Antarvasna, desi kahani: मैं रेलवे स्टेशन पर बैठा ट्रेन का इंतजार कर रहा था लेकिन अभी भी ट्रेन आई नहीं थी और मैं स्टेशन पर ही बैठा हुआ था। मैंने अपनी घड़ी में समय देखा तो उस वक्त रात के 10:00 बज रहे थे। मैं कुछ दिनों के लिए अहमदाबाद अपने काम से गया हुआ था और अब मैं दिल्ली वापस लौट रहा था लेकिन ट्रेन अभी तक आई नहीं थी। करीब आधे घंटे के बाद ट्रेन आ गई और जब ट्रेन आई तो मैंने अपना सामान ट्रेन में रखा और मैं अपनी सीट पर बैठ गया। मैं जैसे ही अपनी सीट पर बैठा तभी मुझे पापा का फोन आया और वह कहने लगे कि राकेश बेटा तुम कहां हो। मैंने उन्हें बताया कि मैं ट्रेन में हूं और कल तक मैं दिल्ली पहुंच जाऊंगा पापा कहने लगे कि हां मैंने तुम्हें इसीलिए फोन किया था। मैंने पापा को कहा कि कल मैं दिल्ली पहुंच जाऊंगा और अगले मैं दिल्ली पहुंच चुका था। जब अगले दिन मैं दिल्ली पहुंचा तो मैंने रेलवे स्टेशन से टैक्सी ली और उसके बाद मैं अपने घर चला आया।
जब मैं अपने घर पर गया तो पापा घर पर नहीं थे मैंने मां से पूछा कि मां पापा कहां है तो मां ने कहा कि वह बस कुछ देर पहले ही अपने दोस्त से मिलने के लिए गए हैं। मैंने अपने कपड़े चेंज किए और उसके बाद मां ने मुझे कहा कि बेटा तुम कुछ खा लो। मां ने मेरे लिए खाना बना दिया और मैं खाना खाने के बाद कुछ देर मां के साथ बैठा रहा तभी पापा भी आ चुके थे। जब पापा आए तो पापा और मैं एक दूसरे से बातें करने लगे पापा ने मुझे कहा कि बेटा आज हम लोग तुम्हारे मामा जी से मिलने के लिए जा रहे हैं। मैंने पापा से कहा कि मैं भी आज आपके साथ मामा जी से मिलने आता हूं काफी समय हो गया था मैं मामाजी को मिला नहीं था। उस रात हम लोग मामा जी के घर चले गए काफी लंबे समय बाद मैं मामा जी से मुलाकात कर रहा था तो मामा जी को भी बहुत अच्छा लगा। मुझे भी बड़ा अच्छा लगा था जब मैं मामा जी से मिला था उस दिन हम लोगों ने मामा जी के घर पर ही डिनर किया और फिर हम लोग घर लौट आए।
जब हम लोग घर लौटे तो मैं कुछ देर अपने फेसबुक मैसेंजर से अपने दोस्तों से बात कर रहा था। काफी लंबे समय बाद मेरी अपने दोस्तों से बात हो रही थी उसी दिन जब मेरी बात निकिता के साथ हुई तो मुझे निकिता से बात कर के बहुत अच्छा लगा। निकिता और मैं स्कूल में साथ में पढ़ा करते थे लेकिन हम लोगों का काफी समय से कोई संपर्क नहीं था। निकिता भी दिल्ली में ही रहती है और उस दिन जब निकिता ने मुझसे बात की तो मैंने निकिता से कहा कि कभी तुम्हारे पास समय हो तो मुझे जरूर मिलना, निकिता ने कहा कि हां क्यों नहीं। यह भी बड़ा अजीब इत्तेफाक था कि एक दिन निकिता मुझे मेरी कॉलोनी में ही मिली। जब निकिता मुझे मिली तो मैंने निकिता से पूछा कि क्या तुम यहां किसी से मिलने आई थी तो निकिता ने मुझे बताया कि हमारी कॉलोनी में उसकी एक सहेली रहती है। मैंने निकिता से उस दिन काफी देर तक बात की और निकिता से बात कर के मुझे बहुत ही अच्छा लगा। निकिता से बात कर के मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और निकिता को भी बड़ा अच्छा लगा था जब वह मेरे साथ बात कर रही थी।
उस दिन के बाद मैं और निकिता एक दूसरे को अक्सर मिलने लगे थे जब भी हम दोनों एक दूसरे को मिलते तो हमें बहुत ही अच्छा लगता। निकिता को भी बहुत ही अच्छा लगता जब भी हम दोनों एक दूसरे से मिला करते। निकिता और मैं एक दूसरे को बहुत ही अच्छे से समझते हैं और अब हम लोगों के बीच कुछ ज्यादा ही नजदीकियां बढ़ने लगी थी। यही वजह थी कि मैं निकिता को अक्सर मिला करता था और निकिता भी मुझसे मिलने लगी थी। कहीं ना कहीं हम दोनों के दिल में एक दूसरे के लिए प्यार उभरने लगा था और यह प्यार अब काफी ज्यादा बढ़ने लगा था। जिस तरीके से निकिता मेरा ध्यान रखती तो मैं निकिता को बहुत ज्यादा प्यार करने लगा था। एक दिन मैंने निकिता से अपने प्यार का इजहार कर ही दिया जब मैंने निकिता से अपने प्यार का इजहार किया तो वह बहुत ज्यादा खुश थी और मैं भी काफी खुश था। निकिता भी मुझे मना ना कर सकी निकिता बहुत ही बिंदास किस्म की है। वह एक दिन मेरे साथ बैठी हुई थी जब हम दोनों साथ में बैठे हुए थे तो निकिता ने मुझसे कहा कि वह कुछ दिनों के लिए अहमदाबाद जा रही है।
मैंने निकिता से कहा कि क्या वह किसी जरूरी काम से अहमदाबाद जा रही है तो निकिता ने मुझे बताया कि वहां पर उसके किसी रिलेटिव की शादी है। मैंने निकिता से कहा कि मुझे भी कुछ दिनों के बाद अहमदाबाद जाना है तो हम लोग अहमदाबाद में ही एक दूसरे से मिलते हैं। निकिता ने कहा कि ठीक है क्योंकि निकिता को अगले दिन ही अमदाबाद जाना था और वह अपनी फैमिली के साथ अहमदाबाद जा चुकी थी। मुझे दो दिन बाद अहमदाबाद जाना था और जब दो दिनों के बाद मैं अहमदाबाद गया तो मैं निकिता से मिला निकिता से मिलकर मुझे अच्छा लगा। मैं करीब दो दिन तक अहमदाबाद में रहा और फिर मैं वापस लौट आया था लेकिन निकिता अभी भी अहमदाबाद में ही थी और मेरी उससे फोन पर ही बातें हो रही थी।
मैंने निकिता से कहा कि तुम दिल्ली कब वापस आ रही हो तो उसने मुझे कहा कि मैं जल्द ही दिल्ली वापस आ रही हूं। निकिता जब दिल्ली वापस आई तो उस दिन निकिता का जन्मदिन था और मैं चाहता था कि निकिता के बर्थडे को हम लोग बड़े ही अच्छे से सेलिब्रेट करें। मैंने और निकिता ने उसके जन्मदिन को सेलिब्रेट किया तो निकिता भी बड़ी खुश थी और मुझे भी बहुत अच्छा लगा जिस तरीके से हम दोनों ने एक दूसरे के साथ उस दिन समय बिताया था। निकिता और मैं एक दूसरे को बहुत ही अच्छे से समझते हैं और हम दोनों के बीच बढ़ती नजदीकियां दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही थी। हम चाहते थे कि हम दोनों एक दूसरे से शादी कर ले लेकिन मैं चाहता था कि हम दोनों थोड़ा समय एक दूसरे को दें जिससे कि हम दोनों एक दूसरे को और अच्छे से समझ पाए। निकिता भी मेरी बात मान गई और हम दोनों ने एक दूसरे से शादी करने का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दिया था।
निकिता के परिवार वालों को भी इस बात का पता था कि निकिता और मेरे बीच रिलेशन है और मेरे परिवार को भी निकिता के बारे में मालूम था। हमारे रिश्ते से किसी को भी कोई एतराज नहीं था हम दोनों एक दूसरे को रोज मिलते। जब भी एक दूसरे के साथ हम दोनों होते तो हम दोनों साथ में काफी अच्छा समय बिताया करते। निकिता और मैं एक दूसरे को काफी ज्यादा प्यार करते हैं जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते है तो हमें बड़ा ही अच्छा लगता है। जब भी निकिता और मेरी बात फोन पर होते है तो हम दोनों एक दूसरे को गर्म करने की कोशिश किया करते कई बार हम लोगों के बीच फोन सेक्स भी होता। मैंने कई बार निकिता से बात करते हुए हस्तमैथुन का मजा भी लिया। अब मुझे लगने लगा था निकिता और मुझे सेक्स करना चाहिए था। हम दोनों ने सेक्स करने के बारे में सोचा क्योंकि हम दोनों की रजामंदी थी इसलिए किसी को कोई भी ऐतराज नहीं था। हम दोनों उस दिन सेक्स करने के लिए तैयार थे क्योंकि निकिता मुझसे बहुत प्यार करती है वह मुझ पर बहुत भरोसा भी करती है इसलिए हम दोनों उस दिन एक साथ ही रुके। जब निकिता के होंठो को चूमना शुरु किया तो मैं और निकिता एक दूसरे के साथ थे।
मैंने निकिता के साथ सेक्स संबध बनाए और मैं बहुत खुश था जिस तरह मैंने निकिता को चोदा। निकिता मेरे बगल मे थी और मैंने उसकी जांघो को सहलाया। जब मैं निकिता की जांघो को सहला रहा था तो मुझे मजा आता और निकिता को भी भजा आ रहा था। वह तडप रही थी मैंने उसके कपडो को खोला तो वह मचल रही थी और मेरा साथ दे रही थी अब हम दोनो तडप रहे थे मैंने निकिता के होंठो को बहुत अच्छे से चूसा। मुझे मजा आ रहा था और वह मेरी आग को बढा रही थी। मैंने जब निकिता के स्तनो को सहलाया और उनका रसपान किया तो मुझे मजा आ रहा था और निकिता भी तडप रही थी।वह अपने पैरो को चौडा कर रही थी। मैं निकिता की चूत को सहला रहा था और वह तडप रही थी वह मुझे कहने लगी मेरी चूत मे लंड डाल दो।
मैंने निकिता की चूत मे लंड को सटाया तो उसकी चूत मेरे लंड को महसूस कर रही थी और गिली हो चुकी थी। वह मुझे कहने लगी मेरी चूत मे लंड डाल दो। मैंने उसके पैरो को कंधे पर रखा और निकिता को चोदना शुरु किया। अब हम दोनो एक दूसरे का साथ अच्छे से दे रहे थे और मैं निकिता की चूत का मजा ले रहा था। जब मैं उसे चोद रहा था तो उसकी सिसकारियां बढ रही थी। मैं निकिता की चूत की गर्मी को बढा चुका था। निकिता को बड़ा मजा आ रहा था। उसके चेहरे मे एक अलग ही खुशी नजर आ रही थी और मैं उसकी चूत के अंदर तक लंड को घुसा रहा था। निकिता मेरा साथ अच्छे से दिए जा रही थी। मैंने उसके पैंरो को चौडा किया और मेरा माल गिरने को था। जब मैंने अपने माल को निकिता के स्तनो पर गिराया तो हम दोनो को मजा आ गया था। निकिता और मैंने अपने कपडे पहन लिए थे जिसके बाद हम दोनो ने एक दूसरे के होंठो को चूमा और फिर मैंने निकिता को उसके घर पर छोड दिया था। निकिता को जब भी मेरे साथ सेक्स करना होता तो मुझे मजा आता और मैं बहुत खुश होता था जब भी हम दोनो सेक्स किया करते।
जब मैं अपने घर पर गया तो पापा घर पर नहीं थे मैंने मां से पूछा कि मां पापा कहां है तो मां ने कहा कि वह बस कुछ देर पहले ही अपने दोस्त से मिलने के लिए गए हैं। मैंने अपने कपड़े चेंज किए और उसके बाद मां ने मुझे कहा कि बेटा तुम कुछ खा लो। मां ने मेरे लिए खाना बना दिया और मैं खाना खाने के बाद कुछ देर मां के साथ बैठा रहा तभी पापा भी आ चुके थे। जब पापा आए तो पापा और मैं एक दूसरे से बातें करने लगे पापा ने मुझे कहा कि बेटा आज हम लोग तुम्हारे मामा जी से मिलने के लिए जा रहे हैं। मैंने पापा से कहा कि मैं भी आज आपके साथ मामा जी से मिलने आता हूं काफी समय हो गया था मैं मामाजी को मिला नहीं था। उस रात हम लोग मामा जी के घर चले गए काफी लंबे समय बाद मैं मामा जी से मुलाकात कर रहा था तो मामा जी को भी बहुत अच्छा लगा। मुझे भी बड़ा अच्छा लगा था जब मैं मामा जी से मिला था उस दिन हम लोगों ने मामा जी के घर पर ही डिनर किया और फिर हम लोग घर लौट आए।
जब हम लोग घर लौटे तो मैं कुछ देर अपने फेसबुक मैसेंजर से अपने दोस्तों से बात कर रहा था। काफी लंबे समय बाद मेरी अपने दोस्तों से बात हो रही थी उसी दिन जब मेरी बात निकिता के साथ हुई तो मुझे निकिता से बात कर के बहुत अच्छा लगा। निकिता और मैं स्कूल में साथ में पढ़ा करते थे लेकिन हम लोगों का काफी समय से कोई संपर्क नहीं था। निकिता भी दिल्ली में ही रहती है और उस दिन जब निकिता ने मुझसे बात की तो मैंने निकिता से कहा कि कभी तुम्हारे पास समय हो तो मुझे जरूर मिलना, निकिता ने कहा कि हां क्यों नहीं। यह भी बड़ा अजीब इत्तेफाक था कि एक दिन निकिता मुझे मेरी कॉलोनी में ही मिली। जब निकिता मुझे मिली तो मैंने निकिता से पूछा कि क्या तुम यहां किसी से मिलने आई थी तो निकिता ने मुझे बताया कि हमारी कॉलोनी में उसकी एक सहेली रहती है। मैंने निकिता से उस दिन काफी देर तक बात की और निकिता से बात कर के मुझे बहुत ही अच्छा लगा। निकिता से बात कर के मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और निकिता को भी बड़ा अच्छा लगा था जब वह मेरे साथ बात कर रही थी।
उस दिन के बाद मैं और निकिता एक दूसरे को अक्सर मिलने लगे थे जब भी हम दोनों एक दूसरे को मिलते तो हमें बहुत ही अच्छा लगता। निकिता को भी बहुत ही अच्छा लगता जब भी हम दोनों एक दूसरे से मिला करते। निकिता और मैं एक दूसरे को बहुत ही अच्छे से समझते हैं और अब हम लोगों के बीच कुछ ज्यादा ही नजदीकियां बढ़ने लगी थी। यही वजह थी कि मैं निकिता को अक्सर मिला करता था और निकिता भी मुझसे मिलने लगी थी। कहीं ना कहीं हम दोनों के दिल में एक दूसरे के लिए प्यार उभरने लगा था और यह प्यार अब काफी ज्यादा बढ़ने लगा था। जिस तरीके से निकिता मेरा ध्यान रखती तो मैं निकिता को बहुत ज्यादा प्यार करने लगा था। एक दिन मैंने निकिता से अपने प्यार का इजहार कर ही दिया जब मैंने निकिता से अपने प्यार का इजहार किया तो वह बहुत ज्यादा खुश थी और मैं भी काफी खुश था। निकिता भी मुझे मना ना कर सकी निकिता बहुत ही बिंदास किस्म की है। वह एक दिन मेरे साथ बैठी हुई थी जब हम दोनों साथ में बैठे हुए थे तो निकिता ने मुझसे कहा कि वह कुछ दिनों के लिए अहमदाबाद जा रही है।
मैंने निकिता से कहा कि क्या वह किसी जरूरी काम से अहमदाबाद जा रही है तो निकिता ने मुझे बताया कि वहां पर उसके किसी रिलेटिव की शादी है। मैंने निकिता से कहा कि मुझे भी कुछ दिनों के बाद अहमदाबाद जाना है तो हम लोग अहमदाबाद में ही एक दूसरे से मिलते हैं। निकिता ने कहा कि ठीक है क्योंकि निकिता को अगले दिन ही अमदाबाद जाना था और वह अपनी फैमिली के साथ अहमदाबाद जा चुकी थी। मुझे दो दिन बाद अहमदाबाद जाना था और जब दो दिनों के बाद मैं अहमदाबाद गया तो मैं निकिता से मिला निकिता से मिलकर मुझे अच्छा लगा। मैं करीब दो दिन तक अहमदाबाद में रहा और फिर मैं वापस लौट आया था लेकिन निकिता अभी भी अहमदाबाद में ही थी और मेरी उससे फोन पर ही बातें हो रही थी।
मैंने निकिता से कहा कि तुम दिल्ली कब वापस आ रही हो तो उसने मुझे कहा कि मैं जल्द ही दिल्ली वापस आ रही हूं। निकिता जब दिल्ली वापस आई तो उस दिन निकिता का जन्मदिन था और मैं चाहता था कि निकिता के बर्थडे को हम लोग बड़े ही अच्छे से सेलिब्रेट करें। मैंने और निकिता ने उसके जन्मदिन को सेलिब्रेट किया तो निकिता भी बड़ी खुश थी और मुझे भी बहुत अच्छा लगा जिस तरीके से हम दोनों ने एक दूसरे के साथ उस दिन समय बिताया था। निकिता और मैं एक दूसरे को बहुत ही अच्छे से समझते हैं और हम दोनों के बीच बढ़ती नजदीकियां दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही थी। हम चाहते थे कि हम दोनों एक दूसरे से शादी कर ले लेकिन मैं चाहता था कि हम दोनों थोड़ा समय एक दूसरे को दें जिससे कि हम दोनों एक दूसरे को और अच्छे से समझ पाए। निकिता भी मेरी बात मान गई और हम दोनों ने एक दूसरे से शादी करने का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दिया था।
निकिता के परिवार वालों को भी इस बात का पता था कि निकिता और मेरे बीच रिलेशन है और मेरे परिवार को भी निकिता के बारे में मालूम था। हमारे रिश्ते से किसी को भी कोई एतराज नहीं था हम दोनों एक दूसरे को रोज मिलते। जब भी एक दूसरे के साथ हम दोनों होते तो हम दोनों साथ में काफी अच्छा समय बिताया करते। निकिता और मैं एक दूसरे को काफी ज्यादा प्यार करते हैं जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते है तो हमें बड़ा ही अच्छा लगता है। जब भी निकिता और मेरी बात फोन पर होते है तो हम दोनों एक दूसरे को गर्म करने की कोशिश किया करते कई बार हम लोगों के बीच फोन सेक्स भी होता। मैंने कई बार निकिता से बात करते हुए हस्तमैथुन का मजा भी लिया। अब मुझे लगने लगा था निकिता और मुझे सेक्स करना चाहिए था। हम दोनों ने सेक्स करने के बारे में सोचा क्योंकि हम दोनों की रजामंदी थी इसलिए किसी को कोई भी ऐतराज नहीं था। हम दोनों उस दिन सेक्स करने के लिए तैयार थे क्योंकि निकिता मुझसे बहुत प्यार करती है वह मुझ पर बहुत भरोसा भी करती है इसलिए हम दोनों उस दिन एक साथ ही रुके। जब निकिता के होंठो को चूमना शुरु किया तो मैं और निकिता एक दूसरे के साथ थे।
मैंने निकिता के साथ सेक्स संबध बनाए और मैं बहुत खुश था जिस तरह मैंने निकिता को चोदा। निकिता मेरे बगल मे थी और मैंने उसकी जांघो को सहलाया। जब मैं निकिता की जांघो को सहला रहा था तो मुझे मजा आता और निकिता को भी भजा आ रहा था। वह तडप रही थी मैंने उसके कपडो को खोला तो वह मचल रही थी और मेरा साथ दे रही थी अब हम दोनो तडप रहे थे मैंने निकिता के होंठो को बहुत अच्छे से चूसा। मुझे मजा आ रहा था और वह मेरी आग को बढा रही थी। मैंने जब निकिता के स्तनो को सहलाया और उनका रसपान किया तो मुझे मजा आ रहा था और निकिता भी तडप रही थी।वह अपने पैरो को चौडा कर रही थी। मैं निकिता की चूत को सहला रहा था और वह तडप रही थी वह मुझे कहने लगी मेरी चूत मे लंड डाल दो।
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