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चुदासी माँ और गान्डू भाई

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मेरी बात सुनकर अजय के शरीर में एक बार ऐंठन हुई और दूसरे ही पल उसके लण्ड से गरम मूत मेरे मुँह में बहने लगा। मैंने उसका लण्ड जड़ तक अपने हलक में ले लिया और भाई का मूत्रपान मस्त होकर करने लगा। कुछ ही देर में उसके लण्ड से मूत्र की धार निकलनी बंद हो गई, पर मैंने लण्ड को मुँह से बाहर नहीं निकाला। अगले ही पल भलभला कर उसका लण्ड मेरे मुँह में झड़ने लगा। भाई का गाढ़ा वीर्य मेरे मुँह को भर रहा था। कुछ वीर्य तो मैं गटक रहा था और कुछ उसके खड़े लण्ड में लपेटकर लण्ड को तेजी से मेरे मुँह में बाहर-भीतर कर रहा था।

फिर हम दोनों भाई शावर के नीचे खड़े हो गये और मैंने शावर वापस चालू कर दिया। हम दोनों नंगे भाई ठंडे पानी से काफी देर तक नहाते रहे। तभी मैंने शावर बंद कर दिया। हम दोनों के नंगे जिश्म से पानी टपक रहा था। फिर एक बड़े तौलिया से हम दोनों ने एक साथ अपने भीगे जिश्म पोंछे। बड़े तौलिया को दोनों के शरीर पर एक साथ लपेटकर आपस में टकराते हुए हमने अपने शरीर अच्छी तरह पोंछ लिए। फिर मैं कमरे में आ गया और अपनी नाइट ड्रेस पहन ली और बिस्तर पर लेट गया। अजय भी नाइट ड्रेस चेंज करके चुपचाप रोज की तरह मेरे साथ एक ही बिस्तर पर सो गया। आज मैं अपने भाई को तृप्त करके खुद एक अवर्णनीय तृप्ति महसूस कर रहा था और उसी की कल्पना में मुझे नींद आ गई।

आज मैं घर कुछ जल्दी आ गया। माँ किचेन में खाना बनाने का काम कर रही थी। मैं अपने रूम में आ गया और फ्रेश हो

पुंज करके वापस टीवी के सामने बैठ गया। थोड़ी देर में माँ भी किचेन का काम खतम करके मेरे पास आकर बैठ गई।

मैं- “क्यों माँ, मुन्ना के आ जाने से अब तुझे नींद नहीं आ रही होगी। कैसे काम चलाती हो? रात भर बिस्तर पर पड़ी इधर से उधर करवट बदलती रहती होगी और अपनी चूत में अंगुली पेलती रहती होगी। तेरे से ज्यादा तो तेरी चूत की चिंता अब मुझे है। ऐसा करना की आज तुम वापस सज-धज कर पूरे दुल्हन वाले रूप में आना। देखना मुन्ना तुम्हें जब इस रूप में देखेगा तो हक्का बक्का हो जाएगा। वैसे भी दुल्हन के रूप में तो तू कयामत ढाती हो। याद है ना तेरी पहली बार तो मैंने दुल्हन वाले रूप में ही ली थी। कैसे मैंने तेरे एक-एक करके कपड़े उतारे थे और तुझे पूरी नंगी करके तेरी क्या जबरदस्त चुदाई की थी...



माँ- “चल बेशर्म कहीं का। जब तक अजय यहाँ है, ऐसी बातें बिल्कुल नहीं। अजय को थोड़ी भी भनक नहीं लगनी चाहिए..."

मैं- “तुझे बताया तो था की अजय की तुम बिल्कुल चिंता मत करो। अजय तो अपने भैया का तेरे से भी ज्यादा दीवाना है। वो तो मेरी खुशी के लिए हरदम तैयार रहता है। तुझे मालूम है? मेरा पक्का लौंडा है वो...” यह बात मैंने माँ की आँखों में झाँक कर कही।

राधा- “तो क्या तूने यह भी शुरू कर रखा है? तभी अजय आजकल गहरी-गहरी बातें करता है। कल मुझे अपने भैया की दुल्हन बनाने के लिए कितना जोर लगा रहा था? मैं तो इसे उसकी नादानी समझ रही थी, अब पता चला की वो नाटक तुम दोनों की मिलीभगत का नतीजा था। क्या सचमुच में तुम अजय के साथ लौंडेबाजी करते हो? कहाँ तो मेरा भोला सा सीधा साधा छोटा बेटा और कहाँ तुम एक नंबर का चालू। तो तूने अपने चिकने भाई को भी नहीं छोड़ा? यह तो मुझे शक था की गाँव में उसकी संगत कुछ लौंडेबाज किस्म के मर्दो से थी, पर तेरे साथ वो इस हद तक खुल जाएगा, विश्वाश नहीं होता। तेरी तो वो भगवान जैसी इज़्ज़त करता है। जरूर तूने उसके साथ जबरदस्ती की होगी और शर्म के कारण अजय कुछ बोलता नहीं होगा। बेचारा मेरा मासूम बेटा... वो तेरा गधे सा मूसल कैसे झेलता होगा? बहुत ही शर्मीले किस्म का लड़का है ना, तेरे काम निपटाने तक चुपचाप पड़ा रहता होगा बेचारा...”

मैं- “अरे माँ ऐसी बात बिल्कुल नहीं है। जानती हो अजय एक नंबर का गान्डू है। तुझे चुदवाने का शायद जितना शौक नहीं होगा, उससे ज्यादा शौक उसे गाण्ड मरवाने का है। मैं तो एक दिन सोया हुआ था तभी उसने मेरे लण्ड से अपनी गाण्ड भिड़ा दी और मेरे लण्ड पर अपनी गाण्ड दबाने लगा। एक तो मुन्ना एकदम मक्खन सा चिकना है, लड़कियों जैसा कमसिन है, औरतों जैसी मस्त भरी और फूली हुई गाण्ड है और ऊपर से गाण्ड मरवाने का पक्का शौकीन है। अब तू ही बता ऐसा मस्त लौंडा जब खुद अपनी गाण्ड मेरे लण्ड पर दबाए तो मैं क्या ब्रह्मचारी बना रह सकता था? मैंने तो तेरी मस्त जवानी देखकर तुझे नहीं छोड़ा और आखीर में तुझे अपने साथ सुला ही लिया। फिर अजय तो मेरे साथ सोता ही है, उसे कैसे छोड़ देता? लेकिन मुन्ना भी ठीक तुम्हारी तरह मस्ती लेने का पूरा शौकीन है, भैया से खुलकर मजा लेता है और भैया को भी पूरा मजा करवाता है...”

राधा- “अभी तो तू कह रहा था की तुम्हें मेरे से ज्यादा मेरी चूत की चिंता है। मेरी फिकर लगी हुई थी की मैं एक बार तेरा लण्ड लेने के बाद अब रात कैसे काटती होऊँगी। पर तेरे लण्ड को तो छोटे भाई की गुदाज गाण्ड मारने को मिल रही है। तुझे मेरी चूत की कहाँ फिकर है? वो तो अपने भाई की गाण्ड के आगे तुझे याद भी नहीं आती होगी। तो तुम दोनों भाइयों की यह रासलीला कब से चल रही है?”

विजय- “देखो माँ इस मामले में तो मुन्ना ने तुमसे बाजी मार ली। तुम तो इतनी मस्तानी चूत और गाण्ड लेकर अंगुली करती ही रह गई थी। यह तो भला हो की मैंने ही अपनी तरफ से कोशिश की की माँ को भी मुन्ना की तरह बड़े से लण्ड की जरूरत है और जब मेरे पास यह है तो क्यों ना माँ को दे दिया जाय? तेरी खुशी के लिए मुझे अपना लण्ड देने में भी कितने पापड़ बेलने पड़े, तब कहीं जाकर मैं तुझे अपना लण्ड दे पाया। वहीं मुन्ना ने तो खुद मेरे लण्ड को अपनी गाण्ड का रास्ता दिखा दिया और बेचारे लण्ड का क्या दोष? उसे तो बिल दिखेगा तो वो तो उसमें जाएगा ही...”

राधा- “तो आज वापस मुझे दुल्हन के रूप में अपने कमरे में बुलाकर तुम दोनों भाई एक साथ मेरे साथ सुहागरात मनाओगे? तो क्या तूने अजय को अपने बीच की सारी बातें बता दी?”

 
मैं- “नहीं माँ तेरी मेरी पर्सनल चुदाई के बारे में मैंने मुन्ना को कुछ भी नहीं बताया है और ना ही आगे बताऊँगा। तू भी उसे मत बताना। उसके सामने हम दोनों इस तरह पेश आएंगे की जैसे सब कुछ पहली बार हो। रहा है। इसमें वापस नये के जैसा मजा आएगा। दूसरी बात मुन्ना और मेरे बीच अब कोई पर्दा नहीं रहा है।

मुन्ना को मैं बहुत प्यार करता हूँ और मुन्ना भी मेरी उतनी ही इज़्ज़त करता है। यह समझ लो की हम दोनों । भाई दो जिश्म एक जान हैं। जो कुछ भी मेरा है वो सब मुन्ना का है। इसलिए मुन्ना के बारे में बिल्कुल भी मत सोचो और हम दोनों भाइयों को अपनी मस्त जवानी का खुलकर मजा दो। एक बात तुझे और बताता हूँ की । मुन्ना को यह गान्डूपने का शौक गाँव से लगा हुआ है। वैसे तो मुन्ना मेरी ही तरह एक पूरा मर्द है, मस्ताना लण्ड है, जोश है, जवानी है पर अभी तक उसने औरत की चूत का स्वाद नहीं चखा है और गाँव में ना कभी इसे चखने की उसके मन में आई। उसे चूत का मजा देना जरूरी है, नहीं तो कई गान्डुओं को खाली गाण्ड मरवाने में ही मजा आता है और औरत की चूत देखते ही उनका लण्ड मुरझा जाता है। आगे शादी व्याह करके उसका घर भी तो बसाना है..”

तभी घर की घंटी बज उठी। माँ ने उठकर दरवाजा खोला तो अजय था।

माँ- “विजय बेटा तो आज जल्दी ही घर आ गया था, तेरा कब से खाने के लिए इंतजार हो रहा है। चल तू भी। तैयार हो जा, मैं दोनों भाइयों का खाना लगाती हूँ.." यह कहकर माँ किचेन में चली गई और अजय मेरे रूम में।

थोड़ी देर में हम तीनों खाने की टेबल पर थे। तीनों ने रोज की तरह हँसी मजाक और बातों में खाना खाया। खाना खतम होने पर माँ अपने कमरे में चली गई और हम दोनों भाई टीवी के सामने बैठे रहे। थोड़ी देर बाद माँ ने कहा की वो नहाने जा रही है। हम दोनों भाई भी अपने कमरे में आ गये। मैं भी शावर लेने बाथरूम में चला गया। मैं काफी देर बाद बाथरूम से निकला तो अजय बिस्तर पर लेट हुआ था। मैं भी बिस्तर पर आकर बैठ गया। हम दोनों भाई इधर-उधर की बातों में खो गये।

करीब 45 मिनिट यूँ ही बीत जाने के बाद 10:30 बजे के करीब माँ हमारे कमरे में आई। माँ की आज की सजधज देखने लायक थी। वही शादी का जोड़ा, सिर पर चुनर, माथे पर बिंदिया, गले में सोने का हार, हाथों में । कंगन और साथ ही दुल्हन वाली नजाकत और शर्म। अजय एकटक माँ को देखे जा रहा था। माँ धीरे-धीरे चलती हुई आकर हमारे साथ बिस्तर पर बैठ गई।

राधा- “लो पंडितजी महाराज दुल्हन भी तैयार होकर शादी का जोड़ा पहनकर आ गई। चलिए ‘चट मॅगनी पट व्याह' वाला काम शुरू कीजिए..” माँ ने अजय की तरफ देखते हुए हँसते हुए कहा।

अजय- “माँ, तू तो सचमुच में मेरी भाभी बनने के लिए दुल्हन बनकर तैयार होकर आ गई। हाँ, भैया जैसा दूल्हा बड़े नशीब वालियों को मिलता है। कहीं लड़के वालों का इरादा ना बदल जाय तो तुझे तो जल्दी दिखानी ही थी।

क्यों भैया, आपसे ज्यादा तो आपकी दुल्हन को जल्दी है, तैयार हैं ना?” अजय ने मेरी ओर देखते हुए कहा।

मैं- “ऐसी मस्त और सुंदर दुल्हन को देखकर कोई फूटे नशीब वाला ही ना कर सकता है। मैंने तो कल ही कह दिया था की तुम्हारी पसंद मेरी पसंद है। आगे अब तुम जानो और तुम्हारा काम...”

मेरी बात सुनकर अजय ने कुछ देर पंडितों जैसा मंत्र पढ़ने का नाटक किया और घोषणा कर दी की हम दोनों पति पत्नी बन गये।

अजय- “भाभी आप कितनी प्यारी लग रही हो। आप जैसी सुंदर पत्नी पाकर मेरे भैया की तो तकदीर खुल गई है। भाभी आप सज-धज के भैया के साथ सुहागरात मनाने तो आ गई हैं, पर मैं यहाँ से हिलने वाला नहीं। भाभी मैं तो रात भर यहीं बैठा-बैठा आपको देखता रहूँगा...” अजय माँ को बार-बार भाभी कहकर संबोधित कर रहा था

और छेड़ रहा था।

राधा- “तू यहाँ से क्यों हिलेगा? तू तो पहले ही मेरी सौत बनकर बैठा हुआ है। मैं तेरी सारी लीला गाँव से ही जानती हूँ। वहाँ हरदम लौंडेबाजों की संगत में रहता था। यहाँ भी जब ऐसे गबरू जवान भैया के साथ सोता है तो सुहागरात तो तूने बहुत पहले से ही मना ली होगी। चुद गया होगा अपने भैया से। आजकल भैया का तो तू । खासमखाश बना हुआ है। भैया की हर बात में हाँ में हाँ मिलाते रहता है। साथ में तेरा सैंया भैया भी तुझे ज्यादा ही हवा दे रहा है। मैं सब समझ रही हूँ। गाँव में तो तेरे मुँह से बोली तक नहीं निकलती थी। यहाँ तो तू ऐसे खिल गया है, जैसे लड़की शादी के कुछ दिनों बाद खिल जाती है। तुम मुझे कितना ही भाभी भाभी बोलो और देवर बनने की कोशिश करो, पर तू मेरी सौत है मेरी सौत। समझ रहे हो ना सौत का मतलब?” माँ ने सौत शब्द पर बार-बार जोर देकर कहा।

अजय जो इतनी देर से शेर बना हुआ था और माँ पर हाबी था, माँ की बात सुनकर उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई और वो बुरी तरह से झेंप गया। उसने शर्म से गर्दन झुका ली।

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साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
माँ ने जब अजय को सौत कहा तो वो बुरी तरह से शर्मा गया। वैसे अजय मेरे से पूरा खुला हुआ था। मुन्ना भी मेरे साथ-साथ माँ की बहती जवानी में डुबकी लगाने के लिए पूरा तैयार था और अपनी ओर से माँ को पटाने की पूरी कोशिश भी कर रहा था। पर जब उसे पता चला की उसका भैया से गाण्ड मरवाने का राज माँ पर खुल गया है तो माँ के सामने एक बार तो लाज आना लाजमी था। अजय बिस्तर पर नजरें गड़ाए चुपचाप बैठा हुआ था। तब मैंने ही स्थिति को वापस सामान्य बनाने की कोशिश की।

मैं- “माँ, मुन्ना को अपनी सौत मत समझो बल्कि मेरी जान कहो। जब मुन्ना को तूने अपनी सौत मान ही लिया है तो इसका मतलब तू मेरी रानी बन गई है। मुन्ना तो पहले से ही मेरा मस्त चिकना माल है लेकिन

तुम क्यों चिंता करती हो? तुझे तो मैं अपने दिल की रानी बनाकर रखूगा। मेरे सपनों की रानी तो तू पहले ही थी और अब मुन्ना को सौत कहकर तो तू मेरी व्याहता बीवी बन गई हो। तुझे तो खुश होना चाहिए की तुझे। देवर के रूप में मेरा इतना चहेता प्यारा भाई मिला है। मेरे और मुन्ना के बीच तो पहले से ही कोई पर्दा नहीं है,

और आगे तेरे और मेरे बीच भी कोई पर्दा नहीं रहने वाला है तो फिर हम तीनों आपस में कोई पर्दा क्यों रखें? चल मुन्ना खुश हो जा माँ ने तुझे सौत कहकर यह मान लिया है की अब से वो मेरी बीवी बन गई है। देखना,आज मैं तेरे सामने ही सुहागरात मनाऊँगा और तेरे सामने ही इसकी लँगा...”

मेरी बात सुनकर अजय विजयी भाव से माँ की तरफ देखकर मुश्कुरा उठा। और कहा- “माँ तूने भैया की बात सुनी? देख, भैया मुझे कितना प्यार करते हैं? पर भैया दिन रात तेरे ही नाम की माला जपते हैं, तुझ पर तो भैया मरते हैं। तुझे तो अपने दिल की रानी बनाकर रखेंगे। तेरी आज तक की सारी प्यास बुझा देंगे। तुझे पता नहीं की भैया मुझे कितना मजा देते हैं। तू एक बार भैया से मजा ले लेगी तो तू खुद उनकी दीवानी हो जाएगी। माँ, भैया का बहुत तगड़ा है, देखेगी तो पूरी मस्त हो जाएगी। सुना तूने, भैया ने क्या कहा? उन्होंने कहा की वे मेरे सामने तेरी लेंगे। समझ रही हो ना की भैया तेरी क्या लेंगे?”

राधा- “अच्छा तो अब तू मुझे समझाएगा की पति सुहागरात में अपनी पत्नी की क्या लेता है? तेरे को उसके बारे में क्या पता? तेरी उमर में आते-आते आजकल के छोकरे तो उसमें दसियों बार डुबकी लगा चुके होते हैं। पर तू तो मर्दो के सक्करकंदों का शौकीन है, उन्हें अपने पिछवाड़े में लेता है। मेरा बड़ा बेटा यहीं बोल-बोलकर तो मेरे सामने ही तुझे छेड़ रहा था, तो मैं क्या इन बातों का मतलब नहीं समझती? अब जब तू भी खुल गया है तो । तुझे समझाती हूँ की पति सुहागरात में पत्नी की क्या लेता है? हम औरतों की दोनों टाँगों के बीच एक पावरोटी के लोफ सा फूला हुआ अंग होता है, जिसके बीचो-बीच खूब गहरा सुराख होता है। हम लोगों का यह अंग कालेकाले रेशमी बालों से भरती रहता है। भीतर देखने से यह बिल्कुल सुर्ख लाल रंग का दिखाई पड़ता है। हम लोगों के इस अंग से कुदरती तौर पर गाढ़ा लसलसा रस निकलता रहता है, जिससे यह भीतर तक पूरा चिकना रहता है, तुम्हारी वाली की तरह इसमें वैसेलीन नहीं चुपड़नी पड़ती। हर जवान मर्द इसकी फिराक में रहता है, इसको पाने के लिए कुछ भी कर सकता है, इसको पाने के लिए जवान औरतों के हजारों नखरे सहता है। सुहागरात में पति पत्नी का यही मस्त अंग लेता है। तेरे भैया भी अगर मेरे साथ आज सुहागरात मनाएंगे तो मेरी इसी खाश चीज को लेंगे और मैं तेरे भैया को पूरी मस्त होकर आज इसका मजा चखऊँगी...”

अजय- “माँ, मैंने तो तुम्हें भैया की दुल्हन यह सोचकर बनाया था की तुम एक बहुत शर्मो-हया वाली और आचार विचार वाली औरत हो, पर तुम तो पक्की मर्दमार और बेशर्म औरत निकली। कम से कम इस सुहागरात की बेला में तो थोड़ी लाज शर्म रखती, दुल्हन की तरह शर्माती, नखरे दिखाती, कहती की मुझे क्या पता तेरे भैया क्या लेंगे? पर लगता है की तू तो अपनी चीज देने के लिए मरी जा रही है...”

 
यह कहकर अजय मेरी तरफ देखते हुए बोला- “भैया अब आपकी जोड़ी की सही लुगाई मिली है। आप खुद जितनी अश्लील खुली-खुली बातें करते हुए मस्ती लेते हैं, आपकी लुगाई उससे भी ज्यादा खुली-खुली गंदी बातें। करने की शौकीन है। आप माँ पर ऐसे ही लट्टू नहीं हुए। माँ बिल्कुल आपकी तबीयत की औरत है, आपको माँ के साथ बहुत मजा आएगा...”

मैं- “मैं माँ को अच्छी तरह से जानता हूँ। अपनी माँ बहुत रंगीन तबीयत की पूरी आशिक मिजाज की औरत है। मेरी ही तरह एक बार खुल जाती है तो झुठे नखरे बिल्कुल नहीं करती, मन में कुछ और और जुबान से कुछ। और नहीं बोलती, जो बात सच है उसे बिना लाग लपेट के खुलकर कहने की हिम्मत रखती है। फिर इस काम का मजा तो खूब खुलकर बात करते हुए बोल-बोलकर करने में ही है और यह बात भला माँ से ज्यादा कौन जानता है। तभी तो माँ पर मेरी तबीयत आई है। जब घर में ही ऐसी मस्त लुगाई मौजूद है तो मैं दुनिया भर में ऐसी दूसरी औरत कहाँ ढूँढ़ता फिरता? माँ जैसी मस्त खेली खाई औरत अपनी बनकर सैंया को जब बिल्कुल खुलकर बोल-बोलकर मस्ती कराती है तो उस मजे का क्या कहना?”

अजय- “माँ देखा, भैया तुम्हें कितना समझते हैं और प्यार करते हैं। भैया ने बहुत उम्मीद से तुझसे दिल लगाया है, उन्हें निराश मत करना। मैंने उसमें डुबकी नहीं लगाई तो क्या, पर मुझे पता है की भैया तेरी दोनों टाँगों के बीच वाली चीज ही मेरे सामने लेंगे और तुम जितनी खुलकर बात कर रही हो उतनी ही मस्त होकर अपनी चीज देना। भैया के लेने का मतलब ठीक से समझ रही हो ना, फिर नखरे मत करने लग जाना की तुझे लेने का मतलब नहीं समझ में आया..."

माँ- “मैंने बताया ना की हम औरतों की दोनों टाँगों के बीच गहरा छेद होता है वैसे ही तुम मर्दो की दोनों टाँगों के बीच एक लंबा सा मोटा इंडे जैसा अंग लटकता रहता है, अब यह मुझे नहीं पता की तुम्हारी टाँगों के बीच भी ऐसी कोई चीज लटक रही है या नहीं, क्योंकी तेरे लक्षण तो ऐसे नहीं है? जब मर्द औरत की लेता है तो अपना इंडा औरत के उस लाल छेद के अंदर डालता है, जैसे की भैया ने जब तुम्हारी मारी थी तो अपना वही इंडा तेरे पिछवाड़े के अंदर डाला था। मैंने बताया ना की हमारी वाली चीज तो नेचुरल रूप से ही चिकनी रहती है और पूरी गहरी होती है तो, किसी भी मर्द का चाहे जितना लंबा हो और मोटा हो वो देर सबेर उसमें पूरा चला ही जाता है। फिर मर्द जैसे लोकोमोटिव के एंजिन में पिस्टन आगे-पीछे होता है वैसे ही अपना इंडा हमारे छेद में आगेपीछे करते हैं। ऐसा करने में मर्दो को बहुत मजा आता है और वे पूरे जोश में भर जाते हैं। रेल की स्पीड की तरह उनका जोश बढ़ने लगता है और साथ-साथ उनके पिस्टन की भी हमारे छेद में स्पीड बढ़ जाती है। फिर जैसे स्टेशन आने से ट्रेन फुस्स्स करके रुक जाती है वैसे ही उनकी मंजिल आने से उनका जोश भी ठंडा पड़ जाता है और उनका फूला हुआ कड़ा डंडा मुरझाकर मरे हुए चूहे जैसा लटक जाता है। अब तुम्हारी समझ में बात आई की मर्द इसी तरह हम औरतों की लेते हैं। क्या भैया ने तेरा पिछवाड़ा भी इसी तरह लिया था?”

अजय- “माँ तुम तो अभी से सौतिया डाह से जलने लगी, जो बार-बार मेरा पिछवाड़ा मेरा पिछवाड़ा कर रही हो? तो क्या अपनी तंदूर सी फूली हुई गाण्ड भैया से बचा लोगी? ठीक है भैया तेरी आगे वाली तो लेंगे पर क्या तेरे पिछवाड़े का तबला बजाने से छोड़ देंगे, क्या तेरे पिछवाड़े में अपना हलब्बी 11” का मूसल ठोंके बिना रहेंगे। तू एक नम्बर की चुदक्कड़ है तो, आगे तो आराम से ले लेगी पर भैया जब तेरे पर सांड़ जैसे चढ़ेंगे और तेरे । पिछवाड़े में पेलेंगे तब देखना तेरी यही जुबान बाहर आ जाएगी, जिससे इस समय बड़ी-बड़ी बातें कर रही हो...”

राधा- “हम औरतों की चूत में इतनी ताकत होती है की किसी भी मर्द को पूरा झाड़ कर रख दे। जब तेरे भैया मेरी 15 साल से अनचुदी चूत का स्वाद लेंगे तो उन्हें मेरी गाण्ड की याद भी नहीं आएगी। पर अब तू अपनी सोच की तेरी लण्डखोर गाण्ड की खाज कौन मिटाएगा? क्योंकी तेरे भैया के लण्ड को तो मेरी चूत से ही फुर्सत नहीं मिलेगी। फिर तुझे कैसे पता की तेरे भैया मेरी गाण्ड भी मारेंगे?”

अजय- “माँ भैया की कोई भी बात और इच्छा मेरे से छिपी हुई नहीं है। भैया जो तुम पर इतना मरते हैं ना । उसका एक बड़ा कारण तेरी फूली-फूली मस्त गाण्ड है। भैया मेरे को हरदम कहते रहते थे की मुन्ना देख माँ की

गाण्ड कैसी मस्त और फूली-फूली है। मुन्ना, माँ जब झुक कर अपनी गाण्ड पीछे उभारती है तो उसे देखकर मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है और मेरा दिल करता है की माँ की ससड़ी उसकी कमर से ऊपर चढ़ा दें और उसके गोल गाण्ड के छेद में एक ही बार में पूरा लण्ड पेल दें। और सुनो, भैया कहते रहते थे की माँ जैसी मस्तानी गाण्ड

वाली औरत को तो पूरी नंगी करके अपनी गोद में बैठा लेना चाहिए और उसकी गाण्ड की गर्मी से खड़े लण्ड को सेंक देना चाहिए। भैया कहते हैं की माँ को जितना मजा चोदने में आएगा उससे ज्यादा मजा तो उसकी गाण्ड मारने में आएगा। माँ तेरी गाण्ड पर तो भैया लार टपकाते हैं और भैया का लण्ड भी लार छोड़ता है। जब तू घर में अपनी गाण्ड मटकाती हुई इधर से उधर फुदकती रहती हो ना तो भैया तुझे देख-देखकर आहें भरते हैं और कहते रहते हैं की ‘हाय मेरी राधा रानी एक बार तो ससड़ी ऊपर उठाकर अपनी गाण्ड दिखा दे। 'मेरी राधा जानू तूने तो मुझे अपनी गाण्ड का दीवाना बना दिया है। भैया मेरे से कहते रहते थे की मुन्ना मुझे एक बार माँ की गाण्ड दिलवा दे, तभी तो मैंने तुझे भैया की दुल्हन बनाने के लिए इतना जोर लगाया। तो माँ यह खयाल तुम मन से निकाल दो की तुम भैया से अपनी गाण्ड बचा लोगी। तेरी गाण्ड में तो भैया का मूसल ठुकना ही ठुकना

 
विजय- “देखा माँ, मैंने कहा था ना की अब मुन्ना पहले वाला मुन्ना नहीं रहा, पूरा चालू हो गया है। अब यह पहले जैसा शर्मीला और चुपचाप रहने वाला नहीं की तू इसे झिड़क कर चुप करा दे। तू अगर सेर है तो यह पूरा सवा सेर है। ऐसे भाई पर मुझे तो बहुत नाज है, बड़े नशीबवाले को ही ऐसा प्यारा और बड़े भाई का मन रखनेवाला भाई मिलता है...” यह कहकर मैंने मुन्ना को अपने आगोश में जकड़ लिया।

मुन्ना मेरे सीने से सिर टिकाए माँ की ओर देखकर मंद-मंद मुश्कुरा रहा था और माँ भी हम दोनों भाइयों का ऐसा प्यार देखकर गदगद होती हुई हँस रही थी।

विजय- “माँ ऐसा प्यारा भाई पाकर मैं तो धन्य हो गया जो भैया की खुशी के लिए कुछ भी कर सकता है। तूने देखा मेरी खुशी के लिए इसने तुझे भी मेरे लिए पटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मेरा तो इससे कुछ भी छिपा हुआ नहीं है, जो कुछ भी मेरा है वो सब इसका है। अब यदि तुम भी मुझे मिली हो तो मेरे साथ-साथ तुम मुन्ना की भी हो, क्योंकी मुन्ना की वजह से ही तुम मुझे मिली हो। मुन्ना ने वैसे तो मेरा व्याह तुझसे करा दिया है, पर असल में तुम हमारी साझे की लुगाई हो। हम दोनों तेरे मर्द हैं। तू बड़ी नशीबवाली है की इस उमर में तुझे हमारे जैसे दो-दो जवान पति एक साथ मिले हैं..."

राधा- “मैं तो खुद अपने दोनों बेटों का आपस में ऐसा प्यार देखकर बलि-बलि हो रही हूँ, नहीं तो आज के जमाने में भाई भाई का दुश्मन होता है। मैं तो यही चाहती हूँ की तुम दोनों की जोड़ी ऐसी ही बनी रहे। तू तो यहाँ शहर में रहता था, मैं तो इस अजय को देख-देखकर ही गाँव में खुश होती रहती थी और इसी के सहारे ही जिंदगी गुजार रही थी। तू ऐसा भाई पाकर निहाल हो गया है तो मैं भी ऐसा मक्खन सा चिकना देवर पाकर खुशी से। भर गई हूँ। मैं तो अब ऐसे प्यारे गुड्डे से देवर के साथ जी भरके खेलूंगी...” यह कहकर माँ ने अजय को अपनी बाँहों में जकड़ लिया।

माँ ने अजय की ठुड्डी पकड़कर चेहरा ऊपर उठा लिया और उसके गोरे गालों की पुच्चियां लेने लगी। कभी एक गाल चूसती तो कभी दूसरा गाल। फिर माँ अजय के दाढ़ी रहित गालों पर अपने गाल रगड़ने लगी। इसके बाद माँ ने अचानक उसके होंठ अपने होंठ में जकड़ लिए और अपने छोटे बेटे के होंठ चूसने लगी। माँ बीच-बीच में अजय के होंठों पर अपनी जीभ फेर रही थी। माँ की आँखों में वासना के लाल डोरे तैर रहे थे।

तभी अजय ने माँ को अपनी बाँहों में जकड़ लिया और माँ के होंठ अपने होंठों में जकड़ लिए। उसने माँ की जीभ अपने मुँह में ले ली और माँ को अपनी मजबूत बाँहों में झकझोरते हुए जीभ चूसने लगा। वो बार-बार माँ के होंठ मुँह में भर रहा था, माँ के फूले-फूले गाल मुँह में भर रहा था।

मैं- “माँ देखा मेरा माल कितना मस्त और मीठा है की तू भी अपने आपको रोक नहीं पाई। इसके मक्खन से । चिकने गाल खाने का और इसके पतले-पतले गुलाबी होंठ चूसने का मजा ही अलग है। मैं ऐसे ही इस पर थोड़ा ही मरता हूँ...”

उधर अजय ने माँ की चूचियां ब्लाउज़ के ऊपर से ही अपने हाथ में भर ली और उन्हें कस-कस के दबाने लगा। वो माँ की चूचियों को मसल-मसलकर उनसे खेल रहा था। माँ के चेहरे पर झुका हुआ माँ के होंठों का रसपान । अत्यंत कामातुर होकर कर रहा था। मैंने इससे पहले अजय को इतने जोश में कभी नहीं देखा। जिंदगी में पहली बार नारी शरीर को पाकर वो मतवाला हो उठा था, उसके सबर का बाँध टूट गया था। मैं बहुत खुश था की मुन्ना की केवल तगड़े मर्यों में ही दिलचस्पी नहीं है, बल्कि माँ जैसी मस्त औरतों में मर्दो से भी ज्यादा उसकी दिलचस्पी है।

राधा- “क्यों रे अजय, व्याह तो तूने मेरा अपने भैया से कराया है और सुहागरात तू खुद मनाने लग गया?" माँ

भी अजय के इस जोश से बहुत खुश दिख रही थी।

माँ की बात सुनकर अजय ने माँ को छोड़ दिया।

मैं- “अरे माँ, इसमें और मेरे में क्या फर्क है? आज पहली बार मैं मुन्ना को इतने जोश में देख रहा हूँ। देखा कैसे तुझे भभोड़-भभोड़ कर तेरे साथ मस्ती कर रहा था। तू जो इतनी देर से इसका मजाक उड़ा रही थी ना एक बार यह तेरी ले लेगा ना तब देखना तुझे लौंडिया जैसा मजा आएगा। बोल दोनों भाइयों को बिल्कुल खुलकर और पूरी बेशर्म होकर मस्ती करवाएगी ना? तुम हम दोनों भाइयों से जितनी मस्त होकर चुदवायेगी तुझे उतना ही ज्यादा मजा आएगा..."

 
साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
मैं- “अरे माँ, इसमें और मेरे में क्या फर्क है? आज पहली बार मैं मुन्ना को इतने जोश में देख रहा हूँ। देखा कैसे तुझे भभोड़-भभोड़ कर तेरे साथ मस्ती कर रहा था। तू जो इतनी देर से इसका मजाक उड़ा रही थी ना एक बार यह तेरी ले लेगा ना तब देखना तुझे लौंडिया जैसा मजा आएगा। बोल दोनों भाइयों को बिल्कुल खुलकर और पूरी बेशर्म होकर मस्ती करवाएगी ना? तुम हम दोनों भाइयों से जितनी मस्त होकर चुदवायेगी तुझे उतना ही ज्यादा मजा आएगा..."

राधा- “तुम जैसों बेशर्मों के आगे बेशर्म तो मैं पहले ही बन गई हैं। मैंने तो कभी ख्वाब में भी ऐसी बेशर्मी भरी बातें नहीं की थी जैसी तुम दोनों के सामने कर रही हैं। लेकिन बिल्कुल खुलकर, एक दूसरे से पूरा बेशर्म होकर ऐसी बातें करने का एक अनोखा ही मजा है, जो मैंने आज तक नहीं लिया था। यह सब तुम्हारी करामात है जो मेरे साथ-साथ मेरे इस भोंदू छोटे बेटे को भी अपने जैसा बेबाक बेशर्म बना लिया है। मैं तो तुम दोनों की एक जैसी माँ हूँ। मेरे लिए तुम दोनों में ना तो पहले फर्क था और ना ही अब। जब पूरी खुल ही गई हूँ तो जी खोल के मस्ती करूंगी और तुम दोनों को करवाऊँगी। मेरे को क्या फर्क पड़ता है की पहले कौन आता है या दोनों साथ-साथ आते हो, चुदना तो मुझे हर हालत में है ही। फिर मैं क्यों नखरे दिखाऊँ और झूठी ना नुकुर करूँ। जितनी आग तुम दोनों में लगी है उतनी ही आग मेरे में भी लगी है और क्यों ना लगे.. आखिरकार, तुम दोनों

भी तो मेरे ही खून हो। जितनी गर्मी तुम दोनों के भीतर है उससे ज्यादा गर्मी मेरे में है...”

अजय- “माँ भैया की बात छोड़ो, यह तो पंडितजी की दक्षिणा भर है, असली मजा तो तेरा भैया ही लेंगे। तुम पर पहला हक तो भैया का ही है। मैंने तो यहाँ आने के पहले तेरा कभी सपना तक नहीं देखा था। यह तो भैया की दी हुई हिम्मत है की मैं तेरे साथ इतना कर सका। अब भैया शुरू भी तो करो ताकी मैं भी देखें की सुहागरात । कैसे मनाई जाती है? भैया माँ कह रही है ना की इसमें बहुत गर्मी है, आज इसकी सारी गर्मी निकाल दो। आज इसके साथ ऐसी सुहागरात मनाओ जैसी की इसने आज तक नहीं मनाई...” अजय की बात सुनकर मैंने माँ के सिर पर चुनर ओढ़ा दी और चेहरा उस चुनर से पूरा ढक दिया। इसके बाद बहुत धीरे-धीरे चुनर का पूँघट ऊपर उठाकर माँ का चेहरा उजागर कर लिया।

माँ ने एक लज्जाशील दुल्हन की तरह आँखें नीची कर रखी थी। फिर मैं माँ के दोनों गालों पर हथेलियां रखकर माँ की आँखों में झाँकने लगा। माँ मंद-मंद मुश्कुरा रही थी। मैंने भी माँ के रसभरे होंठों का एक लंबा चुंबन । लिया। फिर माँ की पीठ पर हाथ लेजाकर ब्लाउज़ के बटन खोलने लगा। सारे बटन खोलकर ब्लाउज़ माँ की बाँहों

से निकाल दिया और माँ की टाइट ब्रा में कसे कबूतर फड़फड़ा उठे।

विजय- "देख मुन्ना, माँ की चूचियां एकदम गोल-गोल और कितनी बड़ी-बड़ी है। हम दोनों इन्हीं का दूध पीकर । बड़े हुए हैं। अभी भी इतनी भारी दिख रही है की जैसे दूध से भरी हुई हैं..." यह कहकर मैंने माँ की एक चूची ब्रा के ऊपर से ही अपने हाथ में ले ली और उसे हल्के-हल्के दबाने लगा।

फिर मैंने माँ की ब्रा का भी स्ट्रैप खोल दिया और ब्रा भी बाँहों से निकाल दी। माँ की सुडौल चूचियां अब हम दोनों भाइयों के सामने नंगी थीं। मैं बारी-बारी से माँ की चूची दबाने लगा। उसके निपल को चींटी में भर मसलने

लगा।

विजय- “ले मुन्ना तू भी छूकर देख, कितनी मुलायम है। यह देख माँ का बड़ा सा निपल। इसे मुँह में लेकर चूस। बचपन में तो तूने इसको बहुत चूसा होगा, अभी जवानी में चूसकर देख, तुझे मजा आ जाएगा। ऐसी मस्त औरत की चूचियां दबा-दबा कर धीरे-धीरे मस्ती ली जाती है। क्यों माँ अपना दूध हम दोनों भाइयों को पिलाओगी ना?”

मेरी बात सुनकर अजय ने गप्प से माँ का एक निपल अपने मुँह में ले लिया और उसे चुभलाते हुए चूसने लगा। मैंने भी दूसरा निपल अपने मुँह में ले लिया और मैं भी उसे जोर-जोर से चूसने लगा मानो उसके भीतर का सारा दूध निचोड़ रहा हूँ। तभी माँ ने अपने दोनों हाथ हम दोनों भाइयों के सिर के पीछे लगा दिए और हमारे सिर

अपनी चूचियों पर दबाने लगी। हम दोनों भाई भी माँ की चूचियां मस्त होकर काफी देर तक चूसते रहे।

अजय- “भैया, माँ की चूची पीने में जो मजा है वो और कोई चीज पीने में नहीं है। हम दोनों कितने खुशनशीब है। की इस जवानी में माँ की चूचियां एक साथ पीने को मिल रही हैं, और माँ भी कितने प्यार से अपनी चूची हमारे मुँह में ठेल-ठेलकर पिला रही है। माँ तुम्हारी चूचियां अभी भी पूरी टाइट हैं। बहुत जान है इनमें। माँ तुम मस्त होकर हमसे अपनी चूचियां मसलवाया करो, हमसे दबवाया करो, हमसे चुसवाया करो। हमें जब भी भूख लगे हमारे मुँह में अपनी चूची ढूंस दिया करो...”

माँ- “अरे अब ये मेरी दूध पिलाने वाली चूची नहीं है बल्कि तुम दोनों के खेलने के लिए बड़ी-बड़ी गेंदें हैं। खूब जी भर के इनसे खेला करो। तुम लोगों की जब भी इच्छा हो मेरी चूची मसल दिया करो, मेरी चूची पीनी हो तो उसमें मुँह लगा दिया करो, मैं खुद तुम लोगों को अपने आँचल में ढक के प्यार से दुधू पिलाऊँगी...”

मैं- “अभी तो तूने खाली माँ की चूची का ही मजा लिया है। माँ का असली माल तो इसके घाघरे में है। घाघरे में इसने अपनी सबसे खाश चीज छिपाकर रखी है। चल अब माँ का घाघरा तू उतार, तुझे माँ की ऐसी मस्त चीज

का दर्शन कराता हूँ की तू मर्दो के लण्डों को छोड़कर उसी का दीवाना हो जाएगा...”

 
मेरी बात सुनकर अजय ने माँ को खड़ा कर लिया और खुद माँ के सामने घुटनों के बल बैठ गया और घाघरे की डोरी खोज कर उसे खींच दी। फिर अजय ने नाड़ा ढीला किया और घाघरा नीचे गिरा दिया। अब माँ की उभरी हुई पैंटी अजय की आँखों के सामने थी।

अजय- “भैया देखो माँ की चीज कितनी फूली हुई है...”

अजय की बात सुनकर मैं भी अजय के साथ माँ के सामने घुटनों के बल बैठ गया। मैं पैंटी के ऊपर से ही माँ की चूत पर हाथ फेरने लगा। हाथ फेरते-फेरते उसे मुट्ठी में कस लेता। फिर मैंने माँ की पैंटी धीरे-धीरे नीचे । सरकानी शुरू कर दी। उधर गहने माँ ने खुद उतार दिए। पैंटी उतरते ही माँ हमारे सामने पूरी नंगी थी। माँ की बड़ी चूत के चारों ओर घने काले-काले झाँट के बाल थे। चूत बहुत ही उभरी हुई थी। चूत की लाल फाँक साफ दिख रही थी। अजय जिंदगी में पहली बार इतने नजदीक से एक औरत की चूत देख रहा था और वो एक टकटकी से चूत के दर्शन कर रहा था।

तभी मैंने माँ की चूत की पुत्तियां फैला दी और अजय को चूत का छेद ठीक से दिखाया- “मुन्ना ठीक से देख यही हम दोनों का जन्मस्थान है। हम दोनों कभी यहीं से बाहर निकले थे। देख हमारा जन्मस्थान कितना मोहक है। क्या काले-काले रेशमी बालों से भरती है। जिंदगी का असली मजा तो इसी चीज में है। यह देख माँ की चूत

का छेद, भीतर से कितना लाल और गहरा है। मेरा इतना बड़ा लण्ड इसमें कहाँ गुम हो जाएगा पता ही नहीं चलेगा। इसे खूब जी भरके देख और इसे खूब प्यार कर। हम दोनों कितने खुशनशीब हैं की इस जवानी में माँ की चूत साथ-साथ देख रहे हैं और माँ भी मस्त होकर हमसे अपना खजाना लुटवा रही है...”

अजय- “भैया यह तो बहुत ही प्यारी है। मैं इसे ठीक से देखेंगा और इसे बहुत प्यार करूंगा। भैया यह तो मैंने सुना था की मर्द लोग इसके पीछे भागते फिरते हैं, पर यह चीज इतनी मस्त है यह मुझे पता नहीं था। इसे देखकर ही इतनी मस्ती चढ़ रही है जितनी की मुझे खड़े लण्ड देखकर भी नहीं चढ़ी थी। वो माँ, भैया भी कम नहीं है, वे जानते थे की माँ ने बड़ा कीमती खजाना अपनी दोनों टाँगों के बीच छिपा रखा है तभी तो उसे पाने के लिए पहले वे तेरे पर लाइन मारने लगे और बाद में तुझे पटाने के लिए मुझे आगे कर दिया...”

अजय की बात सुनकर मैं खड़ा हो गया और माँ को बिस्तर पर लिटा दिया और मैं खुद पलंग के किनारे पर टाँग लटका कर बैठ गया। माँ की गाण्ड मैंने गोद में ले ली और माँ के घुटने मोड़ दिए जिससे माँ की चूत उभरकर पलंग के किनारे पर सामने हो गई। तभी अजय भी सरक कर पलंग के किनारे के पास बैठ गया। माँ की चूत ठीक अजय के मुँह के सामने थी। तभी मैंने दोनों हाथों की सहयता से चूत पूरी फैला दी और जन्नत का फाटक अजय के सामने खुल गया।

मैंने माँ की गाण्ड अपनी गोद में रख रखी थी और अपने छोटे भाई अजय को माँ की चूत पूरी फैलाकर दिखा रहा था। चूत का गहरा और बिल्कुल लाल सुराख ठीक अजय की आँखों के सामने था। वो बड़े चाव से चूत पर झुका हुआ उसे देख रहा था।

विजय- “ले मुन्ना अब ठीक से देख। तेरे भैया इसी के दीवाने थे। असली मजा तो इसी में है। देख अपनी माँ की चूत कितनी मस्त है। ठीक से अंदर तक देख। इसे छू, इसे सहला, इसे प्यार कर, इसे चाट, इसमें अंगुली । घुसाकर देख। देख माँ की चूत कितनी गदराई हुई है। इसे एक बार चोद लेगा ना तो फिर गाण्ड मरवाना भूल जाएगा। देख तेरे लिए मैंने माँ की चूत चौड़ी कर दी है। अब पूरी मस्ती ले इसकी...”

 
साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
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