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वो उस दिन अकेला था और भैंसों के लिए चारा काट रहा था। मुझे देखकर उसने मशीन बंद कर दी और मेरी तरफ खाना लेने आया। मगर यह क्या उसने तो खाना पकड़ने के बहाने मेरी कलाई ही पकड़ ली।
मैंने कहा- “यह क्या कर रहे हो?”
वो बड़े ही अल्ल्हड़पन के साथ बोला- “तेरी कलाई पकड़कर देख रहा हूँ कि जवानी वाली चमड़ी आई भी है या नहीं…” मैं छटपटा कर उससे अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी मगर उसने खाने का डिब्बा किनारे रखकर मुझे अपनी तरफ खींचा।
मैंने उससे विनती करते हुए कहा- “जाने दे मुझे, रब के वास्ते जाने दे मुझे…”
वो बोला- “चली जाना, आज तेरे घर पर कोई भी तो नहीं है। सब तो शादी में गए हुए हैं। तू अकेली वहाँ क्या करेगी?” और इतना कहते हुए उसने मेरे उभरते हुए अनारों को ऊपर से रगड़ा और मुझे बाँहों में जकड़ लिया और मेरे होंठ चूमने लगा। मैं इस अकस्मात हमले को झेल नहीं पाई। हालाँकि मुझे इन सब चीजों का ज्ञान था मगर सम्भोग के बारे में मेरा ज्ञान अभी पूरा नहीं था।
मैंने उससे विनती करते हुए फिर से कहा- “कालू जाने दो। मुझे वरना मैं माँ को बता दूँगी…”
वो मेरे उभारों को दबाते हुए बड़बड़ाया- “चुप कर साली। वो कौन सी दूध की धुली हैं। तेरी माँ और चाची दोनों को ठोंक चुका हूँ और वो भी उनकी पहल पर…” फिर उसने मेरी कमीज के बटन खोलते हुए कहा- “अभी कुछ नहीं करूँगा बस ऊपर से ही एक बार मजे लेने दे। मैंने इतनी कच्ची उम्र की कली को कभी नंगा नहीं देखा है। देर ना कर और मुझे ऊपर से ही हलके-फुल्के मजे लेने दे…” इतना कहते हुए उसने मेरी कमीज उतारनी शुरू कर दी और फिर एक ही पल में उसने मेरी कमीज को मेरे शरीर से अलग कर दिया।
मैंने अपने अनारों पर अभी ब्रा डालनी शुरू नहीं किया था, इसलिए कमीज के नीचे कुछ भी नहीं था।
मेरे उभरते हुए अनारों को देखते ही उसका मुँह खुला का खुला रह गया और उसने कहा- “हाय कितनी मस्त है तेरी जवानी…”
जब उसने मेरे दाल के दाने जैसे चूचुकों को चुटकी में लेकर मसला तो मानो मुझे स्वर्ग का मजा मिल गया। उसने अपना सर झुका कर अपने होंठों से मेरे चूचुक चूसने शुरू कर दिए। मेरे तीस इन्ची अनार उसके मुँह में पूरे आ रहे थे। वो कमाल कर रहा था। मुझे बहुत-बहुत-बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। जी हाँ दोस्तों, इतना मजा तो मुझे आज भी नहीं आता जितना मजा मुझे उस पहली बार में आया था।
मैं उसके बालों में हाथ फेर रही थी और वो मेरे चूचुक चूस रहा था। मेरे लिए यह एक नया अनुभव था। उसने चूचुक चूसते हुए सलवार का नाड़ा खींच दिया और मेरी सलवार नीचे सरक गई। मैंने आज सलवार के नीचे भी कुछ नहीं पहना था। हल्के भूरे बालों से भरी मेरी गुलाबी होंठों वाली चूत देखकर उसका बुरा हाल हो गया। और जब उसने मेरी चूत के होंठ को अलग करके उसपर हाथ फेरा तो…
हाय… मैं क्या बताऊँ, मैं सिसकने लगी। मैं अपने होश खोने लगी थी और मैंने कहे- “काले, छोड़ दे मुझे। कुछ कुछ होता है…”
“मैं तेरी नहीं लूँगा, यह वादा रहा मेरा। बस तू अपनी मर्जी से मुझे मजे लेने दे। वरना मैं जबरदस्ती ले ही लूँगा…”
वैसे मुझे बहुत मजा आ रहा था। उसने मुझे बोरियों से बने तख़्त पर लिटाया और मेरे टांगो के बीच में खुद बैठ गया। उसने अपनी दो उँगलियों से मेरे चूत के होंठ फैलाए और अपनी जीभ उसपर रख दी। मैं तो पागल सी हो रही थी। वो अपनी जीभ से मेरी चूत को चाट रहा था, उसकी खुरदरी जीभ मेरी कोमल चूत पर रगड़ खा रही थी और मेरी चूत अजीब सी अकड़न के साथ फुदक रही थी।
उसने कहा- “कितनी साफ सुथरी कुँवारी चूत है। पहली बार एक कच्ची लड़की की चूत देख रहा हूँ…” और वो मजे ले-लेकर मेरी चूत को चूसने लगा। इसी बीच उसने अपना पजामा उतार दिया और फिर अपना कच्छा भी उतार दिया।
हाय राम… जब मैंने उसका काला नाग जो पहले किसी चमड़ी के हिस्से की तरह लटक रहा था, उसे अपना सर उठाते हुए देखा, मेरी तो जान ही निकल गई। फिर उसका वो काला नाग देखते ही देखते एक लोहे का डण्डा जैसा हो गया। उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपना लौड़ा पकड़ाकर बोला- “ले मेरी जान… इसे पकड़कर इसके साथ खेल। एक ना एक दिन तो तुझे इसको अपनी चूत में डलवाना ही पड़ेगा। अगर मैं नहीं डालूँगा तो कोई और डाल देगा। शादी के बाद तो तेरा खसम रहम नहीं खायेगा। इसको तो फटना ही होगा आज नहीं तो कल। चल चूम ले इसे और मजे लेते हुए मजे दे…”
मैंने उसके लौड़े को सहलाकर देखा और फिर मुँह में लेने की कोशिश की। मगर वो लौड़ा था कि मेरे मुँह में समां नहीं रहा था।
वो बोला- “अपनी जबान से चाट-चाटकर मेरा पानी निकलवा दे। फिर चली जाना…”
मैं बड़ी असमंजस में थी। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि काला कौन से पानी का बात कर रहा है। इसी उधेड़बुन में मैंने उसे पूछा- “पानी… कैसा पानी निकालना है?”
वो मुझे समझाते हुए और मेरे मम्मे दबाते हुए बोला- “अरे मेरी जान… इसके अंदर से पानी निकलता है, जिससे बच्चा होता है। अगर कल को तेरा खसम अपना पानी तेरी चूत के अंदर निकालेगा, तब जाकर तू माँ बनेगी। चल चाट ले इसे…” काला अपना लण्ड हाथ में लेकर मेरे चेहरे के करीब बैठकर मुठ मारने लगा। वो मेरे होठों से अपने लण्ड को रगड़-रगड़कर मुठ मार रहा था।
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वो उस दिन अकेला था और भैंसों के लिए चारा काट रहा था। मुझे देखकर उसने मशीन बंद कर दी और मेरी तरफ खाना लेने आया। मगर यह क्या उसने तो खाना पकड़ने के बहाने मेरी कलाई ही पकड़ ली।
मैंने कहा- “यह क्या कर रहे हो?”
वो बड़े ही अल्ल्हड़पन के साथ बोला- “तेरी कलाई पकड़कर देख रहा हूँ कि जवानी वाली चमड़ी आई भी है या नहीं…” मैं छटपटा कर उससे अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी मगर उसने खाने का डिब्बा किनारे रखकर मुझे अपनी तरफ खींचा।
मैंने उससे विनती करते हुए कहा- “जाने दे मुझे, रब के वास्ते जाने दे मुझे…”
वो बोला- “चली जाना, आज तेरे घर पर कोई भी तो नहीं है। सब तो शादी में गए हुए हैं। तू अकेली वहाँ क्या करेगी?” और इतना कहते हुए उसने मेरे उभरते हुए अनारों को ऊपर से रगड़ा और मुझे बाँहों में जकड़ लिया और मेरे होंठ चूमने लगा। मैं इस अकस्मात हमले को झेल नहीं पाई। हालाँकि मुझे इन सब चीजों का ज्ञान था मगर सम्भोग के बारे में मेरा ज्ञान अभी पूरा नहीं था।
मैंने उससे विनती करते हुए फिर से कहा- “कालू जाने दो। मुझे वरना मैं माँ को बता दूँगी…”
वो मेरे उभारों को दबाते हुए बड़बड़ाया- “चुप कर साली। वो कौन सी दूध की धुली हैं। तेरी माँ और चाची दोनों को ठोंक चुका हूँ और वो भी उनकी पहल पर…” फिर उसने मेरी कमीज के बटन खोलते हुए कहा- “अभी कुछ नहीं करूँगा बस ऊपर से ही एक बार मजे लेने दे। मैंने इतनी कच्ची उम्र की कली को कभी नंगा नहीं देखा है। देर ना कर और मुझे ऊपर से ही हलके-फुल्के मजे लेने दे…” इतना कहते हुए उसने मेरी कमीज उतारनी शुरू कर दी और फिर एक ही पल में उसने मेरी कमीज को मेरे शरीर से अलग कर दिया।
मैंने अपने अनारों पर अभी ब्रा डालनी शुरू नहीं किया था, इसलिए कमीज के नीचे कुछ भी नहीं था।
मेरे उभरते हुए अनारों को देखते ही उसका मुँह खुला का खुला रह गया और उसने कहा- “हाय कितनी मस्त है तेरी जवानी…”
जब उसने मेरे दाल के दाने जैसे चूचुकों को चुटकी में लेकर मसला तो मानो मुझे स्वर्ग का मजा मिल गया। उसने अपना सर झुका कर अपने होंठों से मेरे चूचुक चूसने शुरू कर दिए। मेरे तीस इन्ची अनार उसके मुँह में पूरे आ रहे थे। वो कमाल कर रहा था। मुझे बहुत-बहुत-बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। जी हाँ दोस्तों, इतना मजा तो मुझे आज भी नहीं आता जितना मजा मुझे उस पहली बार में आया था।
मैं उसके बालों में हाथ फेर रही थी और वो मेरे चूचुक चूस रहा था। मेरे लिए यह एक नया अनुभव था। उसने चूचुक चूसते हुए सलवार का नाड़ा खींच दिया और मेरी सलवार नीचे सरक गई। मैंने आज सलवार के नीचे भी कुछ नहीं पहना था। हल्के भूरे बालों से भरी मेरी गुलाबी होंठों वाली चूत देखकर उसका बुरा हाल हो गया। और जब उसने मेरी चूत के होंठ को अलग करके उसपर हाथ फेरा तो…
हाय… मैं क्या बताऊँ, मैं सिसकने लगी। मैं अपने होश खोने लगी थी और मैंने कहे- “काले, छोड़ दे मुझे। कुछ कुछ होता है…”
“मैं तेरी नहीं लूँगा, यह वादा रहा मेरा। बस तू अपनी मर्जी से मुझे मजे लेने दे। वरना मैं जबरदस्ती ले ही लूँगा…”
वैसे मुझे बहुत मजा आ रहा था। उसने मुझे बोरियों से बने तख़्त पर लिटाया और मेरे टांगो के बीच में खुद बैठ गया। उसने अपनी दो उँगलियों से मेरे चूत के होंठ फैलाए और अपनी जीभ उसपर रख दी। मैं तो पागल सी हो रही थी। वो अपनी जीभ से मेरी चूत को चाट रहा था, उसकी खुरदरी जीभ मेरी कोमल चूत पर रगड़ खा रही थी और मेरी चूत अजीब सी अकड़न के साथ फुदक रही थी।
उसने कहा- “कितनी साफ सुथरी कुँवारी चूत है। पहली बार एक कच्ची लड़की की चूत देख रहा हूँ…” और वो मजे ले-लेकर मेरी चूत को चूसने लगा। इसी बीच उसने अपना पजामा उतार दिया और फिर अपना कच्छा भी उतार दिया।
हाय राम… जब मैंने उसका काला नाग जो पहले किसी चमड़ी के हिस्से की तरह लटक रहा था, उसे अपना सर उठाते हुए देखा, मेरी तो जान ही निकल गई। फिर उसका वो काला नाग देखते ही देखते एक लोहे का डण्डा जैसा हो गया। उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपना लौड़ा पकड़ाकर बोला- “ले मेरी जान… इसे पकड़कर इसके साथ खेल। एक ना एक दिन तो तुझे इसको अपनी चूत में डलवाना ही पड़ेगा। अगर मैं नहीं डालूँगा तो कोई और डाल देगा। शादी के बाद तो तेरा खसम रहम नहीं खायेगा। इसको तो फटना ही होगा आज नहीं तो कल। चल चूम ले इसे और मजे लेते हुए मजे दे…”
मैंने उसके लौड़े को सहलाकर देखा और फिर मुँह में लेने की कोशिश की। मगर वो लौड़ा था कि मेरे मुँह में समां नहीं रहा था।
वो बोला- “अपनी जबान से चाट-चाटकर मेरा पानी निकलवा दे। फिर चली जाना…”
मैं बड़ी असमंजस में थी। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि काला कौन से पानी का बात कर रहा है। इसी उधेड़बुन में मैंने उसे पूछा- “पानी… कैसा पानी निकालना है?”
वो मुझे समझाते हुए और मेरे मम्मे दबाते हुए बोला- “अरे मेरी जान… इसके अंदर से पानी निकलता है, जिससे बच्चा होता है। अगर कल को तेरा खसम अपना पानी तेरी चूत के अंदर निकालेगा, तब जाकर तू माँ बनेगी। चल चाट ले इसे…” काला अपना लण्ड हाथ में लेकर मेरे चेहरे के करीब बैठकर मुठ मारने लगा। वो मेरे होठों से अपने लण्ड को रगड़-रगड़कर मुठ मार रहा था।
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