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चुदाई का ज्ञान

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दीपाली- अई आह मार लो आह्ह.. अगर अई आपका मन गाण्ड मारने का हुआ है.. तो ठीक है आह्ह.. मगर मुझे अधूरा क्यों छोड़ दिया.. मेरी चूत में बड़ी खुजली हो रही है आह्ह..

विकास- आह्ह.. आह.. मज़ा आ रहा है साली क्या चिकनी गाण्ड है तेरी.. आह्ह.. लौड़ा खुश हो गया आह्ह.. आज तो.. हाँ जान.. रुक थोड़ी देर और गाण्ड का मज़ा लेने दे.. आह्ह.. उसके बाद तेरी चूत को भी शान्त कर दूँगा।

दस मिनट तक गाण्ड मारने के बाद विकास ने लौड़ा चूत में डाल दिया और रफ़्तार से चोदने लगा। इधर दीपाली ने अनुजा की चूत चाट-चाट कर उसको चरम सीमा पर पहुँचा दिया था।

अनुजा- आहइ आह मज़ा आ गया.. चाट आह्ह.. ज़ोर-ज़ोर से चाट.. आह्ह.. मैं झड़ने वाली हूँ आह्ह..

विकास- ओह्ह ओह्ह ओह्ह मैं भी आहह… करीब ही हूँ उफ़फ्फ़ मज़ा आ गया आज तो.. ओह्ह।

दीपाली- रफ्तार से करो राजा जी.. हम एक साथ ही झड़ेंगे आह्ह.. मेरी चूत में भी आह्ह.. तूफान उठ रहा है। विकास अपनी पूरी ताक़त से झटके मारने लगा और दीपाली ने भी अनुजा की चूत को होंठों से दबा कर उसको ऐसा चूसा कि सबसे पहले अनुजा की चूत ने पानी छोड़ा। अनुजा ने आनन्द में आँखें बन्द कर लीं और दीपाली के सर को कस कर पकड़ लिया और मस्ती से झड़ने लगी। दीपाली भी पानी को ज़ुबान से चाटने लगी।

दीपाली की चूत भी लौड़े के इतने तेज प्रहार को सहन ना कर पाई और उसका बाँध भी टूट गया। वो गाण्ड को पीछे धकेलती हुई झड़ने लगी। उसकी कमर कभी नीचे तो कभी ऊपर को उठ रही थी।

विकास- आह ह आह.. साली ओह्ह ओह्ह ओह्ह.. मुझसे पहले झड़ गई आअहह ले संभाल आह..

दो-चार धक्कों के बाद विकास एकदम से रुक गया और दीपाली की चूत को पानी पिलाने लगा। वो हाँफने लगा था क्योंकि उसने कुछ ज़्यादा ही रफ्तार से शॉट लगा दिए थे।

वो एक तरफ बिस्तर पर लेट गया.. दीपाली भी उसके सीने पर सर रख कर सो गई। अनुजा वैसे ही बैठी रही।

अनुजा- वाह.. मेरी बहना, तू तो मेरी सौतन बन गई है.. चुदवा भी रही हो और मेरे पति के सीने पर भी सो रही हो।

दीपाली झट से बैठ गई और उसके चेहरे पर डर के भाव आ गए।

दीपाली- नहीं दीदी.. प्लीज़ आप गलत समझ रही हो.. मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था.. आपको बुरा लगा तो ‘सॉरी’ मैंने पहले ही कहा था.. अगर आपको ऐतराज ना हो तो मैं सर से चुदवा लूँ.. आपने ‘हाँ’ कही.. तभी मैं राज़ी हुई।

अनुजा- अरे अरे.. पागल मैं तो मजाक से बोली हूँ.. तुमने तो मेरी बात दिल पर ले ली यार.. अबे कूल.. मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता.. अगर सच में भी तू मेरी सौतन बन जाए तो मैं तो खुश रहूँगी.. तेरी जैसी स्वीट सौतन पाकर.. कभी विकास ना भी होगा तो तू मेरी चूत चाट कर मुझे ठंडा कर देगी।

विकास हँसने लगता है और दीपाली का माथा चूम कर उससे कहता है कि वो अनुजा की किसी भी बात का कभी बुरा ना माने क्योंकि इसको मज़ाक करने की आदत है।

दीपाली- दीदी आपने तो मेरी जान निकाल दी थी.. एक तो सर ने मेरी गाण्ड फाड़ दी.. कितना दर्द हो रहा है और रही-सही कसर आपने पूरी कर दी।

अनुजा- अच्छा बाबा ले.. मेरे निप्पल पकड़ कर ‘सॉरी’ बोलती हूँ बस…

अनुजा ने अपने निप्पल इस तरह पकड़े कि दीपाली को हँसी आ गई और वो अनुजा क गले लग गई। विकास ने दोनों को बांहों में भर लिया।

विकास- चलो दोनों ही मेरे सीने पर सर रख लो यार.. बहुत थक गया हूँ थोड़ी देर आराम कर लूँ.. कसम से जानेमन, तेरी गाण्ड बहुत कसी थी साला लौड़ा बहुत मुश्किल से हरकत कर रहा था।दीपाली- हाँ पता है.. तभी तो गाण्ड की हालत बिगड़ गई.. मुझे तो बहुत नींद आ रही है.. मैं तो ऐसे ही आपके सीने पर सोऊँगी।

अनुजा- अरे अभी तो रात शुरू हुई है अभी से सोने की बात कर रही हो यार.. अभी मैंने तो चुदवाया ही नहीं है।

दीपाली- दीदी, आप चुदवा लो.. पर मुझे सोने दो.. हाँ दो घंटा सो लूँ.. उसके बाद मुझे उठा लेना।

विकास- सो जा मेरी रानी.. इस बहाने मुझे भी आराम मिल जाएगा।
 
कुछ देर के आराम के बाद विकास का लंड फिर अकड़ने लगा।

विकास- देखो तो अनु, लौड़ा इतनी जल्दी फिर से तन गया।

अनुजा- हो सकता है की गोली का असर हो।

विकास- हाँ जान कुछ भी हो सकता है.. चलो कारण कोई भी हो.. अब लौड़े को भूख लगी है तो खाना भी दो इसको.. चुदवाओगी न?

अनुजा- नहीं, पता नहीं क्यों मेरे पेट में हल्का दर्द हो रहा है.. अगर चुदवाया तो शायद ज़्यादा हो जाए.. तुम दीपाली को चोद लो.. मैं आती हूँ थोड़ी देर में.. मुझे बाथरूम करना है।

अनुजा गई तो विकास ने दीपाली पर नज़र डाली। दीपाली एकदम गहरी नींद में थी और पेट के बल लेटी हुई थी.. उसकी गाण्ड देख कर विकास उसके पास खिसका और बड़े प्यार से उसको सहलाने लगा।

विकास- दीपाली तुझे बनाने वाले ने बड़ी फ़ुर्सत से बनाया होगा.. तेरी गाण्ड कितनी नरम है.. मैंने कोई अच्छा काम किया होगा जो तुझ जैसी कमसिन लड़की.. आज मेरे बिस्तर पर नंगी पड़ी है.. जान लौड़े में तनाव तो बहुत है.. मगर मैं तेरी नींद खराब नहीं करना चाहता.. तूने आज मुझे बहुत बड़ी ख़ुशी दी है.. जब तक तेरी नींद पूरी नहीं हो जाती.. मैं बस ऐसे ही तेरे जिस्म को निहारता रहूँगा। विकास उसकी गाण्ड को धीरे-धीरे दबा रहा था.. उसका लौड़ा तन कर झटके मारने लगा था। कुछ देर ऐसा चलता रहा।

अनुजा वापस आ कर- अरे क्या बात है आप ऐसे ही बैठे हो… उठाया नहीं क्या दीपाली को।

विकास- नहीं यार.. ये बहुत गहरी नींद में है.. इसकी नींद खराब करने को दिल नहीं मान रहा।

अनुजा- अरे इसने खुद कहा था कि बस दो घंटे सोने दो.. उसके बाद जितना मर्ज़ी चोद लेना.. अभी तो इसको सोए तीन घंटे होने को आए हैं।

विकास- अरे नहीं अनु.. ये अभी छोटी है.. थोड़ा और सोने दो, अपने आप उठ जाएगी।

अनुजा- नहीं मेरे राजा.. इस वहम में मत रहो.. अरे आज इसने पहली बार चुदाई का मज़ा लिया है और खूब चुदी भी है.. ये ऐसी सुकून की नींद ले रही है.. अगर इसे उठाओ नहीं ना.. तो सुबह भी नहीं उठेगी.. चुदने के बाद कैसी अच्छी नींद आती है.. ये मुझसे ज़्यादा कौन जान पाएगा। जब पहली बार चैट पर अपने मुझे चोदा था.. याद है दूसरे दिन देर तक मैं सोती रही थी।

विकास- हाँ.. ये बात तो है.. चुदाई के बाद नींद बड़ी प्यारी आती है। अब तुम भी चुदने से मना कर रही हो.. लगता है इसे उठाना ही पड़ेगा।

अनुजा- सॉरी राजा.. सच्ची मेरे पेट में दर्द हो रहा है.. चुदाई का बिल्कुल भी मन नहीं है.. आप ऐसा करो इसको उठा ही लो और आराम से दोनों मज़े करो.. मुझे तो पेट दर्द की दवा लेनी होगी। ऐसा करो मैं दवा लेकर दूसरे कमरे में सो जाती हूँ.. तुम दोनों यहीं मज़ा करो।

विकास- अरे यार ये क्या बात हुई. यहीं सो जाओ ना।

अनुजा- नहीं विकास.. मैं सुकून से सोना चाहती हूँ और यहाँ तुम दोनों को चुदाई करते देखूँगी तो कहाँ नींद आएगी। आप इसे उठाओ.. मैं चली सोने…

अनुजा वहाँ से चली जाती है.. विकास दीपाली के पास लेट जाता है और उसकी पीठ पर हाथ फिराने लगता है। तभी दीपाली करवट लेती है और उसकी गाण्ड विकास के लौड़े के सामने हो जाती है। विकास उससे चिपक जाता है और लौड़ा उसकी जाँघों के बीच फँस जाता है। विकास अब दीपाली से चिपका हुआ उसके मम्मों को दबाने लगता है। थोड़ी देर में दीपाली वापस करवट लेती है और अबकी बार एकदम सीधी सो जाती है। विकास का लौड़ा बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था।

विकास- मेरी जान.. तू कब उठेगी, देख मेरा लौड़ा बेकाबू हो रहा है.. अब तो बर्दाश्त के बाहर है.. तू सोती रह मैं अब तेरी चूत में लौड़ा घुसा ही देता हूँ.. साली सोई हुई लड़की को चोदने का मज़ा ही कुछ और है।

विकास उकडूँ बैठ गया.. उसने दीपाली के पाँव मोड़ कर उनको फैलाया और लौड़े पर थूक लगा कर चूत पर टिका दिया और धीरे से धक्का मारा.. लौड़ा ‘घप’ से अन्दर घुस गया।

विकास दीपाली के ऊपर लेट गया और उसके निप्पल चूसने लगा.. इधर धीरे-धीरे झटके मारने लगा।

दीपाली- उहह उहह सर आह्ह.. मुझे उठा लिया होता… ऐसे सोते हुए ही चोद रहे हो.. आहह..

विकास- मेरी रानी.. ओह्ह ओह्ह.. कब से तेरे उठने का इन्तजार कर रहा हूँ साला लौड़ा तेरी कमसिन जवानी देख कर झटके मार रहा था.. इसी लिए मैंने सोचा अब लौड़ा चूत में जाएगा तब अपने आप तू उठ जाएगी।

दीपाली- आह्ह.. आह.. चोदो राजा जी.. आह्ह.. मज़ा आने लगा है.. उई आप कितने अच्छे हो.. आह्ह.. चोदो.. मेरी चूत की आज आह्ह.. सारी खुजली मिटा दो आह्ह..

विकास ने तो गोली ले रखी थी.. उसका लौड़ा तो लोहे की रॉड जैसा तना हुआ था और शॉट पर शॉट मार रहा था, मगर बेचारी दीपाली तो बिना कामोत्तेजक दवा के ही चूत में लौड़ा ले रही थी। उसकी चूत तो वक्त पर ही लावा उगलेगी ना.. लगभग 15 मिनट की जोरदार चुदाई के बाद दीपाली सिसकने लगी.. ठंडी ‘आहें’ भरने लगी।
 
दीपाली- आह्ह.. सस्स ऊह्ह सर आह्ह.. बहुत मज़ा आ रहा है उई… धपाधप चोदो और ज़ोर से आह उफ़फ्फ़ कककक सी मेरी चूत आह्ह.. का बाँध टूटने वाला है अई जोर से आह्ह.. और जोर से .. फाड़ दो आह्ह.. मेरी चूत को उफ़फ्फ़ मैं गई आह्ह..

दीपाली ने आँखें बन्द कर लीं.. वो चरमसुख का आनन्द लेने लगी और 2 मिनट बाद उसका बदन ढीला पड़ गया मगर विकास अब भी उसको ठोके जा रहा था।

दीपाली- आह्ह.. आह मेरे राजा जी.. आह्ह.. अब निकाल भी लो आह.. लौड़ा बाहर.. मेरी चूत में से.. आह आह जलन होने लगी है.. आईईइ आहइ आह।

विकास- अभी कहाँ जानेमन.. आह्ह.. उहह अभी तो मेरे लौड़े में करंट भी पैदा नहीं हुआ आह्ह.. आज तुझे इतना चोदूँगा आह्ह.. तेरी चूत की सारी खुजली मिटा दूँगा आह्ह..

दीपाली- आह आह प्लीज़ सर.. निकाल लो.. बड़ी जलन हो रही है आह्ह..

विकास- रानी निकाल तो लूँ मगर तेरी गाण्ड में वापस घुसाऊँगा.. अभी उसको ठीक से नहीं मार पाया हूँ आह्ह.. बोल मरवाएगी ना गाण्ड आह्ह..

दीपाली- आह्ह.. ठीक है मार लो आह्ह.. कम से कम चूत को तो सुकून मिलेगा।

विकास ने रफ्तार से दो-चार झटके मार कर लौड़ा बाहर निकाल लिया दीपाली ने चैन की सांस ली और बैठ कर लौड़े को देखने लगी।

दीपाली- क्या बात है राजा जी.. ये तो भूखे शैतान की तरह अकड़ा खड़ा है चूत का हाल बिगाड़ दिया.. फिर भी इसका मन नहीं भरा क्या?

विकास- अब बातें चोदना बन्द कर.. चल बन जा घोड़ी.. तेरी चूत का चबूतरा तो बना दिया.. अब गाण्ड को भी गड़हिया बना देता हूँ।

दीपाली- अरे गाण्ड भी मार लेना.. पहले लौड़े को चूस तो लूँ.. बड़ा मान ललचा रहा है.. ऐसे कड़क लौड़े को देख कर..

दीपाली ने लौड़े को मुँह में ले लिया और मज़े से चूसने लगी। विकास का बदन जलता अंगारा बन गया था.. वो हवसी हो गया था दीपाली का सर पकड़ कर झटके मारने लगा.. पूरा लौड़ा अन्दर तक डालता और बाहर निकाल लेता। दीपाली भी कम ना थी.. वो होंठों को भींच कर विकास के लौड़े को कसी चूत का अहसास दिला रही थी।

विकास- आह्ह.. आह चूस साली… क्या मस्त चूसती है राण्ड आह्ह.. मज़ा आ गया आह्ह.. साला आज तो लौड़ा झड़ने का नाम ही नहीं लेगा.. बहुत पावर की गोली खाई है.. आह्ह.. चूस ऐसे ही आह्ह..

विकास पागलों की तरह उसके मुँह को चोदने लगा। काफ़ी देर बाद विकास ने लौड़ा मुँह से बाहर निकाला।

विकास- चल अब घोड़ी बन जा बस अब तेरी गाण्ड में ही झडूंगा.. चूत तो पानी पी-पी कर काफ़ी गीली हो गई है। अबकी बार गाण्ड को भी वीर्य रस का मज़ा दे ही देता हूँ।

दीपाली- ऑउह्ह.. मेरे राजा जी.. आप के लौड़े में क्या मज़ा आ रहा था.. दिल कर रहा था बस अभी पानी निकाले और सारा गटक जाऊँ.. उफ्फ.. कितना गर्म अहसास था.. आपने सब चौपट कर दिया.. लो बन गई घोड़ी.. कर लो अपना अरमान पूरा.. गाण्ड की हालत पहले ही खराब है अबकी बार पूरी फाड़ ही दो.. ताकि दर्द होने का झंझट ही ना रहे।

दीपाली ने मुस्कुराते हुए ये बात कही थी.. उसके साथ विकास भी मुस्कुरा दिया। दीपाली अब घोड़ी बन गई थी और विकास तो एकदम बेसबरा हो रहा था उसने जल्दी से लौड़े को गाण्ड पर टिकाया और घुसा दिया पूरा.. एक ही बार में.. दीपाली ने लंड को चूस कर एकदम चिकना कर दिया था इसलिए एक ही झटके में पूरा अन्दर घुस गया।

दीपाली- आहइ मर गई रे.. अई सर आह्ह.. अपने एक ही बार में आह्ह.. पूरा घुसा दिया.. आईईइ गाण्ड पहले ही दुख रही थी उफ़फ्फ़…

विकास- मेरी जान बस जब तक मेरा रस तेरी गाण्ड में नहीं गिरता, तब तक ये दर्द रहेगा.. उसके बाद तू खुद कहेगी कि गाण्ड मरवाने में बहुत मज़ा आता है.. चल अब संभल जा… मैं तेरी सवारी शुरू कर रहा हूँ।

इतना बोलकर विकास रफ्तार से गाण्ड मारने लगा। दीपाली भी ‘अई उ उफ़फ्फ़ कककक’ करती रही। दस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई से विकास के लौड़े में करंट पैदा हो गया था। वो अब अँधाधुंध शॉट मार रहा था।

दीपाली- अईयाया सर.. आह्ह.. आह उफ़फ्फ़ आपका आह्ह.. पानी कब निकलेगा आह…

विकास- उह उह बस आह.. निकलने ही वाला है आह..।

विकास का लौड़ा एकदम से फट गया उसमें से वीर्य की धार निकलने लगी दीपाली की गाण्ड में गर्म-गर्म पानी भरने लगा.. उसको भी बड़ी राहत मिली। जब विकास ठंडा हो गया तो एक तरफ सीधा लेट गया दीपाली ने भी चैन की सांस लेते हुए विकास के सीने पर सर रख दिया।
 
अचानक से दीपाली बैठ गई और इधर-उधर देखने लगी।

दीपाली- सर दीदी कहाँ हैं कब से नहीं दिखीं…

विकास- हा हा हा इतनी देर बाद तुम्हें याद आया कि अनुजा यहाँ नहीं है हा हा हा… तुम भी कमाल करती हो।

दीपाली- इसमें कमाल की क्या बात है.. सोई हुई चूत में तो आपने लौड़ा घुसा दिया.. जब पूरी तरह से नींद टूटी.. तब तक लंड दिमाग़ पर हावी हो गया था। उस वक़्त किसे फ़र्क पड़ता है की कोई कहाँ है.. अब चुद कर सुकून में आई.. तब आपसे पूछ लिया.. अब बताओ भी…

दीपाली थोड़े तीखे अंदाज में बोली शायद विकास की बात उसको बुरी लगी।

विकास ने उसे सब बता दिया कि अनुजा के पेट में दर्द था.. वो दवा लेकर दूसरे कमरे में सो रही है।

दीपाली- उह्ह.. माँ.. सर आप भी ना.. चलो उनको देखते हैं… कहीं ज़्यादा तकलीफ़ तो नहीं हो रही उनको…

विकास- अरे मेरी रानी.. ऐसा कुछ नहीं है.. नॉर्मल सा दर्द था.. उसने दवा ले ली है.. अब वो सुकून से सो रही है.. अगर तुमको यकीन ना आए तो खुद जाकर देख आओ।

दीपाली बिना बोले कमरे से बाहर चली गई। पांच मिनट बाद वापस आकर विकास के पास बैठ गई।

विकास- क्यों हो गई तसल्ली.. देख आई अपनी दीदी को?

दीपाली- हाँ देख आई.. वो तो घोड़े बेच कर सो रही हैं. मैंने उनको छू कर भी देखा.. मगर उनकी नींद काफ़ी गहरी है इसलिए मैं वापस आ गई वरना उनसे पूछ लेती कि अब दर्द कैसा है..

विकास- चलो मेरे कहने से ना सही खुद देखने से तो तुम्हें यकीन हुआ कि अनु सो रही है। अब वहाँ क्या बैठी हो.. यहाँ आ जाओ मेरी बांहों में…

दीपाली दोबारा से विकास के सीने पर सर रख कर उससे लिपट जाती है और बड़े प्यार से उसके पेट पर हाथ घुमाने लगती है।

दीपाली- सर एक बात कहूँ?

विकास- हाँ जान.. कहो ना…

दीपाली- दो दिन पहले तक मैं कितनी अनजान थी ना.. इन सब बातों से लौड़ा, चूत और चुदाई क्या होती है.. कुछ पता नहीं था, मगर अब देखो आज एक ही दिन में कई बार आपसे चुदवा चुकी हूँ और नंगी ही आपसे लिपटी हुई हूँ।

विकास- मेरी जान.. दो दिन पहले तू बस एक साधारण लड़की थी.. मगर अब तू…

विकास बोलता हुआ रुक गया।

दीपाली- कहो ना सर.. अब मैं क्या?

विकास- सॉरी यार गलत शब्द दिमाग़ में आ गया था।

दीपाली- आपको मेरी कसम है… अब बताओ अब क्या?

विकास- ओके बोलता हूँ.. पर प्लीज़ बुरा मत मानना.. अब तू पक्की रंडी बन गई है।

दीपाली- ये तो गाली है ना.. वैसे ये रंडी क्या होती है।

विकास- बहुत भोली है तू.. मेरी जान जो लड़की बिना डरे कभी भी कहीं पर भी किसी से भी चुदवा ले.. उसे रंडी कहते हैं।

दीपाली- ऊह.. माँ.. किसी से भी चुदवा लेती है.. सर मगर मैंने तो बस आपसे चुदवाया है.. मैं कैसे रंडी हुई?

विकास- अरे मेरी माँ.. तुझे कैसे समझाऊँ.. अब देख तू कुँवारी है ना.. और बिना शादी के तूने चूत दे दी .. अगर मैं तेरा ब्वॉय-फ्रेंड होता तो चलता.. मगर तुमने तो अपने सर से चुदवा लिया.. ऐसी लड़की को भी समाज रंडी बोलता है.. अब बस इसके आगे कुछ मत पूछना.. मैंने ग़लती से बोल दिया था.. मैं तेरे आगे हाथ जोड़ता हूँ।

दीपाली हँसने लगती है।
 
दीपाली- सर प्लीज़ आप ऐसे ना करो.. मुझे कुछ पता नहीं है प्लीज़.. आप नहीं समझाओगे तो कौन बताएगा.. बताओ ना प्लीज़…।

विकास- अच्छा सुन वो ब्लू-फिल्म देखी थी ना.. उसमें वो लड़की रंडी थी.. समझी सीधी बात है जो लड़की बिंदास हो कर चुदाई के लिए किसी भी वक्त तैयार रहे.. लौड़ा किसका है उसको कोई मतलब ना हो.. बस चुदना चाहती हो.. वो पक्की रंडी होती है और दूसरी बात सेक्स की भाषा में उत्तेजना बढ़ाने के लिए भी प्यार से रंडी बोला जाता है..

दीपाली- तब तो ठीक है.. आप भी मुझे रंडी बोल सकते हो.. अच्छा सर एक बात और.. अब इम्तिहान आने वाले हैं और इस बार बोर्ड के इम्तिहान हैं मैं पास तो हो जाऊँगी ना…

विकास- अरे पगली तो बहुत होशियार स्टूडेंट है.. सब विषयों में कितने अच्छे नम्बर लाती है.. रही विज्ञान की बात तो अब तो तुझे लिंग-योनि जैसे शब्दों से शर्म नहीं आएगी और मैं हूँ ना.. कल से तुझे असली ज्ञान दूँगा। ये चुदाई तो चलती रहेगी.. तेरा साल बर्बाद नहीं होने दूँगा.. ओके…

दीपाली- ओके सर.. मैं बहुत खुश हूँ कि मुझे आप जैसा सर मिला.. अब मुझे पास होने से कोई नहीं रोक सकता क्योंकि मैंने वो सफ़र तय कर लिया है.. जो बेहद जरूरी था.. विज्ञान से चुदाई ज्ञान तक का सफ़र…

विकास- अरे वाह.. ये हुई ना बात…

विकास ने कस कर दीपाली को अपनी बांहों में भर लिया और काफ़ी देर तक वो दोनों ऐसे ही चिपके रहे।

दीपाली- सर छोड़ो.. मुझे बाथरूम जाना है.. बड़ी ज़ोर से सूसू आ रही है।

विकास- हा हा हा सूसू.. अरे तू कोई छोटी बच्ची है क्या.. जो सूसू बोल रही है.. पेसाब बोल.... सूसू हा हा हा…

दीपाली- बड़े गंदे हो आप.. अब जाने भी दो… नहीं तो यहीं निकल जाएगी।

दीपाली वापस कमरे में आकर शीशे के सामने टेढ़ी खड़ी होकर अपनी गाण्ड देखने की कोशिश करने लगी.. तभी विकास भी आ गया।

विकास- दीपाली ऐसे क्यों खड़ी हो.. क्या देख रही हो?

दीपाली- अपनी गाण्ड देख रही हूँ.. अभी भी ऐसा लग रहा है जैसे कोई चीज़ अन्दर घुसी हुई हो.. दर्द भी हो रहा है गाण्ड में…

विकास- अरे कुछ नहीं.. इतनी कसी हुई गाण्ड पहली दी है ना.. तो ऐसा लगता है.. चल आ जा बिस्तर पर.. मैं थोड़ा सहला देता हूँ.. आराम मिलेगा…

दीपाली- सर.. सिर्फ़ गाण्ड को सहलाओगे.. मेरा पूरा बदन अकड़ गया है आप थोड़ा दबा दो ना प्लीज़…

विकास- जान तू दो मिनट रुक.. मैं सरसों का तेल थोड़ा गर्म कर के लाता हूँ.. उसकी मालिश से तेरा सारा दर्द निकल जाएगा।

दीपाली ने कुछ सोचा उसके बाद बिस्तर पर पेट के बल लेट गई।

विकास रसोई में चला गया और वहाँ से एक प्याली में तेल को हल्का गर्म कर के ले आया।

विकास- ले.. मैं आ गया.. अब देख थोड़ी ही देर में तुझे आराम मिल जाएगा।

विकास बिस्तर पर बैठ गया और अपने हाथों पर ढेर सारा तेल लेकर दीपाली की गर्दन से मालिश करना शुरू हो गया।

दीपाली- आह.. गर्म तेल का अहसास कितना अच्छा है.. उफ सर.. आपके हाथ में तो जादू है.. हाथ लगाते ही बड़ा सुकून मिल रहा है आह्ह.. दबाव उफ्फ हाँ.. ऐसे ही.. मज़ा आ रहा है।

विकास बड़े प्यार से मालिश करने लगा.. गर्दन से पीठ पर होता हुआ गाण्ड को रगड़ने लगा। करीब आधा घंटा तक वो मसाज करता रहा।

दोस्तों इतनी कमसिन लड़की नंगी पड़ी हो और उसके जिस्म को मालिश हो रही हो तो जाहिर सी बात है.. उसकी उत्तेजना तो बढ़ेगी ही.. क्योंकि विकास गाण्ड में तेल डाल कर ऊँगली अन्दर तक डाल रहा था, कभी उसकी चूत को दबा रहा था।

दीपाली एकदम जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी। वो एकदम गर्म हो गई थी। इधर विकास का भी यही हाल था। दीपाली के यौवन को छूने से उसके लौड़े में तनाव पैदा हो गया था और होगा भी क्यों नहीं.. 18 साल की कली को मसाज दे रहा था.. लौड़ा तो फुफकार मारेगा ही।

दीपाली- आह्ह.. आह उफ़फ्फ़… सर आह्ह.. बड़ा मज़ा आ रहा है.. आपने तो आह.. मेरे जिस्म में आग लगा दी.. उफ्फ अब तो आ आपके लौड़े से चूत और गाण्ड के अन्दर तक मालिश कर ही दो आह्ह.. तभी मुझे सुकून मिलेगा…

विकास- हाँ साली रंडी.. तू है ही इतनी हॉट कि साला कोई भी तुझे देख कर गर्म हो जाए और मैं तो कब से तेरे यौवन को मालिश कर रहा हूँ साला लौड़ा फटने को आ गया.. चल अब बन जा घोड़ी.. पहले तेरी गाण्ड बजाऊँगा.. उसके बाद चूत की आग बुझाऊँगा।

दीपाली झट से घोड़ी बन गई और विकास ने अपना लौड़ा गाण्ड में डाल दिया.. करीब आधा घंटा तक वो गाण्ड मारता रहा.. अबकी बार दीपाली को दर्द नहीं बल्कि मज़ा मिल रहा था।
 
लौड़ा गाण्ड में घुस रहा था और उसकी चूत पानी-पानी हो रही थी। जब चूत की आग हद से ज़्यादा हो गई तो दीपाली ने विकास को नीचे लिटा दिया और खुद उसके लौड़े पर बैठ गई.. और कूदने लगी.. केवल 5 ही मिनट में वो झड़ गई..

मगर विकास कहाँ झड़ने वाला था.. वो नीचे से धक्के मारता रहा। उसके बाद स्थिति बदल कर उसे चोदने लगा।

दोस्तो, 25 मिनट तक विकास चूत में लौड़ा पेलता रहा.. दीपाली दोबारा झड़ने को आ गई.. तब कहीं जाकर विकास के लौड़े ने लावा उगला.. दोनों एक साथ झड़ गए और एक-दूसरे से लिपटे हुए पड़े रहे। चुदाई की थकान और रात भी काफ़ी हो गई थी.. दोनों कब सो गए.. पता भी नहीं चला।

सुबह 6 बजे अनुजा की आँख खुली वो भी नंगी ही सोई पड़ी थी.. उठ कर वो सीधी बाथरूम में गई.. नहा कर फ्रेश हुई।

आज उसने नीली साड़ी पहनी, उसमें वो बहुत सुन्दर लग रही थी।

उसके बाद वो दूसरे कमरे में गई.. जहाँ विकास और दीपाली एक-दूसरे की बांहों में गहरी नींद में सोए हुए थे।

अनुजा- लो इनको देखो.. अभी तक बेशर्मों की तरह सोए पड़े हैं।

अनुजा ने उनको उठाने की बजाय कमरे की बत्ती बन्द की और रसोई में चली गई।

लगभग 7 बजे तक अनुजा ने आलू के परांठे और चाय तैयार कर ली.. उसके बाद वापस कमरे में गई.. दोनों अभी तक वैसे ही पड़े थे।

अनुजा- दीपाली.. अरे उठ भी जा.. अब क्या पूरा दिन सोती रहेगी.. स्कूल नहीं जाना क्या?

दोस्तो, मैं आपको बता दूँ.. दीपाली का स्कूल 8 से 2 बजे तक का था।

दीपाली अंगड़ाई लेती हुई उठी.. वो पूरी नंगी थी.. उसकी चूत पर वीर्य लगा हुआ था.. जो सूख गया था।

दीपाली- उहह.. क्या दीदी.. कितनी अच्छी नींद आ रही थी.. सोने भी नहीं देती आप…

विकास भी उठ गया था.. उसने दीवार घड़ी की ओर देखा तो चौंक कर बैठ गया।

विकास- अरे बाप रे… 7 बज गए.. क्या अनु पहले क्यों नहीं उठाया.. दीपाली चल उठ जा.. स्कूल जाना बहुत जरूरी है.. आज इम्तिहान के प्रवेश-पत्र मिलेंगे।

अनुजा- अच्छा मैंने नहीं उठाया.. आप ही रात भर चोदने का मज़ा लेते रहे थे.. चलो कुछ देर नहीं हुई.. नास्ता रेडी है.. बस तुम दोनों तैयार हो जाओ।

विकास कुछ नहीं बोला और सीधा बाथरूम में घुस गया।

अनुजा ने दीपाली का हाथ पकड़ कर उसको खड़ा किया।

अनुजा- अरे बहना.. जल्दी कर तेरे घर भी जाना है.. बैग लेने.. और स्कूल ड्रेस भी वहीं है।

दीपाली आधी खुली आँखों से बाथरूम की तरफ बढ़ने लगी।

अनुजा- यहाँ कहाँ जा रही है.. इसमें विकास है.. सारी रात चुदवा कर भी तेरा मन नहीं भरा क्या.. जो अभी भी वहीं जा रही है.. दूसरे कमरे में जा और जल्दी तैयार हो जाना.. ओके…!

दीपाली कुछ बोली नहीं बस अनुजा की तरफ देख कर मुस्कुरा दी और वहाँ से चली गई।

अनुजा कमरे का हाल ठीक करने लगी।

करीब 20 मिनट में दोनों नहा कर फ्रेश हो गए।
 
दीपाली ने अपने कपड़े लिए और पहनने लगी। विकास भी वहीं उसके सामने खड़ा कपड़े पहन रहा था।

अनुजा- हद हो गई बेशर्मी की.. कपड़े बाथरूम में ले गई होती.. नहा कर ऐसे ही नंगी बाहर आ गई। अब कपड़े भी यहीं पहन रही है।

दीपाली- दीदी आपने ही मुझे बेशर्म बनाया है और सर से कैसी शर्म? रात भर नंगी इनके साथ थी तो अब क्या नया हो गया.. दीदी.. प्लीज़ ये ब्रा का हुक बन्द करो ना.. कब से ट्राइ कर रही हूँ हो नहीं रहा..

अनुजा- मेरी जान.. जब सर से कोई शर्म नहीं है तो हुक भी उनसे ही बन्द करवा ले और अब तू बड़ी साइज़ की ब्रा खरीद ले.. विकास ने तेरे मम्मों को दबा-दबा कर बड़े कर दिए हैं हा हा हा…

दीपाली- क्या दीदी.. आप भी ना.. एक ही रात में बड़े हो गए क्या.. अब आप बन्द कर रही हो या सच में सर को बोलूँ।

अनुजा- ला इधर आ.. बड़ी बेशर्म हो गई है और रात भर तेरे सर ने दबाए भी तो खूब हैं ना.. फरक तो पड़ेगा ही.. अभी नहीं तो कुछ दिन बाद बड़े हो जाएँगे.. खरीदना तो पड़ेगा ही तुमको..

दीपाली- चलो मान लिया मैंने मगर मैं क्यों खरीदूँ.. सर ने बड़े किए है वो ही लाकर दे देंगे हा हा हा हा…

कमरे में हँसी का माहौल बन गया। अनुजा भी उसकी बात से हँसने लगी।

अनुजा- अच्छा ठीक है.. मंगवा लेना, अभी जल्दी रेडी हो जा मेरी माँ.. बातें शाम को कर लेना।

दीपाली- ना ना माँ नहीं सौतन.. हा हा हा हा..

दीपाली पर मस्ती करने का भूत सवार हो गया था।

अनुजा इसके आगे कुछ ना बोली.. बस उसको गुस्से से आँख दिखाई और कपड़े पहनने को बोल कर नास्ता लाने चली गई।

नाश्ते के दौरान भी हल्की-फुल्की बातें हुईं.. उसके बाद विकास निकल गया।

अनुजा और दीपाली भी साथ में निकले। दीपाली के घर के बाहर गमले से चाबी ली.. जल्दी से उसने ड्रेस पहना और स्कूल के लिए निकल गई। चाबी वापस वहीं रख दी।

इस दौरान अनुजा ने घर की तारीफ की और दीपाली से कहा- स्कूल से वापस उसके पास आ जाए.. उसके मॉम-डैड तो शाम तक आएँगे।

दीपाली ने अनुजा को किस किया और बाय बोल कर चली गई।

****************

स्कूल के गेट पर वही तीनों लड़के खड़े उसको आते हुए देख रहे थे।

आज दीपाली के चेहरे में अजीब सी कशिश थी और वो बड़ी चहकती हुई स्कूल में दाखिल हुई।

दीपक- उफ्फ साली क्या आईटम है.. यार जब भी सामने से गुजरती है.. साला लौड़ा इसको सलामी दिए बिना रह नहीं पाता है।

सोनू- यार कब मिलेगी ये साली.. मन तो करता है साली को जबरदस्ती चोद दूँ।

मैडी- अबे साले.. हवसी! रेप की सोचिओ भी मत.. साला आजकल सज़ा बहुत खतरनाक है.. बहन के लौड़े सीधे फाँसी की माँग करते हैं।

सोनू- तो क्या करें यार.. ये साली खुद तो आ कर बोलेगी नहीं कि आओ मेरी चूत ले लो।

दीपक- यार साली के नखरे भी बहुत हैं ठीक से देखती भी नहीं है और ना किसी से बात करती है।

मैडी- अरे नखरे तो होंगे ही.. स्कूल में सब से ज़्यादा खूबसूरत माल है और साली को भगवान ने फिगर भी ऐसा दिया कि देखने वाला ‘आह’ भरे बिना रह नहीं सकता!

दीपक- यार कुछ दिन बाद इम्तिहान शुरू हो जाएँगे.. उसके बाद स्कूल से छुट्टी.. साली 12वीं में है.. अगर पास हो गई तो सीधे कॉलेज जाएगी.. पता नहीं कौन से कॉलेज में जाए.. इस बार हमारी तो पास होने की उम्मीद भी नहीं है।

सोनू- हाँ यारों.. किसी भी तरह इम्तिहान के पहले या इम्तिहान के दौरान ही इस साली को पटाओ वरना जिंदगी भर अफ़सोस ही करते रहेंगे।

(हाय.. दोस्तो, अब इनके बारे में बताने का वक़्त आ गया है।)

इन तीनों की उम्र लगभग 22 के आस-पास होगी.. कोई एक आध महीने का फ़र्क होगा। तीनों दिखने में भी बस ठीक-ठाक से ही हैं इसी लिए कोई लड़की इनको भाव नहीं देती और हाँ तीनों पढ़ाई में भी कमजोर हैं.. बस आवारगर्दी करते हैं कई बार फेल होकर अब 12वीं तक आ पाए हैं।

इनका रुझान शुरू से दीपाली पर ही रहा है क्योंकि वो एक सीधी-सादी लड़की थी और बला की खूबसूरत भी थी इसलिए लट्टू होकर ये उसके पीछे पड़े हैं।

इनकी बातों से आपको लग रहा होगा कितने बड़े चोदू होंगे मगर ऐसा कुछ नहीं है.. कोई 3 साल पहले इन्होंने अपने से जूनियर एक लड़के बबलू को फंसाया था वो कोई कम उम्र का चिकना सा लौंडा दिखने में गोरा-चिट्टा था.. बस इन तीनों ने उसको बहला-फुसला लिया और उसकी गाण्ड मार ली.. मगर इनको ज़्यादा दिन तक वो गाण्ड भी नहीं मिली।

बबलू के पापा सरकारी नौकरी में थे, यहाँ से तबादला हो गया तो दूसरी जगह चले गए और बबलू भी उनके साथ चला गया। इन तीनों ने कोई 2 या 3 बार उसकी गाण्ड मारी होगी। उस दिन से लेकर आज तक चूत तो बहुत दूर की बात है किसी लड़के की गाण्ड भी नसीब नहीं हुई.. बस हाथ से काम चला रहे हैं।
 
वो तीनों काफ़ी देर तक दीपाली के बारे में बात करते रहे.. क्लास में भी बस उसी को घूरते रहे।

आज प्रिंसिपल सब को इम्तिहान के प्रवेश-पत्र के बारे में बता रही थीं कि जाते समय लेते जाना..

सब कुछ सामान्य चल रहा था, जब विकास उस क्लास में आया तो दीपाली के होंठों पर मुस्कान आ गई। रात की सारी बातें उसे याद आने लगीं.. उसने झट से नज़रें नीची कर लीं उसको उस वक्त बड़ी शर्म आई। स्कूल की छुट्टी हुई तो विकास ने दीपाली को बोल दिया- तुम अनुजा के पास घर चली जाओ.. मुझे आने में देर होगी.. सबको प्रवेश-पत्र जो देने हैं।

दीपाली गेट से जब बाहर निकली तो वो तीनों उसके पीछे हो लिए और बस चुपचाप चलने लगे।

जब एक सुनसान गली आई तब दीपक ने हिम्मत करके अपने कदम तेज किए और दीपाली के बिल्कुल बराबर चलने लगा और उसकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा। दीपाली कुछ नहीं बोली और बस चलती रही।

दीपक- दीपाली, आख़िर बात क्या है.. हम एक क्लास में हैं. तुम मुझसे कभी बात भी नहीं करती हो?

दीपाली- क्या बात करूँ.. मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी.. मैं जानती हूँ तुम तीनों पीठ पीछे से किस तरह लड़कियों की बुराई करते हो.. जाओ यहाँ से।

दीपक- अरे नहीं नहीं.. तुम गलत समझ रही हो.. हम बुराई नहीं तारीफ करते है.. बस।

तभी वो दोनों भी उसके बराबर आ गए और उसकी हाँ में हाँ मिलने लगे।

सोनू- हाँ दीपाली.. स्कूल की सब लड़कियां एक तरफ और तुम एक तरफ ... क्योंकि तुम बहुत भोली हो जिसने भी तुम्हें हमारे बारे में बताया है.. तुम खुद जरा सोच कर देखो वो सही लड़की नहीं है.. तुम समझ रही हो ना मेरी बात को…

दरअसल सोनू ऋतु की बात कर रहा था जो दीपाली के करीब थी। उसका ब्वॉय-फ्रेण्ड अजय था.. दोनों काफ़ी मज़ा करते हैं. स्कूल में सब को ये पता है.. बस सोनू का इशारा उसी तरफ था।

दीपाली- देखो कौन कैसा है.. मुझे कोई लेना-देना नहीं.. बस तुम लोग मेरा पीछा करना बन्द करो।

मैडी- अबे सालों, क्यों बेचारी को परेशान कर रहे हो.. इसका मन नहीं है बात करने का.. तो ना सही.. चलो इसको जाने दो…

दीपाली ने एक नज़र मैडी को देखा जैसे उसका शुक्रिया अदा कर रही हो।

मैडी- दीपाली, मैं इनको ले जाता हूँ.. बस एक बात सुन लो सोमवार को मेरा जन्मदिन है.. अगर हो सके तो प्लीज़ आ जाना.. ओके बाय.. चलता हूँ।

जाते हुए मैडी बस दीपाली की आँखों में ही देख रहा था। दीपाली के होंठों पर बेहद हल्की सी मुस्कान आई थी, जिसे वो मैडी से छुपा ना सकी। मैडी भी बिना उसका जवाब सुने उन दोनों को लेकर दूसरी गली में मुड़ गया।

सोनू- अबे ले क्यों आया.. साली को अभी सीधा कर देता.. बहुत भाव खा रही थी।

मैडी- साले सब्र कर.. हमेशा जल्दी में रहता है।

दीपक- और यह जन्मदिन का क्या चक्कर है यार…?

मैडी- साले भूल गया क्या सोमवार को है ना..

दीपक- अरे याद है.. मगर उसको क्यों बोला.. वो कौन सा आ ही जाएगी और मान ले आ भी गई तो क्या होगा?

सोनू- अरे यार.. कल का बता दिया होता.. साली को किसी सुनसान जगह ले जा कर चोद देते।

मैडी- अबे बहन के लौड़े.. कभी तो दिमाग़ का इस्तेमाल किया कर.. कल का रख लेते और वो सुनसान जगह क्यों आती हमारे साथ? हरामी उसको मेरा घर पता है.. वो अगर आती भी है तो वहीं आती। अब सुन सोमवार को वो पक्का आएगी और उसके साथ कोई बदतमीज़ी मत करना.. मेरे दिमाग़ में एक प्लान है.. बस समझो कम बन जाएगा।

दीपक- क्या है.. बता ना यार?

मैडी- अभी नहीं.. सोमवार को.. जब वो आएगी.. तब बताऊँगा। अब चलो यहाँ से.. यहाँ झांट भी नहीं उखड़ पाएगी।

दीपाली सीधी अनुजा के घर चली जाती है।

उसका दरवाजा उस वक्त खुला हुआ था। अनुजा कमरे में बैठी टीवी देख रही थी।

दीपाली- हाय दीदी.. क्या कर रही हो?

अनुजा- अरे तू आ गई.. विकास कहाँ है?

दीपाली- उनको थोड़ा काम है.. बाद में आएँगे।

अनुजा- इधर आ देख.. न्यूज़ में क्या दिखा रहे हैं.. कल 5 लड़कों ने जन्मदिन पार्टी में एक लड़की को नशे की दवा देकर उसका बलात्कार कर दिया.. कुत्तों को पुलिस ने पकड़ लिया है.. बेचारी वो लड़की अब तक सदमे में है।

दीपाली- कितने गंदे लड़के होंगे.. जबरदस्ती की क्या जरूरत थी.. प्यार से कर लेते।

अनुजा- लड़की कुँवारी थी.. मर्ज़ी से नहीं मानी.. तभी तो ऐसा हुआ उसके साथ.. आजकल किसी का भरोसा नहीं करना चाहिए।

दीपाली- दीदी एक साथ 5 चोदेंगे.. तो कितना दर्द हुआ होगा ना बेचारी को?

अनुजा- हाँ दर्द तो हुआ ही होगा वैसे एक बात है.. अगर लड़की पहले से चुदी हुई हो और अपनी मर्ज़ी से चुदवाए तब ज़्यादा से चुदने में मज़ा आता है।

दीपाली- सच में दीदी… लेकिन 5 कुछ ज़्यादा नहीं हो जाते हैं…
 
अनुजा- हाँ 5 ज़्यादा है.. बेस्ट 3 होने चाहिए.. एक लौड़ा मुँह में.. दूसरा चूत और आखिरी गाण्ड में.. बस.. फिर देखो क्या मज़ा मिलता है।

दीपाली- ऊह.. माँ.. अब समझ में आया.. वो तीनों मेरे पीछे क्यों पड़े हैं।

अनुजा- कौन तीनों.. बता तो?

दीपाली ने स्कूल से ले कर जन्मदिन तक की बात अनुजा को बता दी।

अनुजा- हाँ पक्का.. वो तुझे चोदना चाहते हैं मत जाना उनके पास.. अगर तुझे सच में मज़ा लेना है तो उनको ये अहसास मत होने देना कि तू चुदना चाहती है.. तब जाना.. मगर ऐसी-वैसी कोई चीज़ मत खाना.. वरना होश में नहीं रहेगी और वो तेरे मज़े ले लेंगे.. तुझे कुछ मज़ा नहीं आएगा।

दीपाली- नहीं दीदी, अभी मेरा चुदने का ऐसा कोई इरादा नहीं है.. अगर कभी मन हुआ भी तो उनके पास नहीं जाऊँगी.. किसी तरह उनको मेरे पास बुलाऊँगी।

अनुजा- हाँ ये एकदम सही रहेगा.. चल उनकी बात छोड़.. ये बता रात को कितनी बार चुदाई की तुम लोगों ने?

दीपाली ने रात की सारी बातें अनुजा को बताईं.. सुनते-सुनते अनुजा अपनी चूत मसलने लगी।

अनुजा- दीपाली, तू बड़ी कमाल की आइटम है.. एक ही दिन में इतनी बार चुदी.. बड़ी हिम्मत वाली है रे तू.. तेरी बातें सुन कर मेरी चूत गीली हो गई।

दीपाली- अच्छा.. दिखाओ तो.. अभी रस चाट कर आपको मज़ा दे देती हूँ।

अनुजा- अरे नहीं.. विकास आता ही होगा.. पहले साथ खाना खाएँगे.. उसके बाद मज़ा करेंगे।

थोड़ी देर में विकास भी आ गया.. तीनों ने खाना खाया और थोड़ी बातें की, जब अनुजा ने चुदाई की बात की तो विकास ने मना कर दिया।

उसने कहा- दीपाली के इम्तिहान करीब हैं इसको पढ़ाई में ध्यान देने की खास जरूरत है।

अनुजा- लेकिन विकास आज ही ये यहाँ है.. कल से तो बस शाम को आएगी।

विकास- देखो अनु मैं एक आदमी होने के साथ-साथ एक ज़िम्मेदार टीचर भी हूँ और दीपाली को पास कराना मेरी ज़िमेदारी है। ये सब कभी भी कर लेंगे.. मगर इम्तिहान में फेल हो गई तो इसका साल बर्बाद हो जाएगा। विकास की बात अनुजा के साथ दीपाली भी अच्छे से समझ गई।

अनुजा- ठीक है.. मैं बर्तन साफ कर देती हूँ.. आप इसे पढ़ाओ।

शाम के 5 बजे तक विकास जी-जान से उसको समझाता रहा.. अनुजा भी काम ख़त्म करके उनके साथ बैठ गई।

दीपाली- आहह कमर अकड़ गई.. बैठे-बैठे.. अब मुझे जाना चाहिए मॉम-डैड भी आते ही होंगे और सर थैंक्स.. आज अपने मुझे बहुत अच्छे से सब समझाया।

विकास- हाँ.. अब तुम जाओ.. मन तो बहुत था तेरी चूत लेने का .. मगर आज नहीं.. कल शाम को आओगी, तब पढ़ाई के साथ चुदाई भी करूँगा.. ओके अब तुम जाओ…

दीपाली ने विकास को एक चुम्बन किया और अनुजा के गले लग कर कान में धीरे से बोली।

दीपाली- सर का बड़ा मन है चोदने का.. अब आप मेरे जाने के बाद मज़े करना… उनके लौड़े को मेरी तरफ़ से भी थोड़ा चूसना ओके…

अनुजा बस मुस्कुरा देती है और दीपाली वहाँ से चली जाती है।

विकास- क्या बोल रही थी कान में.. वो?

अनुजा- मेरे राजा.. आपने उसे इतने प्यार से चोदा कि आपके लौड़े की दीवानी हो गई है वो.. जाते-जाते भी आपका लौड़ा चूसना चाहती थी मगर आपके मना करने के कारण मुझे बोल कर गई है कि उसकी तरफ से मैं आपके लौड़े को चुसूँ।
 
विकास- अच्छा अगर उसका इतना मन था.. तो एक बार जाते-जाते चुसवा देता.. चल, अब गई तो जाने दो.. वैसे भी कल रात को तुम सो गई थीं.. आज पूरी रात तुम्हें चोद कर भरपाई कर दूँगा.. आ जाओ मेरी जान.. कमरे में चल कर थोड़ा आराम कर लें.. पूरी दोपहर बैठ कर थक गए हैं।

दोनों कमरे में जाकर लेट जाते हैं। अनुजा विकास की पैन्ट का हुक खोलने लगती है।

विकास- क्या बात है.. अभी चुदना है क्या..? मैं समझा रात को आराम से करेंगे।

अनुजा- चुदना नहीं है.. बस दीपाली की बात याद आ गई.. थोड़ा लंड चूसने दो ना.. उसकी बात टालने का मन नहीं कर रहा।

विकास ने भी उसकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिलाई और लौड़ा बाहर निकाल लिया। अनुजा उसको चूसने लगी।

(दोस्तों अनुजा को लौड़ा चूसने दो.. चलो हम दीपाली के पास चलते हैं वो अब तक घर पहुँची या नहीं.)
 
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