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चुदाई का सिलसिला

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शास... कंचन की जीब को मस्ती में पी रहा था....और उसकी एक उंगली...कंचन की चूत में घूम रही थी...कंचन की शिसकिया काफ़ी तेज हो गये थी....शास धीरे धीरे उंगली से कंचन की चूत को फैलाने की कोशिस भी कर रहा था....और कंचन मस्ती में डूबती जा रही थी....कुछ देर के बाद शास ने कंचन की जीब को छोड़ कर उसकी एक चुचि को मुँह में भर लिया था....पर उसकी एक उंगली अभी भी अपने काम में व्यस्त थी.....कंचन की शिसकिया बढ़ती जा रही थी...उसकी चूत पानी से सराबोर थी....इसी बीच शास की उंगली....कंचन की चूत की झिल्ली को टच हो गयी तो कंचन की चीख nikal गयी...उूुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुउउईईईईईईईईईईई.....

पर कंचन को एक अजीब से अहसास ने हिला दिया...कंचन ने शास को बाहों में जकड लिया और शास का मुँह कंचन की चुचि में फँस गया था.....

शास ने कुछ देर के बाद कंचन को गद्दे पर लिटा दिया और कंचन की चूत पर अपना मुँह रख दिया...और एक हाथ से कंचन की चुचियों को बारी बारी से मसल रहा था.....कंचन की चूत शास की गरम साँसों से और ज़्यादा पानी छोड़ने लगी थी....तभी शास की जीब को कंचन ने अपनी चूत के अंदर जाते हुए महसूस किया....कंचन आपना होश खोती जा रही थी...उसे लग रहा थे कि आज शायद इस आनंद में वो बेहोश हो जाएगी.....उसकी आँखे बंद थी...और सिसकियाँ गूँज रही थी...पर अब शास की जीब कंचन की चूत में काफ़ी अंदर तक घूम रही थी....शास को कंचन की चूत का स्वाद मुस्कान की चुत के पानी के स्वाद से मिलता जुलता ही नज़र आ रहा था...पर कंचन की चूत के पानी में हल्का सा भी कसैला पन नहीं था...बिल्कुल कच्चे नारियल के पानी का सा स्वाद.....लेकिन तभी कंचन ने शास के बालों को ज़ोर से पकड़ कर शास के मुँह को अपनी चूत से और सटा दिया था...शास ने धीरे से अपने मुँह को इस तरह से एडजस्ट किया कि उसकी नाक हल्का फूलका शांस तो ले सके क्योंकि कंचन ने तो पूरी ताक़त से शास के मुँह को चूत से सटा दिया था....तभी एक भूचाल सा आया और शास का खुला हुआ मुँह

उस अमृत जल से भर गया....जिसको मदन जल कहते है...जिसको शास गटगट पी गया पर कंचन की पकड़ अभी तक ढीली नहीं हुई थी...

धीरे धीरे कंचन की पकड़ ढीली पड़ती गयी और शास के लंड की अकड़न और बढ़ गयी....झटके खाता हुआ शास का लंड गधे के लंड के तरह शास की नाभि से टकरा रहा था...अब शास ने अपना मुँह कंचन की चूत से हटाया और मन ही मन सोचने लगा कि क्या कंचन की चूत इस लंड को झेल भी पाएगी या नहीं....तभी उसकी नज़र भाभी की वेसलीन की शीशी पर पड़ी और शास ने हाथ बढ़ाकर वेसलीन की शीशी उठा ली....और उसमें से ढेर सारी वॅस्लिन लेकर कंचन की चूत में डालने लगा.......

कंचन....शास क्या कर रहे हो ये.....

शास...कुछ नहीं कंचन तुम्हारी चूत को चिकनी कर रहा हूँ जिससे ये लंड आसानी से घुस जाए नहीं तो तुम्हे ज़्यादा दर्द होगा.....

कंचन....परवाह नहीं शास...बस आज मुझे चोद डालो जो भी होगा देखा जाएगा......

शास....ठीक है कंचन अब ज़रा इसे मुँह के चूस कर गीला कर दो....

कंचन...शास मैं कई घंटों से तड़प रही हूँ इस लंड के लिए....अब बस और नहीं....बस जैसे भी हो अब जल्दी से इसे अंदर डाल दो....

शास...लंड तो मेरा भी परेशान है...पर तुम्हारी मुलायम और कुँवारी चूत को देखकर डर रहा है....कहीं फट ना जाए...फिर क्या होगा....

कंचन...कुछ नहीं होगा...बस आज फाड़ डालो...में सह लूँगी....

अब शास से भी नहीं रुका जा रहा था.....उसका लंड भी अब अकड़ अकड़ कर दर्द कर रहा था....उसका लंड भी कंचन की कुँवारी....नाज़ुक सी चूत में जाने के लिए बेकरार था.....पर शास को मुस्कान की याद अभी भी बाकी थी...उसने मुस्कान की हालत देखी थी....शायद इसी लिए....सुरुआत करने में विलंब कर रहा था....

आख़िर शास ने अपना लंड कंचन की चूत के मुँह पर रख ही दिया.....लंड का गरम सुपाडा चूत पर महसूस कर कंचन शिहर उठी....इसकी हल्की सी सिसकारी निकल गई....

शास...कंचन...तय्यार हो.......

कंचन...अब तय्यारी कैसी कब से इस पल का एंतजार कर रही हूँ...अब तो बस जल्दी से अंदर डाल दो.....

शास ने धीरे से अपने लंड का दबाव कंचन की चूत पर बढ़ाया...पर शास का लंड कंचन की टाइट वर्जिन चूत में नहीं जा रहा था...शास मन ही मन सोच रहा था कि सीधी उंगली से घी नहीं निकलने वाला है.....फिर मुस्कान की याद आते ही डर भी रहा था...

उधर कंचन....की चूत का पानी छोड़ छोड़ कर बुरा हाल था....आख़िर शास ने कंचन के दोनो चुतड़ों को मजबूती से पकड़ कर....अपने लंड को ठीक से एडजस्ट कर एक ज़ोर का झटका दे ही दिया..............

आआआआआअहह...उउउउउउउउउउउउउउईईइसीईई....की आवाज़ के साथ कंचन चिल्ला उठी...और शास के लंड का सुपाडा कंचन की चूत में दाखिल हो चुका था.....कंचन अपने चूतड़ इधर उधर करने लगी...पर शास ने उसके चूतड़ मजबूती से पकड़े हुए थे और इसी पल एक और ज़ोर का झटका दे दिया.....

उउउउउउउउईईईईईएम्म्म्म्म्म्म्म्माआआआआ.............कंचन की एक जोरदार चीख nikal गई.....और शास के लंड का एक चौथाई हिस्सा चूत में दाखिल हो चुका था....कंचन शास के लंड को बाहर nikalने की कोशिस करने लगी.....उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे थे....दर्द से उसका चेहरा बिगड़ने लगा था....उसकी चीख सुनकर भाीभि और अन्य सभी जाग गई थी....

भाभी....शास.... क्या हुआ....

शास....कुछ नहीं भाभी...पहले तो ये कंचन मान नहीं रही थी अब चिल्ला रही है....पर कंचन कुछ भी बोल नहीं पाई..उसका गला मानो किसी ने बंद कर दिया हो...घुटि घुटि दर्द की अह्ह्ह और आँखो से पानी बह रहा था....शास का 1 चौथाई लंड कंचन की चूत को फाड़ कर उसमें दाखिल हो चुका था......

भाभी...शास ज़रा धीरे धीरे डालो ना....तुम्हें तो मालूम है कि कंचन की चूत अभी छोटी और वर्जिन है...क्या वो तुम्हारे इस गधे जैसे लंड को आराम से झेल पाएगी...इस लंड ने तो हमारी चुदि चुदाई चूत की भी हालत खराब कर दी है...फिर इस बेचारी.....की हिम्मत है क़ि इसने इस लंड को लेने की हिम्मत तो दिखाई.......

शास...भाभी मैं तो आराम से ही डाल रहा हूँ पर .......कंचन की चूत ही इतनी टाइट है कि इसमें लंड जा ही नहीं रहा है.......

भाभी...देवर जी...मौके की नज़ाकत को समझ कर चोदो....

शास...ठीक है भाभी........

अब शास ने कंचन की चुचियों को हाथों से मसलना शुरू कर दिया था....और लंड को शांत छोड़ दिया था....काफ़ी देर तक शास कंचन की नाज़ुक चुचियों से खेलता रहा...चुचियों के निप्पल चूस्ता रहा और उसके हाथ कंचन के सरीर के हर भाग को सहला रहे थे.....लगभग 10 मिनट तक ऐसे ही करता रहा और उसका लंड कंचन की चूत में झटके खाता रहा.....

धीरे धीरे कंचन की चूत का दर्द अब कुछ कम हुआ....मगर अभी भी उसकी साने तेज तेज चल रही थी........

शास....अब कैसा महसूस कर रही हो कंचन....

कंचन....अब दर्द कुछ कम है....पर तुमने तो मेरी चूत को फाड़ ही डाला है......अब बाहर nikal लो शास.....मुझसे अब और नहीं झेला जाएगा......मुझे नहीं पता था कि इतना भयानक दर्द होगा.....

शास....घबराओ नहीं कंचन....कुछ नहीं होगा.........अब जब इतना झेल लिया है तो अब तो थोड़ा ही बचा है......तभी कंचन ने हाथ बढ़ा कर देखा...और शास के लंड पर हाथ फेर कर देखा,....अरे अभी तो सारा ही बाहर ही है....फिर अंदर क्या है....

शास....हंस कर...अरे नहीं....बस थोड़ा ही बचा है...और फिर पहली बार बस गेट से अंदर जाने पर ही दर्द होता है और फिर ये गेटवे ऑफ इंडिया को पार कर चुका है....कंचन के चेहरे पर हल्की से मुस्कान फैल गई.....

शास के लंड पर कंचन के हाथ का स्पर्श होते ही उसने एक ज़ोर का ठुमका मारा...और अंदर जाने के लिए मचल उठा....कंचन भी अब कुछ नॉर्मल हो चुकी थी....और फिर कंचन की बेहद टाइट चूत में फँसा शास का लंड कुछ ज़्यादा ही बेचैन हो गया मानो कंचन की चूत उसके लिए चुनोती बन गई हो....शास..बार बार आगे की प्लानिंग के बारे में सोच रहा था....ऑर रिजल्ट एक ही आता था....चुदाई तो अब करनी ही है....जो भी होगा अब देखा जाएगा.........उधर कंचन भी अब कुछ ऐसा ही सोच रही थी शायद????....अब शास ने अपने लंड को थोड़ा अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था,...मगर बहुत धीरे धीरे और लंड अब चूत में अपनी जगह बनाने में लगा था.....लगभत 10 मिनट ऐसा ही करने के बाद कंचन लगभग नॉर्मल हो चुकी थी...उसकी चूत फिर से पानी छोड़ने लगी थी....कुछ ही देर पहले का भयानक दर्द अब वो भूलने लगी थी,,,,

मगर अभी तक कंचन की चूत की झिल्ली नहीं टूटी थी....अभी असली दर्द तो शायद बाकी था इस बात का एहशास शास और कंचन दोनो को ही था....मगर कंचन अब पूरे मज़े का आनंद ले रही थी....आख़िर अब शास की शहन शक्ति जबाब दे चुकी थी....उसका लंड अब कंचन की चूत की गहराई नापने के लिए आतुर हो चुका था....आख़िर शास ने लंड को बाहर खिचा ऑर इससे पहले कि कंचन कुछ समझ पाती शास ने एक ज़ोर का धक्का मार ही दिया......जिससे शास का लंड कंचन की चूत की झिल्ली तो तोड़ते हुए लगभग आधा अंदर पहुँच गया....और कंचन....ज़ोर से चीख उठी.....उसके चेहरे पर भयानक दर्द था...उसका सिर इधर उधर घूम रहा था ऑर शास को पीछे धकेलने की कोशिस कर रही थी.....उसकी चूत से खून की धार बह निकली थी...मगर शास अब रुकने वाला नहीं था....उसने बिना कोई देर किए दूसरा जबरदस्त धक्का लगा ही दिया और शास का लंड कंचन की चूत को चीरता हुआ...3 चौथाई उसकी चूत में फँस गया...

 
दर्द से निढाल कंचन......शायद एक बार फिर मुस्कान की कहानी........कंचन को संभलने का मौका दिए बगैर ही शास का तीसरा जोरदार धक्का.....ऑर इस बार शास का पूरा लंड कंचन की चूत में था और कंचन की बच्चे दानी के अंदर दाखिल हो रहा था.....मगर ये क्या...कंचन तो चीख कर बेहोश बो चुकी थी और बेहोशी में भी दर्द के कारण... अपने सिर को इधर उधर कर रही थी....उसकी आँखों से बहता पानी उसके दर्द की पूरी दास्तान बया कर रहा था....

भाभी....क्या हुआ शास......

शास...वही जिसका डर था भाभी.....

आख़िर भाभी से नहीं रुका गया ऑर वो उठी....अरे ये तो बेहोश हो गयी शास...तुमने इस बेचारी के हालत पर बिल्कुल भी तरस नहीं खाया....भला ये गधे का लंड ये मासूम कंचन काया झेल पाती.....

खैर ठहर अभी कुछ नहीं करना.....में फ्रिज का ठंडा पानी लाती हूँ....तब तक...तू इसके बूब्स ही सहला सकता है....लंड को मत छेड़ना......

शास धीरे धीरे कंचन की चुचिया मसल रहा था....शास का लंड कंचन की चूत में पूरी तरह से फँसा था....ऑर बेहोशी की हालत में कंचन अपने सिर को इधर उधर हिला रही थी.....कंचन की नाज़ुक कुँवारी चूत ऑर शास का मुस्टंडा गधे जैसा लंड....क्या कंचन झेल पाती....आख़िर यही तो होना था......फिर भी शास अपने लंड को बिना हिलाए कंचन की चुचियाँ हल्के हल्के दबा-दबा कर सहला रहा था....ओर कभी कभी चुचियों के निप्पल होंठों में लेकर चूस रहा था....तभी भाभी पानी लेकर आ गयी....ऑर कंचन के मुँह पर ठंडा पानी डाला....एक बार फिर ठंडा पानी डालने पर कंचन कुछ होश में आई...पर चूत का दर्द अभी भी उससे सहन नही हो पा रहा था....उसकी आँखो से बहता हुआ पानी उसके दर्द की कहानी बयान कर रहा था.....कंचन कुछ होश में आते ही चीख पड़ी.....शास प्लीज़ इसे बाहर nikal लो....में तो मर जाउन्गी....आआआआआअहह उूुुुुउउईईईईआआाअहीईईईइससस्स्स्सिईईईईईईईईईई.......................

धीरज धर....अभी दर्द बंद हो आएगा......

कंचन....भाभी में मर रही हूँ

भाभी कंचन के सिर के पास बैठ गई...

भाभी....कंचन बस ज़रा सा हूँ....

कंचन - आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

भाभी....बस अब जो होना था...वो तो हो चुका......बस थोड़ी देर ऑर सहन कर लो......

कंचन....भाभी....नहीं मुझसे सहेन नहीं हो पा रहा है.........

भाभी....कंचन बस थोड़ी सी देर ऑर....ऑर फिर ये तो एक दिन होना ही था...बस इसके बाद इस दर्द से हमेशा के लिए छुट्टी.....बस मज़ा ही मज़ा.... पहले तो सबसे आगे थी.....ऑर अब डर रही है.....लंड तो पूरा चूत में घुस चुका है....क्यों शास.....?????

शास...हां भाभी...कंचन की चूत तो मेरे लंड को पूरा पी गई....

कंचन...पी नहीं गई...फट गई.......

इस पर भाभी....ऑर शास एक साथ हंस पड़े और दर्द होते हुए भी कंचन मुस्कुरा दी.......

भाभी.....आज काश में कंचन की जगह होती...तो बड़ा मज़ा आता...में भी अपनी चूत को फटते हुए देखती....पर मुझे पहले ऐसा लंड ही नहीं मिला....शास मेरी चूत में फिर खुजली मचने लगी है....कुछ तो इस का भी कर दो.......

शास....तो क्या कंचन की चूत से लंड को बाहर nikal कर आपकी चूत में पेल दूं भाभी.......

भाभी...नहीं शास...ऐसा गजब नहीं करना...क्या कंचन की चूत को प्यासी ही छोड़ देगा......देखा नहीं रहे हो....इतना दर्द झेल कर और चूत को फूडवा कर अब कितने आराम से लेटी है.....इस पर कंचन एक बार फिर मुस्कुरा दी.....

शास -- फिर में क्या करूँ भाभी....

भाभी....कुछ नहीं....में तो अपने हाथ से ही काम चला लूँगी.....तुम अब बस कंचन को सम्भालो....ऑर शार एक बार फिर कंचन की चुचियों को मस्त होकर चूसने लगा था....

शास के हाथ कंचन के पूरे सरीर पर तैरने लगे थे....ओर कंचन भी....अब भयंकर दर्द को भूलकर....मीठे मीठे दर्द में भी एक अजीब आनंद का अनुभव कर रही थी......

शास अब कंचन के बदन के साथ पूरी मस्ती के साथ खेल रह था...काफ़ी देर हो चुकी थी....ऑर कंचन की चूत का दर्द अब लगभग गायब था...भाभी का इशारा पाकर शास ने अपने लंड को अंदर ही अंदर हल्के हल्के हिलाना भी शुरू कर दिया था...ऑर कंचन मीठे मीथे दर्द के साथ उउउउउउउउउउआआआआआआउउउउउउउईईईएइससस्स्स्स्सिईईईई

के साथ...धीरे धीरे अपने सरीर को हिला रही थी....ऐसे ही काफ़ी देर गुजर गई....ऑर अब कंचन की चूत ने खून के साथ पानी भी छोड़ना शुरू कर दिया था....मगर शास अभी अपने लंड को अंदर बाहर नहीं कर रहा था...फिर भी उसका लंड झटके मार कर कंचन की चूत को चुनोती दे रहा था...कंचन की बच्चेदानि लगभग 3 एंच अंदर पहुँच चुकी थी...लंड के हर झटके के साथ कंचन क्र्राह उठती थी.....उधर भाभी अपने चूत में चारो उंगली डाल कर घुमा रही थी

कंचन की नज़र भाभी पर जैसे ही पड़ी वो मुस्कुराए बिना नहीं रह सकी....

अब उसकी चूत भी भरपूर पानी छोड़ रही थी...और शास के लंड को और

झटके मारने को मजबूर कर रही थी.....आख़िर जब शास से नहीं रुका गया तो उसने भी लंड को थोड़ा थोड़ा अंदर बाहर करना शुरू कर दिया......ओर कंचन एक बार फिर कराहने लगी पर अब दर्द कम ही हो रहा था

भयानक दर्द सहन करने के बाद ये दर्द कंचन के लिए कुछ भी नहीं था....शास के लंड के धीरे धीरे अंदर बाहर होने के साथ साथ कंचन की आ........आआआआहहुउऊुुुुुउउम्म्म्ममममममाआआआआईईईु

उूुउउम्म्म्मममममममम का साज़ मधुर संगीत बन कर और मादक होता जा रहा था...ऑर शास के लंड की अंदर बाहर होने की स्पीड धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी.....

कंचन अब चुदाई का भरपूर आनंद लेने की स्थिति में आने लगी थी....उधर भाभी अपने काम में मस्त थी....बीच बीच में कंचन भाभी को देख कर ऑर कामातुर हो अपने चूतड़ हल्के से उपर उठाती तो बच्चेदानि ऑर अंदर खिसक जाती जिससे उसकी आआह nikal जाती थी......इस पर शास के लंड की अकड़ाहट ऑर बढ़कर ख़ूँख़ार होती जा रही थी.....ऑर कंचन के आहे अब सिसकारियों में बदलने लगी थी.........

वाह रे चुदाई के खेल...पिछले एक घंटे से दर्द से तड़पती कंचन.......बेहोश होती कंचन ....अब चुदाई के खेल को खुलकर खेलने के लिए तय्यार हो रही थी....उूुुुुउउम्म्म्मममममममाआआआआअहूऊऊऊऊहह की आवाजो के साथ मस्त नाज़ुक सी कंचन.....वासना के समुंदर में तैर रही थी......

 
अब कंचन को चूत के फटने या बच्चेदानि के फटने की कोई चिंता नहीं थी...बस चुदाई.....ऑर चुदाई का आनंद.....ऑर इसी समुंदर में तैरते हुए कंचन अब चुदाई के किनारे की तलाश मे अपने दोनो हाथ शास की कमर पर फिरा रही थी....कभी कभी उसके हाथ शास के चुतड़ों पर आकर शास के लंड को ऑर चूत के अंदर तक लेने की कोशिस कर रहे...थे...उसके अंदर एक तूफान आने जा रहा था.....उधर शास के धक्को की स्पीड के साथ कंचन चुदाई के अंतिम उस छोर की ओर जा रही थी.....जिसका कोई किनारा नहीं...एक अद्भुत आनंद....आनंद....ऑर पूर्णआनंद.......अर्थात....उसकी चूत अब पानी छोड़ने के करीब.....ऑर उसके हाथों का खिचाव शास की कमर पर बढ़ता ही जा रहा था.......

कंचन के हाथों का दबाव शास ने अपनी कमर पर अनुभव किया.....ऑर उसने ऑर जोरदार धक्को की बरसात कंचन की चूत में कर दी.....कंचन की सिसकारी अब पूरे कमरे में गूँज रही थी.....उसी रफ़्तार से भाभी की उंगलियाँ भी अपनी चूत के अंदर बाहर हो रही थी.....भाभी शास के लंड को ही अपनी चूत में जाता अनुभव कर के अपने हाथ की स्पीड बढ़ा रही थी....भाभी की चूत भी अब पानी छोड़ने ही वाली थी...उधर कंचन की चूत और शास के लंड की जंग.....कंचन की चूत फट चुकी थी...उससे खून अब चूत के पानी के साथ मिलकर रिश रहा था...पर चुदाई के आनंद में अब वो सब भूलकर पूर मज़ा ले रही थी...उसकी चूत पानी छोड़ने ही वाली थी ऑर वो शास से ऑर ज़ोर से चिपक कर चूतड़ उछाल रही थी.....कमरे में सिसकारियों की गूँज...उूुुआाअहहुउऊउउम्म्म्ममाआअसस्स्स्स्स्स्सीईईआ आाआआईयईईई सस्स्स्स्स्स्स्शहाआआआअसस्स्स्स्सस्स म्म्मईएरररीए बब्भाई.......फ़ाआड़ दे...आआआहह ईईए लो म्म्म्ममाआऐं तूओ ज्जाअ रही हूऊऊऊवन्न्ननणणन् गूँज रही थीईई

ऑर इसी के साथ कंचन ने पानी छोड़ दिया.......

कंचन की आँखे बंद हो गयी ओर उसकी उंगलियों के नाख़ून शास की कमर में घुस गये...उूुुुुुुुुुुुुआााआआआआअहह की लंबी ध्वनि के साथ.......बस शास के धक्को की आवाज़....कंचन पूर्ण शांत....एक लंबी शांति.......एक लंबा पहला आनंद.....चरम आनंद.....

उधर भाभी की चूत ने भी पानी छोड़ दिया....ऑर एक आआअहह्के साथ वो भी शांत हो गयी.....

मगर शास का लंड अभी भी पूरी गति से अंदर बाहर हो रहरा था.....ऑर फूच फूच फूच की मधुर कामुक आवाज़ ही कमरे में गूँज रही थी....कंचन की चूत अब काफ़ी गीली हो चुकी थी.....ऑर शास का लंड पूरी गति से अंदर बाहर हो रहा था.......अब शास भी अपने उत्कर्ष की ओर बढ़ने लगा था....उसका लंड भी अब पानी छोड़ने के करीब ही था....शांत कंचन में कुछ हलचल सी हुई....शायद अब वो उस पारमानंद से लूटने लगी थी....ठीक इसी बीच शास के लंड ने एक तेज पिचकारी के साथ पानी छोड़ दिया ऑर कंचन की चूत को पूरी तरह से अपने लंड के पानी से भर दिया......शास पूरी तरह से कंचंन से चिपक गया....कंचन अपनी चूत में शास के लंड का गरम-गरम पानी महसूस कर परम आनंद से सराबोर हो चुकी थी....ऑर कमरे में अब पूर्ण शांति..........

कुछ देर के बाद शास ने लंड को कंचन की चूत से बाहर खींचा....इसके साथ ही, खून....चूत का पानी ऑर ढेर सारा वीर्य का मिला हुआ वयंजन कंचन की चूत से बाहर निकलने लगा.....कंचन ने उठने की कोशिस की पर वो ठीक रूप से खड़ी नहीं हो पाई....भाभी ऑर शास ने उसे संभाला....कंचन को अब चलने में बहुत परेशानी हो रही थी....उसकी फटी हुई चूत से अभी भी...खून का रिश्वत हो रहा था....

भाभी....शास ये तो बुरा हुआ...कंचन की चूत तो काफ़ी फट गई ही.....

शास.....अब क्या होगा भाभी...वो घबराकर बोला.....कंचन भी घबरा गई.......

भाभी .....कुछ नहीं...घबराओ मत....सब ठीक हो जाएगा....पहली बार ऐसा होता है....ऑर फिर कंचन की चूत तो अभी नाज़ुक ऑर कुँवारी थी....इस पर गधे का लंड उस में घुसा दिया....तो ये तो होना ही था....पर घबराओ नहीं में संभाल लूँगी.......

भाभी ऑर शास कंचन को पकड़ कर बाथरूम तक ले गये...पर कंचन दर्द के कारण चल नहीं पा रही थी...उसकी टाँगें काप रही थी....ऑर सारे कपड़े भी खून से खराब हो चुके थे.....टाय्लेट करते हुए कंचन को भयंकर दर्द हुआ....

भाभी ऑर शास कंचन को वापस रूम में ले आए....भाभी ने गरम पानी करके उसमें ब्रांडी मिलाकर कंचन की चूत की सिकाई की....जिससे कंचन को काफ़ी दर्द के बाद कुछ राहत मिली.....अभी तक सुबह के 5 बज चुके थे....

भाभी...तुम दोनो कुछ देर आराम कर लो...मेरे पति...हॉस्पिटल से आते ही होंगे....बाकी में सवेरे सब संभाल लूँगी...घबराओ मत...थोड़ी देर सो लो.....

शास ....ठीक है भाभी...पर मुझे तो डर लग रहा है...कंचन की चूत तो बिल्कुल फट गई....घरवालों को क्या कहेंगे.....

भाभी....कहा ना...में सब संभाल लूँगी...अब सो जाओ.....

अब भाभी घर के अन्य कामो में वयस्त हो गई...ऑर शास ऑर कंचन सोने की कोशिस करने लगे....ऑर कुछ ही देर बाद उनके सोने की भी आवाज़ कमरे से आ रही थी....ऑर भाभी काम करते हुए आगे की प्लान बना रही थी..

सुबह जब भाभी के पति जब हॉस्पिटल से आए तो भाभी ने उन्हे बताया कि कंचन रात टाय्लेट जाते हुए बाथरूम में गिर गयी थी....काफ़ी चोट लग गयी है....में जब हॉस्पिटल जाउन्गी तो उसे भी डॉक्टर को दिखा दूँगी....ऑर भाभी जल्दी ही कंचन को अपने पति की सहायता से हॉस्पिटल ले गई...ऑर चुपचाप लड़े डॉक्टर को दिखाया...डॉक्टर ने कुछ क्रींस व मेडिसिन्स दी थी..कुछ दिन सेक्स से दूर रहने की सलाह भी...दी...इसके बाद वे घर लौट आए ...वहाँ पर भी कंचन की बाथरूम में गिरने की ही बात बताई....ऑर किसी को भी शक नहीं हुआ....बात इसी तरह से निपट गई....ऑर शास अपनी मोम के साथ अपने गाँव लौट गया ...कुछ दिनो बाद उसे पता चला कि भाभी प्रेगनेंट है...आख़िर उसने भाभी को चोद चोद कर माँ बना ही दिया था...ऑर भाभी की बरसों की इच्छा भी पूरी हो गई थी

मामा के घर से आने के बाद शास अपनी एग्ज़ॅम्स की तय्यारी पर लग गया ऑर पूरी मेहनत से साथ उसने एग्ज़ॅम दिया....उसके बाद उसकी समर वाकेशन्स शुरू हो गयी.....शास ने मम्मी से मामा के गाँव जाने के लिए कहा तो मम्मी ने कुछ दिन बाद जाने के लिए कह कर बात ख़तम कर दी.....मगर शास के लंड को अब चूत की ज़रूरत महसूस हो रही थी...काफ़ी दिनो से उसे कोई चूत नहीं मिली थी....उसका लंड अब पहले से बड़ा ऑर मोटा हो चुका था...उसे खुद आश्चर्य था...कि उसका लंड इतना भारी कैसे हो जा रहा है....ऑर साथियों से बातों बातों में उसे जानकारी मिल चुकी थी..कि लंड औसत मे 5 या फिर 6-7 इंच का ही होता है...पर उसका लंड तो अभी से 10 इंच लंबा था.. ऑर मोटा भी बहुत था....उसका लंड किसी भी चूत को फाड़ने के लिए काफ़ी था.....मगर अभी किसी भी चूत के मिलने की कोई संभावना नज़र नहीं आ रही थी.....मगर खुदा जब देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है.....यही कुछ बात शास पर भी लागू हुई........

शास को पहला चुदाई का अनुभव संतोष बुआ ने ही कराया था..ऑर आज कल शन्तोश बुआ की लड़की कुछ दिनो के लिए उनके घर पर आई...जो कि एम्स न्यू देल्ही से एमबीबीएस कर रही थी....

संतोष ऑर उसकी बुआ की लड़की शास के घर मिलने के लिए आई....शास तो उस लड़की को देखता ही रह गया....वो इतनी सुन्दर थी....कि शास का तो हाल ही खराब हो गया....ऑर एक तरफ़ा उसी लड़की को घूरता रहा...जब उस लड़की ने शास को अपनी ऑर इस कदर घूरता हुए देखा तो उसे कुछ अच्छा नहीं लगा...वैसे तो उसके लिए ये कोई नई बात नहीं थी...कॉलेज ऑर बाज़ार में भी लड़के उसे घूरते रहते थे...पर गाँव में उसे काफ़ी छोटा लड़का उसे इस कदर घूर रहा था....ये कुछ अटपटा सा लगा...पर वो कुछ नहीं बोली ओर शन्तोश के साथ अपने घर लौट गई.....

कुसुम..संतोष दीदी ये लड़का कौन था...

संतोष...कॉन्सा लड़का कुसुम..

कुसुम...अरे वही लड़का जिनके घर से हम अभी आए है...बहुत घूर घूर कर देख रहा था..

संतोष.. तुम हो ही इतनी सुंदर कि कोई भी तुम्हे घूर घूर कर ही तो देखेगा....ये कह कर संतोष हंस पड़ी.....

कुसुम-क्यूँ मज़ाक कर रही हो दीदी...ज़रा उसकी उम्र तो देखो....ऑर ऐसे घूर रहा था.. कि मानो..मुझे.........

संतोष...वो देखने में ही छोटा है...पर उसका वो बहुत बड़ा है....

कुसुम...उसका वो से आपका क्या मतलब है दीदी...

संतोष...हँसते हुए डॉक्टरनी जी इतनी भी भोली ना बनो...

कुसुम...इसमें भोली बनने की क्या बात है...ज़रा खुलकर बताओ ना दीदी...

संतोष...अरे वही...जिसके लिए आदमी औरत को देखता है....

कुसुम…आदमी किसके लिए औरत को घूरता है दीदी….

संतोष…तुम कॉलेज में क्या पढ़ती हो…जो तुम्हें ये भी नहीं पता है…ऑर फिर तुम्हें कॉलेज के लड़के क्यूँ घूरते हैं…????

कुसुम…उनका तो दिमाग़ खराब होता है जहाँ कोई लड़की देखी बस हो गए शुरू…कुछ वो बोलते रहते है…उन्हें तो कोई ऑर काम होता नहीं है…पर ये लड़का तो अभी उम्र में भी काफ़ी कम है….

संतोष…मेने बताया ना…उसका वो काफ़ी बड़ा ऑर मस्त है….

कुसुम…में भी तो वही पूछ रही हूँ कि वो क्या…..

संतोष….अगर तुम कॉलेज के लड़को को लिफ्ट दो तो वो तुम्हारे साथ क्या करना चाहेंगे…

कुसुम….अरे दीदी छोड़ो..वो तो गंदी सन्दी पिक्चर देखते है…बस उन्हे तो एक ही चीज़ चाहिए….

संतोष…एक ही क्या चीज़ चाहिए…ये तो बताया नहीं तुमने….

कुसुम…तुम तो बात को टाल रही हो…में तो उसके बारे में पूछ रही हूँ….

संतोष..ऑर में भी तो उसी के बारे में बता रही हूँ…वे लड़के तुमसे क्या चाहते है….

कुसुम….सेक्स करना ऑर क्या….

संतोष…पर ये सेक्स होगा किस चीज़ से…में उसी के बारे में बता रही हूँ….

कुसुम…क्या मतलब….

संतोष….बस यही मतलब है कि उसका वो बहुत बड़ा है…..

कुसुम…इसका मतलब ये हुआ कि आपने देखा है दीदी…

संतोष…यही समझ लो…

कुसुम…उत्सुकता से …पर कैसे दीदी…क्या आपने उसके साथ…

संतोष…यही समझ लो…पर वो है बड़ा ही प्यारा…

कुसुम…दीदी बताओ ना…क्या, कब ऑर कैसे हुआ था…..

संतोष…अर्रे..अरे एक साथ इतने सवाल…बस बता दिया कि वो बहुत ही प्यारा है….बस एक ही बार मोका मिला था…बस वो मज़ा आया कि आज तक याद है….अगर एक बार देख लिया तो अपने शहर के लड़को को भूल ही जाओगी…

कुसुम…में अभी कहाँ लड़को को याद रखती हूँ…मेरा कोई बाय्फ्रेंड नहीं है दीदी ऑर मैने आज तक किसी भी लड़के से बात तक नहीं की ऑर बाते तो एक तरफ रही….

संतोष…तो क्या वास्तव में तुमने कभी किसी आदमी का वो नहीं देखा…ऑर सेक्स का आनंद नहीं लिया…

 
कुसुम…नहीं दीदी..सेक्स का आनंद तो नहीं लिया..हां एक दो बार नेट पर रिसर्च करते हुए आदमी का वो तो देखा है…वो भी नेट पर और एक बार मम्मी-पापा को सेक्स करते हुए भी देखा था….बस….

संतोष…पगली…डॉक्टरनी…अरे इतनी बड़ी हो गई…डॉक्टरी पढ़ रही है…ऑर आज तक ना सेक्स किया ऑर ना आदमी का वो ही देखा…अच्छा ये बता तुमने मम्मी-पापा को क्या केरते हुए देखा था…

कुसुम…सेक्स ऑर क्या….

संतोष…अरे पूरी तरह से बता…वो कैसे कैसे कर रहे थे….

कुसुम…ज़्यादा तो कुछ दिखाई नहीं दिया था..बस रात में मैं जब टाय्लेट जा रही थी..तो पापा मम्मी के उपर थे ऑर ज़ोर-ज़ोर से आगे पीछे हो रहे थे…मम्मी कुछ बड़बड़ा रही थी…मुझे शरम आई ऑर में टाय्लेट करके अपने कमरे में भाग गयी…बस…

संतोष…तुम भी कुछ नहीं … कुसुम…अरे जब देखा था..तो पूरा मज़ा लेकर तो देखती….अगर इस जवानी में भी मज़े नहीं लिए तो क्या फिर बुढ़िया होकर लेगी…मेने तो कई आदमियों के साथ मज़े लिए है…पर शास के साथ अनुभव उन सब से प्यारा रहा है…कुसुम जानती हो मेरे साथ शास ने पहली बार किया था…बल्कि कैसे क्या करना है सब मुझे ही सिखाना पड़ा था..पर उसके बाद उसने जो चुदाई की…बस मज़ा आ गया ऑर आज तक याद है…उसके बाद समय या मोका ही नहीं मिला…आख़िर संतोष की ज़ुबान पर चुदाई जैसा शब्द आ ही गया था...

कुसुम…क्या दीदी…आपने ही उसे सिखाया..पर कैसे…अब कुसुम को भी मज़ा आ रहा था….वो भी बड़ी उत्सुकता से सुन रही थी…

संतोष…एक बार खेत में ले गयी थी…वही पर…बड़ा मज़ा आया था…

कुसुम…पर आपको डर नहीं लगा दीदी…कहीं कुछ हो जाता या फिर कोई देखा लेता तो क्या होता..

संतोष…पगली कहीं की…जब एक बार मज़ा ले लेगी तो फिर इन सब बातो का डर अपने आप दूर हो जाएगा…फिर आजकल तो ना जाने कितनी ही टॅबलेट है…दूसरा भी डर नहीं रहता…जवानी आई है तो बस मज़े लो…ऑर जियो…..

कुसुम…दीदी सच बताओ शास का कितना बड़ा है वो…

संतोष…6-7 एंच का तो होगा ही…पर सबसे बड़ी बात तो ये थी…कि में तीन-चार बार झड चुकी थी तब वो एक बार ही झडा था…वर्ना आदमी तो लगाते लगाते ही झड जाते है…ऑर सारा मज़ा किरकिरा कर देते है….

कुसुम…अरे दीदी आप तो बड़ी चालू निकली सारे मज़े ले लिए…ऑर सेक्स के सारे अनुभव भी कर लिए….

संतोष…तुम भी अनुभव कर लो….बाद में काम आएँगे…

कुसुम…मुझे तो डर लगता है दीदी…

संतोष...अरे किस चीज़ का डर.....ये तो सभी करते है...तुमने मम्मी-पापा को तो देखा ही है....

कुसुम…दीदी कहीं कुछ हो गया तो फिर क्या होगा…फिर मुझे तो इस बारे में कोई अनुभव भी नहीं है…

संतोष…अरे कुछ नहीं होगा…ऑर फिर में हूँ ना…में सब संभाल लूँगी…अब गाओं में आई हो तो यहाँ की ऐसी याद लेकर जाओ कि उम्र भर याद रहे…ऑर डॉक्टरनी…तुम्हारी डॉक्टरी में भी तो ये सब की जानकारी ज़रूरी होती होगी….

कुसुम…प्रॅक्टिकल नहीं…बस थियरेटिकल नालेज ही होती है…बुक्स में तो सभी कुछ है…फिर नेट पर सब है…जब चाहे देखा लो…

संतोष…तुम्हारी इच्छा..फिर ये ने कहना कि गाँव गयी थी दीदी ने ख़याल नहीं रखा…तुम चाहो तो में शास से मुलाकात करवाने की कोशिस करूँगी…

कुसुम…दीदी मन तो मेरा भी होता है पर डर लगता है…

संतोष…डर किस बात का में भी तो तुम्हारे साथ ही रहूंगी…फिर ये भी तो देखना होगा कि शास अब तय्यार भी होगा कि नहीं…वो तो अचानक ही हो गया था…

बाते करते करते दोनो बेड पर आ गयी ओर संतोष ने धीरे से कुसुम की चुचियाँ दबा दी…कुसुम के मुँह से आआआअहह निकल गई…..

आअहह दीदी कुछ होता है….आआअहह धीरे से दीदी……..कसमसाती हुई कुसुम की आह एक बार फिर निकल गई……

संतोष…कैसा लगा मेरे जान..छोटी बहना……

कुसुम…बड़ा मीठा मीठा दर्द होता है दीदी, पर मज़ा भी बहुत आया….थोड़ा धीरे से करो ना दीदी…..

संतोष…अरे जब आदमी मस्त हो जाता है तो फिर तो वो मस्त होकर ही दबाता है….मज़ा भी बहुत ही आता है उस दर्द में…मन करता है…कि वो बस दबाता ही रहे ऑर मस्ती में ऑर मस्ती में….ऑर जब निप्पल्स को चूमता है तो सिसकारिया ही निकलती रहती है अह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह …संतोष ने कुसुम की चुचि नंगी करके अपने होठों के बीच चुचि के निप्पल को दबा कर बोली….

कुसुम की आआआहहुउऊईइससस्शहिईिइ के साथ एक कामुक आह निकल गई….उउस्स्स्सिईई दीदी फिर से करो ना….अच्छा लगता है…आज पहली बार किसी ने किया है…..

संतोष ने कुसुम की दोनो चुचियों को नंगा कर दिया ऑर फिर धीरे धीरे सहला कर निप्पल को मुँह में भर लिया….संतोष उसकी चुचियों को सहला सहला कर चूमने ऑर चाटने लगी थी… उसे भी इन कसी हुई चुचियों को सहलाकर चूसने में मज़ा आ रहा था…ऑर कुसुम की हल्की हल्की सिसकारिया लगतार निकल रही थी…संतोष ने धीरे धीरे कुसुम को पूरा नंगा का दिया ऑर खुद भी सारे कपड़े उतार कर कुसुम के उपर लेट गई ऑर उसके पूरे बदन को सहलाने लगी थी….कुसुम के हाथ भी संतोष के शरीर पर लगातार घूम रहे थे….पूरा कमरा मदहोश होकर कामुक सिसकियो से गूज़्ने लगा था…दोनो की चूत गीली होने लगी थी…संतोष का हाथ घूमते घूमते उसकी चूत तक चला गया ऑर वो कुसुम की चूत को हल्के हल्के सहलाने लगी थी…फिर ने जाने उसे क्या सूझा…कि उसने अपना मुँह कुसुम की चूत पर रख दिया ऑर चूत के क्लिट को जीब से चाटने लगी……कुसुम मुमयाने लगी…और उसके चूतड़ अपने आप ही उपर नीचे होने लगे जैसे कि वो वासना के समुंदर में लहरे बन कर तैर रही हूँ….

संतोष की जीब कुसुम की पूरी चूत में घूमने लगी ऑर कुसुम लगातार सिसकियाँ भर रही थी…कि अचानक संतोष ने अपनी जीब को फोल्ड कर कुसुम की चूत के छेद में घुसा दिया….आआआआवउुुुउउईईईईइससस्स्स्स्शह के साथ कुसुम सिहरः उठती…..संतोष की जीब अब लगातार कुसुम की चूत को चोद रही थी…बीच बीच में वो कुसुम की चुचियों को भी मसल रही थी तभी एक तूफान कुसुम के सरीर में आया…उसका पूरा सरीर ऐंठने लगा….उसकी चूत सूनी होने लगी…मानो उसका पूरा सरीर उसकी चूत में नीचूड़ने जा रहा हो… उसके हाथ संतोष के सिर पर ज़ोर से कसने लगे…ऑर संतोष का पूरा मुँह कुसुम की चूत मे फँस गया….उूुुुुुुुुुुुुुुुुुउउम्म्म्मममममममममममाआआआऐईईएईईएईहहाआआआआआअहह का सुर रूम में गूंजने लगा….कुसुम उन्ही लहरो में पूरी तरह से अब डूबने के लिए तय्यार थी….ऑर संतोष कुसुम की चूत को चोद चोद कर पूरा मज़ा ले रही थी…एक प्यासी कुँवारी चूत का पानी भी कुछ अजीब स्वाद दे रहा था…कि अचानक ज्वरभाटा आया ऑर संतोष का पूरा मुँह पानी से भर गया…मस्त संतोष उस पानी को गटगत् पीने लगी ऑर उउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउईईईईईईईईएम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्स्स्स्स्स्स्स्सीइह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआआआआअईईईईए के साथ कुसुम ने अपना पूरा पानी छोड़ दिया….चरम उत्कर्ष के साथ….वो आनंद जिसके बारे में सिर्फ़ सुना था….कुछ देर चूतड़ ज़ोर से उछालने के बाद कुसुम अब शांत होने लगी थी…शान्ती…एक प्रेम सुख…एक नया अनुभव…….वो…क्या सुख था….कुसुम का सरीर शांत होता गया ऑर संतोष उसकी चूत का पूरा पानी पीकर अब उसे जीब से सॉफ करने में लगी थी……

 
कुछ देर शांत रहने के बाद कुसुम ने एक लंबी साँस ली ऑर संतोष को पकड़ कर उससे लिपट गई…दीदी आज तो पूरा मज़ा आ गया…जिंदगी में पहली बार आनंद आया…है…मुझे तो इस मज़े के बारे में कुछ पता ही नहीं था..कहकर संतोष के हाथों को चूमती चली गई…

संतोष…सिर्फ़ हाथ चूमने से कुछ नहीं होगा…अब तुम्हारी बारी है …अब तुम भी मेरी चुचियों ऑर चूत से थोड़ी देर खेलो..मेरी चूत का भी तो पानी nikal जाए…बहुत दिनो से पानी भी नहीं निकला…बस गीली होकर ही रह जाती है….चुदाई तो हुई नहीं..चाट कर ही पानी nikal दो कुसुम…

कुसुम…ठीक है दीदी…अब तो मुझे भी इस मज़े का पता चल गया है..जब तक में यहाँ हूँ रोज आपके साथ इस आनंद का मज़ा लूँगी…..

संतोष…अरे असली आनंद तो तुमने लिया ही नहीं….चल पहले मेरी चूत का पानी nikal दे उसके बाद बात करेंगे…मेरी चूत भी पूरी तरह से गीली हो रही है…..

कुसुम…मेरा भी मन कर रहा है…ऑर ये कह कर वो संतोष पर टूट पड़ी…मस्त होकर उसकी चुचियों को दबा दबा कर पी रही थी…ऑर उसके बाद संतोष की चूत को मुँह मे लेकर चूसने चाटने लगी…यही सिलसिला काफ़ी देर तक चलता रहा….उसके बाद संतोष की चूत ने भी पानी छोड़ दिया…

अब संतोष ओर कुसुम दोनो बराबर बराबर में बिल्कुल नंगी पड़ी थी…दोनो की आँखे बंद थी…ऑर अपने अपने ख़यालो में खोई हुई थी….

कुछ देर शांत रहने के बाद कुसुम ने चुप्पी तोड़ी….दीदी …आप कह रही थी…कि असली मज़ा तो मेने लिया ही नहीं…क्या इससे ज़्यादा मज़ा भी होता है…….

संतोष…आँखे बंद किए हुए ही…हाँ होता है…..

कुसुम…वो कैसे दीदी…वो भी बताओ ना…..

संतोष….चुदाई का मज़ा…

कुसुम…क्या मतलब…दीदी

संतोष…अरे पगली चुदाई में इससे भी ज़्यादा मज़ा है….

इस बात पर कुसुम एक बार फिर चुप हो गई…ऑर संतोष भी चुपचाप पड़ी रही…दोनो के अंदर ही अंदर शायद कोई तूफान चल रहे थे….वो शायद चुदाई के बारे में ही थे…संतोष शायद अब चुदाई का प्लान बना रही थी ऑर कुसुम चुदाई के मज़े के बारे में सोच रही थी…जब इतने मज़े को भी दीदी कुछ नहीं मान रही है तो फिर चुदाई का मज़ा कितना होगा….यही सोच सोच कर उसके सरीर में झुरजुरी सी आ गई…..

कुसुम …दीदी वास्तव में क्या इससे भी ज़्यादा मज़ा है…..

संतोष…है..कुसुम…..में उसी के बारे में सोच रही थी…बहुत दिनो से चुदाई नहीं करवाई है…बस सोच सोच कर ही सरीर में कुछ हो रहा है…

कुसुम…हाई दीदी मेरे सरीर में भी कुछ हो रहा है….

संतोष….कई महीने पहले शास से चुदवाया था…उस समय वो इस बारे में बिल्कुल अंजान था…पर मज़ा बहुत आया था…पर अब तो वो चुदाई में ट्रेंड हो चुका है…कुछ तो मेने ही ट्रैंड कर दिया था…ऑर आज जैसे वो तुम्हे घूर रहा था…..उससे तो मुझे पूरा यकीन है….कि उसने उसके बाद भी किसी की चुदाई की है….ऑर अब उसे भी चूत की ज़रूरत हो रही है….बस काँटा ही डालना है….वो तो तय्यार ही लगता है…..

कुसुम…दीदी अब तो मेरा भी चुदाई का मन कर रहा है पर डर भी लग रहा है….कि कहीं कोई गड़बड़ ना हो जाए….

संतोष…कुसुम जब मज़ा लेना हो तो सारे डर भूल जाने चाहिए…मुझे देखो…बस चुदाई चाहिए आज…कोई डर नहीं….इसे पहले भी कई बार चुदि हूँ….बस एक बार शुरू में थोड़ा दर्द हुआ था….उसके बाद तो बस मज़े ही मज़े मिले….मेने तो प्लान बना लिया है…चाहे जो भी हो….अब तो एक बार फिर शास को फसाना है ऑर चुदाई करवानी है….

फिर दोनो उठ गई ऑर कपड़े पहन कर हाथ मुँह धोया ऑर शास के घर की तरफ़ चल दी…….

संतोष ऑर कुसुम शास के घर आ पहुँची….घर पर भाभी (शास की मम्मी) के अलावा कोई नहीं था….शास भी कहीं बाहर गया हुआ था…..संतोष ऑर कुसुम को देख कर भाभी खुश होते हुए बोली….आऊ…दीदी….में भी घर में अकेली थी…अच्छा किया आप आ गई…वर्ना में अकली बोर हो रही थी….

आपकी बोरियत दूर करने ही तो आए है भाभी….संतोष मुस्कुराइ…

भाभी…अच्छा किया….

कुसुम…हम भी घर पर दोनो अकेले ही थे सोचा आपके साथ बैठ जाए….हमारा भी मन लग जाएगा……

भाभी…ठीक किया तुमने कुसुम…..क्यूँ बाकी सब कहाँ गये…

संतोष…आप तो जानती है भाभी…शादियों का सीज़न चल रहा है….सभी कहीं ना कहीं शादी में गये है….बस घर हम दोनो के हवाले….ऑर उपर से ये डरपोक डाक्टरनी…..

कुसुम…क्या कहा…डरपोक….में किससे डरती हूँ….

संतोष…क्यूँ जब में चोर की बात बता रही थी…तो तुम डर नहीं रही थी….कि रात में क्या होगा, अगर चोर आ गये तो….कुसुम कुछ समझ नहीं पाई कि कब चोरों की बात हुई थी….कि अचानक उसके दिमाग़ में आया कि हो सकता है कि संतोष दीदी का कोई प्लान हो….उसने तुरंत हाँ में हां मिलाते हुए कहा हाई भाभी मुझे चोरों से बहुत डर लगता है…ऑर संतोष धीरे से मुस्कुरा दी….

भाभी…दीदी शादियों का सीज़न चल रहा है…तुम भी कोई लड़का ढूँढ लो ना अब तो…रात कैसे काटती हो….

संतोष…भाभी आपको याद करके….

इस पर तीनो हंस पड़ी….

संतोष…भाभी…अभी तो राते आपको याद करके ही काटनी पड़ेंगी…अभी कोई ऑर रास्ता नहीं है…

भाभी…क्यूँ…क्या कहीं कोई लड़का नहीं देखा है..चाचा जी ने…

संतोष…नहीं अभी तो कहीं भी बात नहीं बनी है….

कुसुम…भाभी आप ही कोई ढूँढ दो ना…..इस बेचारी का बुरा हाल तो मुझसे भी अब देखा नहीं जा रहा है….

संतोष…अपना हाल संभाल डॉक्टरनी जी…मेरा बाद में देखना…तेरी तो हर समय पानी छोड़ती रहती है….

भाभी…अच्छा…डाक्टरनी जी की भी पानी छोड़ती है…दीदी…क्या आपने खोलकर देखा है….कैसी है….

इस पर फिर तीनो हंस पड़े….ऑर कुसुम झेप से गई…..ऑर उसके गालों पर शर्म से गुलाबी पन आ गया…..

संतोष…भाभी क्या बताऊ…..डॉक्टरनी है ना….बिल्कुल चिकनी बना रक्खी है….कहीं पर एक बाल भी नहीं है…गोरी चिट्टी…सफाई का बड़ा ध्यान रखती है…..ऑर पानी भी सॉफ सुथरा ही छोड़ती है….

भाभी… चोन्कते हुए अच्छा जी…इसका मतलब तुमने जी भर कर देखा है….डाकटरणी की……

कुसुम…ये तो आपकी भी ना छोड़े भाभी…अगर इसका बस चले तो…इसके पास तो हर चीज़ का एलाज़ है भाभी….

संतोष…डॉक्टरनी तो तुम हो ऑर एलाज़ मेरे पास,,,ये कैसे हो सकता है…..हैं ना भाभी….

भाभी…हैं बात तो ठीक है….पर तुमने देखी कैसे…..

संतोष…बस ये ना पूछ भाभी…वर्ना…फिर तुम भी……

भाभी…तुम भी क्या….

संतोष…कुछ नहीं भाभी…

भाभी…कुछ छुपा रही हो क्या दीदी….

कुसुम…ये तो सब कुछ ही छिपा रही है….

संतोष…चुप रह डॉक्टरनी जी….भला में क्या छुपाउंगी….

भाभी…कुछ दाल में काला लगता है….सच-सच बताओ दीदी क्या बात है….क्या छिपा रही हो दीदी….भला मुझ से क्या छिपाना…

संतोष…कुछ नहीं भाभी..कुछ भी तो नहीं…बस ऐसे ही…हम लोगो ने सोचा था….कि रात में हम दोनो अकेले रहेंगे इस लिए शास को अपने पास सुला लेंगे…जिससे इस डॉक्टरनी को डर भी नहीं लगेगा….कोई तो आदमी होगा हमारे पास…..

भाभी…बस यही बात है या कोई ऑर….

संतोष…ऑर कुछ नहीं बस यही बात है भाभी….

भाभी…हंसते हुए…शास तो अभी बच्चा है भला वो आप लोगों का क्या डर दूर कर पाएगा….किसी…हट्टे कट्टे नौजवान लड़के को देखो…शायद वही रात में तुम दोनो का डर भी दूर कर दे ऑर……ऑर बस सारा का सारा ही डर दूर कर देगा……

 
संतोष…भाभी आप भी ना बस….ऑर फिर शास अब बच्चा कहाँ रहा है….शायद आपको कोई ग़लत फ़हमी है भाभी….फिर हमारा वो मतलब नहीं था….संतोष ने कुछ सोचते हुए कहा…

भाभी…क्या मतलब कि शास अब बच्चा नहीं रहा है…मुस्कुराते हुए….कही डॉक्टरनी की तरह उसका भी तो नहीं देखा लिया है दीदी…

कैसा है दीदी….

संतोष…क्या भाभी…आप भी मज़ाक कर रही है…

पर घर में तो पानी मार ही रहा था…जिसको भाभी ताड़ गई…भला भाभी की अनुभवी आँखो से वो कैसे छुपा सकती थी….

संतोष…क्या कैसा है….

भाभी….अरे वही…जिसकी तुम्हे रात में ज़रूरत महसूस हो रही है……

संतोष…लजा कर…अरे भाभी…भला मुझे क्या मालूम…

भाभी…दीदी सच-सच बताओ ना…..क्या आपने देखा है….

संतोष…आप तो पीछे पड़ गई भाभी…ऐसी कोई बात नहीं है…

भाभी…देखलो दीदी…अगर आप सच बताएँ तो में शास के पापा से रात को भेजने की बात करूँगी…ऑर नहीं तो बस आपकी रात काली….समझ गई ना बन्नो रानी…भला कोई अपनी भाभी से भी कोई बात छुपाता है…अरे पगली भाभी तो नंदो की मदद ही करती है….

भाभी..संतोष ऑर कुसुम के चेहरों पर आते जाते भाव को पढ़ती हुई….

क्या हुआ दीदी…..आप दोनो तो चुप हो गई…में तो तुम्हारी मदद करना चाहती थी…बाकी आपकी मर्ज़ी….

कुसुम…निराश होते हुए…अब आपसे क्या छुपाना भाभी….संतोष दीदी ने शास के बारे में मुझे बताया था…

भाभी…क्या बताया था…दीदी….

कुसुम…यही कि शास का बहुत बड़ा ऑर मोटा है…ऑर वो पूरी तरह से एक पक्का मर्द है….

भाभी…मुस्कुराते हुए…ये तो मुझे भी मालूम है…ऑर क्या बताया था…अब वो भी बता दो ना दीदी……

संतोष ने शर्म से अपना सिर नीचे झुका लिया था…पर ऑर कोई चारा भी तो नहीं था…अगर उन्हे रात का मज़ा लेना था तो भाभी को सब कुछ बताने के अलावा ऑर कोई रास्ता नही था….

कुसुम…भाभी एक बार संतोष ने शास के साथ किया था…वो उसे आज भी याद है…शास के उसकी लंबाई 6-7 एंच होगी ऑर मोटाई तो 3 एंच से भी ज़्यादा हो सकती है…ऑर क्या बताऊ भाभी….

भाभी…अच्छा में शास के पापा से बात करूँगी…पर मेरे शास को दोनो मिलकर बिल्कुल निचोड़ ही मत लेना….भाभी ने हँसते हुए….संतोष के गाल पर एक हल्की सी चपत लगाते हुए कहा…

संतोष…ने उपर सिर उठाकर भाभी की ओर देखा…भाभी अभी भी मुस्कुरा रही थी…संतोष ने आगे बढ़ कर भाभी को बाहों में भर लिया….”भाभी”……………….

भाभी…अरे पगली…में तो पहले से ही जान रही थी…बस पक्का नहीं था….ऑर तुम्हारी चुचियाँ तो अभी से इतनी टाइट हो गई है फिर रात मे क्या होगा…….भाभी फिर हंस पड़ी….

संतोष…ने भाभी को ऑर ज़ोर से भींच लिया…ऑर भाभी के गाल पर एक किस दे दिया…..

भाभी…दीदी इसे तो रात के लिए संभाल कर रक्खो…रात में काम आएगा…अब ये तो बताओ दीदी…कि तुमने शास को कब ऑर कैसे फँसाया था…

संतोष…भाभी बस एक बार जब में शास को खेतों में ले गई थी….बस उसी दिन….

भाभी…कैसा लगा था…

संतोष…भाभी अब सच बताऊ तो जैसा मज़ा उस दिन आया वैसा पहले कभी नहीं आया …और उसके बाद किसी के साथ कुछ करने का मन ही नहीं हुआ…..

भाभी..अच्छा तो ये बात है…कुछ सोचते हुए…अब शायद भाभी को भी मज़ा आने लगा था…

क्या सच कह रही है दीदी…पर उसे क्या चुदाई का कोई अनुभव था…क्या उसने पहली भी…किसी के साथ….

संतोष…नहीं भाभी..उसका वो पहला वाकिया था….उसे तो मेने खुद ही ट्रेंड किया था…उसके बाद उसने जो मेरी चुदाई की…बस आज तक नहीं भूल पाई….धीरे धीरे वो चुदाई जैसे शब्दों का प्रयोग करने लगी थी…भाभी सच बताऊ शास का बहुत बड़ा ऑर मोटा है…मेरी तो कई दिनो तक दुखी थी…

भाभी…अच्छा…………

उस समय उन तीनो की चूत पानी छोड़ रही थी…भाभी भी अपने शास के बारे में सोच रही थी कि आख़िर ऐसा कितना बड़ा होगा शास का लंड जो संतोष दीदी उसकी इतनी तारीफ कर रही है….सोच सोच कर ही उसकी चूत पानी छोड़ रही थी…उधर संतोष ऑर कुसुम की चूत रात के बारे में सोच कर पानी छोड़ रही थी…

पर भाभी को शायद अब कुछ ऑर भी याद आ रहा था…शायद अपने ससुर के बारे में……

भाभी…. के मस्तिस्क में चलचित्र की तरह आपनी शादी ऑर उसके बाद की कुछ घटनाए घूमने लगी……………..

नई नई शादी होकर भाभी ससुराल आई थी…सुहाग रात में उसके पति ने उसे पूरी रात में 5 बार अपने 6 एंच लंबे ऑर मोटे लंड से चोदा था…क्योंकि भाभी पूरी तरह से वर्जिन (कुँवारी) थी…इसलिए उसे दर्द भी बहुत हुआ था.. पर बाद की चुदाई में मज़ा भी बहुत ही आया था…..इसी तरह से कुछ दिन गुजर गये…उसका पति उसे रोज ही रात में एक या दो बार चोदता था…इस चुदाई के मज़े में भाभी अपने मैके की सारी बातों को भूलने लगी थी..जब भी वो मयके जाती वहाँ पर उसका मन बिल्कुल नहीं लगता था…उसे अपने पति की याद ऑर चुदाई का सुख याद आता था…उसके पति भी उसके बिना नहीं रह पाते थे…..ऑर जल्दी ही उसे मायके से वापस ले आते थे….उस रात में वो कई बार चुदाई करते थे…इसी तरह से एक साल गुजर गया…भाभी अपने पति से पूर्ण संतुष्ट थी…ऑर उसे अपने पति का लंड बहुत अच्छा लगता था…..पर एक दिन….उसकी सास ने उसे कहा कि बहू तुम्हारी शादी को एक साल हो गया है हमें पोते का मुँह कब देखने को मिलेगा…..

रात में भाभी ने ये बात अपने पति को बताई….तो उसके पति ने कहा जब जो होगा हो जाएगा…क्या तुम संतुष्ट नहीं हो….भाभी ने अपने पति को चूमते हुए कहा कि में पूर्ण संतुष्ट ऑर खुस हूँ…इस तरह से कुछ दिन ऑर गुजर गये…पर एक दिन फिर उसकी सास ने कहा कि बहू इतने दिन हो गये….तुमने कोई खूसखबरी नहीं दी….भाभी सोचने लगी कि आख़िर उसके हाथ में क्या है….पर उसने आपनी सासू माँ को कोई जबाब नहीं दिया….

फिर रात में भाभी ने अपने पति को वही बात बताई…तो वो भी सोचे लगे कि…की आख़िर वो क्या करे…????

अगले दिन भाभी के पति ने भाभी ऑर अपना चेकप एक डॉक्टर से कराया…दोनो की सभी रिपोर्ट्स नॉर्मल आई…ऑर धीरज धरने के लिए कहा…..कि कई बार ऐसा होता है…घबराने की कोई बात नहीं है…सब ठीक हो जाएगा…दोनो घर आ गये…ऑर फिर नॉर्मल लाइफ चलने लगी….

एक रात की बात है कि भाभी चुदाई के बाद जब बाथरूम में जा रही थी तो उन्हे आपनी सासू माँ की कुछ अजीब सी कराहने की आवाज़ सुनाई दी…मानो वो दर्द से कर्राह रही हों…सुबह भाभी ने सासू माँ से पूछ ही लिया माजी क्या रात आपकी तबीयत खराब थी…जब में बाथरूम गई तो आप दर्द से कर्राह रही थी…क्या बात है….

सासू माँ मुस्कुरा कर रह गई…ओर बोली नहीं तबीयत ठीक है बस यूँ ही कभी कभी…कुछ परेशानी हो जाती है….

भाभी कुछ समझ नहीं पाई…ऑर बात आई गयी हो गई…

भाभी के ससुर बड़े ही हट्टे-कट्टे लंबे चौड़े गतीले बदन के मालिक थे….एक दिन गाँव की कुछ ओरते (लेडीज़) उनके घर पर बैठी थी ऑर आपस में मज़ाक करते हुए…चुदाई के संबंध में बातें करने लगी ….तभी एक ने बताया कि ….गाँव की एक ओरत के उसके ससुर से संबंध है…..दूसरी ने कहा कि ये कोई नई बात नहीं…आमतौर पर बहू के संबंध ससुर के साथ बन ही जाते है…भाभी सोचने लगी…कि क्या ये भी संभव है…फिर उसे ख़याल आया कि उसके ससुर भी तो उसे चुपके चुपके घूरते है…कई बार उसे अपनी पैंटी पर भी कुछ लगा हुआ मिला है…कहीं उसके ससुर भी तो उस पर नज़र तो नहीं रखते है…ये ख़याल आते ही….भाभी अपने ससुर पर चोर निगाहों से नज़र रखने लगी थी…..

अब भाभी की नज़र अपने ससुर पर रहने लगी थी…भाभी ने महसूस किया कि अक्सर उसके बाथ लेने के बाद उसके ससुर बाथरूम में ज़रूर जाते है…ऑर जब भी भाभी टाय्लेट जाती थी तो उसके ससुर टाय्लेट के दरवाज़ के आसपास नज़र आते थे…पहले तो भाभी इस ओर ध्यान ही नहीं देती थी…पर जब से उन्होने ध्यान देना शुरू किया तो वे इस रहस्य को समझ नहीं पा रही थी…एक दिन जब भाभी घर में सफाई कर रही थी तो उन्होने महसूस किया कि उनके ससुर की निगाहे लगातार उनकी चुचियों को घूर रही है…तो भाभी के सरीर में सिहरन सी दौड़ गई…ऑर उन्होने साड़ी के पल्ले को जो नीचे गिरा हुआ था…ऑर भाभी की आधी चुचियाँ नज़र आ रही थी…को ठीक किया…ऑर फिर सफाई में लग गई…. अचानक उनके ससुर ने भाभी को संबोधन करते हुए कहा….

ससुर…बेटा सफाई आराम आराम से किया करो…वर्ना थक जाओगी……

भाभी…जी पिताजी…

ससुर….सफाई करते हुए ढीले ढले कपड़े ही पहना करो जिससे बैठने में परेशानी ना हो…..या फिर साड़ी को उतार दिया करो…यहाँ पर मेरे ऑर तुम्हारी सास के अलावा ऑर कॉन होता है…में तो तुम्हारे बाप जैसा हूँ मुझ से क्या शरमाना ऑर क्या परदा…ये साड़ी का पल्लू बार बार लुढ़क कर तुम्हे परेशान करता है…बेहतर रहेगा…..कि तुम इसे उतार ही दो….

सासू माँ….बेटी में ज़रा बाहर जा रही हूँ अभी आती हूँ तब तक अपने ससुर को नाश्ता करा देना…में बाद में आकर कर लूँगी….

भाभी…जी माजी….

ससुर…बेटी…तुम मेरे नास्ते की चिंता में परेशान ना हो आराम से सफाई कर लो…बाद में सब साथ नाश्ता कर लेंगे…पर यदि तुम चाहो तो ये साड़ी उतार कर सफाई कर लो…जिससे तुम्हे परेशानी ना हो…

भाभी…नहीं पिताजी मुझे कोई परेशानी नहीं हो रही है…

ससुर…परेशानी क्यूँ नहीं है…में देख रहा हूँ कि ये पल्लू तुम्हे बड़ा परेशान कर रहा है….

भाभी…वो तो ठीक है पिताजी पर कोई आ गया तो क्या कहेगा…..

ससुर ….अरे क्या कहेगा…तुम हमारी बेटी के समान हो…इसमें हर्ज ही क्या है……

भाभी …नहीं पिताजी..में ठीक हूँ…परंतु भाभी कुछ कुछ अब समझ रही थी कि उसके ससुर उसकी साड़ी क्यों उतरवाना चाह रहे है…ऑर उनका ध्यान कहाँ पर है…पर वो अपने ससुर को अपनी ओर से कोई मोका नहीं देना चाहती थी….

ससुर…ठीक है बहू में तो तुम्हारी परेशानी की वजह से कह रहा था…ये पल्लू तुम्हे बड़ा परेशान कर रहा है…

भाभी…कर तो रहा है पिताजी…पर क्या करूँ…कोई आ गया तो जाने क्या क्या समझ लेगा…ऑर जाने क्या क्या बातें होने लगेंगी….भाभी ने ये तो जान ही लिया था कि ससुर बहू के संबंध आम बात है…जैसा कि उसने दूसरी औरतों से सुना था..पर वो अभी इसके लिए तयार भी नहीं थी…ऑर फिर पहल भी नहीं करना चाहती थी….फिर उसे ससुर को परेशान करने में अब मज़ा भी आने लगा था….कई बार तो वो जान बूझ कर अपने पल्लू को इधर उधर गिराने लगी थी…जिससे उसके ससुर ऑर परेशान हो जाए…. कि अचानक भाभी की नज़र सफाई करते हुए आपने ससुर की धोती पर पड़ी तो वो कांप कर रह गई…

 
जैसे ही भाभी की नज़र अपने ससुर की धोती पर पड़ी…भाभी का दिल धक्क से रह गया…ऑर ज़ोर ज़ोर धड़कने लगा….उसके ससुर का लंड धोती में ही तंबू बना हुआ था…भाभी की आखें शरम से नीचे झुक गई ऑर उसके गाल शर्म से गुलाबी हो गए…

ससुर…क्या हुआ बेटी…

भाभी…कुछ नहीं…पिताजी…नज़रें नीची किए हुए ही कहा….

भाभी सोच रही थी कि क्या किसी का इतना बड़ा भी लंड होता है…..भाभी को धोती में जिस तरह का तंबू नज़र आया…उससे तो यही लगा कि ससुर जी का लंड कुछ ज़्यादा ही भारी है….अब भाभी जल्दी जल्दी से सफाई करने लगी थी….

उधर उसके ससुर की निगाहें भाभी के पूरे सरीर को टटोल रही थी…वे सोच रहे थे कि उनकी बहू कितनी सुंदर ऑर भरे हुए सरीर की है…इसका एक एक अंग गदराया हुआ है…क्या भारी चुचियाँ है…ऑर चूतड़ तो गजब ही ढा रहे है…इसकी चूत कितनी प्यारी बिल्कुल डबालरोटी की तरह होगी…आआआअहह अगर इसकी चूत एक बार मिल जाए तो ये लंड तो बस निहाल हो जाए….

भाभी…पिताजी ज़रा पावं तो उपर करलीजिए….भाभी ने ससुर के पलंग के पास सफाई करते हुए कहा….ससुर जी का लंड अभी भी बिल्कुल तंबू बना हुआ था….ऑर बार बार उपर नीचे झटके मार रहा था…भाभी ने कई बार चोर निगाहों से देख लिया था…ऑर भाभी को इतने भारी लंड होने के एहशास से ही अजीब सा लग रहा था….

ससुर..मानो नींद से जागते हुए आअहहाा अच्छा…बेटी ऑर जैसे ही ससुर ने पावं उपर उठाए…तो उनका लंड बीच में फँस जाने के कारण उनके मुँह से आअहह की सिसकारी….निकल गई…

भाभी…क्या हुआ पिताजी…..

ससुर…कुछ नहीं बेटी…बस ज़रा सा पावं सो गया था…

भाभी ने अहसास किया कि उसके ससुर को उपर पावं करने में लंड की वजह से परेशानी हुई है….पर ना जाने क्यूँ भाभी को अब ससुर से डर सा लगने लगा था…इसी लिए भाभी ने जल्दी से सफाई कर कमरे से निकल गई…उसने महसूस किया कि उसकी चूत में कुछ गीलापन आ गया है…पर दूसरे ही पल ससुर के लंड के साइज़ के बारे में सोच कर वो डर गई…..ऑर दूसरे कामो में लग गयी….

उधर ससुर का लंड अब उसे बहुत ज़्यादा परेशान कर रहा था…अकड़न के कारण उसमें दर्द होने लगा था….वो पलंग से जैसे ही उठे ऑर दरवाजे में गए सामने से आती हुई अपनी बहू से टकरा गये……

आआआअहह की आवाज़ हुई…ससुर ऑर बहू के मुँह से एक साथ निकला….बहू की पीठ पर ससुर का लंड ऐसे चुभा जैसे किसी ने बाँस चुभा दिया हो….ऑर अचानक टकराने से ससुर के लंड में ऑर ज़्यादा अकड़न ऑर दर्द बढ़ गया था….

हड़बड़ाहट में ससुर जी बाथरूम की ओर चले गए…ऑर उसके बाद भाभी ने एक लंबी साँस ली…आआहह हे भगवान…कितनी ज़ोर से पीठ से टकराया है….कितना भयंकर लंड है इनका….ऑर जल्दी से बाहर जाकर अपने अन्य कामों में लग गयी….

भाभी घर के कामों में ज़रूर लगी थी..पर उनके ध्यान में ससुर जी का भारी भरकम लंड अब भी घूम रहा था…बीच बीच में उनकी चूत पानी छोड़ रही थी…बीच बीच में उन्हें लंड के बारे में सोच कर झुरजुरी सी आ जाती थी…

ससुर कमरे से निकल कर सीधे बाथरूम में गये ऑर दरवाजा बंद कर जल्दी से लंड को धोती से बाहर निकाल कर जल्दी जल्दी से हिलाने लगे…उन्हें लग रहा था…कि उनका लंड उनकी बहू की दोनो भारी चुचियों के बीच फँसा है…यही सोच सोच कर उनके हाथ से लंड को सहलाने की स्पीड बढ़ती जा रही थी…उनके मुँह से आआआअहहुउऊुुउउईईएइससस्स्स्सिईइ है बहू…..की आवाज़ें निकल रही थी…जब काफ़ी देर हो गई..तो भाभी..उधर गई…तो उन्हें बाथरूम से इसी प्रकार की आवाज़ें सुनाई दी….

भाभी सोचने लगी…कि उनके ससुर उसी के बारे में सोच कर कुछ कर रहे है…कुछ पल के लिए वो भी उत्तेजित हो गई…पर फिर उस भारीभरकम लंड की याद आते ही…उनकी उत्तेजना छुमन्तर हो गई…उनके सरीर में सिहरन सी दौड़ गई…. ये सोच कर वो ऑर डर गयी कि कहीं ससुर का लंड उसकी चूत में घुसा तो उसकी चूत को ज़रूर फाड़ डालेगा…. जब पहली चुदाई में उसे उसके पति के साथ इतना दर्द हुआ था.. तो ससुर का लंड तो मार ही डालेगा….

आख़िर ससुर अपने लंड को हिलाने में व्यस्त थे….अब उनका सरीर अकड़ गया…उनकी आखें बंद हो गई…पूरा सरीर मानो एक जगह सिकुड गया हो…ऑर उन्होने एक आआआआअहह के साथ लंड से पिचकारी छोड़ दी….लंड से निकलती वीर्य की पिचकारी दूर दूर तक जा गिरी थी….आज ससुर के लंड से इतना वीर्य निकला था..कि इतना तो उनकी सुहागरात वाले दिन भी नहीं निकला था……..

कुछ देर के बाद ससुर अपने होश में आए उनका लंड अब सुस्त होने लगा था…उन्हें आज इतना मज़ा आया था…कि शायद पहले कभी आया हो…कुछ देर के बाद वे अंदर से बाथरूम को धोकर बाहर निकल आए…उस समय भाभी आँगन में थी…बहू ऑर ससुर की अचानक आँखे चार हुई…तो भाभी ने शरमा कर आँखें नीची कर ली….ऑर ससुर अपने कमरे में चले गाए…..पर बहू पर नज़र पड़ते ही उनके लंड में फिर से सुरसूराहट होने लगी थी…..

ससुर के दिमाग़ में बहू की फिगर अब घर चुकी थी…बहू की चुचियाँ…उसके चूतड़…बहू की चूत निश्चित रूप से डबलरोटी की तरह से फूली हुई होगी…पता नहीं बहू की चूत पर घने बाल होंगे या फिर सॉफ कर रखी होगो …..यही सोच कर उनका लंड झटके मारता रहा….ऑर ना जाने कब उन्हें नींद आ गई….लगभग एक घंटे के बाद भाभी ससुर जी के कमरे में गई तो ससुर जी सो रहे थे ऑर उनका लंड धोती को खोलकर बाहर निकलने की तय्यारी कर रहा था…

भाभी कुछ देर तक ससुर के लंड को निहारती रही…उनकी हालत भी खराब हो चुकी थी…भाभी अभी नहीं सोच पा रही थी….कि ससुर के साथ नज़दीकी बनाई जाए या फिर दूर ही रहे….कभी उस भयंकर लंड को देखने की इच्छा फिर चूत फटने का डर….यही सोच कर वो परेशान सी हो गयी…पर ये तो पक्का था…कि उनके दिमाग़ में अब ससुर जी का लंड समा चुका था…

भाभी को कभी चूत में उंगली डालने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई थी….उन्होने कभी चूत को सहलाया भी नहीं था…अपने पति के अलावा किसी ऑर से चुदाई भी नहीं करवाई थी…ऑर ना कोई ऑर लंड देखा ही था…पर आज ना जाने भाभी को क्या हुआ था…कि उनका हाथ अपने आप ही अपनी चूत पर चला गया…जो अभी तक गीली थी….ऑर खुल-बंद हो रही थी…भाभी सोचने लगी कि मुझे आज ये क्या हो रहा है….पैंटी भी चूत से लगातार पानी आने से गीली हो चुकी थी……..

दोस्तों….आप सभी अडल्ट है…ऑर लंड चूत के इस खेल से सभी अच्छी तरह से वाकिफ़ है….जब किसी लंड को एक कसी हुई चूत का अहसास होता है तो वो अपना आपा खो देता है ऑर उस चूत में जाने के लिए बेताब हो जाता है ठीक इसी तरह से जब एक चूत को बेताज भारी भरकम लंड का अहसास होता है तो वो उसे अपने अंदर लेने की लिए लालायित हो जाती है…भले ही अंजाम कुछ भी हो…कुछ इसी तरह का खेल भाभी ऑर ससुर के बीच अब शुरू हो चुका था…इसका अंत क्या होगा….आओ आगे बढ़ते है…..

क्यूंकी भाभी ने कभी अपनी चूत को उंगलियों से नहीं सहलाया था…ऑर किसी दूसरे से चुदाई भी नहीं करवाई थी…इसलिए उसके लिए ये नया अनुभव ही था. ऑर वो इस नये अनुभव से रोमांचित हो रही थी…

दिन किसी तरह से गुजर गया…रात आई तो सब लोग खाना खाने के बाद अपने अपने बेडरूम में चले गए…भाभी अपने प्लांग पर अपने पति के साथ थी…तो ससुर अपनी पत्नी के साथ अपने कमरे में थे…..

ससुर आज जल्दी ही भाभी की सास के पलंग पर आ गये ऑर उसकी चुचियों को भाभी की चुचियाँ समझ कर सहलाने लगे…आज ससुर ने जो चुदाई का खेल खेला वो मानो भाभी के साथ ही खेल रहे हो…उनकी पत्नी बार बार चीख उठती थी…वो जान नहीं पा रही थी…कि आख़िर आज ऐसा क्या हुआ कि उनका पति उनको इतने भयन्कर तरीके से चोद रहा है….भाभी की सासू माँ की आज जो हालत हुई…वो आप जान सकते है…वो बेचारी कराहती रही..सिसकती रही चिल्लाती रही…पर ससुर का लंड तो आजकुछ भी मानने तो तय्यार ही नहीं था…आख़िर 3 घंटे की चुदाई के बाद वो चुदाई लीला समाप्त हुई…तब तक सासू माँ निढाल हो चुकी थी …ऑर उसी अवस्था में सो गई…..

उधर…भाभी अपने पति के साथ अपने पलंग पर धीरे धीरे सरक कर अपने पति के सरीर से सॅट गई ऑर एक हाथ पति की छाती पर रख दिया….पति ने भी करवेट भाभी की तरफ ली ऑर उसे बाहों में भर लिया…..

पति…क्या हुआ….क्या आज चूत ज़्यादा पानी छोड़ रही है….

भभी….हैं ना जाने क्यों…शादी के बाद आज पहली बार कुछ अजीब सा लग रहा है…ऑर इसमें से पानी भी कुछ ज़्यादा ही निकल रहा है….

पति…ओह तो लो आपकी चूत की मस्त चुदाई कर देते है…इसी लिए तो यह पानी छोड़ रही होगी…ये कह कर उन्होने भाभी की चुचियों को हल्के हल्के से सहलाना शुरू कर दिया…भाभी का हाथ अपने पति के लंड पर चला गया ऑर भाभी महसूस करने लगी कि शायद मेरे पति का लंड तो ससुर के लंड का आधा ही है…भाभी के पति ने धीरे धीरे भाभी के सभी कपड़े उतार दिए ऑर पूर्णतया नंगी पत्नी के शरीर के सब हिस्सों को सहलाने ऑर मसलने लगे….भाभी के जेहन में ससुर का लंड ही घूमता रहा…ऑर उसके पति उसके शरीर से खेलते रहे…भाभी की चूत पानी पर पानी छोड़ती रही…आख़िर पति ने अपना लंड भाभी की चूत पर रगड़ना शुरू किया….ऑर कुछ ही देर में पूरा लंड भाभी की चूत में पेल दिया….उसके पति के धक्को की रफ़्तार बढ़ती गई…ऑर भाभी भी चुदाई में ना जाने कैसे एक मशीन की तरह से सहयोग करती रही…पर उसके मन में तो ससुर जी का भारीभरकम लंड बस चुका था…कुछ देर के बाद उसके पति ने भाभी की चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया…ऑर गरम..गरम..वीर्य अपनी चूत में गिरने से भाभी…की चूत ने भी पानी छोड़ दिया कुछ देर एक दूसरे से चिपके हुए दोनो झड़ते रहे…पर कुछ ही देर में भाभी की तेज तेज चलती साँसों से मानो ससुर के लंड की चाहत की ही आवाज़ निकल रही थी…

आज पहली बार इतनी लंबी चुदाई के बाद भी ना ही भाभी चुदाई से संतुष्ट हुई थी…ऑर ना जाने क्यूँ ससुर जी भी आज अपने आप को संतुष्ट नहीं पा रहे थे…जबकि उन्होने आज जम कर सासू माँ की चुदाई की थी…सासू माँ का हाल बुरा था…वो समझ नहीं पा रही थी कि आज उसके पति को क्या हुआ जो इतनी भयंकर चुदाई की है… उनका अंग अंग तोड़ कर रखा दिया……उस बेचारी को क्या मालूम था कि आज तो उसके पति बहू के ख़याल में चुदाई कर रहे है…

उस रात में भाभी के पति ने भाभी की दो बार जमकर चुदाई की पर भाभी भी आज कुछ संतुष्ट नज़र नहीं आ रही थी…उसके ख़याल में भी शायद इस समय भी ससुर का भारीभरकम लंड ही घूम रहा था…जिस लंड से वो डर भी रही थी ऑर पाने की चाहत भी थी…

आख़िर पिछली रात में चुदाई का अंत हुआ ऑर सभी सो गये…सुबह को सभी देर से उठे…ऑर अपने अपने कामो में लग गये…

भाभी का पति डेली की तरह अपने खेतो में चला गया ऑर सासू माँ…दूसरे कामों में लग गई…ऑर बहूरानी….

बहूरानी ने घर की सफाई शुरू कर दी…आज भाभी ने ढीले ढाले कपड़े ही पहने थे…उधर ससुर जी भी इसी समय का एंतजार कर रहे थे कि उनकी बहू उसके रूम में सफाई करने आए ऑर वो उसे जी भर कर निहार सके…..

भाभी ससुर जी के रूम में जब सफाई करने के लिए गई तो उनका सरीर कुछ सामान्य नहीं था…उनकी साँसे ज़ोर ज़ोर चल रही थी…ऑर सरीर में बार बार सिहरन से दौड़ जाती थी…..पर अब तो उनका सारा ध्यान ससुर जी के लंड की ओर आकर्षित हो चुका था….बस एक नज़र उसे देख ले तो शायद करार आए…

भाभी ने रूम की सफाई शुरू कर दी…पर अपने साड़ी के पल्लू पर जान बुझ कर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया…ब्लाउज ढीला होने के कारण भाभी की भारी गोरी चिटी चुचिया अंदर से बाहर निकलने की कोशिस कर रही थी…ऑर ससुर उन्हें देख देख कर पागल हुए जा रहे थे….ससुर का लंड धोती में ही उछल कूद कर रहा था…पर ससुर की निगाहे भाभी की चुचियों से नहीं हट पा रही थी…

एक बार भाभी ने ससुरजी को चोर निगाहों से देखा…तो उनका दिल ज़ोर से धड़कने लगा…ससुरजी की आँखें एक टक बहू की चुचियों पर ही जमी थी….

कि अचानक भाभी के मुँह से ना जाने कैसे निकल ही गया….

भाभी…क्या देख रहे है पिताजी….

ससुर…हड़बड़ाते हुए…आआआ हह ईईए वववववूऊओ कुछ नहीं बहू……

भाभी…नहीं कुछ देख तो रहे थे….

ससुर …नहीं बेटी…कुछ भी तो नहीं…बस सोच रहा था…

भाभी…मुस्कुराते हुए ..क्या सोच रहे थे पिताजी….

ससुर…कुछ नहीं..ना जाने क्यूँ आज कच्चा दूध पीने की इच्छा हो रही थी…पर सोच रहा था…कि वो तो तूने गरम कर दिया होगा….

भाभी…हाँ पिताजी आज तो गरम कर दिया है…पहले क्यूँ नहीं बताया….

ससुर…कोई बात नहीं बहू…बस इच्छा हुई तो कह दिया….

भाभी…कोई बात नहीं पिताजी…दूध तो घर का ही है…जब मन करे कच्चा ही पी लेना….में सासू माँ को बोल दूँगी कि वो कल आपको कच्चा दूध देदे..

ससुर…आरे नहीं बहू…बस वो तो ऐसे ही…जब मन होगा में फिर बता दूँगा…सासू माँ को कहने की ज़रूरत नहीं है…

भाभी…क्यूँ पिताजी..क्या अब मन नहीं है…

ससुर…मन तो है..पर बस अब रहने दो….ससुर ने भाभी की भारी भारी चुचियों पर नज़र डालते हुए कहा….

भाभी…लगता है पिताजी आपको दूध पसंद ही नहीं है…

ससुर..नहीं बेटी…पसंद तो बहुत है…पर वो कच्चा दूध नई गाय (काउ) का हो तो बात ही कुछ ऑर होती है….

भाभी…हाँ ये बात तो हो सकती है….तो पिताजी एक नई गाय ले आओ ना….बाते करते हुए भाभी इतनी लापरवाह हो चुकी थी..कि उसकी आधे से ज़्यादा चुचियाँ बाहर झाँक रही थी…ऑर ससुर के लंड की हालत खराब होती जा रही थी…

भाभी अब ये तो जान ही चुकी थी…कि ससुर जी किस दूध की बात कर रहे है….पर वो अभी भी अंजान बनते हुए…ससुर जी को जानबूझ कर परेशान करने में लगी थी…जैसे ही भाभी सफाई करते करते ससुर के पास पहुँची…तो उनकी चुचियाँ ससुर जी को ऑर सॉफ सॉफ नज़र आने लगी…जिससे ससुर जी ऑर परेशान होने लगे….ससुर जी का लंड अब धोती से बाहर निकलने की कोशिस कर रहा था…ऑर ज़्यादा टाइट के कारण ससुर के मुँह से आहह निकल गई……

भाभी….क्या हुआ पिताजी…

ससुर…कुछ नहीं बहू…बस पैरो (लेग्स) में कुछ दर्द सा है….

भाभी….थोड़ा टहल लिया कीजिए…बैठे बैठे भी हो जाता है….

ससुर…हाँ ये तो है….

तभी…अचानक भाभी की नज़र ससुर जी के लंड पर पड़ी…भाभी को इस वक़्त अपनी उम्मीद से ज़्यादा बड़ा नज़र आया…ऑर भाभी के सरीर में एक बार फिर से सिहरन सी दौड़ गई……तभी भाभी को बेड के नीचे चलता हुआ सा प्रतीत हुआ…भाभी की चीख निकल गई……

ससुर ..क्या हुआ बहू….

भाभी…घबराहट से काँपते हुए…पिताजी पलंग के नीचे साँप है….ऑर दूर हट गई….

ससुर नीचे उठे ऑर चारों तरफ देखा….उन्हें कुछ भी नज़र नहीं आया…उन्होने सोचा कि चूहा वेग़ैरह होगा पर कुछ सोच कर….यहाँ तो कुछ भी नहीं है बहू….

भाभी…नहीं पिताजी साँप था…मेने खुद देखा है…उधर बेड के नीचे…

ससुर …. नहीं बहू यहाँ तो कुछ भी नहीं है…

भाभी ने हिम्मत करके बेड के नीचे देखा…कुछ ना होने पर…पर मेने अभी तो देखा था…पिताजी…काफ़ी मोटा ऑर लंबा था…

ससुर - पर अब तो कुछ भी नहीं है…ससुर का लंड अब कुछ शांत हो गया था…फिर भी धोती में गधे के लंड की तरह से हिलता नज़र आ रहा था….

भाभी…शायद कहीं छुप गया है….पिताजी…पर था..बेड के नीचे….

ससुर ने एक बार फिर गौर से बेड के नीचे देखा…उन्हें कुछ भी नज़र नहीं आया…तो वे बोले बहू कहीं तुमको…वहम हो गया है…यहाँ तो कुछ भी नहीं है…..फिर तुम बता रही हो कि काफ़ी मोटा ऑर लंबा था…फिर कहाँ गया…..

भाभी…ने बेड के नीची झाँकते हुए…हां अब तो कुछ नहीं है…फिर भाभी को दीवार में एक छोटा सा छेद नज़र आया….ऑर बोली..पिताजी..वहाँ पर छेद है…कहीं उसमें तो नहीं घुस गया..फिर खुद ही झेन्पते हुए …महसूर किया कि इतने छोटे छेद में वो कैसे घुस सकता है….

 
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ससुर ने नीचे झाँक कर देखा…ओर बहुत बारीक छेद को देख कर मुस्कुराते हुए बोले…हाई बेटी…उसमें ज़रूर घुस सकता है…

भाभी…पर वो तो बहुत बारीक सा छोटा सा छेद है…इतना मोटा ओर लंबा साँप उसमें तो नहीं घुस सकता है…अपनी ही बात को सुधारते हुए बोली….

ससुर…मुस्कुराते हुए…आरे बेटी ये साँप बहुत खतेरनाक होते है…बड़े से बड़ा मोटा साँप एक छोटे से छेद में भी घुस जाता है…

इस पर भाभी एक बार फिर झेंप गई….ओर बोली पिताजी…आप मुझे बना रहे है..भला इतने छोटे छेद में…इतना मोटा ऑर लंबा साँप कैसे घुस सकता है…..

ससुर…घुस जाता है बेटी…ये तो तुम्हे भी पता होगा….ऑर मुस्कुराते हुए बहू की ओर देखा…ससुर जी का लंड एक बार फिर आगे को तंबू की तरह से निकल गया था…जिस पर नज़र पड़ते ही भाभी झेंप कर बाहर निकल गई….

भाभी समझा रही थी कि ससुर जी किस छेद ओर किस साँप की बात कर रहे है……ससुर जी के लंड का बम्बू वो अभी देख कर आई थी…उसकी चूत में कुछ कुछ हो रहा था…उसने महसूस किया कि उसकी चूत गीली हो चुकी थी….इस पर भाभी अचानक ही मुस्कुरा दी….थोड़ी देर के बाद जब भाभी…ससुर जी के कमरे में गई….तो ससुर जी सीधे लेटे थी…उनकी आँखें बंद थी…उनका लंड खड़ा तो नहीं था….पर धोती के उभार से उसके साइज़ का अनुमान लगाया जा सकता था…..

भाभी…पिताजी..अब कैसी तबीयत है….

ससुर…आँखें खोलते हुए….बस थोड़ा से पैरों में दर्द है…बाकी तो सब ठीक है…ये भी ठीक हो जाएगा….

भाभी…क्या में दबा दूं पिताजी….

ससुर अरे नहीं…तुम्हे ओर बहुत काम होते है…दिन भर में थक जाती हो…ये अपने आप ही ठीक हो जाएगा…

भाभी…इस समय तो में खाली हूँ…थोड़ी देर दबा देती हूँ..आराम आ जाएगा…

ससुर…ठीक है बहू जैसी तुम्हारी इच्छा….

भाभी…अपने ससुर जी के पलंग पर ससुर के पैरों के पास बैठ गई ऑर धीरे धीरी ससुर के पैरों को दबाने लगी…पर भाभी का ध्यान ससुरजी के लंड पर ही टिका था..जो अभी तक सो रहा था…पर भाभी के नाज़ुक मुलायम हाथ पेरों पर पड़ने के कारण ससुर जी के सरीर में कुछ सुरसूराहट होने लगी थी ऑर लंड महाशय में भी दम आने लगा था…भाभी ससुर जी के लंड में होने वाली हलचल को महसूस कर रही थी….ऑर ससुर जी का लंड उपर को उभार लेने लगा था…भाभी अभी तक ससुर के घुटनो तक ही दबा रही थी….ससुरजी ने अपना दायां हाथ अपनी आँखों पर रख लिया था…पर उनके होंठों पर जो दबी हुई मुस्कान थी…वो भाभी से नहीं छुपी थी…

अब ससुर जी का लंड उठक-बैठक करने लगा था…ऑर उसे देख कर भाभी…भी मस्ती में पैरों को दबा रही थी….उसकी चूत भी गीली होने लगी थी…पर उसी समय…..बाहर में गेट के खुलने की आवाज़ आई ऑर भाभी जल्दी से कमरे से बाहर निकल आई……..

ये भाभी के पड़ोस में रहने वाली जेठानी लता थी….भाभी ने महसूस किया कि लता को चलने में कुछ परेशानी सी हो रही है…वो बड़ी सम्भल सम्भल कर चल रही थी….

भाभी….आओ लता दीदी…कैसी हो….

लता…ठीक हूँ….सोचा कि कुछ देर तुम्हारे पास बैठ आउ…

भाभी…तुमने बहुत आच्छा किया….ऑर तबीयत तो ठीक है…

लता..हैं तबीयत तो ठीक है….बस सुबह-सुबह इतना काम हो जाता है कि थक जाती हूँ…..

भाभी…हां ये तो लग रहा है…कि आज आप काफ़ी थकि हुई से है….बैठ जाओ में चाइ (टी) बना लाती हूँ….ऑर बही…किचन की ओर जाने लगी….लता भी भाभी के पीछे पीछे…किचिन में आ गई….

भाभी…क्या आज बहुत ज़्यादा काम था….

लता…हैं कुछ ज़्यादा ही था…वे सुबह 4 बजे….बाहर गये है…कुछ दिनों के लिए ऑर रात भर नहीं सोने दिया….कहने लगे कि फिर तो कई दिनो तक नहीं मिलेगी…आज पूरा मज़ा ले लूँ….ऑर हंस पड़ी…

(आपको बता दूं कि भाभी ऑर लता अच्छी फ्रेंड्स बन गई थी…ऑर आपनी सेक्षुयल बाते शेर कर लिया करती थी…ऑर घर वगेरह की बाते भी…खुलकर करती थी…)

भाभी…फिर तो पूरी रात मस्ती में बीती है दीदी….

लता…हैं उन्होने तीन बार जम कर चुदाई की…अंग अंग दुख रहा था…फिर जब वो चले गये तो ……..

भाभी…फिर क्या हुआ…लता दीदी…

लता….अरी कुछ नहीं…बस यूँ ही…

भाभी…बताओ ना दीदी….फिर क्या कुछ खास हुआ….

लता….आरेई वो मेरा देवर है ना…में सोई ही थी.. कि वो पास आकर लेट गया ऑर तुम तो जानती ही हो…जब मर्द चुचियों को मसल्ने लगे तो कहीं रुका जाता है….बस मेरी चूत फिर तय्यार हो गई…ऑर उसके जवान लंड ने फिर से दो बार चोद दिया….बस मेरी चूत की बुरी हालत कर दी…

भाभी…में भी सोच रही थी…कि क्या बात है…आज तुम ठीक से चल नहीं पा रही हो दीदी….अब पता चला कि आज मेरी दीदी ने जम कर चुदाई के मज़े लिए है……

लता….अब तुमसे क्या चोरी…वैसे तो मेरी पति का लंड भी काफ़ी भारी है पर देवर का जवान भारी लंड ओर उपर से ससुर……..वो…वो….

भाभी….वो वो क्या…ससुर का…वो…वो…सच सच बताओ ना दीदी…ससुर का वो क्या…..

लता….आरे एक बार ना जाने कैसे ससुर के साथ संबंध बन गए थे…ऑर मेरे ससुर का लंड तो बहुत ही भयंकर है….देवर के जाने के बाद…एक बार ससुर ने भी आज चोद दी है…बस पूछो मत मेरी चूत का बूरा हाल है….अगर तुम देख लोगि तो घबरा जाओगी…बस ये मान लो कि फटी हुई है…..अभी अभी गरम पानी से सॉफ करके आई हूँ फिर भी ठीक से चला नहीं जा रहा है……

भाभी…पर तुम्हे डर नहीं लगता लता दीदी….तुम्हारी चूत का ये हाल हो गया…कहीं तुम्हारे पति को पता चल गया तो….

लता…आरे मर्द जब चुदाई के मूड में होता है….तब वो चूत का साइज़ नहीं देखता…बस अंदर घुसाने की जल्दी में होता है…फिर वो कई दिनो के बाद आने वाले है….एक बार फिर ससुर से चुदवा लूँगी तो ठीक हो जाएगी….जैसे लोहे को लोहा काटता है वेसे ही चुदाई का दर्द चुदाई से ही जाता है….ऑर लता ये कह कर हंस पड़ी….

भाभी फटी फटी आँखों से लता दीदी को देखती ही रह गयी………..

लता…क्या देख रही हो…रानी जी…..

भाभी…कुछ नहीं बस सोच रही हूँ कि तुम्हारी हिम्मत है….तुमने एक ही रात में कितनी चुदाई करवा ली…कि चूत तक फडवा ली…में तो अपने पति के साथ बस एक बार में ही थक जाती हूँ…..

लता…जब एक बार चुदाई का चस्का लग जाता है तब पता चलता है…कि चुदाई में जो आनंद है वो किसी ऑर चीज़ में कहाँ….रानी….

भाभी….पर इतनी चुदाई…..कि चूत तक फडवा ली……

लता….अरी रानी ऐसा तो पहली कई बार हो चुका….आज पहली बार थोड़े ही…जब मेरे ससुर ने मुझे पहली बार चोदा था.. तो इससे भी बुरी हालत हो गई थी….बस बाद में सब ठीक हो गया….रानी…जो मज़ा मोटे लंड से चुदाई में आता है…उसके सामने तो तखतो ताज भी बेकार है….बस सारी जन्नत एक तरफ….ऑर मोटे लंबे लंड से चुदाई एक तरफ….मुझे तो बस चुदाई में ही मज़ा आता ही….ये चूत शिरफ़ चुदाई के लिए ही है……

भाभी…पर क्या जो भी मिल गया उसी से चुदवा ले……

लता…हाई रानी…चुदाई का तो मौका तलाश लो…जब भी मौका मिले चुदवा लो…यही तो जिंदगी का मज़ा है…..

भाभी…तुम्हे शर्म नहीं आती क्या लता दीदी….

लता…अरी रानी चुदाई में शर्म कैसी…

फिर दोनो बैठ कर चाइ पीने लगी…ऑर चुदाई पर खूब चर्चा हुई…लता दीदी की बातें सुनकर भाभी…की चूत में भी खुजली होने लगी थी….पर वो इस बारे में खुलकर नहीं बोलना चाहती थी…इस लिए लता दीदी की बातों में ही मज़ा लेती रही……कुछ देर के बाद लता दीदी ये कहकर चली गई कि चलूं एक बार ससुर से चुदवा लूँ बस सब ठीक हो जाएगा ऑर मुस्कुराती हुई चली गई….

इसके बाद भाभी दूसरे काम निपटा कर अपने ससुर के रूम में चाइ लेकर गई…

भाभी…पिताजी चाइ पी लो….

ससुर…मेने तो सोचा था कि दूध पिलाओगी….पर लाओ चाइ ही पी लेते हे…ये कहते हुए चाइ का कप भाभी से ले लिया…

भाभी…तो चाइ रहने दो…पिताजी…में दूध ले आती हूँ….

ससुर…चलो अब तो चाइ ही पी लेता हूँ…बाद में दूध पी लेंगे

भाभी…लाओ में आपके पैर दबा देती हूँ….वो लता दीदी आ गई थी…

ससुर…बहुत देर तक बातें होती रही…क्या कह रही थी….

भाभी…कुछ नहीं पिताजी…बस वैसे ही आ गई थी….ऑर ये कह कर भाभी ससुर जी के पैर दबाने लगी….ससुर जी ने चाइ पीकर कप एक तरफ रख दिया…उनकी नज़र भाभी की चुचियों पर गई….वो भारी=भारी चुचियाँ पैर दबाते हुए हिल रही थी…जिससे ससुर जी के लंड में फिर चीटियाँ दौड़ने लगी…..ऑर उसमें हलचल होने लगी…ऑर उसकी हलचल को भाभी भी महसूस कर रही थी….पर भाभी कोई भी शुरुआत नहीं करना चाहती थी…भले ही वो ससुर जी के इस भारी लंड को लेने का मन बना चुकी थी..पर फिर भी वो कोई भी शुरुआत नहीं कर पा रही थी…उधर ससुर जी भी सोच रहे थे कि…आख़िर शुरुआत कैसे की जाए…

ससुर…बेटी फिर तो साँप नज़र नहीं आया……

भाभी…अचानक हुए इस सवाल पर भाभी चौंक गई…क्या जबाब दे ये सोच नही पाई….बस हड़बड़ा कर रह गई….

ससुर…बेटी तुमने जबाब नहीं दिया…वो मोटा लंबा साँप फिर तो नज़र नहीं आया….ससुर ने फिर से दोहरा दिया….

भाभी…अब तक अपने को संभाल चुकी थी….फिर भी सही जबाब नहीं सूझ रहा था…इस लिए नॉर्मली ही कह डी….नज़र तो आया पिताजी….पर कुछ देर बाद गायब हो जाता है…मुझे तो उसे बड़ा डर लगता है…..

ससुर…उससे क्या डर्ना…ये तो हमारे पास ही रहते है…कोई नुकसान नहीं पहुचाते है…..

भाभी…मेने कभी इतना मोटा ऑर लंबा साँप जो नहीं देखा है…इस लिए डर तो लगेगा ही ना….

ससुर…अरे नहीं बेटी…उस साँप से मत डर्ना…वो तो पालतू है…वो कोई नुकसान नहीं पहुचाएगा तुम्हे….

भाभी…पिताजी…उसका क्या भरोसा…मेरे रूम में आकर…किसी बिल में घुस गया तो….

ससुर…फिर भी मत डरना…अपना ही है…पालतू है ना…

भाभी..पिताजी मेरे रूम में सभी छेद बहुत छोटे है…वो वहाँ तो शायद घुस भी नहीं पाएगा…..

ससुर…अरे नहीं बेटी…ये साँप तो बारीक से बारीक छेद में भी घुस जाता है ऑर वही अपनी जगह बना लेता है…..अभी तक ससुर का लंड पूरा फूल कर कुप्पा हो चुका था…ऑर धोती में ऐसे खड़ा होकर झटके मार रहा था…जैसे दो देश की सीमा पर इंडियन झंडा लहरा रहा हो…..भाभी की नज़र उसी पर जमी थी….उनके सरीर में कॅंपन होने लगा था…ऑर डर भी लग रहा था…पर भाभी के हाथ….ससुर जी के पैरों को दबाते हुए कुछ उपर तक पहुँचने लगे थे….भाभी की चूत का भी बुरा हॉल था…भाभी को अब लग रहा था…कि उसके हाथ भी अब उसके कंट्रोल में नहीं रह गये है ऑर वो धीरे धीरे लंड के नज़दीक पैरों को दबा रहे है….ससुर का लंड ऑर मस्त होकर झूम रहा था…लंड में बेचैनी बढ़ेती जा रही थी…..

ससुर…क्या देख रही ही बेटी….

भाभी…हड़बड़ा कर…कुछ नहीं पिताजी….ऑर नीचे देखने लगी….

तभी…,,................

 
तभी…बाहर के गेट के खुलने की आवाज़ आई ऑर भाभी जल्दी से उठ कर ससुर जी के रूम से चाइ का कप लेकर बाहर निकल गई….बाहर आकर भाभी ने देखा कि उनकी सासू माँ ऑर पति खेत से लौट आए है….भाभी किचन में चली गई ऑर अपने काम में लग गई…उधर ससुर जी करवेट लेकर ऐसे लेट गये कि जैसे सो रहे हों…..

सब कुछ सामान्य…मगर जो तूफान भाभी की चूत में ऑर ससुर जी के लंड में चल रहा था…..वो सामान्य कहाँ था….

दोस्तों ये लंड ऑर चूत की भी अजीब दास्तान है…लंड को चूत की ऑर चूत को लंड की जो चाहत होती है वो बड़ा तूफान ला देती है….हाँ एक बात ऑर मर्द को दूसरी औरत की चूत ऑर , औरत को दूसरे मर्द का लंड हमेशा आकर्षित करता रहा है ऑर करता रहेगा…ये वो भूख है जो कभी कम नहीं होती…या फिर यूँ कहिए…मर्ज बढ़ता गया ज्यूँ..ज्यूँ दवा की…..कुछ यही हाल अब भाभी ऑर ससुर का भी हो गया था….ऑर लता के बातों ने इसमें ऑर घी डालने का ही काम किया….भाभी की चूत में ऑर आग भड़क गई…अब तो उसे बस ससुर जी का लंड अपनी चूत में चाहिए था…उसके लिए वो अब कुछ भी करने तो तैयार हो रही थी….उधर ससुर की हालत भी कुछ इसी ही हो चली थी…वो भी भाभी की चूत के दीवाने हो चुके थे…बैगेर देखे ही उन्होने भाभी की चूत की कल्पना कर…कई बार हाथ से हिलाकर ही अपना वीर्य निकाला था…..

भाभी की सासू माँ ऑर पति के घर में आ जाने के बाद वो किचन में ही ना जाने कितनी प्लॅनिंग कर चुकी थी….सासू माँ के माएके में कोई शादी थी जिसमें उन सभी को आज जाना था…पर भाभी का प्लान तो कुछ ऑर ही था….अगर उनका प्लान कामयाब हो गया तो…उनकी ससुर के लंड को पाने की तम्मन्ना पूरी हो सकती थी…..

पति….किचन में आए…ऑर भाभी को बाहों में भरकर एक किस किया…क्या बात है आज तो बड़ी सुंदर लग रही हो…

भाभी…आपको सुंदर दिखाई दे रही हूँ…

पति…हैं क्यूँ नहीं…मेरी रानी है ही सुंदर…..

भाभी..आज सुबह से पेट (स्टमक) में काफ़ी दर्द है…अजवाइन भी ली पर कोई फ़र्क नहीं पड़ा….

पति…तो तुमने पहले क्यूँ नहीं बताया…में डॉक्टर से दवा ले आता….

भाभी…मेने सोच ठीक हो जाएगा…पर कोई आराम नहीं है….

पति…तुम ठहरो..में अभी डॉक्टर से दवाई ले आता हूँ….ऑर हाँ तुम तब तक आराम करो……तभी सासू माँ किचन में आई…..

ससुमा..क्या बात है बहू…

भाभी..कुछ नहीं…माजी..बस पेट में थोड़ा दर्द है….

सस्सुमा… बेटा जा डॉक्टर से दवा ले आ…आज तो तुम्हारे मामा के यहाँ जाना ज़रूरी है…उनकी तो एक ही बेटी है…उसकी शादी में जाना तो बहुत ज़रूरी है….

पति…ठीक है माँ…में अभी ले आता हूँ…..ऑर वे बाहर चले गये….ऑर भाभी अपने रूम में आकर बेड पर लेट गयी थी…ऑर इस प्रकार लापरवाही से लेटी कि जिससे लगता था.. कि उनको काफ़ी दर्द है….

पति ..कुछदेर बाद डॉक्टर को साथ ही ले आए…डॉक्टर साहिब ने निरीक्षण किया…और दर्द की सही वजह ना मिलने पर एक दर्द ओर नशे का एन्जेक्शन दे दिया….जिससे थोड़ी देर बाद ही भाभी को नींद आ गयी…ऑर वो गधे बेच कर सो गयी…….

सासू माँ…अपने बेटे से बाते करते हुए…अब क्या होगा बेटा…बहू की तबीयत तो खराब है…ऑर तेरे मामा के यहाँ भी अभी जाना है फिर क्या करे….

पति…कुछ समझ में नहीं आ रहा है माँ…पिताजी से पूछ लो….

सासू माँ अपने पति के रूम में गयी…ससुर जी की आँख भी लग गयी थी….थोड़ा गुस्से से…आप यहाँ गधे बैच कर सो रहे है…वहाँ बहू की तबिया खराब है…अभी डॉक्टर बुलाया था….फिर आज तुम्हारे साले की एक्लोति बेटी की शादी भी है…अब क्या करें….

ससुर…अरे..दर्द…कब से है…मुझे तो किसी ने बताया नही…अब कैसी है…ससुर भी परेशान होकर बोले….

सासू माँ…मुझे क्या मालूम..जब खेत से आए तो पता चला कि बहू की तबीयत खराब है….तुम्हे तो सोने से ही फुरसत कहाँ है….

ससुर…ये तो बड़ी परेशानी हो गई…अब क्या होगा……

तभी उनके बेटे ने आकर बताया कि डॉक्टर ने तो उसे बाहर ले जाने को मना किया है…दर्द किसी भी वेजह से हो सकता है…फिर क्या करें….

सासू माँ..ऐसा करो बेटा…में ऑर तुम चलते हैं…ये बूढऊ क्या करेगा…फिर बहू के पास भी कोई होना चाहिए..जो डॉक्टर से द्वाए वेगरह लाकर दे सके….ऑर कोई चारा भी तो नज़र नहीं आ रहा है….बहू की तबीयत अब कैसी है….

बेटा…डॉक्टर ने नींद का एन्जेक्शन दिया है….अभी तो सो रही है शायद….

माँ…ठीक है बेटा…तुम तय्यार हो जाओ…में भी तय्यार होती हूँ..देर भी काफ़ी हो गयी वर्ना रात हो जाएगी…बहू को ये देख लेंगे…ऑर फिर डॉक्टर ने दवाई तो दे ही दी है…..कुछ आराम कर लेगी तो आराम आ जाएगा…..

बेटा…ठीक है माँ…आप तय्यार हो जाओ में तय्यार होकर अभी आता हूँ…..ऑर बेटा बाहर चला गया…..

सासू माँ…बहू को तुम्हारे भरोशे छोड़ कर जा रही हूँ…उसका ध्यान रखना….ऑर ज़्यादा प्राब्लम हो तो डॉक्टर को बुला लाना….में पड़ोस में लता को बोल जाती हूँ दो दिन रोटियाँ वो सैक देगी….

ससुर…ठीक है…तुम जाओ में देख लूँगा…कोई परेशानी नहीं होगी…में सब संभाल लूँगा….

सासू माँ मन ही मन सोच रही थी कि अचानक बहू को क्या हो गया…सुबह तो वो ठीक थी…. ससुर भी परेशान होकर बहू के रूम में गये…वो बेसूध होकर सो रही थी…बेचारे परेशान से बाहर आ गये….सासू माँ पड़ोसन लता को बोल कर आ गयी ऑर थोड़ी देर के बाद सासू माँ ऑर भाभी के पति दोनो बस में बैठकर अपनी मंज़िल की ओर रवाना हो गये….

ससुर…बड़ी बैचेनी से इधर उधर टहल रहे थे….शाम होने से पहले ही लता आई ऑर खाना बनाकर…ससुर जी को भाभी का ख़याल रखने को कह कर लौट गई….मगर भाभी अभी भी बेसूध होकर सो रही थी…..इसी तरह से दिन ढल गया…ऑर रात हो चली थी…ससुर ने सभी दरवाजे बंद किए…ऑर बहू के रूम में ही उसके बेड पर ही बैठ गये….कुछ ही देर के बाद बहू ने आहह की आवाज़ के साथ आँखें खोल दी……ऑर अपने ससुर की ओर देखा जो उसके बेड पर ही बैठे थे उसी के चेहरे की ओर देख रहे थे…..

ससुर…अब कैसी तबीयत है…बेटी…..क्या दर्द कम हुआ…

भाभी…हाईन पिताजी…दर्द कम तो है…पर ठीक नहीं हुआ है…..

ससुर…तुम चिंता ना करो…सब ठीक हो जाएगा…में हूँ ना…..

भाभी…हल्की सी आहह भरते हुए…उठने की कोशिस करने लगी….

ससुर क्या…बात है बेटी…लेटी रहो….

भाभी…में टाय्लेट जाना चाहती हूँ पिताजी…पर शायद हिम्मत ही नहीं हो रही है….भाभी ने अपने प्लान पर काम शुरू करते हुए कहा…अब तक भाभी ज्ज़ान चुकी थी…कि उसके पति ऑर सासू माँ रिश्तेदारी में जा चुके है……ऑर अब बारी भाभी की थी…………….

ससुर…चलो बेटी में मदद करता हूँ….

भाभी…आप पिताजी…पर आप कैसे मदद करेंगे….

ससुर… घबराओ नहीं बेटी…में तुम्हे पकड़ कर ले चलता हूँ…ऑर बिना किसी आन्सर का एंतजार किए ही ससुरजी भाभी की बाहे पकड़ कर भाभी को उठाने लगे थे…..

भाभी…आअहह पिताजी….हिम्मतनहीं हो रही है…फिर दर्द अभी भी है…कहीं में गिर ना जाऊ….

ससुर…डरो नहीं बेटी…में तुम्हे गिरने नहीं दूँगा….

भाभी…हैं वो तो है…पिताजी…उठने की कोशिस करते हुए….ऑर बिल्कुल निढाल सी होकर ससुर जी के ऑर करीब..ऑर करीब…ससुर की बालिश्ट बाहों ने भाभी को पूरी तरह से संभाल लिया….ऑर ससुर जी के हाथ बहू की दोनो बगल में थे….उनकी उंगलियाँ बहू की भारी भारी चुचियों का उभार महसूस कर रही थी…ससुर इस मौके का पूरा फ़ायदा उठाना चहते थे उन्होने बहू को कुछ ऑर करीब कर लिया जिससे उसकी चुचियो को उनकी उंगलियाँ पूरी तरह से स्पर्श कर रही थी…ऑर बहू के मांसल मांसल भारी चूतड़ (कूल्हे) कई बार ससुरजी के लंड पर रगड़ खा चुके थे….ऑर वो बाथरूम में पहुँच गये….

 
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