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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete

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मैंने मिन्नी से पूछा- “कुछ मज़ा आया?”

वो बोली- “बहुत दर्द हो रहा है और तुम पूछ रहे हो की मज़ा आया…”

मैंने कहा- “मेरी कसम है तुम्हें, सच-सच बताओ। क्या तुम्हें जरा सा भी मज़ा नहीं आया?”

उसने शरमाते हुए कहा- “पहले तो बहुत दर्द हो रहा था लेकिन बाद में मुझे थोड़ा थोड़ा सा मज़ा आने लगा था कि तुम रुक गये…”

मैंने कहा- “अभी थोड़ी देर में मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो जायेगा। उसके बाद मैं फिर से तुम्हारी गाण्ड मारूँगा…”

वो बोली- “नहीं, अभी रहने दो…”

तभी डोली भाभी ने पूछा- “क्यों राज़, काम हो गया?”

मैंने कहा- “हाँ, मैंने अपना पानी इसके छेद में निकाल दिया है। अभी थोड़ी ही देर में मैं फिर से अपना पानी निकालने वाला हूँ…”

डोली भाभी ने कहा- “ठीक है, जब दोबारा पानी निकाल देना तो बाहर आ जाना…”

मैंने कहा- “ठीक है…”

मैंने अपना लण्ड मिन्नी की गाण्ड में ही रखा और उसकी चूचियों को मसलता रहा। 15 मिनट में ही मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया तो मैंने उसकी गाण्ड मारनी शुरू कर दी। अब उसके मुँह से केवल हल्की हल्की सी आह ही निकल रही थी। थोड़ी ही देर में उसे मज़ा आने लगा तो वो सिसकारियां लेने लगी।

मैंने पूछा- “अब कैसा लग रहा है?”

वो बोली- “अब अच्छा लग रहा है…”

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी तो थोड़ी ही देर में वो जोर की सिसकारियां भरने लगी। मुझे भी उसकी गाण्ड मारने में खूब मज़ा आ रहा था। बीस मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी और फिर झड़ गया। मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड से बाहर निकाला और उसके बगल में लेट गया।

मैंने उसके होंठों को चूमते हुए पूछा- “कैसा लगा?”

वो बोली- “इस बार कुछ ज्यादा ही मज़ा आया। अच्छा हुआ तुमने मुझे शराब पिला दी। कड़वी तो थी पर अब काफी अच्छा लग रहा है…”

मैंने कहा- “धीरे-धीरे तुम्हें ज्यादा मज़ा आने लगेगा। चाहो तो जब भी मैं तुम्हारे छेद में अपना औज़ार डालूँ, तुम थोड़ी शराब पी लिया करना। तुम्हें ज्यादा मज़ा आयेगा…” मैं मिन्नी के पास से उठकर बाहर चला आया।

डोली भाभी बाहर बैठी थी। नशे और पूरी रात ना सोने के कारण उनकी आँखें लाल और बुझी हुई सी थीं। उन्होंने मुझसे पूछा- “काम हो गया?”

मैंने कहा- “हाँ…”

वो बोली- “मैं गरम पानी से उसकी चूत की सिकायी कर देती हूँ। इससे उसका दर्द कम हो जायेगा…”

मैं चुप रह गया क्योंकी मैंने तो मिन्नी की चूत को अभी तक छुआ ही नहीं था। मैंने तो उसकी गाण्ड मारी थी। मैं मिन्नी के पास चला गया।

डोली भाभी पानी गरम करके ले आयीं। वो बोली- “मैं पानी गरम करके लायी हूँ, अंदर आ जाऊँ…”

मैंने कहा- “आ जाओ…”

मिन्नी बोली- “मैं एकदम नंगी हूँ और तुम दीदी को यहाँ बुला रहे हो। क्या सोचेंगी वो… मैं नंगी और बिस्तर पे सैंडल पहने हुए…”

मैंने कहा- “तो क्या हुआ?”

वो कुछ नहीं बोली। डोली भाभी अंदर आ गयी। उन्होंने मिन्नी से कहा- “लाओ मैं तुम्हारे छेद की सिकायी कर दूँ। इससे तुम्हारा दर्द कम हो जायेगा…”

मिन्नी ने करवट बदल ली तो डोली भाभी ने कहा- “तुमने करवट क्यों बदल ली। अब मैं कैसे तुम्हारे छेद की सिकायी करूँगी?”

उसने अपनी गाण्ड के छेद की तरफ इशारा करते हुए कहा- “इसी में तो इन्होंने अपना औज़ार घुसाया था…”

डोली भाभी के मुँह से निकला- “क्या?”

डोली भाभी की नज़र मिन्नी की गाण्ड पर पड़ी। उसकी गाण्ड खून से लथपथ थी। मैंने अभी तक अपना लण्ड साफ नहीं किया था। मेरा लण्ड भी खून से भीगा हुआ था। डोली भाभी आँखें फाड़े कभी मेरे लण्ड को और कभी मिन्नी की गाण्ड को और कभी मेरे चेहरे को देखने लगी। डोली भाभी ने गरम पानी से मिन्नी के गाण्ड की सिकायी की। उसके बाद उन्होंने मुश्कुराते हुए मिन्नी से कहा- “मिन्नी तुमने एक मैदन तो मार लिया है। अब दूसरा मैदन मारना और बाकी है…”

वो बोली- “दीदी, मैं समझी नहीं…”

डोली भाभी ने मिन्नी की चूत पर हाथ लगाते हुए कहा- “अभी तो तुम्हें इस छेद में भी इसका औज़ार अंदर लेना है…”

मिन्नी को बहुत दर्द हो रहा था। डोली भाभी की बात सुनकर वो गुस्से में आ गयी। उसने अपनी चूत की तरफ इशारा करते हुए कहा- “एक छेद के अंदर इनका औज़ार लेने में ही मेरा इतना बुरा हाल हो गया और आप कह रही हो की अभी इस छेद में भी अंदर लेना है। मैं अब किसी छेद में इनका औज़ार अंदर नहीं लूँगी। मुझे बहुत दर्द होता है। आप खुद ही इनका औज़ार अपने छेद में ले लो…”

डोली भाभी ने मुश्कुराते हुए कहा- “मेरे अंदर लेने से क्या होगा। आखिर तुम्हें भी तो इसका औज़ार अपने इस छेद में अंदर लेना ही पड़ेगा। जैसे एक बार तुमने दर्द को बर्दाश्त कर लिया है उसी तरह से एक बार और दर्द को बर्दाश्त कर लेना…”

मिन्नी ने डोली भाभी की चूत की तरफ इशारा करते हुए कहा- “पहले तुम इनका औज़ार अपने इस छेद में अंदर लेकर दिखाओ। उसके बाद ही मैं इनका औज़ार अपने इस छेद में अंदर लूँगी…”

डोली भाभी मुझे देखने लगी और मैं उनको।

मिन्नी बोली- “क्यों अब क्या हुआ? आप मुझे फँसा रही थी लेकिन मैंने आपको ही फँसा दिया। दिखाओ इनका औज़ार अपने छेद के अंदर लेकर…”

डोली भाभी ने कहा- “अच्छा बाबा, अभी दिखा देती हूँ लेकिन उसके बाद तो तुम मना नहीं करोगी?”

वो बोली- “पहले आप दिखाओ। उसके बाद मैं इनका औज़ार अंदर ले लूँगी भले ही मुझे कितनी भी तकलीफ क्यों ना हो…”

डोली भाभी ने मुझसे कहा- “देवर जी… मिन्नी ऐसे नहीं मानेगी। अब तुम अपना औज़ार मेरे अंदर डाल ही दो…”

मैंने कहा- “मिन्नी के सामने?”

डोली भाभी बोली- “तो क्या हुआ? जब ये मुझे तुम्हारा औज़ार अंदर लेते हुए देखेगी तब ही तो ये तुम्हारा औज़ार अंदर लेगी…” डोली भाभी ने अपने कपड़े उतार दिये और मिन्नी के बगल में लेट गयी। मैं डोली भाभी के पैरों के बीच आ गया तो डोली भाभी ने मिन्नी से कहा- “अब तुम बैठ जाओ और देखो की कैसे मैं इसका औज़ार पूरा का पूरा अंदर लेती हूँ…”

मिन्नी डोली भाभी के बगल में बैठ गयी। मैंने डोली भाभी की चूत में अपना लण्ड घुसाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे मेरा पूरा का पूरा लण्ड डोली भाभी की चूत में समा गया। मिन्नी आँखें फाड़े देखती रही। उसके बाद मैंने डोली भाभी की चुदाई शुरू कर दी। मिन्नी मेरे लण्ड को डोली भाभी की चूत में सटासट अंदर-बाहर होते हुए देखती रही। पाँच मिनट की चुदाई एक बाद डोली भाभी झड़ गयी तो मिन्नी ने कहा- “दीदी, तुम्हारे छेद में से क्या निकल रहा है?”

डोली भाभी ने कहा- “ये मेरी चूत का पानी है। अभी ये कई बार निकलेगा। जब ये तुम्हारी चूत में भी अपना लण्ड घुसाकर तेजी से अंदर-बाहर करेगा तब तुम्हारी चूत में से भी ऐसा ही पानी निकलेगा। चूत से पानी निकलने पर बहुत मज़ा आता है। तुम खुद ही देख लो की मुझे कितना मज़ा आ रहा है…”


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मैंने डोली भाभी को लगभग 25 मिनट तक खूब जमकर चोदा। मिन्नी आँखें फाड़े देखती रही। लण्ड का सारा पानी डोली भाभी की चूत में निकाल देने के बाद मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया।

तो मिन्नी बोली- “तुम्हारे लण्ड पर तो जरा सा भी खून नहीं लगा है?”

मैंने कहा- “खून तो केवल पहली पहली बार घुसाने में ही निकलता है…”

वो कुछ नहीं बोली।

डोली भाभी ने मिन्नी से कहा- “अब तो तैयार हो इसका लण्ड अपनी चूत में लेने के लिये?”

वो बोली- “हाँ, लेकिन दीदी, बहुत दर्द होगा…”

डोली भाभी ने कहा- “पगली, केवल एक ही बार तो दर्द होगा। उसके बाद तो तू खुद ही इससे बार-बार कहेगी की अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दो…”

वो बोली- “भला मैं ऐसा क्यों कहूँगी?”

डोली भाभी ने कहा- “क्योंकी तुझे इसमें मज़ा जो आयेगा…”

मैं डोली भाभी के बगल में लेट गया। मिन्नी मेरे लण्ड को देखती रही। थोड़ी देर बाद वो बोली- “इनका लण्ड अब खड़ा क्यों नहीं हो रहा है…”

डोली भाभी ने कहा- “अभी इसने मुझे चोदा है ना। इसलिये। तू इसके लण्ड को सहलाना शुरू कर दे। थोड़ी ही देर में ये फिर से खड़ा हो जायेगा…”

डोली भाभी की चुदाई देखकर मिन्नी को भी थोड़ा जोश आ गया था। उसने अपना हाथ धीरे से मेरे लण्ड पर रख दिया। थोड़ी देर तक वो मेरे लण्ड को देखती रही। उसके बाद उसने मेरे लण्ड को सहलाना शुरू कर दिया। 15-20 मिनट के बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा। मैंने देखा की उसकी आँखें कुछ गुलाबी सी होने लगी थीं। लण्ड खड़ा होते देख मिन्नी जोश में आ गयी और डोली भाभी से बोली- “दीदी, अब तो इनका लण्ड खड़ा हो गया…”

डोली भाभी बोली- “अब तू लेट जा…”

इतना कहकर डोली भाभी उठकर बैठ गयी और मिन्नी लेट गयी। डोली भाभी ने मुझसे कहा- “तू मेरे साथ जरा बाहर आ…” मैंने डोली भाभी के साथ बाहर आ गया। डोली भाभी ने कहा- “इस बार मिन्नी के ऊपर जरा सा भी रहम मत करना। पूरी ताकत के साथ धक्का लगाते हुए पूरा का पूरा लण्ड अंदर घुसा देना। ज्यादा देर भी मत करना। उसके बाद उसकी किसी दुश्मन की तरह खूब जमकर चुदाई करना। समझ गये?”

मैंने कहा, ठीक है- “मैं ऐसा ही करूँगा…”

डोली भाभी ने कहा- “मैंने कभी तेरे भैया से गाण्ड नहीं मरवाती थी। मेरी गाण्ड कब मारेगा?”

मैंने कहा- “जब तुम कहो…”

वो बोली- “ठीक है, मैं तुझे बता दूँगी। अब चल मेरे साथ कमरे में…”

मैं डोली भाभी के साथ कमरे में आ गया। मिन्नी बेड पर लेटी हुई थी। डोली भाभी ने मुझसे कहा- “अब तू अपने लण्ड पर तेल लगा ले और मिन्नी की चुदाई शुरू कर। मैं इसके पास ही बैठ जाती हूँ…”

डोली भाभी मिन्नी के बगल में बैठ गयी। मैंने अपने लण्ड पर ढेर सारा तेल लगा लिया और मिन्नी के पैरों के बीच आ गया। जैसे ही मैंने अपना लण्ड मिन्नी की चूत पर रखा।

तो डोली भाभी ने कहा- “ऐसे नहीं। मैं बताती हूँ…”

मैंने कहा- “बताओ…”

डोली भाभी ने कहा- “तू अपना हाथ इसकी टाँगों के नीचे से डालकर इसके कंधे को जोर से पकड़ ले। उसके बाद अंदर घुसा…” मैंने मिन्नी की टाँगों के नीचे से हाथ डालकर मिन्नी के कंधों को जोर से पकड़ लिया। डोली भाभी ने कहा- “अब जैसा मैंने तुझे समझाया था। ठीक उसी तरह अंदर घुसा दे…”

मैंने मिन्नी के चूत के मुँह पर अपने लण्ड का सुपाड़ा रख दिया। जैसे ही मैंने धक्का लगाया तो डोली भाभी ने मिन्नी के मुँह को जोर से दबाकर पकड़ लिया। मिन्नी के मुँह से गूँ-गूँ की आवाज़ ही निकल पायी।

डोली भाभी मुझसे बोली- “घुसा दे जल्दी से पूरा का पूरा…”

मैं तो ताकतवर था ही। मैंने अपनी सारी ताकत लगाते हुए फिर से एक धक्का मारा। मिन्नी की चूत से खून की धार निकलने लगी। मेरा लण्ड खून से नहा गया। वो अपने हाथों को जोर-जोर से बेड पर पटकने लगी। उसकी सारी की सारी चूड़ियां टूट गयीं और उसका हाथ लहू लुहान हो गया। मुँह दबा होने की वजह से उसके मुँह से केवल गूँगूँ की आवाज़ ही निकल पा रही थी। मैंने फिर से एक धक्का लगाया। इस धक्के के साथ ही मेरा लण्ड मिन्नी की चूत में सट इंच तक घुस गया। मिन्नी तड़प रही थी। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। बेड की चादर पर भी ढेर सारा खून लग गया था।

भाभी बोली- “जल्दी कर…”

मैंने एक धक्का और मारा तो मेरा लण्ड आठ इंच घुस गया। मैंने गहरी साँस लेते हुए फिर से जोर का धक्का लगाया। इस धक्के के साथ ही मेरा पूरा का पूरा लण्ड मिन्नी की चूत में समा गया।

डोली भाभी बोली- “अपना पूरा लण्ड बाहर निकालकर एक ही झटके में फिर से अंदर कर दे…”

मैंने वैसा ही किया।

डोली भाभी ने कहा- “शाबाश… ठीक इसी तरह से चार-पाँच बार और कर…”

मैंने चार-पाँच बार फिर से वैसा ही किया। मिन्नी तड़प रही थी। उसका सारा बदन पसीने से नहा गया था। उसकी साँसें बहुत तेज चल रही थी और सारा बदन थर-थर काँप रहा था। मैंने मिन्नी की चुदाई शुरू कर दी। डोली भाभी अभी भी उसका मुँह दबाये हुए थी। उसके मुँह से गूँ-गूँ की आवाज़ निकल रही थी। उसकी चूत ने मेरे लण्ड को बुरी तरह से जकड़ रखा था। मेरा लण्ड आसानी से उसकी चूत में अंदर-बाहर नहीं हो पा रहा था। पूरी ताकत के साथ मैं लगभग दस मिनट तक उसकी चुदाई करता रहा। मिन्नी अब कुछ हद तक शाँत हो चुकी थी। डोली भाभी ने अपना हाथ उसके मुँह पर से हटा लिया।

तो मिन्नी सिसक-सिसक कर रोते हुए कहने लगी- “दीदी, आप दोनों ने मिलकर मुझे मार ही डाला। बहुत दर्द हो रहा है…”

डोली भाभी ने कहा- “अब तो पहले जैसा दर्द नहीं है न?”

वो बोली- “नहीं, अब पहले से बहुत कम है…”

डोली भाभी ने कहा- “थोड़ा सब्र कर, अभी बाकी का दर्द भी चला जायेगा…”

मैं तेजी के साथ उसकी चुदाई कर रहा था। अब वो चीख नहीं रही थी, केवल आहें भर रही थी। मैंने उसे पाँच मिनट तक और चोदा तो मिन्नी झड़ गयी। उसकी चूत और मेरा लण्ड एकदम गीला हो गया। अब मेरा लण्ड थोड़ा आसानी से उसकी चूत में अंदर-बाहर होने लगा था। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। मिन्नी ने धीरे-धीरे सिसकारियां भरनी शुरू कर दी।


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डोली भाभी ने पूछा- “अब कैसा लग रहा है?”

वो बोली- “अब कुछ-कुछ मज़ा आ रहा है लेकिन दर्द अभी भी है…”

डोली भाभी ने कहा- “अब इस दर्द को जाने में समय लगेगा। उसके बाद बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा…”

मिन्नी बोली- “समय क्यों लगेगा?”

डोली भाभी ने कहा- “जब ये तुम्हें तीन-चार बार चोद देगा, तब तम्हारी चूत इसके लण्ड के साइज़ की हो जायेगी। उसके बाद ये दर्द अपने आप चला जायेगा…”

मैंने और ज्यादा जोर-जोर के धक्के लगाने शुरू कर दिये थे और उसे तेजी के साथ चोद रहा था। मिन्नी ने भी अब धीरे-धीरे अपने चूतड़ उठाने शुरू कर दिये थे। वो भी अब मस्ती में आ रही थी। पाँच मिनट में ही वो फिर से झड़ गयी। उसने मेरे होंठों को चूम लिया और कहा- “अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा है…”

मैंने उसकी चुदाई जारी रखी।

दो मिनट भी नहीं गुजरे थे कि डोली भाभी ने कहा- “मिन्नी अब तुम इसका लण्ड अपने दूसरे छेद में ले लो…”

वो बोली- “फिर से दर्द होगा…”

डोली भाभी ने कहा- “अब ज्यादा दर्द नहीं होगा क्योंकी तुम इसका लण्ड पहले ही अंदर ले चुकी हो…”

वो बोली- “फिर इनसे कह दो की धीरे-धीरे करेंगे…”

डोली भाभी ने कहा- “ये धीरे-धीरे ही करेगा। मैं हूँ न यहाँ पर। अगर ये बदमाशी करेगा तो मैं इसे बहुत मारूँगी…”

वो बोली- “ठीक है…”

मैंने अपना लण्ड मिन्नी की चूत से बाहर निकाला और उसकी गाण्ड में घुसाने लगा। मेरे लण्ड पर मिन्नी की चूत का ढेर सारा पानी लगा हुआ था। धीरे-धीरे मेरा लण्ड सात इंच तक उसकी गाण्ड में घुस गया। उसके बाद जब मैंने और ज्यादा घुसाने की कोशिश की तो उसे फिर से दर्द होने लगा और वो चीखने लगी।

लेकिन इस बार उसने मुझे रोका नहीं। वो बोली- “अब रहने दो, दर्द हो रहा है…”

डोली भाभी ने कहा- “बस थोड़ा सा ही तो बाकी है। उसे भी अंदर ले लो…” मिन्नी कुछ नहीं बोली।

डोली भाभी ने मुझे आँख मारी तो मैंने जोर का धक्का लगा दिया। मेरा बाकी का लण्ड भी उसकी गाण्ड में समा गया। वो जोर से चीखी तो डोली भाभी ने कहा- “बस हो गया…”

उसके बाद मैंने उसकी गाण्ड मारनी शुरू कर दी। थोड़ी देर चीखने के बाद वो शाँत हो गयी। अब उसे गाण्ड मरवाने में भी मज़ा आने लगा था। लगभग पाँच मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी।

तो डोली भाभी ने कहा- “अब रहने दो…”

मैंने कहा- “अभी तो मेरे लण्ड का पानी ही नहीं नकला है…”

वो बोली- “मैं मना थोड़े ही कर रही हूँ। अब तुम इसकी चूत में अपना लण्ड डालकर इसे चोदो…”

मैंने अपना लण्ड मिन्नी की गाण्ड से निकालकर उसकी चूत में डाल दिया। उसके बाद मैंने पूरी ताकत के साथ जोर-जोर से उसकी चुदाई शुरू कर दी। पाँच मिनट में ही मिन्नी फिर से झड़ गयी। मैं इसके पहले दो बार मिन्नी की गाण्ड मार चुका था और दो बार डोली भाभी को चोद चुका था। इसलिये मेरे लण्ड का पानी निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था। मैं जोर-जोर के धक्के लगाते हुए मिन्नी को चोद रहा था।

वो भी अपने चूतड़ उठाने लगी थी। थोड़ी देर बाद वो बोली- “दीदी, अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। इनसे कह दो की थोड़ा और जोर-जोर से धक्का लगायें…”

डोली भाभी ने मुझसे कहा- “तुमने सुना ये क्या कह रही है?”

मैंने कहा- “हाँ…”

वो बोली- “तो फिर तुम इसका कहा मानो और अपनी ताकत दिखा दो इसे…”

मैंने पूरी ताकत लगाते हुए बहुत ही जोर-जोर के धक्के लगाने शुरू कर दिये।

डोली भाभी ने मिन्नी से पूछा- “अब ठीक है?”

वो बोली- “हाँ… अब मुझे ज्यादा मज़ा आ रहा है…” मिन्नी अब चूतड़ उठा-उठाकर मेरा साथ दे रही थी।

मेरा लण्ड उसकी चूत में पूरा का पूरा सटासट अंदर-बाहर हो रहा था। दस मिनट की चुदाई के बाद मिन्नी फिर से झड़ गयी। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया तो उसने मेरे लण्ड को तुरंत पकड़ लिया और कहने लगी- “बाहर क्यों निकाल रहे हो। अभी मुझे और मज़ा लेना है…”

मैंने कहा- “मैं तुम्हें अभी और मज़ा दूँगा। अब तुम घोड़ी की तरह हो जाओ…”

वो डागी स्टाइल में हो गयी तो मैं उसके पीछे आ गया। मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड में घुसा दिया और उसकी गाण्ड मारने लगा। वो जोश के मारे सिसकारियां भरने लगी। पाँच मिनट तक उसकी गाण्ड मारने के बाद मैं अपना लण्ड उसकी गाण्ड से निकालकर उसकी चूत में डाल दिया और उसकी चुदाई करने लगा। मैं उसकी कमर को पकड़कर उसे बहुत ही बुरी तरह से चोद रहा था। वो भी अपने चूतड़ आगे पीछे करते हुए मेरा साथ देने लगी थी। दस मिनट उसकी चुदाई करने के बाद मैं झड़ गया। मेरे साथ ही साथ मिन्नी भी फिर से झड़ गयी।

मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला तो डोली भाभी ने मिन्नी से कहा- “अब तुम इसके लण्ड को चाट लो…”

वो बोली- “मैं इनके लण्ड को नहीं चाटूँगी। इनका लण्ड गंदा है…”

डोली भाभी ने कहा- “गंदा कहाँ है? इसके लण्ड पर तुम्हारी चूत का और इसके लण्ड का पानी ही तो लगा है। इसे चाटने से प्यार बढ़ता है। चाट लो इसे…”

वो बोली- “मैं नहीं चाटूँगी। मुझे घिन्न आती है…”

डोली भाभी ने कहा- “मैं ही चाट लेती हूँ। फिर आगे से तुझे ही चाटना पड़ेगा…”

वो बोली- “ठीक है। पहले तुम चाटकर दिखाओ, बाद में मैं चाट लूँगी…”

डोली भाभी मेरे लण्ड को चाटने लगी। मिन्नी देख रही थी। मेरे लण्ड पर लगा हुआ थोड़ा सा पानी डोली भाभी ने चाट लिया फिर मिन्नी से बोली- “अब बाकी का तुम चाट लो…”

मिन्नी ने शरमाते हुए मेरे लण्ड को चाटना शुरू कर दिया। उसने मेरे लण्ड पर लगे हुए बाकी के पानी को चाट-चाटकर साफ कर दिया।

डोली भाभी ने मिन्नी से कहा- “अब तुम्हें जब ये फिर से चोदेगा तो चिल्लाओगी तो नहीं?”

वो बोली- “अब क्यों चिल्लाऊँगी? अब तो मुझे बहुत मज़ा आने लगा है…”

डोली भाभी ने कहा- “फिर ठीक है, तुम आराम कर लो। जब तुम्हारा मन करेगा तो इसे बुला लेना। मैं इसके साथ अपने कमरे में जा रही हूँ। मुझे इससे कुछ बात करनी है…”

वो बोली, ठीक है- “बुला लूँगी…”

डोली भाभी बोली- “मैं भी इसके साथ आऊँगी तुम्हारे पास और अपने सामने ही तुम्हारी चुदाई करा दूँगी…” डोली भाभी नंगी ही अपनी सैंडल फर्श पर खट-खट करती हुई बाहर चली गयी तो मैं भी उनके पीछे-पीछे नंगा ही बाहर चला आया।

मैंने डोली भाभी से कहा- “तुमने मुझसे मिन्नी एक सामने ही चुदवा लिया। वो क्या सोचेगी…”

डोली भाभी ने कहा- “उसे कुछ भी नहीं मालूम है। अगर उसे कुछ मालूम होता तो भला वो मुझे चुदवाने को क्यों कहती। चलो अच्छा ही हुआ की अब मुझे और मिन्नी को एक दूसरे के सामने तुमसे चुदवाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। हमारा रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया। मैं मिन्नी से भी इस बारे में बात कर लूँगी…”

मैंने भाभी से पूछा- “गाण्ड कब मरवाओगी?”

वो मुश्कुराते हुए बोली- “क्या मेरी गाण्ड भी फाड़नी है?”

मैंने कहा- “हाँ…”

वो बोली- “कल फाड़ लेना…”

मैंने कहा- “थोड़ा सा आज अंदर ले लो बाकी का कल अंदर ले लेना…”

वो बोली- “जो तेरा जी कहे कर ले। अब तो मैं तेरी बीवी बन गयी हूँ…”

मैं डोली भाभी के बगल में लेटा हुआ उनसे बातें करता रहा और उनकी चूत को सहलाता रहा। वो मुझे तरह-तरह के स्टाइल में चोदना सिखा रही थी और मेरे लण्ड को सहला रही थी। लगभग एक घंटे के बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा। मैंने डोली भाभी से कहा- “मिन्नी ने अभी तक मुझे बुलाया ही नहीं। मैं अब तुम्हारी गाण्ड में ही लण्ड घुसाने की कोशिश करता हूँ…”

डोली भाभी और हम दोनों अभी तक नंगे ही थे। मैंने डोली भाभी से घोड़ी बन जाने को कहा तो वो घोड़ी बन गयी। मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा उनकी गाण्ड के छेद पर रखा तो वो बोली- “तेल तो लगा ले…”

मैंने कहा- “नहीं। ऐसे ही…”

वो बोली- “फिर तो बहुत दर्द होगा…”

मैंने कहा- “होने दो। तुम कोई सत्रह-अटारह साल की थोड़े ही हो…”

वो बोली- “ठीक है, जैसी तेरी मरज़ी…”

मैंने अपना लण्ड उनकी चूत में डाल दिया और उनकी चुदाई शुरू कर दी। पाँच मिनट में ही डोली भाभी झड़ गयी तो मेरा लण्ड गीला हो गया। अब तेल लगने की जरूरत नहीं थी। मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा उनकी गाण्ड के छेद पर रखा और थोड़ा सा जोर लगाया। डोली भाभी के मुँह से जोर की आह निकली और मेरे लण्ड का सुपाड़ा उनकी गाण्ड में घुस गया।


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मैंने थोड़ा जोर और लगाया तो वो तड़प उठी और बोली- “जरा धीरे से…”

मैंने फिर से जोर लगाया तो उनके मुँह से चीख निकल गयी। मेरा लण्ड डोली भाभी की गाण्ड में अब तक चार इंच घुस चुका था। मैंने और ज्यादा अंदर घुसाने की कोशिश नहीं की। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिये।

दो मिनट में ही डोली भाभी का दर्द जाता रहा तो वो बोली- “थोड़ा और अंदर कर दे…”

मैंने फिर से थोड़ा जोर लगाया तो वो फिर से चीखी और मेरा लण्ड उनकी गाण्ड में पाँच इंच तक घुस गया। तभी मिन्नी आ गयी। उसने कपड़े नहीं पहने थे। वो पहले जैसी ही सिर्फ अपनी हाई-हील की सैंडल पहने हुए एकदम नंगी थी।

उसने हम दोनों को देखा तो बोली- “दीदी, तुम भी मज़ा ले रही हो?”

डोली भाभी ने कहा- “ये तेरा बड़ी देर से इंतज़ार कर रहा था लेकिन तूने इसे बुलाया ही नहीं। इसे जोश आ गया और इसने मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसाना शुरू कर दिया। मैं इसे मना नहीं कर पायी…”

वो बोली- “मुझे भी फिर से चुदवाना है…”

डोली भाभी ने कहा- “तो आ जा…”

मिन्नी ने कहा- “लेकिन ये तो आपको चोदने जा रहे हैं?”

डोली भाभी ने कहा- “मेरा क्या है, मैं तो कभी भी चुदवा लूँगी। पहले तू चुदवा ले। तेरा चुदवाना ज्यादा जरूरी है। मैं तो बहुत मज़ा ले चुकी हूँ…”

मिन्नी डोली भाभी के बगल में ही घोड़ी की तरह बन गयी। मैंने अपना लण्ड डोली भाभी की गाण्ड से बाहर निकालकर मिन्नी की गाण्ड में घुसाना शुरू कर दिया। वो दर्द के मारे आहें भरने लगी। धीरे-धीरे मेरा पूरा का पूरा लण्ड मिन्नी की गाण्ड में घुस गया तो मैंने उसकी गाण्ड मारनी शुरू कर दी।

वो बोली- “आगे के छेद में घुसाकर चोदो। मुझे उसमें ज्यादा मज़ा आता है…”

मैंने कहा- “थोड़ी देर पीछे के छेद की चुदाई कर लूँ फिर आगे के छेद में भी चोदूँगा…”

वो बोली- “ठीक है, जैसी तुम्हारी मरज़ी…”

मैं मिन्नी की गाण्ड मारता रहा। डोली भाभी मिन्नी से कहने लगी- “तू तो जानती है की राज़ के भैया का स्वर्गवास हुए बहुत दिन हो चुके हैं। मैंने बहुत दिनों से चुदवाया नहीं था और मेरी इच्छा भी मर चुकी थी। लेकिन आज मैंने तेरी खुशी के लिये तेरे कहने पर इससे चुदवा लिया। इससे चुदवाने के बाद मेरी चूत और गाण्ड की आग फिर से भड़क गयी है। मैं जानती हूँ की ये बहुत ही गलत बात है लेकिन मैं अब इससे चुदवाये बिना नहीं रह सकती। अगर किसी को ये पता चल गया तो मेरी बड़ी बदनामी होगी। अब तू ही बता की मैं क्या करूँ? मैं तो अब मर जाना चाहती हूँ…”

मिन्नी बोली- “दीदी, तुम ऐसा क्यों कह रही हो? तुम इनसे जी भरकर चुदवाओ और खूब मज़ा लो। मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है। अगर मैं तुम्हें कभी मना करूँ तो तुम मुझे ही मार डालना। ये बात किसी को नहीं पता चलेगी…”

डोली भाभी ने कहा- “फिर तू मेरी कसम खाकर कह दे की तू कभी भी किसी से नहीं कहेगी…”

मिन्नी ने अपना हाथ पीछे करके मेरा लण्ड पकड़ लिया और बोली- “मैं तुम्हारी कसम क्यों खाऊँ? मैं अपने पति का लण्ड पकड़कर कसम खाती हूँ की मैं कभी भी किसी से कुछ भी नहीं कहूँगी। अब तो आपको मेरी बात पर विश्वास हो गया…”

डोली भाभी ने कहा- “मुझे तुझ पर पूरा विश्वास है…”

वो बोली- “अब इनसे कह दो की मेरी चूत में अपना लण्ड डालकर मेरी चुदाई करें। मुझे गाण्ड मरवाने में ज्यादा मज़ा नहीं आता है…”

डोली भाभी ने मुझसे कहा- “सुन रहा है ना तू की मिन्नी क्या कह रही है। अब इसकी इच्छा पूरी कर…”

मैंने अपना लण्ड मिन्नी की चूत में घुसा दिया और उसकी चुदाई करने लगा। दो मिनट में ही वो एकदम मस्त हो गयी। उसने पूरी मस्ती के साथ मुझसे चुदवाना शुरू कर दिया। वो तेजी के साथ अपने चूतड़ आगे पीछे करते हुए मेरा साथ दे रही थी। मैं भी पूरे जोश और ताकत के साथ उसे चोदता रहा। मिन्नी की चुदाई करते हुए मुझे लगभग तीस मिनट गुजर चुके थे। वो अब तक तीन बार झड़ चुकी थी लेकिन मैं झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।

मिन्नी बोली- “दीदी, मैं थक गयी हूँ…”

डोली भाभी ने कहा- “क्यों, मज़ा नहीं आ रहा है क्या?”

वो बोली- “मज़ा तो बहुत आ रहा है लेकिन अभी मेरी चुदवाने की आदत नहीं है ना…”

डोली भाभी बोली- “फिर मैं क्या करूँ। जब राज़ झड़ जायेगा तब ही तो तुमहारी चुदाई बंद करेगा…”

वो बोली- “मुझे थोड़ा सा आराम कर लेने दो। मैं बाद में चुदवा लूँगी…”

डोली भाभी ने कहा- “जब लण्ड खड़ा हो तो चुदाई नहीं बंद की जाती। इससे आदमी के सेहत पर बुरा असर पड़ता है…”

मिन्नी बोली- “इनसे कह दो की अब रहने दें। बाद में चोद लेंगे। तब तक तुम ही इनसे चुदवा लो…”

डोली भाभी ने कहा- “अच्छा बाबा… मैं ही चुदवा लेती हूँ…”

मैंने अपना लण्ड मिन्नी की चूत से निकालकर डोली भाभी की गाण्ड में घुसाना शुरू कर दिया। मेरा लण्ड मिन्नी की चूत के पानी से पहले से ही भीगा हुआ था। धीरे-धीरे मेरा लण्ड डोली भाभी की गाण्ड में पाँच इंच तक घुस गया। मैंने धक्के लगाने शुरू कर दिये। थोड़ी देर बाद जब मैंने देखा की डोली भाभी मस्ती में आ गयी हैं तो मैंने जोर का धक्का लगा दिया। इस धक्के के साथ ही मेरा लण्ड भाभी की गाण्ड को चीरता हुआ सात इंच तक अंदर घुसा गया। डोली भाभी के मुँह से जोर की चीख निकली।

तो मिन्नी ने कहा- “दीदी, तुम क्यों चीख रही हो। तुम तो चुदवाने की आदी हो…”

डोली भाभी ने कहा- “मैंने आज तक अपनी गाण्ड नहीं मरवायी थी। तुम तो जानती ही हो की इसका लण्ड बहुत लंबा और मोटा है। इसलिये मुझे भी दर्द हो रहा है और मैं चीख रही हूँ। बस अभी थोड़ी ही देर में मेरा दर्द कम हो जायेगा। फिर मुझे भी तेरी तरह खूब मज़ा आने लगेगा…”

धीरे-धीरे डोली भाभी फिर से मस्ती में आ गयी। मैंने पूरी ताकत के साथ फिर से जोर का धक्का मारा। वो फिर से चीखी और मेरा लण्ड आठ इंच तक घुस गया। मैंने फिर एक धक्का मारा तो वो बुरी तरह से चीखने लगी और मेरा पूरा का पूरा लण्ड डोली भाभी की गाण्ड में समा गया। मैंने तेजी के साथ धक्के लगाने शुरू कर दिये। थोड़ी ही देर में डोली भाभी शाँत हो गयी और उन्हें मज़ा आने लगा।

तभी मिन्नी बोली- “दीदी, अब मैं तैयार हूँ। इनसे कह दो की अब मुझे चोद दें…”

डोली भाभी ने कहा- “बार-बार मुझसे क्यों कहती है। तू खुद ही इससे कह दे। अब मैं इससे कुछ नहीं कहूँगी…”

मिन्नी ने मेरा लण्ड पकड़ लिया और बोली- “अब तुम मुझे चोद दो…”

मैं खुश हो गया। मैंने अपना लण्ड डोली भाभी की गाण्ड से निकालकर मिन्नी की चूत में डाल दिया और उसकी चुदाई शुरू कर दी। उसने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया। पंद्रह मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ गया। मिन्नी भी मेरे साथ ही साथ झड़ गयी। जैसे ही मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाला तो उसने मेरा लण्ड चाटना शुरू कर दिया। मैं बहुत खुश हो गया।

डोली भाभी ने मिन्नी से कहा- “अब घिन्न नहीं आ रही है?”

वो बोली- “बिल्कुल नहीं, अब तो मुझे भी खूब मज़ा आने लगा है…”

हम सब नंगे ही सो गये। रात के 7:00 बजे मिन्नी मेरा लण्ड सहलाने लगी। मैं जाग गया तो वो बोली- “एक बार फिर से चोद दो…”

मैंने कहा- “क्यों श्रीमती जी, अब चुदवाने में मज़ा आने लगा है?”

वो बोली- “हाँ… अब तो मैं चाहती हूँ की तुम मुझे सारा दिन चोदते रहो…” उसने और कुछ कहे बिना ही मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

तभी डोली भाभी भी उठ गयी। डोली भाभी ने मुश्कुराते हुए कहा- “मिन्नी, तू इसका लण्ड क्यों चूस रही है?”

वो बोली- “मुझे चुदवाना है…”


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वो बोली- “मुझे चुदवाना है…”

डोली भाभी ने मिन्नी से मज़ाक किया- “पहले तो बहुत चिल्ला रही थी अब क्या हुआ?”

वो बोली- “पहले मुझे मलूम नहीं था की इसमें इतना मज़ा आता है…”

थोड़ी ही देर में मेरा लण्ड खड़ा हो गया। मैंने मिन्नी की चुदाई शुरू कर दी। उसने पूरी मस्ती के साथ चुदवाया। मैंने भी उसे पूरे जोश के साथ लगभग पैंतालिस मिनट तक चोदा। वो इस बार की चुदाई के दौरान चार बार झड़ चुकी थी। उसके बाद डोली भाभी और मिन्नी खाना बनाने चले गयी। मैं टीवी देखने लगा। लगभग डेढ़ घंटे गुजर गये तो मिन्नी किचन से बाहर आयी। उसने मुझसे कुछ कहे बिना ही मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

मैंने पूछा- “अब क्या हुआ?”

वो बोली- “चुदवाना है…”

मैंने कहा- “पहले मुझे खाना खाकर थोड़ा आराम कर लेने दो। बहुत थक गया हूँ…”

वो बोली- “बाद में खा लेना, पहले तुम मुझे एक बार और चोद दो। मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है…”

तभी डोली भाभी आ गयी। उन्होंने मिन्नी से कहा- “सुबह से ही ये हम दोनों को कई बार चोद चुका है। इसे खाना खाकर थोड़ा आराम कर लेने दे, फिर सारी रात खूब जमकर चुदवाना…”

वो बोली- “दीदी… मुझसे रहा नहीं जा रहा है। मेरा मन अजीब सा हो रहा है…”

डोली भाभी ने मज़ाक करते हुए कहा- “अगर तू इतना ही तड़प रही है तो चल मेरे साथ किचन में। मैं तेरी चूत में बेलन घुसेड़ देती हूँ…”

मिन्नी बोली- “फिर घुसेड़ दो ना। मैं आपको कुछ भी नहीं कहूँगी। शादी के पहले मैं अच्छी भली थी। शादी के बाद इन्होंने मेरी चुदाई करके मेरी चूत और गाण्ड में आग सी भर दी है। अब आप ही बताओ की मैं क्या करूँ?”

डोली भाभी ने कहा- “थोड़ा सब्र करना सीख। आखिर ये भी तो आदमी है। थक गया है बेचारा…”

वो बोली- “एक बार ये मुझे और चोद दें। फिर मैं कभी भी इनसे चुदवाने की ज़िद्द नहीं करूँगी। जब भी मुझे जोश आयेगा मैं इनका लण्ड मुँह में लेकर चूसूँगी। उसके बाद ये मुझे चोदना चाहेंगे तो चोदेंगे…”

मैंने कहा- “ठीक है। आ जाओ मेरे पास…” मैं सोफे पर बैठा था। मिन्नी के चूसने से मेरा लण्ड खड़ा हो ही चुका था। मैंने उससे कहा- “अब तुम खुद ही मेरे लण्ड को अपनी चूत में घुसेड़ लो और धक्के लगाओ…”

वो तुरंत ही मेरी जाँघों पर बैठ गयी और मेरे लण्ड को अपनी चूत के अंदर घुसेड़ लिया। उसके बाद उसने धक्के लगाने शुरू कर दिये। पाँच मिनट में ही वो हाँफने लगी और बोली- “मुझे इस तरह मज़ा नहीं आ रहा है। जब तुम खूब जोर-जोर के धक्के लगाते हुए मुझे चोदते हो। तब ही मुझे मज़ा आता है। चोद दो ना मुझे…”

मैंने कहा- “अच्छा बाबा, अब तुम मेरे सामने घोड़ी बन जाओ…”

वो तुरंत ही मेरे सामने घोड़ी बन गयी। उसकी चूत मेरी तरफ थी। मैं थोड़ा गुस्से में था। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया और उसकी कमर को जोर से पकड़ लिया। उसके बाद मैंने बड़ी बेरहमी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी।

डोली भाभी कभी मुझे और कभी मिन्नी को देख रही थी। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था की मैं मिन्नी को इतनी बुरी तरह से भी चोद सकता हूँ। मिन्नी भी बहुत सेक्सी निकली। मैं उसे बहुत ही बुरी तरह से चोद रहा था लेकिन उसे तो इस चुदाई में और ज्यादा मज़ा आ रहा था। वो अपने चूतड़ आगे पीछे करते हुए पूरी मस्ती के साथ चुदवा रही थी। मैंने उसे लग्भग पैंतालीस मिनट तक खूब जमकर चोदा। इस बार की चुदाई के दौरान मिन्नी पाँच बार झड़ गयी थी। डोली भाभी और मैं उसे देखकर दंग रह गये। मिन्नी ने मेरे लण्ड को चाटकर साफ किया और फिर बाथरूम चली गयी।

डोली भाभी ने मुझसे कहा- “तुमने उसे उसे इतनी बुरी तरह से चोदा। फिर भी उसे मज़ा आ रहा था। वो तो मुझसे भी ज्यादा सेक्सी है…”

मैंने कहा- “अभी वो नयी है इसलिये और उसे ज्यादा जोश आ रहा है। अभी तो उसने ज्यादा बार चुदवाया ही कहाँ है। केवल कुछ दिन आप मुझसे मत चुदवाओ। मुझे केवल मिन्नी की चुदाई करने दो। मैं उसे इतनी ज्यादा बार और इतनी बुरी तरह से चोदूँगा की उसकी चूत और गाण्ड की आग ठंडी हो जायेगी। वो मुझसे रो-रो कर कहेगी की मुझे अब मत चोदो…”

डोली भाभी ने कहा- “ठीक है…”

तभी मिन्नी बथरूम से वापस आ गयी और बोली- “देवर-भाभी क्या बातें कर रहे हो?”

डोली भाभी ने मिन्नी से कहा- “मैं इसे समझा रही थी कि ये कुछ दिनों तक मेरी चुदाई ना केरे। केवल खूब जमकर तुमहारी चुदाई ही करे…”

मिन्नी बोली- “आपने तो मेरे मुँह की बात छीन ली। मैं भी यही चाहती थी…”

डोली भाभी ने कहा- “मैं समझ सकती हूँ क्योंकी अभी तुम नयी-नयी हो और तुम्हारे अंदर जोश का ज्वालामुखी फूट रहा है। ये तुम्हारे चूत के ज्वालामुखी को अपने लण्ड के पानी से बुझा देगा। उसके बाद मैं भी चुदवाना शुरू कर दूँगी…”

मिन्नी बोली- “दीदी, तुम एकदम ठीक कह रही हो…”

अगले चार दिनों तक भाभी तड़पती रही। उनका चेहरा एकदम उदास हो गया था। मैं केवल मिन्नी की ही चुदाई करता रहा। मिन्नी को चुदवाने में ही ज्यादा मज़ा आता था। मैंने मिन्नी की खूब जमकर चुदाई की। उसने भी पूरी मस्ती के साथ मेरा साथ दिया और खूब जमकर चुदवाया। मैंने इन चार दिनों में उसे लगभग तीस बार बहुत ही बुरी तरह से चोदा था। उसकी चूत का मुँह एकदम चौड़ा हो चुका था। अब उसका जोश कुछ ठंडा पड़ चुका था। अब तो वो कभी-कभी चुदवाने से इनकार भी करने लगी थी। मिन्नी की बिदायी भी होने वाली थी। उसे एक महीने के लिये मायके जाना था।

पाँच दिन गुजर जाने के बाद वो मायके चली गयी। मायके जाते वक्त वो मुझसे लिपटकर बहुत रोयी।

मैंने पूछा- “क्या हुआ?”

उसने कहा- “एक महीने तक मैं बिना चुदवाये कैसे रहूँगी?”

मैंने कहा- “तुम्हें इतना सब्र तो करना ही पड़ेगा। सभी औरतों को शादी के बाद मायके तो जाना ही पड़ता है…”

वो मायके चली गयी। उसके जाने के बाद डोली भाभी मुझसे लिपट गयी और फूट-फूट कर रोने लगी।

मैंने पूछा- “क्या हुआ?”

तो वो बोली- “तुम्हारे भैया का स्वर्गवास हो जाने के बाद मेरा जोश एकदम ठंडा हो गया था। मैं तुम्हारे साथ अकेली ही रहने लगी थी लेकिन मैंने कभी भी तुम्हें बुरी नज़र से नहीं देखा। मैं आराम से रहने लगी थी। तुम्हारा लण्ड देखने के बाद मुझे जोश आ गया और मैंने तुमसे चुदवा लिया। मिन्नी को गाण्ड मरवाते हुये देखकर मैंने तुमसे गाण्ड भी मरवा ली। उसमें भी मुझे बहुत मज़ा आया। तुमने मेरी चुदाई करके और मेरी गाण्ड मारकर मेरे सारे बदन में आग लगा दी है। पाँच दिनों से तुमने मुझे चोदा नहीं और ना ही मेरी गाण्ड मारी। मैंने ये पाँच दिन कैसे गुजारे हैं। मैं ही जानती हूँ। मिन्नी तो अब एक महीने के लिये मायके चली गयी है। अब तुम मेरी चूत और गाण्ड की आग को पूरी तरह से बुझा दो…”

मैंने कहा- “भाभी, मैंने तो इनकार नहीं किया है…”

वो बोली- “तुमने आफिस से शादी के लिये सात दिनों की छुट्टी ली थी। तुम सात दिनों की छुट्टी और ले लो। मैं भी अपने आफिस से छुट्टी ले लेती हूँ। फिर मुझे सात दिनों तक खूब जमकर चोदो। मुझे उसी तरह से चोदना जैसे कि उस दिन तुमने गुस्से में मिन्नी को चोदा था…”

मैंने कहा- “तुम जैसा कहोगी। मैं तुम्हें वैसे ही चोदूँगा। मैं तुम्हें पूरी तरह से संतुष्ट कर दूँगा…”

डोली भाभी ने सारे कपड़े उतार दिये और एकदम नंगी हो गयी। उन्होंने मेरा लण्ड चूसना शुरू कर दिया। दो मिनट में ही मेर लण्ड खड़ा हो गया तो मैंने ठीक उसी तरह से डोली भाभी को चोदना शुरू किया जैसे मैंने मिन्नी को गुस्से में चोदा था। उस तरह की चुदाई से डोली भाभी एकदम मस्त हो गयी। सात दिनों तक हम दोनों आफिस नहीं गये।

मैंने इन सात दिनों में सारा दिन और सारी रात डोली भाभी की खूब जमकर चुदाई की। उसके बाद मिन्नी के आने तक मैंने उन्हें खूब चोदा। डोली भाभी की चूत की आग भी कुछ हद तक बुझ चुकी थी। मिन्नी के वापस आ जaने के बाद मैं उन दोनों की चुदाई करने लगा। अब वो दोनों ही मुझसे चुदवाकर पूरी तरह से खुश हैं और मैं भी।


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***** THE END समाप्त *****

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दस लाख का सवाल_Das Lakh Ka Sawaal

लेखक - अज्ञात

सुबह से ही बास का मूड बिगड़ा हुआ था। वजह मालूम नहीं पड़ रही थी। मैं वर्षा पाटिल, मुम्बई में एक कम्पनी में सेक्रेटरी का काम करती हूँ। मेरे बास, राहुल अरोड़ा, एक पन्जाबी परिवार से हैं जिनका काम गवनर्मेन्ट के ठेके लेना है। टेन्डर के द्वारा सरकार परचेज़ करती है और मेरे बास आफिसरों को पैसे खिला पिलाकर अपना काम निकलवाते हैं। उनका दिल्ली बेस होना उनके काम में बड़ी सहायता करता है। ज्यादातर कान्ट्रैक्ट दिल्ली से पास होते हैं और दिल्ली में ही आफिसरों को खुश करने के लिये शराब, कबाब और शबाब का मज़ा लूटने देते हैं।

“सर, क्या बात है आज आप बड़े परेशान दिखाई पड़ रहे हैं?” मैंने केबिन में घुसते ही पूछ लिया।

“हां वर्षा, आज कुछ ज्यादा ही परेशान हूँ…” बास ने बड़े गम्भीर होते हुए कहा- “किसी ने हमारी कम्पनी की शिकायत दिल्ली में कर दी है…”

“किस चीज़ की शिकयात, बास?” मैंने चेयर पर बैठते हुए कहा।

“एक ठेके के बारे में, वर्षा। और उसी सिलसिले में एक बड़ा सरकारी आफिसर माल चेक करने आ रहा है…” बास परेशानी की हालत में बोल रहे थे- “अब अगर हमारा माल रिजेक्ट कर दिया तो बड़ा नुकसान होगा कम्पनी को…”

“हां… लेकिन आफिसर को पटा क्यों नहीं लेते हैं सर। आप तो उन लोगों को पटाने में माहिर भी है…” मैंने हँसते हुए कहा।

“नहीं वर्षा। ये आफिसर बड़ा रंगीन मिज़ाज़ है। और लोगों को तो बज़ार की रेडीमेड चीज़ों से पटा लेता हूँ। लेकिन ये आफिसर… मालूम नहीं… क्यों घरेलू चीज़ें ही पसंद करता है…” बास परेशानी की हालत में बोले।

“घरेलू चीज़ें? मतलब?” मुझे कुछ समझ में नहीं आया।

“घरेलू यानी घरेलू… अरे बड़ा रंगीन मिज़ाज़ है। उसे बज़ार की औरतें नहीं बल्कि घरेलू औरतें चाहिये। अब यह सब कहां से लाऊँ मैं…” बास ने समझाते हुए कहा।

अब समझ में आया। बाज़ार की औरतें नहीं… यानि वेश्या नहीं। घर की औरतें चाहिये हम-बिस्तर होने के लिये। यानि पूरा रंगीन मिज़ाज़ था आफिसर। यूं तो बास ऐसी बातें मुझसे नहीं करता था लेकिन आज परेशानी में वह खुलकर बोल पड़ा। फिर हम दोनों सोच में डूब गये इस समस्या को सुलझाने के लिये।

मुझे अपनी सहेली की याद आ गयी। रोहिणी, एक खूबसूरत एयर होस्टेस है। हम दोनों एक साल पहले तक साथ-साथ रहते थे। वह इन चीज़ों में माहिर थी। उसका कहना था कि ज़िन्दगी बड़ी छोटी है। अपनी खूबसुरती का इस्तमाल करो और रूपया बनाओ। वो अपने जिश्म का फायदा उठाकर बड़े-बड़े लोगों से मिलती और एक-दो महिने में लाखों कमाकर दूसरे को ढुँढ़ने लगती। उसका कहना था कि इन 7-8 सालों में इतना कमा लो कि बाकी ज़िन्दगी बगैर कोई काम करे गुज़ार सको। वो हमेशा मुझे भी यही सलाह देती थी। मुझे हमेशा कहती थी- “वर्षा तू तो मुझसे भी खूबसूरत है। कहां सेक्रेटरी की नौकरी में पड़ी है। मेरी लाईन पर चल, लाखों कमायेगी। फिर 7-8 साल बाद हम दोनों किसी छोटे शहर में एक छोटे से मकान में अपनी बाकी की ज़िन्दगी ऐश से गुजारेंगे…”

लेकिन मैं अपने बाय-र्फैंड के साथ खुश थी और थोड़ी बहुत फ्लर्टिंग अपने बास के साथ भी कर लेती थी। जिससे बास भी थोड़ा बहुत मुझसे खुला हुआ था। यह सोचते-सोचते मैंने अपने बास से कहा- “अगर कोई लड़की मिले भी तो वो कोई मामूली नहीं बल्कि कोई एक खूबसूरत ही नहीं बल्कि बला की खूबसूरत चाहिये। उसे क्या मिलेगा जो ये काम करे…”

बास ने समझाते हुए कहा- “वर्षा, यह कान्ट्रैक्ट जो की 10 करोड़ का है। अगर कैन्सल हो जायेगा तो कम्पनी को 2-3 करोड़ का नुकसान जरूर हो जायेगा। मैं तो इससे बचने के लिये 10 करोड़ का 1% कमिशन 10 लाख तक देने को तैयार हूँ…”

“10 लाख रुपये…” मेरा मुँह ये कहते हुए खुला ही रह गया। यह रकम कोई छोटी नहीं होती किसी भी लड़की के लिये। कोई भी तैयार हो जाये। तभी मेरे मन में और एक विचार आने लगा। और यह रकम मुझे मिल जाये तो… फिर मैंने बास से कहा- “सर, मैं एक लड़की को जानती हूँ…”

बास ने उत्सुकता से कहा- “कौन है वो… कोई चालू लड़की नहीं चहिये…”

मैंने कहा- “वो एक एयर-होस्टेस है…”

बास ने फिर पूछा- “क्या वो तैयार हो जायेगी?”

“कोशिश करती हूँ…” मैंने जवाब दिया।

“सोच लो वर्षा। अगर अभी तैयार हो गयी और टाईम पर ना बोल दी तो कहीं लेने के देने न पड़ जायें। फिर तुम जानती हो कि एक बार कान्ट्रैक्ट कैन्सल हुआ तो कितना बड़ा नुकसान हो जायेगा…” बास ने जोर देते हुए कहा।

फिर न जाने मेरे मुँह से कैसे निकल गया- “सर, आप परेशान नहीं होयें। मैं मैंनेज कर लूँगी…”

बास मुझे देखते ही रह गये।

मैंने अपने घर पहुंच कर अपनी फ्रेंन्ड, रोहिणी, के मोबाईल पर फोन किया- “क्या हाल है रोहिणी? मुम्बई में हो या कहीं और…” मैंने फोने लगाते ही पूछा।

“वर्षा। व्हाट ए ग्रेट सर्प्राइज़… मुम्बई से ही बोल रही हूँ यार। बता क्या हाल-चाल है…” रोहिणी ने पूछा।

“बस कुछ नहीं… तू आजकल किसके साथ गुलछर्रे उड़ा रही है?” मैंने हँसते हुए कहा।

“कहां यार… अभी तो कोई मुर्गा ही ढुँढ़ रही हूँ? तू भी क्या अभी सेक्रेटरी बनी हुई है या मेरे जैसी बन गयी…” रोहिणी बोली।

“तेरी तरह बन जाऊँ? चल जा हट… लेकिन तेरे लिये जरूर एक काम है… खूब पैसे मिलेंगे…”

“कोई मुर्गा मिला है क्या?” रोहिणी ने पूछा।

तब मैंने उसे सारी बात बतायी। और उसे साथ देने के लिये 50-50 का आफर किया। जिसे वो मान गयी। शुक्रवार की दोपहर आफिसर, मिस्टर लोहाणे, दिल्ली से आया। एक होटल में एक सुईट की व्यवस्था कर दी गयी उसके लिये। आफिस में आकर माल को देखा। तमाम तरह के प्रश्न करने लगा। मेरा बास परेशान हो गया। उसने मेरी तरफ उम्मीद की नज़रों से देखा। मैंने अब अपनी पोजीशन सम्भाल ली। अपने हसीन जिश्म का फायदा उठाने लगी। आफिसर के नज़दीक आकर उसके हर बात का जवाब देने लगी। लो-कट ड्रेस में से मेरे झलकते हुश्न ने उसके प्रश्नों को कम कर दिया। उसकी दिलचस्पी अब सवालों में नहीं बल्कि मेरे नज़दीक आने में होने लगी। मैं भी एक घरेलू टाईप की लड़की का रोल अदा करते हुए उससे दूर रहने की कोशिश करती और फिर थोड़ी देर में अनजान बनती हुई उसके एकदम करीब आ जाती।


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आफिसर एकदम बेचैन हो उठा। फिर मेरे बास से कहा- “राहुल… माल तो तुम्हारा ठीक है लेकिन तीन-चार फोरमैलिटीज़ करनी पड़ेगी…”

यानी तीर एकदम निशाने पर बैठा। अब उसे पिघलने में ज्यादा देर नहीं थी।

मेरे बास ने कहा- “सर, आपकी हर जरूरत पूरी की जायेगी। आप 1-2 फोरमैलिटीज़ अभी पूरी कर लिजिये बाकी शाम के समय मैं होटल आकर पूरी कर देता हूँ…”

“ठीक है… वैसे तुम्हरी सेक्रेटरी बड़ी इंटेलिजेंट है। तुम्हारा बिज़नेस बहुत ही ग्रो करेगा…” आफिसर मेरे जिश्म को घूरता हुआ बोला। अब बास के लिये समस्या खड़ी हो गयी। आफिसर मिस्टर लोहाणे का इरादा समझ में आ रहा था।

बास राहुल ने मुझसे कहा- “अब क्या करें?”

मैंने हँसते हुए जवाब दिया- “नो प्राब्लम बास, मैं सब सम्भाल लूंगी…” आखिर 10 लाख का सवाल था।

शाम के बजाय आठ बज़े हम लोग यानी मैं और मेरा बास राहुल होटल में पहुंचे। उसके पहले मैंने रोहिणी से बात कर ली थी। वो रात के करीबन 10:00 बज़े वहां पहुँचने वाली थी। उस शाम के लिये मैंने भरपूर तैयारी कर ली। अपने बदन को अच्छी तरह से वैक्सिंग करके और भरपूर मेकअप करके अपने ऊपर तीन-चार ड्रेस की रीहर्सल करने के बाद शार्ट स्कर्ट और हाई हील सैंडल्स के ऊपर बस्टीयर और खुली-जैकेट डालकर मैं एकदम तैयार थी, 10 लाख कमाने के लिये, जिसमें 5 लाख मेरे लिये होंगे।

और मेरा बास स्काच की 3-4 वैराइटी लिये तैयार था। जैसे ही हम सुइट के अन्दर घुसे आफिसर मिस्टर लोहाणे मुझे देखते ही पंक्चर हो गया। उसकी आंखें मेरे जिश्म से चिपक गयी। मेरी गोरी-गोरी चिकनी जांघें, लम्बी टांगें उसके बदन में तूफान ला रही थीं। टाईट स्कर्ट से चिपके हुए मेरे चूतड़ों से उसकी नज़रें चिपकी हुई थी। खुली-जैकेट से झलकते हुए मेरे बस्टीयर में दबे मेरे मम्मे दबोचने के लिये उसे आमन्त्रण दे रहे थे। फेशियल से तरोताज़ा मेरे गाल और हल्के रोज़ रंग की लिपिस्टक से रंगे हुए मेरे नाज़ुक होंठ उसे गुलाब की पंखुड़ियां लग रही थीं। वह मेरा यह रूप देखकर अपने सूखे हुए होंठों को गीला करते हुए बोला- “मिस्टर राहुल क्या यही सेक्रेटरी दोपहर में तुम्हारी आफिस में थी?”

बास खुश होते हुए बोला- “पहले आफिस टाईम था अभी ये रिलैक्स टाईम है। चेन्ज तो होना ही है मिस्टर लोहाणे…”

लोहाणे ने मुझे अपने हाथों से खींचकर एक चेयर पर मुझे बैठाया और सामने वाली चेयर पर खुद बैठ गया। मेरे बास को अपनी चेयर खुद ही खींचकर बैठना पड़ा। मेरी खूबसूरती का जादू चल चुका था। तभी बास ने बात की शुरूआत की- “तो मिस्टर लोहाणे, हमारा माल कैसा लगा?” बास का मतलब आफिस के माल से था।

मगर लोहाणे इसे मेरे बारे में समझा। उसने कहा- “मिस्टर राहुल… बहुत ही खूबसूरत… मानो स्वर्ग से एक अपसरा अभी-अभी उतरी है…”

मैंने शरमा कर अपनी नज़रें झुका ली।

लोहाणे का मतलब समझते हुए बास ने कहा- “मेरा मतलब कान्ट्रैक्ट के माल से था, मिस्टर लोहाणे…”

लोहाणे ने मेरे जिश्म से अपनी नज़र को न हटाते हुए कहा- “छोड़ो उस माल को यार, बात अभी की करो। वो वाला भी परफेक्ट और ये वाला भी…”

ये सुनकर बास झूम उठा।

मैंने भी खड़े होते हुए कहा- “रियली… तब तो हमें इस बात की पार्टी रात भर मनानी चाहिये…”

ये सुनकर बास ने एक फोन होटल रिसेप्शन पर मिलाया और सोडा और कुछ स्नैक्स का आडर्र दे दिया। हम लोग बातें करने लगे। थोड़ी देर में ही वेटर ने आकर आडर्र वाली सब चीज़ें लाकर टेबल पर रख दीं। मैंने रूम में रखे फ्रिज़ में से आईस निकालकर तीन ग्लास में स्काच, सोडा और आईस डालकर पार्टी के शुरू होने का एलान कर दिया। चीयर्स करते हुए बास बोला- “आज के इस कान्टैर्क्ट की सफलता के लिये चीयर्स…”

लोहाणे ने कहा- “मिस वर्षा के इस बेपनाह हुश्न के लिये चीयर्स…”

और मैंने कहा- “आज की इस खुबसूरत पार्टी के लिये चीयर्स…”

और हम सब अपनी ग्लासों को टकरा के पीने लगे। आधे घन्टे तक हम अपनी सीट पर बैठे जाम से जाम टकराते रहे। लोहाणे मेरे सामने बैठा मेरे जिश्म का स्वाद अपनी नज़रों से ले रहा था। मेरे शार्ट-स्कर्ट से झांकती मेरी मांसल जांघों को जी भरके देख रहा था। मैंने भी गौर किया कि लोहाणे के पैंट में एक उभार पैदा हो रहा था। उसकी पैंट चैन के पास से टाईट हो रही थी। अपने मचलते हुए खिलौने को लोहाणे बीच-बीच में एडजस्ट भी कर रहा था। लेकिन उसकी कोशिश असफल हो रही थी। जितना एडजस्ट करता उतना ही उसका खिलौना और मचल रहा था।

मैं एक पेग के बाद जब दूसरा आधा पेग ले रही थी तब तक बास और लोहाणे 3-3 पेग पी चुके थे। मैं इन्तज़ार कर रही थी अपनी फ्रेंन्ड रोहिणी का। वह आये और हमारा काम हो जाये। मैंने कभी भी एक पेग से ज्यादा नहीं पिया था। इसलिये स्काच का नशा पूरा चढ़ा हुआ था। जबकी बास और लोहाणे स्काच के नशे में अब बहकने लगे। उनकी आपस में कही जा रही बातों में तीन-चार गालियां साथ-साथ आ रही थीं। मैं उनके ग्लास को खाली होते देखकर दूसरी बोतल से उनके ग्लास रिफिल करने लगी।

तब लोहाणे ने खड़े होकर मुझे अपनी एक बांह से पकड़ लिया और कहा- “जानेमन तुम तो कुछ भी नहीं ले रही हो। लो ये पीस खाओ… बड़ा ही टेस्टी है…” और यह कहकर मेरे मुँह में स्नैक्स का एक पीस ठूँसने लगा। फिर स्काच के नशे में वापस बोला- “अरे केचप लगाना तो भूल ही गया। इसे केचप के साथ खाओ…” यह कहकर मेरे मुँह में ठूँसे हुए स्नैक्स के ऊपर सीधे केचप की बोतल से केचप लगाने लगा। और वह केचप सारा का सारा मेरी जैकेट और बस्टीयर पर जा गिरा।

लोहाणे शर्म से झेंप पड़ा और कहने लगा- “ओह, आई एम वेरी सारी… वेरी सारी…” और अपनी रुमाल निकालकर साफ करने की कोशिश करने लगा- “प्लीज़… प्लीज़ मुझे साफ करने दिजिये…”

मैंने कहा- “ओह… कोई बात नहीं। मैं खुद साफ कर लूंगी…”

एक खूबसूरत लड़की के कपड़ों पर ऐसा हो जाये तो स्वाभाविक है की कोई भी आदमी परेशान हो ही जाता है। मैं टेबल पर पड़े पेपर नैपकिन्स से केचप को साफ करने लगी। लेकिन वो कहाँ से साफ होता। मैं थोड़ा अपसेट हो गयी। और मेरा बास भी थोड़ा अपसेट हो चुका था।


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लेकिन लोहाणे अपनी सूटकेस खोलने लगा। एक पार्सल को निकालते हुए कहा- “मैं अपनी फ्रेंन्ड के लिये कुछ कपड़े लाया था। शायद आपके काम आ जाये। प्लीज़ देख लीजिये…”

मैंने भी कोई और चारा नहीं देखकर उससे वह पैकेट ले लिया और बाथरूम में घुस गयी। वाशबेसिन में अपने कपड़े साफ किये और पैकेट को खोलकर कपड़े देखने लगी। ये कपड़े कहां थे? ये तो नाईटीज़ थीं… वह भी मिनी नाईटीज़। अब मैं अपने कपड़े साफ करने के चक्कर में काफ़ी गिली कर चुकी थी। और कोई चारा नहीं था मेरे पास। तीन नाईटीज़ में से मैंने एक नाईटी चूज़ की। बाकी दोनों नाईटीज़ पहने या नहीं कोई मतलब ही नहीं था। केवल पहनना था छुपाने के लिये कुछ भी नहीं था। यह वाली नाईटी टाज़र्न स्टाईल की क्रोस स्टाइल का टाप और स्कर्ट था जिसे पहनने के बाद टाप को मुझे वापस खोलना पड़ा।

क्योंकी मेरी ब्रा के स्ट्रैप्स अलग से दिखाई दे रहे थे। जब मैंने अपनी ब्रा उतारकर वह टाप पहना तो मेरे निपल्स उस टाप से झलकने लगे। मेरे मम्मे तो साफ-साफ दिखाई पड़ ही रहे थे। लेकिन कोई उपाय नहीं बचा था और स्काच के नशे ने मेरी हिम्मत भी बढ़ा दी। फिर मेरी फ्रेंन्ड भी थोड़ी देर में आने वली थी।

मैं जैसे ही बाथरूम से बाहर आयी तो लोहाणे और बास का मुँह खुला का खुला रह गया। दोनों की नज़रें मेरी नाईटी को चीरती हुई मेरे दिखाई पड़ रहे जादुई जिश्म को घूर रही थी। उनके मुँह से आहहह… एक साथ निकल पड़ी। लोहाणे का एक हाथ अपनी पैंट पर फौरन जा पड़ा, अपने हाथियार को एडजस्ट करने के लिये। मैं आगे बढ़ी मेरी नज़रें झुकी हुई थी। दोनों मेरे डगमगाते हुए एक-एक कदम पर अपनी आहें भर रहे थे। मेरा बास तो अब एकदम धम्म से अपनी चेयर पर बैठ गया।

लोहाणे ने अपनी ग्लास सम्भाले मेरे ग्लास को मेरे हाथों में थमा दिया और लम्बे-लम्बे घूँट भरने लगा। तभी मेरे डोर को नाक करने की आवाज़ आयी। मेरी जान में जान आ गयी। लोहाणे ने आगे बढ़कर दरवाज़ा खोला और सामने पाया एक और बला की हसीन लड़की को। वह उसे देखकर कुछ हैरान हो गया। उसने अन्दर की ओर देखा।

तभी मैंने कहा- “हाय रोहिणी वेलकम…”

रोहिणी ने भी कहा- “हाय एवरीबडी…”

लोहाणे बोला- “अच्छा यह आपकी परिचित है…”

तब मैंने कहा- “हां, इस पार्टी को दिलखुश बनाने के लिये ही मैंने अपनी फ्रेंन्ड रोहिणी को इनवाईट किया है…”

फिर रोहिणी से सबका परिचय कराया- “रोहिणी, मीट हिम… अवर गेस्ट… मिस्टर लोहाणे और आप हैं मेरे बास मिस्टर राहुल…”

रोहिणी ने दोनों से हाथ मिलाया और मैंने उसके लिये एक पेग बनाया। उसके लिये ही क्यों बल्कि हमारे तीनों के पेग वापस फिल करके चीयर्स किया। रोहिणी अपने साथ म्युज़िक सिस्टम लायी थी। उसे साईड टेबल पर रखकर उसे साकेट में लगाकर आन भी कर दिया। फिर अपना ओवरकोट उतारने लगी। पूरी तैयारी के साथ आयी थी। ओवरकोट उतारने के साथ रूम में अब दो-दो बिज़लियां चमकने लगीं। एक बिज़ली मेरे रूप में चमक ही रही थी।

अब दूसरी बिज़ली दोनों नशे में चूर मर्दों को झटका देने के लिये तैयार थी। रोहिणी चोली नुमा टाप, लाँग स्कर्ट और बहुत ही हाई हील्स के सैंडल्स पहने हुए थी। उसका लाँग स्कर्ट एक साईड से कमर तक कटा था जिससे उसका जिश्म एक साईड से पुरा नंगा दिखाई पड़ रहा था। केवल डोरी से ही वह ढका हुआ था। उसने देर न करते हुए म्युज़िक सिस्टम का वाल्युम बढ़ा दिया और रूम की केवल एक लाईट को चालू रहने दिया। साथ ही वो डांस करने लगी। लोहाणे बेड पर बैठ गया और बास ने बीच में जगह बनाने के लिये चेयर्स को साईड में कर दिया और खुद एक चेयर पर बैठ गया। मेरे लिये कोई चेयर नहीं होने पर मैं बेड पर लोहाणे के पास बैठ गयी। अब हम तीनों नशे में चूर थे जबकी रोहिणी शायद पहले से ही पीकर आयी थी। उसने अपनी ग्लास पूरी खतम करके उसे बेड के नीचे ठेल दिया।

रोहिणी का डांस काबिले तारीफ था। उसकी हर अदा उन दोनों मर्दों की ही सांसें ऊपर-नीचे नहीं कर रही थी बल्कि मुझे भी मस्त कर रही थी। लोहाणे ने मुझे अपनी बाहों में भींच लिया जिसका मैंने कोई विरोध नहीं किया। लम्बा लेटकर वह रोहिणी के डांस का मज़ा लेने लगा। मैं भी उसके पहलू में आधी लेटी हुई डांस का आनंद उठा रही थी। बास धीरे-धीरे चुस्की लेते हुए रोहिणी की हर थिरकते कदम का गर्दन नचाकर जवाब दे रहा था।


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तभी लोहाणे मेरी जांघों को अपने हाथ से सहलाने लगा। जिससे मेरे बदन में एक गुदगुदी होने लगी। मैं और उसके बदन से चिपक गयी। उसका लण्ड पैंट में से मेरे चूतड़ को दस्तक दे रहा था। मैं उसके कड़ेपन का एहसस अपने चूतड़ों पर कर रही थी। रोहिणी ने अब बास की चेयर के सामने आकर अपनी चोली में छिपे मम्मों को उसके चेहरे के सामने नचाने लगी। साईड ऐन्गल से हमें वह दिखाई पड़ रहा था। बास की सांसें और ऊपर-नीचे होने लगी। रोहिणी ने बास का हाथ पकड़ा और अपने गालों से लगाया, फिर अपने मम्मों के ऊपर फिसलाया और उसकी गोद में बैठकर घूम गयी। इधर लोहाणे का हाथ मेरी जांघों से बढ़कर मेरे पेट को सहलाता हुआ मेरे मम्मों को नाईटी के ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया। मेरे मम्मों को धीरे-धीरे सहलाने लगा और मेरे चेहरे को ऊपर करके मेरे होठों को चूम लिया। मेरी आंखें उसके चुम्बन से बन्द होने लगीं। उसने मेरी दोनों कलियों का रस पीना शुरू कर दिया।

तभी रोहिणी ने मेरे बास की शर्ट उतार दी और अपनी चोली भी। अब उसके बड़े साईज़ के मम्मे बास के सीने से टकरा रहे थे। फिर वहां से निकलकर वह हमारे सामने आ गयी और लोहाणे के कान को अपने दांतों से हल्के-हल्के काटने लगी। मेरे दोनों हाथों को पकड़कर मेरी दोनों हथेलिओं को अपने मम्मों पर रख लिया। उफ्फ़… क्या मन्ज़र था।

उसके मम्मों की नाज़ुक त्वचा पे मेरी कोमल हथेलियां फिसल रही थीं। रोहिणी ने अपना हाथ बढ़ाकर लोहाणे की पैंट पर रख दिया और उसके मतवाले लण्ड को पैंट के ऊपर से छेड़ने लगी। लोहाणे के मुँह से सिस्कारी निकल पड़ी। लोहाणे अपने दोनों हाथों को मेरी हथेली के ऊपर रखकर रोहिणी के मम्मों को जोर-जोर से रगड़ने लगा। रोहिणी ने एक झटके में उसकी पैंट की ज़िप्पर को नीचे खींच दिया और अन्डवेर्यर में से उसके लण्ड को बाहर खींच लिया।

उसका लम्बा मोटा लण्ड उछलता हुआ बाहर आ गया। मेरी सांसें ऊपर-नीचे होने लगीं। लण्ड की फोर-स्किन को रोहिणी ने आगे पीछे किया और मुझे वहां से उठाकर अपने साथ खींचती हुई फिर से मेरे साथ नाचने लगी। लोहाणे तो उसके हाथ के सहलाने से पागल हो गया। और उसने अपने बाकी कपड़े उतारकर बेड पर नंगा हो गया। रोहिणी ने अपने मम्मों को मेरे मम्मों से रगड़ना चालू किया फिर मेरी नाईटी के दोनों कपड़े उतार फेंके। अब उसने अपना स्कर्ट निकाला और मेरे नंगे बदन से अपना नंगा बदन चिपका लिया। अब हम दोनों सिर्फ अपने हाई हील सैंडल्स पहने हुए बिल्कुल नंगी नाच रही थीं। मेरा चूतड़ लोहाणे के सामने और रोहिणी का चूतड़ बास के सामने था।

दोनों के चूतड़ थिरक रहे थे। दोनों मर्द अपने होशो-हवास खो रहे थे। फिर मैंने रोहिणी के निपलों से अपने निपलों को रगड़ना चालू कर दिया। हम दोनों घुम घुम कर रगड़ रहे थे।

तब रोहिणी ने मुझे कारपेट पर लेटाकर मेरे होठों को अपने होठों में दबाते हुए अपनी जांघों को मेरी जांघों के ऊपर उछालने लगी। मानो वो मुझे चोद रही हो। दोनों मर्द इस हरकत पर तड़प रहे थे। तड़पते क्यों नहीं। उनकी जगह रोहिणी जो ले रही थी। बास से अब नहीं रहा गया। उसने उठकर अपनी पैंट और अन्डरवेयर खोली और अपना लण्ड रोहिणी के गालों से सहलाना शुरू कर दिया।

यह देखकर लोहाणे भी उठा और सीधे रोहिणी के चूतड़ को चुमने लगा। रोहिणी ने थोड़ा ऊपर खिसकते हुए बास का लण्ड अपने मुँह में ले लिया तो मेरी चूत अब लोहाणे के एकदम सामने थी। मैंने रोहिणी के नीचे पड़े-पड़े उसके मम्मों को चाटना शुरू कर दिया और लोहाणे ने मेरी चूत को। पूरा कमरा सिस्कारियों से भर उठा। तेज आवाज के म्युज़िक के बीच भी हम चारों की सिस्करियां अच्छी तरह से सुनायी पड़ रही थीं। रोहिणी ने मेरे ऊपर से उठकर लोहाणे को जमीन पर लेटा दिया और चढ़ गयी उसके लण्ड पर। लण्ड झटके से उसकी रसभरी चूत में घुस पड़ा। फिर वह उछल-उछलकर धक्के मारने लगी। लोहाणे अपने दोनों हाथों से उसके मम्मों को दबोच रहा था, सहला रहा था, उसके निपलों को पिंच कर रहा था।

इधर बास मुझे जमीन पर लेटे देखकर मेरी चूतड़ को अपने हाथ से उठाया और अपना लण्ड मेरी जांघों में फंसा दिया और मेरी चूत का निशाना लगाकर अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया। दो-तीन धक्कों में उसका पूरा लण्ड मेरी चूत के अंदर था। अब अपने चूतड़ उठाकर मेरी चूत को रोंदने लगा।

मेरे मुँह से आह… आह… निकलने लगी।

अब थोड़ी-थोड़ी देर हम चारों पोजीशन बदल-बदल कर चुदाई रहे थे। कभी लोहाणे का लण्ड मेरी चूत में होता तो कभी बास का लण्ड। इसी तरह रोहिणी का हाल था। लोहाणे चोदने में पुरा एक्स्पर्ट था। उसका लण्ड भी मजबूती से हम दोनों की चूत को मज़ा दे रहा था। बास भी कमजोर नहीं था लेकिन लोहाणे से थोड़ा कम ही था। लोहाणे ने अपने लण्ड को कभी भी खाली बैठने नहीं दिया। हम दोनों की चूत को चोदने के अलावा हमारे मुँह का उपयोग भी बड़े शानदार तरिके से कर रहा था। अपने लण्ड को कभी हमारी चूत में तो कभी हमारे मुँह में देकर अपने लण्ड का बराबर उपयोग कर रहा था। चारों ने रात भर इस चुदाई के खेल को जारी रखते हुए खुब मज़ा लिया।

सुबह तक हम चारों की हालत ढीली हो चुकी थी। लेकिन कम्पनी का कान्ट्रैक्ट पक्का हो चुका था। लोहाणे भी खुश और बास भी खुश… इधर मैं भी खुश… तीन महिने बाद मुझे 10 लाख मिले जिसमें से मैंने 5 लाख रोहिणी को दे दिये।


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***** THE END समाप्त *****

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