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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete

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चुदवाने गई है मेरी बीवी

रविवार का दिन था, मैं सवेरे सवेरे अपने ड्राइंग रूम में बैठा हुआ नाश्ता कर रहा था, अचानक मेरा दोस्त मयंक आ गया। मयंक मेरा पुराना दोस्त है और जब कब ही मिलता है। उसका घर हमारे घर से काफी दूर है। मैंने उसे भी नाश्ते में शामिल कर लिया। नाश्ता करते करते हम बातें करने लगे। खूब इधर-उधर की बातें की, मूड बिल्कुल फ्रेश हो गया।

उधर नाश्ता भी खत्म हो गया। हमने अपने-अपने हाथ धोये और फिर सोफे पर आराम से बैठकर बातें करने लगे। दिन के करीब 11:00 बज चुके थे। बातें कुछ पर्सनल और गहरी होती गई।

अचानक मयंक पूछ बैठा- यार मनोज, मीनाक्षी भाभी नहीं दिखाई पड़ रही हैं, कहाँ गई है तेरी बीवी?

मैंने कहा- चुदवाने गई है मेरी बीवी।

“क्या कह रहे हो यार? कुछ तो शर्म करो?”

“इसमें शर्म की क्या जरूरत है मेरे दोस्त? यह तो हकीकत है। मेरी बीवी चुदवाने ही गई है…”

“तो कब वापस आएँगी भाभी?”

“शाम तक जरूर आ जायेगी…”

“तो क्या बहुत दूर गई हैं वो?”

“दूर नहीं, बस नजदीक ही है, लेकिन उसे आज कई लोगों से चुदवाना है…”

“यार तुम मुझसे पहेली क्यों बुझा रहे हो? मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ?”

इतने में डोर बेल बज उठी। मैंने दरवाजा खोला तो सामने एक खूबसूरत महिला खड़ी थी।

वह बोली- क्या मैं मिस्टर मनोज से मिल सकती हूँ?

मैंने कहा- मैडम, मैं ही हूँ मनोज, आप आईये और अन्दर बैठिये।

वह इत्मीनान से बैठ गई। मैं उसकी खूबसूरती देखने में मशगूल हो गया। गोरी चिट्टी बड़ी-बड़ी चूचियों वाली बड़ी-बड़ी आँखों वाली और बेहद सेक्सी जिश्म वाली औरत को मैं देखे ही जा रहा था। मैं अंदर ही अंदर समझ तो गया था लेकिन मैं उसके मुख से ही कुछ सुनना चाहता था।

वह बोली- तो यह सच है कि आप ही मनोज हैं?

मैंने कहा- हाँ मैम, बिल्कुल सच है, आप काम बताईये?

वह बोली- “मैं मिसेज़ सुषमा जैन हूँ। मुझे मधु जैन ने आपके पास भेजा है…” फिर उसने धीरे से कहा- “यार मैं तुमसे चुदवाने आई हूँ…”

मैंने कहा- “हाँ हाँ, मैं तो आपका ही इंतज़ार कर रहा था। आप शौक से बैठिये, मैं अभी आया…” मैंने पूछा- क्या पियोगी भाभी जी?

वह बोली- यार व्हिस्की पिलाओ पहले।

मैंने उसे अपने दोस्त मयंक से मिलवाया।

वह भी खुश हुई।

हम तीनों लोग शराब पाने लगे। सुषमा ने गिलास उठाया, चियर्स बोला और एक ही सांस में गिलास पूरा खाली कर दिया। फिर उसने सिगरट मांगी और पीने लगी।

मयंक तो बिल्कुल हैरत में था वह सोच नहीं पा रहा था कि यह सब क्या हो रहा है?

मैंने कहा- सुषमा यार, यह मेरा दोस्त आज मेरे साथ रह सकता है न? अगर नहीं तो मैं जाने को कहे देता हूँ?

वो अपने मुँह से धुआं निकालती हुई बोली- “अबे भोसड़ी के, क्यों जाने दोगे इसे? इसे यहीं रखो… आज तुम दोनों बहनचोद मिलकर चोदो मुझे। मुझे भी अच्छा लगेगा…” ऐसा कहकर उसने दूसरा गिलास भी खाली कर दिया और मुझसे लिपट गई।

हम दोनों ने भी उसी तरह दूसरा गिलास खाली कर दिया। दो-दो पैग शराब सबने एक झटके में पी ली तो नशा एकदम से चढ़ गया। मैं जैन मैडम के बदन से खेलने लगा, उसे हर तरफ से कपड़ों के ऊपर से मसलने लगा।

मयंक मुझे देख रहा था।

मैंने उसे आँख मारी और उससे भी लिपट जाने को कहा।

उसने सीधे हमला उसकी चूचियों पर कर दिया।

सुषमा मेरा लण्ड टटोलने लगी और जब मयंक आया तो उसका भी लौड़ा झंझोड़ने लगी। मैं समझ गया कि अब यह बुरचोदी मैडम सुषमा जैन जोश में आ गई है। तो मैं उसे बेडरूम ले गया, उसके एक-एक करके कपड़े उतारने शुरू किया।

मैंने साड़ी खोली तो मयंक ने ब्लाउज़… मैंने ब्रा खोली तो मयंक ने पेटीकोट… बिल्कुल नंगी कर दिया हमने बुर चोदी सुषमा जैन को।

वह बोली- “अब भोसड़ी के तुम भी नंगे हो जाओ। खोलो अपने-अपने लण्ड…” उसने हमारे कपड़े उतावले पन से उतार दिए। एक हाथ में मेरा लण्ड लिया और दूसरे में मयंक का… जितनी वह मस्त होती जा रही थी उतने ही हम लोग भी…

लण्ड दोनों के दोनों टन-टना कर खड़े हो गये।

सुषमा बोली- वाह कितने मस्ताने लौड़े है यार? मधु ने जैसा कहा था बिल्कुल वैसा ही है तेरा लौड़ा मनोज? यार तुम मधु को पहले चोद चुके हो? उसकी बुर में पेल चुके हो अपना लौड़ा?

मैं बोला- “हाँ भाभी, अपने ठीक कहा, मैंने पहले तो कविता को चोदा और फिर उसी दिन यह प्रोग्राम मैंने और कविता भाभी ने ही बैठकर बनाया। आज मुझे ख़ुशी इस बात की है यह प्रोग्राम पिछले एक साल से बहुत बढ़िया चल रहा है। लोग इसका मज़ा ले रहे हैं…” ऐसा कहकर मैंने लण्ड सुषमा की बुर में पेल दिया और चोदने लगा।

वह मयंक का लौड़ा पीते हुए चुदाने लगी।


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सुषमा चुदवाते हुए बोली- आज तो तेरी बीवी किस-किससे चुदवाकर आएगी?

मैंने कहा- वैसे तो बताया नहीं उसने मुझे, लेकिन मैं समझता हूँ कि वह दो लोगों से जरूर चुदवाकर आएगी। उसे चुदवाने का बड़ा जबरदस्त शौक है। अच्छा तेरा हसबैंड क्या कर होगा अभी?

वह बोली- “वह भोसड़ी का अपनी बड़ी बहन को चोद रहा होगा? उसके बाद उसके चाचा की बहू चुदवाने आएगी उससे। मैं भी तुमसे चुदवाने के बाद मनीष अग्रवाल जी से चुदवाकर घर वापस जाऊँगी…”

मयंक बड़ी हैरत भरी निगाहों से हम दोनों को देखने लगा। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है?

मैंने कहा- यार, तुम चिंता न करो, मैं तुम्हें सब समझा दूँगा पहले तुम इस सुषमा की जैन बुर चोदो, तुमने पहले कभी जैन बुर चोदी है? जैन बुरें ज्यादा ही गोरी, चिकनी और चुदक्कड़ होती हैं।

मयंक सुषमा भाभी को चोदने में जुट गया।

भाभी बोली- यार मयंक, अब तुम पीछे से मेरी गाण्ड में पेलो लण्ड, मैं आगे से मनोज का लण्ड चूसते हुए गाण्ड मरवाऊँगी।

मैं पहली बार भाभी को गाण्ड मराते हुए देख रहा था। थोड़ी देर में भाभी ने मयंक को नीचे लिटा दिया और उसके ऊपर उसकी तरफ मुँह करके लेट गई, लण्ड उसकी चूत में घुस गया।

फिर वह अपनी गाण्ड उठाकर बोली- “मनोज, अब तुम मारो मेरी गाण्ड…”

थोड़ी देर गाण्ड मरवाने के बाद वह बोली- यार मनोज, तुमने इस तरह का प्रोग्राम बनाकर कई बीवियों के मन की इच्छा पूरी कर दी। वरना बिचारी एक ही लण्ड पे पूरी ज़िन्दगी निकाल देती हैं और तरह-तरह के लण्ड के लिए हमेशा तरसा करती हैं।

तब तक मैंने कहा- भाभी, अब मैं खलास होने वाला हूँ।

वह बोली- “यार, मेरे मुँह में झड़ना, मैं तेरा लण्ड पियूंगी…” वह वास्तव में मेरा झड़ता हुआ लण्ड पीने लगी और उसके बाद उसने मयंक का भी झड़ता हुआ लण्ड पिया।

सुषमा भाभी चुदवाकर चली गई और उसके बाद मयंक भी चला गया।

शाम को करीब 7:00 बजे मेरी बीवी चुदवाकर कर वापस आ गई। उसका चेहरा चमक रहा था और इधर मेरा भी चेहरा चमक रहा था।

वह भी तैयार हो गई और मैं भी।

हम दोनों लोग बैठे बातें कर रहे थे, इतने में मयंक अपनी बीवी गौरी के साथ आ गया। मैं उसकी बीवी से पहले कई बार मिल चुका था, मीनाक्षी की भी दोस्ती है उससे।

हम चारों लोग दारू पीने बैठ गये।

मयंक बोला- यार, तुमने वह बात नहीं बताई अभी तक?

मैंने कहा- यार देखो, मेरी शादी के दो साल बाद मेरी बीवी एक दिन बोली- “क्या तुमको दो साल से एक ही बुर बार-बार चोदने में मज़ा आता है? मुझे तो एक ही लण्ड से बार-बार चुदवाना अच्छा नहीं लगता?

मैंने कहा- लेकिन फिर किया क्या जाये?

उसने कहा- तुम मेरी सहेली की बुर चोदोगे? बोलो, मैं उसे मना लेती हूँ।

मैंने कहा- हाँ क्यों नहीं चोदूँगा?

बस उसने कविता से बात की तो वह फौरन तैयार हो गई। उसी रात कविता हमारे बेड पर आ गई और रात में जब मैं बिस्तर पर गया तो मेरी बीवी ने मेरा लण्ड उसे पकड़ा दिया। उस दिन मैंने पहली बार किसी और की बीवी को अपनी बीवी के सामने चोदा।

फिर कविता ने मुझसे कहा- यार मनोज… क्या तेरी बीवी मेरे हसबैंड से चुदवा ले?

मैंने हाँ कर दी। उसके बाद कविता का घर मैंने उसे फिर चोदा और उसके मियां ने मेरी बीवी चोदी।

कविता बोली- यार मनोज, हम लोग क्यों न एक ऐसा प्रोग्राम बनाएँ जिसमें हम एक दूसरे की बीवियां चोदते रहें और बीवियां पराये मर्दों से चुदवाती रहें? कविता फिर बोली- और फिर मैंने सोचा एक नया तरीका? एक इतवार को मैं सबकी बीवियां दूसरों के घर चुदवाने के लिए भेजूंगी। यानि मर्द सब अपने-अपने घर में रहेंगे और बीवियां जा जाकर चुदवायेंगी? जैसे आज मनोज की बीवी आज चुदवाकर कर आई है। दूसरे इतवार को बीवियां घर पर रहेंगी और मैं मर्दों को भेजूंगी जहाँ वे जाकर पराई बीवियां चोदेंगे? कौन किसको चोदेगा और कौन किससे चुदवायेगी यह मैं तय करूंगी। इस तरह हर बीवी दो मर्दों से चुदायेगी और हर मर्द दो बीवियां चोदेगा।

मैंने कहा- बस इसी तरह लोग जुड़ते गये और हम लोग चुदाई का मज़ा उठाते गये।

मयंक बोला- यार, आज तुम मेरी बीवी चोदो।

मैंने उसकी बीवी गौरी की तरफ देखा।

वह मुश्कुरा रही थी।

मैंने कहा- यार अपनी बीवी गौरी भाभी से तो पूछ लो?

गौरी भाभी बोली- “अच्छा, आज जब तुमने मेरे मियां से सुषमा की बुर चुदवाई तो तुमने मुझसे पूछा था, भोसड़ी के मनोज? मैं कोई ऐतराज़ नहीं जता रही हूँ। मैं खुद कह रही हूँ कि तुम मुझे चोदो। सीधी सी बात है जब मेरा मियां किसी को चोदेगा तो मैं भी किसी से चुदवाऊँगी। अब खोलो न लौड़ा अपना…” ऐसा कहकर गौरी ने मेरे लण्ड पर हाथ मारा।

उधर मेरी बीवी ने मयंक के लण्ड पे हाथ मारा और कहा- दिखाओ न इस लौड़े को जिसने सुषमा की बुर चोदी है?

मैंने गौरी की चूची दबाकर कहा- भाभी, पहले अपना जलवा तो दिखाओ मुझे? मैं पहले तुम्हें नंगी देखना चाहता हूँ। मुझे बीवियां बगैर कपड़ों के ज्यादा अच्छी लगती हैं।

वह बोली- “मुझे भी मर्द बिना कपड़ों के ज्यादा अच्छे लगते हैं…” उसकी जब ब्रा खुली तो दोनों चूचियां छलक कर बाहर आ गईं।


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वह बोली- “मुझे भी मर्द बिना कपड़ों के ज्यादा अच्छे लगते हैं…” उसकी जब ब्रा खुली तो दोनों चूचियां छलक कर बाहर आ गईं।

मेरे मुँह से निकला- वाह भाभी वाह… कितनी मस्त चूचियां है आपकी? इन्हें देखकर तो लौड़ा बहनचोद अपने आप खड़ा हो जाये।

फिर जब उसने अपना पेटीकोट खोला तो गजब हो गया। उसकी गद्देदार मस्त चिकनी चूत देखकर तो मैं पागल हो गया। मैंने जब अपनी नज़र घुमाई तो देखा कि मयंक मेरी बीवी की चूत चाटने में जुटा है।

आखिरकार गौरी ने मेरा खड़ा लौड़ा पकड़ लिया, वह बोली- “बाप रे बाप… इतना बड़ा लौड़ा लेकर घूमते हो तुम? इसे मेरी बुर में छोड़कर जाया करो?” गौरी भाभी मेरा लण्ड पीने लगी।

और मेरी बीवी मयंक का लण्ड पीने लगी।

दूसरों की बीवियों से लण्ड चुसवाने का मेरा चस्का बढ़ता गया। जब किसी की बीवी मेरा लौड़ा चूसती है तो मुझे अपार आनन्द आता है।

मैंने यह बात जब गौरी भाभी से कहा तो वह बोली- “और मैं भी जब किसी पराये मर्द का लौड़ा चूसती हूँ तो मुझे अपार आनन्द आता है। अब आज से मैं भी तुम्हारे ग्रुप में शामिल हो गई हूँ, अपनी बुर चोदी कविता से बता दो प्लीज? वह भी हर हफ्ते मुझे भी लण्ड भेजा करे? और मेरे पति के पास बुर भिजवाया करे…” ऐसा कहकर गौरी भाभी मेरा लण्ड अपनी बुर में घुसाकर चुदवाने लगी।

उधर मेरी बीवी भी मयंक से चुदवाने में जुट गई, वह बोली- हाय मयंक, आज वैसे मैं दो-दो मर्दों से चुदवाकर आई हूँ लेकिन तेरा लौड़ा बड़ा अनोखा मज़ा दे रहा है मुझे। सुषमा भोसड़ी वाली ने बड़ा मज़ा किया होगा?

तब तक गौरी बोली- हाँ मीनाक्षी भाभी, तेरे मियां का लौड़ा तो लाखों में एक है। आज मुझे लग रहा है कि वाकई पराये मर्दों के लण्ड बड़े शानदार होते हैं। आज मुझे मिल रहा है जवानी का असली मज़ा, हाय मेरे राजा मनोज और चोदो मुझे… खूब कस-कस के चोदो मुझे। मैं तेरी रखैल हूँ, मैं तेरी दूसरी बीवी हूँ, मैं तेरी रंडी हूँ। मैं तेरी कुतिया हूँ, मैं छिनाल हूँ, मैं चुदक्कड़ हूँ यार मुझे चोदो। अपने दोस्तों के भी लण्ड पेलो मेरी बुर में, मेरे राजा मेरी गाण्ड मारो, मेरी चूची चोदो? तेरा मादरचोद लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है मुझे। इसकी माँ का भोसड़ा मैं इसे हर रोज़ पेलूँगी अपनी चूत में?

मैंने महसूस किया कि गौरी भाभी को वाकई बड़ा मज़ा आ रहा है, उसे बहुत दिनों के बाद कोई पराया आदमी चोदने वाला मिला है। मुझे सबसे ज्यादा मज़ा तब आया जब गौरी भाभी ने मेरा झड़ता हुआ लण्ड चाटा। उसी दिन से गौरी-मयंक मेरे ग्रुप में शामिल हो गए।

तो दोस्तों, इसी तरह हमारी मौज़ मस्ती हर इतवार को होती रहती है।

मैं भी खुश और मेरी बीवी भी खुश।


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***** END समाप्त *****

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………………………………………… अगली कहानी ‘ कहानी घर घर की ’ का इंतेजार करें … …

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कहानी घर घर की

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पारुल- “श्रुति, कहां है तू? सुबह से ढूँढ़ रही हूं तुझे, कहां चली गयी थी तू?”

श्रुति- “मामा, मैं वोह अंदर, कमल चाचू से गाण्ड मरवा रही थी, बताइये क्या काम था मुझसे?”

पारुल- “क्या कहा? तू चाचू से गाण्ड मरवा रही थी, शरम नहीं आयी तुझे। वहां तेरे पापा हाथ में लण्ड लिये तेरी चूत और गाण्ड मारने का इंतज़ार कर रहे हैं और तू यहां चुदवा रही है। तुझे पता नहीं कि हर सुबह आफिस जाने से पहले पापा को तेरी ज़रुरत होती है, वो तेरी चूत और गाण्ड चोदे बिना कहीं नहीं जाते…”

श्रुति- “पता है मामा… लेकिन मैं क्या करूं? कमल चाचू मुझे ज़बरदस्ती कमरे में ले गये। और तुम तो जानती हो मर्द का लौड़ा देखते ही कैसे मेरी चूत और गाण्ड रस छोड़ने लगती है, इसलिये मैं न नहीं कर पायी और चाचू से चुद गयी…”

पारुल- “कमल… आज जो कुछ भी हुआ अच्छा नहीं हुआ। तुम जानते हो कि सोम को आफिस जाने के लिये कितनी देरी हो रही है, मगर वो श्रुति को चोदे बिना कहीं नहीं जायेंगे। फिर तूने श्रुति को क्यों चोदा? पूरा दिन पड़ा था उसे चोदने के लिये, तू बाद में भी तो उसे चोद सकता था…”

कमल- “वो भाभी, क्या हुआ न… मैं आंगन में सुबह-सुबह टहल रहा था तो देखा श्रुति वहां सलवार उतार के संडास कर रही है। वो नाज़ारा देखते ही मुझसे रहा नहीं गया और मैंने श्रुति को अपने कमरे में ले जाके उसकी गाण्ड चाटी और फिर उसकी गाण्ड मारी। सारी भाभी, फिर कभी ऐसा नहीं होगा, मैं सोम भैया के आफिस जाने के बाद चोद लूँगा…”

पारुल- “हां ठीक है कमल… तुमने श्रुति को संडास करते हुए देखा और तुम्हारा लण्ड खड़ा हो गया, पर तुम श्रुति को क्यों अपने कमरे में ले गये? मुझसे कहा होता तो मैं तुमको अपनी गाण्ड मारने दे देती। कम से कम सोम को तकलीफ तो नहीं होती। क्यों क्या तुम्हें अपनी भाभी की गाण्ड चोदने में मज़ा नहीं आता?”

कमल- “अरे नहीं भाभी, ऐसी बात नहीं है, आपकी गाण्ड मारने के लिये तो अपनी जान भी दे सकता हूं। आपकी गाण्ड में इतनी ताकत है की सारी दुनिया इसे चोदेगी तो भी इसकी खूबसूरती कम नहीं होगी, और आपकी गाण्ड का स्वाद तो ज़बरदस्त है। सारी भाभी गलती हो गयी…”

श्रुति- “हां मामा सारी, कल से कभी ऐसा नहीं होगा। मुझे माफ कर दो। चलो पापा के कमरे में चलते हैं, मेरी गाण्ड भी पापा के लण्ड को तरस रही है…”

श्रुति ने पापा के कमरे में जाकर पापा से कहा- “सारी पापा, आपको मेरे लिये इंतेजार करना पड़ा। वो क्या है न… कमल चाचू ने मुझे सुबह-सुबह संडास करते हुए देख लिया तो, उनका दिल बहक गया और उन्होंने मुझे अपने कमरे में ले जाके चोद डाला। वो भी बहुत शर्मिंदा हैं आज के लिये। प्लीज… हमें माफ कर दीजिये पापा, अगली बार ऐसा नहीं होगा। आपसे जी भर के चुदवाने के बाद ही किसी और से चुदवाऊँगी…”

सोम- “नहीं बेटी, मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है, बस तुम तो जानती हो की सुबह जब घर से निकलता हूं तो तुम्हारी गाण्ड चाटके और चोदके ही निकलता हूं। मेरा ऐसा मानना है की ऐसा करने से दिन अच्छा गुज़रेगा। तुम्हें तो पता है की हमारा भड़वागिरी का धंधा है, सब कस्टमर पे डिपेंड करता है। अगर कस्टमर को हमारे यहां की लड़कियां पसंद नहीं आयीं तो फिर मुझे तुम्हारी माँ पारुल को उनके पास भेजना पड़ता है जो मुझे पसंद नहीं है…”

श्रुति- “मुझे पता है पापा, चलिये अब अपनी बेटी को खूब रगड़-रगड़ के चोदिये, मुझे भी आपका लौड़ा बहुत पसंद है पापा, मुझे इसे चूसने में और अपनी चूत और गाण्ड में लेने में बहुत मज़ा आता है। मेरी चूत आपकी है, मेरी गाण्ड भी आपकी है। खूब चोदिये पापा मुझे…”

सोम- “मुझे तुम पे नाज़ है की तुम मेरी बेटी हो। मैं कितना किश्मतवाला हूं की मुझे पारुल जैसी रांड बीवी मिली है, और तुम जैसी छिनाल बेटी को पैदा किया है। चल अब जल्दी से अपने कपड़े उतार, वैसे मैंने नाश्ता भी नहीं किया, अपनी चूत से मूत पिला और अपनी गाण्ड से मुझे पीले-पीले केक्स खिला। अपनी गाण्ड में कुछ बचा के रखा है या सारा हग दिया सुबह-सुबह?”

श्रुति- “नहीं पापा अभी भी आपके नाश्ते के लिये कुछ बचा के रखा है, आइये आपको अपना गाण्ड में पकाया नाश्ता खिलाती हूं…”

पारुल- “बाप और बेटी का ऐसा प्यार कितना अच्छा लगता है न कमल। काश… मेरा भी कोई बाप होता तो मैं उससे खूब चुदवाती… तुर्रर्रर… थुस्सस्स… पुर्रर्र… तूउर्र…”

कमल- “भाभी, ये तुमहारी गाण्ड से कैसी-कैसी आवाज़ें आ रही हैं, लगता है सोम भैया ने खूब मारी है रात को तुम्हारी गाण्ड…”

पारुल- “हां रे कमल, कल तेरे भैया सोम ने मेरी चूत और गाण्ड चोद-चोद के एक कर दी, और उसपर से कल रात खाना भी मसालेदार खा लिया था, ये सब उसी का असर है…”

कमल- तो चलो न भाभी मेरे कमरे में मुझे भी बहुत भूख लगी है, मैंने भी नाश्ता नहीं किया। सोम भैया श्रुति की गाण्ड से खा लेंगे आप मुझे अपनी गाण्ड से खिला देना…”


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पड़ोस के दूसरे घर का दृश्य

आशा- “ओह भैया यह क्या कर रहे हो, छोड़ो न भैया मुझे बहुत काम है…”

समीर- “ओह आशा… तुम्हारी कातिल जवानी से ज़्यादा देर दूर नहीं रह सकता, मेरी प्यारी छोटी राड़ बहन…”

आशा- “अभी घंटे भर पहले ही तो मेरी गाण्ड मार चुके हो, फिर इतनी जल्दी कैसे खड़ा हो गया तुम्हारा लौड़ा…”

समीर- “अगर तुम्हारी जैसी छिनाल बहन घर में गाण्ड हिलाते-हिलाते घूम रही हो तो मुझ जैसे बहनचोद का लौड़ा कैसे चुप रहेगा। मैं बस यहां से गुज़र रहा था तो देखा की तुम्हारा पैजामा तुम्हारी गाण्ड में अटक गया है। ये सीन देखकर मुझसे रहा नहीं गया और मैं चला आया तुम्हारी गाण्ड चाटने को। तेरी गाण्ड चूसने का बेहद दिल कर रहा है आशा, चल उतार अपनी सलवार और टेस्ट लेने दे मुझे तेरी गाण्ड का…”

आशा- “मगर भैया… माँ ने देख लिया तो गज़ब हो जायेगा। अगर माँ को पता चल गया की मैं इस टाइम तुमसे अपनी गाण्ड चटवा रही हूं तो मुझे मार डालेगी। जानते नहीं माँ ने स्ट्रिक्टली कहा है की अगर चोदना चुदवाना है तो सुबह के 9:00 बजे से पहले और रात के 10:00 बजे के बाद…”

समीर- “अरे माँ तो खुद रंडी की तरह अपने चौकीदार नंदू से चुदवा रही है, अभी-अभी देख के आ रहा हूं। और वैसे भी माँ ने चोदने चुदाने को मना किया है, खाने पीने पर तो कोई रोक नहीं है ना। मैं माँ से कह दूंगा की मैं आशा की गाण्ड से अपना नाश्ता खाने और चूत से जूस पीने आया था। तब तो माँ कुछ नहीं कहेगी…”

आशा- “अरे भाई… हां… यह बात तो बिल्कुल सही कही तुमने, मां तो खाने पीने पर कभी नाराज़ नहीं होती…”

माँ कमला बाहर दरवाज़े से सब कुछ देख रही थी और मन ही मन खुश हो रही थी की उसके अपने बच्चे कितने प्यार से एक दूसरे के साथ रहते हैं और एन्जॉय करते हैं।

कमला- “ये सब क्या चल रहा है तुम भाई बहन में?”

समीर- “अरे माँ वो… वो… क्या है न की बस कुछ नहीं ऐसे ही आशा से बात करने आ गया था। कुछ नहीं माँ कोई खास बात नहीं है…”

कमला- “मैंने सब सुन लिया है पर तुम्हें परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है, मैं बिल्कुल नाराज़ नहीं हूं, उल्टा मैं बहुत खुश हूं की तुम दोनों में इतना प्यार और अपनापन है। जो कुछ करना है जल्दी-जल्दी करो, मैं हाल में बैठती हूं…”

आशा- “थैंक्स मां तुम कितनी अच्छी हो, वैसे तुम भी हमें ज्वाइन करो न, जब तक भैया मेरी गाण्ड चूसता है, मैं भी तुम्हारी गाण्ड को टेस्ट करती हूं और फिर हो सके तो कुछ मैं भी तुम्हारी गाण्ड से खा लूंगी, आओ न माँ…”

कमला- “नहीं बेटी… मेरी दोस्त पारुल बहुत दिनों बाद आयी है मुझसे मिलने, मैं उससे हाल में बातें करती हूं तुम लोग जल्दी से ये सब खत्म करके अपने-अपने काम पे लग जाओ…”

पारुल- “और बताओ कमला सब कुछ कैसा चल रहा है?”

कमला- “सब ऊपर वाले की दया है, घर में खुशियां ही खुशियां हैं, पारुल…”

पारुल- “और तुम्हारे बच्चे दिखाई नहीं दे रहे… कहां हैं?”

कमला- “अरे वो दोनों तो किचन में खूब मस्ती कर रहे हैं। मेरी बेटी आशा बहुत बड़ी छिनाल है, अपने भाई समीर से गाण्ड चुसवा रही है। अभी तक तो उसके मुँह में हग भी दिया होगा। और समीर भी अपनी बहन से बहुत प्यार करता है, वो भी अपनी बहन की चूत और गाण्ड का पूरा-पूरा ख्याल रखता है। रात को मेरी चूत और गाण्ड भी एक-एक करके चोदता है मादरचोद। मैं बहुत किश्मतवाली हूं पारुल जो मुझे ऐसा परिवार मिला है…”

पारुल- बहुत खुशी हुई ये जानकर की तुमने अपने बच्चों को इतने अच्छे और सेक्सी संस्कार दिये हैं। मैंने भी अपने परिवार को बिल्कुल चुदक्कड़ बना दिया है। कोई भी किसी को भी जब चाहे, जितना चाहे, जिधर चाहे, चोद सकता है। लेकिन एक बेटे की कमी महसूस होती है। मेरी सिर्फ़ एक बेटी है जो मुझसे भी बड़ी रांड है, लण्ड के बगैर एक घंटा भी नहीं रह सकती। मेरे सोम का भड़वागिरी का धंधा है जो मस्त चल रहा है। बस ऊपर वाले की दया है…”

तभी पारुल को किसी का फोन आता है।

“हैलो पारुल भाभी, मैं जानकी बोल रही हूं, आपके लिये एक बुरी खबर है, श्रुति को पुलिस ने बाज़ारू रांड समझकर गिरफ्तार कर लिया है…”

श्रुति की गिरफ्तारी की खबर सुनकर पारुल घबरा जाती है।

कमला- “क्या हुआ पारुल, तुम इतनी घबरायी हुई सी क्यों हो, सब ठीक तो है न…”

पारुल- “अब क्या बताऊँ कमला, न जाने इस श्रुति ने फिर क्या कर दिया है? पुलिस उसे रंडीगिरी के जुर्म में पकड़ के ले गयी है। मुझे अभी इसी वक्त पुलिस स्टेशन जाना होगा…”

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पुलिस स्टेशन में

पारुल- “श्रुति बेटा ये सब क्या है? क्यों पुलिस तुम्हें यहां पकड़ के लायी है। क्या रंडीपन किया तुमने?”

श्रुति- “मामा वो क्या है न की मैं रोड के किनारे पे बैठ के मूत रही थी, तभी एक 14 साल का बच्चा आके मुझे और मेरी चूत को घूरने लगा। मैंने उससे पूछा- क्यों बे साले क्या देख रहा है? कभी किसी लड़की को मूतते हुए नहीं देखा है क्या?”

तो वो कहने लगा- “देखा तो है मगर ऐसी मस्त चूत कभी नहीं देखी…”

श्रुति- “मुझे उसकी बात अच्छी लगी और मैं उसकी पैंट खोल के उसका लौड़ा मुँह में लेके चूसने लगी। इतने में जानकी आंटी ने मुझे वहां देख लिया और शायद उन्होंने ही पुलिस को शिकायत कर दी…”

पारुल- “श्रुति, तुझसे कितनी बार कहा है, अगर चोदना चुदाना है तो उस लड़के को घर लेके आना था, ऐसे रोड पे तमाशा करने की क्या ज़रूरत थी? तुम्हें तो मालूम है न वो जानकी के बारे में, साली रांड छिनाल, खुद को लौड़ा नहीं मिला चुदवाने के लिये तो जल गयी और मेरी बेटी को अंदर करवा दिया। श्रुति तुम्हें सावधान रहना होगा, अगर तू उस लड़के को घर ले आती तो घर वाले कितने खुश होते। मैं भी उससे गाण्ड मरवा लेती, मगर तेरी जल्दबाज़ी ने सब कुछ खराब कर दिया…”

श्रुति- “मामा सारी, अगली बार मैं ध्यान रखूंगी। मामा मुझे यहां से छुड़ाओ, ये लोग बहुत मारते हैं, गाण्ड देखो लाल कर दिया है मादरचोदों ने मार-मार के। माँ अगर तुम इंस्पेक्टर साहब से गाण्ड मरवा लोगी तो ये मुझे छोड़ देंगे। मामा प्लीज मेरे लिये एक बार गाण्ड मरवा लो न प्लीज… मामा, तुम्हारी गाण्ड की तो सारी दुनिया दीवानी है, एक बार तुम्हारी गाण्ड चोदेगा तो तुम जो कहोगी मानेगा…”

पारुल- “ठीक है मैं अभी कुछ करती हूं, तू फिकर मत कर…”

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अगला भाग

पारुल अपने आप से- “यह सोम को क्या हुआ? बहुत परेशान लग रहे हैं, अभी पता लगाती हूँ…”

पारुल सोम से- “क्या हुआ सोम बहुत उदास बैठे हो, चेहरा तो ऐसा बना रखा है जैसे किसी ने तुम्हारी गाण्ड मार दी हो। क्या टेन्शन है? मुझे बताओ…”

सोम- “अब क्या बताऊँ पारुल, माँ चुद गयी है मेरी। एक कस्टमर आया है, 5 करोड़ का आफर दे रहा है एक रात का, पर उसे एक ऐसी औरत चाहिए जिसकी पाद (फार्ट) बहुत नशीली, बदबूदार और सेक्सी हो। और तो और जिसकी टट्टी बहुत स्वादिष्ट हो…”

पारुल- “तो इसमें इतना परेशान होने की क्या बात है? हमारे रंडी खाने में बहुत सी रंडियां हैं जो यह सब कर सकती हैं, भेज दो किसी एक छिनाल को…”

सोम- “अरे तुम बात को समझ नहीं रही हो पारुल, हमारे यहाँ ऐसी कोई लड़की नहीं है जो 5 करोड़ के कस्टमर को संतुष्ट कर सके। सब छिनालें पादती हैं, हगती हैं मगर कोई भी ऐसी नहीं है जो 5 करोड़ के कस्टमर को संतुष्ट कर सके… अगर यह कस्टमर हमारे हाथ से निकल गया तो हमारे दुश्मन किरानी परिवार की मालती उस कस्टमर को हथिया लेगी। फिर हम लौड़ा हाथ में लेके हिलाते रह जाएँगे…”

पारुल- “अगर आप कहें सोम, तो मैं चली जाती हूँ उसके पास। मैं सोचती हूँ कि मैं उसको अपनी गाण्ड के तुरर तुरर तुस्स्स तूस्स से संतुष्ट कर दूँगी और उसे खूब पेट भरकर अपनी टट्टी भी खिलाकर आ जाऊँगी, प्राब्लम साल्व्ड…”

सोम- “नहीं पारुल, मैं तुम्हें जाने नहीं दूँगा, मुझे तुम्हारा वहाँ जाना पसंद नहीं…”

पारुल- “क्यूँ सोम? मैं क्यूँ नहीं जा सकती, क्या मेरी गाण्ड के पाद में अब वो बात नहीं रही या फिर मेरे गू में वो टेस्ट नहीं रहा? क्या बात है सोम बताओ मुझे?”

सोम- “नहीं पर्वती वो बात नहीं है, तुम्हारी गाण्ड की बास में तो इतना दम है कि 5 करोड़ क्या, 50 करोड़ भी तुम्हारी गाण्ड से आई हुई एक पाद के मुकाबले कम है। मगर मुझे पसंद नहीं की मेरी प्राइवेट रंडी लोगों के सामने गाण्ड हिला-हिला के पादे और उनके मुँह में हगे। मैं बहुत ईर्ष्या महसूस करूँगा पारुल। मैं तुम्हें किसी गैर मर्द को अपनी गाण्ड का हलवा खिलाते नहीं देख सकता। तुम्हारी गाण्ड से निकली हुई हर चीज मेरी और इस परिवार की है बस और किसी की नहीं…”

पारुल- “मुझे बहुत खुशी हुई सोम कि आज भी आपको मेरी गाण्ड और उसमें से निकली हुई चीज़ों से इतना प्यार है। मगर बिज़नेस में नो एथिक्स सोम… मैं उस तुलसी किरानी रांड़ को इस कांट्रैक्ट को लेते हुए नहीं देखना चाहती। मैं दिखा देना चाहती हूँ कि पारुल अगरवाल की गाण्ड के सामने किरानी परिवार बेकार है। गाण्ड बड़ी होने से कुछ नहीं होता, गाण्ड में दम होना चाहिए…”

श्रुति- “मामा, पापा, मैंने सब सुन लिया है। अगर आप कहें तो मैं चली जाती हूँ। मैं भी संडास नहीं गयी हूँ। अगर आप दोनों चाहें तो मैं उस कस्टमर के पास चली जाती हूँ। आपका काम भी हो जाएगा पापा और मामा को भी जाना नहीं पड़ेगा…”

पारुल- “तू अपने कमरे में जा श्रुति…”

श्रुति- “नहीं माँ, मैं सच कह रही हूँ, मैं भी तो आप ही की बेटी हूँ। आपकी गाण्ड का कुछ तो असर मेरी गाण्ड में भी तो होगा, देखिए मैं आपको पाद के भी बताती हूँ- तुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रर तुस्स्स्स्स्स्सस्स तुरर्र तुस्स्स्स्स…”

पारुल- “श्रुति तेरी गाण्ड भी मस्त सेक्सी और नशीली है। मगर बेटा, जो कस्टमर आया है उसे एक औरत की गाण्ड चाहिए, एक लड़की की नहीं। उसे मुझ जैसी चुदी चुदाई मेच्योर्ड रांड़ चाहिए। तू तो अभी कमसिन है बेटा, उसकी प्यास और भूख सिर्फ़ मैं और मेरी गाण्ड ही मिटा सकती है…”

पारुल ने फिर कहा- “सूंघना चाहती है मेरी पाद तो यह ले सूंघ- पुउउर्र्र्ररर… फुररररर… टुउस्स्स्स… तुउउउर्र्र्र्ररर… तुस्स्स्स्स्सस्स… पर… पुर्र्र… हिस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स…”

श्रुति- “वाह मोम… मान गयी मैं तो आपकी गाण्ड को… क्या पाद था? जितनी मधुर आवाज उतना ही बदबूदार मगर नशीली बास… हाँ पापा, आप मामा को ही भेजो, मामा की गाण्ड ही आपको यह कांट्रॅक्ट दिला सकती है…”

सोम- “मगर अब भी मेरा दिल नहीं मान रहा है, मैं पारुल को किसी गैर मर्द से गाण्ड चुदवाने नहीं भेज सकता…”

पारुल- “अब कुछ ज्यादा मत सोचिए सोम, मुझे जाने दीजिए। मेरे संसकार कहते हैं कि जब पति मुशीबत में हो तो पत्नी को उसका साथ देना चाहिए और उसकी मुशीबत दूर करने में पति की मदद करनी चाहिए। रामायण में रावण के वध में सीता का भी उतना ही हाथ था जितना राम का था। मुझे जाने दीजिए… सोम मुझे जाने दीजिए। मुझे अपने परिवार की इज़्ज़त बचाने के लिए यह करना ही होगा, मुझे जाने दीजिए…”

सोम- “ठीक है पारुल जाओ, जाकर हमारे खानदान की इज़्ज़त ऊँची करके लौटो…”

पारुल- “ठीक हैं मैं अभी निकलती हूँ…” पारुल भागने लगती है।

पारुल अपनी गाण्ड के छेद से बात करते हुये- “अरी ऊ मेरी प्यारी सी गाण्ड जरा देर के लिए अपनी तूस्स… तूस्स… को दबा के रख, ज्यादा तूस्स… तूस्स… करेगी तो गू निकल आएगा और सारा प्लान सत्यानाश हो जाएगा। तू थोड़ी देर चुप बैठ, तुझे बहुत जल्दी खुलने का मौका दूँगी बस थोड़ी देर रोक के रख…”

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***** THE END समाप्त *****

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