S
StoryPublisher
Guest
आकाश का फ़ैसला देख कर आरती और रिचा चुप हो गई और आकृति ने दोनो की चूड़िया मिक्स करके पहन ली...
आकृति- अब खुश हो दोनो...
आकाश की होशियारी से सब खुश हो गये ....और आकाश स्माइल करके रूम से निकल गया...
रागिनी- सच मे आकृति ...आकाश की दुल्हन तो किस्मत वाली होगी...
आरती- ह्म्म..और वो मैं सेलेक्ट करूगी...हहहे...
फिर सब लड़कियाँ हसी-मज़ाक करते हुए..आकृति को तैयार करने लगी.....
-------------------
यहाँ मदन के घर....
सरिता के निकलने के बाद से ही सुभाष परेशान सा घूम रहा था...
उसने कुछ सोच कर धर्मेश के घर फ़ोन किया....उसे पता था कि उसकी बहेन धर्मेश के घर पर ही है...
फ़ोन धर्मेश की मौसी ने उठाया और फिर सूमी को दे दिया....
(कॉल पर)
सुभाष- सूमी...क्या कर रही हो...
सूमी- कुछ नही...पर आपको क्या हुआ...आपकी आवाज़..
सुभाष(बीच मे)- कुछ नही...ये बताओ कि सरिता आंटी आई है वहाँ...??
सूमी- हाँ..आई थी और चली भी गई...
सुभाष- ओह...तो उन्होने वहाँ काम करवा दिया....
सूमी- हाँ...सब सेट है..पर आप ऐसे घबराए हुए क्यो है...
सुभाष- देख सूमी...मैं नही जानता कि सरिता आंटी का असली मक़सद क्या है...पर मैं इस शादी मे कोई भी प्राब्लम नही चाहता...मैं सच मे आकृति को पसंद करता हूँ...
सूमी- हाँ भैया...आपकी शादी आकृति से ही होगी...टेन्षन मत लो...और ये सब तो सिर्फ़ सेक्स की भूख मिटाने के लिए कर रही है सरिता आंटी...
सुभाष- पर मुझे उन पर शक है...उनके दिमाग़ मे कुछ और चल रहा है...
सूमी- ये आपका वहम है...टेन्षन छोड़ो और सगाई की तैयारी करो...आज शाम को आपकी आधी शादी होने वाली है...
सुभाष- ह्म्म्म ..ठीक है...तू कहती है तो...
सूमी(बीच मे)- अपनी बहेन पर भरोसा रखो...मैं सब संभाल लूगी...
सुभाष- ठीक है गुड़िया...लव यू...
सूमी- आइ लव यू 2 भैया...
फिर सुभाष ने कॉल कट की और थोड़ा रिलॅक्स हो गया और अपनी सगाई के बारे मे सोचने लगा.....
---------------------
यहाँ आज़ाद के घर......
आज़ाद , अली को मेहमानों का ख़याल रखने का बोल कर कुछ काम से अंदर आ गया....
काम निपटा कर वो बाथरूम जाने लगा....
( आज़ाद के घर पर हर रूम से आत्तेच बाथरूम था....और एक साइड पर छोटा सा बाथरूम बना था..जो ज़्यादा यूज़ नही होता था...
आज़ाद ने सोचा कि रूम्स मे औरतें , लड़कियाँ और मेहमान होगे तो वो उस छोटे बाथरूम के साइड चल दिया)
जैसे ही वो बाथरूम के पास पहुचा तो दूसरी तरफ से रिचा आती हुई आ रही थी....( रिचा टाइम-पास करने घूमने निकल आई थी...)
रिचा- अरे अंकल...आप यहाँ...कैसे..??
आज़ाद- अरे मेरी जान...कोई बाथरूम क्यो जाता है...
रिचा- ह्म्म..तो चलिए...मुझे भी जाना है...
आज़ाद- पागल है क्या...ये मेरा घर है...
रिचा- पता है ...पर यहाँ तो कोई नही ना...
आज़ाद- अरे...
रिचा जल्दी से आज़ाद के पास आ गई और उसका लंड पेंट के उपेर से मसल दिया....
आज़ाद(रिचा को दूर कर के) - क्या पागलपन है...दूर रह...
रिचा- अंकल...चलो ना..बड़ी खुजली हो रही है...
आज़ाद- तू समझा कर ना...बहुत काम है अभी....
रिचा- तो थोड़ा आराम तो बनता है....
और रिचा फिर से आज़ाद के लंड को सहलाने लगी...
आज़ाद को एक तरफ डर लग रहा था और दूसरी तरफ उसका लंड उफान मारने लगा था...
रिचा- क्या सोच रहे है...यहाँ कोई नही आएगा...जल्दी से कर लो ना...
आज़ाद की सेक्स की भूख उसके दिमाग़ पर हावी हो गई ...आज़ाद ने चारो तरफ देखा और रिचा को बाथरूम मे भेज दिया और 1 मिनट बाद खुद भी अंदर चला गया...
फिर क्या था...आज़ाद ने रिचा को बाथरूम मे खड़े - खड़े चोदा और कपड़े पहन कर निकल गया....
आज़ाद निकल कर एक साइड गया और दूसरी साइड से सरिता उसी बाथरूम मे आ रही थी...
सरिता ने आज़ाद को निकलते हुए देख लिया था....
रिचा रिलॅक्स होकर अपनी चूत सॉफ कर रही थी...उसे पता था कि इस बाथरूम मे ज़्यादातर कोई नही आता...
पर उसी समय गेट खुला और सरिता के सामने रिचा चूत सॉफ करते हुए पकड़ी गई....
रिचा- ऊओह.....आंटी...एयेए...आअप्प्प..य्ययःहाअ.....क्क्क...क्काईससी..
रिचा की तो गान्ड फट गई पर सरिता के चेहरे पर मुस्कान फैल गई....
सरिता- बस..बस...आराम से काम निपटा लो और कपड़े पहन लो...फिर आराम से बात करेंगे ....वैसे भी अब तो बहुत सी बातें करनी है तुमसे....हहहे...
सरिता की बात सुनकर रिचा सहम गई और सरिता गेट बंद करके बाहर वेट करने लगी....
सरिता(मन मे)- ये तो कमाल हो गया....अब तो मेरा काम और भी आसान हो जायगा...बस ये लड़की मान जाए...फिर गेम मे और भी मज़ा आएगा....हहेहेहहे.....
आज़ाद के घर सब काम अच्छी तरह से चल रहा था...आकाश भी काम मे लगा हुआ था कि तभी रागिनी उसे ढूँढती हुई आ गई....
रागिनी- आकाश भाई...मेरे साथ आएगे थोड़ा...
आकाश- क्या बात है दीदी...कुछ काम है क्या ...???
रागिनी- हाँ भाई...वो स्टोर रूम से कुछ समान उठाना था...
आकाश- तो किसी नौकर को बोल दो...
रागिनी- अरे...सब नौकर बिज़ी है...और आंटी(आकाश की माँ) ने कहा कि तुम्हे ले जाउ...
आकाश- ओह्ह..माँ ने कहा है...तब तो आना ही होगा...चलिए...
( असल मे रुक्मणी ने आकाश का नाम ही नही लिया था...ये तो रागिनी की सोच थी...ताकि आकाश के साथ थोड़ा वक़्त अकेले मे गुज़ार सके)
आकाश , रागिनी के साथ स्टोर रूम मे चला गया...स्टोर रूम घर के पीछे साइड था...और वहाँ लाइट भी नही थी...इसलिए दोनो टॉर्च ले कर गये थे...
रागिनी शहर मे पढ़ने वाली लड़की थी...उसने टाइट लेग्गी और शॉर्ट स्लीबलेस कुरती पहनी हुई थी....
आकृति- अब खुश हो दोनो...
आकाश की होशियारी से सब खुश हो गये ....और आकाश स्माइल करके रूम से निकल गया...
रागिनी- सच मे आकृति ...आकाश की दुल्हन तो किस्मत वाली होगी...
आरती- ह्म्म..और वो मैं सेलेक्ट करूगी...हहहे...
फिर सब लड़कियाँ हसी-मज़ाक करते हुए..आकृति को तैयार करने लगी.....
-------------------
यहाँ मदन के घर....
सरिता के निकलने के बाद से ही सुभाष परेशान सा घूम रहा था...
उसने कुछ सोच कर धर्मेश के घर फ़ोन किया....उसे पता था कि उसकी बहेन धर्मेश के घर पर ही है...
फ़ोन धर्मेश की मौसी ने उठाया और फिर सूमी को दे दिया....
(कॉल पर)
सुभाष- सूमी...क्या कर रही हो...
सूमी- कुछ नही...पर आपको क्या हुआ...आपकी आवाज़..
सुभाष(बीच मे)- कुछ नही...ये बताओ कि सरिता आंटी आई है वहाँ...??
सूमी- हाँ..आई थी और चली भी गई...
सुभाष- ओह...तो उन्होने वहाँ काम करवा दिया....
सूमी- हाँ...सब सेट है..पर आप ऐसे घबराए हुए क्यो है...
सुभाष- देख सूमी...मैं नही जानता कि सरिता आंटी का असली मक़सद क्या है...पर मैं इस शादी मे कोई भी प्राब्लम नही चाहता...मैं सच मे आकृति को पसंद करता हूँ...
सूमी- हाँ भैया...आपकी शादी आकृति से ही होगी...टेन्षन मत लो...और ये सब तो सिर्फ़ सेक्स की भूख मिटाने के लिए कर रही है सरिता आंटी...
सुभाष- पर मुझे उन पर शक है...उनके दिमाग़ मे कुछ और चल रहा है...
सूमी- ये आपका वहम है...टेन्षन छोड़ो और सगाई की तैयारी करो...आज शाम को आपकी आधी शादी होने वाली है...
सुभाष- ह्म्म्म ..ठीक है...तू कहती है तो...
सूमी(बीच मे)- अपनी बहेन पर भरोसा रखो...मैं सब संभाल लूगी...
सुभाष- ठीक है गुड़िया...लव यू...
सूमी- आइ लव यू 2 भैया...
फिर सुभाष ने कॉल कट की और थोड़ा रिलॅक्स हो गया और अपनी सगाई के बारे मे सोचने लगा.....
---------------------
यहाँ आज़ाद के घर......
आज़ाद , अली को मेहमानों का ख़याल रखने का बोल कर कुछ काम से अंदर आ गया....
काम निपटा कर वो बाथरूम जाने लगा....
( आज़ाद के घर पर हर रूम से आत्तेच बाथरूम था....और एक साइड पर छोटा सा बाथरूम बना था..जो ज़्यादा यूज़ नही होता था...
आज़ाद ने सोचा कि रूम्स मे औरतें , लड़कियाँ और मेहमान होगे तो वो उस छोटे बाथरूम के साइड चल दिया)
जैसे ही वो बाथरूम के पास पहुचा तो दूसरी तरफ से रिचा आती हुई आ रही थी....( रिचा टाइम-पास करने घूमने निकल आई थी...)
रिचा- अरे अंकल...आप यहाँ...कैसे..??
आज़ाद- अरे मेरी जान...कोई बाथरूम क्यो जाता है...
रिचा- ह्म्म..तो चलिए...मुझे भी जाना है...
आज़ाद- पागल है क्या...ये मेरा घर है...
रिचा- पता है ...पर यहाँ तो कोई नही ना...
आज़ाद- अरे...
रिचा जल्दी से आज़ाद के पास आ गई और उसका लंड पेंट के उपेर से मसल दिया....
आज़ाद(रिचा को दूर कर के) - क्या पागलपन है...दूर रह...
रिचा- अंकल...चलो ना..बड़ी खुजली हो रही है...
आज़ाद- तू समझा कर ना...बहुत काम है अभी....
रिचा- तो थोड़ा आराम तो बनता है....
और रिचा फिर से आज़ाद के लंड को सहलाने लगी...
आज़ाद को एक तरफ डर लग रहा था और दूसरी तरफ उसका लंड उफान मारने लगा था...
रिचा- क्या सोच रहे है...यहाँ कोई नही आएगा...जल्दी से कर लो ना...
आज़ाद की सेक्स की भूख उसके दिमाग़ पर हावी हो गई ...आज़ाद ने चारो तरफ देखा और रिचा को बाथरूम मे भेज दिया और 1 मिनट बाद खुद भी अंदर चला गया...
फिर क्या था...आज़ाद ने रिचा को बाथरूम मे खड़े - खड़े चोदा और कपड़े पहन कर निकल गया....
आज़ाद निकल कर एक साइड गया और दूसरी साइड से सरिता उसी बाथरूम मे आ रही थी...
सरिता ने आज़ाद को निकलते हुए देख लिया था....
रिचा रिलॅक्स होकर अपनी चूत सॉफ कर रही थी...उसे पता था कि इस बाथरूम मे ज़्यादातर कोई नही आता...
पर उसी समय गेट खुला और सरिता के सामने रिचा चूत सॉफ करते हुए पकड़ी गई....
रिचा- ऊओह.....आंटी...एयेए...आअप्प्प..य्ययःहाअ.....क्क्क...क्काईससी..
रिचा की तो गान्ड फट गई पर सरिता के चेहरे पर मुस्कान फैल गई....
सरिता- बस..बस...आराम से काम निपटा लो और कपड़े पहन लो...फिर आराम से बात करेंगे ....वैसे भी अब तो बहुत सी बातें करनी है तुमसे....हहहे...
सरिता की बात सुनकर रिचा सहम गई और सरिता गेट बंद करके बाहर वेट करने लगी....
सरिता(मन मे)- ये तो कमाल हो गया....अब तो मेरा काम और भी आसान हो जायगा...बस ये लड़की मान जाए...फिर गेम मे और भी मज़ा आएगा....हहेहेहहे.....
आज़ाद के घर सब काम अच्छी तरह से चल रहा था...आकाश भी काम मे लगा हुआ था कि तभी रागिनी उसे ढूँढती हुई आ गई....
रागिनी- आकाश भाई...मेरे साथ आएगे थोड़ा...
आकाश- क्या बात है दीदी...कुछ काम है क्या ...???
रागिनी- हाँ भाई...वो स्टोर रूम से कुछ समान उठाना था...
आकाश- तो किसी नौकर को बोल दो...
रागिनी- अरे...सब नौकर बिज़ी है...और आंटी(आकाश की माँ) ने कहा कि तुम्हे ले जाउ...
आकाश- ओह्ह..माँ ने कहा है...तब तो आना ही होगा...चलिए...
( असल मे रुक्मणी ने आकाश का नाम ही नही लिया था...ये तो रागिनी की सोच थी...ताकि आकाश के साथ थोड़ा वक़्त अकेले मे गुज़ार सके)
आकाश , रागिनी के साथ स्टोर रूम मे चला गया...स्टोर रूम घर के पीछे साइड था...और वहाँ लाइट भी नही थी...इसलिए दोनो टॉर्च ले कर गये थे...
रागिनी शहर मे पढ़ने वाली लड़की थी...उसने टाइट लेग्गी और शॉर्ट स्लीबलेस कुरती पहनी हुई थी....