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"तुम्हारे ख्याल से सिचुयेशन कैसी है ?" कॉनट्रॉलर ने त्रिभुवन की ओर सिगरेट बढ़ाते हुए पूछा.
"सिचुयेशन तो मुझसे बेहतर आप जानते है." त्रिभुवन ने सिगरेट लेते हुए कहा- "उस प्लेन मे जो यह विजय नाम का आदमी इस वक़्त पाइलट की शीट पर बैठा हुआ वो अभी तो बहुत हिम्मत वाला लग रहा है...लेकिन यह परिस्थिति इतनी गंभीर और ख़तरनाक है की बड़े-बड़े हिम्मत वालो के हिम्मत खफा हो जाते है."
"क्या वो प्लेन को सही सलामत नीचे उतरने मे कामयाब हो जाएगा ?" कॉनट्रॉलर ने अपनी और त्रिभुवन की सिगरेट सुलगाते हुए कहा.
"मै अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हू." त्रिभुवन बोला- "लेकिन सब कुछ इस आदमी विजय पर निर्भर करता है.....अगर ऐन वक़्त पर घबराहट के कारण इसके हाथ-पैर फूल गये तो...अब . क्या कहु...उस हालत मे तो समझो कुछ भी हो सकता है."
"यानी जबरदस्त दुर्घटना हो सकती है ?"
"अगर वो सही ढंग से नही उतार पाया तो जबरदस्त क्र्रस हो सकता है...उस हालत मे प्लेन मे निश्चित रूप से आग लग जाएगी...एक आदमी भी बचना मुस्किल हो जाएगा....अगर वो उसे समुन्द्र मे उतारता है तो पानी के आघात से प्लेन बिल्कुल नॅस्ट हो जाएगा...मगर तब हम शायद कुछ लोगो को बचा सके...."
"नेवी को अलर्ट करो." कॉनट्रॉलर ने अपने असिस्टेंट से कहा- "एरफोर्स को भी...उनसे कहो की वे किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहे और अगले निर्देश की प्रतीकच्छा करे."
"लेकिन मै नही चाहूँगा की प्लेन को समुन्द्र मे उतरा जाए." त्रिभुवन बोला- "उसमे बहुत लोगो के मरने का ख़तरा है."
"लेकिन अगर हम उसे एरपोर्ट पर उतारने की कोशिश करते है और वो नही उतार पाया तो सबके-सब लोगो के मारे जाने का ख़तरा है."
"लेकिन अगर वो प्लेन को उतारने मे कामयाब हो गया तो सबके बच जाने का चान्स भी है."
साप-छू छूंदर जैसी हालत हो गयी थी...कुछ समझ मे नही आ रहा था की क्या किया जाए.
"हेलो रडार." त्रिभुवन ने हेडसेट अपने सिर पर चढ़ाने के बाद कहा- "वो प्लेन अभी तुम्हारे रेंज मे आया या नही ?"
"अभी तो नही." दूसरी ओर का जवाब उसके कानो मे गूंजा"- "रूको...एक मिनिट...कुछ आ रहा है...हा कॅप्टन...वो रेंज मे आ गया है...वो ट्रेक से 10 मिल दक्षिण मे है...उससे कहो की वो दाए को 235 की हेडिंग पर जाए."
"ठीक है." कहने के साथ ही त्रिभुवन ने प्लेन से कनेक्ट करने का संकेत दिया.
"हेलो सिक्स-वन-फोर." त्रिभुवन ने माइक्रोफॉन मे कहा- "तुम मेरे निर्देशों को सही ढंग से समझ कर उन पर अमल कर रहे हो ना ?"
"राजनगर." विजय की आवाज़ आई.
"कोई दिक्कत तो नही आ रही ?"
"कोई ख़ास्स दिक्कत तो नही आ रही" विजय का स्वर आया- "ऐसा लग रहा है जैसे छोटी कार चलाने वाले को किसी बड़े भाड़ी ट्रक की ड्राइविंग की शीट पर बैठा दिया हो."
"गुड...वेरी गुड... अब हम तुम्हे रडार पर देख सकते है....तुम सही रास्ते से 10 मिल दक्षिण मे हो...मै चाहता हू की तुम सावधानी के साथ दाए को हो जाओ...अपने "थ्रोट्ल" का ईस्तमाल करते हुए इसी स्पीड को कायम रखो और प्लेन को 235 की हैडिंग पर ले आओ..ठीक से समझ गये ना ?"
"बिल्कुल समझ गया."
"टॉवेर को सावधान करो."कॉनट्रॉलर ने चिल्ला कर अपने असिस्टेंट से कहा- "उनसे कहो की फायर-ब्रिगेड के आदमियो को अलर्ट करे."
"हेलो राज नगर." तभी विजय की आवाज़ गूँजी- "तुम्हारे निर्देश अनुसार हम अब 235 की हेनडिंग पर पहुच गये है."
"बहुत अछी." त्रिभुवन ने अपनी आवाज़ मे ज़बरदस्ती सा उत्साह बरते हुए कहा- "तुम बहुत बढ़िया काम कर रहे हो...जो कुछ भी मैने तुम्हे बताया है उसे एक बार अछीतरह फिर से दोहराव...फिर शायद मौका ना मिले..क्यूंकी अब तुम बहुत जल्दी एरपोर्ट पर पहुँचने वाले हो..."
विजय दोहराने लगा.
"सिचुयेशन तो मुझसे बेहतर आप जानते है." त्रिभुवन ने सिगरेट लेते हुए कहा- "उस प्लेन मे जो यह विजय नाम का आदमी इस वक़्त पाइलट की शीट पर बैठा हुआ वो अभी तो बहुत हिम्मत वाला लग रहा है...लेकिन यह परिस्थिति इतनी गंभीर और ख़तरनाक है की बड़े-बड़े हिम्मत वालो के हिम्मत खफा हो जाते है."
"क्या वो प्लेन को सही सलामत नीचे उतरने मे कामयाब हो जाएगा ?" कॉनट्रॉलर ने अपनी और त्रिभुवन की सिगरेट सुलगाते हुए कहा.
"मै अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हू." त्रिभुवन बोला- "लेकिन सब कुछ इस आदमी विजय पर निर्भर करता है.....अगर ऐन वक़्त पर घबराहट के कारण इसके हाथ-पैर फूल गये तो...अब . क्या कहु...उस हालत मे तो समझो कुछ भी हो सकता है."
"यानी जबरदस्त दुर्घटना हो सकती है ?"
"अगर वो सही ढंग से नही उतार पाया तो जबरदस्त क्र्रस हो सकता है...उस हालत मे प्लेन मे निश्चित रूप से आग लग जाएगी...एक आदमी भी बचना मुस्किल हो जाएगा....अगर वो उसे समुन्द्र मे उतारता है तो पानी के आघात से प्लेन बिल्कुल नॅस्ट हो जाएगा...मगर तब हम शायद कुछ लोगो को बचा सके...."
"नेवी को अलर्ट करो." कॉनट्रॉलर ने अपने असिस्टेंट से कहा- "एरफोर्स को भी...उनसे कहो की वे किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहे और अगले निर्देश की प्रतीकच्छा करे."
"लेकिन मै नही चाहूँगा की प्लेन को समुन्द्र मे उतरा जाए." त्रिभुवन बोला- "उसमे बहुत लोगो के मरने का ख़तरा है."
"लेकिन अगर हम उसे एरपोर्ट पर उतारने की कोशिश करते है और वो नही उतार पाया तो सबके-सब लोगो के मारे जाने का ख़तरा है."
"लेकिन अगर वो प्लेन को उतारने मे कामयाब हो गया तो सबके बच जाने का चान्स भी है."
साप-छू छूंदर जैसी हालत हो गयी थी...कुछ समझ मे नही आ रहा था की क्या किया जाए.
"हेलो रडार." त्रिभुवन ने हेडसेट अपने सिर पर चढ़ाने के बाद कहा- "वो प्लेन अभी तुम्हारे रेंज मे आया या नही ?"
"अभी तो नही." दूसरी ओर का जवाब उसके कानो मे गूंजा"- "रूको...एक मिनिट...कुछ आ रहा है...हा कॅप्टन...वो रेंज मे आ गया है...वो ट्रेक से 10 मिल दक्षिण मे है...उससे कहो की वो दाए को 235 की हेडिंग पर जाए."
"ठीक है." कहने के साथ ही त्रिभुवन ने प्लेन से कनेक्ट करने का संकेत दिया.
"हेलो सिक्स-वन-फोर." त्रिभुवन ने माइक्रोफॉन मे कहा- "तुम मेरे निर्देशों को सही ढंग से समझ कर उन पर अमल कर रहे हो ना ?"
"राजनगर." विजय की आवाज़ आई.
"कोई दिक्कत तो नही आ रही ?"
"कोई ख़ास्स दिक्कत तो नही आ रही" विजय का स्वर आया- "ऐसा लग रहा है जैसे छोटी कार चलाने वाले को किसी बड़े भाड़ी ट्रक की ड्राइविंग की शीट पर बैठा दिया हो."
"गुड...वेरी गुड... अब हम तुम्हे रडार पर देख सकते है....तुम सही रास्ते से 10 मिल दक्षिण मे हो...मै चाहता हू की तुम सावधानी के साथ दाए को हो जाओ...अपने "थ्रोट्ल" का ईस्तमाल करते हुए इसी स्पीड को कायम रखो और प्लेन को 235 की हैडिंग पर ले आओ..ठीक से समझ गये ना ?"
"बिल्कुल समझ गया."
"टॉवेर को सावधान करो."कॉनट्रॉलर ने चिल्ला कर अपने असिस्टेंट से कहा- "उनसे कहो की फायर-ब्रिगेड के आदमियो को अलर्ट करे."
"हेलो राज नगर." तभी विजय की आवाज़ गूँजी- "तुम्हारे निर्देश अनुसार हम अब 235 की हेनडिंग पर पहुच गये है."
"बहुत अछी." त्रिभुवन ने अपनी आवाज़ मे ज़बरदस्ती सा उत्साह बरते हुए कहा- "तुम बहुत बढ़िया काम कर रहे हो...जो कुछ भी मैने तुम्हे बताया है उसे एक बार अछीतरह फिर से दोहराव...फिर शायद मौका ना मिले..क्यूंकी अब तुम बहुत जल्दी एरपोर्ट पर पहुँचने वाले हो..."
विजय दोहराने लगा.