ऑफीस मे आते ही मुझे अक्कौंटेंट ने आज सुबह की सारी बात बता दी...जो सुजाता और डॅड के साथ हुई थी.....
ए/सी- सर...अब बताइए...मैं क्या करता ..
मैं- आपने ठीक किया....उसे मैं देख लूँगा...और हाँ...अगली बार वो आए तो कह देना कि ये मेरा ऑर्डर है कि कोई भी वो फाइल मेरी मर्ज़ी के बिना नही देख सकता...
आ/सी- पर फाइल तो आकाश सर ले गये...
मैं- ओह्ह...डोंट वरी...वो नकली है...असली अपनी जगह सेफ है....चलो...आप अपना काम करो...मैं बाकी देख लूँगा..
सुजाता की हरकते सुनकर मुझे गुस्सा आ गया...पर मैं बिना उसकी असलियत जाने कुछ नही करने वाला था...
पर अभी उससे बात तो करनी ही होगी...पता तो चले कि उसके माइंड मे अब कौन सा प्लान है...
यही सोच कर मैं घर आ गया...जहा सुजाता और डॅड बैठे हुए बातें कर रहे थे...
मुझे देखते ही वो ऐसे चुप हो गये जैसे साँप सूंघ गया हो...और फिर डॅड वहाँ से उठ कर निकल गये...
सुजाता(बनावटी मुस्कान के साथ)- अरे अंकित...आओ बेटा....हम अभी तुम्हारे बारे मे ही बात कर रहे थे...आओ बैठो...
मैने भी चेहरे पर स्माइल बिखेरी और जा कर सुजाता के बाजू मे बैठ गया...और उसकी नरम जाघे मेरी जाघो से सट गई....
मैं- आहह...तो आंटी...आज क्या किया आपने दिन भर...
सुजाता- कुछ ख़ास नही...बस यू ही घूमती रही...तुम्हारे डॅड का ऑफीस...
मैं- आपका मतलब मेरा ऑफीस...है ना...
सुजाता(सकपका कर)- हाँ...हाँ...तुम्हारा ही ऑफीस...बस वही घूम लिया...
मैं- ओह्ह...और काफ़ी हंगामा भी कर लिया...है ना...
मैने सुजाता की आँखो मे देख कर बोला तो वो हैरान रह गई...उसके मुँह से एक लब्ज नही निकला...बस आँखे फाडे मुझे देखती रही....
मैं- क्या हुआ...ऐसे क्या देख रही हो आंटी....
सुजाता- मैं वो...वो ऐसा हुआ कि...
सुजाता कुछ सोच पाती उसके पहले उसका फ़ोन बजने लगा....और उसे राहत मिल गई...
सुजाता(मन मे)- बच गई....(मुझसे)- बेटा मैं बात कर लूँ...फिर बताती हूँ...
और इतना बोल कर सुजाता अपनी गान्ड मटकाते हुए रूम मे निकल गई...
मैं(मन मे)- जा साली....और सोच कर आना कि बोलना क्या है....
फिर मैं पारूल के पास चला गया....जहा पारूल बेड पर औंधी लेटी हुई कुछ पढ़ रही थी...पर बुक उल्टी पकड़ी थी...
मैं- पारूल...ये क्या....उल्टी बुक...
पारूल- अरे भैया...वो मैं तो बस एक पिक्चर देख रही थी...जो उल्टी देखने पर समझ आ रही है...
मैं- ह्म्म...उल्टा समझ मे आ जाता है क्या...
पारूल- भैया...समझने की नज़र चाहिए....उल्टा हो या सीधा...और वैसे भी...हम अपने आप को आईना देख कर ही समझ पाते है कि कैसे लग रहे है....जबकि हम आईने मे उल्टे ही होते है ना...
मैं- बात तो सही कही...कभी -2 उल्टी तस्वीर बहुत कुछ बोल जाती है..जो सीधी भी ना बोल पाए. .
पारूल- ह्म्म..
मैं- अच्छा...अब ये बुक रखो और रेस्ट करो...और शाम तक हिलना भी मत....
फिर मैं पारूल को रेस्ट करता छोड़ कर अपने रूम मे आ गया...और फिर से रिचा, सरफ़राज़ और बहादुर की बातों को सोचने लगा.....
मैं अपने रूम मे बैठा अपनी सोच मे खोया हुआ ही था कि सुजाता आ गई....
सुजाता- हेलो...मैं आ सकती हूँ...
मैं- हाँ आंटी..आइए...
सुजाता- ह्म्म...तो अब बताओ...क्या बोल रहे थे...अपनी बात अधूरी रह गई थी ना...
मैं- ह्म्म..पर कहना तो आपको था...आपने ऑफीस मे क्या कहा था...और क्यो....
सुजाता- ह्म्म..वो तो बस ऐसे ही...आज कल के एंप्लायी ठीक से काम नही करते तो उन्हे टाइम -टाइम पर हड़काना पड़ता है ....
मैं- वो तो है...पर उसके लिए डॅड है...मैं हूँ...आपको तकलीफ़ करने की क्या ज़रूरत थी...और फिर आपने प्रॉपर्टी के पेपर्स मागे ही क्यो...उससे आपको क्या मतलब...
सुजाता- वो...वो तो तुम्हारे डॅड ने माँगे थे...मैने तो बस....
मैं- चुप क्यो हो गई...आपने तो बस यही कहा था ना कि ये प्रॉपर्टी मेरे नाम क्यो है...है ना....
सुजाता- देखो बेटा...मुझे ग़लत मत समझो...मैं तो बस पूछ रही थी कि आकाश ने ऐसा क्यो किया....बाकी उसकी मर्ज़ी...सब उसी का है...
मैं- ह्म्म्मो..सब मेरा भी है....है ना...
सुजाता- ह्म्म...पर तुम्हारे नाम पर सब देख कर सब यही बोलेगे ना कि बेटे ने ऐसा क्यो किया ....तुम्हे नही लगता...
मैं- हो सकता है...पर अब कर क्या सकते है...ये तो हो ही गया ना...
सुजाता- हो सकता है बेटा ..तुम सब कुछ अपने डॅड के नाम ही कर दो...
मैं- ह्म्म..और इससे क्या होगा...
सुजाता- इससे लोग यही बोलेगे की कितना प्यारा बेटा है...डॅड के होते हुए कुछ अपने नाम नही किया...फिर तो ये तुम्हारा ही है ना....
माओं- ओके आंटी....सोचता हूँ...
सुजाता- सोचना क्या...मैं तो कहती हूँ कि....
तभी मेरा फ़ोन बज उठा ..ये रक्षा का कॉल था....और मैने सुजाता को रोक कर बात करनी सुरू की...
दोनो ने कुछ ही देर मे रंडियों की तरह लंड चूस -चूस कर खड़ा कर दिया....
मैं- आअहह....क्या कर रही हो....अब मेरा मूड बनने लगा है...
रक्षा- उउउंम्म.....उउम्म्मह....बनने दो ना...
मैं- सोच लो....मैं तुम दोनो का बुरा हाल कर दूँगा....
रूबी- उउउम्म्मह....उसकी ज़रूरत नही पड़ेगी....
मैं- क्या मतलब....???
रूबी- वहाँ देखो भैया....आपका मूड बनाने का साधन....
रूबी की बात सुन कर मैने एक तरफ देखा तो वहाँ एक औरत खड़ी हुई थी....मेरे देखते ही वो शरमा कर नीचे देखने लगी....
मैं- ये...ये है कौन...
रूबी- उउउंम्म...आओ अम्मी...अब ये आपका है...
मैं(चौंक कर)- अम्मी ....ये तेरी अम्मी है....पर ये यहाँ...कैसे...
रूबी- ये इनका ही घर है भैया....यही रहती है...
मैं- वो तो ठीक है पर..इस वक़्त....आख़िर ये चल क्या रहा है...
रक्षा- उउउंम्म...उउम्म्मह...मैं बताती हूँ....असल मे आंटी आपके हथ्यार की दीवानी हो गई है...और वो...
मैं(बीच मे, चिल्ला कर)- रक्षा...तुमने मुझे समझ क्या रखा है...कॉल बॉय...और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये सब सोचने की भी...
मेरी जोरदार आवाज़ सुन कर रक्षा सहम गई...रूबी का चेहरा भी उतर गया...और रूबी की अम्मी भी मुझे उदासी भरी नज़रों से देखने लगी....
मैं- बोलो...क्या है ये सब....बोलो...
रूबी- एम्म..मुझे लगा कि आपको ये पसंद आएगा...पर आप तो...
मैं- पसंद की बात नही...पर ये सब क्यो...
रक्षा- भैया....वो आंटी ने आपको रूबी के साथ देख लिया था...और तभी से...
मैं- तभी से क्या...मन हुआ और बुला लिया...मुझसे पूछा भी नही...हां...
मेरी बात सुन कर रूबी की अम्मी दूसरे रूम मे भाग गई...रूबी भी अपनी अम्मी के पीछे चली गई...
रक्षा- भैया...ये आपने सही नही किया...बेचारी को हर्ट कर दिया....
मैं- चुप कर....तूने मुझे बताया क्यो नही...और ये रूबी...अपनी ही माँ को...
रक्षा- तो उसमे बुरा क्या...उसके डॅड दुबई मे रहते है...और उसकी माँ यहाँ तड़पति रहती है...क्या उन्हे मस्ती करने का हक़ नही...
मैं- है..बिल्कुल है...पर इस तरह से...मुझे बोलती...
रक्षा- वो डर रही थी..इसलिए रूबी से बोला...
मैं- ओह...और वो अपनी माँ चुदवाने को तैयार हो गई...
रक्षा- हाँ...और इसमे बुराई नही...
मैं- तू अपनी माँ चुदवा देती...
रक्षा- वो कहेगी तो चुदवा ही दुगी...
मैं- तू तो बड़ी वाली है...चल छोड़...अब क्या...
रक्षा- आपने आंटी को हर्ट कर दिया...अब क्या...
मैं- ह्म्म..तो मना लेता हू...तुम एक काम करो...उसे यहाँ भेज दो...और कहना कि मेरे साथ खुल कर पेश आए...तभी उन्हे सही सुख मिलेगा..ओक...अब जाओ...और भेजो मेरी नई छमिया को....
रक्षा , आंटी को बुलाने चली गई...और मैं सोचने लगा कि ये सब हो क्या रहा है...करना कुछ था और अब करने कुछ और ही जा रहा हूँ....साली ये सेक्स की भूख बढ़ती ही जा रही है...
मैं वैसे ही बैठा रहा और थोड़ी देर बाद रक्षा, आंटी को ले कर आ गई...
जैसे ही उसने मेरा लंड देखा तो आँखे झुका ली...
मैं- रक्षा...इनसे बोल दो कि मुझे शरमाती औरते अच्छी नही लगती...खुल के आओ और मज़ा लो...
रक्षा- हाँ आंटी...आप खुल के मज़ा लो...मैं और रूबी घूम कर आते है...गेट बाहर से लॉक रहेगा...अब दिल खोल कर चुदवाओ ..हहहे....
रक्षा की बात सुन कर आंटी शर्मा गई...और रक्षा उसे रूम मे छोड़ कर रूबी के साथ घर से बाहर निकल गई...
मैं- ह्म्म्मी..तो अपना नाम तो बता दो आंटी...
सलमा- स...सलमा...
मैं- देखो सलमा...शरमाओ मत...तुम्हे मेरा लंड पसंद है ना...तो आओ और इसे प्यार करो...फिर ये तुम्हे बहुत प्यार करेगा...आओ जल्दी...
सलमा धीरे से मेरे पास आई और बैठ कर लंड थामते ही सिसक पड़ी...
सलमा- आअहह...
मैं- ह्म्म्मी ..पसंद आ गया...अब इसे प्यार करो...दिल खोल कर...जल्दी...टाइम वेस्ट मत करो....
सलमा ने एक नज़र मुझे देखा और फिर अपने गुलाबी होंठो को लंड के टोपे पर रख दिया....
मैं थोड़ी देर तक सलमा से लंड चुस्वता रहा...पर अब लंड को छूट की चाह तड़पने लगी...इसलिए मैने सलमा को रोक दिया.....
मैं- आज चुसाइ बहुत हो गई....पहले वो लड़कियाँ भी कर गई थी...अब चुदाई चालू करे....
सलमा- ह्म्म्मर...पर मेरे बेडरूम मे...
मैं- जहा तुम कहो...पर कुछ खास है क्या...
सलमा- ह्म्म्मर...वहाँ फीलिंग अच्छी आयगी....उसी बेड पर मेरे सोहर चोदते थे...आज कोई गैर भी मुझे वही चोदेगा तो ये मेरे सोहर के मुँह पर तमाचा होगा....
मैं- पर ऐसा क्यो....तुम्हारे सोहर तूमे चोदते नही अब...
सलमा- चोदेगे तो तब , जब आएँगे....वो तो दुबई मे रहता है और मैं यहाँ तड़पति रहती हूँ...महीनो मे आता है और 1 दिन मे ही चला जाता है...उसे मेरी फ़िक्र ही नही...
मैं- ह्म्म..तो चलो....आज तुम्हारे सोहर की कमी पूरी कर दूं...
और फिर सलमा मुझे अपने बेडरूम मे ले आई....
बेडरूम मे आते ही सलमा ने अपनी नाइटी निकाल दी और उसका गोरा बदन मेरी आँखो मे चमक उठा....
एक दम मस्त बॉडी थी सलमा की....हर एक अंग परफेक्ट....और उसकी गान्ड तो...हाए...कयामत थी....इसे तो ज़रूर मारूगा...पर आज टाइम नही...
मैने सलमा को बाहों मे भर के किस किया और उसे बेड पर लिटा दिया...
फिर जैसे ही मैं झुका तो सलमा ने अपनी आँखे बंद कर ली...
मैं- नही सलमा...आँखे खोल कर मज़ा लो...
सलमा ने आखे खोल कर मुस्कुरा दिया और मैने उसके बूब्स चूसना सुरू कर दिया....
सलमा- ये...यही तो है मेरे सोहर...जो मुझे याद ही नही करते...हुह..
सलमा की बात सुनकर तो मेरा सिर पूरा चकरा गया...
मैं- ये कैसे हो सकता है...
सलमा- क्या कैसे...
मैं- क्क़..कुछ नही...ये तुम्हारे सोहर ही है ना...
सलमा- हाँ...पर तुम ऐसे क्यो पूछ रहे हो....
मैं- कुछ नही...वैसे इनका नाम क्या है....
सलमा- सरफ़राज़ ख़ान.......
सरफ़राज़ ख़ान , सलमा का पति....?????????????????
सलमा की बात सुनकर तो मेरे माइंड मे एक धमाका सा हो गया था....और ये बात मेरी आँखो से सॉफ पता चल रहा था...जो सलमा ने भी नोटीस कर लिया....
सलमा- क्या हुआ....तुम इन्हे जानते हो क्या...
मैं- नही...बस ऐसा लगा कि कही देखा है पहले....इसलिए...
सलमा- ओह्ह...
तभी गेट खोल कर रक्षा और रूबी भी आ गई...
रक्षा- तो आंटी...कैसा रहा...
सलमा फिर से शर्मा गई और नीचे देखने लगी...
रक्षा- ओये होये...देख तो रूबी...तेरी अम्मी को...ऐसे शर्मा रही है जैसे आज ही सुहागरात हुई है...हहहे ....
रूबी- हहहे .....अम्मी....मज़ा आया ना ....
रक्षा- वो तो आया ही होगा....भैया करते ही ऐसे है...है ना आंटी...
सलमा ने एक नज़र रक्षा को देखा और फिर शर्म से लाल हो गई...
रक्षा- ओह्ह्ह...काश हम साथ मे होते...तो आंटी को अपनी आँखो से देख पाते...
रूबी- ह्म्म...मैं तो अम्मी को सवारी करते देखना चाहती थी...पर...
मैं(बीच मे)-अब बस भी करो....और रक्षा तुम्हे घर चलना है..तो छोड़ दूं...
रक्षा- नही भैया...आप जाओ...आज मैं यही रुक रही हूँ...नई नवेली दुल्हन के साथ...
और फिर से रूबी और रक्षा हँसने लगी...
थोड़ी देर बाद मैं वहाँ से निकल आया...पर मेरा माइंड उसी फोटो पर लगा हुआ था....मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि अब क्या करूँ...
सबसे पहले तो मुझे ये बात हजम ही नही हो रही थी कि सरफ़राज़ ही रूबी का बाप है....
और दूसरी बात ये कि अब मैं अकरम से क्या बात करूँ...क्योकि मैने तो सोचा था कि अकरम से वसीम के बारे मे बात करू...शायद कुछ और पता चले....पर अब मैं कन्फ्यूज़ था...
वसीम ख़ान ही सरफ़राज़ है और सरफ़राज़ ही सलमा का पति भी है...मतलब सरफ़राज़ की दो बीवियाँ है...और दोनो के बच्चे भी...पर क्यो...और कैसे....???
एक ही सहर मे साला दो बीवियाँ पाल रहा है और ये बात किसी को पता नही...कैसे....???
यही सवाल मुझे सबसे ज़्यादा परेशान कर रहा था...और ये भी की ये बात अपने खास दोस्त को बताऊ या नही कि उसका बाप उसे धोखा दे रहा है.....
अपने दिमाग़ मे यही सब सवाल लिए मैं घर पहुँच गया....
रात सुरू हो चुकी थी...पर सबसे ज़्यादा अंधकार मेरे माइंड मे छाया हुआ था....
अब तक मेरी सोच यही थी कि अकरम से बात कर के कोई डिसिशन लूँगा...पर अब मुझे प्लान चेंज करना पड़ेगा...या कुछ और सोचना पड़ेगा....
सुजाता- अरे अंकित....जवाब भी नही दिया...कहाँ खोया है....
सुजाता की आवाज़ सुन कर मैं जैसे नीद से जगा...और मैने देखा की मैं सीडीयों पर खड़ा हूँ और सुजाता नीचे खड़े मुझे आवाज़ दे रही है ...
मैं- हुहन...हाँ आंटी...कुछ कहा क्या....
सुजाता- कहाँ खोया है...
मैं- कही नही..बोलो...
सुजाता- तुम पहले फ्रेश हो जाओ...मैं रूम मे आ कर बात कर लुगी...ओके..
मैं- जी...
फिर मैं रूम मे गया और फ्रेश हो कर सुजाता का वेट करने लगा...
तभी मुझे शीला का कॉल आ गया..पर मैने बहाना कर के उसे कल मिलने का बोल दिया.....
थोड़ी देर बाद सुजाता मेरे कमरे मे आई....और आते ही उसने गेट लॉक कर दिया....
गेट की आवाज़ सुन कर मैने उसे देखा तो मैं देखता रह गया....
आज तो साली ने कपड़े सिर्फ़ नाम के लिए पहने हुए थे....उसने एक पतली सी नाइटी पहनी हुई थी...जो उसकी आधी जाघे दिखा रही थी....साथ मे वो नाइटी सिर्फ़ दो डोरियों के सहारे उसके कंधो से टॅंगी हुई थी...उसका गला भी इतना खुला था कि उसके दोनो बड़े बूब्स मुझे आँख मार रहे थे...कुल मिला कर साली लंड खड़ा करने ही आई थी...
सुजाता- अब मूड ठीक है ...??
मैं(मन मे)- हाँ साली...तूने ही फ्रेश कर दिया....
सुजाता- क्या हुआ...अभी भी सोच मे डूबा हुआ है...
मैं- नही...अब ठीक है...और आपके आने से तो और भी ज़्यादा ठीक हो गया....
सुजाता ने देखा कि मैं उसे देख कर मुस्कुरा रहा हूँ तो वो भी मुस्कुरा दी और आ कर मेरे बाजू मे सट कर बैठ गई....
सुजाता(टाँग को दूसरी टाँग पर चढ़ा कर)- मैं इसलिए ही तो आई हूँ कि तुम्हारा मूड ठीक कर दूं...
सुजाता ने अपनी बॉडी हिला कर मेरी बॉडी से रगड़ दी...उपेर से टाँग पर टाँग चढ़ाने से उसकी नाइटी और उपर हो गई और उसकी जाघ और ज़्यादा चमक उठी...
मैं(जाघ देखते हुए)- ह्म्म...सही किया आपने..मुझे मूड फ्रेश करने के लिए इसी की ज़रूरत थी....
सुजाता- ह्म्म..अच्छा बताओ...क्या प्राब्लम है...शायद मैं कोई मदद कर सकूँ...
मैं- ह्म्म...असल मे मेरा बदन दुख रहा है....पता नही क्यो...पर एक अजीब सी थकान लग रही है...
सुजाता(मेरे गले मे हाथ डाल कर)- ओह्ह..तो बताओ..मैं मालिश कर दूं...
मैं- नही आंटी...मालिश की ज़रूरत नही होगी..बस थोड़ी देर मे ठीक हो जायगा...
सुजाता- ओके ...चलो मैं सिर सहला देती हूँ...
और सुजाता मेरे सिर पर हाथ फिराने लगी...इस समय मुझे उसकी बॉडी से आ रही खुसबु मदहोश कर रही थी...लगता है देव लगा कर आई थी...साथ मे उसके बूब्स का हिस्सा मेरे कंधे पर रगड़ कर मेरी भावनाओ को हवा दे रही थी....
अब तक मैं समझ चुका था कि सुजाता को मेरे साथ खुलने मे कोई प्राब्लम नही...इसलिए मैने भी आगे बढ़ने का फ़ैसला कर लिया...
मैने अपना हाथ सुजाता की नंगी जाघ पर रखा और बिना किसी रियेक्शन के बोला...
मैं- अच्छा आंटी...आज आप क्या कह रही थी..वो प्रॉपर्टी पेपर्स के बारे मे...
सुजाता ने मेरा हाथ अपनी जाँघ पर देखा ...और फिर मुझे देखा...और मुस्कुरा कर बोली...
सुजाता- वो...वो मैं ये कह रही थी कि तुम्हे अभी इस लोड की क्या ज़रूरत...अभी सब अपने डॅड को संभालने दो...
मैं(हाथ को थोड़ा घुमाते हुए)- सही कहा आंटी...मैं भी यही सोचता हूँ..अभी तो मेरे ऐश करने के दिन है...है ना...
और इसी के साथ मैने अपना हाथ थोड़ा सा निघट्य के अंदर डाल दिया...जिससे सुजाता की आँखे बड़ी हो गई...पर वो नॉर्मल हो कर मुस्कुराइ और बोली...
सुजाता- ह्म्म...यही तो...तुम्हारी उमर ही ऐश करने की है...
मैं(हाथ को घुमाते हुए)- पर ऐश कैसे करू आंटी....कोई मिलता ही नही...मतलब...आप समझ रही है ना...
सुजाता(मन मे)- कितना बढ़ा कमीना है...इतनो को चोद चुका है और बन रहा है बिल्कुल सरीफ़....
मैं- क्या हुआ आंटी...मैने कुछ ग़लत बोला क्या...
सुजाता- हुह..नही...तुमने सही कहा....पर बेटा...ढूँढने से सब मिल जाता है...तुम ट्राइ करो..सब मिल जायगा....
मैं(हाथ को थोड़ा और आगे ले जा कर)- पर यही तो प्राब्लम है....मैं डाइरेक्ट कैसे कहूँ...सामने वाले को समझना चाहिए ना....
सुजाता अब हाथ के स्पर्श से गरमाने लगी थी...पर उसने मुझे रोका नही...
सुजाता- बेटा...ट्राइ करो...सफलता मिल ही जाएगी...
मैं- क्या आप मेरी प्राब्लम सॉल्व नही कर सकती आंटी...
मैने अपना मुँह सुजाता के मुँह के थोड़ा पास कर लिया और उसकी आँखो मे देखने लगा....
सुजाता- मैं...मैं कैसे...
तभी मैने अपना हाथ थोड़ा और आगे बढ़ा दिया और मेरा हाथ सुजाता की जाघो के बीच पहुँच गया...जिससे सुजाता की आँखे और खुल गई...
मैं(हाथ को दबाते हुए)- बोलो ना आंटी...क्या आप मेरी मदद करेगी...ह्म..
मैने तभी अपना चेहरा सुजाता के चेहरे के बिल्कुल करीब कर लिया...अब हमारी साँसे एक दूसरे के चेहरे को टच कर रही थी...और हमारे होंठो के बीच 1 उंगली का ही फासला था...
मैं- आंटी...मेरी मदद करेगी ना...
सुजाता- ह्म...हां बेटा...करूगी...हम्म...
सुजाता मेरे हाथ की हरक़त से गरमाने लगी थी...और अब वो भी आगे बढ़ने के लिए तैयार थी..
मैने अपने हाथ को जाघो के बीच कर के दबाया तो सुजाता समझ गई कि मैं क्या चाहता हूँ...और गरम हो कर सुजाता ने दोनो टाँगो को अलग कर लिया और मेरा हाथ उसकी पैंटी के उपेर से उसकी चूत पर जा पहुँचा....
कुछ देर तक तो मैं शांत रहा पर काजल की मदमस्त जवानी मुझे मजबूर करने लगी....तो मैं भी उसकी जवानी के रंगने की सोच ली....
काजल ने जब देखा की सब लोग हमसे थोड़ा दूर है तो वो मेरे पास आ गई....
काजल- क्या बात है...आप तो रिलॅक्स भी ठीक से नही करते....
मैं- ह्म्म...क्या करे...तुम करवाओ...तब तो करूगा...
काजल- मेरे करीब आ कर....तो कहिए....कैसे रिलॅक्स करना चाहेगे आप...
मैं- ह्म्म...ज़्यादा कुछ नही...बस थोड़ी सी मस्ती ...और क्या...
काजल- ह्म्म्मड...तो फिर एक काम करे...रेस लगते है...देखते है कि आप हमे पकड़ पाते है कि नही....
मैं- अच्छा...अगर पकड़ लिया तो....
काजल- नही पकड़ पाए तो...
मैं- सवाल के बदले सवाल....गुड...ठीक है...मैं हरा तो तुम्हे शॉपिंग कराउन्गा....पर जीता तो.....
काजल(मुस्कुरा कर)- तो मैं एक मज़ेदार गिफ्ट दूगी....
मैं- ह्म....अच्छा है...तो सुरू करे....
काजल- ह्म्म...कॅच मी..न्ड गेट युवर गिफ्ट...
और काजल पूल मे तैर गई...और मैं उसके पीछे निकल गया.....
करीब 3 घंटे के बाद मैं काजल के घर से निकल कर घर जाने लगा...तभी मेरे आदमी का कॉल आ गया....और मैने कार सीक्रेट हाउस की तरफ दौड़ा दी.....
सीक्रेट हाउस पर...........
मैं- क्या हुआ...इतने अर्जेंट मे क्यो बुलाया....
स- अंदर आओ...देखो इसने क्या किया....
मैं अंदर गया तो देखा कि रिया बेड पर बेहोश डली हुई थी और डॉक्टर उसका चेक अप कर रहा था....
मैं- क्या हुआ इसे...
स- इसने सुसाइड की कोसिस की...
मैं- सुसाइड....पर क्यो...और कैसे...
स- क्यो का तो यही बताएगी...पर ये सुसाइड इसने अपने एअर रिंग से की...बहुत धार वाला इयररिंग था...
मैने रिया के बेड के बाजू मे खड़ी उसकी फ्रेंड को देख कर गुस्से मे कहा....
मैं- तू क्या कर रही थी...रोका नही इसे...
रिया फ्रेंड- मुझे कुछ पता नही चला...मैं बाथरूम गई...जब तक...
और फिर वो रोने लगी...
मैं- ओह गॉड...डॉक्टर...अब ये ठीक है ना...
डॉक्टर- ह्म्म..हथियार धारदार नही था..वरना बचना मुस्किल होता...अब ये ठीक है...और...ये लो...होश भी आ गया...
मैं(चिल्ला कर)- तू समझती क्या है अपने आपको...ऐसा करने की तेरी हिम्मत कैसे हुई...हाँ...
मेरी आवाज़ सुन कर रिया सहम गई और आँखो से आँसू बहने लगे...
मैं- उफ्फ...ये लड़कियाँ भी ना...अब क्या हुआ..रोने क्यो लगी..बोल ना...ऐसा क्यो किया...वजह तो बता...
रिया- म्म...मैं अपनी इज़्ज़त की खातिर मरना पसंद करूगि...इसलिए...
मैं- पर तेरी इज़्ज़त को क्या हो गया...किसी ने कुछ किया क्या...
रिया- न..नही..पर आज नही तो कल...तुम लोग यही करोगे ना...और मैं अपनी इज़्ज़त...
मैं(बीच मे)- बस...बहुत हुआ....इज़्ज़त-इज़्ज़त....देख..मैं लड़कियो की रेस्पेक्ट करता हूँ...और बिना मर्ज़ी उन्हे हाथ भी नही लगाता...इसलिए ये मत सोच कि यहाँ तुम्हारी इज़्ज़त के साथ कुछ बुरा होगा..ओके...
रिया- तो...फिर हमे छोड़ दो ना...हमसे और क्या चाहिए ...
मैं- छोड़ देगे...बस एक बार हमारा काम हो जाए...और वो भी इज़्ज़त के साथ...ओके...
रिया- कैसा काम...हमसे क्या काम है...
मैं- सब बताउन्गा...पर अभी नही...अभी रेस्ट करो ..
और मैं जाने के लिए मुड़ा और गेट पर पहुँच कर रिया को वॉर्निंग दे दी...
मैं- रिया...यहाँ आराम से रहो...कोई तुम्हे बुरी नज़र से देखेगा भी नही...पर अगर आइन्दा ऐसी कोई हरक़त की..तो तुम्हारी इज़्ज़त की बॅंड बजा दूगा...समझी....
और फिर थोड़ी देर रुकर मैं घर निकल आया...कार ड्राइव करते हुए मैं रिया के ही बारे मे सोचता रहा...
मैं(मन मे)- क्या लड़की है...सिर्फ़ इज़्ज़त के बारे मे सोच कर ही सुसाइड करने चली थी...
यकीन ही नही होता कि ये रिचा की बेटी है...एक रिचा है...जो रंडियों को भी पीछे छोड़ दे...और एक उसकी लड़की...जो इज़्ज़त को ही जिंदगी समझती है....
एक तरफ रिचा...अपना काम निकलवाने के लिए किसी के भी नीचे सो जाती है...और एक उसकी बेटी ...जो इज़्ज़त की खातिर जान देने से भी नही हिचकति....
भगवान की लीला भी कमाल है...""कमल को हमेशा कीचड़ मे ही खिलते है...""" ....जय हो प्रभु..जय हो....