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Guest
“वही, जो तुम समझने के लिए तैयार नहीं हो । इंटेलीजेंस की एक खास विंग से मुझे यह सूचना मिली है । हाफिज लुईस के अॉपरेशन औरंगजेब का अगला निशाना तुम हो और दहशतगर्दों ने तुम्हें पांच तारीख को होने वाली तुम्हारी उसी महारैली में निशाना वनाने का प्लान तैयार किया है । यह रामलीला मेदान में ही खत्म करेगा और वहां जमा लाखों की भीड़ उसके काम को वहुत आसान बना देगी । उस भारी-भरकम भीड के बीच सुरक्षा का हर इंतजाम बहुत बौना साबित होगा, चाहे वह जेड प्लस सुरक्षा हो या वहां मुहैया कराई जाने वाली अतिरिक्त सुरक्षा । और हमारी उस खास खुफिया विंग की दी हुई सूचना कभी गलत साबित नहीं हुई !"
"यह तो अाप बहुत गम्भीर बात बता रहे हैं?” निरंजननाथ के लहजे में व्यंग बढ़ता जा रहा था ।
"इसीलिए मेरी नीद उड़ी हुई है । सोचो । रामलीला मैदान में लाखों लोगों की मौजूदगी में अगर कोई वारदात होती है तो क्या होगा? भीड़ में भगदड मच जाएगी और तब, वहां कितने बेगुनाह लोग मारे जाएंगेें, क्या तुम्हे इसका अंदाजा है? एक बात ओर?"
"वह क्या ?"
"वे सब हिंदू होंगे क्योंकि तुम्हें सुनने वे ही. . .
“आ........आप मुझे खौफजदा करने की कोशिश कर रहे हैं गृहमंत्री महोदया अाप मुझें डराकर मेरे रास्ते से भटकाना चाहते है लेकिन मैं डरने वाला नहीं हूं । पांच तारीख को मेरी महारैली है और होकर रहेगी । अगर आतंक्यादिर्यों द्वारा वहां किसी गड़बड़ी की आपके पास पहले से सूचना है तो मेरी सुरक्षा सुनिश्चित करना आपका फर्ज है । वरना यकीन मानिए, अगर उस महारैली के दरम्यान मुझे कुछ हुआ तो अकेली दिल्ली ही नहीं सारा मुत्क उबल पडे़गा औरे आपकी हुकूमत तिनके की तरह बिखर जाएगी । इस मुल्क की धरती गृहयुद्ध की आग में झुलस जाएगी ।"
"इसीलिए मैं अपना काम कर रहा हूं । इसीलिए मैं उस महारैली को स्थगित कर देने की बार-बार विनती कर रहा हूं ।”
" मुझे आपकी बात पर यकीन नहीं । आप एक राजनैतिक आदमी हैं । अपना और अपनी पार्टी का हित साधने के लिए छल का सहारा ले सकते है । अगर आप मुझे सचमुच यकीन दिलाना चाहते हैं तो मेरे सामने उस रिपोर्ट को पेश कीजिए जो आपके किसी खास खुफिया विंग ने दी है ।"
"यह नहीं हो सकता । मैं चाहकर भी तुम्हें वह रिपोर्ट नहीं दिखा सकता । यह कायदे-कानून के खिलाफ है ।"
" तो फिर मुझें अपने उस खुफिया अधिकारी से मिलाइए जिसने आप को यह खबर दी है?"
"यह भी नियम के खिलाफ़ है !"
"तो मेरा फैसला सुनिए । मुझें आपकी किसी भी बात का रत्ती भर भी यकीन नहीं है । इसलिए, मैं आपकी बातों पर तवज्जो देना जरूरी नहीं समझता । महारैली तयशुदा वक्त पर होगी और जरूर होगी । उसमें कोई भी व्यवधान पैदा होता है तो उसके लिए आपकी सरकार जिम्मेदार होगी, जिसका वहुत गम्भीर खामियाजा आपको भुगतना पडे़गा ।"
"तुम्हारा यह फैसला आत्मधाती है ।"
“उससे ज्यादा वह आप सबके लिए आत्मघाती होगा ।"
"तो तुम अपनी जिद नहीं तोडो़गे?"
"बिल्कुल नहीं । इसके अलावा आपके पास कोई और प्रपोजल हो तो बेहिचक मेरे सामने ऱख सकते हैं !"
"मेरे पास दूसरा कोई प्रस्ताव नहीं है ।"
"तो फिर इजाजत दीजिए!" निरंजन कुर्सी से उठ खड़ा होगया उसने नारंग के सामने अपने हाथ जोड़ दिए !
नारग कसमसाकर रह गया ।
कल्याण होलकर रत्नाकर देशपांडे के घर से बाहर निकला ।
उसका चेहरा लटका हुआ था ।
सड़क पर सुर्ख रंग की आठ सीटर वैन खडी़ थी ।
उसकी ड्राइविंग सीट पर शेखरन बैठा हुआ था । पीछे की सीटों पर प्रताप, भल्ला, गिरीश और अमरीक थे ।
केवल रत्नाकर देशपांडे की कमी थी…वरना वहां मिशन मुस्तफा की मुकम्मल टीम इकट्ठा थी ।
होलकर के वहाँ पहुंचते ही स्लाइडिंग डोर खुला ।
उनमें से एक ने पूछा-----"क्या रहा?"
" चलो ।" वेैन में बैठकर दरवाजा बंद करते हुए उसने शेखरन को हुक्म दिया-----"मेन रोड पर पहुंचो, फिर बताता हू ।"
शेखरन ने वेन स्टार्ट की और आगे बढा़ दी ।
"क्या हुआ बॉस ?” प्रताप ने पूछा । उसके स्वर में उत्सुकता थी----“रत्ऩाकर देशपांडे मिला ?"
"नही ।"
"कहां गायब है?"
"किसी को नहीं मालूम ।"
"घर पर कौन-कौन था?"
"केवल एक नोकर ।"
"बाकी लोग कहाँ गए?" सवाल भल्ला ने किया था ।
"देशपांडे परिवार को यहाँ नहीं रखता था! आने जाने का कोई निर्धारित वक्त नहीं है ! इसलिए, यह कहना भी मुश्किल है कि कब बापस आएगा । मेसेज छोड़ दिया है !"
"वह तो पहले भी छोड़ चुके हो बॉंस ।" गिरीश ने कहा----"मगर कोई फायदा नहीं हुआ । उस नेवी अफ़सर की तरफ से अभी तक कोई रिप्लाई नहीं मिली । आखिर कहां जा सकता है वह? उसकी नेवी की नौकरी से तो उसे भी सस्पेंड किया जा चुका होगा?"
"नहीं मालूम ।"
"गड़बड़ है ।"' गिरीश बड़बड़ाने के-से अंदाज में बोला-----“जरूर कोई गड़बड़ है । देशपांडे को लेकर तुम्हारा शक गलत नहीं है बॉस । इस आदमी का किरदार बहुत संदिग्ध लग रहा है । अब तो मुझे भी ऐसा लग रहा है कि इसी ने हमारे प्लान को लीक किया था और आतंकियों से हमारी मुखबिरी की थी ।"
"इतनी जल्दी नतीजे पर नहीं पहुंचते गिरीश ।" अमरीक गिरीश से मुखातिब होकर बोला-----“देशपांडे नेवी का एक बड़ा अफ़सर है और सरकार का वहुत विश्वासपात्र । इसीलिए तो हमारे मिशन के लिए सरकार की तरफ़ से उसका नाम पेश किया गया था!"
“यह स्पेशलिटी उसकी बेगुनाही का सबूत नहीं हो सकती ।"
"मैं गिरीश से सहमत हूं ।" प्रताप ने गिरीश का समर्थन किया । फिर होलकर से मुखातिब हुआ----"तुम क्या कहते हो बॉस?"
"फिलहाल पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है ।" होलकर ठंडी सांस भरता हुआ बोला-----" आज हम सब अगर इस अंजाम तक पहुंचे है तो उसकी वजह केवल मैं ही हूं । मेरी वजह से ही तुम सब सस्पेंड हुए हो और हमें जांच आयोग का सामना करना पड़ रहा है । जांच अगर हमारे खिलाफ गई तो नौकरी तो जाएगी ही, हमें जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है ।"
" यह देशपांडे की वजह से हुआ है ।" ड्राइविंग कर रहा शेखरन नागवारी भरे स्वर में बोला-----'"उसने यकीनन हमसे गद्दारी की है और हमारे प्लान को लीक आउट करके मुस्तफा तक पहुचाया है । वरना.........वरना यह कैसे मुमकिन है कि जो "चिप बम'' मुस्तफा की जेब में प्लांट किया गया था, वह चांदनी मेडम के शरीर में पहुंच गया और जैसे ही बॉस ने रिस्टवॉच में लगा प्लंजर दबाया हैसे ही वह ब्लास्ट हो गया और चांदनी सिंह के परखच्चे उड़ गए! "
""ह. . .हां ।” भल्ला ने झुरझुरी ली…“शुक्र है कि उस वक्त कोई भी चांदनी सिंह के करीब नहीं था । हम सब भी मारे जा सकते थे !"
"यह तो अाप बहुत गम्भीर बात बता रहे हैं?” निरंजननाथ के लहजे में व्यंग बढ़ता जा रहा था ।
"इसीलिए मेरी नीद उड़ी हुई है । सोचो । रामलीला मैदान में लाखों लोगों की मौजूदगी में अगर कोई वारदात होती है तो क्या होगा? भीड़ में भगदड मच जाएगी और तब, वहां कितने बेगुनाह लोग मारे जाएंगेें, क्या तुम्हे इसका अंदाजा है? एक बात ओर?"
"वह क्या ?"
"वे सब हिंदू होंगे क्योंकि तुम्हें सुनने वे ही. . .
“आ........आप मुझे खौफजदा करने की कोशिश कर रहे हैं गृहमंत्री महोदया अाप मुझें डराकर मेरे रास्ते से भटकाना चाहते है लेकिन मैं डरने वाला नहीं हूं । पांच तारीख को मेरी महारैली है और होकर रहेगी । अगर आतंक्यादिर्यों द्वारा वहां किसी गड़बड़ी की आपके पास पहले से सूचना है तो मेरी सुरक्षा सुनिश्चित करना आपका फर्ज है । वरना यकीन मानिए, अगर उस महारैली के दरम्यान मुझे कुछ हुआ तो अकेली दिल्ली ही नहीं सारा मुत्क उबल पडे़गा औरे आपकी हुकूमत तिनके की तरह बिखर जाएगी । इस मुल्क की धरती गृहयुद्ध की आग में झुलस जाएगी ।"
"इसीलिए मैं अपना काम कर रहा हूं । इसीलिए मैं उस महारैली को स्थगित कर देने की बार-बार विनती कर रहा हूं ।”
" मुझे आपकी बात पर यकीन नहीं । आप एक राजनैतिक आदमी हैं । अपना और अपनी पार्टी का हित साधने के लिए छल का सहारा ले सकते है । अगर आप मुझे सचमुच यकीन दिलाना चाहते हैं तो मेरे सामने उस रिपोर्ट को पेश कीजिए जो आपके किसी खास खुफिया विंग ने दी है ।"
"यह नहीं हो सकता । मैं चाहकर भी तुम्हें वह रिपोर्ट नहीं दिखा सकता । यह कायदे-कानून के खिलाफ है ।"
" तो फिर मुझें अपने उस खुफिया अधिकारी से मिलाइए जिसने आप को यह खबर दी है?"
"यह भी नियम के खिलाफ़ है !"
"तो मेरा फैसला सुनिए । मुझें आपकी किसी भी बात का रत्ती भर भी यकीन नहीं है । इसलिए, मैं आपकी बातों पर तवज्जो देना जरूरी नहीं समझता । महारैली तयशुदा वक्त पर होगी और जरूर होगी । उसमें कोई भी व्यवधान पैदा होता है तो उसके लिए आपकी सरकार जिम्मेदार होगी, जिसका वहुत गम्भीर खामियाजा आपको भुगतना पडे़गा ।"
"तुम्हारा यह फैसला आत्मधाती है ।"
“उससे ज्यादा वह आप सबके लिए आत्मघाती होगा ।"
"तो तुम अपनी जिद नहीं तोडो़गे?"
"बिल्कुल नहीं । इसके अलावा आपके पास कोई और प्रपोजल हो तो बेहिचक मेरे सामने ऱख सकते हैं !"
"मेरे पास दूसरा कोई प्रस्ताव नहीं है ।"
"तो फिर इजाजत दीजिए!" निरंजन कुर्सी से उठ खड़ा होगया उसने नारंग के सामने अपने हाथ जोड़ दिए !
नारग कसमसाकर रह गया ।
कल्याण होलकर रत्नाकर देशपांडे के घर से बाहर निकला ।
उसका चेहरा लटका हुआ था ।
सड़क पर सुर्ख रंग की आठ सीटर वैन खडी़ थी ।
उसकी ड्राइविंग सीट पर शेखरन बैठा हुआ था । पीछे की सीटों पर प्रताप, भल्ला, गिरीश और अमरीक थे ।
केवल रत्नाकर देशपांडे की कमी थी…वरना वहां मिशन मुस्तफा की मुकम्मल टीम इकट्ठा थी ।
होलकर के वहाँ पहुंचते ही स्लाइडिंग डोर खुला ।
उनमें से एक ने पूछा-----"क्या रहा?"
" चलो ।" वेैन में बैठकर दरवाजा बंद करते हुए उसने शेखरन को हुक्म दिया-----"मेन रोड पर पहुंचो, फिर बताता हू ।"
शेखरन ने वेन स्टार्ट की और आगे बढा़ दी ।
"क्या हुआ बॉस ?” प्रताप ने पूछा । उसके स्वर में उत्सुकता थी----“रत्ऩाकर देशपांडे मिला ?"
"नही ।"
"कहां गायब है?"
"किसी को नहीं मालूम ।"
"घर पर कौन-कौन था?"
"केवल एक नोकर ।"
"बाकी लोग कहाँ गए?" सवाल भल्ला ने किया था ।
"देशपांडे परिवार को यहाँ नहीं रखता था! आने जाने का कोई निर्धारित वक्त नहीं है ! इसलिए, यह कहना भी मुश्किल है कि कब बापस आएगा । मेसेज छोड़ दिया है !"
"वह तो पहले भी छोड़ चुके हो बॉंस ।" गिरीश ने कहा----"मगर कोई फायदा नहीं हुआ । उस नेवी अफ़सर की तरफ से अभी तक कोई रिप्लाई नहीं मिली । आखिर कहां जा सकता है वह? उसकी नेवी की नौकरी से तो उसे भी सस्पेंड किया जा चुका होगा?"
"नहीं मालूम ।"
"गड़बड़ है ।"' गिरीश बड़बड़ाने के-से अंदाज में बोला-----“जरूर कोई गड़बड़ है । देशपांडे को लेकर तुम्हारा शक गलत नहीं है बॉस । इस आदमी का किरदार बहुत संदिग्ध लग रहा है । अब तो मुझे भी ऐसा लग रहा है कि इसी ने हमारे प्लान को लीक किया था और आतंकियों से हमारी मुखबिरी की थी ।"
"इतनी जल्दी नतीजे पर नहीं पहुंचते गिरीश ।" अमरीक गिरीश से मुखातिब होकर बोला-----“देशपांडे नेवी का एक बड़ा अफ़सर है और सरकार का वहुत विश्वासपात्र । इसीलिए तो हमारे मिशन के लिए सरकार की तरफ़ से उसका नाम पेश किया गया था!"
“यह स्पेशलिटी उसकी बेगुनाही का सबूत नहीं हो सकती ।"
"मैं गिरीश से सहमत हूं ।" प्रताप ने गिरीश का समर्थन किया । फिर होलकर से मुखातिब हुआ----"तुम क्या कहते हो बॉस?"
"फिलहाल पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है ।" होलकर ठंडी सांस भरता हुआ बोला-----" आज हम सब अगर इस अंजाम तक पहुंचे है तो उसकी वजह केवल मैं ही हूं । मेरी वजह से ही तुम सब सस्पेंड हुए हो और हमें जांच आयोग का सामना करना पड़ रहा है । जांच अगर हमारे खिलाफ गई तो नौकरी तो जाएगी ही, हमें जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है ।"
" यह देशपांडे की वजह से हुआ है ।" ड्राइविंग कर रहा शेखरन नागवारी भरे स्वर में बोला-----'"उसने यकीनन हमसे गद्दारी की है और हमारे प्लान को लीक आउट करके मुस्तफा तक पहुचाया है । वरना.........वरना यह कैसे मुमकिन है कि जो "चिप बम'' मुस्तफा की जेब में प्लांट किया गया था, वह चांदनी मेडम के शरीर में पहुंच गया और जैसे ही बॉस ने रिस्टवॉच में लगा प्लंजर दबाया हैसे ही वह ब्लास्ट हो गया और चांदनी सिंह के परखच्चे उड़ गए! "
""ह. . .हां ।” भल्ला ने झुरझुरी ली…“शुक्र है कि उस वक्त कोई भी चांदनी सिंह के करीब नहीं था । हम सब भी मारे जा सकते थे !"