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संध्या- तो आप मुझसे क्या चहती हैं भाबो?
भाबो- संध्या बींदड़ी, मैं चहती हूँ की तू भी दूध की जिम्मेदारी उठा।
संध्या- भाबो, क्या मैं इस जिम्मेदारी को अच्छी तरह निभा पाऊँगी?
भाबो- “संध्या बींदड़ी, तू पूरी तरह इस जिम्मेदारी को उठा सकती है। घर में सबसे बड़े मुम्मोँ की रानी है तू। तू तो मुझसे भी अच्छी तरह निभा सकती है इस जिम्मेदारी को…”
संध्या- पर भाबो, मेरे मुम्मों से तो एक बूंद दूध भी नहीं निकलता है।
भाबो- “अरे पगली, हम एक जड़ीबूटी से बनी एक गोली रात में खा लेते हैं और सुबह तक मुम्मों में दूध भर जाता है…”
संध्या- तो मैं भी खा सकती हूँ भाबो?
भाबो- बिलकुल संध्या बींदड़ी, बल्की आज से ही खा सकती हो।
संध्या- तो मुझे भी दीजिये कुछ गोली भाबो।
भाबो- “संध्या तू ने आज से यह जिम्मेदारी उठाई है, इसलिए पहली बार में गोली नहीं मिलती। बल्की घर में जो-जो दूध की जिम्मेदारी पहले से उठाई होती है वे उस गोली का पेस्ट बनाकर अपने मुम्मों की निप्पल पर लगा लेती हैं और जिम्मेदारी उठाने बाली औरत उनके मुम्मों को चूसती है…”
संध्या- ठीक है भाबो, मैं मुम्मों को चूसने को तैयार हूँ।
भाबो संध्या से बोली- “जा बींदड़ी, मीना बींदड़ी को भी बुला ले…”
संध्या जब मीना के कमरे में पहुँची तो उसे कुछ आवाज आई। संध्या ने दरबाजा खटखटाया।
तो मीना दरबाजा खोलती है और अपना सर दरबाजे से बाहर निकालकर कहती है- “क्या बात है संध्या, इतनी रात को आप क्या कर रहे हो?”
संध्या- “मीना, तुझे भाबो ने बुलाया है…” संध्या मीना का हाथ पकड़ लेती है और मीना को बाहर की तरफ खींचती है।
मीना- संध्या मैं नंगी हूँ।
संध्या- मीना, तू नंगी क्या कर रही है?
मीना- संध्या, तू इतनी रात को नंगी होकर क्या करती है?
संध्या- मैं तो सूरज जी से चुदती हूँ।
मीना- वही मैं भी कर रही हूँ।
संध्या- पर देवर जी तो बाहर गये हैं, क्या वे आ गए है?
मीना- “मेरे वो तो अभी नहीं आए हैं, पर सबसे छोटे देवर जी तो घर पर है ना…”
संध्या- “मीना, तू सबसे छोटे देवर जी से चुद रही है? भाबो को पता चल गया तो तेरी खैर नहीं…”
मीना- “अरे संध्या, यह मेरा हक है और जो भी तुम्हें पूछना है भाबो से जाकर पूछो…”
संध्या- “ठीक है। पर मीना तू जल्दी किचेन में आ जाना…”
संध्या किचेन में जाती है और भाबो से इस सब के बारे में पूछती है- “भाबो, मीना छोटे देवर जी से चुदवा रही है, क्या यह ठीक है?”
भाबो- “संध्या बींदड़ी, तू सोच मीना बींदड़ी मैं और अब तू भी इस घर के लिए कितना कुछ करते हैं? माँ, भाभी, बहन सभी औरतों का दूध हमारे घर के मर्द लोग पीते हैं, तो वे भी बदले में हमारी चुदने की ईच्छा पूरी कर देते हैं। मतलब दूध पीना उनका हक है, और चुदना हमारा… और जहां तक चुदने का सबाल है तो मीना बींदड़ी घर के सभी मर्दो से चुदवाती है और मैं भी… बस चुदने की शर्त यह है की आपका पति या पत्नी घर पर नहीं हो, तभी आप दूसरे से चुदवा सकती हो…”
संध्या- “हाँ भाबो, मैं समझ गई हूँ। भाबो मुझे गले से लगा लो ना…”
भाबो- “यह भी कोई पूछने की बात है…” और भाबो ने अपनी और संध्या की साड़ी का पल्लू हटा दिया और अपने और संध्या के ब्लाउस का एक हुक खोल दिया। फिर भाबो ने संध्या को गले से लगा लिया।
कुछ देर बाद वहां मीना बींदड़ी आ गई और बोली- भाबो, आपने मुझे बुलाया था?
भाबो- “हाँ मीना बींदड़ी, आज संध्या बींदड़ी भी दूध की जिम्मेदारी उठाने जा रही है…”
मीना- यह तो आच्छी बात है। भाबो, मैं गोली का पेस्ट बनाकर लाती हूँ।
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