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चूतो का समुंदर

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आकाश का फ़ैसला देख कर आरती और रिचा चुप हो गई और आकृति ने दोनो की चूड़िया मिक्स करके पहन ली...

आकृति- अब खुश हो दोनो...

आकाश की होशियारी से सब खुश हो गये ....और आकाश स्माइल करके रूम से निकल गया...

रागिनी- सच मे आकृति ...आकाश की दुल्हन तो किस्मत वाली होगी...

आरती- ह्म्म..और वो मैं सेलेक्ट करूगी...हहहे...

फिर सब लड़कियाँ हसी-मज़ाक करते हुए..आकृति को तैयार करने लगी.....

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यहाँ मदन के घर....

सरिता के निकलने के बाद से ही सुभाष परेशान सा घूम रहा था...

उसने कुछ सोच कर धर्मेश के घर फ़ोन किया....उसे पता था कि उसकी बहेन धर्मेश के घर पर ही है...

फ़ोन धर्मेश की मौसी ने उठाया और फिर सूमी को दे दिया....

(कॉल पर)

सुभाष- सूमी...क्या कर रही हो...

सूमी- कुछ नही...पर आपको क्या हुआ...आपकी आवाज़..

सुभाष(बीच मे)- कुछ नही...ये बताओ कि सरिता आंटी आई है वहाँ...??

सूमी- हाँ..आई थी और चली भी गई...

सुभाष- ओह...तो उन्होने वहाँ काम करवा दिया....

सूमी- हाँ...सब सेट है..पर आप ऐसे घबराए हुए क्यो है...

सुभाष- देख सूमी...मैं नही जानता कि सरिता आंटी का असली मक़सद क्या है...पर मैं इस शादी मे कोई भी प्राब्लम नही चाहता...मैं सच मे आकृति को पसंद करता हूँ...

सूमी- हाँ भैया...आपकी शादी आकृति से ही होगी...टेन्षन मत लो...और ये सब तो सिर्फ़ सेक्स की भूख मिटाने के लिए कर रही है सरिता आंटी...

सुभाष- पर मुझे उन पर शक है...उनके दिमाग़ मे कुछ और चल रहा है...

सूमी- ये आपका वहम है...टेन्षन छोड़ो और सगाई की तैयारी करो...आज शाम को आपकी आधी शादी होने वाली है...

सुभाष- ह्म्म्म ..ठीक है...तू कहती है तो...

सूमी(बीच मे)- अपनी बहेन पर भरोसा रखो...मैं सब संभाल लूगी...

सुभाष- ठीक है गुड़िया...लव यू...

सूमी- आइ लव यू 2 भैया...

फिर सुभाष ने कॉल कट की और थोड़ा रिलॅक्स हो गया और अपनी सगाई के बारे मे सोचने लगा.....

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यहाँ आज़ाद के घर......

आज़ाद , अली को मेहमानों का ख़याल रखने का बोल कर कुछ काम से अंदर आ गया....

काम निपटा कर वो बाथरूम जाने लगा....

( आज़ाद के घर पर हर रूम से आत्तेच बाथरूम था....और एक साइड पर छोटा सा बाथरूम बना था..जो ज़्यादा यूज़ नही होता था...

आज़ाद ने सोचा कि रूम्स मे औरतें , लड़कियाँ और मेहमान होगे तो वो उस छोटे बाथरूम के साइड चल दिया)

जैसे ही वो बाथरूम के पास पहुचा तो दूसरी तरफ से रिचा आती हुई आ रही थी....( रिचा टाइम-पास करने घूमने निकल आई थी...)

रिचा- अरे अंकल...आप यहाँ...कैसे..??

आज़ाद- अरे मेरी जान...कोई बाथरूम क्यो जाता है...

रिचा- ह्म्म..तो चलिए...मुझे भी जाना है...

आज़ाद- पागल है क्या...ये मेरा घर है...

रिचा- पता है ...पर यहाँ तो कोई नही ना...

आज़ाद- अरे...

रिचा जल्दी से आज़ाद के पास आ गई और उसका लंड पेंट के उपेर से मसल दिया....

आज़ाद(रिचा को दूर कर के) - क्या पागलपन है...दूर रह...

रिचा- अंकल...चलो ना..बड़ी खुजली हो रही है...

आज़ाद- तू समझा कर ना...बहुत काम है अभी....

रिचा- तो थोड़ा आराम तो बनता है....

और रिचा फिर से आज़ाद के लंड को सहलाने लगी...

आज़ाद को एक तरफ डर लग रहा था और दूसरी तरफ उसका लंड उफान मारने लगा था...

रिचा- क्या सोच रहे है...यहाँ कोई नही आएगा...जल्दी से कर लो ना...

आज़ाद की सेक्स की भूख उसके दिमाग़ पर हावी हो गई ...आज़ाद ने चारो तरफ देखा और रिचा को बाथरूम मे भेज दिया और 1 मिनट बाद खुद भी अंदर चला गया...

फिर क्या था...आज़ाद ने रिचा को बाथरूम मे खड़े - खड़े चोदा और कपड़े पहन कर निकल गया....

आज़ाद निकल कर एक साइड गया और दूसरी साइड से सरिता उसी बाथरूम मे आ रही थी...

सरिता ने आज़ाद को निकलते हुए देख लिया था....

रिचा रिलॅक्स होकर अपनी चूत सॉफ कर रही थी...उसे पता था कि इस बाथरूम मे ज़्यादातर कोई नही आता...

पर उसी समय गेट खुला और सरिता के सामने रिचा चूत सॉफ करते हुए पकड़ी गई....

रिचा- ऊओह.....आंटी...एयेए...आअप्प्प..य्ययःहाअ.....क्क्क...क्काईससी..

रिचा की तो गान्ड फट गई पर सरिता के चेहरे पर मुस्कान फैल गई....

सरिता- बस..बस...आराम से काम निपटा लो और कपड़े पहन लो...फिर आराम से बात करेंगे ....वैसे भी अब तो बहुत सी बातें करनी है तुमसे....हहहे...

सरिता की बात सुनकर रिचा सहम गई और सरिता गेट बंद करके बाहर वेट करने लगी....

सरिता(मन मे)- ये तो कमाल हो गया....अब तो मेरा काम और भी आसान हो जायगा...बस ये लड़की मान जाए...फिर गेम मे और भी मज़ा आएगा....हहेहेहहे.....

आज़ाद के घर सब काम अच्छी तरह से चल रहा था...आकाश भी काम मे लगा हुआ था कि तभी रागिनी उसे ढूँढती हुई आ गई....

रागिनी- आकाश भाई...मेरे साथ आएगे थोड़ा...

आकाश- क्या बात है दीदी...कुछ काम है क्या ...???

रागिनी- हाँ भाई...वो स्टोर रूम से कुछ समान उठाना था...

आकाश- तो किसी नौकर को बोल दो...

रागिनी- अरे...सब नौकर बिज़ी है...और आंटी(आकाश की माँ) ने कहा कि तुम्हे ले जाउ...

आकाश- ओह्ह..माँ ने कहा है...तब तो आना ही होगा...चलिए...

( असल मे रुक्मणी ने आकाश का नाम ही नही लिया था...ये तो रागिनी की सोच थी...ताकि आकाश के साथ थोड़ा वक़्त अकेले मे गुज़ार सके)

आकाश , रागिनी के साथ स्टोर रूम मे चला गया...स्टोर रूम घर के पीछे साइड था...और वहाँ लाइट भी नही थी...इसलिए दोनो टॉर्च ले कर गये थे...

रागिनी शहर मे पढ़ने वाली लड़की थी...उसने टाइट लेग्गी और शॉर्ट स्लीबलेस कुरती पहनी हुई थी....

 


आकाश वैसे तो लड़कियो के साथ काफ़ी खुला हुआ था...पर रागिनी उसके दोस्त की दीदी थी...

इसलिए रागिनी के साथ अकेले एक अंधेरे कमरे मे जाना उसे कुछ अजीब सा लग रहा था...

उपर से रागिनी का हॉट फिगर भी आकाश की परेशानी की एक वजह थी...फिर भी वो मन को काबू करके रागिनी के साथ अंधेरे कमरे मे आ गया....

काफ़ी देर टॉर्च से ढूँढने के बाद उनको वो समान मिल गया जिसकी उन्हे ज़रूरत थी...

वो समाने कमरे की बालकनी पर रखा हुआ था....

अब समस्या ये थी समान उचाई पर था...जहाँ पर पहुचना मुश्किल था....

आकाश- ओह..ये तो...एक काम करता हूँ...स्टूल या सीधी ले कर आता हूँ...

रागिनी- अरे अब तुम जाओगे -आओगे ..इसमे टाइम लगेगा...और फिर मैं यहाँ अकेली कैसे रहूगी...

आकाश- तो आप भी चलो...फिर आ जायगे...

रागिनी- अरे ...टाइम वेस्ट होगा ना...और टाइम काम है...

आकाश- तो आप बोलो ...क्या करे...

रागिनी- ह्म्म..एक काम करो ..तुम मुझे उठा लो और मैं समान उठा लूगी...

आकाश , रागिनी की बात सुनकर चौंक गया...आख़िर वो उसके बेस्ट फ्रेंड की दीदी थी...

रागिनी- क्या सोच रहे हो...

आकाश- मैं..वो...आपको...कैसे...

रागिनी- अरे...तुम हिचकिचाओ मत...उठाओ मुझे..जल्दी...

आकाश ने ना चाहते हुए भी रागिनी की बात मान ली और रागिनी को हाथो से उपर उठा लिया...

आकाश के हाथ रागिनी के घुटनो पर थे...और उसके मुँह के पास रागिनी का सीना था...

रागिनी की लेग्गी चिकनी होने की वजह से आकाश के हाथ की पकड़ ठीक से नही बन रही थी....

आकाश- ठीक है दीदी...पहुच गई...??

रागिनी- अरे नही...थोड़ा और उपर....

आकाश- और उपेर...ये लो..

आकाश ने थोड़ा दम और लगा कर रागिनी को उपर किया...

आकाश - अब ठीक है...??

रागिनी- हाँ..बस ..ऐसे ही पकड़े रहो...

आकाश रागिनी को कस कर पकड़े हुए था..उसकी नाक मे रागिनी के जिस्म की खुश्बू आने लगी और वो थोड़ा मस्त होने लगा....

रागिनी तो बहुत खुश थी ...उसने अपने हाथ उठाकर समान उठाना शुरू किया जिससे उसके बूब्स थोड़ा आगे को तन गये और उसकी कुरती उसकी कमर पर चढ़ गई...

अब आकाश के सामने रागिनी की लेग्गी के अंदर कसी , उभरी हुई गान्ड पूरी तरह से आ गई...

जिसे देख कर आकाश ना चाहते हुए भी बहकने लगा था...

रागिनी की चिकनी लेग्गी की वजह से रागिनी आकाश के हाथो मे फिसल गई और सरसराते हुए नीचे आने लगी...

आकाश के हाथ रागिनी की गान्ड के उपर फस गये और रागिनी के झुकने की वजह से उसके बूब्स आकाश के मुँह पर आ गये.....

रागिनी ने अपने हाथो से आकाश के कंधे पकड़ लिए और अपने बूब्स आकाश के मुँह पर दबा दिए...

आकाश के हाथो मे रागिनी की गान्ड दबी हुई थी..और मुँह बूब्स के बीच मे...आकाश का लंड अब झटके देने लगा था...

 


आकाश थोड़ी देर इसी तरह रागिनी के जिस्म को फील करता रहा और फिर अचानक उसने रागिनी को नीचे खड़ा कर दिया...

आकाश- ओह..सॉरी...दीदी..सॉरी...

रागिनी- अरे ..किस बात की सॉरी...तुमने क्या किया...

आकाश- वो आप मेरी वजह से गिरने वाली थी...

रागिनी- उसमे तुम्हारी क्या ग़लती...वो मेरे कपड़े ही ज़्यादा चिकने है...है ना..

आकाश- जी...चलो कोई और इंतज़ाम करते है...

रागिनी- अरे..टाइम वेस्ट मत करो...और अब आधा समान ही रह गया..

आकाश- पर आप फिसल रही है हाथो से...

रागिनी- तो कुछ ऐसा करो कि मैं फिसल के दूर ना जा पाउ...

आकाश(चौंकते हुए)- क्क़..क्या मतलब..

रागिनी- कुछ नही...मैं बताती हूँ...तुम बैठ जाओ..और मैं अपने पैर तुम्हारे गले मे डालकर बैठ जाउन्गी...फिर तुम खड़े रहना और मैं समान उठा लूगी...

आकाश(पूरी तरह से शॉक्ड हो कर)- क्क़..क्या...पर ऐसे..कैसे...

रागिनी- शरमाना छ्चोड़ो...चलो बैठो...

आकाश तो एक खेला-खाया लड़का था...उसने सोचा कि जब इसे कोई शर्म नही तो मैं क्यो पीछे रहूं...

आकाश फिर घुटनो पर बैठ गया..और रागिनी आकाश के गले के दोनो साइड पैर डाल कर बैठ गई...

फिर आकाश ने रागिनी की जाघे पकड़ कर उठना शुरू किया और रागिनी आकाश के सिर पर झुक गई...फिर वो खड़ा हो गया..

रागिनी- कस के पकडो...मैं गिर ना जाउ...

आकाश(जाघो को कस के पकड़ कर)- पकड़ लिया..आप जल्दी करो..

रागिनी समान उठाने लगी और बार-बार किसी बहाने से अपनी गान्ड को आकाश के गले पर दबाने लगी...

आकाश के हाथो मे रागिनी की चिकनी जाघे थी और उसके गले पर रागिनी की चूत...

आकाश यही सोच रहा था कि उसका गला रागिनी की चूत से चिपका हुआ है और हाथो मे रागिनी की जाघे कसी हुई है...

यही सोच-सोच कर आकाश का लंड खड़ा होने लगा...और वो आँखे बंद करके अपने हाथ को आगे पीछे करने लगा...

रागिनी को ये देख कर खुशी हुई...कि अब आकाश उसकी बॉडी मे खो रहा है..और अब उसका काम आसान हो जायगा...

रागिनी जान भुजकर आराम से समान उठाती रही...और आकाश , रागिनी की बॉडी को महसूस करता रहा....

जब पूरा समान उतर गया..तब भी आकाश कुछ नही बोला...और ये देख कर रागिनी मन ही मन हँसने लगी....

फिर थोड़ी देर बाद बोली...

रागिनी- भाई...

रागिनी की आवाज़ सुनकर आकाश ने आँखे खोल दी और हड़बड़ाते हुए बोला...

आकाश- हह..हाँ..

रागिनी- समान उतर गया भाई...

आकाश को अपने आप पर शर्म आ गई और उसने जल्दी से रागिनी को नीचे उतारा और दोनो समान ले कर बाहर आ गये...बाहर आते ही...

रागिनी- मज़ा आया...

रागिनी ने ये बात एक सवाल की टोन मे कही थी..जिससे आकाश डर सा गया...

आकाश- क्क़..क्क्या...कैसा मज़ा..मुझे क्या मज़ा आएगा...

रागिनी- अरे मैं ये कह रही हूँ कि मुझे मज़ा आया...

आकाश- वो क्यो..??

रागिनी- आज काफ़ी वक़्त के बाद कुछ काम किया ना...हहहे...

आकाश(स्माइल करके)- ओह्ह..

रागिनी- वैसे आगे तो और भी मज़ा आएगा...

आकाश - मतलब...??

रागिनी- मतलब ये कि अभी तो सगाई है...शादी के टाइम ज़्यादा काम होगा...तो ज़्यादा मज़ा आएगा ना...

आकाश - ह्म्म..

फिर दोनो ने समान रखा और अपने-2 रास्ते चले गये...

आकाश अकेले मे अभी-2 हुई घटना के बारे मे सोचने लगा....

आकाश(मन मे)- ये जो भी हुआ...उससे रागिनी दीदी गुस्सा नही हुई...क्या मेरी तरह वो भी गरम हो रही थी...और उनकी बातें भी कुछ...नही-नही...ऐसा नही होगा....

और आकाश अपना मन को समझा कर काम करने मे लग गया....

धीरे-धीरे दिन ढलता गया...और वो वक़्त भी आ गया...जब सगाई होनी थी....

रात का अंधेरा छाने लगा था और आज़ाद का घर जगमगाने लगा था...

सब लोग सुभाष का वेट कर रहे थे....

थोड़ी देर मे सुभाष अपने रिस्तेदारो और दोस्तो के साथ आ गया...

सबकी खातिरदारी होने के बाद आकृति को बुलाया गया और सगाई की रसमे होने लगी...

सगाई बहुत अच्छी हुई और फिर खुशी मे सब डॅन्स करने लगे...

 


जब आरती ने डॅन्स किया तो आमिर तो जैसे दूसरी दुनियाँ मे पहुच गया...जहा सिर्फ़ आरती ही आरती थी...

आमिर के अलावा भी कोई था जो आरती के सपने देखने लगा था...

ऐसे ही नाच-गाने मे रागिनी ने आकाश का हाथ पकड़ा और डॅन्स करने लगी...

डॅन्स करते हुए रागिनी बार-बार आकाश जगह-जगह टच कर रही थी...और आकाश को भी उसका स्पर्श अच्छा लग रहा था...

ऐसे ही खुशी-ख़ुसी नाच-गाना समाप्त हुआ और फिर खाना पीना करके सब बैठ गये...

फिर सुभाष और उसके रिलेटिव मदन और सरिता के साथ उसके घर चले गये...सिर्फ़ सूमी रुक गई रागिनी के साथ...

आज़ाद के सभी मेहमान भी सोने चले गये...अली भी अपने घर निकल गया...

रुक्मणी ने धर्मेश की फॅमिली को भी घर पर रोके लिया...

पर रागिनी ने घर खाली होने का बहाना किया...

फिर रागिनी ने सबको ऐसे पटाया कि तय हुआ कि रागिनी, सूमी और धर्मेश की मौसी के साथ आकाश भी धर्मेश के घर रुकेगा...

आकाश ने धर्मेश को चलने को कहा..पर उसने यहाँ मेहमानो का ख्याल रखने का बहाना कर दिया...

फिर आकाश , रागिनी ,सूमी और धर्मेश की मौसी, धर्मेश के घर निकल गये...

यहा मदन के घर...

सरिता अपने रूम मे आईने के सामने अपना मेक-अप निकाल रही थी कि तभी उसे अपने और रिचा के बीच हुई घटना याद आ गई....

आज दोपहर को आज़ाद के घर पर....

सरिता ने रिचा को रंगे हाथो पकड़ लिया था और अब सरिता , रिचा को ले कर घर की छत पर आ गई...

रिचा अभी भी सहमी हुई थी...वो रिचा के कहने पर उसके साथ तो आ गई थी...पर अभी तक एक शब्द भी नही बोली थी....

सरिता- ह्म..तुम चुप क्यो हो...कुछ बोलो भी...

रिचा- (नज़रे झुकाय खड़ी रही...)

सरिता- अरे...अब बोलो भी...

रिचा(हिम्मत कर के)- क्क़..क्या..??

सरिता- क्या..??...हहहे...अच्छा-अच्छा..ये बताओ कि ये सब कब्से चल रहा है...

रिचा- क्या..??

सरिता- ज़्यादा भोली मत बनो...तुम जानती हो मैं क्या पूछ रही हूँ...

रिचा- मैं समझी नही आंटी...

सरिता- चुप कर रंडी...मैं ये पूछ रही हूँ कि तू कब्से आज़ाद की रंडी बन गई...और उसका लौडा खा रही है...अब समझ आया...बोल अब...

रिचा(सहमते हुए)- वो..वो..2-3 बार ही हुआ आंटी...

सरिता(स्माइल करके)- ह्म्म..तो नई-नई रंडी बनी है..हा...

रिचा- सॉरी आंटी

सरिता- अरे सॉरी किस बात की..ये तो सब करते है...लड़की चूत नही मरवाएगी तो लड़के लौडे का क्या करेंगे...हाँ

रिचा(सुबक्ते हुए)- सॉरी आंटी...अब नही करूगि...

सरिता- नही...तू करेगी...पर..

रिचा , सरिता की तरफ देखने लगी...

सरिता- हाँ सही सुना...तुम आगे भी ये करोगी पर मेरे हिसाब से...

रिचा(आँखे मिला कर)- मतलब..

सरिता- देखो...मैं चाहती हूँ कि तुम मेरा साथ दो...फ़ायदा दोनो का होगा...

रिचा- क्या...आपके मन मे क्या चल रहा है...पहले बताओ...फिर मैं साथ दूगी...

सरिता- मेरे प्लान इतना ही है कि मैं तुम्हारे ज़रिए आज़ाद को रंगे हाथ पकड़ लूँ और फिर उसे बर्बाद कर दूं...

रिचा- आज़ाद अंकल की बर्बादी..हाँ..

सरिता- ठीक सुना...अब बोलो..

रिचा(गुस्से के साथ)- चुप कर साली ..तेरी हिम्मत कैसे हुई ऐसा सोचने की...

सरिता(गुस्से मे)- तू चुप कर...मैं अभी सबको बता दूगी फिर तू भी गई और आज़ाद भी...

रिचा- तो जा...बता दे...फिर खुद ही देख लेना कि तेरा क्या हाल होगा...कोई नही मानेगा...तेरा पति भी नही...समझी..

सरिता- चुप कर ...अभी तो रंडी की तरह चुद रही थी और अब ऐसे तेवेर...

रिचा- हाँ हूँ मैं रंडी...आज़ाद की रखेल...तो तुझे क्या ..तू क्यो जलती है...तुझे भी चुदना है तो बता..मैं तुझे भी चुदवा दूगी...

सरिता- चुप्प्प्प्प्प...तेरी हिम्मत कैसे हुई..

सरिता ने रिचा को मारने के लिए हाथ उठाया तो रिचा ने हाथ पकड़ लिया....

रिचा- ओये...मैं चुप हूँ तो मुझे कमजोर मत समझ...समझी...

रिचा ने सरिता का हाथ झटका और जाने लगी ...फिर पलट कर बोली...

रिचा- तुझे जो करना है कर ले...मैं तो आज़ाद अंकल से रोज चुदुगि...और हाँ...उनके खिलाफ कुछ करने से पहले सोच लेना...वरना तुझे पूरे गाओं की रंडी बना देगे वो...समझी...साली कुतिया...हहातटत्त..

सरिता सोच रही थी कि वो रिचा का इस्तेमाल करके आज़ाद को फसा देगी..पर रिचा तो उसकी बिना लंड के गान्ड मार कर चली गई....

सरिता वहाँ ऐसे खड़ी थी जैसे कोई किसी रंडी को चोद कर नंगा छोड़ गया हो और वो भी बिना पैसे दिए....हाहाहा

सरिता इस बात को याद करते ही गुस्से से लाल हो गई...और उसने सोच लिया कि एक दिन इस रिचा से हिसाब बराबर कर के रहेगी....और फिर उठकर बाथरूम मे घुस गई......

 


आकाश, रागिनी , सोमी और धर्मेश की मौसी ...धर्मेश के घर पहुच गये....

थोड़ी देर तक गुप-सूप करने के बाद धर्मेश की मौसी उपेर सोने चली गई ...

रागिनी ने आकाश को नीचे के एक रूम मे भेज दिया और खुद सूमी के साथ दूसरे रूम मे चली गई....

आकाश रूम मे आ कर सोफे पर बैठ गया और रिलॅक्स करने लगा....

थोड़ी देर बाद ही रागिनी आकाश के पास आ गई...और सामने खड़ी हो गई...

रागिनी-हेलो भाई... क्या कर रहे हो...

आकाश- कुछ नही बस रेस्ट कर रहा हूँ...

रागिनी ने ड्रेस चेंज कर ली थी और इस समय उसने एक मिनी पेंट और टी-शर्ट पहन रखी थी...

रागिनी की पेंट मे उसकी जाघे सॉफ नज़र आ रही थी और उसकी टी-शर्ट मे उसके बूब्स अलग दिख रहे थे...

आकासक तो रागिनी को देख कर ही गरम हो गया...

रागिनी आ कर आकाश के साथ बैठ गई...

रागिनी- क्या हुआ नीद नही आ रही...??

आकाश- नही..बस...थोड़ी देर बाद सो जाउन्गा...

फिर दोनो थोड़ी देर चुप रहे...और चोर नज़रो से एक-दूसरे को देखते रहे...फिर आकाश ने खामोशी तोड़ी...

आकाश- वो सूमी कहाँ है..??

रागिनी- वो तो...सो गई..आज थक गई थी ना डॅन्स करके...

आकाश- ओह..हा...अच्छा डॅन्स किया था उसने...

रागिनी- वैसे तुम भी डॅन्स अच्छा करते हो...

आकाश- अरे मैं कहा...हाँ...आप मस्त करती हो...

रागिनी - तुम भी थक गये होगे ना..कुछ लाउ तुम्हारे लिए...???

आकाश- नही...थॅंक्स...

रागिनी- तुम कहो तो कुछ गरमा-गरम दूं..

आकाश- हूँ...मतलब..??

रागिनी- मतलब ..वो...चाइ बना दूं....

आकाश- नही...नही चाहिए...

रागिनी- अरे भाई..तुम तो बड़े संकोची हो...तुम्हारे मुँह मे भी दे दो तब भी नही पीते...

( रागिनी की बात सुनकर आकाश को स्टोर रूम की याद आ गई...जहाँ रागिनी के बूब्स आकाश के मुँह पर दबे हुए थे...)

आकाश ने रागिनी को देखा तो वो मंद-मंद मुस्कुराते हुए आकाश को देख रही थी...

रागिनी- क्या हुआ...कहो तो अभी पिला दूं..

आकाश(चौंक कर)- हू..क्या..??

रागिनी- मतलब चाइ बना कर पिला दूं...

अब आकाश रागिनी की डबल मीनिंग बातो को समझ गया था...पर अभी भी वो ये सोच कर चुप रहा कि वो उसके दोस्त की दीदी है....

रागिनी- हेलो...क्या हुआ..

आकाश- क्क़..कुछ नही...क्या बोला आपने...

रागिनी- मैने कहा की जो भी चाहिए खुल के माँग लेना...मैं सब दे दुगी...

आकाश(मुस्कुरा कर)-ह्म्म..जी ठीक है...

रागिनी(मन मे)- कितना भाव खा रहा है...सब समझ गया फिर भी...पर मैं भी पीछे नही हटुँगी...आज तो तुम्हे अपना बना के रहूंगी...

आकाश( मन मे)- साली मानेगी नही...लगता है आज इसका कांड हो ही जायगा...

रागिनी- तो...

आकाश- तो..क्या...??

रागिनी- बोलो ना...क्या चाहिए...??

आकाश- ह्म्म..जो आप प्यार से दे दे..मैं सबके लिए तैयार हूँ...

आकाश ने सोच लिया था कि अब रागिनी की चुदाई कर ही देता हूँ...इसलिए आकाश ने रागिनी की आँखो मे देखते हुए बड़े प्यार से ये बात बोली...

 


आकाश को यू घूरते हुए देख कर रागिनी सहम गई और नीचे देखने लगी.....

आकाश- वैसे आपकी बहुत चिकनी थी...

राज्ञी(सकपका कर)- क्या..??

आकाश- वो आपकी पेंट ...जिससे आप फिसल रही थी मेरे हाथ से...

रागिनी(शरमाते हुए)- ह्म...वैसे उसे लेग्गि बोलते है...

आकाश- अच्छा...और वो खुसबु आ रही थी..वो...

रागिनी(मुस्कुराते हुए)- वो तो बॉडी स्प्रे की खुसबु थी...

आकाश- पर अब नही आ रही...

रागिनी- मैने अभी भी लगाया हुआ है...आ तो रही है(अपने आपको सूंघ कर)

आकाश- मुझे नही आ रही...शायद आप दूर हो इसलिए...थोड़ा पास आओ आप...

रागिनी तो यही चाहती थी...तो वो खिसक कर आकाश के पास आ गई...

रागिनी- अब आई ना...

आकाश- नही तो...

रागिनी- पर..अब तो मैं बिल्कुल पास मे हूँ...

आकाश- ह्म्म..पर उतने नही जितने दोपहर मे थे...शायद इसीलिए नही आ रही...

रागिनी- अरे वैसे ही तो है...

आकाश- नही ना...दोपहर मे मेरा मुँह आपके सीने के पास था..तब आई थी खुसबु...

आकाश की बात से रागिनी शरमा गई और समझ भी गई कि आकाश भी अब मज़े लेने के मूड मे है...

रागिनी जल्दी से उठी और दोनो टांगे आकाश की टाँगो के साइड करके उसकी गोद मे बैठ गई...और उसके सिर को पकड़ के बैठ गई...

रागिनी- अब आई...

आकाश(सिर हिला कर)- ना..अभी नही...

रागिनी थोड़ा और आगे हो गई...अब उसकी चूत का हिस्सा आकाश के लंड के उपेर आ गया था...

रागिनी- अब...

आकाश- नही...थोड़ा और पास...

रागिनी ने आगे सरक कर अपना पेट आकाश के पेट से मिला दिया और आकाश के सिर को अपने बूब्स पर दबा दिया...

रागिनी- आअहह...अब आई ना...ह्म

आकाश- हाँ...अब आई...मस्त खुसबु है..

रागिनी- ह्म्म..अच्छे से सूघ लो..

आकाश ने रागिनी की कमर को पकड़ा और उसके बूब्स को टी-शर्ट के उपेर से चूमने लगा...और रागिनी सिसकने लगी...

रागिनी- आहह..भाई..अच्छे से मज़े ले लो...आअहह..

आकाश बूब्स को मुँह से दबाता कभी चूमता और रागिनी मस्ती मे कराहती ...अब आकाश का लंड भी कड़क हो कर रागिनी की गान्ड मे चुभने लगा था..

थोड़ी देर बाद रागिनी ने अपना एक हाथ आकाश के लंड पर रखा...

रागिनी- ओह्ह..भाई...ये क्या है..

आकाश-अच्छा...अब इतनी भोली मत बनो...ये तुम्हारे काम की चीज़ है...खुद देख लो...

रागिनी भी इसी इंतज़ार मे थी...रागिनी जल्दी से गोद से नीचे आई और आकाश भी खड़ा हो गया....

रागिनी ने आकाश का पेंट नीचे किया और फिर लंड को बाहर कर दिया....

आकाश का लंड सामने आते ही रागिनी की आँखे बड़ी हो गई...और वो लंड को पकड़ कर हिलाने लगी...

आकाश- क्या हुआ दीदी...पहले कभी नही देखा क्या..??

रागिनी- देखा तो है...पर फिल्म मे...सच मे तो आज ही देखा ...

आकाश- तो फिर..अब क्या इरादा है...

रागिनी- अभी बताती हूँ...

और रागिनी ने आधा लंड मुँह मे भर लिया...और चूसने लगी...

आकाश- आहह...दीदी...ये कहाँ से सीखा...

रागिनी(लंड को मुँह से निकाल कर)- फिल्म मे देखा और रब्बर का लंड भी चूसा है....

आकाश- ह्म्म..करती रहो...

रागिनी ने फिर पूरे जोश से लंड चूसना शुरू कर दिया....

रागिनी- सस्स्रररुउउप्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प्प.....सस्स्स्रर्र्ररुउउउप्प्प...सस्स्रररुउउप्प्प्प....

आकाश- ह्म्म..ऐसे ही...थोड़ा और लो मुँह मे...आअहह..

रागिनी- उउंम..उउंम...सस्स्रररुउउप्प..आहह..सस्रररुउपप...उउंम..उउंम्म..उउंम..

रागिनी ने धीरे-धीरे पूरा लंड मुँह मे भर लिया...अब लंड उसके गले मे दस्तक दे रहा था...

रागिनी पर हवस सवार हो चुकी थी और वो लंड को तेज़ी से चूसने लगी....

रागिनी- उउंम्म..उउंम...उउंम्म..उउंम्म..उउंम्म...

आकाश- आहह...दीदी...ज़ोर से...एस्स...और तेज...आअहह...

रागिनी- उऊँ..उउंम..उउंम..उउंम्म..उउंम...

 


थोड़ी देर की लंड चुसाइ से लंड पूरा खड़ा हो गया और आकाश ने रागिनी को खड़ा कर लिया...

आकाश ने रागिनी की टी-शर्ट उपेर कर दी और उसके बूब्स सामने आ गये...रागिनी ने ब्रा नही पहनी थी...

आकाश- क्या बात है दीदी...पहले से रेडी होकर आई थी...

रागिनी- ह्म्म...अब किसका इंतज़ार है...

रागिनी ने आकाश को दावत दे दी और आकाश उसके बूब्स को ज़ोर से मसल्ने लगा...रागिनी भी आकाश का लंड हिलाते हुए आकाश को किस करने लगी......

रागिनी- उउंम...उउंम..आहह...आराम से भाई...

आकाश- ह्म्म..

और फिर से दोनो किस करने लगे...

थोड़ी देर तक आकाश ने बूब्स मसल कर मज़ा लिया और फिर वो घुटनो पर बैठ कर बूब्स को चूसने लगा..

आकाश ने अपनी जीभ रागिनी के निप्पल पर फिरानी शुरू की तो रागिनी की आह निकलने लगी...

रागिनी- आहह..भाई...करते रहो..उउउंम्म...

आकाश- सस्ररुउुउउप्प...सस्ररुउपप...सस्ररुउप्प्प...

रागिनी- ओह्ह भाई...ऐसे ही ..आहह...

आकाश निप्पल चूस्ते हुए रागिनी के पेंट को निकाल देता है और पैंटी के उपेर से ही रागिनी की चूत को सहलाता है...

रागिनी- आहह...करते रहो भाई...मज़ा आ रहा है...आहह...

आकाश ने फिर रागिनी के एक बूब्स को मुँह मे भरा और चूसने लगा..साथ ही साथ अपना हाथ रागिनी की चूत पर फिराता रहा...

रागिनी- उउंम...आहह..भाई...चूस लो...आअहह...माआ..ऐसे ही भाई...उउंम..

आकाश- सस्ररुउपप...सस्ररुउउप्प्प..सस्ररुउप्प्प..उउंम्म..उउंम..उउंम..

अब आकाश पूरा गरम हो गया था और वो रागिनी के बूब्स को ज़ोर से चूस्ते हुए काट भी रहा था...

रागिनी- आईईइ..भाई..काटो मत ना..आहह...नही ना...ओह्ह..प्ल्ज़्ज़...आहह..म्म्मा.आ

आकाश ने रागिनी के दोनो बूब्स को चूस कर लाल कर दिया और साथ मे उसके हाथ ने रागिनी की चूत का पानी निकाल दिया...

फिर आकाश ने रागिनी की पैंटी निकालनी शुरू की और साथ मे अपनी जीभ उसके पेट पर फिराने लगा...

पैंटी अलग करने के बाद आकाश हाथ से रागिनी की चूत का दाना सहलाने लगा...

और जीभ फिराते हुए रागिनी की नाभि पर पहुच गया...और जीभ नाभि मे डाल दी...

रागिनी तो जैसे पागल ही हो गई थी और ज़ोर-ज़ोर से आवाज़े निकालने लगी...

रागिनी- आहह...भाई...क्या किया...आहह...पागल कर दोगे तुम...ओह्ह..माँ...खा जाओ मुझे...आअहह..

आकाश भी रागिनी की नाभि चाट कर गीली कर दी और फिर रागिनी को सोफे पर लिटा दिया...

सोफे पर लेट कर रागिनी ने अपनी टांगे खोल दी और आकाश ने भी जल्दी से रागिनी की चूत को मुँह मे भर लिया...

आकाश- उउंम..उउंम..उउंम..

रागिनी- आहह...आअहह...भाई...खा जाओ...आअहह ..

आकाश रागिनी की चूत को दाँत गढ़ा रहा था और चूसे जा रहा था...

रागिनी भी अपनी गान्ड उठा कर चूत को आकाश के मुँह मे भर रही थी...

रागिनी- हाँ भाई...खा जाओ...ऊहह..ज़ोर से..यस...यस..भाई...आअहह

आकाश ने फिर चूत के अंदर अपनी जीभ घुसा दी...

रागिनी- आआहह....ज़ोर से भाई...ओह्ह ...येस्स...एस्स..येस्स..

रागिनी जोश मे आकर अपने हाथ से आकाश के सिर को चूत पर दबाने लगी...

थोड़ी देर बाद आकाश ने चूत चूसना बंद किया और कड़ा होकर अपने लंड को चूत पर सेट किया...

आकाश ने हल्का सा धक्का मारा तो आधा सुपाडा चूत मे चला गया...

आकाश समझ गया कि चूत खुली हुई है..

आकाश- दीदी...कितनों का लिया है..??

रागिनी- भाई तुम पहले मर्द हो जिसका लंड इस चूत को छु रहा है...

आकाश- झूठ नही...चूत खुली हुई है...

रागिनी- सच मे भाई..तुम पहले हो...

आकाश- तो ये चूत कैसे खुल गई दीदी...

रागिनी- वो तो रब्बर के लंड से...मेरी सहेली ने खोली थी..

आकाश- ह्म्म..तो अब असली लंड का मज़ा लो...

और आकाश ने एक जोरदार धक्का मारा और आधे से ज़्यादा लंड अंदर...

रागिनी- आऐईयईईईईई...माअरररर...गाआइ...आआअहह...आअहह...

आकाश- बस थोड़ा दर्द और...

और आकाश ने दूसरा धक्का मार कर पूरा लंड डाल दिया...

रागिनी- आअहह...भाई...ओह्ह...मारररर..गई...आहह..माआ...ऊहह..ऊहह..

रागिनी की सील टूटने के बाबजूद भी उसने लंड पहली बार अंदर तक लिया था...इसलिए वो दर्द से तड़प रही थी...

आकाश ने रागिनी को नॉर्मल करने के लिए झुक कर उसे किस करना शुरू कर दिया और हाथ से उसकी गान्ड सहलाने लगा...

 


थोड़ी देर बाद जब रागिनी नॉर्मल हुई तो उसने अपनी गान्ड हिलाना शुरू कर दिया....

रागिनी- आहह..अब ठीक है भाई...शुरू हो जाओ...

आकाश ने रागिनी का पैर उठाया और धक्के मारना शुरू कर दिया....

रागिनी- आअहह...आहह..आहह...उउंम..करते रहो भाई..आहह..

आकाश- कैसा लग रहा दीदी ...असली लंड खा कर..हाअ..

रागिनी-उूउउम्म्म्ममम…..पहली बार…..इतना..आहह…मज़ा……आअहह……

आकाश- हाँ दीदी...मज़े लो...यस...यस...यस...

रागिनी- आहह…मज़ा…एयेए…गग्गेययय्या…आहह…..आहह..आह...

आकाश अब फुल स्पीड से रागिनी को चोदने लगा और रागिनी गांद उठा -उठा कर आकाश का लंड खा कर मज़े लेने लगी....

आकाश- यस...एस्स...येस्स..वह दीदी...मस्त चूत है...एकदम टाइट ...आहह...

रागिनी-तो मज़े लो...आहह...ज़ोर से भाई...और तेजज ..आअहह..

आकाश 10 मिनट रागिनी को पूरी तेज़ी से चोदता रह….और चुदाई की मस्ती मे रागिनी झड़ने लगी…

रागिनी-आहह...म्मायन्न्न...आइी...ऊहह...भाई...ईसस्स...एस्स..आहह...आऐईयईई...

ओर रागिनी झड़ने लगी ओर चुदाई की आवाज़े बदलने लगी

आअहह…आह..यईीसस…..उउंम…फ़फफुऊूउक्च..फ्फक्च…फ्फूककच्छ……ईएहह..ईएहह..आअहह..ऊहह…आहह..आह

….फ्फक्च्छ..फ़्फुूककच्छ..आहह..अहहह….आअहह

ऐसी आवाज़ो के साथ रागिनी झड गई...उसके झाड़ते ही आकाश ने लंड निकाल लिया और खड़ा हो कर रागिनी की चूत देखने लगा ....

रागिनी- आहह..भाई...क्या हुआ...??

आकाश- आज तुम्हारी चूत का उद्घाटन हो गया...

रागिनी- ह्म्म..पर रात अभी बाकी है भाई...

आकाश- जानता हूँ...चलो अब पलट जाओ...तुम्हे कुतिया बना कर चोदता हूँ....

रागिनी तुरंत पलट कर सोफे पर कुतिया बन गई...और आकाश ने पीछे से लंड को अंदर डाला और कमर पकड़ कर चुदाई शुरू कर दी...

रागिनी- आहह..भाई...बहुत एक्सपर्ट हो चोदने मे...आअहह

आकाश- हाँ दीदी..अब बस देखते जाओ...तुम्हे कैसे- कैसे चोदता हूँ...ये लो....यीहह

रागिनी- आअहह...आराम से भाई...ओह्ह...ऊहह..आहह

आकाश-एसस्स…ये.लो…ईएह..ईएह....

रागिनी-आहह..अहहह..अहहह….ईीस...और टटेज….आअहह..और तेजज....

आकाश-ईीस्स..बेबी….यीह….यस..बेबी...यस...

रागिनी-ज़ूओरर…सससी…आहहह…आऐईइईसीए…हहिी…आहहह….ज़्ज़ूऊररर…ससी..

रागिनी पूरी मस्ती मे आवाज़ करती हुई अपनी गान्ड पीछे कर- कर के आकाश का लंड ले रही थी.....और आकाश भी फुल मस्ती मे रागिनी की चूत के परखच्चे उड़ा रहा था....

आकाश- दीदी...लंड की सवारी करोगी...

रागिनी- आअहह...यस भाई...यस...कराओ ना...

आकाश जल्दी से सोफे पर लेट गया और रागिनी को उपेर आने का बोला...

रागिनी अपनी चूत मे लंड भरते हुए आकाश के उपेर बैठ गई और आकाश ने रागिनी की गान्ड पकड़ के उसे उछालना शुरू कर दिया...

आकाश- मज़ा आया ना दीदी...हाँ

रागिनी- उउंम..हाँ भाई...बहुत...आहह..आहह..आहह..आअहह..

आकाश- जंप दीदी जंप...यह..

रागिनी- ओह यस..ओह येस्स..येस्स..एस्स..एस्स...

आकाश- आहह...गान्ड तो बड़ी मस्त है...मारनी पड़ेगी..

रागिनी- आअहह...मार लेना...ओह्ह..एस्स..एस्स..एस्स..आअहह...आहह...

आकाश- यीहह..दीदी...जंप...तेजज..तेजज..और तेजज..यहह...

रागिनी- यस भाई...यस...ओह...एस..एस्स. आहह......

करीब 5 मिनट बाद रागिनी फिर से झड़ने लगी और चुदाई की आवाज़े रूम मे गूंजने लगी....

आह..आ..त्ततप्प्प..त्ततप्प..त्तप्प..आहह..ईएसस..ऊहह..ज्जूओर्र…ससी..…आअहह…त्तप्प…त्तप्प…ऊहह…यईीसस…अहहह..मैं गािईई...आआहह...

रागिनी के झड़ने के साथ ही आकाश भी झड़ने के करीब आ गया...

आकाश ने रागिनी को सोफे पर लिटाया और उसके उपेर लंड रस की पिचकारी मार दी...

पूरा झड़ने के बाद आकाश रागिनी के सिर की तरफ बैठ गया....

तभी रूम का गेट खुलने की आवाज़ आई ...और साथ मे एक आवाज़ और आई...

"साली... कमीनी...क्या हो रहा है ये सब....तुझसे ऐसी उम्मीद नही थी...."

 


ये आवाज़ सूमी की थी...जो गेट पर गुस्से मे खड़ी थी...

सूमी को देखकर रागिनी तो वैसे ही पड़ी रही...पर आकाश थोड़ा सहम गया और अपना लंड छिपा लिया....

सूमी इस समय सिर्फ़ एक नाइटी मे थी जो उसकी जाँघो तक थी....

सूमी गुस्से मे अंदर आई और रागिनी के दोनो तरफ पैर रख कर उपेर बैठ गई...और उसके कंधे पकड़ कर बोली...

सूमी- क्या है ये सब ...हाँ..

रागिनी- आहह...तू गुस्सा क्यो हो रही है...आराम से...

सूमी- आराम गया भाड़ मे...

रागिनी- ओके...गुस्सा छोड़ ...ये बता कि तू जाग रही थी क्या...

सूमी-हा...मैं जाग भी रही थी और तेरी चुदाई भी देख रही थी.....

रागिनी- ह्म्म ..तब तो तेरी चूत ने पानी छोड़ दिया होगा...हाँ..

सूमी- हाँ यार...बहुत...मसल-मसल कर लाल पड़ गई...

और दोनो हँसने लगी...पर आकाश उनकी बात सुनकर थोड़ा कन्फ्यूज़ हो गया था. .....

तभी सूमी ने झुक कर रागिनी को किस करना शुरू कर दिया...और ये देख कर आकाश समझ गया कि ये दोनो की प्लॅनिंग थी...

सूमी- उउंम..उउंम..उउंम.....आअहह...

रागिनी- उउंम..उउंम्म...उउउम्म्मह...

सूमी- तो आख़िर तूने असली लंड खा ही लिया...

रागिनी(मुस्कुरा कर)- हाँ...वो भी तगड़ा वाला...

सूमी- ओह...तब तो तेरे मज़े हो गये..ह्म्म

रागिनी- हाँ मेरी जान...बहुत मज़ा आया...

सूमी- कमीनी...(और सूमी फिर से रागिनी को किस करने लगी)

रागिनी ने भी सूमी को बाहों मे ले कर किस करना शुरू कर दिया....और सूमी की गान्ड पर हाथ फिराने लगी....

रागिनी के हाथो से सूमी की नाइटी कमर पर आ गई और उसकी पैंटी मे कसी गान्ड आकाश की नज़रों मे आ गई....

रागिनी और सूमी एक-दूसरे के होंठ चूस रही थी और उनकी आवाज़े सुनकर और सूमी की गान्ड देख कर आकाश गरम होने लगा और अपना लंड हिलाने लगा....

थोड़ी देर बाद सूमी की नज़र आकाश पर पड़ी....

सूमी- अरे आप क्यो मेहनत कर रहे है...हम कब काम आएँगे...लाइए ..मैं हिला देती हूँ...

रागिनी- हाँ साली...तू तो पक्की रंडी है...(आकाश से) भाई ..पकड़ा दो इसे..

सूमी ने आकाश का लंड पकड़ा और हिलाना शुरू कर दिया...

सूमी- अच्छा...लंड तूने खाया और रंडी मैं ...साली कुतिया...

रागिनी- तो अब तू भी खा ले...भाई का मस्त है ना...

सूमी(लंड हिलाते हुए)- हाँ मेरी जान...मस्त है...मज़ा आएगा...

रागिनी(सूमी के बूब्स मसल्ते हुए)- तो फिर जल्दी से खड़ा कर दे...दोनो मिल कर खाएँगे...

सूमी- आअहह...रंडी आराम से...और हाँ..अब तो ये रात भर हमारा है...छक कर खाएँगे....

रागिनी- तो जल्दी कर ना....हाथ छोड़..मुँह का इस्तेमाल कर...जल्दी खड़ा होगा...

सूमी थोड़ा आगे हुई और उसका मुँह आकाश के लंड के उपेर आ गया और उसके बूब्स रागिनी के मुँह पर आ गये....

अब सूमी ने आकाश का लंड मुँह मे भर लिया और रागिनी ने सूमी के बूब्स बाहर निकाल कर चूसना शुरू कर दिया....

सूमी- उूुुुउउम्म्म्ममम....आअहह...उउंम..उउंम्म..उउउंम्म..उउम्म्म्मम....

आकाश- ओह्ह...तू सच मे रंडी है...क्या चूस्ति है....

रागिनी- सस्ररुउप्प्प....सस्स्ररुउउप्प्प..सस्स्रररुउउप्प्प्प....

सूमी- उम्म्म..उउंम..उउंम..उउंम्म....

आकाश- ज़ोर से ...आहह....पूरा चूस ना...

रागिनी- सस्स्रररुउउप्प्प....सस्रररुउउप्प्प.....सस्स्रररुउउउप्प्प्प्प......

सूमी ने आकाश का लंड चूस-चूस कर खड़ा कर दिया और रागिनी ने सूमी के बूब्स को चाट-चाट कर लाल कर दिया....

रागिनी- आअहह...अब अकेली ही चूस्टी रहेगी...मुझे भी दे ना....

सूमी- उउंम..उउंम..उउंम..

रागिनी- अरे बस कर रंडी...मुझे दे...तू तो खाती रहती है...मुझे तो पहली बार मिला ..

सूमी- उउंम..आआहह...हा साली...चूस ले...

और सूमी आकाश का लंड छोड़ देती है और रागिनी अपना मुँह खोल देती है...

आकाश ने झुक कर अपना लंड रागिनी के मुँह मे भर दिया और वहाँ सूमी भी नीचे आ कर रागिनी की चूत चाटने लगी....

 
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