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खेल खिलाड़ी का compleet

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खेल खिलाड़ी का पार्ट--35

गतान्क से आगे............

प्रोफेसर उसके उपर झुका उसकी बाई,सुडोल चूची को चूसे जा रहा था & उसका दाया हाथ दिव्या की जीन्स को उसकी गंद से नीचे करने के बाद उसकी चूत के अंदर 1 उंगली घुसा रहा था.दिव्या अब पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी & प्रोफेसर के लंड के लिए पागल हो रही थी.

"अब आओ ना..",उसने प्रोफेसर के बाल पकड़ उसे उपर खिचना चाहा,"..जल्दी से घुसाओ अपना लंड मेरे अंदर!",लेकिन प्रोफेसर उसकी बात अनसुना करते उसकी चूत की दीवारो पे अपनी उंगली चलता रहा.दिव्या खिज गयी लेकिन प्रोफेसर की उंगली उसके मज़े को बढ़ा रही थी.ऐसा लग रहा था कि प्रोफेसर अपनी उंगली से उसकी चूत मे कुच्छ ढूंड रहा है.

तभी दिव्या को ऐसा लगा जैसे उसके अंदर मस्ती,बेचैनी,मज़ा & बेसब्री-ये सभी एहसास अपनी पूरी शिद्दत के साथ उसके जिस्म मे 1 साथ फूट पड़े.प्रोफेसर ने उसका जी-स्पॉट ढूंड लिया था & वाहा पे हल्के-2 सहला रहा था.दिव्या प्रोफेसर से झाड़ते वक़्त हमेशा बहुत मदहोश जाती थी लेकिन अभी की मदहोशी का तो कोई मुक़ाबला नही था!वो सब भूल गयी-वक़्त,जगह,प्रोफेसर..उसे किसी बात का होश नही था.होश था तो अपने लड़की होने का & उस सच्चाई के सबसे खूबसूरत एहसास का जो वो इस वक़्त ऐसे महसूस कर रही थी जैसे उसने कभी नही किया था.

वो आहे भर रही थी बल्कि यू कहा जाए कि चीख रही थी & जब मज़ा बिल्कुल चरम पे पहुँच गया तो वो खामोश हो गयी,उसका चेहरा & बंद आँखे देख ऐसा लगता जैसे उसे बहुत तकलीफ़ हुई है & वो किसी दूसरी दुनिया मे है.ये ग़लत था कि उसे बहुत तकलीफ़ हो रही थी मगर ये सच था कि वो दूसरी ही दुनिया मे थी.

जब वो उस दुनिया से वापस लौटी तो उसने प्रोफेसर को खुद के उपर झुके उसके बालो को सहलाते & उसके चेहरे को निहारते पाया.उसके कपड़े वापस उसके अंगो को ढँके हुए थे.उसने प्रोफेसर के गले मे बाहे डाल उसे नीचे झुका दिया & उसे चूमने लगी.उसकी किस मे बेसब्री नही थी बहुत सुकून था & शुक्रगुज़ारी का एहसास था.

"वक़्त हो गया है,चलें?",प्रोफेसर ने किसी तरह से अपने होंठो को उसके गुलाबी होंठो से अलग किया.दिव्या उठ बैठी & प्रोफेसर ने कार स्टार्ट कर वापस क्लब की तरफ मोड़ दी.

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"हां,मेडम कहिए क्या काम था आपको मुझसे?",दिनेश सिंग बहुत थका नज़र आ रहा था.

"हमे आपसे दीप्ति के बारे मे बात करनी थी.",दिनेश के चेहरे का रंग 1 पल को उड़ा मगर अगले ही पल उसने खुद को संभाल लिया लेकिन दिव्या की पैनी निगाहो ने सब देख लिया था.वो समझ गयी कि अब दिनेश सिंग अंजान बनाने का नाटक करेगा..उसे दीप्ति का नाम भी याद नही होगा.

"कौन दीप्ति?",दिव्या मन ही मन मुस्कुराइ.

"हूँ..",वो कुर्सी पे पीछे हो आराम से बैठ गयी,"..हर मुलाकात इसी कॅबिन मे होती थी या फिर कोई लव नेस्ट भी था?"

"मुलाकात..लव नेस्ट..क्या कह रही हैं आप?",दिनेश ने भवे सिकोड ली,"..मेरी कुच्छ समझ मे नही आ रहा..& बहुत रात हो चुकी है,मुझे घर भी जाना है."

"जब तक हमे दीप्ति के बारे मे सब कुच्छ नही बता देते,तुम कही नही जाओगे.",दिव्या का चेहरा & लहज़ा,दोनो सख़्त थे,"..नाटक छ्चोड़ो & बको!"

"देखिए,आप मुझे ऐसे परेशान नही कर सकती.आप मुझे जानती नही,1 फोन करूँगा..",उसकी बात पूरी होने से पहले ही दिव्या उसके करीब पहुँच गयी & उसका कॉलर पकड़ उसे कुर्सी से उठा दिया.

"फोन करना है..",दिव्या ने उसका मोबाइल उठाया & उसके सामने किया,"..लगाओ जिसे लगाना है..फिर जब कल के अख़बारो मे खबर छपेगि की क्लब वियेन्ना का मॅनेजर,होटेल एउफ़ोरिया के मालिक का दामाद अपने दफ़्तर मे किसी गैर लड़की के साथ रंगरेलिया मनाया करता था तो जो होगा उसकी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ तुम्हारी होगी.",एसी के बावजूद दिनेश पसीने से नहा गया & जब दिव्या ने उसका कॉलर छ्चोड़ा तो अपनी कुर्सी पे धम से गिरा & अपना माथा पकड़ लिया.

"आपको कैसे पता चला?",मरियल सी आवाज़ उसके गले से निकली.

"वो सब छ्चोड़ो & हमे ये बताओ की तुम उस लड़की से कैसे मिले,दोनो का चक्कर कैसे शुरू हुआ & फिर क्या हुआ."

"मैने उसे सबसे पहले क्लब के डॅन्स फ्लोर पे नाचते देखा था..",कुच्छ देर की खामोशी & 2 ग्लास पानी के बाद दिनेश बोला,"..बहुत ज़्यादा खूबसूरत नही थी मगर अजीब सी कशिश थी उसमे.वो डीजे छाज़े की माशुका थी ये जानते हुए भी मैने उसके करीब आने की कोशिश शुरू कर दी & जब उसने भी मुझे बढ़ावा दिया तो मैं खुशी से पागल हो उठा.छाजे से छिप्के हम यहा या फिर होटेल के कमरे मे मिलते थे."

"मिलते थे..",प्रोफेसर अपने होंठ के उपर अपनी उंगली & अंगूठा अपने जाने-पहचाने अंदाज़ मे चला रहा था,"..मुलाक़ातें बंद कब हुई?"

"1 दिन वो गायब हो गयी."

"बिना कुच्छ बताए?"

"हां."

"देखो,यही थी ना वो?",दिव्या ने शोभा/दीप्ति की तस्वीर उसके सामने की.

"हां."

"बहुत शातिर लड़की है.सच-2 बताना,तुम्हे कुच्छ चुना तो नही लगाया इसने?",इस बार दिनेश सच मे थोडा हैरत मे पड़ गया.

"नही,मगर.."

"मगर क्या?"

"देखिए,दिनेश जी..",प्रोफेसर उठके उसके पास आ गया,"..हम पंचमहल पोलीस से तो हैं नही.डेवाले मे इस लड़की ने 1 बड़ी सनसनी खेज वारदात मे अपराधियो का साथ दिया है.जिस शख्स को उस गुनाह के चलते भारी नुकसान उठाना पड़ा,उसका भरोसा भी कुच्छ उसी तरह इस लड़की ने जीता था जैसे कि आपका.",प्रोफेसर उसकी कुर्सी के पीछे उसके कंधो पे हाथ रख के खड़ा था,"..भाई,मेरा तो मशविरा यही है कि आप हमे सब बेझिझक बताइए ताकि ये लड़की गिरफ़्त मे आए & इस बात की गॅरेंटी देते हैं हम कि आपका नाम सामने नही आएगा."

"देखिए,अपनी बात से मुकरिएगा नही.मेरा नाम आया तो मैं बर्बाद हो जाऊँगा."

"बेफ़िक्र रहो.",दिव्या बोली.

"आपकी बातो से लगता है कि उस लूट के पीछे भी इसी का हाथ था."

"खुल के बताओ."

"जब भी हमे साथ वक़्त गुज़ारना होता,दीप्ति को मैं यहा फिर होटेल के किसी कमरे मे बुला लेता मगर होटेल मे हम दोनो के साथ देखे जाने का बहुत ज़्यादा ख़तरा था इसलिए ज़्यादातर हम यही मिलते थे.मैं सवेरे काम का बहाना करके यहा 9 बजे से थोड़ा पहले आ जाता.वो भी उसी वक़्त यहा आती & फिर 11 बजे तक निकल जाती.उस रोज़ भी यही हुआ मगर 10 बजते-2 अचानक 4 नक़ाबपोश यहा घुस आए & उस सेफ..",उसने 1 कोने की ओर इशारा किया को खाली कर निकल गये,"..गनीमत ये थी कि उस रोज़ सेफ मे बस 70,000 रुपये ही थे."

"आपने रिपोर्ट की इस बात की?"

"नही."

"हूँ..लेकिन रुपयो का हिसाब तो देना पड़ता होगा तुमको?"

"मैने अपने खाते मे से उन रुपयो की भरपाई की."

"लेकिन रिपोर्ट करने मे क्या था?बस कह देते कि तुम अकेले थे.",दिव्या ने अगला सवाल दागा.

"जी.दरअसल..वो क्या है कि.."

"हूँ..बोलो-2."

"जी,जब लुटेरे घुसे तो मैं & दीप्ति बिल्कुल..बिल्कुल..नंगे थे..लुटेरो ने 1 फिल्म उतार ली हमारी & धमकाया कि अगर पोलीस को बोला तो कल इसका म्‍मस बनाके पूरे शहर मे फैला देंगे."

"हूँ..दीप्ति का क्या रिक्षन था?"

"लुटेरे जब तक रहे वो बिल्कुल चुप थी..लगता था जैसे बड़े शॉक मे थी.उनके जाते ही फुट-2 के रोने लगी कि उसका क्या होगा..कही म्‍मस बाज़ार मे आ गया तो.मैने उसे समझाया & दिलासा दे के घर भेज दिया."

"अच्छा,दिनेश..",दिव्या ने 2 स्केचस निकले,"..तुमने कभी भी इन लोगो को दीप्ति के साथ देखा था?",छाज़े ने तो नही देखा था & दिव्या को उम्मीद भी नही थी कि दिनेश हा मे जवाब देगा मगर दिनेश ने उसे चौंका दिया.

"हां,ये तो दीप्ति का भाई है.",उसने जवान लुटेरे की ओर इशारा किया जोकि गुलाबो से मिला करता था.

"इसका नाम?"

"वो मुझे मालूम नही.1 बार दीप्ति को मैं अपनी गाड़ी से लेने गया था तो ये इस से बाते कर रही थी,मेरे पुच्छने पे उसने बोला कि उसका भाई है फिर ना उसने आगे बाते ना मैने पुचछा.",दिनेश को दीप्ति के परिवार के बारे मे और कुच्छ नही पता था लेकिन छाज़े ने सब लिख के दिया था.अब अगला कदम दीप्ति के परिवार से पुछ्ताच का था लेकिन कल सुबह.

........................

अजीत खाने की मेज़ पे बैठा था & मेघना नौकरो के साथ खाने की तैय्यारि कर रही थी.अजीत के दिमाग़ मे बस वही बाते घूम रही थी कि आख़िर CM अत्रे,कॅबिनेट सेक्रेटरी अवस्थी के तार उस टेंट वाले & आर्म्स डीलर के साथ क्यू जुड़े थे....आख़िर क्या मक़सद था उनका?!

वो हॉल का टीवी चलता छ्चोड़ आया था जिसकी आवाज़ खाने की मेज़ तक आ रही थी,"..आज 1 रॅली मे लोकहित पार्टी के डेवाले सेंट्रल से उमीड़वार जसजीत प्रधान ने फिर से ग़रीबो के हित & बेरोज़गारो के भविश्य को सुधारने की बात कही.इस रॅली मे भी बहुत भीड़ उमड़ी थी..",न्यूज़ रीडर की आवाज़ उसके कानो मे पड़ी.

"..शर्मा जी,आपको क्या लगता है कि अवाम केवल प्रधान जी को देखने आती है या फिर वोट भी वो उन्हे ही देगी?",अब वो शायद किसी एक्सपर्ट से बात कर रही थी.

"मेरे ख़याल से तो उन्हे वोट भी मिलेंगे."

"आपकी सोच की वजह?"

"देखिए,इस वक़्त जो इमेज,जो छवि प्रधान जी की जनता के बीच है वैसी & किसी नेता की नही.लोगो को वो उनके जैसे लगते हैं..आप समझ रही है ना..हमारे जैसा आदमी.वो ज़बान भी लोगो के जैसे ही बोलते हैं तो मुझे लगता है कि उन्हे तो वोट मिलेंगे ही."

"तो उनकी इस लोकप्रियता का फ़ायदा उनकी पार्टी को भी मिलेगा?"

"ज़रूर."

"शर्मा जी,ऐसी बाते सुनने मे आ रही हैं कि अगर लोकहित जीती तो इस बार अत्रे जी की जगह प्रधान जी CM की कुर्सी पे बैठ सकते हैं.इनमे कितनी सच्चाई नज़र आती है आपको?"

"देखिए,असल बात तो लोकहित के आलाकमान को ही मालूम होगी लेकिन मुझे ये बहुत मुमकिन लगता है कि अगर पार्टी चुनाव जीतती है तो इस बार प्रधान जी ही CM बनेंगे."

"तो फिर अत्रे जी का क्या होगा & क्या वो इतनी आसानी से गद्दी छ्चोड़ेंगे?हमारे मुल्क मे तो नेता गद्दी से चिपके रहने के लिए बदनाम हैं."

"बिल्कुल सही कहा आपने.अत्रे जी आसानी से झुकने वाले नही हैं मगर मुझे नही लगता उनके पास और कोई चारा है.हवा का रुख़ प्रधान जी के पक्ष मे है."

"फिर अत्रे जी के भविश्य के बारे मे आपकी क्या राई है?"

"देखिए,उन्हे दिल्ली बुला लिया जाए,ऐसा हो सकता है."

"पर क्या वाहा भी उनका यही रुतबा,यही रसुख बरकरार रहेगा?"

"नही,ये तो मुमकिन नही.दिल्ली मे पहले से ही बड़े भारी दिग्गज बैठे हैं & अत्रे जी की झोली मे कोई छ्होटी-मोटी मिनिस्ट्री आने वाली है..",तभी अजीत के ज़हन मे बिजली सी कौंधी.अब उसे कुच्छ-2 समझ मे आ रहा था.CM अपने करीबी लोगो के साथ मिलके ज़रूर प्रधान की ताक़त कम करना चाहते हैं..हाँ..इसके सिवा और कोई बात हो भी नही सकती..सभी को पता है कि प्रधान के दम पे उसकी पार्टी के चुनाव जीतने के चान्सस बहुत मज़बूत हैं..ऐसे मे अगला CM वो ही बनेगा & अत्रे जी की कुर्सी छीन जाएगी..यानी शिकार है प्रधान & शिकारी हैं CM अत्रे & उसके साथी.अब बस उसे उनके बिच्छाए जाल & इस ख़तरनाक खेल मे इस्तेमाल किए जाने वाले हथ्यारो का पता लगाना है ताकि वो इस साज़िश की तह तक पहुँचे & राज्य को आनेवाली मुसीबत से बचा सके.

मेघना भी मेज़ पे आके बैठ गयी,नौकरो ने खाना लगा दिया था.अजीत ने खाना परोसती मेघना को देखा & मुस्कुराया & खाना खाने लगा.

......................................

"उन्न्ञणन्..छ्चोड़ो ना..!",दिव्या मुस्कुराती हुई प्रोफेसर दीक्षित के बाहो के घेरे से निकल गयी.दोनो अभी-2 क्लब नीयान से वापस फ्लॅट पे पहुचे थे & अंदर कदम ही रखा था कि प्रोफेसोर ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया था,"..पहले कपड़े बदलने दो.",प्रोफेसर के कुच्छ कहने से पहले ही दिव्या अपने कमरे मे घुस गयी & दरवाज़ा लगा दिया.

दिव्या ने कपड़े उतारे,पॅंटी पे कार मे उसकी चूत से निकला रस सूख चुका था.उसे देख उसके होंठो पे हल्की सी मुस्कान आ गयी & दिल मे 1 बार फिर प्रोफेसर का साथ पाने की कामना जागी.उसने 1 बाथिंग गाउन पहना & सोचा कि पहले मैइले कपड़ो को बाथरूम मे धोने के लिए रख दे & अपना समान भी ठीक कर ले फिर इतमीनान से प्रोफेसर के साथ चुदाई करेगी.

"ओफ्फो..!",कपड़े बाथरूम मे डाल के वो कमरे मे वापस आई ही थी कि उसे कमरे मे खड़ा प्रॉफेसर दिखा.उसने कमर पे बस 1 तौलिया लपेटा हुआ था जिसमे कुच्छ हरकत हो रही थी,"..अभी जाओ.मैं थोड़ी देर मे आती हू.",दिव्या कोने मे रखे अपने सूटकेस की ओर बढ़ी ही थी कि प्रोफेसर ने उसे खींच के अपनी ओर घुमा & अपने सीने से लगा लिया.

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--35

gataank se aage............

professor uske upar jhuka uski bayi,sudol choochi ko chuse ja raha tha & uska daya hath divya ki jeans ko uski gand se neeche karne ke baad uski chut ke andar 1 ungli ghusa raha tha.divya ab puri tarah se mast ho chuki thi & professor ke lund ke liye pagal ho rahi thi.

"ab aao na..",usne professor ke baal pakad use upar khichna chaha,"..jaldi se ghusao apna lund mere andar!",lekin professor uski baat ansuna karte uski chut ki deewaro pe apni ungli chalata raha.divya khij gayi lekin professor ki ungli uske maze ko badah rahi thi.aisa lag raha tha ki professor apni ungli se uski chut me kuchh dhoond raha hai.

tabhi divya ko aisa laga jaise uske andar masti,bechaini,maza & besabri-ye sabhi ehsas apni puri shiddat ke sath uske jism me 1 sath phut pade.professor ne uska g-spot dhoond liya tha & vaha pe halke-2 sehla raha tha.divya professor se jhadte waqt humesha bahut madhosh jati thi lekin abhi ki madhoshi ka to koi muqabla nahi tha!vo sab bhul gayi-waqt,jagah,professor..use kisi baat ka hosh nahi tha.hosh tha to apne ladki hone ka & us sachchai ke sabse khubsurat ehsas ka jo vo is waqt aise mehsus kar rahi thi jaise usne kabhi nahi kiya tha.

vo aahe bhar rahi thi balki yu kaha jaye ki chikh rahi thi & jab maza bilkul charam pe pahunch gaya to vo khamosh ho gayi,uska chehra & band aankhe dekh aisa lagta jaise use bahut taklif hui hai & vo kisi dusri duniya me hai.ye galat tha ki use bahut taklif ho rahi thi magar ye sach tha ki vo dusri hi duniya me thi.

jab vo us duniya se vapas lauti to usne professor ko khud ke upar jhuke uske baalo ko sehlate & uske chehre ko niharte paya.uske kapde vapas uske ango ko dhanke hue the.usne professor ke gale me baahe daal use neeche jhuka diya & use chumne lagi.uski kiss me besabri nahi thi bahut sukun tha & shukraguzari ka ehsas tha.

"waqt ho gaya hai,chalen?",professor ne kisi tarah se apne hotho ko uske gulabi hotho se alag kiya.divya uth baithi & professor ne car start kar vapas club ki taraf mod di.

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"haan,madam kahiye kya kaam tha aapko mujhse?",dinesh singh bahut thaka nazar aa raha tha.

"hume aapse Dipti ke bare me baat karni thi.",dinesh ke chehre ka rang 1 pal ko uda magar agle hi pal usne khud ko sambhal liya lekin divya ki paini nigaho ne sab dekh liya tha.vo samajh gayi ki ab dinesh singh anjan banane ka natak karega..use dipti ka naam bhi yaad nahi hoga.

"kaun dipti?",divya man hi man muskurayi.

"hun..",vo kursi pe peechhe ho aaram se baith gayi,"..har mulakat isi cabin me hoti thi ya fir koi love nest bhi tha?"

"mulakat..love nest..kya keh rahi hain aap?",dinesh ne bhave sikod li,"..meri kuchh samajh me nahi aa raha..& bahut raat ho chuki hai,mujhe ghar bhi jana hai."

"jab tak hume dipti ke bare me sab kuchh nahi bata dete,tum kahi nahi jaoge.",divya ka chehra & lehja,dono sakht the,"..natak chhodo & bako!"

"dekhiye,aap mujhe aise pareshan nahi kar sakti.aap mujhe janti nahi,1 fone karunga..",uski baat puri hone se pehle hi divya uske karib pahunch gayi & uska collar pakad use kursi se utha diya.

"fone karna hai..",divya ne uska mobile uthaya & uske samne kiya,"..lagao jise lagana hai..fir jab kal ke akhbaro me khabar chhapegi ki Club Vienna ka manager,Hotel Euphoria ke malik ka damad apne daftar me kisi gair ladki ke sath rangreliya manaya karta tha to jo hoga uski zimmedari sirf tumhari hogi.",ac ke bavjood dinesh paseene se naha gaya & jab divya ne uska collar chhoda to apni kursi pe dham se gira & apna matha pakad liya.

"aapko kaise pata chala?",mariyal si aavaz uske gale se nikli.

"vo sab chhodo & hume ye batao ki tum us ladki se kaise mile,dono ka chakkar kaise shuru hua & fir kya hua."

"maine use sabse pehle club ke dance floor pe nachte dekha tha..",kuchh der ki khamoshi & 2 glass pani ke baad dinesh bola,"..bahut zyada khubsurat nahi thi magar ajib si kashish thi usme.vo DJ Chaze ki mashuka thi ye jante hue bhi maine uske karib aane ki koshih shuru kar di & jab usne bhi mujhe badhawa diya to main khushi se pagal ho utha.chaze se chhipke hum yaha ya fir hotel ke kamre me milte the."

"milte the..",professor apne honth ke upar apni ungli & angutha apne jane-pehchane andaz me chala raha tha,"..mulakaten band kab hui?"

"1 din vo gayab ho gayi."

"bina kuchh bataye?"

"haan."

"dekho,yehi thi na vo?",divya ne Shobha/dipti ki tasvir uske samne ki.

"haan."

"bahut hatir ladki hai.sach-2 batana,tumhe kuchh chuna to nahi lagaya isne?",is baar dinesh sach me thoda hairat me pad gaya.

"nahi,magar.."

"magar kya?"

"dekhiye,dinesh ji..",professor uthke uske paas aa gaya,"..hum Panchmahal police se to hain nahi.Devalay me is ladki ne 1 badi sansankikhez vardat me apradhiyo ka sath diya hai.jis shakhs ko us gunah ke chalte bhari nuksan uthana pada,uska bharosa bhi kuchh usi tarah is ladki ne jita tha jaise ki aapka.",professor uski kursi ke peechhe uske kandho pe hath rakh ke khada tha,"..bhai,mera to mashvira yehi hai ki aap hume sab bejhijhak bataiye taki ye ladki giraft me aaye & is baat ki guarantee dete hain hum ki aapka naam samne nahi ayega."

"dekhiye,apni baat se mukariyega nahi.mera naam aaya to main barbad ho jaoonga."

"befikr raho.",divya boli.

"aapki baato se lagta hai ki us loot ke peechhe bhi isi ka hath tha."

"khul ke batao."

"jab bhi hume sath waqt guzarna hota,dipti ko main yaha fir hotel ke kisi kamre me bula leta magar hotel me hum dono ke sath dekhe jane ka bahut zyada khatra tha isliye zyadatar hum yehi milte the.main savere kaam ka bahana karke yaha 9 baje se thoda pehle aa jata.vo bhi usi waqt yaha aati & fir 11 baje tak nikal jati.us roz bhi yehi hua magar 10 bajte-2 achanak 4 naqabposh yaha ghus aaye & us safe..",usne 1 kone ki or ishara kiya ko khali kar nikal gaye,"..ganimat ye thi ki us roz safe me bas 70,000 rupaye hi the."

"aapne report ki is baat ki?"

"nahi."

"hun..lekin rupayo ka hisab to dena padta hoga tumko?"

"maine apne khjate me se un rupayo ki bharpayi ki."

"lekin report karne me kya tha?bas keh dete ki tum akele the.",divya ne agla sawal daga.

"ji.darasal..vo kya hai ki.."

"hun..bolo-2."

"ji,jab lutere ghuse to main & dipti bilkul..bilkul..nange the..lutero ne 1 film utar li humari & dhamkaya ki agar police ko bola to kal iska mms banake pure shehar me faila denge."

"hun..dipti ka kya reaction tha?"

"lutere jab tak rahe vo bilkul chup thi..lagta tha jaise bade shock me thi.unke jate hi phut-2 ke rone lagi ki uska kya hoga..kahi mms bazar me aa gaya to.maine use samjhaya & dilasa de ke ghar bhej diya."

"achha,dinesh..",divya ne 2 sketches nikale,"..tumne kabhi bhi in logo ko diptio ke sath dekha tha?",chaze ne to nahi dekha tha & divya ko umeed bhi nahi thi ki dinesh haa me jawab dega magar dinesh ne use chaunka diya.

"haan,ye to dipti ka bhai hai.",usne jawan lutere ki or ishara kiya joki Gulabo se mila karta tha.

"iska naam?"

"vo mujhe malum nahi.1 baar dipti ko main apni gadi se lene gaya tha to ye is se baate kar rahi thi,mere puchhne pe usne bola ki uska bhai hai fir na usne aage batay na maine puchha.",dinesh ko dipti ke parivar ke bare me aur kuchh nahi pata tha lekin chaze ne sab likh ke diya tha.ab agla kadam dipti ke parivar se puchhtachh ka tha lekin kal subah.

Ajit khane ki mez pe baitha tha & Meghna naukro ke sath khane ki taiyyari kar rahi thi.ajit ke dimagh me bas vahi baate ghum rahi thi ki aakhir CM Atre,cabinet secretary Awasthi ke taar us tent vale & arms dealer ke sath kyu jude the....aakhir kya maqsad tha unka?!

vo hall ka tv chalta chhod aya tha jiski aavaz khane ki mez tak aa rahi thi,"..aaj 1 rally me Lokhit Party ke Devalay Central se umeedvar Jasjit Pradhan ne fir se garibo ke hit & berozgaro ke bhavishya ko sudharne ki baat kahi.is rally me bhi bahut bheed umdi thi..",news reader ki aavaz uske kano me padi.

"..Sharma ji,aapko kya lagta hai ki awam keval pradhan ji ko dekhne aati hai ya fir vote bhi vo unhe hi degi?",ab vo shayad kisi expert se baat kar rahi thi.

"mere khayal se to unhe vote bhi milenge."

"aapki soch ki vajah?"

"dekhiye,is waqt jo image,jo chhavi pradhan ji ki janta ke beech hai vaisi & kisi neta ki nahi.logo ko vo unke jaise lagte hain..aap samajh rahi hai na..humare jaisa aadmi.vo zaban bhi logo ke jaise hi bolte hain to mujhe lagta hai ki unhe to vote milenge hi."

"to unki is lokpriyta ka fayda unki party ko bhi milega?"

"zarur."

"sharma ji,aisi baate sunane me aa rahi hain ki agar lokhit jeeti to is baar atre ji ki jagah pradhan ji CM ki kursi pe baith sakte hain.inme kitni sachchai nazar aati hai aapko?"

"dekhiye,asal baat to lokhit ke alakaman ko hi malum hogi lekin mujhe ye bahut mumkin lagta hai ki agar party chunav jeetati hai to is baar pradhan ji hi CM banenge."

"to fir atre ji ka kya hoga & kya vo itni asani se gaddi chhodenge?humare mulk me to neta gaddi se chipke rehne ke liye badnam hain."

"bilkul sahi kaha aapne.atre ji aasani se juane vale nahi hain magar mujhe nahi lagta unke paas aur koi chara hai.hawa ka rukh pradhan ji ke paksh me hai."

"fir atre ji ke bhavishya ke bare me aapki kya rai hai?"

"dekhiye,unhe Dilli bula liya jaye,aisa ho sakta hai."

"par kya vaha bhi unka yehi rutba,yehi rasukh barkarar rahega?"

"nahi,ye to mumkin nahi.dilli me pehle se hi bade bhari diggaj baithe hain & atre ji ki jholi me koi chhoti-moti ministry aane vali hai..",tabhi ajit ke zehan me bijli si kaundhi.ab use kuchh-2 samajh me aa raha tha.CM apne karibi logo ke sath milke zarur pradhan ki taqat kam karna chahte hain..haan..iske siwa aur koi baat ho bhi nahi sakti..sabhi ko pata hai ki pradhan ke dum pe uski party ke chunav jitne ke chances bahut mazbut hain..aise me agla CM vo hi banega & atre ji ki kursi chhin jayegi..yani shikar hai pradhan & shikari hain CM atre & uske sathi.ab bas use unke bichhaye jaal & is khatarnak khel me istemal kiye jane vale hathyaro ka pata lagana hai taki vo is sazish ki teh tak pahunche & rajya ko aanevali musibat se bacha sake.

meghna bhi mez pe aake baith gayi,naukro ne khana laga diya tha.ajit ne khana parosti meghna ko dekha & muskuraya & khana khane laga.

"Unnnnn..chhodo na..!",Divya muskurati hui Professor Dixit ke baaho ke ghere se nikal gayi.dono abhi-2 Club Neon se vapas flat pe phunche the & andar kadam hi rakha tha ki profesor ne use peechhe se baaho me bhar liya tha,"..pehle kapde badalne do.",professor ke kuchh kehne se pehle hi divya apne kamre me ghus gayi & darwaza laga diya.

divya ne kapde utare,panty pe car me uski chut se nikla ras sookh chuka tha.use dekh uske hotho pe halki si muskan aa gayi & dil me 1 baar fir professor ka sath pane ki kamna jagi.usne 1 bathing gown pehna & socha ki pehle maile kapdo ko bathroom me dhone ke liye rakh de & apna saman bhi thik kar le fir itminan se professor ke sath chudai karegi.

"offoh..!",kapde bathroom me daal ke vo kamre me vapas aayi hi thi ki use kamre me khada parofessor dikha.usne kamar pe bas 1 tauliya lapeta hua tha jisme kuchh harkat ho rahi thi,"..abhi jao.main thodi der me aati hu.",divya kone me rakhe apne suitcase ki or badhi hi thi ki professor ne use khinch ke apni or ghumaa & apne seene se laga liya.

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--36

गतान्क से आगे............

"बहुत काम है फिर वक़्त नही मिलेगा करने को तो मुश्किल होगी.",वो कसमसाई लेकिन प्रोफेसर का फौलादी जिस्म & हर पल बढ़ता लंड उसके विश्वास को डिगा रहे थे.प्रोफेसर ने बाए हाथ से उसकी कमर को थाम मज़बूती से उसे खुद से चिपकाया हुआ था & दाए से उसकी ज़ुल्फो को उसके खूबसूरत चेहरे से हटा रहा था.

"सब हो जाएगा,परेशान क्यू होती हो.",उसकी उंगलिया उसकी ठुड्डी के नीचे बहुत हल्के-2 घूम रही थी,"..रात की खामोशी कितनी अच्छी लग रही है.ऐसे मे 1 दूसरे मे खोने के सिवा कोई और काम ज़रूरी कैसे हो सकता है!",उसने अपना सर थोड़ा दाई तरफ झुकाते हुए दिव्या के गुलाबी होंठो को चूमना शुरू कर दिया.दिव्या के हाथ उसके सीने पे लगे हुए थे.कुच्छ देर पहले वो प्रोफेसर को धकेलने की कोशिश कर रहे थे मगर ज़्यु-2 प्रोफेसर के होंठो & ज़ुबान की हरकते और शरीर होती गयी त्यु-2 उसके हाथ प्रोफेसर के सीने पे मस्ती मे घूमने लगे.

प्रोफेसर का दाया हाथ उसके बाए कान के पीछे घूम रहा था & उसके जिस्म मे बिजली दौड़ने लगी थी.उसने प्रोफेसर के सीने के बालो को हल्के से खींचते हुए अपने पंजो पे उचक के उसकी ज़ुबान को अपने मुँह से बाहर धकेलते हुए अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे घुसा दी.प्रोफेसर ने बाया हाथ उसकी कमर से हटाकर सामने किया & गाउन की बेल्ट खोल उसे अंदर घुसा दिया & 1 बार फिर उसकी कमर को लपेट लिया.उसका हाथ उसकी मांसल कमर को दबाते हुए उसकी गंद की बाई फाँक को भी हौले-2 दबा रहा था.दिव्या ने अपने हाथ उसकी पीठ से लगा दिए & उस से चिपक गयी & अपनी बाई टांग उठा उसे प्रोफेसर की दाई टांग पे लंबाई मे चलाने लगी.

चूमते हुए प्रोफेसर उसे पीछे बिस्तर की तरफ ले जा रहा था.उसका बाया हाथ अभी भी दिव्या की गंद की फाँक को दबोचे हुए था,"..ऊहह..!",प्रोफेसर ने हाथ को गंद पे फिराते हुए 1 उंगली दिव्या की आनच्छुई गंद के छेद मे डाल दी तो वो चिहुनक के किस तोड़ते हुए उस से अलग हो गयी लेकिन प्रोफेसर ने उसे अपनी ओर फिर से खींचा & उसकी गंद की छेद मे फिर से उंगली घुसाई.दिव्या पे फिर से शर्म का दौरा पड़ गया & उसके गुलाबी गाल & सुर्ख हो गये.उसने अपने हाथो से प्रोफेसर के हाथ पकड़ उन्हे अपने जिस्म से अलग किया.उसके होंठो पे मस्ती & हया भरी मुस्कान थी.प्रोफेसर की बेबाक निगाहो की तपिश वो झेल नही पाई & पलट के अपनी पीठ उसकी तरफ कर दी.

प्रोफेसर ने अपना तालिया खोला & हाथ आगे बढ़ा दिव्या का गाउन उसके कंधो से सरका उसे भी नंगी कर दिया.दिव्या के कंधो पे हाथ रख वो उसके बाल चूमने लगा तो दिव्या ने अपना सर पीछे कर उसके सीने से लगा दिया & अपने होंठ उपर कर खोल दिए.प्रोफेसर ने उसके होंठो का न्योता कबूला & 1 बार फिर दोनो प्रेमी 1 दूसरे के होंठो का स्वाद चखने लगे.प्रोफेसर उसकी दूधिया चूचियो को दबोचे हुए था.दिव्या ने गंद के उपर उसके गर्म लंड का दबाव महसूस किया तो उसके जिस्म मे झुरजुरी दौड़ गयी & उसने अपने हाथ पीछे ले जाके प्रोफेसर की पेड़ के तने सरीखी जाँघो के बाहरी हिस्सो को सहलाना शुरू कर दिया.

काफ़ी देर तक दोनो वैसे ही खड़े 1 दूसरे को चूमते रहे फिर प्रोफेसर ने अपना दाया हाथ नीचे कर दिव्या की दाई टांग को उठाके उसके घुटने को बिस्तर के उपर टीका दिया फिर उस जाँघ पे अपनी 1 उंगली फिराने लगा.दिव्या थोड़ा आगे को झुक गयी थी & अपने दाए कंधे के उपर से झुके उसके लब चूमते प्रोफेसर के बालो को अपने दाए हाथ से सहला रही थी.कुच्छ देर बाद प्रोफेसर ने उसके बाए घुटने को भी बिस्तर पे चढ़ा दिया & उसके पीछे खड़ा हो गया.दिव्या ने अपनी गंद अपनी आएडियो पे टीका दी & पीछे सर घुमा प्रोफेसर को देखा.

प्रोफेसर ने उसका सर आगे की ओर कर उसके बालो को आधा-2 कर दोनो कंधो के उपर से आगे कर दिया.रेशमी बालो को हाथ मे भर जब उनके साथ उसने उसकी मोटी चूचियो को दबाया तो दिव्या सिहर उठी,उसकी चूत मे कसक सी उठी जिसे उसने चूत को सिकोड शांत करने की कोशिश की मगर नतीजा उलट हुआ & उसका जिस्म & भी गर्म हो गया.प्रोफेसर के होंठ उसके कंधो को चूमते हुए उसकी चूचिया मसलता रहा तब तक जब तक कि दिव्या ने आहे भरते हुए वैसे ही घुटनो पे बैठे हुए अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया.

प्रोफेसर ने उसकी चूचियाँ छ्चोड़ी & अपने दोनो हाथो की उंगलियो के पोरो को उसकी गर्दन के पीछे लगाके उसकी रीढ़ की लंबाई पे उसकी गंद की दरार तक चलाया.दिव्या का जिस्म अब पूरी तरह से मस्ती मे डूब गया था.आँखे बंद कर वो हल्के से मुस्कुराती हुई प्रोफेसर की 1-1 हरकत का पूरा लुत्फ़ उठा रही थी.प्रोफेसर उसके कंधो से लेके उसकी गंद तक उसकी पीठ & कमर के 1-1 हिस्से पे अपने होंठो की छाप छ्चोड़ रहा था.दिव्या की गंद के उपर के डिंपल्स को चूमने के बाद वो वही फर्श पे अपने पंजो के बल बैठ गया & दिव्या की गंद की कस फांको को थाम उन्हे बाहर की ओर फैलाया.

"ऊन्णन्न्..!",दिव्या ने अपना सर उपर उठाते हुए अपने हाथ अपनी कोमल जाँघो पे बेचैनी से चलाते हुए आह भरी तो प्रोफेसर ने अपनी जीभ की नोक उसकी चूत से सता दी.उस एहसास से दिव्या की चूत अपनेआप सिकुड गयी ,मगर प्रोफेसर की ज़ुबान ने उसे फिर से खोला & उस से बह रहे रस को चाटने लगी.दिव्या पागल हो गयी.उसकी आहे और तेज़ हो गयी.प्रोफेसर उसकी कमर थामे उसकी चूत बहुत तेज़ी से चाट रहा था.दिव्या को अपनी चूचियाँ बहुत ही कसी महसूस हुई & उनमे हल्का सा दर्द महसूस हुआ तो उसने अपने हाथो से अपनी गोलाइयाँ दबोच ली & उन्हे दबाने लगी.

प्रोफेसर की ज़ुबान चूत की लंबाई पे घूम उसके दाने को छेड़ रही थी.दिव्या कमर हिलाना चाह रही थी मगर प्रोफेसर ने उसे मज़बूती से थाम रखा था.प्रोफेसर की शरारती ज़ुबान ने दिव्या की चूत मे बहुत उधम मचाया & दिव्या अब मस्ती मे बिल्कुल होश खो चुकी थी.बस कुच्छ ही पलो की बात थी & प्रोफेसर की ज़ुबान उसे झाड़वाने वाली थी कि तभी प्रोफेसर ने जीभ उसकी चूत से सरका उसके गंद के छेद पे लगा उसे छेड़ा & दिव्या ये बर्दाश्त नही कर पाई & फ़ौरन झाड़ गयी.

दिव्या निढाल हो आगे गिरने को थी लेकिन प्रोफेसर फ़ौरन उठ खड़ा हुआ & उसके कंधो को पकड़ उसे सीधा किया & बाए हाथ से उसके दाए कंधे को थाम दाए से अपने प्यासे लंड को पकड़ पीछे से घुटनो के बल ,आएडियो पे गंद टिकाए बैठी दिव्या की रस बहाती चूत मे घुसा दिया.

"ऊव्ववव..!",दिव्या ने फिर पीछे सर झटका,प्रोफेसर ने 1 बार ही मे अपना लंड जड तक उसकी चूत मे उतार दिया था & उसे दर्द महसूस हुआ था.प्रोफेसर ने दाए हाथ से उसके चेहरे को दाई तरफ घुमा अपनी ओर किया & बाए से उसकी चूत के दाने को रगड़ता,उसे चूमता हुआ पीछे से धक्के लगा उसकी चुदाई करने लगा.उसका दाया हाथ दिव्या के बाए गाल से होता हुआ उसकी गर्दन & फिर मोटी चूचियों पे घूम रहा था.

प्रोफेसर का मोटा लंड उसकी चूत को फैला रहा था & दिव्या को उसके हर धक्के पे अलग तरह का मज़ा महसूस हो रहा था.दिव्या ने बदन कमान की तरह मोड़ लिया & प्रोफेसर का दाया हाथ जो अब उसकी चूचियो को दबाने मे लगा हुआ था,अपने दाए हाथ को उसके उपर रख दिया & कमर हिलाती हुई उसे चूमती हुई चुदने लगी.उसके बदन मे बहुत सनसनी हो रही थी & जब प्रोफेसर ने उसकी चूची को दबोच के ज़ोर से चूमा तो वो इतनी मस्ती सह ना सकी & उसकी गिरफ़्त से निकल आयेज बिस्तर पे झुक गयी.प्रोफेसर ने समझा कि वो झाड़ गयी है & धक्के लगाना रोक कर उसकी गोरी पीठ सहलाने लगा मगर दिव्या अभी झड़ी नही थी.

चुदाई रुकने से वो बेचैन हो गयी & उसने अपनी कमर आगे-पीछे कर खुद ही चुदाई शुरू कर दी.प्रोफेसर अपनी कमर पे दोनो हाथ टीका के खड़ा हो गया & उसकी हर्कतो का मज़ा लेने लगा.दिव्या की मोटी गंद जब पीछे हो उसके बड़े आंडो से टकराती & वो दिव्या & उसके जिस्मो के बीच दब जाते तो उनमे 1 अजीब सा मीठा दर्द होता जिसकी लहर उसके दिल तक पहुँचती & वो मस्ती की 1 और सीढ़ी चढ़ जाता.

दिव्या की चूत अब उसके लंड पे कस रही थी,वो समझ गया कि अब दिव्या अपनी मंज़िल के करीब है.उसने उसकी कमर थामी & जवाबी धक्के शुरूर कर दिए.उसके गहरे धक्को ने दिव्या को बिल्कुल मदहोश कर दिया.उसकी आहो से कमरा गुलज़ार हो गया & वो बिस्तर मे मुँह च्छुपाए चादर को अपने बेचैन हाथो से दबोचते,मसल्ते मस्ती मे डूब गयी.प्रोफेसर के धक्को के असर से कुच्छ ही देर मे दिव्या की चूत उसके लंड पे बुरी तरह कस गयी & अगले ही पल वो सुबकने लगी & उसने अपना चेहरा पूरा बिस्तर मे दफ़्न कर लिया,वो झाड़ गयी थी.प्रोफेसोर बड़ी मुश्किल से उसकी चूत की कसी गिरफ़्त मे क़ैद अपने लंड को उसका पानी छ्चोड़ने से रोके हुए था.

थोड़ी देर बाद जब दिव्या की सूबकिया रुकी तो उसने उसकी पीठ पे हाथ फिराया & उसकी दाई चूची को पकड़ उसे अपनी ओर घूमाते हुए उसकी दाई करवट पे कर दिया,उसका लंड अभी भी उसकी चूत मे था.दिव्या ने सर दाई ओर घुमा उपर कर अपनी नासीली आँखो से अपने महबूब को देखा जिसने 1 बार फिर अपनी कमर हिला उसकी चुदाई शुरूर कर दी थी.वो दिव्या की गंद को दबोचे खड़े हुए उसकी टाँगो को सहलाते हुए उसे चोद रहा था.

दिव्या ने दाया हाथ आगे बढ़ा प्रोफेसर का बाया हाथ अपनी गंद से उठा थाम अपनी उंगलिया उसकी उंगलियो मे फँसा दी.प्रोफेसर का जोश अब आसमान च्छू रहा था.थोड़ी देर तक वो दिव्या का हाथ थामे रहा फिर उसेन हाथ छ्चोड़ा & उसकी दोनो टाँगो को 1 साथ उठा के सीधा किया.अब दिव्या सीधी लेटी थी.बिस्तर के कोने पे उसकी गंद टिकी थी & प्रोफेसर ने उसकी दोनो टाँगो को फैला के हवा मे उठाया हुआ था & अपनी कमर हिला के हर धक्के पे पूरा लंड बाहर निकाल के फिर से उसकी चूत मे घुसा रहा था.

अपनी चूचियो को अपने हाथो से दबाती दिव्या बिस्तर पे छॅट्पाटा रही थी.1 बार फिर वो मस्ती के सागर की सबसे ऊँची लहर पे सवार थी.उसका जिस्म थरथरा रहा था,प्रोफेसर का लंड उसकी कोख पे चोट कर रहा था & वो बेचैनी मे आहे भर रही थी.सर उठाके वो प्रोफेसर के बिना झांतो के लंड को अपनी नाज़ुक चूत की चुदाई करते देखने लगी & उस नज़ारे ने उसे और मदहोश कर दिया.उसने सर वापस बिस्तर पे रख दिया & दाए-बाए हिलाते हुए अपनी चूचियाँ वैसे ही दबाती रही.

"ओईईईई....!...हाईईईई......अहन्ंणणन्....ःआण्ण्ण्ण्ण्ण....!",प्रोफेसर ने लंड को सूपदे तक बाहर खींच के फिर से वापस ज़ोर से अंदर ठेला तो दिव्या की चूत के इंच-2 से लंड ने रगड़ खाई & वो मज़े से बहाल हो गयी & चीखने लगी.अगले 3-4 धक्को के बाद वो फिर से झाड़ गयी & आँखे बंद कर लंबी-2 साँसे भरने लगी.प्रोफेसर ने उसकी बाई टांग को मोड़ उसकी दाई टांग से सटा अपने जिस्म के बाई ओर किया & उसके उपर झुक गया.

झड़ने के बाद दिव्या का चेहरा और भी हसीन लग रहा था.पूरा चेहरा ऐसे लाल हो रहा था जैसे अंदर कोई आग जल रही हो.उसकी आँखे बंद थी & होंठो पे सुकून भरी बहुत ही हल्की मुस्कान.प्रोफेसर उसके उपर झुके उसके हुस्न को निहारे जा रहा था....कैसी कशिश थी इस चेहरे मे!..वो दीवाना हो गया था इस लड़की का..मगर क्या केवल उसके हुस्न की वजह से..उसकी दिलकस अड़ाओ की वजह से या फिर उसकी गर्मजोशी भरी चुदाई की वजह से?..नही......उसने उसे उसका बीता कल याद दिलाया था जो आज से बहुत ज़्यादा हसीन था.....उस कल मे जिसमे....

तभी दिव्या ने आँखे खोली & प्रोफेसर की आँखो मे झाँका.....वाहा चाहत थी,उसकी तारीफ थी,ढेर सा प्यार था,जिस्म की प्यास थी मगर साथ-2 1 तड़प भी थी.प्रोफेसर ने 1 बार फिर उसकी चुदाई शुरू कर दी.टांग पे टांग चढ़ि होने की वजह से उसकी चूत और कस गयी थी & दोनो ही का मज़ा और बढ़ गया था.प्रोफेसर ने दाए हाथ से उसके चेहरे को सहलाते हुए अंगूठे को उसके रसीले होंठो पे चलाया तो दिव्या ने उसे काट लिया लेकिन प्रोफेसर ने उसे वापस नही खींचा बल्कि उसके मुँह मे ही रहने दिया.दिव्या उसके अंगूठे को चूसने लगी तो प्रोफेसर ने दूसरे हाथ से उसके गुलाबी,कड़े निपल्स को छेड़ना शुरू कर दिया.

दिव्या को बहुत मज़ा आ रहा था मगर वो प्रोफेसर के जिस्म का पूरा लुत्फ़ उठना चाहती थी.उसने उनके सीने पे हाथ रख उसे उपर उठाया & अपनी टाँगे 1 बार फिर फैला दी.प्रोफेसर उसकी हसरत समझ गया & उसे बाहो मे भर उसने उसे बिस्तर पे और उपर कर लिटाया & फिर उसके उपर लेट गया & उसकी रसीली चूचियो को चूस्ते हुए उसे चोदने लगा.दिव्या ने उसे बाहो मे भर लिया & उसकी पीठ पे उंगलिया चलाते हुए अपनी कमर हिलाके उस से चुदने लगी.प्रोफेसर के तपते होंठ उसके प्यारे चेहरे से लेके उसकी चूचियों तक घूम रहे थे & उसका लंड उसकी चूत की गहराई नापे जा रहा था.

इस बार प्रोफेसर भी अपनी महबूबा की बाहो मे झड़ने को तैय्यार था.दोनो प्रेमी 1 दूसरे से चिपके बस चुदाई किए जा रहे थे.प्रोफेसर का बड़ा लंड हर धक्के पे उसके जिस्म मे बिजली की नयी धारा छ्चोड़ देता था & अब वो बिल्कुल मदहोश हो गयी थी.इस बार जब उसकी चूत फिर से कसने लगी तो प्रोफेसोर ने भी अपना धीरज छ्चोड़ दिया & उसकी गर्दन पागलो की तरह चूमते हुए ज़ोर-2 से कमर हिलाने लगा.जिस्म की कसक अपने चरम पे पहुँचते ही दिव्या की कमर भी तेज़ी से हिलने लगी & वो उचक के प्रोफेसर के बाए कंधे को चूमने लगी.तभी दोनो की आहे 1 साथ निकल पड़ी क्यूकी दोनो 1 साथ अपने सफ़र के अंजाम तक पहुँच गये थे.

प्रोफेसर के गाढ़े वीर्य की गर्माहट चूत मे महसूस करते ही दिव्या बिस्तर पे निढाल हो गयी & प्रोफेसर उसके सीने पे.मस्ती का तूफान अब शांत था,अब बस सुकून था & थी बहुत सारी खुशी.

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इधर भी देखिए अपना अजीत भी मेघना के साथ लगा हुआ है

हॉल मे अंधेरा था & जो रोशनी थी वो चलते हुए टीवी से आ रही थी.सोफे पे बैठे अजीत की गोद मे उसके लंड को अपने अंदर लिए बैठी मेघना आहे भरती हुई उच्छल रही थी.खाना खाने के बाद टीवी देखते हुए कब जवा दिलो की प्यास उनपे हावी हुई & कब दोनो 1 दूसरे मे सामने लगे,इसका होश किसी को भी नही था.

अजीत अपने हाथो मे मेघना की जवान गंद को टोलते हुए उसके सीने को चूम रहा था.दिव्या के साथ सोने पे उसे लगा था कि अब उसे मेघना के साथ वो मज़ा,वो जोश महसूस नही होगा लेकिन वो ग़लत था.दिव्या के साथ दोबारा शुरू किए रिश्ते ने तो उसकी शादीशुदा ज़िंदगी को और रंगीन बना दिया था.कुच्छ दीनो पहले दिव्या के ना होने की कमी जो उसे खल रही थी,वो अब दूर हो चुकी थी & उसे मेघना के साथ दोगुना मज़ा आ रहा था.

"आहह.....!",अजीत मेघना को लिए-दिए खड़ा हो गया & उसे दीवार से सटाके ज़ोर-2 से धक्के लगाने लगा.चुदाई काफ़ी देर से चल रही थी & मेघना अब तक 2 बार झाड़ चुकी थी,"..हाईईइ..रामम्म्म....ऊफफफफ्फ़....आज..ईत्तत्त....!",झड़ती हुई मेघना उस से बिल्कुल चिपक गयी & अपना चेहरा उसके बाए कंधे पे टीका दिया.चंद धक्को के बाद अजीत ने भी उसकी चूत को अपने वीर्य से नहला दिया.पति-पत्नी 1 दूसरे के जिस्मो से चिपके 1 दूसरे को सहला रहे थे.इस तरह से गोद मे उठाके चोदने से तो मेघना को अपने पति की जिस्मानी ताक़त पे गुरूर हो आया.उसने आँखे खोली & नीचे देखा & उसकी भावे सिकुड गयी.

वो अजीत के कंधे पे सर रखे नीचे देख रही थी उसकी पीठ & गंद को.खिड़की से आती चाँद & स्ट्रेयेटलाइट की रोशनी मे उसने देखा कि अजीत की गंद पे नाख़ून के निशान थे....लेकिन मैने तो अजीत को वाहा पे पकड़ा ही नही..ना आज ना कल..फिर ये निशान?..अजीत का काम इतना जोखिम भरा है,कही चोट लग गयी होगी..या फिर ये निशान किसी और ने..शक़ का 1 छ्होटा सा बीज मेघना के ज़हन क़ी ज़मीन मे दब गया था,अब देखना था कि मेघना उसे पानी देती है या नही.

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--36

gataank se aage............

"bahut kaam hai fir waqt nahi milega karne ko to mushkil hogi.",vo kasmasayi lekin professor ka fauladi jism & har pal badhta lund uske vishwas ko diga rahe the.professor ne baye hath se uski kamar ko tham mazbuti se use khud se chipkaya hua tha & daye se uski zulfo ko uske khubsurat chehre se hata raha tha.

"sab ho jayega,pareshan kyu hoti ho.",uski ungliya uski thuddi ke neeche bahut halke-2 ghum rahi thi,"..raat ki khamoshi kitni achhi lag rahi hai.aise me 1 dusre me khone ke siwa koi aur kaam zaruri kaise ho sakta hai!",usne apna sar thoda dayi taraf jhukate hue divya ke gulabi hotho ko chumna shuru kar diya.divya ke hath uske seene pe lage hue the.kuchh der pehle vo professor ko dhakelne ki koshish kar rahe the magar jyu-2 professor ke hontho & zuban ki harkate aur sharir hoti gayi tyu-2 uske hath professor ke seene pe masti me ghumne lage.

professor ka daya hath uske baye kaan ke peechhe ghum raha tha & uske jism me bijli daudne lagi thi.usne professor ke seene ke balo ko halk se khinchte hue apne panjo pe uchak ke uski zuban ko apne munh se bahar dhakelte hue apni zuban uske munh me ghusa di.professor ne baya hath uski kamar se hatake samne kiya & gown ki belt khol use andar ghusa diya & 1 baar fir uski kamar ko lapte liya.uska hath uski maansal kamar ko dabate hue uski gand ki bayi fank ko bhi haule-2 daba raha tha.divya ne apne hath uski pith se laga diye & us se chipak gayi & apni bayi tang utha use professor ki dayi tang pe lumbai me chalane lagi.

chumte hue professor use peechhe bistar ki taraf le ja raha tha.uska baya hath abhi bhi divya ki gand ki fank ko daboche hue tha,"..oohhhhhh..!",professor ne hath ko gand pe firate hue 1 ungli divya ki anchhui gand ke chhed me daal di to vo chihunk ke kiss todte hue us se alag ho gayi lekin professor ne use apni or fir se khincha & uski gand ki chhed me fir se ungli ghusayi.divya pe fir se sharm ka daura pad gaya & uske gulabi gaal & surkh ho gaye.usne apne hatho se professor ke hath pakad unhe apne jism se alag kiya.uske hotho pe masti & haya bhari muskan thi.professor ki bebak nigaho ki tapish vo jhel nahi payi & palat ke apni pith uski taraf kar di.

professor ne apna taliya khola & hath aage badha divya ka gown uske kandho se sarka use bhi nangi kar diya.divya ke kandho pe hath rakh vo uske baal chumne laga to divya ne apna sar peechhe kar uske seene se laga diya & apne honth upar kar khol diye.professor ne uske hotho ka nyota kabula & 1 baar fir dono premi 1 dusre ke hotho ka swad chakhne lage.professor uski doodhiya chhatiyo ko daboche hue tha.divya ne gand ke upar uske garm lund ka dabav mehsus kiya to uske jism me jhurjhuri daud gayi & usne apne hath peechhe le jake professor ki ped ke tane sarikhi jangho ke bahri hisso ko sehlana shuru kar diya.

kafi der tak dono vaise hi khade 1 dusre ko chumte rahe fir professor ne apna daya hath neeche kar divya ki dayi tang ko uthake uske ghutne ko bistar ke upar tika diya fir us jangh pe apni 1 ungli firane laga.divya thoda aage ko jhuk gayi thi & apne daye kandhe ke upar se jhuke uske lab chumte professor ke balo ko apne daye hath se sehla rahi thi.kuchh der baad professor ne uske baye ghutne ko bhi bistar pe chadha diya & uske peechhe khada ho gaya.divya ne apni gand apni aediyo pe tika di & peechhe sar ghuma professor ko dekha.

professor ne uska sar aage ki or kar uske baalo ko aadha-2 kar dono kandho ke upar se aage kar diya.reshmi baalo ko hath me bhar jab unke sath usne uski moti chhatiyo ko dabaya to divya sihar uthi,uski chut me kasak si uthi jise usne chut ko sikod shant karne ki koshish ki magar natija ulat hua & uska jism & bhi garm ho gaya.professor ke honth uske kandho ko chumte hue uski choochiya masalta raha tab tak jab tak ki divya ne aahe bharte hue vaise hi ghutno pe baithe hue apni kamar hilana shuru kar diya.

professor ne uski chhatiya chhodi & apne dono hatho ki ungliyo ke poro ko uski gardan ke peechhe lagake uski reedh ki lumbai pe uski gand ki darar tak chalaya.divya ka jism ab puri tarah se masti me dub gaya tha.aankhe band kar vo halke se muskurati hui professor ki 1-1 harkat ka pura lutf utha rahi thi.professor uske kandho se leke uski gand tak uski pith & kamar ke 1-1 hisse pe apne hotho ki chhap chhod raha tha.divya ki gand ke upar ke dimples ko chumne ke baad vo vahi farsh pe apne panjo ke bal baith gaya & divya ki gand ki kas fanko ko tham unhe bahar ki or failaya.

"oonnnn..!",divya ne apna sar upar uthate hue apne hath apni komal jangho pe bechaini se chalate hue aah bhari to professor ne apni jibh ki nok uski chut se sata di.us ehsas se divya ki chut apneaap sikud gayi ,magar professor ki zuban ne use fir se khola & us se beh rahe ras ko chatne lagi.divya pagal ho gayi.uski aahe aur tez ho gayi.professor uski kamar thame uski chut bahut tezi se chat raha tha.divya ko apni chhatiya bahut hi kasi mehsus hui & unme halka sa dard mehsus hua to usne apne hatho se apni golaiya daboch li & unhe dabane lagi.

professor ki zuban chut ki lumbai pe ghum uske dane ko chhed rahi thi.divya kamar hilana chah rahi thi magar professor ne use mazbuti se tham rakha tha.professor ki shararati zuban ne divya ki chut me bahut udham machaya & divya ab masti me bilkul hosh kho chuki thi.bas kuchh hi palo ki baat thi & professor ki zuban use jhadwane wali thi ki tabhi professor ne jibh uski chut se sarka uske gand ke chhed pe laga use chheda & divya ye bardasht nahi kar payi & fauran jhad gayi.

divya nidhal ho aage girne ko thi lekin professor fauran uth khada hua & uske kandho ko pakad use seedha kiya & baye hath se uske daye kandhe ko tham daye se apne pyase lund ko pakad peechhe se ghutno ke bak,aediyo pe gand tikaye baithi divya ki ras bahati chut me ghusa diya.

"oowwww..!",divya ne fir peechhe sar jhatka,professor ne 1 baar hi me apna lund jud tak uski chut me utar diya tha & use dard mehsus hua tha.professor ne daye hath se uske chehre ko dayi taraf ghuma apni or kiya & baye se uski chut ke dane ko ragadta,use chumta hua peechhe se dhakke laga uski chudai karne laga.uska daya hath divya ke baye gaal se hota hua uski gardan & fir moti chhatiyo pe ghum raha tha.

professor ka mota lund uski chut ko faila raha tha & divya ko uske har dhakke pe alag tarah ka maza mehsus ho raha tha.divya ne badan kaman ki tarah mod liya & professor ka daya hath jo ab uski choochiyo ko dabane me laga hua tha,apne daye hath ko uske upar rakh diya & kamar hilati hui use chumti hui chudne lagi.uske badan me bahut sansani ho rahi thi & jab professor ne uski choochi ko daboch ke zor se chuma to vo itni masi seh na saki & uski giraft se nikal aage bistar pe jhuk gayi.professor ne samjha ki vo jhad gayi hai & dhakke lagana rok kar udki gori pith sehlane laga magar divya abhi jhadi nahi thi.

chudai rukne se vo bechain ho gayi & usne apni kamar aage-peechhe kar khud hi chudai shurur kar di.professor apni kamar pe dono hath tika ke khada ho gaya & uski harkato ka maza lene laga.divya ki moti gand jab peechhe ho uske bade ando se takrati & vo divya & uske jismo ke beech dab jate to unme 1 ajeeb sa meetha dard hota jiski lehar uske dil tak pahunchti & vo masti ki 1 aur seedhi chadh jata.

divya ki chut ab uske lund pe kas rahi thi,vo samajh gaya ki ab divya apni manzil ke karib hai.usne uski kamar thami & jawabi dhakke shurur kar diye.uske gehre dhakko ne divya ko bilkul madhosh kar diya.uski aaho se kamra gulzar ho gaya & vo bistar me munh chhupaye chadar ko apne bechain hatho se dabochate,masalte masti me doob gayi.professor ke dhakko ke asar se kuchh hi der me divya ki chut uske lund pe buri tarah kas gayi & agle hi pal vo subakne lagi & usne apna chehra pura bistar me dafn kar liya,vo jhad gayi thi.profesor badi mushkil se uski chut ki kasi giraft me qaid apne lund ko uska pani chhodne se roke hue tha.

thodi der baad jab divya ki subkiya ruki to usne uski pith pe hath firaya & uski dayi choochi ko pakad use apni or ghumate hue uski dayi karwat pe kar diya,uska lund abhi bhi uski chut me tha.divya ne sar dayi or ghuma upar kar apni nasili aankho se apne mehbub ko dekha jisne 1 baar fir apni kamar hila uski chudai shurur kar di thi.vo divya ki gand ko daboche khade hue uski tango ko sehlate hue use chod raha tha.

divya ne daya hath aage badha professor ke baya hath apni gand se utha tham apni ungliya uski ungliyo me fansa di.professor ka josh ab aasman chhu raha tha.thod der tak vo divya ka hath thame raha fir usen hath chhoda & uski dono tango ko 1 sath utha ke seedha kiya.ab divya seedhi leti thi.bistar ke kone pe uski gand tiki thi & professor ne uski dono tango ko faila ke hawa me uthaya hua tha & apni kamar hila ke har dhakke pe pura lund bahar nikal ke fir se uski chut me ghusa raha tha.

apni choochiyo ko apne hatho se dabati divya bistar pe chhatpata rahi thi.1 baar fir vo masti ke sagar ki sabse oonchi lehar pe savar thi.uska jism tharthara raha tha,professor ka lund uski kokh pe chot kar raha tha & vo bechaini me aahe bhar rahi thi.sar uthake vo professor ke bina jhanto ke lund ko apni nazuk chut ki cudai karte dekhne lagi & us nazare ne use aur madhosh kar diya.usne sar vapas bistar pe rakh diya & daye-baye hilaee hue apni chhatiya vaise hi dabati rahi.

"OUIIIIIII....!...HAIIIII......AHANNNNN....HANNNNNN....!",professor ne lund ko supade tak bahar khinch ke fir se vapas zor se andar thela to divya ki chut ke inch-2 se lund ne ragad khayi & vo maze se behal ho gayi & chikhne lagi.agle 3-4 dhakko ke baad vo fir se jhad gayi & aankhe band kar lumbi-2 sanse bharne lagi.professor ne uski bayi tang ko mod uski dayi tang se sata apne jism ke bayi or kiya & uske upar jhuk gaya.

jhadne ke baad divya ka chehra aur bhi haseen lag raha tha.pura chehra aise laal ho raha tha jaise andar koi aag jal rahi ho.uski aankhe band thi & hotho pe sukun bhari bahut hi halki muskan.professor uske upar jhuke uske husn ko niahre ja raha tha....kaisi kashish thi is chehre me!..vo deewana ho gaya tha is ladki ka..magar kya keval uske husn ki vajah se..uski dilkas adao ki vajah se ya fir uski garmjoshi bhari chudai ki vajah se?..nahi......usne use uska beeta kal yaad dilaya tha jo aaj se bahut zyada haseen tha.....us kal me jisme....

tabhi divya ne aankhe kholi & professor ki aankho me jhanka.....vaha chahat thi,uski tarif thi,dher sa pyar tha,jism ki pyas thi magar sath-2 1 tadap bhi thi.professor ne 1 baar fir uski chudai shuru kar di.tang pe tang chadhi hone ki vajah se uski chut aur kas gayi thi & dono hi ka maza aur badh gaya tha.professor ne daye hath se uske chehre ko sehlate hue anguthe ko uske rasile hontho pe chalaya to divya ne use kaat liya lekin professor ne use vapas nahi khincha balki uske munh me hi rehne diya.divya uske anguthe ko chusne lagi to professor ne dusre haths e uske gulabi,kade nipples ko chhedna shuru kar diya.

divya ko bahut maza aa raha tha magar vo professor ke jism ka pura lutf uthana chahti thi.usne unke seene pe hath rakh use upar uthaya & apni tange 1 baar fir faila di.professor uski hasrat samajh gaya & use baaho me bhar usne use bistar pe aur upar kar litaya & fir uske uapr let agay & uski rasili chhatiyo ko chuste hue use chodne laga.divya ne use baaho me bhar liya & uski pith pe ungliya chalate hue apni kamar hilake us se chudne lagi.professor ke tapte honth uske pyare chehre se leke uski chhatiyo tak ghum rahe the & uska lund uski chut ki gehrayi naape ja raha tha.

is baar professor bhi apni mehbooba ki baaho me jhadne ko taiyyar tha.dono premi 1 dusre se chipke bas chudai kiye ja rahe the.professor ka bada lund har dhakke pe uske jism me bijli ki nayi dhara chhod deta tha & ab vo bilkul madhosh ho gayi thi.is baar jab uski chut fir se kasne lagi to profesor ne bhi apna dhiraj chhod diya & uski gardan paglo ki tarah chumte hue zor-2 se kamar hilane laga.jism ki kasak apne charam pe pahunchte hi divya ki kamar bhi tezi se hilne lagi & vo uchak ke professor ke baye kandhe ko chumne lagi.tabhi dono ki aahe 1 sath nikal padi kyuki dono 1 sath apne safar ke anjam tak pahunch gaye the.

professor ke gadhe virya ki garmahat chut me mehsus karte hi divya bistar pe nidhal ho gayi & professor uske seene pe.masti ka toofan ab shant tha,ab bas sukun tha & thi bahut sari khushi.

Hall me andhera tha & jo roshni thi vo chalte hue tv se aa rahi thi.sofe pe baithe Ajit ki god me uske lund ko apne andar liye baithi Meghna aahe bharti hui uchhal rahi thi.khana khane ke bad tv dekhte hue kab jawa dilo ki pyas unpe havi hui & kab dono 1 dusre me samane lage,iska hosh kisi ko bhi nahi tha.

ajit apne hatho me meghna ki jawan gand ko tolte hue uske seene ko chum raha tha.divya ke sath sone pe use laga tha ki ab use meghna ke sath vo maza,vo josh mehsus nahi hoga lekin vo galat tha.divya ke sath dobara shuru kiye rishte ne to uski shadishuda zindagi ko aur rangeen bana diya tha.kuchh dino pehle divya ke na hone ki kami jo use khal rahi thi,vo ab door ho chuki thi & use meghna ke sath doguna maza aa raha tha.

"aahhhh.....!",ajit meghna ko liye-diye khada ho gaya & use deewar se satake zor-2 se dhake lagane laga.chudai kafi der se chal rahi thi & meghna ab tak 2 bar jhad chuki thi,"..haiiii..raammmm....oofffff....aj..iiitttt....!",jhadti hui meghna us se bilkul chipak gayi & apna chehra uske baye kandhe pe tika diya.chand dhakko ke baad ajit ne bhi uski chut ko apne virya se nehla diya.pati-patni 1 dusre ke jismo se chipke 1 dusre ko sehla rahe the.is tarah se god me uthake chodne se to meghna ko apne pati ki jismani taqat pe gurur ho aaya.usne aankhe kholi & neeche dekha & uski bhave sikud gayi.

vo ajit ke kandhe pe sar rakhe neeche dekh rahe thi uski pith & gand ko.khidki se ati chand & streetlight ki roshni me usne dekha ki ajit ki gand pe nakhun ke nishan the....lekin maine to ajit ko vaha pe pakda hi nahi..na aaj na kal..fir ye nishan?..ajit ka kaam itna jokhim bhara hai,kahi chot lag gayi hogi..ya fir ye nishan kisi aur ne..shaq ka 1 chhota sa beej meghna ke zehan ki zamin me dab gaya tha,ab dekhna tha ki meghna use pani deti hai ya nahi.

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--37

गतान्क से आगे............-

प्रोफेसर दीक्षित दिव्या के बदन से उठ घुटनो पे बैठ गया.सिकुड़ने के बावजूद उसका लंड इतना बड़ा था कि आराम से उसकी महबूबा की गुलाबी चूत के अंदर पड़ा था.दिव्या ने देखा तो उसे प्रोफेसर की आँखो मे फिर वही प्यरा,चाहत & तड़प दिखी.उसने अपनी बाहे आगे कर प्रोफेसर की मज़बूत बाहें थामी & उनका सहारा ले उठ बैठी.प्रोफेसर ने अपने घुटने थोड़े फैलाए ताकि लंड चूत के अंदर ही रहे & दिव्या भी आराम से बिस्तर पे उसके सामने बैठ जाए.दिव्या ने अपने घुटने मोड़ तलवे प्रोफेसर के जिस्म के दोनो ओर बिस्तर पे जमाए & उसके चेहरे को हाथो मे भर लिया.

"क्या जादू कर दिया है तुमने मुझपे,दिव्या?",प्रोफेसोर ने उसकी दाई हथेली चूम ली,"ऐसी दीवानगी,ऐसी शिद्दत भरी चाहत तो मैने पहले कभी महसूस नही की!"

"सच,कभी नही?",दिव्या ने उसकी आँखो मे बड़ी गहरी निगाहो से देखा तो प्रोफेसर ने आँखे मूंद ली & उसकी हथेली को होंठो से सटा लिया.

"1 लड़की थी..",प्रोफेसर ने आँखे खोल दिव्या को देखा जिसे वाहा अब फिर से तड़प नज़र आई.उसने झट से अपने हाथ उसके होंठो पे रख दिए.

"ना!",दिव्या ने उसके दाए गाल को चूमा,"..बहुत दर्द हुआ था ना तुम्हे?",प्रोफेसर ने आँखे मींच ली & हा मे सर हिलाया.

"कभी भूले नही तुम वो गम बस उसके उपर हँसी-मज़ाक की चादर डाल ली.....1 लड़की से दूसरी..दूसरी से तीसरी..तुम उसी की तलाश मे घूमते रहे.है ना?",प्रोफेसर ने आँखे खोली जो हल्की सी नम थी.

"दिव्या..",उसकी आवाज़ और भारी हो गयी थी,".तुम्हे कैसे पता?"

"दिल से दिल को राह होती है,अजिंक्या.",उसने अपना बाया हाथ उसके दिल पे & उसका दाया हाथ अपने सीने पे रखा,"..मैं वो लड़की नही लेकिन अगर मेरे साथ से तुम्हारा गम दूर होता है,तुम्हे खुशी मिलती है तो मैं तुम्हारी तुम्हारी बाहो मे पड़ी रहूंगी."

"ओह..दिव्या!",प्रोफेसर ने उसे बाहो मे भरा तो दिव्या ने भी अपनी बाहे उसके गले मे डाल दी,"..लेकिन तुम तो अभी जवान हो..सारी उम्र पड़ी है तुम्हारे सामने..फिर मैं किसी को बंधन मे बाँधने मे विश्वास नही करता."

"प्रोफेसर अजिंक्या दीक्षित..",दिव्या ने प्यार से उसके दोनो कान खींचे,"..जैसे तुम हो वैसी ही मैं भी हू.तुम्हारे साथ मुझे सबसे ज़्यादा अच्छा लगता है & तुमने भी इसी बात का इकरार किया है लेकिन अगर तुम किसी और से भी मिलो तो मुझे ऐतराज़ नही.मान लो,मैं कहु की तुम सिर्फ़ मेरे होके रहो & कल को तुम्हे कोई लड़की मुझसे भी ज़्यादा अच्छी लगे तो तुम क्या करोगे?..मुझसे च्छुपके उस से मिलोगे & फिर क्या होगा..मुझे पता चलेगा..हम झगदेंगे..अलग होंगे & 1 नया दर्द पाल लेंगे.",प्रोफेसर अचरज से उसे देख रहा था.

"..इस से अच्छा है कि हम दोनो 1 दूसरे को आज़ाद रखें.हम साथ खुश है ना?",प्रोफेसर ने हां मे सर हिलाया,"..तो फिर इस खुशी को खुद से डोर क्यू करें?वैसे भी हम दोनो जानते हैं कि हम औरो के साथ भी वक़्त गुज़ार ले फिर भी जो नशा,जो मादहोशी हमे 1 दूसरे की बाँहो मे महसूस होते हैं वो कही और नही हो सकते....ये खूबसूरत जिस्म..",दिव्या ने उसके चौड़े कंधो पे उंगलिया फिराई,"..मुझे भी बहुत पसंद है..& इस जिस्म के मालिक की शख्सियत की तो मैं दीवानी हो गयी हू."

"दिव्या मेरी जान..!",प्रोफेसर ने अपने होंठ अपनी महबुआ के होंठो से सटा दिया तो उसने भी उसे बाहो मे और कस लिया.दोनो के नाज़ुक अंग 1 बार फिर जाग उठे थे & दोनो फिर से मस्ताने सफ़र पे निकल पड़े थे.

जब प्रोफेसर दीक्षित & दिव्या शाम को 8 बजे क्लब नीयान मे दाखिल हो रहे थे ठीक उसी वक़्त डेवाले ईस्ट से लोक विकास पार्टी का उमीड़वार रघु कुम्भात उर्फ बाबा बलदेव काबरा उर्फ भाय्या जी के साथ चुनाव प्रचार कर रहा था.1 ट्रक के उपर दोनो खड़े थे जोकि बहुत भीड़ भरे इलाक़े से गुज़र रहा था.लोग बाबा के नाम के नारे लगा रहे थे.

हर गुंडे की तरह बाबा को भी जैल & मौत का ख़ौफ़ था.जैल की सैर तो उसने कयि बार की थी मगर नेताओ & अफसरो से नज़दीकियो ने अब उसे इस परेशानी से थोड़ा सुकून दिलाया था मगर मौत का ख़ौफ़ तो बरकरार था.उसके दुश्मन अगर हमला कर देते तो क्या होता?इसी कारण उसने अपनी हवेली के आसपास के काफ़ी बड़े इलाक़े के लोगो की मदद करना शुरू किया.उस इलाक़े मे परेशानी होने पे सभी बाबा का दरवाज़ा ही खखटाते थे & अंजाने मे उसकी चौकीदारी का काम करते थे.

ये लोग रघु के चुनाव मे खड़े होने से बहुत खुश थे & सभी जानते थे कि यहा से लोक विकास की जीत पक्की है.भाय्या जी को कयि सवालो का सामना करना पड़ा था,जहा भी कोई पत्रकार मिलता उनसे इसी बारे मे पुछ्ता कि 1 गुंडे को उन्होने चुनाव का टिकेट क्यू दिया मगर भाय्या जी हर सवाल से कन्नी काट जाते.

ट्रक धीरे-2 लोगो की भीड़ चीरता आगे बढ़ रहा था,"रंजीता नही आई?",भाय्या जी हाथ जोड़े लोगो को देख मुस्कुरा रहे थे.

"मैने ही उसे नही आने को बोला फिर लोग उस से सवाल करेंगे तो वो गरम खोपड़ी कही किसी का भेजा ना उड़ा दे!",दोनो हँसने लगे.

"रघु,काम कब हो रहा है?"

"20 तारीख की शाम को.बेफ़िक्र रहो,सब ठीक से होगा."

"हूँ.",ट्रक वैसे ही आगे बढ़ता रहा.

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ऐसा ही कुच्छ नज़ारा बद्डल की गलियो मे भी था जहा मुकुल अपने चुनाव के लिए प्रचार कर रहा था.सवेरे से ही वो आज इलाक़े के दौरे पे था,दिन मे तो नीना उसके साथ थी & महेश अरोरा भी मगर इस वक़्त नीना थकान का बहाना कर वाहा के उनके मकान मे रुक गयी थी.ये मकान मुकुल ने फॅक्टरी बनाते वक़्त ही खरीदा था ताकि कभी ज़रूरत पड़े तो रुकने का 1 ठिकाना हो.महेश भी कही नज़र नही आ रहा था.

"ऊहह..जल्दी से करो..कही वो आ ना जाए.....आहह..जुंगली!",नीना सारी कमर तक उठाए 1 शेल्फ पे बैठी थी & महेश उसकी टाँगो के बीच खड़ा उसकी चूत मे लंड घुसा के धक्के लगा रहा था.नीना की बात सुन उसने उसके खुले ब्लाउस & उपर किए ब्रा मे से निकली चूचियो पे सजे शहद के रंग के बाए निपल को काट लिया था.

"उस काम का क्या हुआ?",नीना उसकी कमर थामे उसकी चुदाई झेल रही थी.

"1 आदमी मिल गया है जोकि काम कर देगा.",महेश अब उसके निपल पे जीभ फिरा रहा था.

"कौन है वो?",नीना उसकी नंगी गंद को ज़ोरो से दबा रही थी.

"हीरा..मेरी फॅक्टरी मे काम करता है.भरोसे का आदमी है.आज ड्राइवर बीमार पड़ गया तो मुकुल की कार वही तो चला रहा था."

"हूँ..",नीना ने उसके सर को अपने सीने पे दबाया & उसकी चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगी.

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"तुम्हारी & अंजलि प्रधान की दोस्ती कहा तक पहुँची?",राम्या बिस्तर पे अपने घुटनो & हाथो पे थी & भाय्या जी पीछे से अपने घुटनो पे खड़े हो उसकी चूत मे अपना लंड घुसा रहे थे.

"उउम्म्म्मम.....बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी है.लोग बाते कर रहे हैं कि आख़िर ऐसा मुमकिन कैसे हुआ.....ऊव्वववव.....1 दूसरे के घर आना-जाना भी शुरू हो गया है हमारा...आईयइईई...हाआंन्‍णणन्.....!",राम्या अपने दाए हाथ को नीचे ले जाके अपने दाने को रगड़ते हुए अपने नेता से चुद रही थी.

"बहुत बढ़िया काम किया है तुमने..तड़क....!",भाय्या जी ने दाए हाथ से उसकी गंद की गोरी,दाई फाँक पे ज़ोर का थप्पड़ लगाया.

"ओईई...हाईईइ...तड़प...तड़प...तडप्प....तडप्प्प्प....!",राम्या की आहें भाय्या जी की चुदाई & उनके थप्पड़ सब तेज़ होते जा रहे थे.

"ध्यान रहे कि कुच्छ भी हो जाए आने वाली 20 तारीख को तुम उस से नही मिलॉगी.",भाय्या जी उसकी लाल हो चुकी गंद को मसल रहे थे.

"क्यू?....आआहह..!",राम्या की उंगली बहुत तेज़ी से उसके दाने को रगड़ रही थी.

"जैसा कह रहा हू वैसा करो..समझी...!",भाय्या जी आगे झुके & उसके दाए कान को काट लिया,"..अब ये बताओ कि इस वक़्त तुम्हारा पति क्या कर रहा होगा?",वो उसके उपर झुके उसके कान मे जीभ चलाते हुए उसे चोद रहे थे.

"अपना पिल्लू जैसा लंड पकड़ के मेरी याद मे बैठा होगा!",राम्या के जवाब ने उन्हे खुश कर दिया & दोनो अपनी-2 हवस मे और डूब गये.

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"मुकुल,मुझे अब वापस डेवाले जाना है.",मुकुल वापस आ गया था & महेश & कुच्छ और लोगो के साथ खाना खा रहा था.

"नीना,ड्राइवर आज आया नही & मुझे तो रात को रुकना है & महेश को भी वरना ये तुम्हे छ्चोड़ आते."

"तो आज गाड़ी कौन चला रहा था?",जवाब मे मुकुल ने महेश की ओर देखा.

"मेरा आदमी है,भाभी."

"तो उसे ही कह दीजिए,प्लीज़ की मुझे घर छ्चोड़ दे क्यूकी श्लोक को मैं नौकरो के भरोसे पे रात को नही छोड़ सकती."

"लेकिन..",महेश थोड़ा हिचकिचाया.

"प्लीज़."

"ओके..हीरा!",महेश ने उसे आवाज़ दी.

थोड़ी ही देर बाद गाड़ी डेवाले की ओर भागी जा रही थी.

"तुम्हारा नाम हीरा है ना?",नीना ने पीछे की सीट से पुचछा.

"जी."

"तुम्हे महेश जी ने 1 बहुत ज़रूरी काम सौंपा है ना.",हीरा के पाँव ब्रेक पे लग गये & नीना आगे की सीट से टकराते-2 बची.

"क्या हुआ?चौंक क्यू गये?",हीरा पीछे देख रहा था,"..दरअसल इस काम मे जितना फयडा महेश का है उतना ही मेरा भी है & तुम्हारा भी हो सकता है.महेश तो तुम्हे पैसे दे ही रहा है मैं भी दूँगी,तुम्हे बस इतना करना होगा कि कुच्छ भी होने के बाद सबसे पहले मुझे बताओगे & करने के पहले मुझसे पुछोगे लेकिन इसकी भनक महेश को नही लगना चाहिए."

"इस बात की का गारंटी है कि आप अपनी कही बात से नही मुकरेंगी?"

"इस बात की क्या गॅरेंटी है कि महेश काम होने के बाद तुम्हे रास्ते से नही हटाएगा?",हीरा खामोश हो गया & थोड़ा परेशान दिखने लगा.

"देखो,मेरे साथ रहोगे तो फ़ायदे मे रहोगे क्यूकी मुझे भी महेश के राज़ पता हैं & वो मुझे नुकसान नही पहुँचा सकता फिर अगर उसने तुम्हे रास्ते से हटाने की कोशिश कि तो मैं तुम्हे आगाह कर दूँगी."

"मेमसाहब,मुझपे ऐसी मेहेरबानी क्यू?"

"क्यूकी मुझे भी महेश पे पूरा भरोसा नही."

"& मुझपे है?",हीरा हंसा.

"हां,क्यूकी तुम्हे बस पैसो से मतलब है & वो मैं तुम्हे दूँगी."

"मुझे पैसो के अलावा कुच्छ और भी चाहिए.",उसने नीना के सीने की ओर देखा.नीना को गुस्सा तो बहुत आया मगर और कोई चारा नही था,बहुत ज़रूरी था कि हीरा उसकी मुट्ठी मे रहे.

"क्या?",उसने अंजान बनते हुए पुचछा.

"इतनी भी भोली मत बानिए.आप अच्छी तरह से मेरा मतलब समझ रही हैं."

"नही,मैं नई समझ रही."

"ठीक है.मैं आपके साथ काम करूँगा मगर मुझे पैसो के साथ आपका बदन भी चाहिए."

"पागल मत बनो."

"ठीक है.तो काम भूल जाइए.",उसने कार दोबारा स्टार्ट की & आगे बढ़ा दी.पूरे रास्ते दोनो खामोश रहे.फ़ौरन बात मान लेना हीरा को शक़ मे डाल सकता था.नीना जान बुझ के वक़्त लगा रही थी ताकि उसे पूरा यकीन हो जाए कि वो पशोपेश मे पड़ी है & समझ नही पा रही कि क्या करे.

कार उसके घर पहुँच चुकी थी.नीना कार से उतरी & बिना हीरा की ओर देखे आगे बढ़ गयी फिर रुकी & बिना मुड़े बोली,"तुम आज रात यही रुक जाओ.",& तेज़ी से घर मे दाखिल हो गयी.उसे बुरा तो लग रहा था..1 इंसान जिसकी औकात नही थी कि वो उसके पाँव की धूल भी च्छुए,वो

उसके जिस्म से खेलेगा लेकिन हालात ही कुच्छ ऐसे थे कि उसे ये करना पड़ रहा था.

हीरा गाड़ी मे ही सो गया था & नीना अपने कमरे मे श्लोक के साथ.उसने तय कर लिया था कि उसे इस इंसान से कैसे निबटना है,वो उसे अपना जिस्म सौंपेगी लेकिन कुच्छ इस तरह से कि वो उसका दीवाना हो जाए.रात के 12.30 बजे जब श्लोक गहरी नींद मे था तो नीना दबे पाँव उठी & नीचे आई.उसने घर का दरवाज़ा खोला तो थोड़ी देर बाद हीरा कार से उतर के उसके सामने खड़ा था.वो जागता हुआ उसकी राह देख रहा था.

उसके अंदर आने पे नीना ने दरवाज़ा बंद किया & निचली मंज़िल के 1 कमरे मे आ गयी.उसके पीछे-2 हीरा भी अंदर आ गया & दरवाज़ा बंद कर दिया.कुच्छ पल दोनो यू ही खामोश रहे.नीना हीरा की ओर पीठ किए खड़ी थी,वो चाहती थी कि उसे पूरा यकीन हो जाए कि वो इस वक़्त मजबूरी मे उसका साथ दे रही है.

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--37

gataank se aage............-

Professor Dixit divya ke badan se uth ghutno pe baith gaya.sikudne ke bavjood uska lund itna bada tha ki aaram se uski mehbuba ki gulabi chut ke andar pada tha.divya ne dekha to use professor ki aankho me fir vahi pyra,chahat & tadap dikhi.usne apni baahe aage kar professor ki mazbut baahen thami & unka sahara le uth baithi.professor ne apne ghutne thode failaye taki lund chut ke andar hi rahe & divya bhi aaram se bistar pe uske samne baith jaye.divya ne apne ghutne mod talve professor ke jism ke dono or bistar pe jamaye & uske chehre ko hatho me bhar liya.

"kya jadu kar diya hai tumne mujhpe,divya?",profesor ne uski dayi hatheli chum li,"aisi deewangi,aisi shiddat bhari chahat to maine pehle kabhi mehsus nahi ki!"

"sach,kabhi nahi?",divya ne uski aankho me badi gehri nigaho se dekha to professor ne aankhe mund li & uski hatheli ko hotho se sata liya.

"1 ladki thi..",professor ne aankhe khol divya ko dekha jise vaha ab fir se tadap nazar aayi.usne jhats e apne hath uske hotho pe rakh diye.

"na!",divya ne uske daye gaal ko chuma,"..bahut dard hua tha na tumhe?",professor ne ankhe meench li & haa me sar hilaya.

"kabhi bhule nahi tum vo ghum bas uske upar hansi-mazak ki chadar daal li.....1 ladki se dusri..dusri se teesri..tum usi ki talash me ghumte rahe.hai na?",professor ne ankhe kholi jo halki si nam thi.

"divya..",uski aavaz aur bhari ho gayi thi,".tumhe kaise pata?"

"dil se dil ko raah hoti hai,Ajinkya.",usne apna baya hath uske dil pe & uska daya hath apne seene pe rakha,"..main vo ladki nahi lekin agar mere sath se tumhara ghum door hota hai,tumhe khushi milti hai to main taumra tumhari baaho me padi rahungi."

"oh..divya!",professor ne use baho me bhara to divya ne bhi apni baahe uske gale me daal di,"..lekin tum to abhi jawan ho..sari umra padi hai tumhare samne..fir main kisi ko bandhan me baandhne me vishwas nahi karta."

"professor ajinkya dixit..",divya ne pyar se uske dono kaan khinche,"..jaise tum ho vaisi hi main bhi hu.tumhare sath mujhe sabse zyada achha lagta hai & tumne bhi isi bat ka ikrar kiya hai lekin agar tum kisi aur se bhi milo to mujhe aitraz nahi.maan lo,main kahu ki tum sirf mere hoke raho & kal ko tumhe koi ladki mujhse bhi zyada achhi lage to tum kya karoge?..mujhse chhupke us se miloge & fir kya hoga..mujhe pata chalega..hum jhagdenge..alag honge & 1 naya dard paal lenge.",professor achraj se use dekh raha tha.

"..is se achha hai ki hum dono 1 dusre ko azad rakhen.hum sath khush hai na?",professor ne haan me sar hilaya,"..to fir is khushi ko khud se door kyu karen?vaise bhi hum dono jante hain ki hum auro ke sath bhi waqt guzar le fir bhi jo nasha,jo maadhoshi hume 1 dusre ki baho me mehsus hote hain vo kahi aur nahi ho sakte....ye khubsurat jism..",divya ne uske chuade kandho pe ungliya firayi,"..mujhe bhi bahut pasand hai..& is jism ke malik ki shakhsiyat ki to main deewani ho gayi hu."

"divya meri jaan..!",professor ne apne honth apni mehbua ke hotho se sata diya to usne bhi use baho me aur kas liya.dono ke nazuk ang 1 bar fir jaag uthe the & dono fir se mastane safar pe nikal pade the.

Jab Professor Dixit & Divya sham ko 8 baje Club Neon me dakhil ho rahe the thik usi waqt Devalay East se Lok Vikas Party ka umeedvar Raghu Kumbhat urf Baba Baldev Kabra urf Bhaiyya ji ke sath chunav prachar kar raha tha.1 truck ke upar dono khade the joki bahut bheed bhare ilake se guzar raha tha.log baba ke naam ke nare laga rahe the.

har gunde ki tarah baba ko bhi jail & maut ka khauf tha.jail ki sair to usne kayi baar ki thi magar netao & afsaro se nazdikiyo ne ab use is pareshani se thoda sukun dilaya tha magar maut ka khauf to barkarar tha.uske dushman agar humla kar dete to kya hota?isi karan usne apni haweli ke aaspaas ke kafi bade ilake ke logo ki madad karna shuru kiya.us ilake me pareshani hone pe sabhi baba ka darwaza hi khakhatate the & anjane me uski chaukidari ka kaam karte the.

ye log raghu ke chunav me kahde hone se bahut khush the & sabhi jante the ki yaha se lok vikas ki jeet pakki hai.bhaiyya ji ko kayi sawalo ka samna karna pada tha,jaha bhi koi patrakar milta unse isi baare me puchhta ki 1 gunde ko unhone chunav ka ticket kyu diya magar bhaiyya ji har sawal se kanni kaat jate.

truck dhire-2 logo ki bheed cheerta aage badh raha tha,"Ranjita nahi aayi?",bhaiyya ji hath jode logo ko dekh muskura rahe the.

"maine hi use nahi aane ko bola fir log us se sawal karenge to vo garam khopdi kahi kisi ka bheja na uda de!",dono hansne lage.

"raghu,kaam kab ho raha hai?"

"20 tarikh ki sham ko.befikr raho,sab thik se hoga."

"hun.",truck vaise hi aage badhta raha.

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aisa hi kuchh nazara Baddal ki galiyo me bhi tha jaha Mukul apne chunav ke liye prachar kar raha tha.savere se hi vo aaj ilake ke daure pe tha,din me to nina uske sath thi & Mahesh Arora bhi magar is waqt nina thakan ka bahana kar vaha ke unke makan me ruk gayi thi.ye maka mukul ne factory banate waqt hi kharida tha taki kabhi zarurat pade to rukne ka 1 thikana ho.mahesh bhi kahi nazar nahi aa raha tha.

"oohhhhh..jaldi se karo..kahi vo aa na jaye.....aahhhhh..jungli!",nina sari kamar tak uthaye 1 shelf pe baithi thi & mahesh uski tango ke beech khada uski chut me lund ghusa ke dhakke laga raha tha.nina ki baat sun usne uske khule blouse & upar kiye bra me se nikli chhatiyo pe saje shehad ke rang ke baye nipple ko kaat liya tha.

"us kaam ka kya hua?",nina uski kamar thame uski chudai jhel rahi thi.

"1 aadmi mil gaya hai joki kaam kar dega.",mahesh ab uske nipple pe jibh fira raha tha.

"kaun hai vo?",nina uski nangi gand ko zoro se daba rahi thi.

"Hira..meri factory me kaam karta hai.bharose ka aadmi hai.aaj driver bimar pad gaya to mukul ki car vahi to chala raha tha."

"hun..",nina ne uske sar ko apne seene pe dabaya & uski chudai ka lutf uthane lagi.

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"tumhari & Anjali pradhan ki dosti kaha tak pahunchi?",Ramya bistar pe apne ghutno & hatho pe thi & bhaiyya ji peechhe se apne ghutno pe kahde ho uski chut me apna lund ghusa rahe the.

"uummmmm.....bahut achhi dosti ho gayi hai.log baate kar rahe hain ki aakhir aisa mumkin kaise hua.....oowwwww.....1 dusre ke ghar aana-jana bhi shuru ho gaya hai humara...aaiyyeeeeee...haaannnnn.....!",ramya apne daye hath ko neeche le jake apne dane ko ragadte hue apne neta se chud rahi thi.

"bahut badhiya kaam kiya hai tumne..tadak....!",bhaiyya ji ne daye hath se uski gand ki gori,dayi fank pe zor ka thappad lagaya.

"ouiiiii...haiiii...tadap...tadap...tadapp....tadapppp....!",ramya ki aahen bhaiyya ji ki chudai & unke thappad sab tez hote ja rahe the.

"dhyan rahe ki kuchh bhi ho jae aane wali 20 tarikh ko tum us se nahi milogi.",bhaiyya ji uski laal ho chuki gand ko masal rahe the.

"kyu?....aaaahhhhhhh..!",ramya ki ungli bahut tezi se uske dane ko ragad rahi thi.

"jaisa keh raha hu vaisa karo..samjhi...!",bhaiyya ji aage jhuke & uske daye kaan ko kaat liya,"..ab ye batao ki is waqt tumhara pati kya kar raha hoga?",vo uske upar jhuke uske kaan me jibh chalate hue use chod rahe the.

"apna pillu jaisa lund pakad ke meri yaad me baitha hoga!",ramya ke jawab ne unhe khush kar diya & dono apni-2 hawas me aur doob gaye.

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"mukul,mujhe ab vapas devalay jana hai.",mukul vapas aa gaya tha & mahesh & kuchh aur logo ke sath khana kha raha tha.

"nina,driver aaj aya nahi & mujhe to raat ko rukna hai & mahesh ko bhi varna ye tumhe chhod aate."

"to aaj gadi kaun chala raha tha?",jawab me mukul ne mahesh ki or dekha.

"mera aadmi hai,bhabhi."

"to use hi keh dijiye,please ki mujhe ghar chhod de kyuki Shlok ko main naukro ke bharose pe raat ko nahi chod sakti."

"lekin..",mahesh thoda hichkichaya.

"please."

"ok..hira!",mahesh ne use aavaz di.

thodi hi der baad gadi devalay ki or bhagi ja rahi thi.

"tumhara naam hira hai na?",nina ne peechhe ki seat se puchha.

"ji."

"tumhe mahesh ji ne 1 bahut zaruri kaa saunpa hai na.",hira ke panv brake pe lag gaye & nina aage ki seat se takrate-2 bachi.

"kya hua?chaunk kyu gaye?",hira peechhe dekh raha tha,"..darasal is kaam me jitna fayda mahesh ka hai utna hi mera bhi hai & tumhara bhi ho sakta hai.mahesh to tumhe paise de hi raha hai main bhi dungi,tumhe bas itna karna hoga ki kuchh bhi hone ke baad sabse pehle mujhe bataoge & karne ke pehle mujhse puchhoge lekin iski bhanak mahesh ko nahi lagna chahiye."

"is baat ki ka guararntee hai ki aap apni kahi baat se nahi mukrengi?"

"is baat ki kya guarantee hai ki mahesh kaam hone ke baad tumhe raste se nahi hatayega?",hira khamosh ho gaya & uthoda pareshan dikhne laga.

"dekho,mere sath rahoge to fayde me rahoge kyuki mujhe bhi mahesh ke raaz pata hain & vo mujhe nuksan nahi pahuncha sakta fir agar usne tumhe raste se hatane ki koshish ki to main tumhe aagah kar dungi."

"memsahab,mujhpe aisi meherbani kyu?"

"kyuki mujhe bhi mahesh pe pura bharosa nahi."

"& mujhpe hai?",hira hansa.

"haan,kyuki tumhe bas paiso se matlab hai & vo main tumhe dungi."

"mujhe paiso ke alawa kuchh aur bhi chahiye.",usne nina ke seene ki or dekha.nina ko gussa to bahut aaya magar aur koi chara nahi tha,bahut zaruri tha ki hira uski mutthi me rahe.

"kya?",usne anjan bante hue puchha.

"itni bhi bholi mat baniye.aap achhi tarah se mera matlab samajh rahi hain."

"nahi,main nai samajh rahi."

"thik hai.main aapke sath kaam karunga magar mujhe paiso ke sath aapka badan bhi chahiye."

"pagal mat bano."

"thik hai.to kaam bhil jaiye.",usne car dobara start ki & aage badha di.pure raste dono khamosh rahe.fauran baat maan lena hira ko shaq me daal sakta tha.nina jaan bujh ke waqt laga rahi thi taki use pura yakin ho jaye ki vo pashopesh me padi hai & samajh nahi pa rahi ki kya kare.

car uske ghar pahunch chuki thi.nina car se utri & bina hira ki or dekhe aage badh gayi fir ruki & bina mude boli,"tum aaj raat yahi ruk jao.",& tezi se ghar me dakhil ho gayi.use bura to lag raha tha..1 insan jiski aukat nahi thi ki vo uske panv ki dhul bhi chhue,vo

uske jism se khelega lekin halaat hi kuchh aise the ki use ye karna pad raha tha.

hira gadi me hi so gaya tha & nina apne kamre me shlok ke sath.usne tay kar liya tha ki use is insan se kaise nibatna hai,vo use apna jism saunpegi lekin kuchh is tarah se ki vo uska deewana ho jaye.raat ke 12.30 baje jab shlok gehri nind me tha to nina dabe panv uthi & neeche aayi.usne ghar ka darwaza khola to thodi der baad hira car se utar ke uske samne khada tha.vo jaagta hua uski raah dekh raha tha.

uske andar aane pe nina ne darwaza band kiya & nechli manzil ke 1 kamre me aa gayi.uske peechhe-2 hira bhi andar aa gaya & darwaza band kar diya.kuchh pal dono yu hi khamosh rahe.nina hira ki or pith kiye khadi thi,vo chahti thi ki use pura yakin ho jaye ki vo is waqt majoboori me uska sath de rahi hai.

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--38

गेंक से आगे............-

दरअसल थोड़ी देर पहले महेश ने चुदाई ख़त्म होने के बाद 1 बात कही थी जिसके चलते वो इस गलिज़ इंसान को अपना जिस्म सौंपने को मजबूर हो गयी थी.जब नीना ने पुछा कि काम हो जाने के बाद अगर हीरा ने उन्हे ब्लॅकमेल करने की कोशिश की तो वो क्या करेगा तो महेश ने बिना हिचके कहा कि वो पहले ही सोच चुका है कि काम ख़त्म होने के साथ-2 हीरा भी ख़त्म हो जाएगा.नीना ने पहली बार महेश का ये ख़तरनाक पहलू देखा था & तभी उसके दिमाग़ मे ये ख़याल आया कि महेश ऐसा उसके साथ भी तो कर सकता है....आख़िर महेश उसकी मदद क्यू कर रहा था?..उसने कयि बार उस से पुचछा था मगर हर बार उसका जवाब यही होता था कि वो मुकुल के ज़रिए बद्डल से और पैसा कमाना चाहता था लेकिन अब नीना को यकीन हो गया था कि बात कुच्छ और ही थी.

"हुन्ह..!",हीरा ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया & उसके दाए गाल & गर्दन को चूमने लगा तो नीना कसमसाने लगी.हीरा की बाहे काफ़ी मज़बूत थी & उसे नीना के रूखे रवैयययए की कोई परवाह नही थी.उसे भी अपनी किस्मत पे यकीन नही हो रहा था की ऐसी ऊँचे दर्जे वाली खूबसूरत औरत उसकी बाहो मे है!

नीना को अपनी पीठ के निचले हिस्से पे उसका खड़ा लंड महसूस हुआ तो वो उसकी बाहो से छूटने को तड़प उठी.हीरा ने उसे घुमा के उसका चेहरा अपनी ओर किया & उसके होंठो को चूमने की कोशिश करने लगा.नीना मुँह घुमा के उसकी कोशिश नाकाम कर रही थी & हीरा के होंठ कभी उसके गालो से तो कभी गले से टकरा जाते.बेसबरा हीरा थोड़ा आगे बढ़ा तो वो लड़खड़ा गयी & उसके साथ हीरा भी & दोनो पीछे बिस्तर पे गिर पड़े.

ये बात हीरा के लिए और अच्छी हो गयी,अब नीना उसके जिस्म के नीचे दबी थी & वो उसके उपर चढ़ा उसे चूम रहा था.1 बार फिर हीरा उसके गुलाबी लबो को चूमने लगा तो नीना ने दाई तरफ चेहरा घुमा दिया.उसने अपनी नाक उसके गाल पे लगा नीना के चेहरे को सीधा कर फिर चूमने की कोशिश की तो नीना ने इस बार चेहरा बाई तरफ कर लिया.

"देखो,मेडम..",हीरा ने दाया हाथ उसकी कमर के नीचे से निकाला & उसका चेहरा पकड़ के सीधा किया,"..ढंग से चुदोगि तो ना अभी तकलीफ़ होगी ना बाद मे वरना मैने ये बात कही बाहर बोल दी तो..-"

"-..तो क्या?!",नीना ने उसकी बात बीच मे काटी,"..तुम क्या मैं ही अभी बाहर जाके चिल्ला-2 के बोलूँगी कि तुमने मेरे साथ ज़बरदस्ती की है फिर क्या होगा?",हीरा की भावे सिकुड गयी,"..तुम बोलॉगी की मैने तुम्हे ना नही किया था लेकिन 1 बात बताओ लोग मेरी बात का यकीन करेंगे या तुम्हारी जो पहले भी हवालात की सैर कर चुका है?..1 बात कान खोल के सुन लो हीरा ये मेरी मजबूरी है..महेश से हम दोनो को ख़तरा है इसलिए मैं इस वक़्त तुम्हारे साथ हू."

"देखो,मेम्साब..",हीरा ने उसका चेहरा छ्चोड़ उसके बालो की लट को जो माथे पे गिर आई थी,हटाया,"..मेरे लिए भी ये 1 सौदा है.तुम्हे महेश पे नज़र रखनी है & मुझे भी उस से होशियार रहना है.अब हम दोनो उसके बारे मे 1 दूसरे को बताएँगे लेकिन फीस तो लगेगी ना!तो ये फीस मुझे ठीक से चाहिए & मैं यकीन दिलाता हू कि आगे से तुम जैसा कहोगी वही करूँगा.बोलो?",हीरा उसके गुलाबी होंठो पे अपना दाया अंगूठा चला रहा था.

नीना को उसकी बातो मे हवाबाजी नही लगी,उसे लगा कि वो जो कह रहा है वो करेगा,"..मैं कैसे यकीन करू तुम्हारा?"

"ठीक है..",उसका अंगूठा वैसे ही उन नर्म होंठो पे घूम रहा था,"..सुनो,20 तारीख की शाम को काम होने के बाद मैं जहा रहूँगा वाहा का पता है ये & उसके बाद मुझे महेश ने..",हीरा बोल रहा था & नीना सुन रही थी..ये सब तो तय नही हुआ था..यानी महेश का अपना भी कोई मक़सद था & वो किसी बिज़्नेसमॅन का मक़सद नही था.

हीरा ने अंगूठा हटाया & नीना के होंठो से अपने होंठ लगा दिए,इस बार नीना ने उसे रोका नही.कुच्छ देर तक वो उसके होंठो को चूमता रहा मगर जैसे ही उसने अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे डालने की कोशिश की तो नीना ने उसके सीने पे हाथ रख अपने होंठ अलग किए,"महेश काम शुरू होने पे तुमसे कैसे कॉंटॅक्ट करेगा?"

"ना फोन से,ना मिल के.",हीरा ने उसकी नाइटी उसके बाए कंधे से नीचे कर वाहा पे चूमा & फिर उसकी गर्दन मे मुँह घुसा दिया,"..हर रोज़ वो वाहा आएगा जहा मैं च्छूपा रहूँगा & आगे के बारे मे बताएगा.वैसे भी मुझे बस वाहा च्छूपे रहना है,बाकी काम तो महेश खुद करेगा.",उसने दूसरे कंधे पे भी वही हरकत दोहराई & फिर वापस अपने होंठ नीना के होंठो से लगा दिए.

महेश ने उसे इस बारे मे कुच्छ नही बताया था,उसने तो कहा था कि सब कुच्छ उसका आदमी यानी कि हीरा संभालेगा..उसने झूठ क्यू बोला था?..हीरा का दाया हाथ उसकी नाइटी को नीचे से उठा उसकी मखमली बाई जाँघ पे चल रहा था.उसके मज़बूत जिस्म के नीचे दबी नीना के जिस्म मे भी अब हुलचूल होने लगी थी लेकिन उसका ज़हन खुद को उस इंसान से मज़ा लेने को तैय्यार नही कर पा रहा था.हीरा ने अपनी दाई टांग को नीना की टाँगो के बीच कर उन्हे थोड़ा फैलाया & उसकी चूत के बगल मे लंड को रगड़ते हुए उसे चूमने लगा.इस बार उसने अपनी जीभ नीना के मुँह मे दाखिल करा ही दी & उसकी जीभ से लड़ा दी.नीना को ये हरकत अच्छी नही लगी मगर उसका जिस्म गर्म होने लगा था.

"आहह....छ्चोड़ो..प्लीज़...नही!",हीरा ने जी भर के उसे चूमा & किस के अंत तक नीना की चूत ने भी रिसना शुरू कर दिया.वो उठा & उसकी टाँगो को 1 साथ हवा मे उठा लिया & उसकी गोरी जाँघो को पागलो की तरह चूमने लगा.नीना का जिस्म उसके आतुर होंठो के नीचे बावला हो रहा था & वो आँखे बंद कर कसमसाने लगी थी.हीरा के होंठ तो उसकी टाँगो से चिपक के रह गये थे.वो घुटनो पे खड़ा हो गया था & उसकी टाँगो को सीधा कर उसके अपीरो को अपने चेहरे से साटा उन्हे चूम रहा था & उसके हाथ उसकी चूत के ठीक नीचे उसकी जाँघो के बीच घुस उन्हे सहला रहे थे.नीना अब ज़ोरो से आहे भर रही थी.दिमाग़ का कोई कोना अभी भी हीरा के लिए घिन से भरा था लेकिन जिस्म अब पूरी तरह से उस से मिलने को तड़प रहा था.

"आआन्न्‍नणणनह.....आआहह....!",सफेद पॅंटी के अंदर ज्यो ही हीरा का बाया हाथ घुसा & उसकी गीली चूत को हल्के से कुरेदा,नीना झाड़ गयी.उसने अपना बदन बाई तरफ घूमाते हुए अपना चेहरा 1 तकिया खींच उसमे च्छूपा लिया & सुबकने लगी.हीरा मुस्कुरा रहा था.उसने कयि औरतो को चोदा था,कुच्छ शरीफ,कुच्छ बाज़ारु,कुच्छ को उनकी मर्ज़ी से,कुच्छ को ज़बरदस्ती लेकिन आज पहली बार उसे खुद के मर्द होने का एहसास हुआ था.1 औरत जो उसकी पहुँच से दूर थी,उस जैसी औरतो के बारे मे वो केवल सपने देख सकता था,आज उसके हाथ से झाड़ रही थी.

उसने नीना की टाँगो को नीचे रखा & तकिये को हटा उसके चेहरे को चूमने लगा..ये औरत अगर उसे जान भी देने को कहेगी तो वो दे देगा..अफ....ऐसा रेशम सा जिस्म..इतना मुलायम & चेहरा इतना सुंदर!उसने नीना को बाहो मे भर लिया & उसकी पीठ सहलाने लगा.उसे खुद के ऐसे कोमल बर्ताव पे हैरत हुई & नीना को भी ये उमीद नही थी.झड़ने के बाद औरत अपने साथी से बस दुलार चाहती है वासना नही & हीरा की हरकत ने उसके ज़हन की बची हुई उलझन को भी दूर कर दिया.अब वो सिर्फ़ 1 औरत थी,समाज के ऊँचे दर्जे की इज़्ज़तदार औरत नही & वो सिर्फ़ 1 मर्द था,किसी छ्होटी सी फॅक्टरी मे काम करने वाला मामूली मज़दूर नही.

हीरा ने उसकी नाइटी को ढीला कर उसके गले को नीचे किया & नीना के क्लीवेज को चूमने लगा.नीना आँखे बंद किए हुए पड़ी थी.हीरा उसे चूमते हुसे उसके कपड़े उतार रहा था.हर कपड़ा उतरने के बाद वो थोड़ी देर तक उसके जिस्म को निहारता & फिर चूमता.नीना की चूत देख के तो वो बिल्कुल ही भौंचक्का रह गया & घुटनो पे बैठ उसपे बहुत हल्के-2 हाथ फिराने लगा मानो यकीन करना चाहता हो कि उसके सामने लेटी औरत कोई धोखा नही थी.उसने ऐसी गोरी,गुलाबी,बिना बालो की चिकनी चूत सिर्फ़ नंगी किताबो मे देखी थी.नीना को उसका चेहरा देख हँसी आ गयी जिसे उसने ज़ब्त कर लिया.उसका ये हाल देख उसके मन मे 1 ख़याल आया..यही मौका था इस आदमी को अपना गुलाम बनाने का & उसे महेश के खिलाफ इस्तेमाल करने का.

"क्या देख रहे हो?",वो उठी & अपनी जाँघो को भींच अपनी चूत को च्छूपा लिया & हल्के से मुस्कुराते हुए शरमाने का नाटक करने लगी.हीरा तो अब पूरी तरह से अपने होश खो बैठा & आगे बढ़ नीना को बाहो मे भींचने ही वाला था कि नीना बोली,"..पहले अपने भी उतारो.",उसने किसी शर्मीली जवान लड़की की तरह उसकी कमीज़ को हल्के से खींचा.हीरा ने झटपट अपने कपड़े उतार दिए & नंगा हो गया & अपना 8 इंचा का बिल्कुल काला,झांतो भरा लंड हाथ मे पकड़ हिलाने लगा.नीना समझ गयी कि वो अब रुक नही पाएगा.

वो बिस्तर पे लेट गयी & अपनी टाँगे आपस मे और ज़ोर से भींच ली.हीरा का जोश और बढ़ गया.उसने उसकी जाँघो के बीच दाया हाथ चलाते हुए उसकी चूत को दोबारा कुरेदते हुए उसकी टाँगो को खोल दिया & फ़ौरन उनके बीच आ गया.नीना की टाँगे मोड़ उसने अपना लंड निशाने पे लगाया & ज़ोर का धक्का लगाया.

"हाईईइ...राम्म्म्मम...मैं..मरी...!",जितना दर्द नीना को हुआ नही उस से कही ज़्यादा होने का उसने नाटक किया क्यूकी वो हीरा को और मस्त कर जल्दी से झाड़वाना चाहती थी.हीरा उसके उपर लेट गया & उसकी चूचियो & उनके प्यारे निपल्स को मुँह मे भर चूस्ते उसे चोदने लगा.नीना ने भी उस बाहो मे भर लिया & उसकी पीठ सहलाने लगी.जब उसके हाथो ने हीरा की गंद को छुआ तो हीरा के धक्को की रफ़्तार और बढ़ गयी.नीना की चूत भी अब मस्त हो गयी थी & उसे जिस्म मे अजीब सी कसमसाहट महसूस होने लगी थी.

"हीरा..",उसने उसकी दाई चूची को चूस्ते हीरा का सर उसके बाल पकड़ के उठाया,"..1 काम करोगे?",हीरा ने उसे ज़ोर से चूमा & उसकी बाई चूची को मसलने लगा.नीना को अब मज़ा आने लगा था.हीरा का कड़ा लंड & सख़्त हाथ उसके मुलायम जिस्म को भेद & मसल रहे थे & उसके अंदर मस्ती का तूफान अब ज़ोर पकड़ रहा था.

"तुम बोलो तो..जानेमन...आआहह..!",नीना ने उसी वक़्त अपनी चूत को सिकोड उसके लंड को कस लिया तो उसकी कमर हिलनी और तेज़ हो गयी.

"कल जब महेश फॅक्टरी मे होगा तब मैं उसके घर मे घुस उसकी चीज़े देखना चाहती हू.",उसने अपने नाख़ून उसकी गंद मे धंसा दिए.

"हो जाएगा......आआआहह....!",हीरा पागलो की तरह कमर हिलाते हुए झाड़ रहा था & उसी मे उसने इतनी ज़ोर का धक्का लगाया की लंड चूत मे और गहरे उतरा & नीना के अंदर उमड़े तूफान ने नीना को भी अपने आगोश मे भर लिया.

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डीजे छाज़े ने शोभा/दीप्ति का जो पता लिख के दिया था उसकी मा अब वाहा नही रहती थी.दिव्या & प्रोफेसर दीक्षित ने आस-पास पुछ्ताच की & शहर मे थोड़ा भटकने के बाद आख़िरकार दीप्ति की मा के नये पते पे पहुँच ही गये.

"जी!कहिए?",दरवाज़ा 1 25-26 बरस के लड़के ने खोला जिसने 1 बनियान & शॉर्ट्स पहना हुआ था.देख के लगता था कि बस अभी-2 सोके उठा है

"हमे मिसेज़.काजल दयाल से मिलना है."

"क्या बात है?",लड़के के पीछे 1 औरत वाहा आके खड़ी हो गयी थी.औरत की उम्र तो 46-47 साल की होगी मगर वो 38 से ज़्यादा की नही लग रही थी.उसने 1 ढीला-ढाला कॅफ्टन पहना हुआ था,"मैं ही हू,काजल दयाल."

"आप दीप्ति की मा हैं?"

"हां.",दिव्या ने अपना परिचय दिया तो काजल ने उन्हे अंदर बुलाया & ड्रॉयिंग रूम मे बिठाया.

"डार्लिंग,बस अभी आती हू.",लड़का अंदर चला गया था & उसके पीछे काजल भी.दोनो की बातो & फिर चूमने की आवाज़ सुन प्रोफेसर मुस्कुराया & दिव्या चौंक पड़ी....इस औरत का अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ ऐसा रिश्ता था!

1 ट्रे मे पानी के ग्लास & कुच्छ बिस्किट्स लाके उसने उनके सामने रखा तो दिव्या ने देखा कि कॅफ्टन का गला थोड़ा नीचे हो गया था जिस से उसका क्लीवेज दिख रहा था.काजल प्रोफेसर के सामने वाले सोफे पे टांग पे टांग इस तरह से चढ़ा के बैठी थी कि उसकी गोरी टाँगे जोकि इस उम्र मे भी सुडोल थी,उसे अच्छे से दिखें.

"आपकी तारीफ,गेंटल्मन?",काजल प्रोफेसर से ऐसे मुखातिब हुई जैसे दिव्या तो वाहा मौजूद ही नही थी.प्रोफेसर ने अपना परिचय दिया तो काजल उस से और सवाल करने लगी.

"बिच..!",दिव्या जलन & गुस्से से बुदबुदाई.

"कुच्छ कहा आपने,मिस..?"

"दिव्या..",दिव्या थोड़ी तल्खी से बोली,"..हमारे पास ज़्यादा वक़्त नही है,मेडम इसलिए आप फटाफट अपनी बेटी के बारे मे बताएँ जिसकी हमे 1 रॉबरी के केस मे तलाश है."

"वॉट?",काजल चौंक गयी & अपना हाथ अपने सीने पे रख लिया....उसकी हर अदा से ज़ाहिर था कि उसकी ज़िंदगी मे उसने सबसे ज़्यादा तवज्जो केवल अपने जिस्म & उसके सुकून को दी थी.

"जी.कहा है आपकी बेटी?"

"मुझे नही मालूम,मैने तो..",वो सोचने लगी & जोड़ने लगी,"..1 साल से उपर हो गया,उसकी शक्ल नही देखी."

"फोन तो करती होगी वो आपको?",प्रोफेसर ने अपना पानी का ग्लास उसे दे दिया क्यूकी उसे लगा कि इस वक़्त उसे उसकी ज़्यादा ज़रूरत थी.

"थॅंक्स.",वो शोखी से मुस्कुराइ & पानी पिया,"..नही,हमारा बहुत दीनो से कोई कॉंटॅक्ट नही रहा है."

"वजह?",दिव्या ने पुचछा तो काजल ने लंबी साँस ली & पहली बार संजीदा दिखी.

"देखिए,दीप्ति मेरे पहले पति & मेरी बेटी है.हम दोनो तब अलग हुए जब वो कोई 5 बरस की थी.उसके बाद कुच्छ दिन वो मेरे साथ रही फिर मैने उसे हॉस्टिल भेज दिया."

"काजल..",प्रोफेसर ने उस से उसका खाली ग्लास लिया तो दिव्या ने देखा की काजल ने उसके हाथ को च्छू लिया,वो गुस्से से लाल हो गयी,"..आमतौर पे ऐसे हालात मे मा तो बच्चो को अपने साथ रखना पसंद करती है फिर आपने ऐसा क्यू किया?"

"देखिए,प्रोफेसर मैं 1 आज़ाद ख़याल इंसान हू & मेरी कुcछ ज़रूरते हैं..",उसकी निगाहे & हाव-भाव प्रोफेसर को खुला निमंत्रण दे रहे थे,"..ऐसे मे 1 बच्चे का आस-पास होना अच्छा नही लगता."

"तो आपने उसे पैदा क्यू किया था?",दिव्या की आवाज़ मे गुस्सा था.

"प्लान नही किया था वो तो हमे ख़याल ही नही रहा & वो मेरी कोख मे आ गयी.",काजल बहुत बेबाक थी.

"बुरा मत मानीएगा..",प्रोफेसर मुस्कुराया,"..आप अपने पति से अलग क्यू हुई?"

"वो बड़े आज़ाद ख़यालो के इंसान थे लेकिन सिर्फ़ अपने मामले मे इसलिए जब मैने अपनी आज़ादी को एंजाय करना शुरू किया तो उनके अंदर का बचकाना मर्दाना अहम इस बात को हाज़ाम नही कर पाया,इसलिए हम अलग हो गये."

"दीप्ति अब आपके साथ क्यू रह रही थी?"

"स्कूल ख़त्म होने के बाद उसे यहा के कॉलेज मे दाखिला मिला इसलिए."

"पढ़ाई मे कैसी थी?"

"पता नही.मैं ज़्यादा दखल नही देती थी उसकी ज़िंदगी मे.",दिव्या को हैरानी हुई कोई मा ऐसी भी हो सकती है.

"उसके दोस्तो के बारे मे बताइए?"

"उनके बारे मे भी मुझे ज़्यादा नही पता.वो किसी को घर ही नही लाती थी."

"आप डीजे छाज़े को जानती थी?"

"हां,दीप्ति & उसके बीच कुच्छ था ना?",काजल मुस्कुराइ.दिव्या को लगा जैसे कि बात काजल की बेटी के बारे मे नही किसी अंजन शख्स के बारे मे हो रही है.

"आइ न्यू इट!",प्रोफेसर के हा कहने पे वो खुशी से बोली,"..वैसे बड़ा हॉट लड़का था वो.माइ डॉटर ईज़ ए लकी गर्ल."

"वेल,नोट एनी मोर.",दिव्या खड़ी हो गयी,"..अच्छा आपका बेटा कहा है?"

"बेटा?!",काजल चौंक पड़ी.

"हां,दीप्ति का भाई."

"देखिए,मिस.दिव्या मेरी आजतक बस 1 ही औलाद रही है,दीप्ति.",दिव्या & प्रोफेसर ने 1 दूसरे को हैरत से देखा तो दिव्या ने जवान लुटेरे का स्केच काजल के सामने किया.

"ये..ये कौन है?",काजल सच बोल रही थी,ऐसा प्रोफेसर को यकीन हो गया था.

"प्लीज़,काजल जी..माना कि आप सच कह रही हैं लेकिन हो सकता है इसे आपने अपनी लकड़ी के साथ कभी देखा हो?"

"मुझे लगता है कि ये कभी-कभार उसे छ्चोड़ने आया करता था....फोटोट नही स्केच है ना..इसलिए पक्का नही कह सकती फिर खिड़की से सड़क पे खड़े दोनो को बाते करते देखा था."

"ओके,आप अपने एक्स-हज़्बेंड का नाम बताइए & अगर उनका पता मालूम है तो वो भी लिखवाइए.दीप्ति का कोई समान है आपके पास?"

"जी,नही.वैसे उसके पिता का नाम पता आपको लिखवा देती हू."

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--38

gataank se aage............-

Darasal thodi der pehle Mahesh ne chudai khatm hone ke baad 1 baat kahi thi jiske chalte vo is galiz insan ko apna jism saunpne ko majboor ho gayi thi.jab Nina ne puchha ki kaam ho jane ke baad agar Hira ne unhe blackmail karne ki koshihs ki to vo kya karega to mahesh ne bina hichke kaha ki vo pehle hi soch chuka hai ki kaam khatm hone ke sath-2 hira bhi khatm ho jayega.nina ne pehli baar mahesh ka ye khatarnak pehlu dekha tha & tabhi uske dimagh me ye khayal aaya ki mahesh aisa uske sath bhi to kar sakta hai....aakhir mahesh uski madad kyu kar raha tha?..usne kayi baar us se puchha tha magar har baar uska jawab yehi hota tha ki vo Mukul ke zariye Baddal se aur paisa kamana chahta tha lekin ab nina ko yakin ho gaya tha ki baat kuchh aur hi thi.

"hunhh..!",hira ne use peechhe se baaho me bhar liya & uske daye gaal & gardan ko chumne laga to nina kasmasane lagi.hira ki baahe kafi mazbut thi & use nina ke rukhe ravaiyye ki koi parvah nahi thi.use bhi apni kismat pe yakin nahi ho raha tha ki aisi oonche darje vali khubsurat aurat uski baaho me hai!

nina ko apni pith ke nichle hisse pe uska khada lund mehsus hua to vo uski baaho se chhutne ko tadap uthi.hira ne use ghuma ke uska chehra apni or kiya & uske hotho ko chumne ki koshish karne laga.nina munh ghuma ke uski koshish nakaam kar rahi thi & hira ke honth kabhi uske gaalo se to kabhi gale se takra jate.besabra hira thoda aage badha to vo ladkhada gayi & uske sath hira bhi & dono peechhe bistar pe gir pade.

ye baat hira ke liye aur achhi ho gayi,ab nina uske jism ke neeche dabi thi & vo uske upar chadha use chum raha tha.1 baar fir hira uske gulabi labo ko chumne laga to nina ne dayi taraf chehra ghuma diya.usne apni naak uske gaal pe laga nina ke chehre ko seedha kar fir chumne ki koshish ki to nina ne is baar chehra bayi taraf kar liya.

"dekho,madam..",hira ne daya hath uski kamar ke neeche se nikala & uska chehra pakad ke seedha kiya,"..dhang se chudogi to na abhi taklif hogi na baad me varna maine ye baat kahi bahar bol di to..-"

"-..to kya?!",nina ne uski baat beech me kati,"..tum kya main hi abhi bahar jake chilla-2 ke bolungi ki tumne mere sath zabardasti ki hai fir kya hoga?",hira ki bhave sikud gayi,"..tum bologe ki maine tumhe na nahi kiya tha lekin 1 baat batao log meri baat ka yakin karenge ya tumhari jo pehle bhi hawalat ki sair kar chuka hai?..1 baat kaan khol ke sun lo hira ye meri majburi hai..mahesh se hum dono ko khatra hai isliye main is waqt tumhare sath hu."

"dekho,memsaab..",hira ne uska chehra chhod uske balo ki lat ko jo mathe pe gir aayi thi,hataya,"..mere liye bhi ye 1 sauda hai.tumhe mahesh pe nazar rakhni hai & mujhe bhi us se hoshiyar rehna hai.ab hum dono uske bare me 1 dusre ko batayenge lekin fees to lagegi na!to ye fees mujhe thik se chahiye & main yakin dilata hu ki aage se tum jaisa kahogi vahi karunga.bolo?",hira uske gulabio hotho pe apna daya angutha chala raha tha.

nina ko uski baato me hawabazi nahi lagi,use laga ki vo jo keh raha hai vo karega,"..main kaise yakin karu tumhara?"

"thik hai..",uska angutha vaise hi un narm hotho pe ghum raha tha,"..suno,20 tarikh ki sham ko kaam hone ke baad main jaha rahunga vaha ka pata hai ye & uske baad mujhe mahesh ne..",hira bol raha tha & nina sun rahi thi..ye sab to tay nahi hua tha..yani mahesh ka apna bhi koi maqsad tha & vo kisi businessman ka maqsad nahi tha.

hira ne angutha hataya & nina ke hontho se apne honth laga diye,is baar nina ne use roka nahi.kuchh der tak vo uske hotho ko chumta raha magar jaise hi usne apni zuban uske munh me dalne ki koshish ki to nina ne uske seene pe hath rakh apne honth alag kiye,"mahesh kaam shuru hone pe tumse kaise contact karega?"

"na fone se,na mil ke.",hira ne uski nighty uske baye kandhe se neeche kar vaha pe chuma & fir uski gardan me munh ghusa diya,"..har roz vo vaha ayega jaha main chhupa rahunga & aage ke bare me batayega.vaise bhi mujhe bas vaha chhupe rehna hai,baki kaam to mahesh khud karega.",usne dusre kandhe pe bhi vahi harkat dohrayi & fir vapas apne honth nina ke hontho se laga diye.

mahesh ne use is bare me kuchh nahi bataya tha,usne to kaha tha ki sab kuchh uska aadmi yani ki hira sambhalega..usne jhuth kyu bola tha?..hira ka daya hath uski nighty ko neeche se utha uski makhmali bayi jangh pe chal raha tha.uske mazbut jism ke neeche dabi nina ke jism me bhi ab hulchul hone lagi thi lekin uska zehan khud ko us insan se maza lene ko taiyyar nahi kar pa raha tha.hira ne apni dayi tang ko nina ki tango ke beech kar unhe thoda failaya & uski chut ke bagal me lund ko ragadte hue use chumne laga.is baar usne apni jibh nina ke munh me dakhil kara hi di & uski jibh se lada di.nina ko ye harkat achhi nahi lagi magar uska jism garm hone laga tha.

"aahhhh....chhodo..please...nahi!",hira ne ji bhar ke use chuma & kiss ke ant tak nina ki chut ne bhi risna shuru kar diya.vo utha & uski tango ko 1 sath hawa me utha liya & uski gori jangho ko paglo ki tarah chumne laga.nina ka jism uske aatur hotho ke neeche bawla ho raha tha & vo aankhe band kar kasmasane lagi thi.hira ke honth to uski tango se chipak ke reh gaye the.vo ghutno pe khada ho gaya tha & uski tango ko seedha kar uske apiro ko apne chehre se sataye unhe chum raha tha & uske hath uski chut ke thik neeche uski jangho ke beech ghus unhe sehla rahe the.nina ab zoro se aahe bhar rahi thi.dimagh ka koi kona abhi bhi hira ke liye ghin se bhara tha lekin jism ab puri tarah se us se milne ko tadap raha tha.

"aaaannnnnnhhhhhhh.....aaaahhhhhhhh....!",safed panty ke andar jyo hi hira ka baya hath ghusa & uski gili chut ko halke se kureda,nina jhad gayi.usne apna badan bayi taraf ghumate hue apna chehra 1 takiya khinch usme chhupa liya & subakne lagi.hira muskura raha tha.usne kayi aurato ko choda tha,kuchh sharif,kuchh bazaru,kuchh ko unki marzi se,kuchh ko zabardasti lekin aaj pehli baar use khud ke mard hone ka ehsas hua tha.1 aurat jo uski pahunch se door thi,us jaisi aurato ke bare me vo kewal sapne dekh sakta tha,aaj uske hath se jhad rahi thi.

usne nina ki tango ko neeche rakha & takiye ko hata uske chehre ko chumne laga..ye aurat agar use jaan bhi dene ko kahegi to vo de dega..uff....aisa resham sa jism..itna mulayam & chehra itna sundar!usne nina ko baaho me bhar liya & uski pith sehlane laga.use khud ke aise komal bartav pe hairat hui & nina ko bhi ye umeed nahi thi.jhadne ke baad aurat apne sathi se bas dular chahti hai vasna nahi & hira ki harkat ne uske zehan ki bachi hui uljhan ko bhi door kar diya.ab vo sirf 1 aurat thi,samajj ke oonche darje ki izzatdar aurat nahi & vo sirf 1 mard tha,kisi chhoti si factory me kaam karne vala mamuli mazdur nahi.

hira ne uski nighty ko dhila kar uske gale ko neeche kiya & nina ke cleavage ko chumne laga.nina aankhe band kiye hue padi thi.hira use chumte huse uske kapde utar raha tha.har kapda utarne ke baad vo thodi er tak uske jism ko niharta & fir chumta.nina ki chut dekh ke to vo bilkul hi bhaunchakka reh gaya & ghutno pe baith uspe bahut halke-2 hath firane laga mano yakin karna chahta ho ki uske samne leti aurat koi dhokha nahi thi.usne aisi gori,gulabi,bina baalo ki chikni chut sirf nangi kitabo me dekhi thi.nina ko uska chehra dekh hansi aa gayi jise usne zabt kar liya.uska ye haal dekh uske man me 1 khayal aaya..yehi mauka tha is aadmi ko apna ghulam banane ka & use mahesh ke khilaf istemal karne ka.

"kya dekh rahe ho?",vo uthi & apni jangho ko bhinch apni chut ko chhupa liya & halke se muskurate hue sharmane ka natak karne lagi.hira to ab puri tarah se apne hosh kho baitha & aage badh nina ko baaho me bhinchne hi vala tha ki nina boli,"..pehle apne bhi utaro.",usne kisi sharmili jawan ladki ki tarah uski kamiz ko halke se khincha.hira ne jhatpat apne kapde utar diye & nanga ho gaya & apna 8 incha ka bilkul kala,jhanto bhara lund hath me pakad hilane laga.nina samajh gayi ki vo ab ruk nahi payega.

vo bistar pe let gayi & apni tange aapas me aur zor se bhinch li.hira ka josh aur badh gaya.usne uski jangho ke beech daya hath chalate hue uski chut ko dobara kuredte hue uski tango ko khol diya & fauran unke beech aa gaya.nina ki tange mod usne apna lund nishane pe lagaya & zor ka dhakka lagaya.

"haiiii...rammmmm...main..mari...!",jitna dard nina ko hua nahi us se kahi zyada hone ka usne natak kiya kyuki vo hira ko aur mast kar jaldi se jhadwana chahti thi.hira uske uapr let gaya & uski chhatiyo & unke pyare nipples ko munh me bhar chuste use chodne laga.nina ne bhi us baaho me bhar liya & uski pith sehlane lagi.jab uske hatho ne hira ki gand ko chhua to hira ke dhakko ki raftar aur badh gayi.nina ki chut bhi ab mast ho gayi thi & use jism me ajib si kasmasahat mehsus hone lagi thi.

"hira..",usne uski dayi chhati ko chuste hira ka sar uske baal pakad ke uthaya,"..1 kaam karoge?",hiraq ne use zor se chuma & uski bayi choochi ko maslane laga.nina ko ab maza aane laga tha.hira ka kada lund & sakht hath uske mulayam jism ko bhed & masal rahe the & uske andar masti ka toofan ab zor pakad raha tha.

"tum bolo to..janeman...aaaahhhhh..!",nina ne usi waqt apni chut ko sikod uske lund ko kas liya to uski kamar hilni aur tez ho gayi.

"kal jab mahesh factory me hoga tab main uske ghar me ghus uski chize dekhna chahti hu.",usne apne nakhun uski gand me dhansa diye.

"ho jayega......aaaaaahhhhhhhh....!",hira paglo ki tarah kamar hilate hue jhad raha tha & usi me usne itni zor ka dhakka lagaya ki lund chut me aur gehre utra & nina ke andar umde toofan ne nina ko bhi apne agosh me bhar liya.

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DJ Chaze ne Shobha/Dipti ka jo pata likh ke diya tha uski maa ab vaha nahi rehti thi.Divya & Professor Dixit ne aas-paas puchhtachh ki & shehar me thoda bhatakne ke baad aakhirkar dipti ki maa ke naye pate pe pahunch hi gaye.

"ji!kahiye?",darwaza 1 25-26 baras ke ladke ne khola jisne 1 banyan & shorts pehna hua tha.dekh ke lagta tha ki bas abhi-2 soke utha hai

"hume Mrs.Kajal Dayal se milna hai."

"kya baat hai?",ladke ke peechhe 1 aurat vaha aake khadi ho gayi thi.aurat ki umra to 46-47 saal ki hogi magar vo 38 se zyada ki nahi lag rahi thi.usne 1 dhila-dhala kaftan pehna hua tha,"main hi hu,kajal dayal."

"aap dipti ki maa hain?"

"haan.",divya ne apna parichay diya to kajal ne unhe andar bulaya & drawing room me bithaya.

"darling,bas abhi aati hu.",ladka andar chala gaya tha & uske peechhe kajal bhi.dono ki baato & fir chumne ki aavaz sun professor muskuraya & divya chaunk padi....is aurat ka apne bete ki umra ke ladke ke sath aisa rishta tha!

1 tray me pani ke glass & kuchh biscuits lake usne unke samne rakha to divya ne dekha ki kaftan ka gala thoda neeche ho gaya tha jis se uska cleavage dikh raha tha.kajal professor ke samne vale sofe pe tang pe tang is tarah se chadha ke baithi thi ki uski gori tange joki is umra me bhi sudol thi,use achhe se dikhen.

"aapki tarif,gentleman?",kajal professor se aise mukhatib hui jaise divya to vaha maujood hi nahi thi.professor ne apna parichay diya to kajal us se aur sawal karne lagi.

"bitch..!",divya jalan & gusse se budbudayi.

"kuchh kaha aapne,miss..?"

"divya..",divya thodi talkhi se boli,"..humare paas zyada waqt nahi hai,madam isliye aap fatafat apni beti ke bare me batayen jiski jhume 1 robbery ke case me talash hai."

"what?",kajal chaunk gayi & apna hath apne seene pe rakh liya....uski har ada se zahir tha ki uski zindagi me usne sabse zyada tawajjoh kewal apne jism & uske sukun ko di thi.

"ji.kaha hai aapki beti?"

"mujhe nahi malum,maine to..",vo sochne lagi & jodne lagi,"..1 saal se upar ho gaya,uski shakl nahi dekhi."

"fone to karti hogi vo aapko?",professor ne apna pani ka glass use de diya kyuki use laga ki is waqt use uski zyada zarurat thi.

"thanx.",vo shokhi se muskurayi & pani piya,"..nahi,humara bahut dino se koi contact nahi nraha hai."

"vajah?",divya ne puchha to kajal ne lumbi saans li & pehli baar sanjida dikhi.

"dekhiye,dipti mere pehle pati & meri beti hai.hum dono tab alag hue jab vo koi 5 baras ki thi.uske baad kuchh din vo mere sath rahi fir maine use hostel bhej diya."

"kajal..",professor ne us se uska khali glass liya to divya ne dekha ki kajal ne uske hath ko chhu liya,vo gusse se laal ho gayi,"..aamtaur pe aise halaat me maa to bachcho ko apne sath rakhna pasand karti hai fir aapne aisa kyu kiya?"

"dekhiye,professor main 1 azad khayal insan hu & meri kucchh zarurate hain..",uski nigahe & haav-bhav professor ko khula nimantran de rahe the,"..aise me 1 bachche ka aas-paas hona achha nahi lagta."

"to aapne use paida kyu kiya tha?",divya ki aavaz me gussa tha.

"plan nahi kiya tha vo to hume khayal hi nahi raha & vo meri kokh me aa gayi.",kajal bahut bebak thi.

"bura mat maniyega..",professor muskuraya,"..aap apne pati se alag kyu hui?"

"vo bade azad khayalo ke insan the lekin sirf apne mamle me isliye jab maine apni azadi ko enjoy karna shuru kiya to unke andar ka bachkana mardana aham is baat ko hazam nahi kar paya,isliye hum alag ho gaye."

"dipti ab aapke sath kyu reh rahi thi?"

"school khatm hone ke baad use yaha ke college me dakhila mila isliye."

"padhai me kaisi thi?"

"pata nahi.main zyada dakhal nahi deti thi uski zindagi me.",divya ko hairani hui koi maa aisi bhi ho sakti hai.

"uske dosto ke bare me bataiye?"

"unke bare me bhi mujhe zyada nahi pata.vo kisi ko ghar hi nahi lati thi."

"aap dj chaze ko janti thi?"

"haan,dipti & uske beech kuchh tha na?",kajal muskurayi.divya ko laga jaise ki baat kajal ki beti ke bare me nahi kisi anjan shakhs ke bare me ho rahi hai.

"i knew it!",professor ke haa kehne pe vo khushi se boli,"..vaise bada hot ladka tha vo.my daughter is a lucky girl."

"well,not any more.",divya khadi ho gayi,"..achha aapka beta kaha hai?"

"beta?!",kajal chaunk padi.

"haan,dipti ka bhai."

"dekhiye,ms.divya meri aajtak bas 1 hi aulad rahi hai,dipti.",divya & professor ne 1 dusre ko hairat se dekha to divya ne jawan lutere ka sketch kajal ke samne kiya.

"ye..ye kaun hai?",kajal sach bol rahi thi,aisa professor ko yakin ho gaya tha.

"please,kajal ji..maana ki aap sach keh rahi hain lekin ho sakta hia ise aapne apni lakdi ke sath kabhi dekha ho?"

"mujhe lagta hai ki ye kabhi-kabhar use chhodne aya karta tha....fotot nahi sketch hai na..isliye apkka nahi akr sakti fir khidki se sadak pe khade dono ko baate karte dekha tha."

"ok,aap apne ex-husband ka naam bataiye & agar unka pata malum hai to vo bhi likhwaiye.dipti ka koi saman hai aapke paas?"

"ji,nahi.vaise uske pita ka naam pata aapko likhwa deti hu."

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--39

गतान्क से आगे............-

"थॅंक यू.",दिव्या उसके हाथ से काग़ज़ ले दरवाज़े से बाहर निकल गयी & उसके साथ प्रोफेसर भी.दोनो गाड़ी तक पहुँचे ही थे कि काजल ने पीछे से प्रोफेसर को आवाज़ दी.प्रोफेसर उसके पास गया तो दिव्या कार मे बैठ गयी.उसने देखा की दोनो हंस-2 के बात कर रहे हैं तो उसे जलन सी हुई.

"क्यू बुलाया था उसने?",प्रोफेसर ने कार स्टार्ट की,"..उस लगा कि मेरा रुमाल अंदर गिर गया है.",प्रोफेसर ने कार आगे बढ़ा दी,"..& फिर उसे मेरा फोन नंबर भी चाहिए था.",प्रोफेसर हंसा तो दिव्या को भी गुस्से के बावजूद हँसी आ गयी.

"अजिंक्या 1 काम करते हैं..",दिव्या ने खिड़की से बाहर देखते हुए कार चलाते प्रोफेसर दीक्षित की बाँह पे हाथ रखा,"..यहा के क्राइम ब्रांच को इस लड़की के बारे मे बता देते हैं."

"ख़याल अच्छा है."

.......................

"ह्म्म..",एसीपी फ़राज़ सोच मे पड़ गया,"..ज़रा सिंग को अंदर भेजो."

"सर!",1 लंबा-तगड़ा सब-इनस्पेक्टर अंदर आया तो फ़राज़ ने उसे दिव्या के लाए स्केचस थमाए & अब तक उसने जो भी बाते पता की थी वो बताई.

"सर,मुझे लगता है हमे कल जो खबर मिली है,उसका इस केस से ज़रूर कोई ताल्लुक है."

"ज़रा मेडम को उस बारे मे बताओ."

"मेडम,1 मुखबिर से हमे पता चला है की रमेश चंद आज कुच्छ चोटी के हीरे खरीदने वाला है.ये रमेश चंद है तो ज़ोहरी लेकिन ये हमेशा चोरी के माल मे ही डील करता है क्यूकी इसमे मुनाफ़ा ज़्यादा होता है लेकिन वो 1 छ्होटी मछली है.हमे खबर मिली है कि आज जो हीरे वो खरीदने वाला है उनकी कीमत कोई 2 लाख रुपयो के करीब होगी.रमेश ऐसी बड़ी डील अकेले नही कर सकता तो इसका मतलब वो बस 1 बीचोलिया है,1 से हीरे लेके दूसरे को बेचेगा & दलाली खा जाएगा."

"आप क्या करने की सोच रहे हैं इस बारे मे?",दिव्या फ़राज़ से मुखातिब हुई.

"राइड डालेंगे.जैसे ही चीज़े अदली-बदली जाएँगी,उन्हे रंगे हाथो पकड़ेंगे ताकि उन्हे सज़ा दिलवाने मे आसानी हो."

"आप बुरा ना माने तो हम भी आपके साथ चलें?"

"ज़रूर मगर आप दोनो सिर्फ़ देख सकते हैं अगर कोई करवाई करनी पड़ी तो आप उसका हिस्सा नही बनेंगे."

"ठीक है."

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"मेमसाहब,आप महेश के घर पहुँचो मैं 30 मिनिट मे वाहा पहुँचता हू."

"ओके.",नीना ने फोन रखा & निकल पड़ी.उसने 1 काली जीन्स & टी-शर्ट पहनी थी & साथ मे काला चश्मा भी लगाया हुआ था.उसके बाद उसने 1 काला दुपट्टा लेके अपने चेहरे पे ऐसे लपेट लिया मानो धूप से बचना चाह रही हो लेकिन उसका असली मक़सद तो अपना चेहरा च्छुपाना था.

20 मिनिट बाद वो महेश के घर के बाहर खड़ी थी तभी वाहा हीरा 1 बाइक से पहुँचा,"ये लो चाभीया & जल्दी अंदर चलो.",महेश फॅक्टरी पहुँचते ही अपनी चाभीया 1 दराज़ मे रख देता था & फिर काम मे मशगूल हो जाता था.इन चाभियो को वो शाम को फॅक्टरी छ्चोड़ते वक़्त ही निकालता था.इसी बात का फ़ायदा उठाके हीरा ने चाभीया निकाल ली थी & अब नीना के साथ महेश के घर मे दाखिल हो रहा था.

नीना यहा पहले भी आ चुकी थी & उसे अंदर के चप्पे-2 के बारे मे मालूम था.वो सीधा महेश के बेडरूम मे पहुँची & उसकी अलमारी खोल देखने लगी.

"हम ढूंड क्या रहे हैं?",हीरा कमरे मे रखे 1 छ्होटे से कपबोर्ड को खंगाल रहा था.

"कोई भी ऐसी चीज़ जोकि महेश के खिलाफ इस्तेमाल हो सकती है & ध्यान रहे बाद मे सारा समान ज्यो का त्युओ रखना है ताकि उसे शक़ ना हो.",दोनो ने पूरा बेडरूम छान लिया मगर नीना को ऐसा कुच्छ भी हाथ नही लगा जो काम का होता बस कुच्छ

XXX ड्व्ड्स & नंगी किताबें जिनका लुत्फ़ वो महेश के साथ पहले उठा चुकी थी.उसे तलाश थी किसी ऐसे बॅंक स्टेट्मेंट की,किसी ऐसे काग़ज़ात की जिस से महेश के किसी उल्टे-सीधे धंधे का पता चले.वो 1 बिज़्नेसमॅन था & ऐसा हो नही सकता था कि टॅक्स बचाने के लिए उसने कभी कोई क़ानून मरोड़ा ना हो.

1 घंटे तक वो उसके घर को छानते रहे मगर कुच्छ भी हाथ नही लगा.नीना थक के महेश की स्टडी टेबल पे लगी कुर्सी पे बैठ गयी & अपना माथा सहलाने लगी.

"चलें क्या?",हीरा ने 1 शेल्फ की किताबे ठीक कर पुचछा.

"हूँ.",नीना ने आनमने ढंग से स्टडी टेबल की दराजे खोली.1 के नीचे 1 तीन दराजे थी & फिर 1 बड़ा कॅबिनेट.पहली दराज़ मे बस पेंस,स्टप्लेर्स,पिन्स,क्लिप्स जैसी चीज़े पड़ी थी.दूसरी मे 2-3 डाइयरीस थी जोकि बिल्कुल कोरी थी.तीसरी दराज़ मे कुच्छ काग़ज़ात थे & 1 छ्होटा सा फोटो आल्बम जोकि स्टूडियो वाले रील सॉफ करने के बाद मुफ़्त पकड़ाते हैं.

नीना उस आल्बम को पलटने लगी.तस्वीरो को देख के लगता था कि वो महेश के किसी बहुत करीबी रिश्तेदार के किसी जलसे मे खीची गयी हैं.आखरी पन्ने मे नीना को प्लास्टिक कवर मे 2 तस्वीरो के बजाए 3 तस्वीरे दिखी.तीसरी तस्वीर दोनो के बीच च्छूपी हुई थी.नीना ने उस तस्वीर को निकाला & उसके चेहरे का उतरा रंग फिर से खिल उठा....तुम मेरे साथ खेल रहे थे ना महेश,अब मैं तुम्हारे साथ खेलूँगी & इसके साथ भी,उसने तस्वीर मे महेश के साथ खड़ी लड़की को देखा & मुस्कुराइ,"चलो.",वो कुर्सी से उठी & हीरा के साथ निकल गयी.

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पंचमहल पोलीस के जवान एसीपी फ़राज़ के साथ अपनी-2 पोज़िशन संभाले हुए थे.पंचमहल रेलवे स्टेशन के यार्ड के सुनसान हिस्से मे 1 ज़ंग खा रही ट्रेन के कोच के 1 डब्बे मे खड़ा रमेश चंद उस आदमी का इंतेज़ार कर रहा था.पोलीस सभी एंट्री & एग्ज़िट पायंट्स की निगरानी कर रही थी.1 कॉन्स्टेबल डिजिटल वीडियो कॅमरा थामे आगे बढ़ा & उस कोच के बराबर मे लगी दूसरी कोच से रमेश चंद की हर्कतो को कमेरे मे क़ैद करने लगा.

उनका मुखबिर 1 रेलवे की मालगाड़ियो मे समान चढ़ाने वाला लोडर वही बैठा उन्घ्ने का नाटक कर रहा था & बीड़ी पी रहा था.अब तक वो 3 बीडीया पी के उनके टोट फेंक चुका था.अचानक उसने आँखे खोली & कुच्छ देर बाद अगड़ाई ले खड़ा हो गया फिर उसने बीड़ी ज़मीन पे गिराई & अपनी चप्पल तले मसल वाहा से जाने लगा.उसने पोलीस को उस आदमी के आने का इशारा कर दिया था.सारे पोलीस वाले चौकन्ने हो सभी रस्तो को देखने लगे.कुल 3 जगहो से यार्ड मे घुसा जा सकता था.

1 मोटरसाइकल की हल्की-2 आवाज़ आ रही थी मगर उन रस्तो पे कोई गाड़ी आती दिख नही रही थी.फ़राज़ यार्ड की दीवार के पास लगे समान के पीछे खड़ा हो अंदर आने वाले रास्ते को देख रहा था.तभी दिव्या ने उसके कंधे पे हाथ रख उस ज़ंग लगी गाड़ी के आगे की ओर इशारा किया जहा से 1 मोटरसाइकल ट्रॅक्स पे चलती हुई ट्रेन की ओर आ रही थी.

"चालाक & शातिर लगता है.",फ़राज़ फुसफुसाया & इशारे से अपने लोगो को सावधान किया.बाइक सवार ने बाइक ट्रेन के पहले डब्बे के सामने रोकी & अपनी चाभी निकाल के चारो तरफ देखा.वो काली जॅकेट & जीन्स मे था & सर पे लगा काला हेल्मेट & काला वाइज़र उसके चेहरे को पूरा च्छुपाए हुए था.ट्रेन के आगे कोई एंजिन नही था & पहला डब्बा दरअसल आम ट्रेन का आख़िरी डिब्बा था जिसमे गार्ड कॅबिन होता है.वो उसी कॅबिन से अंदर घुसा & लंबे-2 डॅग भरता रमेश चंद के कॅबिन मे पहुँचा जोकि शुरू से तीसरे नंबर पे था.

रमेश चंद ने अपनी कमीज़ के अंदर से 1 पॉलयथीन का पॅकेट निकाल उसे अंदर रखे नोट दिखाए तो उसने भी जेब से बहुत छ्होटी सी पोटली खोल उसे हीरे दिखाए.फ़राज़,प्रोफेसर & दिव्या ये सब नही देख पा रहे थे मगर सभी कुच्छ पोलीस वीडियो मे रेकॉर्ड हो रहा था.डील होते ही वीडियो-रेकॉर्डिंग करने वाले कॉन्स्टेबल के इशारे पे पोलिसेवालो ने फ़ौरन कोच को घेर लिया,"हाथ उठाके कोच से बाहर आओ.",फ़राज़ की कड़कदार आवाज़ गूँजी.

1 पल को रमेश चंद & वो बिके सवार चौंक गये लेकिन संभालते ही उन्होने भागने की कोशिश की जो की स्वाभाविक था मगर उसके बाद जो हुआ किसी ने उसकी उम्मीद नही की थी.बाइक सवार ने फुर्ती से अपनी जॅकेट से 1 पिस्टल निकाली & रमेश चंद के सीने मे मारी फिर उसके निशाने पे डिब्बे मे 2 तरफ से घुसते कॉन्स्टेबल थे.गोलिया चलाते वो अपनी बाइक की तरफ भागा तो फ़राज़,दिव्या & प्रोफेसर तीनो 1 साथ होश मे आए & उसकी बाइक की ओर भागे.

फ़राज़ ने बाइक पे गोलिया चलाई की उसके टाइयर्स पंक्चर कर दे मगर उसका निशाना चुका & गोली बाइक की सीट पे लगी.बाइक सवार बाइक तक फुँचा,पिस्टल को अपनी जेब के हवाले किया & बाइक पे बैठ गया & बाइक स्टार्ट की मगर ठीक उसी समय उसके करीब सबसे पहले पहुँची दिव्या ने उसे 1 किक उसके सर के पीछे मारी जिस से उसका हेल्मेट गिर गया मगर उस चालाक इंसान ने 1 काला नक़ाब भी पहना था.उसने बाइक गियर मे डाल तेज़ी से आगे बढ़ाई तो फ़राज़ की 1 गोली उसकी दाई बाँह मे लगी & वो चीखा मगर बाइक को धीमा नही किया.

और तब प्रोफेसर दीक्षित जोकि वाहा मौजूद सबसे ज़्यादा उम्र वाला इंसान था किसी 16-17 बरस के लड़के की फुर्ती से कुदा & सीधा बाइक सवार के पीछे सीट पे गिरा.खुद को संभाल उसने पीछे से उसे पकड़ उसे बाइक से गिराने की कोशिश की मगर वो आदमी भी कम नही था.1 हाथ से बाइक के थ्रॉटल को पूरा घुमाए दूसरे से वो अपनी कोहनी बार-2 प्रोफेसर को वाहा मार रहा था जहा उसके गुर्दे थे.प्रोफेसर ने भी पैंतरा बदला & उसकी जेब मे रखी पिस्टल निकालने की कोशिश करने लगा.इस हाल मे भी वो बाइक को तेज़ी से भगाए जा रहा था.जब उसे लगा कि अब प्रोफेसर उसकी पिस्टल निकाल लेगा तब उसने कालाबाज़ी दिखाते हुए बाइक के अगले टाइयर को हवा मे खड़ा कर दिया.

प्रोफेसर अचानक बदले इस पैंतरे से संभाल नही पाया & पीठ के बल गिर गया.पोलीस वाले गोलिया चलाते उसके पीछे भागे मगर वो वाहा से निकल भागने मे कामयाब हो चुका था.

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"मैने कहा था ना कि आपलोग कुच्छ नही करेंगे फिर क्या ज़रूरत थी आपको उस से उलझने की?!",फ़राज़ गुस्से मे बौखलाया हुआ था,"..आपको गोली ना लगे इसलिए मेरे आदमी पीछे से उसपे गोली नही चला पा रहे थे.",हॉस्पिटल के कमरे मे 1 नर्स प्रोफेसर के ज़ख़्मो पे मलम लगा रही थी.

"मिस्टर.फ़राज़,आप भी जानते हैं & मैं भी..",दिव्या की आँखो से अँगारे बरस रहे थे,"..कि हम अगर कुच्छ नही करते तो भी नतीजा वही होता.आप इस बात को मानने से क्यू क़तरा रहे हैं कि आपकी प्लॅनिंग मे कमी रह गयी थी & आपने ये सोचा भी नही था कि वो ट्रॅक्स के रास्ते बाइक से आ सकता है.",बात सही थी & फ़राज़ को भी इस बात पे खिज आ रही थी.वो खामोश हो गया & खिड़की से बाहर देखने लगा.

"एसीपी साहब..",प्रोफेसर दीक्षित को कोई खास चोट नही आई थी बस खरोन्चे थी,"..मैं माफी चाहता हू.आप वाहा के इन-चार्ज थे & हमे आपकी कही बातो को मानना चाहिए थे मगर उस वक़्त मैं ही उसके सबसे करीब था & मुझे लगा कि अगर मैने कोशिश नही की तो वो हमारे हाथ से निकल जाएगा & इसिसलिए मैं उसके उपर कूद गया."

"हूँ.",फ़राज़ ने सर हिलाया & कमरे से निकल गया,"..दफ़्तर चलिए,देखे क्या हाथ लगा है हमारे.",निकलते हुए उसने कहा.

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जसजीत प्रधान तड़के ही उठ गया था & 7 बजते-2 तैय्यार होके लॉन मे बैठा चाइ पीते हुए ख़बरे पढ़ रहा था कि तभी 1 नौकर ने उस से आके कुच्छ कहा,"क्या?!& तुमने उन्हे गेट पे रोक रखा है!बेवकूफ़!",वो कुर्सी से उठा & गेट की ओर लगभग भागने ही लगा,"..जाओ जाके मेमसाहब को बुला के ले आओ."

"फादर..!",जसजीत मुस्कुराता हुआ उस भले चेहरे वाले शख्स के पास पहुँचा जो अपनी कार से उतर उसके दरवाज़े के पास खड़ा था,"..आइ'म सॉरी,फादर.इन लोगो ने आपको ऐसे रोका..आइ'म रियली सॉरी!",फादर ने अपना हाथ बढ़ाया तो हाथ मिलाते हुए वो उन्हे अंदर ले आया.दोनो साथ-2 चलते हुए उसके लॉन मे आ गये.

ये इंसान था फादर विनसेंट ओ'ब्राइयेन,स्ट्रीट.पॅट्रिक'स कॉलेज का प्रिन्सिपल.स्ट्रीट.पॅट्रिक'स डेवाले का ही नही बल्कि मुल्क का जाना-माना कॉलेज था & उसमे दाखिला पाना बड़े फख्र की बात समझी जाती थी.वाहा के स्टूडेंट्स दुनिया भर मे फैले थे & ज़्यादातर बहुत कामयाब थे.उन्ही मे से 1 था जसजीत.जब जसजीत कॉलेज मे था तो फादर विनसेंट प्रिन्सिपल नही थे बल्कि वाहा इंग्लीश पढ़ाया करते थे & शायद कॉलेज के सबसे फॅवुरेट प्रोफेसर थे.

"हेलो अंजलि."

"हेलो,फादर.",अंजलि मुस्कुराइ & 1 कुर्सी पे उन्हे बैठने का इशारा किया,"कैसे हैं आप?"

"बढ़िया.",अंजलि ने उन्हे जूस का 1 ग्लास थमाया.

"थॅंक्स.",वो जसजीत से मुखातिब हुए,"..माफी चाहता हू कि इस वक़्त जब तुम एलेक्षन्स मे इतने बिज़ी हो,तुम्हे परेशान कर रहा हू."

"प्लीज़,फादर.यू शर्मिंदा ना करें.आप क्या कोई गैर हैं?"

"तो बेटा,कल रात तुम आ रहे हो ना?"

"ज़रूर फादर,आन्यूयल चॅरिटी बॉल को मैं कैसे भूल सकता हू."

"थॅंक्स,सोन.अंजलि & तुम वाहा आओगे तो और लोग भी आएँगे & हम ज़्यादा से ज़्यादा पैसे इकट्ठा कर पाएँगे जिस से और ज़्यादा ज़रूरतमंडो की मदद हो पाएगी."

"फादर,आपके किसी काम आ सकु ये तो मेरे लिए हमेशा ही बड़े फक्र की बात रही है."

"स्ट्रीट.पॅट्रिक'स को भी तुमपे नाज़ है बेटा &..",वो अंजलि की ओर घूमे,"..& तुमपे भी,अंजलि.जसजीत की कामयाबी की आधी हक़दार तुम भी हो."

"थॅंक्स,फादर.",अंजलि थोड़ा शर्मा गयी & नज़रे झुका ली & फिर फादर से नज़र बचा अपने पति को देखा.वो भी मुस्कुरा रहा था मगर उस मुस्कुराहट मे खुशी,प्यार के अलावा कुच्छ और भी था..क्या,ये अंजलि समझ नही पाई & फिर फादर & पति की गुफ्तगू मे शामिल हो गयी.

...................

वो तस्वीर बड़ी काम की थी.उसने उसकी कॉपी बनवा "अफ़रा-तफ़री मे ये पोटली उसके हाथो से वही गिर गयी थी & ये पैसे भी वही छूट गये थे.",फ़राज़ ने अपनी मेज़ पे पड़ी चीज़ो की ओर इशारा किया.

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--39

gataank se aage............-

"thank you.",divya uske hath se kagaz le darwaze se bahar nikal gayi & uske sath professor bhi.dono gadi tak pahunche hi the ki kajal ne peechhe se professor ko avaz di.professor uske paas gaya to divya car me baith gayi.usne dekha ki dono hans-2 ke baat kar rahe hain to use jalan si hui.

"kyu bulaya tha usne?",professor ne car start ki,"..us laga ki mera rumal andar gir gaya hai.",professor ne car aage badha di,"..& fir use mera fone number bhi chahiye tha.",professor hansa to divya ko bhi gusse ke bavjud hansi aa gayi.

"Ajinkya 1 kaam karte hain..",Divya ne khidki se bahar dekhte hue car chalate Professor Dixit ki banh pe hath rakha,"..yaha ke crime branch ko is ladki ke bare me bata dete hain."

"khayal achha hai."

"hmm..",ACP Faraz soch me pad gaya,"..zara Singh ko andar bhejo."

"sir!",1 lumba-tagda sub-inspector andar aaya to faraz ne use divya ke laye sketches thamaye & ab tak usne jo bhi baate pata ki thi vo batayi.

"sir,mujhe lagta hai hume kal jo khabar mili hai,uska is case se zarur koi talluk hai."

"zara madam ko us bare me batao."

"madam,1 mukhbir se hume pata chala hai ki Ramesh Chand aaj kuchh choti ke heere kharidne wala hai.ye ramesh chand hai to johri lekin ye humesha chori ke maal me hi deal karta hai kyuki isme munafa zyada hota hai lekin vo 1 chhoti machhli hai.hume khabar mili hai ki aaj jo heere vo kharidne vala hai unki keemat koi 2 lakh rupayo ke karib hogi.ramesh aisi badi deal akele nahi kar sakta to iska matlab vo bas 1 bicholiya hai,1 se heere leke dusre kop bechega & dalali kha jayega."

"aap kya karne ki soch rahe hain is bare me?",divya faraz se mukhatib hui.

"raid dalenge.jaise hi chize adli-badli jayengi,unhe range hatho pakdenge taki unhe saza dilwane me aasani ho."

"aap bura na mane to hum bhi aapke sath chalen?"

"zarur magar aap dono sirf dekh sakte hain agar koi karvai karni padi to aap uska hissa nahi banenge."

"thik hai."

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"memsahab,aap Mahesh ke ghar pahuncho main 30 minute me vaha pahunchta hu."

"ok.",Nina ne fone rakha & nikal padi.usne 1 kali jeans & t-shirt pehni thi & sath me kala chashma bhi lagaya hua tha.uske baad usne 1 kala dupatta leke apne chehre pe aise lapet liya mano dhoop se bachna chah rahi ho lekin uska asli maqsad to apna chehra chhupana tha.

20 minute baad vo mahesh ke ghar ke bahar khadi thi tabhi vaha Hira 1 bike se pahuncha,"ye lo chabhiya & jaldi andar chalo.",mahesh factory pahunchte hi apni chabhiya 1 daraz me rakh deta tha & fir kaam me mashgul ho jata tha.in chabhiyo ko vo sham ko factory chhodte waqt hi nikalta tha.isi baat ka fayda uthake hira ne chabhiya nikal li thi & ab nina ke sath mahesh ke ghar me dakhil ho raha tha.

nina yaha pehle bhi aa chuki thi & use andar ke chappe-2 ke bare me malum tha.vo seedha mahesh ke bedroom me pahunchi & uski almari khol ekhne lagi.

"hum dhoond kya rahe hain?",hira kamre me rakhe 1 chhote se cupboard ko khangal raha tha.

"koi bhi aisi chiz joki mahesh ke khilaf istemal ho sakti hai & dhyan rahe baad me sara saman jyo ka tyuo rakhna hai taki use shaq na ho.",dono ne pura bedroom chhan liya magar nina ko aisa kuchh bhi hath nahi laga jo kaam ka hota bas kuchh

XXX dvds & nangi kitaben jinka lutf vo mahesh ke sath pehle utha chuki thi.use talash thi kisi aise bank statement ki,kisi aise kagzat ki jis se mahesh ke kisi ulte-seedhe dhandhe ka pata chale.vo 1 businessman tha & aisa ho nahi sakta tha ki tax bachane ke liye usne kabhi koi kanoon maroda na ho.

1 ghante tak vo uske ghar ko chhante rahe magar kuchh bhi hath nahi laga.nina thak ke mahesh ki study table pe lagi kursi pe baith gayi & apna matha sehlane lagi.

"chalen kya?",hira ne 1 shelf ki kitabe thik kar puchha.

"hun.",nina ne anmane dhang se study table ki daraze kholi.1 ke neeche 1 teen daraze thi & fir 1 bada cabinet.pehli daraz me bas pens,staplers,pins,clips jaisi chize padi thi.dusri me 2-3 diaries thi joki bilkul kori thi.teesri daraz me kuchh kagzat the & 1 chhota sa foto album joki studio vale reel saaf karne ke baad muft pakdate hain.

nina us album ko palatne lagi.tasviro ko dekh ke lagta tha ki vo mahesh ke kisi bahut karibi rishtedar ke kisi jalse me khichi gayi hain.aakhri panne me nina ko plastic cover me 2 tasviro ke bajaye 3 tasvire dikhi.teesri tasvir dono ke beech chhupi hui thi.nina ne us tasvir ko nikala & uske chere ka utra rang fir se khil utha....tum mere sath khel rahe the na mahesh,ab main tumhare sath khelungi & iske sath bhi,usne tasvir me mahesh ke sath khadi ladki ko dekha & muskurayi,"chalo.",vo kursi se uthi & hira ke sath nikal gayi.

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Panchmahal police ke jawan ACP faraz ke sath apni-2 position sambhale hue the.panchmahal railway station ke yard ke sunsan hisse me 1 zang kha rahi train ke coach ke 1 dabbe me khada ramesh chand us aadmi ka intezar kar raha tha.police sabhi entry & exit points ki nigrani kar rahi thi.1 constable digital video camera thame aage badha & us coach ke barabar me lagi dusri coach se ramesh chand ki harkato ko camere me qaid karne laga.

unka mukhbir 1 railway ki maalgadiyo me saman chadhane vala loader vahi baitha unghne ka natak kar raha tha & beedi pi raha tha.ab tak vo 3 beediya pi ke unke tote fenk chuka tha.achanak usne aankhe kholi & kuchh der baad agdayi le khada ho gaya fir usne bidi zamin pe girayi & apni chappal tale masal vaha se jane laga.usne police ko us aadmi ke aane ka ishara kar diya tha.sare police vale chaukanne ho sabhi rasto ko dekhne lage.kul 3 jagaho se yard me ghusa ja sakta tha.

1 motorcycle ki halki-2 aavaz aa rahi thi magar un rasto pe koi gadi aati dikh nahi rahi thi.faraz yard ki deewar ke paas lage saman ke peechhe khada ho andar aane vale raste ko dekh raha tha.tabhi divya ne uske kandhe pe hath rakh us zang lagi gadi ke aage ki or ishara kiya jaha se 1 motorcycle tracks pe chalti hui train ki or aa rahi thi.

"chalak & shatir lagta hai.",faraz fusfusaya & ishare se apne logo ko savdhan kiya.bike savar ne bike train ke pehle dabbe ke samne roki & apni chabhi nikal ke charo taraf dekha.vo kali jacket & jeans me tha & sar pe laga kala helmet & kala visor uske chehre ko pura chhupaye hue tha.train ke aage koi engine nahi tha & pehla dabba darasal aam train ka aakhiri dibba tha jisme guard cabin hota hai.vo usi cabin se andar ghusa & lumbe-2 dag bharta ramesh chand ke cabin me pahuncha joki shuru se teesre number pe tha.

ramesh chand ne apni kamiz ke andar se 1 polythene ka packet nikal use andar rakhe note dikhaye to usne bhi jeb se bahut chhoti si potli khol use heere dikhaye.faraz,professor & divya ye sab nahi dekh pa rahe the magar sabhi kuchh police video me record ho raha tha.deal hote hi video-recording karne vale constable ke ishare pe policevalo ne fauran coach ko gher liya,"hath uthake coach se bahar aao.",faraz ki kadakdar aavaz gunji.

1 pal ko ramesh chand & vo bike savar chaunk gaye lekin sambhalte hi unhone bhagne ki koshish ki jo ki swabhavik tha magar uske baad jo hua kisi ne uski umeed nahi ki thi.bike savar ne furti se apni jacket se 1 pistol nikali & ramesh chand ke seene me mari fir uske nishane pe dibbe me 2 taraf se ghuste constable the.goliya chalat vo apni bike ki taraf bhaga to faraz,divya & professor teeno 1 sath hosh me aye & uski bike ki or bhage.

faraz ne bike pe goliya chalayi ki uske tyres puncture kar de magar uska nishana chuka & goli bike ki seat pe lagi.bike savar bike tak phuncha,pistol ko apni jeb ke havfale kiya & bike pe baith gaya & bike start ki magar thik usi samay uske karib sabse pehle pahunchi divya ne use 1 kick uske sar ke peechhe mari jis se uska helmet gir gaya magar us chalak insan ne 1 kala naqab bhi pehna tha.usne bike gear me daal tezi se aage badhayi to faraz ki 1 goli uski dayi banh me lagi & vo chikha magar bike ko dheema nahi kiya.

aur tab professor dixit joki vaha maujood sabse zyada umra vala insan tha kisi 16-17 baras ke ladke ki furti se kuda & seedha bike savar ke peechhe seat pe gira.khud ko sambhal usne peechhe se use pakad use bike se girane ki koshish ki magar vo aadmi bhi kam nahi tha.1 hath se bike ke throttle ko pura ghumaye dusre se vo apni kohni baar-2 professor ko vaha maar raha tha jaha uske gurde the.professor ne bhi paintara badla & uski jeb me rakhi pistol nikalne ki koshish karne laga.is haal me bhi vo bike ko tezi se bhagaye ja raha tha.jab use laga ki ab professor uski pistol nikal lega tab usne kalabazi dikhate hue bike ke agle tyre ko hawa me khada kar diya.

professor achanak badle is paintre se sambhal nahi paya & pith ke bal gir gaya.police vale goliya chalate uske peechhe bhage magar vo vaha se nikal bhagne me kamyab ho chuka tha.

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"maine kaha tha na ki aaplog kuchh nahi karenge fir kya zarurat thi aapko us se ulajhne ki?!",faraz gusse me baukhlaya hua tha,"..aapko goli na lage isliye mere aadmi peechhe se uspe goli nahi chala pa rahe the.",hospital ke kamre me 1 nurse professor ke zakhmo pe malham laga rahi thi.

"mr.faraz,aap bhi jante hain & main bhi..",divya ki aankho se angare baras rahe the,"..ki hum agar kuchh nahi karte to bhi natija vahi hota.aap is baat ko manane se kyu katra rahe hain ki aapki planning me kami reh gayi thi & aapne ye socha bhi nahi tah ki vo tracks ke raste bike se aa sakta hai.",baat sahi thi & faraz ko bhi is baat pe khij aa rahi thi.vo khamosh ho gaya & khidki se bahar dekhne laga.

"ACP sahab..",professor dixit ko koi khas chot nahi aayi thi bas kharonche thi,"..main mafi chahta hu.aap vaha ke in-charge the & hume aapki kahi baato ko maanana chahiye the magar us waqt main hi uske sabse karib tha & mujhe laga ki agar maine koshish nahi ki to vo humare hath se nikal jayega & isisliye main uske upar kud gaya."

"hun.",faraz ne sar hilaya & kamre se nikal gaya,"..daftar chaliye,dekhe kya hath laga hai humare.",nikalte hue usne kaha.

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Jasjit Pradhan tadke hi uth gaya tha & 7 bajte-2 taiyyar hoke lawn me baitha chai peete hue khabre padh raha tha ki tabhi 1 naukar ne us se aake kuchh kaha,"kya?!& tumne unhe gate pe rok rakha hai!bevkuf!",vo kursi se utha & gate ki or lagbhag bhagne hi laga,"..jao jake memsahab ko bula ke le aao."

"father..!",jasjit muskurata hua us bhale chehre vale shakhs ke paas pahuncha jo apni car se utar uske darwaze ke paas khada tha,"..i'm sorry,father.in logo ne aapko aise roka..i'm really sorry!",father ne apna hath badhaya to hath milate hue vo unhe andar le aaya.dono sath-2 chalte hue uske lawn me aa gaye.

ye insan tha Father Vincent O'Brien,St.Patrick's College ka principal.st.patrick's Devalay ka hi nahi balki mulk ka jana-mana college tha & usme dakhila pana bade fakhra ki baat samjhi jati thi.vaha ke students duniya bhar me faile the & zyadatar bahut kamyab the.unhi me se 1 tha jasjit.jab jasjit college me tha to father vincent principal nahi the balki vaha English padhaya karte the & shayad college ke sabse favourite professor the.

"hello Anjali."

"hello,father.",anjali muskurayi & 1 kursi pe unhe baithne ka ishara kiya,"kaise hain aap?"

"badhiya.",anjali ne unhe juice ka 1 glass thamaya.

"thanx.",vo jasjit se mukhatib hue,"..mafi chahta hu ki is waqt jab tum elections me itne busy ho,tumhe paershan kar raha hu."

"please,father.yu sharminda na karen.aap kya koi gair hain?"

"to beta,kal raat tum aa rahe ho na?"

"zarur father,Annual Charity Ball ko main kaise bhul sakta hu."

"thanx,son.anjali & tum vaha aaoge to aur log bhi ayenge & hum zyada se zyada paise ikattha kar payenge jis se aur zyada zaruratmando ki madad ho payegi."

"father,aapke kisi kaam aa saku ye to mere liye humesha hi bade fakra ki baat rahi hai."

"st.patrick's ko bhi tumpe naaz hai beta &..",vo anjali ki or ghume,"..& tumpe bhi,anjali.jasjit ki kamyabi ki aadhi haqdar tum bhi ho."

"thanx,father.",anjali thoda sharma gayi & nazre jhuka li & fir father se nazar bacha apne pati ko dekha.vo bhi muskura raha tha magar us muskurahat me khushi,pyar ke alawa kuchh aur bhi tha..kya,ye anjali samajh nahi payi & fir father & pati ki guftgu me shamil ho gayi.

vo tasvir badi kaam ki thi.usne uski copy banwa "Afra-tafri me ye potli uske hatho se vahi gir gayi thi & ye paise bhi vahi chhut gaye the.",Faraz ne apni mez pe padi chizo ki or ishara kiya.

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--40

गतान्क से आगे............-

दिव्या ने पोटली खोली तो उसमे से 2 हीरे निकाले जिन्हे उसने प्रोफेसर दीक्षित की ओर बढ़ा दिया.उसने उन्हे देख बस सर हिला दिया.दिव्या ने अपने बॅग से उस हार की तस्वीर निकाली जोकि सेठ मोहन लाल की दुकान से लूटा गया था,"देखिए,हीरे बिल्कुल वैसे ही हैं."

"यानी हार तोड़ के हीरे-पन्ने बेचे जा रहे हैं.",फ़राज़ तस्वीर देख रहा था,"दिव्या जी,मैं अपने आदमियो को इस पैसे का पता लगाने के लिए लगा देता हू.इस वक़्त पूरे शहर की पोलीस 1 ऐसे आदमी की तलाश मे है जिसकी दाई बाज़ू पे गोली लगी है.साथ ही उसकी बाइक & उसके हुलिए की पूरी जानकारी उनके पास है.हुमारी गिरफ़्त मे आते ही हम आपको ज़रूर इत्तिला करेंगे."

"थॅंक यू.हम भी वापस डेवाले लौट रहे हैं & अगर हमे कुच्छ पता चला तो हम भी आपके साथ ज़रूर उसे बाँटेगे.",दिव्या अपना बॅग उठाके खड़ी हो गयी थी मगर प्रोफेसर वैसे ही बैठा हुआ था.

"आप दोनो को क्या लगता है..",वो अपने पुराने अंदाज़ मे अपने होठ के उपर अपनी उंगली & अंगूठा फिरा रहा था,"..इतने दीनो की खामोशी के बाद अचानक ये हीरे बेचने की ऐसी कौन सी ज़रूरत आ पड़ी थी उसे?",उसने दोनो की ओर देखा,"..& वो अकेला केवल अपने हिस्से का माल बेच रहा था या अपने पूरे गॅंग के लिए वाहा आया था?"

"ये तो उसके पकड़ मे आने के बाद ही साफ होगा.",फ़राज़ मुस्कुराया.

"फिर भी एसीपी साहब आप सोचते क्या हैं?"

ह्म्म..",फ़राज़ ने सांस भरी,"..मैं सोचता हू कि वो अकेला अपने हिस्से के हीरे बेच रहा था.मुझे नही लगता कि अगर 5 लोगो का गॅंग है तो वो ऐसे काम मे अपने साथी को यू अकेला भेजेंगे.1 तो ख़तरा है दूसरे पैसो के मामले शरीफ लोग किसी का भरोसा नही करते ये तो फिर भी बदमाश हैं."

"तो क्या गॅंग टूट चुका है?"

"हो सकता है & नही भी.हो सकता है इतना लंबा हाथ मारने के बाद सब आराम कर रहे हैं & इस शख्स को जिसे आज गोली लगी है,कोई ज़रूरत आन पड़ी हो या फिर उसने सारे पैसे उड़ा दिए हो."

"हूँ,वैसे 1 बात है जो मैने आपलोगो को अभी तक नही बताई है."

"क्या?",दिव्या & फ़राज़ 1 साथ बोले.

"उसके गले पे 1 टॅटू था."

"क्या?कैसा?..उसका डिज़ाइन बताइए..पोलीस आर्टिस्ट को बुलाओ..",फ़र्ज़ ने हुक्म दिया,"..फ़ौरन..!"

"उसकी ज़रूरत नही,मैं ही बना देता हू स्केच.",प्रोफेसर ने पॅड & पेन्सिल उठा लिया & हाथ चलाने लगा,"..उसकी गर्दन पे ठीक नीचे गर्दन के गिर्द टॅटू ऐसे बना था जैसे उसने कोई चॉकर पहना हो.पीछे से मुझे लगा भी कि उसने चॉकर पहना है मगर वो 1 साँप का टॅटू था जोकि उसके गले के गिर्द लिपटे बैठा था & उसका मुँह सामने ..",प्रोफेसर ने अपने गले के नीचे के गड्ढे के ठीक उपर इशारा किया,"..यहा ऐसे था..",उसने स्केच बनाया,"..सामने देखता हुआ फन काढ़े हुए."

"ग्रेट प्रोफेसर!फ़ौरन ये जानकारी विरेलेस्स पे दो.",फ़राज़ ने हुक्म सुनाया.प्रोफेसर डिक्सिट मुस्कुराया & उस से हाथ मिलके अपनी प्रेमिका के साथ वाहा से निकल आया.

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"जैसे बताया था,फोटो वैसे ही वापस रख दी ना",अपने ड्रॉयिंग रूम मे नीना बिल्कुल नंगी सोफे पे बैठी थी.उसने बाई टांग सोफे के उपर तलवा जमा के रखी थी & दाई गाळीचे पे.उसके दाए हाथ मे रिमोट था & वो टीवी के चॅनेल चेंज कर रही थी.

"हूँ.",उसके सामने अपने घुटनो पे उसके जैसे ही नंगा बैठा हीरा अपनी जीभ से उसकी दाई अन्द्रुनि जाँघ चाट रहा था,"..उसकी मेज़ की दराज़ के अंदर जो आल्बम का आख़िरी पन्ना था उसकी निचली 2 फोटोस के बीच मे.",उसकी लपलपाति जीभ नीना की गुलाबी चूत पे पहुँच गयी & उसे चाटने लगी.

"उउन्न्ञणन्..गुड..",नीना कसमसाई & अपनी दाई टांग उठा हीरा के बाए कंधे के उपर चढ़ा दी.वो तस्वीर बड़ी काम की थी.उसने उसकी कॉपी बनवा के उसे वापस महेश अरोरा के घर मे रखवा दिया था.अब ये सोचना था कि उस तस्वीर का इस्तेमाल कैसे किया जाए.हीरा की लपलपाति जीभ ने उसके जिस्म को पूरी तरह से मस्त कर दिया था.उसकी चूत से रस बहने लगा था & वो सोफे पे रखी हुई अपनी मखमली गंद धीरे-2 हिला रही थी.उसने चैनल चेज किए & स्क्रीन पे बलदेव काबरा उर्फ भाय्या जी नज़र आने लगे & उसके दिमाग़ मे 1 तरकीब आ गयी.उसका दिल घुशी से झूम उठा.अब उसका काम हो जाएगा.

उसी वक़्त हीरा की जीभ ने अपना कमाल दिखाया & वो झाड़ गयी.उसके झाड़ते ही हीरा खड़ा हो गया & उसकी दोनो टाँगे फैला दी & अपना लंड उसकी चूत मे घुसाते हुए उसके उपर झुक गया....ये कमीना & महेश बस चुनाव तक उसके काम के थे,1 बार मुकुल जीत जाए बस....".ऊव्ववव....!",हीरा ने अपना तगड़ा लंड बड़ी ज़ोर से अंदर धकेला तो रिमोट गाळीचे पे गिरा उसने अपनी बाहे उसकी गर्दन मे डाल दी & उसके चौड़े कंधे सहलाने लगी..उसके बाद इन्हे वो दूध मे पड़ी मक्खी की तरह निकाल फेंकेगी..तब तक जसजीत भी हार चुका होगा & डेवाले सिर्फ़ उसका होगा..सिर्फ़ उसका..!

मगर तब तक इन दोनो मर्दो को काबू मे रखना ज़रूरी था..",ओह.....हीरा..",नीना ने अपना गाल उसके गाल से सटा के रगड़ा & उसकी पीठ पे ऐसी अड़ा से अपने हाथ चलाए कि हीरा तो बस खुशी से पागल हो गया,"..आन्न्न्नह...ज़ोर से...और ज़ोर से.....हाआंन्‍नणणन्......हीराआआ.......!",वो मस्ती मे पागल होने का नाटक करती आहे निकालने लगी & उस से चिपेट गयी.हीरा ये सोच के जोश से पागल हुए जा रहा था कि ऐसी रईस,खूबसूरत,ऊँची सोसाइटी की औरत उसके जिस्म,उसकी चुदाई से मस्ती मे बहाल हो रही है जबकि उसके बाए कंधे पे ठुड्डी टिकाए वो बस टीवी पे नज़र आ रहे भाय्या जी को देख रही थी.

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स्ट्रीट.पॅट्रिक'स कॉलेज के मैं गेट पे गाडियो की लंबी कतार अंदर जाने का इंतेज़ार कर रही थी.आज आन्यूयल चॅरिटी बॉल था जिसमे केवल पुराने स्टूडेंट्स को ही आने की इजाज़त थी & स्टूडेंट्स भी इस खास मौके मे ज़रूर शरीक होते थे.सभी को टिकेट खरीदना होता था & इन टिकेट्स की बिक्री से जमा हुए पैसे ज़रूरतमंडो के भले मे लगाए जाते थे.आज शाम भी हर साल की तरह सभी यहा इकट्ठा होते थे उसके बाद कुच्छ गेम्स खेले जाते थे,2-3 लोग भाषण देते थे & उसके बाद खाना होता था लेकिन सबसे ज़रूरी चीज़ होती थी खाने के ठीक पहले का बॉल.आज से 100 साल पहले कॉलेज के तब के प्रिन्सिपल ने इस बॉल की शुरुआत की थी.तब तो केवल अँग्रेज़ ही इसका हिस्सा होते थे & बॉल डॅन्स उनकी तहज़ीब का हिस्सा था लेकिन आज भी उस बरसो पुरानी परंपरा को कॉलेज ने अपनाया हुआ था & इसमे शामिल होने वाले सभी लोगो को भी इसमे काफ़ी मज़ा आता था.

आज की शाम तो 1 ही इंसान सभी की नज़रो का केन्द्र बना हुआ था-जसजीत प्रधान.सभी को उमीद थी कि अगला CM वही बनेगा & इसलिए सभी उसके करीब आना चाह रहे थे.जसजीत के भी यहा आने का मक़सद केवल इस नेक काम का हिस्सा बनना नही था.वो सबसे पहले 1 राजनेता था & उसके लिए सबसे ज़रूरी चीज़ आने वाला चुनाव जितना था.सबसे ज़रूरी था कि उसे हमारे समाज के सबसे नीचे तबके के लोगो का साथ मिले & इसलिए अपनी हर तक़रीर मे वो वो ज़्यादातर उनके भले & फ़ायदे की ही बात करता था लेकिन इस सबसे ऊँचे,रईस तबके को भी वो नज़रअंदाज़ नही कर सकता था जिसके दिए गये पैसो से ही वो ये चुनाव लड़ पाता था & ये बॉल उन लोगो से मिल उनका शुक्रिया अदा करने का सबसे बढ़िया मौका था.

"लॅडीस & गेंटल्मन..",लोगो से घिरे जसजीत & अंजलि ने जब फादर विनसेंट की आवाज़ माइक पे सुनी तो उनका ध्यान उधर गया,"..अब मैं आज की शाम के हमारे खास मेहमान & उनकी पत्नी को यहा बुलाना चाहूँगा.प्लीज़ वेलकम मिसेज़.अंजलि & मिस्टर.जसजीत प्रधान.",तालियो की गड़गड़ाहट के बीच पति-पत्नी फादर के पास पहुँचे,"..प्लीज़ लेड दा कपल्स ऑन दा फ्लोर.",फादर के इशारे पे जसजीत & अंजलि सबसे पहले डॅन्स फ्लोर पे पहुँचे & उसके बीचोबीच खड़े हो गये.उनके पीछे बाकी जोड़े भी वाहा आए & बॅंड ने म्यूज़िक बजाना शुरू कर दिया जिसकी ताल पे जोड़ो ने बॉल डॅन्स शुरू किया.

अंजलि ने क्रीम कलर की सारी पहनी थी & स्लीव्ले ब्लाउस.उस लिबास मे उसका गोरा रंग और चमक रहा था.पति के साथ यू सबके सामने बाहो मे बाहे डाल के नाचने से उसे थोड़ी शर्म आ रही थी & उसके गोरे रंग के साथ घुली हया की लाली ने उसके रूप को और भी दिलकश बना दिया था,"ऐसे मत देखो ना.कोई देख लेगा तो!",पति की तारीफ भरी निगाहो का रुख़ उसने मोड़ने की कोशिश की.

"तो क्या हुआ?अपनी बीवी को ही देख रहा हू...",जसजीत ने बीवी की संगमरमरी कमर को हल्के से दबाया,"..& मुझे टोक रही हो,उनको को कुच्छ क्यू नही कहती जो तुम्हे देखे जा रहे हैं?"

"मुझे बस तुमसे मतलब है,उनसे नही.",अंजलि मुस्कुराइ....जसजीत के हाथो की छुअन मे कितना सुकून था.

"अच्छा?"

"हां.",तभी जसजीत के चेहरे का रंग बदल गया & मुस्कान गायब हो गयी.

"क्या हुआ?",अंजलि ने पति की नज़रो का पीछा किया तो उसे नाचते हुए पास आ गया 1 जोड़ा दिखा-ये नीना & मुकुल थे.

"हाई!नीना..हाई!मुकुल भाय्या..कैसे हैं?",अंजलि मुस्कुराइ.

"हाई.",नीना ने ठंडे पन से जवाब दिया.आसमानी रंग के 1 स्ट्रॅप वाले लंबे,फ्लोयिंग गाउन मे वो भी बड़ी खूबसूरत लग रही थी.

"अच्छा हू,भाभी.तुम कैसी हो?"

"बढ़िया.नीना,तुम बड़ी खूबसूरत लग रही हो?",जसजीत भाई को देख भी नही रही थी.

"थॅंक्स.",मुकुल ने बीवी से कुच्छ कहा जो शायद उसे पसंद नही आया लेकिन फिर भी उसने शायद बात मान ली.

"भाय्या,मे आइ?",भाभी के साथ डॅन्स की इजाज़त माँगता मुकुल भाई के पीच्चे खड़ा था.जसजीत को भी मजबूरन उसकी बात माननी पड़ी & उसने अपने छ्होटे भाई की बीवी की ओर हाथ बढ़ाया.

"भाभी,भाय्या मुझसे नाराज़ है ना?",अंजलि ने कोई जवाब नही दिया.

"भाभी,मैं मजबूर था.मेरे भी कुच्छ अरमान है.मैं तो भाय्या के खिलाफ जाने की सोच भी नही सकता इसलिए तो बद्डल से इनडिपेंडेंट खड़ा हो गया."

"भाय्या,1 बार उनको बोल तो देते.",अंजलि ने देवर को देखा.

"भाभी,आपसे मैने कभी कुच्छ च्छुपाया है.नही ना?..आप अच्छी तरह जानती हैं कि आजतक मैं किसी की उमीद पे खरा नही उतरा..ना मम्मी-पापा की,ना भाय्या की & ना ही नीना की.अगर भाय्या को बताता तो वो मानता क्या?..कभी नही..मगर मैं जानता हू भाभी कि इस बार मैं कामयाब हो जाऊँगा & क्या अब मुझे ये कहने की ज़रूरत है कि मैं भी तो भाय्या के ही परिवार का हिस्सा हू."

"भाय्या..",अंजलि की आँखो मे दर्द का भाव था,"..ऐसी बाते मत कीजिए.औरो की और जाने मेरा तो इकलौता देवर हमेशा मेरी ज़रूरत के वक़्त मेरे साथ खड़ा रहा है & मेरे लिए वो इस दुनिया का दूसरा सबसे भरोसेमंद इंसान है क्यूकी पहले तो उसके भाय्या हैं!",अंजलि की बात पे मुकुल हंस पड़ा,"..बस ऐसे ही खुश रहिए."

"जानते हैं,भाय्या ये उलझने क्यू हो रही हैं?",कुच्छ देर बाद अंजलि ने बात आगे बढ़ाई,"..क्यूकी हम लोग मिलते-जुलते नही."

"भाभी..",मुकुल ने अपने बड़े भाई के साथ नाचती अपनी बीवी की ओर देखा,"..आप तो सब जानती हैं."

"वो ठीक है पर बच्चे तो मिल सकते है ना & फिर खास मौके पे भी अब तो आपने आना बंद कर दिया."

"आप भी तो नही आती?",मुकुल के कहने के अंदाज़ से अंजलि को अपनी शादी के ठीक बाद का वक़्त याद आया जब मुकुल उसके आगे-पीछे लगा रहता था & कभी-कभार भाई-भाभी से बच्चो की तरह ज़िद कर बैठता था.

"अच्छा बाबा,मैं ही आऊँगी पहले.अब खुश?",अंजलि हँसी तो मुकुल के चेहरे पे शायद महीनो बाद सच्ची खुशी वाली मुस्कान फैल गयी.

"मुकुल को बद्डल से खड़ा होने के लिए तुम ही ने कहा है?",जसजीत ने नीना को देखा.

"मुकुल कोई दूध पीता बच्चा तो है नही,भाई साहब.उसकी मर्ज़ी हुई वो खड़ा हो गया!"

"नीना..",जसजीत ने बड़ी मुश्किल से गुस्सा ज़ब्त किया हुआ था.उसे हमेशा लगता था कि इस औरत की वजह से उसका भाई उस से दूर हो गया & ये बात बहुत हद तक सच भी थी.उसका हाथ थोडा उसकी पीठ पे कस गया तो नीना चिहुनकि.वो भी इस इंसान से नफ़रत करती थी मगर अभी ना जाने क्यू उसका जिस्म उसके दिल की नही सुन रहा था.उसे 1 अजीब सा मज़ा आ रहा था जसजीत के यू करीब खड़े उसके साथ नाचने मे,"..तमीज़ से बोलो..& फिर उस महेश अरोरा से मदद लेने की क्या ज़रूरत थी?"

"जब आपने हाथ खींच लिए तो गैरो का सहारा लेना ही पड़ता है.",नीना ने मुँह फेर लिया.

"जो काम उसके बस का नही उसमे हाथ क्यू डालता है मुकुल बार-2?",जसजीत ने होंठ भींच लिए.

"जब काम करेगा ही नही तो पता कैसे चलेगा कि बस का है या नही?",नीना ने सर उठा जेठ की नज़रो से नज़रे मिला दी.जसजीत कुच्छ पॅलो तक उसे वैसे ही देखता रहा.नीना को चूत मे कसक महसूस हो रही थी & वो हैरान थी कि जिस से वो नफ़रत करती थी उसके करीब होने से उसे ऐसा कैसे महसूस हो सकता था.

"नीना,उसे उसके परिवार से दूर मत करो.",नीना ने कुच्छ नही कहा बस गर्दन घुमा मुकुल की ओर देखा & वाहा का ऩज़ारा वो मुस्कुरा दी लेकिन जसजीत का चेहरा सख़्त हो गया.

"मे आइ?",मुकुल ने गर्दन घुमाई तो देखा महेश खड़ा है 1 औरत के साथ जिसे वो भी पहचानता था,"हेलो,पूजा."

"कैसी हो?",महेश ने अंजलि की कमर मे बाँह डाल दूसरा हाथ अपने हाथ मे लिया.अंजलि के चेहरे की खुशी गायब थी.मुकुल अब पूजा के साथ डॅन्स कर रहा था.

"जवाब नही दोगि?चलो कोई बात नही..1 वक़्त था अंजलि जब तुम मेरे सवालो का इंतेज़ार किया करती थी."

"महेश,वो वक़्त और था.वो सब बहुत पहले ख़त्म हो चुका है."

"तुम्हारे लिए.मेरे लिए वो सब अभी भी ज़िंदा है.",महेश दबी आवाज़ मे मुस्कुराने का नाटक करता बोल रहा था,"मेरी बाहो मे तुम्हारा शरमाना,तुम्हारे रेशमी जिस्म का एहसास,तुम्हारा मुझसे लिपटना..जोश मे झाड़ते वक़्त मेरा नाम लेना.अपने खूबसूरत अंग मुझे सौंपना & मेरे अंग को हाथो मे भर लेना..-"

"-..महेश,प्लीज़!मैं 2 बच्चो की मा हू अब!"

"वो 2 बच्चे मेरे क्यू नही हैं?..क्यू अंजलि क्यू?..मुझे क्यू छ्चोड़ा तुमने?"

"मैने छ्चोड़ा तुम्हे?..",अंजलि ने धिक्कार भरी हँसी हँसी,"..पुरानी आदत है तुम्हारी अपनी ग़लती दूसरो पे थोपने की.मैने सब सौंपा था तुम्हे इस विश्वास के साथ की पूरी ज़िंदगी तुम्हारे साथ बिताउन्गी मगर तुम ही ने झूठ बोला था पापा से कि तुम्हारी नौकरी लग गयी है अमेरिका मे जब कि तुम नित्थल्ले थे & वो जो धोखाधड़ी की थी तुमने."

"सब तुम्हारे लिए."

"क्यू?मैने तुमसे हमेशा कहा था कि मेरे पापा को सब सच बता दो कि तुम्हारी माली हालत ठीक नही.कोई भी ढंग की नौकरी पकड़ लो,मेरे घरवाले नही भी मानेंगे तो भी मैं तुम्हारे साथ चलूंगी लेकिन तुम्हारे झूठ ने सब गड़बड़ कर दिया.पापा कैसे भरोसा करते 1 बेरोज़गार झूठे पे,बोलो?..अपनी औलाद होगी तो समझोगे,महेश.मेरी सलाह मानो,अपना इलाज कर्वाओ & मुझे भूल जाओ.",अंजलि की ईमानदारी भरी निगाहो का तेज झेलने की हिम्मत नही थी महेश मे,उसने सर घुमा लिया,"..मुकुल.",अंजलि ने बगल से नाचते हुए जा रहे अपने देवर को आवाज़ दी & 1 बार फिर उसके साथ हो ली.महेश अपना मुँह लेके खड़ा रहा.

जसजीत के जिस्म मे आया तनाव नीना ने महसूस किया & उसे बहुत खुशी हुई,तस्वीर मे उसकी जेठानी ही थी महेश के साथ....भाई साहब,आपकी प्यारी पत्नी & आपके सुखी संसार मे देखिए कैसे तूफान लाती हू मैं..वो तूफान आपका करियर भी तहस-नहस कर देगा & फिर बस मैं करूँगी इस शहर पे राज सिर्फ़ मैं!

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--40

gataank se aage............-

Divya ne potli kholi to usme se 2 heere nikle jinhe usne Professor Dixit ki or badha diya.usne unhe dekh bas sar hila diya.divya ne apne bag se us haar ki tasvir nikali joki Seth Mohan Lal ki dukan se loota gaya tha,"dekhiye,heere bilkul vaise hi hain."

"yani haar tod ke heere-panne beche ja rahe hain.",faraz tasvir dekh raha tha,"divya ji,main apne aadmiyo ko is paise ka pata lagane ke liye laga deta hu.is waqt pure shehar ki police 1 aise admi ki talash me hai jiski dayi bazu pe goli lagi hai.sath hi uski bike & uske huliye ki puri jankari unke paas hai.huamri giraft me aate hi hum aapko zarur ittila karenge."

"thank you.hum bhi vapas Devalay laut rahe hain & agar hume kuchh pata chala to hum bhi aapke sath zarur use baantege.",divya apna bag uthake khadi ho gayi thi magar professor vaise hi baitha hua tha.

"aap dono ko kya lagta hai..",vo apne purane andaz me apne hoth ke upar apni ungli & angutha fira raha tha,"..itne dino ki khamoshi ke baad achanak ye heere bechne ki aisi kaun si zarurat aa padi thi use?",usne dono ki or dekha,"..& vo akela keval apne hisse ka maal bech raha tha ya apne pure gang ke liye vaha aaya tha?"

"ye to uske pakad me aane ke baad hi saaf hoga.",faraz muskuraya.

"fir bhi ACP sahab aap sochte kya hain?"

hmm..",faraz ne sans bhari,"..main sochta hu ki vo akela apne hisse ke heere bech raha tha.mujhe nahi lagta ki agar 5 logo ka gang hai to vo aise kaam me apne sathi ko yu akela bhejenge.1 to khatra hai dusre paiso ke mamle sharif log kisi ka bharosa nahi karte ye to fir bhi budmash hain."

"to kya gang tut chuka hai?"

"ho sakta hai & nahi bhi.ho sakta hai itna lumba hath marne ke baad sab aram kar rahe hain & is shakhs ko jise aaj goli lagi hai,koi zarurat aan padi ho ya fir usne sare paise uda diye ho."

"hun,vaise 1 baat hai jo maine aaplogo ko abhi tak nahi batayi hai."

"kya?",divya & faraz 1 sath bole.

"uske gale pe 1 tattoo tha."

"kya?kaisa?..uska design bataiye..police artist ko bulao..",farz ne hukm diya,"..fauran..!"

"uski zarurat nahi,main hi bana deta hu sketch.",professor ne pad & pencil utha liya & hath chalane laga,"..uski gardan pe thik neeche gardan ke gird tattoo aise bana tha jaise usne koi choker pehna ho.peechhe se mujhe laga bhi ki usne choker pehna hai magar vo 1 sanp ka tattoo tha joki uske gale ke gird lipte baitha tha & uska munh samne ..",professor ne apne gale ke neeche ke gaddhe ke thik upar ishara kiya,"..yaha aise tha..",usne sketch banaya,"..samne dekhta hua fan kadhe hue."

"great professor!fauran ye jankari wireless pe do.",faraz ne hukm sunaya.professor dixit muskuraya & us se hath milake apni premika ke sath vaha se nikal aaya.

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"jaise bataya tha,foto vaise hi vapas rakh di na",apne drawing room me Nina bilkul nangi sofe pe baithi thi.usne bayi tang sofe ke upar talva jama ke rakhi thi & dayi galiche pe.uske daye hath me remote tha & vo tv ke channel change kar rahi thi.

"hun.",uske samne apne ghutno pe uske jaise hi nanga baitha Hira apni jibh se uski dayi andruni jangh chaat raha tha,"..uski mez ki daraz ke andar jo album ka aakhiri panna tha uski nichli 2 fotos ke beech me.",uski laplapati jibh nina ki gulabi chut pe pahunch gayi & use chaatne lagi.

"uunnnnn..good..",nina kasmasai & apni dayi tang utha hira ke baye kandhe ke upar chadha di.vo tasvir badi kaam ki thi.usne uski copy banwa ke use vapas Mahesh Arora ke ghar me rakhwa diya tha.ab ye sochna tha ki us tasvir ka istemal kaise kiya jaye.hira ki laplapati jibh ne uske jism ko puri tarah se mast kar diya tha.uski chut se ras behne laga tha & vo sofe pe rakhi hui apni makhmali gand dhire-2 hila rahi thi.usne channle chnage kiye & screen pe Baldev Kabra urf Bhaiyya ji nazar aane lage & uske dimagh me 1 tarkib aa gayi.uska dil ghushi se jhum utha.ab uska kaam ho jayega.

usi waqt hira ki jibh ne apna kamal dikhaya & vo jhad gayi.uske jhadte hi hira khada ho gaya & uski dono tange faila di & apna lund uski chut me ghusate hue uske upar jhuk gaya....ye kamina & mahesh bas chunav tak uske kaam ke the,1 baar Mukul jeet jaye bas....".oowwww....!",hira ne apna tagda lund badi zor se andar dhakela to remote galiche pe gira usne apni baahe uski gardan me daal di & uske chaude kandhe sehlane lagi..uske baad inhe vo doodh me padi makkhi ki tarah nikal fenkegi..tab tak Jasjit bhi haar chuka hoga & devalay sirf uska hoga..sirf uska..!

magar tab tak in dono mardo ko kabu me rakhna zaruri tha..",ohhhhh.....hira..",nina ne apna gaal uske gaal se sata ke ragda & uski pith pe aisi ada se apne hath chalaye ki hira to bas khushi se pagal ho gaya,"..aannnnhhhhhh...zor se...aur zor se.....haaaannnnnn......hiraaaaaa.......!",vo masti me pagal hone ka natak karti aahe nikalne lagi & us se chipat gayi.hira ye soch ke josh se pagal hue ja raha tha ki aisi raees,khubsurat,oonchi society ki aurat uske jism,uski chudai se masti me behal ho rahi hai jabki uske baye kandhe pe thuddi tikaye vo bas tv pe nazar aa rahe bhaiyya ji ko dekh rahi thi.

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St.Patrick's College ke main gate pe gadiyo ki lumbi katar andar jane ka intezar kar rahi thi.aaj Annual Charity Ball tha jisme keval purane students ko hi aane ki ijazat thi & students bhi is khas mauke me zarur sharik hote the.sabhi ko ticket kharidna hota tha & in tickets ki bikri se jama hue paise zaruratmando ke bhale me lagaye jate the.aaj sham bhi har saal ki tarah sabhi yaha ikattha hote the uske baad kuchh games khele jate the,2-3 log bhashan dete the & uske baad khana hota tha lekin sabse zaruri chiz hoti thi khane ke thik pehle ka ball.aaj se 100 saal pehle college ke tab ke principal ne is ball ki shuruat ki thi.tab to keval angrez hi iska hissa hote the & ball dance unki tehzib ka hissa tha lekin aaj bhi us barso purani parampara ko college ne apnaya hua tha & isme shamil hone vale sabhi logo ko bhi isme kafi maza aata tha.

aaj ki sham to 1 hi insan sabhi ki nazro ka kendra bana hua tha-Jasjit Pradhan.sabhi ko umeed thi ki agla CM vahi banega & isliye sabhi uske karib aana chah rahe the.jasjit ke bhi yaha aane ka maqsad keval is nek kaam ka hissa banana nahi tha.vo sabse pehle 1 rajneta tha & uske liye sabse zaruri chiz aane vala chunav jitna tha.sabse zaruri tha ki use humare samaj ke sabse neeche tabke ke logo ka sath mile & isliye apni har takrir me vo vo zyadatar unke bhale & fayde ki hi baat karta tha lekin is sabse oonche,raees tabke ko bhi vo nazarandaz nahi kar sakta tha jiske diye gaye paiso se hi vo ye chunav lad pata tha & ye ball un logo se mil unka shukriya ada karne ka sabse badhiya mauka tha.

"ladies & gentleman..",logo se ghire Jasjit & Anjali ne jab Father Vincent ki aavaz mike pe suni to unka dhyan udhar gaya,"..ab main aaj ki sham ke huamre khas mehman & unki patni ko yaha bulana chahunga.please welcome Mrs.anjali & mr.jasjit pradhan.",taliyo ki gadgadahat ke beech pati-patni father ke paas pahunche,"..please lead the couples on the floor.",father ke ishare pe jasjit & anjali sabse pehle dance floor pe pahunche & uske beechobeech khade ho gaye.unke peechhe baki jode bhi vaha aaye & band ne music bajana shuru kar diya jiski taal pe joo ne baal dance shuru kiya.

anjali ne cream color ki sari pehni thi & sleeveless blouse.us libas me uska gora rang aur chamak raha tha.pati ke sath yu sabke samne baaho me baahe daal ke nachne se use thodi sharm aa rahi thi & uske gore rang ke sath ghuli haya ki lali ne uske roop ko aur bhi dilkash bana diya tha,"aise mat dekho na.koi dekh lega to!",pati ki tarif bhari nigaho ka rukh usne modne ki koshish ki.

"to kya hua?apni biwi ko hi dekh raha hu...",jasjit ne biwi ki sangmarmari kamar ko halke se dabaya,"..& mujhe tok rahi ho,ungairo ko kuchh kyu nahi kehti jo tumhe dekhe ja rahe hain?"

"mujhe bas tumse matlab hai,unse nahi.",anjali muskurayi....jasjit ke hatho ki chhuan me kitna sukun tha.

"achha?"

"haan.",tabhi jasjit ke chehre ka rang badal gaya & muskan gayab ho gayi.

"kya hua?",anjali ne pati ki nazro ka peechha kiya to use nachte hue paas aa gaya 1 joda dikha-ye nina & mukul the.

"hi!nina..hi!mukul bhaiyya..kaise hain?",anjali muskurayi.

"hi.",nina ne thande pan se jawab diya.asmani rang ke 1 strap wale lumbe,flowing gown me vo bhi badi khubsurat lag rahi thi.

"achha hu,bhabhi.tum kaisi ho?"

"badhiya.nina,tum badi khubsurat lag rahi ho?",jasjit bhai ko dekh bhi nahi rahi tha.

"thanx.",mukul ne biwi se kuchh kaha jo shayad use pasand nahi aaya lekin fir bhi usne shayad baat maan li.

"bhaiyya,may i?",bhabhi ke sath dance ki ijazat mangta mukul bhai ke peechhe khada tha.jasjit ko bhi majburan uski baat manani padi & usne apne chhote bhai ki biwi ki or hath badhaya.

"bhabhi,bhaiyya mujhse naraz hai na?",anjali ne koi jawab nahi diya.

"bhabhi,main majbur tha.mere bhi kuchh arman hai.main to bhaiyya ke khilaf jane ki soch bhi nahi sakta isliye to Baddal se independent khada ho gaya."

"bhaiyya,1 baar unko bol to dete.",anjali ne devar ko ekha.

"bhabhi,aapse maine kabhi kuchh chhupaya hai.nahi na?..aap achhi tarah janti hain ki aajtak main kisi ki umeed pe khara nahi uta..na mummy-papa ki,na bhaiyya ki & na hi nina ki.agar bhaiyya ko batata to vo manta kya?..kabhi nahi..magar main janta hu bhabhi ki is baar main kamyab ho jaoonga & kya ab mujhe ye kehne ki zarurat hai ki main bhi to bhaiyya ke hi parivar ka hissa hu."

"bhaiyya..",anjali ki aankho me dard ka bhav tha,"..aisi baate mat kijiye.auro ki aur jane mera to iklauta devar humesha meri zarurat ke waqt mere sath khada raha hai & mere liye vo is duniya ka dusra sabse bharosemand insan hai kyuki pehle to uske bhaiyya hain!",anjali ki baat pe mukul hans pada,"..bas aise hi khush rahiye."

"jante hain,bhaiyya ye uljhane kyu ho rahi hain?",kuchh der baad anjali ne baat aage badhayi,"..kyuki humlog milte-julte nahi."

"bhabhi..",mukul ne apne bade bhai ke sath nachti apni biwi ki or dekha,"..aap to sab janti hain."

"vo thik hai par bachche to mil sakte hai na & fir khas mauke pe bhi ab to aapne aana band kar diya."

"aap bhi to nahi aati?",mukul ke kehne ke andaz se anjali ko apni shadi ke thik baad ka waqt yaad aaya jab mukul uske aage-peechhe laga rehta tha & kabhi-kabhar bhai-bhabhi se bachcho ki tarah zid kar baithata tha.

"achha baba,main hi aaoongi pehle.ab khush?",anjali hansi to mukul ke chehre pe shayad mahino baad sachchi khushi vali muskan fail gayi.

"mukul ko baddal se khada hone ke liye tum hi ne kaha hai?",jasjit ne nina ko dekha.

"mukul koi doodh pita bachcha to hai nahi,bhai sahab.uski marzi hui vo khada ho gaya!"

"nina..",jasjit ne badi mushkil se gussa zabt kiya hua tha.use humesha lagta tha ki is aurat ki vajah se uska bhai us se door ho gaya & ye baat bahut hadd tak sach bhi thi.uska hath thoda uski pith pe kas gaya to nina chihunki.vo bhi is insan se nafrat karti thi magar abhi na jane kyu uska jism uske dil ki nahi sun raha tha.use 1 ajib sa maza aa raha tha jasjit ke yu karib khade uske sath nachne me,"..tamiz se bolo..& fir us mahesh arora se madad lene ki kya zarurat thi?"

"jab apne hath khinch len to gairo ka sahara lena hi padta hai.",nina ne munh fer liya.

"jo kaam uske bas ka nahi usme hath kyu dalta hai mukul baar-2?",jasjit ne honth bhinch liye.

"jab kaam karega hi nahi to pata kaise chalega ki bas ka hai ya nahi?",nina ne sar utha jeth ki nazro se nazre mila di.jasjit kuchh palo tak use vaise hi dekhta raha.nina ko chut me kasak mehsus ho rahi thi & vo hairan thi ki jis se vo nafrat karti thi uske karib hone se use aisa kaise mehsus ho sakta tha.

"nina,use uske parivar se door mat karo.",nina ne kuchh nahi kaha bas gardan ghuma mukul ki or dekha & vaha ka nazara vo muskura di lekin jasjit ka chehra sakht ho gaya.

"may i?",mukul ne gardan ghumai to dekha mahesh khada hai 1 aurat ke sath jise vo bhi pehchanta tha,"hello,Puja."

"kaisi ho?",mahesh ne anjali ki kamar me banh daal dusra hath apne hath me liya.anjali ke chehre ki khushi gayab thi.mukul ab puja ke sath dance kar raha tha.

"jawab nahi dogi?chalo koi baat nahi..1 waqt tha anjali jab tum mere sawalo ka intezar kiya karti thi."

"mahesh,vo waqt aur tha.vo sab bahut pehle khatm ho chuka hai."

"tumhare liye.mere liye vo sab abhi bhi zinda hai.",mahesh dabi aavaz me muskurane ka natak karta bol raha tha,"meri baaho me tumhara sharmana,tumhare reshmi jism ka ehsas,tumhara mujhse lipatna..josh me jhadte waqt mera naam lena.apne khubsurat ang mujhe saunpna & mere ang ko hatho me bhar lena..-"

"-..mahesh,please!main 2 bachcho ki maa hu ab!"

"vo 2 bachche mere kyu nahi hain?..kyu anjali kyu?..mujhe kyu chhoda tumne?"

"maine chhoda tumhe?..",anjali ne dhikkar bhari hansi hansi,"..purani aadat hai tumhari apni galti dusro pe thopne ki.maine sab saunpa tha tumhe is vioshwas ke sath ki puri zindagi tumhare sath bitaungi magar tum hi ne jhuth bola tha papa se ki tumhari naukri lag gayi hai America me jab ki tum nitthale the & vo jo dhokhadhadi ki thi tumne."

"sab tumhare liye."

"kyu?maine tumse humesha kaha tha ki mere papa ko sab sach bata do ki tumhari mali halat thik nahi.koi bhi dhang ki naukri pakad lo,mere gharwale nahi bhi manenge to bhi main tumhare sath chalungi lekin tumhare jhuth ne sab gadbad kar diya.papa kaise bharosa karte 1 berozgar jhuthe pe,bolo?..apni aulad hogi to samjhoge,mahesh.meri salah mano,apna ilaj karwao & mujhe bhul jao.",anjali ki imandari bhari nigaho ka tej jhelne ki himmat nahi thi mahesh me,usne sar ghuma liya,"..mukul.",anjali ne bagal se nachte hue ja rahe apne devar ko aavaz di & 1 baar fir uske sath ho li.mahesh apna munh leke khada raha.

jasjit ke jism me aaya tanav nina ne mehsus kiya & use bahut khushi hui,tasvir me uski jethani hi thi mahesh ke sath....bhai sahab,aapki pyari patni & aapke sukhi sansar me dekhiye kaise toofan lati hu main..vo toofan aapka career bhi tehas-nehas kar dega & fir bas main karungi is shehar pe raaj sirf main!

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--41

गतान्क से आगे............-

नीना ने महसूस किया कि उसके जेठ का हाथ उसकी पीठ पे कस गया है.उसने उसकी ओर देखा तो पाया कि वो अंजलि & महेश को ही देख रहा था & उसका चेहरा बहुत ही सख़्त था.जसजीत प्रधान को शायद होश नही था कि वो इस वक़्त अपने छ्होटे भाई की बीवी के साथ है.उसका हाथ थोड़ा और कसा & नीना उसके जिस्म से सॅट गयी.नीना ने अपने पेट पे अपने जेठ की मर्दानगी को महसूस किया तो उसकी सांस जैसे रुक सी गयी.उसके जिस्म मे झुरजुरी दौड़ गयी & उस पल उसने अपने जेठ को 1 दूसरी ही नज़र से देखा.

जैसे ही मुकुल ने वापस अपनी भाभी की बाहे थामी जसजीत का तनाव ख़त्म हो गया & 1 बार फिर नीना & उसके जिस्म मे दूरी बन गयी.नीना को ये अच्छा नही लगा.वो मन ही मन खुद पे मुस्कुराइ....आख़िर कितनी गर्मी भरी थी उसके जिस्म मे कि वो अपने जेठ के बारे मे भी गुस्ताख ख़याल सोचने लगी थी!

इन जोड़ो को नाचते हुए 2 आँखे बड़े गौर से देख रही थी.वरुण को पता था की जसजीत प्रधान यहा आएगा मगर आज उसका मक़सद उसे देखना नही था,आज तो वो अपने प्यार को देखने आया था.उसे यकीन था कि मोना आज अपने पति के साथ यहा ज़रूर आएगी.अभी खास मेहमान ही फ्लोर पे थे.उनके हटने के बाद बारी-2 से 10-10 करके बाकी जोड़े आते जिन्होने इस शाम के लिए टिकेट्स खरीदे थे.

वरुण को वो दिन याद आया जब मोना ने उस से कहा था कि 1 दिन वो दोनो भी इसी तरह यहा 1 साथ नाचेंगे,"..लॅडीस & गेंटल्मन,अब मैं हमारे सबसे खास मेहमान,हमारे मुल्क के नंबर.1 क्रिकेटर,दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाज़,मिस्टर.वरुण अवस्थी को यहा आने की दावत देता हू..",मोना ने फादर की नकल उतारी थी तो दोनो हंस पड़े थे.

वरुण यहा चोरी से घुसा था & 1 पर्दे की ओट से सब देख रहा था.कुच्छ देर बाद वो जिसकी तलाश मे आया था वो उसे नज़र आ ही गयी.मोना अपने पति के साथ डॅन्स कर रही थी.हल्के पीले गाउन मे बला की खूबसूरत लग रही थी..& कितनी खुश..उसके दिल मे टीस सी उठी.उसके पति के हाथ उसके नाज़ुक बदन पे देख वो जलन से भर गया..ये सब तो उसका हक़ था..मोना ने अपना कुँवारापन उसे दिया था..उसके जिस्म के हर हिस्से पे उसके होंठो ने अपने निशान छ्चोड़े थे..मगर आज सब ख़त्म हो चुका था & बीता हुआ कल 1 सपना बन के रह गया था.उसने लंबी सांस ली & वाहा से हट गया.इस सब का ज़िम्मेदार प्रधान कल अपने किए की सज़ा भुगेतेगा...उसने आँखे बंद कर अपने इरादे के बारे मे सोचा & वाहा से चला गया.

मेघना भी वाहा मौजूद थी.वो इस कॉलेज की पुरानी स्टुदेंट थी & अजीत के ना-नुकर करने के बावजूद वो उसे यहा खींच ही लाई थी,"कॉलेज तो शानदार है तुम्हारा!",अजीत मुस्कुराया,"..और तुम्हारी सहेलिया भी!"

"अच्छा!मेरी सहेलियो मे बहुत दिलचस्पी हो रही है?",अजीत को मेघना की बात मे मज़ाक के साथ-2 थोड़ा तंज़ भी मिला लगा.

"सालिया लगती है हमारी,भाई!",अजीत मज़ाक करता रहा मगर मेघना खामोश हो गयी,"क्या हुआ?",अजीत ने चुप्पी तोड़ी,"..आए..!",उसने अपने 1 हाथ से उसका चेहरा अपनी ओर किया,"..क्या बात है?कोई बाय्फ्रेंड याद आ रहा है क्या?",वो हंसा मगर मेघना बिल्कुल संजीदा हो गयी.

"सॉरी,मेघना..मैं तो मज़ाक कर रहा था..तुम्हे बुरा लगा क्या?"

"नही.",नीना थोड़ा आगे झुकी & डॅन्स करते हुए अपना सर अपने पति के सीने पे रख दिया..वो तो अब केवल अजीत की थी मगर क्या वो भी उसी का था?..कैसे सुलझेगी ये उलझन कैसे?

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जो सितारो पे यकीन करते हैं वो ये कहेंगे कि ज़रूर उस वक़्त सितारो का कुच्छ ऐसा मेल था कि कॉलेज हॉल मे नाच रहे सभी जोड़े थोड़े नाखुश थे & अपने-2 साथी को लेके थोड़ा शक़ भी कर रहे थे.

हमारी कहानी का बस 1 जोड़ा बिना किसी बदगुमानी के,बिना किसी उलझन के 1 दूसरे की बाहो मे क़ैद 1 दूसरे को चूम रहे थे.दिव्या प्रोफेसर दीक्षित की बाहो मे क़ैद अपने गुलाबी होंठो को उसको सौंपे खड़ी थी.बस अभी-2 ही वो उसके बुंगले मे दाखिल हुई थी & उसने उसे अपने आगोश मे भर लिया था.दोनो सवेरे ही डेवाले वापस लौटे थे & दिन भर काम करने के बाद दिव्या अपने घर चली गयी थी प्रोफेसर को ये वादा करके कि कुच्छ ही देर मे वो उसके साथ होगी & पूरी रात उसके साथ बिताएगी.

"उउम्म्म्म..छ्चोड़ो..",दिव्या ने प्रोफेसर के सीने पे हाथ रख उसे थोडा दूर किया,"..ऐसे पेश करते हैं घर आए मेहमान से?!",शर्ट के गले मे से झाँकते सीने के बालो को उसने हल्के से खींचा.

"मेहमान ऐसा हसीन हो तो उसके इस्तेक्बाल का तो यही सबसे जायज़ तरीका है.",प्रोफेसर ने उसकी कमर को दबाया & दोबारा आगे उसे चूमने के लिए झुकने लगा.

"उउन्ण..नही..",दिव्या ने हाथ उसके होंठो पे रख उसे रोका,"..पहले अपना घर दिखाओ.कितना शानदार लगता है बाहर से.क्या अंदर से भी तुमने इसे वैसे ही सजाया है?"

"ये तो तुम देख के खुद ही तय करना..",प्रोफेसर ने अपनी बाहो से उसे आज़ाद किया & अपने हाथो मे उसके हाथ ले लिए,"..मगर पहले ज़रा 1 नज़र तुम्हे देख तो लू.",प्रोफेसर के साथ ने दिव्या के अंदर ना जाने क्या जगा दिया था की उसे सजने-सवरने की तमन्ना होने लगी थी.उसका दिल करने लगा था कि वो अपने लिबास,अपनी अदाओ से अपने महबूब को तड़पाए,रिझाए..वो उसकी तारीफ करे & फिर दोनो प्यार मे डूब जाएँ.आज उसने 1 छ्होटी ब्लेक ड्रेस निकाली थी.ड्रेस बस सीने तक कसी थी & नीचे ढीली थी & उसके घुटनो के उपर आधी जाँघो तक आती थी.प्रोफेसर उसे सर से पाँव तक देखने लगा तो हया की लाली ने फिर से उसके गालो को और सुर्ख कर दिया.

प्रोफेसर ने उसकी नंगी बाहो पे अपने हाथ फिराए तो उसका जिस्म थरथरा उठा & होंठ खुद बखुद खुल गये.प्रोफेसर ने उन्हे चूमा & फिर बाई बाँह के घेरे मे उसके जिस्म को भर लिया,"चलो,तुम्हे ये घर दिखाता हू."

"ये है हॉल.",आलीशान से ड्रॉयिंग कम डाइनिंग हॉल मे दीवारो पे बड़ी अच्छी पेंटिंग्स लगी थी.कुच्छ आंटीक पीसस भी थे मगर किसी चीज़ को देख के ऐसा नही लगता था कि हॉल मे दौलत की नुमाइश लगी हो उसका कारण था कि प्रोफेसर ने हर चीज़ तभी खरीदी थी जब उसकी किसी बात ने उसे बहुत प्रभावित किया था,"दिव्या,ये पैंटिंग देखो.कालिदास के मेघ्ड़ूत के बारे मे तो तुमने सुना ही होगा?..उसमे 1 यक्ष जो अपनी प्रेमिका से दूर है मेघ यानी बादल से अपने प्यार का संदेश अपनी महबूबा को भेजता है.तो इस तस्वीर मे पेंटर ने ये कल्पना की है कि जब बादल ने उसका ये संदेश उसकी प्रेमिका तक पहुचेया होगा तो उसे कैसा लगा होगा.",तस्वीर मे 1 बादल बरस रहा था & नीचे 1 खूबसूरत लड़की उस बारिश मे भीग रही थी.उसके चेहरे पे खुशी थी,संतोष था साथ-2 प्रेमी के मिलने की आस भी थी.उसके गीले कपड़ो मे उसका भीगा जिस्म का 1-1 आकार नुमाया हो रहा था.

दिव्या का जिस्म उस पैंटिंग को देख के मचल उठा & उसी वक़्त प्रोफेसर का बाया हाथ उसकी बाई उपरी बाज़ू पे कसा & 1 बार फिर दोनो 1 दूसरे को चूमने लगे.इस बार प्रोफेसर ने उसकी ड्रेस के बाए स्ट्रॅप को कंधे से नीचे सरका दिया,अब बाए कंधे पे उसके काले ब्रा का स्ट्रॅप चमक रहा था.

"ये देखो..",1 टेबल पे 1 बस्ट रखा था यानी 1 इंसान के चेहरे को दिखती मूर्ति,"..ये है फिलॉसफर सॉक्रटेस या सुक्रत जिसे सिर्फ़ इसलिए मार दिया गया था क्यूकी ये उस खुदा को नही मानता था जिसे इसके राज्य के लोग मानते थे.समझती हो दिव्या,कितना हिम्मत का काम है बहाव के खिलाफ तैरना?",दिव्या ने हां मे सर हिलाया.प्रोफेसर की शख्सियत का 1 दूसरा पहलू उसके सामने था-1 समझदार गहरी सोच वाले इंसान का.

"ये तस्वीर मुझे इसे बनाए वाले ने तोहफे मे दिया था..",मुल्क के झंडे के तीनो रंगो को मिला के कुच्छ ऐसी कलाकारी की गयी थी कि उसमे से सभी रंग निकलते दिखते थे & फिर 1 सफेद रंग मे तब्दील होते लगते थे.अब तुम बताओ इस तस्वीर के बारे मे?",दिव्या हल्के से मुस्कुराइ & तस्वीर को देखने लगी.

"एकता..अनेकता मे एकता..तीनो रंगो से अलग-2 रंग निकले & फिर 1 रंग मे तब्दील हो गये..सफेद रंग..अमन..प्यार.",उसने प्रोफेसर को सवालिया निगाहो से देखा तो वो हंस पड़ा.

"जान,तस्वीर कोई पढ़ाई का सवाल थोड़े ही है कि 1 ही सही जवाब हो..",वो उसके पीछे आया & उसे बाहो मे भरा तो दिव्या का सीना उसकी ड्रेस के गले मे से छलक्ने को बेताब हो उठा,"..हर देखनेवाला उसका अपना अलग मतलब निकालने को आज़ाद है.वैसे मैं भी कुच्छ तुम्हारी ही तरह सोचता हू इस तस्वीर के बारे मे.",प्रोफेसर ने उसकी गर्दन पे दाई तरफ चूमा तो दिव्या ने आँखे बंद कर दाई बाँह पीछे ले जा उसका सर सहलाया.कुच्छ ही पलो मे दूसरा स्ट्रॅप भी कंधे से सरक चुका था & दिव्या के कंधे प्रोफेसर के होंठो की तपिश से जलने लगे थे.दिव्या का जिस्म कांप रहा था.वो पलटी & प्रोफेसर के गले मे बाहे डाल उसके चेहरे को चूमने लगी.चूमते-2 वो नीचे आई & उसकी कमीज़ के बटन्स खोल दिए.अगले ही पल प्रोफेसर के गथे हुए जिस्म की मांसपेशियो पे उसके हसरत भरे हाथ घूम रहे थे.

प्रोफेसर ने उसे सीने से लगा लिया & फिर उसे हॉल मे राकीड दूरी चीज़े दिखाने लगा.दिव्या थोड़ी-2 देर पे उसके चौड़े सीने पे जगह-2 चूम लेती.उसने अपनी दाई बाँह अपने आशिक़ की कमर मे डाल रखी थी,"ये है मेरी स्टडी.",दोनो अब 1 दूसरे कमरे मे आ गये थे जिसकी दीवारो से लगे फर्श से छत तक के लंबे शेल्फ किताबो से भरे हुए थे.

"वाउ!",दिव्या की आँखे हैरत से भरी हुई थी,"ये तो कोई छ्होटी सी लाइब्ररी लगती है!",1 तरफ ज़मीन पे 1 गद्दा लगा था जिसपे तकिये रखे हुए थे & दूसरी तरफ 1 डेस्क लगी थी जिसपे 1 कंप्यूटर & लिखने का समान रखा था.इस कमरे मे वो बेतर्तीबी थी जो रोज़ाना इस्तेमाल करने पे होती है,"लगता है तुम्हारा ज़्यादातर वक़्त यही पे गुज़रता है?",दिव्या के सवाल पे प्रोफेसर ने मुस्कुराते हुए हां मे सर हिलाया,"वो क्या है,अजिंक्या?",कमरे के 1 कोने मे 1 बंद अलमारी थी.

"ऐसे ही कुच्छ बेकार का समान पड़ा है.",प्रोफेसर ने सवाल टालने की कोशिश की.

"मुझे देखना है.",दिव्या बच्चो की तरह मचलती हुई उसके सीने के बाल खींचने लगी.

"अच्छा.",लंबी सांस भर प्रोफेसर ने अलमारी खोली तो दिव्या को वाहा कयि शील्ड्स,ट्रोफीस & सर्टिफिकेट्स धूल खाते नज़र आए.

"अजिंक्या!तुम भी ना!..ये सब तुमने ऐसे रखा है..& ये..ये बेकार की चीज़े हैं?"

"हां..क्या काम है इनका..& तुम क्या चाहती हो इनकी नुमाइश लगाऊं."

"नही,नुमाइश मत लगाओ.",दिव्या ने उसे बाहो मे भर अपनी मोटी छातियाँ उसके सीने पे दबा दी,"..पर लोगो ने तुम्हे इज़्ज़त बक्शी है उस बात की तो कद्र करो.कम से कम इन्हे सहेज के तो रखो."

"ओके,कर दूँगा.",प्रोफेसर ने उसे बाँहो मे भर लिया & उसकी मोटी गंद दबाते हुए उसे चूमने लगा.

"ओह्ह्ह्ह...छ्चोड़ो ना..",दिव्या के गाल जोश से और गुलाबी हो गये.मस्ती की शिद्दत ना बर्दाश्त कर पाने के चलते उसने किस तोड़ी & अपने महबूब के आगोश मे छट-पटाने लगी,"..आहह...ना....अजिंक्या...आहह..!",प्रोफेसर ने उसकी ड्रेस के अंदर हाथ घुसा उसकी गंद को दबोच लिया था & उसकी गर्दन & कंधे चूमे जा रहा था.दिव्या के हाथ अभी अब प्रोफेसर के फौलादी जिस्म पे अपनी मस्ती जताते घूम रहे थे.तभी प्रोफेसर ने उसकी गंद की कसी फांको को दबोच उसे थोड़ा उपर उठा खुद से ऐसे सताया की दिव्या की चूत उसके लंड से दब गयी & दिव्या के जिस्म मे फुलझड़िया फूटने लगी.दिव्या की आहे बंद हो गयी & वो प्रोफेसर की बाहो मे झूल गयी.वो झाड़ रही थी.उसे हैरत हो रही थी कि वो इतनी आसानी से कैसे झाड़ गयी मगर अगले ही पल उसे अपनी ड्रेस उतरती महसूस हुई & वो आने वाले मस्त पॅलो की खुमारी मे खो गयी.

प्रोफेसर ने उसे बाहो मे उठा लिया & कमरे से बाहर ले आया,"ये है मेहमानो कमरा.",दिव्या ने अपनी बाहे उसके गले मे डाल दी & उसके चेहरे को चूमने लगी,"..& ये है रसोई.",प्रोफेसर ने उसे किचन के स्लॅब पे बिठा दिया तो दिव्या ने अपनी टाँगे खोल उसे अपनी बाहो मे भर लिया.

"खाना कौन बनाता है तुम्हारे लिए & इस घर को इतना साफ कौन रखता है?",दिव्या उसकी पॅंट खोलते हुए उसके होंठ चूम रही थी.

"नौकर हैं.काम करके चले जाते हैं.",दिव्या ने झटपट प्रोफेसर की पंत & अंडरवेर को उतारा & उसके लंड को बाहो मे भर लिया.

"अजिंक्या,मैने सोचा था कि कभी तुमसे ये सवाल नही करूँगी..",वो लंड को हिला रही थी,"..तुम चाहो तो जवाब मत देना.ये मत समझना कि तुम्हारी ज़ाति ज़िंदगी मे दखल दे रही हू..मगर..",उसने उसके आंडो को हौले से दबाया & फिर लंड को रगड़ने लगी,"..तुम्हे इतने बड़े घर मे अकेलापन महसूस नही होता?"

"ये तो सोच पे है,दिव्या..",प्रोफेसर ने उसकी काले ब्रा मे क़ैद संगमरमरी चूचियाँ आपस मे मिलते हुए दबा दी,"..इंसान भीड़ मे भी अकेला हो सकता है & तन्हाई मे भी तन्हा नही रह सकता.",आ भरती दिव्या के माथे पे शिकन पड़ गयी.

"यहा मेरी यादें है मेरी तन्हाई मिटाने को मेरे साथ.",वो आगे झुका & उसे बाहो मे भर उसके होंठ चूम लिए.दिव्या समझ गयी कि इस रोमानी अंदाज़ मे उसके होंठ बंद करने का मतलब यही था कि वो नही चाहता था कि इस बारे मे आगे बात हो.दिव्या को भी इस बात पे कोई ऐतराज़ नही था,उसने उसके फ़ैसले की कद्र की & उसकी किस का लुत्फ़ उठाने लगी.प्रोफेसर ने उसके ब्रा को खोला & उसकी नुमाया चूचियो को अपने हाथो की मेहेरबानी पे छ्चोड़ दिया.दिव्या की आहे तेज़ हो गई तो वो झुका & उन्हे छूने लगा.उसके होंठो के एहसास से दिव्या मुस्कुरा उठी.स्लॅब के पीछे की दीवार से टेक लगाके बैठ वो आँखे बंद कर उस एहसास का पूरा मज़ा उठाने लगी.उसके निपल्स को अपने होंठो से छेड़ने के बाद वो नीचे गया & उसके सपाट पेट को जी भर के चूमा.

दिव्या की नाभि की गहराइयो को उसने पता नही कितनी बार अपनी ज़ुबान से नापा & फिर नीचे आ उसकी मांसल जाँघो को चूमने लगा.उसके सॅंडल्ज़ को उतार उसने उसके पैरो की उंगलियो को चूमा तो दिव्या सिहर उठी.उसकी चूत मे कसक और तेज़ हो गयी & स्लॅब पे ही कसमसाने लगी.प्रोफेसर खड़ा हुआ & उसे फिर से बाहो मे उठा लिया,"चलो,तुम्हे अपना बेडरूम दिखाता हू.",दोनो की आँखे नशे मे डूबी 1 दूसरे से मिल . दिव्या ने उसके गले मे बाहे डाल दी & अपना सर उसके बाए कंधे पे टीका दिया.

दिव्या बिल्कुल मदहोश थी मगर उस मदहोशी मे भी उसकी तेज़ निगाहो से 1 बात च्छूपी नही रह सकी.प्रोफेसर का कमरा बिल्कुल सॉफ-सुथरा & करीने से था मगर उसे देख के ऐसा लगता था मानो उसे कोई इस्तेमाल नही करता हो.बड़े से पलंग पे सजे बिस्तर को देख के ऐसा लगता था मानो रोज़ उसकी चादर बदली जाती हो मगर उसपे सलवटें डालने वाला कोई ना हो.आख़िर क्यू?..दिव्या के ज़हन मे सवाल कौंधा..प्रोफेसर की ज़िंदही मे औरतो की कमी नही थी फिर वो कमरा ऐसा क्यू लग रहा था..& फिर अगर वो यहा नही आता & किसी को नही लाता तो फिर उसे क्यू लाया था?

प्रोफेसर ने उसे बिस्तर पे लिटाया & उसके उपर झुक उसकी फूल सी कोमल चूचियो को चूसने लगा.दिव्या बाहे फैलाए आहे भरने लगी.प्रोफेसर के आतुर होंठ तो जैसे उसकी मोटी चूचियो से चिपक ही गये थे!दिव्या कमर उचकाते हुए तड़पने लगी....कमाल का मर्द था!....बिना खुद झाडे वो कितनी आसानी से उसे इतनी बार झाड़वा देता था!..उसका जिस्म फिर से मस्ती की ऊँचाइयो को च्छू रहा था की तभी प्रोफेसर ने उसकी चूचिया छ्चोड़ी & नीचे जाने लगा.दिव्या का दिल खुशी से भर उठा,अब उसकी चूत की बारी थी अपने महबूब से प्यार पाने की.

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--41

gataank se aage............-

Nina ne mehsus kiya ki uske jeth ka hath uski pith pe kas gaya hai.usne uski or dekha to paya ki vo Anjali & Mahesh ko hi dekh raha tha & uska chehra bahut hi sakht tha.Jasjit Pradhan ko shayad hosh nahi tha ki vo is waqt apne chhote bhai ki biwi ke sath hai.uska hath thoda aur kasa & nina uske jism se sat gayi.nina ne apne pet pe apne jeth ki mardangi ko mehsus kiya to uski sans jaise ruk si gayi.uske jism me jhurjhuri daud gayi & us pal usne apne jeth ko 1 dusri hi nazar se dekha.

jaise hi Mukul ne vapas apni bhabhi ki baahe thami jasjit ka tanav khatm ho gaya & 1 baar fir nina & uske jism me duri ban gayi.nina ko ye achha nahi laga.vo man hi man khud pe muskurayi....aakhir kitni garmi bhari thi uske jism me ki vo apne jeth ke bare me bhi gustakh khayal sochne lagi thi!

in jodo ko nachte hue 2 aankhe bade gaur se dekh rahi thi.Varun ko pata tha ki Jasjit Pradhan yaha aayega magar aaj uska maqsad use dekhna nahi tha,aaj to vo apne pyar ko dekhne aaya tha.use yakin tha ki Mona aaj apne pati ke sath yaha zarur aayegi.abhi khas mehman hi floor pe the.unke hatne ke baad bari-2 se 10-10 karke baki jode aate jinhone is sham ke liye tickets kharide the.

varun ko vo din yaad aaya jab mona ne us se kaha tha ki 1 din vo dono bhi isi tarah yaha 1 sath nachenge,"..ladies & gentleman,ab main humare sabse khas mehman,humare mulk ke no.1 cricketer,duniya ke behtarin ballebaz,Mr.Varun Awasthi ko yaha aane ki dawat deta hu..",mona ne father ki nakal utari thi to dono hans pade the.

varun yaha chori se ghusa tha & 1 parde ki ot se sab dekh raha tha.kuchh der baad vo jiski talash me aya tha vo use nazar aa hi gayi.mona apne pati ke sath dance kar rahi thi.halke peele gown me bala ki khubsurat lag rahi thi..& kitni khush..uske dil me tees si uthi.uske pati ke hath uske nazuk badan pe dekh vo jalan se bhar gaya..ye sab to uska haq tha..mona ne apna kunwarapan use diya tha..uske jism ke har hisse pe uske hotho ne apne nishan chhode the..magar aaj sab khatm ho chuka tha & beeta hua kal 1 sapna ban ke reh gaya tha.usne lumbi sans li & vaha se hat gaya.is sab ka zimmedar pradhan kal apne kiye ki saza bhugetega...usne aankhe band kar apne irade ke bare me socha & vaha se chala gaya.

Meghna bhi vaha maujood thi.vo is college ki purani stuident thi & Ajit ke na-nukar karne ke bavjud vo use yaha khinch hi layi thi,"college to shandar hai tumhara!",ajit muskuraya,"..aur tumhari saheliya bhi!"

"achha!meri saheliyo me bahut dilchaspi ho rahi hai?",ajit ko meghna ki baat me mazak ke sath-2 thoda tanz bhi mila laga.

"saliya lagti hai humari,bhai!",ajit mazak karta raha magar meghna khamosh ho gayi,"kya hua?",ajit ne chuppi todi,"..aye..!",usne apne 1 hath se uska chehra apni or kiya,"..kya baat hai?koi boyfriend yaad aa raha hai kya?",vo hansa magar meghna bilkul sanjida ho gayi.

"sorry,meghna..main to mazak kar raha tha..tumhe bura laga kya?"

"nahi.",nina thoda aage jhuki & dance karte hue apna sar apne pati ke seene pe rakh diya..vo to ab keval ajit ki thi magar kya vo bhi usi ka tha?..kaise suljhegi ye uljhan kaise?

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jo sitaro pe yakin karte hain vo ye kahenge ki zarur us waqt sitaro ka kuchh aisa mel tha ki college hall me nach rahe sabhi jode thode nakhush the & apne-2 sathi ko leke thoda shaq bhi kar rahe the.

humari kahani ka bas 1 joda bina kisi badgumani ke,bina kisi uljhan ke 1 dusre ki baaho me qaid 1 dusre ko chum rahe the.Divya Professor Dixit ki baaho me qaid apne gulabi hotho ko usko saunpe khadi thi.bas abhi-2 hi vo uske bungle me dakhil hui thi & usne use apne agosh me bhar liya tha.dono savere hi Devalay vapas laute the & din bhar kaam karne ke baad divya apne ghar chali gayi thi professor ko ye vada karke ki kuchh hi der me vo uske sath hogi & puri raat uske sath bitayegi.

"uummmm..chhodo..",divya ne professor ke seene pe hath rakh use thoda dur kiya,"..aise pesh karte hain ghar aaye mehman se?!",shirt ke gale me se jhankte seene ke baalo ko usne halke se khincha.

"mehman aisa haseen ho to uske istekbal ka to yehi sabse jayaz tarika hai.",professor ne uski kamar ko dabaya & dobara aage use chumne ke liye jhukne laga.

"uunn..nahi..",divya ne hath uske hotho pe rakh use roka,"..pehle apna ghar dikhao.kitna shandar lagta hai bahar se.kya andar se bhi tumne ise vaise hi sajaya hai?"

"ye to tum dekh ke khud hi tay karna..",professor ne apni baaho se use azad kiya & apne hatho me uske hath le liye,"..magar pehle zara 1 nazar tumhe dekh to lu.",professor ke sath ne divya ke andar na jane kya jaga diya tha ki use sajne-sawarne ki tamanna honae lagi thi.uska dil karne laga tha ki vo apne libas,apni adao se apne mehboob ko tadpaye,rijhaye..vo uski tarif kare & fir dono pyar me doob jayen.aaj usne 1 chhoti balck dress nikali thi.dress bas seene tak kasi thi & neeche dhili thi & uske ghutno ke upar aadhi jangho tak aati thi.professor use sar se panv tak dekhne laga to haya ki lali ne fir se uske galo ko aur surkh kar diya.

professor ne uski nangi baaho pe apne hath firaye to uska jism tharthara utha & honth khud bakhud khul gaye.professor ne unhe chuma & fir bayi banh ke ghere me uske jism ko bhar liya,"chalo,tumhe ye ghar dikhata hu."

"ye hai hall.",aalishan se drawing cum dining hall me deewaro pe badi achhi paintings lagi thi.kuchh antique pieces bhi the magar kisi chiz ko dekh ke aisa nahi lagta tha ki hall me daulat ki numaish lagi ho uska karan tha ki professor ne har chiz tabhi kharidi thi jab uski kisi baat ne use bahut prabhavit kiya tha,"divya,ye painting dekho.Kalidas ke Meghdoot ke bare me to tumne suna hi hoga?..usme 1 yaksh jo apni premika se door hai megh yani badal se apne pyar ka sandesh apni mehbooba ko bhejta hai.to is tasvir me painter ne ye kalpana ki hai ki jab badal ne uska ye sandesh uski premika tak pahuchaya hoga to use kaisa laga hoga.",tasvir me 1 badal baras raha tha & neeche 1 khubsurat ladki us barish me bhig rahi thi.uske chehre pe khushi thi,santosh tha sath-2 premi ke kilne ki aas bhi thi.uske gile kapdo me uska bhiga jism ka 1-1 aakar numaya ho raha tha.

divya ka jism us painting ko dekh ke machal utha & usi waqt professor ka baya hath uski bayi upri bazu pe kasa & 1 baar fir dono 1 dusre ko chumne lage.is baar professor ne uski dress ke baye strap ko kandhe se neeche sarka diya,ab baye kandhe pe uske kale bra ka strap chamak raha tha.

"ye dekho..",1 table pe 1 bust rakha tha yani 1 insan ke chehre ko dikhati murti,"..ye hai philosopher Socrates ya sukrat jise sirf isliye maar diya gaya tha kyuki ye us khuda ko nahi manta tha jise iske rajya ke log mante the.samajhti ho divya,kitna himmat ka kaam hai bahav ke khilaf tairna?",divya ne haan me sar hilaya.professor ki shakhsiyat ka 1 dusra pehlu uske samne tha-1 samajhdar gehri soch vale insan ka.

"ye tasvir mujhe ise banae vale ne tohfe me diya tha..",mulk ke jhande ke teeno rango ko mila ke kuchh aisi kalakari ki gayi thi ki usme se sabhi rang nikalte dikhate the & fir 1 safed rang me tabdil hote lagte the.ab tum batao is tasvir ke bare me?",divya halke se muskurayi & tasvir ko dekhne lagi.

"ekta..anekta me ekta..teeno rango se alag-2 rang nikle & fir 1 rang me tabdil ho gaye..safed rang..aman..pyar.",usne professor ko sawaliya nigaho se dekha to vo hans pada.

"jaan,tasvir koi padhai ka sawal thode hi hai ki 1 hi sahi jawab ho..",vo uske peechhe aya & use baaho me bhara to divya ka seena uski dress ke gale me se chhalakne ko betab ho utha,"..har dekhnewala uska apna alag matlab nikalne ko azad hai.vaise main bhi kuchh tumhari hi tarah sochta hu is tasvir ke abre me.",professor ne uski gardan pe dayi taraf chuma to divya ne aankhe band kar dayi banh peechhe le ja uska sar sehlaya.kuchh hi palo me dusra strap bhi kandhe se sarak chuka tha & divya ke kandhe professor ke hotho ki tapish se jalne lage the.divya ka jism kanp raha tha.vo palti & professor ke gale me baahe dal uske chehre ko chumne lagi.chumte-2 vo neeche aayi & uski kamiz ke buttons khol diye.agle hi pal professor ke gathe hue jism ki manspeshiyo pe uske hasrat bhare hath ghum rahe the.

professor ne use seene se laga liya & fir use hall me rakhid duri chize dikhane laga.divya thodi-2 der pe uske chaude seene pe jagah-2 chum leti.usne apni dayi banh apne aashiq ki kamar me dal rakhi thi,"ye hai meri study.",dono ab 1 dusre kamre me aa gaye the jiski deewaro se lage farsh se chhat tak ke lumbe shelf kitabo se bhare hue the.

"wow!",divya ki aankhe hairat se bhari hui thi,"ye to koi chhoti si library lagti hai!",1 taraf zamin pe 1 gadda laga tha jispe takiye rakhe hue the & dusri taraf 1 desk lagi thi jispe 1 computer & likhne ka saman rakha tha.is kamre me vo betartibi thi jo rozana istemal karne pe hoti hai,"lagta hai tumhara zyadatar waqt yehi pe guzarta hai?",divya ke sawal pe professor ne muskurate hue haan me sar hilaya,"vo kya hai,Ajinkya?",kamre ke 1 kone me 1 band almari thi.

"aise hi kuchh bekar ka saman pada hai.",professor ne sawal talne ki koshish ki.

"mujhe dekhna hai.",divya bachcho ki tarah machlati hui uske seene ke baal khinchne lagi.

"achha.",lumbi sans bhar professor ne almari kholi to divya ko vaha kayi shields,trophies & certificates dhool khate nazar aaye.

"ajinkya!tum bhi na!..ye sab tumne aise rakha hai..& ye..ye bekar ki chize hain?"

"haan..kya kaam hai inka..& tum kya chahti ho inki numaish lagaoon."

"nahi,numaish mat lagao.",divya ne use baaho me bhar apni moti chhatiya uske seene pe daba di,"..par logo ne tumhe izzat bakshi hai us baat ki to kadr karo.kam se kam inhe sahej ke to rakho."

"ok,kar dunga.",professor ne use bahao me bhar liya & uski moti gand dabate hue use chumne laga.

"ohhhh...chhodo na..",divya ke gaal josh se aur gulabi ho gaye.masti ki shiddat na bardasht kar pane ke chalte usne kiss todi & apne mehboob ke agosh me chhatpatane lagi,"..aahhhhh...na....ajinkya...aahhhh..!",professor ne uski dress ke andar hath ghusa uski gand ko daboch liya tha & uski gardan & kandhe chume ja raha tha.divya ke hath abhi ab professor ke fauladi jism pe apni masti jatate ghum rahe the.tabhi professor ne uski gand ki kasi fanko ko daboch use thoda upar utha khud se aise sataya ki divya ki chut uske lund se dab gayi & divya ke jism me phuljhadiya futne lagi.divya ki aahe band ho gayi & vo professor ki baaho me jhul gayi.vo jhad rahi thi.use hairat ho rahi thi ki vo itni asani se kaise jhad gayi magar agle hi pal use apni dress utarti mehsus hui & vo aane vale mast palo ki khumari me kho gayi.

professor ne use baaho me utha liya & kamre se bahar le aaya,"ye hai mehmano kamra.",divya ne apni baahe uske gale me daal di & uske chehre ko chumne lagi,"..& ye hai rasoi.",professor ne use kitchen ke slab pe bitha diya to divya ne apni tange khol use apni baaho me bhar liya.

"khana kaun banata hai tumhare liye & is ghar ko itna saaf kaun rakhta hai?",divya uski pant kholte hue uske honth chum rahi thi.

"naukar hain.kaam karke chale jate hain.",divya ne jhatpat professor ki pant & underwear ko utara & uske lund ko baaho me bhar liya.

"ajinkya,maine socha tha ki kabhi tumse ye sawal nahi karungi..",vo lund ko hila rahi thi,"..tum chaho to jawab mat dena.ye mat samajhna ki tumhari zati zindagi me dakhal de rahi hu..magar..",usne uske ando ko haule se dabaya & fir lund ko ragadne lagi,"..tumhe itne bade ghar me akelapan mehsus nahi hota?"

"ye to soch pe hai,divya..",professor ne uski kale bar me qaid sangmarmari chhatiya aapas me milate hue daba di,"..insan bheed me bhi akela ho sakta hai & tanhai me bhi tanha nahi reh sakta.",aah bharti divya ke mathe pe shikan pad gayi.

"yaha meri yaaden hai meri tanhai mitane ko mere sath.",vo aage jhuka & use baaho me bhar uske honth chum liye.divya samajh gayi ki is romani andaz me uske honth band karne ka matlab yehi tha ki vo nahi chahta tha ki is bare me aage baat ho.divya ko bhi is baat pe koi aitraz nahi tha,usne uske faisle ki kadr ki & uski kiss ka lutf uthane lagi.professor ne uske bra ko khola & uski numaya chhatiyo ko apne hatho ki meherbani pe chhod diya.divya ki aahe tez ho agyi to vo jhuka & unhe chune laga.uske hotho ke ehsas se divya muskura uthi.slab ke peechhe ki deewar se tek lagake baith vo aankhe band kar us ehsas ka pura maza uthane lagi.uske nipples ko apne hontho se chhedne ke baad vo neeche gaya & uske sapat pet ko ji bhar ke chuma.

divya ki nabhi ki gehraiyo ko usne pata nahi kitni baar apni zuban se napa & fir neeche aa uski mansal jangho ko chumne laga.uske sandals ko utar usne uske pairo ki ungliyo ko chuma to divya sihar uthi.uski chut me kasak aur tez ho gayi & slab pe hi kasmasane lagi.professor khada hua & use fir se baaho me utha liya,"chalo,tumhe apna bedroom dikhata hu.",dono ki aankhe nashe me dubi 1 dusre se mil tgau. divya ne uske gale me baahe dal di & apna sar uske baye kandhe pe tika diya.

divya bilkul madhosh thi magar us madhoshi me bhi uski tez nigaho se 1 baat chhupi nahi reh saki.professor ka kamra bilkul saaf-suthra & karine se tha magar use dekh ke aisa lagta tha mano use koi istemal nahi karta ho.bade se palang pe saje bistar ko dekh ke aisa lagta tha mano roz uski chadar badli jati ho magar uspe salwaten dalne wala koi na ho.aakhir kyu?..divya ke zehan me sawal kaundha..professor ki zindahi me aurato ki kami nahi thi fir vo kamra aisa kyu lag raha tha..& fir agar vo yaha nahi aata & kisi ko nahi lata to fir use kyu laya tha?

professor ne use bistar pe litaya & uske upar jhuk uski phool si komal choochiy chusne laga.divya baahe failaye aahe bharne lagi.professor ke aatur honth to jaise uski moti choochiyo se chipak hi gaye the!divya kamar uchkate hue tadapne lagi....kamal ka mard tha!....bina khud jhade vo kitni asani se use itni baar jhadwa deta tha!..uska jism fir se masti ki oonchaiyo ko chhu raha tha ki tabhi professor ne uski choochiy chhodi & neeche jane laga.divya ka dil khushi se bhar utha,ab uski chut ki bari thi apne mehboob se pyar pane ki.

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--42

गतान्क से आगे............-

प्रोफेसर नीचे आया & उसकी पॅंटी के उपर से ही उसकी चूत को किस्सस से ढँक दिया.दिव्या बिस्तर पे हाथ बेचैनी से चलती अपना सर इधर-उधर हिला रही थी.अधखुली आँखो से उसने देखा की हर दीवार पे प्यार मे डूबे जोड़ो की तस्वीरे हैं.किसी मे कोई 1 दूसरे को चूम रहा है तो किसी मे बस दोनो प्रेमी 1 दूसरे के आगोश मे बैठे हैं.1 तस्वीर मे 1 बिल्कुल नंगी लड़की अपने प्रेमी से चुद रही थी.दोनो को देख ऐसा लगता था दोनो 1 साथ झाड़ रहे हैं.दिव्या को महसूस हुआ कि उसके प्रेमी ने उसकी पॅंटी उतार दी है.

"आननह....!",प्रोफेसर की ज़ुबान उसकी चूत से टकराई तो वो कराह उठी.प्रोफेसर ने उसकी गंद की बगलो मे हाथ लगा के उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया & उसे पागल कर दिया.वो अपनी ज़ुबान को उसकी चूत के अंदर घुसा के उस से बह रहे रस की 1-1 बूँद को चाते जा रहा था.बीच-2 मे उसकी ज़ुबान बाहर आ दिव्या के दाने पे चलती तो वो और ज़ोर से कराह रही .प्रोफेसर ने अपना बाया हाथ बगल से हटा के उसकी चूत के उपर के पेट के हिस्से पे दबाया & अपनी ज़ुबान अंदर फिराई तो दिव्या चीख उठी.बेचैनी से को बिस्तर की चादर को पकड़ के खींचती हुई कमर उचकाने लगी मगर प्रोफेसर के हाथ ने उसे बिस्तर पे दबाए रखा & उसकी चूत से वैसे ही खेलते रहा.दिव्या सिसकते हुए फिर से झड़ने लगी.

प्रोफेसर ने अपना चेहरा उसकी चूत से उठाया & उसकी फैली टाँगो के बीच आ गया.दिव्या ने अपनी टाँगे हवा मे उठा दी तो प्रोफेसर ने उसकी नज़रो मे झँकते हुए अपना लंड उसकी चूत मे उतारना शुरू कर दिया.दिव्या ने आँखे मींच ली & उसकी बाहे पकड़ ली & अपना सर पीछे कर लिया.प्रोफेसर का मोटा लंड उसकी चूत को बहुत ज़्यादा फैला देता था & शुरू मे उसे अभी भी थोड़ा दर्द होता था.प्रोफेसर ने बस 2 इंच लंड बाहर रखा & बहुत धीरे-2 अपनी प्रेमिका की चुदाई शुरू कर दी.वो थोड़ा नीचे झुका & उसकी गर्दन चूमने लगा तो दिव्या ने अपने सर के बगल मे पड़े उसके मज़बूत बाए बाज़ू से अपने होंठ लगा दिए.प्रोफेसर की लंड की रगड़ से जब उसकी चूत मस्त हो गयी तो उसकी टाँगो मे भी हरकत आने लगी.वो कभी प्रोफेसर की जाँघो पे चढ़ जाती तो कभी उसकी कमर पे.दिव्या अपनी आएडियो से प्रोफेसर की जाँघो के पिच्छले हिस्से को सहलाते हुए जब नीचे से अपनी कमर हिलाने लगी तो प्रोफेसर ने लंड को सूपदे तक खींचा & 1 ज़ोर का धक्का दिया.

"ऊव्वववववव.....!",लंड जड तक दिव्या की चूत मे समा गया था.दिव्या के हाथ 1 बार फिर बिस्तर की चादर पे अपनी बेचैनी की दास्तान कहते हुए सलवटें छ्चोड़ने लगे.प्रोफेसर उसके खूबसूरत जिस्म की गोलाईयो,उसकी लंबी गर्दन & हसीन चेहरे को चूमते हुए बस धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था.प्रोफेसर थोड़ी देर बाद उसे उपर से उठा & अपनी हथेलिए उसके दोनो तरफ जमा उसकी चुदाई करने लगा.दिव्या तो मस्ती & मज़े से बहाल हो गयी थी & सिसक रही थी.आँखे खोली तो उसने अपने उपर उठे हुए धक्के लगाते प्रोफेसर को देखा.उसने सर नीचे किया तो उसकी चिकनी चूत को भेदता उसे प्रोफेसर का बिना बालो का मोटा,तगड़ा लंड नज़र आया तो जैसे उसके अंदर जोश की 1 नयी लहर उठ गयी.

उसने अपने हाथो से अपनी चूचिया मसल्ते हुए अपना सर उपर किया तो उसे प्रोफेसर का फौलादी सीना दिखा,उसने अपने हाथ उपर कर उसके जिस्म को पकड़ा & उचकते हुए अपने होंठ प्रोफेसर के बाए निपल से लगा दिए & चूसने लगी.प्रोफेसर को इसकी उमीद नही थी & उसने खुद को झड़ने से कैसे रोका ये वही जानता था.1 तो दिव्या की चूत अब उसके लंड पे बिल्कुल कस गयी थी उपर से उसकी ये मस्तानी हरकत!

वो बस झुका वैसे ही धक्के लगाता रहा कि तभी दिव्या को अपनी चूत मे बहुत तनाव महसूस हुआ.उसने प्रोफेसर का जिस्म छ्चोड़ दिया,उसके होंठ उसके निपल से अलग हुए & वो वापस बिस्तर पे गिर गयी.उसके दोनो हाथ पीछे पलंग के हेडबोर्ड से जा लगे & वो ज़ोर-2 से चीखने लगी.हाथ पीछे ले जाने से उसकी चूचिया & उभर गयी थी & प्रोफेसर को वो उसे दावत देती हुई लगी.वो झुका & अपनी महबूबा की चूचियो को मुँह मे भर लिया.

"आन्न्न्नह....!",1 आख़िरी चीख के साथ दिव्या झाड़ गयी.उसके झाड़ते ही प्रोफेसर ने फ़ौरन अपना लंड उसकी चूत से बाहर खींचा & उसकी गंद के नीचे हाथ लगा उसे हवा मे उठा दिया & इस से पहले की दिव्या कुच्छ समझती वो झुक के उसकी चूत चाटने लगा.

"आननह...उउन्न्ह..हहुऊन्न्ह...न्न्नुउहह...!",जिस्म मे मस्ती जिस शिद्दत के साथ बह रही थी वो अब नकाबिले बर्दाश्त थी.दिव्या अब रो रही थी.जिस्म के मज़े को इस गहराई,इस तीव्रता से उसने कभी महसूस नही किया था.वो प्रोफेसर का सर अपनी चूत से हटाना चाह रही थी मगर वो था कि मन ही नही रहा था & उसकी चूत चाते चला जा रहा था.

"ऊन्न्नह....उउउन्न्ह.....!",दिव्या सुबक्ती हुई 1 बार फिर झाड़ गयी & उसने प्रोफेसर को दूर धकेल दिया & अपनी बाई करवट पे हो अपनी टाँगे मोड़ के घुटने अपने पेट पे लगा लिए & अपनी बाहे भींच के सिसकने लगी.प्रोफेसर उसकी पीठ से आ लगा & उसके बाल सहलाने लगा.कुच्छ पॅलो बाद उसने दिव्या के चेहरे से ज़ूलफे हटा उसके गाल को चूमा तो दिव्या ने उसकी तरफ देखा.प्रोफेसर ने उसका चेहरा अपनी ओर किया & बड़े प्यार से चूमा.दिव्या अब संभाल चुकी थी & उसकी किस का जवाब देने लगी थी.

प्रोफेसर ने वैसे ही करवट पे लेटे हुए उसकी दाई टांग को उठाया & 1 बार फिर दिव्या की चुदाई शुरू कर दी.दिव्या अपनी कोहनी पे उचक गयी & सर पीछे घुमा प्रोफेसर को चूमते हुए उस से चुदने लगी.उसका जिस्म 1 बार फिर मस्ती के सफ़र पे चल पड़ा था.प्रोफेसर का दाया हाथ कभी उसकी जाँघो को सहलाया तो कभी पेट को.वो कभी उसके दाने को मसलता तो कभी गुलाबी निपल्स को.जब उसने उसकी चूचियो को दबोच के मसलते हुए उसके कान मे जीभ फिराते हुए पीछे से तेज़ धक्के लगाने शुरू किए तो 1 बार फिर दिव्या की आहे कमरे को गुलज़ार करने लगी.उसी वक़्त दिव्या की नज़र कमरे के कोने मे रखी 1 मूर्ति पे गयी.कोई 4 फिट लंबी वो मूर्ति 1 स्टॅंड पे रखी थी.खजुराहो की मूर्ति की नकल उस मूर्ति मे ज़ेवरो से सजे 2 नंगे प्रेमी 1 दूसरे के आगोश मे थे & लड़के ने लड़की की दाई जाँघ उठाके उसके चेहरे को चूमते हुए अपना लंड उसकी चूत मे घुसाया हुआ था.इस नज़ारे ने आग मे घी का काम किया & जब प्रोफेसर ने उसके दाने को मसलते हुए उसके कान को हल्के से काटा तो दिव्या 1 बार फिर सूबक पड़ी & झाड़ गयी.

दिव्या निढाल हो पेट के बल बिस्तर पे गिर गयी & अपना चेहरा सलवटो से भरे बिस्तर मे दफ़्न कर सिसकने लगी की तभी 1 बार फिर प्रोफेसर दीक्षित ने पीछे से ही उसकी टाँगो को फैला के अपनी ज़ुबान उसकी चूत से लगा दी.दिव्या की सिसकिया और तेज़ हो गयी.प्रोफेसर की लपलपाति जीभ उसकी चूत से निकले पानी को लगातार चाते जा रही थी.

वो बेचैन हो कमर हिलाते हुए कसमसाने लगी मगर प्रोफेसर ने उसकी कमर को दबाए रखा & उसकी चूत तब तक चाटता रहा जब तक वो 1 बार और नही झाड़ गयी.इस बार झाड़ते ही दिव्या ने करवट बदली & सीधी हो गयी.

दोनो प्रेमी 1 दूसरे की आँखो मे झाँक रहे थे.प्रोफेसर ने उसके घुटने पकड़ उसकी टाँगे खोली तो दिव्या उसका इरादा भाँप गयी & फ़ौरन उठी & प्रोफेसर की कमर को अपने आगोश मे ले उसके पेट को चूमने लगी.प्रोफेसर उसकी इस हरकत से थोडा अचंभे मे पड़ गया.

दिव्या बिस्तर पे बैठे हुए दाई बाँह को उसकी कमर पे लपेटे हुए बाए से उसके लंड को पकड़ उसे चूसने लगी तो प्रोफेसर की आह निकल गयी.दिव्या ने उसके पेट को दबाते हुए उसे बिस्तर पे लेटने का इशारा किया तो प्रोफेसर ने उसकी बात मान ली.दिव्या ने उसके लेटते ही अपनी बाई बाँह को उसकी बाई जाँघ के नीचे से घुसाते हुए उस हाथ से उसके नडो को दबोचा & उसके बगल मे लेट दाई कोहनी को उसके पेट पे टिकाते हुए उसके लंड को मुँह मे भर लिया.उसकी इस अदा पे प्रोफेसर की आह निकल गयी.

दिव्या अपने नखुनो से उसके आंडो को हल्के-2 खरोचते उसके लंड को चूस रही थी.प्रोफेसर काफ़ी देर से बिना झाडे उसे चोद रहा था & अब दिव्या का यू उसके लंड से खेलना उसे झड़ने की ओर तेज़ी से ले जा रहा था.उसने बाए हाथ से दिव्या के बाल पकड़ लिए & उन्हे सहलाने लगा.दिव्या की कोमल ज़ुबान उसके सूपदे को छत रही थी.उसका हाथ अब अंदो से उपर लंड के गिर्द कस चुका था & उसे हिला रहा था.प्रोफेसर का मोटा सूपड़ा उसके होंठो फैला रहा था मगर उसे उसे चाटने,चूसने मे बहुत मज़ा आ रहा था.

उसने अपना बाया हाथ लंड से नीचे किया & प्रोफेसर की बाई जाँघ के नीचे अपनी उंगलियो के पोर से सहलाने लगी.प्रोफेसर मस्ती मे पागल हो अपनी टांग बेचैनी से उठाने लगा.दिव्या ने अपने हाथ को थोड़ा नीचे किया & जहा से अंडे प्रोफेसर के जिस्म से जुड़े थे,उसकी गंद की छेद के थोड़ा उपर,वाहा पे हल्के से चिकोटी काट ली.

"आहह....दिव्या.....रुक जाओ..वरना मैं झाड़ जाऊँगा..!",प्रोफेसर उठ बैठा & दिव्या के बाल पकड़ के उसके सर को उपर किया.

"तो झड़ो ना!"दिव्या की आँखो मे मस्ती के डोरे तार रहे थे,"मैं भी तुम्हारे प्यार का रस चखना चाहती हू आज.",दिव्या ने बिना अपनी पलके नीचे किए अपने आशिक़ के मोटे लंड के छेद पे 1 हल्की सी किस ठोंक दी.प्रोफेसर के जिस्म मे जोश की आग और भड़क उठी.उसने दिव्या की बाई बाँह अपनी जाँघ के नीचे से निकाल अपनी टाँगे फैला दी तो दिव्या उसकी टाँगो के बीच लेट गयी & थोड़ा उठ के उसके लंड को मुँह मे भर लिया.ज़ोर-2 से हिलाते हुए वो लंड को चूसे चली जा रही थी.आख़िर प्रोफेसर कितनी देर तक उसकी ऐसी हरकतें झेलता.उसके आंडो मे अब मीठा दर्द होना शुरू हो गया था.

"दिव्याआअ.....आहह....!",उसका जिस्म झटके खाने लगा & वो दिव्या का सर पकड़े हुए झड़ने लगा.दिव्या का मुँह उसके लंड से निकल रहे वीर्य से भरने लगा.दिव्या ने उसके साथ पिच्छले दीनो मे ना जाने कितनी बार चुदाई की थी मगर फिर भी प्रोफेसर के वीर्य की मात्रा कम नही होती थी.उसका मुँह भर रहा था मगर लंड अभी भी पिचकारियाँ छ्चोड़ रहा था.दिव्या उसके वीर्य की 1-1 बूँद को पी जाना चाहती थी.वो लंड को अभी भी चूसे जा रही थी.

जब उसने पूरे लंड को चाट के सॉफ कर दिया तब जाके उसे चैन पड़ा & वो उपर उठी.उसके उठते ही प्रोफेसर ने उसे अपनी बाँहो मे भर लिया & उसके प्यारे चेहरे को अपनी किस्सस से ढँक दिया.उसके होंठो पे अपने वीर्य का स्वाद चखना प्रोफेसर के लिए बड़ा मस्ती देने वाला एहसास था.उसने अपनी जवान प्रेमिका को अपने जिस्म से पूरा सटा लिया & बिस्तर पे लेट गया.ये तो आगाज़ था दोनो ही जानते थे कि आज रात के अंजाम तक दोनो मस्ती की नयी ऊँचाइयो को छु लेंगे.

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"वो महेश अरोरा था ना?"

"ह-हां..क्यू..?",वॉक-इन क्लॉज़ेट मे कपड़े उतारती अंजलि पति के सवाल से चौंक पड़ी.

"बस ऐसे ही.",जसजीत प्रधान उसकी ओर पीठ किए अपने कपड़े उतार रहा था.अगर वो उस वक़्त अपनी बीवी की ओर देखता तो पाता की क्रीम कलर के ब्रा के गले मे से उसका क्लीवेज उसके धड़कते दिल की घबराहट बयान कर रहा था.

"मुकुल का कॅंपेन वही फाइनान्स कर रहा है.",प्रधान ने पॅंट उतारी,"..मगर वो तुम्हारे साथ कैसे डॅन्स करने लगा?तुम उसे जानती हो क्या?"

"हूँ..हां....मेरा सीनियर था ना कॉलेज मे तो थोड़ी बहुत जान-पहचान थी,ही-हेलो तक & अब..",अंजलि ने पेटिकोट उतारा,"..तुम्हारी वजह से मैं भी तो मशहूर हो गयी हू इसलिए मेरे साथ डॅन्स करने आ गया."

"तुम्हे अच्छा नही लगा क्या?",जसजीत केवल अंडरवेर मे खड़ा था जब अंजलि ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया.

"नही..",जसजीत घुमा & अंजलि की नंगी कमर को अपनी बाहो मे कस के मसला,"..तुम्हे किसी भी और की बाहो मे देखता हू तो पागल हो जाता हू.",उसने अपने होंठ अंजलि के क्लीवेज से लगा दिए.

"धात!....आहह....उम्म्म्म....बिस्तर पे चलो ने प्लीज़....ऊहह..!",पति की गुस्ताख हर्कतो ने उसकी बदगुमानी दूर कर दी थी लेकिन फिर भी अपने पति से,जिसे वो जान से भी ज़्यादा चाहती थी,झूठ बोलना उसे अच्छा नही लगा था मगर वो क्या करती,उसकी मा ने उसे शादी से पहले सख़्त हिदायत दी थी कि चाहे कुच्छ भी हो जाए वो जसजीत को महेश के बारे मे नही बताएगी वरना उसकी शादी बर्बाद भी हो सकती थी.

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"मैने भाभी से बात की आज.",मुकुल नीना के नंगे कंधे को चूम रहा था.दोनो अपने बिस्तर मे चादर के नीचे थे,नीना बाई करवट पे थी & मुकुल उस से पीछे से सटा था.

"तो?"

"भाभी नाराज़ नही हैं पर भाय्या है.",मुकुल उसके पेट को सहला रहा था....अफ..कुच्छ भी कर लो लेकिन ये आदमी बस अपने भाय्या-भाभी की माला ही जपेगा!नीना खिज उठी.

"तो बस मैं चुनाव जीत के भाय्या को ये साबित कर दूँगा कि मैं भी किसी लायक हू.",मुकुल नीना की गर्दन चूम तो रहा था मगर ऐसा लगता था मानो उसका दिल कही और था....ओह!तो ये बात है,मुकुल भी खुद को साबित करना चाहता है,"..& तुम्हे वो सब दूँगा जिसकी तुम हक़दार हो,नीना.",..नीना को ग्लानि महसूस हुई,वो तो सब केवल अपनी हस्रतो को पूरा करने के लिए कर रही थी मगर उसका पति उसकी & अपने परिवार की उमीदो पे खरा उतरने के लिए ये सब कर रहा था..वैसे भी मुकुल उसे पागलो की तरह चाहता था..मगर वो भी तो सब अपने परिवार की खुशी के लिए ही कर रही थी.

"ज़्यादा परेशान मत हो..",नीना ने करवट ली & मुकुल के चेहरे को अपने हाथो मे भर लिया,"..तुम जीतोगे & सब ठीक हो जाएगा & मेरी फ़िक्र मत किया करो.मैं खुश हू तुम्हारे साथ मुकुल.किसी और की बीवी बन के ज़िंदगी बिताने की तो मैं सोच भी नही सकती.",ज़माने बाद नीना की आवाज़ मे मुकुल ने वो नर्मी महसूस की थी.उसके दिल मे प्यार का सैलाब उमड़ आया & उसने अपनी प्यारी बीवी को अपने आगोश मे क़ैद कर लिया & उसके जिस्म को अपने प्यार से भिगोने लगा.उस रात अरसे बाद नीना अपने पति की चुदाई से 2 बार झड़ी.

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क्रमशः........

gataank se aage............-

professor neeche aya & uski panty ke upar se hi uski chut ko kisses se dhank diya.divya bistar pe hath bechiani se chalati apna sar idhar-udhar hila rahi thi.adhkhuli aankho se usne dekha ki har deewar pe pyar me dube jodo ki tasvire hain.kisi me koi 1 dusre ko chum raha hai to kisi me bas dono premi 1 dusre ke agosh me baithe hain.1 tasvir me 1 bilkul nangi ladki apne premi se chud rahi thi.dono ko dekh aisa lagta tha dono 1 sath jhad rahe hain.divya ko mehsus hua ki uske premi ne uski panty utar di hai.

"aannhhhhhh....!",professo ki zuban uski chut se takrayi to vo karah uthi.professor ne uski gand ki baglo me hath laga ke uski chut chatna shuru kar diya & use pagal kar diya.vo apni zuban ko uski chut ke andar ghusa ke us se beh rahe ras ki 1-1 boond ko chate ja raha tha.beech-2 me uski zuban bahar aa divya ke dane pe chalti to vo aur zor se karah ithati.professor ne apna baya hath bagal se hata ke uski chut ke upar ke pet ke hisse pe dabaya & apni zuban andar firayi to divya chikh uthi.bechaini se co bistar ki chadar ko pakad ke khinchti hui kamar uchkane lagi magar professor ke hath ne use bistar pe dabaye rakha & uski chut se vaise hi khelte raha.divya sisakte hue fir se jhadne lagi.

professor ne apna chehra uski chut se uthaya & uski faili tango ke beech aa gaya.divya ne apni tange hawa me utha di to professor ne uski nazro me jhankte hue apna lund uski chut me utarna shuru kar diya.divya ne aankhe meench li & uski baahe pakad li & apna sar peechhe kar liya.professor ka mota lund uski chut ko bahut zyada faila deta tha & shuru me use abhi bhi thoda dard hota tha.professor ne bas 2 inch lund bahar rakha & bahut dhire-2 apni premika ki chudai shuru kar di.vo thoda neeche jhuka & uski gardan chumne laga to divya ne apne sar ke bagal me pade uske mazbut baye bazu se apne honth laga diye.professor ki lund ki ragad se jab uski chut mast ho gayi to uski tango me bhi harkat aane lagi.vo kabhi professor ki jangho pe chadh jati to kabhi uski kamar pe.divya apni aediyo se professor ki jangho ke pichhle hisse ko sehlate hue jab neeche se apni kamar hilane lagi to professor ne lund ko supade tak khincha & 1 zor ka dhakka diya.

"OOWWWWWWW.....!",lund jud tak divya ki chut me sama gaya tha.divya ke hath 1 baar fir bistar ki chadar pe apni bechaini ki dastan kehte hue salwaten chhodne lage.professor uske khubsurat jism ki golaiyo,uski lumbi gardan & haseen chehre ko chumte hue bas dhakke pe dhakke lagaye ja raha tha.professor thodi der baad use upar se utha & apni hatheliye uske dono taraf jama uski chudai karne laga.divya to masti & maze se behal ho gayi thi & sisak rahi thi.aankhe kholi to usne apne upar uthe hue dhakke lagate professor ko dekha.usne sar neeche kiye to uski chikni chut ko bhedta use professor ka bina balo ka mota,tagda lund nazar aaya to jaise uske andar josh ki 1 nayi lehar uth gayi.

usne apne hatho se apni choochiya masalte hue apna sar upar kiya to use professor ka fauladi seena dikha,usne pane hath upar kar uske jism ko pakda & uchakte hue apne honth professor ke baye nipple se laga diye & chusne lagi.professor ko iski umeed nahi thi & usne khud ko jhadne se kaise roka ye vahi janta tha.1 to divya ki chut ab uske lund pe bilkul kas gayi thi upar se uski ye mastani harkat!

vo bas jhuka vaise hi dhakke lagata raha ki tabhi divya ko apni chut me bahut tanav mehsus hua.usne professor ka jism chhod diya,uske honth uske nipple se alag hue & vo vapas bsitar pe gir gayi.uske dono hath peechhe palang ke headboard se ja lage & vo zor-2 se chikhne lagi.hath peechhe le jane se uski choochiya & ubhar gayi thi & professor ko vo use dawat deti hui lagi.vo jhuka & apni mehbooba ki choochiyo ko munh me bhar liya.

"AANNNNHHHHHH....!",1 aakhiri chikh ke sath divya jhad gayi.uske jhadte hi professor ne fauran apna lund uski chut se bahar khincha & uski gand ke neeche hath laga use hawa me utha diya & is se pehle ki divya kuchh samajhti vo jhuk ke uski chut chatne laga.

"AANNHHH...UUNNHHHH..HHHUUNNHHH...NNNUUHHHH...!",jism me masti jis shiddat ke sath beh rahi thi vo ab nakabile bardasht thi.divya ab ro rahi thi.jism ke maze ko is gehrayi,is teevrata se usne kabhi mehsus nahi kiya tha.vo professor ka sar apni chut se hatana chah rahi thi magar vo tha ki maan hi nahi raha tha & uski chut chate chala ja raha tha.

"OONNNHHHHHH....UUUNNHHHHHHH.....!",divya subakti hui 1 baar fir jhad gayi & usne professor ko door dhakel diya & apni bayi karwat pe ho apni tange mod ke ghutne pane pet pe laga liye & apni baahe bhinch ke sisakne lagi.professor uski pith se aa laga & uske baal sehlane laga.kuchh palo baad usne divya ke chehre se zulfe hata uske gaal ko chuma to divya ne uski taraf dekha.professor ne uska chehra apni or kiya & bade pyar se chuma.divya ab sambhal chuki thi & uski kiss ka jawab dene lagi thi.

professor ne vaise hi karwat pe lete hue uski dayi tang ko uthaya & 1 baar fir divya ki chudai shuru kar di.divya apni kohni pe uchak gayi & sar peechhe ghuma professor ko chumte hue us se chudne lagi.uska jism 1 baar fir masti ke safar pe chal pada tha.professor ka daya hath kabhi uski jangho ko sehlayta to kabhi pet ko.vo kabhi uske dane ko masalta to kabhi gulabi nipples ko.jab usne uski choochiyo ko daboch ke maslate hue uske kaan me jibh firate hue peechhe se tez dhakke lagane shuru kiye to 1 baar fir divya ki aahe kamre ko gulzar karne lagi.usi waqt divya ki nazar kamre ke kone me rakhi 1 murti pe gayi.koi 4 ft lumbi vo murti 1 stand pe rakhi thi.khajuraho ki murti ki nakal us murti me zevaro se saje 2 nange premi 1 dusre ke agosh me the & ladke ne ladki ki dayi jangh uthake uske chehre ko chumte hue apna lund uski chut me ghusaya hua tha.is nazare ne aag me ghee ka kaam kiya & jab professor ne uske dane ko maslate hue uske kaan ko halke se kata to divya 1 baar fir subak padi & jhad gayi.

Divya nidhal ho pet ke bal bistar pe gir gayi & apna chehra salwato se bhare bistar me dafn kar sisakne lagi ki tabhi 1 baar fir Professor Dixit ne peechhe se hi uski tango ko faila ke apni zuban uski chut se laga di.divya ki siskiya aur tez ho gayi.professor ki laplapati jibh uski chut se nikle pani ko lagatar chate ja rahi thi.

vo bechain ho kamar hilate hue kasmasane lagi magar professor ne uski kamar ko dabaye rakha & uski chut tab tak chatata raha jab tak vo 1 baar aur nahi jhad gayi.is baar jhadte hi divya ne karwat badli & seedhi ho gayi.

dono premi 1 dusre ki aankho me jhank rahe the.professor ne uske ghutne pakad uski tange kholi to divya uska irada bhanp gayi & fauran uthi & professor ki kamara ko apne agosh me le uske pet ko chumne lagi.professor uski is harkat se thoda achambhe me pad gaya.

divya bistar pe baithe hue dayi banh ko uski kamar pe lapete hue baye se uske lund ko pakad use chusne lagi to professor ki aah nikal gayi.divya ne uske pet ko dabate hue use bistar pe letne ka ishara kiya to professor ne uski baat maan li.divya ne uske letate hi apni bayi banh ko uski bayi jangh ke neeche se ghusate hue us hath se uske nado ko dabocha & uske bagal me let dayi kohni ko uske pet pe tikate hue uske lun dko munh me bhar liya.uski is ada pe professor ki aah nikal gayi.

divya apne nakhuno se uske ando ko halke-2 kharochte uske lund ko chus rahi thi.professor kafi der se bina jhade use chod raha tha & ab divya ka yu uske lund se khelna use jhadne ki or tezi se le ja raha tha.usne baye hath se divya ke baal pakad liye & unhe sehlane laga.divya ki komal zuban uske supade ko chat rahi thi.uska hath ab ando se upar lund ke gird kas chuka tha & use hila raha tha.professor ka mota supada uske hotho faila raha tha magar use use chatne,chusne me bahut maza aa raha tha.

usne apna baya hath lund se neeche kiya & professor ki bayi jangh ke neeche apni ungliyo ke pror se sehlane lagi.professor masti me pagal ho apni tang bechaini se uthane laga.divya ne apne hath ko thoda neeche kiya & jaha se ande professor ke jism se jude the,uski gand ki chhed ke thoda upar,vaha pe halke se chikoti kaat li.

"aahhhh....divya.....ruk jao..varna main jhad jaoonga..!",professor uth baitha & divya ke baal pakad ke uske sar ko upar kiya.

"to jhado na!"divya ki aankho me masti ke dore tair rahe the,"main bhi tumhare pyar ka ras chakhna chahti hu aaj.",divya ne bina apni palke neeche kiye apne aashiq ke mote lund ke chhed pe 1 halki si kiss thonk di.professor ka jism ki josh ki aag aur bhadak uthi.usne divya ki bayi banh apni jangh ke neeche se nikal apni tange faila di to divya uski tango ke beech let gayi & thoda uth ke uske lund ko munh me bhar liya.zor-2 se hilate hue vo lund ko chuse chali ja rahi thi.aakhir professor kitni der tak uski aisi harkaten jhelta.uske ando me ab meetha dard hona shuru ho gaya tha.

"divyaaaaa.....aahhhhhhh....!",uska jism jhatke khane laga & vo divya ka sar pakde hue jhadne laga.divya ka munh uske lund se nikal rahe virya se bharne laga.divya ne uske sath pichhle dino me na jane kitni baar chudai ki thi magar fir bhi professor ke virya ki matra kam nahi hoti thi.uska munh bhar raha tha magar lund abhi bhi pichlariyan chhod raha tha.divya uske virya ki 1-1 boond ko pi jana chahti thi.vo lund ko abhi bhi chuse ja rahi thi.

jab usne pure lund ko chat ke saaf kar diya tab jake use chain pada & vo upar uthi.uske uthate hi professor ne use apni bahao me bhar liya & uske pyare chehre ko apni kisses se dhank diya.uske hotho pe apne virya ka sad chakhna professor ke liye bada masti dene vala ehsas tha.usne apni jawan premika ko apne jism se pura sata liya & bistar pe let gaya.ye to aaghaz tha dono hi jante the ki aaj raat ke anjam tak dono masti ki nayi oonchaiyo ko chhu lenge.

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"Vo Mahesh Arora tha na?"

"h-haan..kyu..?",walk-in closet me kapde utarti Anjali pati ke sawal se chaunk padi.

"bas aise hi.",Jasjit Pradhan uski or pith kiye apne kapde utar raha tha.agar vo us waqt apni biwi ki or dekhta to pata ki cream color ke bra ke gale me se uska cleavage uske dhadakte dil ki ghabrahat bayan kar raha tha.

"Mukul ka campaign vahi finance kar raha hai.",pradhan ne pant utari,"..magar vo tumhare sath kaise dance karne laga?tum use janti ho kya?"

"hun..haan....mera senior tha na college me to thodi bahut jaan-pehchan thi,hi-hello tak & ab..",anjali ne petticoat utara,"..tumhari vajah se main bhi to mashoor ho gayi hu isliye mere sath dance karne aa gaya."

"tumhe achha nahi laga kya?",jasjit kewal underwear me khada tha jab anjali ne use peechhe se baaho me bhar liya.

"nahi..",jasjit ghuma & anjali ki nangi kamar ko apni baaho me kas ke masla,"..tumhe kisi bhi aur ki baaho me dekhta hu to pagal ho jata hu.",usne apne honth anjali ke cleavage se laga diye.

"dhat!....aahhhh....ummmm....bistar pe chalo ne please....oohhhhh..!",pati ki gustakh harkato ne uski badgumani door kar di thi lekin fir bhi apne pati se,jise vo jaan se bhi zyada chahti thi,jhuth bolna use achha nahi laga tha magar vo kya karti,uski maa ne use shadi se pehle sakht hidayat di thi ki chahe kuchh bhi ho jaye vo jasjit ko mahesh ke bare me nahi batayegi varna uski shadi barbad bhi ho sakti thi.

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"maine bhabhi se baat ki aaj.",mukul Nina ke nange kandhe ko chum raha tha.dono apne bistar me chadar ke neeche the,nina bayi karwat pe thi & mukul us se peechhe se sata tha.

"to?"

"bhabhi naraz nahi hain par bhaiyya hai.",mukul uske pet ko sehla raha tha....uff..kuchh bhi kar lo lekin ye aadmi bas apne bhaiyya-bhabhi ki mala hi japega!nina khij uthi.

"to bas main chunav jeet ke bhaiyya ko ye sabit kar dunga ki main bhi kisi layak hu.",mukul nina ki gardan chum to raha tha magar aisa lagta tha mano uska dil kahi aur tha....oh!to ye baat hai,mukul bhi khud ko asbit karna chahta hai,"..& tumhe vo sab dunga jiski tum haqdar ho,nina.",..nina ko glani mehsus hui,vo to sab keval apni hasrato ko pura karne ke liye kar rahi thi magar uska pati uski & apne parivar ki umeedo pe khara utarne ke liye ye sab kar raha tha..vaise bhi mukul use paglo ki tarah chahta tha..magara vo bhi to sab apne parivar ki khushi ke liye hi kar rahi thi.

"zyada pareshan mat ho..",nina ne karwat li & mukul ke chehre ko apne hatho me bhar liya,"..tum jeetoge & sab thik ho jayega & meri fikr mat kiya karo.main khush hu tumhare sath mukul.kisi aur ki biwi ban ke zindagi bitane ki to main soch bhi nahi sakti.",zamane baad nina ki aavaz me mukul ne vo narmi mehsus ki thi.uske dil me pyar ka sailab umad aya & usne apni pyari biwi ko apne agosh me qaid kar liya & uske jism ko apne pyar se bhigone laga.us raat arse baad nina apne pati ki chudai se 2 baar jhadi.

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--43

गतान्क से आगे............-

"आ गयी वापस?",अजीत ने बाथरूम मे जाके मोबाइल अपने कान से लगाया.

"हां,आज सवेरे ही आई.",दिव्या प्रोफेसर दीक्षित के बेडरूम मे पलंग पे नंगी पड़ी थी.प्रोफेसर किचन से कुच्छ खाने को लाने गया था.उस वक़्त दिव्या ने जब अपना मोबाइल चेक किया तो अजीत की मिस्ड कॉल्स पाई तो उसने उसे फोन किया.

"कल तो छुट्टी है?"

"हूँ.",दिव्या सोच रही थी कि अगर अजीत कल मिलने को काहे तो वो क्या बहाना बनाएगी.कल का पूरा दिन वो बस प्रोफेसर की बाहो मे बिताना चाहती थी.

"तो परसो मिलेंगे,ठीक है ना?",अजीत ने खुद ही उसकी मुश्किल आसान कर दी.

"ओके."

"बाइ!"

"बाइ!",अजीत ने फोन बंद किया & कपड़े बदलने लगा.बाथरूम के बाहर खड़ी मेघना की आँखो से 2 बूंदे उसके गालो पे ढालाक गयी..अभी कितना वक़्त ही हुआ था दोनो की शादी को & अजीत अभी से ही..बड़ी मुश्किल से उसने अपनी रुलाई रोकी.वैसे ना उसे मालूम था ना अजीत को & ना ही दिव्या को कि अजीत & दिव्या की अगली मुलाकात कल ही होनी थी & मेघना भी कल रात ही अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी उलझन से रूबरू होने वाली थी.

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अगले रोज़ शाम के 6 बजे थे & अंजलि की कार स्पोर्ट्स कॉंप्लेक्स के बाहर आ कर रुक गयी थी.स्पोर्ट्स कॉंप्लेक्स 1 तिराहे पे था.1 सड़क तो उसके मैं गेट के साथ-2 दाए से बाए जा रही थी & 1 छ्होटी सड़क सीधी उसके गेट तक आती थी.ये छ्होटी सड़क साँप की तरह 2 बार घूमती थी & इसी सड़क के पहले घूमाओ पे बल्लू अपने 3 आदमियो के साथ 1 क़ुआलिस मे बैठा था.उसकी नज़रो से ओझल अंजलि की कार कुच्छ ही दूरी पे पार्किंग मे वॅन मे वरुण बैठा था & इन सभी से थोड़ी दूरी पे सड़क के दूसरी ओर अपने 1 साथी के साथ 1 वॅन मे हीरा बैठा था.बल्लू का 1 आदमी कॉंप्लेक्स के सामने की सड़क के दूसरी ओर उगी झाड़ियो मे च्छूपा बैठा गेट पे नज़र रखे था.जैसे ही अंजलि की कार वापस निकलने के लिए घूमती तो वो अपने फोन से उसे इशारा कर देता.

वरुण ने देखा कि अनीश की प्रॅक्टीस हो चुकी है & वो अपना काइट्बॅग उठाए अपनी मा के साथ बाहर आ रहा था.सभी चौक्कने हो गये.वरुण का दिल ज़ोरो से धड़क रहा था.वो अपराधी नही था मगर आज वो 1 जुर्म करने जा रहा था,1 संगीन जुर्म & अब वो नर्वस हो रहा था.उसने लंबी साँस ली & खुद को शांत करने लगा.अंजलि बेटे के साथ गेट से बाहर आई,अनीश ने अपना काइट्बॅग कार की डिकी मे डाला & मा के साथ पिच्छली सीट पे बैठ गया.ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट की & जैसे ही उसने छ्होटे रास्ते की तरफ गाड़ी घुमाई अपनी वॅन से निकल वरुण कार के सामने कूद पड़ा.

ड्राइवर ने ज़ोर से ब्रेक लगाया & दरवाज़ा खोल बाहर निकला,उसे लगा की उसने आक्सिडेंट कर दिया है & उसकी गाड़ी से टकराए शख्स को चोट आई है.उसने सड़क पे पड़े वरुण को उठाने के लिए उसके कंधे पे हाथ रखा तो वरुण तेज़ी से उठा & 1 मुक्का उसके जबड़े पे जड़ दिया.ड्राइवर कुच्छ हैरानी & कुच्छ मुक्के के ज़ोर से पीछे गिरा & वरुण ने फुर्ती से कार का पिच्छला दरवाज़ा खोल उतने ही भौंचक्के अनीश को बाहर खींचा.अंजलि का दिमाग़ तो जैसे सुन्न हो गया था,उसे कुच्छ समझ मे नही आ रहा था कि ये हो क्या रहा है?सब कुच्छ किसी फिल्म की तरह उसकी नज़रो के सामने घट रहा था.

"मम्मी..!",वरुण की गिरफ़्त मे छट-पटाया अनीश चीखा तो वो जैसे जाग उठी.

"अनीश..!हेल्प....बचाओ..गार्ड...!",उसने कॉंप्लेक्स के गार्ड को चीख के बुलाया.वरुण अनीश के मुँह पे हाथ रखे उसे अपनी वॅन तक ले गया की तभी पीछे से किसी ने उसके कंधे पे वार किया & जैसे ही उसकी गिरफ़्त अनीश पे ढीली हुई 2 जोड़ी हाथो ने अनीश को उसके क़ब्ज़े से छीन लिया & कुच्छ दूरी पे खड़ी अपनी गाड़ी मे डाल वो मैं गेट के साथ वाली सड़क पे भाग गये.

वरुण जब तक संभाला उसने देखा कि कॉंप्लेक्स से भागते लोग उसकी ओर आ रहे हैं.उसने फ़ौरन अपनी वॅन का दरवाज़ा खोला & ड्राइविंग सीट पे बैठा,एंजिन उसने बंद किया नही था,उसने वॅन गियर मे डाली & जल्दी से वाहा से भागा.वो पसीने से तरबतर था..वो कौन लोग थे?..कहा गये वो?..वो पागलो की तरह वॅन भगाए जा रहा था.थोड़ा आगे जाके उसने 1 सड़क के किनारे वॅन लगाई & अपनेआप को संभालने लगा....सब गड़बड़ हो गया था & उसे लोगो ने देख भी लिया था..अब क्या करेगा वो?..मूसा भी जैल से 4 दीनो बाद निकलने वाला था लेकिन तब तक वो क्या करेगा..सबसे पहले तो उसे इस वॅन को छ्चोड़ना पड़ेगा लेकिन कहा..ऐसी जगह जहा ये जल्दी बरामद ना हो..हा 1 जगह थी..उसने वन स्टार्ट की & आगे बढ़ा.

"भाई,सब गड़बड़ हो रहा है!",बल्लू का आदमी अपने च्छूपने की जगह से भागता हुआ निकला,"..हमारा समान कोई और उठा रहा है!"

"क्या?!गाड़ी भगा गेट की तरफ!",बल्लू के हुक्म पे अगले ही पल गाड़ी कॉंप्लेक्स के पास पहुँची & बल्लू ने वरुण की भागती वॅन को देखा.उसने दरवाज़ा खोला & उसका आदमी कार के अंदर कुदा & गाड़ी वरुण की वॅन के पीछे लग गयी.

"भाई,समान उसमे नही दूसरी गाड़ी मे है."

"क्या?"

"हां,भाई.उस वॅन मे 1 अकेला लड़का था जिसने समान को उठाया मगर फिर अचानक दूसरी तरफ से 2 आदमी आए,दोनो सर से पाँव तक काले लिबास मे थे,चेहरे पे काले नक़ाब भी थे.उन्होने उस लड़के से समान को छीना & अपनी सफेद क़ुआलिस मे डाल के निकल गये.नंबर प्लेट पे कीचड़ लगा था."

"कोई हमारी बिरादरी का लगता है.",बल्लू सोच मे डूबा था,"..मगर कौन है जो हमारे मुँह से नीवाला छीन रहा है.कौन है साला?!",बल्लू ने आगे की सीट की बॅक पे हाथ मारा.

ये सब खामोशी से देखता हीरा अपने साथी के साथ वाहा से निकल गया.उसने अपने साथी को 1 बस स्टॅंड पे उतरा & फिर नीना को फोन लगाया.

"हो गया काम?"

"नही.",बल्लू ने उसे सारा हाल सुनाया.

"हूँ..कोई बात नही,अब महेश को सब बता दो.",हीरा ने ऐसा ही किया.

"क्या?!बेटे को किडनॅप कर लिया!..अरे..तो तुमने अंज-..आइ मीन प्रधान की बीवी को क्यू नही उठाया?",महेश बौखला गया था,"..मैने तुम्हे बीवी को उठाने को बोला था ना!"

"साहब,वाहा भीड़ इकट्ठा हो गयी थी,उसमे मैं कैसे करता ये काम & फिर मुझे क्या पता था कि हमारी तरह कोई और भी इस चक्कर मे पड़ा है."

"मगर..",महेश को बहुत खिज हो रही थी,सारे किए-कराए पे पानी फिर गया था,"..तुम यहा आओ अबी!"

"ठीक है,साब ."

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"क्या?!",भाय्या जी अपनी कुर्सी से उठ खड़े हुए,"..रघु,ऐसे हुआ कैसे?"

"कुच्छ समझ नही आ रहा,बलदेव.ये साला किसकी हिम्मत हुई कि मेरे काम मे अड़ंगा डाला."

"रघु,ऐसा हो नही सकता कि किसी को हमारे प्लान के बारे मे पता हो.",भाय्या जी अब संभाल चुके थे & वापस कुर्सी पे बैठ गये थे,"..ये इत्तेफ़ाक़ है."

"ऐसे कैसे मान लू की इत्तेफ़ाक़ है!और कौन उठाना चाहेगा प्रधान के लौंदे को और क्यू?"

"सही सवाल किया तुमने रघु..क्यू?",भाय्या जी का पैना दिमाग़ तेज़ी से चल रहा था,"इस क्यू का जवाब ढूनडते हैं,रघु,कौन का जवाब अपनेआप मिल जाएगा."

"सही बोला,भाई..सही बोला."

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वरुण ने कार को डेवाले रेलवे स्टेशन की पार्किंग मे लगाया & वाहा से बाहर निकला.रास्ते मे कही भी कोई चेकिंग नही हो रही थी मगर उसे पता था कि उसका हुलिया अब तक पूरी डेवाले की पोलीस को पता होगा,उसे अब इसका भी कुच्छ करना होगा.जहा तक हो सका उसने वॅन मे से अपने उंगलियो के निशान मिटाने की कोशिश की थी मगर अब उसे यहा से किसी तरह निकल जाना था..क्यू ना कोई भी ट्रेन पकड़ के निकल ले यहा से?..हा ये सही रहेगा..मगर पोलीस तो यहा से जाने वाली गाडियो & उनके स्टेशन्स पे भी नज़र रख सकती है..पहले हुलिया बदलना होगा.वो स्टेशन से बाहर निकला & पास के बाज़ार मे घुस गया.

1 सलून दिखा तो वो उसके अंदर चला गया,"ज़रा शेव & कटिंग करानी है."

"ज़रूर,सर.बैठिए.",नाई ने दराज़ से अपना समान निकालना शुरू किया,कैसी कटिंग करू,सर?",उसके गर्दन तक के लंबे,घुंघराले बालो को उसने पानी से गीला किया.

"छ्होटे कर दो & ये सामने से स्पाइक..ऐसे..ठीक है."

"ठीक है,सर.",जब वरुण सलून से निकला तो उसके बॉल बिल्कुल छ्होटे थे & सामने के बॉल स्पाइक्ड.अपनी दाढ़ी भी उसने पूरी साफ करा ली थी & अब उसे उमीद थी कि कोई उसे नही पहचानेगा.वो वापस स्टेशन गया मगर अब वाहा का नज़ारा बदल चुका था.चप्पे-2 पे पोलीस थी & उनके साथ खोजी कुत्ते भी थे.उसकी हिम्मत नही पड़ी कि वो उनकी नज़र बचाके आगे बढ़े & वो वाहा से निकल लिया.8 बज चुके थे & उसे ख़याल आया कि उसे अपने कपड़े भी बदलने हैं.वापस अपने वीरान बिल्डिंग वाले अड्डे पे जाना अभी संभव नही था क्यूकी वो जगह यहा से दूर थी & उसके पास सवारी भी नही थी,टॅक्सी वो इस्तेमाल करना नही चाहता था.इसी उधेड़बुन मे वो वाहा से निकला & सड़क पे चलने लगा.कुच्छ ही दूर उसे 1 माल दिखा जहा से उसने 1 सस्ती सी शर्ट & जींस खरीदे फिर 1 पब्लिक टाय्लेट मे अपने कपड़े बदल वो बाहर आ गया.उसकी समझ मे नही आ रहा कि रात कहा काटे & आगे क्या करे.पिच्छले 45 मिनिट से वो कभी इस गली तो कभी उस सुनसान सड़क पे पैदल चला जा रहा था.प्रधान के घर के सामने वाले बंगले मे जाना भी मुमकिन नही था क्यूकी इस वक़्त वो पूरा इलाक़ा तो पोलीस से भरा होगा.तभी उसकी नज़र सामने गयी,वो पोलीस ऑफिसर्स कॉलोनी के पास आ गया था.

वो मुझे शहर या उस से बाहर ढूंड रहे हैं मगर अपने ही घर मे ढूढ़ने का तो उन्हे ख़याल भी नही आएगा.हां,यही ठीक रहेगा & वो कॉलोनी मे घुसने का कोई आसान रास्ता ढूँढने लगा.

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"उउम्म्म्म...उउन्न्ह....!",कमरे मे चूमने की मस्त आवाज़े गूँज रही थी.दिव्या प्रोफेसर की दाई तरफ अपनी बाई करवट पे लेटी थी & उसके दाए हाथ मे प्रोफेसर का लंड था.प्रोफेसर अपनी दाई करवट पे था & दिव्या की ज़ुबान को चूस्ता हुआ उसकी चूचियाँ मसल रहा था कि दिव्या का मोबाइल बजा.

"ओफ्फो..!",दिव्या ने बेमान से किस तोड़ी & अपने महबूब का मस्त लंड छ्चोड़ फोन उठाया,"हेलो."

"दिव्या,फ़ौरन हेडक्वॉर्टर्स पहुँचो!",डीसीपी वेर्मा की आवाज़ मे चिंता & बेसब्री सॉफ झलक रही थी.

"यस.सर.",दिव्या बिस्तर पे बैठ गयी,"..हुआ क्या है.सर?"

"हुआ क्या है!",डीसीपी साहब थोड़े बौखलाए लगे,"..तुम्हे अभी तक नही पता.तुम हो कहा?!न्यूज़ देखो & फ़ौरन यहा पहुँचो."

"सर.."

"हां?"

"प्रोफेसर दीक्षित को.."

"नही,अभी नही."

"सर."

"क्या हुआ,दिव्या?"

"पता नही,ज़रा टीवी खोलो.मुझे फ़ौरन हेडक्वॉर्टर्स पहुचना है.",दिव्या अपने कपड़े पहनने लगी.कुच्छ पलो बाद दोनो ही संजीदगी से टीवी को देख रहे थे.

"पहले मुझे घर जाना होगा,ऐसे लिबास मे दफ़्तर नही जा सकती ना.",दिव्या ने अपनी शॉर्ट ड्रेस की ओर इशारा किया.

"हूँ.",प्रोफेसर बहुत ही गंभीर हो गया था.

"ओके,मैं जाती हू.जो भी होगा तुम्हे बताती रहूंगी.",दिव्या पंजो पे उचकी & प्रोफेसर के होंठ चूम लिए.प्रोफेसर ने भी जवाब दिया मगर उस किस मे कुच्छ कमी थी,दिव्या को लगा कि प्रोफेसर इस खबर से परेशान हो गया.उसने सोचा कि उस से इस बारे मे पुच्छे मगर उसके पास वक़्त नही था & वो वाहा से निकल आई.

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"ऐसा आख़िर हुआ कैसे?",डेवाले के पोलीस कमिशनर गुस्से से बहाल थे,"..उनकी फॅमिली की सेक्यूरिटी थी कहा?",उनका सवाल VईP सेक्यूरिटी के जॉइंट कमिशनर की तरफ था.

"सर,हमने कयि बार उन्हे कहा था लेकिन वो कभी मानते ही नही थे.अब हमारे आदमी ज़बरदस्ती तो उनके पीछे लग नही सकते थे."

"डॅम इट.",कमिशनर के चुप होते ही मीटिंग हॉल मे सन्नाटा पसर गया.

"ओके.",कुच्छ पॅलो बाद वो बोले,"..बच्चा अगवा हो चुका है,अब हमारी सबसे पहली प्राइयारिटी है उसे सही-सलामत उसके घर पहुचाना.सिंग साहब..",वो जॉइंट कमिशनर(क्राइम) से मुखातिब हुए,"..ये आपकी ज़िम्मेदारी है."

"यस,सर.आपकी इजाज़त हो तो मैं निकलु?"

"यस & गुड लक."

"थॅंक यू,सर."

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--43

gataank se aage............-

"aa gayi vapas?",Ajit ne bathroom me jake mobile apne kaan se lagaya.

"haan,aaj savere hi aayi.",Divya Professor Dixit ke bedroom me palang pe nangi padi thi.professor kitchen se kuchh khane ko lane gaya tha.us waqt divya ne jab apna mobile check kiya to ajit ki missed calls payi to usne use fone kiya.

"kal to chhutti hai?"

"hun.",divya soch rahi thi ki agar ajit kal milne ko kahe to vo kya bahana banayegi.kal ka pura din vo bas professor ki baaho me bitana chahti thi.

"to parso milenge,thik hai na?",ajit ne khud hi uski mushkil aasan kar di.

"ok."

"bye!"

"bye!",ajit ne fone band kiya & kapde badalne laga.bathroom ke bahar khadi Meghna ki aankho se 2 boonde uske gaalo pe dhalak gayi..abhi kitna waqt hi hua tha dono ki shadi ko & ajit abhi se hi..badi mushkil se usne apni rulayi roki.vaise na use maloom tha na ajit ko & na hi divya ko ki ajit & divya ki agli mulakat kal hi honi thi & meghna bhi kal raat hi apni zindagi ki sabse badi uljhan se rubaru hone vali thi.

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agle roz sham ke 6 baje the & anjali ki car sports complex ke bahar aa kar ruk gayi thi.sports complex 1 tirahe pe tha.1 sadak to uske main gate ke sath-2 daye se baye ja rahi thi & 1 chhoti sadak seedhi uske gate tak aati thi.ye chhoti sadak sanp ki tarah 2 baar ghumti thi & isi sadak ke pehle ghumao pe Ballu apne 3 aadmiyo ke sath 1 Qualis me baitha tha.uski nazro se ojhal anjali ki carse kuchh hi doori pe parking me van me Varun baitha tha & in sabhi se thodi doori pe sadak ke doosri or apne 1 sathi ke sath 1 van me Hira baitha tha.ballu ka 1 aadmi complex ke samne ki sadak ke dusri or ugi jhadiyo me chhupa baitha gate pe nazar rakhe tha.jaise hi anjali ki cara vapas nikalne ke liye ghumti to vo apne fone se use ishara kar deta.

varun ne dekha ki Anish ki practice ho chuki hai & vo apna kitbag uthaye apni maa ke sath bahar aa raha tha.sabhi chaukkane ho gaye.varun ka dil zoro se dhadak raha tha.vo apradhi nahi tha magar aaj vo 1 jurm karne ja raha tha,1 sangin jurm & ab vo nervous ho raha tha.usne lumbi saaans li & khud ko shant karne laga.anjali bete ke sath gate se bahar aayi,anish ne apna kitbag car ki dicky me dala & maa ke sath pichhli seat pe baith gaya.driver ne gadi start ki & jaise hi usne chhote raste ki taraf gadi ghumai apni van se nikal varun car ke samne kud pada.

driver ne zor se brake lagaya & darwaza khol bahar nikla,use laga ki usne accident kar diya hai & uski gadi se takraye shakhs ko chot aayi hai.usne sadak pe pade varun ko uthane ke liye uske kandhe pe hath rakha to varun tezi se utha & 1 mukka uske jabde pe jad diya.driver kuchh hairani & kuchh mukke ke zor se peechhe gira & varun ne furti se car ka pichhla darwaza khol utne hi bhaunchakke anish ko bahar khincha.anjali ka dimagh to jaise sunn ho gaya tha,use kuchh samajh me nahi aa raha tha ki ye ho kya raha hai?sab kuchh kisi film ki tarah uski nazro ke samne ghat raha tha.

"mummy..!",varun ki giraft me chhatpatata anish chikha to vo jaise jag uthi.

"anish..!help....bachao..guard...!",usne complex ke guard ko chikh ke bulaya.varun anish ke munh pe hath rakhe use apni van tak le gaya ki tabhi peechhe se kisi ne uske kandhe pe vaar kiya & jaise hi uski giraft anish pe dhili hui 2 jodi hatho ne anish ko uske kabze se chhin liya & kuchh doori pe khadi apni gadi me daal vo main gate ke sath vali sadak pe bhag gaye.

varun jab tak sambhala usne dekha ki complex se bhagte log uski or aa rahe hain.usne fauran apni van ka darwaza khola & driving seat pe baitha,engine usne band kiya nahi tha,usne van gear me dali & jaldi se vaha se bhaga.vo paseene se tarbatar tha..vo kaun log the?..kaha gaye vo?..vo paglo ki tarah van bhagaye ja raha tha.thoda aage jake usne 1 sadak ke kinare van lagayi & apneaap ko sambhalne laga....sab gadbad ho gaya tha & use logo ne dekh bhi liya tha..ab kya karega vo?..Musa bhi jail se 4 dino baad nikalne vala tha lekin tab tak vo kya karega..sabse pehle to use is van ko chhodna padega lekin kaha..aisi jagah jaha ye jaldi baramad na ho..haa 1 jagah thi..usne van start ki & aage badha.

"bhai,sab gadbad ho raha hai!",ballu ka aadmi apne chhupne ki jagah se bhagta hua nikla,"..humara saman koi aur utha raha hai!"

"kya?!gadi bhaga gate ki taraf!",ballu ke hukm pe agle hi pal gadi complex ke paas pahunchi & ballu ne varun ki bhagti van ko dekha.usne darwaza khola & uska admi car ke andar kuda & gadi varun ki van ke peechhe lag gayi.

"bhai,saman usme nahi dusri gadi me hai."

"kya?"

"haan,bhai.us van me 1 akela ladka tha jisne saman ko uthaya magar fir achanak dusri taraf se 2 aadmi aaye,dono sar se panv tak kale libas me the,chehre pe kale naqab bhi the.unhone us ladke se saman ko chhena & apni safed qualis me daal ke nikal gaye.number plate pe kichad laga tha."

"koi humari biradri ka lagta hai.",ballu soch me duba tha,"..magar kaun hai jo humare munh se nivala chhin raha hai.kaun hai sala?!",ballu ne aage ki seat ki back pe hath mara.

ye sab khamoshi se dekhta hira apne sathi ke sath vaha se nikal gaya.usne apne sathi ko 1 bus stand pe utara & fir nina ko fone lagaya.

"ho gaya kaam?"

"nahi.",ballu ne use sara haal sunaya.

"hun..koi baat nahi,ab mahesh ko sab bata do.",hira ne aisa hi kiya.

"kya?!bete ko kidnap kar liya!..are..to tumne anj-..i mean pradhan ki biwi ko kyu nahi uthaya?",mahesh baukhla gaya tha,"..maine tumhe biwi ko uthane ko bola tha na!"

"sahab,vaha bhid ikattha ho gayi thi,usme main kaise karta ye kaam & fir mujhe kya pata tha ki humari tarah koi aur bhi is chakkar me pada hai."

"magar..",mahesh ko bahut khij ho rahi thi,sare kiye-karaye pe pani fir gaya tha,"..tum yaha aao abi!"

"thik hai,sa'ab."

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"kya?!",Bhaiyya ji apni kursi se uth khade hue,"..Raghu,aias hua kaise?"

"kuchh samajh nahi aa raha,Baldev.ye sala kiski himmat hui ki mere kaam me adanga dala."

"raghu,aisa ho nahi sakta ki kisi ko humare plan ke bare me pata ho.",bhaiyya ji ab sambhal chuke the & vapas kursi pe baith gaye the,"..ye ittefaq hai."

"aise kaise maan lu ki ittefaq hai!aur kaun uthana chahega pradhan ke launde ko aur kyu?"

"sahi sawal kiya tumne raghu..kyu?",bhaiyya ji ka paina dimagh tezi se chal raha tha,"is kyu ka jawab dhundte hain,raghu,kaun ka jawab apneaap mil jayega."

"sahi bola,bhai..sahi bola."

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varune car ko Devalay Railway Station ki parking me lagaya & vaha se bahar nikala.raste me kahi bhi koi checking nahi ho rahi thi magar use pata tha ki uska huliya ab tak puri devalay ki police ko pata hoga,use ab iska bhi kuchh karna hoga.jaha tak ho saka usne van me se apne ungliyo ke nishan mitane ki koshish ki thi magar ab use yaha se kisi tarah nikal jana tha..kyu na koi bhi train pakad ke nikal le yaha se?..haa ye sahi rahega..magar police to yaha se jane vali gadiyo & unke stations pe bhi nazar rakh sakti hai..pehle huliya badalna hoga.vo station se bahar nikla & paas ke bazar me ghus gaya.

1 saloon dikha to vo uske andar chala gaya,"zara shave & cutting karani hai."

"zarur,sir.baithiye.",nai ne daraz se apna saman nikalna shuru kiya,kaisi cutting karu,sir?",uske gardan tak ke lumbe,ghunghrale baalo ko usne pani se gila kiya.

"chhote kar do & ye samne se spike..aise..thik hai."

"thik hai,sir.",jab varun saloon se nikla to uske baal bilkul chhote the & samne ke baal spiked.apni dadhi bhi usne puri saaf kara li thi & ab use umeed thi ki koi use nahi pehchanega.vo vapas station gaya magar ab vaha ka nazara badal chuka tha.chappe-2 pe police thi & unke sath khoji kutte bhi the.uski himmat nahi padi ki vo unki nazar bachake aage badhe & vo vaha se nikal liya.8 baj chuke the & use khayal aaya ki use apne kapde bhi badalne hain.vapas apne viran building vale adde pe jana abhi asmbhav nahi tha kyuki vo jagah yaha se door thi & uske paas savari bhi nahi thi,taxi vo istemal karna nahi chahta tha.isi udhedbun me vo vaha se nikla & sadak pe chalne laga.kuchh hi door use 1 mall dikha jaha se usne 1 sasti si shirt & jenas kharide fir 1 public toilet me apne kapde badal vo bahar aa gaya.uski samajh me nahi aa raha ki raat kaha kaate & aage kya kare.pichhle 45 minute se vo kabhi is gali to kabhi us sunsan sadak pe paidal chala ja raha tha.pradhan ke ghar ke samne vale bungle me jana bhi mumkin nahi tha kyuki is waqt vo pura ilaka to police se bhara hoga.tabhi uski nazar samne gayi,vo police officers colony ke paas aa gaya tha.

vo mujhe shehar ya us se bahar dhoond rahe hain magar apne hi ghar me dhoondane ka to unhe khayal bhi nahi aayega.haan,yehi thik rahega & vo colony me ghusne ka koi aasan rasta dhoondane laga.

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"uummmm...uunnhhhhh....!",kamre me chumne ki mast aavaze goonj rahi thi.divya professor ki dayi taraf apni bayi karwat pe leti thi & uske daye hath me professor ka lund tha.professor apni dayi karwat pe tha & divya ki zuban ko chusta hua uski chhatiya masal raha tha ki divya ka mobile baja.

"offoh..!",divya ne beman se kiss todi & apne mehboob ka mast lund chhod fone uthaya,"hello."

"divya,fauran headquarters pehuncho!",DCP Verma ki aavaz me chinta & besabri saaf jhalak rahi thi.

"yes.sir.",divya bistar pe baith gayi,"..hua kya hai.sir?"

"hua kya hai!",DCP sahab thode baukhlaye lage,"..tumhe abhi tak nahi pata.tum ho kaha?!news dekho & fauran yaha pahuncho."

"sir.."

"haan?"

"professor dixit ko.."

"nahi,abhi nahi."

"sir."

"kya hua,divya?"

"pata nahi,zara tv kholo.mujhe fauran headquarters pahuchana hai.",divya apne kapde pehanane lagi.kuchh palo baad dono hi sanjida se tv ko dekh rahe the.

"pehle mujhe ghar jana hoga,aise libas me daftar nahi ja sakti na.",divya ne apni short dress ki or ishara kiya.

"hun.",professor bahut hi gambhir ho gaya tha.

"ok,main jati hu.jo bhi hoga tumhe batai rahungi.",divya panjo pe uchki & professor ke honth chum liye.professor ne bhi jawab diya magar us kiss me kuchh kami thi,divya ko laga ki professor is khabar se pareshan ho gaya.usne socha ki us se is bare me puchhe magar uske paas waqt nahi tha & vo vaha se nikal aayi.

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"aisa aakhir hua kaise?",devalay ke Police Commissioner gusse se behal the,"..unki family ki security thi kaha?",unka sawal VIP security ke Joint Commissioner ki taraf tha.

"sir,humne kayi baar unhe kaha tha lekin vo kabhi mante hi nahi the.ab humare aadmi zabardasti to unke peechhe lag nahi sakte the."

"damn it.",commissioner ke chup hote hi meeting hall me sannata pasar gaya.

"ok.",kuchh palo baad vo bole,"..bachcha agwa ho chuka hai,ab humari sabse pehli priority hai use sahi-salamat uske ghar pahuchana.Singh sahab..",vo joint commissioner(crime) se mukhatib hue,"..ye aapki zimmedari hai."

"yes,sir.aapki ijazat ho to main niklu?"

"yes & good luck."

"thank you,sir."

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--44

गतान्क से आगे............-

"मिस्टर.वेर्मा,ये केस मैं आपके सुपुर्द कर रहा हू.",क्प सिंग ने अपने कॅबिन पहुँचते ही डीसीपी वेर्मा को तलब किया.

"सर."

"तो कितने लोग चाहिए आपको?"

"सर,मैं 3 एसीपी & उनकी टीम को इस काम पे लगा दूँगा लेकिन.."

"लेकिन?"

"लेकिन,सर मुझे 1 ऐसा आदमी चाहिए जोकि उन लोगो से बात कर सके?"

"साफ-2 कहिए,वेर्मा जी."

"सर,अपहरण हुआ है तो फिरौती की माँग तो आएगी ही.तो मुझे 1 ऐसा आदमी चाहिए जोकि उनसे डील कर सके."

"हूँ..वेरी गुड पॉइंट.आप खुद क्यू नही करते ये काम?"

"सर,पहले तो मुझे तजुर्बा नही इस बात का,दूसरे मैं पोलीसवाला हू.ऐसे केसस मे हमे अगवा करनेवालो को ये तो भरोसा दिलाना होगा कि हम उन्हे नुकसान नही पहुचाएँगे.अब बच्चे के परिवार वाले तो उसकी कैसी भी माँग मान जाएँगे लेकिन 1 पेशेवर आदमी उस से सही तरीके से बात करेगा."

"कोई ऐसा शख्स है तुम्हारी नज़र मे?"

"है सर पर वो शायद माने नही."

"कौन है वो वेर्मा जी?आप नाम बताइए,मैं मनाउन्गा उसे!"

"प्रोफेसर दीक्षित."

"क्या?ये कौन है?कहा पढ़ता है?"

"सर,मैं अजिंक्या दीक्षित की बात कर रहा हू."

"अजिंक्या?..कौन..",मगर जैसे सिंग साहब को सब याद आ गया,"..आप ठीक कह रहे थे,वो शायद ही माने."

"मैं कोशिश करू,सर?"

"ज़रूर,वेर्मा जी लेकिन कुच्छ ठीक नही लगता कि अजिंक्या को फिर से.."

"सर,हो सकता है इस बार ये हादसा उसे उसके उस गम से उबार दे."

"ओके.",उन्होने 1 ठंडी सांस ली,"..आप मिलिए उस से & बाकी टीम के बारे मे बताइए."

"सर,एसीपी अजीत चौहान प्रधान साहब के बंगल पे है & उनकी सभी कॉल्स मॉनिटर कर रहा है.मैने एसीपी दिव्या माथुर को क्राइम सीन पे फोरेन्सिक वालो के साथ भेजा है & एसीपी नामित भट्ट को कंट्रोल रूम से मिलने वाली किसी भी लेड को फॉलो करने के काम पे लगाया है."

"गुड.इस वक़्त ये केस हमारी टॉप प्राइयारिटी है & हमे इसे जल्द से जल्द सुलझाना है.आप अजिंक्या से मिलिए."

"ओके,सर.",वेर्मा साहब कॅबिन से निकल गये.

"तो यहा 5 गाडिया थी.",दिव्या बुदबुदाई.फोरेन्सिक लॅब के एक्सपर्ट्स ने टाइर्स के निशान & ब्रेक लगाने से पड़े स्किड मार्क्स को देख के ये अंदाज़ा लगाया था.1 टीम ने अंजलि की गाड़ी के टाइयर चेक कर 1 निशान को तो कन्फर्म कर लिया था मगर बाकियो के बारे मे बस अंदाज़ा ही लगा पाए थे अब तक.

"1 तो कोई बड़ी गाड़ी है,दिव्या जी..कोई सुव..",एक्सपर्ट सड़क पे पड़े स्किड मार्क्स को गौर से देख रहा था.पूरा इलाक़ा पोलीस ने फ्लड लाइट से जगमग कर रखा था,"..ये देखिए इधर से आई & यहा पे ब्रेक मार के रुकी फिर निकल गयी.",एक्सपर्ट को पता नही था मगर वो बल्लू की क़ुआलिस की बात कर रहा था,"..फिर ये वॅन जिसकी पोलीस तलाश कर रही है वो यहा खड़ी थी & उसके बाद उसका ड्राइवर ज़रूर बौखलाया हुआ था नही तो टाइयर के निशान ऐसे टेढ़े-मेढ़े क्यू पड़ते?",ये निशान वरुण की वॅन के थे.

"अब 1 और वॅन यहा थी लेकिन उसके निशान बहुत साफ नही हैं?"

"आपको कैसे यकीन कि वो वॅन ही थी?"

"क्यूकी हमे ये पता है कि जिस आदमी ने बच्चे को पकड़ा वो वॅन से भागा था & ये उसके टाइयर्स के निशान हैं & ये देखिए ये भी बिल्कुल वैसे ही निशान है यानी की दोनो गाडिया 1 जैसी थी."

"ह्म्म."

"यहा आइए..",अब सब कॉंप्लेक्स से थोड़ा दूर बढ़ चुके थे,"..यहा पे भी कोई सुव खड़ी थी लेकिन उसे कोई बौखलाहट नही थी बस जल्दी थी.ज़ोर से आयलरेटर दबाने से यहा सड़क किनारे की मिट्टी कुच्छ ज़्यादा उड़ी & ये हल्का सा गड्ढा बन गया है."

"थॅंक्स.",दिव्या ने सारी नयी जानकारी कंट्रोल रूम को पहुचाई.पोलीस ज़ोर-शोर से सभी गाडियो की तलाश मे लगी थी.हीरा ने महेश अरोरा की दी वॅन उसकी फॅक्टरी पहुँचा दी थी.बल्लू की गाड़ी अब बाबा की हवेली मे महफूज़ थी,वरुण ने वॅन स्टेशन की पार्किंग मे छ्चोड़ दी थी & उसका कोई इरादा नही था वापस वाहा जाने का & वो गाड़ी मे जिसमे अनीश अगवा हुआ था इस वक़्त धू-धू करके जल रही थी.

किडनॅपर्स बहुत शातिर थे,आमतौर पे बच्चो को अगवा करनेवाले सवेरे उनके स्कूल जाते वक़्त ये गलिज काम करना पसंद करते हैं क्यूकी उस वक़्त ट्रॅफिक भी कम होता है & पोलीस भी उतनी मुस्तैद नही रहती लेकिन जिन लोगो को अपहरण का ख़तरा होता है वो तो उस वक़्त अपनी हिफ़ाज़त का इंतेज़ाम रखते हैं.जसजीत प्रधान भी इधर कुच्छ दीनो से बच्चो को स्कूल छ्चोड़ने & वापस लाने के वक़्त किसी सेक्यूरिटी वाले को ज़रूर उनके साथ कर देता था मगर अंजलि ऐसा नही करती थी & इसी बात ने किडनॅपर्स को मौका दिया.

वो 4 थे,अनीश को बेहोश कर उन्होने बॅक्सीट के फ्लोर पे उसे डाल 1 कंबल से उसे ढँक दिया & उसके उपर पैर रख 2 आदमी बैठ गये.सभी ने अपने नक़ाब उतार लिए & अपनी काली टी-शर्ट्स के उपर अलग-2 रंगो की कमीज़े पहन ली & टाइ लगा ली.सिर्फ़ 1 ने हाइ नेक टी-शर्ट पहनी थी,उसने 1 कोट अपनी टी-शर्ट के उपर डाल लिया था.अब सभी किसी दफ़्तर से निकले एंप्लायीस लग रहे थे.वो हाइ नेक शर्ट वाला आदमी बार-2 अपनी दाई बाँह को छु रहा था.वो आगे की पॅसेंजर सीट पे बैठा था.उसके साथ बैठा गाड़ी चला रहे आदमी ने उसे देखा & सर हिलाया..ये कभी नही सुधरेगा!..वो बुदबुडाया & कार को डेवाले से बाहर निकलती गाडियो की भीड़ मे घुसा दिया.

डेवाले के आस-पास के इलाक़े अब काफ़ी बस गये थे & इस वक़्त शाम को डेवाले के दफ़्तरो से निकला हुजूम अपने-2 घरो के लिए उन रिहयशी इलाक़ो की तरफ बढ़ जाता था.वो गाड़ी भी इसी भीड़ मे वाहा से निकल गयी & उस वक़्त तक पोलीस तो बस 1 वॅन की तलाश मे थी ना कि किसी हाइयंड आक्सेंट की.किडनॅपर्स ने इस गाड़ी को भी बहुत सोच-समझ के चुना था.डेवाले से बाहर निकलते ही हाइवे पे कोई 10 किमी चलने के बाद ड्राइवर ने कार को 1 साइड रोड पे उतार दिया & तब तक चलता रहा जब रिहयशी इलाक़ो के बाद खेत नही दिखने लगे.

उसने कार को 1 खेत के बगल से मोड़ा & वाहा तक ले गया जहा 1 झोपड़ी नुमा मगर बड़ी इमारत थी.उसने कार रोकी & आस-पास देखा.झोपड़ी के दूसरी ओर से 1 इंनोवा आती दिखी.ड्राइवर के होंठो पे मुस्कान आ गयी.उसके इशारे पे सभी नीचे उतर गये.पीछे बैठे 1 शख्स ने अनीश को कंबल मे लपेटे हुए ही उठा लिया.इंनोवा की ड्राइवर साइड का दरवाज़ा खोल जब उसे चलाने वाली लड़की उतरी तो आक्सेंट के ड्राइवर की मुस्कानओर बड़ी हो गयी.पीछे खड़े शख्स ने अनीश को इंनोवा की डिकी मे डाल दिया.

आक्सेंट के ड्राइवर ने अपनी गाड़ी को उस घास-फूस के छप्पर & लकड़ी की दीवारो वाली इमारत मे घुसा दिया जिसका इस्तेमाल उसका मालिक शायद कॅटाइ के बाद फसल रखने के लिए करता था.तब तक वो लड़की वापस इंनोवा मे बैठ गयी थी मगर इस बार आगे की पॅसेंजर सीट पे.उस लड़की ने किसी दफ़्तर जाने वाली लड़की की तरह फॉर्मल शर्ट & पॅंट पहनी हुई थी.आक्सेंट का ड्राइवर थोड़ी देर तक उस इमारत मे रहा & फिर बाहर आके इंनोवा स्टार्ट कर वापस उधर ही चल पड़ा जिधर से वो आए थे.

कार जब वापस हाइवे पे आई तो पीछे बैठे उस शख्स ने जिसने अनीश को उठाके इस कार मे डाला था & शायद कार मे बैठे सभी लोगो मे सबसे कम उम्र का था,गर्दन घुमा के पीछे द्देखा तो उसे दूर कुच्छ धुआँ उठता दिखा.वो मुस्कुरा दिया & अपने साथियो को देखा.सभी मुस्कुरा रहे थे.कार वापस डेवाले की ओर जा रही थी & यही वो बात थी जोकि उनके प्लान की सबसे मज़बूत & कमाल की बात थी.पोलीस तो यही सोच रही थी कि अगवा करके किडनॅपर्स शहर से बाहर भागेंगे मगर किडनॅपर्स ने बिल्कुल उल्टा किया वो वापस शहर के अंदर घुस रहे थे.

चेक नाके पे डेवाले से बाहर जाती गाडियो की जम के तलाशी हो रही थी मगर अंदर आने वाली गाडियो की तरफ किसी का ध्यान नही था & इसी बात का फ़ायदा उठाके किडनॅपर्स अनीश को अपनी गिरफ़्त मे रखने मे कामयाब रहे.डेवाले के बाहरी किनारे की 1 नयी बन रही पॉश कॉलोनी के 1 बंगल के अंदर कार घुसी.कार के सारे शीशे काले थे & किसी को भी ये नही दिखा होगा कि अंदर कितने लोग हैं.बंगले के गेट पे रुक कार चलाने वाले ने खुद गेट खोला & कार को अंदर किया फिर अंदर बने गॅरेज का दरवाज़ा खोला & फिर कार को उसके अंदर किया.इस सब के दौरान कार के अंदर से कोई नही उतरा.

गॅरेज का दरवाज़ा लगाने के बाद सारे लोग कार से उतरे & गॅरेज के दीवार मे बने 1 दरवाज़े से जो घर को गॅरेज से जोड़ता था,उस से घर के अंदर चले गये.कार चलाने वाले शख्स ने उनके अंदर जाते ही फिर से गॅरेज का दरवाज़ा खोला & बाहर आके उसे लॉक किया & फिर घर के मेन दरवाज़े का ताला खोल अंदर गया.अब अगर किसी ने उसे देखा भी होगा तो यही समझेगा कि उस घर मे 1 अकेला शख्स रहता है.

"अभी भी बेहोश है?",घर के अंदर सबने फिर से अपने नकाब पहन लिए थे.

"हां."

"ठीक है.इसे इसके कमरे मे पहुँचा दो."

"ओके.",वो शख्स जोकि हाइशनेक टी-शर्ट पहने था,उसने अपनी दाई बाँह फिर से च्छुई.

"अब,क्या ज़रूरत थी अभी उन हीरो को ठिकाने लगाने की?कही कुच्छ हो जाता तो?"

"तुम ही ने कहा था कि हमे पंचमहल मे कोई भी सुराग नही छ्चोड़ना है.मेरे पैसे ख़त्म हो गये थे,जुए का कर्ज़ा नही चुकाता तो पोलिसेवालो से ज़्यादा परेशानी खड़ी कर देते वो यहा!"

"1 बार मुझसे तो बोला होता.अच्छा..चलो अपना ज़ख़्म दिखाओ.",दोनो बंगल के 1 कमरे मे गये जहा 1 फर्स्ट-एड बॉक्स था,"..ये तो अच्छा हुआ कि गोली बस च्छू के निकल गयी है..",उसने पट्टी हटा के घाव को देखा,"..हूँ,अब तो काफ़ी ठीक है.मैं 1 बार फिर पट्टी कर देता हू & वो गोलिया खाते रहना.ये काम ख़त्म होने तक तुम फिर से इस हाथ से अपने पत्ते खेलने लगोगे.",दोनो ने ठहाका लगाया.दोनो को देख के लगता था कि दोनो की दोस्ती काफ़ी पुरानी है मगर जहा बी उम्र 40 के आस-पास लगती थी वही ए की उम्र 27-28 से ज़्यादा नही.

"इसे यहा रखो सी..हां इन्ही गद्दो पे.",उस लड़की ने कहा.तीनो सीढ़िया उतर बेसमेंट मे बने 1 कमरे मे आ गये थे.कमरे मे 1 दीवार से लगा के 2 गद्दे ज़मीन पे रखे थे.गद्दे के पास की ज़मीन मे 1 लोहे का मोटा पाइप लगा था जोकि छत तक पहुचा हुआ था.पाइप के आस-पास की ज़मीन देख के लगता था कि बस कुच्छ ही दिन पहले उसे सेमेंट से ज़मीन मे जाम किया गया है.कमरे मे कोई खिड़की नही थी बस बिल्कुल कोने मे 1 रोशनदन मे 1 एग्ज़ॉस्ट फॅन लगा हुआ था.

"ए,इसने अपनी पॅंट गंदी कर दी है.डर गया होगा ज़रूर."

"हूँ,तो बदल देते हैं.",उसने कमरे मे खड़े दूसरे आदमी की ओर देखा तो वो कमरे से बाहर चला गया & 5 मिनिट बाद 1 तौलिया & गर्म पानी लेके आया.तीनो ने मिलके अनीश की पॅंट उतार उसके बदन पे सुख चुके उसके पेशाब को पोंच्छा & फिर 1 दूसरा तौलिया उसकी कमर पे लपेट दिया फिर उसे गद्दे पे लिटा दिया.

"मैं यही कहने वाली थी,डी.",डी नाम का शख्स अनीश के बाए टखने मे 1 पट्टी बाँध रहा था.उसके बाद उन्होने 1 लंबी ज़ंजीर को फर्श मे लगे पाइप के गिर्द 2 बार लपेटा & फिर उसके सिरो को 1 काफ़ी बड़े ताले से बाँध दिया फिर 1 हथकड़ी ली & उसे ताले मे लगा दिया & फिर हथकड़ी की दूसरी कड़ी को अनीश के पट्टी लगे टखने मे बाँध दिया.ज़ंजीर इतनी बड़ी थी कि अनीश उठके कमरे मे रखी1 बाल्टी जो उसे टाय्लेट के लिए इस्तेमाल करनी थी,वही ताक़ जा सके या फिर गद्दे पे सो सके.

अनीश को बाँधने के बाद तीनो ने कमरे का मज़बूत & भारी दरवाज़ा बंद किया & उसमे लगे चारो लॉक्स को बंद किया & फिर उपर आ गये.

"1 बार फिर हम सभी बाते दोहरा लें.",ए नाम का शख्स जोकि अब साफ था कि इनका सरदार है उनसे कह रहा था,"..जब तक हम यहा है तब तक हम 1 दूसरे को हमेशा ए,बी,सी,डी,इन नामो से ही बुलाएँगे.बच्चे के सामने कोई कुच्छ नही बोलेगा & हमेशा काले लिबास मे & नक़ाब लगाके उसके सामने जाएगा.घर से बाहर सिर्फ़ मैं जाऊँगा & काम ख़त्म होने पे अपना-2 हिस्सा लेके हम सब यहा से अलग-2 जगहो पे निकल जाएँगे.कोई सवाल?"

"हां.",ये सी की आवाज़ थी जोकि इनमे सबसे कम उम्र का था,"..आ,खाने मे क्या है?",उसके सवाल पे सभी हंस पड़े & रसोई की ओर बढ़ गये.

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"हेलो,अजिंक्या.",डीसीपी वेर्मा प्रोफेसर दीक्षित के घर के दरवाज़े पे खड़े थे.

"हेलो,प्रदीप.",उसने उन्हे अंदर बुलाया.

"अजिंक्या,तुम तो जानते ही हो कि मैं यहा क्यू आया हू.",प्रोफेसर ने कुच्छ जवाब नही दिया बस अपने हॉल मे बने बार पे जाके अपने दोस्त के लिए ड्रिंक बनाने लगा.

"तो तुम मेरा जवाब भी जानते होगे,प्रदीप.",प्रोफेसर ने ग्लास डीसीपी साहब को थमाया.

"हां मगर आज मैं ना सुनने नही आया हू."

"प्लीज़,प्रदीप.",प्रोफेसर ने 1 घूँट मे अपना ग्लास खाली कर दिया.

"कब तक ऐसे खुद से भगोगे,अजिंक्या?",वेर्मा साहब ने अपने दोस्त के कंधे पे हाथ रखा,"..ये तुम्हारा घर है मगर तुमने पिच्छले 15 सालो मे इसे किसी होटेल की तरह इस्तेमाल किया है.इस शहर मे आते हो,2-3 महीनो बाद चले जाते हो.क्या मैं इसकी वजह नही जानता?..मगर कब तक यू भागते रहोगे,अजिंक्या.प्लीज़,अजिंक्या उस बच्चे के बारे मे सोचो,उसके मा-बाप के बारे मे सोचो.",प्रोफेसर बार पे झुका अपने दोस्त की तक़रीर सुन रहा था.

"प्रदीप,फिर से वही सब..वही दर्द.."

"नही,इस बार नही मेरे दोस्त,इस बार नही.",प्रोफेसर बार पे झुक अपने हाथो मे अपना चेहरा च्छुपाए ना जाने कितनी देर तक खड़ा रहा.

"ठीक है,प्रदीप.मैं ये काम करूँगा मगर मेरी कुच्छ शर्ते हैं."

"ठीक है,मेरे साथ जेसीपी साहब के पास चलो."

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--44

gataank se aage............-

"Mr.Verma,ye case main aapke supurd kar raha hu.",JCP singh ne apne cabin pahunchte hi DCP verma ko talab kiya.

"sir."

"to kitne log chahiye aapko?"

"sir,main 3 ACPs & unki team ko is kaam pe laga dunga lekin.."

"lekin?"

"lekin,sir mujhe 1 aisa aadmi chahiye joki un logo se baat kar sake?"

"saaf-2 kahiye,verma ji."

"sir,apharan hua hai to firauti ki mang to ayegi hi.to mujhe 1 aisa aadmi chahiye joki unse deal kar sake."

"hun..very good point.aap khud kyu nahi karte ye kaam?"

"sir,pehle to mujhe tajurba nahi is baat ka,dusre main policewala hu.aise cases me hume agwa karnevalo ko ye to bharosa dilana hoga ki hum unhe nuksan nahi pahuchayenge.ab bachche ke parivar vale to uski kaisi bhi mang maan jayenge lekin 1 peshevar aadmi us se sahi tarike se baat karega."

"koi aisa shakhs hai tumhari nazar me?"

"hai sir par vo shayad mane nahi."

"kaun hai vo verma ji?aap naam bataiye,main manaunga use!"

"Professor Dixit."

"kya?ye kaun hai?kaha padhata hai?"

"sir,main Ajinkya Dixit ki baat kar raha hu."

"ajinkya?..kaun..",magar jaise singh sahab ko sab yaad aa gaya,"..aap thik keh rahe the,vo shayad hi mane."

"main koshish karu,sir?"

"zarur,verma ji lekin kuchh thik nahi lagta ki ajinkya ko fir se.."

"sir,ho sakta hai is baar ye hadsa use uske us ghum se ubaar de."

"ok.",unhone 1 thandi sans li,"..aap miliye us se & baki team ke bare me bataiye."

"sir,ACP Ajit Chauhan pradhan sahab ke bungle pe hai & unki sabhi calls monitor kar raha hai.maine ACP Divya Mathur ko crime scene pe forensic valo ke sath bheja hai & ACP Namit Bhatt ko control room se milne vali kisi bhi lead ko follow karne ke kaam pe lagaya hai."

"good.is waqt ye case humari top priority hai & hume ise jald se jald suljhana hai.aap ajinkya se miliye."

"ok,sir.",verma sahab cabin se nikal gaye.

"To yaha 5 gadiya thi.",Divya budbudai.forensic lab ke experts ne tires ke nishan & brake lagaane se pade skid marks ko dekh ke ye andaza lagaya tha.1 team ne Anjali ki gadi ke tyre check kar 1 nishan ko to confirm kar liya tha magar bakiyo ke bare me bs andaza hi laga paye the ab tak.

"1 to koi badi gadi hai,divya ji..koi SUV..",expert sadak pe pade skid marks ko gaur se dekh raha tha.pura ilaka police ne flood light se jagmag kar rakha tha,"..ye dekhiye idhar se aayi & yaha pe brake maar ke ruki fir nikal gayi.",expert ko pata nahi tha magar vo Ballu ki Qualis ki baat kar raha tha,"..fir ye van jiski police talash kar rahi hai vo yaha khadi thi & uske baad uska driver zarur baukhlaya hua tha nahi to tyre ke nishan aise tedhe-medhe kyu padte?",ye nishan Varun ki van ke the.

"ab 1 aur van yaha thi lekin uske nishan bahut saaf nahi hain?"

"aapko kaise yakin ki vo van hi thi?"

"kyuki hume ye pata hai ki jis aadmi ne bachche ko pakda vo van se bhaga tha & ye uske tyres ke nishan hain & ye dekhiye ye bhi bilkul vaise hi nishan hai yani ki dono gadiya 1 jaisi thi."

"hmm."

"yaha aaiye..",ab sab complex se thoda door badh chuke the,"..yaha pe bhi koi SUV khadi thi lekin use koi baukhlahat nahi thi bas jaldi thi.zor se acclerator dabane se yaha sadak kinare ki mitti kuchh zyada udi & ye halka sa gaddha ban gaya hai."

"thanx.",divya ne sari nayi jankari control room ko pahuchayi.police zor-shor se sabhi gadiyo ki talash me lagi thi.Hira ne Mahesh Arora ki di van uski factory pahuncha di thi.ballu ki gadi ab Baba ki haweli me mehfuz thi,varun ne van station ki parking me chhod di thi & uska koi irada nahi tha vapas vaha jane ka & vo gadi me jisme Anish agwa hua tha is waqt dhu-dhu karke jal rahi thi.

kidnappers bahut shatir the,aamtaur pe bachcho ko agwa karnevale savere unke school jate waqt ye galiz kaam karna pasand karte hain kyuki us waqt traffic bhi kam hota hai & police bhi utni mustaid nahi rehti lekin jin logo ko apharan ka khatra hota hai vo to us waqt apni hifazat ka intezam rakhte hain.Jasjit Pradhan bhi idhar kuchh dino se bachcho ko school chhodne & vapas lane ke waqt kisi security vale ko zarur unke sath kar deta tha magar anjali aisa nahi karti thi & isi baat ne kidnappers ko mauka diya.

vo 4 the,anish ko behsoh kar unhone backseat ke floor pe use daal 1 kambal se use dhank diya & uske upar pair rakh 2 aadmi baith gaye.sabhi ne apne naqab utar liye & apni kali t-shirts ke upar alag-2 rango ki kamize pehan li & tie laga li.sirf 1 ne high neck t-shirt pehni thi,usne 1 coat apni t-shirt ke upar daal liya tha.ab sabhi kisi daftar se nikle employees lag rahe the.vo high neck shirt vala aadmi baar-2 apni dayi banh ko chhu raha tha.vo aage ki passenger seat pe baitha tha.uske sath baitha gadi chala raha aadmi ne use dekha & sar hilaya..ye kabhi nahi sudhrega!..vo budbudaya & car ko Devalay se bahar nikalti gadiyo ki bhid me ghusa diya.

devalay ke aas-paas ke ilake ab kafi bas gaye the & is waqt sham ko devalay ke daftaro se nikla hujum apne-2 gharo ke liye un rihayshi ilako ki taraf badh jata tha.vo gadi bhi isi bhid me vaha se nikal gayi & us waqt tak police to bas 1 van ki talash me thi na ki kisi Hyundai Accent ki.kidnappers ne is gadi ko bhi bahut soch-samajh ke chuna tha.devalay se bahar nikalte hi highway pe koi 10 km chalne ke baad driver ne car ko 1 side road pe utar diya & tab tak chalta raha jab rihayshi ilako ke baad khet nahi dikhne lage.

usne car ko 1 khet ke bagal se moda & vaha tak le gaya jaha 1 jhopdinuma magar badi imarat thi.usne car roki & aas-paas dekha.jhopdi ke dusri or se 1 Innova aati dikhi.driver ke hotho pe muskan tair gayi.uske ishare pe sabhi neeche utar gaye.peechhe baithe 1 shakhs ne anish ko kambal me lapete hue hi utha liya.innova ki driver side ka darwaza khol jab use chalane vali ladki utri to accent ke driver ki muskan & badi ho gayi.peechhe khade shakhs ne anish ko innova ki dicky me daal diya.

accent ke driver ne apni gadi ko us ghas-phus ke chhappar & lakdi ki deewaro vali imarat me ghusa diya jiska istemal uska malik shayad katai ke baad fasal rakhne ke liye karta tha.tab tak vo ladki vapas innova me baith gayi thi magar is baar aage ki passenger seat pe.us ladki ne kisi daftar jane vali ladki ki tarah formal shirt & pant pehni hui thi.accent ka driver thodi der tak us imarat me raha & fir bahar aake innova start kar vapas udhar hi chal pada jidhar se vo aaye the.

car jab vapas highway pe aayi to peechhe baithe us shakhs ne jisne anish ko uthake is car me dala tha & shayad car me baithe sabhi logo me sabse kam umra ka tha,gardan ghuma ke peechhe ddekha to use door kuchh dhuan uthta dikha.vo muskura diya & apne sathiyo ko dekha.sabhi muskura rahe the.car vapas devalay ki or ja rahi thi & yehi vo baat thi joki unke plan ki sabse mazbut & kamal ki baat thi.police to yehi soch rahi thi ki agwa karke kidnappers shehar se bahar bhagenge magar kidnappers ne bilkul ulta kiya vo vapas shehar ke andar ghus rahe the.

check nake pe devalay se bahar jati gadiyo ki jum ke talashi ho rahi thi magar andar aane vali gadiyo ki taraf kisi ka dhyan nahi tha & isi baat ka fayda uthake kidnappers anish ko apni giraft me rakhne me kamyab rahe.devalay ke bahri kinare ki 1 nayi ban rahi posh colony ke 1 bungle ke andar car ghusi.car ke sare sheeshe kale the & kisi ko bhi ye nahi dikha hoga ki andar kitne log hain.bungle ke gate pe ruk car chalane vale ne khud gate khola & car ko andar kiya fir andar bane garage ka darwaza khola & fir car ko uske andar kiya.is sab ke dauran car ke andar se koi nahi utra.

garage ka darwaza lagane ke baad sare log care se utre & garage ke deewar me bane 1 darwaze se jo ghar ko garage se jodta tha,us se ghar ke andar chale gaye.car chalane vale shakhs ne unke andar jate hi fir se garage ka darwaza khola & bahar aake use lock kiya & fir ghar ke main darwaze ka tala khol andar gaya.ab agar kisi ne use dekha bhi hoga to yehi samjhega ki us ghar me 1 akela shakhs rehta hai.

"abhi bhi behosh hai?",ghar ke andra sabne fir se apne naab pehan liye the.

"haan."

"thik hai.ise iske kamre me pahuncha do."

"ok.",vo shakhs joki highneck t-shirt pehne tha,usne apni dayi banh fir se chhui.

"B,kya zarurat thi abhi un heero ko thikane lagane ki?kahi kuchh ho jata to?"

"tum hi ne kaha tha A ki hume Panchmahal me koi bhi surag nahi chhodna hai.mere paise khatm ho gaye the,jue ka karza nahi chukata to policevalo se zyada pareshani khadi kar dete vo yaha!"

"1 baar mujhse to bola hota.achha..chalo apna zakhm dikhao.",dono bungle ke 1 kamre me gaye jaha 1 first-aid box tha,"..ye to achha hua ki goli bas chhu ke nikal gayi hai..",usne patti hatake ghav ko dekha,"..hun,ab to kafi thik hai.main 1 baar fir patti kar deta hu & vo goliya khate rehna.ye kaam khatm hone tak tum fir se is hath se apne patte khelne lagoge.",dono ne thahaka lagaya.dono ko dekh ke lagta tha ki dono ki dosti kafi purani hai magar jaha B ki umra 40 ke aas-paas lagti thi vahi A ki umra 27-28 se zyada nahi.

"ise yaha rakho C..haan inhi gaddo pe.",us ladki ne kaha.teeno sidhiya utar basement me bane 1 kamre me aa gaye the.kamre me 1 deewar se laga ke 2 gadde zamin pe rakhe the.gadde ke paas ki zamin me 1 lohe ka mota pipe laga tha joki chhat tak pahucnha hua tha.pipe ke aas-paas ki zamin dekh ke lagta tha ki bas kuchh hi din pehle use cement se zamin me jaam kiya gaya hai.kamre me koi khidki nahi thi bas bilkul kone me 1 roshandan me 1 exhaust fan laga hua tha.

"E,isne apni pant gandi kar di hai.darr gaya hoga zarur."

"hun,to badal dete hain.",usne kamre me khade dusre aadmi ki or dekha to vo kamre se bahar chala gaya & 5 minute baad 1 tauliya & garm pani leke aaya.teeno ne milke anish ki pant utar uske badan pe sukh chuke uske peshab ko ponchha & fir 1 dusra tauliya uski kamar pe lapet diya fir use gadde pe lita diya.

"main yehi kehne vali thi,D.",D naam ka shakhs anish ke baye takhne me 1 patti bandh raha tha.uske baad unhone 1 lumbi zanjeer ko farsh me lage pipe ke gird 2 baar lapeta & fir uske siro ko 1 kafi bade tale se bandh diya fir 1 hathkadi li & use tale me laga diya & fir hathkadi ki dusri kadi ko anish ke patti lage takhne me bandh diya.zanjir itni badi thi ki anish uthke kamre me rakhi1 balti jo use toilet ke liye istemal karni thi,vahi taak ja sake ya fir gadde pe so sake.

anish ko bandhne ke baad teeno ne kamre ke mazbut & bhari darwaza band kiya & usme lage charo locks ko band kiya & fir upar aa gaye.

"1 baar fir hum sabhi baate dohra len.",A naam ka shakhs joki ab saaf tha ki inka sardar hai unse keh raha tha,"..jab tak hum yaha hai tab tak hum 1 dusre ko humesha A,B,C,D,E namo se hi bulayenge.bachche ke samne koi kuchh nahi bolega & humesha kale libas me & naqab lagake uske samne jayega.ghar se bahar sirf main jaoonga & kaam khatm hone pe apna-2 hissa leke hum sab yaha se alag-2 jagaho pe nikal jayenge.koi sawal?"

"haan.",ye C ki aavaz thi joki inme sabse kam umra ka tha,"..A,khane me kya hai?",uske sawal pe sabhi hans pade & rasoi ki or badh gaye.

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"hello,Ajinkya.",DCP Verma Professor Dixit ke ghar ke darwaze pe khade the.

"hello,Pradip.",usne unhe andar bulaya.

"ajinkya,tum to jante hi ho ki main yaha kyu aaya hu.",professor ne kuchh jawab nahi diya bas apne hall me bane bar pe jake apne dost ke liye drink banane laga.

"to tum mera jawab bhi jante hoge,pradip.",professor ne glass DCP sahab ko thamaya.

"haan magar aaj main naa sunane nahi aaya hu."

"please,pradip.",professor ne 1 ghunt me apna glass khali kar diya.

"kab tak aise khud se bhagoge,ajinkya?",verma sahab ne apne dost ke kandhe pe hath rakha,"..ye tumhara ghar hai magar tumne pichhle 15 salo me ise kisi hotel ki tarah istemal kiya hai.is shehar me aate ho,2-3 mahino bad chale jate ho.kya main iski wajah nahi janta?..magar kab tak yu bhagte rahoge,ajinkya.please,ajinkya us bachche ke bare me socho,uske maa-baap ke bare me socho.",professor bar pe jhuka apne dost ki taqrir sun raha tha.

"pradip,fir se vahi sab..vahi dard.."

"nahi,is baar nahi mere dost,is baar nahi.",professor bar pe jhuk apne hatho me apna chehra chhupaye na jane kitni der tak khada raha.

"thik hai,pradip.main ye kaam karunga magar meri kuchh sharte hain."

"thik hai,mere sath JCP sahab ke paas chalo."

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
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