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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete

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बीवी की पसंद_Biwi Ki Pasand

लेखक - अनजान

मेरा नाम अमित है और बीवी का नाम शालिनी है। मैं 29 साल का हूँ और शालिनी की उम्र 26 साल है। मेरी बीवी एक बहुत ही खूबसूरत, 36-25-38, और सेक्सी औरत है। मेरा घर एक झील के किनारे एकांत में है। यह बात उन दिनों की है जब मेरे चाचा का लड़का छुट्टी में घर जा रहा था। मेरा कज़िन जब छुट्टी में घर जा रहा था तो अपने कुत्ते, बाबी, को मेरे घर में देख-भाल के लिये छोड़ गया। बाबी एक एलसेशियन कुत्ता था और बहुत ही बड़ा था।

हमने उस कुत्ते को अपने आउट-हाऊस में रख दिया। अगले दिन सुबह जब हम दोनों उस कुत्ते से मिलने गये तो वो अपनी पूँछ हिलाते हुए हमसे मिला और हम लोगों से उसकी दोस्ती हो गयी। रात को हम लोग खाना खाकर व्हिस्की का एक-एक पैगे लेके अपने बेडरूम में कुत्ते को लेकर बैठ गये। उस दिन शनिवार था और हमलोगों का प्रोग्राम जमकर चुदाई करने का था।

मैंने अपनी एक टी-शर्ट और शालिनी ने एक हल्के गुलाबी रंग की नाईटी पहन रखी थी। बाबी हमारे पास ही घूम रहा था और बार-बार हमारे पास दुम हिलाते हुए आ रहा था।

शालिनी उसके सर पर अपने हाथ फिरा रही थी। कुछ समय के बाद बाबी अपना सर शालिनी की गोद में रखकर लेट गया। कुछ समय के बाद बाबी अपने नथुने शालिनी की जाँघों के बीच रगड़ने लगा। शायद उसको शालिनी की चूत की खुशबू आ रही थी। बाबी धीरे-धीरे अपने नथुने शालिनी की चूत के पास ला रहा था और धीरे-धीरे उसका लण्ड खड़ा हो रहा था।

मैंने शालिनी को उसका लण्ड दिखाया तो वो हँस पड़ी और बोली- “शायद यह भी हमारी तरह चुदासा है…”

करीब दस मिनट के बाद शालिनी ने बाबी को घर से बाहर निकालना चाहा क्योंकी वो बार-बार शालिनी की चूत के पास अपने नथुने रगड़ रहा था। शालिनी और मैंने एक-एक पैग और व्हिस्की पिया। शालिनी ने अपने पैर उठाकर अपनी नाईटी के अंदर कर लिये थी। बाबी अब भी कमरे में घूम रहा था। हमारे पलंग और शालिनी के पैर के बीच कुछ जगह छूट गयी होगी और बाबी जल्दी से आया और शालिनी की चूत को चाटने लगा। शालिनी इस तरह अचानक बाबी से चूत चुसवाने के लिये तैयार नहीं थी और वो उछल पड़ी। बाबी का लण्ड अब बिल्कुल खड़ा हो गया था और अंदर से बाहर निकल आया था।

हम लोग अब बिल्कुल गरम हो गये थे और चुदाई के लिए तैयार हो चुके थे। मुझे बहुत जोर से पेशाब लगी थी और मैं बाथरूम में मूतने चला गया। तभी शालिनी को पता लगा कि उसके कान के बुंदे निकल गये हैं और वोह पलंग के नीचे घुटने के बल अपने कान के बुंदे ढूँढ़ने के लिए घुस गयी। मैं अभी मूत रहा था कि मुझे शालिनी की चीख सुनाई दी।

मैं दौड़कर कमरे में आया और देखा कि शालिनी का कमर से ऊपर का शरीर पलंग के अंदर है और बाबी उसके पीछे से कमर के ऊपर चढ़कर शालिनी की चूत अपने लण्ड से चोदने की कोशिश कर रहा है। यह देखकर मेरी हँसी छूट गयी और मैं हँसने लगा।

तभी शालिनी बोली- “हँसना बाद में पहले बाबी को मेरे ऊपर से अलग करो…”

मैं जब बाबी को अलग करने गया तो बाबी गुर्राने लगा। मैं पीछे हट गया और देखने लगा कि उसका लण्ड जो अब करीब 9” लम्बा और 4” मोटा हो चला था और शालिनी की चूत के अंदर घुसाने की कोशिश कर रहा था।

शालिनी ने चिल्लाकर पूछा- “क्या देख रहे हो अब कुछ करो भी…”

मैंने कहा- “रुको…” और मैं दौड़कर एक शीशा ले आया और शालिनी को बाबी के मोटे लण्ड से उसकी चूत की चुदाई का नज़ारा दिखाया।

शालिनी यह देखकर चौंक गयी और चिल्लाई- “बाबी को मेरी चूत से हटाओ…”

बाबी अब तक शालिनी की चूत के अंदर अपना लण्ड डालने में सफ़ल हो गया था और उसकी चूत चोद-चोदकर उसका भुर्ता बना रहा था। अब तो शालिनी की नाईटी भी उसकी कमर तक उठ गयी थी और गोरे-गोरे चूतड़ और खूबसूरत गाण्ड साफ़-साफ़ दिख रही थी।

मैंने शालिनी से कहा- “रुको मैं अभी एक डंडा लेकर आता हूँ और बाबी को भगाता हूँ। बिना डंडे के बाबी तुम्हारी चूत को नहीं छोड़ेगा…”

मैं बाहर गया और बाहर जाकर मुझे एहसास हुआ कि शालिनी और बाबी की चुदाई देखकर मेरा लण्ड भी खड़ा हो गया है। मैं बाहर जाकर डंडा ढूँढ़ने लगा पर डंडा नहीं मिला तो मैं खिड़की से अंदर का नज़ारा देखने लगा। खिड़की पलंग के पास ही थी और मुझको अंदर का नज़ारा साफ़-साफ़ दिख रहा था। थोड़ी देर के बाद मैं कमरे में घुसा तो देखा कि शालिनी का पूरा मुँह लाल हो गया है और वो अपनी चूत की चुदाई से बहुत खुश लग रही है।

मैंने शालिनी से कहा- “बाहर कोई डंडा नहीं मिल रहा है…”

शालिनी बोली- “कुत्ता मुझे खूब रगड़-रगड़ के चोद रहा है और मेरी चूत की चटनी बना रहा है…”

मैंने शालिनी से पूछा- “क्या तुम्हारी चूत में दर्द हो रहा है?”

तो वो बोली- “जैसे ही बाबी का लण्ड मेरी चूत में पहली बार घुसा तो मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया था और इस कारण अब मुझे मजा आ रहा है और चूत बहुत चुदासी हो गयी है और खूब पानी छोड़ रही है…”

मैं उससे बोला- “बाबी का लण्ड मेरे लण्ड से बहुत बड़ा है और तेरी चूत उससे चुदवाने से और फैल जायेगी और उसका लण्ड और अंदर तक चला जायेगा। बाबी को जल्दी हटाना पड़ेगा, क्योंकी अगर उसका लण्ड तेरी चूत में फूलकर फँस गया तो तू उसके लण्ड के साथ फँसी रह जायेगी…”

शालिनी बोली- “इसका क्या मतलब?”

मैं बोला- “मैंने सुना है कि कुत्ता जब कुतिया को चोदता है तब कुछ देर के बाद उसका लण्ड नीचे से फूल जाता है और वो कुतिया की चूत में फँस जाता है। क्या तूने रास्ते में कुत्ता और कुतिया को गाण्ड से गाण्ड मिलाकर चिपके हुए नहीं देखे हैं…”

शालिनी बोली- “हाय जल्दी कुछ करो नहीं तो तुम्हरी बीवी भी बाबी की गाण्ड से गाण्ड मिलाकर फँसी रह जायेगी और तुम अपना लण्ड थामे देखते रह जाओगे और मुठ मारोगे…”

मैं फिर से बाहर गया और खिड़की से देखने लगा। मुझे हैरानी हुई यह देखकर कि शालिनी अब अपनी गाण्ड को पीछे को धकेल रही है और बड़ी मस्ती से बाबी के लण्ड का धक्का अपनी चूत में बड़े आराम से लगवा रही है। धीरे-धीरे बाबी ने अपना पूरा 9” इन्च लम्बा लण्ड शालिनी की चूत के अंदर पेल दिया। मुझे खिड़की से साफ़-साफ़ दिख रहा था कि शालिनी की चूत से सफ़ेद-सफ़ेद पानी निकलकर जमीन पर टपक रहा था और उसकी गाण्ड का छेद खुल और बंद हो रहा था।


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मुझे अपनी और शालिनी की चुदाई के अनुभव से लग रहा था की शालिनी की चूत फिर से पानी छोड़ रही है। थोड़ी देर के बाद बाबी अपनी कमर को खूब जोर से हिलाने लगा और अपना 9” इन्च का लण्ड शालिनी की चूत के अंदर-बाहर बड़ी ज़ोरों से करने लगा।

शालिनी के मुँह से सिसकारी निकल रही थी और वो अनाप-शनाप बोले जा रही थी, जैसे कि- “हाय मेरी माँ, मेरी चूत फट गयी है। कोई आकर देखे एक कुत्ता कैसे मेरी चूत की चुदाई कर रहा है… हाय और जोर से चोदो… फाड़ दो मेरी चूत… हाय मेरी चूत की खाल निकाल दो। हाय अमित देखो कैसे एक कुत्ता तुम्हारे ही सामने तुम्हारी बीवी को अपने मोटे लण्ड से चोद रहा है… हाय बड़ा मज़ा आ रहा है… हाय बाबी और जोर से चोद मुझे… आज फाड़ दे मेरी चूत को… बुझा दे मेरी चूत की गरमी को…”

बाबी ने थोड़ी देर शालिनी की चूत को खूब जोर-जोर से चोदा और फिर झड़कर सुस्त हो गया।

इतने समय तक शालिनी की चूत की चुदाई देखते-देखते मैं भी अपना लण्ड हाथ में थामे-थामे झड़ गया। मैं जल्दी से कमरे के अंदर भागकर गया तो देखा कि शालिनी की चूत अब बहुत फैल चुकी है और उसमें से बाबी के लण्ड की झड़न निकल रही है। शालिनी बाबी की चुदाई से थक गयी थी और हाँफ़ रही थी।

मैं उसके पास गया और बोला- “मैं अब बाबी को लात मारकर भगा देता हूँ…”

शालिनी बोली- “नहीं, अभी वो भी सुस्त हो गया है और थोड़ी देर के बाद जब उसका लण्ड मेरी चूत से छूटेगा तो वो अपने आप ही चला जायेगा…”

करीब दस मिनट के बाद बाबी का लण्ड मुरझा गया। शालिनी की चूत का छेद अब काफ़ी बड़ा हो गया था और काफ़ी सूज सा गया था। उसकी चूत से अब भी बाबी का माल बूँद-बूँद करके निकल रहा था। मैंने धीरे से शालिनी को पकड़कर खड़ा किया।

शालिनी मुझे शरमाई आँखों से देखने लगी और शरमा के बोली- “आज तक मेरी चूत इस कदर कभी नहीं चुदी, बाबी के लण्ड से मेरी चूत बिल्कुल भर सी गयी थी। बाबी के लण्ड ने मेरी चूत की खूब चुदाई करी और मैं पाँच बार झड़ी…” उसके बाद शालिनी अपनी नाईटी और सैण्डल उतारकर बाथरूम में गयी और अच्छी तरह से रगड़-रगड़कर नहाई।

शालिनी बाहर आकर नंगी ही बिस्तर पे बैठ गयी, और मुझसे बोली- “आओ अमित अब तुम मुझे चोदो, मेरी चूत तुम्हारा लण्ड खाने के लिए प्यासी है, आओ जल्दी से अपना मोटा लण्ड मेरी चूत में पेल दो और जोर-जोर से धक्के मार-मारकर खूब अच्छी तरह से चोदो…” इतना बोलकर शालिनी मेरे हाथों को अपनी चूची पर ले गयी और मेरा खड़ा लण्ड अपने मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगी।

मैंने अपनी एक उँगली शालिनी की चूत के अंदर पेल दी और अंदर-बाहर करने लगा।

शालिनी बोली- “क्यों टाइम बबार्द कर रहे हो, जल्दी से उँगली हटाकर अपना लण्ड मेरी चूत में पेलो…”

मैंने भी उठकर अपने लण्ड का सुपाड़ा शालिनी की चूत के छेद पर लगाया और एक जोरदार धक्का मारकर पूरा का पूरा लण्ड एक झटके के साथ शालिनी की चूत में घुसेड़ दिया। शालिनी की चूत थोड़ी देर पहले बाबी का 9” इन्च लम्बा और 4 इन्च मोटा लण्ड खा चुकी थी और इसीलिए उसकी चूत अब तक फैली हुई थी जिससे कि मुझे शालिनी को चोदने में मज़ा नहीं आ रहा था। फिर भी मैंने शालिनी की चूत को चोदा और उसकी चूत को अपनी झड़न से भर दिया और फिर मैं और शालिनी सो गये।

अगले दिन सनडे था और सुबह बाबी हमारे कमरे के अंदर आया तो शालिनी ने प्यार से उसके सर पर हाथ फिराया और मुझे आँख मारती हुई धीरे से बोली- “आज क्या करना है?”

हम दोनों ने नाश्ता किया और झील में नहाने के लिए तैयार हो रहे थे। हम लोग जब कपड़े बदल रहे थे तो शालिनी ने कहा- “देखो, यह क्या है?”

मैं झुक कर शालिनी की बाबी के लण्ड से चुदी चूत की तरफ़ देखने लगा। मैंने देखा कि शालिनी की चूत से अब भी बाबी के लण्ड की झड़न रिस-रिस कर निकल रही है।

शालिनी ने धीरे से अपनी चूत को पोंछ डाला और बोली- “मैंने कल रात करीब चार-पाँच बार उठकर अपनी चूत को साफ़ किया है। बाबी ने कल रात की एक चुदाई से अपने लौड़े का माल तुम्हारे माल से करीब तीन-चार गुना ज्यादा मेरी चूत में डाला है और वो अभी तक निकल रहा है…”

हम लोग सुबह-सुबह झील के किनारे गये और एक दरी बिछाकर उसपे लेट गये। बाबी हमारे बीच घूम फिर रहा था और बारबार शालिनी की तरफ़ घूर रहा था। शालिनी बाबी के सिर पर हाथ फिरा कर बोली- “हाय, तूने कल बहुत मज़ा दिया…”

बाबी ने जल्दी से अपने नथुने शालिनी की चूत पर रख दिये लेकिन शालिनी ने अपने चूतड़ हिलाकर अपनी चूत बाबी के नथुने से अलग कर दी। शालिनी ने अपने सारे कपड़े उतार दिये थे लेकिन अपनी चड्डी पहन रखी थी और मैंने सिर्फ़ एक जाँघिया पहन रखा था।

मैं शालिनी से बोला- “क्यों ना हम अपने सारे कपड़े उतार दें क्योंकी यह सुनसान प्राइवेट सी जगह है और आस-पास कभी कोई आता-जाता भी नहीं है…” कल बाबी से चुदाई के बाद मुझे शालिनी का रिएक्शन देखना था।

शालिनी मेरा कहना मान गयी और पूरी तरह नंगी हो गयी। शालिनी को नंगी देखकर बाबी के कान खड़े हो गये और वो शालिनी की चूत की तरफ़ देखने लगा।

मैंने शालिनी से पूछा- “क्या बाबी को भगा दिया जाये?”

तो शालिनी बोली- “नहीं कल रात बाबी ने मुझे ना तो काटा और ना ही कोई नुकसान पहुँचाया, बस मेरी चूत को जमकर चोदा…”

मैं मज़ाक में शालिनी से बोला- “काश… मेरा भी लण्ड बाबी के जैसा मोटा और लम्बा होता…”

शालिनी बोली- “नहीं तुम्हारा लण्ड बहुत बड़ा है लेकिन कुत्ते का लण्ड तो कुत्ते का ही है…”

मैं शालिनी से बोला- “शायद तुम पहली या आखिरी औरत नहीं हो जिसकी चूत कुत्ते के लण्ड से चुदी हो…”

शालिनी बोली- “मैं मैगज़ीन और किताबों में पढ़ चुकी हूँ कि औरतें कुत्ते से चुदवाना पसंद करती हैं…”

मुझे शालिनी की बात सुनकर बहुत ताज्जुब हुआ और सोचने लगा कि शालिनी ऐसा क्यों कह रही है। हम लोग लेटे हुए बात कर रहे थे।

बाबी बारबार शालिनी के पास आ रहा था और अपना नथुना शालिनी की चूत के पास ला रहा था, लेकिन शालिनी बार-बार उसको हटा रही थी। बाबी का लण्ड अब खड़ा होने लगा था और वो फूलकर लटक रहा था। बाबी का मोटा खड़ा लण्ड देखकर शालिनी अपने होंठ चाट रही थी। अब तक धूप काफ़ी निकल आयी थी और मुझको गरमी लग रही थी।


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इसलिए मैं शालिनी से बोला- “मैं घर के अंदर जाता हूँ, क्या तुम भी आना चाहती हो?”

शालिनी बोली- “नहीं मैं बाहर ही रहूँगी…”

मैंने फिर पूछा- “क्या मैं बाबी के लेकर जाऊँ?”

तो शालिनी बोली- “नहीं रहने दो। इसको बाहर ही रहने दो…”

मैं एक पेड़ के पीछे जाकर छाँव में बैठ गया और सोने की तैयारी करने लगा। शालिनी मुझको मुड़-मुड़कर देख रही थी। मैं समझ गया वो मुझको सोते देखना चाहती है। इसलिए मैं आँख बंद करके सो गया।

करीब पाँच मिनट के बाद उसने मेरा नाम पुकारा लेकिन मैं चुप रहा और सोने का बहाना करता रहा। फिर शालिनी भी एक पेड़ के नीचे जाकर लेट गयी और अपने सैंडल से बाबी का लण्ड, जो कि अभी तक पूरा खड़ा नहीं हुआ था, छूने लगी। बाबी अब शालिनी के और पास गया। शालिनी ने तब बाबी को और पास खींच लिया और उसका लण्ड अपने हाथ से पकड़कर हिलाने लगी। सिर्फ़ दो मिनट के बाद बाबी का लण्ड खड़ा हो गया और चूत में घुसने के लिए तैयार हो गया।

बाबी जल्दी से शालिनी के ऊपर चढ़ गया। शालिनी चित्त लेटी हुई थी।

मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि शालिनी कैसे चित्त लेटकर बाबी से चुदवायेगी।

शालिनी ने बाबी को अपने और ऊपर खींच लिया। अब बाबी का खड़ा लण्ड शालिनी की चूची के ऊपर था। शालिनी ने बाबी को और ऊपर खींचा। अब बाबी का लण्ड ठीक शालिनी के मुँह के ऊपर था। शालिनी ने अपनी जीभ निकालकर धीरे से बाबी के मोटे खड़े लण्ड को चाटा। अब शालिनी ने धीरे से बाबी का लण्ड अपने मुँह के अंदर लिया और उसको जोर-जोर से बड़े मज़े से चूसने लगी और साथ-साथ अपने एक हाथ से अपनी चूत में उँगली डालकर अंदर-बाहर कर रही थी।

थोड़ी देर बाद शालिनी ने अपने मुँह से बाबी का लण्ड निकाला और बाबी का लण्ड अपनी चूची पर रगड़ने लगी और दूसरे हाथ से उसके गोल-गोल गोटे सहलाने लगी। बाबी ने बड़ी जोर से एक बार अपनी कमर हिलाई और शालिनी की चूची, मुँह और चेहरे पे झड़ने लगा। शालिनी धीरे से अपनी जीभ निकालकर अपने मुँह और चेहरे पर गिरा बाबी का माल चाटने लगी।

मुझे यह देखकर बड़ी हैरानी हुई क्योंकी आज तक शालिनी ने इतने जोश और इच्छा से कभी मेरा लण्ड मुँह में लेकर नहीं चूसा था, लेकिन आज वो बाबी का लण्ड बड़े मजे से चूस रही थी। अब शालिनी धीरे से नीचे सरक कर अपनी चिकनी चूत बाबी के मुँह के पास ले गयी।

बाबी अब शालिनी की गाण्ड से लेकर उसकी चूत की घुंडी तक चाटने लगा। बाबी के चूत चाटने से शालिनी झड़ गयी और बड़ी हसरत भरी निगाहों से बाबी के लण्ड की तरफ़ देखने लगी। सिर्फ़ दो-तीन मिनट के बाद ही बाबी का लण्ड फिर से खड़ा होने लगा और अब मुझको समझ में आने लगा कि शालिनी बाबी को एक बार झड़ा लेना चाहती थी जिससे कि बाबी खूब देर तक शालिनी की चूत की अपने लण्ड से चुदाई कर सके।

अब शालिनी अपने हाथ-पैर के बल झुक कर कुतिया जैसी हो गयी। अब कुत्ता पीछे से आकर शालिनी कि चूत सूँघकर फिर से चाटने लगा और फिर शालिनी के ऊपर चढ़ गया। अब बाबी का लण्ड शालिनी की चूत के छेद के सामने था और शालिनी ने अपना हाथ पीछे लेजाकर बाबी का लण्ड अपनी चूत के छेद से मिला दिया।

अब बाबी अपनी कमर को धीरे-धीरे से चलाकर अपना लण्ड धीरे-धीरे शालिनी की चूत के अंदर डालने लगा और धीरे-धीरे शालिनी की चूत को चोदने लगा। कुत्ते का लण्ड शालिनी के चूत-रस से भीगकर बहुत चमक रहा था। बाबी के मोटे लण्ड से शालिनी की चूत का छेद बहुत फैल गया था और मुझको लग रहा था कि कल रात की चुदाई से शालिनी का छेद बाबी का लण्ड आसानी से भीतर ले लेगा। बाबी अब अपने मोटे लण्ड को करीब 5” इन्च बाहर निकाल रहा था और पूरे जोर से अंदर पेल रहा था।

मुझे अब साफ़-साफ़ शालिनी की चूत से चुदाई की आवाज सुनाई पड़ रही थी। बाबी ने करीब 15 मिनट तक शालिनी की चूत का मंथन किया और इतने समय में शालिनी करीब 5 बार झड़ी क्योंकी शालिनी हर बार झड़ने के साथ बहुत बड़बड़ा रही थी।

आखिरकार बाबी अब ठंडा पड़ चुका था पर उसक लण्ड शालिनी की चूत में फँस गया था। बाबी शालिनी की पीठ से अपने आगे के पैर हटाकर मुड़ गया और अब दोनों की गाण्ड से गाण्ड चिपकी हुई थी और दोनों हाँफ रहे थे। जब शालिनी की साँसें सामान्य हुई और वो गर्दन घुमाकर देखी तो मुझसे नजरें टकरा गयी।

वो हँसकर बोली- “बाबी का लण्ड बहुत मोटा और लम्बा है और कल रात की चुदाई से मेरी चूत लण्ड की ठोकर खाने के लिए तड़प रही थी। फिर यह कुत्ता तो कल चला ही जायेगा इसलिए मैंने इसके लण्ड से फिर एक बार अपनी चूत मरवा ली। क्या बताऊँ बहुत ही मज़ा आया। जब बाबी धक्के मारता है तो लगता है उसका लण्ड मेरे मुँह से निकलकर बाहर आ जायेगा। मैं तो अब इससे गाण्ड भी मरवाना चाहती हूँ…”

इतनी देर में कुत्ते का लण्ड प्लाप की आवाज के साथ शालिनी की चूत से निकल आया। मुझे शालिनी की चूत का फ़ैला हुआ छेद अब साफ़-साफ़ दिख रहा था और उसमें से बाबी का माल टपक रहा था। शालिनी की चूत का मटर-दाना (क्लिट) और चूत की पपड़ी बिल्कुल फूलकर लाल पड़ चुकी थी।

मैंने शालिनी से झील में जाकर नहाने के लिए बोला।

तो वो मेरा लौड़ा पकड़कर बोली- “चलो तुम भी नहा लो क्योंकी तुम मेरी चुदाई देखकर गरम हो गये हो और अब तो तुम्हारे कज़न का भी आने का समय हो गया है…”

मैं बोला- “जब तुम बाबी से इतनी अच्छी तरह से चुदवा सकती हो तो मैं आज रात को तुमसे अपना लण्ड चुसवाऊँगा और तुम्हारी गाण्ड भी मारूँगा…”

शालिनी बोली- “ठीक है, पहले मैं तुम्हारा लौड़ा चूसूँगी और फिर तुम मेरी गाण्ड में अपना लण्ड पेलकर मेरी गाण्ड फाड़ देना। बस अब चलो नंगे होकर झील में नहाते हैं…”

मेरा चचेरा भाई शाम को हमारे घर आया और हमसे बोला- “मैं 6 महीने के लिए विदेश जा रहा हूँ और बाबी को किसी के हाथ बेचकर जाऊँगा…”

शालिनी मेरी तरफ़ तिरछी नज़रों से देखने लगी लेकिन कुछ बोली नहीं। मैं शालिनी की तरफ़ देखते हुए भाई से बोला- “अगर सिर्फ़ 6 महीने की बात है तो हम लोग बाबी को अपने पास रख लेंगे क्योंकी हमारा घर भी बड़ा है और हम लोग बिल्कुल अकेले रहते हैं…”

शालिनी मेरी तरफ़ देखकर मुश्कुराई और आँखों से मुझे धन्यवाद दिया।


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***** THE END समाप्त *****

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Friends,

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Enjoy.

Thanks
 
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आज पढ़िये प्रेम गुरू की कलम से

एक खड़े लण्ड की करतूत

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एक खड़े लण्ड की करतूत

लेख़क - प्रेम गुरू

“अच्छा चलो एक बात बताओ जिस माली ने पेड़ लगाया है क्या उसे उस पेड़ के फल खाने का हक नहीं होना चाहिए? या जिस किसान ने इतने प्यार से फसल तैयार की है उसे उसके अनाज को खाने का हक नहीं होना चाहिए? अब अगर मैं अपनी बेटी को चोदना चाहता हूं तो क्या गलत है?” …इसी कहानी से

मेरा एक ई-मित्र है तरुण। बस ऐसे ही जान पहचान हो गई थी। वो मेरी कहानियों का बड़ा प्रशंसक था। उसे किसी लड़की को पटाने के टोटके पता करने थे। एक दिन जब मैं अपने मेल्स चेक कर रहा था तो उससे चैट पर बात हुई थी। फिर तो बातों का ये सिलसला चल ही पड़ा। यह कहानी उसके साथ हुई बातों पर आधारित है।

लीजिये उसकी जबानी सुनिए:

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दोस्तों मेरा नाम तरुण है। 20 साल का हूँ। कालेज में पढता हूँ। पिछले साल गर्मियों की छुट्टियों में मैं अपने ननिहाल अमृतसर घूमने गया हुआ था। मेरे मामा का छोटा सा परिवार है। मेरे मामाजी रुस्तम सेठ 45 साल के हैं और मामी सविता 42 साल के अलावा उनकी एक बेटी है कनिका 18 साल की। मस्त क़यामत बन गई है, अब तो अच्छे-अच्छो का पानी निकल जाता है उसे देखकर। वो भी अब मोहल्ले के लौंडे लपाड़ों को देखकर नैन मट्टका करने लगी है।

एक बात खास तौर पर बताना चाहूँगा कि मेरे नानाजी का परिवार लाहोर से अमृतसर 1947 में आया था और यहाँ आकर बस गया। पहले तो सब्जी की छोटी सी दूकान ही थी पर अब तो काम कर लिए हैं। खालसा कालेज के सामने एक जनरल स्टोर है जिसमें पब्लिक टेलीफोन, कंप्यूटर और नेट आदि की सुविधा भी है। साथ में जूस बार और फलों की दूकान भी है। अपना दो मंजिला मकान है और घर में सब आराम है। किसी चीज की कोई कमी नहीं है। आदमी को और क्या चाहिए। रोटी कपड़ा और मकान के अलावा तो बस सेक्स की जरूरत रह जाती है।

मैं बचपन से ही बहुत शर्मीला रहा हूँ। मुझे अभी तक सेक्स का ज्यादा अनुभव नहीं था। बस एक बार बचपन में मेरे चाचा ने मेरी गाण्ड मारी थी। जब से जवान हुआ था अपने लण्ड को हाथ में लिए ही घूम रहा था। कभी कभार नेट पर सेक्सी कहानियां पढ़ लेता था और ब्लू फिल्म भी देख लेता था। सच पूछो तो मैं किसी लड़की या औरत को चोदने के लिए मरा ही जा रहा था।

मामाजी और मामी को कई बार रात में चुदाई करते देखा था। वाह… 42 साल की उम्र में भी मेरी मामी सविता एकदम जवान पट्ठी ही लगती है। लयबद्ध तरीके से हिलते मोटे-मोटे नितम्ब और गोल-गोल स्तन तो देखने वालों पर बिजलियां ही गिरा देते हैं। ज्यादातर वो सलवार और कुरता ही पहनती है पर कभी कभार जब काली साड़ी और कसा हुआ ब्लाउज पहनती है तो उसकी लचकती कमर और गहरी नाभि देखकर तो कई मनचले सीटी बजाने लगते हैं।

लेकिन दो-दो चूतों के होते हुए भी मैं अब तक प्यासा ही था। जून का महीना था। सभी लोग छत पर सोया करते थे। रात के कोई दो बजे होंगे। मेरी अचानक आँख खुली तो मैंने देखा मामा और मामी दोनों ही नहीं हैं। कनिका बगल में लेटी हुई है। मैं नीचे पेशाब करने चला गया। पेशाब करने के बाद जब मैं वापस आने लगा तो मैंने देखा मामा और मामी के कमरे की लाईट जल रही है।

मैं पहले तो कुछ समझा नहीं पर हाईई… ओह… या… उईई… की हल्की-हल्की आवाज ने मुझे खिड़की से झांकने को मजबूर कर दिया। खिड़की का पर्दा थोड़ा सा हटा हुआ था। अन्दर का दृश्य देखकर तो मैं जड़ ही हो गया। मामा और मामी दोनों नंगे बेड पर अपनी रात रंगीन कर रहे थे। मामा नीचे लेटे थे और मामी उनके ऊपर बैठी थी। मामा का लण्ड मामी की चूत में घुसा हुआ था और वो मामा के सीने पर हाथ रखकर धीरे-धीरे धक्के लगा रही थी और आह… उन्ह… या… की आवाजें निकाल रही थी। उसके मोटे-मोटे नितम्ब तो ऊपर-नीचे होते ऐसे लग रहे थे जैसे कोई फुटबाल को किक मार रहा हो। उनकी चूत पर उगी काली काली झांटों का झुरमुट तो किसी मधुमक्खी के छत्ते जैसा था।

वो दोनों ही चुदाई में मग्न थे। कोई 8-10 मिनट तक तो इसी तरह चुदाई चली होगी। पता नहीं कब से लगे थे। फिर मामी की रफ्तार तेज होती चली गई और एक जोर की सीत्कार करते हुए वो ढीली पड़ गई और मामा पर ही पसर गई। मामा ने उसे कसकर बाहों में जकड़ लिया और जोर से मामी के होंठ चूम लिए।

“सविता डार्लिंग एक बात बोलूं…”

“क्या?”

“तुम्हारी चूत अब बहुत ढीली हो गई है बिलकुल मजा नहीं आता…”

“तुम गाण्ड भी तो मार लेते हो, वो तो अभी भी टाइट है ना?”

“ओह तुम नहीं समझी…”

“बताओ ना…”

“वो तुम्हारी बहन बबिता की चूत और गाण्ड दोनों ही बड़ी मस्त थी। और तुम्हारी भाभी जया तो तुम्हारी ही उम्र की है पर क्या टाइट चूत है साली की। मज़ा ही आ जाता है चोदकर…”

“तो ये कहो ना कि मुझसे जी भर गया है तुम्हारा…”

“अरे नहीं सविता रानी ऐसी बात नहीं है दरअसल मैं सोच रहा था कि तुम्हारे छोटे वाले भाई की बीवी बड़ी मस्त है। उसे चोदने को जी करता है…”

“पर उसकी तो अभी नई-नई शादी हुई है वो भला कैसे तैयार होगी?”

“तुम चाहो तो सब हो सकता है…”

“वो कैसे?”

“तुम अपने बड़े भाई से तो पता नहीं कितनी बार चुदवा चुकी हो अब छोटे से भी चुदवा लो और मैं भी उस क़यामत को एक बार चोदकर निहाल हो जाऊँ…”

“बात तो तुम ठीक कह रहे हो, पर अविनाश नहीं मानेगा…”

“क्यों?”

“उसे मेरी इस चुदी चुदाई भोसड़ी में भला क्या मज़ा आएगा?”

“ओह तुम भी एक नंबर की फुद्दू हो, उसे कनिका का लालच दे दो ना…”

“कनिका… अरे नहीं, वो अभी बच्ची है…”

“अरे बच्ची कहाँ है। पूरे अट्ठारह साल की तो हो गई है। तुम्हें अपनी याद नहीं है क्या? तुम तो केवल सोलह साल की ही थी जब हमारी शादी हुई थी और मैंने तो सुहागरात में ही तुम्हारी गाण्ड भी मार ली थी…”

“हाँ ये तो सच है पर?”

“पर क्या?”


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“मुझे भी तो जवान लण्ड चाहिए ना। तुम तो बस नई नई चूतों के पीछे पड़े रहते हो मेरा तो जरा भी ख़याल नहीं है तुम्हें…”

“अरे तुमने भी तो अपने जीजा और भाई से चुदवाया था ना और गाण्ड भी तो मरवाई थी ना…”

“पर वो नए कहाँ थे मुझे भी नया और ताजा लण्ड चाहिए बस कह दिया…”

“ओह… तुम तरुण को क्यों नहीं तैयार कर लेती। तुम उसके मजे लो और मैं कनिका की सील तोड़ने का मजा ले लूँगा…”

“पर वो मेरे सगे भाई की औलाद हैं क्या यह ठीक रहेगा?”

“क्यों इसमें क्या बुराई है?”

“पर वो… नहीं, मुझे ऐसा करना अच्छा नहीं लगता…”

“अच्छा चलो एक बात बताओ जिस माली ने पेड़ लगाया है क्या उसे उस पेड़ के फल को खाने का हक नहीं होना चाहिए। या जिस किसान ने इतने प्यार से फसल तैयार की है उसे उस फसल के अनाज को खाने का हक नहीं मिलना चाहिए। अब अगर मैं अपनी इस बेटी को चोदना चाहता हूँ तो इसमें क्या गलत है?”

“ओह तुम भी एक नंबर के ठरकी हो। अच्छा ठीक है बाद में सोचेंगे…” और फिर मामी ने मामा का मुरझाया लण्ड अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी।

मैं उनकी बातें सुनकर इतना उत्तेजित हो गया था कि मुट्ठ मारने के अलावा मेरे पास अब कोई और रास्ता नहीं बचा था। मैं अपना 7 इंच का लण्ड हाथ में लिए बाथरूम की ओर बढ़ गया। फिर मुझे ख़याल आया कनिका ऊपर अकेली है। कनिका की ओर ध्यान जाते ही मेरा लण्ड तो जैसे छलांगें ही लगाने लगा। मैं दौड़कर छत पर चला आया।

कनिका बेसुध हुई सोई थी। उसने पीले रंग की स्कर्ट पहन रखी थी और अपनी एक टांग मोड़े करवट लिए सोई थी। स्कर्ट थोड़ी सी ऊपर उठी थी। उसकी पतली सी पैंटी में फँसी उसकी चूत का चीरा तो साफ नजर आ रहा था। पैंटी उसकी चूत की दरार में घुसी हुई थी और चूत के छेद वाली जगह गीली हो गई थी। उसकी गोरी-गोरी मोटी जांघें देखकर तो मेरा जी करने लगा कि अभी उसकी कुलबुलाती चूत में अपना लण्ड डाल ही दूँ। मैं उसके पास बैठ गया और उसकी जाँघों पर हाथ फेरने लगा।

वाह… क्या मस्त मुलायम संग-ए-मरमर सी नाज़ुक जांघें थी। मैंने धीरे से पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर अंगुली फिराई। वो तो पहले से ही गीली थी। आह… मेरी अंगुली भी भीग सी गई। मैंने उस अंगुली को पहले अपनी नाक से सूंघा। वाह क्या मादक महक थी। कच्चे नारियल जैसी जवान चूत के रस की मादक महक तो मुझे अन्दर तक मस्त कर गई। मैंने अंगुली को अपने मुँह में ले लिया। कुछ खट्टा और नमकीन सा लिजलिजा सा वो रस तो बड़ा ही मजेदार था।

मैं अपने आपको कैसे रोक पाता। मैंने एक चुम्बन उसकी जाँघों पर ले ही लिया। वो थोड़ा सा कुनमुनाई पर जगी नहीं। अब मैंने उसके उरोज देखे। वह क्या गोल-गोल अमरूद थे। मैंने कई बार उसे नहाते हुए नंगा देखा था। पहले तो इनका आकार नींबू जितना ही था पर अब तो संतरे नहीं तो अमरूद तो जरूर बन गए हैं। गोरे-गोरे गाल चाँद की रोशनी में चमक रहे थे। मैंने एक चुम्बन उनपर भी ले लिया। मेरे होंठों का स्पर्श पाते ही कनिका जग गई और अपनी आँखों को मलते हुए उठ बैठी।

“क्या कर रहे हो भाई?” उसने उनीन्दी आँखों से मुझे घूरा।

“वो… वो… मैं तो प्यार कर रहा था…”

“पर ऐसे कोई रात को प्यार करता है क्या?”

“प्यार तो रात को ही किया जाता है…” मैंने हिम्मत करके कह ही दिया।

उसकी समझ में पता नहीं आया या नहीं।

फिर मैंने कहा- “कनिका एक मजेदार खेल देखोगी?”

“क्या?” उसने हैरानी से मेरी ओर देखा।

“आओ मेरे साथ…” मैंने उसका बाजू पकड़ा और सीढ़ियों से नीचे ले आया और हम बिना कोई आवाज किये उसी खिड़की के पास आ गए। अन्दर का दृश्य देखकर तो कनिका की आँखें फटी की फटी ही रह गईं। अगर मैंने जल्दी से उसका मुँह अपनी हथेली से नहीं ढक दिया होता तो उसकी चीख ही निकल जाती। मैंने उसे इशारे से चुप रहने को कहा।

वो हैरान हुई अन्दर देखने लगी।

मामी घोड़ी बनी फर्श पर खड़ी थी और अपने हाथ बेड पर रखे थे। उनका सिर बेड पर था और नितम्ब हवा में थे। मामा उसके पीछे उसकी कमर पकड़कर धक्के लगा रहे थे। उन 8 इंच का लण्ड मामी की गाण्ड में ऐसे जा रहा था जैसे कोई पिस्टन अन्दर बाहर आ जा रहा हो। मामा उनके नितम्बों पर थपकी लगा रहे थे। जैसे ही वो थपकी लगाते तो नितम्ब हिलने लगते।

और उसके साथ ही मामी की सीत्कार निकलती- “हाईई… और जोर से मेरे राजा और जोर से… आज सारी कसर निकाल लो और जोर से मारो मेरी गाण्ड बहुत प्यासी है ये हाईई…”

“ले मेरी रानी और जोर से ले… या… सविता… आआ…” मामा के धक्के तेज होने लगे और वो भी जोर-जोर से चिल्लाने लगे।

पता नहीं मामा कितनी देर से मामी की गाण्ड मार रहे थे। फिर मामा मामी से जोर से चिपक गए। मामी थोड़ी सी ऊपर उठी। उनके पपीते जैसे स्तन नीचे लटके झूल रहे थे। उनकी आँखें बंद थी और वह सीत्कार किये जा रही थी- “जियो मेरे राजा मज़ा आ गया…”

मैंने धीरे-धीरे कनिका के वक्ष मसलने शुरू कर दिए। वो तो अपने मम्मी-पापा की इस अनोखी रासलीला को देखकर मस्त ही हो गई थी। मैंने एक हाथ उसकी पैंटी में भी डाल दिया। उफ… छोटी-छोटी झांटों से ढकी उसकी बुर तो कमाल की थी, बिल्कुल गीली। मैंने धीरे से एक अंगुली से उसके नर्म नाज़ुक छेद को टटोला। वो तो चुदाई देखने में इतनी मस्त थी कि उसे तो तब ध्यान आया जब मैंने गच्च से अपनी अंगुली उसकी बुर के छेद में पूरी घुसा दी।

“उईई माँ…” उसके मुँह से हौले से निकला- “ओह… भाई ये क्या कर रहे हो?” उसने मेरी ओर देखा। उसकी आँखें बोझिल सी थी और उनमें लाल डोरे तैर रहे था। मैंने उसे बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूम लिया। हम दोनों ने देखा कि एक पुचक्क की आवाज के साथ मामा का लण्ड फिसल कर बाहर आ गया और मामी बेड पर लुढ़क गई। अब वहाँ रुकने का कोई मतलब नहीं रह गया था। हम एक दूसरे की बाहों में सिमटे वापस छत पर आ गए।

“कनिका…”

“हाँ… भाई…”

कनिका के होंठ और जबान कांप रही थी। उसकी आँखों में एक नई चमक थी। आज से पहले मैंने कभी उसकी आँखों में ऐसी चमक नहीं देखी थी। मैंने फिर उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने लगा। उसने भी बेतहाशा मुझे चूमना शुरू कर दिया। मैंने धीरे-धीरे उसके स्तन भी मसलने चालू कर दिए। जब मैंने उसकी पैंटी पर हाथ फिराया।

तो उसने मेरा हाथ पकड़ते कहा- “नहीं भाई… इससे आगे नहीं…”

“क्यों क्या हुआ?”


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“मैं रिश्ते में तुम्हारी बहन लगती हूँ, भले ही ममेरी ही हूँ पर आखिर हूँ तो बहन ही ना। और भाई और बहन में ऐसा नहीं होना चाहिए…”

“अरे तुम किस ज़माने की बात कर रही हो। लण्ड और चूत का रिश्ता तो कुदरत ने बनाया है। लण्ड और चूत का सिर्फ एक ही रिश्ता होता है और वो है चुदाई का। ये तो केवल तथाकथित सभ्य कहे जाने वाले समाज और धर्म के ठेकेदारों का बनाया हुआ ढकोसला (प्रपंच) है। असल में देखा जाए तो ये सारी कायनात ही इस प्रेम रस में डूबी है जिसे लोग चुदाई कहते हैं…” मैं एक ही सांस में कह गया।

“पर फिर भी इंसान और जानवरों में फर्क तो होता है ना?”

“जब चूत की किश्मत में चुदना ही लिखा है तो फिर लण्ड किसका है इससे क्या फर्क पड़ता है। तुम नहीं जानती कनिका तुम्हारा ये जो बाप है न… वो अपनी बहन, भाभी, साली और सलहज सभी को चोद चुका है और ये तुम्हारी मम्मी भी कम नहीं है। अपने देवर, जेठ, ससुर, भाई और जीजा से ना जाने कितनी बार चुद चुकी है और गाण्ड भी मरवा चुकी है…”

कनिका मेरी ओर मुँह बाईं देखे जा रही थी। उसे ये सब सुनकर बड़ी हैरानी हो रही थी, कहा- “नहीं भाई तुम झूठ बोल रहे हो…”

“देखो मेरी बहना तुम चाहे कुछ भी समझो ये जो तुम्हारा बाप है ना वो तो तुम्हें भी भोगने के चक्कर में है। मैंने अपने कानों से सुना है…”

“क… क्या?” उसे तो जैसे मेरी बातों पर यकीन ही नहीं हुआ। मैंने उसे सारी बातें बता दी जो आज मामा-मामी से कह रहे थे।

उसके मुँह से तो बस इतना ही निकला “ओह… नोऽऽ…”

“बोलो… तुम क्या चाहती हो अपनी मर्जी से प्यार से तुम अपना सब कुछ मुझे सौंप देना चाहोगी या फिर उस 45 साल के अपने खड़ूश और ठरकी बाप से अपनी चूत और गाण्ड की सील तुड़वाना चाहती हो… बोलो?”

“मेरी समझ में तो कुछ नहीं आ रहा है…”

“अच्छा एक बात बताओ?”

“क्या?”

“क्या तुम शादी के बाद नहीं चुदवाओगी। या सारी उम्र अपनी चूत नहीं मरवाओगी?”

“नहीं पर ये सब तो शादी के बाद की बात होती है…”

“अरे मेरी भोली बहना। ये तो खाली लाइसेंस लेने वाली बात है। शादी विवाह तो चुदाई जैसे महान काम को शुरू करने का उत्सव है। असल में शादी का मतलब तो बस चुदाई ही होता है…”

“पर मैंने सुना है कि पहली बार में बहुत दर्द होता है और खून भी निकलता है…”

“अरे तुम उसकी चिंता मत करो। मैं बड़े आराम से करूँगा। देखना तुम्हें बड़ा मज़ा आएगा…”

“पर तुम गाण्ड तो नहीं मारोगे ना। पापा की तरह…”

“अरे मेरी जान पहले चूत तो मरवा लो। गाण्ड का बाद में सोचेंगे…” और मैंने फिर उसे बाहों में भर लिया।

उसने भी मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिया। वाह… क्या मुलायम होंठ थे, जैसे संतरे की नर्म नाज़ुक फांकें हों। कितनी ही देर हम आपस में गुंथे एक दूसरे को चूमते रहे। अब मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर फिराना चालू कर दिया।

उसने भी मेरे लण्ड को कसकर हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी। लण्ड महाराज तो ठुमके ही लगाने लगे। मैंने जब उसके उरोज दबाये तो उसके मुँह से सीत्कार निकालने लगी- “ओह… भाई कुछ करो ना। पता नहीं मुझे कुछ हो रहा है…” उत्तेजना के मारे उसका शरीर कांपने लगा था साँसें तेज होने लगी थी। इस नए अहसास और रोमांच से उसके शरीर के रोएँ खड़े हो गए थे। उसने कसकर मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया। अब देर करना ठीक नहीं था।

मैंने उसकी स्कर्ट और टाप उतार दिए। उसने ब्रा तो पहनी ही नहीं थी। छोटे-छोटे दो अमरूद मेरी आँखों के सामने थे। गोरे रंग के दो रस कूप जिनका एरोला कोई एक रुपये के सिक्के जितना और निप्पल्स तो कोई मूंग के दाने जितने बिलकुल गुलाबी रंग के। मैंने तड़ से एक चुम्बन उसके उरोज पर ले लिया। अब मेरा ध्यान उसकी पतली कमर और गहरी नाभि पर गया। जैसे ही मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी की ओर बढ़ाया

तो उसने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा- “भाई तुम भी तो अपने कपड़े उतारो ना…”

“ओह… हाँ…”

मैंने एक ही झटके में अपना नाईट सूट उतार फेंका। मैंने चड्डी और बनियान तो पहनी ही नहीं थी। मेरा 7 इंच का लण्ड 120° डिग्री पर खड़ा था। लोहे की राड की तरह बिलकुल सख्त। उसपर प्री-कम की बूँद चाँद की रोशनी में ऐसे चमक रही थी जैसे शबनम की बूँद हो या कोई मोती।

“कनिका इसे प्यार करो ना…”

“कैसे?”

“अरे बाबा इतना भी नहीं जानती। इसे मुँह में लेकर चूसो ना…”

“मुझे शर्म आती है…”

मैं तो दिलोजान से इस अदा पर फिदा ही हो गया। उसने अपनी निगाहें झुका ली पर मैंने देखा था कि कनखियों से वो अभी भी मेरे तप्त लण्ड को ही देखे जा रही थी बिना पलकें झपकाए।

मैंने कहा- “चलो, मैं तुम्हारी बुर को पहले प्यार कर देता हूँ फिर तुम इसे प्यार कर लेना…”

“ठीक है…” भला अब वो मना कैसे कर सकती थी।

और फिर मैंने धीरे से उसकी पैंटी को नीचे खिसकाया, गहरी नाभि के नीचे हल्का सा उभरा हुआ पेड़ू और उसके नीचे रेशम से मुलायम छोटे-छोटे बाल नजर आने लगे। मेरे दिल की धड़कनें बढ़ने लगीं। मेरा लण्ड तो सलामी ही बजाने लगा। एक बार तो मुझे लगा कि मैं बिना कुछ किये-धरे ही झड़ जाऊँगा। उसकी चूत की फांकें तो कमाल की थी। मोटी-मोटी संतरे की फांकों की तरह। गुलाबी रंग की, दोनों आपस में चिपकी हुई। मैंने पैंटी को निकाल फेंका।

जैसे ही मैंने उसकी जाँघों पर हाथ फिराया तो वो सीत्कार करने लगी और अपनी जांघें कसकर भींच ली।

मैं जानता था कि यह उत्तेजना और रोमांच के कारण है। मैंने धीरे से अपनी अंगुली उसकी बुर की फांकों पर फिराई। वो तो मस्त ही हो गई। मैंने अपनी अंगुली ऊपर से नीचे और फिर नीचे से ऊपर फिराई। 3-4 बार ऐसा करने से उसकी जांघें अपने आप चौड़ी होती चली गई।

अब मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी बुर की दोनों फांकों को चौड़ा किया। एक हल्की सी पुट की आवाज के साथ उसकी चूत की फांकें खुल गई। आह… अन्दर से बिलकुल लाल सुर्ख… जैसे किसी पके तरबूज की गिरी हो। मैं अपने आपको कैसे रोक पाता। मैंने अपने जलते होंठ उनपर रख दिए। आह… नमकीन सा नारियल पानी सा खट्टा सा स्वाद मेरी जबान पर लगा और मेरी नाक में जवान जिश्म की एक मादक महक भर गई। मैंने अपनी जीभ को थोड़ा सा नुकीला बनाया और उसके छोटे से टीट (मदनमणि) पर टिका दिया। उसकी तो एक किलकारी ही निकल गई।

अब मैंने ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर जीभ फिरानी चालू कर दी। उसने कसकर मेरे सिर के बालों को पकड़ लिया। वो तो सीत्कार पर सीत्कार किये जा रही थी। बुर के छेद के नीचे उसकी गाण्ड का सुनहरा छेद उसके कामरज से पहले से ही गीला हो चुका था।

अब तो वो भी खुलने और बंद होने लगा था। कनिका आह्ह… उन्ह… कर रही थी। ऊईई… माँ… एक मीठी सी सीत्कार निकल ही गई उसके मुँह से।

अब मैंने उसकी बुर को पूरा मुँह में ले लिया और जोर की चुस्की लगाई। अभी तो मुझे दो मिनट भी नहीं हुए होंगे कि उसका शरीर अकड़ने लगा और उसने अपने पैर ऊपर करके मेरी गर्दन के गिर्द लपेट लिए और मेरे बालों को कसकर पकड़ लिया। इतने में ही उसकी चूत से कामरस की कोई 4-5 बूँदें निकलकर मेरे मुँह में समा गई। आह क्या रसीला स्वाद था। मैंने तो इस रस को पहली बार चखा था। मैं उसे पूरा का पूरा पी गया। अब उसकी पकड़ कुछ ढीली हो गई थी। पैर अपने आप नीचे आ गए। 2-3 चुस्कियां लेने के बाद मैंने उसके एक उरोज को मुँह में ले लिया और चूसना चालू कर दिया।

शायद उसे इन उरोजों को चुसवाना अच्छा नहीं लगा था। उसने मेरा सिर एक और धकेला और झट से मेरे खड़े लण्ड को अपने मुँह में ले लिया। मैं तो कब से यही चाह रहा था। उसने पहले सुपाड़े पर आई प्री-कम की बूँदें चाटी और फिर सुपाड़े को मुँह में भरकर चूसने लगी जैसे कोई रस भरी कुल्फी हो।

आह… आज किसी ने पहली बार मेरे लण्ड को ढंग से मुँह में लिया था। कनिका ने तो कमाल ही कर दिया। उसने मेरा लण्ड पूरा मुँह में भरने की कोशिश की पर भला सात इंच लम्बा लण्ड उसके छोटे से मुँह में पूरा कैसे जाता। मैं चित्त लेटा था और वो उकड़ू सी हुई मेरे लण्ड को चूसे जा रही थी। मेरी नजर उसकी चूत की फांकों पर दौड़ गई। हलके हलके बालों से लदी चूत तो कमाल की थी। मैंने कई ब्लू फिल्मों में देखा था की चूत के अन्दर के होंठों की फांकें 1½ या दो इंच तक लम्बी होती हैं पर कनिका की तो बस छोटी-छोटी सी थी। बिलकुल लाल और गुलाबी रंगत लिए।

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मामी की तो बिलकुल काली-काली थी। पता नहीं मामा उन काली-काली फांकों को कैसे चूसते हैं। मैंने कनिका की चूत पर हाथ फिराना चालू कर दिया। वो तो मस्त हुई मेरे लण्ड को बिना रुके चूसे जा रही थी। मुझे लगा अगर जल्दी ही मैंने उसे मना नहीं किया तो मेरा पानी उसके मुँह में ही निकल जाएगा और मैं आज की रात बिना चूत मारे ही रह जाऊँगा। मैं ऐसा हरगिज नहीं चाहता था।

मैंने उसकी चूत में अपनी अंगुली जोर से डाल दी। वो थोड़ी सी चिहुंकी और मेरे लण्ड को छोड़कर एक और लुढ़क गई। वो चित्त लेट गई थी। अब मैं उसके ऊपर आ गया और उसके होंठों को चूमने लगा। एक हाथ से उसके उरोज मसलने चालू कर दिए और एक हाथ से उसकी चूत की फांकों को मसलने लगा।

उसने भी मेरे लण्ड को मसलना चालू कर दिया।

अब लोहा पूरी तरह गर्म हो चुका था और हथोड़ा मारने का समय आ गया था। मैंने अपने उफनते हुए लण्ड को उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया। अब मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके गाल चूमने लगा। एक हाथ से उसकी कमर पकड़ ली। इतने में मेरे लण्ड ने एक ठुमका लगाया और वो फिसल कर ऊपर खिसक गया।

कनिका की हँसी निकल गई।

मैंने दुबारा अपने लण्ड को उसकी चूत पर सेट किया और उसके कमर पकड़कर एक जोर का धक्का लगा दिया। मेरा लण्ड उसके थूक से पूरा गीला हो चुका था और पिछले आधे घंटे से उसकी चूत ने भी बेतहाशा कामरज बहाया था। मेरा आधा लण्ड उसकी कुंवारी चूत की सील को तोड़ता हुआ अन्दर घुस गया।

इसके साथ ही कनिका की एक चीख हवा में गूंज गई।

मैंने झट से उसका मुँह दबा दिया नहीं तो उसकी चीख नीचे तक चली जाती। कोई 2-3 मिनट तक हम बिना कोई हरकत किये ऐसे ही पड़े रहे। वो नीचे पड़ी कुनमुना रही थी। अपने हाथ पैर पटक रही थी पर मैंने उसकी कमर पकड़ रखी थी इसलिए मेरा लण्ड बाहर निकलने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता था। मुझे भी अपने लण्ड के सुपाड़े के नीचे जहां धागा होता है जलन सी महसूस हुई। ये तो मुझे बाद में पता चला कि उसकी चूत की सील के साथ मेरे लण्ड की भी सील (धागा) टूट गई है।

चलो अच्छा है अब आगे का रास्ता दोनों के लिए ही साफ हो गया है। हम दोनों को ही दर्द हो रहा था। पर इस नए स्वाद के आगे ये दर्द भला क्या माने रखता था।

“ओह… भाई मैं तो मर गई रे…” कनिका के मुँह से निकला- “ओह… बाहर निकालो मैं मर जाऊँगी…”

“अरे मेरी बहना रानी। बस अब जो होना था हो गया है। अब दर्द नहीं बस मजा ही मजा आएगा। तुम डरो नहीं ये दर्द तो बस 2-3 मिनट का और है उसके बाद तो बस जन्नत का ही मजा है…”

“ओह… नहीं प्लीज बाहर निकालो… ओह। याआ… उन्ह…”

मैं जानता था उसका दर्द अब कम होने लगा है और उसे भी मजा आने लगा है। मैंने हौले से एक धक्का लगाया तो उसने भी अपनी चूत को अन्दर से सिकोड़ा। मेरा लण्ड तो निहाल ही हो गया जैसे। अब तो हालत यह थी कि कनिका नीचे से धक्के लगा रही थी।

अब तो मेरा लण्ड उसकी चूत में बिना किसी रुकावट अन्दर बाहर हो रहा था। उसके कामरज और सील टूटने से निकले खून से सना मेरा लण्ड तो लाल और गुलाबी सा हो गया था।

“उईई माँ… आह्ह… मजा आ रहा है भाई तेज करो ना। आह और तेज या…” कनिका मस्त हुई बड़बड़ा रही थी। अब उसने अपने पैर ऊपर उठाकर मेरी कमर के गिर्द लपेट लिए थे।

मैंने भी उसका सिर अपने हाथों में पकड़कर अपने सीने से लगा लिया और धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा। जैसे ही मैं ऊपर उठता तो वो भी मेरे साथ ही थोड़ी सी ऊपर हो जाती और जब हम दोनों नीचे आते तो पहले उसके नितम्ब गद्दे पर टिकते और फिर गच्च से मेरा लण्ड उसकी चूत की गहराई में समा जाता। वो तो मस्त हुई आह्ह… उईई माँ… ही करती जा रही थी।

एक बार उसका शरीर फिर अकड़ा और उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ दिया। वो झड़ गई थी। आह… एक ठंडी सी आनंद की सीत्कार उसके मुँह से निकली तो लगा कि वो पूरी तरह मस्त और संतुष्ट हो गई है। मैंने अपने धक्के लगाने चालू रखे। हमारी इस चुदाई को कोई 20 मिनट तो जरूर हो ही गए थे। अब मुझे लगाने लगा कि मेरा लावा फूटने वाला है।

मैंने कनिका से कहा तो वो बोली- “कोई बात नहीं, अन्दर ही डाल दो अपना पानी। मैं भी आज इस अमृत को अपनी कुंवारी चूत में लेकर निहाल होना चाहती हूँ…”

मैंने अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और फिर गर्म गाढ़े रस की ना जाने कितनी पिचकारियां निकलती चली गई और उसकी चूत को लबालब भरती चली गई। उसने मुझे कसकर पकड़ लिया। जैसे वो उस अमृत का एक भी कतरा इधर-उधर नहीं जाने देना चाहती थी। मैं झड़ने के बाद भी उसके ऊपर ही लेटा रहा। मैंने कहीं पढ़ा था कि आदमी को झड़ने के बाद 3-4 मिनट अपना लण्ड चूत में ही डाले रखना चाहिए इससे उसके लण्ड को फिर से नई ताकत मिल जाती है। और चूत में भी दर्द और सूजन नहीं आती।

थोड़ी देर बाद हम उठकर बैठ गए। मैंने कनिका से पूछा- “कैसी लगी पहली चुदाई मेरी जान?”

“ओह बहुत ही मजेदार थी मेरे भैया…”

“अब भैया नहीं सैंया कहो मेरी जान…”

“हाँ हाँ मेरे सैंया, मेरे साजन मैं तो कब की इस अमृत की प्यासी थी। बस तुमने ही देर कर रखी थी…”

“क्या मतलब?”

“ओह्ह… तुम भी कितने लल्लू हो। तुम क्या सोचते हो मुझे कुछ नहीं पता?”

“क्या मतलब?”

“मुझे सब पता है तुम मुझे नहाते हुए और मूतते हुए चुपके-चुपके देखा करते हो और मेरा नाम ले-लेकर मुट्ठ भी मारते हो…”

“ओह… तुम भी ना… एक नंबर की चुदक्कड़ हो…”

“क्यों ना बनूँ आखिर खानदान का असर मुझ पर भी आएगा ही ना…” और उसने मेरी ओर आँख मार दी। और फिर आगे बोली- “पर तुम्हें क्या हुआ मेरे भैया?”

“चुप साली अब भी भैया बोलती है। अब तो मैं दिन में ही तुम्हारा भैया रहूँगा रात में तो मैं तुम्हारा सैंया और तुम मेरी सजनी बनोगी…” और फिर मैंने एक बार उसे अपनी बाहों में भर लिया। उसे भला क्या ऐतराज हो सकता था।

बस यही कहानी है तरुण की। यह कहानी आपको कैसी लगी मुझे जरूर बताएं।

आपका प्रेम गुरू.


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***** THE END समाप्त *****

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Friends,

प्रस्तुत है एक और कहानी "मेरी पत्नी मिन्नी और डोली भाभी_Meri Patni Minni Aur Doli Bhabhi"

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