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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete

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उसकी हाँ से मेरे मुरझाये हुए लण्ड में थोड़ा जान आ गई। उसके हाथ भी उसको सहला रहे थे और फिर हम रचित के लण्ड की बात करने लगे। मेरा खड़ा हो गया। मैंने बात-बात में कहा और आज हमने रचित के यहाँ जो-जो किया वो उसको सुना दिया।

वो चौंक गई- “अरे…”

फिर मैंने कहा- “कल तुमको भी रचित से चुदवा दूँगा। घबराओ मत…” फिर हम लोग आराम से सेक्स करने लगे। चुदाई के तीसरा दौर था तो मेरा निकल ही नहीं रहा था, सुजाता रचित के लण्ड के ख्याल में खोई हुई मस्त हो रही थी। और मैं मस्त धक्के दे रहा था।

वो दो बार झड़ गई, बोली- “ओह नवीन, आज तो तुमने बहुत मजा दिया, क्या किया आज बबीता भाभी ने जो तुमको इतना जोश आ गया?”

“कल देखना रचित कैसे तुमको चोदता है। अब मुझे और सुजाता को भी ऐसे बात करने में मजा आने लगा और फिर मैंने कहा- “यार, मैं झड़ने वाला हूँ…” और मैंने अपना सारा वीर्य अंदर चूत में ही गिरा दिया।

मैंने रात को ही रचित को फोन किया- “लाइन साफ़ है, कल का कार्यक्रम तय है भाई…” और फोन सुजाता के कान में लगा दिया।

वो बोला- “ठीक है भाई, तू कल देखना कि मैं तेरे बीवी को कैसे चोदता हूँ। वो बोलेगी कि मजा आ गया, नवीन ने कभी नहीं किया ऐसा जोरदार सेक्स। कल भाभी की चूत को सही लण्ड मिलेगा…”

“ठीक है, बाय यार, कल मिलते हैं, कल चोद लेना जितना चोदना हो अपनी भाभी को…” आने वाले कल का जोश सबके सर चढ़कर बोल रहा था।

सवेरे हम अपने काम पर निकल गए, शाम को सबको रचित के घर जमा होना था, खाना भी वहीं था और पीना भी। हमने साथ बैठकर शराब पी और मस्ती का दौर चालू हो गया।

मैं रचित के लण्ड पर हाथ लगा कर बोला- “देखो सुजाता, रचित का…”

और रचित ने भी मेरा लण्ड पकड़ लिया।

सुजाता शरमा गई।

फिर भाभी आ गई- “हटो, मैं मजा लूंगी नवीन के साथ तो…”

रचित हट गया, मैंने सुजाता के भी कपड़े खोलने शुरू कर दिए और साथ ही मैं बबीता भाभी को भी चूम रहा था। जैसे ही मैंने सुजाता की ब्रा खोली।

तो रचित बोला- “वाह भाभी… आपके चूचे क्या माल हैं?” वो उनके ऊपर झुक गया, उनको ऐसे चूमने लगा जैसे उसने पहली बार चूचियाँ देखी हों।

बबीता भाभी भी नंगी हो गई। अब हम सब नंगे थे।

सुजाता ने जैसे ही रचित के लण्ड के हाथ लगाया, वो बोली- “वाह… इसको कहते हैं लण्ड। यार नवीन, धन्यवाद यार, तुम जैसा पति सबका होना चाहिए…”

भाभी बोली- “नहीं सुजाता, रचित जैसा पति… इन्हीं का चमत्कार है कि हम दोनों एक दूसरे के पति से चुद रही हैं…”

सुजाता ने रचित का लण्ड मुँह में ले लिया और इधर भाभी ने भी मेरा लण्ड मुँह में ले लिया। आज मैं ऐसा नजारा देखकर जल्दी झड़ने वाला था तो मैंने कहा- “भाभी मैं झड़ने वाला हूँ…”

“आने दो भैया… मैं तुम्हारे वीर्य की प्यासी हूँ…”

सुजाता ने उसको ऐसा करते हुए देखा तो बोली- यह क्या भाभी?

भाभी ने कहा- “ऐसा तो बहुत अच्छा लगता है, एक बार तुम भी रचित का पीकर देख लो, अच्छा लगे तो आगे करना और नहीं लगे तो कोई बात नहीं…”

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फिर क्या था, सुजाता ने रचित का लण्ड मुँह में ले लिया और बड़े मजे से चूसने लगी। इधर भाभी भी मेरा लण्ड मुँह में लेकर बहुत अलग अहसास दे रही थी। थोड़ी देर में मैं भाभी के मुँह में झड़ने लगा और उधर रचित सुजाता के मुँह में।

सुजाता ने रचित का सारा वीर्य पी लिया।

थोड़ी देर हम ऐसे ही पड़े रहे। फ़िर हमने खाना खाया ऐसे ही नंगे। बस थोड़ा बहुत तन को ढक रखा था। खाने से ज्यादा ध्यान एक दूसरे की ओर था। मैं और रचित तो ऐसे ही खाना खा रहे थे। सुजाता ने खाना खाते हुए रचित का लण्ड हाथ में ले लिया।

खैर… हम खाने से निबटकर फिर बिस्तर पर थे। इस बार अपनी-अपनी बीवी के साथ सेक्स शुरू कर रहे थे, दोनों को मजा आ रहा था क्योंकि माहौल ही सेक्सी था। थोड़ी देर हमने ऐसे ही किया। फिर बीवियों को बदल कर करने लगे।

दोनों खुश थीं और एक साथ कहा- “अब आया मजा हमको। हमें अपने-अपने पसंद का लण्ड मिल गया है…”

ऐसे ही कई महीनों तक चलता रहा, फिर हम बोर होने लगे हमको और कुछ नया चाहिए था। एक दिन रचित बोला- “यार, अब मजा कम हो गया है। क्यों न हम विशाल को भी इस खेल में शामिल कर लें…”

विशाल हमारा दोस्त है।

मैंने कहा- “ठीक है, पर वो मान जायेगा क्या?”

रचित ने कहा- “हाँ, मान जायेगा। मेरी उसके साथ भी खुली बात होती है, तो वो जरूर मान जाएगा, ग्रुप सेक्स का उसको भी शौक है…”

मैंने कहा- “ठीक है यार, उसकी बीबी बहुत सेक्सी है, साथ में मिलकर चोदेंगे, मजा आएगा और वो हमारी बीवियों को चोदेगा…”

तब रचित बोला- “ठीक है यार, इसी को तो लाइफ कहते हैं…” और उसने विशाल को फोन लगा दिया, बोला- “तुझे नवीन की बीवी को चोदना है क्या? अगर हाँ तो जल्दी आ जा मेरे दफ्तर में…”

“यार, नवीन की बीवी मेरे से चुद जाये तो मेरे लाइफ बन जाएगी…” विशाल बोला।

रचित- “तो जल्दी आ। मैं बताता हूँ उसको कैसे चोदेगा तू…”

विशाल दस मिनट में आ गया पर मुझे वहाँ देख कर डर गया।

मैं बोला- “कोई बात नहीं, आओ यार विशाल…” और रचित ने उसको सारी योजना बताई।

वो मान गया और बोला- “यार, मैं भी ग्रुप सेक्स का मजा लेने के लिए तरस रहा हूँ। वैसे मेरी बीवी भी ग्रुप सेक्स का मजा लेने की इच्छुक है।

फिर विशाल के घर ही हमने कार्यक्रम रखा। हम चारों वहाँ गए, खाना खाया और आपस में सेक्स की बातें करने लगे। विशाल अपनी बीवी के स्तन दबाने लगा, मैं भाभी के, रचित सुजाता के। थोड़ी देर मैं सब कितनी बार अलट-पलट करते रहे, पता ही नहीं चला। विशाल की पत्नी सोनिया का बदन देखकर मेरा और रचित का तो एक-एक बार ऐसे ही हो गया। क्या मस्त फिगर है?

वो भी बहुत बड़ी चुदक्कड़ निकली, उसने रचित और मेरे दोनों के साथ अकेले सेक्स किया। विशाल मेरी बीवी और भाभी को चोद रहा था। हमारी तो ख्वाहिश पूरी हो रही थी। विशाल मेरी बीवी को ज्यादा मजे लेकर चोद रहा था। उसको वो बहुत पसंद थी।

विशाल बोला- “यार नवीन, भाभी को चोदने के सपने तो मैंने बहुत देखे थे, और आज मेरे दिल की तमन्ना पूरी हो गई…”

फिर विशाल बोला- “तुम कहो तो मेरा एक दोस्त है, जिसके साथ हम सेक्स करते हैं, उसको भी शामिल कर लेते हैं… मेरे बीबी ने खूब चुदाई करवाई है उससे…”

मैं- “क्या नाम है उसका?”

विशाल ने कहा- “दिवाकर…”

“और उसकी बीवी का?”

विशाल बोला- “उसकी बीवी नहीं है, वो तो मेरी बीवी को मजे देता है…”

मैं- “मतलब तुम उससे अपनी बीवी को चुदवाते हो?”

वो बोला- “हाँ, इसको वो अच्छा लगता है…”

मैं- “ठीक है… क्यों भई, बुलवाना है क्या एक लण्ड और तुम लोगों के लिए?”

हमारी बीवियां बोली- “हाँ…”

फिर विशाल ने दिवाकर को फोन किया, वो आ गया। फिर वहीं सबने मिलकर सेक्स किया।

दिवाकर ने विशाल का लण्ड मुँह में लिया। यह देख कर सब चौंक गए।

रचित ने पूछा- यह क्या है?

विशाल बोला- “आखिर मेरी बीबी को चोदता है, कुछ मजा मुझे भी तो देगा न…”

और दिवाकर ने बारी-बारी से सबका लण्ड मुँह में लिया। यह अलग अहसास ज्यादा मजा दे गया।


उसके बाद दिवाकर का एक दोस्त भी हमारे साथ जुड़ गया और उसकी बीवी भी।

मजा बढ़ता जा रहा था और हमारी टीम में लोग भी बढ़ते जा रहे थे। हमारी टीम में आठ मर्द और सात महिलाएँ हो गई हैं और सेक्स कौन किसके साथ करता है, पता ही नहीं चलता है। हाँ… बस हमें अलग-अलग चूत का मजा आ रहा था और हमारी बीवियों को अलग-अलग लण्ड का मजा आ रहा था।

कहानी के बारे में राय भी बताएँ, यह कहानी सच है, अगर और कोई शक है तो बिना संकोच पूछ सकते हैं।


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***** THE END समाप्त *****

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मैं और मेरे विद्यार्थी

लेख़िका - नेहा वर्मा

मैं स्कूल में बायलोजी विषय की टीचर थी। 12वीं क्लास को पढ़ाती थी। मेरी क्लास में लड़के और लड़कियां दोनों ही पढ़ते थे। स्कूल में साड़ी पहनना जरूरी था। मैं दूसरी टीचर्स की तरह खूब मेक-अप करती और खूबसूरत साडियां पहनकर स्कूल आती थी, जैसे कोई स्पर्धा चल रही हो।

क्लास में मुझे रोहित बहुत ही अच्छा लगता था। वो 18 साल का एक सुंदर लड़का था, लंबा भी था, और हमेशा मुझे देखकर मुश्कुराता था, बल्कि खुश होता था। उसकी मतलबी मुश्कुराहट मुझे बैचैन कर देती थी। मुझे भी कभी-कभी लगता था कि रोहित मुझे अपनी बाँहों लेकर चूम ले।

रोहित ही आज की कहानी का नायक है।

हमेशा की तरह आज भी क्लास में मैं पढ़ा रही थी। मैंने विद्यार्थियों को एक सवाल का उत्तर लिखने को दिया। सवाल सरल था। सभी लिखने लगे, पर रोहित मुझे बार-बार देख रहा था। उसे देखकर आज मेरा मन भी मचल गया। मैं भी मुश्कुरा कर उसे निहारने लगी। वो मुझे लगातार देखता ही जा रहा था, कभी-कभी उसकी नजरें झुक भी जाती थी। मुझे लगा कि कुछ करना चाहिए। मैं घूमते हुए उसके पास गयी और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोली- “रोहित कुछ मुश्किल है क्या?” और मैंने उसका कन्धा दबा दिया।

रोहित- “न… नहीं मैम…”

मैं उससे सट गई। उसके कंधे का स्पर्श मेरी जाँघों में हुआ तो मैं सिहर उठी। क्लास के बाद मैंने पेपर ले लिए। छुट्टी के समय मैंने रोहित को बुलाया और कहा- “मैंने तुम्हारा पेपर चेक कर लिया है। रोहित, तुम बायोलोजी में कमजोर हो। तुम्हें मदद की जरूरत हो तो घर पर आकर मुझसे पूछ सकते हो…”

रोहित- “जी मैम… मुझे जरूरत तो है, पर आपका घर का पता नहीं मालूम है…”

मैं- “अगर तुम्हें आना हो तो 4:00 बजे शाम को आ जाना, मेरा पता ये है…” मैंने अपने घर का पता एक कागज़ पर लिखकर देते हुए कहा।

रोहित- “जी थैंक्स…” रोहित के शरीर से एक तरह की खुशबू आ रही थी, जिसे मैं महसूस कर रही थी।

मैं- “रोहित तुम कहाँ रहते हो?”

उसने अपने घर का पता बताया। वो मेरे घर से काफी दूर था। शाम को वो 4:00 बजे से पहले ही आ गया। मैं उस समय लम्बी स्कर्ट और ढीले ढाले टाप में थी। मेरे बड़े और भारी स्तन उसमें से बाहर निकले पड़ रहे थे। तब मैं सोफे पर बैठी चाय पी रही थी।

मैंने उसे भी चाय पिलाई। फिर मैंने पूछा- “किताब लाये हो?”

उसने किताब खोली। मैं उसे पढ़ाने लगी। मैं सेंटर टेबल पर इस तरह झुकी थी कि वो मेरी चूचियां अच्छी तरह देख सके। ऐसा ही हुआ और उसकी नजरें मेरी चूचियों पर गड़ गयीं। मैंने काफी देर तक उसे अपनी चूचियां देखने दी। मुझे अब विश्वास हो गया कि वो गरम हो चुका है। मैंने तुंरत ही गरम-गरम लोहे पर चोट की- “रोहित… क्या देख रहे हो?”

वो बुरी तरह से झेंप गया। पर सँभलते हुए बोला- “नहीं, कुछ नहीं मैम…”

मैंने देखा तो उसका लण्ड खड़ा हो गया था। मैंने कहा- “मुझे पता है तुम कहां झांक रहे हो। तुम अपने घर में भी यही सब करते हो? अपनी माँ बहन को भी ऐसे ही देखते हो क्या? तुम्हें शर्म नहीं आती…”

वो घबरा गया- “मैम वोऽऽ… वोऽऽ… आई एम सारी…”

मैं- “सारी क्यों? तुम्हें जो दिखा, तुमने देखा। तुमने मेरा स्तन देखे, पर मेरा टाप तो उतारकर नहीं देखे, हाथ नहीं लगाया फिर सारी किस बात की? मिठाई खुली पड़ी हो तो मक्खी तो आएगी ना। पर हाँ… सुनो किसी को कहना मत…”

रोहित- “नऽऽ… नहीं मैम, नहीं कहूँगा…”

मैं- “अच्छा बताओ तुम्हारी बहन है?”

रोहित- “हाँ मैम… है, एक बड़ी बहन है…”

मैं- तुम उसे भी ऐसे ही देखते हो। उसकी चूचियां भी ऐसी हैं, मेरे जैसी?”

रोहित- “नहीं मैम… वोऽऽ उसकी तो आप आपसे छोटी हैं…” रोहित शरमाते हुए बोला।

मैं- “तुम्हें कैसे पता, बोलो?”


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रोहित- “जी… मैंने छुप के देखी थी, जब वो नहा रही थी…” वो शर्माता भी जा रहा था और मैंने देखा कि उसका मुँह लाल हो रहा था। मैं समझ गयी कि वो उत्तेजित होता जा रहा है। मैंने धीरे से उसकी जांघ पर हाथ रखा तो वो सिहर गया। पर वो कुछ बोला नहीं। मैं अब उसकी जांघ सहलाने लगी। मेरे अन्दर उत्तेजना अंगड़ाई लेने लगी। मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने धीरे से उसके लण्ड पर हाथ रख दिया।

वो मेरा हाथ हटाने लगा- “मैम ना करो ऐसे, गुदगुदी होती है…”

मैं- “अच्छा, कैसा लगता है?” मैंने अब उंगलियों से उसके लण्ड को ऊपर से पकड़कर दबाया।

रोहित- “मैम आह्ह… अह्ह… नहीं… मैम छोड़ो ना…”

मैं- “पहले बताओ कैसा लग रहा है?”

रोहित- “मैम… मीठी-मीठी सी गुदगुदी हो रही है…” और वो शरमा गया। उसने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया पर मेरा हाथ नहीं हटाया, बल्कि सोफे पर आगे सरक कर अपने लण्ड को और ऊपर उभार लिया।

मैं खुश हो गई। चलो अब रास्ता साफ है। मैंने जल्दी से उसकी पैन्ट की ज़िप खोली और उसका लण्ड बाहर खींच लिया। उसने अपनी आंखें बन्द कर ली। मैं लण्ड को प्यार से आहिस्ता-आहिस्ता सहालाने, मसलने लगी। रोहित सीत्कारने लगा। उसने धीरे से अपनी आंखें खोलकर मुझे देखा। मैंने प्यार से उसके होठों को चूम लिया। अब उसके सब्र का बांध भी टूट गया। उसने मेरी चूचियां पकड़ ली और बुरी तरह भींं और वो मेरे टाप के ऊपर से ही मेरे चूचुक खींचने लगा। रोहित मेरे साथ निर्दयता से पेश आ रहा था।

मैं कराहने लगी- “रोहित… धीरे-धीरे रोहित…” मैंने उसका हाथ पकड़कर हटाना चाहा मगर उसने मुझे छोड़ा नहीं। उसका लण्ड फूलकर फटने को हो रहा था। मैंने लण्ड के सुपाड़े की चमड़ी ऊपर खींच दी और झुक कर लण्ड को अपने मुँह में ले लिया। रोहित अपने चूतड़ उछाल-उछालकर मेरे मुँह को चोदने लगा। उसका लण्ड बढ़ता ही जा रहा था। मेरी उससे चुदने की इच्छा भी बढ़ती जा रही थी।

मैं सोफे से उठी और रोहित को लेकर बिस्तर पर आ गई। जैसे ही मैंने अपना टाप उतारने के लिए अपने हाथ ऊपर किए, रोहित ने मेरी स्कर्ट नीचे सरका दी। ब्रा और पैन्टी तो मैंने पहले से ही नहीं पहनी थी। अब मैं अपने जन्म-रूप में थी और चुदने को बिल्कुल तैयार थी। मेरी चूत गीली हो चुकी थी।

मैंने रोहित से भी कपड़े उतारने को कहा। वो तो इसके लिए पहले से ही आतुर था, उसने फटाफट अपने सारे कपड़े उतार दिए और मादरजात नंगा हो गया।

मैंने उससे प्यार से पूछा- “रोहित… मुझे चोदोगे?”

रोहित- “हां मैम… लेट जाओ जल्दी से…”

अब मैंने उसे तड़पाने की सोची और कहा- “अगर मुझे चोदना है तो पहले मेरी गाण्ड चाटो…” और मैंने अपनी दोनों टांगें ऊपर उठाकर अपने चूतड़ों को ऊपर उठा लिया। इससे मेरी गाण्ड का छेद उभरकर दिखने लगा। मैंने उसे अपनी गाण्ड की तरफ इशारा करके कहा- “चाटो… अपनी जीभ मेरी गाण्ड के छेद में घुसाओ…”

पर वो अपनी जगह से हिला नहीं और झिझकते हुए बोला- “नहीं मैम… मैं ये काम नहीं कर सकता, गंदा लगता है…”

मैं- “अरे चाटो ना, बहुत मज़ा आएगा मुझे…”

पर रोहित नहीं माना।

मैंने कहा- “ठीक है पर चूत तो चूसो, देखो कितनी पनीली हो रही है…”

रोहित- “नहीं मैम, मैं तो बस अपना लण्ड चूत में घुसाना चाहता हूं…”

मुझे गुस्सा आने लगा। लेकिन अपने गुस्से को काबू में करके मैंने उससे कहा- “साले पहले कोई चूत देखी भी है या नहीं? बस चूत में घुसाने की जिद लगा रखी है…” मैंने भी सोच लिया कि जब तक अपनी गाण्ड और चूत रोहित से चटवा नहीं लूंगी इसको चूत में नहीं डालने दूंगी।

मैंने कहा- “अच्छा मेरे पास आओ…”

उसने मेरी एक चूची को मुँह में ले लिया और दूसरी को हाथ से मसलने लगा। मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और उँगलियों से उसके लण्ड को मसलने लगी। वो उत्तेजित हो उठा। मैंने खींचकर उसे अपने से चिपका लिया। मुझे पता था कि वो चोदना चाह रहा है। मैं उसके लण्ड की और तेजी से मुठ मारने लगी। वो सिस्कारियां भरता रहा। मुझे लगा कि वो अब जल्दी झड़ जाएगा, और उसी समय उसका वीर्य निकल पड़ा, वो अपनी उत्तेजना सम्भाल नहीं पाया। मुझे भी यही चहिए था। उसका लण्ड सिकुड़ गया और उसका वीर्य मेरे हाथ से टपक रहा था।

वो बोला- “मैम, ये क्या हो गया? अभी तो मैंने अन्दर भी नहीं डाला था…”

मैं- “अन्दर तो मैं तुझे तब तक नहीं डालने दूंगी जब तक तू मेरा कहा नहीं मानता। मेरी गाण्ड और चूत नहीं चूसेगा तो मैं भी चूत में नहीं डलवाऊँगी। ले अब चूस, चाट ले मेरी गाण्ड, इतनी देर में ये भी फिर तैयार हो जाएगा…” मैं उसके निढाल लौड़े को छेड़ते हुए बोली।

रोहित- “नहीं मैम, बहुत गंदी होती है ये, मुझे घिन आती है…”

मैं- “बहनचोद घिन आती है, गंदी है फिर क्यूं अपना लण्ड हाथ में लेकर इसके पीछे पड़ा है? अच्छा बता अब तक कितनी बार चुदाई की है? किस-किस को चोद चुका है?

रोहित- “मैम किसी को नहीं। एक बार भी नहीं…”

मैं- “अच्छा बताओ, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?”

रोहित- “नहीं मैम, गर्लफ्रेंड नहीं, पर महिमा मुझे अच्छी लगती है…”

मैं- “अच्छा… और उसे तुम अच्छे लगते हो?”


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रोहित- “हाँ मैम, मुझसे बात भी करती है और मुझे ललचाई नजरों से देखती है…”

मैं- “ठीक है… कल मैं उसको यहाँ बुलाती हूँ। या कल तुम उसे यहाँ ला सकते हो?”

रोहित- “मैम, ऐसे कैसे मैं ला सकता हूँ उसे? आप ही बुला लो यहाँ…”

मैं- वो चुद जाएगी तुमसे?

रोहित- “अगर आप हेल्प करोगी तो वो जरूर आ जायेगी और फिर देखेंगे क्या होता है? शायद चुद जाए…”

मैं- “ठीक है, उसे फिर खूब चोदना मेरे सामने…”

रोहित- “प्रोमिस मैम…”

मैं- “प्रोमिस…”

वो खुश हो गया और किताब उठाकर चला गया।

अगले दिन मैंने महिमा को रोहित के साथ आने को कह दिया। महिमा तुंरत तैयार हो गयी। मैं समझ गयी कि आग दोनों ओर लगी है। रोहित उसे अपनी मोटर साइकिल पर बैठाकर ले आया। रोहित और महिमा को मैंने पास-पास ही सोफे पर बैठाया। मैं चाय बनाकर ले आयी। मैंने देखा कि वो दोनों एक दूसरे की टांगों को स्पर्श करते हुए बैठे बात कर रहे थे।

मैं मुश्कुरा उठी।- “महिमा… रोहित तुम्हारी बहुत तारीफ कर रहा था…”

रोहित ने तुंरत ही कहा- “मैम… मैं अभी आया…” वो उठकर बाहर चला गया।

महिमा ने कहा- “मैम… मुझे क्यों बुलाया है?”

मैं- “तुम्हें रोहित अच्छा लगता है?”

महिमा- “वो मेरे से कुछ बात ही नहीं करता है ज्यादा…”

मैं- “तुम उसे पसंद करती हो?”

वो शरमा गयी- “मैम वो मुझे अच्छा लगता है…”

वो भी तुम्हें चाहता है, उसी के कहने पर तुम्हें मैंने यहाँ बुलाया है, पर वो झिझकता है अपने प्यार का इजहार करने में। देखो अब भी उठकर दूसरे कमरे में चला गया, शरमा कर।

महिमा- “मैंने तो उसे कई बार संकेत दिए पर वो समझ ना सका…”

मैं- “ऐसी बात नहीं कि वो तुम्हारे इरादों से बेखबर है, वो डरता है और शरमाता भी है, वो तो कल मुझसे पढ़ने आया तो मैंने बातों-बातों में ऐसे ही पूछ लिया उससे कि कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं? तो बहुत बार पूछने पर बताया कि तुम उसे अच्छी लगती हो तो मैंने उससे प्रोमिस किया कि मैं तुम दोनों की दोस्ती करा दूंगी…”

फिर मैंने कहा- “तो सुनो महिमा, तुम्हें मैं एक मौका देती हूँ। वो मेरे बेडरूम में है जाकर उसे जो कहना है कह दो ना…”

महिमा- “मैम… शर्म आयेगी मुझे भी। वो लड़का होकर भी नहीं कह सकता फिर मैं तो लड़की हूँ…”

मैं- “अच्छा… तो मैं तुम्हारा काम बनती हूँ… पर इसका टैक्स देना पड़ेगा…”

महिमा- “मैम बस एक बार हमारी दोस्ती करवा दो… फिर…”

मैं- “ओके… फिर क्या करोगी बता दो?” मैंने उसे रहस्यमई निगाहों से देखा।

महिमा- “मैम वो… कुछ खास नहीं बस… कुछ नहीं मैम…”

मैं- “कुछ तो… अगर वो तुम्हें किस करे तो, तो करने दोगी?”

महिमा- “मैम… आप भी बस…”

मैं- “बताओ ना?”

महिमा- “हाँ…”

मैं- और?

महिमा- और क्या?

मैं- “हाँ… हाँ बोलो और भी कुछ…”

महिमा- “मैम… आपको भी मज़ा आ रहा है यह सब पूछकर?”

मैं- “हाँ… बहुत मजा है इस सब में… अच्छा बताओ अगर रोहित तुम्हारे चूचियां पकड़ ले तो?”

महिमा- “मैम बस करो… आप तो बेशरम होती जा रही हो…”

मैं- “क्यूँ… इसमें ऐसी क्या बात है? क्या तुम्हारा मन नहीं करता कि कोई तुम्हें किस करे? तुम्हारे शरीर को मसल दे? इस उमर में यह सब करने की इच्छा होती है, मुझे तो बहुत होती है, तुम्हें भी जरूर होती होगी, है ना…”

महिमा- “हाँ मैम, पर डर लगता है किसी को पता चल गया तो?”

मैं- “यहाँ हमारे सिवा और कौन है? बस सारी बात हम तीनों के बीच ही रहेंगी…”

महिमा- “मैम कुछ होगा तो नहीं? मुझे डर लग रहा है और अब तो इच्छा भी बहुत जाग उठी है…”

मैं- “डरो मत… अन्दर बेडरूम में जाओ और कह दो रोहित से दिल कि बात। वो भी बेचैन है…”

महिमा- “नहीं मैम, आप उसे यहीं बुला लो, यहाँ आपके सामने ही, बल्कि आप ही कह दो सारी बात…”

मैं- “चलो यह काम अगर मैं करुँगी तो बाकी काम भी मैं ही कर लूंगी उसके साथ…”

महिमा- “मैम..."

मैं- “अच्छा बुलाती हूँ…” यह कहकर मैंने रोहित को आवाज लगाकर बुलाया।

रोहित अपनी किताबें लेकर अन्दर आ गया। वो मुझसे कुछ पूछने लगा किताब में से।

मैंने उससे कहा- “ज्यादा नाटक मत करो और काम कि बात पर आओ। महिमा तुमसे कुछ कहना चाहती है…”

महिमा- “नहीं मैम, नहीं मैं क्या? मैंने तो कुछ नहीं कहना…”

मैं- “अब तुमने नौटंकी शुरू कर दी…”

“रोहित सुनो, महिमा मान गई है तुमसे दोस्ती के लिए, बल्कि ये तो पहले से ही चाहती थी तुम्हारी दोस्ती, बस तुम्हारे प्रोपोजल का इंतजार कर रही थी…” अब महिमा से बोलो- “आई लव यू…”

रोहित शरमाते और हकलाते हए बोला- “महिमा, आई लव यू…”

मैंने ताली बजाई और महिमा को बधाई दी और कहा- “अब तुम भी बोलो रोहित से…”


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वो भी धीरे से बोली- “रोहित। आई लव यू…”

मैंने फिर ताली बजाई और रोहित को बधाई दी और कहा- “अब आगे बढ़ो और कुछ करो…”

दोनों एक साथ बोले- क्या?

मैं- “क्या-क्या? किस करो…”

दोनों मेरे मुँह की तरफ देखने लगे।

मैं- “हां… हां करो, करो किस एक दूसरे को…”

रोहित बोला- “मैम… नहीं मैम आपके सामने, आपके सामने नहीं…”

मैं- “मेरे सामने… क्या हुआ मेरे सामने? महिमा तुम उठो और रोहित को किस करो गाल पर…”

महिमा- “नहीं मैम मुझे नहीं आता किस करना…”

मैं- “नहीं आता तो सीख ले… ले देख किस कैसे करते हैं…” यह कहकर मैं रोहित के पास गई और पहले उसके गाल पे फिर उसके सिर के पीछे हाथ रखकर उसके होंठों पर जोरदार किस किया।

रोहित घबरा गया और महिमा मुझे ताकती रह गई।

मैं- “चल रोहित तू ही शुरू कर। पकड़ ले और चूस-चूस के लाल कर दे इसके गालों और होंठों को…” मैंने रोहित को महिमा का हाथ पकड़ाते हुए आदेश दिया।

रोहित ने डरते हुए महिमा को अपनी ओर खींचा और उसके कंधे पर हाथ रखकर उसका चेहरा ताकने लगा जैसे उससे पर्मिशन मांग रहा हो।

मैंने उठकर दोनों के सिर पकड़कर उनके होंठों को आपस में मिला दिया। अब रोहित ने अपने होंठ खोले और महिमा के होंठों को किस करने लगा। अब मैं वहां से उठकर बाहर आ गई और दो चार मिनट इधर-उधर बेचैनी से टहलने के बाद फिर अन्दर झांक कर देखा तो रोहित महिमा को चूम रहा था और उसकी चूचियां सहला रहा था। मैं तुंरत अन्दर आ गयी।

महिमा एकदम से घबरा गयी।

मैं- “महिमा क्या हो गया? अरे करो, ये तो लड़की और लड़के के लिए जरूरी है…”

महिमा- “मैम सारी… सारी…”

मैं- “सच कह रही हूँ, अपना काम चालू रखो। कहो तो मैं मदद कर दूँ?”

महिमा शर्म से झुकी जा रही थी। रोहित ने उसका मुँह ऊपर उठाया और उसके होंठ फिर से चूमने लगा। महिमा ने अपनी आँखें बंद कर ली। रोहित ने उसे धीरे से मेरे बिस्तर पर लेटा दिया और अपने कपड़े उतारने लगा। फिर महिमा के कपड़े उतारने लगा। महिमा ने मुझे मुझसे परमिशन मांगने की नजरों से देखा।

मैंने खुद ही उसका टाप उतार दिया और कहा- “मस्ती करो, शरम नहीं…”

रोहित ने उसकी जीन्स भी उतार दी, एक नंगी जवान 18 साल की लड़की देचककर रोहित का लण्ड फूलकर कड़ा हो गया। वो बिस्तर पर उससे लिपट गया।

मैं- “अरे ये क्या कर रहे हो? इसकी इजाजत नहीं है…”

“प्लीज मैम…” दोनों ने मेरी ओर देखा।

मैं- “नहीं… बिल्कुल नहीं। तुम दोनों अकेले कैसे मज़ा ले लोगे, मैं कहां जाऊँगी?” कहकर मैं भी अपने कपड़े उतारने लगी।

रोहित ने मुझे कपड़े उतारते देखा तो बोला- “मैम, तो पहले आप…”

मैंने महिमा के कान में अपनी बात बताई।

वो हँसने लगी- “हाँ मैम, फिर तो आज इसकी खैर नहीं…”

मैं- “हाँ रोहित… पर मेरी शर्त याद है ना… मेरी गाण्ड चाटकर मुझे मस्त कर दो…”

महिमा- “हाँ मैं भी देखूं कि मैम की गाण्ड कैसे चाटता है तू, फिर मैं भी करवाऊँगी वैसे ही…”

रोहित- “नहीं… नहीं, मैं नहीं करूंगा। मैं नहीं चाट सकता गाण्ड…”

मुझे गुस्सा आ गया। मैंने उसके बाल पकड़ लिए और उसके गाल पर एक चांटा जड़ दिया।

वो आश्चर्य से मुझे देखने लगा।

मैंने फिर उसे कहा- “हरामजादे… बोल चाटेगा की नहीं?” फिर मैं उसके चूतड़ों पर लात मारते हुए बोली- “पहले मेरी चूत चाट फिर गाण्ड…”

महिमा- “मैम, ये ऐसे नहीं मानेगा। ये लो, इसे बाँध दो…” महिमा बोली।

हम दोनों ने उसे बिस्तर पर लेटाकर बाँध दिया। महिमा ने उसके लण्ड को पकड़कर मसलना चालू कर दिया। मैं रोहित पर चढ़ गयी। चूत को उसके मुँह से सटाकर बोली- “अब चूसो इसे…” और मैं अपनी चूत उसके मुँह पर धीरे-धीरे रगड़ने लगी।

रोहित- “नहीं मैम… नहीं, मुझे छोड़ दो मैम…”

मैं- “रोहित, चुपचाप मेरी बात मानो…” मैंने अपनी गीली चूत उसके होंठों पर घिसनी चालू कर दी।

वो इधर-उधर होने लगा। उसके मुँह पर मेरी चूत की चिकनाई फैल गयी थी।

मैं- “चल न, चाट ले रे चूत को, ज्यादा हरामीपना मत दिखा…”

रोहित- “मैम क्या कर रही हो?”

मैं- “चल चूस इसे मादरचोद, स्कूल में तो मेरी चूचियां खूब देखता था, अब चूस इसे कुत्ते…”

उसने हार मान ली और चुपचाप चूसने लगा।


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मैंने कहा- “शाबाश बेटा आआह्ह… और अब देख बहनचोद, इसके बाद मेरी गाण्ड का नम्बर है… और महिमा… चल साली तू रोहित का लण्ड चूस…”

महिमा उसके लण्ड को अपने मुँह लेकर चूसने लगी।

मैंने अपने चूतड़ों की फ़ांकों को खोलकर उसके मुँह पर रख दिया। उसने हिम्मत करके अपनी जीभ निकालकर मेरी गाण्ड के छेद में डाल दी।

मैं खुशी से झूम उठी। मेरी तरकीब काम आ गयी थी। मैं अपनी गाण्ड उसके मुँह पर पटकने लगी- “ले चाट इसे बहन के लोड़े…” मैं उसका लण्ड पकड़कर मुठ मारने लगी तो उसे भी मजा आने लगा।

महिमा कहने लगी- “मैम, ये लण्ड तो मेरे लिए छोड़ दो ना प्लीज़…”

मुझे सू-सू आने लगी थी। मैंने अपनी गाण्ड ऊँची की और उसके मुँह में पेशाब की धार छोड़ दी। उसने अपना मुँह बंद कर लिया, आँखें भी बंद कर लीं। मैं अब उसके पूरे शरीर पर पेशाब करने लगी, वो पूरा भीग गया।

महिमा भी उत्तेजित हो चुकी थी- “मैम थोड़ा इधर भी…” महिमा मेरी चूत के पास आ गयी और अपना मुँह खोल दिया।

मैंने अपनी धार महिमा के मुँह की तरफ कर दी। उसने अपना मुँह पूरा पेशाब से भिगा लिया और अपना मुँह खोल लिया। अब धार उसके मुँह में जा रही थी। वो पेशाब अपने मुँह में भरकर एक घूंट में पी गयी। अब पेशाब मैं कर चुकी थी। महिमा ने मेरी चूत में अपनी उंगली डाल दी।

महिमा बोली- “रोहित, देखो कैसा मजा आया ना?”

महिमा ने फिर कहा “मैम मजा आ गया… अब मैं भी मूतने की कोशिश करती हूँ…” और महिमा रोहित के ऊपर चढ़कर मुझसे लिपट गयी और अपनी धार छोड़ दी।

उसकी गरम-गरम धार मेरे शरीर पर भी आ रही थी। मैंने अपनी गाण्ड थोड़ी और ऊँची कर दी। जगह हो गयी थी। अब महिमा के पेशाब की धार रोहित के मुँह पर पड़ रही थी। मैंने भी तुरंत हाथ में उसका पेशाब भर लिया और मुँह में डालकर पी गयी। खारा-खारा सा स्वाद लगा। पर उत्तेजना में उसमें भी स्वाद आया।

रोहित- “भोसड़ी की… तूने ये क्या किया? तेरी तो मैं माँ चोद दूंगा…”

महिमा- “मेरे प्यारे रोहित, मेरी मां बाद में चोदना, पहले मेरी गाण्ड चाट ले…” महिमा ने अपनी गाण्ड के छेद को उसके मुँह पर रख दिया और रोहित के लण्ड को मुठ मारने लगी।

मैं- “मजा आया हरामी गाण्ड चाटकर…” मैंने उसका मुँह सीधा करके महिमा की गाण्ड में घुसा दिया। उसे चाटना ही पड़ा।

रोहित- “चुदक्कड़ रांड अब तो छोड़ दे मुझे, तुझे कुत्ते चोदें… रंडी…”

मैं- “हाँ… हाँ बोल, इतना मोटे लण्ड से क्या अपनी बहन को चोदेगा? हरामी चल चाट तेरी इस चुदक्कड़ रांड की गाण्ड को…”

महिमा- “हाँ मेरे राजा, चाट ले ना मेरी गाण्ड को… फिर तू मुझे घोड़े की तरह से चोदना…” फिर वो भी गाण्ड को आगे पीछे करके गाण्ड रगड़ने लगी।

मेरी इच्छा पूरी हो गयी थी। महिमा ने भी पूरी कसर निकाल ली और उसपर से उतर गयी। महिमा मेरे से लिपट गयी। उसकी चूचियां मेरी चूचियों से टकरा गयीं। दोनों ने एक दूसरे की चूचियां दबाई और रोहित को खोल दिया।

रोहित ने कहा- “मैम, आपको तो मजा आ गया ना? अब मेरी बारी है ना…” उसने बिस्तर पर से हाथ बढ़ाकर मेरी कमर पकड़ ली। उसने मुझे दबोच लिया और बिस्तर पर पटकते हुए बोला- “चल बहन की लौड़ी, घोड़ी बन जा…” उसने मेरी चूचियां भींच डाली। मुझे घोड़ी बनाकर उसने मेरे चूतड़ों पर कस-कस के मारना शुरू कर दिया।

मैं- “रोहित, मत मार मुझे बहनचोद, कुत्ते, अपनी माँ को मारना, घर जाकर उसकी गाण्ड की पिटाई करना…” मैं गलियां देती हुई घोड़ी बन गयी। उसने मेरे चूतड़ की दोनों फांकों को चीरते हुए अपने लण्ड की सुपाड़ी गाण्ड के छेद में टिका दी।

“ले कुतिया, अब तेरी गाण्ड की माँ चोद दूंगा…” कहते हुए उसने मेरी गाण्ड में अपना 18 साल का जवान लण्ड चीरता हुआ अन्दर तक घुसा दिया।

मैं चीख उठी। उसने फिर गाण्ड फाड़ देने वाला धक्का लगाया, मैं फिर चीख उठी। उसके धक्के बढ़ते गए, मैं चीखती रह गयी।

महिमा- “रोहित छोड़ दे मैम को, जल्दी कर ना… फिर मेरी बारी भी तो है…”

मेरा दर्द के मारे बुरा हाल था- “हरामजादे बस कर अब, मेरी गाण्ड फट गई है…”

रोहित- “साली रंडी, तू क्या समझती है, तुझे छोड़ दूंगा। ये देख खून तो निकल रहा है पर अभी और खून निकालूंगा… तुने मेरे ऊपर पेशाब किया है ना…” रोहित ने अपना लण्ड तुरंत बाहर निकाला और जोर लगाया। फिए एक झटके से लण्ड को मेरी गाण्ड में पेल दिया।

मैं- “कुत्ते, हरामी, मर जाऊँगी, छोड़ दे मुझे, लण्ड को निकाल ले अब…”


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पर उसने अनसुनी कर दी और धक्के बढ़ते गए। मेरे हाथ में अब कुछ नहीं था। मैंने अब अपने को रोहित के हवाले कर दिया था। अब दर्द कम हो गया था। पर झटके बेरहमी से मार रहा था। अब उसने अपना लण्ड बाहर निकाला और चूत के द्वार पर रख दिया। रोहित ने धक्का मारते हुए लण्ड सीधा चूत में घुसा दिया। उसका लण्ड मेरी गाण्ड के खून से लथपथ था। बिस्तर पर खून गिरा था। चूत में लौड़े के घुसते ही फिर मेरी आह्ह निकल पड़ी। उसके लण्ड ने सीधे जड़ में चोट की थी।

मैं दर्द से तड़प उठी। दूसरा धक्का तो और भयंकर था। तेज़ दर्द से मैं लगभग रोते हुए बोली- “रोहित प्लीज़, अब छोड़ दे… मैं मर जाऊँगी…” तभी एक और तेज़ धक्का लगा। मुझे लगा मैं बेहोश हो जाऊँगी- “रोहित बस… अब नहीं, रोहित नहीं…”

उसने अब नरमी दिखाई, वो आराम से धक्के लगाने लगा। मुझे भी अब धीरे-धीरे मज़ा आने लगा। रोहित चरम सीमा पर पहुंचने लगा था। मैं चुपचाप लेटी थी। मज़ा बढ़ता जा रहा था। अचानक मुझे लगा कि मैं झड़ने वाली हूं तो मुझे ज्यादा मज़ा आने लगा।

मैंने भी गालियां देनी शुरू कर दी- “लगा जोर हरामी, चोद दे मुझे, जोर लगा रे, दे लण्ड चूत में, हाय उईईइ सी… सी… मादरचोद दे धक्के, मर गयी…” और मेरा रस निकलने लगा। उसके धक्कों से मेरा पूरा शरीर हिल रहा था। मैं निढाल हो गयी। पर अभी भी उसके धक्के चालू थे। मेरी चूत में अब जलन बढ़ने लगी। गाण्ड भयंकर दर्द कर रही थी। चूत का भी बुरा हाल था। चूत के अन्दर तो जैसे आग लग रही थी।

मैंने बिनती की- “रोहित अब छोड़ दे मुझे, प्लीज छोड़ दे मुझे…” पर शायद मेरी आवाज मुँह से नहीं निकल पा रही थी।

रोहित ने मुझे छोड़ दिया और महिमा को पकड़ लिया।

महिमा- “प्लीज रोहित, धीरे करना…”

रोहित ने महिमा को चूमा और उसे मेरे पास बिस्तर पर लेटा दिया। बिस्तर गीला हो चुका था। महिमा को अपनी चूत में लण्ड घुसता महसूस हुआ। उसके मुँह से आह्ह निकल गई।

मैं निढाल सी लेटी थी। रोहित को देखा, उसके चोदने की ताकत कमाल की थी। महिमा खूब उछल-उछलकर चुदवा रही थी। मैंने अपनी आंखें बंद कर ली। फिर धीरे से उठी तो मैंने देखा कि बिस्तर खून से लाल था। मेरी चूत और गाण्ड से खून की कुछ बूंदें टपकी थीं। मुझे ठीक से चलने में परेशानी हो रही थी। मैं बाथरूम में गयी। अच्छी तरह से नहा धोकर वापिस आई तो रोहित और महिमा दोनों गीले बिस्तर पर चित्त लेटे थे। वो झड़ कर निपट चुके थे। रोहित के लण्ड की चमड़ी ऊपर से कुछ कट सी गई थी। महिमा और रोहित एक साथ उठे और बाथरूम में इकट्ठे घुस गए।

जब वो लोग नहाकर बाहर आए तो रोहित की नज़र बिस्तर पर पड़ी, तो वो घबरा गया- “मैम, ये क्या हो गया? इतना खून?”

मैं- “रोहित तूने आज मेरी जान ही निकाल दी…”

रोहित तुरन्त रुई और पट्टी लाया। उसने मेरी टांगें ऊँची की और रुई पानी से मेरी चूत और गाण्ड को अच्छी तरह से पोंछा।

मैंने उससे कहा- “वहां से दवाई उठाकर मेरे अन्दर दोनों जगह लगा दे…”

रोहित उंगली पर दवाई लेकर मेरी चूत के अन्दर और गाण्ड के छेद में लगाने लगा। लेकिन ये क्या? मेरी चूचियां फिर से खड़ी होने लगीं। मुझे चूत में मीठी सी जलन होने लगी। मैंने अपने आपको रोका और उसके लण्ड पर भी मैंने दवाई लगा दी।

रोहित- “मैम… आई एम सोरी, सोरी मैम…”

मैंने उसे गले लगा लिया। उसकी चुदाई से मैं गहराई तक सन्तुष्ट हो गयी।

महिमा भी मुझसे लिपट गई- “रोहित, तू तो ही-मैन है रे… मज़ा आ गया…”

मैंने उसे चूमते हुए कहा- “कल जब पढ़ने आओ तो फिर से ऐसे ही चोदना…”

वो हैरान होकर मुझे देखने लगा। मैंने उसे धीरे से आंख मारी।

महिमा हँस पड़ी और पूछने लगी- “मैम… मैं भी कल पढ़ने आऊँ?”


***** THE END समाप्त *****

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