मैने ज़िया की गान्ड को थपथपाते हुए फुल स्पीड मे चोदना शुरू किया ओर ज़िया ज़ोर-ज़ोर से आवाज़े निकालने लगी ऑर चुदाई का रंग चरम पर पहुच गये…
ज़िया-आअहह…आअहह…ऊररर…तीएजज,,,,आहह,,,,,,आअन्न्ंदडाा ….ताअक्कक….म्म्मा आ….उूउउफ़फ्फ़…म्म्माप….फ़फफादद्ड़..दद्दूव…आअहह...उूउउफ़फ्फ़..म्म्मा......आाऐययईई.....म्म्माहआ...आअहह
मैं- आहह..ईएहह….एस्स..एस्स….ये..ले…...
ज़िया- आअहह…आअहह…ऊररर…तीएजज,,,,आहह,,,,,,आअन्न्ंदडाा ….ताअक्कक….म्म्माहआ….उूउउफ़फ्फ़…माआ…म्माईिईन्न्न…..म्म्माअ…आआईइ……आअहह…ऊओह
मैं- साली.... ओर तेजज्ज़ डालु..
ज़िया-आअहह….दददााालल्ल्ल्ल्ल्ल…द्ददी…..आआअहह…फासस्थटत्त…आअहह
..यस…यस..एस…आअहह....तीएजज्ज़....ऊओरर..त्त्टीज्जज....आहह...उउफफफ्फ़...आआहह
मैं-यस बेबी..ये ले..…ये ले
मैने तेज़ी से ज़िया की चुदाई कर रहा था ऑर ज़िया की गान्ड पर मेरी जाघे इतनी तेज़ी से टकराने लगी कि उसकी गान्ड लाल पड़ने लगी …..15-20 मिनिट की चुदाई से ज़िया फिर से झड़ने लगी ओर उसकी सिसकारिया तेज होने लगी....
ज़िया-आअहह…आहह…हहा…ऐसे ही करो..आहह…..आहहह…अहहह..यईएसस..सहहाः…ज्जॉर्र्र..ससी..आहहह....फ़फफात्तत्त…..प्प्पाट्त्ट…आहः..उउंम…हहूऊ…
आअहह.ययईएसस…आऐईइईसीएहहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…..तीज़्ज़ज्ज…हहाअ…उउउफफफ्फ़...
.यसस्सस्स…आअहह…आअहह…ययईईसस्स….ऊऊहह…आअहह
मैं-यस बेबी यस
ज़िया- अहः..उउंम…हहूऊ…आअहह.ययईएसस…आऐईइईसीए हहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…..एसस्सस्स…आअहह…फफफफफफुऊफ़ुऊूक्कककककक…म्माईिईन्न्न,….आआईयइयाय …आअहहहह…ऊओ…म्मा….ऊहह…ऊहह..ऊहह
ऐसे चिल्लाते हुए ज़िया झड़ने लगी ऑर उसका चूत रस मेरे लंड से होते हुए निकल कर फुकछ-फुकछ की आवाज़े करने लगा…
मैं भी झड़ने ही वाला था तो मैने कहा…
मैं- मैं भी आ रहा हूँ…यही डाल दूं......
ज़िया- डाल दो...आअहह...
मैं- तो लो...यीहह...यीहह......एस्स बेबी...उउंम...यईहह..
मैने ज़िया की चूत लंड रस से भर दी और फिर हम लेट कर गले लग गये और किस करने लगे...
थोड़ी देर बाद हम नॉर्मल हुए तो हम ने कंबल ओढ़ा और बाते करने लगे...
मैं- तुम इतनी वाइल्ड चुदाई पसंद करती हो....??
ज़िया- ह्म्म..इसमे मज़ा बढ़ जाता है...और तुमने तो बहुत मज़ा दिया...
मैं- ह्म..बट सॉरी...इतना दर्द दिया ...सॉरी दीदी...
ज़िया- ना...दीदी नही...कुतिया बोलो...हहहे...
मैं- हाहाहा...ओके..तो मेरी कुतिया...मज़ा आया ना...
ज़िया- ह्म..बहुत..अब थोड़ा रेस्ट कर लेते है...फिर रात मे जहा स्टे करेंगे..वहाँ देखेंगे...ओके...वैसे तुम्हे मज़ा आया ना...सच बोलो..
मैं- सच....बहुत मज़ा आया...
फिर हम कंबल के अंदर पूरे नंगे एक-दूसरे से चिपक कर लेट गये...
और बाहर हमारी चुदाई देख कर एक शक्स अपने आप से बोला...... "सच मे ..मज़ा तो मुझे भी बहुत आया...."
थोड़ी देर रेस्ट करते हुए..मैं हल्का सा नीद की आगोश मे चला गया....
थोड़ी देर बाद मुझे अकरम की आवाज़ आई...
अकरम- उठ अंकित....उठ भी जा साले.....
मैने आँख खोली तो अकरम मुझे हिला रहा था...और तभी मुझे अहसास हुआ कि बस रुकी हुई है....
मैं- उउउंम....क्या है बे...
अकरम- उठ साले....हम रात यही रुकेगे...आराम से सो लेना...अभी नीचे चल...
मैं- ह्म्म...चलता हूँ...
तभी मुझे याद आया कि मैं कंबल मे पूरा नंगा लेटा हूँ...थॅंक गॉड मैं कंबल से निकला नही....
मैं- तू चल ना...आता हूँ...
अकरम- ह्म्म..आजा जल्दी...
अकरम नीचे निकल गया और मैं रिलॅक्स हो गया ...नही तो अकरम को क्या समझाता कि मैं नंगा क्यो लेटा हूँ...
मैने जल्दी से अपने कपड़े पहने और फिर ज़िया के बारे मे सोचने लगा कि वो कब उठ गई और कपड़े पहन के निकल भी गई...
मुझे ज़िया पर गुस्सा आ रहा था...कम से कम जगा कर तो जा सकती थी...
मैं गुस्से मे नीचे उतरा तो पता चला कि हम एक गाओं मे किसी बड़ी हवेली के सामने खड़े थे...
सब लोग अभी भी बाहर खड़े हुए थे...फिर मैने ज़िया को देखा तो उसने मुझे देख कर स्माइल कर दी और उसकी स्माइल ने मेरा गुस्सा और बढ़ा दिया...
पर इस वक़्त उससे बात करना मुश्किल था....फिर मैने सोचा कि इसे तो बाद मे देखगे...पहले इस जगह का तो पता करूँ...
मैं- अकरम...हम कहाँ है अभी ...
वसीम(बीच मे)- बेटा ये हमारे दोस्त की हवेली है...वो इसी गाओं का है...
मैं- पर हम यहाँ क्यो रुके अंकल...आइ मीन किसी होटेल मे रुक सकते थे...
वसीम- बेटा...होटल मे रूम्स मिलने मे प्राब्लम होती और फिर होटेल के लिए आगे सहर जाना पड़ता जो काफ़ी दूर है...रात हो रही थी तो यही रुक गये...
सरद- डोंट वरी बेटा..ये हवेली होटेल से कम नही...तुम्हे कोई प्राब्लम नही होगी..
मैं- अरे..ऐसा कोई मतलब नही था मेरा...मैं तो बस पूछ रहा था ..
वसीम- ओके...अब सब अंदर चलो...नोकर हमारा सामान ले आएँगे....
फिर हम सब हवेली मे चले गये...अंदर आते ही मैने देखा कि ये हवेली वाकई लाजवाब है...
सुख-सूबिधा के सारे सामान मौजूद थे....रात बिताने के लिए होटेल से अच्छी ही थी...
हम सब हॉल मे जमा हो गये...तभी मेरे आदमी का कॉल आ गया....मैं उठ कर थोड़ा दूर आया और कॉल पिक की...
( कॉल पर )
मैं- हाँ..क्या हुआ...??
स- अभी कहाँ हो तुम...??
मैं- मैं तो एक गाओं मे हूँ...असल मे हम अकरम की फॅमिली के साथ **** गाओं जा रहे है...क्यो क्या हुआ...
स- ह्म्म...तो कौन - कौन है तुम्हारे साथ...???
मैं- मेरे साथ...(मैने सबके बारे मे बता दिया)
स- ह्म्म...तो थोड़ा साबधान रहना...
मैं(चौंक कर)- साबधान...किससे...
स- अरे अपने दुश्मनो से और किससे...
मैं- पर यहाँ कौन है मेरा दुश्मन....और जो मेरे दुश्मन है...उन्हे क्या पता कि मैं कहाँ हूँ...
स- तुम भी ना....जब संजू और पूनम तुम्हारे साथ है तो फिर...
मैं(बीच मे)- ह्म्म...पता था मुझे...वही से कुछ बात लीक हुई होगी...बट डोंट वरी...हम उस जगह नही जा रहे जिस जगह डिसाइड हुआ था...
स- मतलब...
मैं- सुनो(और मैने प्लान चेंज का पूरा मामला बता दिया)
स- ह्म्म...इसमे तुम्हे कुछ अजीब नही लगा...
मैं- हाँ..लगा था...अब मेरी बात ध्यान से सुनो...$$$$$%$%%%$$$
स- ह्म्म्न..थोड़ा टाइम दो...सब पता करता हूँ....
मैं- ओके..और हाँ..वो दोनो कैसे है...
स- मस्त है यार....
मैं- ओके..और बहादुर ने कुछ बोला...
स- नही..वो सिर्फ़ तुम्हारे डॅड से ही बात करेगा...
मैं- ओके..नज़र रखना...और हाँ कामिनी के उपेर भी...
स- उसकी टेन्षन मत लो...वो खुद मुझे सब बतायेगी....डोंट वरी...
मैं- गुड..चलो..बाइ...पहुच के बात करूगा...
स- ओके..बाइ...
फिर मैं फ़ोन कट कर के सबके साथ बैठ गया...तभी चाइ आ गई और चाइ पी कर वसीम ने सबको उनके रूम्स बता दिए...
नीचे 4 रूम थे...1 मे वसीम और उसकी बीवी...2 मे सरद और उसकी बीवी...3 मे मोहिनी , पूनम और जूही...4 मे शादिया अकेली ....
बाकी उपेर के 4 रूम्स मे से 1 मे अकरम, मैं और संजू चले गये...2 मे ज़िया, रूही और गुल...और 3 मे नौकरानी जो हमारे साथ आई थी...
ड्राइवर बस मे ही सोने वाला था....
हम अपने रूम मे आए और फ्रेश होकर डिन्नर करने गये और फिर अपने-2 रूम मे सोने आ गये...
अपने रूम मे आते ही हम तीनो फरन्डस ने दो-दो पेग लगाए और रेस्ट करने लगे...
थोड़ी देर बाद अकरम और संजू सोने लगे...क्योकि वो दोनो पूरे सफ़र मे जागते ही रहे थे...
तभी मुझे अपने आदमी की बात याद आई....कि अपने दुश्मनो से साबधान रहना...