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StoryPublisher
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मदन- मैने उसका इंतज़ाम भी कर लिया है...
आज़ाद- वो कैसे..??
मदन- मैने सुभाष को आकृति की फोटो दिखा दी है और उसे अपनी बेटी पसंद है....
अली- वाह...अब बस बिटिया से पूछ लो..
मदन- ह्म्म..और हाँ...वो कुछ दिन बाद यहाँ आ रहे है...तब लड़का-लड़की को एक-दूसरे से आमने-सामने भी मिलवा देगे..और सब ठीक हुआ तो आगे का काम भी कर लेगे...ओके
आज़ाद- वाह...ये सही किया...बहुत अच्छे...
मदन- तो भाभी जी ...आप आकृति को फोटो दिखा देना...और मुझे बता देना...फिर उनके आने का प्रोग्राम फिक्स करते है...
रुक्मणी- अच्छा भाई साब....आज ही बता दूगी....
आज़ाद- अरे अब बैठी क्यो हो...सबका मुँह मीठा करवाओ....बेटी के लिए रिश्ता आया है...
रुक्मणी(खुश हो कर)- अभी लाई जी...
फिर सबने मुँह मीठा किया और थोड़ी देर बाते करने के बाद अली और मदन अपने-2 घर निकल गये....
आज़ाद ने मदन को बोल दिया कि वो आज शाम तक उसे आकृति की मर्ज़ी बता देगा....
सबके जाने के बाद आज़ाद और रुक्मणी एक-दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे...
आज़ाद - भगवान ने तुम्हारी सुन ली रुक्मणी....
रुक्मणी- सही कहा...अच्छा रिश्ता मिल गया..अब बस आकृति को लड़का पसंद आ जाए...
आज़ाद- आ जाएगा....लड़का सच मे अच्छा है....तुम फोटो दिखाओ...और पता करो....उसके दिल की बात...
रुक्मणी- ठीक है...अभी जाती हूँ....
रुक्मणी लड़के की फोटो ले कर आकृति के रूम मे चली गई....
आकृति अपने रूम मे लेटी हुई थी...जबसे उसने अपनी शादी की बात सुनी थी...तभी से उसका दिल मचलने लगा था...
अब उसके मन मे क्या चल रहा है...ये बताना तो मुस्किल है...पर जो भी चल रहा था ..उसका असर उसके चेहरे पर सॉफ दिख रहा था...
वो अपने आप मे कुछ सोच- सोच कर मंद-मंद मुश्कुरा रही थी...जैसे अपने सपनो मे अपने राजकुमार को याद कर रही हो.....
रुक्मणी(आकृति के रूम मे आते ही)- आकृति...
आकृति जल्दी से बैठ गई और शरमाते हुए अपनी नज़रे झुका ली...
रुक्मणी आकर आकृति के बाजू मे बैठ गई और उसके सिर पर हाथ फिरते हुए बोली...
रुक्मणी- बेटी...तूने तो सब सुन लिया है ना ..अब जल्दी से मुझे अपनी मर्ज़ी भी बता दे ....ताकि मैं मदन भाई साब को जवाब दे सकूँ...
आकृति(चुप-चाप ...सिर झुकाए बैठी रही...)
रुक्मणी- ये ले...लड़के की फोटो...और बता ...वैसे हम सब को तो पसंद आया...पर तुझे पसंद आए तभी हम आगे सोचेगे...
आकृति(वैसे ही चुप बैठी रही)
रुक्मणी- ह्म्म..तो अपनी माँ से शरमा रही है ....हाँ
आकृति(नीचे देखते हुए )- माँ...वो...
रुक्मणी- कोई बात नही...मैं समझती हूँ...आख़िर माँ हूँ तेरी....ये ले ..ये फोटो रख के जा रही हूँ....देख लेना ....और जब मैं वापस आउ तो बताना...ठीक..
रुक्मणी फोटो रख कर रूम से निकल गई....और रुक्मणी के जाते ही आकृति ने जल्दी से फोटो उठाई और उसे देखते हुए लेट गई...
आकृति के मन मे क्या चल रहा था...ये तो भगवान जाने...पर इस समय उसे अकेला छोड़ देते है...फोटो के साथ....
वहाँ दूसरी तरफ...आज़ाद के घर से वापिस आने के बाद मदन के घर....
मदन रेस्ट करने लेट गया और सरिता..घर के पीछे बने स्विम्मिंग पूल के पास परेसान बैठी थी....
सरिता बिकनी पहने पूल मे थी पर उसका माइंड यही सोच रहा था कि कैसे भी कर के आकृति इस शादी के लिए मान जाए....
सरिता(मन मे)- एक बार ये शादी सेट हो जाए....फिर सारे पत्ते भी मेरे होंगे...और चाल भी मेरी होगी...और दाव पर लगेगा मल्होत्रा परिवार.....
आख़िर क्या था सरिता का प्लान...क्यो वो ये शादी हर हाल मे करवाना ही चाहती थी......????????
इधर आज़ाद के घर....
आकृति अपने बेड पर उल्टी लेटी हुई सुभाष की फोटो को निहार रही थी...और मंद-मंद मुश्कं दे रही थी...
अचानक उसके हाथ से किसी ने फोटो झटक ली और आकृति की तो जैसे जान ही निकल गई.....
आकृति एक दम से पलटी और...
आकृति- कककक....तू...छुटकी की बच्ची...मैं तुझे....ला..वापिस दे...
आरती- नही दुगी...मैं भी तो देखु...कि किस के ख्यालो मे खोई हुई है मेरी दीदी...
आकृति(बैठ कर)- सीधे से दे दे...वरना...
आरती- वरना क्या....मैं नही देती जाओ. .
आकृति बेड से उठी और आरती को पकड़ने झपटी...पर आरती फोटो ले कर रूम से बाहर भाग गई...
आकृति- रुक जा...छुटकी...मैने कहा ..रुक जा....
आरती- मैं नही रुकती...दम है तो पकड़ लो...
आकृति- हाथ मे आ...फिर बताती हूँ...छुटकी की बच्ची...
आरती चिड़ाते हुए आगे-आगे भाग रही थी और आकृति उसके पीछे-पीछे...
दोनो बहने पूरे गलियारे मे भागती रही...फिर आरती नीचे उतर आई और पीछे-पीछे आकृति भी आ गई...
आरती सीधे अपने पापा के पास पहुच गई...
आरती- पापा...बचाओ...दीदी मार रही है...
आरती चिल्लाते हुए आज़ाद के पास खड़ी हो गई....आज़ाद को देख कर आकृति रुक गई और नज़रे झुका कर खड़ी हो गई...
आरती- देखो पापा ..दीदी मुझे ये फोटो नही दिखा रही....वैसे ये है कौन...??
आज़ाद- बेटा...अपनी दीदी को परेशान नही करते...और ये फोटो ...ह्म्म्मी...तुम्हारे मदन अंकल इसका रिश्ता ले कर आए है तुम्हारी दीदी के लिए...
रुक्मणी(पीछे से आती हुई)- आरती...मैने सब बताया था ना...फिर से क्यो पूछ रही हो...
आज़ाद(आरती के कान को पकड़ कर)- अच्छा...तो सब जान कर भी अंजान बन रही है....ह्म्म..
आरती- सॉरी पापा ...सॉरी...
आज़ाद(आरती के कान के पास मुँह कर के)- ह्म्म..अब चलो..अपनी दीदी से माफी माग़ो...और उनसे पूछ कर आओ कि ये लड़का पसंद है कि नही...
आरती(आज़ाद के कान मे )- पापा...अगर पसंद है तो...
आज़ाद- तो फिर इन्हे तुम्हारा जीजाजी बना दूँगा...
आरती- ह्म्म..तो अब मैं पूछ कर ही वापिस आउगि...
आरती फोटो ले कर वहाँ से आगे आई और आकृति के सामने आ कर बोली...
आरती- अब पकडो दीदी...आ जाओ...
और आरती खिलखिलाते हुए उपेर भाग गई और आकृति भी उसके पीछे भाग गई....
आज़ाद- ये छुटकी भी ना...हाहाहा...
आकृति के रूम मे...
आरती- बताओ ना दीदी...आपको पसंद है ना...
आकृति- (चुप रही)
आरती- बोलो ना दीदी...
आकृति- अच्छा..तू बता ..तुझे पसंद है...
आरती- ह्म्म..देखने मे तो....ज़्यादा अच्छे नही...पर चलेगा...
आकृति- छुटकी की बच्ची...तू नही सुधरेगी...
आरती- ओह हो...बुराई नही सुनी जा रही है...ह्म्म
आकृति(शरमाते हुए)- छुटकी...बता ना...परेसान मत कर....
आरती- ठीक है...बताती हूँ...ह्म्म..मुझे तो पसंद है...अब आप बताओ..
आकृति ने भी हाँ मे गर्दन हिला दी और शरमा गई...
आरती जल्दी से भागती हुई आज़ाद के पास आई और बता दिया कि दीदी की हाँ है...