• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

चुदाई का सिलसिला

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
ससुर…बेटी तुम टाय्लेट कर लो में बाहर इंतजार करता हूँ….

भाभी…ठीक है पिताजी…..ससुर बाथरूम के दरवाजे को बंद कर बाहर आ गये..ऑर भाभी ने साड़ी को उपर उठाकर पैंटी को नीचे किया…ऑर बैठ गई…पेशाब का प्रेशर भी काफ़ी था….ऑर पेशाब बड़ी तेज़ी से….कुछ भाभी का प्लान….सस्स्स्स्स्सुउुुुुउउईईईईईईईईईईई….सस्स्स्स्स्स्स्सीईईई….सस्स्सीईई की धुन ससुर को मदहोश कर रही थी…ऑर भाभी…वहीं पर बैठी बैठी…मुस्कुरा रही थी…..ओर झटके के साथ फिर से सस्स्स्स्स्स्स्सीईईईई उूउउस्स्स्स्स्स्सिईईईईए की धुन…ससुर को घायल करने के लिए काफ़ी थी…

.ये तो भाभी भी जानती थी कि ससुरजी दरवाजे के पास ही खड़े है…ऑर उसकी चूत से निकलने वाले पेशाब की आवाज़ ज़रूर सुन रहे होंगे….इसीलिए…भाभी ने पेशाब भी बड़ी अदा से किया….उससे निकलने वाली धुन खुद आज भाभी को भी निराली लग रही थी….प्प्प्प्प्प्प्पीईईईईईइससस्स्स्सीईईईईईई की धुन पर दो जिस्म पिघलने लगे थे…..

भाभी ने पेशाब करने के बाद …चूत को ताजे साफ पानी से अच्छी तरह से धोया…ऑर हाथ सॉफ करने के बाद उठी…तो आआहह की आवाज़ बाहर तक चली आई….

ससुर….क्या हुआ बहू…तुम ठीक तो हो ना…

भाभी…जी पिताजी…में अब कुछ ठीक हूँ..क्या आप मुझे जरासा सहारा देंगे….

ससुर क्यूँ नहीं बेटी में अभी आता हूँ…ऑर ससुर दरवाजा खोलकर बाथरूम में घुस गये….भाभी की शादी अभी अव्यवस्थित थी…ऑर पल्लू भी चुचियों पर ठीक से नहीं ढका था….ससुर मदहोशी में ही बहू के पास गये ऑर उसकी दोनो बगलों में हाथ दे दिए….अबकी बार ससुर की हथेली का दबाव भाभी की चुचियों पर पड़ रहा था….

भाभी…आआहह….

ससुर…क्या हुआ बेटी…

भाभी…जी आपका हाथ….पिताजी….

ससुर…ओह….थोड़ा सा डब गया था…बेटी..क्या दर्द हुआ है….

भाभी…नहीं पिताजी…वो बस…ऑर शरमा कर मुस्कुरा दी….

ससुर जी ने भाभी को अच्छी तरह से पकड़कर अपने ऑर करीब किया ऑर बाथरूम से बाहर लाकर उसके रूम में ले जाने लगे…पर उनका टेंट बना हुआ लंड भाभी के चुतड़ों को बार बार छू रहा था…जिससे भाभी के सरीर में सिहरन सी दौड़ जाती थी…ऑर कई बार तो भाभी जानबूझ कर अपने चुतड़ों को ससुर के लंड पर रगड़ भी देती थी…जैसे सब कुछ अंजाने में ही हुआ हो….

ससुर ने भाभी को बेड पर लिटा दिया…लिटाते हुए उनका मुँह भाभी की चुचियों को छू गया… आअहह…

ससुर…अब दर्द कैसा है बेटी….

भाभी….कुछ कम है पिताजी…

ससुर…बेटी अगर तुम कहो तो में सरसो के तेल की मालिश तुम्हारे पेट पर करके गरम पानी से सिकाई कर दूं…जल्दी आराम मिलजाएगा….

भाभी….पर कैसे पिताजी…मुझे तो शरम आती है….

ससुर…इसमें शरम की क्या बात है बेटी…फिर में तो तुम्हारे पिता समान हूँ…मुझ से क्या शरमाना….

भाभी…पर पिताजी….

ससुर…पर वर कुछ नहीं…तुम लेटी रहो में सरसों का तेल लेकर आता हूँ….ऑर ये कहकर ससुर बाहर चले गये…..

भाभी…उनको जाते हुए देखकर मंद मंद मुस्कुरा दी…यही तो शायद उनकी प्लॅनिंग का पहला चेप्टर था…..

कुछ ही देर के बाद ससुर एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर आ गये…ऑर एक बोटेल में गरम पानी भी भर लाए थे….

ससुर…लो बहू तुम सीधी लेट जाओ में तुम्हारे पेट पर तेल की मालिश कर दूं…फिर इस गरम पानी की बोतल से सिकाई कर दूँगा…

भाभी..सीधी लेटते हुए…पर पिताजी…में आपके सामने अपने पेट को नंगा कैसे कर सकती हूँ…

ससुर…कोई बात नहीं बेटी…मुझसे क्या परदा…में तो तुम्हारे पिता समान हूँ ऑर फिर ये दर्द भी तो ठीक करना है ना…

भाभी…हाँ ये तो ठीक है…ये दर्द तो ठीक करना है पर मुझे तो शर्मा आ रही है….

ससुर…मुझसे क्यूँ शरमा रही हो बेटी…क्या मेरा ये भी फ़र्ज़ नहीं कि में तुम्हारे पेट की मालिश ही कर सकूँ…तुम तो डेली मेरे पैर दबाती हो…

भाभी…हैं ये तो ठीक है पिताजी…पर में कैसे अपने पेट से पल्लू को हटाऊ…मुझे तो आपके सामने शर्म आती है….

ससुर…तुम ऐसा करो बेटी…आपनी आँखें बंद कर्लो…बाकी में खुद कर लूँगा….पर तुम्हारा दर्द तो हटाना ही हैं ना….बेटी….

भाभी…जी वो तो है पिताजी…पर…

ससुर…पर कुछ नहीं…ऑर ये कहते हुए बहू के पेट से साड़ी का पल्लू एक ओर हटा दिया….भाभी ने अपनी आँखों पर शर्म से हाथ रख लिया….

बहू का सुडोल गोरा पेट देखकर ससुर जी के तो होश ही उड़ गये….नाभि का छेद तो ससुर जी को ऑर उत्तेजित कर रहा था….ससुर जी का मन बहू के पेट को चूमने के लिए मचल उठा…पर थोड़ी…शांति भी रखनी थी…नहीं तो मामला बिगड़ भी सकता था….यही सोच कर ससुर जी ने अपने उपर कंट्रोल किया…ऑर हाथ में तेल लेकर बहू के पेट पर लगाने लगे….

भाभी….पिताजी,…मुझे गुदगुदी हो रही है….प्लीज़ रहने दो ना….

ससुर..कैसे रहने दूं बेटी…मेरा भी तो कुछ फर्ज़ है कि नहीं….आज तो पहली बार तुम्हारी सेवा का मौका मिला है….भला वो कैसे छोड़ दूं…वरना हमेशा तुम ही मेरी सेवा करती हो…..

ससुर का हाथ लगते ही भाभी की हालत खराब होने लगी…उनकी साँसे तेज होने लगी…उनकी गालों पर शुर्खी आ गई थी…पूरे सरीर में बिजलियाँ सी दौड़ने लगी थी….ऑर ससुर बड़ी चालाकी से पूरे पेट पर मालिश कर रहे थे…कई बार तो उनका हाथ भाभी के ब्लाउस तक ऑर कभी…नीचे साड़ी ऑर पीटिकोट के नाडे तक जा रहा था….पर अब तो हद ही हो गयी…..ससुर जी ने एक उंगली…भाभी की नाभि के छेद में डाल दी ऑर उसको अंदर घुमाने लगे…….

भाभी….मुझे बहुत गुदगुदी हो रही है पिताजी…ये आप क्या कर रहे है….

ससुर…कुछ नहीं…बेटी तुम्हारे इस छेद का दर्द दूर करने की सोच रहा हूँ…. बेटी अगर तुम कहो तो तुम्हारी साड़ी ऑर पेटिकोट थोड़ा नीचे कर दूं कही कपड़ो पर तेल ना लगे जाए…..

भाभी…पिताजी…मुझे तो बड़ी शर्म आ रही है…भला कोई ससुर बेटी के साथ ऐसे भी करता है….

ससुर…अभी तो मेने कुछ भी नहीं किया है बेटी…बस तुम्हारे पेट की मालिश ही कर रहा हूँ…पर ऐसे तुम्हारे कपड़े खराब हो सकते है….

भाभी…अगर ऐसा है पिताजी तो फिर थोड़ा सा नीचे कर दो…

ससुर…ठीक है बेटी…ऑर ससुर कपड़ो को थोड़ा नीचे सरकाने लगे…अरे बेटी तुम्हारा पेटिकोट का नाडा टाइट बँधा है..कपड़े तो नीचे नहीं हो पा रहे है….अब क्या करूँ….अभी तक ससुर जी का लंड एक टाइट मोटी रोड़े की तरह से टाइट हो चुका था…ऑर बहू के कूल्हे पर चोट मार रहा था…जिसे भाभी महसूस करके ऑर उत्तेजित हो रही थी….

भाभी…पर पिताजी…

ससुर…क्या हुआ बेटी…में तो थोड़ा ही नीचे करूँगा….इससे मालिश ऑर गरम पानी की बोटेल से सिकाई भी ठीक से हो सेकेगी….

भाभी…पिताजी…शरमाते हुए…कोई आ गया तो…क्या सोचेगा….

ससुर…अब कॉन आएगा…बेटी…आज में तुम्हारी पूरी सेवा करना चाहता हूँ…यदि तुम इजाज़त दो तो बेटी….पेटिकोट का नाडा कुछ ढीला कर दूं तभी तो कपड़े नीचे हो पाएँगे….ऑर पूरी तरह से मालिश भी हो पाएगी….

भाभी…में कैसे कहूँ…पिताजी…ये तो ग़लत होगा…ऑर मुझे शर्म भी आ रही है…..ऐसा तो कभी उन्होने भी नहीं किया है….

ससुर…तो फिर उन्होने कैसे किया है बेटी…ज़रा में भी तो जानू…

भाभी…आप बड़े खराब है…पिताजी…भला…ये में कैसी बताऊ कि उन्होने…..कैसे किया है…..

ससुर…आज जान ही चुके थे…कि बहू को कोई एतराज नहीं है…बस थोड़ा शरमा रही है…ऑर वैसे भी ज़्यादातर महिलाए…कभी भी शुरआत नहीं करती…ये तो बहू है…अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा….ससुर ने बहू की साड़ी थोड़ी एक तरफ को सर्काई…ऑर जैसे ही पेटिकोट के नाडे पर हाथ लगे तो बहू चौंक कर उठ बैठी…ये क्या कर रहे हैं आप पिताजी…..कुछ नहीं बेटी बस थोड़ा सा ढीला करके…थोड़ा नीची कर दूँगा…जिससे मालिश भी ठीक होगी ऑर तुम्हारे कपड़े भी खराब नहीं होंगे…..

भाभी…पिताजी….पर हमे तो शर्म आ रही है….आपके सामने ऐसे कैसे लेट सकते है हम…..

ससुर…क्यूँ बेटी इसमें क्या बुराई है….हम तुम्हारे पिता समान है ऑर तुम हुमारी बेटी हो…क्या हमारा ये भी हक नहीं है कि हम अपनी बेटी की मालिश कर सके….

भाभी…ये तो ठीक है पिताजी…पर….पर…वो हमें लाज आती है….

ससुर…बेटी जब तुम सुबह लता से किचन में बाते कर रही थी…तो कुछ मेने भी सुनी है….वो अपने ससुर की कितनी सेवा करती है….कितना ख़ुसनसीब है उसका ससुर….ऑर एक हम है….कि हमारी बहू…हमे मालिश भी नहीं करने दे रही है…लो बेटी हम चले जाते है…तुम पर हमारा अधिकार ही क्या है….

भाभी..आप बड़े खराब है पिताजी…आपने छुप कर हमारी बातें सुन ली….

 
ससुर…नहीं बेटी छुप कर नहीं…बाहर तक आवाज़ आ रही थी…

भाभी…क्या आवाज़ आ रही थी…पिताजी…..

ससुर….अरे अब क्या बताऊ…कि ससुर ने उसने लता की उसका क्या हाल कर दी है…….

भाभी….पिताजी आपने ये सब सुन लिया क्या….

ससुर…हाँ बेटी जब आवाज़ आ रही थी तो सुनना ही पड़ा….

भाभी…पिताजी…आपको शरम भी नहीं आई ऐसी बाते सुनते हुए….

ससुर…बेटी…में तो शिरफ़ सुन ही रहा था…बाते तो तुम दोनो ही कर रही थी…

भाभी…ने शरमा कर अपने मुँह को हाथों से छुपा लिया….पिताजी आप तो बड़े खराब निकले…सब सुन लिया…..आपको बुरा नहीं लगा…पिताजी….

ससुर…इसमें बुरा लगने की कोन्सि बात थी…पर अब बुरा लग रहा है…कि हमारी बहू…हमे अपने पेट की सही तरह से मालिश भी नहीं करने दे रही है…….

भाभी…पर पिताजी हमें शर्म आ रही है…हम क्या करे…..

ससुर…ठीक है बहू…हम बाहर चले जाते है…हम ने तो सोचा था कि हमारी बेटी भी हमें वैसे ही अपना समझती है जैसे लता अपनी ससुर को मानती है…..ऑर ससुर जी उठने लगे…….

भाभी…ये जान कर कि ससुर जी को बहुत दुख हुआ है….ऑर कहीं सच मूच ना चले जाए तो सारे प्लान पर पानी फिर जाएगा…..एक दम से बोली…नही नहीं..पिताजी…आप ना जाओ…हम तो आपकी उस लता से ज़्यादा सेवा करना चहते है…पर हमे शर्म आ रही थी…लो हम कुछ नही बोलेंगे…आप जो चाहे कर ले……

ससुर…जो चाहे…..ऑर हन्स पड़े….

भाभी…झेंप कर हमारा वो मतलब नहीं था…पिताजी…हम तो…वो….

ससुर …हम तो क्या बेटी….

भाभी…पिताजी…हम तो वो नाडा ढीला करने की बात….कहकर भाभी ने अपने मुँह पर दोनो हाथ रख लिए….

ससुर…हम जानते हैं बेटी…तुम हमारा कितना ख़याल रखती हो…हम ये भी जानते है बेटी कि तुम हमारी हर इच्छा….पूरी भी करना चाहती हो…लता से भी ज़्यादा…..ससुर ने बात को कुछ ज़्यादा ही सॉफ करते हुए कह ही दिया….

भाभी…हाँ ये तो है पिताजी…लता की बातों की याद करके ऑर फिर ससुर के लंड को अपने कुल्हों पर रगड़ने से भाभी की चूत भी पानी छोड़ रही थी….

अब ससुर जी को पूरा यकीन हो चुका था कि उसकी बहू भी गर्म हो चुकी है ऑर चुदने को तय्यार है….वे इस खूबसूरत मौके को भला कैसे छोड़ने वाले थे उन्होने भाभी के पेटिकोट का नाडा खोल दिया ऑर साड़ी ऑर पेटिकोट को थोड़ा नीचे खिसका दिया….भाभी के सरीर में चीटियाँ दौड़ने लगी थी…उनकी चूत अब ऑर ज़्यादा पानी छोड़ने लगी थी उधर ससुर जी का लंड भी अब ऑर बैचेन हो चला था….बरसों की तमन्ना आज पूरी होने जा रही थी…सारी ऑर पेटिकोट को थोड़ा नीचे करते ही ससुर जी के होश उड़ गये….अब उन्हें भाभी की चूत के उपरी हिस्से के झान्टो के छोटे छोटे बाल जो नज़र आ गये थे….उनके लंड ने सलामी दी…ऑर बहू के चुतड़ों से टकरा गया…..बहू के मुँह से आहह निकल ही गया….

ससुर…क्या हुआ बहू…..

भाभी…शरमाते हुए….कुछ नहीं पिताजी…आपका वो हमे चुभ रहा है….

ससुर…हमारा वो…वो क्या बेटी…

भाभी.. आप बड़े बेशर्म होते जा रहे है…पिताजी..भला हम कैसे कहे….

ससुर…बेटी जब तुम हमे नहीं बताओगी तो हमे कैसे पता चलेगा कि हमारा क्या आपको परेशान कर रहा है….

भाभी…आप तो बड़े ही वो है…जाओ हम आपसे नहीं बोलते….

ससुर…अरे नहीं…बेटी नाराज़ ना हो पर बताओ तो सही…ऑर ससुर जी ने बहू की चूत का उपरी बालों वाला हिस्सा छू ही लिया….

भाभी…..आआआआआअहहुउऊउउस्स्स्स्स्सिईई ये क्या कर रहे हैं पिताजी…आआअहह हमे कुछ हो रहा है….

ससुर …ठीक है बेटी…हम सब ठीक कर देते है…ऑर उन्होने भाभी की साड़ी ऑर पेटिकोट को ऑर नीचे कर दिया……जिससे बहू की गीली पैंटी ही उनके निचले हिस्से पर रह गई… थी….ऑर भारी-भारी जांघों के बीच उभरी हुई पैंटी के नीचे चूत…..ससुर जी की हालत खराब हो गई….

भाभी…ये आपने क्या किया पिताजी…हमे नंगा ही कर दिया…हम तो आपकी बेटी के समान हैं..ये आपने क्या किया….

ससुर…हैं बेटी…तुम हमारी बेटी के समान ही हो…इसीलिए तो हमारा भी फ़र्ज़ बनता है कि बेटी के दर्द पीड़ा का ध्यान भी रखे…अब हम खुल कर मालिश कर सकेंगे…ऑर कपड़े भी खराब नहीं होंगे….

भाभी…हैं ये तो ठीक है…पर पिताजी…आपने तो हमे नंगा ही कर दिया….

ससुर…अभी नंगा कहाँ किया है बेटी…तुम्हारी ये पैंटी तो बहुत सुंदर है…इसके नीचे किया छुपा रखा है…बड़ी ही मेजेदार खुसबू आ रही है….

भाभी…आप तो बड़े खराब है…पिताजी…हमे नंगा कर दिया…ऑर अब….

ससुर…बेटी यदि हम तुम्हारा ध्यान नहीं रखेंगे तो लोग क्या कहेंगे…कि बहू को दर्द हो रहा था…ऑर हम ने ध्यान भी नहीं रक्खा….ससुर जी भाभी की गोरी चिट्टी जांघों को देखते ही पागल से हो उठे थे….

भाभी…आँखें खोल कर …क्या देख रहे है पिताजी…

 
ससुर देखा रहा हूँ कि हमारी बहू कितनी सुंदर है…भगवान ने अपने हाथो से बनाया होगा….ऑर तुम्हारी पैंटी की ख़ूसबू तो गजब ही ढा रही है…

भाभी…. दर्द तो उपर है…पिताजी…पर आप तो नीचे के दर्द पर पहुँच गये…पहले उपर का दर्द तो कम हो जाए…पिताजी….

ससुर होश में आते हुए…हैं ये तो में भूल ही गया था….ऑर ससुर ने भाभी के ब्लाउज को उपर करना शुरू कर दिया….

भाभी…अब ये क्या कर रहे है…पिताजी….

ससुर…बेटी पहले उपर का दर्द दूर करने की सोच रहा हूँ…कहीं इस ब्लाउज पर भी तेल ना लग जाए इसी लिए ऐसे भी उपर कर रहा हूँ…पर तुम्हारी तो बड़ी भारी भारी है…..ये उपर नहीं हो रहा है…लगता है इसे भी उतारना ही पड़ेगा .…..

भाभी…अब क्या हुमारा ब्लाउज भी उतार देंगे पिताजी….फिर तो हम बिल्कुल नंगे ही हो .…..

ससुर…पर बेटी…ऑर कोई चारा भी तो नहीं है….पहले उपर के दर्द को दूर जो करना है….ऑर फिर हमारी बेटी जैसी बहू ये ना कहे कि हम ने उसका पूरा ध्यान नहीं रक्खा…..

भाभी…हैं ये तो है..पिताजी..पर हमारा ब्लाउस…

ससुर…तुम आराम से लेटी रहो बहू…में खुद ही देख लूँगा….ऑर ससुर जी ने भाभी के ब्लाउस की हुक खोल दी….

भाभी…आअहह हाई राम आपने तो हमें पूरा ही नंगा कर दिया पिताजी…हमे तो बड़ी शर्म आ रही है…अब हम क्या करें….

ससुर…बस बेटी…आज हमे सेवा करने दो बाद में तो तुम ही हमारी सेवा करोगी….ऑर ये कहकर ससुर जी ने भाभी के ब्लाउस को उसके सरीर से अलग कर दिया….भाभी ने अपना चेहरा अपने हाथों में छुपा लिया….ऑर ससुर जी के हाथ बहू के सरीर पर घूमने लगे…ससुर का बुरा हाल हो रहा था…कि इतना कीमती माल उनके घर में ही था….ऑर दो साल से वे इसे देख ही नहीं सके…..

भाभी…का भी हाल अब ऑर खराब होने लगा था….पिताजी…दर्द तो अब ऑर बढ़ने लगा है….आपने तो ना जाने हमे क्या कर दिया है….आआअहह ससुर जी के हाथों के स्पर्श से भाभी की सिसकारी निकल गयी…..

ससुर…क्या हुआ बेटी…आज आपने सुबह हमें दूध भी नहीं पिलाया था…शायद इसीलिए आज तुम्हारे इतना तेज दर्द हो गया है…..

भाभी…हैं ये हो सकता है…पिताजी…में अभी ले आती हूँ….

ससुर….बस अब तो हम खुद ही पी लेंगे बेटी…तुम बस आराम करो…..

 
ससुर के हाथ भाभी के शरीर पर घूम ज़रूर रहे थे पर उनका ध्यान तो भाभी के सुंदर सुडोल…गोरे.चिट्टे आकर्षक शरीर पर घूम रहा था…वे अब अपने आप को बड़ी मुश्किल से रोके हुए थे…भाभी भी अपने मुँह को अपने हाथों से छुपाए हुए मंद मंद सिसकारी भर रही थी…मगर अचानक ही……ससुर भाभी के ऊपर आ गये ऑर भाभी के शरीर को बेतहासा चूमने लगे….भाभी कसमसा रही थी…ऑर ससुर उसके पूरे शरीर को चूमने चाटने लगे थे…..

भाभी…पिताजी ये आप क्या कर रहे है…में आपकी बहू हूँ…प्लीज़ मेरे साथ ऐसा ना करें पर कोई विरोध भी नहीं कर रही थी…पर अब ससुर कहाँ रुकने वाले थे….उनके चूमने की स्पीड बढ़ती ही जा रही थी…इस अचानक हमले से भाभी भी सम्भल नहीं पाई थी…ऑर शायद उसने पहले से ही इसके लिए अपने आप को तैयार कर लिया था….पर वो मात्र दिखाने के लिए कसमसा रही थी ऑर अपने को छुड़ाने का कोई भी प्रयास नहीं कर रही थी….

भाभी…पिताजी प्लीज़ हमारे साथ ऐसा ना कीजिए….हम तो आपकी बहू है…

ससुर…हाँ बेटी तुम हमारी बहू ही हो…पर तुम्हारे इस सुंदर गठीले शरीर पर कुछ तो हक़ हमारा भी है….आज तो हमें भी इसकी सेवा करने दो….

भाभी…पर ये तो पाप है पिताजी….

ससुर…एक औरत ऑर मर्द जब मिलते है तो ये पाप नहीं पुण्य बन जाता है….क्या तुम्हें मज़ा नहीं आ रहा है बेटी…..क्या तुम्हें ये अच्छा नहीं लग रहा है…यदि तुम्हे बुरा लग रहा है तो हम एक ओर हट जाते है….

भाभी…नहीं नहीं पिताजी अच्छा तो लग रहा है…पर ये तो पाप है…हम आपको अलग हटने के लिए कब कह रहे है….

ससुर जान गये…कि अब बहू चुदाई के लिए पूरी तरह से तैयार है…इस लिए उन्होने जल्दी ही भाभी की ब्रा भी उतार फैकि…ऑर भाभी की भारी भारी….सुडोल चुचियों से खेलने लगे ऑर एक चुचि के निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगे थे…..भाभी की सिसकार बढ़ गयी…आआआहहीीइसस्स्स्स्स्सुउुुुुुआाहह पिताजी….आअप तो वास्तव में दूध पीने लगे…आअहह थोड़ा धीरे से पिताजी….हमें दर्द होता है…..ऑर ससुर जी बहू की चुचियों से प्यार से खेलते हुए उन्हें चाटने चूमने लगे….उन्होने तो कल्पना भी नहीं की थी…कि उनकी बहू इतनी सुदर गठीले बदन की होगी…..वे बारी बारी से दोनों चुचियों को चूम चाट रहे थे….ऑर भाभी का हाल बहुत खराब हो चुका था……

भाभी…पिताजी आपने हमें तो पूरा नंगा कर दिया है….ऑर खुद….????

ससुर -अभी पूरा नंगा कहाँ किया है बेटी…अभी तो पैंटी पहने हो तुम….

भाभी…तो क्या पैंटी भी उतारोगे पिताजी…पर आपने तो कोई भी कपड़ा नही उतारा है…..

ससुर…हैं बेटी अब पैंटी भी उतारनी पड़ेगी…वर्ना हम उस पवित्र जल को कैसे पीएँगे जो तुम्हारी चूत से बह रहा है…..ससुर ने पहली बार चूत शब्द का इस्तेमाल किया था….

भाभी….प्लीज़ पिताजी…हमारी पैंटी मत उतारना….फिर तो हम बिल्कुल ही नंगी हो जाएँगे…..हमें तो सोच कर ही ना जाने क्या हो रहा है….

ससुर ने जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दिए जब भाभी ने आँखे खूल कर देखा तो वो चोंक गयी ससुर जी का लंड उसकी उम्मीद से कही बड़ा था…वो घबरा गई…कि कही पिता जी ने इससे उसकी चूत में डाल दिया तो वो तो बिल्कुल फट ही जाएगी…..उसका शरीर काँप गया….

ससुर…क्या हुआ बहू….तुम ही तो कह रही थी…कि हमने आपने कपड़े नहीं उतारे है ये लो अब हम तो बिल्कुल नंगे हो गये है पर तुम अभी भी पूरी नंगी नहीं हो…..पर भाभी तो ससुर जी के लंड को ही देख रही थी…कितना बड़ा ऑर मोटा था….इसको कोई औरत कैसे झेल सकती है….

ससुर…क्या देख रही हो बहू….

भाभी…पिताजी…आपका ये कितना बड़ा ऑर मोटा है….इसे कोई औरत कैसे झेल सकती है….प्लीज़ पिताजी…मुझे बहुत डर लग रहा है…आप फिर से कपड़े पहन लो….मेने तो इतना भारी देखा तो नहीं पर सुना भी नहीं है….

ससुर…डरो नहीं बेटी…कुछ नहीं होगा…तुमने देखा था ना वो मोटा लंबा साँप उस बारीक से छेद में कैसे घुस गया था…इसी तरह से ये भी अपनी जगह बना लेगा….तुम्हे कोई परेशानी नहीं होगी…

भाभी तो क्या पिताजी….आप ऐसे हमारी इसमें डालेंगे….भाभी ने डरते हुए कहा…..

तब तक ससुर ने भाभी की पैंटी को भाभी के शरीर से अलग कर दिया…ऑर भाभी ने भी भारी चूतड़ ऊपर को किए जिससे वो आसानी से निकल गयी….

भाभी…पिताजी ये आपने क्या किया…हमारी पैंटी भी उतार दी…हमें पूरा ही नंगा कर दिया है…ऑर अपने हाथों से अपनी चूत को छुपाने का प्रयास करने लगी…….

ससुर…तो क्या हुआ बेटी…हम भी तो पूरी तरह से नंगे हो चुके है….

भाभी…पिताजी आप को तो शर्म नहीं आती है…पर हमें तो शर्म आ रही है….ऑर आपने लाइट भी बंद नहीं की है…इस तरह से तो हमारे साथ कभी उन्होने भी नहीं किया…वो भी पहले लाइट तो बंद कर ही देते थे…

ससुर…आरे बेटी…इतने सुंदर शरीर को कोई भला अंधेरे में कैसे निहार सकता है…वो तो बेवकूफ़ है…जिसने इस सुंदर,सुडोल ऑर मांसल काया का आसली मज़ा ही नहीं लिया है…पर में तो अंग अंग निहरना चाहता हूँ बेटी….

भाभी…क्या हम वास्तव में सुंदर है पिताजी….

ससुर- हां बेटी तुम बहुत सुंदर हो…तुम्हारा अंग अंग महक रहा है…मन कर रहा है..तुम्हारा अंग अंग पी जाऊ…..

भाभी…वो कैसे पीओगे पीताजी…..

ससुर…तुरंत बहू के ऊपर फिर से आ गये ऑर बहू के रसीले होंठो को चूमने लगे उन्हें अपने मुँह में भर लिया…ऑर रसमलाई की तरह से चूसने लगे….बहू भी मस्ती में होंठ चुसवाती रही…ऑर अचानक अपनी जीभ ससुर जी के मुँह में डाल दी…अब क्या था…ससुर जी आइसक्रीम की तरह से जीभ को पीने लगे थे….कुछ देर तक ऐसे ही होंठ ऑर जीभ पीने के बाद ससुर जी बहू की गर्दन को चूमने लगे….

जब ससुर जी ने बहू के इयर्स (कान) को चूमा तो बहू सिहर उठी….ससुर जी ने तुरंत बहू के कान के पीछे का हिस्सा चूमना शुरू कर दिया…वो चुदाई के एक माहिर खिलाड़ी थे…वो जाने थे कि औरत के खास अंग कोन्से होते है….थोड़े देर के बाद ससुर जी फिर से होंठो को चूम कर भाभी की चुचियों को मसल मसल कर चूसने लगे थे….भाभी की सिसकारियाँ अब तेज हो चली थी…वो लगातार सिसिया रही थी….उूुउउम्म्म्ममम ईईईईआआआआईईईइसीईईउउुुउउम्म्म्ममममहाआाआऊओंम्म्ममह…..भाभी की चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था….ससुर जी का भारीभरकम गधे का लंड कई बार उनकी चूत पे हल्की चोट कर चुका था…ऑर भाभी के मुँह से आआहह निकल कर रह जाती थी…भाभी इतनी गर्म हो चुकी थी,,,कि उनकी चूत किसी भी पल अपना पूरा पानी छोड़ सकती थी….या यूँ कहूँ कि भाभी आज सातवे आसमान पे थी…वो आज पूरा आनंद ले रही थी….

 
अब ससुर ने भाभी की चुचियों को मसल्ते हुए…भाभी की नाभि (सूंड़ी) और पेट को चूमना चाटना शुरू कर दिया था… कि भाभी का शरीर ऐंठने लगा ऑर उनके मुँह से लंबी आआआहहुउऊुुुुउउम्म्म्ममममममममीईईइससस्स्सिईईईई की आवाज़ निकली ऑर ससुर जी के सिर को पकड़ कर अपनी चुचियों पर दबा दिया….ससुर समझ गये कि उनकी बहू पानी छोड़ रही है……कुछ देर के बाद…..

ससुर….क्या हुआ बहू….

भाभी…अपनी ज़ोर से बंद आँखों को ज़ोर देकर खोलते हुए….हल्की सी मुस्कान के साथ….हमें तो आपने खाली ही कर दिया पिताजी….

ससुर….अभी से खाली हो गयी बहू….अभी तो रात बाकी है…फिर क्या करोगी बेटी….अभी तो कई बार खाली होना है……

भाभी…तो क्या पिताजी…आप रात भर ही….हमें यूँ ही….क्या आज पूरा ही दर्द हटाने की ठान ली है पिताजी….में तो मर जाउन्गी…..उन्होने तो रात में बस एक बार ही किया है…फिर सो जाते है….आप भी ऐसे ही करो ना पिताजी………

ससुर….अभी तो मेने कुछ किया ही नहीं है बेटी….अभी तो इस रुपहले बदन के अंग अंग को चूसना है….बरसों की प्यास बुझानी है….

भाभी…क्यूँ पीताजी…क्या मम्मी जी…आपकी प्यास नहीं बुझती है…

ससुर…अरे छोड़ो उस बुढ़िया को…जहाँ लगाया बस रोने लगी…कभी भी जी भरकर कुछ करने ही नहीं दिया…चीखने चिल्लाने लगती है….में तो प्यासा का प्यासा ही हूँ ऑर फिर उस पर ये सुंदर बदन जैसे कोई अप्सरा आसमान से आज शिरफ़ मेरे लिए उतरी हो तो भला…में आज रात को सोने में कैसे खो सकता हूँ….आज तो रातभर इस रसीले बदन की मदिरा पीउंगा….ऑर इसी के नशे में पूरा मज़ा लूँगा……

भाभी…मुस्कुराती हुई…तो क्या हम अप्सरा है…पिता जी…

ससुर…अरे उस से भी बढ़कर….जो नशा तुम्हारे इस बदन में है…वो तो कई बोतल पीने में भी नहीं है…ऑर ये कहकर ससुर जी…भाभी की चुचियों को फिर से मसल मसल कर पीने लगे….उसके बाद भाभी के पेट ऑर नाभि को चाटने लगे….जैसे वहाँ पर आइसक्रीम लगी हो….ससुर जी का लंड आपे से बाहर होने लगा था.. ऑर बार बार बहू की चुत पर ठोकर मार रहा था.. इस पर भाभी फिर से आआआअहह के साथ सिसक उठती थी….

ससुर…बेटी…तुम भी तो ज़रा इस लंड को अपने हाथों से सहलाओ ना….अब रहा नहीं जा रहा है…ये बड़ा दर्द कर रहा है….

भाभी…मुझे तो शर्म आती है पिताजी..मेने तो कभी उनका भी नहीं पकड़ा है…फिर आपका ये तो मेरे हाथों में आएगा कहाँ….इसको पकड़ने के लिए तो मुझे दोनो हाथो का इस्तेमाल करना पड़ेगा…..

ससुर…लो ऐसा करता हूँ बेटी कि में थोड़ी देर तुम्हारी चूत के रस का आनंद लेता हों…तुम तबतक ज़रा इस लंड से खेलो…बड़ा मज़ा आएगा….ऑर ससुर जी उठकर 69 पोज़िशन में आ गये….ऑर बहू की दोनो टाँगे ऊपर को उठाकर उसकी चूत पर मुँह रख दिया…..उूुुुउउईईएइससस्स्सिईईय्ाआआआहह की सिसकार के साथ बहू सिसक उठी…आआआअहह पिताजी….में तो आज मर ही जाउन्गी…..ये आप क्या कर रहे है….आआआहह….उूुुउउईईईइससस्स्स्स्स्सिईइ

ससुर…कुछ नहीं बेटी…बस तुम्हारी इस डबलरोटी की तरह से फूली हुई रसीली चूत के पानी का आनंद लेना चाहता हूँ…

भाभी सोचने लगी…कि चलो पति का तो कभी नहीं चूसा आज ससुर जी का चूस कर देखती हूँ शायद ससुरजी सच कह रहे हो ऑर वे भी तो मेरी चूत को मस्ती में चूस रहे है…ज़रूर कुछ मजेदार है….ये सोचकर भाभी ने लंड को अपने मुँह पर किया ऑर उसे मुँह में लेने की कोशिस करने लगी…अपना पूरा मुँह खोलकर भी वो सुपाडे को मुँह में नहीं ले सकी….हे भगवान…कितना मोटा है…मुँह में भी नहीं आता है…पर भाभी हिम्मतनहीं हारी ऑर ससुर जी के लंड के सुपाडे को जीभ बाहर निकाल कर चाटने लगी…

.वास्तव में भाभी को लंड का सुपाडा चाटना अब अच्छा लग रहा था….वे मदहोश होकेर ससुर के लंड के सुपाडे को चाटती रही…इस पर ससुर जी भी जोश में आ गये ऑर अपनी जीभ बहू की चूत में अंदर तक घुसा दी….आआआहहुउऊउईईईईईईईइससस्स्स्सिईईईीकि आह बहू के मुँह से निकल गई ऑर वे ऑर फुर्ती से लंड के सुपाडे को चाटने लगी….ससुर के लंड का सुपाडा फूलकर ऑर मोटा हो गया था……गुलाबी गुलाबी सुपाडे को चुस्ती हुई भाभी…मस्ती मे फिर सातवें आसमान पर थी…..ऑर ससुर जी की जीभ बहू की चूत को अंदर तक चोद रही थी…..जब ससुर जी की जीभ बहू के क्लिट को रगड़ती थी…तो उसके मुँह से आआअहह निकल जाती थी…..अब भाभी भी मस्त होकर ससुर जी के लंड के सुपाडे को चाट रही थी…वो इतना मोटा था कि उसके मुँह में नहीं जा रहा था….बस गुलाबी सुपाडे ऑर प्रिगुं को जीभ से चाट चाट कर मज़ा ले रही थी….

.एक बार फिर भाभी का शरीर अकेड़ने लगा था….उसकी चूत में अंदर भरे समुंदर की लहरे तेज हो चली थी…..उसके कराहने ऑर सिसकारियों की आवाज़े तेज हो गयी थी….उूुुउउम्म्म्मममाआआहहुउऊुउउईईईईईआऐईएईईईईीीइसस्स्स्सिईय्ाआआहपिताजी आआआहह ऊऊऊम्म्म्मममम्मूऊऊुुउऊहह के साथ भाभी की आँखें एक बार फिर बंद हो गयी…ज़ोर से बंद आँखें ऑर सिसकियों की लंबी आवाज़ …….आआआआआअहह की लंबी आवाज़…..के साथ भाभी के चुतड़ों ने एक झटका लिया ऑर भरे समुंदर की भारी लहर का पानी ससुर जी के मुँह में उडेल दिया…..जिसको ससुर जी गटागट पीने लगे…..आआअहह क्या स्वादिष्ट है इसके सामने तो सारी दुनिया का स्वाद फीका था…..कुछ देर तक बहू शांत रही…ऑर ससुर जी चूत पीने में मस्त…..जब भाभी स्वर्ग से लौट कर आई तो उसके ससुर उसकी चूत की आइस्क्रीम को उूुुुुउउम्म्म्ममाआआअहह के साथ चाट चाट कर पी रहे थे….उनका लंड झटके पे झटके मार मार कर अखाड़े में उतरने की कोशिश कर रहा था…..ससुर जी ने भाभी की चूत को पूरी तरह से सॉफ कर फिर से सीधे होकर बहू के उपर आ गये ऑर भाभी के मुलायम नाज़ुक रसीले होंठो को पीने लगे…

ससुर जी बहू के मुलायम नाज़ुक रसीली होंठ चूम रहे थे….फिर उन्होने अपनी जीभ बहू के मुँह में डाल दी…..भाभी एक बार फिर मस्त होते हुए ससुरजी की जीभ को चूसने लगी थी…..कुछ देर तक यूँ ही चूसने के बाद…ससुर जी ने भाभी की गर्दन चूमनी चाटनी शुरू कर दी…आज तो वो बहू के हर अंग को चाट चाट कर पूरा स्वाद लेना चहते थे…..उन्होने बहू के कानो के पिछले हिस्से ऑर कानो में भी जीभ घुसा दी…..

भाभी…मूमयाते हुए,,,,आआओउउउईएइसीईयी पिताजी क्या आज कोई छेद छोड़ेंगे भी कि नहीं….

ससुर…बेटी तुम्हारा हर छेद है ही इतना सुंदर ऑर स्वादिष्ट कि कैसे छोड़ दूं मन तो कर रहा हैं आज तो तुम्हे घोल कर ही पी जाऊ….आआआहह क्या बदन है तुम्हारा बहू….बिल्कुल सुगंधित फूलों का दस्ता है…..जितना चूमता ऑर चाट्ता हूँ उतनी ही प्यास बढ़ जाती है…ऑर ज़्यादा स्वादिष्ट हो जाता है…..

भाभी…तो पी लीजिए ना…किसने रोका है….ऑर मुस्कुरा दी….

 
ससुर जी फिर से भाभी की रसीली मदहोश कर देने वाली चुचियों को सहलाकर पीने लगे….चुचियों के निपल्स को चूस चूस कर उन्होने गुलाबी कर दिया था….भाभी की चूत में फिर से एक आग से लग गई थी…उनकी चूत में खलबली शुरू हो चुकी थी…ऑर ससुर जी बहू के शरीर का अंग अंग चाटने में लगे थे….भाभी की शादी को दो साल हो चुके थे ऑर उनके पति उन्हें रोज रात में मस्ती से चोदते थे…पर जो आनंद आज भाभी को मिल रहा था…वो तो आज तक नहीं मिला था….भाभी तो आज मानो निहाल ही हो गई थी….ससुर जी का एक मुस्टंड लंड भाभी की चूत पर लगातार ठोकर मार मार कर भाभी की उत्तेजना को चरम पर पहुचा रहा था….ससुर जी धीरे धीरे बहू की जांघों को चाटने लगे …बहू के शरीर में चीटियाँ चल रही थी…वे सेक्स के इस समुंदर में मस्ती के गोते खा रही थी….आख़िर वो पल आ ही गया जिसका ससुर ऑर बहू दोनो को इंतजार था…

ससुर जी का लंड अब चूत में जाने की लिए मचल रहा था…ऑर भाभी डर तो बहुत रही थी…पर उसने भी अब इसके लिए अंदर ही अंदर अपने को तैयार कर लिया था….ये तो वो भी जान रही थी….कि जो लंड उसके मुँह में नहीं आया,,,,ऑर दोनो हाथों से पकड़ना पड़ा वो लंड उसकी चूत में कैसे जा सकता है पर ये तो दोस्तो आप जानते ही है जब चूत में खुजली मचती है तो वो कुछ भी करने तो तैयार हो जाती है….यहाँ तक कि मूली, गाजर, बेगन तक को चूत में घुसा बैठती है….फिर ये तो मसटंडा लंड था….इसे मुस्टंड लंड की चाहत किस औरत को नहीं होगी….

भाभी की चूत बार बार खुल ऑर बंद हो रही थी….जैसे प्यासी मछली होठों को फड़फड़ाती है…यही हाल अब भाभी की चूत का भी हो चुका था….उसकी चूत भी मुँह खोल कर लंड के इंतजार में लार टपका रही थी…..

अब ससुर जी बैठ गये ऑर बहू की टॅंगो के बीच आ गये….उन्होने भाभी की दोनो टाँगों को ऊपर उठा कर अपने कंधों पर रखा लिया जिससे बहू की चुत कुछ ऑर खुल गयी थी… दो पंखुड़ियो के बीच गुलाब की तरह से महकता छेद देखकर ससुर का लंड अब नियन्त्रण से बाहर हो रहा था….

भाभी…पिताजी…आपका ये तो बहुत ही मोटा ऑर लंबा है….इस नाज़ुक सी जगह में कैसे जाएगा….में तो मर ही जाउन्गी…प्लीज़ पिताजी ये ना करो….मुझ पर तरस खाओ….मेरी ये नाज़ुक सी चूत ऐसे सहेन नहीं कर पाएगी….

ससुर…डरो नहीं बेटी…कुछ नही होगा…ये नाज़ुक सी चूत ही इस पूरे लंड को खा जाएगी….ऑर तुम्हे पता भी नहीं चलेगा……

भाभी…पर कैसे…..

ससुर बस देखती जाओ….बेटी….आज ये लंड इसे असली जीना सीखा देगा…बस उसके बाद ये ऑर मोटा लंबा लंड माँगेगी….

भाभी --- इससे बड़ा…..मोटा….लंबा लंड ऑर क्या होगा पिताजी….ये तो घोड़े के लंड को भी पीछे छोड़ रहा है….अगर एक बार आप इसे गधि की चूत में डाल दो तो वो भी चिल्ला पड़ेगी….

ससुर जी ने ढेर सार तेल बहू की गर्म चूत में उडेल दिया ऑर काफ़ी सारा अपने लंड पर भी लगा लिया….फिर दोनो हाथों से बहू की चूत के द्वार के दोनो पल्लो को खोलकर फैलाया….ऑर उस भयंकर लंड के शुर्ख लाल मोटे सुपाडे को बहू की चूत के छेद पर रख दिया….लंड का स्पर्श अपनी चूत के छेद पर पाकर बहू शिहर उठी , .गरम गर्म सुपाडा….गर्म चूत पर लगते ही बहू की आआअहह निकल गाइिईई

भाभी….आआअहह पिताजी…..प्लीज़ रहने भी दीजिए…..ये इतना भारी घोड़े के लंड से भी भारी लंड हमारी चूत में नहीं जाएगा….प्लीज़ पिताजी….हमें अब छोड़ दीजिए….ये हमारी चूत को फाड़ डालेगा….हम किसी को मुँह दिखाने के काबिल भी नहीं रहेंगे….प्लीज़ पिताजी…वैसे भी हम आपकी बेटी के समान हैं…हम अपने पति को क्या कहेंगे….ये तो हमारी चूत को बुरी तरह से फाड़ देगा……

ससुर….बेटी क्यूँ डर रही हो….कुछ नहीं होगा ऑर फिर किसी को पता कैसे चलेगा….बेटी…चूत ऑर लंड का संबंध ही ऐसा है….ये एक दूसरे को मज़ा देते है….दर्द नहीं….फिर याद करो तुम्हारी जेठानी ललिता ने तुमसे क्या कहा था….कि जब मर्द चुदाई के मूड में होता है तो वो चूत का साइज़ नहीं, बस लंड को चूत में घुसाने की जल्दी में रहता है….ऑर फिर तुम ही कह रही थी…कि तुम्हारा पति तो तुम्हारी चूत को कभी भी नहीं चाट्ता है….फिर वो कैसे देख पाएगा….कि तुम्हारी चूत का क्या हाल है…..

भाभी…पर पिताजी…हम इस लंड को कैसे झेल पाएगे….ये तो हमारी जान ही ले लेगा…..हमारी चूत को कहीं का नहीं छोड़ेगा….

ससुर…क्यूँ डरती हो बहू….कुछ नहीं होगा….ये लंड तुम्हे जो मज़ा देगा उसकी तो तुमने कल्पना भी नहीं की होगी….बस एक बार अंदर जाने दो बस फिर देखना…तुम खुद कहोगी…कि पिताजी…डाल दो पूरा….आआअहह ओर ज़ोर से….

भाभी…क्या सच में पिताजी….

ससुर…हाँ बेटी…बस एक बार थोड़ा दर्द तो होगा ही….जैसे तुम्हे सुहागरात में हुआ होगा….पर उसके बाद कितना मज़ा आया होगा…वो तो तुम्हे आज तक याद होगा….

भाभी…हाँ पिताजी वो चुदाई तो आज तक याद है…अब तो ये भी याद नहीं कि दर्द भी हुआ था…कि नहीं….

ससुर…हां बेटी यही तो में समझा रहा हूँ….उस मज़े के सामने सब दर्द भूल जाते है…जैसे तुम भूल गई…ऑर हां वो पहली चुदाई तुम्हारी….आज तक याद होगी…वो मज़ा….

भाभी…हाँ पिताजी वो पही चुदाई का मज़ा तो आज भी नहीं भूली हुँ….

ससुर…तो फिर बेटी ये भी आज तुम्हारी…पिताजी के साथ पहली सुहागरात है…जो मज़ा आज आएगा वो भी तुम जिंदगी भर नहीं भूलोगि….

भाभी…सच पिताजी….

ससुर… हाँ बेटी…बस शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा…बस उसे झेल लेना उसके बाद तो बस मज़ा ही मज़ा…..वो भी पहली सुहागरात जैसा….

भाभी….मन तो अब मेरा भी कर रहा है…ऑर चूत पानी भी छोड़ रही है…पर अब भी यही डर है कि चूत में जाएगा कैसे….

ससुर…बस देखती जाओ बेटी…ऑर ये कहकर ससुर ने अपने लंड पर थोड़ा सा दबाव बनाया….आआआहहुउऊउउइसस्स्स्सिईईई के साथ भाभी सिसक उठी…पर लंड का सुपाडा अंदर नहीं गया…ससुरा हाथी का लंड ऑर बिल्ली की चूत में…भला इतनी आसानी से कैसे जाएगा….

ससुर….समझ गये कि सीधे तो पर तो ये लंड अंदर नहीं जाएगा…चाहे तेल ऑर भी लगा लूँ….थोड़ी देर तक तो बहू को काबू में करके ज़बरदस्ती ही चोदना पड़ेगा….उसके बाद ही कुछ हो पाएगा….नहीं तो बेटा….बस बाहर ही झाड़ ले इसका पानी…..अब ससुर ने अपनी नई प्लान के अनुसर भाभी को अपनी बाहों में दबा लिया ऑर बहू की गान्ड के नीचे एक मिटा सा पिल्लो लगाया….ऑर फिर से लंड के सुपाडे को चूत के छेद पर एडजस्ट कर एक झटका मार ही दिया….लंड का सुपाडा तो बहू की चूत को फाड़ता हुआ अंदर दाखिल हो गया पर बहू की चीख चीख कर बुरी हालत हो गई….दोस्तों आप सभी जानते है कि जब मर्द पर चुदाई का भूत सवार होता है तो वो सब भूल कर लंड को अंदर डाल ही देता है…फिर अंजाम चाहे जो भी हूँ….ऑर हुआ भी यही……

 
ससुर ने बहू को कस कर बाहों में भिंचे रक्खा ऑर एक के बाद एक कई जोरदार धक्के उस वक़्त तक लगाते रहे जब तक उनका पूरा लंड बच्चेदानि को अंदर धकेलकर बहू की चूत में समा नहीं गया….पूरा का पूरा लंड बहू की चूत में….पर लंड को अंदर करने में साँसे ससुर जी की फूल गयी…ऑर बहू की हालत तो इतनी खराब कि उसे साँस लेना मुश्किल… हो गया .बहू छटपटाती रही….हाथ पैर मारती रही…पर ससुर ने पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में डाल कर ही दम लिया….बहू की साँसे उखड़ रही थी…चूत का दर्द उसके बर्दास्त से बाहर था…पर अब क्या हो सकता था….लंड तो चूत को फाड़ कर अंदर दाखिल हो चुका था…कितना भी भयंकर दर्द क्यूँ ना हो….अब तो झेलना ही था……ससुर भी शांत से होकर बहू के उपर पड़ गये .

दोनो की गरम तेज साँसे आपस में टकरा रही थी….ऑर दो शरीरों की गर्माहट से दर्द की बर्फ पीघलने लगी थी….ससुर बहू के शरीर की मालिश कर रहा था ऑर भाभी की चुचियों से खेलना शुरू कर दिया था….पर उनका लंड तो बहू की चूत में ऐसा फँस गया था…कि अभी अंदर बाहर करने के लिए शायद जगह ही नहीं थी….बहू की चूत ने उसे ऐसा भींच लिया था…कि जैसे ससुर ने बहू को बाहों में जकड लिया था…..कुछ देर यूँ ही गुजर गई..बहू की बंद आँखों से आँसू बह रहे थे…ये देखकर ससुर ने बहू के गालों को चूम लिया…ऑर एक बार फिर से होंठ चूमने शुरू कर दिए….ऑर थोड़ी देर के बाद बहू की साँसे कुछ नॉर्मल हुई तो….ससुर ने उसके गालों पर बह रहे आँसुओं को चाटते हुए पूछा….बेटी अब कैसा महसूस कर रही हो…..

पर भाभी ने कोई जबाब नहीं दिया…बस आपनी उखड़ी हुई साँसों को नॉर्मल करने का प्रयास करती रही……शायद वो भारी-भरकम लंड को पाने की इच्छा के नतीजे के बारे में सोच रही थी…वो ये तो अब तक जान ही चुकी थी कि उसकी चूत को पूरी तरह से फाड़ कर ससुर जी का पूरा लंड उसकी चूत में समा चुका है ऑर अपनी चूत के अंतिम छोर पर बच्चेदानि के मुँह पर ससुरजी के लंड के सुपाडे की गर्माहट….अब उसे शायद अच्छी भी लग रही थी…..

ससुर जी का लंड बहू की चूत में गहराई तक पूरा फँसा था….ऑर वे अब बहू को मस्त होकर चूम ऑर चाट रहे थे ऑर आदत के अनुसार बहू की चुचियों को मसल मस्ल कर पी भी रहे थे….दो शरीर की गर्मी…ससुर जी का चूमना चाटना…ऑर चुचियों का पीना ऑर सबसे ज़्यादा ससुर के लंड के सुपाडे की गरमाई से बहू की चूत भी पिघलने लगी थी…उसने फिर से पानी छोड़ना शुरू कर दिया था….भाभी एक बार फिर चुदाई का आनंद लेने के लिए तैयार हो चुकी थी….पर ससुर जी अब जल्दी में नहीं थे…उनके लंड ने अब तो बहू की चूत पर फ़तेह हासिल कर ली थी….अब उन्हें कोई डर नहीं था…कुछ ही देर बाद बहू की आआआअहह भरी सिसकारी फिर निकलने लगी थी…ससुर जी के भारी भरकम लंड ने बहू की चूत को अपने अनुसार खोल कर अब अपनी जगह बना ली थी….

ससुर …ने एक बार फिर से बहू के होंठो को चूम कर पूछा…बेटी अब कैसी हो…

भाभी…आपकी बला से पिताजी…आप ने तो मार ही डाला…मेरी तो चूत भी फाड़ डाली…है…भला अब क्या होगा….

ससुर…कुछ नहीं होगा..बेटी…किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा….बस आज की रात चुदाई का वो आनंद लो कि जीवन भर याद रहे….

भाभी…तो क्या अब इस लंड को मेरी चूत में यूँ ही डाले रहोगे…या कुछ करोगे भी अब …फाड़ तो डाली ही…..

ससुर ने फिर से बहू के होंठ चूमकर मुस्कुरा दिए….आख़िर अब तो बहू ने इशारा कर दिया था….कि वो तैयार है….ऑर ससुर ने अपने लंड को चूत के अंदर ही थोड़ा थोड़ा हिलाना शुरू कर दिया…..वो तो बेचारा पहले ही झटके खा रहा था…

लंड के चूत में आगे पीछे होने से बहू को कुछ देर फिर परेशानी तो हुई पर जल्दी ही वो मज़े में डूबने लगी…उसकी चूत से फिर पानी बहने लगा था…ससुर जी भी अब मस्त होकर चुदाई में लग गये थे….कमरे में आआआअहहुउऊुुुउउईईईई आआआआअहह उूुुउउईईई आआआएईीइसस्स्स्स्सिईईई म्म्म्मम उूउउम्म्म्ममममम की सिसकियाँ गूज़्ने लगी थी…भाभी के हाथ अब ससुर जी की कमर के ऊपर आ चुके थे…ऑर वे ससुर जी की कमर ऑर चुतड़ों की मालिश कर रहे थे…वाह री चूत…इतना दर्द सह कर फिर से भाभी को चूतड़ हिलाने के लिए मजबूर कर रही थी…अब भाभी के चूतड़ भी उपर नीचे होकर ससुर जी के उस भांकार लंड को जो बच्चेदानि के मुँह पर ठोकर मार रहा था…को पूरा चूत में समाने का प्रयास कर रही थी….

लगभत 20 मिनट तक चुदाई का वो आलम रहा कि चूत लंड को ऑर लंड चूत को झटके पे झटके दे रहे थे….कि बहू के शरीर में ज्वालामुखी फूटने लगा था…उनकी साँसे तेज ऑर तेज…आँखे ज़ोर से भिन्च गयी….भाभी के हाथों का कसाव ससुर की कमर पर बढ़ गया था…ऑर शरीर अकड़ चुका था…कि एक तूफान के साथ जबारजस्ट भूकंप आया ऑर भाभी चेतना शुन्य हो गई….स्वर्ग में….उसकी चूत से पानी के फव्वारे छूट गये…जो ससुर जी के लंड पर बोछार करने लगे….आख़िर इतनी गर्मी को ससुर जी भी कब तक बर्दास्त कर सकते थे…उनके लंड ने दो चार ज़ोर दार झटके दिए ऑर बहू की चूत में ज़ोर दार पिचकारी छोड़ दी…उनका गरम गरम वीर्य सीधे बहू की बच्चेदानि में घुस गया ऑर बहू ससुर जी से ऑर ज़ोर से लिपट गई…दोनो ससुर बहू ना जाने कितनी देर तक यूँ ही लिपटे रहे…..

उस रात में ससुर बहू ने चार बार कई स्टाइल मे चुदाई की…ऑर ये चुदाई का सिलसिला सुबह होने तक चला….आख़िर दोनो सुबह को थक कर सो गये…

दोनो ससुर बहू लभाग 10 बजे सोकर उठे….बहू का पूरा शरीर अकड़ रहा था…ऑर चूत का भी बुरा हाल था….वे नंगे ही उठकर बाथरूम में गये….बहू से ठीक प्रकार से चला तो नहीं जा रहा था…उसकी चूत फट कर सूज गयी थी….बहू ने ससुर जी का लटकत हुआ लंड गौर से देखा ऑर सोचने लगी कि ये लंड उसकी चूत में कैसे समाया होगा….लंड अब खड़ा तो नहीं था…पर घोड़े के लंबे मोटे लंड की तरह से ससुर जी के घुटनो तक लटक रहा था….ऑर चलते हुए…इधर उधर लग रहा था….भाभी की फटी ऑर सूजी हुई चूत फिर से गीली हो गयी…वो खुद हैरान थी कि क्या वास्तव में ही उसकी चूत ने इस लंड को ही रात में पाँच बार अपनी चूत में घुस्वाया है….मगर शक की कोई गुंजाइश नहीं थी…अब तो भाभी ससुर जी से पूरी तरह से खुल गयी थी…..

भाभी…पिताजी…देखो तो आपने हमारी चूत का क्या हाल कर दिया है….

ससुर…देखुतो बेटी…ऑर ससुर बहू के परों के बीच बैठ गये…ऑर बहू की चूत को देखने लगे….पर एक बात है बेटी….कि तुम्हारी चूत बड़ी सुंदर ऑर मज़ेदार है….मज़ा आ गया चुदाई का……फिर हाथ से बहू की चूत को टटोलते हुए….अरे ये तो अभी भी गीली हो रही है….

भाभी…ये आपका जो लंड है….ये इसी का कमाल है….

ससुर ने बहू की टाँगो के बीच मुँह देकर एक बार बहू की चूत पर जीभ फेर दी…जिससे बहू की मीठी…..उूउउम्म्म्मममाआअहह की सिसकारी निकल गयी….

भाभी…आप बड़े ही खराब है पिताजी…क्या पूरी रात में हमारी चूत का भोसड़ा बनाकर भी आपका मन नहीं भरा है….

ससुर…सच तो ये है बेटी….कि भला इतनी सुंदर फूली हुई चूत से कभी मन भरता है….अब तक ससुर जी के लंड में कुछ हरकत हो चुकी थी….देखो ना इसे ये मान ही नहीं रहा….फिर से इस गुलाबी छेद में जाने की ज़िद करने लगा है……

भाभी…भी तो शायद यही चाह रही थी…मुस्कुरा कर बोली…तो मना किसने किया है पिताजी…आज आप इसकी पूरी प्यास भुझा ही दो…..

इस पर ससुर जी ने भाभी को बाहों में भर लिया….ओर बहू को लेजा कर बेड पर लिटा दिया…ऑर बहू के ऊपर आ गये….

ससुर बहू की ये चुदाई मस्ती के आलम में लगभग एक घंटा तक चली…बहू ने इस बीच कई बार पानी छोड़ा…..ऑर ससुर जी ने बहू की चूत के अंतिम छोर पर बच्चे दानी के मुँह पर ठोकर मारते हुए….उसे भी मुँह खोलने के लिए मजबूर कर दिया…ऑर अपने लंड की पिचकारी की धार सीधी ही बच्चेदानि में छोड़ दी….क्या चुदाई थी…आआआअहह……उूुुुुुउउम्म्म्ममम…….उूुउउईईईईईआआऐईएईईइ….ईईईईईीीइसस्स्स्स्स्स्स्स्स्सल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल ऊऊहह की धूम पूरे कमरे में गूँज रही थी…ऑर लगभग एक अवर के बाद दोनो शांत हुए….

 
उसके बाद दोनो ने एक दूसरे को नहलाया ऑर कपड़े बदले….

फिर भाभी ने किचन में जाकर किचन संभाल लिया….ऑर ससुर जी अख़बार की में हेडलाइन पढ़ने लगे…..

तभी…भाभी के पति ऑर सासू माँ वापिस लौट आए….उन्होने आने में जल्दी इसलिए की थी….कि जब वे लोग गये थे तो भाभी की तबीयत खराब थी…..घर पहुँचते ही सासू माँ ने किचन में जाकर बहू से पूछा….अब कैसी तबीयत है बेटी….

भाभी…जी अब तो बिल्कुल ठीक हो गयी है…बस थोड़ी..थोड़ी..दुखन है….

सासू माँ …हाँ बेटी इतने दर्द के बाद दुखन तो होगी ही….जाओ तुम आराम करो…में किचन देख लूँगी….ऑर भाभी अपने रूम में आ गयी…जहाँ पर उसके पति थे…..

पति…अब कैसी तबीयत है..तुम्हारी….

भाभी…अब तो ठीक है बस थोड़ी चलने में दुखन होती है…आपके जाने के बाद पिताजी ने बड़ी सेवा की तो ये दर्द ठीक हो सका….

पति…ठीक है…तुम आराम करो….में डॉक्टेर से दवा ले आता हूँ….

भाभी…पर अब तो ज़रूरत नहीं है…

पति…में दुखन बता कर दवाई ले आता हूँ…ऑर वे बाहर निकल गये…बहू अपने प्लांग पर लेट गई….ऑर धीरे से मुस्कुरा दी…..

उस महीने भाभी को म्सी (पीरियड) नहीं हुआ…जब इसकी जानकारी…सासू माँ ऑर उसके पति को चली तो वे खुशी से फूले नहीं समाए… ऑर घर में सभी खुश हुए…बस उसके बाद भाभी का पूरा ध्यान रखा जाने लगा….पर ये किसको पता था…कि जो बच्चा उसके …गर्भ में पल रहा है….वो उसके ससुर जी की निशानी है………कुछ महीनो बाद भाभी ने एक बेटे को जन्म दिया….पूरे गाओं में मिठाइयाँ बांटी गयी…..ऑर उसका नामकारण शशांक शेखर के रूप में हुआ….जो आज शास बन चुका है…….

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

भाभी….मुस्कुराते हुए अपने वर्तमान में लौट आई…उसे क्या मालूम था…कि उसके बेटे का लंड भी उसके ससुर की तरह से ही होगा…..जिसकी आज जवान लड़कियाँ दीवानी हो रही है….संतोष ऑर कुसुम उसके लंड को पाने के लिए…इतनी प्लानिंग कर रही है….सोचते सोचते भाभी की चूत भी गीली हो गयी……..शायद आज पहली बार भाभी ने अपने बेटे के लंड के बारे में सोचा था…ना जाने क्यूँ भाभी के मन में….शास के लंड को एक बार देखने की इच्छा बढ़ गयी थी….कि आख़िर उसका लंड ऐसा कितना बड़ा है जो संतोष दीदी उसके लंड की इतनी तारीफ कर रही थी….कहीं…उसका लंड इस छोटी सी उम्र में अपने दादा के लंड जैसा भयंकर लंड तो नहीं बन चुका है…..ये सोचते सोचते भाभी की चूत बिल्कुल गीली हो गई थी…जिसको उन्होने बाथरूम में जाकर शांत किया…….

भाभी ने बाथरूम में अपनी चूत को कुछ हद तक शांत तो कर लिया था…पर उसके दिमाग़ में रह रह कर अपने ससुर का लंड (जो अब इस दुनियाँ में नहीं थे) आ रहा था…ऑर उनके लंड से शास के लंड की तुलना कर रही थी….पर अभी तक शास का लंड नहीं देखा था….यही कसक उसकी उलझन बन गयी थी…उसके मन में शास के लंड को देखने की चाह लगातार बढ़ती ही जा रही थी…बार बार सोचती…छी…वो तेरा बेटा है…उसके बारे में ऐसी ग़लत बात सोचना भी पाप है…अपने मन को समझाती….पर कुछ ही देर में मानो शास का लंड उसके सामने झूलने लगता…जिसमे उसके ससुर का लंड उनके घुटनो तक झूल रहा था….फिर अपने पे लानत भेजती…कि वो कितनी गिर गयी है जो अपने ही बेटे के बारे में ऐसा सोच रही है….पर वाह रे मन …जितना शास के लंड को दिमाग़ से निकालने की कोशिस करती…वो उतना ही ज़्यादा उसके जेहन में ऑर अंदर तक चला जाता था….चूत का पानी निकालने के बावजूद उसकी चूत फिर से पानी छोड़ने लगती थी…..

दोपहर को जब उसके पति ऑर शास खेत में काम करके वापस लोटे…तब तक भाभी ने खाना तैयार कर दिया था…

भाभी…आज खेत में बहुत देर कर दी…

पति….हाँ कुछ काम ज़्यादा था…अगर शास साथ ना होता तो मुझ से तो आज शाम तक भी काम निपट नहीं पाता….

भाभी…चलो आप जल्दी से नहा लो….में शास को नहला देती हूँ…कपड़ो ऑर शरीर पर काफ़ी मिट्टी लगी है…फिर खाना खा लेंगे….

पति…ठीक है…शास को जल्दी से नहला दो…में भी जल्दी से नहा कर आता हूँ…भूख भी काफ़ी लगी है….

भाभी…शास बेटा चलो आज तुम्हे में नहला देती हूँ…शरीर पर काफ़ी मिट्टी लगी है….फिर देर भी काफ़ी हो चुकी है…भूख लगी होगी….

शास…आप खाना लगाओ…में जल्दी से खुद नहा कर आता हूँ…..

भाभी…खाना तैयार है…तुम्हारे शरीर पर मिट्टी काफ़ी लगी है…चलो में ही नहला देती हूँ…..ऑर शास का हाथ पकड़ कर बाथरूम में ले गयी….भाभी ने जल्दी जल्दी…शास के बाकी कपड़े उतार दिए….बस अब उसके शरीर पर एक अंडरवेर ही रह गया था….भाभी ने शास को सामने पटरी पर बैठ जाने को कहा….

शास आपनी मम्मी के सामने पटरी पर बैठ गया…ऑर भाभी उसके शरीर पर पानी डालने लगी थी…

भाभी…शास आज तुम्हारी संतोष बुआ आई थी…उनके घर में उसकी फुफेरी बेहन ऑर वो ही है बाकी सब कहीं बाहर गये है…रात में तुम्हे अपने यहाँ सोने के लिए कह रही थी….क्या कहूँ….

शास…संतोष बुआ का नाम सुनते ही उसके चेहरे के भाव बदलने लगे…ऑर वो खूबसूरत लड़की जो उसने सुबह देखी थी…दिमाग़ में घूम गई…ऑर शास के लंड ने तुरंत हरकत की….ठीक हैं मम्मी में सो जाउन्गा…..

भाभी…बड़ी जल्दी तैयार हो गया…क्या बात है शास….

शास…कुछ नहीं मम्मी…आपने कहा इसलिए…पर शास कुछ झेप सा गया…..

भाभी…नहीं यदि तुम कहो तो में मना कर दूँगी….

शास…क्यों मना करती हो मम्मी…जब उनके घर कोई नहीं है तो…हमें हेल्प तो करनी ही चाहिए ना….

भाभी…हाँ.. ये तो हैं…पर भाभी शास के लंड में होने वाली हरकत को नज़रे छिपाकर देख रही थी….जैसे ही भाभी ने शास के ऊपर ऑर पानी डाला तो शास का लंड गीली कपड़े से सॉफ नज़र आ रहा था…भाभी को लगा कि शास का लंड उसके ससुर के लंड से बिल्कुल भी कम नहीं है…जब उसका लंड इस उम्र में इतना बड़ा ऑर मोटा है तो अपनी जवानी के दिनो में तो ये ऑर काफ़ी बड़ा हो जाएगा…..उसके मुँह से आआआअहह निकल गये……ऑर चूत पानी छोड़ने लगी थी…

 
शास…क्या हुआ मम्मी…

भाभी…कुछ नहीं बेटे…बस हाथ में कभी कभी दर्द हो जाता है…बस उसी वजह से….भाभी ने साबुन उठाया ऑर शास के पूरे शरीर पर साबुन लगाने लगी…जब वो आगे को होकर शास की कमर पर साबुन लगा रही थी…तो उसकी चुचि का निप्पल शास के मुँह से टच हो गया…शास को ये संतोष बुआ के चुचि के निप्पल की तरह से लगा ऑर उसके लंड ने एक ऑर सलामी दे दी….जिससे वो ऊपर को उभर आया…..ऑर ओर सॉफ दिखाई देने लगा….

भाभी ने शास के सिर…मुँह ऑर छाती पर भी साबुन लगाया….इसी दौरान उनका हाथ शास के लंड को टच कर गया…भाभी के शरीर में शिहरन सी दौड़ गयी…ऑर शास के लंड ने फिर से एक सलामी मार दी…वो खुद भी घबरा रहा था…कि कहीं मम्मी ने देख तो नही लिया पर लंड क्या उसके काबू में था…

भाभी शास के सारे शरीर पर साबुन लगाने के बाद उसे मलने लगी थी….भाभी के हाथों के स्पर्श ऑर संतोष बुआ के घर पर आई लड़की की कल्पना से शास के शरीर में भी कुछ होने लगा था…आख़िर वो अब जवान होने की ओर कदम बढ़ा रहा था…अचानक भाभी का हाथ शास के पेट से फिसल कर सीधा शास के खड़े हो रहे लंड पर जा टकराया…..

आआहह….अचानक शास के मुँह से निकला…

भाभी…क्या हुआ बेटे….ऑर अबकी बार भाभी ने शास के लंड पर धीरे से हाथ रख कर कहा…ये क्या पाल रखा है बेटे ऑर आपनी मम्मी के सामने ही ऐसे क्यूँ खड़ा कर रखा है…..

शास…वो…..वउूओ….वववूऊ…मम्मी….ऑर शर्म से शास ने सिर नीचे कर लिया…..

भाभी…में जानती हूँ बेटे…तुम्हारी उम्र में ऐसा अक्सर हो जाता है…आदमी का अपनी इस बात पर भाभी ने फिर से शास के लंड को छू दिया…नियंत्रण नहीं रहता है….पर ये तो कुछ ज़्यादा ही बड़ा लग रहा है….भाभी अनजाने में ही बोलती चली गयी….

शास…झेंप गया पर शर्म के कारण ….. मम्मी…..बस इतना ही बोल पाया….

भाभी….हाँ बेटा…में सच कह रही हूँ…पर तुम ऐसे ठीक तरह से सॉफ भी रखते हो या नहीं….भाभी का दिमाग़ बस अब एक कंप्यूटर की तरह से चल रहा था….ससुर की डेथ के बाद से उसे इतना भारी-भरकम लंड नसीब नहीं हुआ था….

शास…जी मम्मी…..

भाभी…क्या जी मम्मी…इसकी सफाई भी करते हो या नहीं…

शास…करता हूँ मम्मी…ऑर सिर नीचे ही झुकाए रहा….उसे अपने इस खड़े हुए लंड को देखकर जो अंडरवेर के कपड़े से सॉफ नज़र आ रहा था..को देखकर खुद शर्म आ रही थी…पर उस पर अब उसका नियंत्रण बिल्कुल भी नहीं था…वो ये तो जानता ही था…कि उसकी मम्मी आज की जवान लड़कियों से ज़्यादा सुंदर ऑर गठीले बदन की औरत है…कई बार उसने मम्मी की ठोस भारी भारी चुचियाँ देखी थी…उसका लंड उस समय भी खड़ा हुआ था…पर खुद पर जलालट भेजते हुए उसने उसे काबू में कर लिया था….पर आज जब उसकी मम्मी ने उसके लंड को छू दिया तो अब तो उसके नियंत्रण से पूरी तरह से आज़ाद था…..

भाभी…शास क्या में देख लूं कि तुम कैसी सफाई रखते हो..

शास….एक दम घबराकर….नहीं मम्मी…में सॉफ रखता हूँ..भला आप कैसे देख सकती है…आख़िर आप मेरी मम्मी है….

भाभी…तो क्या हुआ…मेने तो तुम्हे जनम दिया है ऑर अभी तक तुम्हे नंगा ही देखा है…फिर मुझ से कैसी शरम…

शास…नहीं मम्मी मुझे शरम आती है….

भाभी…ओह तो तुम अब बड़े हो गये इसलिए अपनी माँ से शरम करते हो…

शास…नहीं मम्मी ये बात नहीं…कही मम्मी के सामने भी कोई नंगा हो सकता है….

भाभी…अभी कुछ सालों पहले तो तुम नंगे ही घूमते थे…

शास…तब की बात ऑर थी…पर अब में….

भाभी…हा हा में भी तो वही कह रही थी कि अब तुम जवान हो चुके हो ऑर तुम्हारा ये बेड़ा हो चुका है…हैं ना यही बात….

भाभी…अरे बेटे मम्मी से शर्म ऑर भुआ से शर्म नहीं…उनके साथ….

शास…चौंक कर….क्या मम्मी आप भी….शास अब सोच रहा था. कि क्या मम्मी को पता चल गया है या फिर बेहम के आधार पर ही कह रही है…..

भाभी…हाँ बेटे में तो तुम्हारी मम्मी हूँ बुआ के साथ कुछ करने में शर्म नहीं आती क्या…..

शास…मेने क्या किया है,,,,मम्मी….

भाभी….वो जो तुमने खेत में किया था….वो सब….

शास…आपको किसने बताया मम्मी….सब झूठ है….मेने तो कुछ भी नहीं किया….

भाभी…तो फिर ठीक है…जब वो झूठ बोलती हैं तो में तुम्हे रात में उनके घर नहीं जाने दूँगी…तुम्हारे पापा से मना कर दूँगी….

शास…नहीं मम्मी…प्लीज़…पापा से मत कहना…

भाभी…नहीं..नहीं..में तो नहीं भेजूँगी…वो फिर कुछ झूठ बोलने लगी तो फिर क्या होगा….

शास…कुछ नीरस होकर…वो मम्मी…प्लीज़ आज जाने देना ना…में आप से कुछ नहीं छुपाउंगा…..सब सच सच बता दूँगा….

भाभी…..इसको भी नहीं छुपाएगा….मम्मी ने शास के लंड को हाथ में पकड़ कर कहा…. आज ना जाने भाभी को क्या हो गया था…वो तो बस आज सारी मर्यादाए…..भूल चुकी थी…सुबह से ही उसकी चूत में आग लगी थी…दिन भर पानी छोड़ छोड़ कर उसकी चूत का बुरा हाल था….भाभी ने शास के लंबे…मोटे लंड को आराम से पकड़े रखते हुए कहा…..

शास…भला मम्मी…में आप को कैसे दिखाऊ…आप के सामने मुझे शर्म आती है….

भाभी…पर शास…अब कैसी शरम…अब तो में सब कुछ जान ही चुकी हूँ…फिर तुम्हारा ये तो मेरे हाथ में अभी भी है…ऑर तुम्हे…मम्मी के सामने इसे बल्ली की तरह से खड़ा करते हुए तो शर्म आई नहीं थी….

शास…वो तो अपने आप ही खड़ा हो गया था… मेने थोड़ा ही खड़ा किया था….

भाभी…तो ये अब अपने आप ही अपनी मम्मी को देखकर खड़ा होने लगता है…

शास…ये बात नहीं…मम्मी…बस ये तो….

भाभी…बस ये तो…ये क्या हुआ…सच सच कहो ना कि मम्मी को देखार खड़ा हो जाता है…

शास…नहीं मम्मी आपको देखकर नहीं…

भाभी…तो क्या तुम्हारी मम्मी इतनी बुरी है….शास…..

शास…नहीं..नहीं..मम्मी आप तो लाखों में एक हो…ये सारी लड़कियाँ तुम्हारे सामने तो कुछ भी नहीं….पर आप तो मेरी मम्मी हो ना…आपके बारे में में ऐसा कैसे सोच सकता हूँ….

भाभी…फिर ये मुझे देखकर क्यूँ खड़ा हो जाता है….

शास…कैसे बताऊ मम्मी आप नाराज़ हो ज्जाएँगी…..

भाभी…नहीं हूँगी नाराज़…बताओ….क्या बात है….

शास…वो मम्मी…आअप्प्प्प आअप्प्प आअप्प्प्प

भाभी…क्या आप आप लगा रखी है……

शास…मम्मी वो आप बहुत …………सेक्सी है ना…..

भाभी…क्या…??????? तुम्हे में सेक्सी लगती हूँ…

शास…हाँ मम्मी…आप बहुत सेक्सी हैं…मेने कहा था ना कि आप नाराज़ हो जाएँगी…..

भाभी…नहीं नहीं में नाराज़ तो नहीं हूँ…पर मुझ में सेक्सी क्या है….में तो वैसे ही बूढ़ी हो चुकी हूँ…..

शास…ये क्या कह रही हो मम्मी…आप जवान लड़कियों से ज़्यादा सेक्सी हैं…अगर एक तरफ एक सुन्दर जवान लड़की हो और दूसरी तरफ आप हो ….तो कोई भी आपको ही पसंद करेगा….आपकी फिगर….की तो बात ही कुछ ऑर है….

भाभी…क्या बोलता जा रहा है…ऐसा क्या है मुझ में……

शास…सच सच बताऊ मम्मी आपकी चुचियाँ ऑर आपके चुतड़ों (चूतड़) ऑर आपका भरा भरा बदन किसी को भी…उत्तेजित कर सकता है…किसी का भी ये खड़ा हो सकता है….फिर मेरी क्या ग़लती है….मम्मी….

भाभी…किसी का भी ये….ये क्या….

शास…यही मम्मी जो आपके हाथ में उछल रहा है….

भाभी…क्या इसका कोई नाम नहीं है…जो ये ये कर रहा है….

शास…नाम तो है…पर मुझे शर्म आती है…..

भाभी…एक तरफ तो अपनी मम्मी को सेक्सी…भारी भारी चुचियों ऑर चूतड़ वाली बता रहा है ऑर दूसरी तरफ़ तुम्हे शर्म भी आ रही है….ऑर इसको खड़ा भी कर रखा है……

शास…मम्मी वो आपकी सुंदरता, आपका गठीला भरा हुआ बदन..आपकी मस्त चुचियों ऑर मस्त चुतड़ों को देखकर किसका खड़ा नहीं होगा….आपके गदराए बदन को देखकर तो बूढ़े का भी खड़ा हो जाए…उसका भी झटके खाने लगे….

भाभी…अच्छा..अच्छा..बस मस्का लगाना छोड़…अगर में तुम्हे इतनी सुंदर दिखती थी…तो पहले कभी क्यूँ नहीं कहा…..

शास…डर लगता था…मम्मी इसलिए नहीं कह सका….

 
Back
Top