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घुड़दौड़ ( कायाकल्प ) complete

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“अरे पगली! वो मेरे पति हैं, और तुम्हारे भी पति! ये नौकर नौकरानी वाली बातें मत करना कभी! मेरी बात ध्यान से सुन.. मैं बहुत भाग्यशाली हूँ, कि तू मेरी बहन है – मेरी छुटकी! मत भूलना की मैंने तुझे अपनी छाती पिलाई है.. मैं तुझसे दो साल ही बड़ी सही, लेकिन तुझे माँ जैसा प्रेम भी करती हूँ... मेरी प्यारी बहन, हम दोनों बहनें अब से एक ही पति की पत्नी बनकर रहेंगी! ठीक है?”

“बिलकुल दीदी.. बिलकुल! थैंक यू! थैंक यू! थैंक यू!!”

माहौल एकदम से हल्का हो गया। दोनों हो बहने मुस्कुराने लगीं।

रश्मि और सुमन ने शायद ही कभी सेक्स के विषय में बात करी हो, लेकिन आज परिस्थितियाँ एकदम भिन्न थीं। बात के बारे में पहल रश्मि ने ही करी –

“प्यारी बहना, एक बात बता...”

“क्या दीदी?”

“तुझको.. enough तो मिल जाता है न..?”

“क्या दीदी?”

“अरे.. इनका ‘प्यार’.. और क्या?”

“क्या दीदी! ही ही ही..”

“अरे बोल न?”

“Enough तो कभी नहीं मिलता...”

“क्या? क्या ये तुझे satisfy नहीं...”

“अरे नहीं दीदी! ऐसा कुछ भी नहीं है... इनके तो छूने भर से satisfaction मिल जाता है.. लेकिन ये कुछ इस तरह से करते हैं कि मन भरता ही नहीं...”

रश्मि समझ गई कि सुमन क्या कह रही है.. साफ़ सी बात थी कि सुमन जम कर सेक्स का आनंद उठा रही थी, और रश्मि खुद मानों रेगिस्तान में भटक रही थी। एक पल को उसका मन फिर से इर्ष्या से भर गया। एक भिन्न प्रकार की इर्ष्या – सौतिया डाह!

सुमन ने रश्मि के चेहरे को देखा – उसको समझ में आ गया कि रश्मि के मन में क्या चल रहा है।

“दीदी, अब तो आप घर वापस आ गई हो... अब क्या चिंता!”

“अरे, तेरा ‘मन’ भरते भरते इनके पास मेरा भरने की ताक़त बचेगी भला?”

“आपका क्या दीदी, ही ही!” सुमन भी तरंग में आ गई थी।

“हा हा! मेरी मियान!”

“ही ही दीदी! कैसा कैसा बोल रही हो!”

“अरे इसमें कैसा कैसा वाला क्या है... मियान ही तो कहा है... चूत थोड़े ही कहा... अब तेरा ही देख न.. कुछ सालों पहले तक तेरी पोकी ठीक से दिखती तक नहीं थी.. और अब तो एकदम रसीली हो गई है! फूल कर बिलकुल कुप्पा!”

“दीदी!”

“अरे! मुझसे क्या शर्माना? मेरी भी ऐसी ही हालत हो गई थी मेरी बहना! इनके बेदर्द लिंग ने इतनी कुटाई करी मेरी सहेली की कि साल भर तक ठीक से ले भी नहीं पाती थी.. लेकिन बाद में आदत हो गई, और जगह भी बन गई!”

सुमन शर्माते हुए रश्मि की बात सुन रही थी और साथ ही साथ कुछ सोचती भी जा रही थी।

“अरी! मन ही मन क्या सोच सोच कर मुस्कुराए जा रही है?”

“कुछ नहीं दीदी... मैं सोच रही थी कि हम दोनों बहनों का कितना कुछ साझा है – माँ बाप भी एक और पति भी..”

“हा हा! वो तो है!”

“दीदी, हम लोग कैसे करेंगे?”

“कैसे करेंगे का क्या मतलब?”

“मतलब, उन पर पहला हक़ तो आपका ही है..”

“किसी का पहला दूसरा हक़ नहीं है... हम तीनो का ही हम तीनो पर एक सा हक़ है। इन्होने मुझे यही समझाया है कि शादी में पति और पत्नी दोनों बराबरी के होते हैं.. और कोई छोटा बड़ा नहीं।“

“हम्म.. मतलब की हम तीनो एक साथ?”

“और क्या? सोच.. हम तीनो एक साथ एक बिस्तर पर!”

“नंगू पंगु?” सुमन ने बचे हुए आंसू पोंछते हुआ कहा।

“हाँ..” रश्मि मुस्कुराई, “और उनका छुन्नू.. हम दोनों के अन्दर बारी बारी से! सोच!”

“ही ही.. दीदी, वो उसको लंड कहते हैं..”

“तुझे भी सिखा दिया?”

“हाँ..”

“हम दोनों मिल कर रूद्र की सेवा करेंगी, और हम दोनों मिल कर उनको इतनी ख़ुशी देंगी कि उनसे सम्हाली न जा पाए!”

“हाँ दीदी! उन्होंने बहुत सारे दुःख झेले हैं।“

“अब और नहीं! अब बिलकुल भी और नहीं!”

“दीदी... क्यों न आज हम सब मिलकर रात बिताएँ?”

“मन तो मेरा भी यही है.. लेकिन इनसे भी तो पूछना पड़ेगा... क्या पता, क्या क्या सोच लिया होगा इन्होने!”

“अरे क्या सोचेंगे? किस आदमी को अपने बिस्तर पर दो दो सेक्सी लड़कियाँ नहीं चाहिए?”

“हा हा हा हा... हाँ.. इन्होने हमारे हनीमून पर एक विदेशी लड़की के साथ कर लिया था...”

“क्या कह रही हो दीदी?”

“हाँ! और वो भी मेरे सामने!”

“अरे! और आपने कुछ कहा नहीं? रोका नहीं?”

“अरे कैसे रोकती? इतनी सेक्सी सीन थी कि क्या बताऊँ! वो सीन देख कर मेरे बदन में ऐसी आग लग गई थी कि कुछ कहते, करते न बना!”

“मतलब इन्होने चार चार लड़कियों को...”

“चार? चार मतलब?”

“जब जनाब की हड्डियाँ टूटी हुई थीं, तब इन्होने अपनी नर्स की योनि को भी तर किया...”

“क्या? हा हा!”

“हाँ दीदी... ये तो उससे शादी भी करना चाहते थे.. अगर मैंने ही इनको प्रोपोज़ न कर दिया होता तो ये तो गए थे हाथ से...!”

“बाप रे... कौन थी वो लड़की?”

दोनों बहनें फिर फ़रहत की बातें, और इधर उधर की गप-शप करने लगीं। पुरानी बातों को याद करने लगीं। जो भी गिले शिकवे, डर और संदेह बचे हुए थे, सब निकल गए!

मुझे फोन पर sms मिला – ‘Honey, fuck Di tonite. Fuck her brains out, and then we will talk. Luv’

समय देखा, रात के साढ़े दस बजे थे। मुझे मालूम नहीं था कि दोनों बहनें आपस में क्या कर रही थीं – झगड़ा या प्यार! कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। खाने पीने का भी कुछ ठिकाना नहीं मालूम हो रहा था, इसलिए मैंने बाहर ही खाना खा लिया – खाना क्या खाया, बस पेट में कुछ डाल लिया। भूख तो वैसे भी नहीं लग रही थी।

सुमन का sms पढ़ कर कुछ दिलासा तो हुई। मतलब बात खराब तो बिलकुल भी नहीं हुई है।

‘fuck Di...? बिल्कुल! रश्मि जैसी लड़की तो मुर्दे में भी कामेच्छा जगा सकती है.. ये तो सिर्फ मैं ही हूँ... उसका पति!’

मैं जल्दी जल्दी डग भरते हुए घर पहुंचा – तब तक तो मेरा शिश्न तीन चौथाई खड़ा भी हो गया था। दरवाज़ा खोला तो देखा कि सुमन एक मद्धिम बल्ब से रोशन ड्राइंग रूम में मेरा ही इंतज़ार कर रही थी। उसने मुझे देखा और फिर मेरे लोअर के सामने बनते हुए तम्बू को। उसने एक हाथ की तर्जनी को अपने होंठो पर ऐसे रखा कि मैं कुछ न कहूँ, और दूसरे हाथ की तर्जनी से इशारा कर के अपनी तरफ बुलाया। उसके पास मैं जैसे ही पहुँचा, उसने एक ही बार में मेरा लोअर और चड्ढी खींच कर नीचे उतार दिया और ‘गप’ से मेरे उत्तेजित लिंग को अपने मुँह में भर लिया। कुछ ही देर के चूषण के बाद मेरा लिंग पूरी तरह से तैयार हो गया। यह देख कर उसने मुझे छोड़ दिया और फुसफुसाती हुई आवाज़ में कहा,

“कस के चोदना उसे... कम से कम तीन चार बार! समझ गए मेरे शेर? अब जाओ..”

यदि कोई कसर बची रह गई हो तो सुमन की यह बात सुन कर पूरी हो गई। मास्टर बेडरूम का दरवाज़ा बंद था, और उसके अन्दर में से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी, और न ही अन्दर बत्ती जलती हुई लग रही थी। अन्दर जाते जाते मैंने अपने सब कपड़े उतार दिए। अन्दर गया तो देखा कि हाँलाकि बत्ती बंद थी, लेकिन बाहर से हलकी हलकी रोशनी छन कर आ रही थी, और उसी रौशनी से रश्मि का नग्न शरीर प्रतिदीप्त हो रहा था।

लम्बे लम्बे डग भरता हुआ मैं बिस्तर तक पहुंचा और चुपचाप, बिना कोई ख़ास हलचल किए रश्मि के बगल पहुंचा। वैसे देखा जाय तो जो मैंने आगे उसके साथ करने वाला था, उससे तो रश्मि की नींद में कहीं अधिक ख़लल पड़ने वाला था। वैसे अगर मुझे पहले से मालूम होता तो यह सब इन दोनों बहनों का स्वांग था। खैर, बहुत ही मजेदार स्वांग था। मैंने उंगली को रश्मि की चूत पर हलके से फिराया – वो तुरंत ही गीली हो गई।

‘ह्म्म्म कैसे सपने देख रही है यह..!’ मैंने सोचा।

अब देरी किस बात की थी... मैंने रश्मि की जांघें फैलाई, और फिर अपने लंड को रश्मि के प्रवेश-द्वार पर टिकाया। लिंग में बलपूर्वक रक्त का संचार हो रहा था। लिंग इतना ठोस था कि एक ही बार में वो सरसराते हुए पूरे का पूरा रश्मि के भीतर तक समां गया। मुझे ऐसा लगा कि सोते हुए भी रश्मि की योनि पूरी अधीरता से मेरे लिंग का स्वागत कर रही थी। मैंने लिंग को बाहर खींचा, और वापस उसके अन्दर ठेल दिया – यह इतने बलपूर्वक किया था कि रश्मि की नींद खुल गई। और उसको तुरंत ही अपनी योनि में होने वाले अतिक्रमण का पता भी चल गया।

रश्मि ने तुरंत ही अपना कूल्हा चला कर मेरी ताल में ताल मिलाई। बिना किसी रोक रूकावट के मेरा लिंग सरकते हुए उसकी योनि की पूरी गहराई तक घुस गया। मीठे मीठे दर्द से रश्मि कसमसा गई और उसने मुझे जोर से पकड़ लिया। उत्तेजना के अतिरेक से वह कभी मेरी पीठ पर हाथ फिराती, तो कभी नाखून भी गड़ा देती थी। एक अलग तरह का जंगलीपन था आज उसमें। मुझ में भी था! इसके कारण मुझे चुभन का दर्द नहीं, बल्कि मजा आ रहा था। मैं उन्माद में आ कर धक्के लगाने लगा। मैंने रश्मि के चूतड़ों को पकड़ लिया और तेजी से उसकी योनि की पूरी गहराई तक जा जा कर उसकी चुदाई करने लगा।

बीच-बीच में हम एक दूसरे के होंठों को भी चूमते और चूसते। मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी। रश्मि भी मेरी ताल पर अपनी कमर आगे पीछे कर रही थी, जिससे हम लोग जोरदार चुदाई कर रहे थे। कोई पांच मिनट के बाद मैंने पोजीशन बदलने की सोची। मैं रश्मि को पेट के बल लिटा कर उसको घोड़ी के पोजीशन में ले आया और पीछे से अपने लिंग को उसकी योनि में घुसा दिया। मैंने उसकी कमर को मजबूती से पकड़ा हुआ था, और धक्के लगाने के साथ-साथ उसकी कमर को भी अपने तरफ खींचने लगा। उसकी योनि की भरपूर चुदाई हो रही थी। सुमन अगर यह दृश्य देखती, तो उसको मुझ पर गर्व होता।

कुछ देर में मुझे लगा कि स्खलन हो जायेगा, इसलिए मैं थोड़ा रुक गया। लेकिन लिंग को उसकी योनि से निकाला नहीं। रश्मि बिस्तर पर घोड़ी बनी अपनी साँसें संयत करने लगी। मैं पीछे से ही रश्मि के ऊपर झुक गया और उसके स्तनों को सहलाने लगा, साथ ही उसकी पीठ पर छोटे छोटे चुम्बन जड़ने लगा। इसी बीच रश्मि को चरम सुख मिल गया। मैंने अपने लिंग से उसके अन्दर से निकाला नहीं था। ज्यादा देर रुक भी नहीं सकता था, क्योंकि मुझे भी उसमें वीर्य छोड़ने का मन हो रहा था।

मैंने रश्मि को बिस्तर के साइड में बैठा दिया, कुछ ऐसे जैसे रश्मि का एक पैर नीचे था और दूसरा बिस्तर पर ही रह गया। मैंने उसकी कमर को अपने बांहों में जकड़ा और अपना लिंग उसकी योनि पर टिका कर एक ही बार में अन्दर घुसा दिया।

उसी समय सुमन ने कमरे में प्रवेश किया। पूरी तरह से नंगी!

“दीदी का हो गया जानू.. अब मेरी बारी है!”

मैं एक पल को सुमन की बात समझ नहीं पाया – उसके यूँ ही अचानक से प्रकट हो जाने से एक तो मैं चौंक गया था, और ऊपर से मुझे अचरज हुआ की वो यह ऐसे कैसे बोल रही है। मुझे ऐसे अचंभित देख कर दोनों बहने एक साथ ही हंसने लगीं। तब जा कर मुझे समझ आया की यह इन्ही दोनों की मिलीभगत है और दोनों मुझ से मजे ले रही हैं! मैंने इशारे से सुमन को बिस्तर पर बुलाया, और रश्मि के जैसे ही बैठने को कहा। फिर रश्मि को छोड़ कर सुमन की योनि में प्रविष्ट हो गया। बस एक ही बात मेरे दिमाग में आई,

‘दुनिया में कहीं स्वर्ग है, तो बस, यहीं है!’
 
उपसंहार –

पिछला साल मेरे जीवन का सबसे रंगीन, सबसे खुशनुमा, और प्रेम से सराबोर समय रहा। मेरी दोनों ही पत्नियों ने अपनी अपनी पढ़ाई ख़तम करी। स्नातक की डिग्री के साथ ही उन दोनों को एक और डिग्री मिली – माँ बनने की! एक समय था जब मैं पूरी तरह अकेला हो गया था और आज मेरे घर में कुल जमा पांच लोग हैं - दो बीवियाँ और दो बच्चे!! पास पड़ोस के लोग शुरू शुरू में हमको अजीब निगाहों से देखते थे, लेकिन फिर सभी को हमारी परिस्थितियों का पता चला तो उनका बर्ताव भी सामान्य हो गया। रश्मि, सुमन और मैं - हम तीनो मिल कर सम्भोग का भरपूर आनंद लेते हैं। जीवन में अगर प्रेम है, तो सब कुछ है।

समाप्त!
 

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