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गुलाम

जय- आई डॉन’ट अंडरस्टॅंड व्हाई यू आर सो मच वरीड अवाउट आ गुलाम

निशा-आई हेट यू आंडआई हेट यू मोर व्हेन यू सेड युवरसेल्फ आ गुलाम

जय- आई सेड बिकॉज़ आई ऐम

निशा- नो यू आर नोट

जय- यू नो व्हाट मैने एक्सपेक्ट किया था की तुम शरारती, हँसमुख होगी पर तुम तो सीरीयस निकली इस घर मे दो सीरीयस ही काफ़ी है और की ज़रूरत नही है

निशा- आपने कैसे एक्सपेक्ट किया और आप कैसे जानते थे मेरे बारे मे

जय- ओके लेट'स मेक आ डील

अस्क मी एनितिंग अवाउट यू

आई मीन एनितिंग

अगर मैने सच बताया तो तुम अभी मेरे रूम से चली जाओगी और वापस कभी रात मे नही आओगे और अगर सच नही बता पाया तो आई विल टेल यू एवेरितिंग

निशा- पागल समझा है क्या

बट लेट मी रिफ्रेज़ इट

अगर सच बताया तो अभी के लिए चली जाउन्गी पर बाद के लिए प्रॉमिस नही कर सकती

और अगर झूठ बताया तो यू हॅव टू गिव मी आ किस

मुस्कुराते हुए बोली

जय ने सोचा आज के लिए तो मुसीबत टलेगी

जय- ओके बट ओन्ली वन क्वेस्चन

निशा- पर मैं कुछ भी पूछ सकती हू

जय- ओन्ली अवाउट यू

कुछ भी

निशा- ओके

आज वो बहुत ज़्यादा एग्ज़ाइटेड हो गई थी

मन में दोस्तो के बारे मे पता हो सकता है, स्कूल के बारे मे भी, बाय्फ्रेंड था नही, कहाँ रहती थी और किसके साथ ये भी पता हो सकता है

क्या पुच्छू क्या पुच्छू

अरे हा मार्क्स

मार्क्स वो भी सब्जेक्ट वाइज़ मुझे खुद मेरे मार्क्स याद नही रहते इसको कैसे याद होंगे

पर अगर हुए तो

क्या पता डॅड के पास मार्क्स शीट जाती हो

फिर उसने सोचा चलो ब्लफ करते है

निशा- आ कामन थिंग अवाउट माइ पेट आंड माइ बाय्फ्रेंड

जय स्माइल करते हुए उठा और गेट खोल दिया

निशा को जाने के लिए इशारा करने लगा

निशा जय के चेहरे को देख कर ही समझ गई की आन्सर पता है वो खुद को ही गालियाँ देने लगी

निशा धीमे धीमे चल कर गेट तक बाहर निकल कर

निशा- पहले आन्सर तो दो

जय- यू नेवेर हॅड आ बाय्फ्रेंड नॉर आ पेट

और गेट बंद कर देता है

निशा बेचारी का सारा एग्ज़ाइट्मेंट ही ख़तम हो जाता है

सॅड फेस बना कर अपने रूम मे चली जाती है और सोचने लगती है कल के लिए क्वेस्चन

और सोचते सोचते सो जाती है

………………………………………

सुबह ब्रेकफास्ट पर

प्रिया- डॅड मैने कुछ लिस्ट बनाई है उन लोगो पर मुझे शक है

ठाकुर- अच्छा काम किया बेटा

तुम जय को लेके चले जाना और हा याद रखना उसे सिर्फ़ ज़रूरत की चीज़ें बताना

प्रिया- समझ गई डॅड

पर उन लोगो का क्या करना है

ठाकुर- अब तुम संभाल रही हो तो तुम जानो क्या करना है

प्रिया- आज मीटिंग करती हू सबके साथ फिर देखते है क्या करना है

ठाकुर- जैसी तुम्हारी मर्ज़ी

फिर सब शांति से ब्रेकफास्ट करते है और अपने अपने काम के लिए निकल जाते है

प्रिया जय को लेकर फॅक्टरी आजाती है और जय को बोल कर जो लिस्ट उसने तैयार करी थी उन सबको मीटिंग हॉल मे बुला लेती है पर जय को बाहर ही रहने देती है

उसे डर था की कही जय को पता चल गया तो वहाँ क्या हो सकता है

अंदर क्या बाते हुई ना जय को पता है और ना मुझे वो शायद रूम मे ही रह गये करीब एक दो घंटे बाद प्रिया बाहर निकली और उसके पीछे पीछे सब लोग जिनके चेहरे पर डर सॉफ झलक रहा था

बाहर आते ही

प्रिया- लो यहाँ का तो काम होगया अब हमारे पास बहुत टाइम है घूमने के लिए

चलो कही चलते है

जय- घर चले

प्रिया- घर तो हर रोज जाते है

चलो कही घूमने चलते है

क्या अपनी बेहन को घुमाओगे नही(बेहद प्यार से बोलती है)

और जय मना नही कर पाता

और वो लोग फॅक्टरी से निकल कर ऐसे ही सड़कों पर घड़ी घुमाने लगते है क्यूकी जय को पता नही था की जाना कहाँ है और प्रिया शहर मे न्यू थी

जय तो घूमने के लिए कही भी शांत जगह पर बात कर दारू पी लेता था इस ज़्यादा उसने ना कभी सोचा और ना कभी किया

प्रिया- कब से यही कार घुमा रहे हो

कही चलना नही है क्या

जय- आप बताओगे तभी तो चलूँगा

प्रिया- मैं तो न्यू हू यहाँ तुम्हे पता होना चाहिए जगह के बारे मे कही भी चल लो बस ज़्यादा भीड़ नही होनी चाहिए जहा शांति से कुछ देर बात सके या फिर एक काम करो वो उस दिन वाली जगह पर ही चल लो वो ठीक रहेगा बहुत शांति रहती है वो तो उस दिन उन लफंगो ने मज़ा खराब कर दिया नही तो खूब एंजाय कर रहे थे

जय भी बिना कुछ कहे उस साइड मे कार घुमा देता है और हल्की फुल्की बाते करते करते वो जगह पर पहुच गये

प्रिया- तुम्हे ये जगह बहुत पसंद है ना

जय-ह्म

प्रिया- शायद कुछ पुरानी यादें जुड़ी हुई है

जय- काइंड ऑफ

प्रिया- अच्छा उस दिन तुम किसी लड़की के बारे मे बता रहे थे फिर अचानक भड़क गये

कौन है वो बताना चाहोगे

जय- मैं भी कभी एक आम इंसान हुआ करता था

हँसता था,खुश रहता था खूब मस्ती भी करता था अकेला था पर खुश था पर फिर एक दिन जिंदगी मे वो पता नही क्यू आई पर साथ मे मेरा सब कुछ लेके चली गई

मैने कभी किसी को नही बताया की यहाँ आकर मैने जो भी किया क्यू किया पर असलियत ये थी की मैं गुस्से मे था मैं टूटा हुआ था और मुझे सब अपने दुश्मन नज़र आने लगे थे

मुझे प्यार करने वाला कोई नही और ना कोई समझने वाला था मैं बस एक टूटा हुआ इंसान था जिसने अपनी इंसानीयत खो दी थी और उसे पता भी नही चला की कब वो एक शांत हँसमुख लड़के से हैवान बन गया

मैं उसे ब्लेम नही करता इसमे उसकी कोई ग़लती नही थी ग़लती मेरी ही थी की मुझे उससे प्यार होगया था और उसके लिए आई ऐम जस्ट आन अनदर पर्सन इन हर लाइफ

मै हमेशा यही सोचता था की जो मैने किया वो सबकी वजह वो थी पर ये सच नही था

सच ये था की जो मैं आज हू दट'स हू आई ऐम आंड दट'स हू आईऑल्वेज़ वाज़

मुझे बस एक मोके की तलाश थी और उसने बस मुझे वो मौका दे दिया और फिर मैने कभी पीछे मूड के नही देखा

आई डॉन’ट नो व्हाई आई ऐम टेल्लिंग यू ऑल दिस मे बी यू आर दा ओन्ली वन हू कॅन अंडरस्टॅंड ओर यू आर दा ओन्ली वन हू ऑल्वेज़ अंडरस्टॅंड..
 
ठाकुर- जय इधर आ आजा बात करते है

ठाकुर जो दारू पी रहा था शायद इसीलिए जय को इतने प्यार से बुलाया है

ठाकुर- बैठ ना तू क्यू हमेशा ऐसे रहता है आज सब क्लियर कर देते है

जय- आप नशे मे हो और कितनी पी ली है आपने चलो मैं रूम मे छोड़ देता हू आपको

ठाकुर- आज पता है ना क्या दिन है

जय- मैं कैसे भूल सकता हू

ठाकुर जय के लिए भी पेग बना देता है

ठाकुर- तो आज पीते है और बाते करते है

जय बैठ जाता है और अपना पेग उठा लेता है

ठाकुर- मुझे पता है जो भी हुआ उसमे तेरी ग़लती नही थी उसमे मेरी ग़लती थी बस मेरी मैं तुझे समझ ही नही पाया तू एक बचा ही तो था अकेला टूटा हुआ बचा मुझे तेरा ध्यान रखना चाहिए था

जय- आप क्यू पुरानी बाते लेके बैठ गये जो हुआ उससे भूल जाइए

ठाकुर- कैसे भूल जाऊँ मैं कैसे क्या तू भूल पाया है नही ना और उन सबकी वजह से ही तू आज देख क्या बन गया तू इंडिया क्यू आया तू लंडन मे ही सही था खुश था और इस दलदल मे बहुत दूर

जय- शायद यही किस्मत थी

ठाकुर- मैं तुझे कभी समझ ही नही पाया कभी नही पर अब समझ गया हू तू आज के बाद कभी किसी के आगे सर नही झुकाएगा मेरे आगे भी नही ये सब कुछ तेरे लिए ही तो है मैं जो पहले तेरे लिए नही कर पाया वो अब करूँगा इस शहर का नया बाहुबली तू होगा तू राज करेगा यहाँ

जय- मैं जैसा हू जहा हू मुझे रहने दीजिए आपने देख रखा है मैं क्या कर सकता हू मेरे हाथ मे पवर आ गई तो शहर तबाह हो जाएगा एक बार ग़लती हो गई अब दुबारा नही कर सकता

ठाकुर- उस ग़लती ने जो बदलाव लाया है तुझमे उसी की वजह से मैं ये सब बोल रहा हू तू वो नही रहा अब अब तेरा दिल दोबारा से ढकने लगा है

पत्थर पिघलने लगा है तू खुश रहा कर मुझे अच्छा नही लगता जब तू मायूष यहाँ वहाँ घूमता रहता है मेरे से नज़र तक नही मिलाता

जय- आप अब सो जाइए बहुत पी ली आपने

ठाकुर- मैने निशा की आँखों मे तेरे लिए प्यार देखा है

जय- हा तो क्या हुआ क्या वो मुझसे प्यार नही कर सकती

ठाकुर- तू समझा नही मैं क्या कहना चाह रहा हू

जय एक नज़र ठाकुर को देखता है

जय- आपको ना बहुत ज़्यादा चढ़ गई है अभी सोना है आपको हम कल बात करेंगे

ठाकुर- मैं बिल्कुल होश मे हू

जय- होश मे होते तो ऐसे बाते नही बोलते और जय ठाकुर को उठा कर उसके रूम मे ले जाने लगता है

ठाकुर- हम कल बात करेंगे करेगा ना मेरे से बात

जय- हा हम कल बात करेंगे

और जय बड़ी मुस्किल से ठाकुर को उसके रूम मे सुला कर आता है

पर प्राब्लम ये थी की दो आँखों ने इनकी सारी बातें सुन ली थी पर वो आँखें किसकी थी ये नही पता

जय भी वहाँ से अपने रूम मे चला जाता है पर साथ साथ एक बॉटल दारू की भी ले जाता है

अभी रूम मे घुसा ही था की निशा उसके बेड पर बैठी देखी

निशा को देख कर जय अपना सर पीट लेता है

निशा हँसते हुए

इतनी जल्दी पीछा नही छोड़ने वाली

जय- अभी क्या चाहिए तुम्हे

निशा- मेरी बेस्टफ्रेंड??

जय- तुम्हारी डाइयरी जिसमे तुम कुछ कुछ लिखती रहती हो अब निकलो यहाँ से

निशा मूह फाडे जय को देखते रह जाती है फिर नॉर्मल होकर

निशा- ये तो क्वेस्चन ही नही था

मैं तो ये बोल रही थी की मेरी बेस्टफ्रेंड ने कहा है की आज तो किस लेके ही आना

जय- तो तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड बोलने भी लग गई

निशा- वो हम एक दूसरे की बातें बिना बोले समझ जाते है

निशा- आप मुझे इसलिए भगाना चाहते है की यहाँ आराम से दारू पी सको

इतनी ड्रिंक करना अच्छी बात नही है

जय- हा पता है

टेल मी सम्तिंग आई डॉन’ट नो
 
निशा- प्रिया दीदी से तो इतने अच्छे से बात कर लेते हो मेरे से ही क्यू चिड़े रहते हो हमेशा

जय- क्यूकी प्रिया दीदी बड़ी है, समझदार है और फालतू की बातें नही करती

निशा- तो क्या मैं समझदार नही हू और क्या मैं फालतू की बातें करती हूँ

जय- तुम खुद ही बोल रही हो

निशा- मैं पूछ रही थी ओके

निशा- तो आपने प्रिया दीदी को दीदी मान लिया है

जय- इस हिसाब से तो तुम मेरी छोटी बेहन हुई है ना

निशा- बातें नही करनी तो सीधे सीधे बोल सकते हो

बकवाश करने की कोई ज़रूरत नही है

और धडाम से गेट बंद करते हुए निशा जय के रूम से निकल गई

जय मन में

अरे वाह इसको तो बस बेहन बोलना है और ये अपने आप पीछा छोड़ देगी

और सब आराम से सो गये निशा नही उसे बहुत दुख हुआ जय को उसे बेहन बोलने से

बेचारी रोती हुई ही सो गई

………………………..

सुबह हुई तो सब तैयार थे मंदिर जाने के लिए

जय ड्राइव कर रहा था उसके साइड वाली शीट पर ठाकुर और पीछे तीनो बहने बैठी हुई थी

मंदिर पहुच कर जय बाहर खड़ा हो गया

प्रिया- तुम नही चलोगे?

ठाकुर- ये नही जाता इसके लिए प्रसाद ले आना

बाकी सब मंदिर चले जाते है और जय बाहर ही कार के पास उनका वेट करने लगता है

जब वापस आते है तो जय छोटे छोटे बच्चो के साथ खेल रहा था

उसके चेहरे पर स्माइल थी जो बहुत कम देखने को मिलती थी

वो खुश था शायद अपना बचपन देखने की कोशिश कर रहा था

अब वो लोग जय को देख ही रहे थे की तीन चार कार वहाँ आके रुकी और कुछ लोग उनमे से निकल आए

उनका लीडर- आप भी यही और हम भी यही लगता है कोई पुराना नाता है हमारा ठाकुर साहब

ठाकुर- पास्ट को याद रख अपने आप नाता याद आज़ाएगा

चलो बेटे अपनी बेटियो को बोला

लीडर- बहुत अच्छे से याद है एक एक चीज़ याद है ठाकुर साहब कभी नही भूलूंगा

बेटियाँ वापस घर आ गई मेरा बेस्ट विशस है उनको

लीडर प्रिया को घुरते हुए बोलता है

तभी जय ठाकुर के आगे आकर लीडर की तरफ फेस करके खड़ा हो जाता है

जय- याद नही है तो याद दिलाऊ क्या शहर की सड़कें आज भी लाल है

एक सेकेंड का वक़्त नही लगाउन्गा याद दिलाने मे

क्या हुआ था क्यू हुआ था और किसने क्या क्या खोया

बहुत खून बहा है इस दिन और बहाना चाहता है तो वापस आना

तुझे तो पता ही होगा मैं हमेशा से तेरा इंतज़ार करता रहता हू

लीडर- आउन्गा एक दिन ज़रूर आउन्गा कुछ कसम मैने भी खाई थी कुछ कसम तूने भी पर पूरी एक की हो होगी वापस ज़रूर आउन्गा

जय- फिर कभी जा नही पाएगा

मैने एक ही काम अधूरा छोड़ा है उसे पूरा करने का मौका तो देगा ही तू

तेरा इंतज़ार रहेगा और इस फॅमिली से जितना हो सके दूर रहना ये तेरे और मेरे बीच की बात है नही तो तुझे पता है ना मुझे सारी जानकारी रहती है

लीडर- तेरे और मेरे बीच की बात

और ये बोल कर वो वहाँ से चला जाता है
 
ठाकुर- सॉरी बेटा(प्रिया,निशा और शिवानी)

चलो समान दान करते है

ठाकुर जय की तरफ इशारा करता है

जय- प्रिया दीदी...

कॅनआईकॉल यू ऑल दीदी

प्रिया हँसते हुए

आई विल लव इट व्हेन यू कॉल मे दीदी

निशा का मूड फिर से खराब हो जाता है क्यूकी जय ने ऑल पर कुछ ज़्यादा ही ज़ोर दिया था

जय- प्रिया दीदी ,शिवानी दीदी और निशा दीदी अपने हाथो से दे तो अच्छा रहेगा

निशा- मैं आपकी बेहन नही हू

ठाकुर- बेटा ये कैसे बात कर रहे हो

निशा- आप इनको बोल दो की मुझे बेहन ना बोले

ठाकुर- अरे बेहन ही तो बोल रहा है गुस्सा क्यू कर रही हो

निशा- मुझे बेहन ना बोले

ठाकुर- अच्छा बाबा ओके

जय सॉरी बोलो इसको और बेहन नही बोलना आगे से ठीक है

जय मुस्कुराते हुए

अगर प्रिया दीदी शिवानी दी और निशा जी सबको अपने हाथो से दे तो अच्छा रहेगा

फिर सब ग़रीबो को उनके ज़रूरत का समान डोनेट करते है

खूब सारा आशीर्वाद लेके वापस हवेली आजाते है...
 
निशा पूरे दिन से अपने रूम मे ही घुसी हुई थी ना किसी से बात कर रही थी और ना किसी को अपने रूम मे घुसने दे रही थी सब बहुत परेशान और टेन्षन मे थे

आख़िर कार हार कर प्रिया जय के पास आई

प्रिया- जय

जय- जी बोलिए

प्रिया- तुमने कुछ बोला क्या निशा को

जय- नही मेरी उनसे कोई बात ही नही हुई है कल से

प्रिया- क्या तुम उससे जाके बात करोगे उसने सुबह से कुछ भी नही खाया है और ना किसी से बात कर रही है

जय गहरी सास छोड़ कर

जय- आई कॅन’ट प्लीज़ ट्राइ टू अंडरस्टॅंड मुझे इनसे दूर रखिए मैं नही कर सकता

प्रिया- पर क्यू बस बात करने को ही तो बोल रही हूँ

क्या पता तुम्हारे बोलने पर मान जाए

जय- आप ये बताए मुझे वो मेरी क्या लगती है जो मेरे कहने पर मानेगी

प्रिया- कुछ भी लगती हो पर क्या तुम तुमने मुझे दीदी बोला था ना तो क्या दीदी के कहने पर एक बार उससे बात नही कर सकते

जय- नही

प्रिया- अब मैं तुम्हे ऑर्डर दे रही हूँ तुम गुलाम हो ना तो जाके बात करो

जय- सॉरी नही कर सकता मुझे लगा आपने मुझे सच मे भाई बोला था चलो कोई नही पर मैं बात नही कर सकता आपकी बेहन है बचपन से आपने उसका ख़याल रखा है एक मा की तरह अगर आप चाहो तो एक मिनिट मे उससे मना सकते हो आप जाए और मुझे फॅमिली मॅटर्स से दूर रखिए

प्रिया- क्या तुम फॅमिली नही हो

जय- आपने अभी तो मुझे गुलाम बोला है मैं सच मे एक गुलाम ही हू और मैं आपका नही ठाकुर साहब का गुलाम हू उनके ऑर्डर्स मानता हू वो बोलेंगे तो जान ले लूँगा और जान दे भी दूँगा आप उनको बोल कर देखो वो खुद आपकी बात काट देंगे बट ये सब मॅटर नही करता मॅटर करते हो आप आप जाके बात करो वो मान जाएगी और प्लीज़ मुझे दूर रखो और हा आगे से भाई मत बोलना प्लीज़ ये कह कर जय वहाँ से चला गया

प्रिया को जय का ऐसा बिहेवियर बिल्कुल अच्छा नही लगा पर फिर हार कर वो खुद ही निशा के रूम की तरफ चली गई

प्रिया- गुड़िया गेट खोलो

नो आन्सर

प्रिया थोड़ी तेज आवाज़ मे

गुड़िया मैने कहा गेट खोलो अबकी बार गुस्सा था उसकी आवाज़ मे

और कुछ ही देर मे निशा ने गेट खोल दिया और खुद जाके अपने बेड पर बैठ गई उसको देख कर ही लग रहा था की बेचारी कितने देर से रो रही है

प्रिया- ये क्या है तुझे समझ नही आता क्या वो गुलाम है समझी तू गुलाम मालिक और गुलाम मे कभी प्यार नही हो सकता मैने अभी बहुत रिक्वेस्ट की उससे बात करने की पर वो नही माना तो इसका मतलब है उसको कुछ फीलिंग्स नही है तेरे लिए

तू अभी बच्ची नही रही जो समझ ना पाए और ऐसे रोने से कुछ नही होने वाला तू उससे बहुत बेटर लड़का डिज़र्व करती है बहुत ज़्यादा बेटर अभी तू मेरे साथ नीचे चलेगी सबको सॉरी बोलेगी और खाना खाएगी

निशा लगभग रोते हुए=

दीदी क्या सच मे उसके दिल मे मेरे लिए कुछ नही है

`

प्रिया उसके चेहरे को अपने हाथ मे लेते हु=

बेटू उसके दिल मे किसी के लिए कुछ नही है वो बस अपनी ड्यूटी निभा रहा है

वो यहाँ रहता है क्यूकी वो यहाँ काम करता है वो अपने ऑर्डर मानता है क्यूकी हम उसको पैसे देते है और कुछ नही है बेटू तू जितनी जल्दी हो सके ये समझ जा और अगर सच मे प्यार करती है ना तो ऐसे रोने से कुछ नही होगा

बी स्ट्रॉंग और उसे अपने प्यार के दम पर चेंज कर उसे एक इंसान बना जो इंसानीयत वो खो चुका है ना उसे वापस जिंदा कर उसके दिल मे अपने लिए एक जगह बना और ये सब यहाँ बाते रो कर नही होगा तुझे सामना करना पड़ेगा

बेटू ये तो शुरुआत है लाइफ की आगे बहुत टफ टफ सिचुयेशन आएगी तो क्या तू ऐसे ही रोते रहेगी

हा बता मुझे क्या मेरी गुड़िया इतनी कमजोर है

नही ना नही ना

निशा बस ना मे सर हिला देती है

प्रिया- गुड अभी अपना फेस सॉफ कर और नीचे चल मैने तेरा फॅवुरेट खाना बनाया है

प्रिया निशा के माथे को च्छूम कर रूम से निकल जाती है

जाते जाते

जल्दी आना गुड़िया नही तो मैं सारा फिनिश कर जाउन्गी फिर दोबारा से रोते रहना

निशा को अपने दीदी से बात करके बहुत अच्छा लगा वो अपनी हालत सुधार कर नीचे चली जाती है

सबको सॉरी बोल कर खाना खाने लगती है

ठाकुर भी कुछ नही बोलता उसे बस प्यार से उसके सर पर हाथ फेर देता है

और सब चुप चाप खाना खाने लगते है

और उसके बाद हॉल मे ही बात कर बाते करने लगते है

निशा भी कुछ हद तक नॉर्मल हो गई थी और कुछ हद तक नॉर्मल दिखाने की कोशिश कर रही थी
 
फिर सब हॉल से बाहर पार्क मे आके बैठ जाते है और इधर उधर की बातें करने लगते है

तभी गेट से जय की कार आती है और वो बिना उनके तरफ देखे वहाँ से निकलने की कोशिश करने लगता है पर ठाकुर उसे बोल लेते है

ठाकुर- इधर आ

जय पहले की तरह सर नीचे करके ठाकुर के पास जाके खड़ा होगया

ठाकुर- अभी कहाँ से आ रहा है

जय- सर दर्द कर रहा था इसलिए थोड़ा टहलने गया था

ठाकुर- और ड्रग्स करके आगया , वोही तो तेरी मेडिसिन है है ना

जय कुछ नही बोलता

ठाकुर उसके बाल पकड़ कर

मेरी तरफ देख

वोही तेरी मेडिसिन है हा

एक दिन मर जाएगा तू इन सबके चक्कर मे

और एक बात मेरी ध्यान से सुन ले

आज के दिन मुझे कोई खून ख़राबा नही चाहिए समझा

जो पास्ट मे हुआ वो हुआ पर और नही

जय- खून तो बहेगा बहुत बहेगा अभी

जब तक उनमे से एक भी जिंदा है खून तो बहेगा

ठाकुर- और कितनाआआआ

मुझे आज बता ही दे कितना

एक जिंदगी के बदले तू कितनी जिंदगी तबाह करेगा

जय- वो एक मेरी दुनिया थी

और उसके लिए मैं पूरी दुनिया तबाह कर दूँगा

ठाकुर- तो इंतज़ार किस चीज़ कर कर रहा है तू

जा और ख़तम कर दे आज सबको

क्यूकी मुझसे और बर्दाश्त नही होगा

जय- इतनी आसान मौत देनी होती तो कब का दे देता

अभी उनको ख़ौफ़ मे जीने दो

अभी उनको उनके किए पर पछताने दो

जिस दिन उनके अंदर से डर ख़तम होगा उस दिन एक और मरेगा जिससे वो डर कायम रहे

फिर एक और मरेगा

फिर एक और

ऐसे कर करके

एक एक को चुन चुन कर ऐसी मौत दूँगा की उनकी रो भी तडपेगी

अभी बहुत वक़्त है

बहुत वक़्त है

ठाकुर- और तुझे क्या मिल जाएगा उससे

जय- सुकून

मेरी रूह को सुकून

उसके बाद मैं आराम से मर जाउन्गा

उसके बाद ना मेरे पास जीने की वजह बचेगी और ना मैं जीना चाहूँगा

फिर मैं चैन से मर जाउन्गा

कही तो जन्नत मे वो मेरा इंतज़ार कर रही होगी

वहाँ जाके उसकी गोद मे सर रख कर सोजाउन्गा

ठाकुर- अगर आँखें खोल कर देखेगा तो शायद जीने की वजह मिल जाए

जय- चाहिए ही नही अब

इसलिए ही आँखें बंद कर रखी है

अगर खोल ली तो शायद जीना मजबूरी बन जाए जो मुझे पता है नही होगा इसलिए आँखें बंद करने मे ही भलाई है

मैने बहुत दुख दिया है आप सब को उसके लिए मुझे माफ़ कर दीजिए

मेरे कुछ मकसद है मैं उनसे पीछे नही हट सकता

मुझे सुकून की मौत चाहिए जो सिर्फ़ एक ही चीज़ से मिल सकती है और वो है खून

मैं बस जब तक जिंदा हू जब तक मेरा मकसद पूरा नही हो जाता उसके बाद मैं सुकून से यहाँ से चला जाउन्गा

एक ऐसी गहरी नींद मे जिससे कभी ना उठु

और वो होगी मेरी जीत

हो सके तो मुझे माफ़ करदेना पर मैं वो नही दे सकता जो आप चाहते हो (निशा की तरफ देखता है)

फिर वहाँ से चला जाता है...
 
ऑफीस मे आए लगभग दो घंटे होगये थे और प्रिया ने एक बार भी जय से बात नही की

ना ही कार मे और ना अभी वो बस जितना हो सके उतना जय को इग्नोर कर रही थी

जय समझ तो गया ही था पर उसने सोचा जो हो रहा है ठीक ही है फ्यूचर के लिए

ऑफीस के बाद वो दोनो सीधा घर आ गये

ना कही लंच करने गये और ना कही घूमने

प्रिया भी उससे एक बॉडीगार्ड की तरह ही बिहेव कर रही थी

जय को अच्छा तो नही लगा पर ठीक है अब वो कर भी क्या सकता था

पूरा दिन ऐसे ही चलता रहा सब जय से सिर्फ़ काम के टाइम ही बात करते अडरवाइज़ उसे पूरा इग्नोर

रात हुई और जय पूरी तरह नशे मे हवेली मे घुसा

उसे लगा की इस टाइम सब सो गये होंगे तो चुप चाप अपने रूम मे चला जाएगा पर यहाँ सब पता नही इतनी रात मे हॉल मे बाते क्या बाते कर रहे थे

जय तो इतने नशे मे था की उससे ठीक से चला भी नही जा रहा था

उसने जब सबको देखा तो मन में सोच लिया की आज फिरसे क्लास ली जाएगी यही सोच कर वो आगे बढ़ा और चलता गया और चलता गया पर साला आज किसी ने कुछ नही कहा

तो बेचारे को सांस आई और सीधा अपने रूम मे जाके गिर गया

ज़्यादा नशे मे होने के कारण गिरते ही सो भी गया

जब उठा तो देखा की शूस निकले हुए है चादर ओढ़ रखा है तो समझ गया की कोई ना कोई तो आया था रात मे

पर उसने ज़्यादा सोचा नही एक जॉइंट मारा और बाहर आ गया

ठाकुर हॉल मे ही बैठा हुआ था

ठाकुर- मैं काम से शहर जा रहा हू

तू घर मे ही रहना और होश मे रहना

किसी को बाहर नही लेके जाना

समझ गया

जय- अकेले जाना रिस्क है मैं चलता हू साथ

ठाकुर- मुझे कुछ हुआ तो जीतने लोग इन्वॉल्व हो उनकी जिंदगी बख्श देना

मेरी आख़िरी इक्षा समझ कर

जय- आपकी जगह मैं चला जाता हू

यहाँ सब सेफ है अपना एरिया भी है

वहाँ मैं देख लूँगा

ठाकुर- मेरी लाइफ से ज़्यादा मेरी बेटियों की लाइफ इंपॉर्टेंट है

तू उनको संभाल बस

जय- फिर उनको भी साथ ले चलते है शहर भी घूम लेंगी

ठाकुर- तुझे जितना बोला है उतना कर समझा

यहाँ रह और उनका ध्यान रख

मैं अभी बुढहा नही हुआ हू

10-12 को तो अभी भी अकेले लपेट सकता हू

जय कुछ नही बोला बस हा मे गर्दन घुमा दी और बाहर बने पार्क मे जाके बैठ गया

घर मे वो दो जगह ही मिलता था या तो पार्क के बाहर वाली साइड मे या टेरेस पर

दोनो जगह कोई नही आता जाता था इसलिए

आराम से धुप मे वो लंबा लेट गया और अपने ही सोच मे डूब गया और जगा जब उसे अहसास हुआ की कोई उसके साइड मे बैठा है

जय ने धीरे से अपनी आँखें खोली और साइड मे देखा तो शिवानी बैठी थी

उसे देख कर फिर से अपनी आखें बंद करली

शिवानी से उसे कोई प्राब्लम नही थी क्यूकी वो कम ही बात करती थी और ज़्यादा परेशान भी नही करती

शिवानी-आईनो हू यू आर

शिवानी ने जैसे बॉम्ब फोड़ दिया हो जय पर

उसकी आँखें जो काफ़ी देर से बंद थी वो खुल गई

शिवानी- डॉन’ट वरी मैने अभी किसी को नही बताया है

इट'स युवर सीक्रेट जब तुम चाहोगे और तुम बताओगे तभी सबको पता चलेगा

आई विल नोट टेल एनिवन

जय- थॅंक यू

बस इतना ही बोल पाया

शिवानी- निशा का तो दिल ही टूट जाएगा बेचारी का

जय- आपको कैसे पता चला?

शिवानी- याद्दाश्त अच्छी है मेरी

और ये वाय्लेट आँखें हर किसी की नही होती ना

बट आई ऐम सॉरी

जय- फॉर व्हाट?

शिवानी- तुम अकेले पड़ गये थे

हमें सच मे किसी ने बताया नही अडरवाइज़ सिचुयेशन कुछ और होती

हम शॅडोस मे जी रहे थे

आई डॉन’ट नो मैं क्या बोलू किस्पर गुस्सा करू बट इट'स नोट युवर फॉल्ट

ये हम सबकी ग़लती है

हमारे पास दीदी थी हमें संभालने के लिए तुम्हारे पास कौन था

एक अनजान देश मे तुम अकेले थे और कोई नही

ऐसी सिचुयेशन मे जो भी हुआ उसके लिए हम तुम्हे ब्लेम नही कर सकते

जय- हू टोल्ड यू ऑल दिस?

शिवानी- मुझे याद आगया बस

जय- डॉन’ट लाइ प्लीज़

मैंने जिंदगी मे झूठ और धोके ही देखे है

अब आप तो ऐसा मत करो मेरे साथ प्लीज़ टेल मी

शिवानी- मैंने तुम्हारी और डॅड की कॉन्वर्सेशन सुनी थी

जब तुम और डॅड रात को हॉल में बैठ कर बाते कर रहे थे

आंड डॅड वाज़ टू ड्रंक

उस दिन………………………

जय- उन्होने ये नही बोला था की मैं कौन हू

शिवानी- पर उन्होने ये तो बोला था की तुम्हे लंडन ही रहना चाहिए था वापस नही आना चाहिए था

जय- इट डजंट प्रूव एनितिंग बिकॉज़ आप लोगो को इसके बारे मे कुछ नही पता था

और मेरी आँखें कब देखी आपने

मुझे तो याद नही कभी बिना ग्लासस के आपके सामने आया

शिवानी- निशा ने बताया

जय- नही उसने नही बताया

शिवानी- तुम्हे कैसे पता

जय- इट'स ट्रू ना की निशा ने नही बताया

शिवानी- तुम इतना शक क्यू करते हो

क्या मैं कोई स्ट्रेंजर हू

कल देखी थी तुम्हारी आँखें

तुम जब सो गये थे तब तुम्हारे रूम मे आई थी तुम्हारे शूस निकाले और तुम्हारे चादर उढाई फिर पता नही क्यू तुम्हारे आँखें देखने का मन कर गया तो ग्लासस उतार दिए

पर तुम सो रहे थे तो देखी नही

मैं जब जाने को हुई तो तुम नशे मे कुछ बड़बड़ा रहे थे

मुझे ही किसी को समझ कर मेरा हाथ पकड़ कर कुछ कुछ बोल रहे थे

फिर एक सेकेंड के लिए आँखें खोल कर तुमने मुझे बोला आई ऐम सॉरी आई ऐम सॉरी और ये बोलते बोलते दोबारा सो गये

और शिवानी वहाँ से उठ कर चली गई शायद जय के बार बार शक वाले क्वेस्चन्स से उसे गुस्सा आ गया था

जय फिरसे आँखें बंद करके लेट गया

हॅव यू गाइस एवर नोटीस्ड दट द पर्सन हू डजंट शो हिज़/हर फीलिंग्स,फील्स दा मोस्ट

आक्च्युयली आई डु

यही जय के साथ हो रहा था

वो अपनी फीलिंग्स किसी को दिखा नही रहा था या दिखा नही सकता था पर उसे फील बहुत कुछ हो रहा था

निशा का नाराज़ होना उसे अच्छा नही लग रहा था और प्रिया का उसे इग्नोर करना शायद सबसे ज़्यादा दुख दे रहा था

उसके पास इन सबका एक ही सल्यूशन्स था दारू और गांजा

मेरे पास भी यही सल्यूशन्स होते है हमेशा

दारू तुम्हे वाय्लेंट करती है और गांजा शांत तो सिचुयेशन के हिसाब से कर लेता हू

पर फॅक्ट तो यही है की दोनो ही अपनी अपनी तरह हमें मार रही है वैसे भी साला जिंदगी ऐसी चल रही है की जीना भी किसको है

बट वो एक शख्स बस उस एक शख्स के लिए इस जिंदगी को जीने का भी मन कर जाता है और साला दुख जब होता है जब तुम उसे दूसरो की बाहों मे देखते हो और उससे भी ज़्यादा दुख जब होता है जब वो दूसरे की बाहों मे खुश हो

मैं पता नही आज क्या लिख रहा हू पर आज मूड कुछ ज़्यादा ही खराब है

रीज़न तो सबका एक ही होता है ना

मेरा भी वही है पर प्राब्लम एक ही है की मैं कुछ कर नही सकता

वैसे मोस्ट्ली हम जैसे कोई कुछ कर भी नही पाते

चलो छोड़ो स्टोरी पर आते है

लगता है आज एमोशन्स अच्छे निकलेंगे
 
प्रिया- तेरे मूड को क्या हो जाता है

कभी अच्छा कभी खराब कभी कुछ पता ही नही चलता

कही तुझे एपिलेप्सी तो नही हो गई है

शिवानी- हाहाहा वेरी फन्नी

ऐसा कुछ नही है दी बस ऐसे ही

प्रिया- गुड़िया समझा इसे

निशा- दीदी कुछ नही रखा प्यार व्यार मे अपने ड्रीम्स पर फोकस करो वोही है जो हमेशा साथ देंगे

शिवानी- अरे वह हमारी गुड़िया तो बड़ी हो गई

तुम्हे पता है बचपन मे एक लड़का होता था बहुत प्यारी आँखें थी उसकी

बहुत रेर भी मैने कभी अपनी लाइफ मे उसकी जैसे आँखें नही देखी

मैं बहुत प्यार करती थी उससे

बचपन था ना तो प्यार का मतलब पता था और ना ये की प्यार बहुत बड़ी कुर्बानी माँगता है

पर उस टाइम का प्यार बहुत सच्चा टाइप का प्यार होता था

ना हम किसी का कलर देखते थे और ना रेस

बस हो जाता था

तो मुझे भी उस लड़के से होगया था

बहुत प्यार होगया था

फिर वो एक दम से गायब होगया

किसी को नही पता चला कहाँ गया

जिंदा भी है या मर गया मैं बहुत रोई

काफ़ी दिनों तक खाना भी नही खाया फिर मा ने समझाया की बेटा एक दिन वो वापस ज़रूर आएगा देखना तुम

दीदी आप बताओ की अगर वो वापस आगया तो मैं उसे पहचानूँगी कैसे और क्या वो फीलिंग्स अभी तक कही कोने मे जिंदा भी होगी मेरे अंदर या जैसे वो मुझे छोड़ के गया वैसे ही उसकी फीलिंग्स भी मुझे छोड़ कर चली जाएगी

प्रिया- बेटा(प्रिया मोस्ट्ली दोनो बहनों को प्यार से बेटा ही बुलाती थी)

प्यार अगर सच्चे दिल से किया जाए तो उससे किसी भी हालात मे कितने भी टाइम बीत जाने मे हम आँखें बंद करके भी महसूस कर लेते है

और रही बात फीलिंग्स की तो आज कल के प्यार मे तो फीलिंग्स है ही नही

यहाँ तो बस हवस जिंदा है

पर अगर सच्चा प्यार है तो वो प्यार और वो फीलिंग्स कभी नही मरती कभी भी नही

शिवानी- राइट नाउ आई ऐम लॉस्ट

मुझे कुछ समझ नही आ रहा

प्रिया- कम हियर

प्रिया शिवानी को बिल्कुल अपने पास बिठा लेती है

प्रिया - टेल मी व्हाट हॅपंड

और डॉन’ट लाई हाँ

मुझे झूठ सुनना पसंद नही है टेल मी एवेरितिंग

प्रिया- दीदी वो जय....

गेट ज़ोर ज़ोर से नॉक होने लगता है

शायद कुछ आफ़त आ गई

देखते है पर नेक्स्ट अपडेट मे....
 
**ठाकुर- अब तुझे ही उनका ख़याल रखना है

अब टाइम आगया है मोक्ष प्राप्ति का

और हा सुन मेरी मौत की वजह बना कर अब और खून मत बहाना

अब तेरे पास जीने की वजह है तो जीना

बहुत खुश रहना और उन्हे भी खुश रखना

मुझे पता है तू उनसे बहुत प्यार करता है और मुझे ये भी पता है की वो सब भी तुझसे उतना ही प्यार करती है

ये प्यार ही तुझे आगे का रास्ता दिखाएगा,सही रास्ता

बस इस फॉलो करते जाना

बस इस फॉलो करते जाना

और वो सके तो मुझे माफ़ कर देना बेटे**

तो हुआ ये की ठाकुर को अकेला पा कर उसके दुश्मनों ने अपना काम कर दिया

एक बहुत आसान मौत

ठाकुर का शरीर शहर वापस लाया गया

शहर में सन्नाटा छा गया

क्यूकी शहर मे एक ही तो इंसान था जिसकी वजह से थोड़ी बहुत शांति रहती थी अब वो भी चला गया

लोगो को किसी बात की चिंता नही थी की ठाकुर चला गया है चिंता इस बात की थी की अब जय के कहर से कौन बचाएगा

पहले ठाकुर की वजह से जय थोड़ा कंट्रोल मे रहता था पर अब तो वो क्या करेगा किसी को कुछ समझ मे नही आ रहा था और यही हाल उन सबका भी था जिन्होने ठाकुर को मारा

मौका देख कर ठाकुर को तो मार दिया पर ये नही सोचा की इसका अंजाम क्या होगा

अब उनकी फ़टी पड़ी थी

अब तो वो यही सोच रहे थे की अंडरग्राउंड हो जाए क्यूकी जय को पता चलने मे ज़्यादा टाइम नही लगेगा और जब लगेगा तो उन्हे ये बहुत अच्छे से पता था की जय मौत नही देगा पर उनकी जिंदगी जहन्नुम बना देगा

दूसरी तरफ ठाकुर की मौत के बाद से ही उनकी बेटियों की हालात बहुत खराब थी

एक तो वो इतने सालो बाद अपने पिताजी से मिली थी

अभी तो उन्होने अच्छे से बात भी नही की थी और ये सब होगया

जय पूरी कोशिश कर रहा था सबको संभालने मे

पर जिस चीज़ की उसको आदत नही थी वो कैसे करता

ना प्यार करना आता था और ना जताना

प्रिया ने अपने आपको मजबूत करके अपनी बहनों का बहुत ध्यान रख रही थी

क्यूकी अब वोही तो बची थी और सबसे समझदार और बड़ी भी

ऐसे ही 12 दिन हो गए और ठाकुर की अस्थियो को गंगा मे बहा दिया गया

धीरे धीरे घर का माहौल थोड़ा हल्का होने लगा

सब वापस मे थोड़ी बहुत बाते भी करने लगे पर कोई भी जय से कुछ नही बोलता था

उनको लगता था की अगर जय उनके साथ होता तो शायद आज उनके डॅड उनके बीच मे होते

ना तो कोई जय की बात सुनते थे और ना मानते थे

और जय कर भी क्या सकता था

ठाकुर ने शब्दों मे बांध दिया की उनका ध्यान रखना और जिसने मारा उन्हे छोड़ देना

जय बेचारा दुविधा मे और ज़्यादा नशा करने लग गया

वो अब बहुत कम टाइम पीछे था पुराना वाला मॉन्स्टर बनने मे

अगर ऐसा ही कुछ और दिन चला तो शहर को फिरसे पुराना वाला जय देखने मे बिल्कुल भी वक़्त नही लगेगा

ऐसे ही एक दिन

प्रिया- तुम डॅड के गुलाम थे ना

अब वो नही रहे अब अगर तुम यहाँ से जाना चाहते हो तो जा सकते हो

जय- आप तो हो

आपकी बहने तो है

मैने ठाकुर साहब को बचन दिया था

प्रिया- तो मतलब अब मैं तुम्हारी मालिक हू

जय बस हा मे गर्दन हिला देता है

प्रिया- तो मुझे वो सब चाहिए

सारे के सारे और जिंदा

जय- और क्या करोगे आप

प्रिया- क्या तुम डॅड से भी ऐसे ही क्वेस्चन पूछते थे

जय- मैने उनसे वादा किया था की मैने उनके मौत को वजह बना कर खून नही बहाऊंगा

प्रिया- पर मैने नही किया ना

मैं बहा सकती हू

तुम्हे उन सबको मेरे पास लेके आना है बस

तुम्हारा इतना ही काम है बाकी कुछ नही करना

और एक बात याद रखना वो सब जिंदा होने चाहिए

जय- मैं ये नही कर सकता

आपके हाथ मे खून नही लगने दे सकता

मैं अपना वादा तोड़ कर उन्हे मार दूँगा

जैसे आप बोलॉगे उससे भी दर्दनाक मौत दूँगा उनको

पर आप ये नही कर सकती

मैं ये होने नही दूँगा

प्रिया- तुम एक गुलाम हो और तुम्हे ये करना पड़ेगा

जय- ना मैं गुलाम हू और ना मैं करूँगा

प्रिया- तुम नही तो कोई और करेगा

पैसे के लिए दुनिया मे कोई कुछ भी कर सकता है

जय- इस शहर मे मेरे बिना पूछे कोई कुछ नही करेगा

अगर विस्वास नही है तो आजमा के देख लेना

प्रिया जय की कॉलर पकड़ कर

तो फिर तुम्हारे पूछे बिना किसी ने मेरे डॅड की कैसे मार दिया

या फिर तुमने ही मरवा दिया हो उन्हें

बताओ तुम्हारे बिना पूछे कैसे होगया ये सब

बताओ मुझे

जय- गुस्से मे अक्सर हम ग़लत बोल जाते है जो हमें नही बोलना चाहिए

जिसने भी ये सब किया है वो यहाँ के नही है

वो यहाँ के हो ही नही सकते

शायद कोई पुरानी दुश्मनी है

प्रिया- क्या तुम उनके सारे दुश्मन को नही जानते

जय- मैं जीतनो को जानता था वो नही हो सकते

प्रिया- और क्यू नही हो सकते

जय- क्यूकी मैने सबको मार दिया था

और मरे हुए लोग सिर्फ़ फ़िल्मो मे वापस आते है रियल लाइफ मे नही

प्रिया- वो कोई भी हो

मुझे उनकी डेड बॉडी देखनी है

जय- बदले की आग बहुत गंदी चीज़ होती है

बस ये याद रखना की आप अपनी आत्मा को ख़तम ना करदो

प्रिया- इस बारे मे तुम तो अड्वाइज़ मत ही दो

तुमने भी तो बदले मे कितना खून बहाया है

जय- इसलिए समझा रहा हू

मैं कभी नॉर्मल नही जी पाउन्गा

मैं कभी शांति से नही सो पाउन्गा

हर रोज लोगो की च्चीखे मुझे सोने नही देती

हर तरफ खून ही खून दिखता है

मुझे नफ़रत की आग ने जला दिया

आप मुझसे कही ज़्यादा समझदार हो

जो भी करो सोच समझ कर करना

प्रिया- मैने सोच लिया है

वो सब मरेंगे तो बस मरेंगे

अगर तुम नही मारोगे तो मैं मार दूँगी

जय- ओंन वन कंडीशन

प्रिया- मंजूर

जय- आप अपने हाथ गंदे नही करोगे

प्रिया- ठीक है

जय- मैं पता लगाता हू
 
जय- मैं पता लगाता हू

प्रिया- वो भी तो हो सकता है(लीडर)

जय- नही वो नही है

उसकी दुश्मनी मुझसे है वो मेरी फॅमिली को कुछ नही करेगा

प्रिया- तुम इतना विश्वास के साथ कैसे कह सकते हो

जय- क्यूकी उसकी भी फॅमिली है

प्रिया- वेट आ सेकेंड

मेरी फॅमिली से क्या मतलब है तुम्हारा

जय थोड़ा मुस्कुरा कर

क्या आपका कोई भाई नही था दीदी

याद कर्लो क्या पता कही याद आजाए....
 
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