उपर से गिरते हुए थूक से और भी चिकना हो गया था मैने अब उनके कूल्हों को थोड़ा सा चौड़ा किया और अपने लंड को वहाँ पे टिका दिया ज़ोर लगाने पर मेरा सुपाडा अंदर घूंस गया मामी को थोड़ा दर्द सा हो रहा था पर वो भी तैयार थी अपनी गान्ड मुझे देने क लिए मामी की गान्ड ज़्यादा टाइट नही थी तो ज़्यादा मुश्किल नही हुई और कुछ प्रयासो के बाद मेरा पूरा लंड अंदर तक समा गया मामी बोली ज़ोर ज़ोर से मेरी गान्ड चोदना मैं कहा डार्लिंग चिंता मत करो बस मेरा साथ दो मैने पूरे लंड को बाहर निकाल लिया और फिर एक दम से वापिस अंदर डाल दिया मामी बोली आआक्ककककककककककककककककककककककककककककुउुुुुुुुुुुुुुुउउ मैने कहा अभी तो कह रही थी कि ज़ोर से चोदना तो फिर उन्होने चूं ही नही की और मैं लगा स्टार्ट होने आज कई दिनो बाद गान्ड मार रहा था तो लंड भी थोड़ा ज़्यादा ही कड़क हो रहा था
मामी मेरे हर प्रहार की शक्ति को अपने चुतडो पे झेल रही थी मामी के नरम नरम चुतडो से जब मेरी टांगे टकराती तो उनका पूरा बोझ उनपे पड़ने लगा था वो मेरे बोझ से दबी जा रही थी उनकी गान्ड का छेद मेरे लंड पे किसी टोपी की तरह कसा हुआ था 20 मिनट तक लगातार गान्ड चुदाई चलती रही मामी भी फुल एंजाय कर रही थी मेरी रफ़्तार टॉप गियर मे थी अब मेरा बस निकलने ही वाला था तो मैने दो-चार झटके और मारे और लंड को बाहर निकाल के उनके गौरे गौरे चुतडो पे सफेद पानी की बारिश कर दी एक झटके से लंड बहार आने से मामी को भी थोड़ा आराम मिला चुतडो पे सफेद चिपचिपी बूंदे चमकने लगी थी मैं काफ़ी देर तक उनके चुतडो को ही निहारता रहा फिर मैं उठा और बाहर आया और पानी से अपने लंड को धोने लगा
मामी भी आ गयी और अपनी गान्ड को सॉफ करने लगी कुछ छपके उन्होने अपनी चूत पे भी मारे मैने कहा आप अंदर चलो मैं एक बार पानी की सप्लाइ को चेक करके आता हूँ और पानी की क्यारियो की तरफ चल पड़ा एक तो धून्ध ज़्यादा पड़ रही थी तो थोड़ी परेशानी हो रही थी और उपर से ठंड मे पानी मे खड़े होना कोई15 मिनट बाद मैं वापिस कॉटडे मे गया मामी रज़ाई ओढ़े लेटी थी मेरी हालत ठंड से टाइट हुई पड़ी थी तो रज़ाई मे घूंस के चैन मिला मामी ने मेरी ओर करवट ली और मुझसे लिपट गयी बहुत ही अच्छा लगा मामी ने मेरी जाँघो पे अपना हाथ फेरने लगी जो धीरे धीरे मेरे अंडकोषो पे पहुँच गया उन्होने अपनी मुट्ही मे मेरी गोलियो को भर लिया और उनसे छेड़खानी करने लगी सुरूर फिर से छाने लगा था मामी मेरी आँखो मे आँखे डाले हुई थी
उनके होंठ थोड़े लरज रहे थे मैने भी अपनी उंगली उनकी चूत मे घूँसा दी और उसे अंदर बाहर करने लगा उनकी चूत बहुत ही गरम लग रही थी उन्होने मेरा हाथ हटाया और मेरे लंड को अपनी चूत के छेद पे रख के रगड़ने लगी जब जब मेरा संवीदनशील सुपाडा ऐसे रगड़ती तो मुझे बहुत ही तेज गुदगुदी होने लगी लंड कुछ ही देर मे पूर्ण रूप से तन चुका था तो मैने कहा बस मामी और उनकी मांसल टाँग को अपनी कमर पे रख लिया और लंड को एक बार मे ही अंदर घूँसा दिया मामी इस हमले के लिए तैयार नही थी वो थोड़ा सा टेढ़ी और हुई और अपनी बाहों को मेरे गले मे डाल दिया लंड सरपट दौड़ने लगा अब ऐसा चिकना रोड मिले तो लंड की पर्फॉर्मेन्स तो जबरदस्त अपने आप ही होनी थी मामी बोली धक्के मत मारो मैं बस तुम्हारे लंड को अपने अंदर महसूस करना चाहती हूँ
मैं रुक गया मामी ने मेरे होंठो को अपने मुँह मे भर लिया और उन्हे चबाने लगी कोई 5-6 मिनट तक वो बस मेरे लंड को फील ही करती रही मेरा हाल थोड़ा अजीब हो रहा था तो मैने उन्हे अड्जस्ट किया और उनके उपर गया अब मैने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया मामी ने भी अपनी टाँगो को खूब फैला लिया और अपनी चूत मराई का मज़ा लेने लगी मामी की चूत फुदक रही थी आज काफ़ी ज़्यादा गीलापन था उसमे से बस हमारी सांसो की सरगोसियाँ हर तरफ फैली हुई थी रज़ाई के अंदर उनको भोग रहा था मैं आधे-पोने घंटे तक ढंग से बजाया उनको और फिर एक बार अपने पानी से उनकी चूत की सिंचाई कर दी इस तरह सुबह होने तक ना मामी सोई ना मुझे एक पल को भी सोने दिया पूरी रात उनकी हवस को मिटाया ना जाने कितनिबार वो चुदि
कभी वीर्य पिया कभी लंड गान्ड मे लिया कभी बस चूसा ही इस तरह से पूरी रात उन्होने अपनी इच्छा को पूरी किया जितना उनकी आग भुजती उतना ही और भड़क जाती सुबह 7 बजे वो मुझसे अलग हुई और अपने कपड़े पहन ने लगी वो कच्छि को टाँगो पे चढ़ा ही रही थी कि मैने उन्हे रोका और उस छोटी से कच्छि को अपनी पेंट की जेब मे रख लिया मामी हँसी और सलवार को उपर चढ़ा लिया बाहर अभी भी थोड़ा अंधेरा सा ही था पंप बंद किया ताला लगाया और हम घर वापिस चल पड़े बदन बुरी तरह से थक चुका था ऐसा ही हाल मामी का भी था
घर पे आते ही मैं सीधा बाथरूम मे घूंस गया और नहाने लगा मामी रसोई मे चली गयी कोई 11 बजे मैं एक दम रेडी था वापिस होने के लिए बस पकड़ी और सहर चल पड़ा बस स्टॅंड आया अपनी टिकेट ली और अब वापसी का सफ़र करना था पूरी रात की नींद थी और सफ़र भी लंबा था तो बस मे सो गया कोई 5बजे मैं उठा बस एक ढाबे पे खड़ी थी बाहर आके मुँह धोया कुछ खाया पिया अभी एक घंटा और लगना था कुछ देर मे बस फिर चल पड़ी मैने अपने सर को खिड़की पे टिका लिया और हवा के झोंको का आनंद लेने लगा अपने सहर आते आते 7 बज गये थे अंधेरा पूरी तरह छा चुका था टेंपो भी नही मिलने वाला था इस टाइम लिमिटेड सर्विस ही चलती थी तो अब पैदल ही चलना था उपर से मेरा बॅग भी थोड़ा भारी था
पर और कोई रास्ता भी नही था तो चल पड़ा पेट मे चूहे कूद रहे थे सो अलग जैस तैसे करके धक्के खाते हुए घर पहुँच ही गया घरवालो से दुआ सलाम हुई फिर खाना वाना खाया कुछ सफ़र की थकान भी थी तो बस अपना कमरा खोला और बिस्तर पे पड़ गया फिर ना कोई होश रहा सुबह ही आँख खुली अपने होश संभाले कमरे की थोड़ी सफाई की इन सब मे ही दोपहर हो गयी फिर मैं अंदर गया तो बस चाची ही थी उन्होने बोला कुछ खाएगा मैने हाँ की तो उन्होने प्लेट मे खाना डाल के मुझे दिया और मेरे पास ही बैठ गयी उन्होने पूछा इस बार तो कई दिन लगा दिए क्या कोई मिल गयी थी वहाँ तो मैने कहा क्या आप भी ना पूरा टाइम खाल खेंचती रहती हो फिर खाना ख़तम किया मैने पूछा सब लोग कहाँ है तो बोले दो तो ऑफीस गये है
दीदी और मांजी प्रीतम के घर गयी है कुछ रस्मे चल रही है तब मुझे याद आया कि उसकी शादी मे बस3-4 दिन ही बचे है मैं तो उसे भूल ही गया था चाची मज़े लेते हुए बोली बेटा अब तेरी चिड़िया तो उड़ जाएगी अब कहाँ जुगाड़ करेगा तो मैने कहा आप हो ना और उन्हे अपनी बाहों मे ले लिया वो छूटने की कोशिस करने लगी बोली कम्बख़्त टाइम पास मत कर छोड़ दे, मुझे भी प्रीतम के घर जाना है तू इधर ही रहियो और घर का ध्यान राखियो पर फिर भी चुम्मि तो ले ही ली मैने चाची भी चली गयी मैं अलमारी मे कुछ ढूँढ रहा था कि तभी कुछ गिर पड़ा ये तो मिता की पैंटिंग थी उसे देखते ही मूड रोमॅंटिक सा हो गया मैने कॅन्वस सेट किया और लगा एक ब्लॅक आंड वाइट पैंटिंग बनाना उसमे इतना खोया कि पता ही नही कब तब लगा रहा
जब मम्मी चाइ का गिलास लेके आई तो मेरा होश टूटा उन्होने मेरे उकेरे चित्र को देखा और बोली ये किसकी तस्वीर बनाई है तूने तो मैने कहा मम्मी बस यू ही बन गयी अब माँ तो माँ होती है उन्होने ताड़ ही लिया था वो बोली तेरा कोई चक्कर-वक्कर तो नही चल रहा ना वैसे भी पिछले कुछ महीनो से तेरे अंदाज बदले हुए है मैने कहा क्या मम्मी कुछ भी बोलती हो अब मुझ से कौन लड़की रिश्ता जोड़ेगी ये तस्वीर तो ऐसे ही बन गयी बात आई गयी हो गयी पर मुझे लगा कि मम्मी से झूट बोलना इतना आसान नही है खैर, छोटा मोटा काम किया तभी प्रीतम का भाई आ गया और बोला यार कल मेरे साथ सिटी चलियो कुछ फर्निचर का सामान पेंडिंग है लाने चलना है मैने कहा ठीक है भाई फिर मैं उसके साथ साथ उसके घर चला गया
तो पता चला कि ज्योति भी आई हुई है और उसकी भाभी ने मुझे देख के ज्योति ने उसके कान मे कुछ ख़ुसर फुसर किया तो वो हँसने लगी मैने सोचा ज्योति को रगड़ दूं मोका मिले तो मैं बैठा था कि तभी उपर से प्रीतम के दीदार हुए खुदा कसम क्या कयामत लग रही थी उबटन और मेकप से एकदम खिल चुकी थी उसने आँखो के इशारे से मेरा हाल पूछा मैने मुस्कुरा के जवाब दिया फिर उसका भाई प्लॅनिंग बताने लगा मैने कहा कि तू चिंता मत कर सब अच्छे से हो जाएगा टेन्षन मत ले 8 बज चुके थे म्यूज़िक चल रहा था कुछ रिलेटिव्स डॅन्स कर रहे थे अब शादी का घर था तो माहौल तो बन ना ही था पर मुझे कुछ बैचैनि सी हो रही थी ना जाने क्यो शायद प्रीतम के दूर जाने की वजह से दिल मे कुछ चुभन सा लगा क्या ये प्यार था ????????????????????????????????????????????????????????? नही, बिल्कुल नही ये बस एक दोस्त के दूर जाने का रिएक्सन था फिर मैं अपने घर आया तो रास्ते मे शीला मिल गयी वो थोड़ा नाराज़ सा होते हुए बोली कि आज कल कहाँ रहते हो मेरी तरफ देखते भी नही पहले तो मेरी आदत बिगाड़ दी और अब दूर भागते हो मैने कहा ऐसी बात नही है भाभी बस थोड़ा सा बीजी हूँ फिर वो अपने घर हुई और मैने अपने कमरे मे आज कई दिनो मे किताबो की शकल देखी थी साला दिमाग़ घूम ही गया एक दम से कुछ नोट्स वैगरह बनाए टॉपिक्स शॉर्टलिस्ट किए स्कूल तो ओपन हो ही गये थे पर मैने डिसाइड किया कि प्रीतम की शादी के बाद ही जाउन्गा अगला पूरा दिन बाजार मे ही बीत गया अब बस 2 दिन रह गये थे मैं रात को अपने कमरे मे था
कोई 10 साढ़े दस का टाइम रहा होगा मेरे गेट की कुण्डी खाड़की मैने गेट खोला तो शीला थी वो अंदर आई और बोली आज कुछ हो जाए मैने कहा पप्पू कहाँ है तो वो बोली पी के पड़ा है आप जल्दी से कर्लो ना कई दिन हो गये है आप तो मुझे भूल ही गये है ना जाने मेरा दिल शीला से हट सा गया था तो मैने उसे टालते हुए कहा कि भाभी हमने जो भी किया वो ग़लत बात है हम बहक गये थे पर इस सिलसिले को यही पे ख़तम कर देना चाहिए तो शीला बोली सॉफ सॉफ क्यो नही कहते कि आपका मन भर गया है मैने उसे समझाने की लाख कोशिस की पर वो मान ही नही रही थी वो बोली आपने ही तो मुझे पर पुरुष के लंड का चस्का लगाया है और अब आप ही मना कर रहे हो
शीला ने मेरे पयज़ामे के अंदर हाथ डाल दिया और मेरे लंड को मसल्ने लगी पर ना जाने क्यो मेरा मूड बिल्कुल भी नही था मैने उसे अपने से दूर हटाया और बोला कि भाभी मान जाओ आज कल मेरी तबीयत थोड़ी ठीक नही रहती है और मुझपे थोड़ा प्रेशर भी है प्लीज़ आप तो समझो मैं किसी भी तरह से उसे टालना चाहता था पर वो मान ही नही रही थी तो मैने अपने आप को हालत पे छोड़ दिया और सोचा चलो ठीक है ये भी खुश हो जाएगी शीला ने मेरे पयज़ामे को नीचे सरका दिया और मेरे लंड से खेलने लगी थोड़ी देर वो ऐसे ही उसे हिलाती रही फिर वो नीचे बैठी और मेरे लंड पे अपने होंठ लगा लिए पूरे लंड को अपने मुँह मे लेके वो चुँसने लगी लंड मे भी तनाव आने लगा था आख़िर उसने भी मामी के बाद कुछ किया नही था
तो जल्द ही वो भी फूल गया शीला तो थी ही उतावली मैने उसे खड़ी की और उसके ब्लाउस को खोल ही रहा था कि वो बोली कपड़े मत उतारो अभी वापिस जाउन्गि बस जल्दी से मुझे शांत कर दो और फोल्डिंग पे लेट गयी मैने उसके घाघरे को कमर तक हटाया उसकी चूत का गीलापन जाँघो तक आ चुका था शीला पूरी तरह से चुदासी हो रही थी मैने उसकी टाँगो को खोला और अपने लंड को अंदर सरका दिया शीला के चेहरे पे खुशी छा गयी हम दोनो संभोग रत हो गये बिना मर्ज़ी के उसे चोद रहा था बस ये सोचके कि जल्दी से जल्दी उसे यहा से दफ़ा कर सकु पर एक बार चूत मे लंड गया तो बाकी कुछ याद ना रहा मैने उसके मुँह को अपने से जोड़ लिया और वो भी नीचे से गान्ड उछालते हुए चुदने लगी उसे थोड़ी जल्दी भी थी तो वो कुछ ज़्यादा ही जोश दिखा रही थी
मैं भी कहा कम रहने वाला था उसे किस करते हुए बस छोड़े जा रहा था अगले कुछ मिंटो तक बस सन्नाटा छाया रहा 20 मिनट तक बस चुदाई ही चलती रही तब जाके उसने अपना छोड़ा और लंबी साँसे लेने लगी पर मैं उसे चोदे ही जा रहा था थोड़ा टाइम और लगा और मैने भी मैदान छोड़ दिया जैसे ही मेरा काम हुआ शीला उठी और अपने घाघरे से चूत को सॉफ किया और अपने घर चली गयी मैने पयज़ामा पहना और कुण्डी लगा के कुर्सी पे बैठ गया
गला खुश्क हो गया था थोड़ा पानी पिया नींद तो जैसे रूठ सी गयी थी उन्दिनो बहुत ही कम सो पता था रेडियो ऑन कर लिया खामोशी मे संगीत की धुन तैर गयी अपना फेव. प्रोग्राम चालू था दिल को सुकून मिला कागज पेन लिया और अपने विचारो को शब्दो का रूप देने लगा मुझपे रोमॅंटिक महॉल छाने लगा मिता की याद बहुत जोरो से आने लगी पर वो उस टाइम कहाँ मिलती दिल साला बहुत ही उदास सा हो गया बिना बात के एक सर्द उदासी ने मुझे अपने आगोश मे ले लिया दिल बस मिता मिता कर रहा था और वो बेख़बर कही गहरी नींद मे सो रही होगी आज भी याद है वो मेरे जीवन की एक बेहद मुश्किल रात थी थोड़ा पानी और पिया कुछ देर बाद मेरी साँसे नियंत्रण मे आई बहुत ही मुश्किल से रात कटी सुबह मैं जल्दी ही प्लॉट मे चला गया
मैने देखा कि प्रीतम के बाडे का बल्व जल रहा था मैने सोचा कि कौन होगा यहाँ पर उसकी माँ फिर सोचा छोड़ कोई भी हो पर थोड़ी से उत्सुकता हो गयी थी मैने सोचा सुबह सुबह चान्स लिया जाए मैं निकला और उधर चला अंदर घुसा तो देखा कि ये तो ज्योति है वो भैंसो को चारा डाल रही थी मैने उसे पीछे से पकड़ लिया वो घबरा गयी पर जब मुझे देखा तो शांत हुई मैने कहा चलो एक चान्स हो जाय तो वो बोली अभी मर्वाओगे क्या मेरी भाभी आने वाली है यहाँ मामी के साथ पर मैं जल्दी ही टाइम सेट करूँगी और तुम्हे बता दूँगी अभी तुम वापिस जाओ तो मैं निकल आया अब कुछ होना तो था नही तो घर पहुँच गया जाते ही एक चाइ पी तो मम्मी बोली तेरे कपड़े कितने गंदे हुए पड़े है इन्हे धो भी ले आज कल पता नही तेरा ध्यान कहाँ रहता है
ये बात उन्होने कुछ ज़्यादा ही ज़ोर देकर कही थी पापा ने मुझे घूरा पर फिर अपनी नज़र हटा ली मैने कहा आज ही धो लूँगा और चाची के पास चला गया चाची भी आजकल मेरे फुल मज़े लेती थी वो बोली क्या बात है बेटा कुछ उखड़ा उखड़ा रहता है प्रीतम जा रही है तो दुखी है मैने कहा क्या चाची एक बात को पकड़ के बैठी हो उसके सिवा और भी कई काम है मुझे अब वो जा रही है तो आप ही कुछ मेहरबानी कर दो ना वो बोली जितनी करती हूँ उतना ही ठीक है ज़्यादा सपने मत ले जा दुकान जा और ये समान ले के आ मैने पर्ची ली और दुकान पे चल पड़ा किस्मत से ज्योति दुकान पे टकरा गयी उसने जल्दी से कहा कि प्रीतम तुमसे मिलना चाहती है आज दोपहर मे हम तुम्हारे प्लॉट मे मिलेंगे तुम मॅनेज करना अब प्रीतम का क्या पंगा लग गया
घर पे समान रखा और कपड़े धोने लगा काफ़ी टाइम लग गया उनको धोने मे मैने कहा मम्मी कपड़े सूख जाए तो अलमारी मे रख देना और प्लॉट मे पहुँच गया थोड़ी ही देर मे वो दोनो भी आ गयी मैने कुण्डी लगाई प्रीतम दौड़ के मेरे सीने से लग गयी बोली कल मेरी शादी है मैने कहा हाँ मुझे पता है वो बोली जाने से पहले वो एक बार मेरे साथ थोड़ा टाइम बिताना चाहती है मैने कहा पर अगर कोई आ गया तो वो बोली डरता है क्या मैने कहा नही तेरे लिए कुछ भी डार्लिंग तो उसने कहा चल कुछ करते है उसने ज्योति को कहा तू थोड़ी देर इधर ही बैठ और प्रीतम मेरा हाथ पकड़ के अंदर कमरे मे आ गयी मैने कहा प्रीतम कल तेरी शादी है फिर पति के साथ ही कर लियो तो वो बोली मुझे गिफ्ट नही देगा क्या और मुझे किस करने लगी ना जाने कितने दिनो बाद उसके होंठो को छुआ था कितने प्यासे थे वो ,
प्रीतम पागलो की तरह मुझे चूमने लगी मैने कहा पगली सांस तो लेने दे पर उसने जैसे सुना ही नही बिल्कुल बेकाबू हो गयी थी वो काफ़ी देर तक बस किस ही चलती रही फिर वो हटी और अपनी सलवार और कच्छि को निकाल के नीचे से नंगी हो गयी पर उसने सूट नही निकाला पहले से बहुत ही ज़्यादा मोटी हो गयी थी वो मैने उसकी चूत को अपने हाथ से मसल दिया कुछ देर तक बस उसे मसलता ही रहा फिर उसे चारपाई पे लिटाया और उसकी टाँगो को चौड़ा कर दिया बिना बालो की चूत को देखने का ये लास्ट मौका था मैं अपने होंठो पे जीभ फेरी और प्रीतम की चूत की मस्त पंखुड़ियो को अपने मुँह मे ले लिया आज तो कयामत होनी थी प्रीतम बहुत ही ज़ोर से मोन करने लगी तो मैने कहा जान थोड़ा कंट्रोल कर पर आज वो बिल्कुल अलग ही मूड मे थी आज वो सब बंधन तोड़ने को बेताब थी
बस वो मुझमे खो जाना चाहती थी उसने कहा चूसो मेरी मुनिया को तो मैं ईक बार फिर अपना मुँह उसकी टाँगो के जोड़ मे घूँसा दिया और उसकी रस से भरी चूत को पीने लगा प्रीतम बहुत ही ज़ोर से आहे भर रही थी उसकी पूरी चूत मेरे मुँह मे थी प्रीतम की सिसकारिया लगातार बढ़ती ही जा रही थी इतने दिनो बाद उसका साथ पाकर मुझे भी बहुत ही अच्छा लग रहा था उसकी चूत को अपने दांतो से काट ते हुए मैं चाटे जा राहा था प्रीतम ने अपनी टाँगो को टाइट कर लिया और पूरा मज़ा लेने लगी 15 मिनट तक चाटने के बाद उसने अपना पानी मेरे मुँह मे ही छोड़ा दिया मैने उसे पूरा चाट लिया प्रीतम जल्दी से उठी और मेरी पॅंट को खोल के लंड को बाहर निकाल लिया और जल्दी से अपने मुँह मे लेके चुँसने लगी
लंड चुँसने मे तो उसका डिप्लोमा ही था तभी ज्योति बाहर से बोली दीदी जल्दी करो काफ़ी देर लग रही है तो मैने अपने लंड को उसके मुँह से निकाला और उसे वही पे घोड़ी बना दिया उसके उभरे हुए चुतडो के बीच चूत को देख के मेरी लार टपक गयी मैने लंड पे थोड़ा थूक लगा के उसे चिकना किया और प्रीतम की कमर को थामते हुए अपने लंड को उसकी चूत मे डाल दिया और बस फिर फ़च पच की आवाज़ ही कमरे मे गूँज रही थी क्या गजब की चुदासी थी वो घोड़ी बनी चुद रही थी उसका चेहरा लाल हो गया था मैं पूरी ताक़त लगा के उसे चोद रहा था उसने अपने हाथ मजबूती से फर्श पे टिका लिए थे और अपनी चुदाई का भरपूर आनंद ले रही थी 10-12 मिनट तक ऐसे ही वो चुदती रही फर्श पे होने के कारण मेरे घुटने मे दर्द होने लगा था
तो मैने अपना लंड बाहर निकाल लिया और उसे खड़ी करते हुए एक किस किया और उसको सीधा खड़ा कर दिया अब मैने उसकी एक टाँग को थोड़ा सा खोला और एक ही झटके मे दुबारा से लंड को अंदर घूँसा दिया प्रीतम ने अपने हाथ मेरे कंधो पे रख दिए और अपनी आँखो को बंद कर लिया मैं उसके चुतडो को थामे लगा उसकी लेने प्रीतम बोली मज़ा आ रहा है तुझे तो मैने कहा तेरे साथ की तो बात ही कुछ ओर है वो बस एक फीकी सी हँसी हँस दी अब उसकी टाँगो का कंपन बढ़ने लगा था मैं समझ गया था कि वो कुछ ही देर की मेहमान है तो मैने अपनी स्पीड को और तेज कर दिया और हम दोनो एक साथ से स्खलित हो गये कुछ देर हम ऐसे ही एक दूसरे की बाहों मे लिपटे खड़े रहे
फिर वो अलग हुई और अपनी सलवार पहन ने लगी वो बोली मेरा जाने का मन नही है मैनेकहा क्यो तो वो मेरे गले लग के रोने लगी बोली मुझे तुमसे प्यार हो गया है मैं नही रह पाउन्गि तेरे बिना तो मैने कहा पागल मत बन कल बारात आ जाएगी तेरी ऑर मेरी राहे अलग है तू भी जानती है पर तू हमेश इस दिल मे दोस्त के रूप मे रहेगी उसकी आँखो मे आँसू भर आए मैने उसे शांत किया और समझाया अब कैसे बता ता कि मेरा दिल तो मिता के लिए धड़कने लगा था जैसे तैसे प्रीतम को वापिस भेजा दिल तो मेरा भी भर आया था पर मेरी ज़िंदगी कही ओर थी कुछ रिश्तो की डोर इतनी गहरी उलझ चूँकि थी कि उन्हे सुलझाना बेहद मुश्किल था मेरी ज़िंदगी कई टुकड़ो मे बँट चूँकि थी बस एक दिल ही था जो मिता के लिए धड़कता था बाकी तो बस मेरे लंड की भूख का नतीजा थी
मैं सोचने लगा कि प्रीतम भी कल चली जाएगी जब उसे पटाया था तो उसे चोदने के लिए ही पर अब वो मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी मूड ऑफ हो गया था मैने प्लाट का गेट लॉक किया और घर की ओर चल दिया वहाँ पहुँचा तो एक नया तमाशा मेरा इंतज़ार कर रहा था मुझे देखते ही मम्मी लगी गलियाँ बकने और दो-चार झापड़ रसीद कर दिए मैने सोचा किसी कांड के बारे मे तो नही पता चल गया इनको मम्मी का टेंपर पूरा हाइ था फिर उन्होने मिता की तस्वीरे दिखाते हुए बोला कौन है ये लड़की और तेरी अलमारी मे इसकी इतनी सारी तस्वीरे क्यो है मैने कहा मम्मी उस दिन भी आपको बताया था कि ये मेरी प्रेरणा है जब भी पैंटिंग करता हूँ तो ये ही चेहरा बन जाता है वो बोली माँ हूँ तेरी मुझे सिखा मत और सब सच सच बता दे ये क्या चक्कर है
कही तू इसके चक्कर मे तो नही पड़ गया आज आने दे तेरे पापा को वो ही पूछेंगे अब मेरी गान्ड फट गयी मैने कहा मम्मी बिना बात का इश्यू मत बनाओ पर वो ना मानी और गुस्से मे उन सारी तस्वीरो को फाड़ दिया ओह माँ ये क्या कर दिया मुझे बहुत बुरा लगा पर कुछ कर भी नही सकता था ग़लती मेरी ही थी अगर मैं उनको कपड़ो को रखने को ना बोलता तो ना वो अलमारी खोलती और ना वो उन तस्वीरो को देखती टाइम थोड़ा खराब चल रहा था शाम को पापा के आगे शिकायत पहुँची तो उन्होने ज़्यादा कुछ नही किया दो-चार दुनिया दारी की बाते समझाई और स्टडी पे फोकस करने को कहा मैं भी खुश था कि चलो जान छूटी वहाँ से निकला ही था और चाची ने पकड़ लिया और लगी पूछने तो मैने उन्हे बता दिया कि वो तस्वीरें इस घर की होने वाली बहू की है
उनका मुँह खुला का खुला ही रह गया वो कुछ कहती उस से पहले ही मैं निकल लिया रात को मैने सोच लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए मैं प्रीतम की शादी मे नही जाउन्गा अब छोटी-मोटी प्रेमकहानियो का अंत तो प्रेमिका की शादी के टेंट मे कुर्सिया लगाते लगाते ही हो जाता है और फिर अगले दिन सनडे भी था तो मुझे मिता से मिलने भी जाना था अगले दिन ठीक 9 बजे मैं मंदिर मे था 10 बज गये फिर 11 फिर 12 पर वो ना आई मैं हताश होने लगा पर तकदीर पे किसका ज़ोर दो बजे तक उसका इंतज़ार किया पर दर्शन ना दिए प्राणप्यारी ने तो अब वापिस जाना ही था हताश मन से चल पड़ा सोचते हुए कि क्यो ना आई वो पर दिल मे तो हुडक लगी थी वो माना ना तो आइडिया लगाया कि उसके गाँव का एक चक्कर मारा जाए क्या पता किसी घर मे उसके दर्शन हो जाए
दो चक्कर मारे पर सारे प्रयास मिथ्या दुखी मन से वापिस आ गया सर मे दर्द सा हो रहा था तो बस आते ही लेट गया थोड़ी ही देर हुई थी कि चाचा आ गये बोले बेटे मुझे ऑफीस के काम से कल सुबह जल्दी जाना है अगर तुझे कोई प्राब्लम ना हो तो तू कुन्वे पे सो जइयो फसल मे नील गाय घुस आती है थोड़ा ध्यान रख लियो कल मैं संभाल लूँगा मैने कहा ठीक है चाचा जी मुझे भी ठीक लगा क्यों कि मैं प्रीतम के यहाँ नही जाना चाहता था तो मैने साइकल ली और निकल पड़ा तभी मुझे कुछ याद आया तो वापिस घर गया और जो पैसे मुझे सरोज ने दिए थे वो मैने पर्स मे डाले और चल दिया कुन्वे पे गया साइकल खड़ी की ऑर गीता के घर की ओर चल पड़ा
जब मैं पहुँचा तो वो खाना बनाने की तैयारी कर रही थी मुझे देख के वो बहुत खुश हो गयी और बोली आज मुझे ग़रीब के घर कैसे मैने तो सोचलिया था कि तुम मुझे भूल गये होंगे तो मैने कहा कि अपनो को कोई भूलता है क्या गीता शरमाते हुए मेरे गले लग गयी कुछ तो कशिश थी उस औरत मे उस से टच होते ही मेरा लंड अपना काबू खोने लगा मैने वो पैसे निकाले और उसके हाथ मे दे दिए गीता बोली वो ये नही लेगी तो मैने अधिकार पूर्वक कहा कि आप रख लो कुछ काम आ जाएँगे पर वो मना करने लगी पर मैने उन्हे वो पैसे दे ही दिए गीता बोली खाना बना रही हूँ तुम भी साथ ही खा लेना मैने कहा आप बना लो तब तक मैं कुन्वे पे राउंड मार लेता हूँ काम कुछ ख़ास था नही साइकल को कमरे के अंदर खड़ा किया और खाट पे लेट गया
थोड़ा थकान सी महसूस हो रही थी अंधेरा भी छाने लगा था मैने कमरे को बंद किया और पैदल चलते हुए गीता के घर हो लिया फिर हम डिन्नर करने लगे उसने मुझे दूध का गिलास पकड़ाया और बोली मैं अभी नहा कर आती हूँ फिर आराम से बातचीत करेंगे और चली गयी मैं दूध पीने लगा अब उसके मकान की दशा पहले से बहुत ही बेहतर लग रही थी हर चीज़ सलीके से सजी पड़ी थी कोई 20-25 मिनट बाद वो आई मैं तो उसे देखते ही रह गया बेहद पतले से पेटिकोट मे उसकी गीली टांगे जो सॉफ सॉफ नुमाया हो रही थी और उसके गीले बाल जो उसके चुतडो तक पहुँच रहे थे कसम से आज तो गीता भी रोल मे थी वो मुस्कुराते हुए बोली आज यही रहोगे ना तो मैने कहा अब तुम रोकोगि तो रुकना ही पड़ेगा गीता तौलिए से अपने गीले बदन को पोंछने लगी
मैने गेट को अंदर से बंद कर दिया और अपने कपड़ो को उतरने लगा पूरा नंगा होने के बाद मैं गीता के पीछे जाके खड़ा हो गया और उसके पेटिकोट के नाडे को खोल के उसे हटा दिया मेरा लंड उसके गौरे चुतडो से सट गया मैने अपने हाथ उसके उभारो पे रखे और ब्लाउस को भी अलग कर दिया अब हम दोनो पूर्ण नंगे हो चुके थे उसके गीले बालो से आती शॅमपू की खुश्बू मेरे नथुनो मे सामने लगी मैं उसके बालो को सहलाने लगा उसकी गदराई जवानी मेरी बाहों मे आने को बेताब हो रही थी मैं अब उसके चेहरे को अपनी ओर किया और बिना कुछ बोले उसके गुलाबी होंटो को चूमने लगा गीता के प्यासे होंठ अपना रस मुझे पिलाने लगे नीचे लंड उसकी जाँघो के बीच घूँसा हुआ था बहुत देर तक बस उसके होंठो का रस ही पिया
गीता तो मेरे आने से ही खुस हो गयी थी मैने अपने हाथो को उसकी मुलायम गान्ड पे कस दिया था और उसे मसल्ने लगा फिर उसने किस तोड़ी और अपनी सांसो को दुरुस्त करने लगी मैने उसे पलंग पे लिटा दिया और फिर चूमने लगा मैं इतना उतावला हो गया था कि जैसे पहली बार किसी को चोदने जा रहा हूँ होंठो को छोड़के गालो पे आया और उन्हे अपने दाँतों से काटने लगा गीता मस्ती से सिसकने लगी वासना उसके शरीर मे भरने लगी उसने अपना हाथ बढ़ा कर मेरे लंड को पकड़ लिया और उस से खेलने लगी नहाने के बाद उसका बदन और भी मादक हो गया था अब मैं उसकी गर्दन पे जीभ चलाने लगा गीता उत्तेजित हो गयी थी थोड़ा नीचे आते हुए मैं अब उसके 36इंची बोबो पे आ चुका था एक को तो मैने अपने मुँह मे भर लिया और दूसरे को सख्ती से दबाने लगा
कुछ ही मिनट मे गीता की चूचिया पूरी तरह से तन चूँकि थी मैं नीचे सरकते हुए उसके पेट पे आया और पूरे पेट को चूमने लगा गीता मोन कर रही थी अब मैं उसकी नाभि तक आ गया था थोड़ी देर वहाँ रुका फिर सीधा उसकी मखमली छूट पे आ पहुँचा आज तो वहाँ पे एक भी बाल नही था शायद उसने नहाते हुए ही सॉफ किए थे एक दम खिली हुई चूत ने मेरा मन मोह लिया था मैने कहा जान आज तो आग लगा रही हो तो वो बोली तुम्हारे लिए ही इसे चमकाया है मैने ईक जोरदार चुम्मि ली गीता की चूत की तो गीता बहुत ही गरम हो गयी वो बोली चाट लो ना इसे और अपनी टाँगो को चौड़ा कर लिया मैने उस रस से भारी प्याली पे अपने होंठ टिका दिए गीता के बदन मे भूंकंप आ गया उसने अपनी मुठ्थियों को कस लिया और बोली मेरे सरताज अपनी इस प्यारी की चूत को आज मज़े से भर दो जब से तुम गये हो मैं इस कामग्नी मे जल रही हूँ आज अपने प्यार की बारिश से मेरी अगन को बुझा दो मुझ अधूरी को फिर से पूर्ण कर दो
मैं बेफिकरि से उसकी चूत को चाट रहा था मैने सोच लिया था कि इसको ऐसे ही झाड़ दूँगा एक बार तो मैं लगा मैने पूरी जीभ उसकी चूत मे डाल दी खुरदरी जीभ ने अंदर जाते ही आतंक मचा दिया गीता की चूत ने गाढ़ा पानी छोड़ना शुरू कर दिया गीता की टांगे मचल रही थी हर गुज़रते पल के साथ गीता के बदन की कंपकपाहट बढ़ती ही जा रही थी मेरी जीभ अंदर और दाँत उसके छोटे से दाने पे लगे पड़े थे गीता को बहुत ही मज़ा मिल रहा था
वो बस हाई हाई करे जा रही थी गीता का बदन अब उसके काबू मे नही था और ऐसे ही करते हुए वो झाड़ गयी उसका पानी मेरे चेहरे पे लग गया था मैने अपनी बनियान से मुँह को पोंच्छा और गीता पे चढ़ गया उसने मेरे लंड को खुद अपनी चूत पे सेट किया और बोली जल्दी से डालो पहले धक्के मे ही आधा लंड गीता की चूत मे पहुँच गया गीता ने अपनी बाहों को मेरी पीठ पे कस लिया और अपने होंटो को गोल कर लिया एक और धक्के के साथ पूरा लंड चूत की गहराई मे उतर गया अब मैने शुरू की गीता की रेल बनानी गीता की चूत दुबारा गीली होने लगी थी गीता बोली बहुत ही बढ़िया लग रहा है मैने कहा बढ़िया तो लगेगा ही जानेमन और उसको किस करने लगा गीता भी बेकरारी के साथ चुदने लगी थी गीता को चोदना मेरे स्वर्णिम पल था पूरे आधे घंटे तक उसकी रेल बनाई जम के उसने इस बीच एक बार और अपना छोड़ दिया था मैने कहा पानी कहाँ निकालु तो उसने कहा प्यासी हूँ तो पिला ही दो तो मैने लंड को निकाला और उसके मुँह मे दे दिया और लपा लॅप चुँसने लगी दो मिनट मे ही मैने उसके मुँह को भर दिया जिसे वो बड़े ही चाव से पी गयी
हम दोनो निढाल पड़े थे गीता के मन मे एक बार और चुदने की थी पर मैने कहा जान पिछले कई दिनो से मेरी नींद है और कल मुझे स्कूल भी जाना है तो अभी सो जाओ मैं फिर कभी तुम्हारी पूरी तस्सली कर दूँगा तो वो मान गयी सोने की कोशिश की तो प्रीतम की याद फिर से आ गयी एक अजीब सी कशमकश मे फस गया था गीता बोली क्या बात है तो मैने उसे अपनी परेशानी बताई वो बोली ये जीवन का सफ़र बड़ा ही अजीब होता है ना जाने कितने मुसाफिर मिलते है पर हमसफ़र तो कोई एक ही बन ता है जितना इन सब के बारे मे सोचोगे उतना ही परेशान होवोगे फिर उसने मेरा सर दबाना शुरू किया थोड़ा आराम मिला और ना जाने कब मैं सो गया सुबह 6 बजे उसने मुझे जगाया मैने कपड़े पहने और उसको मस्त चूमा और अपने कुन्वे पे आ गया साइकल ली और घर चल पड़ा जल्दी से तैयार हुआ और बिना नाश्ता किए ही बस स्टॅंड चल पड़ा
टेंपो पकड़ा नियत समय पे वो मिता के गाँव के स्टॅंड पे रुका बड़ी ही नज़ाकत से मेरी प्रेयसी चढ़ि और ठीक मेरे सामने बैठ गई आँखो से आँखे टकराई सिटी आए और किराया अदा कर के स्कूल की तरफ चल पड़े मैने पूछा कल तुम मंदिर क्यो नही आई तो वो बोली पहले तुम बताओ तुम कहाँ थे दो हफ़्तो से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी थोड़ी सी डिप्रेस्ड थी और कुछ मेहमान भी आए हुए थे सो कल नही गयी उस तरफ तो मैने उसे बताया कि मामा के घर जाना पड़ा था मजबूरी थी ऐसे ही बातें करते हुए हम स्कूल तक पहुँच गये लंच तक एक मिनट की फ़ुर्सत ना मिली हर टीचर हद से ज़्यादा प्रेशर डाल रहा था जैसे आगे चलके हमे ही दुनिया को बदलना था
लंच मे हमारा पूरा ग्रूप इकट्ठा हुआ और टाइम पास करने लगे सब अपनी अपनी छुट्टियों की बाते बता रहे थे पर मेरा ध्यान तो मिता पे ही था जब वो हँसती थी तो उसकी मुस्कान सीधा मेरे दिल मे उतर जाती थी मिता का जादू मुझ पे चल चुका था उस दिन कुछ ज़्यादा कुछ ख़ास नही हुआ बस पढ़ाई और पढ़ाई फिर वो स्टुपिड सी एक्सट्रा क्लास दिमाग़ का दही हो गया पूरी तरह से पर ये तो लाइफ थी उस टाइम स्कूल लाइफ बहुत ही बुरी लगती थी पर आज वो पल याद आके दिल मे एक टीस जगा देती है और उपर से बाली उमर का इश्क़ जो आने वाले समय मे मोहबत की एक नयी इबारत लिखने वाला था अगले 15-20 दिन कब गुजर गये मुझे पता ही नही चला बस स्टडी और स्टडी मुझे जुनून था मेरिट लाने का खाना पीना सब कुछ छूट गया था सेक्स तो बहुत दूर उसका ख्याल भी नही किया था
दिनचर्या बस सिमट सी गयी थी शीला कभी कभी आ धमकती थी पर उसे कड़े शब्दो मे समझा दिया था कि अभी कुछ नही होगा बस लाइफ घिसट ते हुए कट रही थी जनवरी का लास्ट चल रहा था मैं स्कूल से आया तो देखा कि रवि और अनिता भाभी आए हुए थे मैने उन्हे नमस्ते किया भाभी मुझे देख के खुश हो गयी तो रवि ने बताया कि कंपनी ने उसकी पोस्टिंग बॅंगलॉर कर दी है 6-7 महीने वो उधर ही काम करेगा और अनिता गाँव मे ही रहेगी मैने कहा चलो ठीक है इधर रहेगी तो हमारा भी मन लगा रहेगा भाभी ने गहरी नज़र से मेरी ओर देखा शाम का टाइम उन लोगो के साथ ही स्पेंड किया फिर डिन्नर करके मैं अपने अड्डे मे पहुच गया
स्टडी टेबल पे बैठ तो गया था पर ध्यान बार बार अनिता भाभी की ओर ही जा रहा था मैं सोचने लगा कि उस दिन उनके साथ रिश्ता तोड़ लिया था तो अब वो देगी या नही क्या पता दुबारा बात बन जाए ये सोचते सोचते मैं सो गया सुबह मैं तैयारी कर रहा था कि पापा बोले चल आजा आज मैं तुझे स्कूल छोड़ देता हूँ और तेरे टीचर्स से प्रोग्रेस रिपोर्ट भी ले लूँगा मेरा दिल तो नही था पर क्या करता स्कूल पहुँचते ही मैं सीधा क्लास मे चला गया और पापा प्रिन्सिपल ऑफीस चले गये थोड़ी देर बाद मिता भी आ गयी और बोली आज जल्दी आ गये मैं तो सोच रही थी कि तुम शायद छुट्टी करोगे तो मैने कहा कि आज पापा आए है प्रिन्सिपल ऑफीस मे है प्रोग्रेस रिपोर्ट ले रहे है वो बोली ओह! थोड़ी देर मे क्लास स्टार्ट हो गयी
और फिर वो ही बोरिंग टाइम लंच मैने उसके साथ किया हम खा ही रहे थे कि रीना आ गयी और बोली आज तो भाई भाभी साथ ही खा रहे है तो मिता बुरी तरह झेंप गयी मैने रीना को लताड़ा कहा क्या कुछभी बोलती है पागल है क्या मिता का चेहरा शरम से लाल हो गया काफ़ी देर बाद वो नॉर्मल हुई मैने रीना को समझाया कि अभी ऐसा कुछ नही है बस दोस्ती से थोड़ा ज़्यादा है जब होगा तो मैं ज़रूर बताउन्गा पर अंदर ही अंदर मैं बड़ा खुश हो रहा था
अनिता भाभी से कभी कभी आँख मिल जाती थी पर ताइजी उसके सर पे मंडराती रहती थी तो मैं भी ज़्यादा रिस्क नही लेना चाहता था स्कूल की दो दिन की छुट्टी थी तो मैने सोचा कि गीता से मिल आउ वैसे भी काफ़ी दिन हो गये थे तो शाम को मैं गीता से मिलने चल पड़ा आज मैं पैदल ही था कुन्वे के पास मुझे बिम्ला काकी मिल गयी बोली लल्ला इधर का रास्ता तो भूल ही गये हो तुम थोड़ा हम ग़रीबो का भी ख्याल कर लिया करो कई दिन हो गये तेरे लौडे का स्वाद चखे हुए घर पे भी कोई नही है चलो आ जाओ हो जाए दो-दो हाथ और मुझे अपने घर ले आई मैं पूछा काका कहाँ गये तो उसने बताया कि वो मेरी लड़की के ससुराल गया हुआ है काकी ने अपने सामान को रखा और बोली तुम कमरे मे चलो मैं अभी आई कुछ देर बाद वो आ गयी
काकी नेआते ही सीधा मेरी ज़िप खोली और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया और उसे सहलाते हुए बोली लल्ला आज आएगा मज़ा कुछ देर उसे हिलाने लगी लंड मे तनाव आ गया फिर वो खड़ी हुई और तुरंत ही नंगी हो गयी अन्द्रूनि कपड़े तो वो कभी पहनती ही नही थी मैने काकी को लिटा दिया और अपने कपड़े उतारने लगा मैं काकी की छूट पे उगे बालो के जॅंगल मे अपना हाथ फेरते हुए बोला कभी इन्हे काट भी लिया करो इन्हे वो बोली टाइम ही नही मिला और फिर इनसे मेरी ये छुपी रहती है कोई इस्पे अपनी बुरी नज़र नही डालता है तो मैने कहा इस्पे कोई बुरी नज़र कैसे डालेगा तुम खुद ही चुदने को तैयार रहती हो तो वो हँसने लगी बोली इसमे आग ही इतनी लगती है मैं क्या करू और अब तो आदत हो गयी है अब तो मरने पे ही ये आदत छूटे गी मैं चूत पे हाथ फेरने लगा उसके झान्टो पे अपनी उंगली गोल गोल घुमाने लगा काकी बोली ऐसा मत करो बाल टूट जाएँगे दर्द होगा
पर मुझे मज़ा आ रहा था काफ़ी देर तक मैं ऐसे ही करता रहा तो काकी बोली अब बस भी करो ना काकी की चूत उन बालो मे छुपी पड़ी थी दिख ही नही रही थी तो मैने उनकी टाँगो को थोड़ा चौड़ा किया और अपनी दो उंगलियो को चूत मे घुसेड दिया काकी बोली आराम से लल्ला पूरा हाथ डालेगा क्या तो मैने कहा इसमे तो हाथ भी आराम से चला जाएगा मैं अपनी उंगलिया अंदर बाहर करने लगा काकी उत्तेजित होने लगी थी 5-6 मिनट तक उंगली ही करता रहा काकी बोली चूँसोगे नही तो मैने कहा जब तक इन बालो को नही कटोगी मैं तेरी चूत नही चाटूँगा तो वो बोली आगे से सॉफ ही रखा करूँगी मेरी उंगलिया पूरी तरह भीग चूँकि थी तो काकी बोली बस अब उंगलियों से काम ना चलेगा अब तो लॉडा चाहिए मुझे चल जल्दी से चोद मुझको तो मैने उन्हे घोड़ी बना दिया
और अपने लंड को उनके विशाल चुतडो पे घिसने लगा वो बोली लल्ला तडपा मत कर भी ले ना तो मैने उनकी चूत मे लंड डाल दिया और हाथो को आगे बढ़ा के उनकी मोटी मोटी चूचियो को थाम लिया और उनको दबाने लगा बिम्ला काकी का बदन मस्ती मे ऐंठ गया उनके चूतड़ अपने आप ही पीछे हो गये जब मैं धक्का मारते मारते रुक जाता तो वो खुद ही अपनी गान्ड को पीछे हिलाने लग जाती थी उनके बोबे और भी मोटे लग रहे थे शायद ज़्यादा चुदाई से ऐसे हो गये थे वो चुदती भी तो बहुत ही थी बस नये नये लंड ही ढूँढती रहती थी मैने भी अपने बदन को झुकाते हुए अपना बोझ उनपे डाल दिया और अपने दाँतों से उनके कंधो और गर्दन को काटने लगा काकी और भी मस्ता गयी और जोश से चुदने लगी हम दोनो मे से कोई भी कुछ नही बोल रहा था
बस लगे पड़े थे दस मिनट बाद मैं हटा तो वो मेरे उपर चढ़ गयी और अब वो मुझे चोद रही थी बहुत ही तेज़ी से वो मेरे लंड पे उछल रही थी मैने कहा थोड़ा सा धीरे पूरा लंड एक ही झटकेमे बाहर निकालता और फिर तुरंत ही चूत मे घूंस जाता था लंड किसी टॉवर की तरह खड़ा था उसे भी कई दिनो बाद चूत की खुराक मिली थी तो वो भी पूरे जोश मे था काकी भी अपने पूरे अनुभव को इस्तेमाल कर रही थी उन्हे तो पता था ही कि कैसे किसी पुरुष को मज़ा दिया जाता है मैने उन्हे अपने नीचे लिया और उनको किस करते हुए लगा चूत मारने उन्होने अपनी टाँगो को मेरी कमर पे लपेट लिया था बहुत ही जोश से मैं उनके मोटे मोटे होंठो को चबाए जा रहा था मैं अब जल्दी से फारिग होना चाहता था काकी भी नीचे से अपनी गान्ड को मटका रही थी
मैने अपनी पूरी शक्ति लगा दी और बेरहमी से काकी को चोदे जा रहा था मंज़िल बस करीब ही थी कुछ मिनट और फिर मेरे लंड से पिचकारियों की बारिश निकलने लगी कई दिनो से जमा सारा वीर्य काकी की चूत मे झाड़ गया था शांत होने के बाद मैने कलाई घड़ी मे टाइम देखा तो पता चला पोने घंटे से भी ज़्यादा टाइम हो गया था उनको चोदते हुए मैने अपने कपड़े पहने वो ऐसे ही पड़े रही अब गीता के घर जाने का टाइम नही था तो मैं वापिस अपने घर चल पड़ा