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चुदाई का ज्ञान

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फ़ोन रखने के बाद विकास ने अनुजा से पूछा- क्या हुआ?

अनुजा- मेरे राजा आपकी किस्मत बहुत अच्छी है.. मैंने तो सोचा दीपाली को एक घंटा और रोक लूँ.. ताकि आपको एक बार और इसकी मचलती जवानी को भोगने का मौका मिल जाए.. मगर भगवान ने तो इसे कल शाम तक यहीं रोक दिया अब तो सारी रात आप इसके साथ रासलीला कर सकते हो।

दीपाली- छी: .. दीदी आप भी ना कितनी गंदी बातें करती हो और आपने झूट क्यों बोला कि दवा दोगी मुझे.. आपका इरादा तो कुछ और ही है।

अनुजा- अरे नहीं मैंने कोई झूट नहीं बोला तुमसे.. दवा तो अब भी दूँगी.. पहले नास्ता तो कर लो और हाँ विकास के साथ चुदाई तो दवा लेने के बाद भी कर सकती हो यार.. मौका मिला है तो इस पल को अच्छे से एंजाय करो ना.. चल अब नास्ता कर ले बाकी बातें बाद में होती रहेंगी।

तीनों नंगे ही बैठे नाश्ता करने लगे.. उनको देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कोई आदिवासी कबीले के लोग हैं जिनको कपड़े क्या होते हैं.. पता ही नहीं है.. उनमें कोई शर्म नहीं थी।

नाश्ता करते हुए दीपाली ने अनुजा से कहा।

दीपाली- दीदी एक बात अभी तक समझ नहीं आई.. सर आपके पति हैं फिर भी आपको कोई ऐतराज नहीं कि ये मेरे साथ चुदाई कर रहे हैं बल्कि आप खुद इनसे मुझे चुदवा रही थीं.. ऐसा क्यों?

अनुजा- अरे दीपाली.. मैं उन औरतों जैसी नहीं हूँ जो पति को पल्लू से बाँध कर रखती हैं। तुमको नहीं पता उनके पति उनसे छुप कर कहीं ना कहीं मुँह काला करते हैं और उनको प्यार भी दिखावे का करते हैं मगर मेरा विकास मुझ पर जान छिड़कता है.. इसी लिए मुझे भी अपने पति का ख्याल है.. लौड़े का तो कोई नुकसान होता नहीं है.. कितनी भी चूत रगड़ लो.. तो मुझे क्या दिक्कत.. और इसमें मेरा एक और फायदा है.. कभी अगर मेरे मन में ना हो तो पति को नाराज़ नहीं करूँगी.. सीधा तुम्हें बुला लूँगी.. तुम चुदवा लेना इससे. विकास भी खुश.. मैं भी खुश।

दीपाली- और मेरी ख़ुशी का क्या?

विकास- अरे मेरी जान.. तेरी ख़ुशी के लिए ये लौड़ा है ना.. तू जब चाहे इसको अपनी चूत में ले लेना हा हा हा हा…

विकास के साथ अनुजा भी ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी।

दीपाली- उहह सबको अपनी पड़ी है.. जाओ नहीं चुदवाती में.. अब क्या कर लोगे तुम.. दीदी आप बहुत गंदी हो अपने मतलब के लिए मुझे इस्तेमाल किया आपने।

अनुजा- अरे रे रे.. तू तो बुरा मान गई.. कसम से मैं तो मजाक कर रही थी यार.. तुझे सब अच्छे से समझ आ जाए और तू भी मज़ा ले सके.. बस इसलिए मैंने ये किया…

दीपाली- हा हा हा हा निकल गई ना हवा.. जब मुझे छेड़ रहे थे दोनों.. तब बड़ा मज़ा आ रहा था.. मैंने थोड़ा सा गुस्सा होने का नाटक किया तो आप डर गईं।

विकास- ले अनु तेरे नहले पे दहला मार दिया इसने…

अनुजा- हाँ वाकयी में एक बार तो मैं डर गई थी।

दीपाली- नहीं दीदी.. आपको डरने की कोई जरूरत नहीं है.. आपने जो किया अच्छा किया.. अब हम दोनों राजा जी से चुदाएंगे.. बड़ा मज़ा आएगा…

अनुजा- ओये होये राजा जी.. क्या बात है अब तक तो सर बोल रही थी.. तेरी चूत की सील तोड़ते ही सीधे राजा जी.. गुड.. आगे खूब तरक्की करोगी तुम…

विकास- दीपाली ऐसी सेक्सी बातें करोगी तो मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा देख मेरे लौड़े में तनाव आने लगा है.. अब नास्ता भी हो गया.. आजा मेरी जान तेरी चूत का स्वाद चखा दे मेरे लौड़े को…

दीपाली- सब्र करो पहले मुझे दवा तो लेने दो वरना फिर से मेरी जान निकल जाएगी।

अनुजा- अरे हाँ.. पहले दवा ले ले उसके बाद चुदाई का मज़ा लेना.. चुदाई करवा के आराम से सो जाना…

विकास- अनु तुम भी कहाँ सोने की बात कर रही हो.. ऐसी कमसिन कली साथ होगी तो नींद किसे आएगी.. आज तो सारी रात बस इसकी चूत में लौड़ा डाल कर पड़ा रहूँगा।

अनुजा- अच्छा बच्चू.. और मेरा क्या होगा.. कब से मेरी चूत में खुजली हो रही है…

दीपाली- दीदी मेरे बाद आप चुदवाना.. प्लीज़ मुझे आपकी चुदाई देखनी है…

अनुजा- ठीक है देख लेना.. अच्छा रुक मैं तुझे दवा देती हूँ। उसके बाद तुम दोनों मज़े करना.. मुझे बाजार जाना है एक जरूरी काम है।

अनुजा ने एक गोली दीपाली को दे दी और जाने लगी।

दीपाली- नहीं दीदी आप यहीं रहो ना प्लीज़…

अनुजा- अरे पगली बस अभी जाकर आती हूँ कुछ समान लाना है.. अभी लेकर आ जाती हूँ और कुछ खास काम भी है.. आकर तुझे बताऊँगी।
 
दीपाली बुझे मन से अनुजा को जाने देती है। अनुजा के जाने के बाद विकास उसके पास बैठ जाता है और उसके मम्मों को सहलाने लगता है।

विकास- क्या हुआ रानी.. अनुजा के जाने से खुश नहीं हो क्या.. मैं हूँ ना.. तुम्हारा ख्याल रखने को…

दीपाली- नहीं सर.. ओह्ह.. सॉरी.. राजा जी ऐसी बात नहीं है मैं खुद यही चाहती हूँ कि दीदी कहीं चली जाए और मैं आपसे खुल कर बात कर सकूँ.. पर दीदी के बारे में सोच कर दुखी हूँ.. कोई तो बात है जिसके कारण वो अपने पति को किसी अनजान लड़की को चोदते देख रही हैं. कहीं उनकी कोई मजबूरी तो नहीं?

विकास- ओ बेबी कूल.. ऐसा कुछ नहीं है.. हम दोनों में कोई ऐसी बात नहीं है तुम गलत समझ रही हो.. वो किसी मजबूरी में नहीं बल्कि ख़ुशी से ये सब कर रही है।

दीपाली के चेहरे पर ख़ुशी के भाव आ गए और वो विकास से लिपट गई।

विकास- ये हुई ना बात अब चल जब तक अनुजा आए हम एक बार और खुल कर चुदाई का मज़ा ले लेते हैं.. कसम से तेरी चूत बहुत दमदार है. साली लौड़े को ऐसे जकड़ लेती है जैसे कभी छोड़ेगी ही नहीं।

दीपाली- आप भी दीदी की तरह बेशर्म हो।

विकास- अरे रानी.. अगर चुदाई का मज़ा लेना है ना.. तो बेशर्म होना ही पड़ता है.. अगर यकीन नहीं आता तो आजमा लो और देखो कितना मज़ा आएगा।

दीपाली- मैंने उस स्टोरी में ये सब पढ़ा था.. चलो मैं ट्राइ करती हूँ।

विकास- हाँ ठीक है.. मैं भी तुम्हारा साथ दूँगा।

दीपाली- अरे मेरे चोदूमल, आ जा. देख तेरे इन्तजार में कैसे चूत टपक रही है.. जल्दी से अपने लौड़े को घुसा दे और मेरी चूत को ठंडा कर दे हा हा हा हा हा मुझसे नहीं होगा कुछ भी हा हा हा।

विकास- अरे हँस मत.. अच्छा बोल रही थी तू.. प्लीज़ जान बोलो ना.. मज़ा आएगा।

दीपाली- ओके ओके.. आप पहले मेरे इस डायलाग का तो जबाव दो।

विकास- अरे जानेमन.. अभी देख कैसे मैं अपने लंबे लौड़े से तेरी चूत की गर्मी निकालता हूँ।

दीपाली फिर ज़ोर से हँसने लगी इस बार विकास भी उसके साथ हँसने लगा और हँसते-हँसते उसने दीपाली को बांहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने लगा। दीपाली भी उसका साथ देने लगी।

अब दोनों हँसी-मजाक से दूर काम की दुनिया में खो गए थे। विकास उसके निप्पलों को चूस रहा था तो वो अपने हाथ से उसके लौड़े को दबा रही थी।

दीपाली- आह्ह… उफ्फ.. आपका ये अंदाज बहुत अच्छा लगता है.. उई आह्ह… ऐसे ही चूसो.. मज़ा आ रहा है आह्ह… मुझे आपका लौड़ा चूसना है.. पता नहीं क्यों मेरे मुँह में पानी आ रहा है और मन कर रहा है लौड़ा चूसने को…

विकास- मेरी जान मुझे भी तो अपनी कमसिन चूत का मज़ा दो.. चलो तुम मेरे ऊपर आ जाओ.. अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दो और तुम आराम से लौड़ा चूसो।

दोनों 69 की अवस्था में आ गए और मज़े से चुसाई करने लगे।

दीपाली की सूजी हुई चूत को विकास की जीभ से बड़ा आराम मिल रहा था। वो एकदम गर्म हो गई थी और टपकने लगी थी.. इधर विकास पर भी चुदाई का खुमार चढ़ने लगा था.. पानी की बूँदें तो उसके लौड़े से भी आ रही थीं क्योंकि दीपाली होंठों को भींच कर मुँह को ज़ोर-ज़ोर से हिला रही थी जिससे विकास को बड़ा मज़ा आ रहा था। दस मिनट तक ये खेल चलता रहा। विकास ने चूत को चाटना बन्द किया और दीपाली को हटने को कहा।

दीपाली- उफ्फ.. कितना मज़ा आ रहा था क्या हुआ हटाया क्यों.. आपके लौड़े में क्या मज़ा है.. सच्ची.. दिल करता है बस चूसती रहूँ।
 
विकास- अरे चूस लेना मेरी जान.. पहले इसको चूत का मज़ा लेने दे.. साली तेरी टाइट चूत को पहले चोद-चोद कर ढीला कर दूँ.. उसके बाद जितना मर्ज़ी लौड़ा चूसना.. चल अब तू घोड़ी बन जा.. तुझे नए तरीके से चुदना सिखाता हूँ।

दीपाली- हाँ मज़ा आएगा.. मैंने डीवीडी में देखा था.. चलो मैं घोड़ी बन जाती हूँ.. पर आराम से डालना.. मुझे मज़ा लेना है.. प्लीज़ दर्द मत देना।

विकास- अरे मेरी जान तूने लौड़े को चूस कर इतना चिकना कर दिया है कि तेरी चूत में फिसलता हुआ सीधा अन्दर जाएगा।

दीपाली घुटनों के बल घोड़ी बन जाती है मगर अनुभव ना होने क कारण कमर को काफ़ी उँचा कर लेती है।

विकास- अरे जान तू घोड़ी की जगह ऊँठनी बन गई.. चूतड़ों को नीचे कर.. ताकि तेरी चूत मेरे लंड की सीध में आ जाए…

विकास ने उसको ठीक से बताया तब वो सही आसन में आई।

विकास ने लौड़े को चूत के मुँह पर रख कर धीरे से धक्का मारा.. आधा लौड़ा चूत में ‘पक्क’ से घुस गया।
 
दीपाली- आआह्ह… आराम से डालो ना.. दुःखता है आह्ह…

विकास- मेरी जान जब तक तू दो-तीन बार मुझसे चुदवा नहीं लेगी.. ये दर्द होता रहेगा.. अब इससे धीरे मुझसे नहीं होगा, चल थोड़ा बर्दाश्त कर ले.. मैं पूरा डालता हूँ.. उसके बाद हलके धक्के मारूँगा।

विकास ने पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया और धीरे-धीरे झटके मारने लगा। लगभग 5 मिनट बाद दीपाली को दर्द कम हुआ और उसको मज़ा आने लगा।

दीपाली- आ.. आह उहह.. राजा जी आह्ह… अब मज़ा आ रहा है.. पूरा लौड़ा बाहर निकाल कर एक साथ अन्दर डालो आह्ह… मेरी चूत में बड़ी खुजली हो रही है।

विकास- अभी ले मेरी रानी तेरी चूत बहुत टाइट है साली.. ऐसी नुकीली चूत चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा है.. ले ... और ले आह्ह… मज़ा आ गया मेरा लौड़ा आह्ह… साली चूत को टाइट मत कर आह्ह… लौड़ा आगे-पीछे करने में दुःखता है आह्ह…

दीपाली- आआह्ह… आईईइ उहह.. ससस्स चोदो आह्ह… अई कककक ज़ोर-ज़ोर से आह्ह… चोदो मज़ा आ रहा है मेरे लौड़ूमल आह्ह… मज़ा आ रहा है।

विकास पर अब जुनून सवार हो गया वो सटासट लौड़ा पेलने लगा। अब उसकी रफ्तार बढ़ गई थी.. दीपाली भी गाण्ड को पीछे झटके दे कर चुद रही थी। कोई 15 मिनट बाद दीपाली का रस निकल गया विकास भी झड़ने के करीब था।

आख़िर दीपाली की गर्म चूत में उसका लौड़ा ज़्यादा देर तक टिका नहीं रह सका उसने भी दम तोड़ दिया.. चूत का कोना-कोना पानी से भर गया।

पानी निकाल गया मगर विकास ने लौड़ा अब भी बाहर नहीं निकाला और दीपाली की गाण्ड सहलाने लगा।

दीपाली- उफ़फ्फ़ राजा जी.. आप तो बड़े मस्त चोदते हो.. मेरी टाँगें दु:खने लगी हैं.. अब तो लौड़ा निकाल लो.. अब क्या इरादा है।

विकास- जान तेरी गाण्ड भी बहुत मस्त है… सोच रहा हूँ अबकी बार तेरी गाण्ड ही मारूँ.. साली क्या मक्खन जैसी चिकनी गाण्ड है.. बड़ा मज़ा आएगा इसे मारने में।

दीपाली- अभी तो लौड़ा बाहर निकालो बाद की बाद में देख लेना और गाण्ड कैसे मारोगे.. इसमें कैसे लौड़ा जाएगा?

विकास एक तरफ सीधा लेट गया.. दीपाली उसके सीने पर सर रख कर उसके लौड़े को देखने लगी.. जो अब ढीला हो गया था।

विकास- मेरी जान जैसे चूत में जाता है उसी तरह गाण्ड में भी चला जाएगा.. तू बस देखती जा मैं कैसे-कैसे तुझे चोदता हूँ।

दीपाली- हाँ मेरे राजा जी.. अब तो मैं आप की हूँ जैसे चाहो चोद लेना.. सच में अगर पहले पता होता कि चुदाई में ऐसा मज़ा मिलता है.. तो कब की चुदवा लेती मैं.. अच्छा एक बात पूछू?

विकास- हाँ रानी पूछो।

दीपाली- ये लौड़ा अभी कितना नर्म हो गया है और छोटा भी.. मगर चोदने के वक्त कैसे लंबा और कड़क हो जाता है.. ये बात मेरी समझ में नहीं आई।

विकास- अरे ये तो साधारण सी बात है देखो ये इसकी असली अवस्था है.. जब आदमी के दिमाग़ में कोई गंदी बात आती है या वो कुछ ऐसा देख ले जिससे उसकी उत्तेजना जाग जाए.. तब दिमाग़ इसे आदेश देता है और इसकी नसें अकड़ने लगती हैं या यूँ कहो.. लंड में तनाव आने लगता है।

दीपाली- अच्छा तो कुछ गंदा सोचने या देखने से ही ये अकड़ता है क्या?

विकास- नहीं.. इसके अलावा भी बहुत से कारण हैं.. जैसे किसी ने इसे सहला दिया हो या किसी लड़की के साथ जाँघ से जाँघ मिला कर बैठने से भी इसमें तनाव आ जाता है.. कई बार तो आदमी को पता भी नहीं चलता कि ये क्यों खड़ा है.. बस इसके संपर्क में कोई भी लड़की या औरत आ जाए तो इसका तनाव शुरू हो जाता है।

दीपाली- अच्छा अगर कोई भी पास ना हो.. दिमाग़ में कोई गंदी बात भी ना हो, तब तो ये सोया ही रहता है ना…

विकास- नहीं.. एक और बड़ा कारण है जिसकी वजह से ये खड़ा हो जाता है। देखो हफ्ते या दस दिन में अगर वीर्य बाहर नहीं निकाला जाता तो रात को सोते हुए ये खड़ा हो जाता है और वीर्य बाहर फेंक देता है.. उसे स्वप्नदोष कहते हैं।

दीपाली- बाप रे, ये तो बहुत शैतान है.. इसको तो बस किसी ना किसी बहाने खड़ा होना है.. वैसे एक बात है.. इन दो दिनों में मुझे बहुत ज्ञान की बातें पता चल गई हैं थैंक्स सर.. जो अपने मेरी इतनी मदद की।

विकास- अरे मैंने कहा ना सर नहीं बोलो राजा जी अच्छा था..

दीपाली- नहीं.. मुझे कभी-कभी सर बोलने दो.. वरना स्कूल में कहीं मुँह से राजा जी निकल गया तो मामला बिगड़ जाएगा।

विकास- हाँ बात तो सही है।

दीपाली- अच्छा एक बात और बताओ.. ये एक दिन तो में यहीं हूँ.. उसके बाद अगर मेरी चुदने की इच्छा हुई तो मैं क्या करूँगी?

विकास- अरे मेरी रानी में हूँ ना.. जब चाहो आ जाना.. मेरा लौड़ा हमेशा तेरी चूत के लिए खड़ा रहेगा।

दीपाली- और दीदी का क्या होगा? मुझे तो अब भी बहुत अजीब लग रहा है कि वो कैसे अपने पति को किसी अनजान लड़की से चुदाई करने की इजाज़त दे रही है।
 
विकास- अरे उसकी चिंता तुम मत करो ... वो तो रोज रात को चुदवाती है.. तुम शाम को आ जाना.. मैं तेरी चूत को ठंडा कर दूँगा.. वैसे अनुजा के ऐसा करने में उसका कोई ना कोई स्वार्थ तो जरूर है और देख लेना वक़्त आने पर वो जरूर बता देगी.. अब तू ज़्यादा सोच मत बस मजे ले।

दीपाली बड़े प्यार से विकास के लौड़े को सहला रही थी और बातें कर रही थी। करीब आधा घंटा दोनों वैसे ही लिपटे बातें करते रहे।

दीपाली- सर देखो.. इसमें तनाव आने लगा है।

विकास- तो इसमें देखने की क्या बात है.. तेरे मुलायम हाथ कब से इसे सहला रहे हैं तनाव तो आएगा ही.. अरे मैं तो जवान हूँ अगर तू ऐसे किसी बूढ़े का लौड़ा सहलाती ना.. तो उसमें भी जान आ जाती।

दीपाली- क्यों बूढ़े आदमी का खड़ा नहीं होता क्या?

विकास- होता तो है मगर बहुत ज़्यादा उत्तेजित होने पर.. वरना नहीं और वैसे भी बूढ़े लौड़े में कसाव कहाँ होता है.. अगर ग़लती से खड़ा भी हो जाए तो क्या कर लेगा.. चुदाई करना उनके बस में नहीं.. इसके लिए घुटनों में जान होनी चाहिए.. कोई बूढ़ा अगर झटके मारेगा तो साले के घुटने में दर्द हो जाएगा या कमर अकड़ जाएगी हा हा हा हा…

दोनों खिलखिला कर हँसने लगे.. विकास का लौड़ा अब अपने विकराल रूप में आ गया था, जिसे देख कर दीपाली के मुँह में पानी आने लगा और उसने झट से लौड़े को मुँह में ले लिया और मज़े से चूसने लगी।

तभी अनुजा वापस आ गई।

अनुजा- वाह क्या बात है.. मुझे गए हुए कितना वक्त हो गया.. मैंने सोचा अब तक तो तुम दोनों मज़े से चुदाई करके थक गए होगे.. मगर यहाँ तो अभी तक लौड़ा चूसा जा रहा है.. इतनी देर क्या भजन गा रहे थे।

विकास- अरे आओ आओ.. मेरी जान.. तुम वहीं खड़ी बोलती रहोगी क्या.. यहाँ बिस्तर पर तो आओ।

अनुजा- क्या विकास.. आप भी ना.. अब इसे लौड़ा चुसा रहे हो.. चोदोगे कब?

इतने वक्त तक क्या कर रहे थे.. कम से कम एक बार तो आपको चोद ही लेना चाहिए था ना…

दीपाली ने लौड़ा मुँह से बाहर निकाला और थोड़े गुस्से में बोली।

दीपाली- क्या दीदी आप भी बिना बात सुने.. बोले जा रही हो.. सर ने मुझे घोड़ी बना कर चोदा है.. ये तो सर का लौड़ा दोबारा खड़ा हो गया.. इसलिए बस चूस कर मज़ा ले रही थी कि अपने सब चौपट कर दिया।

अनुजा- ओह्ह.. तो ये बात है.. घोड़ी बन कर चुद चुकी हो.. हाँ और अब भी तेरी प्यास मिटी नहीं कि दोबारा लौड़े को चूस कर तैयार कर रही हो.. क्या बात है लगता है दवा असर कर गई.. तेरा दर्द ख़तम हो गया क्या?

दीपाली- हाँ दीदी आज ही तो चुदना सीखा है.. इतनी जल्दी थोड़े ही मेरी प्यास मिटेगी.. अब दर्द काफ़ी कम है पहली बार तो दर्द हुआ दूसरी बार थोड़ा मज़ा आया.. अबकी बार तो और ज़्यादा मज़ा आएगा ना..

विकास- हाँ मेरी छोटी रानी… तू सही बोली.. चुदाई का मज़ा हर बार बढ़ कर ही आता है।

अनुजा- बस भी करो.. तुम दोनों चुदाई का मज़ा लेते रहोगे तो क्या मैं सीढ उंगली घुसाऊँगी अपनी चूत में… विकास एक बार तो मेरी चूत भी ले लो यार.. उसके बाद तुम्हारे लौड़े में दम नहीं रहेगा।

विकास- अरे मेरी जान.. एक बार क्यों चल दो बार लूँगा तेरी .. उसके बाद इसको चोदूँगा और तुझे क्या पता मेरे लौड़े में कितना दम है.. आज तो पूरी रात ये ऐसे ही खड़ा रहेगा.. चल आ जा तेरी चूत की खुजली भी मिटा देता हूँ।
 
दीपाली- हाँ दीदी.. मुझे भी आपकी चुदाई देखनी है.. अब तो आप आ ही जाओ बस।

अनुजा- अरे अभी नहीं रात को चुदवाऊँगी यार.. अभी खाना भी बनाना है…

दीपाली- दीदी, उसकी चिंता न करो ... खाना मैं बना दूंगी।

दीपाली उठ कर किचन की तरफ बढती है पर विकास उसके पीछे है और अनु विकास के पीछे.

विकास- अरे, तुम अकेली क्यों बनाओगी... मैं भी साथ दूंगा तुम्हारा।

अनुजा- ओये होये.. मेरा राजा.. क्या बात है… बड़ा प्यार आ रहा है दीपाली पर.. कभी मेरे को तो रोटियां बनाने में मदद नहीं की तुमने?

विकास- अरे जान ये बच्ची है.. इसलिए मदद कर रहा हूँ और कोई बात नहीं है।

अनुजा- अच्छा बच्ची है.. जिस तरह तुम इसको चोद रहे हो.. सारा पानी इसकी चूत में भर रहे हो.. जल्दी ही ये बच्ची को एक बच्चा हो जाएगा।

ये सुनते ही दीपाली के होश उड़ गए।

दीपाली- क्या.. नहीं दीदी.. प्लीज़ ऐसा मत कहो.. मेरी तो जान निकल जाएगी… क्या सच्ची मेरे को बच्चा होगा?

अनुजा- हा हा हा विकास.. देखो तो इसके चेहरे का रंग कैसे उड़ गया.. अरी मेरी प्यारी बहना.. मेरे होते हुए ऐसा कभी नहीं होगा.. तेरे लिए दवा लाई हूँ ना.. इसी लिए तो मैं गई थी। यही था वो खास काम.. इतनी जल्दी थोड़े तुझे माँ बनने दूँगी.. अभी तो चुदाई का भरपूर मज़ा लेना है तेरे को… चल अब रोटी बना और आप यहाँ से जाओ.. काम करने दो हमको…

विकास- अरे यार, मैंने वो वाली गोली ले ली है। देख लौड़ा कैसे झटके मार रहा है प्लीज़.. तुम अपना काम करो और मुझे अपना काम करने दो।

अनुजा- ठीक है.. ठीक है.. कर लो अपना काम.. दीपाली कमर को थोड़ा और मोड़ कर रोटी बना लो ताकि ये अपना लौड़ा तेरी चूत में डाल सके।

विकास- नहीं यार.. इसकी गाण्ड बड़ी मस्त है.. मेरा मन तो इसकी गाण्ड मारने का हो रहा है।

अनुजा- पागल हो गए हो क्या.. रोटी बनाते हुए इसकी कुँवारी गाण्ड कैसे मारोगे.. पता है ना पहली बार में क्या होगा.. वो तुम रात को आराम से मार लेना.. अभी चूत से ही काम चलाओ।

दीपाली- हाँ सर.. दीदी की बात सुन कर चूत में खुजली होने लगी है। राजाजी, डाल भी दो आप अपना लौड़ा।

दीपाली ने कमर को और ज़्यादा झुका लिया.. विकास ने लौड़े पर थूक लगा कर चूत में पेल दिया।

अब दीपाली रोटी बनाने में लग गई और साथ में उसकी चुदाई भी शुरू हो गई।

विकास धीरे-धीरे उसको चोदने लगा।

अनुजा- राजा, लौड़े का सारा कस अभी निकाल दोगे.. तो इतनी लंबी रात कैसे निकलेगी।

विकास- चिंता मत कर.. अभी बस ऐसे ही थोड़ा मज़ा ले रहा हूँ पानी नहीं निकालूँगा।

अनुजा- अगर ऐसी बात है तो ठीक है थोड़ा मेरी गाण्ड में भी घुसा ददो ताकि मैं भी इस लम्हे को हमेशा याद रखूँ कि कभी रसोई में भी आपने मेरी गांड ली थी।

विकास- हाँ जानेमन.. जरूर तुम कहो और मैं ना करूँ.. ऐसा कभी हुआ है क्या?

विकास थोड़ी देर दीपाली को चोदता रहा उसके बाद उसने अनुजा की गाण्ड में लौड़ा घुसा दिया।

लगभग 15 मिनट तक ये खेल चलता रहा तब तक खाना भी बन गया।
 
अनुजा- अब बस भी करो.. चलो कमरे में जाकर बैठ जाओ.. हम खाना लेकर आ जाते हैं।

तीनों नंगे ही कमरे में खाना खाने लगे।

खाने के बाद वो तीनों टीवी देखने लगे।

अनुजा- ले दीपाली.. ये गोली खा ले, इस के बाद कितना भी चुद.. बच्चा नहीं होगा।

दीपाली ने बिना बोले दवा ले ली।

अनुजा- थोड़ी देर टीवी देख लेते हैं उसके बाद चुदाई शुरू करेंगे.. हम दोनों को जितना चोदना है चोद लेना.. आज जैसा मौका शायद दोबारा मिले ना मिले।

दीपाली- नहीं दीदी.. ऐसी बात मत करो अब तो हम रोज चुदाई करेंगे। अब मुझसे कहाँ बर्दाश्त होगा.. आप और मैं सर को रोज मज़े देंगे।

विकास- अच्छा मुझे मज़े दोगी.. क्यों तुम दोनों मज़े नहीं लोगी क्या?

दीपाली हँसने लगती है और उसके साथ दोनों भी मुस्कुरा देते हैं।

दीपाली- दीदी, वो वाली मूवी लगाओ ना.. उसको देख कर चुदाई करेंगे.. मज़ा आएगा…

अनुजा- अरे वो तो उस दिन हमने देख ली थी ना.. आज तुझे दूसरी दिखाती हूँ अच्छी वाली.. तू भी क्या याद करेगी।

विकास- हाँ अनु.. मैं समझ गया तू कौन सी मूवी की बात कर रही है.. चल जल्दी से लगा दे… आज दीपाली को ये भी सिखा देते हैं कि कभी दो से चुदना हो तो कैसे चुदना चाहिए।

दीपाली- दो से चुदने का क्या मतलब है दीदी?

अनुजा- अभी देख लेना यार।

अनुजा ने एक सेक्सी डीवीडी लगा दी। तीनों पास बैठ कर देखने लगे.. विकास बीच में था और वो दोनों उसके दाएँ-बा एँ बैठी हुई थीं.. फिल्म में एक लड़की बैठी हुई थी। तभी दो आदमी आकर उसको चूमने लगते हैं और धीरे-धीरे उनका चोदन शुरू हो जाता है।

असल बात यह है कि अनुजा दीपाली को यही दिखना चाह रही थी कि कैसे दो आदमी एक लड़की को चोदते हैं और हुआ भी वही.. जब दोनों उसको आगे-पीछे से चोदने लगे दीपाली बोल पड़ी।

दीपाली- ओह्ह.. माँ.. ये क्या एक साथ दो आदमी लौड़ा डाल रहे हैं.. ऐसा होता है क्या?

विकास- मेरी जान होता है.. तभी तो ये फिल्म बनी.. आगे देखो और भी मज़ा आएगा जब तीसरा आकर इसके मुँह को चोदेगा.. यही तो है असली चुदाई का मज़ा।

इतना बोलकर विकास उसके मम्मों को सहलाने लगा।

इधर अनुजा भी कम ना थी.. वो विकास के लौड़े को सहला रही थी।

आधा घंटा तक तीनों फिल्म देखते रहे.. विकास का लौड़ा अब पूरा तन गया था और तीन लौड़ों से चुदती हुई लौन्डिया का ख्याल करके दीपाली और अनुजा दोनों की चूत पानी-पानी हो गई थीं।

विकास- चल मेरी रानी.. अब तेरी गाण्ड मारकर तुझे एकदम पक्की चुदक्कड़ बना देता हूँ ताकि तू कभी भी किसी को भी खुश कर सके।

दीपाली- सर, आप की बात तो ठीक है मगर आपका लंड बहुत मोटा और बड़ा है.. ये मेरी गाण्ड में कैसे जाएगा.. बहुत दर्द होगा।

विकास- अरे जान कुछ नहीं होगा.. चूत में चला गया तो गाण्ड में क्यों नहीं जाएगा।

अनुजा- हाँ दीपाली, चूत में तो सील टूटी इसलिए इतना दर्द हुआ.. गाण्ड में ऐसा कुछ नहीं है.. दर्द होगा, मगर उतना नहीं।

दीपाली ने विकास के लौड़े को हाथ से पकड़ कर देखा।

दीपाली- देखो दीदी शाम को ये इतना फूला हुआ नहीं था अभी तो बहुत मोटा लग रहा है।

अनुजा- अरे ऐसा कुछ नहीं है.. तेरे राजा जी ने पावर बढ़ाने की गोली ले ली है.. इसके कारण ये ऐसा लग रहा है।

दीपाली चौंकते हुए विकास को देखने लगती है।

विकास- अरे इसमें चौंकने वाली क्या बात है.. अब देखो शाम से तुम दोनों को चोद रहा हूँ.. मैं भी इंसान हूँ थक गया हूँ.. इसलिए गोली ली, ताकि मेरा पावर बना रहे और रात भर हम मज़ा करते रहें बस…

दीपाली- ठीक है सर.. जैसा आपको अच्छा लगे.. मगर ये फिल्म देख कर मेरी चूत गीली हो गई है.. बड़ी खुजली हो रही है.. पहले इसकी खाज मिटा दो।

विकास- हाँ जानेमन.. क्यों नहीं मगर पहले चूत लूँगा तो तेरा पावर कम हो जाएगा और उसके बाद गाण्ड में दर्द होगा.. चल आ जा पहले थोड़ी देर गाण्ड मार लूँ.. उसके बाद पानी चूत में ही निकालूँगा ताकि दोनों काम एक ही बार में हो जाएं।
 
अनुजा बिस्तर पर टेक लगा कर बैठ गई ... विकास ने दीपाली से कहा- इस तरह घोड़ी बन जाओ कि तुम अनुजा की चूत भी चाट सको और गाण्ड भी मरवा सको।

दीपाली- हाँ ये ठीक रहेगा.. मगर पहले आपके लौड़े को चूस कर गीला तो कर दूँ ताकि आराम से अन्दर चला जाए।

विकास- अरे नहीं, थूक से काम नहीं चलेगा.. गाण्ड में लौड़ा ऐसे नहीं जाता। तेरी गाण्ड तो में लौड़े पर देसी घी लगा कर मारूँगा.. बस 2 मिनट रुक मैं अभी लाया.. तब तक अनुजा तू इसको गर्म कर।

अनुजा और दीपाली एक-दूसरे के होंठ चूसने लगीं और निप्पल दबाने लगीं।

विकास ने एक प्याली में थोड़ा सा घी गर्म किया और कमरे में ले आया।

विकास- बस दीपाली अब सही पोज़ में आ जाओ.. मुझसे सबर नहीं हो रहा.. तेरी मक्खन जैसी गाण्ड मुझे पागल बना रही है।

अनुजा वापस टेक लगा कर बैठ गई और दीपाली घोड़ी बन कर उसकी चूत चाटने लगी।

विकास- हाँ बस ऐसे ही रहना जानेमन.. आज तेरी गाण्ड में लौड़ा घुसा कर मैं धन्य हो जाऊँगा।

विकास ने ऊँगली घी में भर कर दीपाली की गाण्ड के सुराख पे रख दी और धीरे-धीरे उसमें घुसाने लगा।

दीपाली- आ आ आह्ह.. दीदी आपकी चूत से क्या मस्त रस आ रहा है.. आईईइ आह्ह.. सर आराम से.. कुँवारी गाण्ड है मेरी…

विकास- अरे रानी, तभी तो ऊँगली से घी तेरी गाण्ड में भर रहा हूँ ताकि लौड़ा आराम से अन्दर चला जाए।

दीपाली- ऊँगली से ही हल्का दर्द हो रहा है.. लौड़ा डालोगे तो मेरी जान ही निकल जाएगी।

अनुजा- उफ़फ्फ़ अरे कुछ नहीं होगा तू बस चूत रस का मज़ा ले बाकी विकास अपने आप संभाल लेगा।

दीपाली चूत चाटने में लग गई और विकास ऊँगली से उसकी गाण्ड को फैलाने लगा.. उसको मज़ा देने के लिए दूसरे हाथ से उसकी चूत में भी ऊँगली करने लगा।

अब दीपाली को बड़ा मज़ा आ रहा था.. वो अपनी जीभ चूत में घुसा कर चाटने लगी।

अनुजा- आह्ह.. अई आह अरे वाह.. बहन, बड़ा मस्त चूस रही हो कककक आह्ह..मज़ा आ रहा है।

विकास ने घी दीपाली की गाण्ड में अच्छे से लगा दिया था।

अब उसका लौड़ा झटके खाने लगा था। उसने दीपाली की गाण्ड पर एक चुम्बन किया और लौड़े पर अच्छे से घी लगा लिया। अब विकास ने लौड़ा गाण्ड के सुराख पे रखा.. दोनों हाथों से उसको थोड़ा खोला और सुपाडे को उसमें फँसा दिया।
 
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विकास का लौड़ा एकदम फँस सा गया था.. इतना चिकना होने के बाद भी अब आगे नहीं जा रहा था।

विकास- आह उफ़फ्फ़.. साली तेरी गाण्ड है या आग की भट्टी.. कैसी गर्म हो रही है.. उफ़फ्फ़ लौड़ा जलने लगा है और टाइट भी बहुत है.. साला लौड़ा तो एकदम फँस गया है।

विकास आधे लौड़े को ही अन्दर-बाहर करने लगा.. उसको बड़ा मज़ा आ रहा था… अब गाण्ड में आधा लौड़ा ‘फक..फक..फक’ की आवाज़ से अन्दर-बाहर होने लगा।

अनुजा- आह्ह.. अरे चूत को खा जाएगी क्या.. आराम से चूस।

तभी विकास ने पूरा लौड़ा टोपी तक बाहर निकाला और ज़ोर से झटका मारा पूरा लौड़ा गाण्ड में जड़ तक घुस गया। इसी के साथ दीपाली झटके के साथ ही बिस्तर पर गिर गई। विकास भी उसकी पीठ के ऊपर उसके साथ ही नीचे गिर गया। इस सब में दीपाली का मुँह अनुजा की चूत के ऊपर कस गया।

अनुजा- ऊ माँ… विकास क्या कर रहे हो उफ्फ.. दीपाली उठो आह्ह..

विकास वैसे ही पड़ा-पड़ा लौड़े को आगे-पीछे करता रहा। दो मिनट में ही उसने ना जाने कितने शॉट मार दिए थे।

अनुजा- विकास प्लीज़ उठो मेरी जाँघों में बहुत दर्द हो रहा है उफ़फ्फ़.. उठो भी यार…

विकास ने लौड़ा गाण्ड से निकाल लिया और उकडूँ बैठ गया.. तब जाकर कहीं दीपाली की जान में जान आई और वो एक तरफ सीधी लेट गई।

दीपाली- आह आह उह्ह.. माँ.. सर ये आपने क्या कर दिया.. अई मेरी गाण्ड फट गई है.. आह्ह.. बहुत जलन हो रही है.. ऐसा लगता है अभी भी उसके अन्दर कुछ घुसा हुआ है।

विकास- अरे कुछ नहीं हुआ है.. बस थोड़ी देर की बात है.. उसके बाद आराम मिल जाएगा।

दीपाली- नहीं.. नहीं.. आहह.. मुझे उफ़फ्फ़ नहीं मरवानी गाण्ड.. बहुत दर्द हो रहा है.. देखो बिस्तर पर भी ठीक से गाण्ड नहीं टिका पा रही हूँ।

अनुजा- अरे विकास, इसको दर्द हो रहा है.. तो जाने दो ना.. इसकी चूत ले लो ताकि इसको चुदाई का मज़ा आए और गाण्ड को आराम मिल जाए।

विकास को अनुजा की बात समझ में आ गई कि वो क्या कहना चाहती है।

विकास- ओके ओके.. अब तू घोड़ी बन जा.. मैं तेरी चूत में लौड़ा डालता हूँ.. चल जल्दी कर.. मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

दीपाली- आह्ह.. काहे का मज़ा.. उफ्फ.. लगता है मेरी गाण्ड तो फट गई..

विकास ने दीपाली का हाथ पकड़ कर उसको उठा लिया।

विकास- अरे कुछ नहीं हुआ है.. अब चल जल्दी से घोड़ी बन जा यार.. मेरा मज़ा खराब हो रहा है।

दीपाली दोबारा उसी स्थिति में आ गई और अनुजा ने उसका मुँह अपनी चूत पर लगा दिया।

अनुजा- यार कितना मस्त चूस रही थी तू.. चूत को सारा मज़ा किरकिरा हो गया.. चल अब थोड़ा चूत को चाट कर मज़ा दे.. तू तो अब चूत घिसवा कर ठंडी हो जाएगी.. मेरी चूत तो अब तू ही ठंडा कर सकती है।

दीपाली के चेहरे पर दर्द के भाव साफ नज़र आ रहे थे, बुझे मन से वो चूत को चाटने लगी। इधर विकास ने लौड़ा चूत में घुसा दिया और झटके मारने लगा। अभी कोई 5 मिनट ही हुए थे कि दीपाली को अब मज़ा आने लगा और वो कमर हिला-हिला कर चुदने लगी और अनुजा की चूत चाट-चाट कर मज़े लेने लगी।

विकास- आह्ह.. आह उहह.. साली कसम से आह्ह.. तू बड़ी मस्त लड़की है.. क्या चूतड़ हिला कर चुद रही है और साली तेरी चूत भी क्या मस्त है उहह उहह ले आ रानी मज़ा आ रहा है।

अनुजा- दीपाली आह्ह.. चाटो आह्ह.. चाटो बहुत मज़ा आ रहा है मेरे राजा आह्ह.. अब दीपाली गर्म हो गई है आह्ह.. मार दो निशाना.. कर लो अपना अरमान पूरा।

दीपाली कुछ समझ पाती, इसके पहले ही विकास ने लौड़ा चूत से निकाल लिया और गाण्ड के छेद पर रख कर ज़ोर से झटका मारा। इस बार विकास ने दीपाली की कमर को अच्छे से पकड़ा हुआ था ताकि वो आगे ना जा पाए। एक ही वार में लौड़ा गाण्ड के अन्दर और दीपाली की चीख बाहर।

दीपाली- आह आआह्ह.. सर प्लीज़ आराम से करो ना.. अई दीदी आप बहुत गंदी हो आह्ह.. आपने ही कहा ना सर को उईईइ आह…

अनुजा- अरे कुछ नहीं होगा.. जब चूत का दर्द नहीं रहा.. तो ये भी ठीक हो जाएगा और इसमें भी मज़ा आने लगेगा।

विकास पागालों की तरह गाण्ड में दनादन लौड़ा पेल रहा था। दीपाली दर्द से कराह रही थी।
 
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