकी टाँगे सहलाते उसे चोदने लगा.कुच्छ ही पलो मे दिव्या फिर से हवा मे उड़ रही थी & उसके गले से मस्तानी आहे निकल रही थी.

प्रोफेसर ने उसकी उपरी बाहे थामी & उसे उपर खींच अपने सीने से लगा लिया.दिव्या चौंक उठी & उसने अपनी बाहे उसके गले मे डाल दी.फुर्ती से प्रोफेसर ने अपनी टाँगे 1-1 करके सामने फैलाई & पेट के बल लेट गया.अब उसकी महबूबा उसके उपर थी.दिव्या ने उसके सीने पे हथेलिया जमाई & अपनी कमर हिलने लगी.उसकी बहो से दबी उसकी चूचिया बड़े मस्ताने अंदाज़ मे छल्छला रही थी.प्रोफेसर ने अपने मज़बूत हाथो से उन्हे गूंधना शुरू किया तो दिव्या ने अपना सर मस्ती मे पीछे फेंक दिया & ज़ोर-2 से कमर हिलाने लगी.प्रोफेसर ने उसकी चूचियाँ छ्चोड़ी तो उसकी गंद की कसी फांको को पकड़ लिया & उन्हे मसलने लगा.

उन्हे पकड़ वो कभी बाहर की तरफ खींचता तो कभी उन्हे 1 साथ आपस मे दबा देता.दिव्या के लिए ये सारा एहसास नया था & वो मस्ती मे मुस्कुराती अपने प्रेमी के हाथो का लुत्फ़ उठा रही थी.तभी प्रोफेसर ने उसकी गंद को बिल्कुल छ्चोड़ दिया & अपने दाए हाथ की बस 1 उंगली को उसकी गंद की दरार पे बहुत हौले से फिरा दिया.हाथो के शदीद एहसासो के बाद इतना हल्का सा मुलायम एहसास!दिव्या के अंदर जैसे बिजली की कोई नयी धारा फुट पड़ी & प्रोफेसर को दोबारा अपने लंड पे उसकी चूत की शदीद कसावट महसूस हुई.प्रोफेसर के लंड ने उसे दूसरी बार झाड़वा दिया था.वो हाँफती हुई उसके सीने पे गिर गयी मगर प्रोफेसर का काम अभी पूरा नही हुआ था.
 
उसकी पीठ सहलाते,उसके बालो को चूमते उसने उसे फिर से संभलने का वक़्त दिया & फिर उसे पलट के अपने नीचे किया.1 बार फिर वो उसकी टाँगो के बीच अपने घुटनो पे बैठा था.दिव्या अधमुंदी पॅल्को से उसे देख रही थी.उसने उसकी दाई टांग को पकड़ मोड़ कर उसे भी अपने जिस्म की दूसरी तरफ दिव्या की बाई टांग के उपर किया.फिर दिव्या का उपरी बदन भी बाई करवट पे कर फ़ौरन उसके पीछे आ उसकी पीठ से आ लगा.इस सब के दौरान उसका लंड दिव्या की चूत से बाहर नही निकला था.

उसने फिर से उसे चोदना शुरू किया & 1 बार फिर दिव्या मस्ती के सफ़र पे चल पड़ी.दिव्या अपनी बाई कोहनी पे उचक गयी & प्रोफेसर ने अपना दया हाथ उसकी कमर पे डाल दिया & उसकी चूचने मसलने लगा.दोनो 1 दूसरे को चूमते हुए चुदाई कर रहे थे.इस पोज़िशन मे लंड पूरा अंदर नही जा रहा था & दिव्या को थोड़ा आराम था.उसकी चूत अभी भी प्रोफेसर के लंड की आदि नही हुई थी.प्रोफेसर ने हाथ को छातियो से हटा उसकी चूत के दाने को पकड़ लिया तो दिव्या ने भी अपना दाया हाथ पीछे ले जाते हुए उसके आंडो पे फिराना शुरू कर दिया.प्रोफेसर के धक्के उसकी इस हरकत से तेज़ हो गये & उसकी उंगली की रफ़्तार भी.1 बार फिर दिव्या की चूत ने प्रोफेसर के लंड को अपनी गिरफ़्त मे कसा & वो आहे भरने लगी.

प्रोफेसर ने फ़ौरन उसके दाने को छ्चोड़ा & उसकी कमर पकड़ उसे उल्टा कर उसके उपर चढ़ गया.फिर उसने अपने घुटने मोड & अपने साथ दिव्या की कमर उठा उसे डॉगी स्टाइल मे चोदने लगा.बिस्तर की मूडी-तूडी चादर मे सर धंसाए दिव्या अब आधी बेहोशी की हालत मे थी.प्रोफेसर की चुदाई उसे मस्ती की उन ऊँचाइयो पे ले गयी थी जिनके वजूद के बारे मे उसे पता बी नही था.बस आहे भरती वो उस से चुदती रही .प्रोफेसर उसकी चूचियों को दबाता उसके उपर लेट गया & गहरे धक्के लगाने लगा.दिव्या झाड़ चुकी थी & शांत पड़ी थी.

अब प्रोफेसर को अपने अंदर उबल रहा लावा रुकता नही नज़र आ रहा था.वो उठा & उसने दिव्या को अपने साथ फिर से बाई करवट पे किया.उसने उसकी दाई टांग उठाई & घुटनो पे होता हुआ उसकी टाँगो के बीच आ गया.ऐसा करते ही दिव्या ने उसे अपने उपर खींच लिया & अपनी बाहो & टाँगो मे उसे कस लिया.वो समझ गयी थी कि इस बार प्रोफेसर झदेगा & वो उसके साथ झड़ना चाहती थी.

"चोदो मुझे जानू..और चोदो...हाआंन्‍नणणन्..अंदर तक..ऊओवव्वव.....रुकना मत मेरी जान..!",दिव्या प्रोफेसर की पीठ से लेके गंद तक अपने नखुनो के निशान छ्चोड़ रही थी & अपनी टाँगो को उसकी जाँघ से उठाके उसकी कमर पे क्रॉस कर के कस रही थी.प्रोफेसर उसके चेहरे को चूमता,उसके कानो मे जीभ फिराता उसकी बातो & आहो से पागल हो रहा था.तभी दिव्या की चूत ने कुच्छ ज़्यादा ही ज़ोर से उसके लंड को कसा & इस बार प्रोफेसर ने अपने उपर कोई काबू नही रखा.उसके लंड से वीर्य की मोटी धार फुट पड़ी जिसे दिव्या ने सीधा पानी कोख के अंदर जाते महसूस किया.वो ज़ोर-2 से सूबक रही थी,प्रोफेसर का गाढ़ा वीर्य च्छुटे ही जा रहा था & हर फव्वारे पे उसके बदन मे मज़े की 1 और लहर दौड़ जाती,इतना मज़ा जो वो बर्दाश्त नही कर पा रही थी!प्रोफेसर की भी आहे निकल गयी थी.ऐसी कसी चूत उसने ज़िंदगी मे नही चोदि थी & उसके एहसास ने उसे भी मज़े की नयी दुनिया दिखाई थी.दोनो प्रेमी अपने प्यार का इकरार करते 1 दूसरे से लिपटे पड़े थे & दीवारो पे लगी राजा & रानी की तस्वीरे उनके प्यार को देखते हुए मुस्कुरा रही थी.

............................

"इतनी जल्दी नींद आ रही है तुम्हे?",मेघना बिस्तर मे घुसते ही बाई करवट पे लेटे अजीत से पीछे से चिपक गयी.

"हूँ..",अजीत अपने सीने पे चलते उसके दाए हाथ को सहलाने लगा.

"कल भी ऐसे ही सो गये थे.",अपनी बात पे मेघना को खुद ही शर्म आ गयी & उसने अजीत की पीठ मे मुँह च्छूपा लिया.

"थक गया था कल.",अजीत ने झूठ बोला.दिव्या के साथ की गयी मस्ती के दौरान उसने जो उसकी पीठ पे खरोंच के निशान छ्चोड़े थे,उसे उनका ख़याल आ गया था & इस वजह से वो कल रात सो गया था.निशान तो अभी भी उसकी पीठ पे मौजूद थे मगर कमरे मे अंधेरा था & मेघना को वो नज़र नही आते.

"तुमने उठाया क्यू नही कल आज की तरह?",उसने करवट बदल अपनी बीवी को बाहो मे भर लिया तो प्यासी मेघना ने फ़ौरन अपना दाया हाथ उसके कुर्ते मे घुसा दिया.

"इतनी भी मतलबी नही हू कि तुम्हारी थकान का ख़याल ना करू.",वो उसके कुर्ते से झाँक रहे सीने के बालो मे अपनी नाक घुमा रही थी कि अजीत ने उसका चेहरा उपर किया & उसके होंठ चूम लिए.मेघना ने उसके कुर्ते से हाथ निकाला & उसके पीछे बढ़के साइड-टेबल पे रखे लॅंप को जलाने लगी.

"क्या कर रही हो?!",अजीत ने किस तोड़ उसका हाथ रोका.

"लाइट जला रही थी.",दिव्या ने 1 बार फिर उसके सीने मे मुँह च्छूपा लिया,"तुम बिना लाइट के करते कहा हो?",उसकी लरजती आवाज़ मे प्यार,पति के जिस्म की चाहत & शर्म की मिठास घुली थी.

"आज ऐसे ही प्यार करूँगा तुम्हे..",अजीत ने उसे सीधा लिटाया & उसके उपर झुक उसकी गोरी गर्दन को चूमने लगा,"..पूरे चाँद की रोशनी मे देखूँगा तुम्हारे जिस्म को..!",1 पल को उसका दिल ग्लानि से भर गया,वो अपनी बीवी से झूठ बोल रहा था..उसे डर था कि मेघना कही उसकी पीठ के निशान ना देख ले & इसी वजह से वो बत्ती नही जला रहा था.उसने उस बीवी से झूठ बोला था जो उसे बेहद चाहती थी & सिर्फ़ उसे चाहती थी बल्कि.आज उसने खुद प्यार के लिए पहल की थी & जैसे उसे पसंद था वैसे ही अंदाज़ मे प्यार कर भी रही थी....इसी बात की तलाश थी ना उसे..इसीलिए वो दिव्या की बाहो मे दुबारा गया था ना..क्या होता अगर वो बेवफ़ाई करने से पहले थोड़ा सोच लेता तो..उसकी बीवी खुद को उसी के साँचे मे ढाल रही थी केवल इसलिए कि वो उसे अपना सब कुच्छ मानती थी..

तभी मेघना ने उसका सर थोड़ा नीचे अपने सीने पे किया & अजीत उन गोलाईयों मे खो अपनी जद्दोजेहद भूल गया.

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दोस्तो कैसी रही दिव्या और प्रोफ़ेसर की मस्त चुदाई बताना मत भूलना आपका दोस्त राज शर्मा

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क्रमशः........

 
KHEL KHILADI KA paart--33

kuchh palo baad jab vo hosh me ayi to usne professor ko khud ko niharte paya.usne apna baya hath uski or badhaya to professor ne use thama & utha ke bitha liya fir vo khada hua & apna underwear utar diya & fir ghutno pe khada ho gaya.divya ki nazre professor ke lund se chipak ke reh gayi.lund 9.5 inch lumba & lagbhag 1.5-2 inch mota tha.professor ke seene se jo balo ki lakir neeche ki or badhi thi vo lund ke uapr khatm ho gayi thi kyuki professor ne apni jhanto & lund ke aas-paas ke balo ko shave kar liya tha.

is vajah se lund aur lumba lag raha tha & uske neeche latke ande golf balls ki tarah lag rahe the.divya ne apni zindagi me aisa lund nahi dekha tha & khud ba khud uska hath aage badha & usne lund ko tham liya.lund bahut garm tha & uska ehsas divya ko bahut bhala laga.usne uspe mutthi kasi to paya ki uski ungliya & angutha bamushkil lund ko gher pa rahe hain.usne 1 baar dhire se hilaya to professor ki aah nikal gayi.divya ne hilane ki raftar thodi badhayi & thdoa aage ho uske supade ko halke se chum liya,professor ne maze me uske sar ko pakad liya & uske baal sehlane laga.lund precum se gila tha jise divya ne chat liya.

divya ne lund ko professor ke pet se sata diya & uski jud se leke nok tak apni jibh ki nok fira di.professor ne 1 aur aah bhari.divya ne jibh vapas neeche firayi & professor ke bina balo ke ando ko bari-2 se munh me bhar zor se chus liya.professor ne ab tez aah bhari.divya ne lund ko thama & hilate hue apne munh me bhar liya.lund ke aakar ne use madhosh kar diya tha.lund ko hilate,ando ko dabate vo lund ko chumte apni hi duniya me kho gayi thi jaha bas vo lund tha & kuchh nahi,use to lund ke malik ka bhi hosh nahi tha.kuchh der baad jab lund precum se fir gila hua jise usne khush-2 chata to use khayal aaya ki koi uska munh chodne ki koshish nahi kar raha hai.

aamtaur pe uske chusne se pagal hoke uske premi uska sar pakad uska munh chodne lagte the lekin professor aisa nahi kar raha tha.lund munh me bhare divya ne upar dekha to mushkil se apne upar kabu rakhe,apni kamar ko hilne se roke professor ka chehta use dikha.professor ne haule se lund uske munh se khincha to vo ghutno pe khadi ho gayi & professor ke bazu tham liye.use uska itna khayal tha is baat se uske dil me uske liye bahut pyar unmad aaya tha.dono agle hi pal 1 dusre ki baaho me the.

professor ne use chumte hue use bistar pe litaya & 1 baar fir uske hotho se uske pet tak ka safar tay kiya.is baar uske pet ko chumne ke baad usne uski panty ki waistband me ungliya fansayi to usne pani gand uchka di & agle hi pal uska husn apne pure shabab me professor ki aankho ke samne tha.professor ghutno pe baith ke use niharne laga & fir uski dayi tang utha li.apne honth usne uske daye panv se lagaye & uski ungliyo ko bhi vaise hi chusa jaise hatho ki ungliyo ko chusa tha.ungliya chuste hue jab usne uski ras se bhigi panty utha ke use chuma to divya ki masti fir badh gayi.

professor ne dono panvo ko bari-2 vaise hi chuma & fir uski tango ko chumta hua uske ghutno tak aa gaya.uske ghutno ko ji bhar ke chumne ke baad usne uski tange failayi & uski dayi andruni jangh ko chumta hua uski chut tak pahunch gaya.vaha pahunch usne chut ke aas-pas tab tak chuma jab tak divya bechain ho uske sar ko pakad apni chut pe dabane ki koshish karte hue apni kamar nahi hilane lagi.

"aannhhhh..!",professor ne uski tange apne kandho pe chadhai & bistar pe pet ke bal let gaya.uski jangho ke bahri hisso ko sehlate hue jaise hi usne apne hotho ko divya ki chut pe rakh us se beh rahe ras ko kutte ki tarah laplapati jibh se chaatne laga to divya ne aah bhari.professor ki jibh uski chut ke andar dakhil ho uske ras ko piye ja rahi thi & vo bechaini me aahe bhar rahi thi.thodi der baad rpofessor ne jibh chut se nikal uske dane pe rakh di & use chatne laga & thik usi waqt apni 2 ungliya chut me ghusa chut ko chodne laga.

"oonnnhhhhh..!",divya is dohre humle ko nahi jhel payi & jhad gayi.jhadte hi uski kasi chut & zyada kas gayi & professor ki ungliyo ko apne bhitar qaid kar liya.professor ko uski kasavat pe badi hairat hui & uske dil me khayal aaya ki uski ungliyo ki jagah kuchh hi der me uska lund hoga & us waqt ke maze ke ehsas se vo muskura utha.

Divya jhad rahi thi & Professor Dixit ne apni ungliyo & zuban ko uski chut se laag kar liya tha & uski tango ke beech baitha use dekh raha tha.kuchh palo baad jab divya ne aankhe kholi & professor ko uske sambhalne ka intezar karta paya to vo uski kayal ho gayi..kitna khayal tha use uska!..koi aur hota to abhi tak uske upar savar ho chuka hota!

"professor..",divya ne apni tange thodi aur failayi & apne hath apne sar ke peechhe le jake faila apni oonchi chhatiyo ko aur ubhar diya,"..mujhe chodo.",apni mehbooba ki baat bhala professor kaise taal sakta tha.usne uske ghutne mode to divya ne apne nichle honth ke baye kone ko apne danto tale daba liya.professor ne apne baye hath me lund ko thama & uski chut ki darar pe rakha & 1 dhakka diya & supade ko andar dhakela.

"aahhhhh..!",mote supade ne uski chut ko faila diya tha & divya ko halka dard mehsus hua tha.professor ruk gaya tha.divya ne use dekha & aankho se lund ko andar dalne ka ishara kiya to professor dhire-2 lund ko andar dhakelne laga.divya ne aankhe meench li.use dard ho raha tha.professor ka lund na keval behad lumba tha magar kuchh zyada hi mota tha & uski chut ko bahut zyada faiala raha tha.

"oohhhhh..!",lund jab 7 inch se aage gaya to divya dard se karah uthi.professor ruk gaya & usne lund ko aage nahi thela.divya ne use khinch ke apne upar lita liya to professor utne hi lund se uske baye kaan & gaal ko chumta use chodne laga.divya halki-2 aahe bharne lagi & kuchh der baad uske upar masti chhane lagi.usne apne pairo ke talvo ko professor ki mazbut tango pe jama diya.

"professor..",usne apne chehre ke dayi taraf pade professor ke mazbut bazu ke daule ko chuma,"..apna pura lund andar ghusao na!"

"tumhe dard nahi hoga?",professor ne apne chehre se uske chehre ko seedha kar uske honth chume & uski aankho me jhanka.

"umra bhar ke maze ke liye npal bhar ke dard ko seh lungi main!",is baat ne professor ke dil me pyar & jism me josh ki lehar dauda di & 1 hi dhakke me usne bacha hua lund bhi divya ki chut me ghusa diya.

"OOWWWWW..!",divya chikh uthi.lund vaha pahuncha tha jaha abhi tak koi bhi lund nahi pahuncha tha-uski kokh ke munh tak.professor ruk gaya tha & uske chehre ko chum raha tha.use pata tha ki divya abhi taklif me hai & vo use sambhalne ka waqt de raha tha.thodi der baad divya ne apne chehre ke bagal me faile uske mazbut bazuo pe pane hath firate hue uske kandho ko sehlaya & fir uski pith sehlane lagi.

"ruk kyu gaye?chodo na!",divya ne uske baye kaan me apni jibh firayi to professor hne 1 baar fir uski chudai shuru kar di.pehle to vo tez dhakke laga raha tha magar lund ko bas 2 inch hi bahar nikal ke.thodi der baad jab usne pure lund ko bahar nikal ke andar dalna shuru kiya to divya pagal hi ho gayi.kokh pe padti har chot uske jism me bijli dauda deti.vo pagalo ki tarah chikh raha thi & professor ki pith ko kharonch rahi thi.kuchh hi palo me professor ko apne lund pe uski chut bashut zyada kastui hui mehsus hui & vo samajh gaya ki vo jhad rahi hai.divya uske badan se chipki hui subak rahi thi & apni kamar hila rahi thi.

uske jhadne ke baad professor uske upar se utha & apni kohniyo pe apna vazan tika ke uski choochiya chusne laga.divya uske baal sehla rahi thi & vo use bahut dhire-2 chod raha tha.divya ko apni chut puri bhari mehsus ho rahi thi & is ehsas se uska dil khushi se bhar gaya tha.professor ne uski chhatiyo ko apne hotho ke nishan se bhar diya & fir uth ke apne ghutno pe ho gaya & uski chhatiya maslate uski tange sehlate use chodne laga.kuchh hi palo me divya fir se hawa me ud rahi thi & uske gale se mastani aahe nikal rahi thi.

professor ne uski upri baahe thami & use upar khinch apne seene se laga liya.divya chaunk uthi & usne apni baahe uske gale me daal di.furti se professor ne apni tange 1-1 karke samne failayi & puth ke bal let gaya.ab uski mehbooba uske upar thi.divya ne uske seene pe hatheliya jamai & apni kamar hilane lagi.uski baho se dabi uski choochiya bade mastane andaz me chhalchhala rahi thi.professor ne apne mazbut hatho se unhe goondhna shuru kiya to divya ne apna sar masti me peechhe fenk diya & zor-2 se kamar hilane lagi.professor ne uski chhatiya chhodi to uski gand ki kasi fanko ko pakad liya & unhe maslane laga.

unhe pakad vo kabhi bahar ki taraf khinchta to kabhi unhe 1 sath aapas me daba deta.divya ke liye ye sara ehsas naya tha & vo masti me muskurati apne premi ke hatho ka lutf utha rahi thi.tabhi professor ne uski gand ko bilkul chhod diya & apne daye hath ki bas 1 ungli ko uski gand ki dara pe bahut haule se fira diya.hatho ke shadid ehsaso ke baad itna halka sa mulayam ehsas!divya ke andar jaise bijli ki koi nayi dhara phut padi & professor ko dobare apne lund pe uski chut ki shadid kasavat mehsus hui.professor ke lund ne use dusri baar jhadwa diya tha.vo hanfti hui uske seene pe gir gayi magar professor ka kaam abhi pura nahi hua tha.

uski pith sehlate,uske baalo ko chumte usne use fir se sambhalne ka waqt diya & fir use palat ke apne neeche kiya.1 baar fir vo uski tango ke beech apne ghutno pe baitha tha.divya adhmundi palko se use dekh rahi thi.usne uski dayi tang ko pakd mod kar use bhi apne jism ki dusri taraf divya ki bayi tang ke upar kiya.fir divya ka upri badan bhi bayi karwat pe kar fauran uske peechhe aa uski pith se aa laga.is sab ke dauran uska lund divya ki chut se bahar nahi nikla tha.

usne fir se use chodna shuru kiya & 1 baar fir divya masti ke safar pe chal padi.divya apni bayi kohni pe uchak gayi & professor ne apna daya hath uski kamar pe daal diya & uski chhatiya maslane laga.dono 1 dusre ko chumte hue chudai kar rahe the.is position me lund pura nadar nahi ja raha tha & divya ko thoda aaram tha.uski chut abhi bhi professor ke lund ki aadi nahi hui thi.professor ne hath ko chhatiyo se hata uski chut ke dane ko pakad liya to divya ne bhi apna daya hath peechhe le jate hue uske ando pe firana shuru kar diya.professor ke dhakke uski is harkat se tez ho gaye & uski ungli ki raftar bhi.1 baar fir divya ki chut ne professor ke lund ko apni giraft me kasa & vo aahe bharne lagi.

professor ne fauran uske dane ko chhoda & uski kamar pakad use ulta kar uske upar chadh gaya.fir usne apne ghutne mode & apne sath divya ki kamar utha use doggy style me chodne laga.bistar ki mudi-tudi chadar me sar dhansaye divya ab aadhi behoshi ki halat me thi.professor ki chudai use masti ki un oonchaiyo pe le gayi thi jinke vajud ke bare me use pata bi nahi tha.bas aahe bhari vo us se chud rahi .professor uski chhatiyo ko dabata uske upar let gaya & gehre dhakke lagane laga.divya jhad chuki thi & shant padi thi.

ab professor ko apne andar ubal raha lava rukta nahi nazar aa raha tha.vo utha & usne divya ko apne sath fir se bayi karwat pe kiya.usne uski dayi tang uthayi & ghutno pe hota hua uski tango ke beech aa gaya.aisa karte hi divya ne use apne upar khinch liya & apni baaho & tango me use kas liya.vo samjh gayi thi ki is baar professor jhadega & vo uske sath jhadna chahti thi.

"chodo mujhe janu..aur chodo...haaannnnnn..andar tak..ooowwww.....rukna mat meri jaan..!",divya professor ki pith se leke gand tak apne nakhuno ke nishan chhod rahi thi & apni tango ko uski jangh se uthake uski kamar pe cross kar ke kas rahi thi.professor uske chehre ko chumta,uske kano me jibh firata uski baato & aaho se pagal ho raha tha.tabhi divya ki chut ne kuchh zyada hi zor se uske lund ko kasa & is baar professor ne apne upar koi kabu nahi rakha.uske lund se virya ki moti dhar phut padi jise divya ne seedha pani kokh ke andar jate mehsus kiya.vo zor-2 se subak rahi thi,professor ka gadha virya chhute hi ja raha tha & har favvare pe uske badan me maze ki 1 aur lehar daud jati,itna maza jo vo bardasht nahi kar pa rahi thi!professor ki bhi aahe nikal gayi thi.aisi kasi chut usne zindagi me nahi chodi thi & uske ehsas ne use bhi maze ki nayi duniya dikhayi thi.dono premi apne pyar ka ikrar karte 1 dusre se lipte pade the & deewaro pe lagi raja & rani ki tasvire unke pyar ko dekhte hue muskura rahi thi.

"Itni jaldi nind aa rahi hai tumhe?",Meghna bistar me ghuste hi bayi karwat pe lete Ajit se peechhe se chipak gayi.

"hun..",ajit apne seene pe chalte uske daye hath ko sehlane laga.

"kal bhi aise hi so gaye the.",apni baat pe meghna ko khud hi sharm aa gayi & usne ajit ki pith me munh chhupa liya.

"thak gaya tha kal.",ajit ne jhuth bola.Divya ke sath ki gayi masti ke dauran usne jo uski pith pe kharonch ke nishan chhode the,use unka khayal aa gaya tha & is vajah se vo kal raat so gaya tha.nishan to abhi bhi uski pith pe maujood the magar kamre me andhera tha & meghna ko vo nazar nahi aate.

"tumne uthaya kyu nahi kal aaj ki tarah?",usne karwat badal apni biwi ko baaho me bhar liya to pyasi meghna ne fauran apna daya hath uske kurte me ghusa diya.

"itni bhi matlabi nahi hu ki tumhari thakan ka khayal na karu.",vo uske kurte se jhank rahe seene ke baalo me apni naak ghuma rahi thi ki ajit ne uska chehra upar kiya & uske honth chum liye.meghna ne uske kurte se hath nikala & uske peechhe badhake side-table pe rakhe lamp ko jalane lagi.

"kya kar rahi ho?!",ajit ne kiss tod uska hath roka.

"light jala rahi thi.",divya ne 1 baar fir uske seene me munh chhupa liya,"tum bina light ke karte kaha ho?",uski larajti aavaz me pyar,pati ke jism ki chahat & sharm ki mithas ghuli thi.

"aaj aise hi pyar karunga tumhe..",ajit ne use seedha litaya & uske upar jhuk uski gori gardan ko chumne laga,"..pure chand ki roshni me dekhunga tumhare jism ko..!",1 pal ko uska dil glani se bhar gaya,vo apni biwi se jhuth bol raha tha..use darr tha ki meghna kahi uski pith ke nishan na dekh le & isi wajah se vo batti nahi jala raha tha.usne us biwi se jhuth bola tha jo use behad chahti thi & sirf use chahti th.aaj usne khud pyar ke liye pehal ki thi & jaise use pasand tha vaise hi andaz me pyar kar bhi rahi thi....isi baat ki talash thi na use..isiliye vo divya ki baaho me dubara gaya tha na..kya hota agar vo bewafai karne se pehle thoda soch leta to..uski biwi khud ko usi ke sanche me dhaal rahi thi keval isliye ki vo use apna sab kuchh manti thi..

tabhi meghna ne uska sar thoda neeche apne seene pe kiya & ajit un golaiyo me kho apni jaddojehad bhul gaya.

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--34

गतान्क से आगे............

"प्रोफेसर..",सवेरे के सूरज की रोशनी अब महाराजा सुजान सिंग के महल के उस खास कमरे को रोशन कर रही थी.प्रोफेसर पीठ के बल लेटा था & दिव्या उसके पेट पे सर रखे लेटे थी.बाहे पीछे की ओर मोड़ उसने दाया हाथ प्रोफेसर के चेहरे को सहलाने मे लगाया हुआ था & बाया उसके पेट के नीचे लंड के ठीक उपर के हिस्से को,"..तुमने प्लान किया था ना यहा लाके मुझे चोदने का?",उसने हल्के से अपना सर दाई तरफ घुमाया.

"मैने प्लान किया था तुम्हे ये कमरा दिखाने का..",प्रोफेसर अपने हाथो मे उसका मुलायम हाथ ले हौले-2 उसे चूम रहा था,"..इस कमरे की कहानी सुनाने का..क्यूकी तुम इसकी हक़दार थी.तुम मेरी चाह समझ उसे मानोगी इसकी ख्वाहिश थी मुझे लेकिन उमीद नही."

"क्यू?"

"तुम्हारे जैसी हुसनपरी मेरे जैसे इंसान पे अपनी नज़रे करम की इनायत करेगी इसका यकीन नही था मुझे.",प्रोफेसर की बात पे दिव्या मुस्कुराइ & अपना हाथ उसके हाथो से छुड़ाया & करवट ले अपने पेट के बल हो गयी & अपनी टाँगे घुटनो से मोड़ हवा मे उठा दिलकश अंदाज मे हिलाने लगी & प्रोफेसर को देखते हुए वही पे चूमने लगी जहा थोड़ी देर पहले उसका बाया हाथ था.प्रोफेसर ने हाथ अपने सर के अगल बगल फैला लिए & आहे भरने लगा.उसने नीचे देखा तो दिव्या का चेहरा उसके बालो से च्छूप गया था.दाए हाथ से उसने वो आब्नुसि चिल्म हटाई & उस मस्ती मे डूबे चेहरे का दीदार किया जो अब उसके तने लंड को अपने होंठो की शबनम से भिगो रहा था.

दिव्या का दाया हाथ प्रोफेसर की मोटे तने जैसी मज़बूत जाँघो के बालो मे घूम रहा था & बाया लंड की जड को पहली उंगली & अंगूठे के दायरे मे कसे हुए था.हाथ की बाकी उंगलिया प्रोफेसर के बड़े,बिना बालो के आंडो पे जमी हुई थी,"क्या यहा हम हमेशा नही रह सकते?",अपनी बचकानी बात पे 1 बार फिर लंड को मुँह मे लेने से पहले दिव्या खुद ही ह्नस दी.

"काश ऐसा होता,दिव्या.",प्रोफेसर ने प्यार से उसके बालो को उसके चेहरे से हटाया & फिर गाल को सहलाया,"..तुम्हारी बाहो मे तुम्हे प्यार करते हुए मरना तो जीने से कही बेहतर होगा."

"उउंम...अपनी किताबी बाते यहा मत करो..!".दिव्या ने आंडो को दबाते हुए लंड के छेद को जीभ की नोक से छेड़ प्रोफेसर को पागल कर दिया.उसने प्रोफेसर को प्यार भरी झिड़की तो दी थी मगर उसकी बात से उसके दिल मे खुशी की लहर फुट पड़ी थी,बताओ ना!कब तक हैं हम यहा?"

"बस दोपेहर तक.शाम को क्लब वियेन्ना नही जाना?",दिव्या उसके लंड को छ्चोड़ प्रोफेसर के पेट को चूमती हुई उसके सीने तक आ पहुँची थी.उसने अपने गदराए मगर सुडोल बदन को प्रोफेसर के जिस्म की लंबाई पे जमा दिया.उसके मुलायम जिस्म के एहसास ने प्रोफेसर को पागल कर दिया & उसके हाथ दिव्या की पीठ से लेके उसकी गंद तक घूमने लगा.प्रोफेसर के हाथ बेचैन हो गये थे,उन्हे समझ नही आ रहा था कि दिव्या के नशीले बदन के किस हिस्से को सहलाए & किसे दबाएँ!

"उउम्म्म्म....!",दिव्या का भी यही हाल था.वो प्रोफेसर के होंठो को चूम रही थी,उसकी जीभ से खेल रही थी लेकिन उसका मन भर ही नही रहा था..उसका दिल कर रहा था कि उम्र भर अपनी ज़ुबान को उसकी आतुर ज़ुबान से यू ही मिलाती रहे,"..जाना है पर जब तक यहा हैं तब तक मैं बस इसके..",प्रोफेसर के उपर से उतर वो अपनी दाई करवट पे हुई & अपना बाया हाथ प्रोफेसर के चेहरे पे फिरा उसकी ओर इशारा किया,"..& इसके..",उसने अपनी बाई टांग प्रोफेसर की दाई टांग के उपर चढ़ा दी & अपना बाया हाथ उसके चेहरे से नीचे ले जा उसके लंबे लंड को दबा दिया,"..बारे मे सोचना चाहती हू."

बिना 1 पल गवाएँ प्रोफेसर ने दाए हाथ से उसकी गंद की बाई फाँक को थामा & नीचे से अपना आधा लंड उसकी चूत मे घुसा दिया.

"औउईईई....!",दिव्या दर्द से कराही & अपना सर पीछे झटका.प्रोफेसर ने अगले धक्के मे लंड को पूरा उसकी चूत मे घुसा दिया & सर झुका के उसके गुलाबी निपल्स को चूस्ते हुए उसे चोदने लगा.

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ग्लोरीया अपार्टमेंट्स-4 आलीशान टवर सुंदर गेट & ऊँची दीवारो के पीछे खड़े थे.सभी टवर्स 14 मंज़िल के थे.पहले 4 टवर्स मे 2 कमरो से लेके 3 कमरो तक के फ्लॅट्स थे.पाँचवे टवर मे 6 कमरो के पेंटहाउसस बने हुए थे & इसी के सातवी मंज़िल के पेंटहाउस के बारे मे जानने अजीत वाहा आया था.

"सलाम साब.",मेन गेट पे बने कॅबिन मे 2 गार्ड्स मे से 1 ने उसकी वर्दी देख उसे सलाम किया.

"हूँ..कब से यहा काम कर रहे हो?"

"2 साल से उपर हो गया,साहब.",अजीत कॅबिन के अंदर घुस गया & वाहा रखी चीज़े देखने लगा.

"इधर यहा औरत के बॅग & चैन छीनने के केसस के बारे मे सुना है."

"हां,साहब.बाइक पे लड़के कर रहे हैं ये सब."

"किसी की शक्ल देखी है?"

"कहाँ साहब!हेल्मेट लगाए रहते हैं."

"अच्छा!अपार्टमेंट ब्लॉक के अंदर तो कोई तकलीफ़ नही होती ना?"

"नही साहब."

"क्या करें भाई!उपर से ऑर्डर आया है कि ज़रा यहा का राउंड लगाऊं.काफ़ी बड़े लोग रहते हैं ना यहा!"

"वो तो है साहब.हमारी भी हालत खराब रहती है."

"यही रिजिस्टर है जिसमे आने-जाने वालो का रेकॉर्ड रखते हो?",अजीत गार्ड की कुर्सी पे बैठ गया & रिजिस्टर उठा लिया.

"जी साहब..",दूसरा गार्ड बोला,"..बाहर से आनेवाले का नाम,पता,उसकी गाड़ी का नंबर,फोन नंबर,आने का टाइम,जाने का टाइम & जिस फ्लॅट मे आया है वाहा का नंबर लिखते हैं."अजीत रिजिस्टर के पन्ने पलट रहा था.सतपाल ने उसे बताया था कि CM मधुकर अत्रे अक्सर पेंटहाउस ब्लॉकके की सातवी मंज़िल के फ्लॅट नंबर 700 मे आया करता था.फ्लॅट के अंदर केवल वो जाया करता था & कोई नही.सतपाल & बाकी बॉडीगार्ड्स बाहर ही खड़े रहते थे.वैसे भी उस मंज़िल पे 1 ही फ्लॅट था.जब भी CM यहा आता था तो वो अपनी प्राइवेट कार मे आता था जिसपे कोई भी सरकारी निशान नही होता था,उसके साथ की पाइलट & सेक्यूरिटी कार्स थोड़ा पहले ही रुक जाती थी & अपार्टमेंट के अंदर बस उसी की कार जाती थी.अभी 7 दिन पहले भी वो यहा आया था शाम को 8 बजे के करीब.

अजीत ने पन्ने पलटते हुए उस दिन का रेकॉर्ड खोला & शाम के 8 बजे की एंट्री पे निगाह डाली-'ए.कुमार,फ्लेट नंबर.123,वसुधा अपार्टमेंट,संदेश कॉलोनी,डेवाले',फिर 1 फोन नंबर & फ्लॅट के मालिक का नाम 'आर.एस.अवस्थी'.कॅबिन की दीवार पे होर टवर मे रहने वालो के नाम & उनके इंटरकम नंबर्स की लिस्ट लगी थी.गार्ड अपने इंटरकम से फ्लॅट वालो को उनके यहा आने वाले मेहमान की खबर दे देता था.उस लिस्ट पे नज़र डाली & वाहा भी वही नाम था.अजीत को 1 बार फिर पसीने छूट गये.उसने रिजिस्टर बंद किया & वाहा से निकल आया.

अवस्थी कॅबिनेट सेक्रेटरी था यानी राज्य का सबसे ऊँचा सिविल सर्वेंट या सरकारी अफ़सर & CM का खास आदमी....आख़िर माजरा क्या था?..वो टेंटवाला,CM,अवस्थी ये सब क्या खेल खेल रहे थे?..इतने बड़े लोगो का इस मामले से जुड़ा होना..ये सब ठीक नही था..उसे डीसीपी साहब को बता देना चाहिए अब..लेकिन उस से क्या होगा..सब सावधान हो जाएँगे & वो आर्म्स डीलर भी..CM,अवस्थी जैसे लोगो को तो वो हाथ लगा ही नही सकता लेकिन वो हथ्यारो का कारोबारी तो उसकी गिरफ़्त मे आ ही सकता है..1 बार सबूतो के साथ पकड़ा गया तो इन बड़े लोगो को उस से पल्ला झाड़ते देर नही लगेगी & उसका मक़सद पूरा हो जाएगा..अभी बात खुद तक रखनी ही ठीक है..अजीत ने जीप स्टार्ट की & दफ़्तर के लिए चल पड़ा.

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8 बजते ही दिव्या प्रोफेसर के साथ क्लब वियेन्ना पहुँच गयी थी.अपने करियर मे पहली बार दिव्या को काम करने का दिल नही कर रहा था.महल मे सवेरे की चुदाई के बाद दोपहर को वाहा से निकलने के वक़्त तक दोनो नंगे 1 दूसरे की बाहो मे पड़े रहे थे.खाना भी उन्होने उसी हालत मे खाया.महल से फ्लॅट तक के कार के सफ़र मे दिव्या प्रोफेसर से सटके बैठी थी & 1 पल के लिए भी अलग नही हुई.फ्लॅट पे पहुँचते ही दोनो ने 1 बार फिर चुदाई की थी & मिनिट्स मे तैय्यार होने वाली दिव्या को आज आधा घंटा लगा था क्यूकी तैय्यार होने से ज़्यादा उसका दिल अपने महबूब की किस्सस & हाथो की हर्कतो मे लग रहा था.

"यही है डीजे छाज़े..",1 बआउन्सर ने दोनो को 1 लंबे बालो वाले शख्स के सामने ला खड़ा किया.उस शख्स ने गोटी रखी हुई थी & कानो & दाई भौं के अलावा उसका निचला होंठ भी पियरस्ड था वाहा रिंग लगा था.दिव्या ने उसे अपना & प्रोफेसर का परिचय दिया & शोभा की तस्वीर दिखाई.तस्वीर देखते ही छाज़े के चेहरे पे गम के बदल च्छा गये.

"क्या आप मेरे शो के बाद मिल सकते हैं?",उसकी आवाज़ की गंभीरता सुन प्रोफेसर & दिव्या के पास और कोई चारा नही था,"..आप होटेल के इंडियन रेस्टोरेंट मे बैठिए,मैं वही मिलता हू आपसे 1 घंटे बाद."

"ओके."

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"तुम्हारा असली नाम क्या है?",दिव्या ने पुचछा.

"चंपक भुल्लर.",छाज़े उनके साथ बैठा था.दिव्या को नाम सुन हँसी आई जिसे उसने ज़ब्त कर लिया.

"इस लड़की को कैसे जानते थे?"

"दीप्ति..मेरा पहला प्यार थी.",छाज़े अपने ड्रिंक के ग्लास को बस घुमा रहा था,पी नही रहा था.

"कहा मुलाकात हुई थी तुम्हारी?"

"2 साल पहले 1 कॉलेज फेस्ट मे मैं डीजे कॉन्सोल हॅंडल कर रहा था,वही मिली थी.उसी वक़्त मुझे क्लब नीयान मे डीजे का काम मिला था.हम हर शाम वाहा मिलते थे,मेरे शो के बाद हम साथ डिन्नर करते &.."

"और?",प्रोफेसर ने सवाल किया.

"..& वही करते जो प्यार मे पागल 2 जवान लोग करते हैं."

"1 बात बताओ..",दिव्या ने अपनी कोहनिया मेज़ पे टिकाई,"..उसके परिवार वालो को ऐतराज़ नही था तुम दोनो के रिश्ते पे?"

"वो अपनी मा के साथ यहा रहती थी & कहती थी कि मैं उस बात की परवाह ना करू,उसकी मा कभी हमारे बीच नही आएगी."

"फिर क्या हुआ?जुदा कैसे हुए तुम दोनो?",छाज़े कयि पॅलो तक खामोश बस अपने ड्रिंक को देखता रहा.

"आप पोलिसेवाले हैं तो उसके बारे मे क्यू पुच्छ रहे हैं?"

"1 केस के सिलसिले मे."

"उसका क्या लेना-देना है इस से?"

"देखो,चंपक..",दिव्या की आवाज़ मे पुलिसिया लहज़ा आ गया,"..तुम्हारी एक्स-गर्लफ्रेंड 1 ख़तरनाक लड़की है & अगर तुम ये सोच रहे हो कि हमसे झूठ बोलके उसे बचा अपना प्यार साबित करोगे & वो तुम्हारी बाहो मे दौड़ी चली आएगी तो तुमसे बड़ा बेवकूफ़ इस दुनिया मे कोई नही!",बेबाकी से कहे गये सच ने छाज़े को चौंका दिया.

"अब मुँह बंद करो,ये देवदास वाला अंदाज़ छ्चोड़ो & सब तफ़सील से बताओ.",प्रोफेसर दिव्या के अंदाज़ पे मन ही मन मुस्कुराया.

"जी..",छाज़े ने थूक गटका,"..1 साल तक सब ठीक चलता रहा.हम जब मर्ज़ी,जैसे मर्ज़ी मिलते रहते.हम बहुत खुश थे लेकिन फिर दीप्ति की मुलाकात 1 दिन क्लब मे क्लब के मॅनेजर से हुई.इसके 1 महीने के बाद से वो मुझ से कटी-2 रहने लगी.मेरी समझ मे कुच्छ नही आ रहा था कि आख़िर बात क्या है फिर 1 रात शो के बाद मैं अपना 1 बॅग क्लब मे भूल गया.उसमे कुच्छ ज़रूरी काग़ज़ात थे जिनकी मुझे अगली सुबह ज़रूरत थी.मैं सवेरे-2 क्लब पहुँचा,अपना बॅग उठाया & निकल ही रहा था कि कुच्छ आवाज़ो से चौंक पड़ा जोकि मॅनेजर दिनेश सिंग के कॅबिन से आ रही थी.मैं सोच मे पड़ गया क्यूकी 12 बजे से पहले कभी वो क्लब आता नही था.."

"..नज़दीक गया तो मुझे एहसास हुआ कि वो किसी लड़की के साथ है.मैने सोचा की चलो देखते हैं कि किसके साथ अयाशि कर रहा है,दोस्तो के साथ हँसी-मज़ाक का अच्छा मसाला मिलेगा लेकिन जब मैने दरवाज़े को हल्के से खोल अंदर झाँका तो मेरा खून सुख गया,मेरी जान..मेरी दीप्ति बिल्कुल नंगी मॅनेजर के उपर उसके लंड को अपने अंदर लिए हँसती हुई उच्छल रही थी.",छाज़े की आँखो मे पानी आ गया मगर उस पानी के पीछे गुस्सा सॉफ दिख रहा था.

"फिर?"

"फिर क्या!मैने वो क्लब छ्चोड़ दिया & तब से यहा हू,मैने दीप्ति से भी मिलने की कोई कोशिश नही की.उसके बाद वो भी यहा से गायब हो गयी थी."

"तुम ज़रा दीप्ति का पता,नंबर,कॉलेज का नाम & जो भी कुच्छ जानते हो इस काग़ज़ पे लिख दो.",दिव्या ने काग़ज़ & कलम उसकी ओर बढ़ाया & प्रोफेसर की ओर देखा.दोनो जानते थे कि अब अगली मुलाकात दिनेश सिंग से करनी है.

1 बार फिर दिव्या & प्रोफेसर दीक्षित क्लब नीयान मे थे.इस वक़्त क्लब बिल्कुल भरा हुआ था & वाहा के स्टाफ को सांस लेने की भी फ़ुर्सत नही थी.स्टाफ के 1 मेंबर ने बाते की कुच्छ खास मेहमआनो की वजह से दिनेश सिंग बहुत मसरूफ़ है तो अगर वो बुरा ना माने तो रात 12 बजे उस से मिल ले या फिर अगले दिन का इंतेज़ार करें.दोनो ने तय किया कि दोनो 12 बजे का इंतेज़ार करेंगे.

समय काटने के लिए दोनो पहले 1 रेस्टोरेंट मे गये & खाना खाया & फिर प्रोफेसर की कार मे वही आस-पास चक्कर लगाने लगे.प्रोफेसर ने 1 सुनसान गली मे कार रोकी तो दिव्या खुद अपनी सीट से उठ उसकी गोद मे आ गयी.उसकी दाई बाँह प्रोफेसर की गर्दन मे झूल गयी & बाया हाथ उसकी पॅंट पे चलने लगा.प्रोफेसर ने भी उसे आगोश मे भरते हुए बाया हाथ उसकी गंद को दबाने मे लगाया & दाए से उसकी मस्त चूचियों को उसके टॉप के उपर से ही दबाने लगा.

चंद पॅलो मे ही दिव्या उसके हाथो की कारस्तानियो की वजह से झाड़ गयी.झाड़ते ही वो प्रोफेसर की गोद मे उसे अपने सीने से लगाके ज़ोर-2 से साँसे लेने लगी.किसी मर्द के लिए ऐसी दीवानगी.ऐसा जुनून उसने पहली बार महसूस किया था.ये सॉफ था कि दोनो 1 दूसरे के जिस्मो के पीछे पागल हैं लेकिन उनके इस रिश्ते मे केवल वासना नही थी.दोनो की चुदाई मे जिस्मो की 1 अंतहीन प्यास थी लेकिन उस प्यास के नशे मे ऐसा नही होता था कि दोनो को 1 दूसरे की तकलीफ़ का ख़याल ना हो.दोनो ने इस बात को अभी पूरी तरह से महसूस नही किया था मगर दोनो के दिलो के किसी कोने ने ये फिर जिसे अँग्रेज़ी मे सबकॉन्षियस कहते हैं,उसने इस बात को अच्छी तरह समझ लिया था.इस चलते जो लगाव पैदा हुआ था वही उनके रिश्ते को मज़बूती दे रहा था.

"ऊन्णन्न्....क्या कर रहे हो?..जींस उतार दो ना!",प्रोफेसर ने दिव्या की सीट को पूरा नीचे कर दिया था दिव्या को उसके उपर लिटा दिया था.दिव्या का टॉप उसके सीने के उपर चढ़ा हुआ था & ब्रा उसकी मोटी चूचियों के नीचे.गुलाबी निपल्स प्रोफेसर की ज़बान के रस से गीले चमक रहे थे & बिल्कुल सख़्त हो चुके थे.उनके आस-पास चूचियों पे हल्के & गहरे निशान प्रोफेसर के होंठो की करामात की गवाही दे रहे थे.

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क्रमशः........

 
KHEL KHILADI KA paart--34

gataank se aage............

"Professor..",savere ke suraj ki roshni ab Maharaja Sujan Singh ke Mahal ke us khas kamre ko roshan kar rahi thi.professor pith ke bal leta tha & divya uske pet pe sar rakhe lete thi.baahe peechhe ki or mod usne daya hath professor ke chehre ko sehlane me lagaya hua tha & baya uske pet ke neeche lund ke thik upar ke hisse ko,"..tumne plan kiya tha na yaha lake mujhe chodne ka?",usne halke se apna sar dayi taraf ghumaya.

"maine plan kiya tha tumhe ye kamra dikhane ka..",professor apne hatho me uska mulayam hath le haule-2 use chum raha tha,"..is kamre ki kahani sunane ka..kyuki tum iski haqdar thi.tum meri chah samajh use maanogi iski khwahish thi mujhe lekin umeed nahi."

"kyu?"

"tumhare jaisi husnpari mere jaise insan pe apni nazre karam ki inayat karegi iska yakin nahi tha mujhe.",professor ki baat pe divya muskurayi & apna hath uske hatho se chhudaya & karwat le apne pet ke bal ho gayi & apni tange ghutno se mod hawa me utha dilkash andfaz me hilane lagi & professor ko dekhte hue vahi pe chumne lagi jaha thodi der pehle uska baya hath tha.professor ne hath apne sar ke agal bagal faila liye & aahe bharne laga.usne neeche dekha to divya ka chehra uske baalo se chhup gaya tha.daye hath se usne vo aabnusi chilma hatayi & us masti me dube chehre ka deedar kiya jo ab uske tane lund ko apne hotho ki shabnam se bhigo raha tha.

divya ka daya hath professor ki mote tane jaisi mazbut jangho ke baalo me ghum raha tha & baya lund ki jud ko pehli ungli & anguthe ke dayre me kase hue tha.hath ki baki ungliya professor ke bade,bina balo ke ando pe jumi hui thi,"kya yaha hum humesha nahi reh sakte?",apni bachkani baat pe 1 baar fir lund ko munh me lene se pehle divya khud hi hnas di.

"kash aisa hota,divya.",professor ne pyar se uske baalo ko uske chehre se hatay & fir gaal ko sehlaya,"..tumhari baaho me tumhe pyar karte hue marna to jeene se kahi behtar hoga."

"uumm...apni kitabe baate yaha mat karo..!".divya ne ando ko dabate hue lund ke chhed ko jibh ki nok se chhed professor ko pagal kar diya.usne professor ko pyar bhari jhidki to di thi magar uski baat se uske dil me khushi ki lehar phut padi thi,batao na!kab tak hain hum yaha?"

"bas dopehar tak.sham ko Club Vienna nahi jana?",divya uske lund ko chhod professor ke pet ko chumti hui uske seene tak aa pahunchi thi.usne apne gadraye magar sudol badan ko professor ki jism ki labai pe juma diya.uske mulayam jism ke ehsas ne professor ko pagal kar diya & uske hath divya ki pith se leke uski gand tak ghumne laga.professor ke hath bechain ho gaye the,unhe samajh nahi aa raha tha ki divya ke nashile badan ke kis hisse ko sehlaye & kise dabayen!

"uummmm....!",divya ka bhi yehi haal tha.vo professor ke hotho ko chum rahi thi,uski jibh se khel rahi thi lekin uska man bhar hi nahi aha tha..uska dil kar raha tha ki umra bhar apni zuban ko uski aatur zuban se yu hi milati rahe,"..jana hai par jab tak yaha hain tab tak main bas iske..",professor ke upar se utar vo apni dayi karwat pe hui & apna baya hath professor ke chehre pe fira uski or ishara kiya,"..& iske..",usne apni bayi tang professor ki dayi tang ke upar chadha di & apna baya hath uske chehre se neeche le ja uske lumbe lund ko daba diya,"..bare me sochna chahti hu."

bina 1 pal gavayen professor ne daye hath se uski gand ki bayi fank ko thama & neeche se apna aadha lund uski chut me ghusa diya.

"ouuiiiiiii....!",divya dard se karahi & apna sar peechhe jhatka.professor ne agle dhakke me lund ko pura uski chut me ghusa diya & sar jhuka ke uske gulabi nipples ko chuste hue use chodne laga.

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Gloria Apartments-4 aalishan tower sundar gate & oonchi deewaro ke peechhe khade the.sabhi towers 14 manzil ke the.pehle 4 towers me 2 kamro se leke 3 kamro tak ke flats the.panchve tower me 6 kamro ke penthouses bane hue the & isi ke satvi manzil ke penthouse ke bare me jaanane ajit vaha aaya tha.

"salam saab.",main gate pe bane cabin me 2 guards me se 1 ne uski vardi dekh use salam kiya.

"hun..kab se yaha kaam kar rahe ho?"

"2 saal se upar ho gaya,sahab.",ajit cabin ke andar ghus gaya & vaha rakhi chize dekhne laga.

"idhar yaha aurot ke bag & chain chhenane ke cases ke bare me suna hai."

"haan,sahab.bike pe ladke kar rahe hain ye sab."

"kisi ki shakl dekhi hai?"

"kahan sahab!helmet lagaye rehte hain."

"achha!apartment bolck ke andar to koi taklif nahi hoti na?"

"nahi sahab."

"kya karen bhai!upar se order aaya hai ki zara yaha ka round lagaoon.kafi bade log rehte hain na yaha!"

"vo to hai sahab.humari bhi halat kharab rehti hai."

"yehi register hai jisme aane-jane valo ka record rakhte ho?",ajit guard ki kursi pe baith gaya & register utha liya.

"ji sahab..",dusra guard bola,"..bahar se aanevale ka naam,pata,uski gadi ka number,fone number,aane ka time,jane ka time & jis flat me aya hai vaha ka number likhte hain."ajit register ke panne palat raha tha.Satpal ne use bataya tha ki CM Madhukar Atre aksar penthouse blocke ki satvi manzil ke flat number 700 me aya karta tha.flat ke andar keval vo jaya karta tha & koi nahi.satpal & baki bodyguards bahar hi khade rehte the.vaise bhi us manzil pe 1 hi flat tha.jab bhi CM yaha aata tha to vo apni private car me aata tha jispe koi bhi sarkari nishan nahi hota tha,uske sath ki pilot & security cars thdoa pehle hi ruk jati thi & apartment ke andar bas usi ki car jati thi.abhi 7 din pehle bhi vo yaha aaya tha sham ko 8 baje ke karib.

ajit ne panne palatate hue us din ka record khola & sham ke 8 baje ki entry pe nigah dali-'A.Kumar,falt no.123,Vasudha Apartment,Sandesh Colony,Devalay',fir 1 fone number & flat ke malik ka naam 'R.S.Awasthi'.cabin ki deewar pe hor tower me rehne valo ke naam & unke intercom numbers ki list lagi thi.guard apne intercom se flat valo ko unke yaha aane vale mehman ki khabar de deta tha.us list pe nazar dali & vaha bhi vahi naam tha.ajit ko 1 baar fir paseene chhut gaye.usne register band kiya & vaha se nikal aaya.

awasthi cabinet secretary tha yani rajya ka sabse ooncha civil servant ya sarkari afsar & CM ka khas aadmi....aakhir majra kya tha?..vo tentwala,CM,awasthi ye sab kya khel khel rahe the?..itne bade logo ka is mamle se juda hona..ye sab thik nahi tha..use DCP sahab ko bata dena chahiye ab..lekin us se kya hoga..sab savdhan ho jayenge & vo arms dealer bhi..CM,awasthi jaise logo ko to vo hath laga hi nahi sakta lekin vo hathyaro ka karobari to uski giraft me aa hi sakta hai..1 baar sabooto ke sath pakda gaya to in bade logo ko us se palla jhadte der nahi lagegi & uska maqsad pura ho jayega..abhi baat khud tak rakhni hi thik hai..ajit ne jeep start ki & daftar ke liye chal pada.

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8 bajte hi divya professor ke sath club vienna pahunch gayi thi.apne career me pehli baar divya ko kaam karne ka dil nahi kar raha tha.mahal me savere ki chudai ke baad dopahar ko vaha se nikalne ke waqt tak dono nange 1 dusre ki baaho me pade rahe the.khana bhi unhone usi halat me khaya.mahal se flat tak ke car ke safar me divya professor se satke baithi thi & 1 pal ke liye bhi alag nahi hui.flat pe pahunchte hi dono ne 1 baar fir chudai ki thi & minutes me taiyyar hone vali divya ko aaj aadha ghanta laga tha kyuki taiyyar hone se zyada uska dil apne mehboob ki kisses & hatho ki harkato me lag raha tha.

"yehi hai dj chaze..",1 bouncer ne dono ko 1 lumbe baalo vale shakhs ke samne la khada kiya.us shakhs ne goatee rakhi hui thi & kano & dayi bhaun ke alawa uska nichla honth bhi pierced tha vaha ring laga tha.divya ne use apna & professor ka parichay diya & Shobha ki tasvir dikhayi.tasvir dekhte hi chaze ke chehre pe ghum ke badal chha gaye.

"kya aap mere show ke baad mil sakte hain?",uski aavaz ki gambhirta sun professor & divya ke paas aur koi chara nahi tha,"..aap hotel ke Indian restaurant me baithiye,main vahi milta hu aapse 1 ghante baad."

"ok."

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"tumhara asli naam kya hai?",divya ne puchha.

"Champak Bhullar.",chaze unke sath baitha tha.divya ko naam sun hansi aayi jise usne zabt kar liya.

"is ladki ko kaise jante the?"

"Dipti..mera pehla pyar thi.",chaze apne drink ke glass ko bas ghuma raha tha,pi nahi raha tha.

"kaha mulakat hui thi tumhari?"

"2 saal pehle 1 college fest me main dj console handle kar raha tha,vahi mili thi.usi waqt mujhe Club Neon me dj ka kaam mila tha.hum har sham vaha milte the,mere show ke baad hum sath dinner karte &.."

"aur?",professor ne sawal kiya.

"..& vahi karte jo payr me pagal 2 jawan log karte hain."

"1 baat batao..",divya ne apni kohniya mez pe tikayi,"..uske parivar valo ko aitraz nahi tha tum dono ke rishte pe?"

"vo apni maa ke sath yaha rehti thi & kehti thi ki main us baat ki parwah na karu,uski maa kabhi humare beech nahi ayegi."

"fir kya hua?juda kaise hue tum dono?",chaze kayi palo tak khamosh bas apne drink ko dekhta raha.

"aap policevale hain to uske bare me kyu puchh rahe hain?"

"1 case ke silsile me."

"uska kya lena-dena hai is se?"

"dekho,champak..",divya ki aavaz me pulisiya lehja aa gaya,"..tumhari ex-girlfriend 1 khatarnak ladki hai & agar tum ye soch rahe ho ki humse jhuth bolke use bacha apna pyar sabit karoge & vo tumhari baaho me daudi chali ayegi to tumse bada bevkuf is duniya me koi nahi!",bebaki se kahe gaye sach ne chaze ko chaunka diya.

"ab munh band karo,ye Devdas vala andaz chhodo & sab tafsil se batao.",professor divya ke andaz pe man hi man muskuraya.

"ji..",chaze ne thuk gatka,"..1 saal tak sab thik chalta raha.hum jab marzi,jaise marzi milte rehte.hum bahut khush the lekin fir dipti ki mulakat 1 din club me club ke manager se hui.iske 1 mahine ke baad se vo mujh se kati-2 rehne lagi.meri samajh me kuchh nahi aa raha tha ki aakhir baat kya hai fir 1 raat show ke baad main apna 1 bag club me bhul gaya.usme kuchh zaruri kagzat the jinki muh agli subah zarurat thi.main savere-2 club pahuncha,apna bag uthaya & nikal hi raha tha ki kuchh aavazo se chaunk pada joki manager Dinesh Singh ke cabin se aa rahi thi.main soch me pad gaya kyuki 12 baje se pehle kabhi vo club aata nahi tha.."

"..nazdik gaya to mujhe ehsas hua ki vo kisi ladki ke sath hai.maine socha ki chalo dekhte hain ki kiske sath ayasshi kar raha hai,dosto ke sath hansi-mazak ka achha masala milega lekin jab maine darwaze ko halke se khol andar jhanka to mera khun sukh gaya,meri jaan..meri dipti bilkul nangi manager ke upar uske lund ko apne andar liye hansti hui uchhal rahi thi.",chaze ki aankho me pani aa gaya magar us pani ke peechhe gussa saaf dikh raha tha.

"fir?"

"fir kya!maine vo club chhod diya & tab se yaha hu,maine dipti se bhi milne ki koi koshish nahi ki.uske baad vo bhi yaha se gayab ho gayi thi."

"tum zara dipti ka pata,number,college ka naam & jo bhi kuchh jante ho is kagaz pe likh do.",divya ne kagaz & kalam uski or badhaya & professor ki or dekha.dono jante the ki ab agli mulakat dinesh singh se karni hai.

1 baar fir Divya & Professor Dixit Club neon me the.is waqt club bilkul bhara hua tha & vaha ke staff ko sans lene ki bhi fursat nahi thi.staff ke 1 member ne batay ki kuchh khas mehmano ki vajah se Dinesh Singh bahut masruf hai to agar vo bura na mane to raat 12 baje us se mil le ya fir agle din ka intezar karen.dono ne tay kiya ki dono 12 baje ka intezar karenge.

samay kaatne ke liye dono pehle 1 restaurant me gaye & khana khaya & fir professor ki car me vahi aas-paas chakkar lagane lage.professor ne 1 sunsan gali me car roki to divya khud apni seat se uth uski god me aa gayi.uski dayi banh professor ki gardan me jhul gayi & baya hath uski pant pe chalne laga.professor ne bhi use agosh me bharte hue baya hath uski gand ko dabane me lagaya & daye se uski mast chhatiyo ko uske top ke upar se hi dabane laga.

chand palo me hi divya uske hatho ki karastaniyo ki vajah se jhad gayi.jhadte hi vo professor ki god me use apne seene se lagake zor-2 se sanse lene lagi.kisi mard ke liye aisi deewangi.aisa junoon usne pehli baar mehsus kiya tha.ye saaf tha ki dono 1 dusre ke jismo ke peechhe pagal hain lekin unke is rishte me kewal vaasna nahi thi.dono ki chudai me jismo ki 1 antheen pyas thi lekin us pyas ke nashe me aisa nahi hota tha ki dono ko 1 dusre ki taklif ka khayal na ho.dono ne is baat ko abhi puri tarah se mehsus nahi kiya tha magar dono ke dilo ke kisi kone ne ye fir jise angrezi me subconscious kehte hain,usne is baat ko achhi tarah samajh liya tha.is chalte jo lagav paida hua tha vahi unke rishte ko mazbuti de raha tha.

"oonnnn....kya kar rahe ho?..jenas utar do na!",professor ne divya ki seat ko pura neeche kar diya tha divya ko uske upar lita diya tha.divya ka top uske seene ke upar chadha hua tha & bra uski moti chhatiyo ke neeche.gulabi nipples professor ki zaban ke ras se gile chamak rahe the & bilkul sakht ho chuke the.unke aas-paas chhatiyo pe halke & gehre nishan professor ke hotho ki karamat ki gawahi de rahe the.

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kramashah........

 
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