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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete

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मेरी पत्नी मिन्नी और डोली भाभी

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लेख़क - अज्ञात (Unknown)

हम लोग गाँव के रहने वाले हैं। हमारा गाँव शहर से 44 की॰मी॰ दूर है। पास के ही एक शहर में भैया की शादी हो गयी। डोली भाभी बहुत ही अच्छी थी और खूबसूरत भी। भैया की उम्र 24 साल की थी। वो उम्र में भैया से एक साल छोटी थी। मैं डोली भाभी से उम्र में पाँच साल छोटा था। डोली भाभी शहर की पढ़ी-लिखी और फैशनेबल युवती थीं।

शादी के बाद भैया की नौकरी एक बड़ी कंपनी में लग गयी। वो पटना में ही रहने लगे। वो खुद ही घर का सारा काम करते थे और खाना भी बनाते थे। जब उन्हें खाना बनाने में और घर का काम करने में दिक्कत होने लगी तो उन्होंने डोली भाभी को भी पटना बुला लिया। मम्मी तो थी नहीं, केवल पापा ही थे। कुछ दिनों के बाद पापा का भी स्वर्गवास हो गया तो भैया ने मुझे अपने पास ही रहने के लिये बुला लिया। मैं उनके पास पटना आ गया और वहीं रहकर पढ़ायी करने लगा।

भाभी पटना में रहकर बिल्कुल शहरी - माडर्न हो गयी थीं। वो खुद को कई किट्टी पाटिर्यों और दूसरे सामाजिक सम्मेलनों में खुद को व्यस्त रखती थीं।

मैंने बी॰ए॰ तक की पढ़ायी पूरी की और फिर नौकरी की तलाश में लग गया। अभी मुझे नौकरी तलाश करते हुए एक साल ही गुजरा था की भैया का रोड एक्सीडेंट में स्वर्गवास हो गया। उस समय मेरी उम्र 21 साल की हो चुकी थी। अब तक मैं एकदम हट्टा-कट्टा नौजवान हो गया था। मैं बहुत ही ताकतवर भी था क्योंकी गाँव में कुश्ती भी लड़ता था। मुझे भैया की जगह पर नौकरी मिल गयी। अब घर पर मेरे और डोली भाभी के अलावा कोई नहीं था। वो मुझसे बहुत प्यार करती थी। मैं भी उनकी पूरी देखभाल करता था और वो भी मेरा बहुत ख्याल रखती थी।

डोली भाभी को भी एक कंपनी में सेक्रेटरी की नौकरी मिल गयी थी और साथ ही उनको ही घर का सारा कम करना पड़ता था इसलिये मैं भी उनके काम में हाथ बंटा देता था। वो मुझसे बार-बार शादी करने के लिये कहती थी। एक दिन डोली भाभी ने शादी के लिये मुझ पर ज्यादा दबाव डाला तो मैंने शादी के लिये हाँ कर दी। डोली भाभी की एक सहेली थीं जो की उनके मायके के शहर में ही रहती थी। उनकी एक छोटी बहन थी जिसका नाम मिन्नी था। डोली भाभी ने मिन्नी के साथ मेरी शादी की बात चलायी।

बात पक्की करने से पहले डोली भाभी ने मुझे मिन्नी की फोटो दिखाकर मुझसे पूछा- कैसी है?

मैं मिन्नी की फोटो देखकर दंग रह गया। मैं समझता था की गरीब लड़की है, ज्यादा खूबसूरत नहीं होगी लेकिन वो तो बहुत ही खूबसूरत थी। मैंने हाँ कर दी। मिन्नी की उम्र अभी 18 साल की ही थी। खैर शादी पक्की हो गयी। मिन्नी के मम्मी पापा बहुत गरीब थे। एक महीने के बाद ही हमारी शादी एक मंदिर में हो गयी। शादी हो जाने के बाद दोपहर को डोली भाभी मुझे और मिन्नी को लेकर पटना आ गयी। डोली भाभी ने मिन्नी को नये अच्छे से कपड़े वगैरह में फिर तैयार किया और पास के एक ब्यूटी पालर्र में उसका श्रृंगार इत्यादि भी करवाया। घर पर कुछ पड़ोस के लोग बहू देखने आये। जिसने भी मिन्नी को देखा, उसकी बहुत तारीफ की। शाम तक सब लोग अपने-अपने घर चले गये। रात के 8:00 बज रहे थे।

डोली भाभी ने मुझसे कहा- “आज मैं बहुत थक गयी हूँ। तुम जाकर होटल से खाना ले आओ…”

मैंने कहा- “ठीक है…” मैंने झोला उठाया और खाना लाने के लिये चल पड़ा। मेरा एक दोस्त था - विजय। उसका एक होटल था। मैं सीधा विजय के पास गया।

विजय बोला- “आज इधर कैसे?”

मैंने उससे सारी बात बता दी। वो मेरी शादी की बात सुनकर बहुत खुश हो गया। हम दोनों कुछ देर तक गपशप करते रहे। हम दोनों ने एक-दो पैग भी पिये। मुझे चिंता नहीं थी क्योंकी डोली भाभी इस मामले में काफी खुले विचारों की थीं और खुद भी कई बार ड्रिंक करती थीं।

विजय ने मुझसे कहा- “तुझे मज़ा लेना हो तो मैं एक तरीका बताता हूँ…”

मैंने कहा- “बताओ…”

वो बोला- “तुम मिन्नी की चूत को कुछ दिन तक हाथ भी मत लगाना। तुम केवल उसकी गाण्ड मारना और अपने आपको काबू में रखना। कुछ दिन तक उसकी गाण्ड मारने के बाद तुम उसकी चुदाई करना…”

मैंने सोचा की विजय ठीक ही कह रहा है। मैंने उससे कहा- “ठीक है, मैं ऐसा ही करूँगा…”

उसने मेरे लिये सबसे अच्छा खाना जो की उसके होटल में बनता था, पैक करवा दिया। मैं खाना लेकर घर वापस आ गया। हम तीनों ने खाना खाया। डोली भाभी ने मिन्नी को मेरे रूम में पहुँचा दिया। उसके बाद उन्होंने मुझे अपने रूम में बुलाया। मैंने देखा कि उनके पलंग के पास स्टूल पर एक शराब की बोतल खुली रखी थी और पास ही ग्लास में शराब भरी थी। मैंने पहले कभी भाभी के पास पूरी बोतल नहीं देखी थी। कभी अगर उन्हें पीने का मूड होता तो मुझसे कहकर पौव्वा या अद्धा ही मंगवाती थीं और वो भी हम दोनों शेयर करते थे क्योंकी हम दोनों को ही ज्यादा पीने की आदत नहीं थी।


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मैंने कहा- “भाभी… ये क्या पूरी बोतल? आप अकेले मत पी जाना। आपको कंट्रोल नहीं रहता…”

वो बोलीं- “तू मेरी फिक्र मत कर। आज खुशी का दिन है। पर मैं ज्यादा नहीं पीयूँगी। खैर तू ज़रूरी बात सुन…” और कहने लगी- “मिन्नी अभी छोटी है। उसके साथ बहुत आराम से करना…”

मैंने मज़ाक किया- “मुझे करना क्या है?”

वो बोली- “शैतान कहीं का… तू तो ऐसे कह रहा है की जैसे कुछ जानता ही नहीं…”

मैंने कहा- “मुझे कुछ नहीं मालूम है…”

डोली भाभी ने मुश्कुराते हुए कहा- “पहले उससे प्यार की दो बातें करना। उसके बाद अपने औज़ार पर ढेर सारा तेल लगा लेना। फिर अपना औज़ार उसके छेद में बहुत ही धीरे-धीरे घुसा देना। जल्दी मत करना नहीं तो वो बहुत चिल्लायेगी। वो अभी 18 साल की ही है। समझ गये न…”

मैंने कहा- “हाँ, मैं समझ गया…”

डोली भाभी ने कहा- “अब जा अपने कमरे में…”

मैं अपने कमरे में आ गया। मिन्नी बेड पर बैठी थी, मैं भी उसके बगल में बैठ गया। मैंने उससे पूछा- “मैं तुम्हें पसंद हूँ?”

उसने अपना सिर हाँ में हिला दिया।

मैंने कहा- “ऐसे नहीं, बोलकर बताओ…”

उसने शरमाते हुए कहा- “हाँ…”

मैंने पूछा- “कहाँ तक पढ़ी हो?”

वो बोली- “केवल इंटर तक…”

मैंने कहा- “मेरी डोली भाभी ने मुझे कुछ सिखाया है। क्या तुम्हें भी किसी ने कुछ सिखाया है?”

वो कुछ नहीं बोली तो मैंने कहा- “अगर तुम कुछ नहीं बोलोगी तो मैं बाहर चला जाऊँगा…”

इतना कहकर मैं खड़ा हो गया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।

मैं उसकी बगल में बैठ गया। मैंने कहा- “अब बताओ…”

वो कहने लगी- “मेरे घर पर केवल मेरे मम्मी-पापा ही हैं। उन्होंने तो मुझसे कुछ भी नहीं कहा लेकिन मेरे पड़ोस में रहने वाली भाभी ने मुझसे कहा था की तुम्हारे पति जब अपना औज़ार तुम्हारे छेद में अंदर घुसायेंगे, तब बहुत दर्द होगा। उस दर्द को बर्दाश्त करने की कोशिश करना। ज्यादा चीखना और चिल्लाना मत नहीं तो बड़ी बदनामी होगी। अपने पति से कह देना की अपने औज़ार पर ढेर सारा तेल लगा लेंगे। मैंने आज तक औज़ार नहीं देखा है। ये औज़ार क्या होता है?”

मैंने कहा- “तुमने आदमियों को पेशाब करते समय उनका डंडा देखा है?”

उसने कहा- “हाँ, हमारे मोहल्ले में तो सारे मर्द कभी भी कहीं भी पेशाब करने लगते हैं। आते जाते समय मैंने कई बार देखा है। लेकिन उसे तो लण्ड कहते हैं…”

मैंने कहा- “उसी को औज़ार भी कहते हैं…”

वो बोली- “मैंने तो देखा है की किसी-किसी का बहुत बड़ा होता है…”

मैंने कहा- “जैसे आदमी कई तरह के होते हैं। ठीक उसी तरह उनका औज़ार भी कई तरह का होता है। मेरा औज़ार देखोगी?”

वो बोली- “मुझे शरम आती है…”

मैंने कहा- “अब तो तुम्हें हमेशा ही मेरा औज़ार देखना पड़ेगा। उसे हाथ में भी पकड़ना पड़ेगा। देखोगी मेरा औज़ार…”

वो बोली- “ठीक है, दिखा दो…”

मैं पहले से ही जोश में था। मैंने अपनी शर्ट और बनियान उतार दी। उसके बाद मैंने अपनी पैंट और चड्ढी भी उतार दी। मेरा 9” लंबा और खूब मोटा लण्ड फनफनाता हुआ बाहर आ गया। मैंने अपना लण्ड उसके चेहरे के सामने कर दिया और कहा- “देख लो मेरा औज़ार…”

उसने तिरछी निगाहों से मेरे लण्ड को देखा और शरमाते हुए बोली- “तुम्हारा तो बहुत बड़ा है…” इतना कहकर उसने अपने हाथों से अपने चेहरे को ढक लिया।


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***** *****To be contd... .... ...

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मैंने उसका हाथ पकड़कर उसके चेहरे पर से हटा दिया और कहा- “शरमाती क्यों हो। जी भरकर देख लो इसे। अब तो सारी ज़िंदगी तुम्हें मेरा औज़ार देखना भी है और उसे अपने छेद के अंदर भी लेना है। मैंने तो अपने कपड़े उतार दिये हैं अब तुम भी अपने कपड़े उतार दो…”

वो बोली- “मैं अपने कपड़े कैसे उतार सकती हूँ, मुझे शरम आती है…”

मैंने कहा- “अगर तुम अपने कपड़े नहीं उतारोगी तो मैं अपना औज़ार तुम्हारे छेद में कैसे घुसाऊँगा?”

वो कुछ नहीं बोली।

मैंने मिन्नी के कपड़े उतारने शुरू कर दिये तो वो शरमाने लगी। धीरे-धीरे मैंने उसे एकदम नंगा कर दिया। सिर्फ मैंने उसके पैरों में से उसके सैंडल नहीं उतारे। डोली भाभी काफी फैशनेबल थीं और अपने काम पर और घर में भी ज्यादातर समय ऊँची एंड़ी के सैंडल पहने रहती थी और मुझे औरतों के सुंदर पैरों में ऊँची एंड़ी के सैंडल देखकर अजीब सी उत्तेजना मिलती थी। किश्मत से मिन्नी को भी भाभी ने ऊँची एंड़ी के सैंडल पहना दिये थे। मैं उसके संगमरमर जैसे खूबसूरत बदन को देखकर दंग रह गया। उसकी चूचियां अभी बहुत बड़ी नहीं थीं। मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसकी चूचियों को सहलाते हुए उसे होंठों को चूमने लगा। मैंने देखा की उसकी चूत पर अभी बहुत हल्के-हल्के बाल ही उगे थे और उसकी चूत एकदम गुलाबी सी दिख रही थी। मैंने उसकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया।

तो वो बोली- “मुझे गुदगुदी हो रही है…”

मैंने पूछा- “अच्छा नहीं लग रहा है?”

वो बोली- “बहुत अच्छा लग रहा है…”

मैंने उसके निप्पलों को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया तो वो सिसकारियां भरने लगी। उसके बाद मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। उसे गुदगुदी होने लगी।

उसने मेरा हाथ हटा दिया।

तो मैंने पूछा- “क्या हुआ?”

वो बोली- “बहुत जोर की गुदगुदी हो रही है…”

मैंने कहा- “अच्छा नहीं लग रहा है क्या?”

वो बोली- “अच्छा तो लग रहा है…”

मैंने कहा- “तुमने मेरा हाथ क्यों हटाया। अगर तुम ऐसा ही करोगी तो मैं बाहर चला जाऊँगा…”

वो बोली- “ठीक है, मैं अब तुम्हें कुछ भी करने से मना नहीं करूँगी…”

मैंने कहा- “फिर ठीक है…” मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया।

थोड़ी ही देर में उसकी चूत गीली होने लगी। वो जोर-जोर से सिसकारियां भरने लगी। मैंने एक अँगुली उसकी चूत के अंदर डाल दी तो उसने जोर की सिसकरी ली। मेरा लण्ड अब तक बहुत ज्यादा टाइट हो चुका था। थोड़ी देर तक मैं उसकी चूत में अपनी अँगुली अंदर-बाहर करता रहा तो वो झड़ने लगी।

झड़ते समय उसने मुझे जोर से पकड़ लिया और बोली- “तुम्हारे अँगुली करने से मुझे तो पेशाब हो रहा है…”

मैंने कहा- “ये पेशाब नहीं है। जोश में आने के बाद चूत से पानी निकलता है…”

वो कुछ नहीं बोली। मेरी अँगुली उसकी चूत के पानी से एकदम गीली हो चुकी थी। थोड़ी ही देर में वो पूरे जोश में आ गयी।

तो मैंने कहा- “अब मैं अपना औज़ार तुम्हारे छेद में घुसाऊँगा। तुम पेट के बल लेट जाओ…”

वो पेट के बल लेट गयी। मैंने देखा की उसकी गाण्ड भी एकदम गोरी थी। उसकी गाण्ड का छेद बहुत ही हल्के भूरे रंग का था। मैं अपनी अँगुली उसकी गाण्ड के छेद पर फिराने लगा। उसके बाद मैंने एक झटके से अपनी एक अँगुली उसकी गाण्ड में घुसा दी। वो जोर से चीखी।

मैंने कहा- “अगर तुम ऐसे चीखोगी तो डोली भाभी आ जायेगी…”

वो बोली- “दर्द हो रहा है…”

मैंने कहा- “दर्द तो होगा ही। अभी तो मैं अपना लण्ड तुमहारी गाण्ड में घुसाऊँगा…” थोड़ी देर तक मैं अपनी अँगुली उसकी गाण्ड में अंदर-बाहर करता रहा।

वो बोली- “मेरा छेद तो बहुत ही छोटा है और तुम्हारा औज़ार बहुत बड़ा। अंदर कैसे घुसेगा?”

मैंने कहा- “जैसे और औरतों के अंदर घुसता है…”

वो बोली- “तब तो मुझे बहुत दर्द होगा…”

मैंने कहा- “इसीलिये तो तुम्हारे पड़ोस की भाभी ने तुमसे कहा था की दर्द को बर्दाश्त करना, ज्यादा चीखना चिल्लाना मत…”

वो बोली- “मैं समझ गयी…”

मैं उसके ऊपर आ गया।

तो वो बोली- “तेल नहीं लगाओगे?”

मैंने कहा- “लगाऊँगा…”

मैंने अपने लण्ड पर ढेर सारा तेल लगा लिया। उसके बाद मैंने उसकी गाण्ड के छेद पर अपने लण्ड का सुपाड़ा रखा और उससे कहा- “अब तुम अपना मुँह जोर से दबा लो जिससे तुम्हारे मुँह से चीख ना निकले…”

उसने कहा- “ठीक है, दबा लेती हूँ लेकिन बहुत धीरे-धीरे घुसाना…”

मैंने कहा- “हाँ, मैं बहुत धीरे ही घुसाऊँगा…”

उसने अपने हाथों से अपने मुँह को दबा लिया। मैंने थोड़ा सा ही जोर लगाया था कि वो जोर से चीखी। मेरे लण्ड का सुपाड़ा भी अभी उसकी गाण्ड में नहीं घुस पाया था। वो रोने लगी और बोली- “मुझे छोड़ दो, बहुत दर्द हो रहा है…”

मैंने कहा- “दर्द तो होगा ही। तुम अपना मुँह जोर से दबा लो…”

उसने अपना मुँह फिर से दबा लिया तो मैंने इस बार कुछ ज्यादा ही जोर लगा दिया। वो दर्द से तड़पते हुए जोर-जोर से चीखने लगी- “दीदी, बचा लो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊँगी…”

इस बार मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसकी गाण्ड में घुस गया। उसकी गाण्ड से खून निकल आया था। वो इतने जोर-जोर से चीख रही थी की मैं थोड़ा सा डर गया। मैंने एक झटके से अपना लण्ड बाहर खींच लिया। पक की आवाज़ के साथ मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसकी गाण्ड से बाहर आ गया। मैंने उसे चुप कराते हुए कहा- “अगर तुम ऐसे ही चिल्लाओगी तो काम कैसे बनेगा…”

वो बोली- “मैं क्या करूँ, बहुत दर्द हो रहा था…”

मैंने कहा- “थोड़ा सब्र से काम लो। फिर सब ठीक हो जायेगा। अब तुम अपना मुँह दबा लो, मैं फिर से कोशिश करता हूँ…”

उसने अपना मुँह दबा लिया तो मैंने फिर से अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी गाण्ड के छेद पर रख दिया। उसके बाद मैंने उसकी कमर के नीचे से हाथ डालकर उसे जोर से पकड़ लिया। फिर मैंने पूरी ताकत के साथ जोर का धक्का मारा। वो बहुत जोर-जोर से चिल्लाने लगी। वो मेरे नीचे से निकलना चाहती थी लेकिन मैंने उसे बुरी तरह से जकड़ रखा था। मेरा लण्ड इस धक्के से गाण्ड में तीन इंच तक घुस गया। वो जोर-जोर से चिल्लाते हुए डोली भाभी को पुकार रही थी- “दीदी, बचा लो मुझे नहीं तो ये मुझे मार डालेंगे। बहुत दर्द हो रहा है…”


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तभी कमरे के बाहर से डोली भाभी की आवाज़ आयी- “राज़, क्या हुआ? मिन्नी इतना क्यों चिल्ला रही है?”

मैंने कहा- “मैं अपना औज़ार अंदर घुसा रहा था लेकिन ये मुझे घुसाने ही नहीं दे रही है। बहुत चिल्ला रही है…”

डोली भाभी ने कहा- “तुम दोनों बाहर आ जाओ। मैं मिन्नी को समझा देती हूँ…”

मैंने लुंगी पहन ली और मिन्नी से कहा- “बाहर चलो। डोली भाभी बुला रही है…”

वो उठना चाहती थी लेकिन उठ नहीं पा रही थी। मैंने उसे सहारा देकर खड़ा किया। उसने केवल अपनी साड़ी बदन पर लपेट ली। मैं उसे सहारा देकर बाहर ले आया क्योंकी वो दर्द के मारे ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। साथ ही उसे ऊँची एंड़ी के सैंडल पहनने की आदत भी नहीं थी।

डोली भाभी ने मिन्नी से पूछा- “इतना क्यों चिल्ला रही थी?”

वो रोते हुए डोली भाभी से कहने लगी- “ये अपना औज़ार मेरे छेद में घुसा रहे थे इसलिये मुझे बहुत दर्द हो रहा था…”

डोली भाभी ने कहा- “पहली-पहली बार दर्द तो होगा ही। सभी औरतों को होता है। ये कोई नयी बात थोड़े ही है…” डोली भाभी ने मुझसे कहा- “मैंने तुझसे कहा था ना की तेल लगाकर धीरे-धीरे घुसाना…”

मैंने कहा- “मैं तेल लगाकर धीरे-धीरे ही घुसाने की कोशिश कर रहा था। जैसे ही मैंने थोड़ा सा जोर लगाया और मेरे औज़ार का टोपा ही इसके छेद में घुसा कि ये जोर-जोर से चिल्लाने लगी। इसके चिल्लाने से मैं डर गया और मैंने अपना औज़ार बाहर निकाल लिया। उसके बाद मैंने इसे समझाया तो ये राज़ी हो गयी। मैंने फिर से कोशिश की तो ये फिर जोर-जोर से चिल्लाने लगी और मेरा औज़ार केवल जरा सा ही अंदर घुस पाया। तभी आपने हम दोनों को बुलाया और हम बाहर आ गये…”

डोली भाभी ने कहा- “इसका मतलब तुमने अभी तक कुछ भी नहीं किया?”

मैंने कहा- “बिल्कुल नहीं… तुम चाहो तो मिन्नी से पूछ लो…”

डोली भाभी ने मिन्नी से पूछा- “क्या ये सही कह रहा है?”

उसने अपना सिर हाँ में हिला दिया। डोली भाभी ने मिन्नी से कहा- “तुम कमरे में जाओ। मैं इसे समझा बुझाकर भेजती हूँ…”

मिन्नी कमरे में चली गयी। मैंने देखा कि डोली भाभी की आँखें नशे में लाल सी थीं और उन्होंने अभी तक अपने कपड़े नहीं बदले थे। उन्होंने मुझे समझाते हुए कहा- “इस बार बहुत ही धीरे-धीरे घुसाना नहीं तो मैं बहुत मारूँगी…”

मैंने कहा- “मैं तो बहुत धीरे-धीरे ही घुसा रहा था लेकिन इसका छेद भी बहुत तो छोटा है…”

डोली भाभी ने कहा- “फिर तो ऐसे काम नहीं बनेगा। तुम इसके साथ थोड़ी सी जबरदस्ती करना लेकिन ज्यादा जबरदस्ती मत करना। ये अभी 18 साल की है। इसलिये इसे ज्यादा दिक्कत हो रही है…”

मैंने कहा- “ठीक है…”

इतना कहकर डोली भाभी मुश्कुराने लगी। मैं कमरे में आ गया और मैंने अपनी लुंगी उतार दी। मैंने मिन्नी से अपनी साड़ी उतारने को कहा तो उसने इस बार खुद ही अपनी साड़ी उतार दी। साड़ी उतारने के बाद मिन्नी खुद ही बेड पर सैंडल पहने हुए पेट के बल लेट गयी। मैंने अपने लण्ड पर ढेर सारा तेल लगाया और उसके ऊपर आ गया। उसके बाद मैंने जैसे ही अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी गाण्ड के छेद पर रखा तो उसने अपना मुँह दबा लिया। उसके बाद मैंने थोड़ा सा जोर लगाया तो इस बार वो ज्यादा जोर से नहीं चीखी।

मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसकी गाण्ड में घुस गया। मैंने अपने लण्ड के सुपाड़े को उसकी गाण्ड में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया तो वो आहें भरने लगी। थोड़ी देर के बाद जैसे ही मैंने थोड़ा सा जोर लगाया तो उसने जोर की आह भरी और मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में दो इंच तक घुस गया। मैंने थोड़ा जोर और लगाया तो वो जोर-जोर से चिल्लाने और रोने लगी। मेरा लण्ड बहुत मोटा था ही। अब तक उसकी गाण्ड में तीन इंच ही घुस पाया था। मैं रुक गया लेकिन वो दर्द के मारे अभी भी बहुत जोर-जोर से चिल्ला रही थी। मुझे गुस्सा आ गया तो मैंने जोर का एक धक्का लगा दिया। इस धक्के के साथ ही मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में चार इंच तक घुस गया।

वो और ज्यादा जोर-जोर से चिल्लाने लगी- “दीदी, बचाओ मुझे। मैं मर जाऊँगी…”

उसके चिल्लाने की आवाज़ सुन्कर डोली भाभी ने बाहर से पूछा- “अब क्या हुआ?”

वो रोते हुए कहने लगी- “दीदी, मुझे बचा लो नहीं तो मैं मर जाऊँगी…”

डोली भाभी ने कहा- “अच्छा तुम दोनों बाहर आ जाओ…”

मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड से बाहर निकाला और हट गया। मेरे लण्ड पर ढेर सारा खून लगा हुआ था। उसके बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और बाहर आ गये। मिन्नी ठीक से चल नहीं पा रही थी। मैं उसे सहारा देकर बाहर ले आया।

बाहर आने के बाद डोली भाभी मिन्नी को समझाने लगी- “देखो मिन्नी अगर तुम ऐसे ही चिल्लाओगी तो काम कैसे बनेगा। हर औरत को पहली-पहली बार दर्द होता है और उसे उस दर्द को बर्दाश्त करना पड़ता है…”

मिन्नी रो रो कर कहने लगी- “दीदी, मैंने अपने आपको संभालने की बहुत कोशिश की। लेकिन मैं दर्द को बर्दाश्त नहीं कर पायी, इसलिये मेरे मुँह से चीख निकल गयी। इनका औज़ार भी तो बहुत बड़ा है…”

डोली भाभी ने कहा- “औज़ार तो सबका बड़ा होता है। लेकिन एक बार जब अंदर घुस जाता है फिर कभी भी बड़ा नहीं लगाता। उसके बाद हर औरत को मज़ा आता है और तुम्हें भी आयेगा…”

मिन्नी बोली- “दीदी, मेरी बात पर विश्वास करो, इनका औज़ार बहुत बड़ा है। मैंने बहुत से आदमियों को पेशाब करते समय देखा है लेकिन इनके जैसा औज़ार मैंने आज तक कभी नहीं देखा। तुम चाहो तो खुद ही देख लो, तुम्हें मेरी बात पर विश्वास हो जायेगा…”

डोली भाभी के हाथ में शराब का भरा ग्लास था। उन्होंने एक घूँट पीते हुए मुझसे कहा- “राज़, दिखा तो सही अपना औज़ार। जरा मैं भी तो देखूँ कि ये बार-बार क्यों तेरे औज़ार को बहुत बड़ा कह रही है…”

मैंने कहा- “भाभी, मुझे शरम आती है…”

डोली भाभी ने कहा- “मैं तो तेरी भाभी हूँ, मुझसे कैसी शरम… अपना औज़ार बाहर निकालकर दिखा मुझे। “

मैंने शरमाते हुए अपनी पैंट खोल दी। मेरा लण्ड पहले से ही खड़ा था। मेरा नौ इंच लंबा और खूब मोटा लण्ड फनफनाता हुआ बाहर आ गया। उसपर खून भी लगा हुआ था।

डोली भाभी ने जैसे ही मेरा लण्ड देखा तो उन्होंने अपना हाथ मुँह पर रख लिया और बोली- “बाप रे… तेरा औज़ार सचमुच बहुत ही बड़ा है। मैंने भी ऐसा औज़ार तो कभी देखा ही नहीं था। अब मेरी समझ में आया की मिन्नी क्यों इतना चिल्लाती है…”

मैंने देखा की डोली भाभी की आँखें जो पहले से नशे में लाल थीं, अब मेरे लण्ड को देखकर चमक उठी थीं। उन्हें भी जोश आने लगा था क्योंकी मेरा लण्ड देखने के बाद उन्होंने गटागट अपना ग्लास खाली किया और अपना एक हाथ अपनी चूत पर रख लिया था।

मैंने कहा- “भाभी, तुम ही बताओ मैं क्या करूँ। मैं अपना औज़ार छोटा तो नहीं कर सकता…”


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डोली भाभी ने मिन्नी से कहा- “इसका औज़ार तो सच में बहुत बड़ा है। तुम्हें दर्द को बर्दाश्त करना ही पड़ेगा नहीं तो बड़ी बदनामी होगी…” डोली भाभी ने मिन्नी को बहुत समझाया तो वो मान गयी।

डोली भाभी ने मिन्नी से कहा- “अब तुम अपने कमरे में जाओ। मैं इसे समझा बुझाकर तुम्हारे पास भेज देती हूँ…”

मिन्नी कमरे में चली गयी। रात के दो बज रहे थे। डोली भाभी ने फिर अपने ग्लास में शराब ले ली और दो घूँट पीकर मुश्कुराते हुए मुझसे कहने लगी- “देवर जी, तुम्हारा औज़ार तो वाकयी बहुत ही बड़ा है और शनदार भी। मैंने आज तक अपनी ज़िंदगी में ऐसा औज़ार कभी नहीं देखा था। मेरा मन इसे हाथ में पकड़कर देखने को कह रहा है, देख लूँ?” उनकी आवाज़ नशे में काँप रही थी।

मैंने कहा- “भाभी, आप क्या कह रही हो? आज आपने बहुत ज्यादा पी ली है और आप नशे में हो…”

वो बोली- “तुम्हारे भैया को गुजरे हुए एक साल हो गया। आखिर मैं भी तो औरत हूँ और जवान भी। मेरा मन भी कभी-कभी इधर-उधर होने लगाता है। तुम तो मेरे देवर हो। हर औरत अच्छे औज़ार को पसंद करती है। मुझे भी तुम्हारा औज़ार बहुत ही अच्छा लग रहा है। अगर मैं तुमसे लग जाती हूँ तो मेरी भी इच्छा पूरी हो जायेगी और किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा…” इतना कहकर उन्होंने मेरा लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी।

मैं भी आखिर मर्द ही था। मुझे डोली भाभी का लण्ड सहलाना बहुत अच्छा लगने लगा इसलिये मैं कुछ नहीं बोला।

थोड़ी देर तक मेरा लण्ड सहलाने के बाद वो बोली- “तुमने अभी तक सुहागरात का मज़ा भी नहीं लिया है और मैं समझती हूँ की तुम भी एकदम भूखे होगे। मेरी इच्छा पूरी करोगे?”

मैंने कहा- “अगर तुम कहती हो भला मैं कैसे इनकार कर सकता हूँ। आखिर मैं भी तो मर्द हूँ और तुम्हारे सिवा मेरा इस दुनिया में और कौन है…”

वो बोली- “फिर तुम यहीं रुको, मैं अभी आती हूँ…” इतना कहकर डोली भाभी मिन्नी के पास चली गयी।

मैंने देखा की वो काफी नशे में थीं और उनके कदम लड़खड़ा रहे थे। ऊँची एंड़ी के सैंडलों में उन्हें डगमगाते देखकर मेरे लण्ड में एक लहर सी दौड़ गयी। उन्होंने मिन्नी से कहा- “अब तुम सो जाओ। रात बहुत हो चुकी है। मैं राज़ को सब कुछ समझा दूँगी। उसके बाद मैं उसे सुबह तुम्हारे पास भेज दूँगी। मैं बाहर से दरवाजा बंद कर देती हूँ…”

मिन्नी बोली- “ठीक है, दीदी…”

डोली भाभी मिन्नी के कमरे से बाहर आ गयी और उन्होंने मिन्नी के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर लिया। उसके बाद वो मुझे अपने कमरे में ले गयी। मेरे बदन पर कुछ भी नहीं था। लूँगी तो मैंने पहले ही उतार दी थी। कमरे में पहुँचते ही डोली भाभी ने कहा- “देवर जी, तुमने अपना औज़ार इतने दिनों तक कहाँ छिपा रखा था। बड़ा ही प्यारा औज़ार है तुम्हारा…”

मैंने कहा- “मैंने कहाँ छिपाया था, यहीं तो था तुम्हारे पास…”

वो स्टूल से शराब की बोतल उठा उसपे सीधे मुँह लगाकर पीते हुए बोली- “मेरे पास आओ…”

मैं उनके नज़दीक चला गया और बोला “भाभी… आपको मैंने इतनी ज्यादा शराब पीते हुए पहले नहीं देखा। मुझे भी एक पैग दो ना…”


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मैं उनके नज़दीक चला गया और बोला “भाभी… आपको मैंने इतनी ज्यादा शराब पीते हुए पहले नहीं देखा। मुझे भी एक पैग दो ना…”

उन्होंने मेरा लण्ड पकड़ लिया और सहलाते हुए बोली- “देवर जी। आज तो बहुत ही खास दिन है। मैं बस मदहोश हो जाना चाहती हूँ पर तुझे नहीं दूँगी। मुझे पता है तू पहले से पीकर आया था। और तू मर्द है। थोड़ी सी भी ज्यादा हो गयी तो तेरा ये बेहतरीन औज़ार ठंडा पड़ जायेगा…” फिर वो कहने लगी- “मैंने आज तक ऐसा औज़ार कभी नहीं देखा था। हर औरत अच्छा औज़ार पसंद करती है। मुझे तो तुम्हारा औज़ार बहुत पसंद आ गया है। आज मैं तुमसे लग जाती हूँ। तुमसे चुदवाने में मुझे बहुत मज़ा आयेगा। लेकिन जैसे तुमने मिन्नी के साथ किया था उस तरह मेरे साथ मत करना नहीं तो मुझे भी बहुत तकलीफ होगी और मेरे मुँह से भी चीख निकल जायेगी। मिन्नी पास के ही कमरे में है, इसका ख्याल रखना…”

मैंने कहा- “अच्छा…”

थोड़ी देर तक डोली भाभी मेरा लण्ड सहलाती रही और शराब पीती रही। उसके बाद उन्होंने भी अपने कपड़े उतार दिये और एकदम नंगी हो गयी। डोली भाभी भी बहुत ही खूबसूरत थी। वो अपने सैंडल उतारने लगी तो मैंने उन्हें रोका।

वो मुश्कुराते हुए बोली- “तो तू भी अपने भैया की तरह औरतों के ऊँची एंड़ी के सैंडल देखकर उत्तेजित होता है?”

मैं थोड़ा सा शरमाया।

तो वो बोली- “शमार्ता क्यों है। ज्यादातर मर्दों को ऊँची एंड़ी के सैंडल पहनी औरतें उत्तेजक लगती हैं। इसीलिये तो मैं हरदम ऊँची एंड़ी के सैंडल पहने रहती हूँ…” उसके बाद वो सैंडल पहने हुए ही बेड पर लेट गयी और बोली- “अब थोड़ा सा तेल अपने लण्ड पर लगा लो और आ जाओ…”

मैंने कहा- “क्या भाभी, आपने तो भैया से बहुत बार चुदवाया है, आप मुझसे तेल लगाने को कह रही हैं। बिना तेल के ज्यादा मज़ा आयेगा…”

वो बोली- “फिर देर किस बात की। आ जाओ…”

मैं डोली भाभी के पैरों के बीच आ गया।

डोली भाभी ने कहा- “आराम से घुसाना, जल्दी मत करना। जब मैं रोकूँगी तो रुक जाना…”

मैंने कहा- “ठीक है…”

वो बोली- “चलो अब धीरे-धीरे अंदर घुसाओ…”

मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा डोली भाभी की चूत के मुँह पर रख दिया और धीरे-धीरे अपना लण्ड डोली भाभी की चूत में घुसाने लगा। जैसे ही मेरे लण्ड का सुपाड़ा डोली भाभी की चूत में घुसा तो उनके मुँह से आह निकल गयी। उनकी चूत मुझे ज्यादा टाइट लग रही थी। मेरा लण्ड आसानी से घुस नहीं पा रहा था। मैं जोर लगाकर धीरे-धीरे अपना लण्ड डोली भाभी की चूत में घुसाने लगा। डोली भाभी आहें भरती रही। जब मेरा लण्ड पाँच इंच तक घुस गया तो दर्द के मारे उनका बुरा हाल होने लगा लेकिन उन्होंने मुझे रोका नहीं। उन्होंने अपने होंठों को जोर से जकड़ लिया था। मैं जोर लगाता रहा।

जब मेरा लण्ड डोली भाभी की चूत में छः इंच तक घुस गया तो वो बोली- “अब रुक जाओ…”

मैं रुक गया तो वो बोली- “बहुत दर्द हो रहा है। अब बर्दाश्त करना मुश्किल है। कितना बाकी है अभी?”

मैंने कहा- “तीन इंच…”

वो बोली- “अब और ज्यादा अंदर मत घुसाना। धीरे-धीरे चुदाई करना शुरू कर दो…”

मैंने धीरे-धीरे डोली भाभी की चुदाई शुरू कर दी। उनकी चूत ने मेरे लण्ड को बुरी तरह से जकड़ रखा था। वो आहें भरती रही। मुझे भी खूब मज़ा आ रहा था। आज मैं किसी औरत को पहली बार चोद रहा था। पाँच मिनट की चुदाई के बाद डोली भाभी झड़ गयी। उन्होंने बहुत दिनों से चुदवाया नहीं था इसलिये उनकी चूत से ढेर सारा जूस निकला। उनकी चूत और मेरा लण्ड एकदम गीले हो गये तो उन्होंने कहा- “अब धीरे-धीरे बाकी का भी घुसा दो…”

मैंने इस बार थोड़ा ज्यादा ही जोर लगा दिया तो वो अपने आपको रोक नहीं पायी। उनके मुँह से चीख निकल ही गयी लेकिन उन्होंने तुरंत ही खुद को संभाल लिया। मैंने इस बार एक धक्का लगा दिया तो वो दर्द के मारे तड़पने लगी और बोली- “अब कितना बाकी है?”

मैंने कहा- “एक इंच…”

वो बोली- “अब चोदो मुझे, बाकी का चुदाई करते समय घुसा देना…”

मैंने डोली भाभी की चुदाई शुरू कर दी। मुझे खूब मज़ा आ रहा था। डोली भाभी दर्द के मारे आहें भर रही थी। जैसे-जैसे समय गुजरता गया वो शाँत होती गयी। अब उन्हें भी मज़ा आने लगा था। तभी मैंने एक धक्का लगाकर बाकी का लण्ड भी उनकी चूत में घुसा दिया।


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मैंने डोली भाभी की चुदाई शुरू कर दी। मुझे खूब मज़ा आ रहा था। डोली भाभी दर्द के मारे आहें भर रही थी। जैसे-जैसे समय गुजरता गया वो शाँत होती गयी। अब उन्हें भी मज़ा आने लगा था। तभी मैंने एक धक्का लगाकर बाकी का लण्ड भी उनकी चूत में घुसा दिया।

वो चीख उठी और बोली- “पूरा घुस गया?”

मैंने कहा- “हाँ…”

वो बोली- “अब जोर-जोर से चोदो। तुम तो गाँव में कुश्ती लड़ा करते थे न?”

मैंने कहा- “हाँ…”

वो बोली- “अब तुम मेरी चूत के साथ कुश्ती लड़ो। मेरी चूत को अपने लण्ड का दुश्मन समझ लो और मेरी चूत पर अपने लण्ड से खूब जोर-जोर से वार करो। फाड़ देना आज इसको…”

मैंने कहा- “अगर फाड़ दूँगा तो बाद में मज़ा कैसे आयेगा?”

वो बोली- “तुम इसका मतलब नहीं समझे। मैं सचमुच फाड़ने को थोड़े ही कह रही हूँ…”

मैंने बहुत ही जोर-जोर के धक्के लगाते हुए डोली भाभी को चोदना शुरू कर दिया। डोली भाभी तो बहुत ही सेक्सी निकलीं। वो हर धक्के के साथ अपने चूतड़ उछाल-उछालकर मुझसे चुदवा रही थी। पूरा बेड जोर-जोर से हिल रहा था। कमरे में धपधप की आवाज़ हो रही थी। उनकी चूत से से भी चप-चप की आवाज़ निकल रही थी। मैं भी पूरे जोश में था और वो भी। पाँच मिनट की चुदाई के बाद वो फिर से झड़ गयी लेकिन मैं रुका नहीं। मैं खूब जोर-जोर के धक्के लगाते हुए उनकी चुदाई कर रहा था। वो पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी और अपनी चूचियों को अपने हाथों से मसल रही थी। थोड़ी देर की चुदाई के बाद मैं झड़ गया। डोली भाभी भी मेरे साथ ही साथ फिर से झड़ गयी।

मैंने अपना लण्ड उनकी चूत से बाहर निकाला तो मेरे लण्ड पर खून भी लगा हुआ था।

डोली भाभी ने कहा- “देख लिया तुमने अपने लण्ड की करतूत। इसने मुझ जैसी चुदी चुदाई औरत की चूत से भी खून निकाल दिया…” उन्होंने मेरे लण्ड को कपड़े से साफ कर दिया।

उसके बाद मैं उनके बगल में लेट गया। वो मेरे होंठों को चूमने लगी और बोली- “देवर जी, आज तो तुमने मुझे ऐसा मज़ा दिया है की मैं क्या बताऊँ। ऐसा मज़ा तो मुझे आज तक कभी नहीं मिला…”

मैंने कहा- “भाभी। आप इतने नशे में हो। इसलिये इतनी तारीफ कर रही हो…”

भाभी बोलीं- “अरे मेरे बेवकूफ देवर जी, नशे में जरूर हूँ पर गलत नहीं कह रही। बल्कि नशे में तो मज़ा दोगुना हो गया…”

मैंने फिर कहा- “मैं मिन्नी का क्या करूँ?”

वो बोली- “मैंने तुम्हारे भैया से इतने सालों तक चुदवाया था। फिर भी मुझे तुम्हारा लण्ड अपनी चूत के अंदर लेने में बहुत तकलीफ हुई। मिन्नी अभी बहुत छोटी है। जरा सोचो की उसे कितनी तकलीफ होती होगी…”

मैंने कहा- “तब तुम ही बताओ मैं क्या करूँ। क्या मैं मिन्नी को छोड़कर केवल तुमहारी चुदाई करूँ?”

वो बोली- “मैं ऐसा थोड़े ही कह रही हूँ। अबकी बार जब तुम मिन्नी की चुदाई करना तो उसके ऊपर जरा सा भी रहम मत करना। वो चाहे कितनी भी चीखे या चिल्लाये। अपना पूरा का पूरा लण्ड अंदर घुसा देना। उसकी चीख मुझे सुनायी पड़ेगी। तुम इसकी परवाह मत करना…”

मैंने कहा- “ठीक है, मैं ऐसा ही करूँगा…”

वो बोली- “थोड़ी देर आराम कर लो। उसके बाद मिन्नी के पास जाओ। अबकी बार हार नहीं मानना। पूरा का पूरा घुसा देना भले ही वो कितना भी चीखे या चिल्लाये। हो सके तो उसे भी थोड़ी सी शराब पिला दो। उसे तकलीफ कुछ कम होगी और बाद में मज़ा भी ज्यादा आयेगा…”

मैंने कहा- “मैं ऐसा ही करूँगा…”

सुबह के पाँच बजने वाले थे। थोड़ी देर आराम करने के बाद मैं मिन्नी के पास चला गया। मिन्नी सो रही थी। मैंने उसे जगाया तो वो उठ गयी। मैंने उससे कहा- “जाकर तेल की शीशी उठा लाओ और मेरे लण्ड पर ढेर सारा तेल लगा दो…”

वो बोली- “मुझे शरम आती है…”

मैंने कहा- “अगर तुम मेरे लण्ड पर तेल नहीं लगाओगी तो मैं ऐसे ही अपना लण्ड तुम्हारे छेद में घुसा दूँगा…”

वो बोली- “ना बाबा ना, ऐसा मत करना। जब तेल लगाने के बाद भी इतना दर्द होता है तो बिना तेल लगाये जब तुम अपना औज़ार अंदर घुसाओगे तो मैं तो मर ही जाऊँगी। मैं तुम्हारे औज़ार पर तेल लगा देती हूँ…” इतना कहकर वो उठी। उसने तेल की शीशी से तेल निकालकर मेरे लण्ड पर लगा दिया। उसके तेल लगाने से मेरा लण्ड एकदम टाइट हो गया। उसके बाद मैंने एक ग्लास में थोड़ी सी शराब डालकर उसके होंठों से ग्लास लगा दिया। उसने थोड़ी आनाकनी की पर फिर मेरे समझाने पर वो बुरा सा मुँह बनाकर एक ही साँस में पूरा गटक गयी।


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वो बोली- “ना बाबा ना, ऐसा मत करना। जब तेल लगाने के बाद भी इतना दर्द होता है तो बिना तेल लगाये जब तुम अपना औज़ार अंदर घुसाओगे तो मैं तो मर ही जाऊँगी। मैं तुम्हारे औज़ार पर तेल लगा देती हूँ…” इतना कहकर वो उठी। उसने तेल की शीशी से तेल निकालकर मेरे लण्ड पर लगा दिया। उसके तेल लगाने से मेरा लण्ड एकदम टाइट हो गया। उसके बाद मैंने एक ग्लास में थोड़ी सी शराब डालकर उसके होंठों से ग्लास लगा दिया। उसने थोड़ी आनाकनी की पर फिर मेरे समझाने पर वो बुरा सा मुँह बनाकर एक ही साँस में पूरा गटक गयी।

“ऊँ… मेरा सिर घूम रहा है…” वो बोली और वो मेरे कुछ कहे बिना ही पेट के बल लेट गयी और बोली- “धीरे-धीरे घुसाना…”

मैं उसके ऊपर आ गया। मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी गाण्ड के छेद पर रख दिया और फिर उसकी कमर के नीचे से हाथ डालकर उसकी कमर को जोर से पकड़ लिया। मैंने थोड़ा सा जोर लगाया तो उसके मुँह से आह निकल गयी। मैंने थोड़ा जोर और लगाया तो उसके मुँह हल्की सी चीख निकल गयी। मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में तीन इंच तक घुस चुका था। मैंने थोड़ा सा जोर और लगाया तो वो फिर से चिल्लाने लगी और मेरा लण्ड चार इंच तक घुस गया। मैंने उसकी चीख पर जरा सा भी ध्यान नहीं दिया।

मैंने जोर का धक्का मारा तो वो तड़पने लगी और जोर-जोर से चीखने लगी- “दीदी, बचा लो मुझे, मर जाऊँगी मैं…”

अगले धक्के के साथ मेरा लण्ड पाँच इंच तक घुस गया। मैंने फिर से बहुत ही जोर का एक धक्का और मारा तो वो अपने हाथों को जोर-जोर से बेड पर पटकने लगी। उसने अपने सिर के बाल नोचने शुरू कर दिये और बहुत ही जोर-जोर से चिल्लाने लगी। अब तक मेरा लण्ड मिन्नी की गाण्ड में छः इंच तक घुस चुका था।

मैंने पूरी ताकत के साथ फिर से जोर का धक्का मारा तो वो बहुत जोर-जोर से रोने लगी। लग रहा था कि जैसे वो मर जायेगी। मैं रुक गया और फिर अगले धक्के के साथ मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में सात इंच घुस चुका था। मैंने अपना लण्ड एक झटके से बाहर खींच लिया। पक की आवाज़ के साथ मेरा लण्ड बाहर आ गया। मैंने देखा की उसकी गाण्ड का मुँह खुला हुआ था और ढेर सारा खून मेरे लण्ड पर और उसकी गाण्ड पर लगा हुआ था। मैंने तेल की शीशी उठायी और उसकी गाण्ड के छेद में ढेर सारा तेल डाल दिया। उसके बाद मैंने फिर से अपना लण्ड धीरे-धीरे उसकी गाण्ड में घुसा दिया। जब मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में सात इंच तक घुस गया तो मैंने पूरी ताकत के साथ दो बहुत ही जोरदार धक्के लगा दिये।

वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी- “दीदी, तुमने मुझे कहाँ फँसा दिया। मैं मरी जा रही हूँ और तुम सुन ही नहीं रही हो, बचा लो मुझे, नहीं तो ये मुझे मर डालेंगे…”

मैंने कहा- “अब चुप हो जाओ। मेरा पूरा लण्ड अब घुस चुका है…”

वो कुछ नहीं बोली, केवल सिसक-सिसक कर रोती रही। मैं अपना लण्ड उसकी गाण्ड में ही डाले हुए थोड़ी देर तक रुका रहा। धीरे-धीरे वो कुछ हद तक शाँत हो गयी।

तभी कमरे के बाहर से ही डोली भाभी ने पूछा- “काम हो गया?”

मैंने कहा- “अभी तो मैंने केवल अपना औज़ार ही पूरा अंदर घुसाया है…”

वो बोली- “ठीक है, अब जल्दी से अपना पानी भी निकाल दो और बाहर आ जाओ…”

मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिये तो मिन्नी फिर से चीखने लगी। वक्त गुजरता गया और वो धीरे-धीरे शाँत होती गयी। दस मिनट में वो एकदम शाँत हो गयी तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी। अब उसके मुँह से केवल हल्की-हल्की सी आह ही निकल रही थी। मैंने अपनी स्पीड और तेज कर दी। तेल लगा होने की वजह से मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में सटासट अंदर-बाहर हो रहा था। मुझे खूब मज़ा आ रहा था। मिन्नी को भी अब कुछ-कुछ मज़ा आने लगा था।

मैं भी पूरे जोश में आ चुका था और तेजी के साथ उसकी गाण्ड मार रहा था। दस मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी और फिर झड़ गया। लण्ड का सारा पानी उसकी गाण्ड में निकाल देने के बाद भी मैंने उसकी गाण्ड में ही अपना लण्ड डाले रखा और उसके ऊपर लेट गया।


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***** ***** To be Contd... ...

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