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चुदाई का ज्ञान

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दीपाली- नहीं.. मैं कब से तरस रही हूँ.. मेरे होंठों सूख गए.. लाओ लौड़ा मेरे मुँह में दो और तुम चूत चाटो।

भिखारी को समझ आ गया वो उल्टा हो गया.. यानी दीपाली सीधी ही लेटी रही और उसने ऊपर आकर उसके मुँह में लौड़ा डाल दिया और खुद चूत चाटने लगा।

भिखारी कमर को हिला-हिला कर दीपाली के मुँह में लौड़ा अन्दर बाहर कर रहा था.. साथ ही साथ उसकी चूत को चाट रहा था। अभी पाँच मिनट भी नहीं हुए होंगे.. दीपाली फिर से उत्तेजित हो गई और लौड़े को मुँह से निकाल कर उसे चोदने को बोलने लगी।

(दोस्तों, आप सोच रहे होंगे कि एक अँधा आदमी इतने आसन कैसे ले रहा है.. तो आपको बता दूँ कि चुदाई अक्सर रात के अंधेरे में होती है। वो कहते हैं ना कि रात के अंधेरे में कहाँ मुँह काला करके आई है.. तो दोस्तों, आँख वाले भी ये काम चुपके से अंधेरे में करते हैं.. इसमें आँख का कोई काम नहीं.. यहाँ तो जिस्म में आग और लंड में जान होनी चाहिए. इशारे से सब काम हो जाता है और लौड़ा तो ऐसा होता है कि चूत के करीब भी हो तो अपने आप अन्दर जाने का रास्ता ढूँढ़ लेता है। मेरी बात वो ही समझ सकता है जिसने ये अनुभव किया होगा। तो चलो अब आगे आनन्द लीजिए।)

भिखारी समझ गया कि अब ज़्यादा देर करना ठीक नहीं.. कोई आ गया तो सारा खेल चौपट हो जाएगा। वो दीपाली के पैरों के बीच आ गया और उसने उसके दोनों पैर अपने कंधे पर डाल लिए.. लौड़ा अपने आप चूत के पास हो गया।
 
भिखारी- मेरी जान.. अब संभल जा ... मेरा हथियार अब तेरी नन्ही सी चूत में जाने वाला है।

दीपाली- आह डाल दो.. अब तो चूत का हाल से बेहाल हो गया है.. अब तो बिना लौड़े के इसको सुकून नहीं आएगा।

भिखारी ने अपना सुपारा चूत पर टिकाया.. ऊँगली से टटोल कर चूत की फाँक को थोड़ा खोला और धीरे से लौड़ा आगे सरका दिया।

दीपाली- आहह.. आपका लौड़ा बहुत मोटा है ... उई! सुपाड़ा घुसते ही चूत फ़ैल गई है.. उई! आराम से डालना अन्दर.. आहह.. कहीं आपके बम्बू से मेरी चूत फट ना जाए..

भिखारी- डर मत मेरी जान.. तेरी जैसी लड़की तो नसीब से चोदने को मिलती है.. तुझे तकलीफ़ दूँगा तो कामदेव नाराज़ नहीं हो जाएँगे मुझसे.. तू बस थोड़ा दर्द सहन कर ले.. मैं आराम से लौड़ा घुसा रहा हूँ।

भिखारी ने धीरे-धीरे लौड़े को आगे धकेलना शुरू कर दिया। वैसे तो दीपाली ने विकास का लंबा लंड चूत में लिया हुआ था मगर ये लौड़ा कुछ ज़्यादा ही मोटा था.. तो उसकी चीख निकल गई.. मगर वो बस आनन्द के मारे आँखें मींचे पड़ी रही।

दीपाली- आहह.. ससस्स उह.. डाल दो आहह.. आपके लौड़े में आहह.. इतनी गर्मी है उफ.. चूत की आग और भड़क गई.. आहह.. पूरा डाल दो.. एक ही साथ.. अब बर्दास्त नहीं होता।

भिखारी ने आधा लौड़ा घुसा दिया था.. दीपाली की बात सुन कर उसने कमर को पीछे किया और एक जोर का झटका मारा। ‘फच्च’ की आवाज़ के साथ 9″ का लौड़ा चूत में समा गया।

दीपाली- ईएयाया उऊ.. माँ, मार डाला रे.. आहह.. तुम आदमी हो या घोड़े.. आहह.. कितना बड़ा लौड़ा है.. लगता है तुमने चूत में गड्डा खोद दिया आहह.. कितना दर्द हो रहा है.. अऐईइ.. मगर ऐसा मोटा तगड़ा लौड़ा जब अन्दर गया.. तो मज़ा भी आ गया…

भिखारी- उफ़फ्फ़ मेरी जान, तेरी चूत तो बहुत टाइट है.. लौड़ा अन्दर फँस सा गया है.. तू सच में बच्चों से ही चुदवाती होगी.. आहह.. अब ले ... संभाल मेरे वार ... अब बर्दाश्त नहीं होता.. कब से लौड़ा फुफकार रहा है।

भिखारी ने अब झटके मारना शुरू कर दिए और ‘दे.. घपाघप’ लौड़ा पेलने लगा। दीपाली को दर्द तो हो रहा था मगर वो उसको ज़ोर-ज़ोर से चोदने को बोल कर उकसा रही थी। उसकी आँखों में आँसू आ गए मगर चुदास उन आँसुओं पर भारी थी। वो अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर चुदाई में साथ देने लगी।

भिखारी उसको चोदने के साथ-साथ उसके निप्पल भी चूस रहा था। करीब 20 मिनट की चूत फाड़ चुदाई के बाद दीपाली का बाँध टूट गया और वो झटके खाने लगी। उसकी चूत से रस निकलने लगा जिसका अहसास भिखारी ने अपने लौड़े पर महसूस किया और झटके मारना बन्द कर दिए। ... जब दीपाली शान्त हुई तो वो दोबारा शुरू हो गया।

दीपाली- आहह.. उई मेरी चूत दो बार ठंडी हो गई.. आहह.. मगर तुम्हारा लौड़ा झड़ने का नाम भी नहीं ले रहा.. जब से मैंने झांटें साफ कीं.. तब से अकड़ा हुआ है।

भिखारी- अभी कहाँ, बेबी.. आह आह.. कई दिनों बाद चूत मिली है ... आज तो पूरा मज़ा लूँगा.. मेरा लंड इतनी जल्दी नहीं झड़ता.. उस पड़ोसन भाभी को मैं चोदता था ना तो उसकी हालत खराब करके ही झड़ता था.. आहह.. उफ तेरी चूत बहुत टाइट है.. मज़ा आ रहा है उह उह।

दीपाली- मेरी चूत में जलन होने लगी। दो मिनट का तो आराम दो आहह.. आई.. मैं मुँह से मज़ा दे देती हूँ आहह.. निकाल लो ना.. आहह.. आई.. एक बार…

भिखारी को उस पर रहम आ गया और एक झटके से लौड़ा चूत से बाहर खींच लिया। ‘पॉप’ की आवाज़ के साथ लौड़ा बाहर आ गया.. जैसे किसी ने म्यान से तलवार निकाली हो। दीपाली बैठ गई और लौड़े को चूसने लगी.. उसको अब राहत मिली और लौड़ा अब भी लोहे की रॉड जैसा तना हुआ था.. जिसे उसको चूसने में अलग ही मज़ा आ रहा था। पाँच मिनट तक वो लौड़ा चूसती रही.. अब उसकी चूत दोबारा चुदने के लायक हो गई.. उसमें पानी रिसने लगा..

भिखारी- मेरी जान.. अब बस भी कर.. चल अब घोड़ी बन जा.. मेरा लौड़ा अब किसी भी वक़्त लावा उगल सकता है।
 
दीपाली घुटनों के बल हो गई और भिखारी ने उसके पीछे आ कर लौड़ा चूत पर टिका दिया और वहाँ बस रगड़ने लगा.. उसने अन्दर नहीं डाला.. उसके हाथ दीपाली की गाण्ड पर घूम रहे थे।

दीपाली- ससस्स! आह, डालो ना.. क्या हुआ छेद नहीं मिल रहा क्या.. मैं मदद करूँ..

भिखारी- अरे नहीं मेरी जान.. छेद क्यों नहीं मिलेगा.. क्या कभी सुना है.. साँप को बिल कोई और बताता है.. वो खुद ब खुद ढूँढ लेता है.. मैं सोच रहा हूँ तेरी गाण्ड क्या ज़बरदस्त है.. एकदम मक्खन की तरह.. अबकी बार गाण्ड ही मारूँगा।

दीपाली- वो सब बाद की बात है, पहले चूत में लौड़ा घुसाओ और जल्दी से अपना पानी निकालो.. मेरी माँ आने वाली है।

भिखारी ने इतना सुनते ही लौड़ा चूत में पेल दिया और उसे कस कर ठोकने लगा। उसने दीपाली की कमर पकड़ ली और रफ़्तार से लौड़ा अन्दर-बाहर करने लगा।

दीपाली- आआ आआ आईईइ आराम से.. आह क्या हो गया तुमको.. आह आहह.. मर गई रे.. हाय जान निकल गई आ उह..

अबकी बार भिखारी कुछ ज़्यादा ही रफ़्तार से चोद रहा था। वो पूरा लौड़ा बाहर निकालता और एक साथ अन्दर घुसा देता.. जिसके कारण दीपाली को दर्द होता और चोट के साथ ही वो सिहर जाती। दस मिनट तक वो बिना कुछ बोले चूत को रगड़ता रहा। अब दीपाली को भी मज़ा आने लगा था ... वो अपने चूतड़ पीछे धकेलने लगी थी।

दीपाली- आहह.. आह आईईइ जोर से! आहह.. उहह.. ज़ोर से! आहह.. मेरा प्प..पानी आ..आने वाला है।

अब भिखारी ने उसे चोदने में अपनी पूरी ताक़त लगा दी, उसका लौड़ा भी फूलने लगा था, अब किसी भी पल उसका ज्वालामुखी फूटने वाला था।

भिखारी- उह उह उह! मेरा भी आने वाला है.. आहह.. बाहर निकालूँ क्या? आहह.. जल्दी बोलो।

दीपाली- आई.. आई.. नहीं! आहह.. आहह.. चूत के अन्दर आहह.. उह.. मैं गई! आहह!

उसी पल दीपाली का बाँध टूट गया और उसकी चूत ने लंड पर पानी छोड़ दिया ... चूत का पानी लगते ही लंड से बहुत तेज पिचकारी निकली, जिसका फोर्स इतना तेज था कि दीपाली की चूत से टकराते ही दीपाली की सिसकी निकल गई.. जैसे किसी ने पानी के पाइप से तेज धार चूत में मार दी हो… लंड से वैसी ही कई पिचकारियां और निकलीं और दीपाली की चूत पा से भर गई।

जब भिखारी ने लौड़ा बाहर खींचा, ‘फक’ की आवाज़ से लौड़ा बाहर निकला.. उसके साथ दोनों का मिला-जुला रस भी बाहर आने लगा। अब दोनों ही थक चुके थे इस पलंग-तोड़ चूत-फाड़ चुदाई से ... दोनों बिस्तर पर पड़े लंबी-लंबी साँसें ले रहे थे। काफ़ी देर तक दोनों वैसे ही पड़े रहे।

भिखारी- वाह जानेमन वाह.. आज तूने कमाल कर दिया.. कोई भीख में रोटी देता है कोई पैसे.. तो कोई कपड़े.. मगर तू सबसे बड़ी दानवीर है.. तूने मुझे भीख में अपनी चूत दे दी! वाह.. मज़ा आ गया।

दीपाली- ऐसा मत कहो, मैंने तुम्हें कोई भीख नहीं दी.. मेरी अपनी चूत में आग लग रही थी। उसकी शांति के लिए मैंने तुम्हें इस्तेमाल किया और कसम से मज़ा आ गया। तुम्हारा लौड़ा बहुत तगड़ा है.. झड़ता ही नहीं ... कितना चोदा तुमने मुझे.. वाकयी बहुत पावर है तुम्हारे लंड में..

भिखारी- जान, अब गाण्ड कब मरवाओगी? मेरा बड़ा मन हो रहा है.. तेरी मखमली गाण्ड मारने का।

दीपाली- अभी नहीं.. मम्मी आ जाएगी ... तुम बस इसी एरिया में घूमते रहना.. जब भी मौका मिलेगा मैं अन्दर बुला लूँगी और प्लीज़ किसी को बताना मत.. मेरी इज़्ज़त अब तुम्हारे हाथ में है।

भिखारी- अरे मुझे क्या पागल कुत्ते ने काटा है जो मैं किसी को बताऊँगा.. सोने जैसा पानी फेंकने वाली चूत को भला कोई क्यों काटेगा.. उसको तो बस चोदेगा! हा हा हा! तू फिकर मत कर, अब मैं इसी एरिया में भीख माँगता रहूँगा.. जब मौका मिले.. तू बुला लेना तुझे मेरे खड़े लौड़े की कसम है।

दीपाली- अच्छा बाबा, ठीक है.. अब उठो. जल्दी से कपड़े पहनो और निकलो.. माँ आ गईं तो सब चौपट हो जाएगा।

दीपाली ने उसे पापा के पुराने कपड़े पहना दिए और कुछ खाना भी पैकेट में डाल कर दे दिए। वो खुश होकर वहाँ से चला गया तब कहीं दीपाली की जान में जान आई और वो बाथरूम में घुस गई। उसकी चूत में थोड़ा दर्द था तो वो गर्म पानी से नहाने लगी और चूत को सेंकने भी लगी। उसने नहाने के बाद भिखारी के पुराने कपड़े फेंके. अब उसको बड़ी ज़ोर की भूख लगी और लगनी ही थी. उसने 9″ के मूसल से इतनी दमदार मार जो खाई थी।

बस फिर क्या था.. उसने जम कर खाना खाया और अपने कमरे में जाकर सो गई। कब उसको नींद ने अपने आगोश में ले लिया पता भी नहीं चला। उसकी मम्मी आईं तब तक वो गहरी नींद में सो गई थी।

(रात को कहीं कुछ खास नहीं हुआ तो चलो सीधे सुबह की बात बताती हूँ। दोस्तों, आप सोच रहे होंगे कि ये कहानी कब से चल रही है मगर इसमें अब तक रविवार नहीं आया, अब विस्तार से सब लिखूँगी तो कहानी बड़ी हो ही जाती है ... खैर, अगली सुबह का सूरज निकल आया.. आज रविवार था ... अब आज क्या होता है आप खुद देख लो।)
 
दीपाली देर तक सोती रही क्योंकि आज स्कूल तो था नहीं और कल की चुदाई से उसका बदन दुख रहा था।

करीब 9 बजे उसकी मम्मी ने उसे बाहर से आवाज़ लगाई, ‘अब बहुत देर हो गई.. उठ जाओ, पढ़ाई नहीं करनी क्या.?’

दीपाली अंगड़ाई लेती हुई बोली।

दीपाली- कल शाम को तो इतनी जबरदस्त चुदाई की थी.. अब दोबारा आप चुदाई करने को कह रही हो।

सुशीला- अरे क्या बड़बड़ा रही है.. उठ कर बाहर आ …

मम्मी की आवाज़ सुनकर दीपाली को अहसास हुआ कि उसने ये क्या बोल दिया.. ये तो अच्छा हुआ मम्मी ने नहीं सुना वरना आज तो उसकी शामत आ जाती।

दीपाली- हाँ मम्मी आ रही हूँ.. बस 2 मिनट।

दीपाली ने दिल पर हाथ रखा, वो थोड़ा डर गई थी। उसके बाद वो फ्रेश होने चली गई।

(दोस्तो, जब तक यह फ्रेश होती है.. चलो, विकास और अनुजा के पास चलते हैं, देखते हैं वहाँ क्या खिकड़ी पक रही है।)

अनुजा- क्या बात है मेरे राजा आज तो नहाने में बड़ी देर लगा दी.. अन्दर ऐसा क्या कर रहे थे? कहीं दीपाली के नाम की मुठ तो नहीं मार रहे थे ना, हा हा हा हा हा!

विकास- अरे मुठ मारें मेरे दुश्मन.. आज तो लंडदेव उसकी चूत की सैर करेंगे ... नहाने में समय इसलिए ज्यादा लग गया क्योंकि आज मैं लौड़े की सफ़ाई कर रहा था. यार, आज रविवार है इसलिए आज तुम दोनों की चूत और गाण्ड को शाम तक जम के रगड़ना है।

अनुजा- ओये होये.. क्या बात है! मेरे लिए तो नहीं किया था चिकना. रात को ऐसे ही मेरी ठुकाई कर दी ... अब मेरा ख्याल तो आप दिल से निकाल ही दो. रात को क्या कम चोदा है जो अब दोबारा मेरी हालत खराब करना चाहते हो।

विकास- अरे जानेमन, रात को तो मैंने गोली ले ली थी ताकि पूरी रात तुम्हें चोद कर खुश कर दूँ. वैसे बुरा मत मानना, मैंने इसलिए तुम्हे इतना चोदा कि आज पूरा दिन बस दीपाली के मज़े ले सकूँ।

अनुजा- अच्छा जी मेरी बिल्ली मुझ ही से मियाऊँ.. कोई बात नहीं जाओ, आपको पूरी आज़ादी है … जितना मर्ज़ी उसको चोद लेना. मुझे मेरी एक सहेली के घर जाना है. उसकी बड़े दिनों से याद आ रही है. आज रविवार है तो आराम से पूरा दिन हम बात कर लेंगे। आप यहाँ मज़े करना।

विकास- अरे कौन सी सहेली? हमसे भी मिलवाओ कभी. और तुम सिर्फ बात ही करोगी या कुछ और करने का इरादा है?

अनुजा- अरे तुम कुछ ज़्यादा ही फास्ट हो रहे हो. मैंने दीपाली को तुमसे चुदवा दिया इसका मतलब यह नहीं कि तुम किसी के बारे में कुछ भी बोल दोगे।

अनुजा की आँखों में गुस्सा साफ नज़र आ रहा था।
 
विकास- अरे सॉरी यार.. तुम तो बुरा मान गई.. मैंने बस ऐसे ही मजाक में कहा था।

अनुजा- नहीं विकास, ऐसा मजाक दोबारा मत करना.. मैंने दीपाली के लिए ये सोच कर ‘हाँ’ कही थी कि दोनों का भला हो जाएगा. उसको ज्ञान मिल जाएगा और आपको कुँवारी चूत.. मगर इसके अलावा आप किसी के बारे में सोचना भी मत।

विकास- ओके मेरी जान.. सॉरी.. अब मूड ठीक करो और नास्ता ले आओ, बड़े जोरों की भूख लगी है।

(दोस्तो, यहाँ तो कुछ खास नहीं हो रहा. चलो प्रिया के पास चलते हैं।)

कल शाम की चुदाई के बाद रात को दीपक किसी बहाने से प्रिया के घर गया और उसे दवा और मलहम दे गया। उसकी चूत सूज गई थी. आज सुबह वो भी देर से उठी थी। अभी नहा कर निकली ही थी कि उसके घर दीपक आ गया।

प्रिया- अरे दीपक भाई आप.. आओ आओ बैठो…

तभी अन्दर से उसके पापा आ गए. उन्होंने दीपक का हाल पूछा. वो शायद कहीं जाने के लिए जल्दी में थे तो प्रिया को बोल गए- भाई को चाय दो.. तुम्हारी माँ मंदिर गई हैं, मुझे भी जरूरी काम से जाना है।

दीपक ने भी उनको जाने को कहा और खुद सोफे पर बैठ गया।

प्रिया- हाँ भाई.. कहो क्या पीओगे चाय या कॉफी?

दीपक- मन तो मेरा.. दूध पीने का कर रहा है।

प्रिया- अच्छा क्या बात है.. शराब से सीधे दूध पर आ गए.. अभी लाती हूँ..

दीपक- अरे बहन, जाती कहाँ है.. गाय या बकरी का नहीं.. तेरा दूध पीना है मुझे.. आ जा, अभी तो कोई नहीं है ... पिला दे अपना दूध..

प्रिया- धत.. आप बड़े बेशर्म हो.. कुछ भी बोल देते हो.. मेरे पास कहाँ दूध है.. अभी तो मैं खुद बच्ची हूँ.. जब बच्चे हो जाएँगे.. तब दूध आएगा।

दीपक- अरे वाह.. क्या बात है बच्चे की बात कर रही हो.. क्या इरादा है तेरा?

प्रिया- मेरा इरादा तो कुछ नहीं है.. आप सुबह-सुबह कैसे आ गए?

दीपक- मेरी जान, आज रविवार है.. कल की चुदाई भूल गई क्या.. चल लगा फ़ोन दीपाली को और वहीं बुला ले.. आज पूरा दिन तीनों वहाँ मज़े करेंगे।

प्रिया- पूरा दिन… मगर मैं मम्मी को क्या कहूँगी?

दीपक- अरे कह देना.. सहेली के घर इम्तिहान की तैयारी करने जा रही हो.. सिंपल यार…

प्रिया- आइडिया तो अच्छा है.. मगर आज मैं नहीं चुदवा पाऊँगी. कल की चुदाई से मेरी चूत सूज गई है.. दर्द भी बहुत हो रहा है.. अगर आज दोबारा चुदवाया तो बीमार हो जाऊँगी. इम्तिहान भी सर पर आ गए हैं।

दीपक- अरे यार, पहली बार दर्द होता है.. अब नहीं होगा और मज़ा ज़्यादा आएगा, तेरी गाण्ड भी तो अभी मारनी बाकी है।

प्रिया- ना बाबा ना.. गाण्ड तो इम्तिहान के बाद ही मरवाऊँगी.. कहीं सूज गई तो पेपर के लिए 3 घंटे बैठना पड़ता है.. मुश्किल हो जाएगी।

दीपक- अच्छा मत चुदवाना.. मगर दीपाली को तो बुला ले.. यार, तू देख कर ही मज़ा ले लेना. लौड़े से नहीं तो चूस कर ही तेरा पानी निकाल दूँगा.. प्लीज़ यार, उसके लिए कब से तड़प रहा हूँ.. तू तो अच्छी तरह जानती है.

प्रिया- आपकी बात सही है मगर शायद आप भूल गए. दीपाली ने कहा था.. उस घर का मलिक रात को आ जाएगा.. अब तक तो वो आ गया होगा।

दीपक- नहीं ऐसा कुछ नहीं है.. वो घर बन्द पड़ा है. उसकी चाभी किसी तरह दीपाली के हाथ लग गई होगी। वहाँ कोई नहीं आने वाला उसने झूठ कहा था.. मुझे पता है। तू उसको फ़ोन तो कर..

प्रिया- अच्छा भाई, करती हूँ.. आप बैठो तो सही।

प्रिया ने जब फ़ोन लगाया तो दीपाली ने ही उठाया।

दीपाली- हाँ.. बोल प्रिया कैसी है अब? कल तेरे को मज़ा आया कि नहीं?

प्रिया- अरे बहुत आया.. मिल कर बताऊँगी यार ... तू कल वाले घर में आ जा.. दीपक भी यहीं है.. साथ में मज़ा करेंगे.
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दीपाली- अरे नहीं, वहाँ आज नहीं जा सकते.. वो रात को आ गया.. यार, ऐसा कर दोपहर को मैं तुझे फ़ोन कर के कोई दूसरी जगह बताऊँगी जहाँ हम मज़े कर सकते हैं और अभी तो वैसे भी मुझे बहुत जरूरी काम है यार. दोपहर को फ्री हो कर बात करती हूँ ओके बाय..

प्रिया कुछ और बोलती उसके पहले दीपाली ने फ़ोन काट दिया।

दीपक- क्या हुआ.. क्या बोली वो?

प्रिया- उसने कहा कि वहाँ वो आदमी रात को आ गया है दोपहर को किसी दूसरी जगह के बारे में बताएगी।

दीपक- ऐसा कहा उसने और दूसरी जगह कहाँ से लाएगी प्रिया? ये दीपाली जितनी सीधी दिखती है.. उतनी है नहीं.. क्या पता किस-किस से चुदवाती फिरती है.. तभी तो दूसरी जगह की बात कर रही थी।

प्रिया- होगा जो भी.. अब दोपहर तक इन्तजार करो.. फिर उससे ही पूछ लेना।

दीपक- तू पागल है क्या? कल पहली बार चूत के दर्शन हुए और आज तू इन्तजार की बात कर रही है.. उसको गोली मार.. चल आ जा तू ही मेरी प्यास बुझा दे.. लौड़े को देख.. चूत के लिए कैसे अकड़ा हुआ खड़ा है।

प्रिया- भाई, आप पागल हो गए क्या? माँ किसी भी वक़्त आ सकती हैं।

दीपक ने दरवाजा बन्द किया और अपना लौड़ा पैन्ट से बाहर निकल लिया.. जो वाकयी में मचल रहा था।

प्रिया- ओह.. भाई, आप क्या कर रहे हो.. इसे जल्दी से पैन्ट के अन्दर डालो.. कोई देख लेगा तो आफ़त आ जाएगी।

दीपक- चुप कर, इतना वक्त बातों में खराब कर रही है. चूत नहीं तो मुँह से चूस कर ही मज़ा दे दे. दरवाजा बन्द है, आंटी आ भी गई तो जल्दी से अन्दर डाल लूँगा. चल जल्दी आ…

प्रिया ने मौके की नज़ाकत को समझा और जल्दी से नीचे बैठ कर उसके लौड़ा को मुँह में भर लिया और चूसने लगी।

दीपक- आह्ह.. मज़ा आ गया.. साली ओफ्फ क्या मस्त चूसती है तू.. पहले पता होता तो इतने साल तड़पना नहीं पड़ता.. चूस आह्ह.. मज़ा आ रहा है।

प्रिया लौड़े को होंठ से दबा कर चूस रही थी ... पूरा जड़ तक अन्दर ले लेती फिर पूरा बाहर निकाल देती … बस इसी तरह वो चूसती रही। दीपक को चूत चुदाई जैसा मज़ा आ रहा था। वो अब प्रिया के सर को पकड़ कर दे-दनादन उसके मुँह को चोदने लगा। प्रिया का मुँह दुखने लगा था.. मगर दीपक तो बस लौड़ा पेले जा रहा था। प्रिया ने बड़ी मुश्किल से लौड़ा मुँह से निकाला और एक लंबी सांस ली।

दीपक- अरे मज़ा आ रहा था निकाल क्यों दिया.. मेरा पानी निकलने ही वाला था.. ओफ्फ जल्दी से चूस ना…

प्रिया- हाँ चूसती हूँ.. जरा सांस तो लेने दो.. कब से चूस रही हूँ.. आपका लौड़ा पानी छोड़ता ही नहीं.. इसमें बहुत दम है।

दीपक- अब बातें बन्द कर आह्ह.. चूस.. ओफ्फ मज़ा आ गया आह्ह.. ऐसे ही हाँ आह्ह.. ऐइ ज़ोर-ज़ोर से चूस आह्ह.. ओफ्फ सस्स हूओ उई..

दीपक का लौड़ा फूलने लगा और उसी पल दीपाली ने लौड़ा इतना बाहर निकाल दिया कि बस सुपारा अन्दर रहा ... उसमें से गर्म-गर्म लावा निकला जिसे उसने अपनी जीभ पर ले कर पूरा बाहर निकाला और फिर गटक गई।

दीपक- वाह मेरी बहन, तू तो कमाल की रण्डी है.. क्या मज़ा दिया है मुझे.. अब से रोज तेरे पास आऊँगा.. मौका मिला तो तेरी चुदाई करूँगा.. नहीं तो तेरा मुँह चोदूँगा.. बड़ा मस्त चूसती है तू तो।

प्रिया- भाई, अब आप निकल लो.. माँ आती होगी.. आपको देखेगी तो 10 तरह के सवाल करेगी.. दोपहर तक दीपाली कुछ ना कुछ जुगाड़ कर ही लेगी.. उसके बाद मैं आपको बता दूँगी.. आप बस घर पर ही रहना।

दीपक- ठीक है मेरी जान.. अभी तो जा रहा हूँ मगर दोपहर तक कुछ ना हुआ ना तो देख लेना ... मुझे चूत चाहिए बस!

दीपक वहाँ से निकल गया। प्रिया सोच में पड़ गई कि दीपाली इतनी जल्दी में क्यों थी.. कहीं विकास सर के पास तो नहीं जा रही। प्रिया ने दोबारा फ़ोन लगाया और इस बार भी दीपाली ही थी।

दीपाली- अरे क्या हुआ यार? मैंने कहा ना दोपहर को बताती हूँ।

प्रिया- ऐसी बात नहीं है.. आज रविवार है तू कहा बिज़ी है? ये बता कहीं चुदवाने के लिए विकास सर के पास तो नहीं जा रही ना?

दीपाली- हाँ.. वहीं जा रही हूँ.. तुझे आना है क्या? वहाँ आ जा ... तू भी चुदवा लेना मेरे साथ..

प्रिया- नहीं यार तू जा.. मैं उनके सामने नहीं जाना चाहती.. वक़्त आएगा तो उनके लौड़े को भी देख लूँगी.. अभी दीपक ही बहुत है और प्लीज़ तुम भी उनको कुछ मत बताना।

दीपाली- ठीक है नहीं बताऊँगी.. अच्छा सुन चाभी तेरे पास है ना.. 11 बजे के बाद तू उस घर में जा सकती है.. शाम को 5 बजे तक वहाँ कोई नहीं रहता.. चाहे तो दीपक को वहाँ बुला ले और मज़ा कर.. मैं भी आ जाऊँगी।

प्रिया- यार, आख़िर वहाँ रहता कौन है? ये तो बता मुझे..

दीपाली- अरे एक बूढ़ा आदमी रहता है. सुबह से शाम तक बाहर रहता है.. इसी लिए बोल रही हूँ उसके आने के पहले निकल जाना।
 
प्रिया- मगर वो है कौन? तेरे पास चाभी कहाँ से आई… ये तो बता?

दीपाली- वक़्त आने पर सब बता दूँगी.. चल अब रख.. मुझे रेडी होना है यार..

दीपाली ने फ़ोन रख दिया। अब वो कपड़े देखने लगी कि आज क्या पहने।

फ़ोन रखने के बाद प्रिया अपने कमरे में चली गई और अपने आप से बड़बड़ाने लगी।

प्रिया- ये दीपाली भी ना.. कुछ भी नहीं बताती अपने बारे में.. अब विकास सर के पास मज़े लेने जा रही है।

बड़बड़ाते हुए उसको कुछ आइडिया आता है और वो जल्दी से नीचे जाती है। उसकी माँ भी मंदिर से आ गई थीं.. वो उनको बोलती है कि अपनी सहेली के पास जाकर अभी आती हूँ और घर से निकल जाती है।

उधर अनुजा ने विकास को नास्ता करवा दिया और खुद रेडी होकर घर से निकल गई।

दीपाली ने आज काली जींस और लाल टी-शर्ट पहनी थी.. बड़ी मस्त लग रही थी। अपनी माँ को ‘इम्तिहान की तैयारी करने सहेली के पास जा रही हूँ’ बोल कर वो भी घर से निकल गई।

(दोस्तो, आप ध्यान करना कि सब एक ही वक्त घर से निकल रही हैं। अब तीनों के बारे में एक साथ तो बता नहीं सकती इसलिए एक-एक करके बताती हूँ। आज बड़ा ट्विस्ट है, आप ध्यान दो बस।)

दीपाली विकास के घर की ओर जा रही थी और एक मोड़ पर उसने अनुजा को दूसरी तरफ जाते हुए देखा उसने आवाज़ भी दी.. मगर अनुजा ने नहीं सुनी और रिक्शा रुका कर उसमें बैठ कर चली गई।

दीपाली ने भी ना जाने क्या सोच कर दूसरा रिक्शा रुकवाया और अनुजा के पीछे चल दी। वो 15 मिनट तक वो अनुजा का पीछा करती रही और अपने आप से बड़बड़ा रही थी कि दीदी कहाँ जा रही हैं.. आज तो रविवार है इनको पता है मैं आऊँगी.. उसके बाद भी जाने कहाँ जा रही हैं।

अनुजा का रिक्शा एक घर के पास जाकर रुका तो दीपाली ने भी रिक्शा रुकवा लिया। जब अनुजा अन्दर चली गई तो दीपाली उस घर के पास जा कर खिड़की से अन्दर झाँकने लगी।

अन्दर एक औरत जो करीब 30 साल के लगभग होगी, दिखने में भी ठीक-ठाक सी थी, वो सोफे पर बैठी थी। अनुजा बिल्कुल उसके पास बैठी बातें कर रही थी जो बाहर दीपाली को साफ सुनाई दे रही थीं।

अनुजा- यार मीना, बड़े दिनों बाद मिलना हुआ. कभी तू भी मेरे घर पर आ जाया कर।

मीना- अरे नहीं रे, वक्त कहाँ मिलता है आने का. तुम तो जानती हो मेरा काम ही ऐसा है.. होटल में कहाँ वक्त मिलता है.. बस रविवार को छुट्टी मिलती है। वहाँ साले एक से बढ़ कर एक हरामी देखने को मिलते हैं।

अनुजा- हरामी कौन? मैं कुछ समझी नहीं यार?

मीना- अरे यार, मैंने बताया तो था.. वहाँ ज़्यादातर टूरिस्ट आते हैं। अब जैसे कोई अंग्रेज आया तो उस साले को इंडियन गर्ल चाहिए. बस हमारा मैनेजर भड़वा, मंगवा देता है. उस लड़की को सब समझा कर मुझे वहाँ कमरे तक ले जाना पड़ता है और उसके जाने का इंतजाम भी मुझे करना पड़ता है। साला कोई-कोई हरामी तो मुझे ही चोदने के चक्कर में रहता है। तू जानती है मुझे ये सब पसन्द नहीं है।

अनुजा- अरे यार जानती हूँ.. तू अपने पति को छोड़ कर अलग रहती है क्योंकि वो जानवरों की तरह तुझे चोदता था.. तब से चुदाई से तुझे नफ़रत हो गई है। यार, वहाँ तुझे अच्छा नहीं लगता तो तू कोई दूसरी नौकरी कर ले ना…

मीना- अरे नहीं यार. इतने बड़े होटल में स्टाफ की हैड हूँ.. पगार भी अच्छी है। ऐसी नौकरी दूसरी नहीं मिलेगी।

अनुजा- हाँ ये बात तो सही है.. अच्छा ये बता कि ट्रिपल एक्स फिल्मों में अंग्रेजों का लंड जितना बड़ा दिखाते हैं, क्या सच में उतना बड़ा होता है.. तूने तो देखा होगा वहाँ?

मीना- अरे मैं क्यों देखूँगी, यार?

अनुजा- ओह.. कभी तो मौका मिला होगा.. जैसे तू कमरे में लड़की लेने या वापस लाने गई हो.. नज़र पड़ जाती है यार.. बता ना…

मीना- हाँ कई बार ऐसा हुआ है.. बड़ा तो होता है, ये बात मैंने गौर की है मगर अफ़्रीकन आदमी का सबसे बड़ा होता है. अभी कल ही एक काला सांड आया है, कुत्ता कहीं का…

अनुजा- अरे कौन सांड.. क्या हुआ? बता ना यार?
 
मीना- कल एक अफ़्रीकन आया है.. शैतान जैसा लंबा-चौड़ा.. मैनेजर ने मुझे उससे पूछने भेजा था कि उसको कोई चाहिए क्या? तो हरामी ने मुझे ही पकड़ लिया और अपना शॉर्ट्स निकाल कर मुझे लौड़ा दिखा कर बोला कि हाय बेबी लुक एट माय कॉक. यू वांट दिस बिग कॉक … मैं अपना हाथ छुड़ा कर वहाँ से भाग गई और मैनेजर से शिकायत की.. तब उन्होंने उसको समझाया कि ये खुद नहीं चुदेगी.. तुमको लड़की ला कर देगी.. तब हरामी बात को समझा।

अनुजा- ओह.. रियली कितना बड़ा होगा उसका?

मीना- अब मैंने कौन सा नाप कर देखा है? सोया हुआ भी कोई 7” का होगा. खड़ा होने पर न जाने कितना बड़ा होगा?

अनुजा- ओह्ह.. रियली यार एक बात तो है लौड़ा जितना बड़ा होता है ना.. उतना ही मज़ा देता है।

मीना- अरे तू भी.. क्या ये लौड़े की बात लेकर बैठ गई.. चल आ जा रसोई में नाश्ता बनाते हुए बात करेंगे।

अनुजा- अरे नहीं.. नाश्ते की क्या जरूरत है यार बात करते हैं ना…

मीना- अब कोई बहस नहीं.. चल आ जा…

दोनों उठ कर रसोई में चली जाती हैं। दीपाली भी अब सोचती है यहाँ खड़ी रहने से क्या फायदा। वो भी रिक्शा पकड़ कर वापस विकास के घर की ओर चल देती है।

(दोस्तो, आप सोच रहे होंगे कि मैं कहानी को लंबा खींचती जा रही हूँ, नए-नए किरदार सामने आ रहे हैं मगर आपका ऐसा सोचना गलत है. ये सब कहानी का हिस्सा है जो धीरे-धीरे सामने आ रहा है. इसका कहानी से गहरा सम्बन्ध है। ये आपको बाद में पता चल जाएगा. अभी प्रिया के पास चलते हैं।)

प्रिया के मन में शरारत भरा आइडिया आया था कि सर के घर किसी सवाल पूछने के बहाने से जाए और दीपाली का प्रोग्राम चौपट कर दे। बस वो विकास के घर की ओर निकल पड़ी। उसने हरे रंग का स्कर्ट और गुलाबी टॉप पहना हुआ था.. वो इस ड्रेस में बड़ी सेक्सी लग रही थी।

जब अनुजा घर से निकली थी तब विकास अलमारी के ऊपर से कोई सामान निकाल रहा था.. तभी उसकी आँख में कंकर चला गया और उसकी आँख में जलन होने लगी। उसने जल्दी से आई-ड्रॉप आँखों में डाला और बिस्तर पर लेट गया। तभी प्रिया दरवाजे पर पहुँच गई और दरवाजा खटकाने लगी।

विकास- दरवाजा खुला है आ जाओ अन्दर.

प्रिया चुपके से अन्दर आ गई। विकास ने टी-शर्ट नहीं पहन रखी थी और नीचे भी बस बिना अंडरवियर के लोवर ही था।

विकास- आ गई ... अब सवाल मत पूछना कि ऐसे क्यों पड़ा हूँ? आँख में कचरा चला गया.. अभी ड्रॉप डाला है.. 5 मिनट रूको. आ जाओ मेरे पास बैठ जाओ…

प्रिया कुछ नहीं बोली.. बस धीरे से बिस्तर पे विकास के पास बैठ गई.. उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या बोले और दीपाली कहाँ है.. वो सोच ही रही थी कि अचानक उसके बदन में 440 वोल्ट का झटका लगा।

विकास लेटा हुआ था और वो उसके पास बैठी थी। अचानक विकास ने प्रिया को अपने पास खींच लिया और उसका मुँह लौड़े पर टिका दिया।

विकास- अरे चुपचाप क्यों बैठी है.. देख मैंने आज तेरे लिए लौड़ा कैसा चमकाया हुआ है.. चूसेगी नहीं आज।

प्रिया के तो होश उड़ गए वो तो दीपाली का प्रोग्राम चौपट करने आई थी.. यहाँ तो मामला ही दूसरा हो गया। वो कुछ बोलती इसके पहले विकास ने एक और धमाका कर दिया.. उसने लोवर नीचे सरका दिया। अब लौड़ा आधा खड़ा प्रिया के होंठों के एकदम करीब था।

विकास- अरे जानेमन, क्या बात है.. नाराज़ है क्या.. ले, अब चूस ले.. देख कैसा चिकना हो रहा है.. इसे तेरे लिए ही चमकाया है.. आज तेरी चूत और गाण्ड की खैर नहीं…
 
प्रिया अब बुरी तरह डर गई थी ... वो अपने ही जाल में फँस गई थी, उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे और क्या ना करे। विकास ने उसके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया और लंड का उसके होंठों से स्पर्श करवा दिया।

विकास- अरे क्या हुआ.. कुछ तो बोल.. आज मौनव्रत रख कर आई है क्या? और तेरे मम्मे इतने कड़क क्यों लग रहे हैं.. कुछ अलग ही लग रहे हैं ... ले, अब तो लौड़ा मुंह के पास आ गया ... चूस ना यार…

विकास के चूचे दबाने से प्रिया का मन मचल गया और उसने धीरे से लौड़े का सुपाड़ा मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी।

विकास- आह्ह.. मज़ा आ गया.. अरे मुँह में पूरा ले ना आह्ह..

विकास का लौड़ा झटके से अपने असली रूप में आ गया था। प्रिया ने डरते-डरते पूरा लौड़ा मुँह में ले लिया और मज़े से चूसने लगी।

विकास- आह मेरी जान! ओफ्फ, मज़ा आ गया आह्ह.. आज तो तू कुछ अलग ही अंदाज में चूस रही है आह्ह.. उफ़फ्फ़…

प्रिया अब वासना की आग में जलने लगी थी. उसकी चूत रिसने लगी थी। वो और जोश में लौड़ा चूसने लगी। जब विकास की आँख ठीक हुई, उसने आँखें खोल ली थीं पर वो प्रिया को दीपाली समझ कर उसकी चून्चियां दबा रहा था। दरअसल प्रिया की पीठ उसकी तरफ थी और वो लौड़ा चूस रही थी। उसका जिस्म भी दीपाली जैसा ही था.. बस त्वचा की रंगत का फ़र्क था जिसके कारण विकास को अब तक कुछ पता नहीं लगा। वो बस लौड़े की चुसाई का आनन्द ले रहा था और प्रिया भी मज़े ले रही थी।

विकास- ओफ्फ आह्ह.. चूस.. मेरी जान आह्ह.. आज तेरी चूत और गाण्ड का भुर्ता बना दूँगा आह्ह.. अब बस भी कर.. लौड़ा चूस कर ही ठंडा करेगी क्या आह्ह..? चल अब चूत का मज़ा लेने दे आ जा मेरी जान…

विकास ने प्रिया के सर को पकड़ कर लौड़े से हटाया और उसके चेहरे पर नज़र पड़ते ही उसके होश उड़ गए। प्रिया भी एकदम से घबरा गई.. जैसे लंबी बेहोशी के बाद होश में आई हो। अब विकास से नज़रें मिला पाना उसके लिए मुश्किल हो रहा था, उसने नजरें झुका लीं।

(ओह.. सॉरी मित्रों.. आपको थोड़ा रुकना होगा, कुछ जरूरी बात बतानी है.. आपको बता दूँ.. दीपाली जब अनुजा के पीछे गई थी। तभी प्रिया यहाँ आई थी। सारी घटनाएं एक साथ हो रही हैं तो आपको बता दूँ कि दीपाली वहाँ बिज़ी थी। देखें कि प्रिया, जो यहाँ अपनी हीरोइन है, कहाँ तक पहुँची है. कहीं ऐसा ना हो दीपाली आ जाए और दोनों को इस हाल में देख ले।)
 
दीपाली वापस रिक्शा में आ रही थी तभी रास्ते में मैडी और सोनू बाइक पर जा रहे थे.. दोनों ने उसे देख लिया दीपाली की भी नज़र उन पर पड़ गई।

दीपाली- अरे ये कहाँ से आ गए.. अब सर के घर जाना ठीक नहीं.. क्या पता ये पीछे आ जाएं।

दीपाली ने रिक्शा अपने घर की ओर ले लिया और घर के पहले मोड़ पर उतर गई। मैडी भी उसका पीछा करता हुआ आ गया। दीपाली ने उनको नज़रअंदाज किया और घर की तरफ चल दी।

मैडी- दीपाली एक मिनट रूको तो प्लीज़…

दीपाली- अरे तुम यहाँ क्या कर रहे हो.. बोलो क्या बात है?

मैडी- दीपाली कहाँ जाकर आई हो तुम?

दीपाली- एक्सक्यूज मी.. तुम होते कौन हो मुझसे सवाल पूछने वाले?

मैडी- सॉरी यार.. तुम तो बुरा मान गईं.. मेरा वो मतलब नहीं था.. कल आ रही हो ना?

दीपाली- हाँ यार पक्का आऊँगी.. बोला ना अब जाओ. मुझे ऐसे रास्ते में खड़ा होना पसन्द नहीं है।

मैडी- ओके थैंक्स.. बाय.. चल बे क्या खड़ा है चल…

दोनों वहाँ से जाने लगे.. दीपाली वहीं खड़ी उनको जाते हुए देख रही थी.. वो बात करते हुए जा रहे थे।

सोनू- यार साली, दिन-ब-दिन क़यामत होती जा रही है.. कल का क्या सोचा है.. अब तो बता दे.. कहीं ऐसा ना हो.. कल ये आए भी और हम कुछ भी ना कर सकें।

मैडी- अबे चूतिया साला.. जब भी बोलेगा उल्टी बात ही बोलेगा… इसके लिए मैंने इतना खर्चा किया.. ऐसे थोड़े ही साली को जाने दूँगा.. चल दीपक के पास चलते हैं, तीनों मिल कर बात करेंगे.. उसके सामने ही कल का प्लान बताऊँगा.. तब तुझे समझ आएगा।

सोनू- अरे अभी नहीं.. बाद में जाएँगे पहले एक जरूरी कम निपटा आते हैं.. उसके बाद पूरा दिन में फ्री हूँ यार…

मैडी- कौन सा जरूरी काम बे?

सोनू- यार, पापा के दोस्त के घर ये पेपर देने हैं बस उसके बाद फ्री ही फ्री.. चल अभी तो बाइक भी है.. बाद में आते हैं ना दीपक के पास…

मैडी ने ना-नुकुर की और फिर मान गया दोनों वहाँ से चले गए।

दीपाली- चले गए हरामी.. अब जाती हूँ मेरे राजा जी के पास. बेचारे राह देख रहे होंगे. दीदी भी नहीं हैं घर पर. वो तो वहाँ अपनी सहेली के साथ बिज़ी हैं।

दीपाली विकास के घर की तरफ बढ़ने लगती है।

(अरे दोस्तो, अब क्या होगा? प्रिया भी वहीं है. चलो, आपको वापस वहाँ ले चलती हूँ.. मज़ा आएगा।)

विकास- प्प..प्प..प्रिया तुम.. यहाँ क्या कर रही हो?

प्रिया- व..व..वो सर मैं स..सवाल पूछने आई थी.. मगर आपने..

विकास- ओह्ह.. मैंने समझा दीपाली आई.. न..न..नहीं मेरी बीवी आई है.. ऐसा समझा सॉरी.. ग़लती से मेरे मुँह से ‘दीपाली’ निकल गया।

विकास ने तब तक लोवर ऊपर कर लिया था उसका लौड़ा अभी भी तना हुआ था।

प्रिया- आप मुझे दीपाली ही समझ रहे थे.. मैं सब जानती हूँ।

विकास- क..क्या? तुमको कैसे पता?

प्रिया- वो सब बाद में बताऊँगी.. दीपाली कहाँ है.. मैं उसके लिए ही आई थी।

विकास- अभी तक तो नहीं आई.. आने ही वाली होगी.. तुम जल्दी से निकलो.. अगर वो आ गई तो गड़बड़ हो जाएगी.. तुमको फिर कभी मज़े करवाऊंगा।

प्रिया- सॉरी, आप गलत समझ रहे हो.. दीपाली ने कई बार मुझसे आपके बारे में कहा.. मैंने हमेशा मना ही किया और आज भी मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। बस सब इत्तफ़ाक़ से हो गया.. ओके मैं जाती हूँ ... प्लीज़ आप भी उसको कुछ मत बताना।

विकास- अच्छा इत्तफ़ाक़ से हो गया.. लौड़ा तो बड़े मज़े से चूस रही थी.. अब जाने दो. तुम्हारी मर्ज़ी.. अच्छा अब जाओ.. मैं क्यों उसको बताऊँगा?

प्रिया जब दरवाजे के पास गई.. बस खोलने ही वाली थी कि विकास भाग कर उसके पास आ गया।
 
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