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चूतो का समुंदर



मैने जूही का पैर साइड मे कर दिया...जिससे जूही गुस्सा हो गई और अचानक मुस्कुराने लगी...

मैं- क्या हरक़त है ये...

रूही- अच्छा...मैं करूँ तो हरक़त और ज़िया करे तो...

ज़िया का नाम आते ही मेरी धड़कन बढ़ गई...मुझे यकीन हो गया कि इसने कुछ तो देखा है...

पर मुझे रूही का डर नही था...डर इस बात का था कि कही अकरम को भनक ही गई तो क्या सोचेगा वो....

मैं- क्या बकवास है...ज़िया के साथ क्या...???

रूही(आगे आकर धीरे से)- ज़िया अच्छा चूस्ति है ना....ह्म

अब तो मेरी सच मे चॉक ले गई...रूही ने सब देखा था...अब समझदारी यही होगी कि रूही को मनाया जाए कि चुप रहे....

तभी रूही उठ कर जाने लगी और धीरे से बोल कर गई...

रूही- मेरा ख्याल रखना...वरना...हहहे...तुम जानते ही हो ..कि लड़कियो के पेट मे राज़ हजम नही होते....

रूही मुझे प्यार से धमकी देकर निकल गई और मैं परेसान हो कर लेट गया...

लेकिन मुझे आराम से लेटना भी नसीब नही हुआ...मुझे लेट कर 20-25 मिनिट ही हुए थे कि ज़िया फिर से आ गई...

ज़िया(धीरे से)- क्या कर रहे हो...

मैं- तुम...क्या हुआ...

ज़िया- हाँ..और कौन हो गा...और क्या हुआ मतलब...मुझे आग लगा कर खुद आराम कर रहे हो...

मैं- अच्छा..मैने क्या किया....

ज़िया- ज़्यादा भोले मत बनो...चाइ पीते हुए मेरी चूत को रगड़-रगड़ कर प्यासा कर दिया और आ कर आराम करने लगे....

मैं- ओह्ह...तो अब क्या इरादा है...

और मैने ज़िया को खीच कर अपने उपेर डाल लिया...

ज़िया- अओुच्च..आराम से मेरी जान....बहुत नाज़ुक हूँ मैं...फूल की तरह..

मैं- ओह..तब तो इस फूल को मसल कर इसका रस पीना ही पड़ेगा...

( और मैने ज़िया का एक निप्पल मरोड़ दिया)

ज़िया- आअहह...तो मसल दो ना...मैं तो कब्से तैयार हूँ...

मैं- पर मैं फूल को नंगा करके ही मसलूंगा...

ज़िया- नंगा...यहाँ...कैसे...

मैं - अब डरना छोड़ो...एक तो अंधेरा उपेर से सर्दी...तो हम कंबल मे कैसे है ..किसी को क्या खाक पता चलेगा...ह्म...

और फिर से ज़िया का निप्पल मरोड़ दिया...

ज़िया- उूउउम्म्म्म...ठीक है...तो जल्दी करो ना....

मैं- ह्म..तो शुरू हो जाओ...

मेरे बोलते ही ज़िया ने कॅबिन का परदा ठीक से लगाया और मेरे दोनो पैरो के साइड घुटनो पर बैठ गई और एक झटके मे अपना टॉप निकाल दिया....

टॉप निकलते ही उसके बूब्स मेरे सामने आ गये...

मैं- दीदी...ब्रा कहाँ है...

ज़िया- वो...मैं जब फ्रेश होने गई थी तो निकाल ली थी....न्ड हे...डोंट कॉल मी दीदी...ट्रीट मी लाइक युवर फक्किंग बिच...

मैं- ओह...तो अब नंगी हो जा मेरी कुत्ति...

ज़िया(मुस्कुरा कर)- अब पूरे टूर मे मुझे अपनी कुतिया की तरह चोदना...

मैं- हाँ क्यो नही...चल...ये स्कर्ट भी निकाल दे....

ज़िया जल्दी से पीछे लेटी और अपनी स्कर्ट को निकालते हुए अपनी टांगे हवा मे कर दी....

बाकी का काम मैने कर दिया...उसकी स्कर्ट को टाँगो से निकाल दिया...

ज़िया ने फिर मेरे लोवर को खीच कर निकाल दिया और मेरे लंड पर अपनी बड़ी गान्ड रख कर बैठ गई...मैने भी अपनी टी-शर्ट निकाल दी और अब हम दोनो पूरे नंगे थे....

 


ज़िया मेरे लंड पर अपनी चूत घिसने लगी और मैने उसके बूब्स को मसलना चालू कर दिया...

मैं- तुम्हारे बूब्स तो बस चूसने को बने है...मस्त...

ज़िया- ओह्ह..तो चूस लो ना...

मैने ज़िया को अपने उपेर झुका लिया औट उसके बूब्स को बारी- बारी चूसने लगा...और ज़िया अपनी गान्ड मेरे लंड पर घुमाती रही...

मैं ज़िया के बूब्स को कभी चूस्ता और कभी काट रहा था..और ज़िया पूरी मस्ती मे सिसकते हुए मेरे लंड पर गान्ड घिस रही थी...

मैं- उउउंम्म....उउंम..आहह...उउउंम...उउउंम.....

ज़िया- ओह्ह...आहह..काटो...आअहह...मत....उउंम्म...

मैं- चुप साली...तू मेरी कुतिया है ना...उउउंम्म...उूउउंम्म...

ज़िया- आअहह ...पता है....उउउंम्म....आअहह...आअहह...

थोड़ी देर की मस्ती मे ज़िया की चूत पानी बहाने लगी और मेरा लंड उसकी चूत के पानी से गीला होकर तैयार होने लगा....

मैं- अब जल्दी से मेरा लंड तैयार कर...फिर अपनी कुतिया की फाडनी भी तो है..

ज़िया- हमम्म...हाँ मेरे राजा...अभी करती हूँ...आहह...

ज़िया जल्दी से साइड मे आई और झुक कर मेरे लंड को चूसने लगी...

ज़िया- सस्स्ररुउप्प्प्प...सस्स्ररुउउप्प्प्प...सस्रररुउपप...सस्ररुउप्प्प...सस्दतरतुउपप...उूउउम्म्म्ममममम...

मैं- क्या बात है ....आअहह....ऐसे ही...आहह. .

ज़िया- सस्स्रररुउउउप्प्प्प्प...उउंम..उऊँ..उउंम..उउंम..उउंम..

मैं- यस...अंदर तक ले...आहह...ज़ोर से. .एस्स...एससस्स....

ज़िया पूरे लंड को गले तक भर कर चूस रही थी..और मैं मस्ती मे सिसक रहा था....

मैं- आहह...ज़ोर से...यीहह...ज़ोर से...ज़ोर से....आअहह...

थोड़ी देर लंड चुसवाने के बाद मैने उठ कर ज़िया को लिटाया और दोनो पैर एक तरफ करके उसकी चूत मे लंड सेट कर दिया...

मैं- अब तेरी फाड़ता हूँ....चूत को बाद मे चखुगा...अभी लंड ले...

ज़िया- तो डाआलूऊऊ......आअहह...

ज़िया के बोलने के पहले आधा लंड उसकी चूत मे जा चुका था...

मैं- चुप कर साली...अभी तो और जाना है..

ज़िया- आहह..आराम से...ऊहह...

और मैने दूसरे धक्के मे पूरा लंड चूत मे उतार दिया...

ज़िया- आहज..थोड़ा...रूको...ओह्ह्ह...

मैं- नही...तुझे कुतिया बनने काशौक है ना...अब देख...

और मैने ज़िया का एक बूब्स पकड़ा और उसे दबाते हुए तेज़ी से चुदाई करने लगा....

ज़िया-उूुुउउइइ…म्म्म्मउमाआ…..फफफफफ़ाआद्दद्ड…द्ददडिईई…

.आहह…हमम्म्म…उूउउम्म्म्मम…म्म्म्मुमाआररर्र्ररर…द्द्ददडाालल्ल्ल्ल्ल्लाअ..आहह…हहुउऊम्म्म्ममम्म्म

मैं- अब बन मेरी कुतिया...ये ले साली...यह...ईएह...

यईहह

ज़िया- ऊहह...म्माआ...माअर गाइ...आआअहह...

मैं- अभी तो तेरी गान्ड मरेगी...तब चिल्लाना....ले साली...मेरी कुतिया....

थोड़ी देर के बाद ज़िया का दर्द सिसकियों मे बदल गया...अब लंड उसकी चूत मे सेट हो चुका था...और वो मज़े से सिसक रही थी...

ज़िया- आहह...ज़ोर से...आहह...ऊहह....फक...फक..फुक्कक..

मैं- यीहह...टेक इट...एस्स....यीहह...

ज़िया- आहह..फक...मी...हार्डर...एस्स..एस्स..एसस्स...ओह्ह्ह...

थोड़ी देर बाद ज़िया झड़ने लगी...

ज़िया- इहह...एस्स...कूँम्मिईननगग...आहह...आहह...फक..फक्ज्क..फुक्ककक...यईससस्स...आहह..आहह...

ज़िया झड़ने के बाद शांत हो गई और मैं उसे चोदता रहा....थोड़ी देर बाद मैने लंड बाहर निकाला तो ज़िया ने उठ कर लंड को चूस लिया...

ज़िया- आहह..टेस्टी ..हाअ...अब मेरी बारी..

और ज़िया ने मुझे लिटाया और लंड को चूत मे भरके उपेर बैठ गई..मैने ज़िया की गान्ड को सहलाना शुरू किया और रिया ने लंड पर उछलना शुरू कर दिया.....

ज़िया -आअहह…आहह...आहह…उउउफ़फ्फ़….हहाअ…..

मैं-यस बेबी…जंप….याआ..यस...

ज़िया-आअहह…आहह…हहा…हाअ…आहह....

मैं-एस…जंप…ज़ोर से..कुतिया……तेज ..और तेजज....

ज़िया -हाअ..आहह…..आहहह…अहहह..यईएसस..आहह…आऐईइसस्ससी..आहहह

मैं- हाँ..ऐसे ही….ज़ोर से…

मैने ज़िया के बूब्स को हाथो से पकड़ लिया ओर मसलते हुए उसको चोदने लगा…

ज़िया भी पूरी स्पीड से उछल रही थी, उसकी मस्त गान्ड मेरी जाघो पर पट-पट कर रही थी…ऑर ज़िया चुदाई का आनद ले रही थी….

मैं-यस …जंप….य्ाआ

ज़िया-आअहह…आहह…हहा…आईसीए..आहह…..आहहह…अहहह..

यईएसस..ईसस्स..आहह

मैं- आहह…ज़ोर से…यस…

ज़िया- आहह आह…आहह

मैं-यस बेबी यस

ज़िया- अहः..उउंम…हहूऊ…आअहह.ययईएसस…आऐईइईसीए हहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…..एसस्सस्स…आअहह…

पूरे कॅबिन मे हमारी चुदाई की आवाज़े भर रही थी और हम बेफ़िक्र चुदाई के नशे मे डूबे हुए थे....

फफफफात्तत्त…..प्प्पाट्त्ट…आहः..उउंम…हहूऊ…आअहह.ययईएसस…आऐईस...हहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…

..आहह…आईइईसीए..हहीी..आहह…ज्जोर्र…सीए..यएएसस्सस्स…आअहह…ययईईसस्स….ऊऊहह

ऐसी ही आवाज़ो के साथ ज़िया मेरे उपेर झुक गई और किस करने लगी...

ज़िया- उउंम..उउंम्म..आहह...थक गई...उउंम्म...

मैने तुरंत ज़िया को कुतिया बनाया और पीछे से लंड को चूत मे उतार दिया....एक बार फिर से ज़िया कराह उठी...

ज़िया- आाआईयईईईई......

मैं- अब बनी तू कुतिया...अब देख कैसे होती है कुतिया की चुदाई....

और मैने कमर पकड़ कर तेज़ी से चुदाई शुरू कर दी.....

ज़िया- आहह….माँ…उूउउइइ…..आहह

मैं- अब तेरी फाड़ता हूँ मेरी कुतिया…

ज़िया-आअहह..फाड़ दो…आअहह…ज्ज़ोर..सी…माररू..

मैं -तो ये ले …फटी तेरी..यीहह

 


मैने ज़िया की गान्ड को थपथपाते हुए फुल स्पीड मे चोदना शुरू किया ओर ज़िया ज़ोर-ज़ोर से आवाज़े निकालने लगी ऑर चुदाई का रंग चरम पर पहुच गये…

ज़िया-आअहह…आअहह…ऊररर…तीएजज,,,,आहह,,,,,,आअन्न्ंदडाा ….ताअक्कक….म्म्मा आ….उूउउफ़फ्फ़…म्म्माप….फ़फफादद्ड़..दद्दूव…आअहह...उूउउफ़फ्फ़..म्म्मा......आाऐययईई.....म्म्माहआ...आअहह

मैं- आहह..ईएहह….एस्स..एस्स….ये..ले…...

ज़िया- आअहह…आअहह…ऊररर…तीएजज,,,,आहह,,,,,,आअन्न्ंदडाा ….ताअक्कक….म्म्माहआ….उूउउफ़फ्फ़…माआ…म्माईिईन्न्न…..म्म्माअ…आआईइ……आअहह…ऊओह

मैं- साली.... ओर तेजज्ज़ डालु..

ज़िया-आअहह….दददााालल्ल्ल्ल्ल्ल…द्ददी…..आआअहह…फासस्थटत्त…आअहह

..यस…यस..एस…आअहह....तीएजज्ज़....ऊओरर..त्त्टीज्जज....आहह...उउफफफ्फ़...आआहह

मैं-यस बेबी..ये ले..…ये ले

मैने तेज़ी से ज़िया की चुदाई कर रहा था ऑर ज़िया की गान्ड पर मेरी जाघे इतनी तेज़ी से टकराने लगी कि उसकी गान्ड लाल पड़ने लगी …..15-20 मिनिट की चुदाई से ज़िया फिर से झड़ने लगी ओर उसकी सिसकारिया तेज होने लगी....

ज़िया-आअहह…आहह…हहा…ऐसे ही करो..आहह…..आहहह…अहहह..यईएसस..सहहाः…ज्जॉर्र्र..ससी..आहहह....फ़फफात्तत्त…..प्प्पाट्त्ट…आहः..उउंम…हहूऊ…

आअहह.ययईएसस…आऐईइईसीएहहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…..तीज़्ज़ज्ज…हहाअ…उउउफफफ्फ़...

.यसस्सस्स…आअहह…आअहह…ययईईसस्स….ऊऊहह…आअहह

मैं-यस बेबी यस

ज़िया- अहः..उउंम…हहूऊ…आअहह.ययईएसस…आऐईइईसीए हहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…..एसस्सस्स…आअहह…फफफफफफुऊफ़ुऊूक्कककककक…म्माईिईन्न्न,….आआईयइयाय …आअहहहह…ऊओ…म्मा….ऊहह…ऊहह..ऊहह

ऐसे चिल्लाते हुए ज़िया झड़ने लगी ऑर उसका चूत रस मेरे लंड से होते हुए निकल कर फुकछ-फुकछ की आवाज़े करने लगा…

मैं भी झड़ने ही वाला था तो मैने कहा…

मैं- मैं भी आ रहा हूँ…यही डाल दूं......

ज़िया- डाल दो...आअहह...

मैं- तो लो...यीहह...यीहह......एस्स बेबी...उउंम...यईहह..

मैने ज़िया की चूत लंड रस से भर दी और फिर हम लेट कर गले लग गये और किस करने लगे...

थोड़ी देर बाद हम नॉर्मल हुए तो हम ने कंबल ओढ़ा और बाते करने लगे...

मैं- तुम इतनी वाइल्ड चुदाई पसंद करती हो....??

ज़िया- ह्म्म..इसमे मज़ा बढ़ जाता है...और तुमने तो बहुत मज़ा दिया...

मैं- ह्म..बट सॉरी...इतना दर्द दिया ...सॉरी दीदी...

ज़िया- ना...दीदी नही...कुतिया बोलो...हहहे...

मैं- हाहाहा...ओके..तो मेरी कुतिया...मज़ा आया ना...

ज़िया- ह्म..बहुत..अब थोड़ा रेस्ट कर लेते है...फिर रात मे जहा स्टे करेंगे..वहाँ देखेंगे...ओके...वैसे तुम्हे मज़ा आया ना...सच बोलो..

मैं- सच....बहुत मज़ा आया...

फिर हम कंबल के अंदर पूरे नंगे एक-दूसरे से चिपक कर लेट गये...

और बाहर हमारी चुदाई देख कर एक शक्स अपने आप से बोला...... "सच मे ..मज़ा तो मुझे भी बहुत आया...."

थोड़ी देर रेस्ट करते हुए..मैं हल्का सा नीद की आगोश मे चला गया....

थोड़ी देर बाद मुझे अकरम की आवाज़ आई...

अकरम- उठ अंकित....उठ भी जा साले.....

मैने आँख खोली तो अकरम मुझे हिला रहा था...और तभी मुझे अहसास हुआ कि बस रुकी हुई है....

मैं- उउउंम....क्या है बे...

अकरम- उठ साले....हम रात यही रुकेगे...आराम से सो लेना...अभी नीचे चल...

मैं- ह्म्म...चलता हूँ...

तभी मुझे याद आया कि मैं कंबल मे पूरा नंगा लेटा हूँ...थॅंक गॉड मैं कंबल से निकला नही....

मैं- तू चल ना...आता हूँ...

अकरम- ह्म्म..आजा जल्दी...

अकरम नीचे निकल गया और मैं रिलॅक्स हो गया ...नही तो अकरम को क्या समझाता कि मैं नंगा क्यो लेटा हूँ...

मैने जल्दी से अपने कपड़े पहने और फिर ज़िया के बारे मे सोचने लगा कि वो कब उठ गई और कपड़े पहन के निकल भी गई...

मुझे ज़िया पर गुस्सा आ रहा था...कम से कम जगा कर तो जा सकती थी...

मैं गुस्से मे नीचे उतरा तो पता चला कि हम एक गाओं मे किसी बड़ी हवेली के सामने खड़े थे...

सब लोग अभी भी बाहर खड़े हुए थे...फिर मैने ज़िया को देखा तो उसने मुझे देख कर स्माइल कर दी और उसकी स्माइल ने मेरा गुस्सा और बढ़ा दिया...

पर इस वक़्त उससे बात करना मुश्किल था....फिर मैने सोचा कि इसे तो बाद मे देखगे...पहले इस जगह का तो पता करूँ...

मैं- अकरम...हम कहाँ है अभी ...

वसीम(बीच मे)- बेटा ये हमारे दोस्त की हवेली है...वो इसी गाओं का है...

मैं- पर हम यहाँ क्यो रुके अंकल...आइ मीन किसी होटेल मे रुक सकते थे...

वसीम- बेटा...होटल मे रूम्स मिलने मे प्राब्लम होती और फिर होटेल के लिए आगे सहर जाना पड़ता जो काफ़ी दूर है...रात हो रही थी तो यही रुक गये...

सरद- डोंट वरी बेटा..ये हवेली होटेल से कम नही...तुम्हे कोई प्राब्लम नही होगी..

मैं- अरे..ऐसा कोई मतलब नही था मेरा...मैं तो बस पूछ रहा था ..

वसीम- ओके...अब सब अंदर चलो...नोकर हमारा सामान ले आएँगे....

फिर हम सब हवेली मे चले गये...अंदर आते ही मैने देखा कि ये हवेली वाकई लाजवाब है...

सुख-सूबिधा के सारे सामान मौजूद थे....रात बिताने के लिए होटेल से अच्छी ही थी...

हम सब हॉल मे जमा हो गये...तभी मेरे आदमी का कॉल आ गया....मैं उठ कर थोड़ा दूर आया और कॉल पिक की...

( कॉल पर )

मैं- हाँ..क्या हुआ...??

स- अभी कहाँ हो तुम...??

मैं- मैं तो एक गाओं मे हूँ...असल मे हम अकरम की फॅमिली के साथ **** गाओं जा रहे है...क्यो क्या हुआ...

स- ह्म्म...तो कौन - कौन है तुम्हारे साथ...???

मैं- मेरे साथ...(मैने सबके बारे मे बता दिया)

स- ह्म्म...तो थोड़ा साबधान रहना...

मैं(चौंक कर)- साबधान...किससे...

स- अरे अपने दुश्मनो से और किससे...

मैं- पर यहाँ कौन है मेरा दुश्मन....और जो मेरे दुश्मन है...उन्हे क्या पता कि मैं कहाँ हूँ...

स- तुम भी ना....जब संजू और पूनम तुम्हारे साथ है तो फिर...

मैं(बीच मे)- ह्म्म...पता था मुझे...वही से कुछ बात लीक हुई होगी...बट डोंट वरी...हम उस जगह नही जा रहे जिस जगह डिसाइड हुआ था...

स- मतलब...

मैं- सुनो(और मैने प्लान चेंज का पूरा मामला बता दिया)

स- ह्म्म...इसमे तुम्हे कुछ अजीब नही लगा...

मैं- हाँ..लगा था...अब मेरी बात ध्यान से सुनो...$$$$$%$%%%$$$

स- ह्म्म्न..थोड़ा टाइम दो...सब पता करता हूँ....

मैं- ओके..और हाँ..वो दोनो कैसे है...

स- मस्त है यार....

मैं- ओके..और बहादुर ने कुछ बोला...

स- नही..वो सिर्फ़ तुम्हारे डॅड से ही बात करेगा...

मैं- ओके..नज़र रखना...और हाँ कामिनी के उपेर भी...

स- उसकी टेन्षन मत लो...वो खुद मुझे सब बतायेगी....डोंट वरी...

मैं- गुड..चलो..बाइ...पहुच के बात करूगा...

स- ओके..बाइ...

फिर मैं फ़ोन कट कर के सबके साथ बैठ गया...तभी चाइ आ गई और चाइ पी कर वसीम ने सबको उनके रूम्स बता दिए...

नीचे 4 रूम थे...1 मे वसीम और उसकी बीवी...2 मे सरद और उसकी बीवी...3 मे मोहिनी , पूनम और जूही...4 मे शादिया अकेली ....

बाकी उपेर के 4 रूम्स मे से 1 मे अकरम, मैं और संजू चले गये...2 मे ज़िया, रूही और गुल...और 3 मे नौकरानी जो हमारे साथ आई थी...

ड्राइवर बस मे ही सोने वाला था....

हम अपने रूम मे आए और फ्रेश होकर डिन्नर करने गये और फिर अपने-2 रूम मे सोने आ गये...

अपने रूम मे आते ही हम तीनो फरन्डस ने दो-दो पेग लगाए और रेस्ट करने लगे...

थोड़ी देर बाद अकरम और संजू सोने लगे...क्योकि वो दोनो पूरे सफ़र मे जागते ही रहे थे...

तभी मुझे अपने आदमी की बात याद आई....कि अपने दुश्मनो से साबधान रहना...

 


मैं(मन मे)- मेरे यहाँ आने की बात सिर्फ़ रजनी आंटी और विनोद को पता है...और किसी को नही...अगर इन दोनो मे से किसी ने मुँह खोला तो...समझा ही देता हूँ...

फिर मैं रूम से बाहर आया और विनोद को कॉल किया.....

( कॉल पर )

विनोद- हेल्लूऊ...कौन है...

मैं- सो रहे थे क्या...??

विनोद- ये सोने का ही टाइम है...तुम कौन...??

मैं- साले...मैं तेरा बाप बोल रहा हूँ...अब उठ..

विनोद(सकपका कर)- त्त..तुम...इतनी रात मे...क्या हुआ...??

मैं- हुआ तो कुछ नही...और होना भी नही चाहिए...

विनोद- क्या मतलब...??

मैं- मतलब ये कि मैं कहाँ गया हूँ ये सिर्फ़ तू और तेरी रांड़ ही जानती है...और मैं चाहता हूँ कि ये बात तुम दोनो के अलावा किसी को पता ना चले..समझा..

विनोद- हाँ..मैं चुप रहुगा...पर भाभी को कैसे...

मैं- ये तेरा काम है...अगर ऐसा नही हुआ तो तुम जानते हो ना...कि मैं क्या करूगा..

विनोद- न्ही-न्ही...मैं उसे चुप रखुगा..तुम कुछ मत करना..

मैं- गुड बॉय...अब सो जा...और हाँ...अपनी बीवी को हाथ भी मत लगाना...

विनोद- ह्म..नही लगाउन्गा...

मैं- सो जा फिर...बाइ

और मैने कॉल कट कर दी...अब मैं निश्चिंत हो गया कि मेरे यहा होने का पता मेरे दुश्मनो को नही चलेगा...

पर अभी मुझे नीद नही आ रही थी..मैं तो बस मे ज़िया की चुदाई करके सो चुका था.....

इसलिए मैं रूम के बाहर ही घूमने लगा और देखने लगा कि कहीं कोई जाग रहा हो तो थोड़ा टाइम-पास कर लूँ...

तभी मुझे नीचे एक साया नज़र आया...जो एक साइड के रूम से निकल कर आया था और दूसरे साइड के रूम की तरफ चला गया...

नीचे के रूम सीडीयो की वजह से दिख नही रहे थे...मैं जब तक नीचे आया...वहाँ कोई नही था और रूम बंद थे...

दोनो साइड ही 2-2 रूम्स थे तो अंदाज़ा लगाना मुस्किल था की किस रूम से कौन आया...

पहले मुझे ख्याल आया कि कहीं अकरम की मोम तो नही सरद के रूम मे थी...पर फिर सोचा कि उसके रूम तो एक साइड ही है...और फिर दोनो अपने पार्ट्नर के साथ है...

मैं रूम की तरफ देख ही रहा था कि तभी पीछे से गाते खुलने की आवाज़ आई...और सरद बोला...

सरद- अरे अंकित...यहाँ...क्या हुआ ..

मैं- ओह्ह..अंकल...कुछ नही...मैं बस...वो नीद नही आ रही थी...

सरद- ह्म्म..नई जगह है ना...मुझे भी नीद नही आ रही...आओ बैठते है...

हम दोनो सोफे पर बैठ गये और तभी सरद ने विस्की की बॉटल उठाई जो कि डिन्निंग टेबल पर रखी थी....

सरद- आओ..एक -एक पेग ले लेते है...

मैं- अरे नही अंकल...थॅंक्स...

सरद- अरे बेटा..शरमाओ मत...अब तुम बड़े हो गये हो..कम ऑन..एक पेग..

मैं कुछ कहता उसके पहले ही सरद ने पेग बना दिए...और मैं भी शरम छोड़ कर पेग पीने लगा...

फिर बातें करते हुए हम 3-3 पेग गटक गये और फिर सरद गुड नाइट बोल कर रूम मे निकल गया....

मैं(मन मे)- कौन होगा वो...इस तरफ तो सिर्फ़ शादिया, मोहिनी, जूही और पूनम ही है...

इनमे से कौन हो सकता है...अगर शादिया होती तो वो अपने रूम मे ही किसी को बुला लेती...अकेली जो है...फिर कौन हो सकता है...

मैं अपनी सोच मे खोया था कि तभी मेरे गले मे किसी ने बाहें डाल दी...

मैने पलट के देखा तो वो रूही थी...मैं उसे यहाँ देख कर चौंक गया...

मैं- त्त..तुम..यहाँ...और ये क्या हरक़त है...

रूही- क्यो...तुम्हे पसंद नही आया क्या...

मैं- देखो रूही...तुम...जाओ यहाँ से...

रूही- मैं जाने के लिए नही आई...

मैं- तो किस लिए आई हो...

रूही- तुम जानते हो...

मैं- क्या मतलब..??

रूही मेरे बाजू मे आ कर बैठ गई और मेरी जाघ सहलाने लगी...

मैं(रूही का हाथ हटाकर)- दूर हटो...ये हरक़ते बंद करो...

रूही- क्यो...मुझ मे क्या कमी है...

मैं- देखो रूही...बकवास बंद करो और जाओ यहाँ से...

रूही- नही...जब तक तुम मुझे हाँ नही कहोगे तब तक नही जाने वाली...

मैं- क्या हाँ...किस बात की हाँ...

रूही- तुम्हे पता है कि मुझे क्या चाहिए...

मैं- सॉफ..सॉफ बोलो...क्या कहना चाहती हो...

रूही- सॉफ..सॉफ...ये चाहिए( जूही ने मेरे लंड पर हाथ रख दिया)

मैं(हाथ हटाकर)- बस...बहुत हुआ...तुम पागल हो गई हो...जाओ यहाँ से...

रूही- हाँ...पागल हो गई हूँ...मेरे बदन मे आग लगी है...वो भी तुम्हारी वजह से....

मैं- तो जाओ अकरम के पास और बुझा लो आग....और हाँ... मैने क्या किया...

रूही(मुस्कुरा कर)- क्या बुझा लूँ...तुम्हारा फरन्ड तो किस करके छोड़ देता है ...बहुत सरीफ़ बनता है...और ये सब तब हुआ जब तुमने अपना वो दिखा दिया....

मैं- कब दिखाया...

रूही- ज़िया के साथ.....

मैं(बीच मे)- बस...एक शब्द नही...जाओ...ये नही हो सकता...

रूही- क्यो नही...ये तो बताओ मुझे...क्या कमी है मुझ मे...

मैं- कोई कमी नही...पर भूलो मत तुम मेरे फरन्ड की गर्लफ्रेंड हो...और मैं उसे धोखा नही दे सकता....जाओ अब...

रूही(खड़ी हो कर)- ह्म्म..जाती हूँ..पर फिर आउगि ..और हाँ ...क्या कह रहे थे धोके के बारे मे....ज़िया के साथ वो सब कर के धोखा ही दे रहे हो...समझे...

रूही चली गई और मेरे दिमाग़ मे आग लगा गई...उसकी बात भी सच थी...

मैं उसकी दीदी को चोद कर उसे धोखा तो दे ही चुका था...फिर रूही को क्यो नही चोद सकता....धोखा तो दे ही रहा हूँ......

फिर मैने अपने आप से कहा कि ये छोड़ो और सोने चलो...माइंड को शांति मिलेगी...

मैं उपर पहुच गया...पर इससे पहले कि रूम मे एंटर होता मुझे सिसकारियों की आवाज़ आने लगी....

मैं(मन मे)- ये तो चुदाई के टाइम की सिसकी है...पर यहाँ कौन है...??

मैं आवाज़ के पीछे गया और उपेर के लास्ट रूम मे पहुच गया....जिसमे नोकरानि रुकी हुई थी...

मैने गेट को खोलने की कोसिस की बट खुला नही...फिर मुझे याद आया कि सारे गेट मे सेम की लगती है ...तो मैं अपने रूम से की लाया और गेट को आराम से ओपन कर के अंदर देखा...

अंदर का नज़ारा देख कर ही मेरा लंड अकड़ने लगा....

मैं(मन मे)- ह्म्म...लगे रहो....रूम किसी और का और मज़े किसी और के...चलो एंजोई करो...मैं चला सोने....

और मैने गेट लगाया और रूम मे जाने लगा तभी पीछे से मुझे किसी ने पकड़ लिया...और मैं शॉक्ड रह गया.....

मैने अपने आप को छुड़ा कर पलट के देखा तो रूही खड़ी हुई मुस्कुरा रही थी...

मैं(गुस्से मे)- पागल हो गई क्या...ये क्या हरक़त है...

रूही- क्यो..डर गये क्या...??

मैं- बात डरने की नही...तुम क्यो आई...

रूही- तुम जानते हो...

मैं(झल्ला कर)- चाहती क्या है तू...

रूही- ये भी तुम्हे पता है...

मैं- देखो रूही...ये ग़लत है....

रूही- कुछ ग़लत नही...जिस्म की भूख मिटाना सही होता है...

मैं- हाँ...पर हर किसी के साथ नही...तुम अकरम को बोलो ना...

रूही- वो नही मानेगा....तुम ही मान जाओ...

मैं- नही...मैं अपने दोस्त को धोखा नही दूँगा...

रूही- वो तो तुम दे ही रहे हो...उसकी दीदी को चोद कर...

मैं- रूही...बस करो...भूल जाओ सब...

रूही- नही...ना मैं भूलूंगी और ना तुम्हे भूलने दुगी...

मैं- समझती क्यो नही...ज़िया खुद मेरे पास आई थी...इट वाज़ आन आक्सिडेंट...

रूही- तो मैं भी तो अपने आप आई...एक आक्सिडेंट और सही...

मैं- बस...बहुत हुआ..जाओ और सो जाओ...

रूही- अभी जाती हूँ...तुम रात को सोच लेना...या तो मेरा साथ दो या फिर तैयार हो जाना..अपने दोस्त के सामने शर्मिंदा होने...मैं सबको बता दुगी...

मैं- ऐसा कुछ मत करना...उसकी फॅमिली को पता चला तो वो बिखर जायगे...बहुत सरीफ़ है वो लोग...

रूही- अच्छा...उनकी सराफ़त तो पास वाले रूम मे देख ली मैने...क्या सराफ़त है ...

मैं(चौंक कर)- व्हाट...तुमने...कब...??

रूही- ये छोड़ो...तुम मेरे बारे मे सोचो...एक रात है तुम्हारे पास...गुड नाइट...

रूही मुझे टेन्षन देकर निकल गई और मैं भी रूम मे आ गया....

रूम मे आते ही मैं सोफे पर लेट गया और एक बार फिर मेरे दिल और दिमाग़ मे जंग छिड़ गई.....

एक तरफ दिल कह रहा था कि रूही ग़लत है...उसकी माँग भी ग़लत है...मुझे उससे दूर रहना चाहिए...

पर दिमाग़ कह रहा था कि इसमे हर्ज ही क्या है..गरम माल खुद चल कर मेरे पास आ रहा है तो ना क्यो बोलू....

फिर दिल ने कहा कि रूही के साथ दूसरा रिस्ता बनाना अपने दोस्त को धोखा देना होगा...नही-नही उसके साथ कुछ नही...

पर दिमाग़ ने फिर टोका और कहा कि ...बात धोखे की है तो वो तो मैं दे ही चुका...उसकी दीदी को चोद कर....तो अब गर्लफ्रेंड को चोदने से क्या फ़र्क पड़ेगा...

फिर दिल ने कहा कि नही...ज़िया की बात अलग है...वो खुद चूत खोल कर आई थी...

तो दिमाग़ बोला ...तो क्या...रूही भी खुद आ रही है...

काफ़ी देर की कस्मकस के बाद मैने 2 पेग और लगाए और दिल और दिमाग़ ..दोनो को शांत किया और फिर नीद की आगोश मे चला गया.....

 


सुबह मुझे अकरम ने जगाया....

अकरम- उठ भाई...कितना सोयगा...

मैं(आँखे खोलते हुए)- ह्म..उठता हूँ यार...थोडा और सोने दे....

अकरम- अच्छा..साले ये बता कि सोफे पर क्यो सोया है...

मैं- क्या..सोफा...अभी सोने दे...फिर बात करते है...

और मैं फिर से सो गया....बट थोड़ी देर बाद ही जूही मुझे जगाने आ गई...

जूही- उठ यार..कितना सोयगा...हमे चलना है...उठ जा...

मैं(बिना देखे)- तू फिर से आ गया साले...सोने दे...

जूही- ओह हेलो...मैं जूही हूँ...अकरम नही...उठो...

फिर मुझसे थोड़ा होश आया और मैने आँखे खोल कर देखा...सामने जूही मुस्कुरा रही थी...

मैं- ओह्ह..तुम...आअहह...मुझे लगा अकरम है...

जूही- अच्छा..तो गौर से देख लो....मैं जूही हूँ..देखो...

जूही अपने हाथ अपनी कमर पर रख कर खड़ी थी...उसके ट-शर्ट मे तने हुए बूब्स...खुले बाल और पिंक लिपस्टिक से सजे मुस्कुराते होंठ...इन सब को देख कर तो मेरा दिल खुश हो गया...

जूही- अभी भी ना पहचाना हो तो छु कर देख लो...

मैने सोचा सही मौका है...और मैने उसके बूब्स की तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया...

जूही मेरा हाथ देख कर सकपका गई पर पीछे नही हटी...बस नज़रे झुका ली...

तभी मैने हाथ को बूब्स के सामने रोक दिया और बोला...

मैं- ज़रूरत नही...पहचान गया...फिर कभी...

जूही(शर्मा कर)- फिर कभी क्या...तुम ना...चलो उठ कर फ्रेश हो और जल्दी नीचे आओ...हमे जाना है...ओके

मैं- ह्म्म..आता हूँ...

थोड़ी देर बाद हम सब नीचे नाश्ता कर रहे थे..और कुछ लोगो को देख कर मेरे दिमाग़ मे रात का सीन घूमने लगा...और मेरी स्माइल निकल गई..

जूही मेरे सामने ही बैठी थी...उसे लगा कि मैं उसे देख कर मुस्कुरा रहा हूँ तो उसने अपनी नज़रे झुका ली और शरमाने लगी...

तब मुझे अहसास हुआ कि जूही के साथ बात बनने मे टाइम नही लगेगा...बस एक अच्छे मौके का इंतज़ार करना होगा...

 


नाश्ता करने के बाद हमारी जाने की तैयारी हुई और एक बार फिर से हम बस के सफ़र पर निकल गये.....

हम लोग अभी आगे शीट पर ही बैठे थे पर रूही मुझे लगातार घूरे जा रही थी...

दूसरो तरफ जूही भी मुझे चोर नज़रों से देख रही थी....

वही शादिया अब भी मुझे लेकर टेन्षन मे थी...उसे मुझसे कई सवाल जो पूछने थे....

वही ज़िया बिल्कुल मेरी कुतिया की तरह हरक़त कर रही थी...कभी.मुझे देख कर आँख मारती तो कभी अपना बूब्स खुद ही दबा देती....

मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं इन चूतो के बीच फस गया हूँ...

धीरे-2 करके सब कॅबिन मे जाने लगे...

अकरम और संजू को अभी भी रात की मदहोशी थी तो वो जाकर सो गये....

बाकी सब भी चले गये सिर्फ़ मैं शीट पर बैठा रहा और आगे वाली शीट पर वसीम और सरद थे...

तभी रूही मेरे बाजू मे आई और इसारे से पीछे वाले कॅबिन मे आने को कहा....

मैं उसका मक़सद तो जानता ही था...और अब मैने ये भी सोच लिया था कि जो होना है वो हो जाने दो...मैं पीछे नही हटूँगा...

और रही बात अकरम की तो ज़िया को छोड़ कर उसे धोखा दे ही दिया तो अब रूही भी सही...

और रूही के जाने के बाद मैं भी उठा और सबको देखते हुए लास्ट कॅबिन मे चला गया.....

वहाँ रूही तो पहले से ही इंतज़ार मे थी....

रूही ने शीट्स को फोल्ड करके बेड की तरह बना लिया था और अपने पैर फैला कर बैठी हुई थी...

मैं भी जाकर रूही के सामने पैर मोड़ कर बैठ गया....

मैं- हाँ...क्या हुआ...??

रूही- तुम्हारा टाइम ख़त्म हो गया....अब बोलो क्या सोचा...??

मैं(अंजान बन कर)- किस बारे मे...??

रूही- बस भी करो...सब जानते हो फिर क्यो पूछ रहे हो...

मैं- देखो...मेरी बात सुनो..

रूही(बीच मे)- बस...अब नही...मुझे बस आन्सर चाहिए...एस ऑर नो...

मैं- ओके...यस...लेकिन..

रूही- अब क्या...???

मैं- मेरी कुछ शर्ते है....

रूही- ह्म्म...मुझे मंजूर है...

मैं- क्या...बिना सुने ही...

रूही- ह्म्म..जब मैं तुम्हे सब कुछ देने को तैयार हो गई तो फिर क्या प्राब्लम हो सकती है मुझे...

मैं- पर फिर भी...सुन तो लो...

रूही- ह्म्म..बोलो...

मैं- पहली शर्त ये है की तुम अकरम को नही छोड़ोगी...उसके साथ अपना रिश्ता पहले की तरह ही निभाओगी...

रूही- ये तो मैं तुम्हारे कहे बिना भी करती...मैं उसे सच्चा प्यार करती हूँ...

मैं- तो फिर मेरे साथ ये सब...

रूही(बीच मे)- सिर्फ़ मज़े के लिए..और हाँ इस बात पर बहुत बहस हो चुकी..अब काम की बात करे...

मैं- तुम नही मनोगी...हाँ...

रूही- ह्म्म्म ...तो यही थी तुम्हारी शर्त...

मैं- हाँ..पर और भी है...

रूही- तो बोलो ना...

मैं- दूसरी शर्त ये है कि तुम्हे मेरी रंडी बनना होगा...

रूही- व्हाट...क्या कह रहे हो...

मैं- जो तुमने सुना...मैं जिसे भी चोद्ता हूँ...उसे रंडी बना कर ही चोद्ता हूँ...अब बोलो..

रूही- ह्म..ठीक है...मैं तैयार हूँ...

मैं(मन मे)- साली ने हाँ बोल दिया...कमीनी है सच मे...

रूही(मुस्कुरा कर)- क्या हुआ..तुमने क्या सोचा..मैं डर कर पीछे हट जाउन्गी...

मैं- ह्म..नही..ऐसी बात नही...मैं सच मे सब को रंडी की तरह चोदता हूँ...

रूही(मेरे करीब चेहरा ला कर)- तो बन गई तुम्हारी रंडी..अब आओ भी...

मैं-अच्छा...तुम सह पओगि...

रूही(पीछे टिक कर अपने पैर फैलाकर)- हाँ...इसमे बहुत दम है...(अपनी चूत की तरफ उंगली कर के)

फिर मैने अपने पैर को रूही की चूत पर रखा...फिर अंगूठे और उंगली से उसकी चूत को दबा दिया...

रूही- आऐईयईईई...

मैं- बस...इतना ही दम है..हाँ..

रूही- आजमा के देख लो...खुश हो जाओगे...

मैं(मुस्कुरा कर)- अब तो तुम्हे अपनी रंडी बनाना ही होगा...

रूही- तो अभी शुरू करे...

तभी ज़िया ने कॅबिन का परदा खोला...और मैने तुरंत अपना पैर हटा लिया....

ज़िया मेरे पैर को तो नही देख पाई पर उसने रूही की बात सुन ली थी...

ज़िया- क्या शुरू किया जा रहा है...???

ज़िया की बात से रूही परेसान हो गई और मुझे देखने लगी तभी मैने बात को संभाला....

मैं- अर्रे..वो मैं इसकी और अकरम की लव स्टोरी सुनाने का बोल रहा था...तो ये बोली की बाद मे बाते या अभी शुरू करे...

रूही- हाँ..हाँ मैं यही कह रही थी कि आप आ गई...

ज़िया- अच्छा...हाँ..रूही ..तुम्हे गुल बुला रही है...

रूही- ह्म्म्मे...चलिए...

ज़िया- तुम जाओ ..मुझे अंकित से कुछ बात करनी है..

रूही(उठते हुए)- ठीक है...आप कर लो...मैं बाद मे कर लूगी...

ज़िया- क्या..??

रूही- मतलब..आप अभी बात कर लो..मैं बाद मे इसे स्टोरी बता दूगी...

ज़िया- अच्छा...

रूही मुझे आँखे दिखा का गुस्से मे चली गई और ज़िया ने कॅबिन का परदा लगाया और मेरे उपेर चढ़ गई...

मैं- आहह..क्या कर रही हो...

ज़िया- कुतिया अपने मालिक को प्यार कर रही है...

और ज़िया अपनी जीभ निकाल कर मेरे होंठो पर फिराने लगी....

मैं- उउंम..बस कर कुतिया...अभी रुक जा...

ज़िया- नही रुक सकती...कुतिया को मार की ज़रूरत है...

मैं- मार की..

ज़िया- हाँ...अपने हथियार से मारो...तब मानेगी...

मैं- पर अभी सब जाग रहे है...

ज़िया- श्ीई....जागने दो...कोई नही आएगा यहाँ ...

मैं- कोई आ गया तो मरेगे...

ज़िया- नही...कोई नही आएगा...अब मार लो कुतिया की..जल्दी से...

 


मैं- तू तो सच मे कुतिया बन गई...बिना मारे मानेगी नही....

ज़िया- नही...अब जल्दी करो...कल रात से आग लगी है...तुम्हे क्या..

मैं- ओह..तो रात मे बुला लेती...

ज़िया- अरे...रात को मुझे नीद आ गई थी...अब करो भी...

मैं(मन मे)- हाँ साली...रात मे तू कहाँ और किसके साथ सो रही थी...ये मैने देखा था....रंडी कही की...

ज़िया- अब और ना तडपाओ....सस्स्ररूररुउप्प्प...सस्स्रररुउप्प्प...

ज़िया फिर से मेरे होंठो को चाटने लगी...

मैं- लगता है आज कुतिया की गान्ड फाडनी पड़ेगी...तभी मानेगी...

ज़िया- सस्ररुउप्प्प...आअहह...फाड़ दो ना...सस्ररुउप्प्प...सस्ररुउपप...

मैं जानता था कि ये बिना चुदे नही जाएगी तो मैने भी चुदाइ का मूड बना लिया और ज़िया की जीभ से जीभ मिला कर एक-दूसरे को प्यार करने लगे....

हम दोनो एक दूसरे से लिपट कर होंठो का रास्पान कर रहे थे...

ज़िया- उउंम...सस्स्रररुउउप्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प.....

मैं- सस्ररुउउप्प....सस्स्रररुउउप्प्प....उउउंम्म...उउउंम्म...उउंम...

मैने ज़िया को किस करते हुए उसके बूब्स पर हाथ रखे और उसके दोनो निप्पल को मरोड़ दिया...

ज़िया- उउउंम....आअहह...इतनी ज़ोर से.....उउउंम्म...

मैं- सस्स्रररुउउप्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प....मम्मूऊऊउउम्म्मह...

ज़िया- उउंम...चलो अब जल्दी से उस शैतान को निकालो....

मैं- रुक जा कुतिया...पहले तेरे बूब्स को तो निचोड़ दूं....चल निकाल बाहर...

मेरे कहते ही ज़िया ने अपने टॉप को निकाल दिया ....उसने आज भी ब्रा नही पहनी थी...

मैं- साली...आज भी बिना ब्रा के..

ज़िया- अब तो ब्रा वापिस आकर ही पहनूगी...

मैं- अच्छा...कमीनी कही की....

ज़िया- अभी कहा....वहाँ पहुचने तो दो...फिर देखना मेरा कमीनपन...आअहह...

मैने ज़िया के बूब्स को पकड़ के मसल दिया...

और फिर उसके बूब्स को मुँह मे भर के चूसने लगा....

ज़िया- आहह...चूस लो...ज़ोर से उउंम्म...

मैं- उउंम्म...उउंम.....उउउंम्म..उउउंम..

मैं ज़िया के निप्पल को काट कर उसे दर्द भरा मज़ा दे रहा था और ज़िया अपनी मस्ती मे अपनी कॅप्री को निकाल रही थी...

मैं- उउंम...उउउंम...आहह....मज़ा आ गया मेरी जान....

ज़िया- हम्म..अब निकालो अपना हथियार...

मैं- चल तू ही निकाल ले...आजा...

और मैं शीट पर खड़ा हो गया...

ज़िया- खड़े..खड़े चुदाइ करोगे क्या...

मैं- तू शुरू तो कर...फिर बताता हूँ...

और ज़िया ने घुटनो पर बैठ कर मेरे पेंट को खोलकर नीचे किया और मेरे लंड को सहलाने लगी......

ज़िया ने मेरे सुपाडे को होंठो मे लिया और अपनी जीभ लंड के छेद पर घुमाने लगी....

मैं- उउंम्म...साली...क्या मज़ा दे रही है...उउउम्म्म्मम...

थोड़ी देर बाद ज़िया ने लंड को मुँह मे भर लिया और मुँह को आगे पीछे करके लंड चूसने लगी.....

मैं- उउंम...अब शैतान को जगाओ...फिर शैतान की शैतानी दिखाता हूँ....

ज़िया- सस्स्रररुउउउगगगगग....सस्स्रररूउउग़गग...सस्स्रररूउउगग़गग....सस्स्रररूउउगग़गग...

ज़िया मस्ती मे मेरा लंड चूस कर कड़क करने लगी और साथ मे मेरी बॉल्स को सहला कर मेरी गर्मी भड़का रही थी....

ज़िया लंड को मुँह मे भर कर अपनी जीभ को मेरे सुपाडे पर घुमाती और मैं गुदगुदी महसूस कर के और भी गरम होने लगा...

ज़िया- सस्स्रररुउउप्प्प.....सस्रररुउउप्प्प्प....सस्स्ररुउउप्प्प...उउउम्म्म्ममममम....

मैं- आहह....बस कर साली....झाड़ा ही देगी क्या...आआहह.....

ज़िया- उउउम्म्म्म...आअहह....अब जाग गया शैतान...अब बोलो...

मैं- हम्म..अब शैतान को उसकी गुफा दिखाओ....

ज़िया- ह्म्म...अभी दिखाती हूँ....

और ज़िया खड़ी हुई और अपनी कॅप्री निकाल दी...साली ने पैंटी भी नही पहनी हुई थी..

उसके पैंटी निकलते ही उसका चूत का दाना उछल कर मुझे अपने पास बुलाने लगा और मैने भी उसकी दावत आक्सेप्ट की और एक हाथ से दाने को मसल दिया....

ज़िया- आअहह...गुफा के दरवाजे को छोड़ो...शैतान को गुफा मे डालो...

मैं- ह्म..चल आजा मेरी कुत्ति...

और मैं बैठ गया और ज़िया को अपनी गोद मे बैठा कर झटके से पूरा लंड उसकी चूत मे उतार दिया....ज़िया की तो जान ही निकल गई...

ज़िया- आाऐययईईईईईईईई.....माअरर...दीईयाअ....आआअहह....

मैं- चुप कर साली. ..शैतान गुस्सा हो गया तो गान्ड फाड़ देगा..

और मैने ज़िया की कमर पकड़ कर उसे उछालना चालू कर दिया...

कुछ धक्को के बाद ज़िया खुद उछल-उछल कर लंड खाने लगी....

ज़िया -आअहह…आहह...आहह…उउउफ़फ्फ़….हहाअ…..

मैं-यस…गान्ड उछाल कुतिया...ज़ोर से.….य्ाआ..यस...

ज़िया-आअहह…आहह…हहा…हाअ…आहह....

मैं- यस…जंप…ज़ोर से...तेज ..और तेजज....

ज़िया -हाअ..आहह…..आहहह…अहहह..यईएसस..आहह…आऐईइसस्ससी..आहहह

मैं- हाँ..ऐसे ही….ज़ोर से…अब शैतान खुश हुआ...आहह...

मैने ज़िया के बूब्स को हाथो से पकड़ लिया ओर उसके निप्पल को मरोड़ते हुए ज़िया को चोदने लगा…

ज़िया भी पूरी स्पीड से उछल रही थी, उसकी मस्त गान्ड मेरी जाघो पर पट-पट कर रही थी…ऑर ज़िया चुदाई का आनद ले रही थी….

मैं-यस …जंप….य्ाआ

ज़िया-आअहह…आहह…हहा…..आहह…..आहहह…अहहह..

यईएसस..ईसस्स..आहह

मैं- आहह…ज़ोर से…कुतिया ..ज़ोर से....

ज़िया- आहह आह…आहह...

मैं-यस... यस...ज़ोर से साली...

ज़िया- अहः..उउंम…हहूऊ…आअहह.ययईएसस…आऐईइईसीए हहीी…आअहह...

पूरे कॅबिन मे हमारी चुदाई की आवाज़े भर रही थी और हम बेफ़िक्र चुदाई के नशे मे डूबे हुए थे....

फफफफात्तत्त…..प्प्पाट्त्ट…आहः..उउंम…हहूऊ…आअहह.ययईएसस…आऐईस...हहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…

..आहह…आईइईसीए..हहीी..आहह…ज्जोर्र…सीए..यएएसस्सस्स…आअहह…ययईईसस्स….ऊऊहह

ऐसी ही आवाज़ो के साथ ज़िया मेरे उपेर झुक गई और किस करने लगी...

 


तभी मैने ज़िया को शीट पर लिटाया और उसके साथ लेट कर उसकी टाँग उठा कर फिर से चुदाई शुरू कर दी......

ज़िया- आअहह....शैतान सच मे जाग गया...आअहह...

मैं- अभी देखती जा...शैतान की शैतानी....

ज़िया- आओउंम्म....आहह..आआहह...आहह..ऊहह...ज़ोर से...ज़ोर से......

मैं- ये ले साली....पक्की कुतिया हो गई तू....हाा...येस्स...एसस्स..एसस्स...

ज़िया- ओह्ह मा.....ज़ोर से..ज़ोर से...मैं गाऐयईईईईईई.....

ज़िया झाड़ कर शांत हो गई पर मैने चुदाई जारी रखी....

ज़िया- आअहह...बस करो...उूउउंम्म...

मैं- चुप कर ...आजा जल्दी....

फिर मैने जिया को उठाया और उसकी पीठ से चिपक कर उसके बूब्स दबाने लगा.....

ज़िया- आअहह....मज़ा आ गया जान...

मैं- अभी तो मज़ा बाकी है ...

और मैने पीछे से उसकी चूत मे लंड डाल दिया.....

लंड अंदर जाते ही ज़िया अपनी गान्ड हिलाने लगी....

मैं- आअहह..तेरी चूत फिर से गरम हो गई कुतिया....

ज़िया- हम्म...बहुत गरम कुतिया हूँ...फुल मज़ा दूगी...

मैं- हाँ साली...कुतिया की पूरी फाड़ कर ही वापिस भेजुगा...अब आजा...

और फिर मैं पीछे टिक गया और एक बार फिर से ज़िया को लंड पर बैठा लिया.......

ज़िया अभी धीरे -2 उछल रही थी और हम मस्ती मे बातें करने लगे...

ज़िया- उउफ़फ्फ़....तुम्हारा शैतान तो बहुत बुरा हाल कर रहा है...फिर से चूत गरम कर दी...

मैं- आहह...शैतान है..शैतानी तो करेगा ना....और तुझे नही लेना तो किसी और को दे दूं...

ज़िया- आहह...किसको ...

मैं- तू बता...उसे दे ही दे दूँगा....

ज़िया- ऊहह...सच मे...

मैं- ह्म्म..किसे देना है बोल...

ज़िया- बताउन्गी...अभी शैतान को बोलो की मेरी फाड़ दे....

मैं- चल फिर..बन जा कुतिया...

और ज़िया अच्छी कुतिया की तरह आगे झुक गई और मैने उसकी गान्ड पकड़ कर उसकी चुदाई शुरू कर दी....

ज़िया- आहह….माँ…उूउउइइ…..आहह

मैं- अब तेरी फाड़ता हूँ मेरी कुतिया…

ज़िया-आअहह..फाड़ दो…आअहह…ज्ज़ोर..सी…आआअहह....

मैं -तो ये ले …फटी तेरी..यीहह

मैने ज़िया की गान्ड को थप थपाते हुए फुल स्पीड मे चोदना शुरू किया ऑर ज़िया ज़ोर-ज़ोर से आवाज़े निकालने लगी ऑर चुदाई का रंग चरम पर पहुच गया…

ज़िया-आअहह…आअहह…ऊररर…तीएजज,,,,आहह,,,,,,आअन्न्ंदडाा ….ताअक्कक….म्म्मा आ….उूउउफ़फ्फ़…म्म्मा ….फ़फफादद्ड़..दद्दूव…आअहह...उूउउफ़फ्फ़..म्म्मा.....आाऐययईई.....म्म्माहआ...आअहह

मैं- आहह..ईएहह….एस्स..एस्स….ये..ले…...

ज़िया- आअहह…आअहह…ऊररर…तीएज्ज,,,,आहह,,,,,,आअन्न्ंदडाा ….ताअक्कक….म्म्माहआ….उूउउफ़फ्फ़…माआ…म्माईिईन्न्न…..म्म्माअ…आआईइ……आअहह…ऊओह

मैं- साली.... ये ले..शैतान को खुश कर....

और मैने ज़िया की गान्ड पर ज़ोर-ज़ोर से थप्पड़ मारने चालू कर दिए....

ज़िया-आअहह….मारो मत....आअहह…..आआअहह…फासस्थटत्त…आअहह

..यस…यस..एस…आअहह....तीएजज्ज़....ऊओरर..त्त्टीज्जज....आहह...उउफफफ्फ़...आआहह

मैं-हाँ कुतिया ...ये ले..…ये ले...

मैने तेज़ी से ज़िया की चुदाई कर रहा था ओर ज़िया की गान्ड पर थप्पड़ की बरसात कर रहा था....उसकी गान्ड पूरी गान्ड लाल पड़ने लगी थी.. …..

 


हमारी चुदाई की आवाज़े बढ़ती गई...पर बस चलने की वजह से किसी को सुनाई नही दी....

ऐसे ही जोरदार चुदाई करते हुए हुए ज़िया फिर से झड़ने लगी ओर उसकी सिसकारिया तेज होने लगी....

ज़िया-आअहह…आहह…हहा…ऐसे ही करो..आहह…..आहहह…अहहह..यईएसस..सहहाः…ज्जॉर्र्र..ससी..आहहह....फ़फफात्तत्त…..प्प्पाट्त्ट…आहः..उउंम…हहूऊ…

आअहह.ययईएसस…आऐईइईसीए हहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…..तीज़्ज़ज्ज…हहाअ…उउउफफफ्फ़....यसस्सस्स…आअहह…आअहह…

ययईईसस्स….ऊऊहह…आअहह

मैं-यस..एस्स..एस्स....और ले कुतिया....स्स्सल्लाप्प्प...

ज़िया- अहः..उउंम…हहूऊ…आअहह.ययईएसस…आऐईइईसीए हहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…..एस्स्स्स्स…आअहह…फफफफफफुऊफ़ुऊूक्कककककक…म्माईिईन्न्न,….आआईयइयाय …आअहहहह…ऊओ…म्मा….ऊहह…ऊहह..ऊहह

ऐसे चिल्लाते हुए ज़िया झड़ने लगी ऑर उसका चूत रस मेरे लंड से होते हुए निकल कर फुकछ-फुकछ की आवाज़े करने लगा…

मैं भी झड़ने ही वाला था तो मैने अपनी पूरी स्पीड मे चुदाई शुरू कर दी

मैं- मैं भी आ रहा हूँ…ले कुतिया...शैतान का पी ले...

ज़िया- डाल दो...आअहह...

मैं- तो लो...यीहह...यीहह......एस्स....उउंम...यईहह..यीहह....

मैने ज़िया की चूत लंड रस से भर दी और फिर उसके उपेर ही लेट गया और उसको चूमने लगा...

मैं- तो...कैसा लगा शैतान..

ज़िया- ह्म्म....बहुत ज़ोर से लगा...आअहह...फाड़ ही दी...

मैं- ह्म्म....कुतिया जो हो मेरी...फाड़नी ही पड़ती है...

ज़िया- ह्म्म...पर रोज फाड़नी पड़ेगी....

मैं- हाँ..हाँ....और अभी तो शैतान की नज़र तेरी गान्ड पर भी है...

ज़िया- ह्म्म..पता है...उसे भी फाड़ लेना...पर प्यार से...

मैं- नही...शैतान आराम से नही करता...ज़ोर से फाड़ता है...

ज़िया- ह्म्म..अब कुतिया बनी हूँ तो जो चाहे करो...हहहे...

फिर हम ने किस किया और मैं बोला...

मैं- पर कुछ भी कहो...मुझे अकरम के लिए बुरा लगता है...

ज़िया- ह्म्म...वो तो है...उसकी सग़ी दीदी की जोरों से बजा जो रहे हो...

मैं- ह्म्म...बहुत बुरा लगता है...

ज़िया- अरे किस बात का बुरा...वो तो कुछ करता नही किसी के साथ...पर हम क्यो पीछे रहे...लाइफ को एंजाय करो..

मैं- पर उसे पता चलेगा तो...

ज़िया- अरे किसी को पता नही चलेगा...कि तुमने अकरम की दीदी को अपनी कुतिया बना लिया....

मैं- पर वहाँ किसी को शक ना हो जाए...

ज़िया- अरे जब चलती बस मे ही दो बार बजा डाला....सबके होते हुए....और किसी को भनक नही लगी तो वहाँ क्या खाक पता चलेगा....

मैं- ह्म्म...वो तो है...काफ़ी इंटरेस्टिंग चुदाई की हम ने....हाँ

ज़िया- ह्म्म..तुम सोचना छोड़ो और अपने दोस्त की बेहन की बजाते रहो...चलो एक बार और....

तभी एक आवाज़ आई.....

"" छ्हीई...दीदी तुम...तुम ऐसी...छीयियी...और तुम अंकित...तुमसे ऐसी उम्मीद नही थी...तुम्हारे बारे मे क्या सोच थी मेरी और तुम तो...तुम..तुम धोखेबाज कही के..."""

और ये आवाज़ सुनते ही हमारी गान्ड फट गई और शर्म से नज़रे झुक गई....

हम दोनो अपनी नज़रे झुकाए ऐसे ही नंगे पड़े रहे....इस समय ज़िया पूरी नंगी उल्टी लेटी थी और मैं भी उसके उपेर नंगा पड़ा था....

फिर वो शक्श हमे लानत दे कर निकल गया और हम अपनी चोरी पकड़े जाने से घबरा गये...

ज़िया तो रोने ही लगी थी...पर मैं रोया नही...बस ये सोचने लगा कि अब आगे क्या करना है...

मैं ज़िया के उपेर से उठा और अपने कपड़े पहनने लगा...

मैं- ज़िया...अब रोना बाद मे..पहले कपड़े पहनो...

ज़िया ने भी रोते हुए अपने कपड़े पहन लिए...

फिर हम दोनो आमने-सामने बैठ गये...पर ज़िया अभी भी रो रही थी...

मैं- ज़िया...अब चुप भी हो जाओ...यू रोने से कुछ नही होगा....

ज़िया(सुबक्ते हुए)- ये क्या हो गया अंकित...अब क्या करेंगे...

मैं- अब रो रही हो...पहले समझाया था कि बस मे मत करो..तब तो तुम्हे आग लगी हुई थी...अब भुग्तो...

ज़िया- प्लीज़ अंकित...कुछ सोचो...मुझे बचा लो....प्लीज़...

मैं- मैं क्या करू...मैने समझाया था...पर तुम तो...ह्म्म

ज़िया- अब तुम भी मुझे ही सुना रहे हो...

मैं- ग़लती तुम्हारी ही है ज़िया...

ज़िया- मैं क्या करू..मुझसे बर्दास्त नही हुआ और ये ग़लती कर दी...

मैं- मेरी बात मानी होती तो कुछ नही होता...

ज़िया- आगे से तुम्हारी बात मानुगी...जहाँ तुम कहोगे वही करूँगी...

मैं(मन मे)- साली कितनी बड़ी रंडी है...अभी-2 पकड़ी गई...फिर भी इसे करना चुदाई ही है...

ज़िया- प्ल्ज़ अंकित ..कुछ करो ना...

मैं- सोचते है कुछ पर पहले रोना बंद करो...

 
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