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16
शफ्फाक शाही ने पूछा-“कौन?”
"जावेद कश्मीरी ।" दूसरी तरफ से कहा गया ।
दो अक्षरों का वह छोटा सा नाम शफ्फाक शाही कै दिलो दिमाग पर जैसे रायफल की गोली बनकर लगा था । उसे तभी से जावेद कै फोन का इंतजार था जब से उसका जिगर का टुकडा अगवा हुआ था क्योंकि उससे बात करके कम से कम उसे यह तो पता लग सकता था कि वारिस महफूज भी हे या नहीं।
...... इसके बावजूद अब, फोन आया तो जावेद कश्मीरी का नाम सुनते ही सारे जिस्म में झुरझुरी सी दौढ़ गई ।
बडी मुशिकल से बोला-"तुम्हारी दुश्मनी मुझसे है जावेद, हाथ ही डालना था तो मुझ पर डालते । मेरे मासूम वेटे ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा हैं? उसे छोढ़ दो ।”
जवाब सुलगते लहजे में आया…"मेरे मां…बाप ओर बहन ने क्या बिगाड़ा था तुम्हारा ? उन्हें किस बात की सजा मिली और. ..मैँने ही तेरा क्या बिगाड़ था? मुझे किस बात की सजा दी थी तुमने मुझे ?"
“ग गलती हो गई जावेद ।"'
"तो अब उस गलती की सजा भुगत ।"
"मैं तैयार हू..मैं हर सजा भुगतने के लिए तैयार हूंमगर मेरे बेटे को छोड दे । उसे खरोंच भी नहीँ आनी चाहिए ।"
' बडे ही जहरीले अंदाज में हंसकर कहा गया…"अब तेरी समझ में आ रहा होगा कि जब तुम मुझे हथकडी और बेडियों में जकड़कर मेरे मां बाप के पास ले गए थे तो उनके दिल पर क्या गुजरी होगी !"
"क्या चाहते हो मुझसे ? "
"तुझे वहाँ आना हे जहा' मैँ बुलाऊं ।"'
"ब बताओ कहां आना है, मैं तेयार हूं ।"'
“पहले हिदायत सुन ।"'
"हिदायत ? ”
"अपने अफसरों से मेरे फोन या उस जगह के बारे में कोई बात की जहां मैँ वुलाऊंगा तो वारिस खलास ।”
"न नहीं नहीं । तुम बारिस को हाथ भी नहीं लगाओगे । मैं इस बारे में किसी से कोइ बात नहीं करूंगा । बताओ कहां आना है।"
"फिर फौन करूंगा ।”
शफ्फाक शाही क्रो लगा कि दूसरी तरफ़ से संबंध विच्छेद किया जाने वाला है इसलिए जल्दी से बोला-"व वारिस ठीक तो है । "
"तब तक ठीक ही रहेगा जब तक कोई चालाकी नहीं करोगे। ”
"उ उससे बात करा दो ।"'
"नहीं हो सकती ।"
शफ्फाक ने कुछ कहने के लिए मु'ह खोला ही था कि कनेक्शन कटने की आबाज कान से टकराई।
चेहरे पर मौजूद भय के भावों में निराशा ने रंग भरने शुरु कर दिए । उस वक्त वह रिसीवर क्रेडिल पर वापस रख रहा था जब बगल में खडी बीवी यानि रेहाना ने कहा…“मुझसे बात क्यों नहीं कराई। मैंने कहा था उसका फोन आए तो...
"मौका ही कहां दिया उसने। अपने मतलब की बात कही और फोन काट दिया । वारिस तक से बात नहीं कराईं ।"
' “क्या कह रहा था ?"
“कहीं बुलाना चाहता हे, अभी जगह नहीं बताई ।"'
"कुछ लेकर जाना है ?”
"अभी तो इस बारे में कुछ नहीं कहा ।"'
“हमें भी इसी बात की हैरत है ।"' इन शब्दों के साथ डीआइजी ने शफ्फश्क शाही के बंगले की लाबी में कदम रखा ।
“अ..... आप?" उन्हें देखकर शफ्फाक चौंका था ।
"सुना है जावेद कश्मीरी किसी बेगुनाह को अपना निशाना नहीं बनाता, केवल उन लोगों को मार रहा है जिन्हें दोषी समझता हे, जैसे इकरामुद्दीन, जैसे गुलहसन । इस पैमाने से नापें तो ज़रूर तुमसे भी उसकी कोइ पर्सनल खुदक है।"
"न नहीं सर ।"' उसने घबराकर कहा-""ऐसा नहीं है ।"'
17
"फिर तुम्हें टार्गेट क्यों बना रहा हे वह?”
"म मैं इस बारे मेँ क्या कह सकता हूं?"
"अगर सच बोल रहे हो तो ऐसे मामलों में दूसरा कारण दौलत होती हे । शायद उसने तुम्हारे बेटे क्रो पैसों कै लिए किडनैप किया हो लेकिन अभी तक तो ऐसी भी कोइ बात न की हे । उसने यह सब पेसों के लिए किया होता तो भले ही जगह न बताता मगर फिरौती मांगने वाले आम मुजरिम की तरह यह तो कहता ही कि इतने पैसों का इंतजाम करके रखना ।"
“आपको कैसे मालूम सर कि उसने फोन पर क्या . . .
"तुम्हारा फोन टैप है शफ्फाक ।"'
" ओह ! ”
"सोचा था एक बार फोन करते ही पकडा जाएगा मगर चालाक हे । फर्जी आइडी वाले मोबाइल से फोन किया था उसने ।”
"ल लेकिन ।" रेहाना का चेहरा फक्क पढ़ गया था, वह कहती चली गई-“अगर उसे पता लग गया कि हमारा फोन टैप किया गया था और पुलिस ने सारी बातें सुनी हं तो...
"तो? "
"वह हमारे वारिस को...
"आप फिक्र न करें, उसे वारिस क्रो कोई नुकसान नहीं पहुंचाने दिया जाएगा ।'" डीआइजी ने कहा…"मगर इस डर से उसे चाहे जो करत्ते रहने की छूट भी नहीं दी जा सकती । बल्कि हम तो कहते हैँ उसे गिरफ्तार करने या खत्म कर देने का यह सबसे बेहतरीन मौका है । किसी न किसी मकसद से तो उसने वारिस क्रो किडनैप किया ही हे । अपने उस मकसद क्रो पूरा करने के लिए वह तुम्हें किसी स्थान पर बुलाएगा । " अब वह शफ्फाक से मुखातिब था…""पूरी तैयारियों कै साथ उसे उसी स्थान पर घेर लिया जाए । "
"इससे वारिस को खतरा हो सकता है सर ।" कहते वक्त खौफ की ज्यादती के कारण शफ्फाक के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था ।
डीआइजी ने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा -“यकीन रखो शफ्फाक , तुम्हारे बेटे क्री कीमत पर कुछ नहीं किया जाएगा । पर तुम्हें भी यकीन दिलाना होगा कि उसके ओर अपने बीच होने वाली किसी डील को छुपाओगे नहीं क्योकि ज़रूरी नहीं हे अगली बार वह फोन पर ही बात करे । चालाक है, इसलिए उम्मीद की जाती हे कि जगह कै बारे में वह तुम्हें किसी अन्य माध्यम से बताएगा । किसी ऐसे माध्यम से जिस तक पुलिस अपने प्रयास से न पहुंच सकै । उस अवस्था मेँ तुम हमेँ सबकुछ बताआगे, वेसे भी एसएसपी होने के नाते इतनी हिम्मत तो तुम्हें दिखानी ही होगी ।"
शफ्फष्क शाही खामोश खड़ा रहा ।
"जवाब दो शफ्फाक ।" इस बार डीआईजी ने थ्रोड़े सख्त लहजे में पूछा था…“हिम्मत दिखाओगे या नहीं। "
"ज जी । दिखाऊंगा ।"
"यदि बेटे के मोह में तुम अपना फर्ज भूले यानी जावेद से कोई गुपचुप डील की तो याद रखना, उस अवस्था मेँ किसी भी पुलिसिया कार्यवाही के दरम्यान तुम वारिस को गंवा सकते हो जबकि अगर तुम पल पल की जानकारी देते रहे त्तो हमारा वादा हे- उसे पकडा जा सकै या न पकडा जा सकें, वारिस का बाल बांका न होने दिया जाएगा । उसे महफूज रखना हमारी पहली ड्यूटी होगी। "
शफ्फाक शाही को लगा…डीआइजी साहब ठीक कह रहे हैं ।
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शफ्फाक शाही ने पूछा-“कौन?”
"जावेद कश्मीरी ।" दूसरी तरफ से कहा गया ।
दो अक्षरों का वह छोटा सा नाम शफ्फाक शाही कै दिलो दिमाग पर जैसे रायफल की गोली बनकर लगा था । उसे तभी से जावेद कै फोन का इंतजार था जब से उसका जिगर का टुकडा अगवा हुआ था क्योंकि उससे बात करके कम से कम उसे यह तो पता लग सकता था कि वारिस महफूज भी हे या नहीं।
...... इसके बावजूद अब, फोन आया तो जावेद कश्मीरी का नाम सुनते ही सारे जिस्म में झुरझुरी सी दौढ़ गई ।
बडी मुशिकल से बोला-"तुम्हारी दुश्मनी मुझसे है जावेद, हाथ ही डालना था तो मुझ पर डालते । मेरे मासूम वेटे ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा हैं? उसे छोढ़ दो ।”
जवाब सुलगते लहजे में आया…"मेरे मां…बाप ओर बहन ने क्या बिगाड़ा था तुम्हारा ? उन्हें किस बात की सजा मिली और. ..मैँने ही तेरा क्या बिगाड़ था? मुझे किस बात की सजा दी थी तुमने मुझे ?"
“ग गलती हो गई जावेद ।"'
"तो अब उस गलती की सजा भुगत ।"
"मैं तैयार हू..मैं हर सजा भुगतने के लिए तैयार हूंमगर मेरे बेटे को छोड दे । उसे खरोंच भी नहीँ आनी चाहिए ।"
' बडे ही जहरीले अंदाज में हंसकर कहा गया…"अब तेरी समझ में आ रहा होगा कि जब तुम मुझे हथकडी और बेडियों में जकड़कर मेरे मां बाप के पास ले गए थे तो उनके दिल पर क्या गुजरी होगी !"
"क्या चाहते हो मुझसे ? "
"तुझे वहाँ आना हे जहा' मैँ बुलाऊं ।"'
"ब बताओ कहां आना है, मैं तेयार हूं ।"'
“पहले हिदायत सुन ।"'
"हिदायत ? ”
"अपने अफसरों से मेरे फोन या उस जगह के बारे में कोई बात की जहां मैँ वुलाऊंगा तो वारिस खलास ।”
"न नहीं नहीं । तुम बारिस को हाथ भी नहीं लगाओगे । मैं इस बारे में किसी से कोइ बात नहीं करूंगा । बताओ कहां आना है।"
"फिर फौन करूंगा ।”
शफ्फाक शाही क्रो लगा कि दूसरी तरफ़ से संबंध विच्छेद किया जाने वाला है इसलिए जल्दी से बोला-"व वारिस ठीक तो है । "
"तब तक ठीक ही रहेगा जब तक कोई चालाकी नहीं करोगे। ”
"उ उससे बात करा दो ।"'
"नहीं हो सकती ।"
शफ्फाक ने कुछ कहने के लिए मु'ह खोला ही था कि कनेक्शन कटने की आबाज कान से टकराई।
चेहरे पर मौजूद भय के भावों में निराशा ने रंग भरने शुरु कर दिए । उस वक्त वह रिसीवर क्रेडिल पर वापस रख रहा था जब बगल में खडी बीवी यानि रेहाना ने कहा…“मुझसे बात क्यों नहीं कराई। मैंने कहा था उसका फोन आए तो...
"मौका ही कहां दिया उसने। अपने मतलब की बात कही और फोन काट दिया । वारिस तक से बात नहीं कराईं ।"
' “क्या कह रहा था ?"
“कहीं बुलाना चाहता हे, अभी जगह नहीं बताई ।"'
"कुछ लेकर जाना है ?”
"अभी तो इस बारे में कुछ नहीं कहा ।"'
“हमें भी इसी बात की हैरत है ।"' इन शब्दों के साथ डीआइजी ने शफ्फश्क शाही के बंगले की लाबी में कदम रखा ।
“अ..... आप?" उन्हें देखकर शफ्फाक चौंका था ।
"सुना है जावेद कश्मीरी किसी बेगुनाह को अपना निशाना नहीं बनाता, केवल उन लोगों को मार रहा है जिन्हें दोषी समझता हे, जैसे इकरामुद्दीन, जैसे गुलहसन । इस पैमाने से नापें तो ज़रूर तुमसे भी उसकी कोइ पर्सनल खुदक है।"
"न नहीं सर ।"' उसने घबराकर कहा-""ऐसा नहीं है ।"'
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"फिर तुम्हें टार्गेट क्यों बना रहा हे वह?”
"म मैं इस बारे मेँ क्या कह सकता हूं?"
"अगर सच बोल रहे हो तो ऐसे मामलों में दूसरा कारण दौलत होती हे । शायद उसने तुम्हारे बेटे क्रो पैसों कै लिए किडनैप किया हो लेकिन अभी तक तो ऐसी भी कोइ बात न की हे । उसने यह सब पेसों के लिए किया होता तो भले ही जगह न बताता मगर फिरौती मांगने वाले आम मुजरिम की तरह यह तो कहता ही कि इतने पैसों का इंतजाम करके रखना ।"
“आपको कैसे मालूम सर कि उसने फोन पर क्या . . .
"तुम्हारा फोन टैप है शफ्फाक ।"'
" ओह ! ”
"सोचा था एक बार फोन करते ही पकडा जाएगा मगर चालाक हे । फर्जी आइडी वाले मोबाइल से फोन किया था उसने ।”
"ल लेकिन ।" रेहाना का चेहरा फक्क पढ़ गया था, वह कहती चली गई-“अगर उसे पता लग गया कि हमारा फोन टैप किया गया था और पुलिस ने सारी बातें सुनी हं तो...
"तो? "
"वह हमारे वारिस को...
"आप फिक्र न करें, उसे वारिस क्रो कोई नुकसान नहीं पहुंचाने दिया जाएगा ।'" डीआइजी ने कहा…"मगर इस डर से उसे चाहे जो करत्ते रहने की छूट भी नहीं दी जा सकती । बल्कि हम तो कहते हैँ उसे गिरफ्तार करने या खत्म कर देने का यह सबसे बेहतरीन मौका है । किसी न किसी मकसद से तो उसने वारिस क्रो किडनैप किया ही हे । अपने उस मकसद क्रो पूरा करने के लिए वह तुम्हें किसी स्थान पर बुलाएगा । " अब वह शफ्फाक से मुखातिब था…""पूरी तैयारियों कै साथ उसे उसी स्थान पर घेर लिया जाए । "
"इससे वारिस को खतरा हो सकता है सर ।" कहते वक्त खौफ की ज्यादती के कारण शफ्फाक के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था ।
डीआइजी ने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा -“यकीन रखो शफ्फाक , तुम्हारे बेटे क्री कीमत पर कुछ नहीं किया जाएगा । पर तुम्हें भी यकीन दिलाना होगा कि उसके ओर अपने बीच होने वाली किसी डील को छुपाओगे नहीं क्योकि ज़रूरी नहीं हे अगली बार वह फोन पर ही बात करे । चालाक है, इसलिए उम्मीद की जाती हे कि जगह कै बारे में वह तुम्हें किसी अन्य माध्यम से बताएगा । किसी ऐसे माध्यम से जिस तक पुलिस अपने प्रयास से न पहुंच सकै । उस अवस्था मेँ तुम हमेँ सबकुछ बताआगे, वेसे भी एसएसपी होने के नाते इतनी हिम्मत तो तुम्हें दिखानी ही होगी ।"
शफ्फष्क शाही खामोश खड़ा रहा ।
"जवाब दो शफ्फाक ।" इस बार डीआईजी ने थ्रोड़े सख्त लहजे में पूछा था…“हिम्मत दिखाओगे या नहीं। "
"ज जी । दिखाऊंगा ।"
"यदि बेटे के मोह में तुम अपना फर्ज भूले यानी जावेद से कोई गुपचुप डील की तो याद रखना, उस अवस्था मेँ किसी भी पुलिसिया कार्यवाही के दरम्यान तुम वारिस को गंवा सकते हो जबकि अगर तुम पल पल की जानकारी देते रहे त्तो हमारा वादा हे- उसे पकडा जा सकै या न पकडा जा सकें, वारिस का बाल बांका न होने दिया जाएगा । उसे महफूज रखना हमारी पहली ड्यूटी होगी। "
शफ्फाक शाही को लगा…डीआइजी साहब ठीक कह रहे हैं ।
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