S
StoryPublisher
Guest
"यह जानबूझकर सीधी-साधी बात में पेंच पैदा कर रहा है सर ।" प्रताप उतिजित्तिसा होकर बोला…“मामले को उलझा रहा है । दोनों खाते पूरी तरह विरोधाभासी हैं ।"
" ऐसा कुछ नहीं है ।” आर्या बोला-“मेरा यकीन करो ।"
"वो बाद में ।" नेगी बोला-----"पहले ये बता, अगर यहाँ तुझे हम न मिले होते । सचमुच कोई ऐसा अादमी मिला होता, जो तुझे ऐसे लोगों का ठिकाना बताता, जिनका मकसद निरंजननाथ का मर्डर करना होता तो उससे मिलने वाली खबर को किसके पास ट्रांसफ़र करता? सीधे दहशतगर्दों को या किसी और को?"
"म…म…मैं ।"
"मिमियाये बगैर बोल…बिना किसी हुज्जत के बोल । फौरन उसका नाम बता? कौन है वह?"
"म..........मैं किसी दहशतगर्द को नहीं जानता ।"
"जिसे जानता है, उसके बारे में बता?"
आर्या ने थूक गटका !
उसने बोलने का उपक्रम न किया ।
"मेरे पास जरा भी वक्त नहीं है आर्या ।" नेगी खूंखार स्वर मै बोला--------------अगर तू यह समझता है कि तेरे बच निकलने का कोई रास्ता वाकी बचा तो बाज आ जा । अगर तूं बाज़ नहीं आया ! अपना ही नुकसान करेगा । मेरे पास खडे ये आईबी के जल्लाद । ये तेरी चमडी को रेशा-रेशा करके उघेड़ेगे और इस तरह उधेड़ेगे कि तू अकेला नहीं बल्कि तेरी सात पुश्ते त्राहि-त्राहि कर उठेगी !"
"ब. . .बताता हूं ।” आर्या थूक निगलकर जल्दी से बोला----मैं बताता हूँ । उसका नाम. . .जसवंत है ।”
नेगी की आंखें सिकुड़ी-------“कौंन जसवंत?"
“अ......औमकार चौधरी का पर्सनल असिस्टेंट ।"
"क . . .क्या?" अकेला नेगी ही नहीं, प्रताप भी बूरी तरह चौंक पड़ा था-------“ओमकार चौधरी से तेरा मतलब-बह पोलीटीशियन है ?"
"ह . . .हां ।"
"चौधरी का पीए टेरेरिस्टों से मिला हुआ है?"
"यह सच है ।”
"बगैर किसी सबूत के तेरी लफ्फाजी पर कोई यकीन नहीं करेगा । जसवंत ओमकार चौधरी का खासमखास है, ऐसे में अगर जसवंत पर उंगली उठती है तो वह उंगली सीधे ओंमकार चौधरी पर उठी मानी जाएगी और यह बात मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि ओमकार चौधरी जैसा नेता कभी दहशतगर्दों से मिला नहीं हो सकता । उसने तो दहशतगर्दों और उनके मुल्क के हुक्मरानों की नीद हराम कर रखी है । इसीलिए हर दहशतगर्द उसके खून का प्यासा है ! तूं सुन रहा है न आर्या?"
"मैं चौधरी की नहीं जसवंत की बात कर रहा हूं । मेरा ओमकार चौधरी से कोई बास्ता नहीं है । मेरा वास्ता केवल जसवंत से है ।"
" अगर जसवंत दहशतगर्दों से मिला हुआ है तो. . . ।" प्रताप बहुत ज्यादा फिक्रमंद हो उठा था-------" यह और भी ज्यादा चिंता की बात है । इन हालात में तो दहशतगर्दों के लिए चौधरी को निशाना बनाना बहुत आसान होगा । हैरानी की बात है कि उन लोगों ने अभी तक चौधरी को कोई नुकसान नहीं पहुचाया ।"
............................
"दहशतगर्दों का सारा ध्यान फिलहाल निरंजननाथ पर है !" नेगी सोच में डूबा हुआ बोला । उसका लहजा भी व्यग्रता से भरा था------" ओंर जसवंत की असली ताकत चौधरी ही है, इसलिए पहले वे ओमकार चौधरी को खत्म करने की बेवकूफी नहीं कर सकते । ईश्वर न करे, कल अगर वे निरंजननाथ को खत्म करने में कामयाब हो गए तो अगला टार्गेट ओमकार चौधरी ही होगा ।"
" ऐसा नहीं होना चाहिए एसीपी साहब ।" प्रताप उत्तेजित होकर बोला------" हमें उसे हर हाल में रोकना होगा ।"
नेगी ने प्रताप से ध्यान हटाकर आर्या पर नजरें केंदित की और सवाल किया…“क्या जसवंत को तेरे यहाँ आने की खबर है !"
“ह. . .हां ! " वह फिर हकबकाया ।
"कैसे?"
"मैंने ही उसे फोन करके, यहाँ से आई कॉल के बारे में बताया था । उसी ने कहा कि मैं फौरन बताए गए पते पर पहुचूं और वहां जो भी बाते हों, उनके बारे में उसे बताऊं ।"
" शाबाश ।" नेगी कड़वे स्वर में बोला । फिर, उसकी आखों में चमक उभरी------" चल तू फौरन जसवंत को फोन कर ।"
"क.. किसलिए?" आर्या ने थूक निगला ।
"उससे मीटिंग फिक्स करा उसे फौरन इमरजेंसी मीटिंग के लिए कहीं बुला ।"
"व. . .वह मेरे बुलाने से आ जाएगा?"
"जरूर आएगा । तू उससे कहेगा कि जिस इंफार्मर से मिलने गया था, उसने कुछ ऐसी सनसनीखेज बाते बताई हैं, जिन्हें तूं फोन पर नहीं बता सकता । उनके लिए तेरा उससे मिलना जरूरी है । वैसी कंडीशन में वह इंकार नहीं कर सकेगा ।"
"अ........आप करना क्या चाहते है सर?"
"तुझे बता दूं! एक बिके हुए करप्ट पुलिसिये को बता दूं-----एक नमकहराम इंसान को बता दूं?"
उसका सिर एक बार फिर झुक गया ।
"फोन निकालकर जसवंत को लगा । और याद रखना जलील इंसान ।" उसके लहजे में चेतावनी का पुट उभर आया था-----''अगर बातों के दरम्यान जसवंत को किसी गुप्त इशारे से सावधान करने का प्रयास किया, या उसने तेरी बातों से सच को भांप लिया तो तेरी लाश यहीं, इसी फ्लेट में गिरेगी ।"
आर्या की हालत मरता क्या न करता वाली थी ।
'कश्मीर केसरी' के ताजा संपादकीय का शीर्षक था------
कहाँ सो रहा है हिंदुस्तानी ?
हमेशा की तरह इस संपादकीय को भी, अखबार के मालिक और प्रधान संपादक प्रबल कुमार चोपड़ा ने लिखा था ।
प्रबल कुमार चोपडा का 'संपादकीय' देश में बहुत लोकप्रिय था और ऐसा बेवजह नहीं था । लोकप्रियता का कारण यह था कि प्रबल कुमार चोपडा के हर लेख में तथ्यपूर्ण बातें लिखी होती थी ।
खोजपूर्ण बाते लिखी जाती थी । ऐसी-ऐसी सूचनाएं उजागर की जाती थी जो पाठकों को अन्य किसी अखबार या टीबी चैनल से नहीं मिलती थी । अगर यह भी कहा जाए तो गलत न होगा कि वह अपने एक ही लेख में सत्ता पर भी बरसता था और आतंकवादियों पर भी, और ऐसा वह इतने तर्कपूर्ण तरीके से करता था कि पाठको को उसकी हर बात सच लगती थी ।
लोगों को उसके संपादकीय पढ़कर जोश आ जाता था ।
आज का लेख "कहां सो रहा है हिंदुस्तानी' भी ऐसा ही एक तथ्यात्मक तथा खोजपूर्ण लेख था, जो देश के मौजूदा हालात की सजीव तस्वीर खींचता था । उसमें आज़ वहुत कुछ ऐसा लिखा था, जिसने आम जनों के साथ ही कुछ खास जनों का ध्यान भी खींच लिया था । चोपडा ने लिखा था---------
'कश्मीर केसरी' के हाथ लगे सूत्रों के मुताबिक हाफिस लुईस का अॉपेरेशन औंरगजेब अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है और जिस बर्बर तरीके से उसने जांबाज पुलिस अॉफिसर गुलशन राय तथा उसके साथियों का सिर कलम किया , वह मुल्क के हुक्मरानों की लंगोटी खोलने के लिए काफी है !
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
इससे पहले चींदनी सिंह के साथ हुई क्रूरता का जख्स अभी सूखा भी नहीं था कि भारत माता का सीना फिर छलनी हो गया !!!!
लेकिन यह नशंपिशाचों की प्यास का अंत नहीं हैं, यह तो महज उसका एक पड़ाव है ! अगला नम्बर किसका है, यह समझना मौजूदा हलात में ज्यादा मुश्किल नहीं है !
खुफिया एजेसियों की मानें तो वह शख्स निरंजननाथ भी हो सकता है और ओमकार चौधरी जैसी कद्दावर शख्तीयत भी हो सकती है, खुद मैं भी ही सकता हूं !
ये कैसा सिस्टम है कि यह सब तब हो रहा है जबकि खुफिया एजेंसियां बहुत पहले ही हाफिस द्वारा चलाए जा रहे आँपरेशन औरंगजेब की सच्चाई से हुकूमत को आगाह करा चुकी हैं !
मुझे अपनी मौत के अंदेशे का जरा भी खौफ नहीं हैं, क्योंकि मैंने जो मशाल जला दी है, वह मैरी मौत के बाद भी बुझने वाली नहीं है !
" ऐसा कुछ नहीं है ।” आर्या बोला-“मेरा यकीन करो ।"
"वो बाद में ।" नेगी बोला-----"पहले ये बता, अगर यहाँ तुझे हम न मिले होते । सचमुच कोई ऐसा अादमी मिला होता, जो तुझे ऐसे लोगों का ठिकाना बताता, जिनका मकसद निरंजननाथ का मर्डर करना होता तो उससे मिलने वाली खबर को किसके पास ट्रांसफ़र करता? सीधे दहशतगर्दों को या किसी और को?"
"म…म…मैं ।"
"मिमियाये बगैर बोल…बिना किसी हुज्जत के बोल । फौरन उसका नाम बता? कौन है वह?"
"म..........मैं किसी दहशतगर्द को नहीं जानता ।"
"जिसे जानता है, उसके बारे में बता?"
आर्या ने थूक गटका !
उसने बोलने का उपक्रम न किया ।
"मेरे पास जरा भी वक्त नहीं है आर्या ।" नेगी खूंखार स्वर मै बोला--------------अगर तू यह समझता है कि तेरे बच निकलने का कोई रास्ता वाकी बचा तो बाज आ जा । अगर तूं बाज़ नहीं आया ! अपना ही नुकसान करेगा । मेरे पास खडे ये आईबी के जल्लाद । ये तेरी चमडी को रेशा-रेशा करके उघेड़ेगे और इस तरह उधेड़ेगे कि तू अकेला नहीं बल्कि तेरी सात पुश्ते त्राहि-त्राहि कर उठेगी !"
"ब. . .बताता हूं ।” आर्या थूक निगलकर जल्दी से बोला----मैं बताता हूँ । उसका नाम. . .जसवंत है ।”
नेगी की आंखें सिकुड़ी-------“कौंन जसवंत?"
“अ......औमकार चौधरी का पर्सनल असिस्टेंट ।"
"क . . .क्या?" अकेला नेगी ही नहीं, प्रताप भी बूरी तरह चौंक पड़ा था-------“ओमकार चौधरी से तेरा मतलब-बह पोलीटीशियन है ?"
"ह . . .हां ।"
"चौधरी का पीए टेरेरिस्टों से मिला हुआ है?"
"यह सच है ।”
"बगैर किसी सबूत के तेरी लफ्फाजी पर कोई यकीन नहीं करेगा । जसवंत ओमकार चौधरी का खासमखास है, ऐसे में अगर जसवंत पर उंगली उठती है तो वह उंगली सीधे ओंमकार चौधरी पर उठी मानी जाएगी और यह बात मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि ओमकार चौधरी जैसा नेता कभी दहशतगर्दों से मिला नहीं हो सकता । उसने तो दहशतगर्दों और उनके मुल्क के हुक्मरानों की नीद हराम कर रखी है । इसीलिए हर दहशतगर्द उसके खून का प्यासा है ! तूं सुन रहा है न आर्या?"
"मैं चौधरी की नहीं जसवंत की बात कर रहा हूं । मेरा ओमकार चौधरी से कोई बास्ता नहीं है । मेरा वास्ता केवल जसवंत से है ।"
" अगर जसवंत दहशतगर्दों से मिला हुआ है तो. . . ।" प्रताप बहुत ज्यादा फिक्रमंद हो उठा था-------" यह और भी ज्यादा चिंता की बात है । इन हालात में तो दहशतगर्दों के लिए चौधरी को निशाना बनाना बहुत आसान होगा । हैरानी की बात है कि उन लोगों ने अभी तक चौधरी को कोई नुकसान नहीं पहुचाया ।"
............................
"दहशतगर्दों का सारा ध्यान फिलहाल निरंजननाथ पर है !" नेगी सोच में डूबा हुआ बोला । उसका लहजा भी व्यग्रता से भरा था------" ओंर जसवंत की असली ताकत चौधरी ही है, इसलिए पहले वे ओमकार चौधरी को खत्म करने की बेवकूफी नहीं कर सकते । ईश्वर न करे, कल अगर वे निरंजननाथ को खत्म करने में कामयाब हो गए तो अगला टार्गेट ओमकार चौधरी ही होगा ।"
" ऐसा नहीं होना चाहिए एसीपी साहब ।" प्रताप उत्तेजित होकर बोला------" हमें उसे हर हाल में रोकना होगा ।"
नेगी ने प्रताप से ध्यान हटाकर आर्या पर नजरें केंदित की और सवाल किया…“क्या जसवंत को तेरे यहाँ आने की खबर है !"
“ह. . .हां ! " वह फिर हकबकाया ।
"कैसे?"
"मैंने ही उसे फोन करके, यहाँ से आई कॉल के बारे में बताया था । उसी ने कहा कि मैं फौरन बताए गए पते पर पहुचूं और वहां जो भी बाते हों, उनके बारे में उसे बताऊं ।"
" शाबाश ।" नेगी कड़वे स्वर में बोला । फिर, उसकी आखों में चमक उभरी------" चल तू फौरन जसवंत को फोन कर ।"
"क.. किसलिए?" आर्या ने थूक निगला ।
"उससे मीटिंग फिक्स करा उसे फौरन इमरजेंसी मीटिंग के लिए कहीं बुला ।"
"व. . .वह मेरे बुलाने से आ जाएगा?"
"जरूर आएगा । तू उससे कहेगा कि जिस इंफार्मर से मिलने गया था, उसने कुछ ऐसी सनसनीखेज बाते बताई हैं, जिन्हें तूं फोन पर नहीं बता सकता । उनके लिए तेरा उससे मिलना जरूरी है । वैसी कंडीशन में वह इंकार नहीं कर सकेगा ।"
"अ........आप करना क्या चाहते है सर?"
"तुझे बता दूं! एक बिके हुए करप्ट पुलिसिये को बता दूं-----एक नमकहराम इंसान को बता दूं?"
उसका सिर एक बार फिर झुक गया ।
"फोन निकालकर जसवंत को लगा । और याद रखना जलील इंसान ।" उसके लहजे में चेतावनी का पुट उभर आया था-----''अगर बातों के दरम्यान जसवंत को किसी गुप्त इशारे से सावधान करने का प्रयास किया, या उसने तेरी बातों से सच को भांप लिया तो तेरी लाश यहीं, इसी फ्लेट में गिरेगी ।"
आर्या की हालत मरता क्या न करता वाली थी ।
'कश्मीर केसरी' के ताजा संपादकीय का शीर्षक था------
कहाँ सो रहा है हिंदुस्तानी ?
हमेशा की तरह इस संपादकीय को भी, अखबार के मालिक और प्रधान संपादक प्रबल कुमार चोपड़ा ने लिखा था ।
प्रबल कुमार चोपडा का 'संपादकीय' देश में बहुत लोकप्रिय था और ऐसा बेवजह नहीं था । लोकप्रियता का कारण यह था कि प्रबल कुमार चोपडा के हर लेख में तथ्यपूर्ण बातें लिखी होती थी ।
खोजपूर्ण बाते लिखी जाती थी । ऐसी-ऐसी सूचनाएं उजागर की जाती थी जो पाठकों को अन्य किसी अखबार या टीबी चैनल से नहीं मिलती थी । अगर यह भी कहा जाए तो गलत न होगा कि वह अपने एक ही लेख में सत्ता पर भी बरसता था और आतंकवादियों पर भी, और ऐसा वह इतने तर्कपूर्ण तरीके से करता था कि पाठको को उसकी हर बात सच लगती थी ।
लोगों को उसके संपादकीय पढ़कर जोश आ जाता था ।
आज का लेख "कहां सो रहा है हिंदुस्तानी' भी ऐसा ही एक तथ्यात्मक तथा खोजपूर्ण लेख था, जो देश के मौजूदा हालात की सजीव तस्वीर खींचता था । उसमें आज़ वहुत कुछ ऐसा लिखा था, जिसने आम जनों के साथ ही कुछ खास जनों का ध्यान भी खींच लिया था । चोपडा ने लिखा था---------
'कश्मीर केसरी' के हाथ लगे सूत्रों के मुताबिक हाफिस लुईस का अॉपेरेशन औंरगजेब अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है और जिस बर्बर तरीके से उसने जांबाज पुलिस अॉफिसर गुलशन राय तथा उसके साथियों का सिर कलम किया , वह मुल्क के हुक्मरानों की लंगोटी खोलने के लिए काफी है !
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
इससे पहले चींदनी सिंह के साथ हुई क्रूरता का जख्स अभी सूखा भी नहीं था कि भारत माता का सीना फिर छलनी हो गया !!!!
लेकिन यह नशंपिशाचों की प्यास का अंत नहीं हैं, यह तो महज उसका एक पड़ाव है ! अगला नम्बर किसका है, यह समझना मौजूदा हलात में ज्यादा मुश्किल नहीं है !
खुफिया एजेसियों की मानें तो वह शख्स निरंजननाथ भी हो सकता है और ओमकार चौधरी जैसी कद्दावर शख्तीयत भी हो सकती है, खुद मैं भी ही सकता हूं !
ये कैसा सिस्टम है कि यह सब तब हो रहा है जबकि खुफिया एजेंसियां बहुत पहले ही हाफिस द्वारा चलाए जा रहे आँपरेशन औरंगजेब की सच्चाई से हुकूमत को आगाह करा चुकी हैं !
मुझे अपनी मौत के अंदेशे का जरा भी खौफ नहीं हैं, क्योंकि मैंने जो मशाल जला दी है, वह मैरी मौत के बाद भी बुझने वाली नहीं है !